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’41 किसानों की मौत’: लौट आया ‘नोटबंदी से होने वाली मौत’ वाला नैरेटिव किसान आंदोलन में भी

तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन एक महीने से ज्यादा समय से चल रहा है। अपनी माँगों पर अड़े हुए किसान दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच रविवार (दिसंबर 27, 2020) को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने भी किसान आंदोलनों को अपना समर्थन देते हुए कहा कि ‘हमारे किसान साथियों को 32 दिनों से सर्दी में रहना पड़ रहा है’ और आंदोलन के दौरान हुई 40 किसानों की मौत ने उन्हें बहुत दुःख पहुँचाया है।

किसान आंदोलनों के दौरान हुई किसानों की कथित मौत को लेकर काफी बयानबाजी देखने को मिल रही है। लेकिन क्या किसान आंदोलनों में सामने आ रही किसानों की मौत वास्तव में उनकी माँगों या फिर धरना प्रदर्शन से जुड़ी हुई हैं? लेकिन जिस तरह से किसी भी मौत को किसान आंदोलन से जोड़ दिया जा रहा है, ठीक ऐसा ही चलन मीडिया से लेकर राजनीतिक बयानबाजी में नोटबंदी के दौरान भी देखने को मिला था जब किसी भी दुर्घटना के कारण हुई मौत को नोटबंदी से हुई मौत को ठहराया जाने लगा था। यहाँ तक दावे किए गए कि नोटबंदी की मार से 32 दिन में 100 से अधिक लोगों ने अपनी जान गँवाई। 

बताया जा रहा है कि पंजाब और हरियाणा में 15 सितंबर से अब तक पंजाब के साथ-साथ दिल्ली में 41 किसानों की मौत हो चुकी है। इनमें से 30 मौतें अकेले पंजाब के मालवा बेल्ट से, दोआब बेल्ट से 6, माझा बेल्ट से 2 और हरियाणा से 3 बताई जा रही हैं।

किसानों की जिन मौतों को इस आंदोलन से जोड़कर सामने रखा जा रहा है, उनमें से कई मौत तो वास्तव में किसी व्यक्ति के सल्फास खाने, दुर्घटना का शिकार होने आदि कारणों से हुई हैं। यहाँ तक कि इनमें से कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने कर्ज के चलते कथित तौर पर आत्महत्या की हैं।

हमने सिर्फ जाँचने के लिए सबसे पहले आई कथित तौर पर ‘किसान आंदोलनों से जुड़ी मौतों’ की कुछ खबरों की पड़ताल की, तो पता लग गया कि ये आँकड़ा और कहानियाँ भ्रामक और गुमराह करने वाली हैं। इन लोगों की मौत की वजहों को देखकर उन तमाम मौतों पर संदेह पैदाता है, जिन्हें इस आंदोलन से जोड़कर बताया जा रहा है।

किसान आंदोलनों के कारण होने वाली कथित तौर पर पहली मौत 18 सितंबर को बताई जा रही है। दरअसल, पंजाब के मनसा गाँव के रहने वाले 65 वर्षीय प्रीतम सिंह ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के घर के बाहर धरने पर जानलेवा सल्फास की गोलियाँ खा ली थीं। प्रीतम सिंह के परिवार को सरकार द्वारा 3 लाख रुपए का मुआवजा, एक परिवार के सदस्य को नौकरी और कर्ज माफ़ी के आश्वासन के वायदे के बाद ही मृतक के शरीर का अंतिम संस्कार किया गया।

इन्हीं मौतों में दो महिलाएँ की मौत भी जोड़ी गई हैं। इन महिलाओं में से एक थीं 80 साल की तेज कौर! तेज कौर की मौत बुढलाडा में 8 अक्टूबर को रेलवे ट्रैक पर गिरने से हुई थी। जबकि गुरमेल कौर की मौत बठिंडा में विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल का दौरा पड़ने से हुई। ख़ास बात यह है कि रेलवे ट्रैक पर गिरने और दिल का दौरा पड़ने से हुई मौतें भी किसान आंदोलन का हिस्सा बताई जा रही हैं।

26 नवंबर को जब किसान पंजाब से दिल्ली की ओर रवाना हुए तो 27 नवंबर को एक और मौत दर्ज की गई। पंजाब के मनसा गाँव के 45 वर्षीय धन्ना सिंह के ट्रैक्टर के भिवानी के पास एक ट्रक की चपेट में आने से मौत हो गई। उनके परिवार को पंजाब सरकार द्वारा मुआवजे में 5 लाख रुपए दिए गए।

समाचार पत्र ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, कई प्रदर्शनकारियों की मौत दिल्ली में ठंड के कारण भी हुई हैं। जबकि कुछ लोग कोहरे के कारण सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए। वहीं, गुरलभ सिंह, जिस पर 6 लाख से अधिक का कर्ज था, की मौत की जाँच पंजाब पुलिस कर रही है और बताया जा रहा है कि उसकी मौत का कारण विषैला पदार्थ खाकर आत्महत्या करना है।

इन लोगों की मौत का वास्तविक कारण सामने रखने का कारण यह भी है कि ठीक ऐसा ही माहौल राजनेताओं द्वारा नोटबंदी के दौरान भी बनाया गया था। ऐसा प्रतीत होता है कि नोटबंदी के समय भी सौ लाशों की गिनती पूरी करने वाले विपक्ष ने जैसे सामान्य मौतों को भी लाइन में खड़े हो कर मरने वाली मौत कह दी थी, वैसे ही कोई भी, कहीं भी आत्महत्या कर रहा है, या फिर ट्रक के टक्कर से दुर्घटनावश मर रहा है, उसे किसान आंदोलन वाले तत्परता से वैसे ही अपना बना रहे हैं जैसे खालिस्तानियों के नेताओं को।

‘सुरक्षा चाहिए तो हम देंगे’ – हिंदू युवकों से शादी करने वाली 2 मुस्लिम युवतियों को UP पुलिस की पेशकश

यूपी पुलिस ने बरेली जिले में 2 मुस्लिम युवतियों द्वारा अपनी मर्जी से धर्मपरिवर्तन कर हिंदू युवकों के साथ शादी करने पर उन्हें सुरक्षा देने की पेशकश की है। मामला रिठौरा और बहेड़ी इलाके का है। युवतियों ने अपने परिजनों से जान के खतरे की आशंका जताई थी। पुलिस ने कहा कि अगर दोनों पति-पत्नी सुरक्षा माँगेंगे तो उन्हें सुरक्षा दी जाएगी।

बरेली के वरिष्‍ठ पुलिस अधीक्षक रोहित सिंह सजवाण ने शनिवार को कहा, “दोनों लड़कियों ने अपने प्रमाणपत्रों के आधार पर बालिग होना बताया है और दोनों ने दूसरे धर्म के युवकों से अपनी मर्जी से विवाह किया है। रिठौरा के युवक-युवती के परिजनों ने लिखित रूप से अब कोई भी आपत्ति ना होने की बात कही है और लिखित रूप से पुलिस को अनापत्ति प्रमाणपत्र दे दिया है। जिले के दोनों प्रकरण में कथित लव जिहाद का कोई मामला नहीं है।”

वहीं जिले के बहेड़ी इलाके में हुई घटना में महिला के परिवार ने हिंदू पुरुष के खिलाफ अपहरण और चोरी का मामला दर्ज कराया था। बता दें कि उनकी शादी गुरुवार को रितोरा क्षेत्र के एक मंदिर में हिंदू धर्म के अनुसार हुई थी।

गौरतलब है कि बहेड़ी क्षेत्र में मुस्लिम युवती ने हिंदू लड़के से शादी करने के बाद वीडियो साझा कर एसएसपी से जान की सुरक्षा की गुहार लगाई थी। युवती ने अपने वीडियो में पति और उसके दोस्तों की जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा मुहैया कराने की अपील की।

युवती ने वीडियो में कहा, “मैंने अपनी मर्जी से शादी की है। अगर मेरे पति के साथ कुछ होता है तो मेरे माता-पिता को जिम्मेदार ठहराया जाए।” दरअसल युवती के पिता ने हिन्दू पक्ष के ऊपर कई संगीन आरोप लगाए थे, जिसको युवती ने वीडियो जारी कर खारिज कर दिया। उसने शादी का प्रमाण-पत्र भी जारी किया, जिसमें आर्य समाज मंदिर में सितंबर 2020 में मंजीत चौधरी नामक युवक से शादी दर्शाया गया है।

एसएसपी सजवान ने कहा, “हम उच्च न्यायालय के निर्देश का पालन कर रहे हैं, जो कहता है कि एक रिश्ते में दो व्यस्क की सहमित होनी चाहिए। उन्हें अपने परिवार के हस्तक्षेप के बिना एक साथ रहने का अधिकार है।”

हाल ही में इस तरह की एक और घटना बरेली में ही सामने आई थी, जहाँ अलीशा नाम की मुस्लिम युवती ने अमन नाम के हिन्दू युवक से शादी कर ली। युवती के पिता ने बरेली के प्रेमनगर थाने में हिन्दू युवक पर अपहरण का मामला दर्ज कराया था।

पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के कुछ ही समय बाद युवती को बरामद कर लिया था। इसके बाद पुलिस ने युवती का मेडिकल कराया। अदालत में बयान भी दर्ज कराया। इस दौरान पुलिस ने बताया कि युवक और युवती दोनों बालिग़ हैं और युवती ने युवक के पक्ष में बयान दिया था। फिर पुलिस ने युवती को युवक के घर भेज दिया था और घटना में धर्म-परिवर्तन का कोई पहलू भी सामने नहीं आया था।

इसके अलावा उत्तर प्रदेश के ही औरैया जिले में एक मामला सामने आया था, जिसमें दो अलग धर्म के प्रेमी-प्रेमिका ने आपसी सहमति से शादी की थी। दिल्ली की रहने वाली रेशमा और औरैया के निवासी अमन ने बिधूना कस्बे स्थित भगवान शिव के मंदिर में हिन्दू रीति-रिवाज़ों से शादी की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ दोनों के बीच पिछले काफी समय से बातचीत हो रही थी। इस शादी में युवक और युवती के परिजन भी शामिल हुए थे और दोनों ने पति-पत्नी को आशीर्वाद भी दिया था। परिजनों का कहना था कि जिस बात में उनके बच्चे खुश हैं, उस बात में ही उनकी ख़ुशी है।

‘हरामखोर’ टिप्पणीकार संजय राउत की बीवी को ED का समन, ₹4355 करोड़ का बैंक घोटाला

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत की पत्नी वर्षा को पंजाब और महाराष्ट्र सहकारी बैंक (PMC) घोटाला मामले में जाँच में शामिल होने के लिए समन जारी किया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, शिवसेना नेता की पत्नी वर्षा राउत को 29 दिसंबर को एजेंसी के सामने पेश होने के लिए कहा गया है। बताया जा रहा है कि इस मामले में प्रवीण राउत नाम के एक अन्य आरोपित की पत्नी के साथ वर्षा राउत का 50 लाख रुपए का लेनदेन संदेह के घेरे में है।

संजय राउत के नजदीकी प्रवीण राउत को कुछ दिन पहले ईडी ने गिरफ्तार किया था। बताया जा रहा है कि प्रवीण राउत के अकाउंट से कुछ ट्रांजेक्शन वर्षा राउत के अकाउंट में हुआ। अब इसी संबंध में ईडी जानकारी जुटाना चाह रही है। प्रवर्तन निदेशालय जानना चाहती है कि ये ट्रांजेक्शन कैसे हुआ है और इसके पीछे का कारण क्या है? पूरी जानकारी जुटाने के लिए ही वर्षा राउत को समन किया गया है।

इस खबर सामने आने के कुछ ही देर बाद शिवसेना नेता संजय राउत की प्रतिक्रिया भी सामने आई है –

PMC बैंक घोटाला

उल्लेखनीय है कि पिछले साल सितंबर में रिजर्व बैंक को पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक (पीएमसी) में हो रहे कथित घोटाले का पता चला था। इसके बाद आरबीआई ने बैंक से पैसे की निकासी पर सीमा लगा दी थी। भारतीय रिज़र्व बैंक को पता चला था कि पीएमसी बैंक मुंबई के एक रियल इस्टेट डेवलेपर को क़रीब 6500 करोड़ रूपए ऋण देने के लिए नकली बैंक खातों का उपयोग कर रहा है।

इससे बचने के लिए रिजर्व बैंक ने सितंबर 24, 2019 को पैसे निकालने पर एक सीमा लगा दी। शुरुआत में हर खाताधारक 50,000 रुपए निकाल सकता था, अब यह सीमा 1 लाख रुपए कर दी गई है।

शादी के बाद 3 साल तक छिपाए रखा धर्म, बच्चा होते ही फरार: खोजबीन के बाद बीवी को मुस्लिम होने का पता चला

उत्तर प्रदेश में लव जिहाद कानून के बाद कई मामले देखने को मिल रहे है। ताजा मामला गोरखपुर का है। यहाँ एक मुस्लिम युवक ने तीन साल पहले अपना धर्म छिपा कर युवती से शादी की, फिर बच्चा होने के बाद फरार हो गया। पुलिस मामले की जाँच में जुटी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सहजनवां थाना क्षेत्र में लव जिहाद की शिकार हुई एक महिला ने एसपी नॉर्थ को शिकायत पत्र सौंपते हुए न्याय की गुहार लगाई है। पीड़िता का आरोप है कि एक मुस्लिम युवक ने अपना नाम और धर्म छिपा कर उससे 3 साल पहले शादी की थी। इस दौरान उसने उसे काफी प्रताड़ित किया और फिर बच्चा होने के बाद उसे छोड़ कर फरार हो गया।

पुलिस ने पीड़िता की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया है। एफआईआर के अनुसार, महिला ने बताया कि शादी के बाद वह एक किराए के मकान में युवक के साथ रहती थी। उसने कई बार युवक से उसके घर वालों के बारे में पूछा और उनसे मिलने की इच्छा जाहिर की थी। लेकिन हर बार आरोपित उसकी बातों को टाल देता था।

बार-बार परिजनों के बारे में पूछने पर वह उसे मारने-पीटने भी लगा था। महिला ने बताया कि युवक के फरार होने के बाद जब उसने उसका पता लगाया, तब उसे इस धोखाधड़ी के बारे में पता चला। बता दें कि खोजबीन के दौरान युवती को उसके मुस्लिम धर्म के होने का पता चला। इसके बाद उसने इसकी तहरीर सहजनवां पुलिस थाने में दी।

सहजनवां थानेदार संतोष कुमार यादव ने कहा कि महिला की तहरीर मिली है। उससे शादी का साक्ष्य माँगा गया है। उसने दो दिन का समय लिया है। साक्ष्य मिलने पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि लव/ग्रूमिंग जिहाद की घटनाओं पर काबू पाने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार 27 नवंबर को विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश-2020 लेकर आई थी। इस क़ानून को लागू किए जाने के बाद से ही कार्रवाई का सिलसिला जारी है।

इस क़ानून को लागू हुए पूरे एक महीने बीत चुके हैं और इस अवधि में लगभग 12 एफ़आईआर दर्ज हो चुकी ही और 35 लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। यानी पुलिस ने राज्य में हर दिन लगभग एक से ज़्यादा मामले दर्ज किए हैं।

उल्लेखनीय है कि एटा में लव/ग्रूमिंग जिहाद के 8 मामले, सीतापुर में 7 मामले, गेटर नोएडा में 4, शाहजहाँपुर और आजमगढ़ में 3, मुरादाबाद, मुज़फ़्फ़रनगर, बिजनौर और कन्नौज में 2, बरेली और हरदोई में 1 मामला दर्ज किया गया। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में इसका पहला मामला दर्ज किया गया था।

बुलेट का जवाब बैलेट से: जम्मू-कश्मीर में भारत, भारतीयों और लोकतंत्र की जीत, भाजपा का उदय है बड़ा संदेश

जम्मू-कश्मीर के जिला विकास परिषद चुनाव परिणामों का राष्ट्रीय महत्व तो है ही, इनका अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक महत्व भी है। इसीलिए दिल्ली में बैठे विघ्न-संतोषी विपक्षी दल और पाकिस्तान-चीन जैसे ईर्ष्यालु पड़ोसी देश भी इन चुनावों में जनता की भागीदारी, घटित होने वाली हिंसा और चुनाव परिणामों की ओर टकटकी लगाकर देख रहे थे।

आज उनकी धड़कन थम गई है, और बोलती भी बंद हो गई है। ये चुनाव परिणाम बिहार विधान सभा चुनावों, हैदराबाद नगर निगम चुनावों और राजस्थान के पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों के परिणामों का ही विस्तार हैं। एक के बाद एक भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन लोकतान्त्रिक किले फतह कर रहा है।

अगले साल देश के पाँच राज्यों- पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, पुदुचेरी और असम में विधान सभा चुनाव होने हैं। सन 2021 की ‘पूर्वसंध्या’ में आए ये चुनाव परिणाम बहुत कुछ कहते हैं और आगामी विधानसभा चुनावों की पूर्वपीठिका निर्मित करते हैं।

जम्मू-कश्मीर के चुनाव परिणाम के बाद दावे के साथ कहा जा सकता है कि आज देश में सच्चे अर्थों में एक ही अखिल भारतीय राजनीतिक दल है। यह दल भारतीय जनता पार्टी है, जिसकी पहुँच, पहचान और स्वीकार्यता गुजरात से असम-अरुणाचल प्रदेश तक और कश्मीर से तमिलनाडु-केरल तक है। भारतीय जनता पार्टी के निरंतर चढ़ाव से विपक्ष और वामपंथी बुद्धिजीवियों की बौखलाहट अस्वाभाविक नहीं है।

पहले गुपकार गठजोड़ चुनाव में भागीदारी को लेकर असमंजस में था, और चुनाव बहिष्कार की योजना बना रहा था, किन्तु बाद में उन्हें लगा कि कहीं चुनाव बहिष्कार करके वे भी अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस की तरह अलग-थलग पड़कर अप्रासंगिक न हो जाएँ और ‘राजनीतिक स्पेस’ को नए खिलाड़ी घेर लें। इसलिए वे गठबंधन बनाकर पूरी मजबूती से यह चुनाव लड़ते हुए इन चुनाव परिणामों के माध्यम से कोई बड़ा राजनीतिक सन्देश देने की रणनीति पर काम कर रहे थे। वे अपने हमदर्द पाकिस्तान के साथ मिलकर अन्तरराष्ट्रीय कूटनीतिक मंचों पर भारत-विरोधी दुष्प्रचार करना चाहते थे। लेकिन घोषित चुनाव परिणामों ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया है।

अगस्त 05, 2019 को अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी किए जाने और अनुच्छेद 35 ए की समाप्ति के बाद हुए जम्मू-कश्मीर में हुए पहले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में उभरी है। इस चुनाव में उसने जम्मू-कश्मीर के 20 जिलों की 280 जिला परिषद सीटों में से न सिर्फ 75 सीटों पर विजय प्राप्त की है, बल्कि उसके द्वारा प्राप्त मत प्रतिशत में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

2014 के विधान सभा चुनाव में जहाँ भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में हुए मतदान के कुल 22.98 प्रतिशत मत प्राप्त किए थे, वहीं इस बार यह प्रतिशत बढ़कर 24.82 फीसद हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने न सिर्फ जम्मू संभाग में गुपकार गठजोड़ का सूफड़ा साफ़ कर दिया है, बल्कि पहली बार कश्मीर संभाग में भी तीन सीट जीतकर अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है।

यह वही कश्मीर है, जहाँ भारतीय जनता पार्टी तो क्या भारत का तिरंगा झंडा उठाने वालों को मौत के घाट उतार दिया जाता था। ‘एक निशान, एक विधान और एक प्रधान’ की लड़ाई लड़ते हुए ही डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी जैसे भारत माता के सपूतों का बलिदान हुआ था। इन चुनाव परिणामों ने सच्चे अर्थों में जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी और प्रजा परिषद के संस्थापक अध्यक्ष पंडित प्रेमनाथ डोगरा की सोच और संघर्ष को सही साबित कर दिया है।

भारतीय जनता पार्टी के बढ़ते दबदबे से आशंकित सात विपक्षी दलों (नैशनल कॉन्फ्रेस, पीडीपी, जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी आदि) ने ‘पीपुल्स एलायंस फॉर गुपकार डिक्लरेशन’ के बैनर तले गठबंधन बनाकर यह चुनाव लड़ा था। वस्तुतः यह भारतीय जनता पार्टी की लोकप्रियता और जनाधार से घबराये हुए चिर-प्रतिद्वंद्वी दलों का मतलबपरस्त और मौकापरस्त गठजोड़ मात्र था।

सात दलों के इस गठबंधन ने 110 सीटों पर विजय प्राप्त की है। जहाँ निर्दलीय प्रत्याशियों ने 49 सीटों पर जीत दर्ज की है, वहीं कॉन्ग्रेस मात्र 26 सीटें ही जीत सकी है। कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीए मीर के साहिबजादे भी चुनाव हार गए।

‘पीपुल्स एलायंस फॉर गुपकार डिक्लरेशन’ नामक गठबंधन में शामिल जम्मू-कश्मीर के पुराने और स्थापित राजनीतिक दलों का प्रदर्शन वास्तव में अत्यंत निराशाजनक है। महबूबा मुफ़्ती की पार्टी पीडीपी तो मात्र 27 सीटों पर ही सिमट गई।

भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशियों द्वारा जीती गई कुल सीटों (124) और उनको मिले मत प्रतिशत को जोड़ दें (52 प्रतिशत से अधिक) तो यह जनादेश साफ़ संकेत देता है कि जम्मू-कश्मीर के लोग बदलाव और विकास चाहते हैं। वे आतंकवाद और अलगाववाद की काली छाया से बाहर निकलकर नई संभावनाओं का सूर्योदय देखना चाहते हैं। वे खून-खराबे और दहशतगर्दी की धरती बन गई कश्मीर की वादियों को एकबार फिर ‘धरती का स्वर्ग’ बनाने की परियोजना में भागीदार बनना चाहते हैं।

इन चुनावों का वास्तविक और सबसे बड़ा सन्देश राज्य में लोकतान्त्रिक प्रक्रिया की बहाली और उसमें व्यापक जन भागीदारी है। इस चुनाव में सबसे पहले और सबसे बढ़कर लोकतंत्र की जीत हुई है। आतंकवादी और अलगाववादी संगठनों को ठेंगा दिखाते हुए न सिर्फ भारी संख्या में लोग चुनाव लड़े, बल्कि आम मतदाता ने पूर्ववर्ती चुनावों से कहीं ज्यादा मतदान भी किया।

इस बार 280 सीटों के लिए कुल 2178 प्रत्याशी चुनाव लड़े और कुल 51.42 प्रतिशत मतदान हुआ। 30 लाख से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। स्थानीय लोगों ने निडरतापूर्वक बुलेट का जवाब बैलेट से दिया। 28 नवम्बर से 22 दिसम्बर के बीच 8 चरणों में संपन्न हुए जिला विकास परिषद् चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से संपन्न हुए हैं, क्योंकि शासन ने सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था की थी।

प्रत्येक प्रत्याशी को शासन की ओर से सुरक्षा मुहैय्या कराई गई थी ताकि वह बेख़ौफ़ होकर लोकतान्त्रिक प्रक्रिया में भागीदारी कर सके। अनेक पूर्व मंत्रियों, पूर्व सांसदों, पूर्व विधायकों और उनके परिजनों ने भी भी जिला विकास परिषद चुनाव लड़ा।

जम्मू संभाग में जहाँ औसत मतदान 65 प्रतिशत के आसपास रहा, वहीं कश्मीर संभाग में यह 40 प्रतिशत के आसपास था। उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर में 20 जिले हैं। प्रत्येक जिले को 14 निर्वाचन-क्षेत्रों में बांटा गया था। जिला विकास परिषद् चुनाव मतपत्रों द्वारा संपन्न कराए गए ताकि लोकसभा आदि चुनावों की तरह प्रतिकूल परिणाम आने की स्थिति में विपक्ष ईवीएम से छेड़छाड़ का रोना न रोए।

इस लोकतान्त्रिक उत्सव में जनता की भागीदारी और इसका समयबद्ध, शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से संपन्न होना सबसे बड़ा और निर्णायक सन्देश है। ये चुनाव अगस्त 05, 2019 और अक्टूबर 31, 2019 को लिए गए ऐतिहासिक निर्णयों के बाद और उनकी पृष्ठभूमि में संपन्न हुए हैं।

गुपकार गठजोड़ इन चुनावों को केंद्र सरकार के इन निर्णयों पर ‘रेफेरेंडम’ के रूप में प्रचारित करना चाहता था। किन्तु जम्मू- कश्मीर की जनता ने चुनावों में उत्साहजनक भागीदारी करके न सिर्फ लोकतान्त्रिक प्रक्रिया में अपनी आस्था व्यक्त की, बल्कि भारतीय संघ में अपना विश्वास और उसके प्रति अपनी एकजुटता भी प्रदर्शित की है।

जिस षड्यंत्र के तहत ‘पीपुल्स एलायंस फॉर गुपकार डिक्लरेशन’ अवसरवादी, अपवित्र और बेमेल गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ रहा था, वह भी न सिर्फ उजागर हो गया बल्कि असफल भी हो गया। ये चुनाव परिणाम और इनमें जनता की व्यापक भागीदारी नैशनल कांफ्रेंस अध्यक्ष फारुख अब्दुल्ला और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ़्ती द्वारा दिए गए राष्ट्र-विरोधी बयानों का जम्मू-कश्मीर की जनता द्वारा दिया गया मुंहतोड़ जवाब हैं।

उल्लेखनीय है कि अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए फारुख अब्दुल्ला द्वारा चीन से सहायता लेने की बात की गई थी और महबूबा मुफ़्ती ने अनुच्छेद 370 की बहाली तक तिरंगा न उठाने की बात कही थी। उनके ये बयान बात इस गठजोड़ और इसके आकाओं की असलियत का खुलासा करते हैं।

निश्चय ही, ये चुनाव परिणाम गुपकार गठजोड़ के उपरोक्त आकाओं और उनकी सरकारों की ‘रोशनी एक्ट भूमि घोटाले’ और जम्मू संभाग के ‘इस्लामीकरण’ जैसी कारस्तानियों का भी प्रतिफल हैं।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा द्वारा अक्टूबर 30, 2020 को जम्मू-कश्मीर केन्द्रशासित प्रदेश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री केके शर्मा की नियुक्ति के साथ ही जम्मू-कश्मीर में लोकतान्त्रिक प्रक्रिया की बहाली की हलचल तेज हो गई थी।

लोकतान्त्रिक प्रक्रिया में सभी नागरिकों की विश्वासबहाली और भागीदारी सुनिश्चित करना किसी भी राज्य का सर्वप्रमुख कर्तव्य है और यही उसकी सबसे बड़ी चुनौती भी है। आज केंद्र-शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर इस चुनौती को स्वीकार करने में सफल हुआ है।

वहाँ त्रि-स्तरीय पंचायती राज्य व्यवस्था के महत्वपूर्ण और सबसे बड़े सोपान जिला विकास परिषद् के चुनाव पहली बार कराए गए। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने अक्टूबर महीने में पंचायती राज से सम्बंधित 73 वें संविधान संशोधन को जम्मू-कश्मीर में पूरी तरह लागू कर दिया था। राज्य में यह कानून पिछले 28 वर्ष से लंबित था।

पंचायती राज व्यवस्था न सिर्फ लोकतान्त्रिक व्यवस्था की मजबूत नींव है, बल्कि स्वशासन और सुशासन की भी पहचान है। इतिहास में पहली बार पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थी, गोरखा और बाल्मीकि समुदाय के लोगों को अपने लोकतान्त्रिक अधिकार मतदान का अवसर प्राप्त हुआ।

अभी तक ये अभागे और उपेक्षित समुदाय राज्य के चुनावों में मतदान के अपने लोकतान्त्रिक अधिकार से सुनियोजित ढंग से वंचित किए गए थे। पिछले दिनों केन्द्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की नई अधिवास नीति, मीडिया नीति, भूमि स्वामित्व नीति और भाषा नीति में बदलाव करते हुए शेष भारत से उसकी दूरी और अलगाव को खत्म किया गया है।

भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर राजभाषा अधिनियम-2020 लागू करते हुए पाँच भाषाओं- कश्मीरी, डोगरी, हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी को राजभाषा का दर्जा दिया है। बहुप्रयुक्त स्थानीय भाषाओं को राजभाषा का दर्जा मिलने से न सिर्फ इन भारतीय भाषाओं का विकास हो सकेगा, बल्कि शासन-प्रशासन में जनभागीदारी बढ़ेगी।

बहुत जल्दी जम्मू-कश्मीर की औद्योगिक नीति भी घोषित होने वाली है। ये चुनाव और इनके परिणाम केंद्र सरकार और उपराज्यपाल शासन की उपरोक्त सकारात्मक और संवेदनशील नीतियों पर भी मोहर लगाते हैं।

उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर की राज्य विधान-सभा में क्षेत्रीय असंतुलन रहा है। इसलिए चुनाव आयोग विधान-सभा चुनाव कराने से पहले वहाँ विधान-सभा क्षेत्रों का परिसीमन करा रहा है। यह परिसीमन कार्य अगले वर्ष तक पूरा होने की सम्भावना है।

परिसीमन प्रक्रिया के पूर्ण हो जाने के बाद लोकतान्त्रिक व्यवस्था और विकास-प्रक्रिया में सभी क्षेत्रों और समुदायों का समुचित प्रतिनिधित्व और भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी। शासन-प्रशासन की कश्मीर केन्द्रित नीति भी संतुलित हो सकेगी और अन्य क्षेत्रों के साथ होने वाले भेदभाव और उपेक्षा की भी समाप्ति हो जाएगी। यह विकास और विश्वासबहाली की राष्ट्रीय परियोजना है।

श्रीशैलम मंदिर पर मुस्लिमों का कब्जा, पूजा वाले फूलों की टोकरी में ही ले जाते हैं मटन: BJP विधायक टी राजा का आरोप

गोशमहल से भाजपा विधायक टी राजा सिंह ने आरोप लगाया है कि आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम मंदिर पर मुस्लिमों का कब्ज़ा हो चुका है। डेक्कन क्रॉनिकल (Deccan Chronicle) की रिपोर्ट के मुताबिक़ मंदिर से नज़दीक स्थित लगभग सभी दुकानों के ठेकों पर उनका एकाधिकार हो चुका है। वहाँ की गौशालाओं में मौजूद गायों की उनके माँस के लिए हत्या की जाती है।  

राजा सिंह ने दावा किया है कि रज़ाक नाम का व्यक्ति श्रीशैलम मंदिर का ठेकेदार है और उसकी पत्नी वहाँ पर बतौर सुपरवाइजर कार्यरत है। रज़ाक श्रीशैलम से विधायक शिल्पा चक्रपाणी रेड्डी (YSRCP) का नज़दीकी है और उसका भाई TDP नेता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसलिए सत्ता भले किसी की भी क्यों न हो, रज़ाक बंधुओं का पूरे मंदिर पर नियंत्रण है। 

गौशाला में होती है गौहत्या

रिपोर्ट के मुताबिक़ टी राजा सिंह ने कहा है कि रज़ाक पर कई गंभीर मामले लंबित हैं। इनमें से एक फूलों की टोकरी में बकरे का गोश्त ले जाने से संबंधित है। इन्हीं फूलों का इस्तेमाल मंदिर की पूजा-पाठ में भी होता है। रज़ाक की सुपरवाइजर पत्नी की मदद से वहाँ पर गौहत्या भी की जाती है, जो कि पूर्णतः प्रतिबंधित है। 

शिल्पा चक्रपाणी रेड्डी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है और कहा है कि वह संक्रांति के बाद भाजपा विधायक के साथ इस मुद्दे पर बहस के लिए तैयार हैं। उन्होंने अपने बयान में कहा, “सारे आरोप झूठे, आधारहीन और दुर्भावनापूर्ण हैं और सिर्फ लोगों को भड़काने के लिए लगाए गए हैं।” रेड्डी ने कहा कि वह कट्टर हिन्दू हैं और उन्होंने यह मंदिर अपने रुपयों से बनवाया है। 

मंदिर की गौशाला में मौजूद हैं हज़ारों गाय

मंदिर प्रशासन से जुड़े व्यक्ति के मुताबिक़ अक्षय निधि अधिनियम (Endowments Act) कहता है कि अन्य धर्मों के लोग इस मंदिर शहर में नहीं रह सकते हैं। लेकिन श्रीशैलम में रहने वाले मुस्लिमों ने इसके विरोध में अदालत का रुख किया और फ़िलहाल यह मामला अदालत में लंबित है।

गौशाला सुपरवाइजर पर गौहत्या का आरोप लगाए जाने के बाद उसका स्थानान्तरण कर दिया गया। श्रीशैलम ब्रह्मारम्भा मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर द्वारा संचालित गौशाला में लगभग 1542 गाय-बैल मौजूद हैं।           

पाकिस्तानी पिस्तौल के साथ दाऊद इब्राहिम का करीबी अब्दुल कुट्टी गिरफ्तार, 24 साल से था फरार

गुजरात पुलिस के आतंक निरोधक दस्ते (ATS) ने शनिवार (26 दिसंबर, 2020) को अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गे अब्दुल माजिद कुट्टी को गिरफ्तार किया है। माजिद पिछले 24 साल से फरार चल रहा था। वह दाऊद इब्राहिम का काफी करीबी माना जाता है। पुलिस का मानना है कि वह दाऊद से जुड़े काफी राज और खुफिया जानकारियों को उगल सकता है।

24 साल बाद झारखंड से पकड़ा गया अब्दुल माजिद कुट्टी साल 1996 से कानून की गिरफ्त से दूर था। कुट्टी की तलाश देश के कई राज्यों की पुलिस कर रही थी। वह 1997 में गणतंत्र दिवस पर गुजरात और महाराष्ट्र में बम विस्फोट करने के लिए एक पाकिस्तानी एजेंसी के इशारे पर दाऊद इब्राहिम द्वारा भेजे गए विस्फोटकों से संबंधित एक मामले में भी शामिल था।

अब्दुल माजिद कुट्टी गुजरात और महाराष्ट्र में किसी बड़े दंगे की साजिश रच रहा था और उसे जल्द ही अंजाम देने वाला था। लेकिन वह यह कर पता, उससे पहले ही पुलिस ने उसे धर दबोचा।

एटीएस अधिकारियों ने बताया, “अब्दुल माजिद कुट्टी केरल का रहने वाला है। मजीद वर्ष 1996 में 106 पिस्तौल, लगभग 750 कारतूस और लगभग चार किलोग्राम आरडीएक्स इकट्ठा करने के मामले में वॉन्टेड था।”

एक वरिष्ठ एटीएस अधिकारी ने बताया, “अन्य आरोपितों को इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका था लेकिन अब्दुल पुलिस की पकड़ से हर बार भागने में सफल हो जाता था। हमें अपने खुफिया सूत्रों से झारखंड में उसके ठिकाने के बारे में जानकारी मिली थी। इसके बाद एक टीम को झारखंड भेजा गया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।अब्दुल माजिद कुट्टी के पास से पाकिस्तानी पिस्तौल मिली है।”

गौरतलब है कि ईडी ने भी अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम पर शिकंजा कसते हुए स्मगलर्स एंड फॉरेन एक्सचेंज मैनिपुलेटर्स एक्ट (SAFEMA) के तहत महाराष्ट्र की उसकी 6 प्रॉपर्टी को नीलाम करवा दिया। इसमें दाऊद के पैतृक गाँव रत्नागिरी में उसकी सम्पत्ति भी शामिल थी। यह संपत्ति उसकी माँ अमीना बी और बहन हसीना पार्कर के नाम पर रजिस्टर्ड थी। 1983 में मुंबई जाने से पहले दाऊद का परिवार इसी घर में रहता था।

1993 के मुंबई सीरियल धमाकों के मुख्य आरोपित भगोड़े डॉन दाऊद की सम्पत्ति की इस नीलामी से 22 लाख 79 हजार 600 रुपए मिले। कोविड के चलते नीलामी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की गई थी। SAFEMA की धारा 68F के तहत वॉन्टेड अपराधियों और उनके परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों की संपत्तियों पर भी आगे कार्रवाई की जाएगी।

किसान भईल परेशान, पप्पू गइले मिलान: किसान आन्दोलन की छुच्छी में आग लगा RAGA गए इटली, करेंगे धरना-प्रदर्शन

‘किसान भईल परेशान, पप्पू गइले मिलान’, ये किसी आने वाली भोजपुरी फिल्म का नाम नहीं बल्कि कॉन्ग्रेस के दबंग नेता राहुल गाँधी जी की ताजा खबर पर दिल्ली-हरियाणा सीमा पर डटे ‘किसान पुत्रों’ की प्रतिक्रिया है। ताजा खबर ये है कि तीन नए ‘फासीवादी’ कृषि कानूनों को लेकर किसान आंदोलन की छुच्छी में आग लगाकर कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष इटली (मिलान) भाग रहे हैं। यह खबर ठंड में ठिठुरते एक किसान पुत्र ने हमें अपने जियो सिम से कॉल कर के दी। हालाँकि, खबर लिखे जाने तक वहाँ मौजूद जियो टॉवर की बिजली वाली तार काट दी गई थी।

बताया जा रहा है कि राहुल गाँधी को हमेशा की ही तरह कुछ आकस्मिक कारणों से देश छोड़कर जाना पड़ रहा है। कॉन्ग्रेस के युवा नेता की वैश्विक छवि के कारण अक्सर उन्हें ऐसे फैसले लेने होते हैं, खासकर तब जब देश में कुछ न कुछ बड़ा घटनाक्रम चल रहा हो।

‘ऐसी भी क्या मजबूरी है कि उन्हें क्रिसमस और पश्चिमी नववर्ष के अवसर पर अक्सर देश छोड़कर इटली जाना होता है?’ इस सवाल के जवाब में राहुल गाँधी का कहना है कि आपको क्यों लगता है कि मैं भारत के किसानों को मझधार में छोड़कर सिर्फ छुट्टियाँ बिताने के लिए इटली जा रहा हूँ?

सवाल पर हैरानी जताते हुए राहुल गाँधी ने कहा कि वो सिर्फ भारत के ही नहीं बल्कि एड्रियाटिक सागर की सीमाओं से लगे देशों के भी नेता हैं, जिस कारण अब उनकी चिंता का स्रोत सिर्फ भारत के ही किसानों की समस्या नहीं बल्कि अब वो पूरे यूरोप महाद्वीप के किसानों की समस्या के समाधान पर भी विचार कर रहे हैं।

राहुल गाँधी ने कहा कि किसानों की समस्या के समाधान के लिए उन्होंने जमकर ‘होमवर्क; कर लिया है। उन्होंने कहा कि वो करीब दो माह से घर पर बैठे इंटरनेट पर ‘फार्म विल’ खेल रहे थे, ताकि किसानों को कृषि सम्बन्धी परेशानियों को समझ सकें। कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि वो इटली में भी ‘फ़ार्म-विल’ खेलने वाले अपने दोस्तों के साथ धरना-प्रदर्शन कर किसान आंदोलन को जारी रखेंगे।

लेकिन तमाम अटकलों के विपरीत, कुछ खोजी फैक्ट चेकर्स ने बताया कि राहुल गाँधी के यूरोप जाने का असल कारण ब्रिटेन में कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन का मिलना है। अपुष्ट सूत्रों की मानें तो कॉन्ग्रेस नेता का कहना है कि इस बार वो वहीं जाकर कोरोना वायरस के इस नए प्रकार पर हैंडसैनीटाइजर डाल आएँगे जिससे भारत में प्रदर्शन कर रहे किसानों को कोई समस्या न हो। कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने इसे बड़ा फैसला बताकर कहा कि वो हमेशा से जानते थे कि राहुल जी के अंदर नेतृत्व की क्षमता है।

‘मंदिर में ग्रेनेड फेंकना’ – Pak से आया था फोन, मुस्तफा और मुर्तजा के साथ 4 आतंकी गिरफ्तार, J&K गजनवी फोर्सेज से है ताल्लुक

सुरक्षाबलों ने जम्मू कश्मीर के पुंछ जिले में 4 संदिग्ध आतंकियों को हिरासत में लिया है। उनके पास से 6 ग्रेनेड बरामद किए गए हैं। गिरफ्तार किए गए संदिग्ध आतंकी वहाँ के मंदिर पर हमले की योजना बना रहे थे।

दरअसल शनिवार (26 दिसंबर 2020) रात 8 बजे स्थानीय पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और 49 राष्ट्रीय राइफल के जवान मेंधर सेक्टर के बसूनी क्षेत्र में वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। इस अभियान के दौरान उन्होंने गलहुटा गाँव के दो भाइयों मुस्तफ़ा इक़बाल और मुर्तजा इक़बाल को गिरफ्तार किया। 

इस घटना पर जानकारी देते हुए पुंछ के एसएसपी रमेश कुमार अंग्रल ने कहा, “इस कार्रवाई की वजह से ही हमें सफलता हासिल हुई। गिरफ्तारी के बाद 49 राष्ट्रीय राइफल बटालियन के बसूनी स्थित मुख्यालय में संदिग्धों से पूछताछ शुरू हुई। तब हमें पता चला कि मुस्तफ़ा को पाकिस्तानी नंबर से कॉल आई थी। पूछताछ में ही उसने स्वीकार किया कि उसे आरी गाँव स्थित मंदिर में ग्रेनेड फेंकने की ज़िम्मेदारी मिली हुई थी। उसके मोबाइल फोन में एक वीडियो भी मिला, जिसमें ग्रेनेड का इस्तेमाल करने का तरीका बताया गया था।” 

सुरक्षाबलों ने मुस्तफ़ा के घर पर छापा भी मारा, जहाँ से 6 ग्रेनेड और अज्ञात गज़नवी फोर्सेज़ के पोस्टर बरामद किए गए। इसके अलावा बालाकोट सेक्टर के नियंत्रण रेखा पर स्थित डाबी गाँव से भी दो संदिग्ध हिरासत में लिए गए हैं। फ़िलहाल सुरक्षाबलों और पुलिस का खोजबीन अभियान और गिरफ्तार किए गए संदिग्ध आतंकियों से पूछताछ जारी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अधिकारियों ने यह भी बताया कि यह सारे ही आतंकी जम्मू कश्मीर गज़नवी फोर्सेज़ से जुड़े हुए हैं, जो इस्लामी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा के अंतर्गत काम करता है। 13 दिसंबर 2020 को मुग़ल रोड, सूरनकोट पर हुई मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए थे, यह दोनों आतंकवादी भी जम्मू कश्मीर के इसी आतंकी संगठन से जुड़े हुए थे।      

ब्रिटेन से आए 279 लोगों का पता नहीं, 184 ने दिए गलत नंबर और पता: कोरोना के नए स्ट्रेन के बीच लापरवाही भारी

ब्रिटेन में कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन मिलने के बाद से ही पूरी दुनिया में हड़कंप मचा हुआ है। ऐसे में ब्रिटेन से हाल ही में तेलंगाना लौटे कम से कम 279 यात्रियों का पता नहीं चल पा रहा है। इसके अलावा 184 यात्रियों ने अपना फोन नंबर और पता गलत दर्ज कराया है। इससे स्वास्थ्य विभाग की चिंताएँ बढ़ा गई है।

राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को ब्रिटेन से लौटे 59 और लोगों में नए कोरोना वायरस संक्रमण मिले हैं। इसके बाद अब तक ब्रिटेन से लौटे कोरोना संक्रमितों की संख्‍या 119 हो गई है।

तेलंगाना पुलिस के मुताबिक, ब्रिटेन से आए 184 लोगों से संबंधित कोई जानकारी नहीं मिली है, क्योंकि इन्होंने गलत फोन नंबर और एड्रेस दर्ज करवाए थे। इनके अलावा 92 यात्री पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश, केरल और कर्नाटक से हैं, जिनकी पहचान नहीं हो पाई है।

तेलंगाना पब्लिक हेल्थ निदेशक डॉ. जी श्रीनिवास राव ने कहा, “नए प्रकार के वायरस वाले लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्हें केवल सतर्क रहने की जरूरत है। ठीक से मास्क का उपयोग करें। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें और बार-बार हाथों को धोते रहें।”

डॉ. राव ने कहा, “1216 लोगों में से 937 का टेस्ट करवाया जा चुका है। इनमें से शनिवार को 2 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए।” उन्होंने 9 दिसंबर के बाद ब्रिटेन से लौटे सभी यात्रियों से अपनी सूचना अधिकारियों को देने का आग्रह किया है।

राज्य सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, जानलेवा कोरोना वायरस के नए स्‍ट्रेन से संक्रमित 18 लोगों के करीब आए 79 लोगों को क्वारंटाइन कर और उनके स्वास्थ्य स्थिति को लगातार मॉनिटर किया जा रहा है। इसके अलावा संक्रमित लोगों के सैंपल को सेलुलर और मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) में जाँच के लिए भेजा गया है।

गौरतलब है कि ब्रिटेन में कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन का पता चलने के बाद भारत और यूरोप समेत कई देशों ने वहाँ से आने वाली फ्लाइट पर रोक लगा दी थी। भारत सरकार ने जरूरी कदम उठाते हुए इंग्लैंड से आने वाली सभी उड़ानों को 31 दिसंबर की आधी रात तक सस्पेंड कर रखा है।

ब्रिटेन के अलावा कोरोना वायरस के इस नए प्रकार का संक्रमण नीदरलैंड, डेनमार्क, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में भी पाया गया। वहीं अब कई अन्य देश भी इंग्लैंड की उड़ानों पर रोक को लेकर सोच-विचार कर रहे हैं। यूरोप के कई देशों ने इंग्लैंड बॉर्डर को सील कर दिया है।