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गुनाह, औरतों की बेशर्मी… अल्लाह का इम्तिहान: आमिर खान के करीबी मौलाना का सुर कोरोना संक्रमण से बदला

तबलीगी जमात के चर्चित पाकिस्तानी मौलाना तारिक जमील कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए थे। इससे उबरने के बाद कोविड 19 पर उनकी राय बदल गई है। पहले उन्होंने इस महामारी के लिए औरतों को जिम्मेदार ठ​ठहराया था। लेकिन अब उनका मानना है कि अल्लाह इम्तिहान ले रहा है। इतना ही नहीं अब वह इससे बचाव के उपाय भी बता रहे हैं।

एक वीडियो संदेश तारिक जमील ने कहा है कि उन्हें नहीं पता था कि कोरोना वायरस क्या है। फिर वे इससे संक्रमित हो गए। अल्लाह की रहमत से 10 दिन अस्पताल में रहने के बाद वे ठीक हो गए हैं। उनके मुताबिक़ अल्लाह ने लोगों का इम्तिहान लेने के लिए यह महामारी भेजी है। लेकिन लोगों को मास्क पहनना चाहिए और सामाजिक दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) का पालन करना चाहिए। बुजुर्गों को इस बीमारी से सबसे ज़्यादा ख़तरा है।

जून 2020 में तारिक जमील ने कहा था कि कोरोना महामारी लोगों के गुनाहों का नतीजा है और इसे विज्ञान के आधार पर (साइंसी मोड) देखा और समझा जाना निन्दनीय है। इसके पहले अप्रैल 2020 में तारिक जमील ने एक कार्यक्रम में बोलते हुए महिलओं को कोरोना महामारी के लिए ज़िम्मेदार ठहराया था। इस कार्यक्रम में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान भी मौजूद थे। 

अपनी दुआ के दौरान तारिक लड़कों की तरह रोते हुए अल्लाह से गुज़ारिश कर रहा था कि वो दुनिया को कोरोना वायरस से बचा ले। उसका कहना था कि मुस्लिम महिलाओं और युवाओं के बेशर्म बर्ताव की वजह से अल्लाह ने लोगों को इतना कष्ट और पीड़ा दी है।  

कौन हैं मौलाना तारिक जमील?

मौलाना तारिक जमील इस्लामी उपदेशक, मज़हबी लेखक और तबलीगी जमात का सदस्य है। वह देवबंद से भी संबंधित हैं।

तारिक जमील का जन्म 1 जनवरी 1953 को पाकिस्तान के पंजाब राज्य स्थित मियाँ चन्नू में हुआ था। उनकी पढ़ाई लाहौर के गवर्नमेंट कॉलेज यूनिवर्सिटी से हुई है। इस्लामी शिक्षा जामिया, अरबिया रैविंद (raiwind) से पूरी की जहाँ उन्होंने कुरान, हदीस, सूफ़ी, तर्क और इस्लाम से जुड़े क़ानून का अध्ययन किया। 

मौलाना तारिक जमील का शहरी मुस्लिमों पर अच्छा-खासा प्रभाव है। मुस्लिम 500 के अनुसार, “पाकिस्तान के फैसलाबाद में मदरसा चलाने के साथ-साथ मौलाना तारिक ने दुनिया भर में हज़ारों भाषण दिए हैं। व्यवसायी से लेकर मंत्री, अभिनेता और खिलाड़ी तक, मौलाना तारिक हर वर्ग को प्रभावित करने में सफल रहे हैं।” तबलीगी उपदेशक के बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान से भी काफी करीबी रिश्ते हैं। उनका दावा है कि हज के दौरान लंबी मुलाक़ात के बाद बॉलीवुड अभिनेता उन्हें अक्सर संदेश भेजते रहते हैं।    

नेपाल में ‘पहलवान’ भेजेगा चीन: होउ यांकी के घटते दखल और कम्युनिस्ट पार्टी में टूट के खतरे से टेंशन में बीजिंग

नेपाल की राजनीतिक उठा-पठक से चीन टेंशन में है। काठमांडू में अपने राजदूत होउ यांकी के घटते प्रभाव को देखते हुए उसने डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू कर दी है। इस कड़ी में उसने अपने अंतरराष्ट्रीय विभाग के उप-मंत्री गुओ येझोऊ (Guo Yezhou) को काठमांडू भेजने की योजना बनाई है। गुओ को बीजिंग में सियासी पहलवान के तौर पर देखा जाता है।

असल में नेपाल की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी (NCP) पर टूट का खतरा मॅंडरा रहा है। वर्तमान और पूर्व प्रधानमंत्री के बीच संघर्ष चल रहा है। इससे पहले इसी साल मई में जब इसी तरह की स्थिति पैदा हुई थी तो नेपाल में चीन की राजदूत होउ यांकी ने मामले को सँभाल लिया था।

जुलाई में दोबारा विवाद होने के बाद बी चीनी राजदूत के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हो गया था। लेकिन, अब प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली द्वारा संसद भंग करने की सिफारिश के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है।

NCP के नेताओं ने इस बात की पुष्टि की है कि गुओ येझोउ रविवार (दिसंबर 27, 2020) को काठमांडू पहुँचेंगे। उनके साथ 4 सदस्यों का एक चीनी प्रतिनिधिमंडल होगा। वे अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ नेपाल की राजधानी में 4 दिनों तक प्रवास करेंगे और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में चल रहे विवाद को सुलझाने की कोशिश करेंगे। NCP (दहल-नेपाल गुट) के विदेश मामलों के उप प्रमुख विष्णु रिजाइ ने बताया कि चीन पार्टी नेताओं के साथ संपर्क में है।

हालाँकि, उन्होंने पूरे प्रकरण के बारे में अधिक कुछ साझा करने से इनकार कर दिया। चीन ने ही CPN-UML और माओवादियों के विलय के बाद इस पार्टी के गठन की भूमिका तैयार की थी, ऐसे में वो इसे टूटने नहीं देना चाहता। शेर बहादुर देउबा और सुशील कोइराला के प्रधानमंत्रित्व काल में विदेश संबंधों के सलाहकार रहे दिनेश भट्टराई का कहना है कि चीन की सीधी प्रतियोगिता नेपाल में भारत से है और अपने हितों को बचाए रखने के लिए उसने भारी निवेश किया है।

उन्होंने कहा कि काठमांडू में अचानक परिवर्तन होने के कारण चीन चिंतित है। सीमा विवाद पर भारत के खिलाफ बयान दे रहे ओली के तेवर अक्टूबर में नरम पड़ गए थे, जब भारत के कुछ राजनयिकों ने उनसे मुलाकात की थी। RAW के मुखिया सुमंत गोयल, भारतीय सेना प्रमुख MN नरवणे और विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला से मुलाकात के बाद ओली के तेवर ढीले पड़े थे। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने भी इस क्षेत्र में आकर चीनी प्रभाव को कम करने का प्रयास किया था।

इसके बाद चिंतित चीन ने अपने रक्षा मंत्री वेई फेंघे को नेपाल भेजा। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की एक टीम ने नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं से संपर्क किया। NCP के एक स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य ने बताया कि भारतीय अधिकारियों के दौरे के बाद चिंतित चीन को तब और धक्का लगा, जब ओली ने संसद को ही भंग करने की सिफारिश कर दी। इसके बाद होउ यांकी ने 3 बड़े नेताओं के साथ बैठक कर ये पूछा कि क्या इन परिवर्तनों से चीनी निवेश पर कोई फर्क पड़ेगा?

पोखरा में चीन एक अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बना रहा है। साथ ही काठमांडू में रिंग रोड का विस्तारीकरण किया जा रहा है। कोरोना संक्रमण के कारण चीनी निवेशों को धक्का लगा है। सुरक्षा कारणों से भी चीन NCP में टूट के खिलाफ है। नेपाल की राजनीति में चीन इस तरह से कभी सक्रिय नहीं रहा। अब चीन इसीलिए नाखुश है क्योंकि वो NCP नेताओं के बीच ‘गिव एंड टेक’ पर सहमति नहीं बन पाई। ऊपर से लोग चीन का विरोध भी कर रहे हैं।

हाल ही में ‘शीतल निवास’ में होउ यांकी ने मंगलवार (दिसंबर 22, 2020) को नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी से मुलाकात कर ताजा स्थिति पर चर्चा की। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने संसद को भंग करने की सिफारिश राष्ट्रपति भंडारी को भेज दी थी, जिस पर उन्होंने हस्ताक्षर भी कर दिया है। केपी शर्मा ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) और पुष्प कमल दहल प्रचंड के कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट) के विलय के बाद ‘नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (NCP)’ का गठन हुआ था।

उज्जैन: बेगमबाग का वह घर ध्वस्त जहाँ से राम मंदिर के लिए चंदा जमा कर रहे लोगों पर हुआ था पथराव

मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित बेगमबाग इलाके में ‘रामनिधि संग्रहण’ रैली निकालने के दौरान मुस्लिम समुदाय के अराजक तत्वों ने हिन्दू संगठन पर पथराव किया था। इस घटना पर संज्ञान लेते हुए पुलिस ने उन लोगों पर कड़ी कार्रवाई की है जो पथराव की घटना में शामिल थे। पुलिस और नगरपालिका की संयुक्त टीम ने उस घर को ध्वस्त कर दिया है, जिसके आस-पास मौजूद होकर कुछ महिलाएँ और बच्चे यात्रा निकालने वालों पर पथराव कर रहे थे। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ जिस घर के नज़दीक अराजक तत्वों ने पथराव की घटना को अंजाम दिया था, वह ग़ैरक़ानूनी था। इसके बाद अधिकारियों ने घर को जेसीबी मशीन से ध्वस्त कर दिया। 

मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित बेगमबाग में शुक्रवार (दिसंबर 25, 2020) की शाम हिंदू संगठनों की रैली (रामनिधि संग्रहण रैली) पर जम कर पत्थरबाजी की गई थी। मुस्लिम भीड़ की इस हरकत के बाद दोनों समुदायों के बीच झड़प हुई और इलाके में तनाव व्याप्त हो गया था। वहाँ खड़ी कई गाड़ियों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। तोड़फोड़ और पथराव की इस घटना में लगभग 10 लोग घायल हुए थे। पुलिस ने एक आरोपित को गिरफ्तार भी किया है।

हिंदू कार्यकर्ता अयोध्या में निर्माणाधीन राम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने के लिए रैली निकाल रहे थे। इस रैली को टॉवर क्षेत्र से महाकाल क्षेत्र स्थित भारत माता मंदिर तक जाना था। तभी रास्ते में ही बेगमबाग क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय के कुछ असामाजिक तत्वों ने रैली पर पथराव शुरू कर दिया। ​रैली में शामिल हिंदू भारी पत्थरबाजी के बीच किसी तरह जान बचाकर निकलने में सफल रहे।

किसान चौपाल से कॉन्ग्रेस भड़की, राजस्थान में 800 पर FIR: कृषि कानूनों पर भ्रम दूर करने के लिए 700 चौपाल लगा रही BJP

किसानों के हित में तीनों कृषि कानूनों का विरोध करने का दावा करने वाली कॉन्ग्रेस की राज्य सरकारें किसानों के खिलाफ ही मामले दर्ज करा रही है। राजस्थान में भाजपा की चौपाल में जुटे सैकड़ों किसानों पर FIR दर्ज की गई है। राजस्थान में भाजपा ने तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे दुष्प्रचार को रोकने के लिए कई चौपाल के आयोजन का कार्यक्रम बनाया है, जिसमें किसानों को इन कानूनों के फायदे गिनाए जाएँगे।

राजस्थान की पुलिस ने भाजपा नेता भूपेंद्र यादव समेत उन 800 किसानों के खिलाफ FIR दर्ज की है, जो चौपाल में शामिल हुए थे। पुलिस ने इन सभी के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए महामारी एक्ट का सहारा लिया है। डेढ़ दर्जन भाजपा नेताओं के साथ-साथ चौपाल में उपस्थित किसानों के खिलाफ FIR दर्ज किया गया है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने इस घटना की निंदा करते हुए पूछा कि क्या राजस्थान में कॉन्ग्रेस के राज में कोई लोकतंत्र बचा भी है?

उन्होंने पूछा कि अगर भारतीय जनता पार्टी आज किसानों के बीच फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करने का प्रयास कर रही है तो इसमें गलत क्या है? उन्होंने कहा कि अशोक गहलोत की सरकार चाहे अपनी मशीनरी का जितना गलत उपयोग कर ले, किसानों के बीच जागरूकता फैलाने का कार्यक्रम जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि 2022 तक भारत के किसान आत्मनिर्भर, समृद्ध और स्वतंत्रत होंगे- मोदी सरकार इसी दिशा में आगे बढ़ रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में पीएम किसान सम्मान निधि के दूसरे इन्सटॉलमेंट के तहत किसानों के खाते में 2000 रुपए भेजते हुए उन्हें सम्बोधित भी किया था। चौपाल के दौरान उनके इस सम्बोधन को प्रसारित भी किया गया और किसानों को सुनाया गया। देश भर के 9 करोड़ किसानों के खाते में 18,000 करोड़ रुपए भेजे गए हैं। कृषि कानूनों पर दुष्प्रचार को खत्म करने के लिए बीजेपी देश भर में 700 किसान चौपाल और 700 प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगी।

केंद्र सरकार ने साफ़ कर दिया है कि वो वार्ता के लिए हमेशा तैयार है और किसान संगठनों की आपत्तियों को सुन कर तीनों कानूनों में संशोधन भी किया जा सकता है, लेकिन इन कानूनों को वापस लेने का कोई सवाल पैदा नहीं होता। MSP और APMC पर भी पीएम मोदी कई बार आश्वासन दे चुके हैं कि इन्हें ख़त्म नहीं किया जा रहा है। मंगलवार (दिसंबर 29, 2020) को फिर से केंद्रीय मंत्रियों की किसान संगठनों से वार्ता होगी।

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि जो दल पश्चिम बंगाल में किसानों के हित में नहीं बोलते हैं, वे यहाँ दिल्ली आकर किसानों के बारे में बात करते हैं। उन्होंने कहा कि इन दलों को आजकल APMC मंडियों की चिंता सता रही है, लेकिन ये दल बार-बार यह भूल जाते हैं कि केरल में APMC मंडियाँ नहीं हैं और इन लोगों ने केरल में कभी आंदोलन नहीं किए। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य कार्ड, यूरिया की नीम कोटिंग, सौर पम्पों के वितरण की योजना जैसी सरकार की कुछ किसान केन्द्रित पहल गिनाईं, जिनसे किसानों को लागत घटाने में सहायता मिली है।

‘ये लोग मुझे पालघर की तरह मार डालेंगे’: महाराष्ट्र में राम मंदिर के साधु पर हमला, तलवार वाला Video वायरल

महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं और उनके ड्राइवर की मॉब लिंचिंग को लोग अभी भूले नहीं हैं। इसी बीच महाराष्ट्र से अब एक और ऐसा मामला सामने आ गया है। औरंगाबाद में राम मंदिर के एक साधु पर 25 लोगों की भीड़ ने हमला बोल दिया और जम कर पिटाई की। ये घटना पेठण तहसील के जांभली गाँव की है। यहाँ के मंदिर में गणेश पुरी शिंदे नामक एक साधु रहते हैं। उनकी पिटाई का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

जब अचानक से दो दर्जन ग्रामीणों ने साधु महाराज को घेर लिया तो उन्होंने अपनी कुटिया में जाकर आत्मरक्षा के लिए रखी दो तलवार उठा ली। वीडियो में उन्हें कहते हुए सुना जा सकता है कि भीड़ उन्हें उसी तरह मार डालेगी, जैसे पालघर में साधुओं की सामूहिक हत्या की गई थी। उन्होंने बताया कि ये लोग उन्हें हमेशा परेशान और प्रताड़ित करते रहते हैं। साधु ने कहा कि उन पर पहले भी ऐसे हमले हो चुके हैं।

अपने हाथ में दो तलवारों के वीडियो में दिखने के सवाल पर साधु गणेश पुरी शिंदे ने कहा कि उन्होंने खुद की सुरक्षा के लिए ये उठाया था, उन्हें इसके लिए मजबूर होना पड़ा था। शुक्रवार (दिसम्बर 25, 2020) को मोक्षदा एकादशी थी, ऐसे में गाँव के कई महिलाएँ एवं पुरुष निलाज गाँव के श्रीराम मंदिर में पहुँचे थे। ग्रामीणों का कहना है कि साधु के भुट्टे के खेत में गाय घुस गई। इसके बाद साधु ने एक ग्रामीण को डंडे से मारा, जिससे लोग आक्रोशित हो गए।

साधु ने आरोप लगाया कि ग्रामीणों ने सबसे पहले उन पर पत्थरबाजी की, जिसमें उन्हें काफी चोटें आईं। ग्रामीणों ने दावा किया कि वे दौड़ते हुए बस्ती की ओर गए थे, इसलिए गिरने पर उन्हें चोट लगी होगी। औरंगाबाद के घाटी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। शनिवार को 25 लोगों के खिलाफ मारपीट का मामला भी दर्ज कराया गया। पुलिस साधु से पूछताछ कर रही है कि उनके पास तलवार कहाँ से आई और उन्होंने क्यों रखी थी।

‘आज तक’ की खबर के अनुसार, पुलिस ने जाँच के क्रम में वो तलवारें भी जब्त कर ली है। पुलिस ने बताया कि अगर साधु महाराज के पास रखीं तलवारें अवैध पाई जाती हैं तो उनके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। पुलिस ने कहा कि वो शुक्रवार को ही साधु को मामला दर्ज कराने को कह रहे थे, लेकिन वो तैयार नहीं हुए। सोशल मीडिया में लोगों ने इस घटना को लेकर जम कर आक्रोश जताया।

पालघर मामले की जाँच के बाद भी एक स्वतंत्र फैक्ट फाइंडिंग कमिटी ने साधुओं की मॉब लिंचिंग को लेकर कहा था कि इसके पीछे गहरी साजिश थी। साथ ही इस घटना के तार नक्सलियों से भी जुड़े थे। कमिटी ने पाया था कि वहाँ उपस्थित पुलिसकर्मी अगर चाहते तो इस हत्याकांड को रोक सकते थे लेकिन उन्होंने हिंसा की साजिश में शामिल होने का रास्ता चुना। कमिटी के अनुसार, आदिवासियों को वामपंथी भड़का रहे हैं कि वे क़ानून, सरकार और संविधान का सम्मान न करें।

लोकतंत्र का ककहरा सीखें राहुल गाँधी, क्योंकि यह परिवार का विशेषाधिकार सुरक्षित रखना नहीं

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने यह कहकर देश की जनता का ही मजाक उड़ाया है कि भारत का लोकतंत्र फर्जी है। अपनी तमाम कमियों और कमज़ोरियों के बावजूद भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था पूरे विश्व में सम्मान की पात्र है। देशवासियों को इस पर गर्व है। पर शायद राहुल गाँधी के लिए भारत के लोकतंत्र का मतलब उनके और उनके परिवार के विशेषाधिकार सुरक्षित रखने तक ही सीमित है। अन्यथा वे ऐसा हास्यास्पद और मूर्खतापूर्ण बयान देकर देश और देशवासियों का अपमान नहीं करते।

यह बयान उन्होंने उस समय दिया जब वे अपनी बहन प्रियंका गाँधी वाड्रा और कॉन्ग्रेस के कई सारे नेताओं के साथ राष्ट्रपति भवन की तरफ कूच करना चाहते थे। कॉन्ग्रेस पार्टी से पूछा जाना चाहिए कि इतने सारे लोग ले जाकर क्या उनका मकसद राष्ट्रपति भवन का घेराव करना था? क्या वे उसी तरीके से राष्ट्रपति भवन की घेराबंदी करना चाहते थे जैसे कि कुछ किसान नेताओं ने दिल्ली की है?

राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस का प्रतिनिधिमंडल तो राष्ट्रपति से मिला। मगर बिना इजाजत के पुलिस ने बाकी नेताओं को पैदल मार्च करने से मना कर दिया और उनकी बहन प्रियंका गाँधी वाड्रा सहित अन्य को आगे जाने से रोक दिया, तो क्या यही प्रमाण है कि देश से लोकतंत्र खत्म हो गया? शायद राहुल गाँधी का लोकतंत्र अपने परिवार से शुरू होकर वहीं खत्म हो जाता है।

वैसे भी राहुल गाँधी को लोकतंत्र का ककहरा शुरू से पढ़ने की जरूरत है। लोकतांत्रिक व्यवस्था और मर्यादाओं की अगर उन्हें रत्तीभर भी समझ होती तो वे भारतीय लोकतंत्र पर ऐसा मजाकिया बयान देने से पहले अपने अंदर झाँक लेते। अगर ऐसा होता तो वह उस दिन अपने आप से ये सवाल पूछते जब उन्होंने सितंबर 2013 में अपनी ही सरकार के एक अध्यादेश को प्रेस कॉन्फ्रेंस में फाड़ फेंका था। उस समय उन्हें यह याद नहीं रहा कि वह देश के प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद और लोकतांत्रिक व्यवस्था का कितना गंभीर उल्लंघन कर रहे हैं।

कुछ नहीं तो वे अपनी दादी इंदिरा गाँधी से ही पूछ लेते कि उन्होंने जब जून 1975 में देश में इमरजेंसी लगाई थी तो क्या वह लोकतंत्र के भले के लिए लगाई थी? वैसे इतना दूर भी जाने की जरूरत नहीं है। अगर लोकतांत्रिक मर्यादाओं और मूल्यों को वे किंचित भी मान देते हैं तो वे कहीं बाहर नहीं बल्कि अपनी पार्टी में इसे लागू कर सकते हैं। कॉन्ग्रेस तो अब उनके परिवार की जेबी पार्टी ही है। और कुछ नहीं तो वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात मानकर कॉन्ग्रेस शासित पुदुचेरी में पंचायतों के चुनाव क्यों नहीं करवा लेते?

असल में राहुल गाँधी की चिंता भारत के लोकतंत्र को लेकर नहीं है। उन्हें चिंता सिर्फ अपनी बहन और अपने परिवार के विशेष अधिकारों को लेकर है। उनका गुस्सा सिर्फ अपनी बहन प्रियंका गाँधी वाड्रा को हिरासत में लिए जाने से है अन्यथा दुनिया के सबसे बड़े भारतीय लोकतंत्र को फर्जी नहीं बताते।

राहुल गाँधी अपनी पार्टी के नेताओं के साथ राष्ट्रपति को एक ज्ञापन देने के लिए जाना चाहते थे। यह ज्ञापन था कृषि कानूनों को लेकर। कृषि कानूनों की ही बात की जाए तो इनके बहाने उनकी सरकार उनके मुख्यमंत्री पंजाब में जो कर रहे हैं वह क्या किसी भी तरीके से लोकतांत्रिक है?

यह सही है कि लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार सब रखते हैं। लेकिन विरोध का ये अधिकार जब गुंडागर्दी और अराजकता में बदल जाए तो इसे लोकतंत्र नहीं भीड़तंत्र कहते हैं।

इस बहस में जाए बिना की कृषि कानूनों के साथ क्या होना चाहिए, क्या उनकी पार्टी की सरकार पंजाब में लोगों के जानमाल की रक्षा कर पा रही है? कोरोना के इस नाज़ुक समय में पंजाब की सरकार आम जनता की ऑनलाइन दिनचर्या, कामकाज और संपत्ति को सुरक्षित नहीं रख पा रही।

पंजाब के कुछ इलाकों में तोड़फोड़, गुंडागर्दी, उद्योगों, दूरसंचार उपकरणों और निजी संपत्तियों को क्षति करने का जो तमाशा चल रहा है क्या वह लोकतांत्रिक है? राहुल गाँधी और उनकी पार्टी हिंसा की इस आग में रोज़ घी डालने का काम कर रहे हैं। क्या ऐसा करके वे किसानों, पंजाब और देश का भला कर रहे हैं? यह सवाल राहुल गाँधी और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से पूछा जाना निहायत ही जरूरी है।

पंजाब के लोग और खासकर सिख हमेशा तरक्की पसंद रहे हैं। उन्होंने दुनिया में अपनी इस प्रगतिशील सोच से हमेशा नाम कमाया है। राहुल गाँधी के उलजुलूल बयानों के बाद पंजाब में हिंसा का दौर चल रहा है। आम जनजीवन ठप्प करके उद्योगों को नुकसान पहुँचाया जा रहा है।

ये लोकतांत्रिक तो कतई नहीं है। जिस सरकार को सम्पत्तियों की रक्षा करनी चाहिए वह तो हाथ पर हाथ धरकर बैठी है। गुंडागर्दी करने वाले जानते हैं कि जब ‘सैयां भए कोतवाल तो फिर डर काहे का।’ कृषि, उद्योग और शिक्षा के क्षेत्र में हमेशा तरक्की का परचम लहराने वाले पंजाब को ये सब दूसरी दिशा में ले जाने का काम कर रहे हैं।

ये तो तय है कि आम पंजाबी कुछ लोगों की अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेकने की इन हरकतों को आखिरकार नकार ही देंगे। लेकिन डर है कि तब तक बहुत देर न हो चुकी हो। ऐसा न हो कि राजनीतिक रोटियों के चक्कर में राहुल गाँधी और कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब को हिंसा और विद्वेष की ऐसी डगर पर डाल दें जहाँ से पीछे लौटना मुश्किल हो।

किसानों सहित पंजाब के तरक्कीख्याल लोग तो आखिरकार अवसरवाद की इस भँवर में से अपनी किश्ती निकाल ही लेंगे। लेकिन कॉन्ग्रेस के नेतृत्व की हरकतें अगर ऐसी ही रही तो वे अपने हाथ से पंजाब जैसा प्रदेश हमेशा के लिए खो देंगे। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि राहुल गाँधी देश की गौरवपूर्ण प्रजातांत्रिक व्यवस्था को कोसने के स्थान पर खुद अंदर झाँकने की कोशिश करें। इसी से पंजाब के किसानों, उनकी पार्टी का और खुद उनका भला होगा।

यूपी: ‘लव जिहाद’ पर नया क़ानून आने के बाद महीने भर में 35 की गिरफ्तारी और 12 FIR, हर दिन एक से ज़्यादा मामले दर्ज

लव/ग्रूमिंग जिहाद की घटनाओं पर काबू पाने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार 27 नवंबर को विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश-2020 लेकर आई थी। इस क़ानून को लागू किए जाने के बाद से ही कार्रवाई का सिलसिला जारी है। इस क़ानून को लागू हुए पूरे एक महीने बीत चुके हैं और इस अवधि में लगभग 12 एफ़आईआर दर्ज हो चुकी ही और 35 लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। यानी पुलिस ने राज्य में हर दिन लगभग एक से ज़्यादा मामले दर्ज किए हैं।

न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के मुताबिक़ एटा में लव/ग्रूमिंग जिहाद के 8 मामले, सीतापुर में 7 मामले, गेटर नोएडा में 4, शाहजहाँपुर और आजमगढ़ में 3, मुरादाबाद, मुज़फ़्फ़रनगर, बिजनौर और कन्नौज में 2, बरेली और हरदोई में 1 मामला दर्ज किया गया। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में इसका पहला मामला दर्ज किया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ उवैस अहमद गाँव की ही एक छात्रा पर धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहा था।

घटना बरेली जिले के देवरनिया क्षेत्र की थी, जिसकी शिकायत पीड़िता के पिता टीकाराम ने की थी। इसके आधार पर पुलिस ने आरोपित के विरुद्ध मामला दर्ज किया था। पीड़िता के पिता ने बताया था कि शरीफ़नगर गाँव के निवासी रफ़ीक अहमद के बेटे उवैस अहमद ने पढ़ाई के दौरान उनकी बेटी के साथ जान-पहचान बढ़ाई। दोनों के बीच काफी समय तक मित्रता रही, इसके बाद उवैस उनकी बेटी पर धर्म परिवर्तन कर शादी करने का दबाव बनाने लगा।

इसके अलावा अंतर्धार्मिक विवाह की जानकारी मिलते ही उत्तर प्रदेश पुलिस ने राजधानी लखनऊ में एक शादी समारोह रुकवाया था। पुलिस ने दंपत्ति को शादी से पहले संबंधित दस्तावेज़ देने और क़ानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा। वहीं उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में 19 वर्ष की युवती ने 11 दिसंबर को शिकायत दर्ज कराई थी जिसमें उसने आरोप लगाया था कि मोहम्मद आज़ाद नाम के युवक ने शादी का झाँसा देकर उसके साथ बलात्कार किया। 

कुछ समय बाद धर्म परिवर्तन करने का दबाव भी बनाया। इसके बाद पुलिस ने मोहम्मद आज़ाद पर उत्तर प्रदेश के धर्मांतरण क़ानून, बलात्कार और मानव तस्करी का मामला दर्ज किया था। 16 दिसंबर को पुलिस ने आरोपित आज़ाद को गिरफ्तार किया था। इसी तरह यूपी पुलिस ने मुरादाबाद में नए क़ानून के तहत राशिद अली और सलीम अली को गिरफ्तार किया गया था। 16 दिसंबर को बिजनौर में एक व्यक्ति को लव/ग्रूमिंग जिहाद के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।     

हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया था। उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था, “हमने पुलिस प्रशासन से साफ कहा कि जब किसानों से मिलें तो हमारा संबोधन राम-राम होना चाहिए। हमारे यहाँ का किसान भाई जब मिलता है तो वह संबोधन में राम-राम बोलता है, तो राम शब्द का प्रयोग दो बार जरूर होना चाहिए। जब हम किसान भाइयों से मिलें तो हमारा संबोधन राम-राम होना चाहिए। जब सुरक्षा के साथ सेंध लगाने वाला कोई भी ऐसा दुराचारी, अपराधी बहन-बेटियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करे तो उसकी राम नाम सत्य की यात्रा भी निकालनी चाहिए। यह कार्य हम और पुलिस-प्रशासन सुनिश्चित करें।”

‘मैं इस चाकू से मोदी का पेट फाड़ दूँगी’: भारतीय किसान संघ के नेता की पत्नी ने दी धमकी, देखें वीडियो

केंद्र सरकार द्वारा लागू तीन कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसान आंदोलन में जहाँ एक तरफ दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के आरोपितों की रिहाई और खालिस्तानी समर्थकों के पोस्टर देखने को मिले तो वहीं अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बर्बरता, आपत्तिजनक टिप्पियाँ और यहाँ तक की मौत की धमकियाँ भी देखने को मिल रही है। जिसकी वजह से नए कृषि कानूनों के विरोध के पीछे छिपी असल मंशा को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

नेशनल दस्तक द्वारा गुरुवार (26 दिसंबर, 2020) को अपलोड किए गए वीडियो में एक महिला को प्रधानमंत्री को चाकू से मारने की धमकी देते हुए सुना जा सकता है। प्रदर्शनकारियों के लिए लंगर तैयार करने में व्यस्त एक महिला से जब पत्रकार ने संपर्क किया तो उसने जवाब देते हुए कहा “मैं इस चाकू से मोदी का पेट फाड़ दूँगी।” बता दें जब महिला आकस्मिक रूप से मोदी को जान से मारने की धमकी दे रही थी, तब वह हाथ में पकड़े चाकू से घोंपने का इशारा भी कर रही थी। वीडियो में यह धमकी 15 मिनट 18 सेकंड पर सुना जा सकता है।

साभार: यूट्यूब दस्तक

वहीं महिला को इस बयान पर फटकार लगाने के बजाय पत्रकार ने भी इस बात को हँसी में उड़ा दिया और यहाँ तक ​​कि उसने महिला को अपना बयान दोहराने के लिए प्रोत्साहित भी किया। इसके बाद पत्रकार ने इसे पीएम मोदी के खिलाफ उनके माँगों को न मानने के लिए ‘लोगों के गुस्से’ का प्रकोप बताया।

पत्रकार ने महिला प्रदर्शनकारी के बयान को उचित ठहराते कहा, “यह सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा है। वे 26 दिन से सड़कों पर हैं।” यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि उक्त महिला प्रमुख भारतीय किसान यूनियन नेता राकेश टिकैत की पत्नी है।

गौरतलब है कि इससे पहले एक वीडियो सामने आया था, जिसमें ‘प्रदर्शनकारी’ महिलाएँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मरने की दुआ कर रही थी। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो में एक महिला को कहते हुए देखा गया, “मोदी मर जा तू, शिक्षा बेच के खा गया रे मोदी, मर जा तू। रेल बेचकर खा गया रे मोदी, मर जा तू। देश बेच के खा गया रे मोदी, मर जा तू। किसानों को धोखा दे गए रे मोदी, मर जा तू।” वहीं सामने बैठी महिला बार-बार ‘हाय-हाय मोदी मर जा तू’ दोहरा रही थी।

हालाँकि, यह अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ कि वीडियो कहाँ का है। लेकिन बैकग्राउंड में अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) और कम्युनिस्ट पार्टी के हथौड़ा निशान वाला पोस्टर लगा देखा जा सकता है। बता दें कि एआईकेएस एक वामपंथी संगठन है। इसके दो गुट हैं- एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और दूसरा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का।

वहीं पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह ने भी ‘किसान आंदोलन’ में भड़काऊ भाषण दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेकर कहा था कि अगर ‘हिम्मत है तो वो अकेले आएँ और किसानों से बात करे।’ एक पंजाबी समाचार चैनल से बात करते हुए उन्होंने पीएम मोदी को जान से मारने की दी गई धमकियों का भी समर्थन किया था। योगराज सिंह ने कहा कि उन्होंने पीएम मोदी सहित भाजपा के अन्य नेताओं के चेहरे देखे हैं, वो सभी ‘शैतानों की तरह’ दिखते हैं।

ओवैसी के नेता फारूक अहमद द्वारा की गई गोलीबारी में घायल पूर्व पार्षद ने तोड़ा दम: घटना का वीडियो हुआ था वायरल

तेलंगाना के आदिलाबाद शहर में 18 दिसंबर को ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता फारूक अहमद द्वारा अंधाधुंध गोलीबारी की घटना में घायल हुए तीन लोगों में से एक व्यक्ति ने शनिवार (26 दिसंबर, 2020) को दम तोड़ दिया।

पुलिस के अनुसार, आदिलाबाद नगरपालिका के पूर्व पार्षद सैयद ज़मीर (55) ने हैदराबाद में निज़ाम के आयुर्विज्ञान संस्थान (NIMS) में इलाज के दौरान अंतिम साँस ली।

बता दें तेलंगाना के आदिलाबाद जिले में ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के जिला अध्यक्ष फारूक अहमद ने दो लोगों पर गोलियाँ चला दीं थी जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। यह घटना क्रिकेट खेलने के दौरान हुई थी। जोकि हाथापाई में बदल गई।

तभी फारूक ने अपने विरोधियों पर बहुत करीब से गोलीबारी शुरू कर दी। फारूक अहमद ने दो लोगों पर गोलियाँ चलाईं थी और तीसरे पर चाकू से हमला किया था। ज़मीर घायल तीन लोगों में से एक था, जिसके पेट में गोली लगी थी चूँकि जमीर की हालत सबसे ज्यादा गंभीर थी, तो उसे उपचार के लिए हैदराबाद ले जाया गया। जहाँ उसकी मृत्यु हो गई।

वहीं अन्य दो सैयद मन्नान और सैयद मोहतेसिन थे। जिनका इलाज राजीव गाँधी आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS), आदिलाबाद में चल रहा है।

पुलिस ने पहले आरोपित AIMIM नेता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 307 और भारतीय शस्त्र अधिनियम की धारा 27/30 के तहत मामला दर्ज किया था। हालाँकि, शनिवार को ज़मीर की मौत के बाद पुलिस अब आईपीसी की धारा 302 के तहत हत्या का मामला भी दर्ज करेगी।

इसके अलावा, पुलिस ने अहमद के हथियार के लाइसेंस को भी रद्द कर दिया है और उसकी बंदूक जब्त कर ली है। घटना के तुरंत बाद गिरफ्तार किया गया था। और वर्तमान में वह 14 दिन की न्यायिक रिमांड में है। सोशल मीडिया पर इस हमले के वायरल वीडियो में फारूक अपने एक हाथ से हवा में गोलीबारी करते और दूसरे हाथ में चाकू लिए नजर आ रहा है।

पीएम मोदी ने राहुल को याद दिलाया पुडुचेरी, कहा- दिल्ली में बैठे कुछ लोग मुझे लोकतंत्र का पाठ पढ़ा रहे हैं

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के ‘भारत में अब लोकतंत्र नहीं रह गया है’ वाले हालिया बयान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें आज जमकर लताड़ा है। PM मोदी ने कहा कि दिल्ली में बैठे कुछ लोग मुझे लोकतंत्र का पाठ पढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

दरअसल, पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने कल कहा था, “आप किस लोकतंत्र की बात कर रहे हैं? क्या आप भारत की बात कर रहे हैं? भारत में लोकतंत्र नहीं है। भारत में लोकतंत्र… यह आपकी कल्पना में हो सकता है लेकिन वास्तविकता में नहीं।”

वहीं पीएम नरेंद्र मोदी ने अब राहुल गाँधी के इस बयान को लेकर उनपर पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, “पुडुचेरी में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद पंचायत और म्यूनिसिपल इलेक्शन नहीं हो रहे। जो लोग मुझे लोकतंत्र का पाठ पढ़ाते रहते हैं, वे वही हैं जो वहाँ अपनी सरकार चला रहे हैं।” बता दें, केंद्रशासित प्रदेश पुदुचेरी में कॉन्ग्रेस की सरकार है

गौरतलब है कि पीएम मोदी ने आज कश्मीर के निवासियों को शांतिपूर्वक जिला विकास परिषद के चुनाव कराने और इतने कम समय में अपने प्रतिनिधियों को चुनने के लिए बधाई दी। साथ ही उन्होंने जम्मू-कश्मीर में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) SEHAT योजना का भी शुभारंभ किया।

पीडीपी-भाजपा गठबंधन और लोकतंत्र के लोकाचार के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता को याद करते हुए मोदी ने कहा, “हम जम्मू और कश्मीर में सरकार में थे। लेकिन आप जानते हैं कि हमनें सरकार से क्यों नाता तोड़ा। हमारी माँग थी कि पंचायत चुनाव कराए जाएँ और लोगों को उनके प्रतिनिधि चुनने के लिए उचित अधिकार दिए जाएँ। अब आपके पास आपके प्रतिनिधि हैं जो आपके लिए काम करेंगे। ”

पीएम मोदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के निवासी न केवल कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच बड़ी संख्या में मतदान करने के लिए निकले, बल्कि जम्मू-कश्मीर में महात्मा गाँधी का ग्राम स्वराज का सपना भी पूरा किया है।

पीएम मोदी ने कार्यक्रम में बोलते हुए आगे कहा, “आज का दिन जम्मू-कश्मीर के लिए बहुत ऐतिहासिक है। आज जम्मू-कश्मीर के सभी लोगों को आयुष्मान योजना का लाभ मिलने जा रहा है। मैं कल अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर इस योजना को लॉन्च करना चाहता था। अटलजी का जम्मू और कश्मीर से विशेष संबंध था, जो अब इन्सानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत ’के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।”

जम्मू के निवासी और आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थी रमेश लाल ने पीएम मोदी को धन्यवाद दिया और कहा, “मेरे परिवार के सभी 5 सदस्यों का आयुष्मान भारत गोल्डन कार्ड है। हम सभी इस स्कीम के लिए पीएम मोदी के आभारी हैं। अगर मेरे पास यह कार्ड नहीं होता तो कैंसर का इलाज करा पाना बेहद मुश्किल होता।” रमेश कैंसर के मरीज हैं। पीएम मोदी ने कहा कि आयुष्मान भारत ने आपका जीवन आयुष्मान बना दिया है। मैं आपसे अपील करता हूँ कि दूसरे को इस स्कीम और इसके फायदे के बारे में बताएँ।

बता दें यह योजना 2011 के सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (SECC) के अनुसार 21 लाख से अधिक लोगों को लाभान्वित करेगी। इस योजना के तहत पंजीकृत व्यक्ति 24,148 अस्पतालों में सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।