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मुस्लिम दबंगों ने दलित महिला को पीट कर जमीन कब्जाने की करी कोशिश: वीडियो वायरल, एक्शन में UP पुलिस

उत्तर प्रदेश में एक जिला है बलरामपुर। यहाँ के गाँव शेखापुर पचीठे में एक दलित महिला अपने परिवार के साथ रहती हैं। नाम है रत्ना देवी उर्फ गुड़िया। यह गाँव छोड़ कर जाना चाहती हैं। कारण है – मुस्लिम दबंगों जाहिद अली, चाँद अली, सत्तार अली, पीर अली और सुबराति के द्वारा इनको तंग किया जाना, इनके साथ मार-पीट करना, इनकी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश करना।

रत्ना देवी उर्फ गुड़िया ने आरोप लगाया है कि मुस्लिम दबंगों ने उनकी जमीन पर कब्जा करने के उद्देश्य से उनके साथ मार-पीट की है। उनका यह भी आरोप है कि जब वो इस मामले को लेकर प्रशासन के पास गईं तो उचित कार्रवाई नहीं की गई। साथ ही इन्होंने गाँव के प्रधान पर भी आरोप लगाया कि वो भी भू-माफियाओं के साथ मिला हुआ है।

इस मामले का एक वीडियो वायरल हुआ है। इस वीडियो में रत्ना देवी उर्फ गुड़िया ने खुद को पासवान जाति का बताया है और अपने ऊपर किए जा रहे अत्याचार की बात विस्तार से बताई है।

रत्ना देवी ने आरोप लगाया है कि पानी पटाने को लेकर उनके मर्द (पति) और बच्चों को आरोपितों ने लतार-लतार (पैर से) कर मारा है। इतना ही नहीं, उन्होंने बाल पकड़-पकड़ कर उठा कर पटक भी दिया है।

वीडियो में रत्ना देवी के पति अपने घर के सामने रहने वाले जाहिद अली, चाँद अली, सत्तार अली, पीर अली और सुबराति की घर की ओर इशारा करके बताते हैं कि ये लोग ही इनकी जमीन पर अतिक्रमण करना चाहते हैं। रत्ना देवी का कहना है कि गाँव का प्रधान भी मुस्लिम आरोपितों के साथ मिल कर कह रहा है कि ये लोग गाँव छोड़ कर चले जाएँ।

वीडियो वायरल होने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए यूपी पुलिस को सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इसके बाद पुलिस और प्रशासन हरकत में आई।

बलरामपुर के एसपी और डीएम दोनों ने खुद पीड़िता के घर पहुँच कर उनसे बात की। वीडियो में स्पष्ट सुना जा सकता है कि एसपी पीड़िता को आराम से रहने का आश्वासन दे रहे हैं। साथ ही पूछते हैं कि कोई परेशान तो नहीं कर रहा है? और संबंधित थाने के अधिकारी से भी इस बात को ध्यान में रखने को कहते हैं।

एसपी की बात पर थाने के अधिकारी उन्हें और पीड़ित परिवार को आश्वस्त करते हैं कि वो दिन-रात उनकी सुरक्षा में लगे हैं। खुद पीड़ित महिला ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि जब से यह पुलिस अधिकारी (वीडियो में दिख रहे) आए हैं, तब से मदद कर रहे हैं और वो कार्रवाई से संतुष्ट हैं।

पीड़ित महिला रत्ना देवी उर्फ गुड़िया ने एसपी और डीएम के सामने यह बात रखी कि जैसे सबके घरों के आगे खाली जगह है, वैसे ही उनके घर के आगे भी जगह खाली रहे। और जो भी अतिक्रमण उन्होंने अपने घर के आगे कर रखा है, वो उसे हटा लेंगी लेकिन यह सभी घरों के सामने से हटना चाहिए।

इसके पहले 6 दिसंबर को बलरामपुर पुलिस ने इस मामले पर ट्वीट करते हुए बताया था कि यह दो पक्षों में जमीन का विवाद है। इसमें राजस्व विभाग द्वारा नोटिस भी दिया जा चुका है और यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। साथ ही पुलिस ने यह भी लिखा था कि यह वीडियो पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए बनाया गया है।

कानपुर: खाली प्लॉट से मिले 4 नरमुंड, पुलिस ने कहा- पुरानी हैं खोपड़ी, कहीं से लाकर यहाँ रखा गया

कानपुर के पनकी थाना क्षेत्र के कांशीराम कॉलोनी में एक खाली प्लॉट में नरमुंड मिलने के बाद स्थानीय लोगों में सनसनी फैल गई। शुरुआत में बताया गया कि 4 नरमुंड बच्चों के हैं। खोपड़ी पर लगे खून एवं लाल रंग को देखकर लोगों ने तंत्र-मंत्र की आशंका जता रहे थे।

हालाँकि अब पुलिस अधीक्षक ने बयान देकर स्थिति को स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया, “इन नर कंकालों की फोरेंसिक टीम द्वारा जाँच की जा रही है। अभी तक की जाँच में यह बात सामने आई है कि यह काफी पुराने हैं। देखने से मालूम पड़ता है कि यह बच्चों का नहीं, बल्कि बड़ों का है। ऐसा लगता है कि इसे कहीं से लाकर यहाँ पर रख दिया गया है। इस संबंध में फोरेंसिक टीम और हमारी पुलिस की टीम आगे की जाँच कर रही है।”

तंत्र-मंत्र के बारे में पूछे जाने पर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि विस्तृत जाँच की जा रही है। तथ्यों के सामने आते ही इससे अवगत कराया जाएगा।

बताया जा रहा है कि पनकी थाना अंतर्गत कांशीराम आवास योजना की कॉलोनी के ठीक सामने खाली प्लॉट है। सुबह में टहलने निकले कुछ लोगों ने खाली प्लॉट में पाँच नरमुंड पड़े देखे। नरमुंड पड़े होने की सूचना के बाद मौके पर भारी भीड़ लग गई और क्षेत्र में सनसनी फैल गई। पुलिस के पहुँचने से पहले एक नरमुंड कुत्ते उठा कर ले गए। पुलिस ने चार नरमुंड को कब्जे में लेकर जाँच के लिए भेज दिया है।

‘इस्लाम का शेर’: फ्रांसीसी शिक्षक का सिर कलम करने वाले का ‘हीरो’ की तरह निकला जनाजा, गाँव की सड़क भी हत्यारे के नाम पर

आपको फ्रांस के शिक्षक सैमुअल पैटी याद होंगे, जिन्हें एक इस्लामी कट्टरवादी अब्दुल्लाख ने सिर्फ इसीलिए मार डाला था, क्योंकि उन्होंने अपनी कक्षा में पैगम्बर मुहम्मद के कार्टून्स दिखाए थे। अब उसे उसके गृह क्षेत्र चेचन्या में दफ़न किया गया है, जहाँ उसे पूरा हीरो वाला सम्मान दिया गया। सैकड़ों लोगों ने उसके जनाजे में भाग लिया और मुस्लिम भीड़ ने ‘इस्लाम का शेर’ के नारे लगाए। उसके सम्मान में गाने गाए गए।

उसे दफनाए जाने का पूरा वीडियो भी वायरल हो गया है, जिसमें सैकड़ों लोगों को हिस्सा लेते हुए देखा जा सकता है। अब्दुल्लाख अँजोरोव मात्र 18 साल का था और उसने फ्रेंच शिक्षक का सिर कलम कर दिया। बाद में पुलिस मुठभेड़ में उसी दिन अक्टूबर 16, 2020 को उसे भी मार गिराया गया था। शनिवार (दिसंबर 5, 2020) को उसकी लाश को उसके गृह क्षेत्र ‘रिपब्लिक ऑफ रूस’ के चेचन्या में लाया गया।

उसके गाँव शालाजी में ग्रामीणों ने उसके सम्मान में कार्यक्रम किए और अपने गाँव के इस्लामी रीति-रिवाजों के साथ दफ़न किया। भारी बर्फबारी के बावजूद 200 लोगों ने उसके अंतिम-संस्कार में हिस्सा लिया। पूरे गाँव में उसके शव को घुमाया गया, जो ‘Urus-Martanovsky’ नमक जिले में स्थित है। 5330 लोगों की जनसंख्या वाले इस गाँव के बाहर के लोग कहीं आकर शामिल न हो जाएँ, इसके लिए 65 पुलिस अधिकारियों को लगाया गया था।

गाँव की सीमाओं को सील कर दिया गया था। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में तो यहाँ तक कहा जा रहा है कि गाँव के लोगों ने एक सड़क का नामकरण भी अब्दुल्लाख के नाम पर किया है। वहाँ के लोगों ने कहा, “इस्लाम का शेर अपने जन्मस्थान पर आ गया है। वो अपनी मिट्टी में वापस चला गया है। केवल अल्लाह के पास ही सत्ता और शक्ति है, और किसी के पास भी नहीं।” वहाँ के कट्टरपंथी नेता भी उसके समर्थन में दिखे।

चेचन्या के एक कट्टरवादी नेता रमजान कादीरोव ने कहा कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों लोगों को आतंकवाद का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोगों के पास कोई विकल्प भी नहीं बचा है, क्योंकि फ्रांस की सरकार ‘शार्ली हेब्दो’ में बने पैगम्बर मुहम्मद के कार्टून्स को जायज ठहरा रहे हैं। हालाँकि, रूस ने कट्टरपंथी नेता को फटकार लगाई और विदेशी मामलों पर बयानबाजी न करने को कहा।

इस्लामी कट्टरपंथ से निपटने के लिए अपनी नई योजना को लेकर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों लगातार मुस्लिम देशों के निशाने पर हैं। मैक्रों ने देश के मुस्लिम नेताओं से ‘चार्टर ऑफ रिपब्लिकन वैल्यूज’ पर सहमति देने के लिए कहा है। इसको लेकर विवाद चल रहा है। चार्टर के मुताबिक, इस्लाम एक मजहब है और इससे किसी भी तरह के राजनीतिक आंदोलन को जोड़ा नहीं जा सकता है। चार्टर के तहत, फ्रांस के मुस्लिम संगठनों में किसी भी तरह के विदेशी हस्तक्षेप को प्रतिबंधित किया जाएगा।

केजरीवाल बॉर्डर पर, CM हाउस पर धरना: पार्षदों ने कहा- निगमों का ₹13,000 करोड़ दो, नहीं तो हड़ताल करेंगे सफाईकर्मी

केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली को घेरे बैठे ‘किसानों’ के समर्थन और सेवा में आम आदमी पार्टी (AAP) कोई कसर नहीं छोड़ रही है। खुद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपनी पूरी कैबिनेट के साथ सिंघु बॉर्डर पर किसानों से मिलने पहुँचे थे। दिलचस्प बात यह है दिल्ली के मुख्यमंत्री के घर के बाहर दिल्ली नगर निगम के पार्षद धरने पर बैठे हैं।

इनकी माँग है कि नगर निगमों के 13000 करोड़ रुपए की बकाया राशि चुकाई जाए। लेकिन, मुख्यमंत्री इनसे मुँह फेर कर किसान आंदोलन में पहुँच गए। अब पार्षदों व धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि जब तक उनकी सुनवाई नहीं होगी, वे कहीं नहीं जाएँगे।

भाजपा दिल्ली के ट्विटर अकाउंट पर धरने का वीडियो शेयर करते हुए लिखा गया है, “नगर निगम दिल्ली के 13,000 करोड़ रुपए की बकाया राशि न देने पर, आज, मुख्यमंत्री निवास स्थान पर केजरीवाल सरकार के ख़िलाफ़ तीनों निगम के पार्षदों द्वारा धरना प्रदर्शन जारी है।”

अगले ट्वीट में लिखा गया, “अपनी नाकामियों का ठीकरा दिल्ली सरकार दूसरे राज्यों पर फोड़ती आई है और अब नगर निगम, जो दिल्लीवासियों के लिए वास्तव में काम करती है, उसे भी पंगु बनाने में जुटी हुई है। मुख्यमंत्री जी शर्म करो, निगम का बकाया पैसा जारी करो।”

इसी क्रम में अगले ट्वीट में कहा गया, “केजरीवाल सरकार दलगत राजनीति से ऊपर उठकर दिल्ली के विकास और जन सेवा के लिए निगमों का बकाया 13000 करोड़ रुपए तत्काल प्रभाव से दे। निगमों को पंगु बनाना बंद करे केजरीवाल सरकार।”

शेयर किए गए वीडियो में प्रदर्शनकारियों को कहते सुना जा सकता है कि केजरीवाल सरकार ने उनसे वादा किया था कि सारा बकाया चुकाया जाएगा और उनसे यह भी कहा गया था कि वह लोग उनसे आकर कभी भी मिल सकते हैं। प्रदर्शनकारी कहते हैं कि आज सुबह जब वे मुख्यमंत्री से मिलने आए तो कहा गया कि वह उनसे मिलेंगे, लेकिन थोड़ी देर बाद सीएम बिन कुछ कहे और बिना उनसे मिले चले गए।

अब मुख्यमंत्री का रवैया देखकर प्रदर्शन पर बैठे लोगों का कहना है कि वह उनके आवास पर बैठे हैं और जब सीएम वापस आएँगे तब वह पहले उनसे बात करेंगे और तभी उनको अंदर जाने दिया जाएगा। प्रदर्शनकारी कहते हैं, “उन्होंने अगर हमारा पैसा क्लियर किया तो हम यहाँ से जाएँगे, वरना सभी सफाई कर्मचारी हड़ताल पर जाने को तैयार हैं। यदि दिल्ली में कोरोना की चौथी लहर आई तो उसके जिम्मेदार भी मुख्यमंत्री ही होंगे।”

प्रदर्शनकारी बताते हैं, “ये पैसा कोई हमारा नहीं है। ये राज्य वित्त आयोग जिसका गठन राज्य सरकार ने किया है, उसकी सिफारिश के अनुसार तीनों नगर निगम का पैसा 13,500 करोड़ रुपया नगर निगम को दिल्ली सरकार से लेना है।”

उल्लेखनीय है कि अपने आवास पर निगम पार्षदों की सुनवाई करने की बजाय दिल्ली मुख्यमंत्री केजरीवाल ने थोड़ी देर पहले अपने ट्विटर पर किसान प्रदर्शन की वीडियो शेयर की है। इस वीडियो में वह कहते नजर आ रहे हैं कि किसानों की माँग बिलकुल जायज है और उनकी पार्टी शुरू से इस संघर्ष में साथ हैं।

वह कहते हैं कि शुरू-शुरू में जब किसान बॉर्डर पर आए तो केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस ने उनसे 9 स्टेडियम माँगे। बहुत दबाव बनाया गया ताकि किसान दिल्ली आए और उन्हें पकड़कर स्टेडियम में डाल दिया जाए, लेकिन उनकी सरकार ने परमिशन नहीं दी और इससे आंदोलन को बढ़ने में मदद मिली। इसके बाद से उनकी पार्टी से जुड़े सभी लोग सेवादार की तरह किसानों की सेवा करने में लगे हैं। वह कहते हैं कि वह आज भी प्रोटेस्ट में बतौर सेवादार ही पहुँचे हैं।

ममता बनर्जी ने बंगाल में 2014 में ही लागू कर दिया था एग्रीकल्चर मार्केटिंग एक्ट, अब मोदी सरकार के कृषि कानूनों का कर रहीं विरोध

जहाँ एक तरफ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी केंद्र के कृषि कानूनों का विरोध करते हुए किसानों के आंदोलन के समर्थन की बातें कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने अपने राज्य में इससे मिलता-जुलता एक कानून 2014 में ही पारित कर लिया था। ममता बनर्जी की सरकार ने पश्चिम बंगाल में ‘एग्रीकल्चर मार्केटिंग बिल’ विधानसभा में पास कराया था। अब वो मोदी सरकार के नए कृषि कानूनों का विरोध कर रही हैं।

ममता बनर्जी ने कहा है कि केंद्र की भाजपा सरकार को या तो कृषि कानूनों को वापस ले लेना चाहिए, या फिर इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने डेरेक ओ ब्रायन सहित तृणमूल कॉन्ग्रेस के अपने कुछ वफादार नेताओं को सिंघु सीमा पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के पास भेजा भी और प्रदर्शनकारी नेताओं से बातचीत की। इस दौरान योगेंद्र यादव भी देखे गए। मंगलवार (दिसंबर 8, 2020) को किसान संगठनों ने ‘भारत बंद’ का आह्वान कर रखा है जिसे कई राजनीतिक दलों ने भी समर्थन दिया है।

मोदी सरकार के नए कृषि कानूनों से किसानों को अपने उत्पाद कहीं भी भेजने की छूट मिलती है, साथ ही ‘कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग’ की स्थिति में प्राइवेट कंपनियों की मनमानी पर भी लगाम लगती है। इसमें क्षति की स्थिति में खरीददार पर ही सारी जिम्मेदारी डाल दी गई है और किसान इन सबसे मुक्त है। रुपए के भुगतान के लिए समयसीमा भी दी गई है। बावजूद इसके भ्रम फैला कर किसानों को बरगलाया जा रहा है।

पश्चिम बंगाल सरकार ने 2014 में जो ‘एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केटिंग (रेगुलेशन) बिल’ पास कराया था, दावा किया गया था कि इससे किसानों को अपने उत्पादों के उचित दाम मिलेंगे। ममता बनर्जी सरकार ने कहा था कि बिचौलियों की गतिविधियों को रोकने के लिए ऐसा किया गया है। साथ ही कहा था कि बिचौलियों से निपटने के कड़े कदम उठाए जा रहे हैं और उनसे निपटने में ये कानून सहायक सिद्ध होगा।

आज जब मोदी सरकार यही कर रही है तो ममता बनर्जी सहित पूरे विपक्ष को दिक्कत है। पश्चिम बंगाल के उस कानून के अनुसार, इससे किसानों की पहुँच एक नए बाजार तक होगी और वो सीधे उपयोगकर्ताओं तक अपने उत्पाद बेच सकेंगे। ग्राहकों और किसानों, इसे दोनों के लिए सरकार ने लाभदायक बताया था। साथ ही कहा गया था कि दोनों को ज्यादा भरोसेमंद सिस्टम का हिस्सा बनाना राजकोष के लिए भी अच्छा होगा।

ठीक इसी तरह, NCP के संस्थापक-अध्यक्ष शरद पवार आज ‘किसानों’ के आंदोलन को समर्थन देते हुए कृषि कानूनों पर मोदी सरकार को घेर रहे हैं। शरद पवार यूपीए सरकार में लगातार 10 वर्षों तक केंद्रीय कृषि मंत्री थे और तब वो इन्हीं कृषि सुधारों की पैरवी कर रहे थे, जिनके विरोध में आज वो खड़े हैं। उन्होंने APMC सुधारों को लेकर मुख्यमंत्रियों को पत्र भी लिखा था। उन्होंने तब इन सबके लिए प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी पर जोर दिया था, जबकि आज ये भ्रम फैलाया जा रहा है कि प्राइवेट सेक्टर किसानों की जमीनें ले लेंगे और उन्हें रुपए नहीं देंगे।

बंगाल: BJP नेता कबीर बोस की कार पर हमला, 100 से ज्यादा TMC नेताओं ने घेरा हुआ है घर, सुरक्षाकर्मी को भी पीटा गया

पश्चिम बंगाल में ममता सरकार की पुलिस ने भाजपा से जुड़े लोगों के ख़िलाफ़ अपनी कार्रवाई जारी कर रखी हुई है। सोमवार (दिसंबर 7, 2020) को राज्यसभा सांसद स्वप्न दासगुप्ता ने बताया कि भाजपा प्रवक्ता कबीर शंकर बोस को उनके घर में हाउस अरेस्ट कर लिया गया और टीएमसी के कार्यकर्ता उन्हें घर से बाहर निकलने नहीं दे रहे।

स्वप्नदास गुप्ता ने अपने ट्वीट में लिखा,

“पश्चिम बंगाल के भाजपा प्रवक्ता और वकील कबीर शंकर बोस को उनके सेरामपोर के फ्लैट में बंद करके रखा गया है। टीएमसी पुलिस के साथ मिल कर किसी को घर में उनके घुसने या बाहर निकलने से रोक रही है। उनकी कार को क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। क्या कानून व्यवस्था बंगाल में पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।”

इसके अलावा ऑपइंडिया से बात करते हुए कबीर शंकर ने स्वयं अपनी स्थिति बताई। उन्होंने कहा कि लगभग 100 से ज्यादा टीएमसी कार्यकर्ता  उनके घर के बाहर खड़े हैं और उन्हें अंदर बंद किया हुआ है। वह कहते हैं, “पुलिस बिलकुल मेरे घर के बाहर है। उन्होंने मेरी आवाजाही बंद कर दी है। किसी को अंदर आने नहीं दिया जा रहा है। वह मुझे खाना और दवाई भी नहीं लेने दे रहे। यहाँ कुछ भी हो सकता है। मुझे नहीं पता ये क्या चल रहा है। कल्याण बनर्जी हमसे डर गए हैं।”

TMC के गुंडों ने तोड़ी भाजपा प्रवक्ता कबीर की गाड़ी, सुरक्षाकर्मी को भी मारा

बता दें कि डीएनएन न्यूज ने भाजपा नेता के सुरक्षाकर्मियों से टीएमसी की झड़प की वीडियो साझा की है। ये वीडियो उस समय की है जब भाजपा नेता कबीर शंकर बोस अपनी कार को निकाल रहे थे। इस वीडियो में हम देख सकते हैं कि दो समूह आपस में लड़ रहे हैं और धक्कामुक्की कर रहे हैं। वीडियो में हम भाजपा नेता की कार को क्षतिग्रस्त हुए भी देख सकते हैं और कार के शीशों को भी टूटा हुआ साफ देख सकते हैं।

कबीर कहते हैं,

“जब मैं अपने घर से बाहर निकला तो मैंने कई टीएमसी कार्यकर्ताओं और स्थानीयों को घर के बाहर बैरीकेडिंग किए देखा। टीएमसी पार्षद पप्पू सिंह जो वहाँ मौजूद थे उन्होंने मुझे आगे जाने से रोका। मेरे सुरक्षाकर्मियों ने उनसे विनती की कि हमें बाहर जाना है, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। जब टीएमसी के लोगों ने मेरे आदमी पर हमला किया तो उसे आत्मरक्षा में जवाब देना पड़ा। मेरी कार और मेरे सुरक्षाकर्मी पर हमला हुआ। ऐसे हिंसक हमले भाजपा को नहीं रोक सकते। ”

स्थानीय सांसद कल्याण बनर्जी भी इस बीच टीएमसी समर्थकों के साथ मौके पर पहुँचे। उन्होंने कबीर के आवास के बाहर नारेबाजी की। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने भाजपा नेता को ‘गुंडा’ कहा, जिन्हें स्वयं राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने गुंडागर्दी के लिए भेजा है।

कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाते हुए कहा, “मैं जगदीप धनखड़ को बताना चाहता हूँ कि वो सेरामपोर में शांति नहीं भंग कर सकते हैं। ये सब उनका प्लान था। उनके संबंध अपराधियों से हैं।” पूरी झड़प पर सफाई पेश करते हुए कल्याण बनर्जी ने पास खड़ी महिला पर इशारा करते हुए कहा कि भाजपा नेता और उनके सुरक्षाकर्मी ने उसे प्रताड़ित किया। इतना ही नहीं बनर्जी ने अमित शाह को दंगाई भी कहा।

याद दिला दें कि इससे पहले शनिवार (दिसंबर 5, 2020) को भाजपा की रैली पर टीएमसी के गुंडों ने हमला किया था। एक वीडियो सामने आई थी जिसमें हवा में धुआँ उड़ता दिखा था। भाजपा राष्ट्रीय सचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था कि बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले आम हो गए हैं और ऐसे अटैक ममता बनर्जी की ओर से करवाए जाते हैं।

संसद भवन की नई बिल्डिंग के भूमिपूजन से TMC को आपत्ति, कहा- यह सिकुलर नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 दिसंबर 2020 को नए संसद भवन का भूमि पूजन करेंगे। इसकी घोषणा होने के साथ ही विपक्ष की ’धर्मनिरपेक्ष’ ताकतें इस कदम को ‘गैर-धर्मनिरपेक्ष’ साबित करने की कोशिश में जुट गई है।

टाइम्स नाउ के रिपोर्ट के अनुसार, “टीएमसी नए संसद भवन के निर्माण से पहले भूमि पूजन समारोह का विरोध करती है। यह कदम ‘धर्मनिरपेक्ष नहीं’ है। अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने भी सरकार की ‘प्राथमिकताओं’ पर सवाल उठाया है।” तृणमूल कॉन्ग्रेस के अलावा राशिद अल्वी, पीएल पुनिया जैसे कॉन्ग्रेसी और सीपीआई के नेताओं ने भी संविधान के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों का हवाला देते हुए भूमि पूजन के फैसले की आलोचना की है।

तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता, महुआ मोइत्रा ने भी रविवार (दिसंबर 6, 2020) को सरकार के फैसले के बारे में अपनी नाराजगी व्यक्त की थी। एक ट्वीट में उन्होंने दावा किया कि देश के प्रधानमंत्री को ‘धर्मनिरपेक्ष’ ‘बहु-आस्था’ वाले लोकतंत्र में आधारशिला रखना चाहिए, न कि भूमि पूजन करना चाहिए। खुद को ‘संविधान समर्थक’ बताते हुए मोइत्रा ने इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने इस तरफ इशारा किया इसका मतलब यह नहीं कि वे हिंदू विरोधी हैं।

उनके ट्वीट में लिखा था, “एक धर्मनिरपेक्ष बहु-आस्था वाले लोकतंत्र में पीएम को नए संसद भवन की आधारशिला रखनी चाहिए, न कि ‘भूमि पूजा’ करनी चाहिए। मैं इस तरफ इशारा करने के लिए हिंदू विरोधी नहीं हूँ, केवल संविधान समर्थक हूँ।”

10 दिसंबर को नए संसद भवन का भूमि पूजन

शनिवार (दिसंबर 5, 2020) को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने बताया था, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 दिसंबर को नए संसद भवन का भूमि पूजन करेंगे। अक्टूबर 2022 तक निर्माण कार्य पूरा होने की संभावना है। हमारी स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगाँठ पर नई संसद में सत्र आयोजित किया जाएगा।”

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि लोकसभा सदस्यों के लिए लगभग 888 सीटें होंगी और नए भवन में राज्यसभा सदस्यों के लिए 326 सीटें होंगी। नए भवन में 1224 सदस्यों को एक साथ समायोजित करने की क्षमता होगी। बिड़ला ने नए संसद भवन को आत्मनिर्भर भारत का मंदिर बताया, जो राष्ट्र की विविधता को दर्शाएगा।

संविधान की मूल प्रति में भगवान राम

ऐसा अक्सर देखा गया है कि भारत में लेफ्ट-लिबरल गिरोह हर घटना को पश्चिमी धर्मनिरपेक्षता के नजरिए से विश्लेषण करते हुए भारत की सांस्कृतिक बारीकियों और विरासत को समझने में विफल रहा है। भारत के संविधान में भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण का चित्रण है जो लंका में रावण का वध करने के बाद अयोध्या लौट रहे हैं। तस्वीर मौलिक अधिकारों से संबंधित अध्याय की शुरुआत में दिखाई देती है।

अगस्त में राम मंदिर के भूमि पूजन से पहले कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भगवान राम को नमन करते हुए भारतीय संविधान की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की, जिसमें श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण वनवास से वापस अयोध्या के लिए लौट रहे हैं।

अपने ट्वीट में रविशंकर प्रसाद ने लिखा, “भारत के संविधान की मूल प्रति में मौलिक अधिकारों से जुड़े अध्याय के आरम्भ में एक स्केच है जो मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम, माता सीता और भाई लक्ष्मण के रावण पर विजय प्राप्त कर अयोध्या वापसी का है। आज संविधान की इस मूल भावना को आप सभी से शेयर करने का मन हुआ।”

‘2014 के बाद 450 Km मेट्रो लाइन बनकर तैयार, 1000 Km पर काम चालू’: PM मोदी ने आगरा मेट्रो का किया शिलान्यास

जहाँ एक तरफ विपक्षी दल कई मुद्दों पर विरोध प्रदर्शनों में उलझे हुए हैं, मोदी सरकार का विकास कार्य अनवरत जारी है। सोमवार (दिसंबर 7, 2020) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगरा मेट्रो प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया। आगरा के 15वीं वाहिनी पीएसी परेड ग्राउंड में हुए कार्यक्रम को पीएम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सम्बोधित किया। यूपी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की देखरेख में इसका काम शुरू होने वाला है।

26 लाख की जनसंख्या को लाभान्वित करने वाला आगरा मेट्रो रेल 29.4 किलोमीटर लंबा होगा और इसमें दो कॉरिडोर होंगे। ताज ईस्ट गेट से सिकंदरा लगभग 14 किलोमीटर होगा और 13 मेट्रो स्टेशन होंगे। दूसरा कॉरिडोर आगरा कैंट से कालिंदी विहार तक होगा और इसकी लंबाई 15.4 किलोमीटर होगी। इसमें कुल 14 मेट्रो स्टेशन होंगे। हर साल 60 लाख पर्यटक आगरा आते हैं। अब उन्हें भी सुविधा मिलेगी।

आगरा मेट्रो रेल के कॉरिडोर शहर के चार प्रमुख रेलवे स्टेशनों, बस डिपो, कॉलेजों, प्रमुख बाजारों और पर्यटन स्थलों को आपस में जोड़ेंगे। सुबह 11 बजे से शिलान्यास कार्यक्रम शुरू हुआ, जिसे सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आगरा के पास बहुत पुरातन पहचान तो हमेशा रही है। अब इसमें आधुनिकता का नया आयाम जुड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सैंकड़ों वर्षों का इतिहास सँजोए ये शहर अब 21वीं सदी के साथ कदमताल मिलाने के लिए तैयार हो रहा है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि आगरा में स्मार्ट सुविधाएँ विकसित करने के लिए पहले ही लगभग 1,000 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है और पिछले साल जिस कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का शिलान्यास करने का उन्हें मौका मिला था, वो भी अब बन कर तैयार है। उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2014 के बाद के 6 वर्षों में देश में 450 किमी से ज्यादा मेट्रो लाइन देशभर में ऑपरेशनल हैं और लगभग 1000 किमी मेट्रो लाइन पर तेजी से काम चल रहा है।

बकौल पीएम मोदी, जब आप साहस और समर्पण के साथ आगे बढ़ते हैं, तो कोई भी बाधा आपको रोक नही सकती। भारत का सामान्य युवा, भारत के छोटे शहर आज यही साहस और समर्पण दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक सुविधाएँ और कनेक्टीविटी मिलने से पश्चिमी यूपी का ये सामर्थ्य और बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि देश का पहला रैपिड रेल ट्रांसपोर्ट सिस्टम मेरठ से दिल्ली के बीच बन रहा है। पीएम मोदी ने कहा:

“नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन प्रोजेक्ट के तहत 100 लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च करने की तैयारी है। ‘Multi-model Connectivity Infrastructure Master Plan’ पर भी काम किया जा रहा है। कोशिश है कि देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए पूरी दुनिया से निवेश आकर्षित किया जाए। यहाँ की भूमि और किसानों में अपार सामर्थ्य है। पशुधन के मामले में भी ये क्षेत्र देश मे अग्रणी है। ऐसे में यहाँ डेयरी और फ़ूड प्रोसेसिंग से जुड़े उद्योगों के लिए बहुत संभावनाएँ हैं। दो-तीन दिन पहले तेलंगाना में, हैदराबाद में गरीब और मध्यम वर्ग ने सरकार के प्रयासों को अभूतपूर्व आशीर्वाद दिया है। आपका साथ और आपका समर्थन ही मेरी प्रेरणा शक्ति है। देशवासियों की छोटी से छोटी खुशी, मुझे नए-नए काम करने की हिम्मत देती है।”

पीएम ने जनता को आश्वस्त किया कि दिल्ली-मेरठ के बीच 14 लेन का एक्सप्रेस-वे भी जल्द ही इस क्षेत्र के लोगों को सेवा देने लगेगा। उन्होंने कहा कि देश के इंफ्रा सेक्टर की एक बड़ी दिक्कत हमेशा से ये रही थी कि नए प्रोजेक्ट्स की घोषणा तो हो जाती थी लेकिन उसके लिए पैसा कहाँ से आएगा, इस पर बहुत ध्यान नहीं दिया जाता था। उन्होंने बताया कि राजग सरकार ने नई परियोजनाओं की शुरुआत करने के साथ ही, उसके लिए आवश्यक धनराशि के इंतजाम पर ध्यान दिया है।

पीएम ने बताया कि अब एक संपूर्णता की सोच से रिफॉर्म्स किए जा रहे हैं। शहरों के विकास के लिए सरकार ने 4 स्तरों पर काम किया है। बीते समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान हो, जीवन ज्यादा सुगम हो, ज्यादा से ज्यादा निवेश हो और आधुनिक टेक्नॉलॉजी का उपयोग अधिक हो। उन्होंने कहा कि रियल एस्टेट सेक्टर की क्या स्थिति थी, इससे हम भली-भाँति परिचित हैं। घर बनाने वालों और घर खरीदारों के बीच भरोसे की एक खाई आ चुकी थी। कुछ गलत नीयत वाले लोगों ने पूरे रियल एस्टेट को बदनाम करके रखा था।

उन्होंने आगे बताया कि इस परेशानी को दूर करने के लिए RERA का कानून लाया गया। हाल में आई कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस कानून के बाद मिडिल क्लास के घर तेज़ी से पूरे होने शुरू हुए हैं। अमृत मिशन के तहत देश के सैकड़ों शहरों में पानी, सीवर जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड किया जा रहा है। शहरों में सार्वजनिक टॉयलेट्स की बेहतर सुविधाएँ हों, वेस्ट मैनेजमेंट की आधुनिक व्यवस्था हो, इसके लिए स्थानीय निकायों को मदद दी जा रही है।

किसान आंदोलन में #नहीं_चाहिए_भाजपा का ट्रेंड: अखिलेश यादव के घर के बाहर पुलिस, बैरिकेडिंग तोड़ रहे सपाई गुंडे

किसान आंदोलन का राजनीतिकरण करने से इस समय कोई विपक्षी पार्टी नहीं चूक रही। दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेसृ मामले को सुलझाने की बजाय केंद्र सरकार की आलोचना कर रही है और उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने भी किसानों को अपना समर्थन दिखाने के लिए एक यात्रा निकालने का ऐलान किया है। 

समाजवादी पार्टी के इस ऐलान के बाद यूपी पुलिस ने लखनऊ से लेकर कन्नौज तक में हर कोने पर सुरक्षा बढ़ा दी है। वहीं अखिलेश यादव के घर के बाहर घेरा कर दिया गया है, जिसे देखकर सपा कार्यकर्ता लखनऊ में जगह-जगह प्रदर्शन कर रहे हैं और पुलिस की बैरिकेडिंग को भी तोड़ रहे हैं।

लखनऊ के विक्रमादित्य रोड पर स्थित समाजवादी पार्टी के कार्यालय को छावनी में बदल दिया गया है। हर जगह पुलिस के जवान खड़े हैं। अखिलेश यादव के घर के बाहर बैरिकेडिंग है। पुलिस ने किसी को भी यहाँ आने-जाने से मना किया है। 

परिस्थितियों को संभालने के लिए पुलिस ने अपने पास वाटर कैनन भी रखे हैं। इधर, समाजवादी पार्टी के एमएलसी राजपाल कश्यप और आशू मलिक को हिरासत में लिया गया है। दोनों नेताओं पर पुलिस से धक्कामुक्की का आरोप है। दोनों कार्यालय बंद होने के बावजूद उसमें जाने का प्रयास कर रहे थे।

कश्यप ने मीडिया से बात करते हुए सवाल किया है कि आखिर पुलिस उन्हें क्यों रोक रही है? क्यों अखिलेश यादव को रोका जा रहा है? उनका कहना है कि प्रदेश सरकार अखिलेश यादव से घबरा रही है और किसानों की आवाज उठाने पर उनके साथ अन्याय हो रहा है।

यहाँ गौरतलब हो कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आज सुबह किसानों के समर्थन में जनता को यात्रा में शामिल करने के लिए अपने ट्वीट में लिखा था, “कदम-कदम बढ़ाए जा, दंभ का सर झुकाए जा, ये जंग है ज़मीन की, अपनी जान भी लगाए जा… ‘किसान-यात्रा’ में शामिल हों! #नहीं_चाहिए_भाजपा।”

इस ट्वीट के बाद और पुलिस कार्रवाई देखकर सोशल मीडिया पर कई लोग इस पर अपनी राय रख रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि समाजवादियों और किसान में कोई समानता नहीं है, क्योंकि हजारों करोड़ की सरकारी संपत्ति और सरकारी नौकरियों की बंदरबाँट करने वाले किसान नहीं हो सकते। गुंडाराज चलाने वाले किसान कैसे हो सकते हैं? किसानों के नाम पर उनकी जमीन और गौधन लूटने वाली पार्टी और नेता सिर्फ माफिया हो सकते हैं।

बता दें कि उत्तर प्रदेश में साल 2022 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी सत्ता में आने के लिए योगी सरकार की छवि बिगाड़ने में लगातार प्रयासरत है। यही कारण है कि वह अपने ट्वीट में किसानों के समर्थन के साथ #नहीं_चाहिए_भाजपा का हैशटैग लगा रहे हैं।

‘बाबरी मस्जिद… भगवान का घर तोड़ना पाप’ – शब्दों से खेल रही स्वरा भास्कर की हिंदी कमजोर या है पाखंड?

6 दिसंबर का दिन हिंदुओं के लिए शौर्य दिवस और वामपंथियों के लिए ब्लैक डे होता है। हिंदुओं के लिए शौर्य दिवस इसलिए क्योंकि साल 1992 में 6 दिसंबर को ही कारसेवकों ने बिना किसी की परवाह किए राम मंदिर के लिए एक रास्ता प्रशस्त किया था और वामपंथियों के लिए ब्लैक डे इसलिए, क्योंकि वह चाह कर भी इन कारसेवकों को नहीं रोक पाए थे।

6 दिसंबर 1992 का ही परिणाम था कि 5 अगस्त 2020 को राम मंदिर का भूमिपूजन संपन्न हो पाया। यह दिन स्मृतियों से भुला पाना असंभव है। न जाने कितने हिंदू हृदय सम्राट बलिदान हुए, तब जाकर एक सपने का असली नक्शा इस साल तैयार हुआ।

इस साल भूमिपूजन के बाद वामपंथी 6 दिसंबर पर पहले से ज्यादा शोक मनाते दिखे, लेकिन बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर का विलाप एक अलग ही स्तर का था। उनकी जानकारी के मुताबिक बाबरी मस्जिद भगवान का घर होता है और कारसेवकों ने इसे तोड़ कर पाप किया।

स्वरा ने 6 दिसंबर के अवसर पर अपने ट्वीट में लिखा, “चाहे जितनी लीपा पोती कर लो, भगवान का घर… किसी के भी भगवान का घर तोड़ना पाप होता है।”

स्वरा भास्कर का यह ट्वीट किसके लिए है? ये एक बड़ा सवाल होना चाहिए, क्योंकि सदियों पहले भगवान का घर तोड़ा गया, इस बात में कोई संदेह नहीं है। लेकिन, जब उनका ट्वीट भगवान राम के संदर्भ में नहीं है… तो वह किस भगवान की बात कर रही हैं और किस भगवान के घर के लिए अपना रोना रो रही हैं। बाबरी मस्जिद के लिए? जिसकी नींव ही सदियों पहले राम मंदिर के मलबे पर रखी गई थी। 

स्वरा भास्कर की इसी प्रकार की अज्ञानता के कारण पिछले दिनों रुबिका लियाकत ने उन्हें अपने शो में जम कर लताड़ा था और अब उनकी ऐसी बेवकूफियों के कारण उनका दोबारा मजाक उड़ने लगा है। स्वरा भास्कर, अपने चंद फॉलोवर्स को बरकरार रखने के लिए ये जानती हैं कि उन्हें कैसे अपनी बातें बनानी हैं। लेकिन क्या उन्हें बात का अंदाजा है कि वह इस प्रक्रिया में मजहब का घालमेल कर रही हैं।

इस्लाम में मूर्ति पूजन की कोई जगह नहीं है, तो केवल इबादत करने के लिए बनाई गई इमारत भगवान का घर कैसे हो सकती है?

एक ऐसी जगह, जिसके ढाँचे और उसकी भूमि पर विवाद रहा हो और दूसरा समुदाय सबूतों के साथ उस पर अधिकार प्राप्त कर चुका हो, उस पर घड़ियाली आँसू क्यों? मस्जिद और मंदिर जैसे शब्दों का घालमेल कर ट्वीट क्यों?

सेकुलरिज्म के नाम पर बात मस्जिद की लेकिन ‘भगवान’ शब्द का प्रयोग करना स्वरा भास्कर को उचित लग रहा होगा, लेकिन क्या उनके उन फॉलोवर्स को यही बात पचेगी जो, दूसरे धर्म के लोगों को काफिर कहते हैं, काफिरों का सर तन से जुदा करने की कसमें खाते हैं?

शब्दों के उलटफेर से देश के हिंदू को लंबे समय तक भ्रमित किया गया। स्वरा जैसों का प्रयास आज भी वही है कि राम मंदिर बनने के बाद सेकुलर हिंदू उसमें जाए और अपने पूर्वजों के बलिदान के लिए मंदिर में बैठकर अल्लाह से माफी माँगे।

पाखंड की कोई परिभाषा नहीं होती। स्वरा भास्कर इस बात को हर बात सिद्ध कर देती हैं। वह बाबरी मस्जिद पर विलाप कर रही हैं, लेकिन हैरानी इस बात की है कि भगवान और भगवान का घर लिखने वाली कभी उन सैंकड़ों मस्जिद पर अपना ज्ञान नहीं देती हैं, जिन्हें तैयार करने के लिए भारत की विरासत और संस्कृति पर आघात हुआ।

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया दावे करता है कि एक दिन बाबरी का उदय जरूर होगा। इधर स्वरा जैसे लोग हिंदुओं को एहसास दिलाते हैं कि उन्होंने बाबरी मस्जिद को गिरा कर पाप किया। अगर ये सारी चीजें एक दूसरे से जुड़ी नहीं हैं तो क्या है! क्या देश के सेकुलर हिंदू के मन में अपने धर्म के प्रति घृणा भरने का काम नहीं हो रहा है? हिंदुओं को हिंसक दिखाने की कोशिश नहीं चल रही है?

पिछले कुछ सालों में हमें हिंदुओं का कट्टर रूप देखने को जरूर मिला है, लेकिन ये कट्टर चेहरा इसलिए बेहतर है क्योंकि देश में स्वरा जैसे लोग मौजूद हैं, जो अपनी अज्ञानता को सेकुलरिज्म की चादर से ढक रहे हैं और इसका शिकार हो रहा है सामान्य हिंदू।

कम से कम कथित कट्टर हिंदू में गलत के ख़िलाफ़ विरोध करने की क्षमता तो है। उसके पास अपने हक के लिए बोलने के लिए बुलंद आवाज तो है। कॉन्ग्रेस काल में बढ़े हिंदू के पास इनमें से कुछ नहीं था। आज का हिंदू स्वरा भास्कर की भाँति कम से कम दुनिया को बरगला नहीं रहा।

जब समय आने पर देश के मुस्लिम ‘बाबरी याद रहेगी’ का हैशटैग चला सकते हैं तो आखिर हिंदू उस प्रहार को क्यों भूलें जिसमें न केवल उनके मंदिर का विध्वंस किया गया बल्कि पूरे हिंदू धर्म को लक्षित करके हिंदुओं को निशाना बनाया गया। 6 दिंसबर 1992 को केवल चंद हिंदुओं का ज्वार था, जो खुद के प्राण को दाँव पर लगाकर भगवान को छत दिलाने गए थे, उनका उद्देश्य मजहब को निशाना बनाने का नहीं था, अपनी पहचान वापस पाने था।