किसान संगठनों ने मंगलवार (दिसंबर 8, 2020) को भारत बंद का आह्वान कर रखा है। 12 दिन से किसान दिल्ली की सीमा पर डटे हुए हैं। केंद्र सरकार के साथ किसान नेताओं की 5 दौर की बातचीत बेनतीजा रही है। अब इस पूरे मामले पर पंजाब सरकार का दोहरा चेहरा भी सामने आ गया है।
पंजाब में कॉन्ग्रेस की सरकार है। वहाँ दो प्रमुख दलों के बीच अपने आप को किसानों का बड़ा हितैषी बनाने की होड़ लगी हुई है। दूसरी पार्टी है अकाली दल, जो इसी कृषि कानून के खिलाफ केंद्र की एनडीए सरकार से बाहर हो चुकी है। लेकिन अब इन दोनों ही दलों की पोल खुलती नजर आ रही है।
Had the Akalis not cancelled the deal, at least 1.5 lakh farmers of Punjab would have tripled their incomes! pic.twitter.com/aLOWMlGcPQ
— Capt.Amarinder Singh (@capt_amarinder) July 27, 2016
दरअसल पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का 2016 का एक ट्वीट वायरल हो रहा है। जिसमें उन्होंने अकाली दल पर निशाना साधा था। बता दें कि अमरिंदर सिंह ने 27 जुलाई, 2016 को एक ट्वीट किया था। इसमें उन्होंने लिखा था कि उन्होंने 3000 करोड़ रुपए के रिटेल एग्री-बिजनेस प्रोजेक्ट की शुरुआत के लिए रिलायंस ग्रुप के साथ समझौता किया था। इस समझौते से 3000 गाँवों में कम से कम 1.5 लाख किसानों की आय को तीन गुना करने में मदद मिलती, लेकिन अकाली दल ने इसे रद्द कर दिया।
इस ट्वीट में कैप्टन ने जिस सौदे के बारे में लिखा है उसे भी जान लीजिए। दरअसल मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस रिटेल ने कृषि और रिटेल प्रोजेक्ट के लिए पंजाब सरकार के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किया था, जिसमें 500 करोड़ रुपए का शुरुआती निवेश का प्रावधान किया गया था। बाद में इसे 3,000 करोड़ रुपए तक बढ़ाया जाना था। लेकिन अकाली दल की सरकार ने इसे खारिज कर दिया था।
गौरतलब है कि पंजाब के सीएम किसानों के आंदोलन को लेकर अमित शाह से भी मिले थे। उन्होंने इस आंदोलन को जल्दी समाप्त कराने की बात कही थी। इसको लेकर उन्होंने कहा था कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो देश की सुरक्षा को इससे खतरा होगा।
अकाली दल और कॉन्ग्रेस दोनों का दावा है कि नए कानूनों से कृषि में निजी कंपनियों और कॉर्पोरेट यूनिट्स का प्रवेश हो गया जिससे किसानों के लिए मुश्किल शुरू हो जाएगी। कॉन्ट्रैक्ट खेती के प्रावधानों की वजह से किसानों से उनकी जमीन का मालिकाना हक छिन जाएगा।
दोनों ही दल केंद्र सरकार पर इस बात को लेकर निशाना साध रहे है कि अडानी-अंबानी जैसे पूँजीपतियों को लाभ पहुँचाने के लिए सरकार ने यह कानून बनाया है। हालाँकि इस ट्वीट से स्पष्ट हो जाता है कि किसान आंदोलन के बीच कॉन्ग्रेस और अकाली दल जो राजनीति कर रहे हैं वह केवल और केवल वोट बैंक को साधने के लिए है।
किसान केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए नए कृषि कानून का विरोध कर रहे हैं। इस बीच भाजपा नेता और आर्थिक मामलों के प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने बताया कि इस आंदोलन को कमीशन एजेंटों (आढ़तियों) ने उकसाया है, जिन्हें सालाना 6000 करोड़ रुपए का कमीशन छिनने का डर है।
रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा ने कॉन्ग्रेस और कमीशन एजेंटों पर अपने फायदे के उद्देश्य से किसानों को भड़काने का आरोप लगाया है। गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा कि यह लंबे समय से चली आ रही माँग है कि सरकार किसानों के लिए विकल्प बाजार बनाए और कृषि क्षेत्र में क्रांति लाए। उन्होंने दोहराया कि नए कृषि बिलों की शुरूआत उस दिशा में एक कदम है। भाजपा नेता ने कहा कि सरकार के प्रयासों को विपक्षी दलों और कमीशन एजेंटों के एक प्रेरित अभियान द्वारा बिगाड़ने की कोशिश हो रही है।
उन्होंने कहा कि पंजाब में लगभग 25,000 कमीशन एजेंट हैं, जो 8.5% की कटौती करके 6000 करोड़ कमाएँगे। अग्रवाल ने कहा कि नए कृषि कानूनों ने बाजारों पर कमीशन एजेंटों के नियंत्रण को खतरे में डाल दिया है। इसलिए वे कॉन्ग्रेस पार्टी के समर्थन से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और मंडी प्रणाली के ‘उन्मूलन’ के बारे में अफवाहें फैला रहे हैं।
कृषि कानूनों को लाने का उद्देश्य कमीशन एजेंटों के एकाधिकार को समाप्त करना था
यह पूछे जाने पर कि सरकार एमएसपी के बारे में किसानों को लिखित में आश्वासन क्यों नहीं देती, उन्होंने स्पष्ट किया कि नए कृषि कानूनों का एमएसपी से कोई संबंध नहीं है। गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने इस बात पर जोर दिया कि मंडी प्रणाली और एमएसपी वैसी ही रहेगी, जैसा कि अभी तक था। इस बात को केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार स्पष्ट किया है।
उन्होंने कहा कि कृषि कानून विशेष रूप से APMC (कृषि उपज बाजार समिति) में कमीशन एजेंटों के एकाधिकार को समाप्त करने के लिए है। उन्होंने आगे कहा कि एजेंट किसानों को स्थानीय बाजार में अपनी उपज बेचने के लिए मजबूर करते हैं, क्योंकि इससे उन्हें 8.5% का कमीशन मिलता है। जबकि नए कानून से जहाँ लाभ मिलेगा, किसान वहीं फसल बेच सकेंगे।
गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने MSP के बारे में भ्रम को दूर किया
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि इस सरकार ने पिछली सरकारों द्वारा 6% की तुलना में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कुल कृषि उपज का 15% खरीदने का फैसला किया है। उन्होंने टिप्पणी की, “एमएसपी के बारे में अफवाह फैलाने वालों को यह समझना चाहिए कि केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करती है, लेकिन राज्य सरकारों को उस कीमत पर फसलों की खरीद करनी होती है। राज्य सरकारें आर्थिक रूप से इतनी मजबूत नहीं हैं कि 100% खरीद वो कर पाएँ और न ही उनके पास भंडारण की उचित क्षमता है।”
भाजपा नेता ने प्रदर्शन के समय पर उठाया सवाल, निजी निवेश पर दिया जोर
उन्होंने नए सिरे से विरोध-प्रदर्शन के समय पर भी सवाल उठाया। अग्रवाल ने कहा कि कई रिपोर्ट की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए और किसान संगठनों से बातचीत के बाद कृषि कानूनों से जुड़े ऑर्डिनेंस जून में आए थे। किसी को समस्या थी तो जून में भी बात उठा सकते थे। अब नवंबर के अंत में आंदोलन हो रहा है। इससे पता चलता है कि किसानों को भड़काया गया और गुमराह किया जा रहा है। भाजपा प्रवक्ता ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में वेयरहाउसिंग और कोल्ड स्टोरेज सुविधाएँ कम हैं, लेकिन विशेष क्षेत्र में निजी निवेश से किसानों को लाभ होगा क्योंकि देश में अनाज सरप्लस है।
नारीवाद का चेहरा वर्तमान में कितना दोगला हो चुका है, इसका नमूना पिछले दिनों जायरा वसीम और सना खान जैसी लड़कियों के ऐलान के बाद हर जगह देखने को मिला। मजहब की दुहाई देकर करियर की क़ुर्बानी देने वाली इन लड़कियों के फैसले के ख़िलाफ़ किसी नारीवादी ने आवाज बुलंद नहीं की।
कुछ दिन पहले एक और मुस्लिम महिला ने कामयाबी के शिखर पर पहुँचने के बाद खुद को उसी जगह धकेल दिया, जहाँ से वो ऊपर उठी थी। इस लड़की का नाम है हलीमा अदन। हलीमा, अमेरिका जैसे विकसित देश में रहते हुए खुद को इस्लाम से परे नहीं समझ पाईं। उसके शब्द अब भी मन में सवाल उठाते हैं कि आखिर अमेरिका में रहने वाली एक लड़की के लिए जींस पहनना किसी के धार्मिक भावना को आहत करना कैसे हो सकता है।
अब खबर आई है कि पाकिस्तान की अदाकारा जैनब जमील ने भी इस्लाम के लिए खुशी-खुशी अपने करियर की कुर्बानी देकर ऐलान किया है कि अब वह कुरान, हदीस, दीन और इस्लाम को समझेंगी, इसके लिए अल्लाह ने ही उन्हें चुना है।
जायरा वसीम, सना खान, हलीमा अदन और जैनब जमील। ये कोई अंतिम नाम नहीं हैं जिन्होंने मजहब के लिए खुद के पूरे जीवन के साथ खिलवाड़ किया। इस सूची में अभी और नाम शामिल होंगे और इनसे पहले भी बहुत से नाम इस लिस्ट से जुड़ चुके होंगे।
सवाल यह है कि जब इस्लाम के प्रति मोह इतना अधिक है तो फिर समाज में अन्य लड़कियों के लिए आशा जगाने का मतलब क्या था! बॉलीवुड इंडस्ट्री से लेकर हर इंडस्ट्री में मुस्लिम लड़कियों को बढ़-चढ़कर इसलिए आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि समाज में सकारात्मक संदेश जाए और समुदाय की लड़कियों को भी खुल कर जीने का मौका मिले। लेकिन उक्त लड़कियों के उदाहरण जिन्हें वैश्विक स्तर पर दुनिया ने उन्हें उनकी पहचान के साथ कबूल किया। उन्हें नाम दिया। शोहरत दी। फिर एक दिन उसी पहचान का इस्तेमाल कर वह इस्लाम की दुहाई देने लगती हैं।
मजहब के नाम पर इन लड़कियों की ‘घर वापसी’ समुदाय की अन्य लड़कियों के लिए किसी नासूर से कम साबित नहीं होगी। वह लड़कियाँ जो अपने परिवेश को हराकर ऊँचाइयों पर जाने के सपने देखती हैं, उन्हें शायद किसी सना या जायरा का उदाहरण देकर ये कहकर रोक दिया जाए कि वह लोग भी जीवन में आगे तक गईं, लेकिन लौटना इस्लाम के पास ही पड़ा।
विचार करिए, उस समय लड़की की मनोस्थिति क्या होगी? लड़की या तो ऐसे उदाहरणों को कोसते हुए जीवन गुजार देगी या हो सकता है कि इनको प्रेरणा मान कर पहले ही खुद को मजहब के नाम पर कुर्बान कर दे।
पिछले दिनों इंडियन आइडल में नजर आई बिहार की सितारा परवीन ने अपने संघर्ष को जब दुनिया के सामने बताया तो सबकी आँखें भीग गईं। उस हिजाब पहनने वाली प्रतिभावान लड़की ने साफ कहा कि उनके समुदाय में गायकी की इजाजत नहीं मिलती। वह छुप-छुप कर इस मंच तक पहुँची है।
सितारा को बतौर उदाहरण देने का मकसद आज यही है कि हम ये समझ सकें कि टैलेंट किसी धर्म, जाति, वर्ग को देख कर शरीर में प्रवेश नहीं करता। लेकिन हमारा समाज उसे आगे बढ़ाने में मजहब को बीच में जरूर ले आता है।
एक ऐसा समुदाय जिसकी महिलाएँ आज भी खुली हवा में बाल लहराने के कारण अपने घरों से दुत्कार दी जाती हैं, वहाँ सोचिए कि बिना कोई टैलेंट विकसित किए लड़कियाँ कैसे आगे बढ़ पाएँगीं।
अमेरिका में रहने वाली एक ईरानी लड़की का नाम मसीह अलीनेज़ाद है। मसीह पिछले कई सालों से अपने घर नहीं जा पाई हैं। उनके पिता ने उनसे बात करना भी बंद कर दिया है। मसीह की गलती बस ये थी कि वह अपने समुदाय की लड़कियों की एक बुलंद आवाज बनना चाहती थीं और इसके लिए उन्होंने एक अभियान शुरू कर दिया था। उन्होंने गाड़ी का स्टेयरिंग पकड़कर बिना हिजाब के फोटो सोशल मीडिया पर डाली थी जिसे देख कई महिलाएँ प्रेरित हुईं और उनसे जुड़ती गईं। अपनी किताब ‘द विंड इन माय हेयर’ में अलीनेजाद ने लिखा है कि वो मूक लोगों की आवाज़ बनना चाहतीं थी, लेकिन इरान में रहते हुए वो हमेशा ही मूक रहीं।
इस्लामी देशों में मजहबी कट्टरता किस चरम पर है इसे माप पाना असंभव है। लेकिन मसीह जैसी महिलाओं की स्थिति देखकर इसका अंदाजा जरूर लगाया जा सकता है।
हम नारीवाद के नाम पुरुषों से नफरत करना आज सीख चुके हैं। उन पर इल्जाम लगाना, उनकी सोच को दुत्कारना हमारे नारीवाद का मेन ऑब्जेक्टिव है। लेकिन हम चुप हैं जायरा वसीम और सना खान जैसी लड़कियों पर, जो मुस्लिम महिलाओं के उत्थान की जगह उनके दमन का कारण बनेंगी। इनकी ख्याति न जाने की कितनी लड़कियों के संघर्षों पर विराम लगा देगी।
ये एक बड़ा सवाल है कि जायरा वसीम और सना खान का इस्लाम के प्रति मोह बॉलीवुड की स्वरा भास्कर और सोनम कपूर जैसों के लिए नारीवाद पर आघात क्यों नहीं है? ये तो वहीं लड़कियाँ हैं जिन्होंने थोड़ी सी पहचान पाते ही सबसे पहले खुद की धार्मिक पहचान को दाव पर लगाकर लिबरल छवि कायम की और लगातार अपने धर्म के ख़िलाफ़ बोलती रहीं।
फिर आखिर कैसे इन्हें इनके साथी मजहब की खाईं में जाते हुए प्रोग्रेसिव लग सकते हैं? और उनकी इच्छा ‘माय लाइफ माय रूल्स’ का हिस्सा लग सकती है? इनसे आखिर क्यों एक भी बार ये नहीं पूछा जाता कि जब जाना वापस वहीं था, तो यहाँ तक का रास्ता क्यों तय किया? और अगर मन में उड़ने की इच्छा थी तो अब उन इच्छाओं को मारने का कारण क्या है?
आज नैतिकता के आधार पर देखें तो सना खान और जायरा वसीम से अधिक प्रेरणादायक सनी लियोन का जीवन लगता है। कम से कम सनी लियोन ने लड़कियों को सकारात्मक संदेश तो दिया। उन्होंने एक ऐसे दलदल से निकालकर खुद को उस सोसायटी में ढाला जहाँ हर किसी के लिए वो पॉर्न स्टार थीं, लेकिन अब वह एक सामान्य हिरोइनों की भाँति जीवन जी रही हैं। साथ ही अपने परिवार के साथ खुश भी है। जीवन में सही व सकारात्मक बदलाव इसे ही कहा जाता है। सना खान जैसी मशहूर हिरोइन के जीवन में आया बदलाव बस इस बात का प्रमाण है कि मुस्लिम महिलाओं की कामयाबी के समांतर एक ऐसा समाज भी चल रहा है जो उन्हें खींचकर पीछे ढकेलने में आतुर है, ताकि उनकी जमीन बची रहे।
सना खान के करियर को यदि देखें तो मालूम होगा कि वह इस इंडस्ट्री की सबसे बोल्ड हिरोइनों में से एक थीं। लेकिन आज मुफ्ती अनस से उनके निकाह के बाद उनकी हर तस्वीर हिजाब में होती है। और यूट्यूब के कमेंट देखने पर मालूम होता है कि उनके समुदाय के लोग उन्हें इस अवतार में देखकर कितने खुश हैं। कई कट्टरपंथी सना को अन्य लड़कियों के लिए प्रेरणा बताते हैं और समझाते हैं कि शुक्र है उनको समय रहते समझ आ गई। कुछ लोग मुफ्ती अनस को बड़े दिल वाला कहते हैं जो उसने एक ऐसी लड़की को स्वीकारा जिसने बीते समय में कई काम इस्लाम के ख़िलाफ़ किए।
प्रश्न है कि नारीवाद का झंडा बुलंद करने वालों को सना, जायरा वसीम, हलीमा के फैसलों में पितृसत्ता क्यों नहीं दिखती। समय के साथ यदि सना को उनकी बोल्डनेस, जायरा को उनकी एक्टिंग खुदा की नफरमानी लग भी रही थी तो वह सामान्य जिंदगी की ओर रुख कर सकती थीं। लेकिन नहीं। अन्य लड़कियों को इस्लाम के प्रति प्रभावित करने के लिए उन्होंने उस हिजाब से खुद को ढक लिया, जिससे कई लड़कियाँ निकलने के लिए लगातार कोशिशें कर रही हैं।
जायरा वसीम को साल 2018 में इमरजिंग ब्यूटी ऑफ द ईयर का अवॉर्ड मिला था। शाहरुख खान ने उन्हें लेकर भविष्यवाणी की थी कि वह भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे बड़ी हिरोइन बनेंगी। लेकिन उन्हीं जायरा वसीम ने साल 2019 आते-आते ये कह दिया कि अब उन्हें बॉलीवुड में करियर नहीं बनाना, क्योंकि एक्टिंग उन्हें उनके मजहब से दूर कर रहा है।
जायरा जैसी लड़कियों के ये वाक्य कितनी पीड़ा देते हैं, इसका अंदाजा उस कश्मीरी महिला कलाकार से समझने की जरूरत है जिसे कट्टरपंथ के कारण अपनी कला जलानी पड़ी थी, जिसने जायरा के एक्टिंग छोड़ने के ऐलान के बाद एक साक्षात्कार में अपनी वेदना बताई और ये समझाया कि एक मॉडल बनने के बाद उन्हें क्या फर्क नजर आया।
बकौल सैयद रुहानी
“जब मैंने मॉडलिंग शुरू की, तो मैंने देखा कैसे लोग मुझे ट्रीट कर रहे हैं कि मुझे अच्छा लग रहा है, जबकि दूसरी ओर मदरसे में मुझे मारा जाता था, मुझे गाली दी जाती थी, मेरे साथ गलत बर्ताव होता था, और मुझे बंधक बनाकर रखा जाता था, सिर्फ़ इसलिए ताकि मैं अल्लाह के बारे में पढ़-सीख सकूँ।“
हम अपने घरों में बैठकर सोचते हैं कि ऐसी बॉलीवुड में आने वाली महिलाएँ खुले विचारों की होती होंगी। वह अपने आस-पास की लड़कियों को सपने देखने के लिए प्रेरित करती होंगी। लेकिन हकीकत क्या है? यह जायरा वसीम और सना खान जैसी लड़कियों को देखकर मालूम चलता है, जिन पर उनके समुदाय का प्रभाव किसी भी उम्र में किसी भी पड़ाव में हावी हो जाता है।
अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल जंगी मैदान की तरह नजर आने लगा है। राज्य से एक और बीजेपी कार्यकर्ता के मारे जाने की खबर है। आरोप है कि सत्ताधारी टीएमसी के संरक्षण में पुलिस ने इस बर्बरता को अंजाम दिया है।
घटना सिलीगुड़ी के तीनबत्ती की है। सोमवार (दिसंबर 7, 2020) को बीजेपी कार्यकर्ता राज्य सचिवालय की शाखा ‘उत्तरकन्या’ की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहे थे। इस दौरान दो जगहों पर उनकी पुलिस से झड़प हुई। बीजेपी का आरोप है कि हमले में उसके कार्यकर्ता उलेन रॉय की मौत हो गई।
बता दें कि भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) ने बंगाल सरकार के खिलाफ ‘उत्तरकन्या अभिजन’ के तहत दो स्थानों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए थे। भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद तेजस्वी सूर्या ने बंगाल पुलिस की बर्बरता की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा है, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान कई बीजेपी कार्यकर्ता जख्मी हो गए। बंगाल में लोकतंत्र की हत्या हो रही है।
भाजयुमो ने आरोप लगाया कि उत्तर बंगाल के लोगों से किए गए वादों को सरकार ने पूरा नहीं किया और सरकार द्वारा शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं का लाभ आम आदमी तक नहीं पहुँचा। भाजपा की युवा शाखा उत्तर बंगाल में ममता बनर्जी सरकार के कथित कुशासन, बेरोजगारी और उपेक्षा के खिलाफ मार्च निकाल रही थी। पश्चिम बंगाल के भाजपा अध्यक्ष और सांसद दिलीप घोष और सयंतन बसु सिलीगुड़ी के फूलबाड़ी जंक्शन में एक मार्च का नेतृत्व कर रहे थे। वहीं अन्य मार्च का नेतृत्व भाजपा के बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय और पार्टी नेता मुकुल रॉय कर रहे थे।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया और आँसू गैस के गोले छोड़े। फुलबारी बाजार में एक रैली का नेतृत्व करने वाले बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि पश्चिम बंगाल में ‘बीजेपी के उभार’ से डरकर सरकार दमनकारी नीति अपना रही है।
Ulen Roy, BJP worker, died due to police lathicharge. He was demanding development of North Bengal. Pishi is the home minister of Bengal and is directly responsible for his death.
It is obvious that Pishi resents North Bengal and is targeting those opposed to TMC’s injustice! pic.twitter.com/w0RNpDd7eT
मार्च के दौरान दोपहर करीब दो बजे सिलीगुड़ी के तीनबत्ती पर भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने मोर्चाबंदी करने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं में झड़प हो गई। स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए भारी पुलिस बल को बुलाया गया। इस झड़प में कई पत्रकार, भाजपा कार्यकर्ता और पुलिस के जवान घायल हो गए हैं। वहीं एक बीजेपी नेता की मौत भी हो गई है। पुलिस ने क्षेत्र में धारा 144 लागू करने की घोषणा कर दी।
WB police are a disgrace to India’s famed police force.
They have forgotten their constitutional duties.
They should remove their uniforms & join TMC goons.
The brutal suppression of democratic dissent must be condemned by every responsible Indian.
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद और भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या ने कहा, “पुलिस ने भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं पर आँसू गैस के गोले और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। उन्हें यूनिफॉर्म उतार कर टीएमसी गुंडों को ज्वाइन कर लेना चाहिए। भाजपा के कई कार्यकर्ता उनके शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल हो गए। पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र की हत्या हो रही है।” उन्होंने एक अन्य ट्वीट में बताया कि ममता पुलिस द्वारा फेंके गए बमों के कारण भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता उलन रॉय की मृत्यु हो गई।
I am informed by our local karyakartas that Sri Ulen Roy, a senior BJP karyakarta, has succumbed to splinter injuries caused by the country bombs that Mamata’s police threw.
This is murder. Nothing less.
We are very angry. We will never forgive you Mamata Di.
वहीं बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे बीजेपी युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं पर तीनबत्ती में पुलिस ने आँसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। यहाँ जिस प्रकार की अराजकता है, राष्ट्रपति शासन लगाना जरूरी है। यहाँ प्रजातंत्र नहीं, गुंडों का राज है।
उत्तरी बंगाल के विकास की मांग कर रहे भाजपा कार्यकर्ता श्री उलेन रॉय की पुलिस लाठीचार्ज में मौत हो गई। ममता सरकार के इशारों पर पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं पर ऐसे जुल्म लगातार हो रहे हैं। अब ऐसी घटनाओं को रोका जाना जरूरी है!#AarNoiAnnaypic.twitter.com/jUfIwVlDXZ
उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “उत्तरी बंगाल के विकास की माँग कर रहे भाजपा कार्यकर्ता उलेन रॉय की पुलिस लाठीचार्ज में मौत हो गई। ममता सरकार के इशारों पर पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं पर ऐसे जुल्म लगातार हो रहे हैं। अब ऐसी घटनाओं को रोका जाना जरूरी है।”
हम नहीं डरेंगे !
ममता बनर्जी जी आप अपने वर्दी वाले गुंडों से BJYM के कार्यकर्ताओं पर चाहे जितना मर्ज़ी अत्याचार करवा लीजिए।
Police showed restraint and didn’t do lathicharge or used fire arms. Only water cannons and tear gas were used to disperse the violent crowd. However, death of a person has been reported. Body is being sent for PM. The actual cause of death will be known only after the PM (2/2)
इस घटना पर बंगाल पुलिस की ओर से भी बयान जारी किया गया है। पुलिस ने अपने बयान में कहा, “आज सिलीगुड़ी में एक राजनीतिक दल के समर्थकों द्वारा विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिंसा की गई। हिंसक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने केवल वाटर कैनन और आँसू गैस का इस्तेमाल किया। पुलिस को एक व्यक्ति की मौत की सूचना मिली है। मौत का वास्तविक कारण पोस्टमॉर्टम के बाद ही पता चलेगा।”
पुलिस द्वारा फेंके गए आँसू गैस और उन्ही के साथ खड़े हुए ममताजी के गुंडो ने बम चलाए।
ऑपइंडिया ने रैली और पुलिस की बर्बरता के बारे में पश्चिम बंगाल के बीजेपी मीडिया विभाग के सदस्य कालीचरण शॉ से बात की। उन्होंने कहा कि ममता सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया गया क्योंकि वह उत्तर बंगाल के विकास के अपने वादे को पूरा करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि 2014 में उन्होंने सुनिश्चित किया कि उत्तर पश्चिम बंगाल में विकास कार्य उनकी प्राथमिकता सूची में होगी, लेकिन ऐसा करने में वो असफल रही।
इससे पहले भाजपा नेता कबीर बोस को हाउस अरेस्ट करने और उनके घर को टीएमसी के 100 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को घेरने की खबर आई थी। इसको लेकर टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा है, “भाजपा का एक गुंडा CISF के संरक्षण में यहाँ रह रहा है। वह जगदीप धनखड़ के साथ नियमित संपर्क में है। CISF ने हमारे कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया।”
West Bengal: Violence erupted between TMC & BJP party workers in Hooghly district, yesterday
“A BJP goon is living here under CISF protection. He’s in regular touch with Jagdeep Dhankar. The CISF lathi-charged our workers who were gathered here,” says TMC MP Kalyan Banerjee pic.twitter.com/RhgaU5LmwU
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में शनिवार को हिंसक वारदात की खबर सामने आई थी। राज्य के आसनसोल में बीजेपी की बाइक रैली पर हमला हुआ था। इसमें बीजेपी के 5 से 7 कार्यकर्ता घायल हुए थे। बीजेपी कार्यकर्ताओं पर फायरिंग की गई और पत्थरबाजी भी की गई। इस दौरान बम भी फेंके गए।
पाकिस्तान में जन्मीं ब्रिटिश मूल की अभिनेत्री सलमा आगा की बेटी जारा खान को कई दिनों से सोशल मीडिया पर रेप और मौत की धमकियाँ मिल रही थीं। जारा ने इसकी शिकायत ओशिवारा पुलिस स्टेशन में की। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।
जारा खान ने मुंबई के ओशिवारा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाते हुए बताया कि उन्हें 28 अक्टूबर से 3 नवंबर के बीच सोशल नेटवर्किंग साइट इंस्टाग्राम के जरिए रेप की धमकियाँ मिली। जारा की शिकायत के बाद पुलिस भी हरकत में आई और तुरंत ही आरोपित का पता लगा लिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जाँच में पुलिस को पता चला कि धमकी देने वाली हैदराबाद की एक 23 वर्षीय एमबीए स्टूडेंट है। ओशिवारा थाने के सीनियर इंस्पेक्टर ने कहा कि शिकायत के बाद साइबर सेल को सूचना दी गई थी जिससे लोकल आईपी अड्रेस का पता चला। पुलिस ने बताया कि आरोपित का नाम नूरा सरवर है, जिसने इंस्टाग्राम पर अपनी फर्जी प्रोफाइल बना रखी है।
ओशिवारा पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ निरीक्षक दयानंद बांगर ने मीडिया को बताया, “आरोपित लड़की ने इंस्टाग्राम पर अश्लील मैसेज भेजे और जान से मारने की भी धमकी दी। उसने इंस्टाग्राम पर अपनी एक फर्जी प्रोफाइल बना रखी है। हमने इंस्टाग्राम को इसके बारे में सूचित किया, जिसके बाद उन्होंने हमारी मदद की।”
पुलिस जाँच में ये भी सामने आया है कि आरोपित नूरा और उसका को-वर्कर एक पॉलिटिकल पार्टी के लिए काम करते हैं। हालाँकि मामले को लेकर पुलिस अब भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर जारा को ये धमकियाँ क्यों दी जा रही थीं। इसके पीछे की वजह अभी तक पता नहीं चल पाई है। धारा 354 (A), (B), 509, 506 और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट के तहत धारा 67 (A) में आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।
गौरतलब है कि जारा आगा ‘निकाह’ फेम अभिनेत्री सलमा आगा की बेटी हैं। जारा भी फिल्मों में अपनी किस्मत आजमा चुकी हैं। उन्होंने अभिनेता अर्जुन कपूर के साथ फिल्म ‘औरंगजेब’ से फिल्मों में डेब्यू किया था। हालाँकि ये फिल्म ज्यादा चल नहीं पाई थी। इसके बाद वो फिल्म ‘देसी कट्टे’ में भी नजर आईं।
भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से आई दो नाबालिग बहनों को उनके घर वापस भेज दिया है। दोनों बहनें गलती से नियंत्रण रेखा (LOC) पार कर जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में दाखिल हुई थीं। प्रशासन और सेना ने दोनों बहनों को उपहार के साथ उनके घर वापस रवाना किया। इसके लिए सेना का आभार प्रकट करते हुए कहा कि कि उन्हें इस बात की आशा नहीं थी कि वे अपने घर लौट पाएँगी।
दोनों बहनों की पहचान लाएबा जुबैर (17) और सना जुबैर (13) के रूप में हुई है। दोनों कहुटा तहसील अब्बासपुर गाँव की रहने वाली हैं। वे रविवार (6 दिसंबर 2020) की सुबह नियंत्रण रेखा से जम्मू-कश्मीर के पुंछ में दाखिल हुई थीं। तभी इन पर सेना के जवानों की नज़र पड़ी और उन्होंने दोनों को हिरासत में लिया। हिरासत में लेने के बाद सेना ने दोनों नाबालिग बहनों से पूछताछ की और पूछताछ के बाद पुलिस के हवाले कर दिया। इस घटना के बाद पूरे एलओसी क्षेत्र को एलर्ट कर दिया गया था।
#WATCH | We lost our way & entered Indian territory. We feared that Army personnel will beat us up but they treated us in a very good manner. We had thought that they would not allow us to go back but today we are being sent home. People are very good here: Laiba Zabair https://t.co/u6DXgPEf7Cpic.twitter.com/2rkf8hOdxk
घर वापस भेजे जाने के बाद लाएबा जुबैर ने भारतीय सेना का आभार प्रकट करते हुए कहा, “हम अपना रास्ता भटक गए थे और भूलवश भारतीय सीमा में चले गए थे। हमें इस बात का डर लग रहा था कि सेना के जवान हमारी पिटाई करेंगे। लेकिन वह सभी हमारे साथ बहुत ही अच्छे से पेश आए। उन्होंने हमें खाना दिया और ठहरने के लिए जगह भी दी। सभी लोग हमारी वापसी के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे। उनका व्यवहार बहुत ही अच्छा था। हमें ऐसा लग रहा था कि यह लोग हमें वापस अपने घर नहीं जाने देंगे, लेकिन आज हम अपने घर जा रहे हैं। यहाँ के लोग वाकई बहुत अच्छे हैं।”
इस घटनाक्रम पर सेना अधिकारियों ने भी जानकारी दी थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पुंछ में नियंत्रण रेखा पर तैनात भारतीय सेना की सरला बटालियन ने दोनों नाबालिग लड़कियों को चकना दा बाग़ क्षेत्र में पाकिस्तान की तरफ से दाखिल होते हुए देखा। तुरंत सेना के जवानों ने उनको हिरासत में लिया और पूछताछ की। पूछताछ के दौरान दोनों नाबालिग बहनों ने स्वीकार किया था कि वे गलती से यहाँ आई थीं।
ज्योति एक आम नारी हैं। शक्ल-सूरत से केरल में उनकी पहचान भी मुश्किल है, क्योंकि वो यहाँ की मूल नहीं हैं, उनका ससुराल यहाँ है। लेकिन वो पलक्कड़ स्थित पलथुल्ली क्षेत्र के अंतर्गत कोल्लेनगोडे ब्लॉक पंचायत की भाजपा उम्मीदवार हैं। ज्योति की मलयाली भाषा पर शानदार पकड़ है और उनका पहनावा भी परंपरागत मलयाली युवती जैसा ही होता है। वह मूल रूप से छत्तीसगढ़ स्थित दंतेवाड़ा जिले के बछेली क्षेत्र की रहने वाली हैं।
ज्योति ने शायद ही कभी सोचा होगा कि वह केरल की बहू बनेंगी लेकिन फिर उनकी पलथुल्ली के रहने वाले पीवी विकास से शादी हुई। पीवी विकास केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवान हैं। ज्योति ने एक अजनबी सुरक्षाबल (विकास, जो कि अब उनके पति हैं) की जान बचाते हुए अपना दाहिना गँवा दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स में ज्योति ने इस मुद्दे पर कई बातें कहीं:
“तारीख़ थी 3 जनवरी 2010 और मैं बस में विकास के ठीक पीछे बैठी थी। विकास अपनी दंतेवाड़ा स्थित बैलाडीला सीआईएसएफ़ यूनिट के लिए लौट रहे थे। वह खिड़की की रेलिंग पर अपना सिर रख कर आराम कर रहे थे। अचानक मुझे एक ट्रक नज़र आया, जो उसी दिशा से आ रहा था जिधर विकास रेलिंग पर अपना सिर रख कर आराम कर रहे थे। तभी ड्राइवर का बस पर नियंत्रण ख़त्म हो गया। मैंने तुरंत अपना हाथ निकाल कर विकास का सिर अंदर किया। इसके पहले कि मेरा हाथ पूरी तरह अंदर आ पाता, उसके पहले ही ट्रक ने मेरे हाथ में टक्कर मार दी।”
ज्योति की ज़िंदगी पर इस घटना का बेहद नकारात्मक प्रभाव पड़ा था। पहले तो घर वालों का क्रोध झेलना पड़ा और इसके अलावा बीएससी नर्सिंग का कोर्स भी बीच में ही छोड़ना पड़ा।
घटना के लगभग एक साल बाद पीवी विकास और ज्योति की शादी हुई और 2011 में वह केरल आ गईं। अब वो केरल की बहू हैं और वहाँ की परंपराओं को न सिर्फ बखूबी निभा रही हैं बल्कि समाज में सक्रिय भी हैं।
कोल्लेनगोडे ब्लॉक पंचायत की भाजपा उम्मीदवार ज्योति सिर्फ दो मुद्दों पर वोट की माँग कर रही हैं – पहला विकास और दूसरा राष्ट्रवाद। ज्योति द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक़ भारतीय जनता पार्टी की स्थानीय कमेटी ने उनसे चुनाव लड़ने के लिए संपर्क किया था। इस पर ज्योति के पति और ससुराल वालों ने सहमति जताई थी। राजनीति के मुद्दे पर ज्योति का कहना था कि भाजपा के प्रति उनका लगाव तब से है, जब वह छत्तीसगढ़ में थीं। उनका यह भी कहना है कि अब पूरे केरल में भी भाजपा की स्थिति मज़बूत हो रही है।
ज्योति के मुताबिक़, “केरल के लोग उस पर बहुत स्नेह लुटा रहे हैं। चुनाव में वोट देना बाद की बात है लेकिन अभी के लिए लोगों की तरफ से जो स्नेह मिला, वो शानदार अनुभव है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीति से भी प्रभावित हूँ, मेरा प्रयास यही होगा कि भाजपा वहाँ बेहतर प्रदर्शन करे।”
पलक्कड़ के भाजपा जिलाध्यक्ष कृष्णा दास ने भी ज्योति की सराहना की थी। उनके मुताबिक़, “ज्योति अब केरल की बेटी हैं, उन्होंने एक जवान की जान बचाते हुए अपना हाथ गँवाया है। वह हमारे लिए किसी प्रेरणा से कमतर नहीं हैं।”
भारत में ISI अब खालिस्तानी कट्टरपंथियों और जम्मू-कश्मीर के इस्लामी आतंकियों का गठजोड़ बनाकर भारत को अस्थिर करने की साजिश पर काम कर रहा है। दिल्ली पुलिस ने शकरपुर से 5 खालिस्तानी-कश्मीरी आतंकियों की गिरफ़्तारी के बाद ये खुलासा किया है। आतंकियों के पास से बड़ी मात्रा में खतरनाक हथियार और ड्रग्स बरामद किए गए हैं।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के डिप्टी कमिश्नर (DCP) प्रमोद कुशवाहा ने कहा कि गुप्त सूचनाओं के आधार पर इन 5 आतंकियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से 2 खालिस्तानी और 3 कश्मीरी हैं। इनके पास से 3 पिस्टल, 2 किलो हेरोइन और 1 लाख रुपए जब्त किए गए हैं। कुशवाहा ने बताया कि ISI अब खालिस्तानी अभियान को कश्मीरी जिहाद से जोड़ रहा है, ये स्पष्ट हो गया है। ये भारत को अस्थिर करने की साजिश है।
जिन 2 पंजाबी आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है, वो शौर्य चक्र अवॉर्ड विजेता बलविंदर सिंह की हत्या में शामिल थे। उनके आका का नाम सुख बिहारीवाल है, जो गल्फ मुल्कों में रहता है और वहीं से भारत के खालिस्तानी आतंकियों को निर्देशित करता है। बलविंदर सिंह आतंक के खिलाफ एक प्रमुख आवाज़ थे। उन पर न जाने कितने ही हमले किए गए थे। अक्टूबर 2020 में पंजाब के तरनतारन जिले में उनकी हत्या कर दी गई थी।
बलविंदर सिंह ने कई दशकों तक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। दिल्ली पुलिस ने बताया है कि गुरजीत सिंह और सुखदीप सिंह इससे पहले भी कई आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं। पुलिस ने बताया है कि पाकिस्तान से ऑपरेट किए जा रहे कई गैंगस्टर्स के साथ उनके सम्बन्ध हैं। शब्बी अहमद, अयूब पठान और रियाज़ का आतंकी संगठन हिज़्बुल मुजाहिद्दीन से स्पष्ट जुड़ाव सामने आया है।
ये तीनों हिज्बुल मुजाहिद्दीन के ‘ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW)’ हैं, जिसका पूरा सेटअप पाक अधिकृत कश्मीर (POK) में है। यानी, पुलिस का कहना है कि इस पूरे मामले के दो कंपोनेंट्स हैं- पंजाबी गैंगस्टर्स और कश्मीरी आतंकी। पंजाबी गैंगस्टर कॉम्पोनेन्ट को टारगेट को मारने में और कश्मीरी कॉम्पोनेन्ट को आतंकी फंडिंग और ड्रग्स के नेटवर्क में इस्तेमाल किया जाता है। इन दोनों के बीच सेतु का काम कर रही है पाकिस्तान की ISI।
These two have linkages to one Sukhmeet, who is Gulf-based, and some other gangsters. These are gangsters and have linkages to Pakistan based ISI operatives: DCP Special Cell Pramod Kushwaha
पंजाब पुलिस बलविंदर सिंह की हत्या की जाँच कर रही है। उसने इस बात की पुष्टि की है कि आज दिल्ली पुलिस द्वारा जब्त किए गए हथियारों का इस्तेमाल ही उस हत्याकांड में किया गया था। हालाँकि, इस प्वाइंट पर अभी और जाँच होगी। पुलिस ने बताया कि इस गठजोड़ के दो उद्देश्य थे – पहला, समाज में सांप्रदायिक अशांति पैदा करना और दूसरा, आतंकवाद के खिलाफ खड़े होने वाले लोगों को हतोत्साहित करना।
दिल्ली में ‘किसान आंदोलन’ चल रहा है और इसकी आड़ में खालिस्तानी ताकतें फिर से सिर उठा रही हैं। इन 5 आतंकियों को गिरफ्तार किए जाने से पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के साथ इनकी मुठभेड़ भी हुई। दोनों तरफ से गोलीबारी के बाद इन्हें धर-दबोचा गया। पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी संगठन और इसके इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) की नई साजिश है कि अब जम्मू कश्मीर के साथ-साथ पंजाब के रास्ते चीन के ड्रोन्स के माध्यम से खतरनाक हथियार व अन्य दहशत का साजो-सामान भेजा जाए।
भारत से संबंधित मुद्दों पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान का आम तौर पर विलाप जारी रहता है लेकिन मन की गहराइयों में, वह भारत के अलंकृत दृश्यों और यहाँ की सुंदरता से प्रभावित ही रहते हैं। भारत के अद्भुत नजारों के प्रति उनकी भावनाएँ एक ट्वीट के ज़रिये सामने आई। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने गिलगित-बाल्टिस्तान की एक विलक्षण तस्वीर साझा की और उन्होंने दावा किया कि यह धरती पर उनकी सबसे पसंदीदा जगहों में से एक है।
कैलेडॉसोपिक (गतिशील) तस्वीरों का परिदृश्य साझा करते हुए इमरान खान ने अपने ट्वीट में लिखा, “सर्दियों से ठीक पहले गिलगित-बाल्टिस्तान के रंग। इस धरती पर मेरी सबसे पसंदीदा जगहों में से एक।”
The colours of Gilgit Baltistan just before the onset of winter. One of my favourite places on this earth. pic.twitter.com/qdhGqkZ2Fx
नेटिज़न्स ने दिलाया याद, गिलगित-बाल्टिस्तान है भारत का हिस्सा
जैसे ही इमरान खान ने उस जगह को अपनी सबसे पसंदीदा जगहों में से एक बताया वैसे ही नेटिज़न्स ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें याद दिलाया गिलगित-बाल्टिस्तान वैधानिक रूप से भारत का हिस्सा है, जिस पर पाकिस्तान ने गैरक़ानूनी रूप से कब्ज़ा किया है।
gb is part of India ?????????? gilgit baltistan is part of j&k and j&k is part of India ???? . jai hind ?? . RT and support to India ?? pic.twitter.com/9kgDkVbwR5
एक यूजर ने तो इन तस्वीरों को खींचने का दावा करते हुए निराशा जताई है कि काँट-छाँट कर तस्वीरों से वाटरमार्क और उसका क्रेडिट गायब कर दिया गया है।
Thank you sir @ImranKhanPTI for sharing my picture but it would have been great if my watermark haven’t being cropped & credits may have been given to me. https://t.co/HaeXsVQPbP
सोशल मीडिया यूज़रर्स ने बताया, गिलगित-बाल्टिस्तान की नहीं कैलिफ़ोर्निया की तस्वीरें
यह ट्वीट करने से ठीक पहले इमरान खान ने एक ट्वीट में चार तस्वीरें इसी कैप्शन के साथ साझा की थी। जिसके बाद तमाम सोशल मीडिया यूज़र ने इस बात की और इशारा किया कि यह तस्वीर गिलगित-बाल्टिस्तान की नहीं, बल्कि अमेरिका की है। इसके बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने ट्वीट डिलीट कर दिया और दोबारा किए गए ट्वीट में कुछ तस्वीरें साझा की जो कथित तौर पर गिलगित-बाल्टिस्तान की थीं।
This joker tweeted image of California and claimed it to be of Girgit Baltistan. Later deleted that tweet. “Nakshe badalne se kuch nahi hoga khan sahab, ek baar nasha badal ke dekh lo ” pic.twitter.com/b6CUw3bcsZ
गिलगित-बाल्टिस्तान: अतीत में जम्मू कश्मीर का हिस्सा
गिलगित-बाल्टिस्तान अतीत में जम्मू-कश्मीर रियासत (प्रिंसली स्टेट) का हिस्सा था जिस पर महाराजा हरि सिंह का शासन था। आज़ादी के कुछ समय बाद पश्तून लड़ाकों ने पाकिस्तानी सेना का समर्थन किया, जिसके बाद उन्होंने जम्मू-कश्मीर पर हमला करके लूट और बलात्कार की।
पाकिस्तान के इस समुदाय ने गिलगित-बाल्टिस्तान और मुज़फ्फराबाद समेत कश्मीर के अन्य क्षेत्रों पर कब्ज़ा किया। हमले के 4 दिन बाद 26 अक्टूबर 1947 को महाराजा हरि सिंह ने समझौते पर हस्ताक्षर किए और फिर जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय हुआ। इसके बाद भारतीय सेना एयरलिफ्ट कर श्रीनगर भेजी गई और राजधानी को आज़ाद कराया जा सका।
इसके बाद भारतीय सेना पश्तून समुदाय के लोगों को वहाँ से हटाने में पूरी तरह कामयाब रही और वहाँ युद्धविराम हुआ। भारतीय सेना ने सफलतापूर्वक जम्मू हासिल किया, लेह लद्दाख के साथ साथ कश्मीर का एक बड़ा हिस्सा भी हासिल किया। तब तक पाकिस्तानी सेना गिलगित-बाल्टिस्तान पर कब्ज़ा कर चुकी थी इसमें शक्सगाम घाटी और कश्मीर के कई क्षेत्र शामिल थे।
समझौते की वजह से जम्मू-कश्मीर पर भारत का संप्रभुता के लिहाज़ से अधिकार है। इसमें पीओके के कुछ हिस्से जैसे गिलगित-बाल्टिस्तान और कश्मीर के भी कुछ इलाके जिस पर पाकिस्तान का ग़ैर कानूनी कब्ज़ा है शामिल हैं। नवंबर 2020 में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने गिलगित-बाल्टिस्तान को ‘प्रोविंशियल स्टेटस’ का ऐलान किया था। उनका दावा था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प को मद्देनज़र रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
इसके बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था, “भारत सरकार पाकिस्तान के ऐसे किसी भी प्रयास को सिरे से खारिज करती है, जिसमें वह भारत की सीमा में किसी भी तरह का बदलाव करना चाहता है। मैं इस बात उल्लेख करना चाहता हूँ कि जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और गिलगित-बाल्टिस्तान का क्षेत्र क़ानूनी तौर पर भारतीय गणतंत्र का हिस्सा हैं।” पाकिस्तान का उन क्षेत्रों पर कोई अधिकार नहीं है। उसने गैर कानूनी रूप से कब्ज़ा कर रखा है।
पूरे बयान में कहा गया था, “पाकिस्तान का अनाधिकारिक कब्ज़ा वहाँ पर रहने वाले लोगों के साथ होने वाला अत्याचार, मानवाधिकार उल्लंघन, उत्पीड़न और 7 दशकों से छिनी हुई उनकी आज़ादी को छुपा नहीं सकता है। पाकिस्तान को भारतीय क्षेत्रों में बदलाव करने की बजाय वह इलाके खाली करने चाहिए जिस पर उसका अनाधिकारिक कब्ज़ा है।” सितंबर के दौरान सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पाकिस्तान का राजनीतिक फैलाव जो पूरी तरह वहाँ की सेना के हाथ में था, उसने पूरे क्षेत्र की तथाकथित स्वायत्तता को बदलने की आज़ादी दी थी। इस फैसले से सीधे तौर पर चीन और चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर को फायदा होगा।
Thank you sir @ImranKhanPTI for sharing my picture but it would have been great if my watermark haven’t being cropped & credits may have been given to me. https://t.co/HaeXsVQPbP
पाकिस्तानी अभिनेत्री जैनब जमील ने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए इसकी जानकारी दी। उन्होंने इस्लाम की शिक्षाओं के बारे में अधिक जानने के लिए इंडस्ट्री को अलविदा कहा।
31 वर्षीय अभिनेत्री ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर एक घोषणा की, “मुझे यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि मैंने अभिनय और मॉडलिंग छोड़ दी है। अल्हमदोलिल्लाह अल्लाह ने मुझे कुरान और हदीस का छात्र बनने और हमारे मजहब इस्लाम के बारे में अधिक जानने के लिए चुना है।”
जैनब की इंस्टाग्राम स्टोरी
आगे जैनब ने इंस्टाग्राम स्टोरी में विस्तार से बताया कि उन्होंने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री छोड़ने का फैसला क्यों किया। जैनब ने लिखा, “वो लोग जो वास्तव में चिंतित हैं और मुझसे पूछ रहे हैं कि मैंने यह निर्णय क्यों लिया, उनकी चिंता का मैं सम्मान करती हूँ। मुझे देर हो गई है। मुझे यह घोषणा बहुत पहले करनी चाहिए थी लेकिन शायद मैं तैयार नहीं थी या मैं कुछ जवाबों की तलाश में थी। वास्तव में अब मुझे तफसीर के साथ कुरान पढ़ते हुए 3 साल हो गए हैं और मैं सरल छात्र नहीं हूँ।”
जैनब ने अपने पोस्ट में इस बात भी जोर डाला कि वह अपने करियर के चुनाव से संतुष्ट नहीं थीं। इसका जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा, “मेरे सभी मूर्खतापूर्ण सवालों और शंकाओं का समाधान करने के लिए मेरे शिक्षकों का धन्यवाद। उनकी वजह से आज मैं इस मुकाम पर पहुँच पाई कि मैं इतना बड़ा कदम उठाने के लिए तैयार हूँ। मैं उस कैरियर को छोड़ रही हूँ, जिसके बारे में मैंने सोचा था कि मैं पसंद करुँगी। लेकिन किया नहीं, क्योंकि जब भी मैं सेट पर काम कर रही होती थी तो उससे पूरी तरह संतुष्ट नहीं थी।”
उन्होंने यह भी लिखा कि वो इस क्षेत्र में काम करने वाले किसी भी एक्टर की भावनाओं को आहत नहीं करना चाहती। लेकिन सभी लोग अलग-अलग होते हैं। जैनब ने उस प्रोडक्ट और प्रोड्यूसर का धन्यवाद अदा किया, जिनके साथ उन्होंने काम किया था। अंत में उन्होंने उन प्रोड्यूसर का शुक्रिया अदा किया, जिनके साथ उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था। उन्होंने गुजारिश की कि उनका नाम इन कॉन्ट्रैक्ट से हटा दिया जाए।
जैनब जमील ने ‘सदा सुखी रहो’, ‘ससुराल मेरी बहन का’, ‘मनचली’, ‘मिल के हम ना मिले’ और ‘आपके कनीज’ जैसे जियो एंटरटेनमेंट के कई ड्रामे में काम किया है। पिछले महीने ही एक और मॉडल अनम मलिक ने मजहब की खातिर मॉडलिंग की दुनिया को अलविदा कह दिया था। मलिक ने कहा था कि उन्होंने मॉडलिंग की दुनिया को हमेशा के लिए छोड़ने और इस्लाम की शिक्षाओं के अनुसार जीने का फैसला किया है।