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यूपी में कुख्यात डॉन बदन सिंह बद्दो के शाही बंगले की हुई कुर्की: मेरठ से भागा था 2.5 लाख का इनामी हिस्ट्रीशीटर

योगी सरकार इन दिनों माफ‍िया और अवैध कार्यों से जमा की गई संपत्ति और अवैध निर्माण को लेकर कड़ी कार्रवाई कर रही है। अपराधियों पर नकेल कसने की इस कड़ी में प्रशासन ने मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद और सुंदर भाटी के बाद अब वेस्ट यूपी के कुख्यात बदन सिंह पर शिकंजा कसा है। मेरठ पुलिस ने शनिवार (7 नवंबर, 2020) की सुबह ढाई लाख के इनामी हिस्ट्रीशीटर बद्दो के घर की कुर्की ढोल नगाड़े के साथ की।

यह कुर्की एसपी कृष्ण बिश्नोई और ब्रह्मपुरी सीओ अमित कुमार राय के नेतृत्व में की गई है। पंजाबीपुरा में स्थित कुख्यात बदमाश के कोठे पर ब्रह्मपुरी और टीपी थाना पुलिस ने पहुँचकर इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया। पुलिस ने घर में रखा सारा कीमती सामान जब्त कर लिया। इस दौरान घर के भीतर बदन सिंह बद्दो की बहन मौजूद थी। कुर्की से पहले पुलिसने अदालत के आदेश को भी पढ़ा। कुर्की किया गया मकान बद्दो के नाम पर है।

जिसके बाद पुलिस ने समान को जब्त कर कई गाड़ियों में भरकर उन्हें थाने भेज दिया। पुलिस अधिकारियों ने पूरे घर को खंगाला और उसके बाद घर के सामान को जब्त करने की कार्यवाही की गई।

कुर्की के दौरान ढोल बजाकर लोगों को जानकारी दी जा रही थी कि बदन सिंह बद्दो की घर की कुर्की की जा रही है। अगर इस कुर्की से किसी को ऐतराज है तो वो यहाँ आ करके अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है। वहीं, सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसी भी तरह की कोई अप्रिय घटना ना हो सके।

गौरतलब है कि वेस्टर्न यूपी का कुख्यात बदमाश बदन सिंह बद्दो पिछले 20 महीने से फरार चल रहा है। मेरठ के एक होटल से अप्रैल 2019 में एक पेशी के दौरान वह पुलिस को चकमा देकर भाग गया था। जिसके बाद से आज तक बदन सिंह बद्दो का कोई पता नहीं चल पाया है। लेकिन समय-समय पर बदन सिंह बद्दो सोशल मीडिया पर एक्टिव रहता है। जिस पर वह अपने विरोधियों और पुलिस धमकी देता है।

बद्दो पर अपरहण, रंगदारी और जमीन कब्जे को लेकर कई मामले दर्ज है। इसके अलावा मुजफ्फरनगर के सुशील मूंछ और बदन सिंह की जोड़ी का अपराध की दुनिया में बोलबाला है। पिछली सरकारों में लोगों पर दबदबा बनाने वाले इन बदमाशों की कमर यूपी की योगी सरकार ने तोड़ दी है। सरकार की सख्त कार्रवाई से परेशान ये अपराधी अपनी जान बचाने के लिए छुपते हुए इधर-उधर भटक रहे है।

मोस्ट वांटेड और उत्तर प्रदेश के टॉप टेन बदमाशों की सूची में शामिल बदन सिंह बद्दो के शाही बंगले की कीमत करोड़ों में है। एसएसपी अजय साहनी ने बताया कि बदन सिंह उर्फ बद्दो पुत्र चरन सिंह निवासी बेरीपुरा टीपीनगर एक अभ्यस्त अपराधी है। वह बार-बार अपराध कर रहा है। उसने आर्थिक और भौतिक चाहत के लिए अपराध किया, जिससे आम जनता में भय और रोष व्याप्त है। ऐसे अभ्यस्त अपराधी की लगातार निगरानी और प्रभावी कार्रवाई के लिए बद्दो को जिले का अपराध माफिया घोषित किया गया है।

‘2013 से अन्वय नाइक वित्तीय संकट में थे, अर्णब ने आत्महत्या के लिए नहीं उकसाया’: जानिए क्या कहती है 2019 की क्लोजर रिपोर्ट

महाराष्ट्र सरकार के इशारे पर रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी के खिलाफ ‘विच हंट’ में जुटी मुंबई पुलिस को 2019 में अन्वय नाइक आत्महत्या मामले में दायर क्लोजर रिपोर्ट कठघरे में खड़ा करती है।

केस का बैकग्राउंड

यह मामला इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक की मृत्यु से संबंधित है, जिसने मई 2018 में आत्महत्या कर ली और अपने पीछे एक सुसाइड नोट छोड़ गया। इस सुसाइड नोट में आरोप लगाया गया कि अर्णब गोस्वामी ने उनका ₹83 लाख का बकाया नहीं चुकाया। सुसाइड नोट में दो अन्य लोगों- फिरोज शेख और नितेश सारडा का भी नाम था। उन दोनों पर क्रमश: ₹4 करोड़ और 55 लाख न चुकाने का आरोप लगाया। यहाँ पर यह ध्यान देना उचित है कि मामला अप्रैल 2019 में बंद कर दिया गया था और अब अर्नब गोस्वामी को चुप कराने के लिए पुलिस द्वारा एकतरफा रूप से खोला गया है।

द इंडियन एक्सप्रेस की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार, अन्वय नाइक आत्महत्या मामले की जाँच कर रहे अधिकारियों को रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्णब गोस्वामी, नितेश सारडा और फिरोज शेख के बीच कोई संबंध नहीं मिला। उन्हें कोई सबूत नहीं मिला जो यह सत्यापित कर सके कि तीनों ने नाइक का जीवन ‘असहनीय’ बनाया या आत्महत्या के लिए प्रेरित किया। इस प्रकार, मामले की जाँच कर रही रायगढ़ पुलिस ने अप्रैल 2019 में मजिस्ट्रेट के सामने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में ‘case summary’ दायर किया था। यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि आरोपित के खिलाफ पर्याप्त सबूत के अभाव में ‘summary’ दायर किया गया। जिससे पुलिस को आरोप पत्र प्रस्तुत करने से रोका जा सके।

अर्णब गोस्वामी और अन्य आरोपितों के बीच कोई संबंध नहीं है

क्लोजर रिपोर्ट में जोर देकर कहा गया, “तीनों अभियुक्तों को विभिन्न क्षेत्रों, स्थानों और तीनों के बीच कोई संबंध नहीं होने के कारण जाँच में प्रमाणित किया गया है। अब तक की जाँच में इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि सुसाइड नोट में नामजद तीन आरोपितों की ओर से की गई कार्रवाई, व्यक्तिगत रूप से या एक साथ मिलकर, मृतक के जीवन को असहनीय बना दिया या उसके पास आत्महत्या करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। इसलिए, इस मामले में साक्ष्य के अभाव में, ‘अंतिम सारांश’ को स्वीकार किया जाना चाहिए।” 

अन्वय नाइक की कंपनी भारी घाटे में थी

इसमें आगे कहा गया, “जाँच से पता चला कि पिछले छह से सात वर्षों (2018 से पहले), कॉनकॉर्ड (अन्वय नाइक की कंपनी) को वित्तीय नुकसान हो रहा है, जिसके कारण अन्वय नाइक और उनकी माँ मानसिक तनाव में थे। चूँकि उनकी माँ कंपनी में भागीदार थीं, इसलिए उन्होंने उनकी गला दबाकर हत्या कर दी, और फिर खुद को लटका दिया। ऐसा उन्होंने सुसाइड नोट में लिखा।”

क्लोजर रिपोर्ट में दोहराया गया है कि कॉनकॉर्ड डिज़ाइन्स प्राइवेट लिमिटेड ने कई ग्राहकों के काम को अधूरा छोड़ दिया था, जिनमें से अन्वय नाइक का नाम भी शामिल था। सुसाइड नोट में इसका जिक्र किया गया था। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया, “आरोपितों ने पुलिस के सामने पेश किए गए दस्तावेजों के अनुसार वेंडरों और विक्रेताओं को भुगतान किया।” रायगढ़ पुलिस द्वारा प्रस्तुत क्लोजर रिपोर्ट को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एल जी पच्ची ने 16 अप्रैल, 2019 को स्वीकार कर लिया।

इंडियन एक्सप्रेस ने विशेष रूप से कॉनकॉर्ड ऑफ कंपनीज के साथ कॉनकॉर्ड द्वारा दायर वार्षिक वैधानिक रिटर्न को एक्सेस किया। विवरण के अनुसार, कंपनी पर वित्तीय वर्ष 2016 में ₹26.5 करोड़ का कर्ज था। दिलचस्प बात यह है कि कंपनी जल्द ही निष्क्रिय हो गई और उस वर्ष के बाद से उसने वार्षिक रिटर्न दाखिल करना भी बंद कर दिया।

अन्वय नाइक के परिवार द्वारा लगाया गया आरोप

जब अदालत के समक्ष क्लोजर रिपोर्ट पेश की गई, तो पीड़ित परिवार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील वैभव कार्णिक ने आरोप लगाया था कि पुलिस द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की सत्यता संदिग्ध थी। उन्होंने दावा किया, “पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट कई दस्तावेजों पर आधारित थी जैसे कि अभियुक्तों द्वारा जमा किए गए डेबिट नोट, जिनकी गिनती भी नहीं की गई थी और इसलिए, उनकी सत्यता संदिग्ध है।”

अन्वय नाइक की बेटी अदन्या नाइक ने भी दावा किया था कि अर्णब गोस्वामी और अन्य आरोपित एक-दूसरे को जानते थे। उसने आरोप लगाया, “जब मेरे पिता फिरोज शेख को भुगतान करने के लिए कहा, तो उन्होंने कहा कि गोस्वामी ने भी भुगतान नहीं किया है। उसे कैसे पता चला कि भुगतान किसने किया था? इसका मतलब है कि वे एक दूसरे से जुड़े हुए थे।” उसने यह भी दावा किया कि इस मामले की जाँच करने वाले इंस्पेक्टर सुरेश एच वरडे ने मामले को ‘अविश्वसनीय’ बनाना चाहा और शिकायत वापस लेते हुए उन्हें एक बयान पर हस्ताक्षर करने के लिए धमकाया।

इस मामले में मई में मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख द्वारा अवैध रूप से फिर से जाँच का निर्देश देने के बाद पीड़ित की पत्नी अक्षत नाइक ने 12 अक्टूबर को मामले को फिर से खोलने के लिए 35 कारण प्रस्तुत किए थे।

जाँच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई

इस बीच, मुंबई पुलिस ने इंस्पेक्टर सुरेश एच वरडे के खिलाफ विभागीय जाँच शुरू की थी, ताकि मामले के तथ्यों को मिटा दिया जाए। उन्हें निरीक्षक के पद से जिला यातायात विभाग में स्थानांतरित कर दिया गया। पीड़िता के परिवार ने आरोप लगाया था कि ट्रैफिक विभाग में उनके स्थानांतरण के बावजूद वाडारे ने मामले की जाँच जारी रखी। अक्षत नाइक ने आगे आरोप लगाया कि अर्णब गोस्वामी ने अपने केबिन में मुंबई के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को अपना बयान दिया था और जाँच रिपोर्ट में उसका कोई उल्लेख नहीं है।

अर्णब गोस्वामी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया

इससे पहले, अलीबाग अदालत ने अर्णब गोस्वामी की 14 दिनों की पुलिस हिरासत की माँग को लेकर मुंबई पुलिस की याचिका खारिज कर दी थी, जिसे 4 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था। आधी रात को चली सुनवाई के बाद, अलीबाग कोर्ट ने रिपब्लिक टीवी एडिटर-इन-चीफ को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुनैना पिंगले ने कहा था कि पुलिस मृतक और गोस्वामी के बीच प्रथम दृष्टया लिंक स्थापित करने में विफल रही है। CJM ने माना, “आरोपित व्यक्तियों की गिरफ्तारी के पीछे के कारणों और आरोपित व्यक्तियों द्वारा दी गई दलीलों को ध्यान में रखते हुए, गिरफ्तारी प्रथम दृष्टया अवैध लगता है। कोई भी ठोस सबूत प्रस्तुत नहीं किया गया है जो इस अदालत को गिरफ़्तार अभियुक्तों को पुलिस हिरासत में भेजने के लिए वारंट देता हो।”

मंदिर संस्कृति की पहचान, ज्ञान-गौरव के केंद्र, धार्मिक कार्यों के अलावा किसी भी अन्य उद्देश्य के लिए न हो उपयोग: मद्रास HC

मद्रास उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार धार्मिक कार्यों के अलावा किसी भी अन्य उद्देश्य के लिए मंदिर की भूमि का उपयोग नहीं कर सकती है। तमिलनाडु में दो मंदिरों की भूमि को अलग करने के संबंध में भक्तों द्वारा की गई शिकायतों का जवाब देते हुए मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा कि मंदिर की भूमि का उपयोग केवल मंदिर के लाभकारी उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।

उच्च न्यायालय ने यह भी माना कि तमिलनाडु में मंदिर न केवल प्राचीन संस्कृति की पहचान का स्रोत हैं बल्कि यह कला, विज्ञान और मूर्तिकला के क्षेत्र में प्रतिभा के गौरव और ज्ञान का प्रमाण भी है।

अदालत ने हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्त विभाग को निर्देश दिया कि वह समय-समय पर रिपोर्ट दर्ज करने के लिए एक अधिकारी की नियुक्ति कर सभी मंदिर भूमि की पहचान और अतिक्रमणकारियों से उनकी सुरक्षा करे।

हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग तमिलनाडु सरकार के विभागों में से एक है जो राज्य के भीतर मंदिर प्रशासन के प्रबंधन और विनियमन के लिए जिम्मेदार है।

बता दें यह मामला नीलकंरई के पास श्री शक्ति मुथम्मन मंदिर और सलेम में कोट्टई मरियम्मन मंदिर की भूमि के अतिक्रमण से संबंधित है। अदालत ने मंदिर के भूमि के अतिक्रमण के खिलाफ भक्तों द्वारा दायर कई याचिकाओं के जवाब में अपने आदेशों की घोषणा की।

गौरतलब है कि यह याचिका राज्य के मत्स्य विभाग द्वारा श्री शक्ति मुथम्मन मंदिर से संबंधित कुछ भूमि पर एक आधुनिक मछली बाजार, मछली भोजनालय और कार्यालय भवन विकसित करने के बाद दायर की गई थी। विभाग ने भक्तों द्वारा की गई आपत्तियों की अवहेलना की थी।

इसी तरह, अरुलमिघु कोट्टई मरियम्मन थिरुकोइल से संबंधित कुछ जमीन बिना किसी लिखा पढ़ी के क्षेत्रीय परिवहन विभाग को हस्तांतरित कर दी गई। साथ ही पुल बनाने के लिए मंदिर की कुछ जमीनों को राजमार्ग विभाग ने भी अपने कब्जे में ले लिया था।

धार्मिक संस्थानों को ठीक से बनाए रखा जाना चाहिए: मद्रास HC

न्यायमूर्ति आर महादेवन ने अपने आदेश में निर्देश दिया कि धार्मिक संस्थानों, विशेष रूप से मंदिरों की संपत्तियों का रखरखाव ठीक से किया जाना चाहिए। अदालत ने तमिलनाडु सरकार को फटकार लगाते हुए कहा, एचआर एंड सीई डिपार्टमेंट, जो मंदिर की संपत्तियों का संरक्षक है, ने मंदिर की संपत्तियों का रखरखाव ठीक से नहीं किया, यह विषय इस विभाग के दायरे में आता है। इस तरह का रवैया बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

न्यायाधीशों ने मंदिर की भूमि से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया, उन्होंने मत्स्य विभाग को भी बुलाया, जिसने एचआर और सीई विभाग के साथ एक समझौते के तहत नीलकंरई के पास एक इमारत का निर्माण किया है, जिसके लिए किराया एकत्र किया जाएगा।

इसके अलावा न्यायमूर्ति आर महादेवन ने एचआर एंड सीई डिपार्टमेंट के आयुक्त को सभी अतिक्रमणों को वापस से हटाने और भूमि पुनः प्राप्त करने के लिए कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “एचआर और सीई विभाग भूमि की सुरक्षा के लिए एक दीवार लगाकर निर्माण शुरू करने के लिए कदम उठाएगा। मंदिर संबंधी उद्देश्यों को छोड़कर भूमि का उपयोग किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जाएगा। एचआर और सीई विभाग के कमिश्नर द्वारा प्राधिकृत अधिकारी मंदिरों और इसके गुणों के वित्तीय पहलुओं के संबंध में एक उचित रजिस्टर बनाए रखेगा और नियमित अंतराल पर संबंधित प्राधिकरण के समक्ष उसे दाखिल करेगा।”

‘हिम्मत है तो मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री को यूपी ले जाकर दिखाओ’: उद्धव ठाकरे की गीदड़-भभकी का राजू श्रीवास्तव ने दिया जवाब

उत्तर प्रदेश के नोएडा में बन रही फिल्म सिटी को लेकर अब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे बौखला गए हैं। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा है कि अगर हिम्मत है तो फिल्म इंडस्ट्री को मुंबई से उत्तर प्रदेश ले जाकर दिखाएँ। उन्होंने आक्रामक अंदाज़ में कहा कि जिस भूमि पर दादा साहब फाल्के ने फिल्म निर्माण की शुरुआत की थी, उस जगह पर वो किसी भी प्रकार की कमी नहीं होने देंगे। नोएडा में फिल्म सिटी बनने के फैसले के साथ ही भाजपा और शिवसेना सामने-सामने हैं।

एबीपी न्यूज़ की खबर के अनुसार, यूपी में फिल्म सिटी को लेकर बोलते हुए सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा कि बॉलीवुड इंडस्ट्री में कई सारी समस्याएँ और परेशानियाँ हैं, जिन्हें दूर करने का काम उनकी सरकार करेगी। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड इंडस्ट्री को जो भी सुविधाएँ चाहिए होंगी, वो उन्हें मुहैया करवाया जाएगा। उन्होंने महाराष्ट्र में सबसे अच्छी गुणवत्ता वाले फिल्मों के निर्माण की बात करते हुए यूपी में बनने वाली फिल्म सिटी पर तंज कसा। उन्होंने कहा:

“सबसे अच्छी गुणवत्ता के फिल्मों के निर्माण के लिए लिए आपको प्रौद्योगिकी और स्थान की आवश्यकता पड़ेगी। इसे ध्यान में रखते हुए एक कार्य योजना तैयार की जाए। फिल्म इंडस्ट्री अपनी प्राथमिकताएँ निर्धारित करें और हम इसे पूरा करेंगे। आज साउंड-मिक्सिंग के लिए लोग लंदन जाते हैं। हमारे पास मुंबई में संसाधन व सुविधाएँ क्यों नहीं हो सकतीं? हम अधिक लोगों तक पहुँच के लिए राज्य में ऐसे थिएटर और सिनेमा घर स्थापित करने के लिए भी काम करेंगे, जहाँ लोगों का ज्यादा खर्च न हो।”

उद्धव ठाकरे ने ऐलान किया कि सरकार जल्द ही फिल्म और मनोरंजन उद्योग के सभी हितधारकों के साथ मिलकर मेगा-सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करेगी और इस उद्देश्य के लिए उपयुक्त स्थान की तलाश करेगी। इससे पहले शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ में भी ‘मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री को नोएडा शिफ्ट करने के षड्यंत्र’ को लेकर आरोप लगाए गए थे। उसने मुंबई को देश की आर्थिक के साथ-साथ सांस्कृतिक राजधानी भी करार दिया था।

कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव ने उद्धव ठाकरे को करारा जवाब देते हुए कहा कि यूपी में फिल्म सिटी के निर्माण का काम मुकाबले के लिए नहीं, बल्कि रोजगार उपलब्ध कराने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने रोजगार की संभावनाओं को तलाशते हुए फिल्म सिटी का खाका तैयार किया है। उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ और गंगाघाट का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यूपी में बड़े कलाकार पहले से शूटिंग करते आ रहे हैं और क्योंकि यहाँ धार्मिक और रमणीय स्थलों की संख्या अच्छी खासी है।

‘न्यूज़ 18’ की कुमारी रंजना से बात करते हुए राजू श्रीवास्तव ने कहा कि रोजगार के लिए चिंतित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर विभाग को खँगाल रहे हैं, जहाँ सम्भावनाएँ हों और रोजगार उपलब्ध कराया जा सके, और इसी के तहत फिल्म सिटी का निर्माण हो रहा है। उन्होंने कहा कि यूपी में फिल्म स्टूडियो हो या रियल लोकेशन्स हों, जहाँ मराठी फिल्में भी बनें, अंग्रेजी फिल्में भी बने और दूसरी भाषाओं की फिल्मों का भी निर्माण हो।

बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कम से कम समय में उत्तर प्रदेश में फिल्म सिटी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इसके लिए 1000 एकड़ की भूमि की व्यवस्था किए जाने की बात भी कही गई है। सीएम योगी ने स्पष्ट किया है कि ये फिल्म सिटी अंतरराष्ट्रीय स्तर का होगा। इसके लिए पूरी योजना तैयार कर ली गई है। कुछ दिनों पहले बड़ी फ़िल्मी हस्तियों के साथ बैठक में उपस्थित लोगों को नक्शों और डायग्राम्स के जरिए इसका पूरा ब्लूप्रिंट दिखाया गया।

कर्नाटक: जनता की माँग पर CM येदियुरप्पा ने पटाखों पर लगे पूर्ण प्रतिबंध को आंशिक रूप से हटाया

शुक्रवार (नवंबर 06, 2020) को कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने घोषणा की कि वे हिन्दुओं के पवित्र त्योहार दिवाली पर पटाखे जलाने पर प्रतिबन्ध लगा रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमने इस विषय पर चर्चा की और पटाखों पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। एक आदेश जारी किया जा रहा है। इसका कारण कोविड-19 महामारी है।”

हालाँकि, अपने पूर्व निर्णय को बदलते हुए, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने पटाखों पर लगे पूर्ण प्रतिबंध को आंशिक रूप से हटाने का फैसला किया। मुख्यमंत्री कार्यालय से पूर्ण प्रतिबंध लगाने के 8 ही घंटे बाद दूसरा बयान जारी किया गया। इसमें कहा गया, “दिवाली में पटाखों पर प्रतिबन्ध लगाने के बाद हमें कई सुझाव मिले। लोगों को अपनी तथा बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए साधारण तरीके से त्योहार मनाना चाहिए।”

गौरतलब है कि इस वर्ष कई राज्यों ने दिवाली के पटाखों पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाए हैं। पराली जलने की समस्या का प्रबंधन करने में असफल रही पंजाब सरकार, जो दिल्ली-एनसीआर-पंजाब क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण का मुख्य कारण है, भी इनमें शामिल है।

हाल ही में पंजाब सरकार ने पटाखों के विक्रय पर कार्रवाई करने का दावा भी किया, जबकि इसी दौरान पराली जलाने की समस्या 4 वर्षों में सबसे अधिक थी। अन्य राज्य, जहाँ दिवाली मनाने पर हिन्दू गिरफ्तार किए जा सकते हैं, जहाँ यह सदियों चला आ रहा है, उनमें आते हैं- ओडिशा, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और राजस्थान।

हालाँकि, कर्नाटक राज्य सरकार ने पटाखों पर पहले पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया था, लेकिन अब कहा गया है कि लोग यदि चाहें तो ग्रीन-पटाखे जलाकर दिवाली मना सकते हैं। अब तक, कर्नाटक की ही एकमात्र सरकार है जिसने जनता की भावनाओं का ध्यान रखा है और दिवाली में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाने के अपने निर्णय को वापस लिया है।

‘पूरा भारत मेरे बाप की मिल्कियत, अब्बा की जमीन है, अब ये लड़ाई हिस्सेदारी की लड़ाई है’: असदुद्दीन ओवैसी

बिहार में विधानसभा चुनाव के तीसरे और अंतिम चरण में प्रवेश करते ही, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक चुनावी रैली में विवादित टिप्पणी की। विवादास्पद राजनेता ने भारत पर अपने पूर्वजों का मालिकाना हक बताया।

ओवैसी ने कहा, “असदुद्दीन ओवैसी बिहार का तो नहीं है, मगर ये पूरा भारत असदुद्ददीन ओवैसी के बाप की मिल्कियत है। कैसे है? हमारे अब्बा, आपके अब्बा, उनके अब्बा, उनके अब्बा के अब्बा जब दुनिया में कदम रखे, तो भारत में रखे थे कदम। तो ये हमारे अब्बा की जमीन हुई और किसी माई के लाल में ताकत नहीं है कि हमको हमारी अब्बा की जमीन पर घुसपैठी करार दे। ये अब्बा की जमीन है और अब्बा की जायदाद में बेटी और बेटे का हिस्सा मिलेगा। अब ये लड़ाई हिस्सेदारी की लड़ाई है।”

बिहार चुनाव के अंतिम चरण की पूर्व संध्या पर ओवैसी की विवादास्पद टिप्पणी आई। AIMIM प्रमुख बिहार में एक रैली को संबोधित कर रहे थे, जब उन्होंने यह विवादित टिप्पणी की। ओवैसी की इस विवादास्पद टिप्पणी की हर तरफ आलोचना हो रही है।

ओवैसी के AIMIM का इतिहास और हिंदुओं पर अत्याचार

चूँकि, ओवैसी ने जोर देकर कहा कि उनके पूर्वज भारत के हैं, इसलिए भारतीयों के प्रति उनके पूर्वाग्रहों और उनके कार्यों को जानने की जरूरत है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन रजाकारों की विरासत है। एक जिहादी आतंकी समूह, जिसने निजाम के राज्य में हिंदुओं के खिलाफ अनगिनत अत्याचार किए। जिसे भारत के लौह पुरुष सरदार पटेल द्वारा कुचल दिया गया था। वर्ष 1927 में स्थापित मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन निज़ाम समर्थक पार्टी थी। जो कि निज़ाम के हैदराबाद को पूरी तरह से भारतीय संघ में विलय नहीं करना चाहती थी।

अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए एमआईएम के कासिम रिज़वी ने नेतृत्व वाले रजाकारों को बुलवाया। दरअसल, रजाकार मूल रूप से जिहादी भीड़ थी, जिसे एमआईएम ने सड़कों पर होने वाली हिंसा को रोकने के लिए इस्तेमाल किया। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र रहे रिजवी को वर्ष 1946 में एमआईएम का अध्यक्ष चुना गया था, जिसने रजाकारों का नेतृत्व किया था। तब उसने इस क्षेत्र में हिंदुओं के खिलाफ सबसे जघन्य अपराध किए थे। यहाँ तक कि रजाकारों ने महिलाओं और बच्चों के साथ छेड़छाड़ और बलात्कार किए, हिंदुओं का उत्पीड़न किया और हिंदुओं की हत्याएँ कीं। लेकिन जल्द ही सरदार पटेल ने सामने आकर इस पागलपन का अंत कर दिया। 

उन्होंने निज़ाम को घुटने के बल लाया और उसे भारतीय संघ में प्रवेश करने के लिए मजबूर कर दिया। ऑपरेशन पोलो भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया था, जिससे रजाकार भारतीय सेना से दंग थे। यही कारण था कि उन्होंने विनम्रतापूर्वक आत्मसमर्पण कर दिया। जिसके बाद निजाम के मंत्री लईक अली और कासिम रिज़वी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। जिसके चलते रिजवी ने आखिरकार नौ साल की जेल की सजा काटी और फिर उसे इस शर्त पर रिहा किया गया कि वह पाकिस्तान के लिए रवाना हो जाएगा। जिसे उसने पूरा किया।

बिहार चुनाव के लिए AIMIM मैदान में

इस चुनाव में एआईएमआईएम ने उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी, बसपा एवं कुछ अन्य दलों के साथ मिलकर ‘ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेक्युलर अलांयस’ (जीडीएसएफ) का गठन किया है। कुशवाहा इस गठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं।

हाथरस केस: नार्को टेस्ट के बाद अब पीड़ित परिवार ने पॉलीग्राफ टेस्ट से भी किया इनकार

हाथरस के बुलगढी गाँव में युवती की मौत की जाँच कर रही केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) की टीम ने मृतका के परिवार के सदस्यों से सच्चाई जानने के लिए पॉलीग्राफ टेस्ट कराने को कहा है। मृतका के भाई और माँ से इस संबंध में घटनास्थल पर पूछताछ की गई। बताया जा रहा है कि उन्होंने सच और झूठ का पता लगाने के लिए किए जाने वाले इस पॉलीग्राफ टेस्ट को कराने से इनकार कर दिया। 

सीबीआई द्वारा पीड़िता के भाई से कई बार पूछताछ किए जाने के बाद पता चला है कि मुख्य आरोपित संदीप पीड़िता के भाई द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन के माध्यम से लगातार संपर्क में था। सीबीआई ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर पॉलीग्राफ टेस्ट कराने से इनकार कर दिया। हालाँकि पीड़िता के भाई की आवाज का सैंपल लिया गया, और अब एजेंसी द्वारा इसकी ऑडियो जाँच की जाएगी।

सीबीआई के सवालों के बारे में मृतका के भाई ने बताया कि सीबीआई ने उनसे सच झूठ का पता लगाने (पॉलीग्राफ टेस्ट) के लिए टेस्ट कराने को कहा। इस पर उसने अनभिज्ञता जाहिर करते हुए इंकार कर दिया। ऑडियो टेस्ट की बात कहने पर उसने (भाई ने) हाँ कर दी। पीड़िता के भाई का कहना है कि जेल में बंद लोगों से पूछताछ की जाए, उन्हें आराम से जेल में बिठा रखा है। मृतका के भाई ने कहा कि उनसे पूछा जाए कि उसकी बहन को कैसे मारा।

मृतका के बड़े भाई ने आरोप लगाया है कि सीबीआई पूरे मामले को प्रेम प्रसंग के रूप में चित्रित करना चाहती है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया है कि जाँच एजेंसी ने स्वीकार किया कि मामला हल होने के कगार पर है। इस बीच मृतका की भाभी ने हाथरस के डीएम का टेस्ट कराने की माँग तक की। उन्होंने कहा कि डीएम का टेस्ट क्यों नहीं करवाया जा रहा है?

CBI ने रीक्रिएट किया क्राइम सीन

सीबीआई 12 अक्टूबर से हाथरस की घटना की जाँच कर रही है। जाँच एजेंसी ने उच्च न्यायालय से तीखी टिप्पणी के बाद अपनी जाँच तेज कर दी है। डीएसपी सीमा पाहुजा के नेतृत्व में 15 सदस्यों की एक टीम शुक्रवार (नवंबर 6, 2020) दोपहर करीब 12 बजे फोरेंसिक टीम के साथ घटनास्थल पर पहुँची और क्राइम सीन को रीक्रिएट किया

पीड़ित की माँ और भाई को CRPF के संरक्षण में घटनास्थल पर लाया गया। टीम ने पीड़ित के भाई को घटना स्थल से लगभग 100 मीटर की दूरी पर मैदान के पिछले हिस्से पर बैठा दिया, जबकि सीबीआई की दूसरी टीम पीड़ित की माँ के साथ खेत में पहुँची। इसके बाद, पीड़िता की माँ से पूछताछ की गई।

CBI की टीम ने लगभग 20 मिनट तक माँ से पूछताछ की जिसके बाद पीड़िता के भाई को पूछताछ के लिए बुलाया गया। दोनों से अलग-अलग पूछताछ करने के बाद सीबीआई सच्चाई तक पहुँचने की कोशिश कर रही है।

हाथरस के पीड़ित परिवार के कई चेहरे हैं

हाथरस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू लड़की के परिवार की लगातार बदलती स्थिति रही है। शुरुआत में, पीड़ित परिवार ने केवल हमले का आरोप लगाया था, और बलात्कार का आरोप एक हफ्ते बाद जोड़ा गया। इससे मामले को लेकर बहुत भ्रम पैदा हो गया था, क्योंकि अब तक उपलब्ध चिकित्सा और फॉरेंसिक सबूत बलात्कार के आरोप की पुष्टि नहीं करते हैं। इसी तरह, मामले में जाँच पर भी परिवार का रुख भी बदलता दिख रहा है, खासकर पीड़ित के भाई द्वारा दिया गया बयान अविश्वसनीय बना हुआ है।

राज्य सरकार द्वारा यह मामला सीबीआई को सौंप दिए जाने के बाद मृतका के भाई ने कहा कि परिवार ने इसकी माँग नहीं की। रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़िता के भाई ने कहा कि उन्होंने सीबीआई जाँच की माँग नहीं की क्योंकि एसआईटी जाँच पहले से ही चल रही है। अब परिवार सुप्रीम कोर्ट के तहत न्यायिक जाँच की माँग कर रहा है।

परिवार ने नार्को टेस्ट कराने से इनकार किया था

हाथरस में पीड़िता के परिजनों ने अभी पॉलीग्राफ टेस्ट कराने से ही इनकार नहीं किया है। इससे पहले, उन्होंने नार्को टेस्ट लेने से भी इनकार कर दिया था। एसआईटी जाँच की शुरुआती रिपोर्ट में पीड़ित परिवार के नार्को टेस्ट की सिफारिश की गई है। हालाँकि, पीड़िता की माँ ने सिफारिश को खारिज कर दिया है, यह कहते हुए कि उसका परिवार नार्को टेस्ट से नहीं गुजरेगा।

यहाँ तक कि जब समाचार चैनल ‘आज तक’ के रिपोर्टर ने मृतका की दुखी माँ से कहा था कि नार्को टेस्ट से छिपे हुए मामले के तथ्यों का पता चल जाएगा, तो माँ ने जवाब दिया था, “हमें नहीं पता कि नार्को टेस्ट क्या है और इसलिए हम इसे नहीं करवाना चाहते हैं।”

हाथरस कांड

14 सितंबर को, एक 19 वर्षीय लड़की का गला घोंटा गया था, और बाद में उसने 29 सितंबर को अस्पताल में दम तोड़ दिया था। आरोपित के खिलाफ शुरू में हत्या के आरोप लगे थे। हालाँकि, बाद में बलात्कार के आरोप भी शामिल किए गए थे।

उस समय हाथरस मामला पॉलिटिकल ड्रामा और मीडिया प्रोपगेंडा का आधार बन गया था। कॉन्ग्रेस नेताओं राहुल और प्रियंका गाँधी, भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद, टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रायन, और कई अन्य लोग राज्य में योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ हमला करने के लिए परिवार से मिलने हाथरस गए थे।

‘जूते से मारा, कुछ अज्ञात पीने को दिया, रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट’: जानिए अर्णब की गिरफ्तारी के बाद मुंबई पुलिस ने क्या किया

अर्णब गोस्वामी के वकीलों द्वारा उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दायर करने के बाद कुछ चौंकाने वाले खुलासे सामने आए है। जमानत के अलावा इस याचिका में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए और अंतरिम सुरक्षा प्रदान करने के लिए भी कहा गया है।

बता दें अर्णब को मुंबई के इंटीरियर डिजाइनर अन्वय और उनकी माँ को कथित तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में 4 नवंबर बुधवार को गिरफ्तार किया गया था। मुंबई पुलिस ने उन्हें न्यायिक सहमति के बिना हिरासत में लिया था। वे 18 नवंबर तक ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं। पिछली 3 रातों से उन्हें अलीबाग में बने कोविड सेंटर में रखा गया था।

जमानत याचिका पर आज दोपहर 12 बजे से न्यायमूर्ति एसएस शिंदे और एमएस कार्णिक की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।

रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी ने महाराष्ट्र पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताते हुए उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद करने का अनुरोध किया है। अपनी जमानत याचिका में उन्होंने बताया कि किस तरह मुंबई पुलिस ने उन्हें मारा-पीटा और प्रताड़ित किया।

अर्णब ने घर से बाहर घसीटे जाने और गिरफ्तार करने के बाद मुंबई पुलिस द्वारा कथित तौर पर प्रताड़ित करने की कहानी सुनाई है।

  • 1) अर्णब के बाएँ हाथ पर 6 इंच का गहरा घाव हुआ।
  • 2) रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट।
  • 3) अर्णब ने दावा किया है कि पुलिस ने उन्हें जूते से मारा।
  • 4) पुलिस ने गिरफ्तारी के वक्त जूते पहनने तक का समय नहीं दिया।
  • 5) नस में चोट होने का दावा
  • 6) पानी तक नहीं पीने दिया।
  • 7) पुलिस अधिकारियों द्वारा उन्हें कुछ तरल का सेवन करने के लिए मजबूर किया गया और जोकि पीने लायक नहीं था।

इस मामले में अर्णब गोस्वामी की बंदी प्रत्यक्षीकरण अर्जी कहती है:

गिरफ्तारी के दौरान और एक पुलिस वैन में अलीबाग में ट्रांसफर होने के दौरान याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि पुलिस ने उन्हें जूते से मारा। पानी तक नहीं पीने दिया। अर्णब ने अपने हाथ में 6 इंच गहरा घाव होने, रीढ़ की हड्डी और नस में चोट होने का दावा भी किया है। उनका कहना है कि पुलिस ने गिरफ्तारी के वक्त जूते पहनने तक का समय नहीं दिया। साथ ही पुलिस अधिकारियों द्वारा उन्हें कुछ तरल का सेवन करने के लिए मजबूर किया गया और जोकि पीने लायक नहीं था।

गौरतलब है कि मुंबई पुलिस 2 साल पुराने बंद मामले में उन्हें गिरफ्तार करने उनके आवास पर पहुँची थी। इस दौरान उन्होंने अर्णब गोस्वामी से हाथापाई भी की। जिसके बाद रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर पुलिस द्वारा की गई उनकी गिरफ्तारी को चुनौती दी है।

बॉम्बे हाईकोर्ट में यह दलील तब आई जब मुंबई पुलिस ने मनमाने तरीके से महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख के निर्देश पर इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक की आत्महत्या के 2018 के बंद मामले में फिर से जाँच शुरू की।

याचिका की सुनवाई का आज तीसरा दिन है। कल, उच्च न्यायालय ने अर्णब गोस्वामी को उच्च न्यायालय में भी एक अलग जमानत आवेदन दायर करने के लिए कहा था।

अर्णब गोस्वामी का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कल मुंबई उच्च न्यायालय में तर्क दिया था कि अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी गैरकानूनी थी और उन्हें हिरासत में रखने का कोई आधार नहीं था। बंद मामले को बिना अदालत की अनुमति से खोल देना अपने आपमे संदिग्ध परिस्थितियों को दर्शाता है।

हरीश साल्वे ने कहा कि गृह मंत्री अनिल देशमुख ने विधानसभा में आरोप लगाया था कि आत्महत्या के लिए अर्णब जिम्मेदार था। यहीं से पूरा मामला शुरू होता है। उन्‍होंने कहा कि पुलिस एक ऐसे पुलिस रिमांड को पाना चाहती है, जिसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अस्वीकार कर दिया था।

साल्वे ने कोर्ट से कहा था कि अगर अन्वय नायक ने वित्तीय नुकसान के कारण आत्महत्या की, तो उनकी माँ ने अपना जीवन क्यों समाप्त कर लिया? हम आत्महत्या के पीछे की परिस्थितियों को नहीं जानते हैं। किसी ने यह स्थापित नहीं किया कि अवैध कमीशन है। साल्वे ने तर्क देते हुए कहा कि इन परिस्थितियों में अर्नब को हिरासत में रखने की कोई आवश्यकता नहीं है।

उल्लेखनीय है कि गोस्वामी को रायगढ़ पुलिस ने 4 नवंबर की सुबह उनके मुंबई आवास से गिरफ्तार किया था, जिसके बाद अलीबाग के CJM ने उन्हें 18 नवंबर तक के लिए 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। कथिततौर पर गिरफ्तारी के समय मुंबई पुलिस ने अर्णब के नाबालिग बेटे से मारपीट और उनके परिजनों से बत्तमीजी भी की थी।

जिस पर HC में दायर याचिका में उठाया गया मुख्य तर्क यह है कि मजिस्ट्रेट द्वारा 2019 में पुलिस को सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर मामले में एक क्लोजर आदेश पारित होने के बाद न्यायिक आदेश प्राप्त किए बिना मामले को फिर से खोलने के लिए पुलिस के पास कोई पावर नहीं है।

रिलायंस समूह ने कामाख्या मंदिर को भेंट किया 20 किलो सोना, दिवाली तक मुख्य गुम्बद पर चढ़ेगी सोने की परत

देश के सर्वाधिक प्रतिष्ठित शक्तिपीठों में से एक गुवाहाटी का कामाख्या मंदिर इस साल दिवाली में सोने से सजाया जाएगा। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) ने इस प्रोजेक्ट की ज़िम्मेदारी ली है जिसके तहत कामाख्या मंदिर के गुंबद को सजाने के लिए 20 किलो सोना उपहार स्वरुप दिया है। इस शिखर पर पत्ती के आकर में सोने की परत (लीफिंग) चढ़ाई जाएगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ आरआईएल इस मंदिर के शिखर को दिवाली से पहले 20 किलो सोने से सुसज्जित करेगा। 

इस प्रोजेक्ट को रिलायंस समूह की तरफ से कामाख्या मंदिर के लिए उपहार के रूप में बताया जा रहा है। रिलायंस समूह के मुखिया मुकेश अंबानी ने मंदिर के प्रशासन से जुड़े लोगों से वादा किया है कि वह मंदिर की सज्जा (लीफिंग) के लिए 20 किलो सोना दान करेंगे। वहीं, कामाख्या मंदिर प्रशासन से जुड़े लोगों ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि रिलायंस समूह की तरफ से सोना भेजा जा चुका है जो कि कुछ दिन पहले ही वहाँ पहुँचा। इसके अलावा, रिलायंस समूह के आभूषण संभाग (jewellery division) की तरफ से सजावट का काम पहले ही शुरू किया जा चुका है।

रिलायंस समूह ने प्रोजेक्ट के लिए अपने कर्मचारी और पर्याप्त सुरक्षा भी भेज दी है। फ़िलहाल रिलायंस समूह के अंतर्गत काम करने वाले इंजीनियर, सोने का काम करने वाले (ज्वेलर) और अन्य लोग मंदिर से जुड़े इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में जुट गए हैं। तय योजना के अनुसार इस प्रोजेक्ट को दिवाली के पहले पूरा किया जाना है। ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई से भेजे गए रिलायंस समूह के कर्मचारी प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए पूरी मेहनत से लगे हुए हैं। शिखर के लिए तांबे का एक ढाँचा (कॉपर फ्रेम) तैयार किया गया है जिससे सोने की सजावट को सही से रखा जा सके।

पहले था सोने का कलश, अब पूरा गुंबद होगा सोने का 

मंदिर प्रशासन से जुड़े मोहित शर्मा ने इस संबंध में अन्य अहम जानकारी भी दी। उन्होंने गुवाहाटी प्लस से बात करते हुए बताया कि कलश या मंदिर की चोटी पहले से ही सोने का बना हुआ था। लेकिन रिलायंस समूह द्वारा किए गए दान के बाद पूरा गुंबद ही सोने का होगा, रिलायंस समूह इस पूरे प्रोजेक्ट का खर्च उठा रहा है। मुकेश अंबानी कामाख्या माता के बड़े भक्त हैं और वह संभावित तौर पर प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद मंदिर दर्शन करने आएँगे। फ़िलहाल इस मामले में रिलायंस समूह की तरफ से पुष्टि होनी बाकी है। 

भाजपा नेता हिमंत बिस्वा सरमा ने निभाई अहम भूमिका

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, असम की राज्य सरकार में मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रिलायंस समूह के मुकेश अंबानी को इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाने में अहम भूमिका निभाई। रिलायंस समूह ने इस संबंध में सितंबर के दौरान ही प्रस्ताव पेश किया था।

कामाख्या मंदिर प्रशासन का मानना था कि महामारी के चलते श्राइन पिछले काफी समय से बंद था। लेकिन दिवाली से पहले सोने की मदद से की जाने वाली मंदिर की सजावट का कार्य निसंदेह ज़्यादा भक्तों को आकर्षित करेगा। इतना ही नहीं, दिवाली उत्सव के मौके पर यह आकर्षण का एक केंद्र भी बना रहेगा। सोने की लीफिंग का कुल खर्च लगभग 10 करोड़ रुपए आँका गया है।           

चुनाव प्रक्रिया पर ट्रम्प सवाल उठाएँ तो ‘झूठे’ और भारत में EVM पर आरोप ‘गंभीर’: देखें रवीश कुमार की दोहरी बातें

NDTV के पत्रकार रवीश कुमार का दोहरा रवैया एक बार फिर से सामने आया है और इस बार उन्होंने अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव की मतगणना को लेकर भारत को बदनाम करने की कोशिश की है। रवीश कुमार ने उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे अमेरिका में मतों की गिनती में जैसे ही डोनाल्ड ट्रम्प पिछड़ने लगे, उन्होंने ‘झूठ का एक्सेलेटर’ दबा दिया। उन्होंने कहा कि व्हाइट हाउस में चल रही ट्रम्प की प्रेस कॉन्फ्रेंस को कई समाचार चैनलों ने प्रसारण रोक दिया। यही रवीश खुद भारत में EVM का रोना रोते रहे हैं।

रवीश कुमार ने दावा किया कि अमेरिका के समाचार चैनलों ने ये कहते हुए ट्रम्प की प्रेस कॉन्फ्रेंस का प्रसारण रोक दिया कि वो पहले अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा दिए गए तथ्यों की जाँच करेंगे। इसके बाद अपना प्रोपेगंडा फैलाते हुए रवीश पूछने लगे कि अगर ऐसा भारत में हो जाए तो ED की टीम सिर्फ घर में ही नहीं जाएगी, बल्कि पूरे घर को ही ED के दफ्तर में मँगा लिया जाएगा। एसोसिएट प्रेस ने जानकारी दी है कि ABC, CBS और NBS जैसे बड़े चैनलों ने प्रसारण रोका।

उन्होंने कहा कि ट्रम्प चुनाव मे धाँधली को लेकर ‘अनर्गल’ आरोप लगा रहे थे, इसीलिए इन चैनलों का कहना था कि वो पहले ट्रम्प द्वारा लगाए गए भ्रामक आरोपों की जाँच करेंगे। अभी जो रवीश कुमार अमेरिकी चुनावों को पवित्र और उसकी प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले को झूठा बता रहे हैं, वही रवीश कुमार भारत में उन लोगों का समर्थन करते रहे हैं, जो यहाँ की चुनाव प्रक्रिया और EVM पर सवाल खड़े करते हैं।

रवीश कुमार का वो वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि EVM हैकिंग के आरोपों को मजाक में नहीं, बल्कि गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि लोकसभा चुनाव को हैक किया गया था या उसमें गड़बड़ी हुई थी, ये सवाल फिर से उठ रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि जिस EVM मशीन को देवता मानते हुए हम मजाक में सारे आरोपों को उड़ा देते हैं, लंदन में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में उसे लेकर कई आरोप लगाए गए हैं।

रवीश कुमार ने कहा था कि EVM को लेकर संदेह इतना बढ़ गया है कि वज्रगृह के बाहर राजनीतिक कार्यकर्ता जमा हो जाते हैं और देखते रहते हैं कि कहीं EVM को बदल न दिया जाए या फिर उसे हैक न कर लिया जाए। तब वो देश के कई इलाकों में EVM पर लगे आरोपों की जाँच की बात कर रहे थे। आज यही रवीश कुमार अमेरिका में चुनाव प्रक्रिया पर सवाल न उठाने को कह रहे हैं। और जब यही चीजें भारत में हो तो बुरी हो जाती है।

उधर रवीश कुमार ने अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी को लेकर भी फेसबुक पोस्ट लिखा है। अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी क्यों और किस तरह से हुई, इस बारे में आपको पता ही होगा। पहले पैराग्राफ में ही रवीश ने गिरफ़्तारी के तरीकों पर सवाल करते हुए कानून के जानकारों के हवाले से इसे गलत बताया। लेकिन, दूसरे पैराग्राफ में ‘Whataboutery’ शुरू हो जाती है। रवीश कुमार सहित सारे गिरोह के लोग साथ में लिख रहे हैं कि वो अर्णब गोस्वामी को पत्रकार नहीं मानते।