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BHU आयुर्वेद में ‘गर्भ संस्कार थेरेपी’ से पैदा होंगे ‘अभिमन्यु’: भजन-मंत्र-वेद-पाठ के जरिए होगी महिलाओं की डिलीवरी

देश के प्रख्यात शैक्षणिक संस्थान काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के आयुर्वेद विज्ञान विभाग ने एक अनूठी प्रक्रिया शुरू की है जिसका नाम है, ‘गर्भ संस्कार थेरेपी’। इस थेरेपी का उद्देश्य महिलाओं के गर्भ में पल रहे शिशुओं को जन्म के पूर्व से ही अच्छे संस्कार दिए जाएँ। इस थेरेपी की सहायता से गर्भवती महिलाओं को वैदिक थेरेपी, ध्यान थेरेपी, आध्यात्मिक संगीत थेरेपी और पूजापाठ थेरेपी की मदद से गर्भ में पलने वाले शिशुओं का पालन-पोषण किया जाएगा।   

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि भारत की सनातन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति पूरे विश्व में अनुसंधान का विषय है। वर्तमान आधुनिक चिकित्सा पद्धति ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई बड़े सकारात्मक परिवर्तन किए हैं लेकिन प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति की उपयोगिता सबसे अलग है। इन बिंदुओं को मद्देनज़र रखते हुए पुरातन परम्पराओं का अनुसरण करते हुए गर्भ संस्कार थेरेपी की शुरुआत की गई है। बीएचयू के आयुर्वेद विभाग ने इस थेरेपी की शुरुआत इसलिए की जिससे शिशुओं को गर्भ में रहने के दौरान ही उचित संस्कार दिए जा सकें। 

इस मुद्दे पर बात करते हुए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के सुंदर लाल अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट, प्राध्यापक एसके माथुर ने इससे संबंधित कई अहम जानकारी दी। उन्होंने कहा, “गर्भ संस्कार कोई नई प्रक्रिया नहीं है। आयुर्वेद में इस प्रक्रिया का अनुसरण सदियों से हो रहा है, वैज्ञानिक स्वीकृति के बिना इस प्रक्रिया को उतनी अहमियत नहीं मिल पाई थी। हम गर्भ संस्कार को प्रसूति विभाग तंत्र (obstetrics) के अंतर्गत दोबारा नए सिरे से शुरू कर रहे हैं, यह गर्भवती महिलाओं के लिए ज़रूरी भी होता है।” 

इसके बाद उन्होंने कहा कि यह बात वैज्ञानिक रूप से सिद्ध की जा चुकी है कि अच्छे वातावरण और अच्छे संगीत का मस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। गर्भ संस्कार थेरेपी के तहत गर्भवती महिला को अच्छा संगीत, बेहतर साहित्य और प्रेरणादायक चीज़ें दिखाने पर जोर दिया जाएगा। गर्भ पर पड़ने वाले इन चीज़ों के प्रभाव को वैज्ञानिक विधि से देखा और समझा जाएगा। इस प्रक्रिया की शुरुआत सितंबर महीने के अंतिम हफ्ते में हुई थी जिसे फ़िलहाल लगभग पूरी तरह से क्रियान्वित किया जा रहा है।

आयुर्वेद विभाग के तहत आने वाले प्रसूति तंत्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सुनीता सुमन ने भी इस प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा, “आयुर्वेद में कुल 16 संस्कारों का उल्लेख है जिसमें से एक गर्भ संस्कार है। तमाम पौराणिक कथाओं के अनुसार गर्भ संस्कार का महत्व अत्यधिक है, इसके अनुसार शिशु को गर्भ के भीतर ही शिक्षा प्रदान करनी चाहिए। इस थेरेपी के अंतर्गत महिलाओं को वेद पढ़ने के लिए दिए जा रहे हैं। अस्पताल में भर्ती महिलाओं को भजन सुनाया जा रहा है, उन्हें अच्छे महापुरुषों से संबंधित साहित्य पढ़ाया जाता है। गर्भ में पलने वालों शिशुओं को जिस तरह का वातावरण मिलता है वह बड़े होकर वैसे ही बनते हैं। ऐसे में यह प्रक्रिया गर्भवती महिलाओं के लिए वरदान साबित होगी।”

भारतीय आयुर्वेद में गर्भ संस्कार थेरेपी कोई नई प्रक्रिया नहीं है, इसकी शुरुआत होने से महिलाओं में उल्लास और प्रसन्नता का माहौल है। गर्भवती महिलाओं का मानना है कि गर्भ संस्कार की मदद से शिशुओं को अच्छा संस्कार मिलेगा और वह समाज में बेहतर योगदान दे सकेगा। महाभारत में भी अर्जुन पुत्र अभिमन्यु ने माँ के गर्भ में रह कर ही चक्रव्यूह के 6 द्वार तोड़ने की शिक्षा ग्रहण की थी।           

कभी शाम होते घरों में बंद कर दी जाती थीं बिहार की महिलाएँ, आज हैं चुनावी बहस का हिस्सा: लालू से नीतीश तक के सफर में कुछ तो बदला है

अपने प्रिय नाटक ‘ध्रुवस्वामिनी’ की पुनः यात्रा ने पाटलिपुत्र की महान स्त्रियों की विरासत की चिर स्मृति मन में जगा दी। वही भूमि, जिसने 16 महाजनपदों की अवधारणा देकर भारत को राज करना सिखाया। उसकी महिलाएँ आत्मबल से कितनी लबालब होंगी, जिन्होंने भारतवर्ष को उत्तरोत्तर सम्राट तैयार कर के दिए!

रामायणकालीन माता सीता हों, जिन्होंने लंका जैसे शक्तिशाली साम्राज्य से अकेले निडरता से आँखें मिलाई, उर्मिला, जिन्होंने स्वाधिकार से लक्ष्मण को अपने स्वच्छंद धर्म निर्वाहन को प्रवृत्त किया। कैसा विषद आत्मबल रहा होगा सुजाता का, जिनकी ‘जैसे मेरी मनोकामना पूरी हुई, उसी तरह आपकी भी हो’ की शुभेक्षा से भरी खीर ग्रहण करने मात्र से बुद्ध को आत्मबोध हो गया।

फिर यशोधरा, मूरा, शुभाद्रंगी जैसे माताएँ और राजकन्याएँ हों, या उभया मिश्रा जैसी विदुषी, जिनके सामने शंकराचार्य को भी लगभग घुटने टेकने पड़े, बिहारी महिलाओं के शौर्य को बहुत दूर जाकर ढूँढना नहीं पड़ता।

वैसे ‘प्रिंट की जोती’ की मानें, या फिर यूँ भी बिहार मातृसत्तात्मक ही रहा है यानी, ‘बिहारी गाइज आर मोस्टली मम्माज़ बॉय’ (‘जोती’ जी से साभार) सिवाय एक यादव परिवार की बहू के, जो आधी रात को घर से निष्कासित की जाती है, उसे अपवाद रखें। हुआ तो गाँधी परिवार में मेनका जी के साथ भी ऐसा ही, परंतु हम इसे लेकर भारत में और बिहार में महिलाओं की पारंपरिक स्थिति पर धारणा नहीं बना सकते।

जैसा कि सर्वविदित है कि सामाजिक कुपोषण की पहली शिकार भी स्त्री होती हैं। वर्षों तक घोटालों और प्राकृतिक आपदा झेलता बिहार निश्चित ही अपने कई समर्थ नौनिहालों से हाथ धो चुका है और इसका बहुत बड़ा मूल्य महिलाओं ने चुकाया।

एक ‘जातउद्घोषक’ सरकार में एक जाति विशेष की महिलाओं के चुन-चुन कर बलात्कार किए जाने की बात हो या बाहुबलियों की अतिशयोक्ति, बिहार की ललनाओं की परीक्षा सदियों तक चली।

वैसे, लालू के समय में जो बिटिया शाम होते ही ढोर जैसे घरों में बंद कर दी जाती थी, अब शाम को विहंगो जैसे साईकिल पर उन्मुक्तता से बैठ बिहार विहार करती है। इस वाक्य के अलंकार निश्चय ही भावातिरेक में लालू के उस काल को सोच कर आते हैं, जब अपराध ने अपनी नई सीमाएँ तय कीं।

सीमाएँ ही नहीं, अपराध निरन्तर नए रूप और प्रतिमान स्थापित करता रहा। स्वाभाविक है कि समाज में अपराध की पहली और अंतिम भोक्ता महिलाएँ होती हैं, चाहे आपको कुल का मान मर्दन करना हो, या फिर व्यक्ति और समुदाय का। लेकिन NRCB के आँकड़ों से यह जानना बहुत सुखद रहा कि नीतीश कुमार के शासन में बिहार में महिलाओ के विरूद्ध अपराध भारत में तीसरे पायदान पर हैं। राजस्थान और दिल्ली से कहीं अधिक सुरक्षित बिहार अब स्वछंद साँस लेता प्रतीत होता है।

इस चुनावी मौसम में तब जानने का मन हुआ कि राजनीतिक पराक्रम के खेल में महिलाओं को लेकर कोई चुनावी वार्ता है भी या नहीं? इसी क्रम में बिहार में जारी विधानसभा चुनाव के चुनावी एजेंडे पर देखे गए कुछ राजनीतिक भाषणों से भी वास्ता पड़ा।

आशानुरूप, सबसे निराशाजनक बात थी कि बिहार के राजपुत्रों- तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव के भाषणों से खानापूर्ति के अलावा महिला विकास और सशक्तिकरण जैसे शब्द ही गायब थे। चिराग ज्यादा सुनने में नहीं आए पर वो अपेक्षाकृत काफी कुशल वक्ता और नेता हैं।

ऐसे ही भारतीय जनता पार्टी का पक्ष रखते हुए श्री गुरुप्रसाद पासवान को इस बीच काफी न्यूज चैनल पर सुना जिसमें कुछ महत्वपूर्ण बातें पता चलीं। इसके अनुसार, बिहार में इस बीच राजग सरकार के अंतर्गत –

  • 7 करोड़ जन-धन खाते, जो अक्टूबर 2020 तक खुले, उनमें 2.5 करोड़ महिलाओं के हैं
  • 4 लाख मुद्रा योजना के अन्तर्गत आवंटित ऋण में 2.5 लाख महिलाएँ लाभान्वित हुईं
  • 15 करोड़ महिलाएँ स्वयम सहायता के माध्यम से एमेजॉन, फ्लिपकार्ट जैसी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों में बहुआयामी भूमिका निबाह रही हैं।
  • इसमें समाज की सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्था, पंचायत में दिया गया आरक्षण उल्लेखनीय है

यह जानकारी उत्साहजनक है और उससे भी ऊपर, यह देखना सुखद है कि बिहार के राजनीति में लालू के जातिगत गोलबंदी और तुष्टीकरण से ऊपर महिला विकास और सशक्तिकरण का एक स्वस्थ और बहुप्रतीक्षित विमर्श शुरू हुआ जो अब तब बिहार के राजनीतिक पृष्ठभूमि से नदारद था! इस सकारात्मकता का स्वागत होना चाहिए और ईश्वर इस मंथन को पुष्पित-पल्लवित करे!

नोट: यह लेख श्रद्धा सुमन राय द्वारा लिखा गया है, जो कि वर्तमान में एक बहुराष्ट्रीय संस्था में यांत्रिक अभियंता के पद पर कार्यरत हैं।

‘हिन्दू SC/OBC जाति प्रमाण पत्र वाले ईसाई पादरियों को आंध्र सरकार ने दिए ₹5000’: NGO के पत्र पर कार्रवाई का आदेश

आंध्र प्रदेश में NGO ‘लीगल राइट्स प्रोटेक्शन फोरम’ ने अपनी रिसर्च में पाया था कि राज्य में 29841 ईसाई पादरियों को 5000 रुपए का एकबारगी मानदेय दिया गया। ये रुपए ‘डिजास्टर रिलीफ फण्ड’ से दिए गए। साथ ही इनमें से 70% ऐसे हैं, जिनके पास SC/OBC जाति प्रमाण पत्र हैं। अब केंद्रीय समाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने इस मामले में कार्रवाई के लिए आंध्र प्रदेश के अधिकारी को पत्र लिखा है।

NGO ने उस पत्र को अपने ट्विटर हैंडल से शेयर करते हुए बताया कि मंत्रालय ने आंध्र प्रदेश के सामाजिक कल्याण मंत्रालय के प्रधान को पत्र लिख कर हिन्दू SC/OBS जाति प्रमाणपत्र के जरिए 5000 रुपए उठाने वाले पादरियों पर कार्रवाई के बाद ‘एक्शन टेकेन रिपोर्ट’ भेजने को कहा है। NGO ने इस मामले में नेशनल SC & BC कमीशन को पत्र लिखते हुए इसे ईसाई धर्मान्तरण के लिए सरकारी प्रलोभन करार दिया था।

इन दोनों आयोगों ने NGO ‘लीगल राइट्स प्रोटेक्शन फोरम’ ने निवेदन किया था कि इस मामले में जाँच कराई जाए और इसके लिए एक फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी का गठन कर के उसे आंध्र प्रदेश भेजा जाए। साथ ही उसने इस मामले में आंध्र प्रदेश के राज्यपाल को भी पत्र लिख कर ईसाई पादरियों के हिन्दू SC/OBC जाति प्रमाण पत्र रद्द करने को कहा था, क्योंकि ये एक साथ दो-दो धर्मों की सुविधाओं का फायदा उठा रहे हैं।

NGO ने इसे ‘दोहरी धार्मिक पहचान’ का खुलासा करते हुए माँग की है कि न सिर्फ एक साथ दो-दो धर्मों की सुविधाओं का लाभ उठा रहे इन पादरियों पर कार्रवाई की जाए, बल्कि आंध्र प्रदेश सरकार को भी पादरियों को मानदेय देने से रोका जाए। संस्था ने इसे करदाताओं के बहुमूल्य योगदान की बर्बादी करार दिया। उसने कहा कि आंध्र प्रदेश की सरकार हर महीने ऐसे पादरियों को वेतन देने जा रही है, जो अच्छी बात नहीं है।

हाल ही में कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोमवार (अक्टूबर 19, 2020) को बेंगलुरु से 80 किलोमीटर दूर कपालबेट्टा में जीसस क्राइस्ट की दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा पर चल रहे कार्य को रोकने का आदेश दिया था, जिसका शिलान्यास कॉन्ग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने किया था। रामनगर जिले में चल रहे इस काम को रोकते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा था कि उसकी अनुमति के बिना इस पर कोई काम नहीं होना चाहिए। एक PIL पर सुनवाई करते हुए उच्च-न्यायालय ने ये आदेश सुनाया।

‘तुम्हें ई-तमाचा मारूँ क्या?’: UN ने हिन्दुओं को दिया ‘पर्यावरण फ्रेंडली’ दीपावली बनाने का ज्ञान, लोगों ने लगाई लताड़

अब दीपावली के मौके पर हिन्दुओं को ज्ञान देने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) भी आगे आ गया है। ‘यूनाइटेड नेशंस (UN) इन इंडिया’ के ट्विटर हैंडल ने भारत के लोगों से अपील की है कि इस दीपावली वो खुल कर ‘ई-पटाखे’ फोड़ें। उसने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और ‘यूएन एनवायरनमेंट प्रोग्राम’ के साथ मिल कर लोगों से ‘पर्यावरण फ्रेंडली दीपावली’ मनाने की अपील की और इसके ‘जादू’ को अनुभव करने को कहा। हालाँकि, इससे कई लोग नाराज़ भी दिखे।

‘यूएन (UN) इन इंडिया’ ने लोगों से अपील की कि वो फेसबुक और इंस्टाग्राम पर ‘AR फिल्टर्स’ का इस्तेमाल कर के अपने बचपन के फेवरिट पटाखों के साथ तस्वीरें पोस्ट करने को कहा। इसके जवाब में ‘उत्तराखंड वॉर मेमोरियल’ के अध्यक्ष तरुण विजय ने पूछा कि क्या कभी संयुक्त राष्ट्र ने ‘पर्यावरण फ्रेंडली’ ईद या क्रिसमस मनाने की अपील की है? अन्य लोगों ने पूछा कि क्या दीपावली पर हिन्दुओं को पटाखे न फोड़ने के ज्ञान देने की जगह इन दोनों त्यौहारों पर पर्यावरण बचाने की अपील करने की UN की हिम्मत भी है?

कुछ अन्य लोगों ने कहा कि उनका मन कर रहा है कि संयुक्त राष्ट्र की इस ट्वीट पर वो उसे ऑनलाइन ही ‘ई-तमाचा’ मारें। वहीं एक व्यक्ति ने याद दिलाया कि जब पूरी दुनिया में पर्यावरण को लेकर कोई बात भी नहीं होती थी, तब अति-प्राचीन काल में भारतीय सभ्यता में पर्यावरण की बातें की जाती थीं। उसने याद दिलाया कि ऋग्वेद और यजुर्वेद में पेड़ों को न काटने और प्रदूषण न फैलाने की बात कही गई है।

एक अन्य ट्विटर यूजर ने लिखा कि अगर पटाखों को प्रतिबंधित ही करना है तो सालों भर ऐसा किया जाना चाहिए, सिर्फ दीपावली के मौके पर नहीं। साथ ही नए वर्ष के मौकों पर पटाखों के महिमामंडन करने पर भी सवाल किया। कइयों ने उस पर हिन्दूफोबिया फैलाने का आरोप लगाया। एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि हमारे त्यौहार आपके लिए ‘सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम’ नहीं है। एक ने सेलेब्रिटीज की शादियों और IPL के समय भी ज्ञान देने को कहा।

वहीं एक ट्विटर यूजर ने एक वीडियो के माध्यम से हमला बोला। उसने दावा किया कि ये वीडियो यूएन हेडक्वार्टर के पास हुए पटाखों के सेलेब्रेशन का है। साथ ही पूछा कि क्या इससे पर्यावरण में प्रदूषण नहीं फैलता? उसने याद दिलाया कि अमेरिका की जनसंख्या भारत की एक तिहाई है लेकिन वो भारत से ढाई गुना ज्यादा प्रदूषण फैलाता है। लोगों ने प्रदूषण फैलाने वाले बड़े-बड़े अन्य कारकों पर उपाय करने को कहा, जबकि UN दीपावली पर हिन्दुओं को ‘ई-पटाखे’ फोड़ने पर ज्ञान दे रहा है।

बता दें कि दिल्ली में दीपावली से पहले केजरीवाल सरकार ने भी पटाखों को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। दिल्ली सरकार में पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने शुक्रवार (नवंबर 6, 2020) को इसकी जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि पटाखे जलाने और पटाखे बेचने वालों पर ₹1 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इससे पहले सीएम केजरीवाल ने ग्रीन क्रैकर समेत किसी भी प्रकार के पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया था।

बिहार चुनाव: पूर्णिया में मतदाताओं की भीड़ ने किया सुरक्षा बलों पर हमला, 5 राउंड फायरिंग, 2 लोग गिरफ्तार

शनिवार (नवंबर 7, 2020) को बिहार में तीसरे और अंतिम चरण का चुनाव चल रहा है। इस दौरान पूर्णिया में फायरिंग की बातें कही जा रही है। दो मतदाताओं की गिरफ़्तारी की खबर भी है। बताया गया है कि मतदान केंद्र पर अचानक से मतदाताओं ने हमला बोल दिया, जिसके बाद CISF के जवानों ने पाँच राउंड हवाई फायरिंग की। हालाँकि, चुनाव आयोग ने अभी तक बिहार के पूर्णिया में मतदान के दौरान मतदाताओं और जवानों की झड़प में फायरिंग होने की पुष्टि नहीं की है।

‘प्रभात खबर’ की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्णिया जिला के मरंगा थाना अंतर्गत सतकोदरिया पंचायत के अलीनगर बूथ संख्या 282 पर मतदाताओं की एक बड़ी भीड़ जमा हो गई। उन्होंने बताया कि वो अपना मताधिकार का प्रयोग करने आए हैं। चूँकि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण इस बार के चुनावों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन कराया जा रहा है, इसीलिए सुरक्षा बलों ने मतदाताओं को लाइन में लगने को कहा।

अचानक से मतदाताओं ने कतार छोड़नी शुरू कर दी और लाइन को तोड़ दिया। इसके बाद जवान उन्हें समझाने लगे, लेकिन मतदाताओं ने उनकी बात नहीं बनी। इसी बात को लेकर सुरक्षा बलों के जवानों और मतदाताओं के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मतदान केंद्र पर भीड़ ने हमला बोल दिया। बताया जा रहा है कि स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस द्वारा 5 राउंड फायरिंग की गई। 2 मतदाताओं को गिरफ्तार किए जाने की खबर भी सामने आई है।

पूर्णिया के एसपी विशाल शर्मा ने इस घटना की पुष्टि की है। साथ ही, लाठीचार्ज की बात भी मीडिया द्वारा कही जा रही है। मतदाताओं का आरोप है कि सुरक्षाकर्मियों ने ही उनकी पिटाई की, जिसके बाद विवाद शुरू हुआ। मतदान केंद्र पर वरिष्ठ अधिकारी पहुँचे हैं और BSF के जवानों को लगाया गया है। वहीं, बिहार चुनाव के दौरान मतदाताओं ने पूर्णिया के अधिकारियों के सामने सुरक्षा बलों के जवानों पर उनसे अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया और कहा कि उन्होंने हमला नहीं किया।

बिहार चुनाव: नीतीश के ‘तीर’ को वोट देने पर RJD समर्थकों ने बुजुर्ग को बेरहमी से पीटा

बिहार में एक बुजुर्ग ने नीतीश कुमार के चुनाव चिन्ह तीर पर वोट देने की बात कही तो लालटेन के निशान वाले RJD समर्थकों ने बुजुर्ग की बुरी तरह से पिटाई कर डाली। सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है, जिसमें बुजुर्ग व्यक्ति RJD के गुंडों द्वारा अपने साथ की गई मारपीट के बारे में बता रहे हैं। गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण का मतदान जारी है।

बुजुर्ग के साथ मारपीट करने वाले लोग कथित तौर पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के समर्थक बताए जा रहे हैं और वह बुजुर्ग व्यक्ति को इसलिए पीट रहे हैं क्योंकि उन्होंने बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी के लिए मतदान किया।

भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल प्रभारी अमित मालवीय ने इस घटना का वीडियो ट्वीट किया। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “यह वीडियो मधेपुरा का है जहाँ तीर (जेडीयू) पर वोट देने की बात कही तो आरजेडी समर्थकों ने बुजुर्ग की बुरी तरह पिटाई कर दी। आरजेडी का मतलब बिहार में गुंडाराज।” घटना बिहार, मधेपुरा जिले के भवानीपुरा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत बरगाँव की बताई जा रही है।   

मतदान के दौरान इस तरह के वीडियो का सामने आना बिहार में राजद की गुंडागिर्दी को दर्शाता है। वीडियो में लोग बुजुर्ग व्यक्ति से पूछते हैं कि उनके साथ क्या हुआ तब वह बताते हैं कि आरजेडी के स्थानीय नेताओं और समर्थकों ने उसे नीतीश कुमार की पार्टी को मतदान करने के लिए अपशब्द कहा और बुरी तरह पीटा। बुजुर्ग रोते हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हैं। वो कह रहे हैं कि आरजेडी के समर्थकों ने उसके साथ हिंसा की और कपड़े तक फाड़ दिए।

आज सुबह 7 बजे से ही बिहार की 78 विधानसभा चुनाव सीटों के लिए 16 जिलों में मतदान शुरू हो चुका है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार तीसरे चरण के चुनाव में लगभग 2.34 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करने वाले हैं, नतीजतन चुनाव आयोग ने भी इससे संबंधित हर ज़रूरी प्रबंध और दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं।

तीसरे और अंतिम चरण के चुनावों में 1204 उम्मीदवारों का भाग्य दांव पर लगा है। इसमें राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सर्वाधिक 46 उम्मीदवार हैं, लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के 42, जनता दल (यूनाइटेड) (जदयू) के 37, भारतीय जनता पार्टी के 35 और कॉन्ग्रेस के 25 उम्मीदवार शामिल हैं।

‘आज तक’ ने हाथरस मामले में किया HC के आदेश का उलंघन, IB मंत्रालय ने दिए NBSA को कार्रवाई करने के निर्देश

न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग स्टैण्डर्ड अथॉरिटी (NBSA) ने ‘इंडिया टुडे मीडिया नेटवर्क’ के समाचार चैनल ‘आज तक’ को नोटिस भेजा है। ये नोटिस इलाहबाद हाईकोर्ट के आदेश के उल्लंघन को लेकर भेजा गया, जिसमें उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुई घटना की जाँच को लेकर गोपनीयता बरतने की बात कही गई थी।

मंत्रालय के आदेश के बाद अब इस मामले में समाचार चैनल ‘आज तक’ के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ये नोटिस बृहस्पतिवार (नवंबर 5, 2020) को भेजा गया। ज्ञात हो कि यूपी के हाथरस में एक अनुसूचित जाति की युवती की मौत को विपक्षी दलों ने राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने NBSA को निर्देश दिए हैं कि वो ‘आज तक’ चैनल के खिलाफ उचित कार्रवाई करे। कॉन्ग्रेस पार्टी के समर्थक साकेत गोखले द्वारा दायर की गई शिकायत के बाद ये आदेश दिया गया। गोखले ने उत्तर प्रदेश सरकार के एडिशनल मुख्य सचिव को पत्र लिख कर आरोप लगाया था कि ‘आज तक’ ने हाथरस मामले में चल रही सीबीआई जाँच को लेकर खबर चलाई, जबकि इलाहबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में गोपनीयता बरतने के स्पष्ट आदेश दिए थे।

केंद्रीय मंत्रालय ने NBSA को लिखा पत्र (फोटो साभार: LiveLaw)

समाचार चैनल ‘आज तक’ ने सीबीआई द्वारा मृतका के परिवार से पूछे गए प्रश्नों को लेकर खबर चलाई थी, जिसे साकेत गोखले ने इलाहबाद हाईकोर्ट के आदेश के उलंघन का मामला बताया। गोखले ने इसे ‘शर्मनाक’ करार दिया। अब केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने NBSA से कहा है कि वो 15 दिनों के भीतर इस मामले में एक्शन ले। ‘इंडिया टुडे मीडिया नेटवर्क’ इससे पहले भी कई नियमों के उल्लंघन के मामलों में एजेंसियों की जाँच का सामना कर रहा है।

इससे पहले, न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड अथॉरिटी (NBSA) ने इंडिया टुडे समूह के हिंदी भाषा समाचार चैनल ‘आज तक’, ज़ी न्यूज़, न्यूज़ 24 और इंडिया टीवी को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की असंवेदनशील और सनसनीखेज रिपोर्टिंग के लिए माफी माँगने का आदेश दिया था। ब्रॉडकास्टिंग अथॉरिटी ने ‘आज तक’ को 27 अक्टूबर को रात 8 बजे अपने चैनल पर ‘लाइव’ माफी माँगने का आदेश दिया था। हिंदी समाचार चैनल ने 28 अक्टूबर को रात 9 बजे के बाद अपनी माफी को प्रसारित किया।

केरल की चर्च में IT रेड: प्रचारक ने गरीबों के नाम पर जुटाया विदेशी टैक्स-फ्री चंदा, इसाई प्रचार व रियल एस्टेट में किया निवेश

IT विभाग ने केरल स्थित ‘बिलीवर्स ईस्टर्न चर्च’ और इसके मुखिया इसाई मत के प्रचारक केपी योहानन के घर और ऑफिस में छापेमारी की। हाल ही में इस चर्च पर आरोप लगा कि वह चैरिटी फंड (दान निधि) का इस्तेमाल धार्मिक और निजी कार्यों के लिए कर रहा है, जिसके बाद स्थानीय लोगों से मिले इनपुट के आधार पर यह छापेमारी की कार्रवाई की गई। इसाई प्रचारक केपी योहानन पर आरोप है कि उसने गरीबों के नाम पर विदेश से धन इकट्ठा किया और उसका इस्तेमाल रियल एस्टेट क्षेत्र में और अपने निजी इन्वेस्टमेंट में किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ आयकर विभाग के सूत्रों ने इस मुद्दे पर कई अहम जानकारी दी। अधिकारियों ने योहानन के घर पर खड़ी एक गाड़ी से 57 लाख रुपए और कुछ फोन भी जब्त किए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़, छापेमारी का अभियान गुरुवार (5 नवंबर 2020) को शुरू हुआ था और यह अभी तक केरल समेत देश के अन्य क्षेत्रों में जारी है। अभी तक अनेक परिसरों से लगभग 8 करोड़ रुपए बरामद किए जा चुके हैं। फ़िलहाल छापेमारी का यह अभियान जारी है। गौरतलब है कि 2012 में भी राज्य सरकार ने केपी योहनन के खिलाफ जाँच का आदेश दिया था।

आयकर विभाग के सूत्रों के अनुसार, ‘बीलीवर्स ईस्टर्न चर्च’ देशभर में कई पूजास्थलों, विद्यालयों, कॉलेजों तथा केरल में एक मेडिकल कॉलेज और एक अस्पताल का संचालन करता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, चर्च को गरीबों और निराश्रितों की मदद के लिये विदेश से दान प्राप्त हुआ है, लेकिन वास्तव में इस तरह के टैक्स फ्री फंड का अचल संपत्ति लेनदेन में व्यक्तिगत और अन्य अवैध खर्चों के लिये बेहिसाब नकद लेनदेन में इस्तेमाल किया गया था।

इसके अलावा, केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने पहले ही केरल के बिलीवर्स ईस्टर्न चर्च का एफ़सीआरए (Foreign Contribution Regulation Act) एमाउंट रद्द कर दिया था। यह कार्रवाई तब की गई जब यह पता चला कि विदेशों से मिलने वाले आर्थिक सहयोग (फंड्स) की वजह चैरिटी (दान) होती है, लेकिन यहाँ उसका इस्तेमाल धार्मिक कार्यों के लिए होता है।

‘चर्च को विदेश से मिलने वाला चंदा समुचित माध्यमों से मिला था लेकिन उन्होंने इसका धार्मिक उपयोग में किया। एफ़सीआरए रद्द होने के बावजूद चर्च का प्रयास रहता था कि अन्य ट्रस्ट की मदद से फंड्स मिल जाएँ। 

आयकर विभाग चर्च द्वारा किए गए पिछले 10 साल के लेन-देन की जानकारी एकत्रित कर रहा है। चर्च को पिछले कुछ सालों में लगभग 4 हज़ार करोड़ रुपए का आर्थिक सहयोग मिला जिसमें से ज़्यादातर राशि धार्मिक संस्थाओं के निर्माण और रियल स्टेट कारोबार में खर्च हो गया।

प्रथम दृष्टया ऐसी जानकारी सामने आ रही है कि चर्च ने लगभग 1 हज़ार करोड़ रुपए रियल स्टेट में खर्च किए है। चैरिटी (दान निधि) के लिए दिए गए आर्थिक सहयोग का इस्तेमाल चर्च चलाने के लिए हुआ है जो कि धार्मिक कार्य है। क्योंकि छापेमारी का अभियान जारी है इसलिए दिशानिर्देशों के उल्लंघन की सीमा के बारे में फ़िलहाल कोई दावा नहीं किया जा सकता है।     

केरल सरकार करेगी मंदिर में ST समुदाय के पुजारी की नियुक्ति: मंदिर बोर्ड पहले भी कर चुका है 6 दलितों को शामिल

केरल की राज्य सरकार ने त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड (Travancore Devaswom Board) में अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय के एक व्यक्ति को मंदिर के पुजारी के रूप में नियुक्त करने का फैसला किया है। यह पहली बार है जब अनुसूचित जनजाति समुदाय के किसी शख्स को बोर्ड के पुजारी के तौर पर नियुक्त किया गया है। 2017 में बोर्ड में 6 दलितों को भी शामिल किया गया था।

त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड राज्य के 1248 मंदिरों की देखभाल और प्रबंधन का जिम्मा संभालता है। फ़िलहाल, पार्ट टाइम आधार पर बोर्ड में 18 एससी (SC) और 1 एसटी (ST) पुजारी की नियुक्ति की गई है। सबरीमाला स्थित भगवान अयप्पा के मंदिर का प्रबंधन भी यही बोर्ड करता आ रहा है। मंदिर बोर्ड, जो कि केरल राज्य की वामपंथी सरकार के अधीन है, एसटी समुदाय के एक व्यक्ति को पुजारी नियुक्त करेगा।

केरल राज्य के पर्यटन और देवास्वोम मंत्री कडकमपल्ली सुरेंद्रन ने जानकारी दी है कि ये पहली बार है जब राज्य में त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड ने किसी अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय के पुजारी की नियुक्ति का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि बोर्ड फिर से इतिहास रच रहा है और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) वर्ग के 19 व्यक्तियों को त्रावणकोर देवस्वॉम बोर्ड में अंशकालिक शांति अधिकारी के पद पर नियुक्ति के लिए सिफारिश की जाएगी। उन्होंने बताया:

“अगस्त 23, 2017 को अस्तित्व में आई रैंक सूची से त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड में अंशकालिक शांति के पद के लिए अब तक 310 व्यक्तियों का चयन किया गया है। हालाँकि, चूँकि उस समय परीक्षा के लिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) के पर्याप्त उम्मीदवार नहीं थे, इसलिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए विशेष अधिसूचना के अनुसार तैयार की गई रैंक सूची को अंतर को भरने के लिए बृहस्पतिवार (नवंबर 11, 2020) को प्रकाशित किया गया था। अनुसूचित जनजाति के लिए 4 रिक्तियाँ थीं लेकिन केवल एक आवेदन प्राप्त हुआ था।”

उन्होंने ये भी जानकारी दी कि जब से LDF सरकार सत्ता में आई है, भर्ती बोर्ड को पुनर्गठित किया गया है और 474 उम्मीदवारों को त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड में विभिन्न पदों के लिए चुना गया है, कोचीन देवस्वोम बोर्ड में विभिन्न पदों के लिए 325 उम्मीदवारों का चयन किया गया है और 16 उम्मीदवारों का चयन मालाबार देवास्वोम बोर्ड के लिए किया गया है। उन्होंने ये भी बताया कि अब तक तीन देवस्वाम बोर्डों के लिए कुल 815 उम्मीदवारों का चयन किया गया है।

विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने भी 5000 ऐसे पुजारियों को प्रशिक्षित कर विभिन्न मंदिरों में नियुक्त किया है, जो एससी-एसटी (दलित) समुदाय से आते हैं। संगठन के निवेदन के बाद विभिन्न राज्य सरकारों ने भी अपने पैनल में इन पुजारियों को जगह दी है। खासकर दक्षिण भारत में संगठन को इस कार्य में खासी सफलता मिली है। अकेले तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में एससी-एसटी (दलित) समुदाय के 2500 पुजारियों को प्रशिक्षित किया गया है।

मस्जिद में हनुमान चालीसा पढ़ने-पढ़ाने वाले BJP नेता व मौलवी को भरना पड़ा ₹10 लाख का मुचलका

उत्तर प्रदेश के बागपत के विनयपुर गाँव स्थित मस्जिद में हनुमान चालीसा और गायत्री मंत्र का पाठ करने के मामले में स्थानीय पुलिस ने भाजपा नेता और मौलवी से मुचलका (बॉन्ड) भरवाया। खेकड़ा थाने के पुलिस निरीक्षक अनिल कुमार ने शुक्रवार (नवंबर 6, 2020) को जानकारी दी कि 5-5 लाख रुपए का मुचलका बनाया गया और उस पर भाजपा नेता मनुपाल बंसल और मौलवी अली हसन से हस्ताक्षर करवाए गए। इसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया।

पुलिस का कहना है कि इस घटना को लेकर कहीं भी किसी भी प्रकार का तनाव नहीं है और स्थिति पूरी तरह सामान्य है। हाल ही में खबर आई थी कि मस्जिद में हनुमान चालीसा और गायत्री मंत्र का पाठ करने की अनुमति देने वाले मौलवी को मुस्लिम समाज के लोगों ने बैठक कर के मस्जिद से निकाल दिया है। पुलिस ने इस घटना को असत्य बताते हुए कहा कि मौलाना अली हसन को निकाले जाने की खबर सही नहीं है।

पुलिस ने बताया कि मौलवी को कुछ दिनों के लिए घर भेजा गया है और वो कुछ ही दिनों में वापस आ जाएँगे। वहीं भाजपा जिला कार्यकारिणी सदस्य एवं जनसंख्या फाउंडेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनुपाल बंसल ने दावा किया है कि भाजपा या उनकी संस्था का इस घटना से कोई लेना-देना नहीं है और ये उनका व्यक्तिगत निर्णय था। उन्होंने मौलवी को निकाले जाने की बात पर कहा कि ये गलत है क्योंकि उन्होंने तो भाईचारे का सन्देश दिया था।

दरअसल बागपत में खेकड़ा क्षेत्र के विनयपुर गाँव में भाजपा की जिला कार्यकारिणी सदस्य एवं जनसंख्या फाउंडेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनुपाल बंसल मंगलवार (नंवबर 3, 2020) को मस्जिद में पहुँचे थे। उनका कहना था कि मौलाना अली हसन से इजाजत लेने के बाद उन्होंने भाईचारे के लिए पवित्र स्थान मस्जिद में हनुमान चालीसा का पाठ किया। हनुमान चालीसा के पाठ को फेसबुक पर लाइव किया गया और गायत्री मंत्र का पाठ भी किया गया था। 

इससे पहले एक अलग घटना में उत्तर प्रदेश में मथुरा के एक मंदिर में नमाज पढ़ने के बाद गोवर्धन इलाके की ईदगाह में चार युवकों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया था। ईदगाह मस्जिद में मंगलवार (नवंबर 3, 2020) सुबह किए गए इस हनुमान चालीसा पाठ का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो पुलिस एक्शन में आई और तत्काल चारों युवकों को हिरासत में ले लिया गया था। युवकों का शांतिभंग की धाराओं में चालान कर जेल भेज दिया गया था।