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मुंबई इंडियंस की जीत का वो सिपाही, जो 3 साल से लगातार बना रहा 400+ रन, फिर भी टीम इंडिया में नहीं मिली जगह

मंगलवार (नवंबर 10, 2020) को दुबई में IPL के 13वें संस्करण का फाइनल मैच हुआ और मुंबई इंडियंस (Mumbai Indians) ने बड़ी जीत दर्ज की। मुकेश अम्बानी के स्वामित्व वाली टीम ने रोहित शर्मा की कप्तानी में 5वीं IPL ट्रॉफी जीती। इस तरह से 2013 से हुए IPL के 8 संस्करणों में से 5 में खिताब मुंबई इंडियंस (Mumbai Indians) के नाम गया। इस टीम के पास दो चैंपियंस लीग की ट्रॉफियाँ भी हैं। कुल मिलाकर इसके पास 7 बड़े खिताब हैं।

अगर बल्लेबाजी की बात करें तो मुंबई इंडियंस (Mumbai Indians) की बैटिंग क्रम की सफलता के दो सबसे बड़े सूत्र भारत के दो युवा बल्लेबाज रहे। वो हैं ईशान किशन और सूर्यकुमार यादव। जहाँ ईशान किशन छक्के मारने में महारत रखते हैं, सूर्यकुमार यादव अपनी निरंतरता के लिए जाने जाते हैं, दर्शनीय शॉट्स खेलने के लिए जाने जाते हैं। दोनों युवा बल्लेबाजों ने अभी तक टीम इंडिया का मुँह नहीं देखा है, उन्हें शॉर्टर फॉर्मैट्स में भी नहीं चुना गया है।

IPL-13 में सूर्यकुमार यादव के सम्बंधित दो ऐसे मोमेंट्स आए, जब क्रिकेट के फैंस को उनकी जबरदस्त उपस्थिति का एहसास हुआ। अबुधाबी में अक्टूबर 28, 2020 को मुंबई इंडियंस और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) का मैच चल रहा था। RCB ने पहले बैटिंग करते हुए 164 रनों का सम्मानजनक स्कोर खड़ा किया। उस मैच में चेज करते समय एक छोड़ से मुंबई इंडियंस के विकेट्स गिर रहे थे, लेकिन ‘सूर्य’ की चमक बढ़ती जा रही थी।

मात्र 43 बॉल पर नाबाद 79 रन बना कर चौकों-छक्कों की बरसात करने सूर्यकुमार यादव के लिए एक मौका ऐसा भी आया, जब भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली (जो RCB के भी कप्तान हैं) से उनका आमना-सामना हुआ। दोनों ने एक-दूसरे को कुछ देर तक देखा और फिर खेल में लग गए। लेकिन, वो तस्वीर काफी चर्चित हुई और इसीलिए भी, क्योंकि उससे 2 दिन पहले ही ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए टीम का ऐलान हुआ था और सूर्य उसमें नहीं थे।

इस मैच को जिताने के बाद सूर्यकुमार यादव ने ‘मैं हूँ ना’ (फिल्म नहीं) वाला एक्सप्रेशन दिया और टीम के प्रबंधन और फैंस को एक तरह से आश्वस्त किया कि जब तक वो मैदान के बीच में मौजूद हैं, उन्हें टेंशन लेने की कोई ज़रूरत नहीं है। ये तस्वीर और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर खुल कर घूमा। इसके बाद ‘दिल जीतने वाला’ अगले मोमेंट फाइनल मैच में आया, जब उन्होंने रोहित शर्मा के लिए अपना विकेट ‘सैक्रिफाइस’ कर दिया।

रोहित शर्मा अपना अर्धशतक पूरा करने वाले थे और ऐसे में सूर्यकुमार यादव को लगा कि वो सेट बल्लेबाज हैं और और उन्हें आउट नहीं होना चाहिए। सूर्यकुमार यादव भी वहाँ से जिताने की क्षमता रखते थे और अच्छा खेल रहे थे, लेकिन जब रन आउट का मौका था और रोहित शर्मा आगे निकल आए थे, तब सूर्य ने अपने एन्ड से विकेट दे दिया। इसके बाद उनके इस ‘सैक्रिफाइस’ की चारों तरफ चर्चा हुई।

इस खिलाड़ी की खासियत ये है कि इसने सिर्फ इस साल ही परफॉर्म नहीं किया है बल्कि पिछले 3 सालों से लगातार ऐसा ही तूफानी खेल का मुशायरा कर रहा है। 2018, 19 और 20 – लगातार 3 साल इन्होंने IPL में 400 रनों का आँकड़ा पार किया है। इससे पहले वो ऊपरी क्रम में नहीं उतरते थे लेकिन तब भी उनका प्रदर्शन जानदार हुआ करता था। वो अक्सर नाबाद रहते थे। लेकिन, 30 वर्षीय ‘SKY’ को टीम में जगह नहीं मिली।

यहाँ तक कि कोलकाता नाइट राइडर्स के कप्तान रहे गौतम गंभीर भी कह चुके हैं कि KKR के लिए अगर पिछले 13 सालों में कुछ सबसे बड़ा लॉस हुआ है तो वो है सूर्यकुमार यादव का जाना। रणजी ट्रॉफी में भी मुंबई की तरफ से उनका प्रदर्शन शानदार रहा है और वो टीम का नियमित हिस्सा रहे हैं। टीम इंडिया के कोच रवि शास्त्री ने तो उन्हें धैर्य रखने को कहा है लेकिन देखना ये है कि उम्र के किस दहलीज पर उन्हें भारत के लिए खेलना का मौका मिलता है।

एक और युवा नाम है जो बिहार से आता है और इस साल IPL में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाला बैट्समैन भी है। वो विकेटकीपर भी है, लेकिन उसके ऊपर ऋषभ पंत को तरजीह दी जाती है, जो अब तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कुछ खास नहीं कर सके हैं और निरंतरता की कमी से जूझ रहे हैं। ईशान किशन धोनी के जाने के बाद के दौर में विकेटकीपर के रूप में टीम इंडिया में सेवा देने की क्षमता रखते हैं।

ईशान किशन अंडर-19 टीम की कप्तानी भी कर चुके हैं, ऐसे में उनके पास अनुभव की भी कमी नहीं है। ईशान किशन ने इस IPL की एक इनिंग में भी 90 रनों से अधिक की जुझारू पारी खेली और कई अन्य मैचेज में भी अपनी इनिंग से समझदारी से स्कोरबोर्ड को चलाया। इस साल उन्होंने यूएई में हुए IPL में 30 छक्के लगाए। जहाँ बॉलर्स का बोलबाला रहा, वहाँ इस तरह से बल्लेबाजी ज़रूर उन्हें खास बनाती है।

ठाकरे को ‘पेंगुइन’ कहने वाले समित ठक्कर को 3 सप्ताह में तीसरी बार जेल, 13 नवंबर तक पुलिस हिरासत में

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे के खिलाफ कथित आलोचनात्मक टिप्पणियाँ करने के आरोप में गिरफ्तार सोशल मीडिया यूजर समित ठक्कर को 13 नवंबर तक के लिए एक बार फिर से पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। आरोप है कि समित ठक्कर ने आदित्य ठाकरे को ‘बेबी पेंगुइन’ कह दिया था जिस कारण वो ठाकरे सरकार की नजरों में चढ़े हुए हैं।

गौरतलब है कि दीवाली की वजह से अदालत आगामी 13 से 15 नवंबर तक बंद है। इसका मतलब है कि समित को इस साल की दिवाली जेल में गुजारनी होगी। साथ ही उसकी जमानत अर्जी पर सुनवाई छुट्टियों के खत्म होने के बाद यानी 16 नवंबर को ही संभव है।

बता दें कि यह फैसला इस सप्ताह सोमवार को ठक्कर की जमानत अर्जी खारिज होने के बाद सामने आया। गिरगाँव की एक स्थानीय अदालत ने उसे फिर से गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। ठक्कर को अदालत से 2 नवंबर को जमानत मिलने के बाद मुंबई पुलिस ने उसे फिर से गिरफ्तार किया था।

आदित्य ठाकरे के खिलाफ किया था अपमानजनक पोस्ट

नागपुर पुलिस ने ट्विटर पर उनकी टिप्पणियों को लेकर नागपुर और मुंबई में कई प्राथमिकी दर्ज होने के बाद ठक्कर को उन्हें 24 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। इन टिप्पणियों में उन्होंने कथित तौर पर महाराष्ट्र के पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे को ‘बेबी पेंगुइन’ भी कहा था।

समित के खिलाफ 2 जुलाई को नागपुर और वीपी रोडपुलिस स्टेशन मुंबई में दो एफआईआर दर्ज की गईं थी। उन पर सीएम ठाकरे, आदित्य ठाकरे और नितिन राउत के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने का आरोप लगाया गया था। उन्होंने ठाकरे के खिलाफ 1 और 30 जून को ट्वीट पोस्ट किया था। जबकि 1 जुलाई को उन्होंने संजय राउत के खिलाफ एक ट्वीट पोस्ट किया था।

काले कपड़े पहनाए, चेहरा ढके और दोनों हाथ रस्सी से बांधा, समित का वायरल वीडियो

उल्लेखनीय है कि इससे पहले पिछले सप्ताह, सोशल मीडिया पर पुलिस के अधिकारियों की गिरफ्त में समित का एक वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो में समित ठक्‍कर को अदालत ले जाते समय उसे काले कपड़े पहनाए, चेहरा ढके और दोनों हाथ रस्सी से बाँधा हुआ देखा गया था। वीडियो 30 अक्टूबर का था। जिसके बाद समित ठक्‍कर को कोर्ट ने 2 नवंबर तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

वायरल हुए वीडियो को काफी दूर से लिया गया था। जिसमें पुलिसकर्मी साफ दिखाई दे रहे हैं। स्नेहा सिंघवी नाम की एक यूजर ने ट्विटर पर इस वीडियो को शेयर किया गया था। उन्होंने वीडियो पोस्ट करते हुए पुष्टि की थी कि काले कपड़े से ढका व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि ट्विटर यूजर समीत ठक्कर है।

वहीं 2 नवंबर को नागपुर कोर्ट द्वारा समित को जमानत दिए जाने के कुछ देर बाद मुंबई वीपी रोड पुलिस ने उसे अदालत परिसर से फिर गिरफ्तार किया और उसे मुंबई ले गई। समित के भाई ऋषि ने आरोप लगाया कि उनके भाई को एक सोची-समझी साजिश के तहत गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि समित के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज की गई हैं, इसलिए यदि वह एक में जमानत लेता है तो उसे साजिश के तहत अन्य एफआईआर के आधार पर गिरफ्तार कर लिया जाता है।

ये भारत के लोगों की जीत है: ‘भारत माता की जय’ ‘वंदेमातरम’ के नारों के साथ लौट आए अर्णब

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी जेल से बाहर आ गए हैं। उन्होंने बाहर आते ही ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारे लगाए। उन्होंने पूरे जोश के साथ कहा, “मैं सुप्रीम का आभारी हूँ। ये भारत के लोगों की जीत है।”

भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी को तत्काल रिहा करने के आदेश के बाद, उनके समर्थक और प्रशंसक उनकी रिहाई का जश्न मनाने के लिए देश भर में सड़कों पर उतर आए।

औपचारिकता पूरी होने के बाद जेल से बाहर आने पर भारत के सबसे बड़े टीवी समाचार नेटवर्क के संपादक का अभिवादन करने के लिए नवी मुंबई के तलोजा जेल के बाहर भी भारी भीड़ जमा हो गई। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में लोगों को जेल के प्रवेश द्वार के बाहर दीया जलाते हुए देखा गया और बड़ी संख्या में लोगों को रिहाई की खुशी मनाते देखा गया। गेट के बाहर जमा हुए लोगों को सच्चाई की जीत और झूठ की हार के नारे लगाते सुना जा सकता था।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अर्णब गोस्वामी को बेल दे दिया है। जमानत आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने इसे मानने के लिए मुंबई पुलिस को निर्देशित किया। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा था, “हम मानते हैं कि जमानत नहीं देने में हाईकोर्ट गलत था।” इसके साथ ही अर्नब गोस्वामी और दो अन्य आरोपितों को 50,000 रुपए के बॉन्ड पर अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया। पुलिस आयुक्त को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया जाता है कि आदेश का तुरंत पालन किया जाए।

अर्णब गोस्वामी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की थी। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा था कि अगर हम आज इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करते हैं तो बर्बादी की राह पर बढ़ जाएँगे। उन्होंने कहा था कि किसी की विचारधारा अलग हो सकती है और वो चैनल नहीं देखे, लेकिन संवैधानिक अदालतें अगर ऐसी आज़ादी की सुरक्षा नहीं करती हैं तो वो बर्बादी की राह पर बढ़ रही है।

बंगाल राजनैतिक हत्याओं पर सीधी चेतावनी देते हुए, मोदी ने बिहार चुनावों पर जनता का किया धन्यवाद

बिहार विधानसभा चुनाव में काँटे की टक्कर में एनडीए की जीत से उत्साहित भाजपा समर्थकों ने बुधवार (नवंबर 11, 2020) को दिल्ली भाजपा मुख्यालय में जश्न मनाया। कोरोना वायरस महामारी के बीच हुए बिहार विधानसभा चुनाव और विभिन्न राज्यों में हुए उपचुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार सफलता हासिल की है।

इन सफलताओं का जश्न मनाने के लिए बुधवार की शाम भाजपा मुख्यालय में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित समेत कई नेता पहुँचे।

‘मोदी-मोदी’ और ‘एक ही नारा एक ही नाम जय श्रीराम जय श्रीराम’ के नारों की गूँज के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘भारत माता की जय’ के नारे के साथ अपने भाषण की शुरुआत की। अपने सम्बोधन में उन्होंने बंगाल में होने वाली राजनैतिक हत्याओं का भी जिक्र किया और सीधी चेतावनी दी। जिससे कयास लगाए जा रहे हैं कि इनको लेकर केंद्र जल्द ही कोई कठोर कदम उठाने जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि कल जो नतीजे आए, उन्होंने साबित कर दिया कि आप काम करेंगे तो लोगों से आपको भरपूर आशीर्वाद भी मिलेगा। आप खुद को समर्पित करेंगे, चौबीसों घंटे देश के विकास के बारे में सोचेंगे तो आपको नतीजे मिलेंगे। देश की जनता आपकी मेहनत देख रही है। आपकी तपस्या को देख रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सफल चुनाव के लिए पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, “मैं हर कार्यकर्ता और उनके परिजनों को बधाई देता हूँ। ये चुनावी नतीजे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की कुशलता और प्रभावी रणनीति का परिणाम है। नड्डा जी आगे बढ़ो, हम आपके साथ हैं।” इसके बाद गृह मंत्री अमित शाह और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने खड़े होकर जेपी नड्डा का अभिवादन किया।

उन्होंने कहा कि कल सुबह से लेकर देर रात तक पूरे देश की नजरें टीवी पर थीं, ट्विटर पर थीं, चुनाव आयोग की वेबसाइट पर थीं। लोकतंत्र के प्रति हम भारतीयों की जो आस्था है, उसकी मिसाल पूरी दुनिया में कहीं नहीं मिलती। चुनाव नतीजों में हार-जीत अपनी जगह है लेकिन चुनाव की ये प्रक्रिया हर भारतीयों के लिए गौरव का विषय है, इसलिए पूरे देश को बधाई देता हूँ, धन्यवाद करता हूँ। इस चुनाव को सफलतापूर्वक, शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए चुनाव आयोग, देश के सुरक्षा बल और स्थानीय प्रशासन भी बधाई के पात्र हैं।

वो आगे कहते हैं, “कुछ चीजें तो हम देश में भूल गए हैं। आपको पता होगा कि पहले जब चुनाव होते थे तो दूसरे दिन हेडलाइंस आती थीं बूथ लूट की, दोबारा मतदान की। आज खबर आती है कि पोलिंग बढ़ा, पुरुषों का वोट बढ़ा। पहले बिहार में यह खबर आती थी कि इतने लोग मारे गए। लेकिन अब नहीं। कोरोना की वजह से मतदान कम होगा, इस आशंका को लोगों ने ध्वस्त कर दिया। कोरोना के इस संकट काल में चुनाव कराना आसान नहीं था लेकिन हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्थाएँ इतनी सशक्त और पारदर्शी हैं कि चुनाव कराकर दुनिया को भी भारत की ताकत का अहसास कराया है।”

पीएम मोदी ने कहा, “चुनाव नतीजों के निहितार्थ बहुत गहरे हैं, मायने बहुत बड़े हैं। लोकसभा चुनाव में जो नतीजे आए थे, यह उसका और व्यापक विस्तार है। बीजेपी पूरब में जीती, मणिपुर में कमल का झंडा फहरा दिया। सुदूर पश्चिम में जीती, गुजरात की सभी सीटें जीत ली। बीजेपी को यूपी, एमपी में जीत मिली। और दक्षिण में कर्नाटक, तेलंगाना में भी विजय प्राप्त हुई। लद्दाख, दीव दमन में भी बीजेपी की जयजयकार हो गई। बीजेपी ही एक मात्र राष्ट्रीय पार्टी है जिसका परचम देश के नागरिकों ने ही पूरे देश में फहराया है।”

उन्होंने कहा, “कभी हम 2 सीट पर थे और 2 कमरों से पार्टी चला करती थी। आज हिंदुस्तान के हर कोने में है, हर किसी के दिल में है। आखिर ऐसा क्यों हुआ, कैसे हुआ? इसका उत्तर कल जो नतीजे आए हैं, उसी में मिल जाता है। भारत के लोग इक्कीसवीं सदी के भारत के नागरिक बार-बार अपना संदेश स्पष्ट कर रहे हैं। अब सेवा का मौका उसी को मिलेगा जो देश के विकास के लक्ष्य के साथ ईमानदारी से काम करेगा। हर राजनीतिक दल से देश के लोगों की यही अपेक्षा है कि देश के लिए काम करो, देश के काम से मतलब रखो।”

“कल जो नतीजे आए उन्होंने साबित कर दिया है कि आप काम करेंगे तो लोगों को आपसे भरपूर आशीर्वाद भी मिलेगा। आप खुद को समर्पित करेंगे, चौबीसों घंटे देश के विकास के बारे में सोचेंगे कुछ नया करने की कोशिश करेंगे तो आपको नतीजे भी मिलेंगे। देश की जनता आपकी मेहनत को देख रही है। आपकी तपस्या को देख रही है। आपकी नीयत को देख रही है। और इसलिए चुनाव के समय बिना किसी भ्रम में पड़े जनता जनार्दन कठिनाई के बीच भी वोट देती है। नतीजों में देश की जनता ने तय कर दिया है कि इक्कीसवीं सदी में देश की राजनीति का मुख्य आधार विकास ही होगा।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की जनता को सबसे ज्यादा भरोसा भारतीय जनता पार्टी पर है। हम देश के लोगों के हित का काम करते हैं। भाजपा देश के हर वर्ग की जरूरत समझती है। भाजपा दलितों और शोषितों की आवाज है। हम देश को आगे ले जाने वाला हर काम करेंगे। भाजपा पर जनता का भरोसा मेरे लिए बहुत बड़ी पूँजी है। बिहार की जनता ने साबित किया है कि यहाँ की जनता पारखी भी है जागरूक भी।

इस दौरान उन्होंने महिलाओं का भी शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि लोग साइलेंट वोटर्स की बात कर रहे हैं, वे हमारी माँ और बहनें हैं और भाजपा केवल उनकी देखभाल करती है।

दिल्ली में सार्वजानिक स्थानों पर नहीं होगी छठ पूजा: पटाखों पर बैन के बाद केजरीवाल सरकार का नया आदेश

दिल्ली में दिवाली पर पटाखे पूरी तरह से बैन करने के बाद अब अरविंद केजरीवाल सरकार ने छठ पर्व पर नया आदेश जारी किया है। इस साल छठ पूजा का आयोजन सार्वजनिक स्थलों पर नहीं किया जाएगा। दिल्‍ली सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए बिहार के महापर्व छठ को लेकर एक पत्र जारी किया है।

सरकार के द्वारा जारी पत्र में यह कहा गया है कि दिल्‍ली में पब्‍लिक प्‍लेस पर छठ पूजा मनाने की छूट नहीं होगी। इसके लिए बकायदा सभी डीएम और पुलिस के सभी डीडीसी को पत्र लिखा है कि यह बात हर सुनिश्‍चित हो कि सार्वजानिक स्थानों पर छठ पूजा न हो।

दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (DDMA) ने सभी संबंधित जिला अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। DDMA द्वारा आदेश में कहा गया है कि दिल्ली में कोरोना के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो आ रही है। ऐसे में छठ पूजा सार्वजनिक जगहों पर मनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। DDMA ने लोगों को घर पर ही छठ पूजा मनाने की सलाह दी है।

दिल्ली सरकार ने दिल्ली में छठ पूजा घाट तैयार करने व आयोजन के लिए एलजी को बीते दिनों प्रस्ताव भेजा था। सरकार ने उसके साथ एसओपी भी भेजी थी। जिसमें कम भीड़, आर्टिफिशियल घाट, सामाजिक दूरी व जागरूकता को लेकर सभी तमाम इंतजाम करने की बात कही थी।

डीडीएमए ने कहा है कि इसका आयोजन सार्वजनिक स्थलों पर नहीं होगी। मगर कोई निजी तौर पर अपने निजि स्थल पर मनाना चाहता है तो कर सकता है। मगर इस दौरान भीड़, सामाजिक दूरी समेत कोविड से बचाव के सभी उपाय होने चाहिए। बताते चलें बीते साल दिल्ली सरकार ने दिल्ली भर में यमुना नदी समेत कुल 1108 छोटे बड़े घाट बनवाए थे। इस बार आर्टिफिशियल घाट के लिए निविदा भी जारी कर दी गई थी। मगर डीडीएमए की मंजूरी के बाद सरकार अब इसके लिए कोई आयोजन नहीं करेगी।

हर वर्ष धूमधाम से मनाए जाने वाले इस पर्व की रौनक इस साल फीकी रहेगी। कोरोना के लगातार बढ़ते मामलों के मद्देनजर इस साल छठ पूजा का आयोजन सार्वजनिक स्थलों पर नहीं किया जाएगा। इस साल छठ पर्व 18 नवंबर से 21 नवंबर तक मनाया जाएगा। 18 नवंबर को इसकी शुरुआत होगी, इस दिन नहाय खाय, 19 नवंबर को खरना, 20 नवंबर को संध्या अर्घ्य और 21 नवंबर की सुबह उषा अर्घ्‍य के साथ इसकी समाप्ति होगी।

दिल्‍ली-एनसीआर के लाखों लोग दिल्‍ली सरकार के इस फैसले से प्रभावित होंगे। बता दें कि देश की राजधानी में यूपी-बिहार के लाखों परिवार रहते हैं जो छठ पूजन करते हैं। छठ ना सिर्फ बिहार बल्कि उत्तर प्रदेश में भी बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। छठ के वक्‍त दिल्‍ली में नदी और घाटों पर मेले जैसा नजारा रहता है। यहाँ पर हजारों परिवार छठ मनाते नजर आते हैं। दिल्‍ली के प्रमुख घाट जैसे यमुना घाट, हिंडन घाट, राजघाट और सचिवालय घाट जैसे कई जगहों पर छठ मनाने वालों की भीड़ रहती है।

महापर्व छठ को लेकर बिहार में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसकी चर्चा की थी। बिहार के साथ अपने लगाव की बात करते हुए छपरा में पीएम मोदी ने कहा था कि कोरोना के काल में किसी माँ को ये चिंता करने की जरूरत नहीं है कि छठ पूजा को कैसे मनाएँगे।

पीएम मोदी ने बिहार के छपरा में कहा था, “अरे मेरी माँ! आपने अपने बेटे को दिल्ली मैं बिठाया है, तो क्या वो छठ की चिंता नहीं करेगा! माँ! तुम छठ की तैयारी करो, दिल्ली में तुम्हारा बेटा बैठा है।”

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने दिवाली के ठीक पहले आम लोगों से निवेदन करते हुए एक वीडियो जारी किया था। वीडियो में केजरीवाल ने जनता से निवेदन करते हुए कहा था कि वह लोगों के साथ पूजा करने को तैयार हैं लेकिन कोई पटाखे न जलाए।

उन्होंने कहा था, “इस बार भी हम सभी लोग मिलकर दिवाली मनाएँगे, पटाखे नहीं जलाएँगे। किसी भी हालत में पटाखे नहीं जलाने हैं अगर पटाखे जलाएँगे तो हम लोग अपने ही बच्चों की ज़िन्दगी के साथ खेलेंगे। ऐसा करके हम लोग अपने दिल्ली के परिवार की जिन्दगी के साथ खेलेंगे। पटाखे नहीं जलाएँगे और दिवाली का त्यौहार एक साथ मनाएँगे।”

बिहार: जीत का जश्न मना रहे BJP नेता के बेटे की पीट-पीटकर हत्या, शव को पेड़ से लटकाया

बिहार में चुनाव के नतीजे आने के बाद कटिहार में एनडीए की जीत की खुशी में पटाखे जलाने पर एक BJP नेता के बेटे की हत्या का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि जिसकी मृत्यु हुई है वह BJP बूथ अध्यक्ष और वार्ड मेंबर का बेटा था। दरअसल, खुशी के माहौल में पटाखे जला रहे BJP नेता के बेटे को दूसरे पक्ष के गुस्साए लोगों ने पहले बेरहमी से मारा फिर उसके शव एक पेड़ से लटका दिया। बता दें इलाके में जहाँ जश्न का माहौल था, वहीं भाजपा नेता के घर मातम पसर गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना मंगलवार (नवंबर 10, 2020) की देर रात कटिहार के फलका थाना क्षेत्र के सोहथा उत्तरी पंचायत स्थित गोपालपट्टी गाँव की है। बिहार के नतीजे सामने आने के बाद जगह-जगह भाजपा समर्थक और कार्यकर्ता अपने-अपने तरीके से खुशी मना रहे हैं। उसी दौरान कोढ़ा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा बूथ अध्यक्ष दिनेश मुनि के पुत्र रंजीत कुमार (18) को भाजपा प्रत्याशी की जीत के जश्न में पटाखे फोड़ना भारी पड़ गया।

घटना की जानकारी देते हुए मृतक के पिता व भाजपा नेता ने बताया कि घटना के वक्त वह गाँव में नहीं मौजूद थे। धान की तैयारी कराने के लिए वह और उनकी पत्नी पास के कुंवारी गाँव गए हुए थे। जिस दौरान कुछ लोगों ने उन्हें फोन पर धमकी देते हुए कहा कि उनका पुत्र पटाखे फोड़ रहा है और यह ठीक नहीं है। चुनाव परिणाम की अगली सुबह उनके बेटे का शव गाँव स्थित दरगाह बहियार में एक पेड़ से लटका हुआ मिला।

परिजनों का आरोप है कि पटाखों को लेकर दूसरे पक्ष से विवाद काफी बढ़ गया था। उसी का गुस्सा निकलते हुए गाँव के कुछ अज्ञात युवकों ने उसकी बेरहमी पीट-पीटकर हत्या कर दी और बाद में शव को पेड़ पर फंदे से लटका दिया।

घटनास्थल पर पहुँची स्थानीय पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। परिजनों की तहरीर पर पुलिस अज्ञात आरोपितों के खिलाफ शिकायत दर्ज करते हुए मामले की जाँच पड़ताल में जुट गई है।

पुलिस को मृतक के शरीर पर मारपीट के निशान भी मिले हैं। घटना को लेकर गाँव में तनावपूर्ण स्थिति है। मृतक युवक की माँ उषा देवी भी वार्ड सदस्य हैं। जानकारी के अनुसार, पिता दिनेश मुनि भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता हैं। पहले वे भाजपा के पंचायत अध्यक्ष थे। इस बार उन्हें बूथ अध्यक्ष बनाया गया था।

कोरोना के बदतर होते हालातों पर दिल्ली HC ने लगाई केजरीवाल सरकार की क्लास, पूछा- केस डबल होने का इंतजार कर रहे हो?

दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बेकाबू हो चुके हैं। राजधानी दिल्ली में प्रतिदिन होने वाले संक्रमण के हिसाब से सबसे ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। एक तरफ जहाँ पिछले महीने दिल्ली में मात्र 8-9 हजार एक्टिव केस रह गए थे, वहीं अब इनकी संख्या 30 हजार से अधिक हो चुकी है। ऐसे में दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार (नवंबर 11, 2020) को अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को कड़ी फटकार लगाई है।

हाईकोर्ट ने राजधानी में बढ़ रहे कोरोना मामले पर AAP सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा कि क्या इस स्थिति से निपटने के लिए उनके पास कोई नीति या रणनीति है? जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच ने कहा कि पिछले 2 सप्ताह में कोरोना के मामले में दिल्ली ने महाराष्ट्र और केरल को भी पीछे छोड़ दिया है। ऐसे में AAP सरकार ने कोरोना से निपटने के लिए क्या कदम उठाए हैं?

कोर्ट ने केजरीवाल सरकार से सवाल किया कि क्या वह मामलों के दोगुने होने का इंतजार कर रही है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को आदेश दिया कि वह स्टेटस रिपोर्ट दायर कर बताए कि उसने कोरोना संक्रमण पर काबू पाने के लिए पिछले दो हफ्तों में क्या कदम उठाए हैं। मामले में अगली सुनाई 18 नवंबर को होगी।

दिल्ली में कोरोना को बढ़ते मामलों पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने अपनी तल्ख टिप्पणी में कहा, “दिल्ली में आँकड़े प्रति दिन 8000 से ऊपर हैं। क्या हम आँकड़ों के डबल होने का इंतजार कर रहे हैं?” कोर्ट ने दिल्ली को अनलॉक किए जाने पर सवाल भी उठाए।

कोर्ट ने कहा, “ऐसी स्थिति में दिल्ली सरकार ने कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए क्या किया? स्कूलों को खोला जा रहा है। तहबाजारी और साप्ताहिक बाजार अपने पुराने रूप में लौट आए हैं। दिल्ली सरकार बताए कि हमें इस याचिका का दायरा टेस्ट से आगे बढ़ाते हुए किट की उपलब्धता या अन्य मुद्दों तक क्यों नहीं लेकर जानी चाहिए?”

अदालत ने 200 लोगों को सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होने और सार्वजनिक परिवहन को पूरी क्षमता से चलाने की अनुमति के पीछे के तर्क पर भी सवाल किया। पीठ ने कहा कि इससे संक्रमण का प्रसार तेजी से हो सकता है।

दिल्ली सरकार ने अपने जवाब में हाईकोर्ट के सामने कहा कि कई जगह ऐसी है जहाँ कोरोना के मामले कम हैं। नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली इसमें शामिल है। हालाँकि नई दिल्ली और सेंट्रल दिल्ली में केस बढ़ रहे हैं। कोर्ट दिल्ली सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं नजर आया। कोर्ट ने कहा, “हम सभी मौजूदा स्थिति से वाकिफ हैं। हम में से कोई नहीं जानता कि क्या होगा। दिल्ली सरकार ने क्यों अपने सारे रास्ते खोल दिए हैं, जबकि दूसरे राज्यों में संक्रमण को रोकने के लिए बंदी पर काम हो रहा है।”

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी तब की जब मामले में याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि वह कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं। बावजूद इसके न उन्हें बेड मिला और न कोई अस्पताल। आखिरकार एक दोस्त की मदद से एक नर्सिंग होम में दाखिला मिला। पर यहाँ एक ऑक्सीजन मीटर के अलावा कोई मदद नहीं है।

कोर्ट ने दिल्ली सरकार को चेताते हुए कहा कि त्योहारों के मौसम में बाजारों में बड़े पैमाने पर भीड़ जुटती नजर आ रही है, जो संक्रमण को और बढ़ाएगी। दिल्ली सरकार यदि कोरोना संक्रमण पर काबू पाने के लिए अपने नीति को लेकर गंभीर है तो उसे पब्लिक प्लेस पर मास्क के इस्तेमाल और भीड़ जमा होने से रोकना होगा।

भगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम की पुश्तैनी हवेली समेत 6 प्रॉपर्टी नीलाम, ₹22 लाख की कमाई

अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम पर और शिकंजा कसते हुए अब उसकी प्रॉपर्टी को नीलाम किया जा रहा है। स्मगलर्स एंड फॉरेन एक्सचेंज मैनिपुलेटर्स एक्ट (SAFEMA) के तहत मोस्ट वॉन्टेड आतंकी दाऊद इब्राहिम की महाराष्ट्र की 6 प्रॉपर्टी मंगलवार (नवंबर 10, 2020) को नीलाम कर दी गई। इसके अलावा, दाऊद के पैतृक गाँव रत्नागिरी में उसकी सम्पत्ति भी शामिल थी। यह संपत्ति उसकी माँ अमीना बी और बहन हसीना पार्कर के नाम पर रजिस्टर्ड थी। 1983 में मुंबई जाने से पहले दाऊद का परिवार इस घर में रहता था

1993 के मुंबई सीरियल धमाकों के मुख्य आरोपित भगोड़े डॉन दाऊद की सम्पत्ति की इस नीलामी से 22 लाख 79 हजार 600 रुपए मिले। कोविड के चलते नीलामी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की गई। SAFEMA की धारा 68F के तहत वॉन्टेड अपराधियों और उनके परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों की संपत्तियों पर कार्रवाई की जा सकती है।

दिल्ली के वकील अजय श्रीवास्तव ने दाऊद की 2 और वकील भूपेंद्र भारद्वाज ने चार प्रॉपर्टी खरीदी हैं। अजय श्रीवास्तव ने कहा कि वह “इन स्थानों पर आतंकवादी-विरोधी राष्ट्रीय मोर्चा” खोलेंगे। दाऊद की 4, 5 ,7 और 8 नंबर संपत्ति भूपेंद्र कुमार भारद्वाज ने, जबकि 6 और 9 नंबर की संपत्ति वकील अजय श्रीवास्तव ने ली हैं। 10 नंबर की प्रॉपर्टी को तकनीकी वजह से ऑक्शन में नहीं रखा गया। इस प्रॉपर्टी की मार्किंग पर कुछ विवाद था।

जाँच अधिकारी मुनाफ सैयद के मुताबिक, रत्नागिरी के खेड़ में दाऊद की कुल 13 संपत्ति थीं, जिसमें से 6 की नीलामी की गई है। इन संपत्तियों की कीमत करीब 80 लाख लगाई गई थी। रत्नागिरी में स्थित दाऊद की पुश्तैनी हवेली महज 11 लाख 2 हजार में बिक गई।

नीलाम हुई संपत्तियों में खेड़ तालुका के मुम्बाके गाँव में जमीन का एक टुकड़ा शामिल था। इसके लिए 1.38 लाख की बोली लगाई गई थी। इसके अलावा एक जमीन और उस पर बना दो मंजिला बंगला भी नीलाम हुआ है। इसके लिए पाँच लाख रुपए की बेस कीमत रखी गई थी। पेट्रोल पंप के नाम पर ली गई एक जमीन को भी नीलाम किया गया है।

वहीं, दाऊद के सहयोगी इकबाल मिर्ची का जुहू वाला बंगला इस बार भी नीलाम नहीं हो सका। ज्यादा कीमत का हवाला देते हुए बोली लगाने वाले ने हाथ खींच लिए। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दाऊद के सहयोगी इकबाल मिर्ची के परिवार के सदस्यों से जुड़ी 7 संपत्तियों को पिछले महीने अटैच किया था। इनमें एक सिनेमा हॉल, एक होटल, एक अंडर कंस्ट्रक्शन होटल, दो बंगले और पंचगनी में 3.5 एकड़ जमीन शामिल है। जब्त की गई संपत्तियों की कीमत 22 करोड़ रुपए से ज्यादा बताई जा रही है।

गौरतलब है कि 2018 में नागपाड़ा में बने दाऊद के रौनक अफरोज होटल, डाम्बर वाला बिल्डिंग और शबनम गेस्ट हाउस को नीलाम किया गया था। उसके बाद दाऊद की बहन हसीना पारकर का फ्लैट भी नीलाम कर दिया गया था।

दाऊद के गाँव में उसकी संपत्तियों की नीलामी करने की यह तीसरी प्रक्रिया थी। इसके पहले भी SAFEMA की तरफ से दो बार नीलामी की प्रक्रिया को पूरा करवाया गया था। लेकिन किसी ने भी डॉन की प्रॉपर्टी को खरीदने की हिम्मत नहीं दिखाई थी।

कामरा, राठी, शेहला.. अर्णब को जमानत मिलते ही लिबरल्स ने छोड़ा झाग और जहर

सुप्रीम कोर्ट ने रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी को 2018 के आत्महत्या मामले में जमानत दे दी है। जमानत आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने इसे मानने के लिए मुंबई पुलिस को निर्देशित किया है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा–  “हम मानते हैं कि जमानत नहीं देने में हाईकोर्ट गलत था।” इसके साथ ही अर्नब गोस्वामी और दो अन्य आरोपितों को 50,000 रुपए के बांड पर अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया। अदालत ने पुलिस आयुक्त को यह निर्देश भी दिए कि उनके आदेश का तुरंत पालन किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद सोशल मीडिया के कथित लिबरल्स की मानसिक दशा देखते ही बन रही है। कथित कॉमेडियन कुणाल कामरा, लिबरल्स के ‘दुग्गल साहब’ ध्रुव राठी हों या फिर JNU की फ्रीलांस प्रोटेस्टर शेहला रशीद, लगभग हर आदर्श लिबरल इस जमानत पर बेहद व्यथित नजर आ रहा है। NDTV की पूर्व पत्रकार निधि राजदान ने तो एक ऐसा ट्वीट तक डिलीट कर दिया, जो उन्होंने जस्टिस चंद्रचूड़ की तारीफ़ में 2018 में किया था। लेकिन मौके की नजाकत को भाँपते हुए कुछ लोगों के पास इसके स्क्रीनशॉट सुरक्षित थे।

कथित कॉमेडियन कुणाल कामरा सुप्रीम कोर्ट के फैसले से इस कदर बिलबिला गया कि उसने तो जजों के आगे से ‘आदरणीय’ हटाने की ही सिफारिश कर डाली। इतना ही नहीं, उसने जज डीवाई चंद्रचूड़ को फ्लाइट अटेंडेंट बताते हुए कहा कि वो प्रथम श्रेणी के यात्रियों के लिए शैंपेन परोसते हैं।

NDTV की पूर्व पत्रकार निधि राजदान ने 28 सितंबर, 2018 को ट्विटर पर लिखा था, “जज चंद्रचूड़ के लिए बहुत सम्मान।” हालाँकि, आज अर्णब की जमानत पर सुनवाई के दौरान निधि राजदान ने अपना यह ट्वीट ये सोचकर डिलीट कर दिया कि किसीको क्या ही पता चलेगा। लेकिन इससे पहले ही यह सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका था।

इसमें एक और वामपंथी पत्रकार शामिल हुई। नाम है- रोहिणी सिंह। उन्होंने रिपब्लिक मीडिया के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए हँसने वाला इमोजी बनाया है। इस ट्वीट में रिपब्लिक ने बताया था कि लंदन में भी लोग अर्णब की जमानत को लेकर होने वाले फैसले को जानने के लिए टीवी स्क्रीन से चिपके हुए हैं। जिसका रोहिणी सिंह ने मजाक बनाने की कोशिश की है। हालाँकि, इस हँसी के पीछे छुपे जख्म के लिए कोई इमोजी होती तो रोहिणी उसे जरूर आज ट्वीट करती। 

JNU की फ्रीलांस प्रोटेस्टर शेहला रशीद ने अदालत के एक बयान पर ट्वीट किया है कि अगर आपको उमर खालिद की स्पीच पसंद नहीं है तो आपको वो नहीं सुननी चाहिए। दरअसल, अदालत ने अर्णब की जमानत पर सुनवाई के दौरान कहा कि अगर आपको कोई न्यूज़ चैनल पसंद नहीं है तो आपको वो नहीं देखना चाहिए।

अब आते हैं कुख्यात ट्रोल और अंतरिक्ष से लेकर पातल और हर आकाशगंगा की प्रत्येक चीज का पूरा ज्ञान रखने वाले लगभग सभी मामलों के जानकार ध्रुव राठी पर! उसने इस फैसले को लेकर कई ट्वीट किए। राठी ने ‘लाइव लॉ’ के एक ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा, “न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ एक सच्चे लिबरल हैं, वे यहाँ सही बात कह रहे हैं। लेकिन कृपया आम आदमी को भी व्यक्तिगत स्वतंत्रता की पहुँच प्रदान करें। हर किसी को अर्णब गोस्वामी के रूप में विशेषाधिकार प्राप्त नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट उनके लिए तुरंत खुल जाएगा। सैकड़ों अन्य लोग को इस अधिकार से वंचित कर दिया गया है!”

बता दें कि ध्रुव राठी ने जिस ट्वीट को रीट्वीट किया था उसमें जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा था कि  एक संवैधानिक अदालत अगर लिबर्टी की सुरक्षा नहीं करे तो फिर और कौन करेगा? उन्होंने कहा कि पीड़ित को पूरा अधिकार है कि उसे निष्पक्ष जाँच का अधिकार मिले।

इसके अलावा उसने एक ट्वीट में लिखा, “अधिकांश लिबरल अर्णब गोस्वामी को जमानत देने के इस निर्णय का समर्थन करते हैं। लेकिन हम यही चाहते हैं कि समान नियम सभी के लिए समान रूप से लागू हो। मुझे उम्मीद है कि अर्णब अब अन्य पत्रकारों के पक्ष में अपनी आवाज उठाएँगे, जो सरकारों के उत्पीड़न के कारण जेल गए।”

ध्रुव राठी की भड़ास यहीं पर खत्म नहीं हुई। उसने इसका मजाक भी बनाया। एक अन्य ट्वीट में राठी ने लिखा, “फन फैक्ट: वकील हरीश साल्वे, जिन्होंने अर्णब गोस्वामी को जमानत दी, ये वही व्यक्ति हैं जिन्होंने 2015 में सलमान खान को जेल जाने से बचाया था।”

अब ये बात राठी ने निकाली ही है तो हम आपको कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और मशहूर वकील कपिल सिब्बल की कारस्तानी भी बताते हैं। देश भर में नागरिकता कानून के विरोध के नाम पर जो हिंसा हुई उसमें पता चला कि पीएफआई के बैंक अकाउंट से देश के कई बड़े वकीलों को पैसे दिए गए थे। इनमें कपिल सिब्बल  का नाम भी शामिल था।

जाँच के दौरान पीएफआई के कुल 73 बैंक खातों का पता चला था। कॉन्ग्रेस का चेहरा बेनकाब होने से उसके नेताओं में बौखलाहट बढ़ गई थी। खुलासे से पता चला था कि PFI ने वकील और कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल को 77 लाख रुपए दिए थे। सिब्बल ने दावा किया था कि ये पेमेंट हादिया केस के लिए पीएफआई ने उन्हें दिया था।

वहीं 1984 सिख विरोधी दंगे मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉन्ग्रेस नेता सज्जन कुमार को सिख विरोधी दंगों का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि सज्जन को अब ताउम्र जेल में रहना होगा। इस मामले में कोर्ट में सज्जन कुमार का पक्ष कपिल सिब्बल के बेटे अमित सिब्बल ने रखा था।

गौरतलब है कि हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने सोमवार (नवंबर 9, 2020) को 2018 की आत्महत्या के मामले में अर्णब की अंतरिम जमानत याचिका खारिज करने के बाद उन्हें सेशन कोर्ट भेज दिया था। वहीं अर्णब के वकीलों ने आज सुप्रीम कोर्ट में भी जमानत याचिका दायर की। न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और इंदिरा बनर्जी की पीठ के समक्ष बुधवार को इसकी सुनवाई हुई। इससे पहले न्यायमूर्ति एसएस शिंदे और एमएस कार्णिक की पीठ ने अर्णब गोस्वामी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

जिनकी आत्महत्या केस में अर्णब को जेल, उनकी पत्नी व उद्धव ठाकरे की बीवी के बीच करोड़ों का जमीन सौदा: BJP नेता

भाजपा नेता किरीट सोमैया ने महाराष्ट्र सरकार और रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी के विवाद के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। दरअसल भाजपा नेता ने दावा किया है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के परिवार का स्वर्गीय अन्वय नाइक के परिवार के साथ भूमि के लेनदेन का मामला था। सोमैया ने कहा कि उनके पास पर्याप्त सबूत हैं, जो ठाकरे और नाइक परिवार के बीच हुए जमीन के सौदे को साबित करते हैं।

सोमैया ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार की वेबसाइट में मौजूद मुरुद रायगढ़ के भूमि रिकॉर्ड के अनुसार उद्धव ठाकरे की पत्नी का स्वर्गीय अन्वय नाइक के परिवार के साथ भूमि का लेनदेन हुआ था। इस मामले में उन्होंने संबंधित दस्तावेज एसपी और कलेक्टर को भेज दिए हैं।

भाजपा नेता व सांसद किरीट सोमैया ने यह सारी जानकारी ट्विटर के माध्यम से साझा की है। उन्होंने लिखा कि उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे ने मनीषा रविंद्र वायकर के साथ मिलकर दिवंगत अन्वय नाइक और अक्षिता नाइक से मार्च 2014 में 2.20 करोड़ रुपए की जमीन खरीदी थीं। बता दें कि अक्षिता नाइक स्वर्गीय अन्वय नाइक की पत्नी हैं।

यही नहीं, किरीट सोमैया ने उद्धव ठाकरे पर आरोप लगाते हुए यह भी पूछा कि क्या यह रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी को फँसाने की वजह भी हो सकती है? साथ ही उन्होंने अपने ट्वीट में कुछ दस्तावेज शेयर करते हुए उन्हें जमीन सौदे से संबंधित बताया।

उन्होंने अपने अगले ट्वीट में कहा, “मैंने इन सभी दस्तावेजों की जाँच पड़ताल कर इसे कलेक्टर और एसपी को भेज दिया है।” उन्होंने बताया कि यह जानकारी उन्हें महाराष्ट्र सरकार की भूमि रिकॉर्ड के जरिए मिली है।

बहरहाल, बीजेपी नेता द्वारा किए गए इस खुलासे को उस संदर्भ को फिर से देखना अनिवार्य है, जिसके आधार पर रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी को गिरफ्तार किया गया था।

अर्णब की गिरफ्तारी

गौरतलब है कि रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर इन चीफ अर्णब गोस्वामी को चार नवंबर की सुबह उनके घर से पुलिस ने बिना किसी सूचना के गिरफ्तार कर लिया था। अर्णब को दो साल पुराने केस में गिरफ्तार किया गया, जो पहले ही बंद हो गया था। गिरफ्तारी के दौरान मुंबई पुलिस ने अर्णब के अलावा उसके परिजनों से भी बद्तमीजी की थी।

गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने अर्णब गोस्वामी को अलीबाग कोर्ट में पेश किया गया था, जहाँ पर पुलिस कस्टडी की माँग की गई थी, हालाँकि कोर्ट ने पुलिस कस्टडी देने से इनकार कर दिया था।

उल्लेखनीय है कि यह मामला एक इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक की मृत्यु से संबंधित है, जिन्होंने मई 2018 में आत्महत्या कर ली थी। इस दौरान पुलिस ने एक सुसाइड नोट बरामद किया था। जिसमें आरोप लगाया गया कि अर्णब गोस्वामी ने उनको 83 लाख का बकाया राशि नहीं दिया था।

अन्वय नाइक और उनकी माँ कुमुद अपने अलीबाग फार्महाउस में मृत पाए गए। सुसाइड नोट में दो अन्य लोगों के नाम भी थे, जिनका नाम फ़िरोज़ शेख और नितेश सारदा था। इन पर भी 4 करोड़ और 55 लाख नहीं देने का आरोप था। वहीं अप्रैल 2019 में मामला बंद कर दिया गया था लेकिन राज्य सरकार के कथित प्रतिशोध की भावना के चलते इसे दोबारा से खोला गया है।

द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, उस समय अन्वय नाइक आत्महत्या मामले की जाँच कर रहे अधिकारियों को रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्णब गोस्वामी, नितेश सारदा और फ़िरोज़ शेख के बीच कोई संबंध नहीं मिला था। हत्या के लिए उकसाने वाला मामले में पर्याप्त सबूत नहीं होने की वजह से पुलिस ने इसे खारिज कर दिया था। साथ ही मामले की जाँच कर रही रायगढ़ पुलिस ने अप्रैल 2019 में मजिस्ट्रेट के सामने अपनी क्लोजर रिपोर्ट भी दायर की थी।