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बिहार-अमेरिका की खबरों के बीच UP चुनाव में CM योगी ने किया BJP का झंडा बुलंद, कॉन्ग्रेस का सफाया

बीते दिन (7 नवंबर 2020) को बिहार विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण के मतदान पूरे हुए। इसके बाद सामने आए एग्जिट पोल्स में एनडीए (भाजपा-जदयू) को बहुत अच्छे संकेत नहीं मिले हैं लेकिन इस दौरान उत्तर प्रदेश की 7 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव भी हुए थे। इन 7 सीटों पर हुए उपचुनाव के एग्जिट पोल में भारतीय जनता पार्टी को स्पष्ट बढ़त मिलती हुई नज़र आ रही है। इंडिया टुडे एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल में भाजपा पूरी तरह विजेता नज़र आ रही है। 

इस एग्जिट पोल के अनुसार भारतीय जनता पार्टी को 37 फ़ीसदी तक मतदान मिल सकते हैं। वहीं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अगुवाई वाली समाजवादी पार्टी को 27 फ़ीसदी मतदान मिल सकता है। इसके अलावा मायावती की बहुजन समाज पार्टी को 20 फ़ीसदी और 6 सीटों पर चुनाव लड़ने वाले कॉन्ग्रेस को सिर्फ 8 फ़ीसदी मतदान मिलने के आसार जताए गए हैं।   

सीटों की संख्या को लेकर बात करें तो इंडिया टुडे एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल के अनुसार भाजपा को 5 से 6 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। समाजवादी पार्टी को एक या दो सीट और बसपा और कॉन्ग्रेस को शून्य सीट मिलने की संभावना जताई गई है। उत्तर प्रदेश की इन 7 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए 3 नवंबर को मतदान हुआ था। उत्तर प्रदेश की इन खाली सीटों पर हुए उपचुनावों का परिणाम 10 नवंबर को आएगा। 

इसी एग्जिट पोल के आधार पर अन्य राज्यों में हुए उपचुनावों के नतीजों को लेकर भी अनुमान लगाया गया। गुजरात में भी 8 सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा के लिए अच्छे संकेत सामने आ रहे हैं। इंडिया टुडे के एग्जिट पोल्स की मानें तो गुजरात में भाजपा 49 फ़ीसदी मतों के साथ लगभग 6 से 7 सीटें जीत सकती है। 

वहीं कॉन्ग्रेस की हालत गुजरात में भी बहुत दयनीय ही बनी हुई है, 40 फ़ीसदी मतदान के साथ कॉन्ग्रेस के हिस्से में सिर्फ एक सीट आने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि इसी एग्जिट पोल के अनुसार यह भी हो सकता है कि कॉन्ग्रेस पार्टी का गुजरात में खाता ही न खुले। ठीक इसी तरह एग्जिट पोल्स के मुताबिक़ राज्य के अन्य राजनीतिक दल 11 फ़ीसदी मतदान हिस्सेदारी के साथ अपना खाता नहीं खोल पाएँगे।       

वहीं मध्य प्रदेश में 28 सीटों पर हुए उपचुनाव परिणाम में भी भाजपा की स्थिति काफी बेहतर नज़र आ रही है। इंडिया टुडे के एग्जिट पोल के अनुसार भाजपा 16 से 18 सीट तक जीत सकती है वहीं कॉन्ग्रेस के हिस्से में सिर्फ 10 से 12 सीट मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी को मध्य प्रदेश के उपचुनाव में सिर्फ एक सीट मिलने का अनुमान लगाया गया है। 

3 बच्चों की अम्मी का बॉयफ्रेंड के साथ न्यूड वीडियो वायरल, पति रफीक ने भी मोबाइल पर देखा… 12 बार चाकू मार हत्या

मुंबई के भिवंडी में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की ही हत्या कर दी। उसकी पत्नी का अपने बॉयफ्रेंड के साथ न्यूड वीडियो वायरल हो गया था, जिसके बाद उसने इस वारदात को अंजाम दिया। आरोपित की पहचान रफीक मोहम्मद यूनुस के रूप में हुई है, जिसने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। रफीक मोहम्मद यूनुस अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ अंसार नगर क्षेत्र में रह रहा था। लॉकडाउन में उसकी नौकरी भी चली गई थी।

पुलिस ने बताया है कि कोरोना वायरस से उपजे हालात के बाद लगाए गए लॉकडाउन में नौकरी जाने के कारण वो बेरोजगार हो गया था। पहले वो बिजली करघा संयंत्र में काम करता था। इसके बाद उसकी पत्नी नसरीन अपने तीनों बच्चों के साथ अपनी बहन के यहाँ रहने चली गई। वो भिवंडी में ही नगाँव क्षेत्र इलाके में रह रही थी। महिला के बॉयफ्रेंड की पहचान सद्दाम के रूप में हुई है, जिसके साथ उसका न्यूड वीडियो वायरल हो गया

इस वीडियो को देखने के बाद 50 वर्षीय रफीक मोहम्मद यूनुस अपनी पत्नी से मिलने गया और उसने वहीं पर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद वो हत्या की वारदात में इस्तेमाल किए गए चाकू को लेकर स्थानीय शांति नगर थाना पहुँचा और आत्मसमर्पण कर दिया। सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर ममता डिसूजा ने बताया कि अपनी पत्नी के किसी ‘गैर-मर्द के साथ अफेयर’ वायरल होने के बाद वो काफी ‘शर्मिंदा’ था और इसीलिए उसने ऐसा किया।

अब पुलिस उस व्यक्ति की तलाश कर रही है, जिसने इस वीडियो को शूट कर के वायरल किया। आरोपित के व्हाट्सप्प पर भी ये वीडियो आया था। जब वो आत्मसमर्पण करने पहुँचा तो उसके कपड़े और चाकू खून से सने हुए थे। वो 17 सालों से नसरीन के साथ वैवाहिक सम्बन्ध में था। जॉब जाने से पहले वो पॉवर लूम में बतौर सुपरवाइजर कार्यरत था। उसने अपनी पत्नी के पेट, गर्दन और बाहों पर 12 बार खतरनाक चाकू से वार किया। उसके खिलाफ हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया है।

अक्टूबर 2020 के अंत में सूरत से भी हत्या की एक ऐसी खबर आई रही, जिसने सभी को चौंका दिया था। एक फैक्ट्री मालिक रामू संतराम गोस्वामी को आलम और उसके दो सहयोगी अली और सतला नाम के आरोपितों ने निर्दयतापूर्वक मार डाला था। आरोपितों ने मृतक की पत्नी और तीन साल के मासूम बेटे की आँखों के सामने ही इस वारदात को अंजाम दिया था। आलम फैक्ट्री मालिक की पत्नी पर बुरी नजर रखता था।

बिहार विधानसभा चुनाव: गलत हो सकते हैं Exit Polls, कारण – महिला वोटिंग, अनाज वितरण और फेल होता MY समीकरण

बिहार में हुए विधानसभा चुनाव के बाद आए लगभग सभी एग्जिट पोल्स में तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन की सरकार बनती दिख रही है, या फिर काँटे की टक्कर है, लेकिन क्या ये आँकड़े गलत भी हो सकते हैं? प्रथम चरण में भाजपा के लिए बहुत कुछ दाँव पर नहीं था, लेकिन दूसरे और तीसरे चरण को मिला दें तो कम से कम राजग को साधारण बहुमत तो मिलता दिख ही रहा है। अगर महिलाएँ बड़ी संख्या में मत डालने निकली हैं तो राजग के जीतने की संभावना ज्यादा है।

नीतीश कुमार से ज़रूर लोग ऊब गए हैं, जिसका कारण है पिछले पाँच वर्ष। लोग तारीफ भी करते हैं तो उनके प्रथम कार्यकाल की। नीतीश कुमार के कर्म का फल ही है कि राजद आज उन्हें टक्कर दे रही है क्योंकि 2015 में उन्होंने ही मृत पार्टी को संजीवनी दी। लेकिन, लोग तेजस्वी यादव को उनका विकल्प नहीं मान रहे। बिहार में आई बाढ़ के बाद हुए लाख भ्रष्टाचार के बावजूद जनता तक राहत सामग्री पहुँची, उसका फायदा भी उन्हें मिला।

इसी तरह सुशील कुमार मोदी से भी लोग नाराज़ हैं। सीमांचल के इलाके में देख लीजिए। वहाँ असदुद्दीन ओवैसी, राजद और कॉन्ग्रेस जीत सकती हैं लेकिन वोट बँटते हैं तो जदयू को फायदा हो सकता है। कई सीटों पर जातीय गुटबंदी टूटती दिख रही है। अनाज वितरण ही सबसे बड़ा वो कारण है, जिससे राजग को फायदा होता दिख रहा है। जहाँ पर यादव बनाम यादव है, जैसे तेज प्रताप यादव की हसनपुर, वहाँ भी उम्मीदवारों की छवि पर चीजें निर्भर करती हैं।

भाजपा को लेकर कोई नाराजगी नहीं थी क्योंकि लोग चाहते थे कि भाजपा अकेले लड़े। लेकिन, नीतीश कुमार को भी उतना नुकसान नहीं हुआ है। चिराग पासवान को लोजपा का परंपरागत वोट मिल रहा है लेकिन दूसरे लोग उनके साथ नहीं गए हैं। कई जगह उन्होंने पिछली बार अच्छा प्रदर्शन करने वाले निर्दलीयों को भी टिकट दिया है। राजद के लिए भी माई समीकरण की बहुत बड़ी गुटबंदी नहीं दिख रही है। इसीलिए बिहार विधानसभा चुनाव में एग्जिट पोल्स गलत भी हो सकते हैं।

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बिहार विधानसभा चुनाव में NDA और UPA में हो सकती है काँटे की टक्कर: एग्जिट पोल का दावा

बिहार में 243 विधानसभा सीटों पर 7 नवंबर (शनिवार) को तीसरे चरण का मतदान शाम छह बजे समाप्त हो गया। इस चुनाव में सभी राजनीतिक दलों ने सत्ता पर काबिज होने के लिए पुरजोर कोशिश की है। अब सभी की निगाहें चुनाव नतीजों पर है। 10 नवंबर को मतगणना के बाद फाइनल नतीजे सामने आएँगे। लेकिन एग्जिट पोल्स के रुझान आने शुरू हो गए हैं। जिसके अनुसार एनडीए और यूपीए में कड़ी टक्कर दिखाई दे रही है।

विभिन्न एग्जिट पोल के रुझानों से पता चलता है कि इस बार बिहार में पार्टियों के बीच कड़ा मुकाबला हो सकता है क्योंकि प्रत्येक एग्जिट पोल में महागठबंधन और एनडीए को लगभग बराबर सीटें मिलती दिख रही हैं।

Exit PollNDA allianceMahagathbandhanLJPOthers
Republic-Jan Ki Baat91-117138-1188-56-3
Times Now-C-voter104-128108-1131-34-8
TV9 Bharatvarsh110-120115-1253-510-15
Today’s Chanakya55-66180-191

रिपब्लिक-जन की बात एग्जिट पोल के नतीजों का दावा है कि एनडीए गठबंधन को 243 सीटों वाली विधानसभा में से 91 से 117 तक सीटें मिलने की उम्मीद है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि कॉन्ग्रेस और राजद के महागठबंधन गठबंधन 138 से 118 सीटों की सीमा तक कहीं न कहीं पहुँच सकता है। और सबसे अधिक सीटों के साथ गठबंधन के रूप में उभर रहा है। इसके अलावा, लोजपा और अन्य 8 और 6 सीटों में सिमटते दिख रहे हैं।

दूसरी ओर सी-वोटर एग्जिट पोल के नतीजों का दावा है कि एनडीए गठबंधन (जिसमें भाजपा, जदयू और अन्य दल शामिल हैं) 104 से 128 सीटों से जीत हासिल करेगा। वहीं महागठबंधन को 108 से 113 सीटें मिलने की उम्मीद है जबकि लोजपा और अन्य 3 से 8 सीटें स्कोर करेंगे।

तीसरे एग्जिट पोल टीवी 9 भारतवर्ष ने यह भी संकेत दिया कि बिहार में चुनावी लड़ाई जमकर लड़ी गई है। जहाँ एनडीए गठबंधन को 110-120 सीटें मिलने की उम्मीद है, जबकि उसके प्रतिद्वंद्वी महागठबंधन को 115-125 सीटें मिलने का अनुमान है। एग्जिट पोल का दावा है कि एलजेपी और अन्य के खाते में 5 से 15 सीटें जा सकती हैं।

चाणक्य के बिहार विश्लेषण के मुताबिक, आरजेडी नेतृत्व वाला महागठबंधन राज्य की कुल 243 सीटों में से 180 से 191 सीटें जीतकर राज्य में सरकार बनाने के लिए तैयार है। वहीं चाणक्य का दावा है कि एनडीए गठबंधन 55 से 66 सीटों के साथ दूसरा स्थान हासिल करेगा।

इंडिया टुडे-एक्सिस माय इंडिया के मुताबिक मुख्यमंत्री पद के लिए आरजेडी नेता तेजस्वी यादव बिहार के 44 फीसदी वोटों के साथ नीतीश से आगे नजर आ रहे है। नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के तौर पर 35 फीसदी लोगों का वोट हासिल हुआ है। अन्‍य के खाते में 7 से 4 प्रतिशत सीटें जा सकती हैं।

एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल के नतीजों का दावा है कि एनडीए को 69 से 91, महागठबंधन को 139 से 161 और लोजपा को 3 से 5 सीट मिलने का अनुमान है।

अर्णब गोस्वामी को आज भी जमानत नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- सत्र न्यायालय में कर सकते हैं आवेदन, जानिए आज क्या हुआ

रिपब्लिक ग्रुप के एडिटर इन चीफ अर्णब गोस्वामी की जमानत याचिका पर 7 नवंबर को बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। 6 घंटे तक चली सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने जमानत के फैसले को सुरक्षित रख लिया है। अर्णब को अभी हिरासत में ही रहना होगा। फिलहाल, कोर्ट ने अर्णब को राहत देते हुए कहा कि वो चाहें तो लोअर कोर्ट में पिटिशन दाखिल कर सकते हैं। 

हाईकोर्ट ने लोअर कोर्ट से कहा, “अगर इनकी तरफ से याचिका दाखिल की जाती है तो उसपर 4 दिन के अंदर फैसला दे दिया जाए।” अर्णब को 2018 के आत्महत्या के मामले बुधवार को गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। गिरफ्तार और रिमांड के खिलाफ उसने बॉम्‍बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

शनिवार (नवंबर 7, 2020) को आयोजित विशेष सुनवाई में, जस्टिस एसएस शिंदे और एमएस कार्णिक की खंडपीठ ने अंतरिम राहत के लिए तत्काल आदेश पारित करने से इनकार कर दिया।

6 घंटे तक चली सुनवाई के बाद पीठ ने कहा, “हम आज आदेश पारित नहीं कर सकते। पहले से ही 6 बज चुके हैं। इस बीच हम यह स्पष्ट करते हैं कि याचिका का लंबित होना याचिकाकर्ता को सत्र न्यायालय में जमानत के लिए आवेदन करने से नहीं रोकता है और यदि ऐसा आवेदन दायर किया जाता है, तो उस पर चार दिनों के भीतर फैसला किया जाना चाहिए।”

हालाँकि, जब याचिकाकर्ता के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने जोर देकर कहा कि याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत प्रदान की जाए, तो जस्टिस शिंदे ने संकेत दिया कि अदालत ने आदेश को सुरक्षित रखा है और आने वाले सप्ताह में किसी दिन सुनाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि अदालत जल्द से जल्द आदेश सुनाएगी।

वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने जगदीश अरोड़ा के बंदी मामले का हवाला दिया, जहाँ सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल प्रशांत कनौजिया को हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया था। साल्वे ने तर्क दिया कि कनौजिया के मामले के समान, उनके मुवक्किल अर्णब गोस्वामी को भी जमानत दी जानी चाहिए। हालाँकि, अदालत ने मामले में फैसला देने से इनकार कर दिया।

HC की याचिका में तर्क दिया कि पुलिस के पास रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आधार पर 2019 में मजिस्ट्रेट द्वारा मामले में एक क्लोजर आदेश पारित करने के बाद न्यायिक आदेश प्राप्त किए बिना मामले को फिर से खोलने के लिए पुलिस के पास कोई शक्ति नहीं है। बचाव पक्ष के वकीलों ने कहा कि मामले में जाँच फिर से शुरू करने के लिए पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई अवैध थी, इसलिए आरोपित को रिहा किया जाना चाहिए।

शुक्रवार (नवंबर 6, 2020) को, अर्णब गोस्वामी के वकील की सुनवाई के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस एसएस शिंदे और एमएस कार्णिक की डिवीजन बेंच ने फिर से रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी की याचिका को स्थगित कर दिया है। बता दें, इस याचिका में 2018 के आत्महत्या मामले को रद्द करने की माँग की गई है। अदालत ने कहा कि, कोर्ट को निष्कर्ष पर आने से पहले दूसरे पक्ष को सुनने की जरूरत है। इसी आत्महत्या मामले में अर्णब गोस्वामी को गिरफ्तार किया गया है।। 

बॉम्बे HC ने शुक्रवार को कहा था कि निष्कर्ष पर आने से पहले अदालत को दूसरे पक्ष को सुनने की जरूरत है। अर्नब गोस्वामी ने जेल से अंतरिम रिहाई की भी माँग की। सुनवाई 5 नवंबर को शुरू हुई थी, जिसके एक दिन बाद रायगढ़ अदालत ने पुलिस रिमांड की याचिका खारिज कर दी थी और उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

वहीं अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी मामले पर शुक्रवार (नवंबर 6, 2020) सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र विधानसभा के सचिव को फटकार लगाई है। कोर्ट ने पूरे मामले पर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करके उनके पत्र पर उनसे दो हफ्तों में जवाब माँगा। इसके साथ ही कोर्ट ने अर्णब को राहत प्रदान करते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा था कि उन्हें वर्तमान कार्यवाही के बाद गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।

अर्णब को मुंबई के इंटीरियर डिजाइनर अन्वय और उनकी माँ को कथित तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में 4 नवंबर बुधवार को गिरफ्तार किया गया था। मुंबई पुलिस ने उन्हें न्यायिक सहमति के बिना हिरासत में लिया था। वे 18 नवंबर तक ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं। पिछली 3 रातों से उन्हें अलीबाग में बने कोविड सेंटर में रखा गया था।

अर्णब ने दावा किया था कि पुलिस ने उन्हें जूते से मारा। पानी तक नहीं पीने दिया। सुनवाई के दौरान अर्नब के वकील ने कोर्ट में सप्लीमेंट्री एप्लिकेशन लगाई थी।। इसके अलावा अर्णब ने अपने हाथ में 6 इंच गहरा घाव होने, रीढ़ की हड्डी और नस में चोट होने का दावा भी किया है। अर्णब ने कहा कि पुलिस ने गिरफ्तारी करते समय उन्हें जूते पहनने का भी वक्त नहीं दिया। 

गौरतलब है कि गोस्वामी को रायगढ़ पुलिस ने 4 नवंबर की सुबह उनके मुंबई आवास से गिरफ्तार किया था, जिसके बाद अलीबाग के CJM ने उन्हें 18 नवंबर तक के लिए 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। कथिततौर पर गिरफ्तारी के समय मुंबई पुलिस ने अर्णब के नाबालिग बेटे से मारपीट और उनके परिजनों से बत्तमीजी भी की थी।

जिस पर HC में दायर याचिका में उठाया गया मुख्य तर्क यह है कि मजिस्ट्रेट द्वारा 2019 में पुलिस को सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर मामले में एक क्लोजर आदेश पारित होने के बाद न्यायिक आदेश प्राप्त किए बिना मामले को फिर से खोलने के लिए पुलिस के पास कोई पावर नहीं है।

अब मुख्तार अंसारी की पत्नी और साले पर यूपी पुलिस ने कसा शिकंजा: ₹28 करोड़ 58 लाख की संपत्ति जब्त

योगी सरकार अपराधी और माफियाओं के खिलाफ लगातार शिकंजा कस रही है। उत्तर प्रदेश के जाने माने बाहुबली और पूर्वांचल के बड़े माफिया मुख्तार अंसारी को प्रशासन ने आड़े हाथों ले लिया है। आए दिन उसके और उसके करीबियों के अवैध मकानों की कुर्की और उन्हें बुलडोजर से ध्वस्त करने के मामले सामने आ रहे है।

इसी कड़ी में शनिवार (7 सितंबर, 2020) शाम गाजीपुर पुलिस ने मुख्तार की पत्नी आफशा अंसारी और सालों के नाम रजिस्टर्ड 28 करोड़ 58 लाख की संपत्ति की कुर्की की। इतना ही नहीं पुलिस ने ढोल-डुग्गी बजवाते हुए अवैध संपत्ति के निर्माण और जमीन को कुर्क करने का नोटिस चस्पा किया है।

पुलिस अधीक्षक डॉ. ओपी सिंह ने बताया कि अपराधिक गैंग आईएस-191 के लीडर मुख्तार अंसारी की पत्नी और दो सालों के विरुद्ध गैंगेस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज होने के बाद एनबीडब्ल्यू वारंट जारी किया गया था, कोर्ट द्वारा निर्धारित तारीख पर नहीं पहुँचने के बाद तीनों के खिलाफ इनाम घोषित किया गया है।

उन्होंने कहा कि अब इसकी 28.58 करोड़ रुपए की अनाधिकृत संपत्ति को पुलिस टीम ने कुर्क किया है। मुख्तार अंसारी की पत्नी आफसा अंसारी व उनके साले सरजील रजा और अनवर शहजाद संगठित आपराधिक गिरोह के रूप में अपराध करते है।

जेल में बंद मुख्तार अंसारी पर सख्त कार्रवाई करते हुए बबेड़ी गाँव स्थित एक करोड़ 80 लाख की संपत्ति (गाटा संख्या 607 रकबा 0.539 हेक्टेयर) को प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में शनिवार को कुर्क कर दिया गया। पुलिस के अनुसार अन्य संपत्तियों पर भी कार्रवाई अति शीघ्र करवाई जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक तरफ जहाँ मुख्तार सलाखों के पीछे है वहीं उसकी पत्नी आफसा, सरजील रजा और अनवर शहजाद फरार चल रहे हैं। पत्नी आफसा मुख्तार के अवैध कारनामों की बराबर की हिस्सेदार है। पुलिस ने उस पर भी कुर्क जमीन पर अवैध कब्जे का केस दर्ज किया हुआ है।

आफसा अंसारी पर सरकारी धन गबन करने का भी केस है। वहीं सरजील रजा, अनवर शहजाद पर सरकारी ठेका हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेज लगाने का केस दर्ज है। गैंगस्टर केस के तीनों आरोपितों की धर पकड़ में यूपी पुलिस जुटी हुई है।

गौरतलब है कि इससे पहले यूपी प्रशासन ने माफिया और पूर्व विधायक मुख़्तार अंसारी के गाजीपुर स्थित अवैध साम्राज्य में ‘मुख़्तार अंसारी का ताजमहल’ कहे जाने वाले उसके गजल होटल को ध्वस्त कर दिया था। गजल होटल मुख़्तार अंसारी की बीवी और बेटों के नाम पर पंजीकृत था।

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में नियंत्रक प्राधिकारी बोर्ड विनियमित क्षेत्र गाजीपुर ने बीते शनिवार को गजल होटल के मालिक अब्बास अंसारी व उमर अंसारी की अपील खारिज करते हुए इस पर कार्रवाई की थी। जिला प्रशासन जिले में भी एक के बाद एक कार्रवाई कर रही है। अब तक मुख्तार से जुड़े कुल 68 करोड़ से अधिक की संपत्ति कुर्क और अवमुक्त कराई जा चुकी है।

कानपुर लव जिहाद के मामले में SIT ने पूरी की जाँच: 9 मामलों में मिले चौकाने वाले सबूत

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने कानपुर में लव जिहाद के मामलों की जाँच के लिए अगस्त में एक विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया था। पुलिस ने 14 केस में से आधे की जाँच पूरी कर ली है। इन 14 मामलों में कुछ चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। बता दें हाल ही में लव-जिहाद के मामलों पर सख्त रुख दिखाते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि लव जिहाद वाले नहीं सुधरे तो उनकी ‘राम नाम सत्य’ वाली यात्रा निकल जाएगी।

एनबीटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, एसआईटी के गठन के बाद इस्लाम धर्म कबूल कर निक़ाह करने वाले सारे मामलों पर संज्ञान लिया गया था। जिनमें 12 धर्मांतरण के मामले पहले के थे, वहीं 11 मामले मात्र तीन महीनों के अंदर इसी साल सामने आए थे। जिनमें सबसे ज्यादा चर्चित मामला शालिनी से फिजी फातिमा बनी युवती का था।

मीडिया को सूत्रों से जानकारी मिली है कि पुलिस ने जाँच दौरान जबरन इस्लाम कबूलवाने वाले 14 मामलों को एक अलग श्रेणी में रखा था। इनमें से 9 मामले एसआईटी को ऐसे मिले है जिसमें हिंदू लड़कियों को जबर्दस्ती धर्म परिवर्तन करवाने के ठोस सबूत भी सामने आए है।

रिपोर्ट के अनुसार, आईजी रेंज मोहित अग्रवाल को लव जिहाद के इस घिनौने खेल की रिपोर्ट 1 हफ्ते के भीतर सौंप दी जाएगी। रिपोर्ट की जो बाहरी जानकारी सामने आई है उसमें कहा गया है कि भोली भाली दूसरे समुदाय की लड़कियों को मुस्लिम समुदाय के युवकों द्वारा अपनी धार्मिक पहचान छिपाकर पहले प्रेम मोहब्बत की बात करके अपने झाँसे में लिया जाता था। इसके बाद उनका ब्रेनवॉश, जबरन इस्लाम धर्म कबूल करवाकर निकाह किया जाता था।

वहीं लव-जिहाद के कई मामलों में देखा गया है कि आरोपित ज्यादातर सोशल मीडिया के जरिए युवतियों से संपर्क बनाते है। ये सभी आसपास के ही रहने वाले होते है। उनसे प्यार भारी बातें और पानी की तरह पैसों को बहा कर उनका पहले विश्वास जीतते है। फिर उनसे प्रेम संबंध बनाते है। प्रेम जाल में फँसाने के बाद तमाम तरह के इमोशनल बातें कर उन्हें अपनों के खिलाफ बरगलाया जाता है। इसके बाद बहला-फुसलाकर अपने भगा ले जाते हैं और जबरन इस्लाम धर्म कबूल कराया जाता है।

सोशल मीडिया पर अपने परिवार वालों पर ही संगीन आरोप लगाने वाली शालिनी यादव से फिजा फातिमा बनकर निकाह करने वाली युवती ने वीडियो बवाल खड़ा कर दिया था। जिसके बाद हिंदूवादी संगठनों और युवती के भाई ने इसके पीछे लव जिहाद के खेल को रचने वाले एक पूरे गैंग का खुलासा किया था। वहीं कई पीड़ित परिवार भी सामने आकर लव जिहाद का शिकार हुई अपनी बेटियों के बारे बताया था। आरोप लगाया गया था कि कानपुर में लव जिहाद की जड़ें मजबूत होती जा रही हैं। शहर में एक संगठित गिरोह सक्रिय है, जो दूसरे समुदाय की लड़कियों को प्रेमजाल में फँसाकर जबरन निकाह कराता है।

गौरतलब है कि गरीब घर से होने के बावजूद मुस्लिम युवक इन कारनामों को आसानी से अंजाम दे रहे थे। जिनमें लवजिहाद के पाँच आरोपित एक ही कॉलोनी के पाए गए थे जिन्होंने 5 हिंदू लड़कियों से निकाह किया था। ये पाँचो लड़के आपस में दोस्त भी थे। वहीं जब इन सभी लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया तो सभी ने एक से बढ़कर एक महँगे वकीलों को अपने समर्थन में खड़ा कर दिया था।

वहीं कुछ दिन पहले इस मामले में पैसों का कनेक्शन देखते हुए पुलिस ने जब इसकी जाँच की तो इस घिनौने खेल के पीछे पाकिस्तानी संगठन का पता चला था। यह संगठन मुस्लिम युवकों को हिंदू लड़कियों का ब्रेनवाश और धर्मांतरण करने के लिए फंडिंग करता था। साथ ही इस पूरे मामले की साजिश के पीछे एक मस्जिद का भी नाम सामने आया था।

एजेंसी की जाँच में 50 हज़ार से अधिक फॉलोवर्स वाले पाकिस्तानी संगठन दावत-ए-इस्लामी का पता चला था। ये फॉलोवर्स पूरे शहर में घूम घूम कर अपने समुदाय के लोगों को इस्लाम धर्म के प्रति कट्टर बनाने और हिंदुओं के प्रति नफरत भरने और उन्हें बरगलाने का काम कर रहे थे। एजेंडे के तहत उनके द्वारा भोली-भाली हिन्दू लड़कियों को फँसाने, इस्लाम कबूल करवाने के साथ ही कई हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा था।

बिहार चुनाव: कितने सही होंगे एग्जिट पोल? Bihar election analysis

बिहार चुनाव: कितने सही होंगे एग्जिट पोल? किसकी बनेगी बिहार में सरकार? क्या एग्जिट पोल कह रहे हैं सही कहानी?

पूरा वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

उमर खालिद के खिलाफ मुकदमे की अनुमति के लिए केजरीवाल को वामपंथी, कॉन्ग्रेस और मुस्लिम कट्टरपंथियों ने दी ‘चेतावनी’

दिल्ली दंगों के आरोपित व जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद के लिए केजरीवाल सरकार के यूएपीए के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी देने के बाद कॉन्ग्रेस ट्रोल और इस्लामवादियों ने दिल्ली सरकार और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ एक साथ हल्ला बोल दिए हैं।

उमर खालिद पर मुकदमे को मंजूरी देने के लिए अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार के फैसले ने वामपंथी ‘कार्यकर्ताओं’ और इस्लामवादियों को नाराज कर दिया है। इन कट्टरपंथी सदस्यों को दिल्ली सरकार से बहुत उम्मीदें थीं कि यह सांप्रदायिक दंगों के आरोपित उमर खालिद के खिलाफ अभियोजन को मंजूरी नहीं देगा, क्योंकि इन्होंने जेएनयूएसयू के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार और अन्य पर राजद्रोह के मामले में मुकदमा चलाने से इनकार कर दिया था।

यह ध्यान रखना उचित है कि दिल्ली सरकार ने शुरू में कन्हैया कुमार पर मुकदमा चलाने के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया था। हालाँकि, बाद में, अत्यधिक सार्वजनिक दबाव के कारण, दिल्ली सरकार को कन्हैया कुमार और अन्य के खिलाफ जेएनयू के राजद्रोह के मुकदमे में मुकदमा चलाने के लिए अपनी सहमति देनी पड़ी।

इसी तरह, दिल्ली सरकार ने वामपंथी कट्टरपंथी तत्वों को एक बड़ा झटका देते हुए उमर खालिद के खिलाफ मुकदमा चलाने की सहमति दे दी, जो दिल्ली में हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों की साजिश रचने के लिए कड़े आतंकवाद विरोधी गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत दर्ज किया गया था। फरवरी में इसने 50 से अधिक लोगों की जान ले ली।

वामपंथी कट्टरपंथी और इस्लामवादी अरविंद केजरीवाल और दिल्ली सरकार पर भड़के

केजरीवाल द्वारा केस चलाने की अनुमति देने के तुरंत बाद JNU छात्र नेता अध्यक्ष आइशी घोष ने अपने ट्वीट में सीएम का नाम लिख कर स्पष्ट कहा कि ये धोखेबाजी/ विश्वासघात वो कभी नहीं भूलेंगी। आइशी ने लाइव लॉ के ट्वीट पर अपना रिप्लाई दिया, जिसमें जानकारी दी गई थी कि केजरीवाल सरकार ने उमर के ख़िलाफ़ यूएपीए के तहत कार्रवाई करने की इजाजत दे दी है। इसी ट्वीट पर आइशी ने लिखा, “श्रीमान अरविंद केजरीवाल प्रत्येक विश्वासघात को कभी भुलाया नहीं जाएगा।”

एक अन्य अल्ट्रा-लेफ्ट छात्र नेता साईं बालाजी ने आम आदमी पार्टी के खिलाफ रोष प्रकट करते हुए इसे ’आपदा’ बताया और उन पर भाजपा और आरएसएस का हिस्सा होने का आरोप लगाया।

बालाजी ने कहा कि AAP बीजेपी-आरएसएस के एजेंडे के लिए खड़ा है और उन्हें दिए गए जनादेश के खिलाफ खड़ा है।

Tweet by Sai Balaji

एक वामपंथी ट्रोल ने आम आदमी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे ‘संघी-बी टीम’ होने का दावा किया कि उमर खालिद एक ’नायक’ था जिससे वे डरते हैं।

Tweet by one Subytweets

शेहला रशीद ने दिल्ली सरकार के फैसले का उल्लेख करते हुए, न केवल यह दावा किया कि उसके अमेरिका में दोस्त थे, बल्कि यह भी कहा कि उसके ये ‘दोस्त’ आसानी से अमेरिका में इस तथ्य के लिए सांत्वना ले सकते हैं कि उनका कम से कम वास्तविक विरोध था।

मूल रूप से, रशीद ने कहा कि आम आदमी पार्टी सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ विपक्ष की भूमिका में नहीं रही।

Tweet by Shehla Rashid

कुख्यात इस्लामी ‘पत्रकार’ राणा अयूब ने भी अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मोर्चा खोला।

Tweet by Rana Ayyub

विडंबना की बात यह है कि इन वामपंथी कार्यकर्ताओं और इस्लामवादियों ने उत्साहपूर्वक आम आदमी पार्टी के नेताओं जैसे अमानतुल्ला खान, ताहिर हुसैन के साथ मुस्लिम विरोधी भीड़ को सीएए विरोध प्रदर्शन के दौरान उकसाने के लिए हाथ मिलाया था। बाद में, इन्हीं लोगों ने 2020 के दिल्ली चुनावों में AAP और अरविंद केजरीवाल के लिए भी प्रचार किया था और उम्मीद की थी कि AAP सत्ता में आने के बाद उन्हें दिल्ली की सड़कों पर अराजकता पैदा करने देगी।

आम तौर पर, आम आदमी पार्टी ने इन वामपंथी और इन कट्टरपंथियों के अत्याचारों की अनदेखी की थी, इस उम्मीद में कि उनका इस्तेमाल दिल्ली चुनाव के दौरान किया जा सके।

हालाँकि, दिल्ली सरकार ने इस बार इन कट्टरपंथी तत्वों की ओर से मुँह मोड़कर, कानून के समक्ष जवाबदेह ठहराए जाने से पहले उमर खालिद को आजाद करने की उनकी उम्मीदों को कुचल दिया है।

सिर्फ कट्टरपंथी वामपंथी और इस्लामवादी ही नहीं, इन कट्टरपंथी गुटों के सदाबहार समर्थक- कॉन्ग्रेस इकोसिस्टम भी AAP के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार के खिलाफ हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के मामले में UAPA के तहत उमर खालिद के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से आहत है।

Tweet by Congress troll

सोशल मीडिया पर हिंदू विरोधी घृणा और फर्जी खबरें फैलाने के लिए जाना जाने वाले श्रीवास्तव ने दावा किया कि उमर खालिद के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए केजरीवाल की मंजूरी ने साबित कर दिया कि AAP और कुछ नहीं, BJP की बी टीम है। दोनों की राजनीतिक और वैचारिक समानता है।

उन्होंने दावा किया कि केजरीवाल ने अल्पसंख्यकों और भाजपा विरोधी कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न समर्थन किया है, जबकि यह भी कहा कि केवल कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी भाजपा और आरएसएस के खिलाफ एक विरोधी के रूप में खड़े रहे।

एक अन्य कॉन्ग्रेस ट्रोल संघमित्रा ने कहा कि दिल्ली में मुस्लिमों ने 2020 के दिल्ली चुनावों में आम आदमी पार्टी को भारी वोट दिया था, हालाँकि, केजरीवाल उमर खालिद पर मुकदमा चलाने की मंजूरी देकर उन्हें ब्याज दे रहे हैं।

Tweet by Congress troll

इस तरह से कॉन्ग्रेस ने उमर खालिद जैसे कट्टरपंथी इस्लामवादी की तुलना करके दिल्ली के मुसलमानों का सामान्यीकरण किया।

Tweet by Congress troll

एक अन्य कॉन्ग्रेस ट्रोल अजय ने कहा कि उमर खालिद जेएनयू से पीएचडी होने के बावजूद अरविंद केजरीवाल की संघ परिवार की जड़ों के माध्यम से देखने की दूरदर्शिता नहीं रखते।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को इस बात की जानकारी दी कि उन्होंने दिल्ली दंगे मामले में पुलिस की तरफ से दर्ज किए गए हर केस में प्रॉसिक्यूशन की मंजूरी दे दी है। अब यह कोर्ट को देखना है कि आरोपित कौन हैं।

बता दें कि इस साल के फरवरी माह में हुए दंगों में उमर खालिद को 13 सितंबर को यूएपीए कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था। उस पर राजधानी दिल्ली के उत्तर पूर्वी क्षेत्र में दंगों का षड्यंत्र रचने, भड़काऊ भाषण देने और हिंसा भड़काने का आरोप लगाया गया था।

यूपी में कुख्यात डॉन बदन सिंह बद्दो के शाही बंगले की हुई कुर्की: मेरठ से भागा था 2.5 लाख का इनामी हिस्ट्रीशीटर

योगी सरकार इन दिनों माफ‍िया और अवैध कार्यों से जमा की गई संपत्ति और अवैध निर्माण को लेकर कड़ी कार्रवाई कर रही है। अपराधियों पर नकेल कसने की इस कड़ी में प्रशासन ने मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद और सुंदर भाटी के बाद अब वेस्ट यूपी के कुख्यात बदन सिंह पर शिकंजा कसा है। मेरठ पुलिस ने शनिवार (7 नवंबर, 2020) की सुबह ढाई लाख के इनामी हिस्ट्रीशीटर बद्दो के घर की कुर्की ढोल नगाड़े के साथ की।

यह कुर्की एसपी कृष्ण बिश्नोई और ब्रह्मपुरी सीओ अमित कुमार राय के नेतृत्व में की गई है। पंजाबीपुरा में स्थित कुख्यात बदमाश के कोठे पर ब्रह्मपुरी और टीपी थाना पुलिस ने पहुँचकर इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया। पुलिस ने घर में रखा सारा कीमती सामान जब्त कर लिया। इस दौरान घर के भीतर बदन सिंह बद्दो की बहन मौजूद थी। कुर्की से पहले पुलिसने अदालत के आदेश को भी पढ़ा। कुर्की किया गया मकान बद्दो के नाम पर है।

जिसके बाद पुलिस ने समान को जब्त कर कई गाड़ियों में भरकर उन्हें थाने भेज दिया। पुलिस अधिकारियों ने पूरे घर को खंगाला और उसके बाद घर के सामान को जब्त करने की कार्यवाही की गई।

कुर्की के दौरान ढोल बजाकर लोगों को जानकारी दी जा रही थी कि बदन सिंह बद्दो की घर की कुर्की की जा रही है। अगर इस कुर्की से किसी को ऐतराज है तो वो यहाँ आ करके अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है। वहीं, सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसी भी तरह की कोई अप्रिय घटना ना हो सके।

गौरतलब है कि वेस्टर्न यूपी का कुख्यात बदमाश बदन सिंह बद्दो पिछले 20 महीने से फरार चल रहा है। मेरठ के एक होटल से अप्रैल 2019 में एक पेशी के दौरान वह पुलिस को चकमा देकर भाग गया था। जिसके बाद से आज तक बदन सिंह बद्दो का कोई पता नहीं चल पाया है। लेकिन समय-समय पर बदन सिंह बद्दो सोशल मीडिया पर एक्टिव रहता है। जिस पर वह अपने विरोधियों और पुलिस धमकी देता है।

बद्दो पर अपरहण, रंगदारी और जमीन कब्जे को लेकर कई मामले दर्ज है। इसके अलावा मुजफ्फरनगर के सुशील मूंछ और बदन सिंह की जोड़ी का अपराध की दुनिया में बोलबाला है। पिछली सरकारों में लोगों पर दबदबा बनाने वाले इन बदमाशों की कमर यूपी की योगी सरकार ने तोड़ दी है। सरकार की सख्त कार्रवाई से परेशान ये अपराधी अपनी जान बचाने के लिए छुपते हुए इधर-उधर भटक रहे है।

मोस्ट वांटेड और उत्तर प्रदेश के टॉप टेन बदमाशों की सूची में शामिल बदन सिंह बद्दो के शाही बंगले की कीमत करोड़ों में है। एसएसपी अजय साहनी ने बताया कि बदन सिंह उर्फ बद्दो पुत्र चरन सिंह निवासी बेरीपुरा टीपीनगर एक अभ्यस्त अपराधी है। वह बार-बार अपराध कर रहा है। उसने आर्थिक और भौतिक चाहत के लिए अपराध किया, जिससे आम जनता में भय और रोष व्याप्त है। ऐसे अभ्यस्त अपराधी की लगातार निगरानी और प्रभावी कार्रवाई के लिए बद्दो को जिले का अपराध माफिया घोषित किया गया है।