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बिहार चुनाव: अब राजद नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने PM मोदी को कहा- ‘दंगे वाला CM’, भड़के लोग

बिहार में चल रहे चुनावों के बीच राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने पीएम मोदी के खिलाफ विवादास्पद बयान दिया है। तीसरे चरण के मतदान से पहले एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए सिद्दीकी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘दंगेवाला सीएम’ के रूप में संदर्भित किया। जिससे सोशल मीडिया सहित कई जगहों पर लोग भड़क गए हैं।

जनता को संबोधित करते हुए अब्दुल बारी भाजपा के दिवंगत नेता अटल बिहारी वाजपेयी की तारीफ और पीएम मोदी पर हमलावर होते हुए नजर आए। उन्होंने कहा, “हमने अटल बिहारी वाजपेयी जैसे दिग्गजों को देखा है। जबकि उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता हम लोगों से भिन्न थी। लेकिन वह देश को समझते थे, समाज को समझते थे, यहाँ की संस्कृति को समझते थे। यही कारण है कि अल्पसंख्यक आज भी उनका आदर करते हैं। जिन्हें आज भाजपा निशाना बना रही है। लेकिन मोदी जी को यह अहसास नहीं हो रहा है कि वह देश के प्रधानमंत्री हैं। उन्हें अब भी लग रहा है कि वह गुजरात के वही दंगेवाले सीएम हैं।”

बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष और बिहार सरकार के लोक लेखा समिति के अध्यक्ष राजद नेता ने जारी चुनावों के बीच अपने बयानों के कारण नया बवाल खड़ा कर दिया है। बता दें शनिवार को बिहार में कुल 78 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान होगा। इस चुनाव में कुल 2.35 करोड़ वोट डालने के योग्य हैं। चुनावों के तीसरे और अंतिम चरण में 1200 उम्मीदवारों के भाग्य का निर्धारण किया जाएगा।

गौरतलब है कि गोधरा में मुस्लिम भीड़ द्वारा 27 फरवरी 2002 को अयोध्या से लौट रही साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन में एक डिब्बे में आग लगा दी गई थी। अयोध्या से लौट रहे 59 कारसेवकों को जिंदा जला दिया गया था। इन डिब्बों में कई महिलाएँ और बच्चें भी शामिल थे। इस नरसंहार के बाद गुजरात में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे। यह याद रखना उचित है कि पीएम मोदी को 2002 के गुजरात दंगों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा क्लीन चिट दे दी गई थी। जो गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के जलने के बाद भड़की थी।

कस्टडी में बीतेगी अर्णब की तीसरी रात, जमानत पर कल होगी सुनवाई: जानिए वकील हरीश साल्वे ने आज कोर्ट में क्या कहा

अर्णब गोस्वामी के वकील की सुनवाई के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस एसएस शिंदे और एमएस कार्णिक की डिवीजन बेंच ने फिर से रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी की याचिका को स्थगित कर दिया है। बता दें, इस याचिका में 2018 के आत्महत्या मामले को रद्द करने की माँग की गई है। अदालत ने कहा कि, कोर्ट को निष्कर्ष पर आने से पहले दूसरे पक्ष को सुनने की जरूरत है।

अर्णब गोस्वामी ने जेल से अंतरिम रिहाई की भी माँग की थी। वहीं अब अदालत 7 नवंबर (शनिवार) को दोपहर 12 बजे याचिका पर आगे की सुनवाई जारी रखेगी। इसका मतलब यह होगा कि रिपब्लिक टीवी के प्रमुख को एक और रात न्यायिक हिरासत में बिताना पड़ेगा।

रिपब्लिक टीवी के प्रमुख अर्णब गोस्वामी द्वारा दायर की गई बंदी की याचिका की सुनवाई हुई थी। अर्णब गोस्वामी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने पीठ को बताया कि अलीबाग अदालत द्वारा रिमांड आदेश अर्णब की अवैध गिरफ्तारी को लेकर कई पॉइंट को दर्शाता है। साथ ही लगाए गए आरोपों की योग्यता पर भी सवाल खड़े करता है।

साल्वे ने न्यायालय को विशेषाधिकार संबंधी कार्यवाही के उल्लंघन से अवगत कराया जिसके तहत आत्महत्या के मामले को फिर से खोला गया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अर्णब गोस्वामी को गिरफ्तारी से संरक्षण दिया है और महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष को एक अवमानना ​​नोटिस भी जारी किया है।

साल्वे का कहना है कि उन्होंने याचिका के साथ धारा 438 के तहत एक आवेदन दायर किया है। “मेरी याचिका में आरोप लगाया गया है कि जो मामला बंद किया गया था उसे दुर्भावनापूर्ण इरादों के साथ फिर से खोला गया है।”

वहीं गोस्वामी की ओर से पेश अधिवक्ता पोंडा ने अदालत के आदेश को पढ़ा, जिसमें CJM ने उल्लेख किया है कि मामले को फिर से खोलने के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई है।

रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ को 2019 में बंद किए मामले में फँसाने (जिसमें कोई सबूत नहीं मिला था) और महाराष्ट्र सरकार की चाल पर प्रकाश डालते हुए साल्वे ने अदालत को बताया कि गृह मंत्री अनिल देशमुख ने विधानसभा में आरोप लगाया था कि अर्णब गोस्वामी इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक की आत्महत्या के जिम्मेदार थे। बता दें नाइक ने कथित तौर पर 2018 में आत्महत्या कर ली थी। उन्‍होंने कहा कि पुलिस अर्णब के लिए पुलिस रिमांड को पाने की कोशिश कर रही थी, जिसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अस्वीकार कर दिया था।

रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार के निजी प्रतिशोध पर प्रकाश डालते हुए साल्वे ने अदालत को बताया कि गृह मंत्री अनिल देशमुख ने असेंबली में आरोप लगाया था कि अर्णब गोस्वामी इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार थे, जिन्होंने 2018 में कथित रूप से आत्महत्या की थी।

साल्वे ने कहा कि सीजेएम ने अपने आदेश में कहा, “ऐसा लगता है कि आरोपित (अर्णब गोस्वामी) की गिरफ्तारी अवैध है।” साथ ही साल्वे ने विधानसभा में किस प्रकार चर्चा की गई इस ओर भी कोर्ट के ध्यान को आकर्षित किया।

मुंबई पुलिस ने हंसा रिसर्च ग्रुप के कर्मचारियों पर रिपब्लिक के खिलाफ बयान देने का बनाया दबाव

साल्वे ने अर्नब गोस्वामी के खिलाफ पहले से दर्ज एफआईआर का जिक्र करते हुए दावा किया कि महाराष्ट्र सरकार ने रिपब्लिक को निशाना बनाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए। साल्वे ने हंसा रिसर्च ग्रुप का भी हवाला दिया, जिसने अदालत में यह दलील दी कि मुंबई पुलिस द्वारा उन्हें रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के खिलाफ गलत बयान देने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

शिवसेना नेता संजय राउत पर कटाक्ष करते हुए साल्वे ने अदालत से कहा कि कोई भी व्यक्ति जो कानून से परिचित नहीं है, वह भी इन आरोपितों (जो अर्णब गोस्वामी और अन्य दो आरोपियों को आत्महत्या के मामले में 2018 में आत्महत्या के मामले में दोषी ठहराता है) को प्रथम दृष्टया में आरोपित ठहरा रहा है। मतलब अगर किसी का नाम सुसाइड नोट में है तो उसे जेल में डाल देना चाहिए।

साल्वे ने कहा, “बिना किसी सकारात्मक कार्रवाई के उत्पीड़न के आरोप पर कार्रवाई, अभियुक्त की ओर से होने वाली घटना के समय के लिए कोई सकारात्मक कार्रवाई न होना, जिसके कारण व्यक्ति को आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया गया हो, धारा 306 आईपीसी के संदर्भ में सजा टिकाऊ नहीं है।” साल्वे ने दोहराया कि अगर अन्वय नायक ने वित्तीय नुकसान के कारण आत्महत्या की, तो उनकी माँ ने अपना जीवन क्यों समाप्त कर लिया? हम आत्महत्या के पीछे की परिस्थितियों को नहीं जानते हैं। किसी ने यह स्थापित नहीं किया कि अवैध कमीशन है। साल्वे ने तर्क देते हुए कहा कि इन परिस्थितियों में अर्नब को हिरासत में रखने की कोई आवश्यकता नहीं है।

साल्वे ने पीठ को बताया कि मजिस्ट्रेट को प्रथम दृष्टया पता चलता है कि गिरफ्तारी गैरकानूनी है और सारा कृत्य आपसी दुश्मनी का है। अर्णब के वकील ने विभिन्न पिछले मामलों का हवाला देते हुए बताया कि उच्च न्यायालय असाधारण परिस्थितियों में अनुच्छेद 226 के तहत भी जमानत दे सकता है।

गौरतलब है कि गोस्वामी को रायगढ़ पुलिस ने 4 नवंबर की सुबह उनके मुंबई आवास से गिरफ्तार किया था, जिसके बाद अलीबाग के CJM ने उन्हें 18 नवंबर तक के लिए 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। कथिततौर पर गिरफ्तारी के समय मुंबई पुलिस ने अर्णब के नाबालिग बेटे से मारपीट और उनके परिजनों से बत्तमीजी भी की थी।

जिस पर HC में दायर याचिका में उठाया गया मुख्य तर्क यह है कि मजिस्ट्रेट द्वारा 2019 में पुलिस को सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर मामले में एक क्लोजर आदेश पारित होने के बाद न्यायिक आदेश प्राप्त किए बिना मामले को फिर से खोलने के लिए पुलिस के पास कोई पावर नहीं है।

दीदी का उद्देश्य अपने भतीजे को CM बनाना, नहीं भेजे राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो को 2018 के बाद के रिकॉर्ड: अमित शाह

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव अगले साल होने वाले हैं लेकिन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अभी से प्रदेश में अपना मुआएना करना शुरू कर दिया है। दो दिन का प्रदेश दौरा करने पहुँचे गृहमंत्री ममता सरकार पर जम कर वार कर रहे हैं। कल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने बंगाल को एक बार फिर सोनार बांग्ला बनाने का आह्वान किया। वहीं दूसरे दिन की शुरुआत उन्होंने दक्षिणेश्वर मंदिर में पूजा के साथ की।

इसके बाद वह एक स्थानीय कार्यकर्ता नवीन बिस्वास के घर पहुँचे और परंपरागत तरीके से जमीन पर बैठकर भोजन किया। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा कि वो नवीन बिस्वास और उनके परिवार के आतिथ्य भाव के लिए उनके आभारी रहेंगे।

फिर, अपने दो दिवसीय दौरे के आखिरी दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अमित शाह ने कहा कि टीएमसी सरकार पिछले 10 सालों में उम्मीदो पर खरा नहीं उतर पाई है। जनता से किए वादे भी पूरे नहीं हुए हैं इसलिए लोगों की उम्मीद गुस्से में बदल चुकी हैं।

उन्होंने कहा, “आज मेरा बंगाल का दो दिवसीय दौरा समाप्त हो रहा है। इस दौरे के दौरान भाजपा के 4 विभागों के कार्यकर्ता और समाज के अन्य कार्यकर्ताओं से मिलना हुआ। करीब 180 से ज्यादा संस्थाओं के प्रतिनिधियों से भी संवाद हुआ।”

गृहमंत्री ने कहा कि बंगाल में कम्युनिस्ट शासन से त्रस्त होकर ममता बनर्जी के हाथों में बंगाल की कमान दी गई थी। मगर आज माँ, माटी और मानुष का नारा तुष्टिकरण, तानाशाही और टोलबाजी में परिवर्तित हो गया है।

उनके अनुसार, “बंगाल की जनता में एक अजीब प्रकार का वातावरण दिख रहा है। मैं जहाँ भी गया तो सैकड़ों लोग सड़कों पर आए थे। जब वो भारत माता की जय, वंदे मातरम, जय श्रीराम के नारे लगाते थे, वो हमारे स्वागत में कम, ममता सरकार के प्रति गुस्से को ज्यादा दिखाते थे।”

बंगाल की जनता को आश्वस्त करते हुए अमित शाह ने कहा, “मैं बंगाल की जनता को आश्वस्त करने आया हूँ कि आपने कॉन्ग्रेस को भी 1 मौका दिया, कम्युनिस्टों को भी बार-बार मौके दिए और 2 मौके ममता जी को दिए। एक मौका मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा को दे दीजिए, हम 5 वर्ष के भीतर सोनार बांग्ला बनाने का वादा करते हैं।”

बंगाल विकास, सुरक्षित सीमा और घुसपैठ नियंत्रण को अपना स्पष्ट लक्ष्य बताते हुए कहा कि TMC और दीदी का एकमात्र लक्ष्य है कि अगले टर्म में भतीजे को मुख्यमंत्री बना देना है। अब बंगाल की जनता को तय करना है कि परिवारवाद चाहिए या विकासवाद चाहिए।  

अमित शाह ने कहा, “मैं ममता जी से पूछना चाहता हूँ कि उन्होंने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो को 2018 के बाद से पश्चिम बंगाल के अपराध रिकॉर्ड क्यों नहीं भेजे? आप क्या छिपाने की कोशिश कर रहे हैं और क्यों? लोग राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति के बारे में जानना चाहते हैं।”

उन्होंने दावा किया कि इस बार बंगाल के विधानसभा चुनाव वह 200 से ज्यादा सीटों से जीतेंगे और प्रदेश में उनकी सरकार ही बनेगी। उनका कहना है कि जेपी नड्डा के नेतृत्व में भाजपा बंगाल चुनाव को गंभीरता से ले रही है, क्योंकि इससे सरकार की सुरक्षा जुड़ी है, साथ ही अति पिछड़े गरीब लोगों के भले का भी सवाल है। 

ताहिर खान ने भारती को झाँसी से किया था किडनैप, संदिग्ध हालत में भोपाल में हुई मौत: परिवार ने लगाया लव जिहाद का आरोप

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लव जिहाद का शिकार बनी यूपी की लड़की की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। जून 2019 में झाँसी से ताहिर खान ने मिनी भारती को किडनैप कर लिया था। जिसकी पहचान अब तरन्नुम नाम से हुई है। पुलिस ने मामले में 2 आरोपितों को गिरफ्तार कर मामले की जाँच शुरू कर दी है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, भोपाल के कोलार इलाके के गेहूँखेड़ा में रहने वाला ताहिर खान नाम का युवक डेढ़ साल पहले नाबालिक युवती को बहला फुसलाकर झाँसी से भगाकर भोपाल ले आया था और उसके बाद उसकी कोई खोज खबर नहीं थी। युवती की मौत के बाद परिजनों को भारती के बारे में पुलिस से पता चला।

पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, ताहिर खान ने गंभीर अवस्था मे नाबालिग हिंदू युवती को तरन्नुम नाम से चूनाभट्टी स्थित अस्पताल में भर्ती कराया था। इलाज के दौरान युवकी की संदिग्ध हालात में मृत्यु हो गई। तफ्तीश के दौरान पुलिस ने युवती का कनेक्शन यूपी के झाँसी में पाया।

भोपाल पुलिस तुरंत कार्रवाई करते हुए मामले की जानकारी यूपी पुलिस को दी। जिस दौरान पुलिस को मृतक लड़की के असली नाम और परिजनों का पता चला। जिसे अस्पताल में ताहिर खान ने तरन्नुम नाम से अपनी पत्नी रूप में भर्ती करवाया था।

परिजनों का आरोप हैं कि बेटी को बहला फुसलाकर भोपाल लाने के बाद आरोपित ताहिर ने बेटी का नाम बदलकर तरन्नुम कर दिया और उसी नाम से उसको अस्पताल में भर्ती कराया। लड़की के परिजनों ने आरोप लगाया कि लड़की को बंधक बनाकर रखा गया था। पुलिस ने इस मामले में अभी कोई भी जानकारी नहीं दी है। हालाँकि, हिंदू संगठनों ने भी घटना पर नाराजगी जताई है और आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है।

पुलिस ने कहा, मौत के कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। साथ ही धर्म परिवर्तन की बात जाँच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। एसपी साईं कृष्णा एस थोटे ने बताया कि पुलिस ने 2 लोगों को गिरफ्तार किया है और मामले की पड़ताल कर रही है।

‘मैं J&K पुलिस और सेना का शुक्रगुजार हूँ, उन्होंने मुझे जिंदगी जीने का एक और मौका दिया’: सरेंडर के बाद बोला आतंकी, देखें Video

जम्मू कश्मीर के पंपोर में एक आतंकी के सरेंडर की वीडियो सामने आई है। वीडियो में देख सकते हैं कि आतंकी अपने पास से सारी चीजें जमीन पर फेंक कर सुरक्षाबल की ओर आगे बढ़ा चला आ रहा है। वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि दक्षिणी कश्मीर में सुरक्षाबलों के ऑपरेशन के दौरान आतंकी ने यह सरेंडर किया। इससे पहले उसके एक साथी को भारतीय सुरक्षाबल ढेर कर चुकी थी। पुलिस का कहना है कि घाटी में अब तक 9 आतंकी सरेंडर कर चुके हैं।

सरेंडर के वीडियो में हम देख सकते हैं कि सुरक्षाकर्मी बड़े आराम से आतंकी को आश्वस्त करके अपने पास बुला रहे हैं। वह उसके पास जाकर उससे पिस्टल आदि बरामद करते हैं और फिर उसे आगे लेकर आते हैं।

आतंकी वीडियो में अपना नाम खाबिर सुल्तान मीर बताते हुए कहता है, “मैने आतकी संगठन सितंबर में ज्वाइन किया था। अभी मैं शुक्रगुजार हूँ जम्मू-कश्मीर पुलिस का और यहाँ की आर्मी का क्योंकि उन्होंने मुझे मौका दिया अपनी लाइफ जीने के लिए। फिर से जीने के लिए। ये लोग मुझे जिंदा लेकर आए और मुझे कोई टॉर्चर नहीं किया। मुझे अच्छे से अपने भाई की तरह ही लेकर आए। जो हथियार मेरे पास थे। वो सभी मैंने वहीं पर रख दिए हैं।”

आतंकी खाबिर सुल्तान को वीडियो के आखिर में कहते सुना जा सकता है, “मैं सब भाइयों से अपील करता हूँ कि ये खून खराबा फरेब है, झूठ है, बहकावा है, इसमें कुछ भी नहीं है।” 

उल्लेखनीय है कि इस वीडियो को देखने के बाद कई नेटिजन्स की भिन्न भिन्न प्रकार की प्रतिक्रिया आई है। लोगों का कहना है कि ऐसे लोगों के लिए भारतीय सुरक्षाबल कितनी भी आत्मीयता दिखा लें लेकिन यह लोग कभी नहीं बदलते। हालाँकि, कुछ का कहना यह भी है कि ऐसा करके सुरक्षाबल ने उस आतंकी को सही रास्ते पर लाने का काम किया है।

बता दें कि जम्मू कश्मीर में पिछले साल से आतंकियों के सफाए का काम सुरक्षाबल ने तेज कर दिया है। ऐसे में गुरुवार को उन्हें पुलवामा के मीज पंपोर में दो आतंकियों के छिपे होने की बात पता चली। इसके बाद फौरन स्थानीय पुलिस व सीआपीएफ के जवानों ने इन्हें पकड़ने के लिए ऑपरेशन शुरू किया। इस ऑपरेशन में एक आतंकी को मौके पर ढेर कर दिया गया। वहीं दूसरे ने आत्मसमर्पण कर दिया। इस एनकाउंटर में सेना का एक जवान और दो अन्य नागरिक घायल हुएए हैं।

याद दिला दें अभी कुछ दिनों पहले ऐसे ही एक आतंकी के सरेंडर करते हुए वीडियो बडगाम से सामने आई थी। वीडियो में सुरक्षाबल के लहजे ने सभी के दिलों को जीत लिया था। वहीं सरेंडर के बाद आतंकी भी सहज होकर सुरक्षाकर्मियों को सभी बात बताते नजर आया था।

CM केजरीवाल ने दीवाली से पहले पटाखों के इस्तेमाल व बिक्री पर लगाया बैन: उल्लंघन पर ₹1 लाख तक का जुर्माना

दिल्ली में दीवाली से पहले केजरीवाल सरकार ने पटाखों को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। दिल्ली सरकार में पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने शुक्रवार (नवंबर 6, 2020) को इसकी जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि पटाखे जलाने और पटाखे बेचने वालों पर ₹1 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री का यह बयान दिल्ली सीएम की उस घोषणा के एक दिन बाद आया है जिसमें सीएम केजरीवाल ने ग्रीन क्रैकर समेत किसी भी प्रकार के पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया था। 

इसी घोषणा के बाद गोपाल राय ने कहा कि पटाखे बेचने या फोड़ने वाले लोगों पर वायु प्रदूषण (नियंत्रण) अधिनियम (1981) के तहत 1 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। गोपाल राय ने बताया कि आरोपित के खिलाफ एयर एक्ट के तहत केस बनाया जाएगा, जिसमें 1 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। 

आगे उन्होंने सोमवार (नवंबर 9, 2020) को होने वाली एक बैठक के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह पर्यावरण विभाग, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और दिल्ली पुलिस के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करेंगे ताकि प्रतिबंध को लागू करने के लिए एक विस्तृत कार्य योजना तैयार की जा सके।

उनका कहना है कि वैसे तो दिल्ली में प्रदूषण के स्रोत साल भर लगातार बने रहते हैं लेकिन दीवाली में पटाखे फोड़ने और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने से दिल्ली का प्रदूषण बढ़ जाता है। आगे उन्होंने कोरोना के बढ़ते मामलों का भी हवाला दिया और कहा कि लोगों की जान बचाने के लिए यह कदम जरूरी है।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री केजरीवाल ने गुरुवार को पटाखों पर प्रतिबंध को लेकर घोषणा की थी कि दिल्ली में 7 नवंबर से 30 नवंबर तक पटाखे आदि बैन रहेंगे। इसके बाद कई लोगों ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। पटाखा कारोबारियों ने भी इस पर अपना गुस्सा जाहिर किया।

एएनआई समाचार एजेंसी के अनुसार, दिल्ली के एक पटाखा विक्रेता ने इस प्रतिबंध पर कहा, “दिल्ली सरकार को पटाखों पर बैन लगाना ही था तो पहले बता देती और हमें लाइसेंस जारी न करती। हम कोई और काम कर लेते। हमने जो माल उठा रखा है जो बुकिंग कर रखी है वो तो वेस्ट हो गई। हमें कम से कम 15 लाख का नुकसान हो रहा है।”

वहीं भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष ने भी केजरीवाल सरकार के इस फैसले पर बयान दिया है। उन्होंने कहा, “दिल्ली में प्रदूषण की समस्या को लेकर केजरीवाल जी अगर आप कुछ ठोस कदम उठाते तो आज ये पटाखे बैन करने की नौबत नहीं आती। ग्रीन पटाखों को बैन कर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाकर मुख्यमंत्री जी आपने गलत किया है और धार्मिक भावनाओं को आहत करने का काम किया है।”

2017 से अब तक 279 लोग शिरडी से लापता: बॉम्बे HC ने मानव तस्करी की आशंका में महाराष्ट्र पुलिस से माँगा जवाब

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने महाराष्ट्र के शिरडी शहर से पिछले कुछ सालों से गायब हो रहे लोगों के बढ़ते मामलों को देखते हुए महाराष्ट्र पुलिस को मामले में संज्ञान लेने का निर्देश दिया है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बॉम्बे हाईकोर्ट ने महसूस किया कि लापता हो रहे लोगों का पता लगाने में महाराष्ट्र पुलिस का प्रयास काफी असंतोषजनक रहा है। कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस महानिदेशक (DGP) से इस मुद्दे पर गौर करने और सख्त कदम उठाने के लिए कहा है। उच्च न्यायालय ने डीजीपी से, गुमशुदगी के पीछे (मानव) तस्करी या अंग तस्करी रैकेट की संभावना की जाँच करने और इस पर से पर्दा हटाने का आदेश भी दिया है

शिरडी पुलिस द्वारा बॉम्बे हाईकोर्ट को सौंपे गए आँकड़ों के अनुसार 2017 से 27 अक्टूबर, 2020 के बीच अहमदनगर के शिरडी से लगभग 279 लोगों के लापता होने की सूचना है। इनमें से 67 लापता लोगों को अभी तक ट्रेस नहीं किया जा सका हैं।

बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने पाया कि 2017 में शिरडी से 20 लोग लापता हो गए थे, जिनका अभी पता नहीं चल पाया है। वहीं इस साल मार्च में हुए लॉकडाउन से पहले 20 अन्य लोगों के लापता होने की सूचना है।

बता दें इंदौर निवासी मनोज सोनी द्वारा कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। मनोज 10 अगस्त, 2017 को अपने परिवार के साथ साईंबाबा मंदिर में दर्शन करने के लिए शिरडी आए थे। उनकी 35 वर्षीय पत्नी दीप्ति एक शाम मंदिर में दर्शन करने के बाद गायब हो गई थी, जिनका अभी तक पता नहीं लग पाया है।

न्यायमूर्ति रवींद्र वी. घुघे और न्यायमूर्ति बीयू देबदवार की खंडपीठ ने 26 अक्टूबर को अहमदनगर के एसपी को दीप्ति मामले में पुलिस द्वारा किए गए प्रयासों को लेकर अदालत को एक रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा था।

इस मामले में उच्च न्यायालय द्वारा मानव तस्करी करने वाले गिरोहों की संलिप्तता पर संदेह किया जा रहा है।

अदालत के समक्ष प्रस्तुत आँकड़ों में कहा गया है कि 2017 में शिरडी से लापता 71 लोगों की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। जिनमें से 51 लोग वापस मिल गए थे जबकि दीप्ति सहित 20 लोग अभी भी लापता हैं। वहीं 2018 में गुम हुए 82 व्यक्तियों में से 13 का पता अभी तक नहीं चल पाया है और 2019 में लापता हुए 88 में से 14 के लापता होने की सूचना है। इस साल 2020 में 38 लोग लापता हुए, जिनमें केवल 18 लोगों का ही पता चला है।

मानव-तस्करी के मद्देनजर अदालत को जवाब देते हुए अभियोजक ने अदालत से कहा कि, शिरडी पुलिस को अभी तक किसी भी मानव तस्करी या अंग तस्करी समूह का लिंक इस मामले में नहीं मिला है। जिसके लिए लोगों का अपहरण या उन्हें गायब किया जा रहा है।

न्यायाधीशों ने कहा कि 26 अक्टूबर को अदालत के आदेश के बाद पुलिस को गहरी नींद से उठाया गया। कोर्ट ने कहा कि इंसान झूठ बोल सकता है लेकिन दस्तावेज झूठ नहीं बोलेंगे। 22 नवंबर, 2019 को कोर्ट के आदेश के अनुसार, शिरडी पुलिस द्वारा जाँच के लिए गठित विशेष यूनिट का इस मामले में किया गया प्रयास संतोषजनक नहीं है।

अदालत ने आगे कहा, “हम आश्वस्त हैं कि शिरडी पुलिस स्टेशन ने शायद ही कोई प्रयास किया हो। और यह इस तरफ इशारा किया कि अहमदनगर पुलिस विभाग के प्रमुख भी अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहे हैं।”

बॉम्बे हाई कोर्ट की बेंच ने यह भी कहा कि वह 24 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में डीजीपी के जवाब का इंतजार करेगी।

उमर खालिद और शरजील इमाम पर चलेगा UAPA के तहत मुकदमा: गृह मंत्रालय ने दिया ग्रीन सिग्नल

उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों और हिंसा को लेकर गृह मंत्रालय और दिल्ली सरकार ने बड़ा ऐलान किया है। ऐलान के मुताबिक़ जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और शरलीज इमाम पर गैर कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मुकदमा चलाने को हरी झंडी दिखा दी गई है। यानी उमर खालिद और शरजील इमाम दोनों पर यूएपीए के तहत मुकदमा दर्ज करके आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी। 

कुछ महीनों पहले ही उमर खालिद पर फरवरी के दौरान राजधानी दिल्ली के उत्तर पूर्वी क्षेत्र में दंगों का षड्यंत्र रचने, भड़काऊ भाषण देने और हिंसा भड़काने का आरोप लगाया गया था। इन आरोपों की जाँच होने के बाद उमर खालिद को यूएपीए अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था। 

क़ानूनी प्रक्रिया को मद्देनज़र रखते हुए किसी भी व्यक्ति पर यूएपीए के तहत मामला चलाने के लिए गृह मंत्रालय की स्वीकृति अनिवार्य होती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गृह मंत्रालय ने लगभग एक हफ्ते पहले इस पर स्वीकृति जारी की थी। बहुत जल्द दिल्ली पुलिस उमर खालिद और शरजील इमाम के विरुद्ध अदालत में चार्जशीट दायर करने जा रही है। 

इसके अलावा कड़कड़डूमा अदालत ने उमर खालिद की न्यायिक हिरासत 20 नवंबर तक के लिए बढ़ा दी है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में उमर खालिद की न्यायिक हिरासत 30 दिन तक बढ़ाने के लिए अर्जी लगाई थी। उमर खालिद के अधिवक्ता ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि वह पुलिस को जाँच के दौरान पूरा सहयोग प्रदान कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में दिल्ली पुलिस की तरफ से इस तरह का आरोप लगाना कि उमर पुलिस की जाँच प्रक्रिया में सहयोग नहीं कर रहा है, यह आरोप निराधार है। उमर की न्यायिक हिरासत बढ़ाने के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा लगाई गई अर्जी सरासर गलत है। 

वहीं दिल्ली पुलिस ने भी इस पूरे प्रकरण पर अपना पक्ष रखा था। दिल्ली पुलिस का कड़कड़डूमा अदालत के समक्ष कहना था कि मामले की जाँच हो रही है इस बात को मद्देनज़र रखते हुए उमर खालिद को जमानत नहीं दी जानी चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने उमर खालिद की न्यायिक हिरासत 20 नवंबर तक के लिए बढ़ा दी है। फ़िलहाल उमर खालिद न्यायिक हिरासत में ही है और पुलिस इस मामले से जुड़े अहम पहलुओं की जाँच कर रही है। 

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र उमर खालिद को दिल्ली पुलिस ने रविवार (13 सितंबर 2020) को गिरफ्तार किया था। फरवरी में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) विरोध के दौरान दिल्ली के कई इलाकों में दंगे हुए थे और उमर खालिद पर उन दंगों का षड्यंत्र रचने का आरोप है। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने उमर खालिद पर गैर क़ानूनी गतिविधि (नियंत्रण) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया था। 

वहीं शरजील इमाम ने पिछले साल सीएए विरोधी प्रोटेस्ट के दौरान भड़काऊ बयान देकर असम को भारत से अलग करने की बात की थी। मामला तूल पकड़ने के बाद शरजील ने कई दिनों तक पुलिस से बचने का प्रयास किया। मगर बाद में उसकी गिरफ्तारी बिहार के जहानाबाद से हुई थी। पूछताछ में पता चला था कि शरजील भारत को इस्लामिक मुल्क बनाना चाहता था। अपने इस काम के लिए उसने मस्जिदों में भड़काऊ पर्चे बँटवाए थे।

अपने घृणित विवादित बयान शरजील इमाम ने कहा था, “हमारे पास संगठित लोग हों तो हम असम से हिंदुस्तान को हमेशा के लिए अलग कर सकते हैं। परमानेंटली नहीं तो एक-दो महीने के लिए असम को हिंदुस्तान से कट कर ही सकते हैं। रेलवे ट्रैक पर इतना मलबा डालो कि उनको एक महीना हटाने में लगेगा… जाना हो तो जाएँ एयरफोर्स से। असम को काटना हमारी जिम्मेदारी है।”

जिस अमान हयात खान को विनय गुप्ता ने दी मार्ट में नौकरी, उसी ने साजिश रच कर पत्नी सहित उतारा मौत के घाट

दिल्ली एनसीआर ग्रेटर नोएडा में मंगलवार (नवंबर 3, 2020) की देर रात एक विनय गुप्ता नाम के कारोबारी और उनकी पत्नी नेहा की हत्या को बेहद सुनियोजित ढंग से अंजाम दिया गया। आरोपित की पहचान अमान हयात खान बताई जा रही है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज में रात के 12:15 बजे उसे फ्लैट तक आते और वारदात के बाद हाथ में विनय की दुकान/मार्ट का थैला लेकर जाते देखा। 

पुलिस का कहना है कि उन्होंने अपनी जाँच में मार्ट के कई कर्मचारियों से बात की। उन्होंने बताया कि दुकान में कपड़े, गहने आदि के अलग-अलग स्टॉल काउंटर हैं। इनमें कपड़े का स्टॉल विनय के भांजे सौरभ मित्तल का है। वह गाजियाबाद रामप्रस्थ का निवासी है। कर्मचारियों की मानें तो सौरभ के स्टॉल पर कुछ समय तक कमल नाम का लड़का काम करता था। लेकिन कुछ समय पहले उसके काम छोड़ने के कारण वहाँ हयात को बैठाया गया।

पुलिस को जाँच में पता चला है कि आरोपित सभी को अपना नाम अमन बताता था लेकिन उसके हाथ में हयात गुदा हुआ था। सभी पहलुओं को जोड़ते हुए आशंका जताई जा रही है कि अमन का पूरा नाम अमान हयात खान था और स्पेलिंग एक जैसी होने की वजह से वह अमान नाम को ही अमन की तरह इस्तेमाल करने लगा था। 

इसी अमान ने पैसों के लालच में मार्ट के मालिक विनय गुप्ता को मारने का प्लान बनाया और घटना को अंजाम देने से कुछ दिन पहले ही छुट्टी लेकर अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया। इसके बाद ग्रेनो वेस्ट की हाई सेक्योरिटी से लैस टेकजोन-5 चेरी काउंटी सोसायटी निवासी विनय के आवास पहुँचा और मौका पाते ही उन पर ताबड़तोड़ वार किए। वारदात को अंजाम देने में उसके जूते भी खून से बुरी तरह सन गए थे। इसलिए वह फ्लैट में अपने जूते उतार कर और विनय के जूते पहन कर फरार हुआ। उसकी तलाश में पुलिस की कई टीमें दबिश दे रही हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटनास्थल पर पहुँचने पर उन्हें नेहा का शव रसोई के पास पड़ा मिला और वहीं करीब में पराठा रखा था। इसे देखकर अंदाजा लगाया गया कि शायद करवाचौथ से एक दिन पहले नेहा रात का भोजन करने जा रही थीं, तभी आरोपित ने उन पर हमला किया। नेहा के शव से ही 20 कदम दूर विनय का शव पड़ा था और कमरे में टीवी चला हुआ था।

पुलिस को अभी तक की जाँच में अमान हयात खान द्वारा की जा रही धोखाधड़ी की बात भी पता चली है। अन्य कर्मचारियों ने बयान में बताया कि अमान अपने स्टॉल से कपड़े बिक्री के रुपयों में धोखाधड़ी करता था। उसने कुछ दिन से बीमारी का बहाना बनाकर छुट्टी ली हुई थी। जब हत्या के मामले का खुलासा हुआ तभी इस हेरफेर का भी पता चला।

यहाँ बता दें कि अभी दो महीने पहले इसी सोसायटी के अंदर ऐसी ही वारदात को अंजाम दिया गया था। इसके कारण पुलिस सोसायटी में तैनात सुरक्षाकर्मियों से भी गहनता से पूछताछ कर रही है। सीसीटीवी खराब पाए जाने पर सुरक्षा एजेंसी का लाइसेंस भी रद्द करने की अपील डीजीपी को रिपोर्ट भेज कर की गई है।

इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत पटेल उमरांव ने ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा, “ग्रेटर नोयडा में विनय गुप्ता नें अपनी दुकान में अमान हयात खान को नौकरी दी थी। हयात नें पैसों के लालच में विनय के फ्लैट में घुसकर 12 से अधिक वार करके विनय व उनकी पत्नी की बेरहमी से हत्या कर दी। अगर जीवन सुरक्षित चाहते हैं तो ऐसे लोगों को नौकरी देने या घर में प्रवेश देने से बचें।”

अर्णब की गिरफ्तारी में इंदिरा के निरंकुश शासन की झलक है, प्रेस की आजादी बचाने के लिए विरोध जरूरी

देश के ख्याति प्राप्त पत्रकारों में शीर्ष में शुमार रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी ने एक बार फिर देश को आपातकाल की याद दिला दी है। निर्भीक पत्रकारिता के अग्रणी नामों में शामिल अर्णब की आवाज को दबाने के लिए स्टेट मशीनरी का जैसा इस्तेमाल महाराष्ट्र में हो रहा है, ठीक वैसा ही इंदिरा के शासन में भी देखने को मिला था।

ये संकेत किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र के लिए घातक हैं। प्रेस को किसी भी लोकतांत्रिक देश में समाज का आइना माना जाता है। प्रेस के माध्यम से लोग देश दुनिया में घटित गतिविधियों से अवगत हो, अपना ज्ञान बढ़ाते तथा साथ ही साथ जागरूक भी होते हैं।

लोकतांत्रिक देश में प्रेस की स्वतंत्रता एक बुनियादी जरूरत है, जो एक दबाव समूह के रूप में कार्य करते हैं। किसी भी लोकतांत्रिक देश में कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के साथ मीडिया को चौथा स्तंभ माना जाता है। प्रेस की आजादी का मतलब है कि किसी भी व्यक्ति को सार्वजनिक तौर अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार हो।

अभिव्यक्ति की आजादी ने स्वतंत्रता आंदोलन को भी दी थी धार

बात जब भारत जैसे लोकतांत्रिक देश की हो रही हो तो प्रेस की स्वतंत्रता की अपनी महती भूमिका है। आजादी के समय से ही भारत में प्रेस की अहम भूमिका रही है। आजादी के आंदोलन में प्रेस ने बिना डरे, बिना रुके, बिना थके अपनी जिम्मेदारी का पूर्ण निर्वहन किया।

महात्मा गाँधी से लेकर लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, डॉ राजेंद्र प्रसाद, महावीर प्रसाद द्विवेदी, पंडित मदन मोहन मालवीय और डॉ राम मनोहर लोहिया जैसे महापुरुषों ने अपनी लेखनी के जरिए भारतवासियों में आजादी के आंदोलन का जज्बा जगाया था।

भारत में जनमत जागृत करने का कार्य नागरिक समाज के महत्वपूर्ण अंग के रूप में ‘मीडिया’ ही करती है। साथ ही साथ, राजनीतिक दलों और नेताओं को कई बार राह दिखाने का काम भी बहुधा मीडिया ही करती है। वह अलग बात है कि कभी-कभी सत्ता की नाराजगी का दंश भी इन्हें ही झेलना पड़ता है।

1975 में जनता के हक की लड़ाई लड़ने वाले विपक्ष का समर्थन करने पर आपातकाल के नाम पर मीडिया का गला घोट दिया गया था। भारतीय प्रेस को सेंसरशिप का सामना करना पड़ा था। अनेक अखबारों पर सरकारी छापे पड़ने के साथ-साथ विज्ञापन तक रोके गए। बहुत से पत्रकारों को जेलों में भी डाला गया। इसके बावजूद भी भारत का मीडिया वर्ग घबराया नहीं, बल्कि इस अघोषित संकट का डटकर मुकाबला किया। यह प्रेस की स्वतंत्रता को प्रतिबंधित करने का ही फल था कि एक सरकार का लोकतांत्रिक तरीके से तख्ता पलट हुआ।

आज फिर से 1975 के आपातकाल की याद आ रही है जब महाराष्ट्र में भारत के एक चर्चित एवं वरिष्ठ पत्रकार अर्णब गोस्वामी के साथ महाराष्ट्र सरकार और वहाँ की पुलिस द्वारा जिस तरह दुव्यर्वहार किया गया है, यह बेहद निंदनीय है। यह ठीक उसी तरीके से है जब 1975 में आपातकाल लगाकर लोकतंत्र की हत्या की गई थी। उस समय भी लेखनी और आवाज को दबाने का भरपूर प्रयास किया गया था। ये और बात है कि वह प्रयास असफल रहा।

अर्णब गोस्वामी की जिस तरह से गिरफ्तारी हुई, वह पूरी तरह से अलोकतांत्रिक व अमानवीय है। प्रेस की आजादी पर यह हमला किसी भी तरह से जायज़ नहीं ठहराया जा सकता है। भारतीय संविधान और लोकतंत्र ने मीडिया को स्वतंत्रता दी है। इसलिए पत्रकारों को स्वतंत्रता और सुरक्षा मिलनी ही चाहिए। अर्णब गोस्वामी का जिस तरह से गिरफ्तारी हुई, यह महाराष्ट्र सरकार का कौन सा लोकतांत्रिक तरीका था?

इस मामले को लेकर देश-विदेश से बहुत लोगों ने विभिन्न माध्यमों से अपनी-अपनी नाराजगी प्रकट की और अमानवीय घटना का विरोध किया। इसी क्रम में राज्य सभा सांसद और बीजेपी के शीर्ष नेता डॉ विनय सहस्रबुद्धे जी ने इस समूचे घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए बिलकुल ठीक कहा कि यह घटना बदले की भावना से प्रेरित है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार की इस अमानवीय घटना पर प्रश्न करते हुए कहा कि क्या लोकतंत्र में लोगों को समाज में अपनी बात रखने का अधिकार नहीं है? अगर किसी ने आलोचना की तो आप उस पर अटैक करेंगे, यह बहुत ही दु:खद बात है। उन्होंने बल देकर कहा कि इस घटना पर पत्रकार बुद्धिजीवियों को बोलना चाहिए।

महाराष्ट्र सरकार एवं पुलिस की यह कार्रवाई केवल एक पत्रकार के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह समूचे मीडिया वर्ग की आजादी के साथ-साथ अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है। सरकार की नीतियों पर प्रश्न उठाना कोई जुर्म तो नहीं है। यह तो स्वस्थ लोकतंत्र के चिह्नित लक्षण हैं। और अगर कोई सरकार से प्रश्न करते वक्त उचित मर्यादा का पालन नहीं करता है तो उसका भी जवाब देने का एक तरीका होता है, जो मर्यादा के भीतर होनी चाहिए। वरना भविष्य में अगर चीन और पाकिस्तान के साथ हमारी तुलना होने लगेगी, तो कोई बड़ी बात नहीं होगी।

आज एक गलत उदाहरण स्थापित होता नजर आ रहा है। इसलिए आज हमें सचेत होने की जरूरत है। अभिव्यक्ति की आजादी के साथ साथ प्रेस की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने, लोकतांत्रिक परंपरा को मजबूत बनाए रखने और भविष्य में ऐसा किसी भी पत्रकार के साथ ना हो, इसलिए महाराष्ट्र सरकार की इस अमानवीय कार्रवाई का पुरजोर विरोध होना चाहिए।