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मृतक किसान ने शिवसेना MP पर लगाया था आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप, परिवार ने की अर्णब जैसी त्वरित कार्रवाई की माँग

महाराष्ट्र में एक किसान ने वर्ष 2019 के अप्रैल माह में आत्महत्या की थी और अपने सुसाइड नोट में शिवसेना सांसद ओमप्रकाश राजे निम्बालकर पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया था। दिलीप धवले नाम के इस किसान का परिवार अभी भी न्याय का इंतजार कर रहा है। मृतक किसान के परिवार की माँग है कि जिस तत्परता से मुंबई पुलिस रिपब्लिक भारत के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, उसी तरह से उन्हें भी न्याय दिलाया जाए।

उस्मानाबाद पुलिस ने किसान को आत्महत्या के लिए उकसाने और धोखाधड़ी के कथित आरोपों में शिवसेना के सांसद ओमप्रकाश राजे निम्बालकर और 56 अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था। धवले, जो उस्मानाबाद के कास्बे तडवाले गाँव के थे, ने दो सुसाइड नोट छोड़े थे, एक ढोकी पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर के पास, और दूसरा, मतदाताओं को संबोधित करते हुए। उन्होंने लिखा कि मिल को समय पर ऋण चुकाने में विफल रहने के बाद उनकी जमीन को तीन बार नीलाम किया गया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सूखे के कारण उन्होंने ऐसा कदम उठाया।

आत्महत्या करने वाले किसान की पत्नी वंदना धवले ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से की माँग की है कि दिलीप धवले की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार शिवसेना सांसद ओमप्रकाश राजे और अन्य आरोपितों से तत्काल निपटा जाना चाहिए।

उस्मानाबाद में प्रेस वार्ता करते हुए धवले के परिवार ने उनकी मौत के मामले की जाँच में देरी होने पर आक्रोश जाहिर किया। दिलीप धवले की पत्नी वंदना धवले ने कहा कि लोकसभा चुनावों के दौरान उद्धव ठाकरे ने उन्हें इंसाफ दिलाने का वादा किया था। इसके बाद उन्होंने बताया कि उनके पति ने इसलिए आत्महत्या क्योंकि उनके साथ आर्थिक धोखाधड़ी हुई थी, जिसके चलते उन्हें अपमान का सामना करना पड़ा था। धवले के परिवार का यहाँ तक कहना था कि घटना के 5 महीने बाद इस संबंध में मामला दर्ज किया गया था और मामला दर्ज किए जाने के बाद एक साल पूरे हो चुके हैं लेकिन पुलिस ने अभी तक चार्जशीट दायर नहीं की है। 

धवले के भाई राज और बेटे दीपक ने भी इस मामले पर पुलिस के लापरवाही भरे रवैये को लेकर रोष जताया है और साथ उद्धव सरकार से निवेदन किया है कि उन्हें जल्द से जल्द न्याय दिलाया जाए। इसके अलावा धवले के परिवार ने कहा कि वह अगले दो दिनों में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मुलाक़ात करने के लिए मुंबई आएँगे और विस्तार से जानकारी देंगे कि निम्बालकर की वजह से उनकी कितनी दुर्दशा हुई।

मृतक किसान दिलीप धवले के परिवार ने इस पर आशा जताई कि जिस तरह मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने नायक परिवार का कष्ट जानने के बाद तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की, ठीक उसी तरह मुख्यमंत्री इनके मामले में भी तत्काल प्रभाव से कार्रवाई का आदेश देंगे। 

वहीं, शिवसेना नेता ओमप्रकाश राजे निम्बालकर ने इस तरह के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। उनका कहना है कि न तो वह शुगर फैक्ट्री के बोर्ड का हिस्सा थे और न ही बैंक के तंत्र (बॉडी) में शामिल थे। उन्होंने एक तरह से सारा आरोप बैंक पर लगा दिया है।

मुंबई पुलिस रिपब्लिक TV के खिलाफ गलत बयान देने के लिए बना रही दबाव: हंसा रिसर्च ग्रुप ने दाखिल की हाईकोर्ट में याचिका

टीआरपी हेरफेर मामले में हंसा रिसर्च ग्रुप ने मुंबई पुलिस पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। ग्रुप ने कहा है कि मुंबई पुलिस द्वारा उन्हें रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के खिलाफ गलत बयान देने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

बार और बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, BARC के बार-ओ-मीटर (ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल) का संचालन करने वाली कंपनी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख करते हुए इस मामले की जाँच मुंबई पुलिस के बजाय केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की माँग की है।

बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर याचिका में हंसा रिसर्च ने आरोप लगाया है कि पुलिस उनके कर्मचारियों को फर्जी बयान जारी करने के लिए दबाव बनाने की रणनीति अपना रही है। साथ ही रिपब्लिक टीवी द्वारा जारी एक डॉक्यूमेंट को फर्जी करार देने के लिए कह रही है।

हंसा रिसर्च की रिपोर्ट, जिसके आधार पर टीआरपी मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी, उसमे सिर्फ इंडिया टुडे के नाम का उल्लेख करते हुए कहा गया था कि इंडिया टुडे चैनल को देखने के लिए बार-ओ-मीटर वाले ने घरों को रिश्वत दिया था। वहीं पुलिस द्वारा लगाए गए आरोप के विपरीत इसमें रिपब्लिक का नाम नहीं था। इसके अलावा एफआईआर में भी इसका जिक्र नहीं है।

याचिका में कहा गया है, “याचिकाकर्ताओं को लगातार क्राइम ब्रांच में लंबे समय तक रखा जाता है और गिरफ्तारी की धमकी दी जाती है और बार-बार झूठे बयान देने के लिए दबाव बनाया जाता है।”

याचिका हंसा समूह के निदेशक नरसिम्हन के स्वामी, सीईओ प्रवीण ओमप्रकाश और नितिन काशीनाथ देवकर की तरफ से दायर किया गया है। याचिका में कहा गया कि पुलिस को पहले ही बताया जा चुका है कि तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जा रहा है कि रिपब्लिक द्वारा दिखाए गए डॉक्यूमेंट सही है या नहीं।

हंसा द्वारा दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि उनके अधिकारियों से बिना लिखित सूचना के पूछताछ की जा रही है और उन्हें दस्तावेज तैयार करने का समय भी नहीं दिया गया है। याचिकर्ताओ पर इसके लिए दबाव भी बनाया गया।

मुंबई के पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह, सहायक पुलिस निरीक्षक सचिन वाज़े और एसीपी शशांक संभल को याचिका में उत्तरदाताओं के रूप में नामित किया गया है। हंसा रिसर्च के कर्मचारियों को 12 अक्टूबर के बाद से बार-बार अपराध शाखा के कार्यालय में बुलाया गया और फिर घंटों इंतजार करवाया गया है।

कंपनी का कहना है कि उसके कर्मचारियों को मुंबई पुलिस द्वारा परेशान किया गया, क्योंकि उन्होंने रिपब्लिक टीवी के खिलाफ गलत बयान देने से इनकार कर दिया था। हंसा रिसर्च ने यह भी बताया है कि यह टीआरपी हेरफेर मामले में वे शिकायतकर्ता थे और अब उन्हें ही पुलिस द्वारा परेशान किया जा रहा है।

याचिका में कहा गया, “यह एक अनोखी स्थिति है, जहाँ किसी अपराध में पहले मुखबिर को जाँच एजेंसी द्वारा परेशान किया जा रहा है और एक आरोपित की तरह ट्रीट किया जा रहा। यह पूरी तरह से कानून और कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के खिलाफ है। यह एक व्यक्ति के मौलिक अधिकारों के खिलाफ है और इसमें माननीय उच्च न्यायालय द्वारा तत्काल हस्तक्षेप किया जाना चाहिए।”

यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि हंसा रिसर्च ने अपने एक कर्मचारी विशाल भंडारी के खिलाफ मामला दायर किया था, जिसने 2 घंटे प्रतिदिन इंडिया टुडे चैनल देखने के लिए BARC पैनल हाउसों को पैसे देने की बात कबूल की थी। यह पैसे उसे चैनल द्वारा भुगतान किया गया था।

हालाँकि, परम बीर सिंह द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान टीआरपी मामले में रिपब्लिक टीवी का नाम लिया गया था, और उन्होंने इंडिया टुडे के नाम का उल्लेख नहीं किया। जिसके बाद हंसा रिसर्च की मूल शिकायत और मामले में पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में देखा गया कि इंडिया टुडे को मामले में कई बार नामित किया गया था जबकि उसमें रिपब्लिक टीवी का नाम नहीं था।

तभी से परम बीर सिंह और सचिन वाजे के नेतृत्व में मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक टीवी को फँसाने के लिए उसके खिलाफ अभियान छेड़ रखा है। चैनल के अधिकारियों और पत्रकारों को रोजाना पुलिस स्टेशन में बुलाया जाता है और उनसे घंटों पूछताछ की जाती है।

अब हंसा रिसर्च का कहना है कि उनके कर्मचारियों को भी उसी उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। कुल मिलाकर उन्हें लगभग 200 घंटों तक बिना किसी उचित कारण के हिरासत में रखा गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि याचिकाकर्ताओं और अन्य अधिकारियों को बुलाने और हिरासत में लेने का एकमात्र उद्देश्य उन पर दबाव डालना और उन्हें निराश करना है ताकि वे सचिन वाजे की इच्छा के अनुसार गलत बयान दे सकें।

हंसा रिसर्च का कहना है कि पुलिस और मीडिया उन्हें आपसी हमला करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। जिसका नुकसान उन्हें झेलना पड़ रहा है।

कंपनी का कहना है कि वह यह नहीं कह सकते है कि रिपब्लिक ने बिना किसी फिजिकल डॉक्यूमेंट को दिखाए एक नकली दस्तावेज़ प्रदर्शित किया, क्योंकि टीवी पर जो दिखाया गया था, उससे इसकी प्रामाणिकता निर्धारित करना मुश्किल है। लेकिन इसके बावजूद पुलिस उन्हें यह बयान देने के लिए परेशान कर रही है कि दस्तावेज नकली है।

उन्होंने यह भी कहा है कि वाज़े और क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने झूठे और असत्यापित तथ्यों के आधार पर मीडिया स्टेटमेंट बनाने का अभियान शुरू किया है।

करतारपुर गुरुद्वारे की जिम्मेदारी पहुँची ISI के हाथ: नई संस्था में नहीं है एक भी सिख, भारत ने किया विरोध

पाकिस्तान की इमरान सरकार ने पिछले साल करतारपुर गुरुद्वारे के मुद्दे को खूब भुनाया था। अब इसी मामले पर उनकी नई चाल सामने आई है। सिखों की आस्था के प्रतीक करतारपुर गुरुद्वारे के प्रबंधन का काम काज इमरान सरकार ने एक ऐसी संस्था को सौंपा है जिसका दूर-दूर तक सिख समुदाय से लेना-देना नहीं है बल्कि उसके तार आईएसआई से जुड़े बताए जा रहे हैं।

आजतक की खबर के अनुसार, पाकिस्तान की इमरान सरकार ने करतारपुर के रख रखाव की जिम्मेदारी सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से छीनकर जिस प्रोजेक्ट मैनेजमेंट ईकाई को सौंपी है, उसकी अगुवाई मो तारिक खान करेंगे और उसके सभी सदस्य Evacuee Trust Property Board (ETPB) से जुड़े हुए हैं। इसे लेकर कहा जाता है कि इस बोर्ड को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई कंट्रोल करती है। इस नई नई संस्था में एक भी सिख नहीं है।

पाकिस्तान द्वारा जारी आदेश

खबर है कि करतारपुर गुरुद्वारे के जरिए पाकिस्तान व्यापार का प्लान बना रहा है। अपने आदेश में उन्होंने प्रोजेक्ट बिजनेस का भी जिक्र किया है। इस खबर के सामने आने के बाद इसका जगह-जगह विरोध हो रहा है। भारत ने इस पर आपत्ति व्यक्त करते हुए अपना बयान जारी किया है।

भारत के विदेश मंत्रालय ने लिखा, ”हमने उन रिपोर्टों को देखा जिनके मुताबिक पाकिस्तान ने पवित्र गुरुद्वारा करतारपुर साहिब का प्रबंधन एवं देखरेख का कार्य अल्पसंख्यक सिख समुदाय की संस्था पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से लेकर एक गैर सिख संस्था इवेक्वी ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड के हाथों दिया जा रहा है।”

आगे बयान में लिखा गया, “पाकिस्तान का यह एकतरफा निर्णय निंदनीय है और करतारपुर साहिब कॉरीडोर खोले जाने की भावना और सिख समुदाय के धार्मिक ख्यालों के विरुद्ध है। ऐसे कदम पाकिस्तानी सरकार और धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों एवं कल्याण के लंबे चौड़े दावों की असलियत उजागर करते हैं।”

भारत के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान को कहा है कि वह सिख समुदाय के अधिकारों के हनन करने वाले इस फैसले को वापस ले लें। गुरुद्वारे के प्रबंधंन संबंधी मामलों का प्रबंध करने का अधिकार केवल सिख समुदाय का है।

इसी प्रकार दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पाकिस्तान कैबिनेट ने गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के प्रबंधन का जिम्मा पाकिस्तान गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से छीन कर गैर-सिख निकाय ईटीपीबी को सौंपा है। पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई का संगठन ईटीपीबी ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब का नियंत्रण करेगा।”

बिहार के लिए मुझे नीतीश सरकार की जरूरत, डबल इंजन की ताकत विकास को नई ऊँचाई पर पहुँचाएगी: PM मोदी

बिहार विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण का प्रचार गुरुवार (5 नवंबर, 2020) को समाप्त हो गया। आखरी चरण के कुछ क्षण पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने बिहारवासियों के नाम पत्र लिखा है। इस पत्र को पीएम मोदी ने अपने ट्विटर पर शेयर किया है। इस पत्र में उन्होंने बिहार की जनता से एनडीए पर भरोसा करने और एनडीए की बिहार में सरकार बनाने की बात की है।

प्रधानमंत्री ने लिखा, मेरे प्रिय बिहार के भाइयो और बहनों, सादर प्रणाम। आज इस पत्र के माध्यम से आपसे बिहार के विकास, विकास के लिए एनडीए पर विश्वास और विश्वास बनाए रखने के लिए एनडीए के संकल्प के बारे में बात करना चाहता हूँ।

PM मोदी ने कहा कि इस पत्र के माध्यम से वह बिहार के विकास के लिए राजग पर विश्वास और विश्वास बनाए रखने के लिए राजग के संकल्प के बारे में बात करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘युवा हों या बुजुर्ग, गरीब हों या किसान, हर वर्ग के लोग जिस प्रकार आशीर्वाद देने के लिए सामने आ रहे हैं, वह एक आधुनिक और नए बिहार की तस्वीर दिखाता है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’’ के मंत्र पर चलते हुए राजग की सरकार बिहार के गौरवशाली अतीत को फिर स्थापित करने के लिए कटिबद्ध है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि एनडीए के लिए मानव जीवन की गरिमा सर्वोपरि है। हम हर नागरिक को देश की उन्‍नति और प्रगति में भागीदार मानते हैं। पहले देश के विकास में बनावटी बाधांए खड़ी करके रखी गई थीं। जिससे युवाओं, महिलाओं और किसानों के लिए अवसर कम होते गए। लेकिन एनडीए के निरंतर प्रयासों से अब यह‍ स्थिति बदल गई है। एनडीए ने बिहार में बिजली, पानी, सड़क, इलाज, शिक्षा और कानून व्‍यवस्‍था हर क्षेत्र में बहुम काम किया है।

उन्होंने आगे कहा, मूल आवश्‍यकताओं की पूर्ति के बाद अब यह दशक बिहार की आकांक्षाओं की पूर्ति का है। एनडीए का प्रत्‍येक साथी, इन आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए निष्‍ठा के साथ काम करने के लिए तत्‍पर है। बिहार को अभाव से आकांक्षा की ओर ले जाना एनडीए सरकार की बहुत बड़ी उपलब्धि है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह हम सब के लिए गर्व का विषय है कि बिहार चुनाव का पूरा फोकस विकास पर केंद्रित रहा। राजग की सरकार ने पिछले वर्षों में जो कार्य किए उसका हमने ना केवल रिपोर्ट कार्ड पेश किया बल्कि जनता जनार्दन के सामने आगे का विजन भी रखा। लोगों को भरोसा है कि बिहार का विकास राजग सरकार ही कर सकती है।’’

पीएम मोदी ने कहा, “हर गरीब को पक्‍का घर देना हो, घर-घर शौचालय बनाना हो, घरों में नल से जल देना हो, बिजली पहुँचानी हो, गैस कनेक्‍शन देना हो, हर गरीब को बैंक से जोड़ना हो, यह सब बिहारवासियों के वोट की ताकत से ही संभव हो पाया है। बिहार की बहनों, बेटियों की अपेक्षाएं और आकांक्षाएँ भी अब निरंतर बढ़ रही हैं। उनको शौचालय की सुविधा मिली तो उनमें सुरक्षा का एहसास आया। उनके नाम से प्रधानमंत्री आवास योजना का घर मिला तो चिंता कम हुई।”

गरीबों के लिए लाई गई योजनाओं के बारे में आगे उन्होंने कहा, “जनधन खाता खुला, मुद्रा योजना से बैंक लोन मिला तो नया आत्‍मविश्‍वास जागा। समाज में आत्‍मविश्‍वास तब और बढ़ता है, जब जन्‍म से लेकर बुढ़ापे तक संपूर्ण सुरक्षा कवच मिले। बीते वर्षों में एडीए ने गर्भावस्‍था से लेकर बुढ़ापे में पेंशन और बीमा तक की सुरक्षा दी है। आज बिहार का गरीब से गरीब परिवार भी गंभीर बीमारी का इलाज देश में कहीं भी मुफ्त में करा पा रहा है।”

उन्होंने कहा कि अव्यवस्था और अराजकता के वातावरण में नव निर्माण असंभव होता है। उन्होंने कहा, ‘‘वर्ष 2005 के बाद से बिहार में माहौल भी बदला और नव निर्माण की प्रक्रिया भी आरंभ हुई। बेहतर संसाधन और कानून का राज सामाजिक और आर्थिक संपन्नता के लिए अनिवार्य है। बिहार को यह दोनों राजग ही दे सकता है।’’

अपनी बात को विराम देते हुए पीएम मोदी ने कहा, “बिहारवासी ‘स्‍वामित्‍व योजना’ का भी बहुत उम्‍मीद के साथ इंतजार कर रहे हैं। इन मजबूत कदमों से आम लोगों का सशक्तिकरण होगा और उन्‍हें गरिमापूर्ण जीवन मिलेगा।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, साथियों, बिहार में वोट पड़ रहा है-
जात-पात पर नहीं, विकास पर
झूठे वादों पर नहीं, पक्‍के इरादों पर
कुशासन पर नहीं, सुशासन पर
भ्रष्‍टाचार पर नहीं, ईमानदारी पर
अवसरवादिता पर नहीं, आत्‍मनिर्भरता के विजन पर

आगे नीतीश सरकार पर भरोसा जताते हुए मोदी ने कहा, ‘‘मैं बिहार के विकास को लेकर बहुत आश्वस्त हूँ। बिहार के विकास में कोई कमी ना आए, विकास की योजनाएँ अटकें नहीं, भटकें नहीं इसलिए मुझे बिहार में नीतीश जी की सरकार की जरूरत है। मुझे विश्वास है कि डबल इंजन की ताकत इस दशक में बिहार को विकास की नई ऊँचाई पर पहुँचाएगी।’’ जय बिहार, जय भारत!’

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले और दूसरे चरण के तहत अब तक 135 सीटों पर मतदान संपन्न हो चुके हैं जबकि तीसरे और अंतिम चरण के तहत शनिवार यानी 7 तारीख को 78 सीटों पर मतदान होने हैं। वोटों की गिनती 10 नवंबर को होगी।

दाऊद का खास गुर्गा CM योगी की रडार पर: अबू सलेम और उसके करीबियों की अवैध सम्पत्तियों की यूपी पुलिस बना रही लिस्ट

उत्तर प्रदेश में गुजरे वक्त में अपराध का खौफ कायम करने वाले माफिया गैंग और उनके सरगनाओं पर योगी सरकार का शिकंजा कसता जा रहा है। अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी के बाद अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का खास साथी रहा अबू सलेम भी योगी सरकार के निशाने पर आ चुका है जो फिलहाल जेल में बंद है। पिछली सरकारों में मौज उठा रहे इन बाहुबलियों में अब योगी का खौफ साफ नजर आने लगा है।

यूपी प्रशासन अबू सलेम के भाई अबू जैश की अवैध संपत्तियों की लिस्ट बना रही है। पुलिस अभी इस मामले में अतिरिक्त जानकारी देने से बच रहीं है। कहा जा रहा है कि जिस तरह योगी सरकार ने माफिया मुख्तार और अतीक अंसारी के नाते रिश्तेदारों की करोड़ो की अवैध सम्पत्तियों को नष्ट किया है, उसी तरह अब अबू सलेम का नंबर भी जल्द लगाया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अबू सलेम की आर्थिक ताकत पर चोट पहुँचाने के लिए उसके भाई और करीबियों की संपत्ति का ब्यौरा जुटाना शुरू कर दिया गया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण और पुलिस ने डॉन अबू सलेम के करीबियों की सपंत्तियों के दस्तावेज, उनकी कानूनी वैद्यता आदि की जाँच शुरू कर दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अबू जैश के कब्जे की करोड़ों की जमीनों को लेकर प्रशासन को जानकारी मिली है। इन जमीनों मे कई सरकारी जमीनें भी शामिल हैं। पुलिस को लखनऊ में सप्रू मार्ग पर रेस्टोरेंट, मानक नगर में प्लॉटिंग की जानकारी मिली है। इसके अलावा लखनऊ के सर्वोदय नगर, ठाकुरगंज में करोड़ों की प्लॉटिंग की भी जानकारी मिली है। बताया गया है कि फैजाबाद रोड पर अवैध रूप से गेस्ट हाउस और होटल चलाया जा रहा है।

बता दें अबू सलेम का फर्जी पासपोर्ट बनवाने में उसके भाई ने मदद की थी। पुलिस अफसरों का कहना है कि संपत्ति की जाँच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। मुख्तार अंसारी गैंग के खिलाफ कार्रवाई के दौरान ही कुछ लोगों ने पुलिस कमिश्नर से अबू सलेम के एक भाई की कई सम्पत्तियों का ब्योरा बताते हुए शिकायतें की थी। इसके बाद ही पुलिस जेल में बंद माफिया पर नकेल कसना शुरू कर दिया।

ईसा खान के ₹20 करोड़ की अवैध संपत्ति के साथ मेराज के घर पर भी चला बुलडोजर: अंसारी गिरोह पर CM योगी का वार

उत्तर प्रदेश में समस्त अवैध निर्माणों तथा संपत्तियों पर योगी सरकार की पैनी नज़र बनी हुई है। हाल ही में गाजीपुर के माफिया मुख्तार अंसारी के होटल गजल पर कार्रवाई करते हुए उसे ध्वस्त किया गया था। अब अवैध निर्माणों के मामले पर कार्रवाई तेज़ करते हुए प्रशासन ने वाराणसी में अंसारी गैंग के मेराज़ तथा मऊ में ईसा खान के गैर कानूनी इमारतों पर बुलडोज़र चलवा दिया है।

मेराज़ अहमद की अवैध इमारत को ध्वस्त करता वीडीए का बुलडोजर, साभार: दैनिक भास्कर

मेराज़ अहमद, मुख्तार अंसारी के अंतरप्रांतीय गिरोह का सहयोगी तथा जैतपुरा थाना अंतर्गत अशोक कॉलोनी का रहने वाला है। उस पर फ़र्ज़ी कागज़ात के जरिए हथियारों का लाइसेंस बनवाने तथा उनके नवीनीकरण का आरोप है। उसने कुछ दिन पहले ही पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था। उसके खिलाफ़ आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468, 470, 471, 216 तथा 120बी के तहत कई मुकदमे चल रहे हैं।

मेराज़ अहमद का अवैध मकान, साभार: लाइव हिन्दुस्तान

मेराज़ ने अशोक विहार कॉलोनी स्थित अपने मकान के पिछले हिस्से में एक अवैध निर्माण करवा रखा था, जिसके लिए उसे 2 महीने पहले ही वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) द्वारा नोटिस भी जारी किया गया था।

नोटिस पर कोई संज्ञान न लिए जाने तथा अवैध इमारत के ज्यों के त्यों रहने के कारण वीडीए ने स्वयं कार्रवाई करते हुए उसे ध्वस्त करवाया। ध्वस्तीकरण के दौरान वीडीए की टीम तथा सीओ चेतगंज संतोष कुमार मीणा, इंस्पेक्टर जैतपुरा शशि भूषण राय सहित भारी पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा।

मेराज़ अहमद के पेरिस प्लाज़ा को ध्वस्त करता वीडीए का बुलडोजर, साभार: न्यूज़ ट्री

ईसा खान की 20 करोड़ रुपए की संपत्ति पर हुई कार्रवाई

दूसरी ओर, मऊ में गाज़ीपुर तिराहे पर अंसारी गैंग के एक और माफिया ईसा खान की अवैध इमारत को गिरवाया गया। आरोपों के अनुसार पेरिस प्लाज़ा नामक यह अवैध तीन मंजिला इमारत सरकारी आईटीआई की ज़मीन पर बिना वैध नक्शे के बनी थी। इसकी कीमत 20 करोड़ रुपए थी।

इसके संबंध में वर्ष 2004 से मुकदमा विचाराधीन था जिसमें पिछली 27 अगस्त को ध्वस्तीकरण का आदेश पारित हुआ था। बाद में इसके खिलाफ दाखिल अपील भी खारिज हो गई और आज ध्वस्तीकरण की कार्यवाई की गई। इमारत ध्वस्त करने के समय पर भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती रही। ध्वस्तीकरण से पहले ही प्लाजा सील कर दिया गया था।

अपर पुलिस अधीक्षक त्रिभुवन नाथ त्रिपाठी ने बताया कि मुख़्तार अंसारी गिरोह के सदस्य ईसा खान की 20 करोड़ रुपए की संपत्ति को जिलाधिकारी के आदेश पर व्यापक पुलिस बल की मौजूदगी में ध्वस्त कर दिया गया।

अंसारी का टूटा ‘ताज महल’

उल्लेखनीय है कि इससे पहले माफिया विधायक मुख्तार अंसारी के अवैध साम्राज्य पर सबसे गहरी चोट करते हुए उसके ‘ताज महल’ गजल होटल को तोड़ा गया था। गाजीपुर के गजल होटल को रविवार (नवंबर 1, 2020) की सुबह ध्वस्त किया गया था। ये मुख़्तार अंसारी की बीवी और बेटों के नाम पर पंजीकृत था।

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में नियंत्रक प्राधिकारी बोर्ड विनियमित क्षेत्र गाजीपुर ने शनिवार को गजल होटल के मालिक अब्बास अंसारी व उमर अंसारी की अपील खारिज कर दी थी। ये दोनों मऊ से 5वीं बार विधायक चुने गए मुख़्तार अंसारी के बेटे हैं।

मिथिला के कवि कोकिल विद्यापति की जन्मस्थली उपेक्षित | Vidyapati’s Bisfi ignored, in bad shape

मैथिल लोग जहाँ भी होते हैं, विद्यापति को अपनी धरोहर मान कर स्नेहपूर्वक उनकी बातें करते हैं, लेकिन उनके जन्मस्थल बिस्फी की उपेक्षा पर चर्चा नहीं होती।

पूरा वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

वीडियो: ट्रैफिक के कारण धीरे चल रही थी एंबुलेंस, मरीज की गंभीर हालत देख पुलिसकर्मी ने 2km भागकर खाली कराई रोड

सोशल मीडिया पर कभी-कभी ऐसी वीडियोज देखने को मिल जाती हैं जिनके कारण किसी का भी दिल खुश हो जाए। आज ऐसी ही एक वीडियो हैदराबाद से सामने आई है। इस वीडियो में एक ट्रैफिक पुलिस को सड़क पर भागते देखा जा सकता है।

यह वीडियो किसी साधारण स्थिति की नहीं है। वीडियो में नजर आ रहा पुलिसकर्मी सड़क पर लगे ट्रैफिक को खाली करवा कर एक एंबुलेंस के लिए रास्ता बनवा रहा है।

सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने मरीज को लेकर अस्पताल जाती एंबुलेंस को रास्ता दिलवाने के लिए करीब 2 किलोमीटर तक ऐसे ही दौड़ लगाई। इस बीच किसी ने उनकी वीडियो बना ली और सोशल मीडिया पर अपलोड कर दी।

वीडियो को देखने के बाद न केवल नेटिजन्स ने बल्कि हैदराबाद ट्रैफिक पुलिस ने भी इस निष्ठा को सलाम किया। एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस (ट्रैफिक) अनिल कुमार ने लिखा, “HTP अधिकारी बबजी एंबुलेंस के लिए ट्रैफिक क्लियर करवा रहे हैं। शाबाश। नागरिकों की सेवा में हैदराबाद ट्रैफिक पुलिस।”

वीडियो से संबंधित जानकारी के अनुसार, बबजी ने जिस एंबुलेंस के लिए रास्ता खाली करवाया उसमें एक गंभीर हालत का मरीज था। ये एंबुलेंस अबिड्स से कोटी जा रही थी। जब ड्यूटी पर तैनात बबजी ने देखा कि ट्रैफिक के कारण वह काफी धीरे-धीरे जा रही है तो उन्होंने आगे आकर रास्ता बनवाया।

यह घटना वैसे सोमवार की है मगर वीडियो बुधवार को वायरल होनी शुरू हुई। लोगों ने इस वीडियो को देखकर बबजी को खूब सराहा। लोगों ने कहा कि एक पुलिसकर्मी के कारण पूरे देश के पुलिसकर्मियों के लिए अब मानक बन गए हैं। उन्हें उनकी इंसानियत के लिए सराहा जाना चाहिए। एक यूजर ने वीडियो अपलोड करके दावा किया कि बबजी को उनके कार्य के लिए आज सम्मानित भी किया गया।

आईपीएस दीपांशु काबरा ने लिखा,”आपकी मदद के लिए खाकी मीलों दौड़ जाएगी, पर कभी थमेगी नहीं।” आगे वह लिखते हैं, “हैदराबाद का पुलिसकर्मी एंबुलेंस की मदद के लिए कुछ मील के लिए दौड़ा। आशा करता हूँ कि मरीज अब ठीक होगा। भारत इस सच्चे समर्पण और सेवा को सैल्यूट करता है।”

आरिफ मसूद पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का मामला दर्ज: कॉन्ग्रेस MLA के अवैध निर्माण पर चला बुलडोजर

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के इकबाल मैदान में फ्रांस के राष्ट्रपति के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले कॉन्ग्रेस विधायक आरिफ मसूद के खिलाफ बीजेपी की शिवराज सिंह चौहान सरकार ने शिकंजा कस दिया है। आरिफ मसूद के खिलाफ जहाँ मामला दर्ज किया गया है, वहीं स्‍थानीय प्रशासन ने गुरुवार को सुबह मसूद के कॉलेज के करीब अतिक्रमण कर बनाए अवैध निर्माण को ढहा दिया है। प्रशासन द्वारा करीब तीन घंटे चले इस अतिक्रमण में बुलडोजर से अलग-अलग जगह स्थित सीढ़ी, बाथरूम आदि तोड़े गए हैं।

पिछले दिनों राजधानी के इकबाल मैदान में कॉन्ग्रेस विधायक की अगुवाई में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रो के खिलाफ प्रदर्शन किया गया था। इस मामले में स्थानीय पुलिस ने विधायक आरिफ मसूद समेत 7 के खिलाफ बुधवार रात को धार्मिक भावना भड़काने का मामला दर्ज किया। वहीं, अब प्रशासन ने बड़े तालाब के करीब खानूगाँव क्षेत्र में अतिक्रमण कर बनाई गई इमारत के हिस्से को ढहा दिया है। यह विधायक मसूद के महाविद्यालय के परिसर में है।

कथिततौर पर भोपाल मध्य से विधायक आरिफ मसूद पर आरोप है कि उन्होंने भीड़ इकट्‌ठा कर भोपाल के इकबाल मैदान में फ्रांस का झंडा और वहाँ के राष्ट्रपति का पुतला जलाया था। मसूद ने केंद्र और राज्य सरकारों पर कथित तौर पर ‘हिंदूवादी’ कहते हुए हमला किया था और उन पर फ्रांसीसी सरकार का समर्थन करने का आरोप लगाया था।

मसूद ने आक्रामक तरीके से अपने भाषण में कहा कि केंद्र और राज्य की हिंदूवादी सरकार के मंत्री भी फ्रांस की हरकत का समर्थन कर रहे हैं। हम फ्रांस के साथ हिंदुस्तान की सरकार को भी चेतावनी देते हैं कि यदि सरकार ने फ्रांस का विरोध नहीं किया तो हम हिंदुस्तान में भी ईंट से ईंट बजा देंगे। जिस पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सिर्फ धारा 144 के उल्लंघन का मामला दर्ज किया था। फिर बाद में अन्य मामलों ओर FIR की गई।

भोपाल आईजी उपेंद्र जैन ने एएनआई को बताया, “कॉन्ग्रेस विधायक मसूद और छह अन्य के खिलाफ आईपीसी की धारा 153 ए के तहत गैर-जमानती वारंट जारी किया गया है।” बता दें कि पिछले महीने एक कट्टरपंथी द्वारा फ्रांस में एक शिक्षक की हत्या के बाद शहर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था।

राँची के रंगरेज गली में अराजक तत्वों ने तोड़ा शिवलिंग: बाजार बंद कर सड़क पर उतरे हिन्दू, कार्रवाई की माँग

झारखंड की राजधानी राँची के अपर बाजार की रंगरेज गली में स्थित मंदिर में तोड़फोड़ की घटना सामने आई है। अराजक तत्वों ने यहाँ मंदिर में बने शिवलिंग को ही पूरा उखाड़ दिया। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें भी शेयर की जा रही हैं।

आज सुबह जब स्थानीय लोगों को इस घटना की जानकारी हुई तो सब मौके पर जुटे और पुलिस को सूचित किया। अब पुलिस मामले में आगे अपनी जाँच कर रही है। सीसीटीवी फुटेज भी खँगाले जा रहे हैं। आरोपितों का पता लगाने का प्रयास हो रहा है।

घटना के बाद से लोगों में इसे लेकर काफी गुस्सा है। स्थानीय लोगों ने आक्रोश जाहिर करने के लिए आज अपर बाजार की सभी दुकानें भी बंद रखीं। हिंदूवादी संगठन से जुड़े कार्यकर्ता भी सड़कों पर आए और प्रदर्शन किया। इन सबकी यही माँग है कि मंदिर के शिवलिंग को तोड़ने वालों की गिरफ्तारी जल्द से जल्द हो।

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय में देश के अलग-अलग कोनों में हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ की कई घटनाएँ सामने आई है। पिछले दिनों हरियाणा के मेवात में ऐसी ही घटना घटी थी। वहाँ नवरात्रि के तीसरे दिन ही दुर्गा माता की मूर्ति को उखाड़ लिया गया था। घटना की बाद की तस्वीरों में हमें सिर्फ़ शेर के पंजे नजर आए थे।

वहाँ के स्थानीयों ने तो मूर्ति टूटने पर यही आरोप लगाया था कि पहले भी इस तरह की घटनाएँ होती आई हैं और इस बार भी उन्हें शक है कि मंदिर से कुछ दूरी पर बने मदरसे के मौलवी के इशारों पर यह काम किया गया।

ऐसे ही आँध्र प्रदेश में पिछले दिनों मंदिरों पर हमले के कई मामले सामने आए थे। खबरों से पता चला कि प्रदेश में हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुँचाने के लिए कहीं अराजक तत्वों ने भगवान की मूर्तियों को तोड़़ा और कहीं रथों में आग लगाई।

इसी प्रकार कश्मीर में भी पिछले दिनों एक शिव मंदिर को ध्वस्त किया गया था। इसी शिव मंदिर में कुछ साल पहले शिवलिंग के टुकड़े-टुकड़े किए जाने की घटना सामने आई थी।

स्थानीय लोगों ने ट्विटर पर इस संबंध में लिखा था, “कुछ साल पहले यहाँ पर शिवलिंग को तोड़ दिया गया था, लेकिन हमारी आस्था देखिए, हम ये सोचकर खुश थे कि कम से कम ढाँचा तो है, मगर इस बार मंदिर को ही धराशायी कर दिया गया। आशा है कि किसी दिन हम इस मंदिर में वापस जाएँगे और प्रार्थना करेंगे। यह दुखद और भयावह है।”