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कठमुल्लों के फतवों से नहीं बल्कि संविधान से चलेगा देश: CM योगी ने बिहार में भरी हुँकार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिहार विधानसभा चुनावी रैलियों के मंच पर कट्टरपंथियों और धर्म के नाम पर महिलाओं और बच्चों का शोषण करने वालों के विरोध में हुंकार भरा है। CM योगी ने मंच से खुलकर कहा- “देश कठमुल्लों के फतवों से नहीं बल्कि संविधान से चलेगा।”

बिहार राज्य के वैशाली में विपक्षियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए योगी ने कहा, ‘‘कॉन्ग्रेस के लोग चाहते ही नहीं थे नारी गरिमा की रक्षा हो और इसीलिए ये हमेशा किसी कठमुल्ले के कहने पर तीन तलाक की प्रथा को समर्थन करते थे। फतवा जारी होता था, कॉन्ग्रेस और राजद के लोग नाक रगड़कर उनके पास जाते थे और कहते थे ये जो फतवा जारी हुआ है इसी के अनुसार देश चलेगा।”

भीड़ से भी योगी ने पूछा, “आप बताइए ये देश फतवों से चलेगा या संविधान से?” उन्होंने आगे कहा, “देश संविधान से संचालित होता है। लेकिन तीन तलाक की कुप्रथा को समाप्त करने का काम किसने किया मोदी जी ने।”

बिहार चुनाव के मद्देनजर सिवान, वैशाली और मधुबनी के विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार करने पहुँचे योगी आदित्यनाथ ने विरोधियों को लताड़ते हुए कहा, “कॉन्ग्रेस और राजद फिर से जंगलराज स्थापित करना चाहते हैं।” बिहार की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार अपने युवाओं की ऊर्जा और नौजवानों की प्रतिभा के लिए जाना जाता है।

कट्टरपंथियों के खिलाफ सीधा हमला करते हुए CM योगी ने यह साफ कर दिया कि उत्तर प्रदेश हो या फिर बिहार भाजपा अपने मूल एजेंडे पर अभी भी कायम है फिर चाहे वो कश्मीर में 370 का मामला हो या फिर यूपी और बिहार में कट्टरपंथी ताकतों और उनके मंसूबों को खत्म करना हो। साथ ही उन्होंने अब देश की धरती से नक्सलवाद को भी उखाड़ फेंकने की बात कही है।

वहीं राममंदिर को लेकर योगी ने कहा कि हम हमेशा कहते थे- “रामलला हम आएँगे, मंदिर वहीं बनाएँगे” राम मंदिर की राह में बाधा यही कॉन्ग्रेस, राजद, और भाकपा माले थे लेकिन हमने वादा किया था कि भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर भी बनवाएँगे। 5 अगस्त को ये भी काम हो गया, बिहार में एनडीए की सरकार बनाएँगे तो हम भगवान राम के दर्शन भी करवाएँगे।”

गौरतलब है कि न्यायालय द्वारा जारी किया गया आदेश कि केवल विवाह के लिए धर्म परिवर्तन स्वीकार्य नहीं होगा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ने भी इस आदेश पर टिप्पणी करते हुए कहा कि, सरकार भी ‘लव जिहाद’ के मामलों पर रोक लगाने के लिए क़ानून लेकर आएगी। उन्होंने कहा, “ऐसे लोगों के लिए चेतावनी है, जो अपनी पहचान छिपा कर हमारी बहनों के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने का प्रयास करते हैं।”

जौनपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए योगी ने कहा, “हम लव जिहाद के मामलों को रोकने के लिए एक प्रभावशाली क़ानून बनाएँगे। छद्म वेश में, चोरी-छिपे नाम बदल कर जो लोग बहन-बेटियों की इज्जत के साथ खिलवाड़ करते हैं, उनके लिए पहले से मेरी चेतावनी है। अगर वह सुधरे नहीं तो ‘राम नाम सत्य है’ की यात्रा अब निकलने वाली है।”

“हम लोग मिशन शक्ति के कार्यक्रम को इसलिए आगे बढ़ा रहे हैं। मिशन शक्ति के कार्यक्रम का मतलब है कि हम हर बेटी को, हर बहन को सुरक्षा की गारंटी देंगे। इन सारी बातों के बावजूद अगर किसी ने दुस्साहस किया तो उनके लिए ऑपरेशन शक्ति अब तैयार है। इसका उद्देश्य यही है कि हम हर हाल में लड़कियों की सुरक्षा करेंगे और उनके सम्मान की सुरक्षा करेंगे। इसके अलावा न्यायालय के आदेश का भी पालन होगा और बहन-बेटियों का सम्मान सुनिश्चित होगा।”

पत्नी और तीन साल के बच्चे के सामने आलम ने अली, सतला के साथ की रामू की हत्या: उसकी वाइफ से करता था एकतरफा प्यार

गुजरात के सूरत शहर में एक तरफा प्यार के जुनून के कारण हत्या का मामला सामने आया है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, फैक्ट्री मालिक रामू संतराम गोस्वामी को आलम और उसके दो सहयोगी अली और सतला नाम के आरोपितों ने रविवार 25 अक्टूबर को निर्दयतापूर्वक मार डाला। आरोपितों ने मृतक की पत्नी और तीन साल के मासूम बेटे की आँखों के सामने ही इस वारदात को अंजाम दिया।

सूरत पुलिस ने सोमवार सुबह तीनों को गिरफ्तार कर लिया। प्रारंभिक जाँच के अनुसार, पुलिस को पता चला कि आलम फैक्ट्री मालिक की पत्नी से एकतरफा प्यार करता था। जिस वजह से उसके पति गोस्वामी की आलम और उसके दो सहयोगियों ने गुस्से में आकर हत्या कर दी।

रिपोर्ट के अनुसार, गोस्वामी अमरोली इलाके में अपनी पत्नी और 3 साल के बेटे के साथ रहता था। कतारगाम में वह कपड़े पॉलिश करने का कारखाना चलाता था। एक दिन अचानक उसकी पत्नी के फ़ोन पर किसी अनजान व्यक्ति ने फ़ोन कर पूजा से बात करने की बात कही। जिसपर रामू की पत्नी ने रॉन्ग नंबर बोलते हुए उसका फ़ोन काट दिया। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई।

आरोपित आलम लगातार रामू की पत्नी को काल करने और उससे बात करने की इच्छा जाहिर करने लगा। जिससे परेशान हो कर पत्नी ने इसकी शिकायत अपने पति से कर दी। वहीं जब रामू ने आ रहे नंबर की जाँच पड़ताल की तो पता चला रॉन्ग नंबर वाला शख्स उसी के परिचितों में से एक था। जिसका नाम आलम है।

जिसके बाद आलम की इन हरकतों से नाराज होकर रामू खुद उसके घर इसकी शिकायत लेकर पहुँचा। उसने आलम को समझाइश दी और यह भी कहा कि अगर वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो इसकी शिकायत वह थाने में कर देगा। रामू के समझाने के बाद आलम ने दो तीन दिनों तक उसकी पत्नी को फ़ोन नहीं किया। जिससे रामू को लगा कि मामला खत्म हो गया, लेकिन उसे क्या पता था आलम के दिमाग में कुछ और ही चलने लगा था।

कुछ दिन रुकने के बाद रविवार की रात करीब 11 बजे आलम अपने दो साथी अली और सतला के साथ रामू के घर पर धावा बोल दिया। तीनों जबरन उसके घर में घुसे और अंदर से घर को बंद कर लिया। इसके बाद पत्नी और मासूम बेटे की आँखों के सामने ही रामू के पेट व सीने में कई बार चाकू घोंप कर वहाँ से भाग गए।

पत्नी ने फौरन इसकी शिकायत पुलिस को दी और रामू को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया। लेकिन इलाज से पहले ही डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं मामले पर तुरंत कार्रवाई करते हुए पुलिस ने तीनों हत्यारों को गिरफ्तार कर लिया।

मुख्यमंत्री पिता के नाम पर नहीं, अपने काम पर वोट चाहता हूँ: नीतीश मिश्र, भाजपा प्रत्याशी | Nitish Mishra talks to OpIndia

बिहार की चुनावी यात्रा के दौरान ऑपइंडिया ने झंझारपुर (मधुबनी) के विधानसभा सीट से बीजेपी के उम्मीदवार नीतीश मिश्र से विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की। बता दें कि नीतीश मिश्र पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र के पुत्र हैं। वो दस साल विधायक रहे हैं। उन्होंने हमारे साथ बातचीत करते हुए वंशवाद पर उठते सवालों पर बात की।

हमने उनसे जानने की कोशिश की कि उन पर आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने गन्ना विकास मंत्री रहने के दौरान ऐसा कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिससे कि चीनी मील वापस से खुल सके, जिससे लोगों को रोजगार मिलता और तब शायद इस तरह से पलायन नहीं होता। इस दौरान हमने बढ़ते कट्टरपंथ और धर्मांतरण पर भी उनसे सवाल किया।

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55 से डील 1 पर निशाना: मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक TV से बदला लेने के लिए हंसा विजन को बनाया शिकार

मुंबई पुलिस और रिपब्लिक टीवी के बीच चल रहे घमासान में अब पुलिस ने चैनल को आर्थिक रूप से अपंग बनाने की कोशिश की है। पुलिस ने चैनल में विज्ञापन देने वाली मीडिया बाइंग एजेंसियों को अपना निशाना बनाया है। इसी क्रम में परम बीर सिंह की अगुवाई में मुंबई पुलिस का पहला टारगेट हंसा विजन है। जो एक मीडिया बाइंग एजेंसी है।

बता दें पुलिस द्वारा हंसा विजन को निशाना बनाने का कारण यह है कि इसकी ग्रुप कंपनी हंसा रिसर्च टीवी चैनलों की दर्शकों की संख्या को मापने वाले ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) के बार-ओ-मीटर्स को मैनेज करती है। मुंबई पुलिस के अनुसार, हंसा रिसर्च और सहयोगी कंपनियाँ किसी भी टीवी चैनल के साथ किसी भी प्रकार की बिज़नेस डीलिंग नहीं कर सकती हैं।

मुंबई के एक पुलिस अधिकारी ने शुक्रवार को दावा किया कि केंद्र सरकार द्वारा जारी सामान्य व्यावसायिक नैतिकता और दिशानिर्देशों के तहत, हंसा रिसर्च या इसकी सहयोगी कंपनियाँ किसी भी टीवी चैनल के साथ व्यापार में संलग्न नहीं हो सकती हैं।

गौरतलब है कि मुंबई पुलिस का यह दावा कई सवाल खड़े करता है, क्योंकि यह स्पष्ट नहीं है कि इस तरह की शर्त को केंद्रीय सरकार द्वारा दिशा-निर्देशों में रखा गया है या नहीं।

बता दें हंसा रिसर्च और हंसा विजन पूरी तरह से अलग-अलग इकाइयाँ हैं, जबकि पहली टीवी चैनलों के साथ डीलिंग नहीं कर सकती क्योंकि यह BARC के साथ बार-ओ-मीटर्स का प्रबंधन करने के लिए काम करती है, दूसरी एक मीडिया बाइंग एजेंसी है। जिससे यह पता चलता कि इसका पहला बिज़नेस TYV चैनलों के साथ डीलिंग करना है। वहीं पुलिस के अनुसार अगर ऐसा कोई नियम मौजूद है, तो कंपनी का अस्तित्व बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए।

वहीं दूसरी बात कि अगर हंसा विजन को टीवी चैनलों से डील की अनुमति नहीं है, तो मुंबई पुलिस इस मामले में केवल रिपब्लिक को क्यों निशाना बना रही है। कंपनी ने खुद कहा है कि वे 55 टीवी चैनलों के साथ डील करते हैं।

हंसा ग्रुप के सीईओ शेखर स्वामी द्वारा जारी एक बयान में कहा गया था, “पिछले दो वर्षों में व्यवसाय के हिस्से के रूप में, हंसा विजन ने अपने ग्राहकों की ओर से कुल टीवी चैनलों के लिए 55.42 करोड़ रुपए के टीवी विज्ञापन का समय खरीदा है। वहीं 2019 और 2020 में हंसा विजन द्वारा रिपब्लिक टीवी से कोई विज्ञापन समय नहीं खरीदा गया है।”

इस तरह से देखा जाए तो अगर किए गए यह डील अवैध है तो मुंबई पुलिस को उन सभी 55 चैनलों से पूछताछ करनी चाहिए, लेकिन मुंबई पुलिस सिर्फ रिपब्लिक को ही कटघरे में खड़ा कर रही है।

हंसा विजन द्वारा प्रकाशित वित्तीय विवरणों में कंपनी ने 2017-18 और 2018-19 में रिपब्लिक पर विज्ञापन स्लॉट खरीदे थे। और इसी चीज का टीवी नेटवर्क को पेमेंट किया गया था। कंपनी ने उसके बाद चैनल से कोई स्लॉट नहीं खरीदा है, जबकि अन्य टीवी चैनलों में विज्ञापन स्लॉट खरीदने और उसकी पेमेंट करने की प्रकिया लगातार बनी हुई है।

हंसा विजन ने जारी एक बयान में कहा, “हंसा विजन टेलीविज़न चैनल्स से विज्ञापन समय खरीदती है, ताकि क्लाइंट की तरह से विज्ञापन प्रकाशित किए जा सके।

वहीं हंसा रिसर्च ने भी यही तथ्य रखा था कि उसकी कंपनी हंसा विजन टीवी चैनलों में विज्ञापन स्पॉट खरीदती है, और वह ऐसी कोई डीलिंग नहीं करती है। वास्तव में हंसा रिसर्च और रिपब्लिक नेटवर्क दोनों ने कहा कि हंसा विजन ने रिपब्लिक को विज्ञापन स्पॉट खरीदने के लिए 108 करोड़ रुपए का भुगतान किया था। जबकि मुंबई पुलिस ने सिर्फ 32 करोड़ का दावा किया है। रिपब्लिक ने इस तथ्य के समर्थन में ऑडिट किए गए वित्तीय विवरण भी प्रकाशित किए थे।

अब अगर वास्तव में यह सच है कि हंसा ग्रुप की कंपनी हंसा विज़न टीवी चैनलों के साथ डीलिंग नहीं कर सकती है, तो इसका मतलब होगा कि कंपनी का पूरा कारोबार अवैध है। अब यह देखना बाकी है कि क्या मुंबई पुलिस हंसा विजन के साथ इस अवैध कारोबार के लिए अन्य सभी 54 टीवी चैनलों को जाँच के दायरे में लाती है या नहीं।

‘मैन ऑफ अमित शाह’ क्यों कहते हैं इन्हें? | Bihar Elections: ‘Man of Amit Shah’ talks to OpIndia

बिहार की चुनावी यात्रा के दौरान ऑपइंडिया ने ‘मैन ऑफ अमित शाह’ कहे जाने वाले मुरारी मोहन झा से मुस्लिम बहुल केवटी विधानसभा क्षेत्र के मुद्दों पर बातचीत की। यह पूछे जाने पर कि वह जनता के बीच किन मुद्दों को लेकर जाएँगे, उनका कहना है कि वो प्रधानमंत्री की योजनाओं के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दों को लेकर जनता के बीच जा रहे हैं।

यात्रा के दौरान हमने पाया कि उनके लिए जनता का झुकाव पार्टी से परे जाकर भी है। जब हमने इस बारे में उनसे जानने की कोशिश की तो उन्होंने बताया कि वो छात्र जीवन से ही सामाजिक कार्यों में लगे रहे हैं। उन्होंने हर जाति-दल के लोगों की मदद की है। यही कारण है कि आज लोग जाति-दल से ऊपर उठ कर उनका समर्थन कर रहे हैं।

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फ्रांस में पाकिस्तान और बांग्लादेशी नागरिकों की एंट्री पर लगे बैन: हिंसक प्रदर्शनों को देखते हुए विपक्षी नेता की माँग

फ्रांस में अक्‍टूबर माह में हुए आतंकी हमलों के बाद इस्‍लामिक आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाने की माँग तेज होती जा रही है। विपक्ष की नेता मरीन ले पेन ने अब सरकार से पाकिस्‍तान और बांग्‍लादेश से जुड़ी एक ऐसी माँग कर डाली है जो इन देशों खासतौर पर पाक की मुश्किलें बढ़ाने वाली है। 

पेन ने माँग की है कि पाक और बांग्‍लादेश से आकर यहाँ बसने वाले अप्रवासियों पर बैन लगा देना चाहिए। उन्‍होंने यह माँग दक्षिण एशिया के इन दोनों देशों में होने वाले अति हिंसक विरोध प्रदर्शनों के चलते की है। बता दें कि फ्रांस के राष्‍ट्रपति इमैनुएल मैंक्रो की तरफ से की गई टिप्‍पणी से नाराज पाकिस्‍तान और बांग्‍लादेश के लोग बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन पर उतर आए हैं।

ले पेन ने ट्वीट कर अपनी माँग सरकार के सामने रखी है। फ्रेंच में की गई ट्वीट का अनुवाद कुछ इस तरह से है, “आज बांग्‍लादेश और पाकिस्‍तान में नए सिरे से हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए हैं। इन्‍हें देखते हुए मैं सरकार से माँग करती हूँ कि इन देशों से आने वाले लोगों को राष्‍ट्रीय सुरक्षा के नाम तुरंत बैन कर दिया जाना चाहिए।”

इससे पहले, पेन ने फ्रांस और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो का साथ देने और फ्रांसीसी विरोधी भावनाओं के खिलाफ समर्थन दिखाने के लिए भारत को धन्यवाद दिया था। बता दें कि भारत ने एक बार फिर यह साफ किया है कि वो मौजूदा संकट में फ्रांस के साथ खड़ा है। साथ ही भारत ने आतंकवाद और कट्टरपंथ का समर्थन करने वालों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई का आह्वान भी किया है।

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उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, “नई दिल्ली ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि आतंकवाद और उसे जन्म देने वाला कट्टरपंथ सेंसरशिप का सबसे डरावना रूप है। यह हमारी लोकतांत्रिक स्वतंत्रता और हमारे साझा गणतंत्रवादी आदर्शों के लिए खतरा है। पेरिस और नीस में जो कुछ हुआ, उसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। भारत इस लड़ाई में फ्रांस के साथ है।”

बता दें कि तुर्की और पाकिस्तान द्वारा फ्रांस के खिलाफ मोर्चा खोलने के बाद भारत फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का समर्थन करने वाला पहला गैर-पश्चिमी देश था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेरिस और नीस की घटना की निंदा करते हुए आतंकवाद से लड़ाई में फ्रांस के समर्थन की बात कही। उन्होंने शिक्षक की हत्या की निंदा करते हुए कहा था कि किसी भी कारण या किसी भी परिस्थिति में आतंकवाद को सही नहीं ठहराया जा सकता।

पाक-बांग्‍लादेश में हो रहे प्रदर्शन

पाक और बांग्‍लादेश में हजारों की संख्‍या में कट्टरपंथी इकट्ठा हुए थे। इन लोगों ने राष्‍ट्रपति मैंक्रो के पुतले जलाए और सड़कों पर इनका प्रदर्शन किसी को भी दहशत में डालने वाला था। मैंक्रो इस समय हर मजहबी देश के निशाने पर हैं। 16 अक्‍टूबर को जब एक शिक्षक का सिर कलम कर दिया गया था तो मैंक्रो ने फ्रांस की संस्‍कृति की तारीफ की थी। उन्‍होंने कहा था कि फ्रांस पैगंबर मोहम्‍मद के कार्टून छापना बंद नहीं करेगा।

मदरसे में मैक्रों के पुतले का सिर कलम 

समुदाय विशेष के लोग पैगंबर मोहम्‍मद के चित्रण को ईशनिंदा मानते हैं। शिक्षक की निर्मम हत्‍या के बाद कई जगह पर फ्रेंच नागरिकों ने इन कार्टूनों का प्रदर्शन किया था। इसकी वजह से समुदाय के लोग खासे नाराज हैं। मैक्रों ने हिस्‍ट्री के टीचर सैमुअल पैटी की हत्‍या के बाद कहा था, “उन्‍हें इस्‍लामिक आतंकियों ने इसलिए मार दिया क्‍योंकि वह हमारा भविष्‍य चाहते थे। लेकिन फ्रांस कार्टूनों को नहीं त्‍यागेगा।”

शुक्रवार को पाकिस्‍तान में विरोध प्रदर्शन के नाम पर अजब-गजब वाकया हुआ। यहाँ पर मदरसे में पढ़ाने वाले टीचर ने छात्राओं के सामने मैक्रों के पुतले का सिर कलम कर दिया। इन छात्राओं में से कई ऐसी थीं जिनकी उम्र बहुत कम थी। 

वहीं बांग्‍लादेश की राजधानी ढाका में भी प्रदर्शन जारी है। बताया जा रहा है कि एक प्रदर्शन में करीब 40,000 लोगों ने हिस्‍सा लिया था, जिसे इस्‍लामी आंदोलन बांग्‍लादेश की तरफ से आयोजित किया गया था। पाक की राजधानी इस्‍लामाबाद में भी 2000 प्रदर्शनकारियों ने फ्रांस के दूतावास तक मार्च निकाला था।

‘पैगंबर मोहम्मद के कार्टून बना वो सोचते हैं कि ‘वो’ ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ समझ पचा लेंगे?’ नरसंहार ट्वीट का बचाव

मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने एक बयान दिया था, जिसमें उनका कहना था कि समुदाय विशेष के पास लाखों फ्रांसीसी लोगों को जान से मारने का अधिकार है। इस बयान पर उनकी पूरी दुनिया में आलोचना हुई लेकिन इसके बाद वह शुक्रवार (30 अक्टूबर 2020) को फिर अपने नफ़रत भरे बयान के पक्ष में खड़े हुए नज़र आए। इस बयान के संबंध में ट्वीट करते हुए उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत संदर्भ में लिया जा रहा है।

दरअसल गुरूवार (29 अक्टूबर 2020) मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने ट्विटर पर जहर उगलते हुए कहा था कि मजहब विशेष वालों के पास फ्रांस के लोगों की हत्या करने का अधिकार है। फ्रांस के लोगों की हत्या का समर्थन करते हुए महातिर मोहम्मद ने अपने ट्वीट में लिखा था, “क्रोधित लोगों के पास जान लेने का अधिकार है क्योंकि भूतकाल (इतिहास) में फ्रांस ने लाखों लोगों का नरसंहार किया है। 

महातिर मोहम्मद का ट्वीट

अपने नफ़रत भरे ट्वीट पर पूरी दुनिया में विवाद बढ़ने और आलोचना का शिकार होने के बाद उन्होंने इस संबंध में सफाई भी पेश की। उन्होंने कहा, “जिस तरह मेरे द्वारा पेश किए गए विचारों की गलत व्याख्या की गई और तोड़-मरोड़ का उनका प्रचार किया गया, मैं इस बात से बहुत ज़्यादा निराश हूँ।”

महातिर मोहम्मद ने कहा कि लोग उनके ट्वीट को पूरा नहीं पढ़ पाए, जिसके अगले हिस्से में यह लिखा था, “मुस्लिमों ने कभी आँख के बदले आँख वाली नीति के क़ानून का पालन नहीं किया। मुस्लिम ऐसा नहीं करते हैं और फ्रांस के लोगों को ऐसा नहीं करना चाहिए। बल्कि फ्रांस सरकार को अपने लोगों को इस बात की शिक्षा देनी चाहिए कि वह दूसरों की भावनाओं का सम्मान करें।” 

इसके बाद महातिर मोहम्मद ने कहा कि जिस तरह उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया और इसके गलत मायने निकाले गए। उसके आधार पर उन्हें फेसबुक और ट्विटर पर हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया। इस कार्रवाई को मद्देनज़र रखते हुए उन्होंने फेसबुक और ट्विटर की आलोचना की। आलोचना करते हुए उन्होंने लिखा कि उनके द्वारा अपना पक्ष रखने और सफाई पेश किए जाने के बावजूद इस तरह की कार्रवाई गलत है।

फ्रांसीसी लोगों के नरसंहार की बात कहने वाले महातिर मोहम्मद अगले ही क्षण खुद ही भुक्तभोगी (victim) भी बन गए। 

महातिर मोहम्मद द्वारा किए गए ट्वीट

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि उनके लिए यही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। एक तरफ उन्होंने ऐसे लोगों का बचाव किया, जिन्होंने पैगंबर मोहम्मद का कार्टून बनाया। साथ ही समुदाय के लोगों से इस बात की आशा रखी कि वह अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर बिना कोई प्रतिक्रिया दिए इसे पचा (स्वीकार) लें।

खुद को भुक्तभोगी साबित करते और ट्विटर की आलोचना करते हुए महातिर मोहम्मद इस बात पर अड़े थे कि पैगंबर मोहम्मद का कार्टून बनाना अभिव्यक्ति की आज़ादी के दायरे में नहीं आता है लेकिन उनकी प्रतिक्रिया ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ की मिसाल है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिमों से इस बात की उम्मीद की जाती है कि वह अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर कार्टून स्वीकार कर लें जबकि ट्विटर ने उनका यह ट्वीट डिलीट कर दिया था। महातिर मोहम्मद की तरफ से यह प्रतिक्रिया शुक्रवार को कट्टर इस्लामियों द्वारा नीस शहर में आतंकी हमलों के बाद आई थी। 

इस आतंकवादी हमले में एक आतंकी ने नीस शहर स्थित एक चर्च के पास कुल 3 लोगों की हत्या कर दी थी, जिसमें एक महिला भी शामिल थी, जिसका गला काट दिया गया था। यह भयावह हमला फ्रांस के एक शिक्षक का अभिव्यक्ति की आज़ादी से संबंधित मुद्दे पर एक कार्टून (पैगंबर मोहम्मद) दिखाने के लिए गला काटने के बाद हुआ था। महातिर मोहम्मद के ट्वीट पर विवाद बढ़ने के बाद ट्विटर ने उसे हिंसा को बढ़ावा देने वाला बता कर डिलीट कर दिया था। 

‘Boycott Islam’ लिख कर फँस गईं तस्लीमा नसरीन, कॉन्ग्रेसी साकेत गोखले ने दर्ज कराई शिकायत

बांग्‍लादेश की जानी-मानी लेखिका और एक्टिविस्ट तस्लीमा नसरीन के खिलाफ शिकायत दर्ज किया गया है। यह शिकायत कॉन्ग्रेस समर्थक साकेत गोखले ने दर्ज करवाई है। साकेत ने तस्लीमा के खिलाफ भारत में सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने की कोशिश करने को लेकर शिकायत दर्ज कराई है।

बता दें कि तस्लीमा नसरीन ने 29 अक्टूबर 2020 को अपने ट्विटर अकाउंट के माध्यम से एक ट्वीट पोस्ट किया, जिसमें ’बॉयकॉट इस्लाम’ लिखा था। विदेशियों के क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी के समक्ष दायर शिकायत में कहा गया है कि नई दिल्ली में वीजा पर रहने वाली तस्लीमा नसरीन (स्वीडन की नागरिक) ने वीजा मानदंडों का व्यापक उल्लंघन करते हुए अपने ट्वीट के माध्यम से भारत में सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने का प्रयास किया है। 

गोखले ने गृह मंत्रालय के वीजा विंग और एफआरआरओ को लिखे अपने पत्र में कहा कि नसरीन का ट्वीट ‘हमारे देश में सांप्रदायिक विद्वेष और नफरत फैलाने का एक कुत्सित और जानबूझकर किया गया प्रयास’ है। शिकायत में आगे कहा गया है, “यह नोट किया जा सकता है कि किसी भी तरह के वीजा पर रहने वाले विदेशियों को देश में उनके निवास के दौरान राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने की अनुमति नहीं है।” गोखले ने सरकार से मामले का तत्काल संज्ञान लेने का अनुरोध किया। 

तस्लीमा नसरीन ने हाल ही में ट्व‍िटर पर लिखा था, “इस्लाम धर्म में सुधार की जरूरत है, नहीं तो आधुनिक सभ्‍यता में इस धर्म के लिए कोई जगह नहीं है।” इसके पहले तस्लीमा ने ट्व‍िटर पर ही लिखा था, “बॉयकॉट इस्‍लाम।”

तस्लीमा नसरीन के इन ट्वीट्स के बाद सोशल मीडि‍या में खासा बवाल हुआ। जहाँ इस्‍लामि‍क कट्टरपंथियों ने उनकी आलोचना की तो बाकी लोग खुलकर उनके समर्थन में आए। दरअसल, तस्लीमा लगातार खुलकर इस्‍लाम की बुराइयों और इस धर्म की खामियों के बारे में बात करती हैं।

हाल ही में फ्रांस में पैगंबर मोहम्‍मद के कार्टून को लेकर चल रहे विवाद पर भी वे खुलकर अपना पक्ष रख रही हैं। वे लगातार ट्वीट करती हैं और मुस्लिम कट्टरपंथियों को आइना दिखाती रहती हैं। तस्लीमा पाकिस्‍तान मूल के तारेक फतेह की तरह ही इस्‍लाम की बुराइयों की आलोचना करती हैं और भारत की पैरवी करती रही हैं।

गौरतलब है कि 29 अक्टूबर 2020 की सुबह 9 बजे फ्रांस के नीस शहर में स्थित कैथेड्रल चर्च में एक आतंकवादी घटना हुई। इस आतंकी घटना में एक व्यक्ति ने अल्लाह-हू-अकबर बोलते हुए कई लोगों पर धारदार हथियार से हमला किया। इस घटना में अभी तक 3 लोगों की जान जा चुकी है और कई घायल बताए जा रहे हैं। मरने वालों में एक महिला भी शामिल है, जिनका गला काट दिया गया है।

इसके बाद फ्रांस के एविगनन (Avignon) शहर में एक व्यक्ति ने अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाते हुए धारदार हथियार से पुलिसकर्मियों के एक समूह पर हमला कर दिया। इसके बाद पुलिस वालों ने उस व्यक्ति पर जवाबी कार्रवाई में गोली चलाई जिसमें उस व्यक्ति की मौत हो गई। स्थानीय समयानुसार यह घटना लगभग 11:15 बजे हुई थी यानी फ्रांस के ही नीस शहर के चर्च में 1 महिला समेत 3 लोगों की गला काट कर हत्या करने के कुछ ही घंटों बाद।

लव जिहाद करने वाले अगर सुधरे नहीं तो ‘राम नाम सत्य है’ की यात्रा अब निकलने वाली है: योगी आदित्यनाथ

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने धर्म परिवर्तन को लेकर कल ही एक बड़ा आदेश जारी किया था। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा था कि केवल विवाह के लिए धर्म परिवर्तन स्वीकार्य नहीं है। इसके अलावा न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि धर्म परिवर्तन का उद्देश्य अलग है, उसका विवाह से कोई सरोकार नहीं है।

अब न्यायालय के इस आदेश पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि सरकार भी ‘लव जिहाद’ के मामलों पर रोक लगाने के लिए क़ानून लेकर आएगी। इसके बाद उन्होंने कहा, “ऐसे लोगों के लिए चेतावनी है, जो अपनी पहचान छिपा कर हमारी बहनों के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने का प्रयास करते हैं।” 

जौनपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा, “हमने जो कहा था, वह करके दिखाया है। साथ ही यह भी कहने के लिए आए हैं कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश दिया है शादी ब्याह के लिए धर्म परिवर्तन आवश्यक नहीं है। ऐसा नहीं किया जाना चाहिए और न ही इसे मान्यता मिलनी चाहिए। इस बात को ध्यान में रखते हुए सरकार भी निर्णय ले रही है कि हम लव जिहाद को सख्ती से रोकने का प्रयास करेंगे।” 

इस मुद्दे पर आगे बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा:

“हम लव जिहाद के मामलों को रोकने के लिए एक प्रभावशाली क़ानून बनाएँगे। छद्म वेश में, चोरी-छिपे नाम बदल कर जो लोग बहन-बेटियों की इज्जत के साथ खिलवाड़ करते हैं, उनके लिए पहले से मेरी चेतावनी है। अगर वह सुधरे नहीं तो राम नाम सत्य है की यात्रा अब निकलने वाली है। हम लोग मिशन शक्ति के कार्यक्रम को इसलिए आगे बढ़ा रहे हैं। मिशन शक्ति के कार्यक्रम का मतलब है कि हम हर बेटी को, हर बहन को सुरक्षा की गारंटी देंगे। इन सारी बातों के बावजूद अगर किसी ने दुस्साहस किया तो उनके लिए ऑपरेशन शक्ति अब तैयार है। इसका उद्देश्य यही है कि हम हर हाल में लड़कियों की सुरक्षा करेंगे और उनके सम्मान की सुरक्षा करेंगे। इसके अलावा न्यायालय के आदेश का भी पालन होगा और बहन-बेटियों का सम्मान सुनिश्चित होगा।”

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने धर्म परिवर्तन और विवाह को लेकर जो अहम फैसला सुनाया था, उसके अनुसार विवाह से धर्म परिवर्तन का कोई सरोकार नहीं है। धर्म परिवर्तन करने के बाद विवाह करने वाले एक जोड़े ने संरक्षण के लिए माँग करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। इस याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने यह आदेश सुनाया था। 

न्यायालय ने 2014 के नूर जहां बेगम मामले के आदेश का हवाला देते हुए आदेश सुनाया और कहा कि ऐसे मामलों में न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि ‘विवाह के लिए धर्म परिवर्तन मान्य नहीं हो सकता है।’

नूर जहां बेगम मामले में दायर की गई अनेक याचिकाओं में एक ही प्रश्न था, “क्या सिर्फ विवाह के लिए धर्म परिवर्तन मान्य हो सकता है?” जबकि धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को न तो उस धर्म के बारे में कोई जानकारी होती है और न आस्था/विश्वास। तमाम याचिकाओं में एक ही प्रश्न था कि लड़कियों ने मुस्लिम लड़कों के कहने पर इस्लाम धर्म कबूल किया। जबकि उन लड़कियों को न तो इस धर्म के बारे में मूलभूत जानकारी थी और न ही आस्था।

बिहार में तेजस्वी यादव के समर्थन में खड़े वामपंथी दलों ने यूपी की दी दुहाई, कहा- ‘हम हारे तो नहीं बचेगा लोकतंत्र’

बिहार में वामपंथी अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए फिर से कुलबुलाने लगे हैं। बिहार में जंगलराज का पर्याय मानी जाने वाली राजद के साथ मिल कर महागठबंधन में चुनाव लड़ रहे भाकपा (माले) के नेता दीपांकर भट्टाचार्य लोगों को उत्तर प्रदेश का डर दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा देश में लोकतंत्र ख़त्म कर रही है और वो नहीं जीते तो बिहार में भी यही होगा। उन्होंने कहा कि बिहार में उनकी सरकार नहीं बनी तो वहाँ लोकतंत्र की हत्या हो जाएगी।

‘न्यूज़ 18’ के इंटरव्यू में वामपंथी नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि राजग को ध्वस्त करने के लिए उन्होंने पार्टी हित को किनारे रख कर लालू यादव की पार्टी के साथ गठबंधन किया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी न तो कोई वैचारिक समझौता कर रही है और न ही किसी का पिछलग्गू बन रही है। उन्होंने दावा किया कि गठबंधन के 25 पॉइंट चार्टर में भी वामपंथ का प्रभाव है। उन्होंने कहा कि कृषि ऋण माफी, सुरक्षित रोजगार और समान काम के लिए समान वेतन जैसे मुद्दे वामपंथी पहले से उठाते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने 30 सीटों की माँग रखी थी, पर उन्होंने समझौता किया और राजद ने 19 सीटें दी। उन्होंने दावा किया कि उनके पास मजबूत उम्मीदवार और जनाधार है, जिससे वो चुनावी समीकरणों को बदलने की ताकत रखते हैं। भाकपा (माले) के महासचिव ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए दोनों कैडर आधारित दल साथ आए हैं और एक कॉम्पैक्ट और विश्वसनीय गठबंधन बनाया है।

इस दौरान उन्होंने 2015 में महागठबंधन का चेहरा रहे और अब राजग के मुख्यमंत्री उम्मीदवार नीतीश कुमार को अवसरवादी और अविश्वसनीय करार दिया। उन्होंने कहा कि अब महागठबंधन में पाला बदलने वाला कोई नहीं है और यही उनके पक्ष में गेमचेंजर साबित होगा। हालाँकि, उन्होंने जीतन राम माँझी, मुकेश साहनी और उपेंद्र कुशवाहा जैसे नेताओं के महागठबंधन छोड़ने पर दुःख जताते हुए कहा कि वो रहते तो अच्छा होता।

अपनी बिहार की चुनावी सभाओं में भी भाकपा नेता दीपांकर भट्टाचार्य भाजपा पर निशाना साधते हुए कहते रहे है कि अगर बिहार में भाजपा की सरकार बनी तो यहाँ भी ‘उत्तर प्रदेश जैसे हालात’ पैदा हो जाएँगे। उन्होंने कहा कि भाजपा की ‘लोकतंत्र विरोधी और फासीवादी’ मुहिम को रोकने के लिए माले ने कॉन्ग्रेस और राजद से गठबंधन किया है। दीपांकर ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि भविष्य में तेजस्वी यादव की सरकार बनी तो उसमें माले शामिल नहीं होगी बल्कि बाहर से ‘नजर रखेगी’।

हाल ही में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावेड़कर ने ऑपइंडिया से कहा था, “बिहार में हमारा पहले से ही गठबंधन है, बीच में जदयू निकल गए थे, लेकिन फिर वापस आए, तो आज हम काफी मजबूती से नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने के वादे पर ही चुनाव लड़ रहे हैं। और हमें जनता का आशीर्वाद मिलेगा। पहले चरण के चुनाव के बाद पता चलेगा कि बीजेपी और जदयू कॉम्बिनेशन बहुत आगे निकलेगा। HAM और VIP चार पार्टियों का ये गठबंधन मजबूती से लड़ रहा है और निश्चित रूप से जीतेगा।”