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‘उद्धव सोनिया होश में आओ’: दिल्ली के प्रेस क्लब के बाहर अर्णब गोस्वामी के समर्थन में उमड़ा हुजूम

मुंबई पुलिस जिस तरह से ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के संस्थापक अर्णब गोस्वामी के घर में घुस कर उठा कर ले गई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया, उसे लेकर पूरे भारत में आक्रोश है। दिल्ली के प्रेस क्लब में भी कई पत्रकारों व अन्य लोगों ने पहुँच कर अर्णब गोस्वामी के लिए समर्थन जताया और मुंबई पुलिस व महाराष्ट्र सरकार की निंदा की। ऑपइंडिया सहित कई मीडिया संस्थानों के पत्रकार इस विरोध प्रदर्शन में शामिल रहे।

नीचे संलग्न किए गए तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि कैसे दिल्ली के प्रेस क्लब के बाहर आकर लोग अर्णब गोस्वामी के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने अपने साथ ‘संविधान से गद्दारी है, महाराष्ट्र सरकार मीडिया की हत्यारी है’ और ‘उद्धव-सोनिया होश में आओ, मीडिया पर हमले बंद करो’ लिखे बैनर ले रखा था। साथ ही वो ‘अगर आज चुप रहे तो कल आप पर हमला होगा’ लिखे पोस्टर-बैनर भी ले रखे थे।

साथ ही नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) ने भी महाराष्ट्र सरकार की निंदा करते हुए कहा कि अर्णब गोस्वामी को बिना किसी पूर्व-सूचना के जबरन उनके घर में घुस कर गिरफ्तार किया गया। यूनियन ने कहा कि ये पुलिस बल का दुरूपयोग है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को वश में करने का प्रयास है। यूनियन ने इसे अमानवीय, हृदयहीन और गैर-कानूनी बताया। यूनियन ने ध्यान दिलाया कि कैसे अर्णब को उनके वकीलों की सलाह भी नहीं लेने दी गई।

यूनियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में हस्तक्षेप करने की माँग करते हुए कहा कि राजनीतिक कारणों से अर्णब गोस्वामी को प्रताड़ित किया जा रहा है। साथ ही इसे सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन भी करार दिया। मेजर जनरल (रिटायर्ड) जीडी बख्शी ने भी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। पत्रकारों ने कहा कि ये सब उसी महाराष्ट्र में हो रहा है, जहाँ बालासाहब ठाकरे कार्टून्स के जरिए अपनी बात रखते थे।

ज्ञात हो कि ‘इंडियन डिजिटल मीडिया असोसिएशन (IDMA)’ ने ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के मुख्य संपादक अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी और मुंबई पुलिस की ‘मनमानी’ पर हैरानी जताई है। ‘रिपब्लिक टीवी’ के अनुसार, अर्णब गोस्वामी के साथ दुर्व्यवहार किया गया, उन्हें जबरन पुलिस थाने ले जाते समय कई गाड़ियों का बदल-बदल कर इस्तेमाल किया गया। चैनल ने ये भी बताया है कि अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी के लिए पुलिस न तो कोई वारंट और न ही कोई अदालती आदेश लेकर आई थी।

चीन से काम समेटकर UP पहुँची जर्मन कंपनी: आगरा में शुरू किया प्रोडक्शन, 10,000 लोगों को मिलेगा रोजगार

लाखों डॉलर के जूते निर्यात के कारोबार को चीन से समेटकर भारत आई जर्मनी की कंपनी वॉन वेलेक्स ने UP के आगरा में दो फुटवियर यूनिट्स में उत्पादन शुरू कर दिया है। अभी तक कुल 2000 लोगों को इन यूनिट्स में रोजगार दिया गया है। वॉन वेलक्स कंपनी अब UP में तीन परियोजनाओं में लगभग 300 करोड़ रुपए का निवेश करेगी और लगभग 10,000 लोगों को रोजगार मिल सकेगा।

अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आलोक कुमार ने मंगलवार (4 नवंबर, 2020) को वर्चुअल माध्यम से इन इकाइयों का उद्घाटन किया। बता दें कि भारत की जूता निर्यातक कंपनी ‘इआट्रिक इण्डस्ट्रीज ग्रुप’ और जर्मनी की कंपनी ‘कासा ऐवर जिम्ब’ (Casa Everz Gmbh) के बीच हुए साझेदारी में इसकी स्थापना की गई हैं।

‘कासा ऐवर जिम्ब’ ने मई माह में कोरोना वायरस की महामारी के बीच ही भारत के साथ इस प्रस्ताव को रखा था। यह ब्रांड भारत के अलावा चीन में भी काम कर रहा था, जिसका करोड़ डॉलर का टर्नओवर है। अब यह चीन से सारा काम समेटकर भारत में उत्तर प्रदेश राज्य में स्थापित हो रही है।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों इकाइयों की वार्षिक 25 लाख जोड़ी जूतों की उत्पादन क्षमता है। बताया जा रहा यह कंपनी जेवर में 10,000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में दिसंबर तक एक नई उत्पादन इकाई स्थापित कर सकती है। जबकि कोसी-कोटवान, मथुरा में 7.5 एकड़ में एक और विनिर्माण यूनिट भी प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं के तहत कंपनी वार्षिक 50 लाख जोड़ी जूतों का उत्पादन करेगी।

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व यह संभव हो सका है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में संकट को अवसर में बदलने के विजन के परिणाम मिलने लगे हैं। इसके तहत केवल पाँच माह में निवेश-प्रस्ताव क्रियान्वित होकर उत्पादन शुरू हो गया है।

उन्होंने कहा कि कोविड-19 के बाद के कालखण्ड में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इकाइयों के संचालन के शुभारम्भ की घोषणा मेट्रो शूज लिमिटेड के अध्यक्ष रफीक ए मलिक तथा जिलाधिकारी आगरा प्रभु एन सिंह द्वारा की गई।

वहीं, ‘आशीष इआट्रिक इण्डस्ट्रीज’ के सीईओ आशीष जैन ने बताया कि इस मौजूदा परियोजना में जर्मन प्रौद्योगिकी और यूपी के जनसांख्यिकीय लाभांश के तालमेल का एक अनुपम उदाहरण है। परियोजना के अधीन प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, अनुसंधान, विकास, विपणन और उत्पादन ईआट्रिक इण्डस्ट्रीज के सहयोग से किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि वॉन वेलेक्स द्वारा 10,000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में जेवर (यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण) में दिसम्बर 2020 तक एक नई उत्पादन इकाई स्थापित करने की योजना है। इसी तरह कोसी-कोटवान मथुरा में 7.5 एकड़ में एक और विनिर्माण इकाई प्रस्तावित है।

गौरतलब है कि भारत में कंपनी के आने से 10 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा और करोड़ों डॉलर का बिजनेस होगा।

वहीं सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) राज्य मंत्री उदयभान सिंह ने भी इस कदम का स्वागत किया था। उन्होंने कहा “हम यह देखकर बहुत खुश हैं कि कासा ऐवर जिम्ब (Casa Everz Gmbh) देश में निवेश करेगा और इतने लोगों को रोजगार देगा। खास बात यह है कि वो चीन को छोड़ कर भारत के उत्तर प्रदेश आ रहा है।”

पुरुषों और महिलाओं के लिए ऑर्थोपेडिक फुटवियर (Orthopaedic footwear) बेचने वाले इस ब्रांड के 80 देशों में 100 मिलियन से ज्यादा ग्राहक हैं। इसे भारत में 2019 में लॉन्च किया गया था और यह 500 से ज्यादा रीटेल और ऑनलाइन दुकानों पर यह ब्रांड मिलता है।

उल्लेखनीय है कि वॉन वैल्स जर्मनी एक जर्मन ब्रांड है जो ‘5 जोन तकनीक’ पर आधारित है, 5 जोन नाम से महिला और पुरुष के जूते चप्पल सैंडल बनाकर यूरोपीय बाजार में करोड़ों डॉलर का व्यापार करती है। भारत में यह काम वन विलेज जर्मन के नाम से किया जा रहा है।आगरा में उत्पाद होने वाला वन विलेज जर्मन घरेलू और निर्यात का काम पहले से भी कर रहा है। इसमें जूते का निर्माण आपके स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर किया जाता है।

बड़े बेटे पर ₹14 करोड़ जुर्माना, छोटा चला रहा ड्रग्स का अवैध कारोबार: वामपंथी नेता के बेटे पर ED का शिकंजा

केरल की वामपंथी सरकार लगातार मुश्किलों में फँसती जा रही है क्योंकि अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जाँच में पता चला है कि बिनिश कोदियेरी एक काफी बड़े और अवैध अंडरग्राउंड कारोबार का संचालन कर रहा था। वो सीपीएम के स्टेट सेकेट्री कोदियेरी बालाकृष्णन का बेटा है, इसीलिए राज्य की सत्ताधारी पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। नार्कोटिक्स के कारोबार और अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग के मामले में भी उन पर आरोप लगा है।

असल में बिनिश कोदियेरी अलग-अलग लोगों के नाम पर केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में कई दुकानों की चेन, कई लक्जरी कारों (जिनमें से प्रत्येक का दाम 2 करोड़ रुपए है), कई होटल, शोरूम, और इलेक्ट्रिकल फिटिंग की दुकानें चला रहा था। ये सभी दुकानें दूसरे लोगों के नाम पर रजिस्टर कराई गई हैं। मंगलवार (नवंबर 3, 2020) को उसे प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 5 दिनों के लिए कस्टडी में लिया, ताकि आगे की पूछताछ की जा सके।

दरअसल, ED ने बेंगलुरु से मोहम्मद अनूप नामक ड्रग पेडलर को गिरफ्तार किया था, जिसने बिनिश कोदियेरी के अवैध कारोबार के विवरण साझा किए थे। इसके बाद एजेंसी ने रुपयों के लेनदेन की जाँच शुरू कर दी और इससे जाँच एजेंसी को निवेशों के एक बड़े नेटवर्क का पता चला। ये निवेश ड्रग से कमाए गए रुपयों से अर्जित की गई सम्पत्तियों और व्यवसायों में किए गए थे। इसके लिए कई ड्रग पेडलर्स का सहारा लिया गया था।

साथ ही UAE के कॉन्सुलेट के साथ बिनिश कोदियेरी के रिश्ते और कारोबार भी शक के घेरे में आ गए हैं। जाँच में पता चला है कि वो दलालों के जरिए ऐसे कई अधिकारियों से संपर्क में था। वामपंथी नेता का बड़ा बेटा बिनॉय बालाकृष्णन पहले ही दुबई में एक धोखाधड़ी के मामले में आरोपित है और उस पर 14 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया था। अब इस परिवार के अन्य वरिष्ठ सदस्यों से भी पूछताछ की जा सकती है।

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के करीबी अधिकारी एम शिवशंकर पहले से ही मनी लॉन्ड्रिंग के मामले का सामना कर रहे हैं। वहीं ED की एक टीम ने बुधवार को बेंगलुरु स्थित कोदियेरी के आवास पर छापेमारी भी की। उसके कई पार्टनरों के ठिकाने भी ED की रडार पर हैं। उसके एक पार्टनर अब्दुल लतीफ़ के कारोबारी ठिकानों पर भी छापेमारी होनी है। वो फ़िलहाल क्वारंटाइन में है क्योंकि उसकी अम्मी को कोरोना हुआ है।

कुछ ही दिनों पहले खबर आई थी कि केरल में एक दलित महिला अपनी दो बेटियों की हत्या के मामले में न्याय के लिए भटक रही है और उसने फिर से विरोध प्रदर्शन शुरू किया है। ये 3 साल पहले की घटना है, जब दोनों नाबालिग बहनों की वालयार में संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या कर दी गई थी। हत्या से पहले उन दोनों का यौन शोषण भी किया गया था। सोमवार (अक्टूबर 26, 2020) को उनकी माँ ने न्याय के लिए फिर से आंदोलन शुरू किया है।

मुंबई आतंकी हमले के बाद कॉन्ग्रेस डर गई थी, हमने पुलवामा का बदला लिया- योगी आदित्यनाथ

बिहार चुनावों में प्रचार के दौरान यूपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार RJD और कॉन्ग्रेस पर निशाना साध रहे हैं। आज कटिहार, मधुबनी, दरभंगा में भी जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने आतंकवाद पर पूर्ववर्ती कॉन्ग्रेस सरकार के नजरिए समेत कई अन्य मुद्दों को जनता के सामने रखा। उन्होंने कहा कि मुंबई आतंकी हमलों के बाद कॉन्ग्रेस डर गई थी जबकि वर्तमान सरकार ने पुलवामा आतंकी हमले का मुँहतोड़ जवाब दिया।

मोदी सरकार के नेतृत्व में एनडीए सरकार की खासियतें गिनाते हुए उन्होंने मुंबई में हुए आतंकी हमले की याद दिलाई। उन्होंने बताया कि जब मुंबई में आतंकी हमला हुआ था उस समय कॉन्ग्रेस सत्ता में थी और उसे राजद का समर्थन मिला था, लोग पाकिस्तान को तभी सबक सिखाना चाहते थे, मगर कॉन्ग्रेस डर गई। पुलवामा हमले के बाद पीएम ने कहा था कि हम अपने सैनिकों के बलिदान का बदला लेंगे और हमने यह पाकिस्तान में घुसकर किया भी। योगी आदित्यनाथ ने सवाल किया कि क्या कॉन्ग्रेस ऐसा कर सकती थी?

इसी प्रकार कटिहार में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घुसपैठ की समस्या को लेकर कहा कि कटिहार घुसपैठ की समस्या से तंग है जब एनडीए सरकार आएगी तो घुसपैठिए को बाहर निकाल फेंकेगी। उन्होंने कटिहार से भाजपा प्रत्याशी तार किशोर के लिए वहाँ की जनता से आशीर्वाद माँगा और आश्वास्त किया कि घुसपैठ की समस्या का समाधान होगा।

वह बोले कि बिहार में नीतिश के नेतृत्व में एक बार फिर एनडीए सरकार बनेगी। उन्होंने जनता से कहा कॉन्ग्रेस और राजद के परिवारों की चिंता आम लोगों की नहीं है। वह कॉन्ग्रेस-राजद पर तंज कसते हुए कहते हैं- “इनके लिए परिवार ही पार्टी है और पार्टी ही देश है। इससे बाहर इनकी दृष्टि नहीं है।” सीएम योगी ने राजद और कॉन्ग्रेस के लिए कहा कि इन्हें जब सत्ता में रहने का अवसर मिला तो इन्होंने परिवारवाद को बढ़ावा दिया।

लालू यादव के चारा घोटाला पर तंज कसते हुए भाजपा के स्टार प्रचारक सीएम योगी ने कहा कि सत्ता में रहते हुए ये गरीबों को मकान, शौचालय, रसोई गैस का कनेक्शन, बिजली का कनेक्शन नहीं दे पाए, स्वास्थ्य बीमा कवर नहीं दे पाए, खाद्यान्न नहीं दे पाए.. और तो और, अवसर मिला तो जानवरों का राशन भी चट कर गए।

मुख्यमंत्री योगी ने एक ओर जहाँ तेजस्वी यादव के 10 लाख नौकरी वाले वादे को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि रोजगार का झुनझुना दिखा कर ये जनता की आँखों में धूल झोंकने का कार्य कर रहे हैं तो वहीं, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को लेकर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने विकास को समग्र बनाने पर ज़ोर दिया है। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, यही मंत्र रहा। हम विकास सबका करेंगे, तुष्टीकरण किसी का नहीं।

पंजाब सरकार संविधान का पालन करने में विफल: हाई कोर्ट की गंभीर टिप्पणी, केंद्र को 500 करोड़ रुपए का नुकसान

पंजाब में ‘रेल रोको’ आंदोलन के कारण भारतीय रेलवे को राजस्व में लगभग 500 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। ऑल इंडस्ट्रीज एंड ट्रेड फोरम के अध्यक्ष बद्रीश जिंदल ने कहा कि राज्य के कारोबारियों को कुल मिलाकर करीब 5000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है, क्योंकि ‘किसानों’ द्वारा रेल लाइन को बंद करने का अभियान जारी है। इस्पात उद्योग से लेकर आवश्यक वस्तुओं तक, पंजाब में लगभग हर चीज की कमी है। पंजाब सरकार की निष्क्रियता के कारण, बिजली स्टेशनों को बिजली उत्पादन के लिए कोयला नहीं मिल पा रहा है, जिससे राज्य भर में बिजली की भारी कमी हो रही है।

हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को कानून के नियम का पालन करने में विफल बताया

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने पंजाब सरकार द्वारा रेलवे पटरियों को खाली कराने में विफलता पर नाराजगी व्यक्त की। उच्च न्यायालय ने 29 अक्टूबर को कहा था कि पंजाब सरकार कानून-व्यवस्था को संभालने में असमर्थ है। उच्च न्यायालय ने यहाँ तक ​​कहा था कि यदि सरकार पटरियों को खाली कराने में विफल रहती है, तो वह एक आदेश जारी करेगी और उस पर लिखा होगा कि पंजाब सरकार संविधान का पालन करने में विफल रही है।

केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन ने अदालत को बताया कि पंजाब सरकार राज्य में माल गाड़ियों को न चलने देने के लिए केंद्र को दोषी ठहराने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिख कर राज्य में माल और यात्री ट्रेनों को फिर से शुरू करने की माँग की।

जैन ने कहा कि पंजाब सरकार का दावा है कि पटरियाँ खाली हैं, लेकिन कई जगहों पर ट्रेनों को रोककर तलाशी ली जा रही है। उच्च न्यायालय ने पंजाब सरकार और केंद्र को जल्द से जल्द समस्या का हल खोजने का निर्देश दिया था।

पंजाब सरकार ने कोयले की कमी के लिए केंद्र पर दोषारोपण किया

एक सोशल मीडिया पोस्ट में पंजाब सरकार ने कहा था, “मालगाड़ियों के निलंबन के कारण पंजाब के कोयले के भंडार पूरी तरह से खाली हो गए हैं। पिछले थर्मल पावर प्लांट के परिचालन में कटौती के कारण उपभोक्ता बड़े पैमाने पर बिजली कटौती का सामना कर रहे हैं।” इस पोस्ट को पंजाब सरकार के फेसबुक और ट्विटर अकाउंट से श्यर किया गया था।

विधानसभा में अपने बयान के दौरान सिंह ने कहा कि पीएसपीसीएल उत्तरी ग्रिड को 12.23 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से दैनिक भुगतान कर रहा है और साथ ही 8.73 रुपए का अनिर्धारित लेन-देन चार्ज भी दे रहा है क्योंकि राज्य को बिजली स्टेशनों के लिए कोयला नहीं मिल पा रहा है।

पंजाब सरकार द्वारा किया गया सोशल मीडिया पोस्ट

नेटिज़न्स ने पंजाब सरकार के दावे का तुरंत खंडन किया और कैप्टन अमरिंदर सिंह से भारतीय रेलवे को दोष देने के बजाय रेलवे ट्रैक को खाली कराने का आग्रह किया।

रिपोर्टों के अनुसार, आंदोलनकारी जंडियाला, जगराओं, फिल्लौर, मुक्तसर, करतारपुर, फाजिल्का, रोमाना अल्बेल सिंह, गंगसर जैतो, फरीदकोट, फिरोजपुर, बटारी, मोगा, और मखु में रेल सेवाओं को रोक रहे हैं। हर जगह पर लगभग 10 से 20 आंदोलनकारी पटरियों को अवरुद्ध कर रहे हैं। उन्होंने पटरियों की पूर्ण नाकाबंदी सुनिश्चित करने के लिए कई स्थानों पर टेंट लगाए हैं।

पीयूष गोयल ने पंजाब सरकार से पटरियों को खाली कराने का अनुरोध किया था

26 अक्टूबर को पंजाब में माल और यात्री गाड़ियों को फिर से शुरू करने की कैप्टन अमरिंदर की माँग के जवाब में, रेल मंत्री पीयूष गोयल ने पंजाब सरकार से पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि वो रेल ट्रैक पर से आंदोलनकारियों को हटाएँ, सेवाओं की पूरी तरह से बहाली के लिए सुरक्षा की गारंटी दें।

गोयल ने पंजाब के सीएम को लिखे पत्र में कहा था कि रेलवे ने 23 अक्टूबर को माल परिचालन शुरू किया था, लेकिन पटरियों की छिटपुट नाकाबंदी जारी रहने के कारण इसे रोक दिया गया। सुगम सेवाओं को बाधित करते हुए आंदोलनकारी अभी भी पावरहाउस और रेलवे स्टेशनों के बाहर हैं।

उन्होंने आगे कहा, “नाकाबंदी की कुल निकासी के बिना, हमारे कर्मचारी, विशेष रूप से लोको पायलट और गार्ड गाड़ियों को चलाने के बारे में आश्वस्त नहीं हैं।” आंदोलनकारियों द्वारा लोको पायलटों के साथ मारपीट की भी खबरें थीं। गोयल ने यह भी उल्लेख किया कि आंदोलन के कारण पंजाब में माल की 200 से अधिक रेक फँसी हुई थीं।

किसान बिलों को लेकर रेल रोको आंदोलन के कारण ट्रेन सेवाएँ स्थगित

पंजाब में रेल रोको आंदोलन सितंबर में शुरू हुआ, जिसके बाद रेलवे ने सुरक्षा कारणों को बताते हुए राज्य में अपनी सेवाओं को स्थगित कर दिया। सेवाओं को थोड़े समय के लिए फिर से शुरू किया गया, लेकिन फिर से निलंबित कर दिया गया क्योंकि पंजाब सरकार पटरियों को खाली कराने में विफल रही।

सितंबर में, केंद्र सरकार ने कृषि उद्योग के लिए तीन नए बिलों की घोषणा की। इन बिलों का उद्देश्य बिचौलियों को उपज की बिक्री और खरीद से दूर करना है। हालाँकि, विपक्षी दलों ने न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) को हटाने के प्रयास के रूप में बिलों को चित्रित करने का प्रयास किया और आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने कृषि व्यवसाय में बड़े खिलाड़ियों की सुविधा के लिए इन बिलों को लाया। कैप्टन अमरिंदर ने नए नियमों को दरकिनार करने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया था।

अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी पर AAP और कॉन्ग्रेसी नेता-समर्थक खुलेआम मना रहे जश्न, श्रेय लेने की लगी होड़

फासीवाद का रोना रोने वाले आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेसी नेता और समर्थक मुंबई पुलिस द्वारा अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी पर जश्न मनाते हुए नजर आ रहे हैं। बता दें कि सत्ता में बैठे उद्धव सरकार के इशारे पर मुंबई पुलिस के अधिकारी AK-47 के साथ अर्णब के घर, उन्हें गिरफ्तार करने पहुँचे।

कथित तौर पर उन्होंने न सिर्फ रिपब्लिक चीफ अर्णब के बाल खिंचे बल्कि उनके बेटे को भी मारा और उनके ससुराल वालों से बद्तमीजी भी की। यह गिरफ्तारी पुलिस ने अदालत द्वारा बंद किए गए 2018 के केस में की है।

वहीं एक पत्रकार की गिरफ्तारी की निंदा करने के बजाय, कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी के समर्थक और नेता इस मामले में खुश होते हुए नजर आए।

आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता ने ट्विटर पर कहा कि अर्णब किसी भी प्रकार से सहानुभूति के हकदार नहीं हैं। यह कह कर उन्होंने मुंबई पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग को भी सही ठहराया। इसके अलावा कॉन्ग्रेसी नेताओं ने अर्णब की गिरफ्तारी का श्रेय भी लिया।

अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी का श्रेय लेने की होड़ में कॉन्ग्रेसी नेता इतना खो गए कि उन्होंने 2018 आत्महत्या के मामले में हुए उन्मूलन के बारे में गलत सूचना फैलाना शुरू कर दिया।

गौरव पांडे और रुचिरा चतुर्वेदी जैसे कॉन्ग्रेसी नेताओं ने 2018 में आत्महत्या मामले की रिपोर्ट का हवाला भी दिया। हालाँकि इन लोगों ने मुंबई पुलिस द्वारा दायर क्लोजर रिपोर्ट के बारे में बताना सही नहीं समझा।

अन्य लोगों ने भी अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी की खुशी मनाई।

इस मामले में राहुल गाँधी के प्रशंसक ने भी मुंबई पुलिस की सराहना की।

फ्रीडम ऑफ स्पीच का हवाला देते हुए हमेशा से मातम मनाने वाले भी इस मामले में जश्न मनाने में पीछे नहीं दिखे।

मुखौटा पहनकर प्रोपेगैंडा फैलाने वाले फैक्टचेकर भी अर्णब की गिरफ्तारी पर अपने फ्रीडम ऑफ स्पीच की लड़ाई भूलते हुए नजर आए।

गौरतलब है कि अर्णब गोस्वामी ने खुद इस बात का खुलासा किया कि उन्हें जबरदस्ती ले जाया जा रहा और मुम्बई पुलिस ने उनसे और उनके परिजनों ने मारपीट की है। इसके बावजूद कॉन्ग्रेस समर्थक इन बातों से मुँह फेरते हुए पुलिस के इस कारनामे पर उनकी प्रशंसा करते हुए नजर आए।

रिपब्लिक टीवी और अर्णब गोस्वामी पर हो रहे लगातार पुलिस ‘हमले’ पर ऑपइंडिया के विचार

समाचार चैनल ‘रिपब्लिक टीवी’ के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी के साथ मुंबई पुलिस का दुर्व्यवहार आज की सबसे बड़ी खबर है। अर्णब को जिस तरह से मारपीट के बाद पुलिस अधिकारियों ने उनके घर से उठाया और साल 2018 के केस का हवाला देकर अपने साथ थाने ले गए, उसके पीछे की मंशा सभी को मालूम है। यह वही केस है जिसे कुछ समय पहले स्वयं मुंबई पुलिस बंद कर चुकी थी लेकिन अब नई सरकार के नेतृत्व में यह फिरसे खोला गया है। केस दोबारा क्यों खोले जाते हैँ यह बताने की जरूरत नहीं है।

यह बात सब जानते हैं कि अर्णब गोस्वामी के समाचार चैनल रिपब्लिक टीवी की पत्रकारिता ने पिछले दिनों किस तरह से महाराष्ट्र सरकार के नाक में दम किया हुआ था। पिछले 4-5 महीनों से  रिपब्लिक टीवी प्रमुखता से महाराष्ट्र सरकार व मुंबई पुलिस के ख़िलाफ़ अपनी कवरेज कर रहा था। यानी, यदि चैनल 18 घंटे लाइव आया तो 9 घंटे या उससे भी ज्यादा प्रशासन के ख़िलाफ़ बोलता रहा।

क्रमानुसार देखें तो बांद्रा में रिपोर्टिंग को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद पालघर लिंचिंग में सोनिया गाँधी से सवाल पूछने, सुशांत सिंह केस में सीबीआई जाँच की माँग करने, फिर ड्रग मामले तक रिपब्लिक टीवी लगातार सुर्खियों में रहा। बाद में अचानक खबर आई कि पूरे संस्थान के 1000 कर्मचारियों के ख़िलाफ़ एफआईआर हो गई है। 

आजाद भारत के इतिहास में किसी सरकार ने शायद ही ऐसा कदम कभी किसी संस्थान के ख़िलाफ़ उठाया हो या आजादी के बाद से शायद ही पत्रकारों के ख़िलाफ़ हुए केसों की कुल गिनती भी इस संख्या के आस-पास पहुँच पाई हो। हो सकता है नैतिकता के आधार पर रिपब्लिक टीवी की पत्रकारिता गलत हो मगर रिपब्लिक टीवी अकेला ऐसा चैनल नहीं है जिसने जर्नलिज्म को इस गर्त में पहुँचाया। 

आज अन्य चैनलों के मुकाबले अर्नब गोस्वामी के इस चैनल की टीआरपी सबसे ज्यादा है। दर्शक उन्हें देखना पसंद कर रहे हैं। उन्हें सुनना पसंद करते हैं। ऐसे में यदि वामपंथी गिरोह के लोग उनकी गिरफ्तारी को प्रेस फ्रीडम पर खतरा बताने की जगह उन्हें पत्रकारिता का ज्ञान दे रहे हैं, तो सोचिए ये कहाँ तक वाजिब है कि एक ऐसे शख्स को जर्नलिज्म के गुण दोष बताना जिसने इसी क्षेत्र में रहते हुए मीडिया चैनल के रूप में एक पूरा एम्पायर खड़ा कर दिया हो।

पूरा वीडियो इस लिंक पर क्लिक करके देखें।

मुख़्तार अंसारी के परिवार को फायदा पहुँचाने वाले 2 IAS अधिकारियों को योगी सरकार ने हटाया

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने दो IAS अधिकारियों गुरुदीप सिंह और राजीव शर्मा को हटा कर उन्हें प्रतीक्षारत कर दिया है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने विवादास्पद फैसले लिए और ऐसे एक्शन लिए, जिनसे दोनों को फायदा हुआ। इन दोनों IAS अधिकारियों पर मऊ के विधायक मुख़्तार अंसारी और उसके भाई अफजल अंसारी के परिवार को फायदा पहुँचाने का आरोप है।

यह भी आरोप है कि करियर मेडिकल कॉलेज व डेंटल कॉलेज के मालिकों को भी इन दोनों IAS अधिकारियों ने फायदा पहुँचाया। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मीडिया में प्रकाशित खबर का संज्ञात लेते हुए इस पर कार्रवाई की है। जहाँ गुरुदीप सिंह वरिष्ठ IAS अधिकारी व राजस्व परिषद में सदस्य थे, वहीं दूसरी तरफ राजीव शर्मा अभी कुछ समय पहले ही विशेष सचिव, नगर विकास से राजस्व परिषद में नियुक्त किए गए थे।

‘हिंदुस्तान’ में प्रकाशित खबर के अनुसार, राजस्व परिषद के सदस्य के पास न्यायिक अधिकार होता है और वो जमीन से जुड़े मामले की सुनवाई करते हैं। इन दोनों IAS अधिकारियों ने ऐसे-ऐसी फैसले लिए, जिनसे न सिर्फ जिला प्रशासन, बल्कि उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ सरकार की भी खूब किरकिरी हुई। दोनों को ही राजस्व परिषद से हटा दिया गया है। सरकार ऐसे अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करेगी, जो माफिया से गठजोड़ में हैं।

परिषद सदस्य व IAS अधिकारी गुरुदीप सिंह ने उस सरकारी आदेश को ही निरस्त कर दिया था, जिसमें करियर मेडिकल व डेंटल कालेज के सरकारी जमीन पर बने होने की रिपोर्ट दी गई थी। इस आदेश को लखनऊ के तहसीलदार (सदर न्यायिक) और अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व, सीतापुर) द्वारा जारी किया गया था। इसी तरह राजीव शर्मा ने भी एक आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी।

उन्होंने उस आदेश को ही रद्द कर दिया था, जिससे एक जमीन को सरकारी होने का दर्जा दिया गया था। ये वही जमीन है, जिस पर मुख़्तार अंसारी के दोनों बेटों और गाजीपुर से दूसरी बार सांसद बने अफजल अंसारी के बँगले बने हुए हैं। मुख़्तार के बेटों के बँगले पहले ही ध्वस्त किए जा चुके हैं। राजस्व परिषद के अध्यक्ष दीपक त्रिवेदी के साथ विचार-विमर्श के बाद राज्य सरकार ने इन IAS अधिकारियों को प्रतीक्षारत करने का फैसला लिया।

हाल ही में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने माफिया विधायक मुख़्तार अंसारी के अवैध साम्राज्य पर अब तक का सबसे करारा प्रहार किया था। गाजीपुर में ‘मुख़्तार अंसारी का ताजमहल’ कहे जाने वाले उसके गजल होटल को ध्वस्त कर दिया गया था। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने भी देवरिया की चुनावी सभा में याद दिलाया था कि कैसे योगी सरकार गुंडे-माफियाओं की अवैध सम्पत्तियों पर बुलडोजर चलवा रही है।

‘अर्णब की गिरफ्तारी मीडिया की स्वतंत्रता, व्यक्ति की स्वाधीनता का हनन’: IDMA ने महाराष्ट्र सरकार की ‘मनमानी’ की निंदा की

‘इंडियन डिजिटल मीडिया असोसिएशन (IDMA)’ ने ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के मुख्य संपादक अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी और मुंबई पुलिस की ‘मनमानी’ पर हैरानी जताई है। ‘रिपब्लिक टीवी’ के अनुसार, अर्णब गोस्वामी के साथ दुर्व्यवहार किया गया, उन्हें जबरन पुलिस थाने ले जाते समय कई गाड़ियों का बदल-बदल कर इस्तेमाल किया गया। चैनल ने ये भी बताया है कि अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी के लिए पुलिस न तो कोई वारंट और न ही कोई अदालती आदेश लेकर आई थी।

IDMA ने कहा कि वीडियो में दिख रहे विजुअल्स से ये स्पष्ट है कि पुलिस अर्णब गोस्वामी की पत्नी पर लगातार दबाव बना रही थी और उन्हें जबरन एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने को कह रही थी, और वो कौन से दस्तावेज थे, ये स्पष्ट नहीं है। IDMA ने इसे ‘महाराष्ट्र सरकार की मनमानी की हैरान कर देने वाली अवस्था’ बताया और कहा कि एक पत्रकार को चुप कराने के लिए स्टेट मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है।

IDMA ने ये भी याद दिलाया कि ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के दोनों चैनलों द्वारा महाराष्ट्र सरकार की आलोचना की गई थी, इसीलिए ये ‘बदले की भावना’ से की गई कार्रवाई हो सकती है। उसने न सिर्फ इसे मीडिया की स्वतंत्रता का हनन बताया, बल्कि व्यक्तिगत आज़ादी का हनन भी करार दिया। साथ ही कहा कि ये उस स्वाधीनता का अतिक्रमण है, जिसे भारत के संविधान द्वारा हर नागरिक को प्रदान की गई है।

IDMA ने चेताया कि जिन लोगों पर नागरिकों की रक्षा की जिम्मेदारी है, जब उन्हीं लोगों से नागरिकों को खतरा पैदा हो जाता है – तब लोकतांत्रिक शक्तियों को अपनी पूरी शक्ति लगा कर निष्पक्षता से न्याय की माँग करनी चाहिए। संस्था ने कहा कि अगर कुछ गलत हुआ है तो पुलिस कार्रवाई करने का अधिकार रखती है, लेकिन इसमें कानून का पालन किया जाना चाहिए। साथ ही इस घटनाक्रम को ‘रिपब्लिक’ के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार का ‘विच हंट’ करार दिया, जो पिछले कई हफ़्तों से चल रहा है।

IDMA ने माँग की है कि अर्णब गोस्वामी को तुरंत रिहा किया जाए और राज्य सरकार भारत की जनता को स्पष्टीकरण दे कि नागरिकों के अधिकारों का इस तरह से क्यों हनन किया जा रहा है। डिजिटल मीडिया संस्थानों का समूह IDMA ने आशंका जताई कि छोटे मीडिया संस्थानों की आवाज़ों को दबाने के लिए कुछ भी किया जा सकता है। संस्था ने ऐसी कोशिशों का विरोध करते हुए इसके खिलाफ लड़ाई की बात भी कही।

ज्ञात हो कि ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ और ‘ऑपइंडिया’ सहित 9 मीडिया संस्थानों ने मिल कर ‘इंडियन डिजिटल मीडिया असोसिएशन (IDMA)’ नामक प्लेटफॉर्म का गठन किया है। ये भारत में डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का सबसे बड़ा समूह है। ये भारत के स्वामित्व वाला, भारत का, और भारत के लिए समर्पित मीडिया समूह होगा। इसके सभी संस्थापक सदस्यों के 10 करोड़ यूजर्स हैं और ये सभी ‘इंडिया फर्स्ट’ की थ्योरी पर काम करेंगे।

अर्णब गोस्वामी ‘पत्रकार’ नहीं, जो ऐसा कह रहे… वो फैला रहे झूठ: ऑल्ट न्यूज के प्रतीक सिन्हा ने फैलाया प्रोपेगेंडा

अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी के बाद बड़े-बड़े राजनेता तक प्रेस पर हुए हमले की निंदा करने से गुरेज नहीं कर रहे हैं। वहीं इस मौके पर प्रोपेगेंडा वेबसाइट ऑल्ट न्यूज का संस्थापक और फर्जी न्यूज फैलाने के लिए कुख्तात प्रतीक सिन्हा अब भी जहर उगलने में व्यस्त है।

अर्णब की गिरफ्तारी पर प्रतीक सिन्हा ने लिखा, “जो दावा कर रहे हैं या सलाह दे रहे हैं कि अर्णब गोस्वामी एक पत्रकार है, वो सक्रियता से केवल झूठी जानकारी फैला रहे हैं।”

इतना ही नहीं उसे इस बात से भी परेशानी है कि आखिर स्मृति ईरानी जैसे भाजपा नेता अर्णब पर हुई कार्रवाई पर क्यों बोल रहे हैं। उसने स्मृति इरानी के ट्वीट पर जवाब दिया है कि भाजपा ने हमेशा से प्रेस को दबाया। उसने पूछा है कि क्या भाजपा नेताओं ने पहले इसी तरह पत्रकारों पर हुए हमलों के लिए बोला था। उसका कहना है कि वो जानता है भाजपा नेता आने वाले समय में भी किसी और के लिए नहीं बोलेंगे?

ऐसे में सोशल मीडिया यूजर्स ने प्रतीक सिन्हा को आड़े हाथों लेते हुए उसको करारा जवाब दिया है। लोगों ने पूछा है कि यदि अर्णब गोस्वामी पत्रकार भी नहीं है तो क्या एके-47 लेकर पुलिस उसके घर में घुसेगी, वो भी कुछ बिलों और पुराने केसों को लेकर।

एक यूजर ने पलटवार करते हुए कहा कि जो लोग दावा कर रहे हैं या बता रहे हैं कि प्रतीक सिन्हा एक फैक्ट चेकर है, वो सक्रियता से झूठी खबर फैला रहे हैं।

लोगों का यह भी कहना है कि अर्णब गोस्वामी ऐसे लोगों को ऐसे ही दोहरे रवैये के कारण एक्सपोज करता है। आज गिरफ्तार कॉन्ग्रेस सरकार ने अर्णब को करवाया है लेकिन हमला तब भी बीजेपी पर किया जा रहा है।

यहाँ बता दें कि एक ओर जहाँ प्रतीक सिन्हा जैसे मीडिया गिरोह के लोग अर्णब की गिरफ्तारी पर उनके ख़िलाफ़ जहर उगल रहे हैं। वहीं कई भाजपा नेताओं और कंगना रनौत जैसे कलाकारों ने इस गिरफ्तारी की निंदा की है। इसे प्रेस पर खतरा बताया है। इस घटना को आपातकाल की याद कहा है।

अभी कुछ देर पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के संस्थापक अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी की निंदा की है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस और उसके गठबंधन साथियों ने एक बार फिर से लोकतंत्र को शर्मसार किया है।

उन्होंने कहा कि ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ और अर्णब गोस्वामी के खिलाफ सत्ता की शक्ति का दुरूपयोग करना व्यक्तिगत अधिकारों का हनन है। अमित शाह ने गोस्वामी पर कार्रवाई को लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ पर हमला करार दिया।

इसी तरह स्मृति इरानी ने लिखा, “स्वतंत्र प्रेस में जो लोग आज अर्नब का समर्थन नहीं कर रहे हैं वह फासीवाद का समर्थन कर रहे हैं। आप उन्हें पसंद या न पसंद कर सकते हैं, आप उनकी मौजूदी को तुच्छ समझ सकते हैं लेकिन यदि आप आज चुप रहते हैं तो आप दमन का समर्थन करते हैं। अगर आप अगले होंगे तो कौन बोलेगा?”