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कार्तिक मास: मौसम के बदलाव की सूचना भी पर्व से, सिर्फ सभ्यता-संस्कृति नहीं, छिपे हैं अनगिनत वैज्ञानिक तथ्य

प्राणी मात्र के संरक्षण संवर्धन के ज्ञान से अनुस्यूत वेदों का अनुसरण करने वाली भारतीय संस्कृति में पर्व की एक लंबी पंक्ति है। पर्व या उत्सव किसी संस्कृति की समृद्धता को द्योतित करते हैं। जो संस्कृति जितनी वैभवशाली होती है, उसमें उतने ही पर्व होते हैं और पर्व भी केवल मनोरंजन के लिए नहीं अपितु अन्वर्थ है अर्थात् पर्व शब्द संस्कृत की ‘पृ’ धातु से बना है जिसका अर्थ होता है पूर्ण करने वाला, तृप्त करने वाला। पहाड़ को भी पर्वत कहते हैं क्योंकि वह भी पर्व वाला है अर्थात् उसका निर्माण भी कालखण्ड में धीरे-धीरे हुआ है।

गन्ने के एक-एक भाग को भी पर्व (पौरी) कहते हैं, उसका प्रत्येक भाग मिलकर पूर्ण मिठास, तृप्ति को प्राप्त कराता है। इसी प्रकार वर्ष पर्यन्त प्राकृतिक दिवस विशेष को पर्व कहा जाता है क्योंकि ये दिवस विशेष हमें पूर्ण करने वाले तथा तृप्त करने वाले होते हैं। भारतीय संस्कृति व्यक्ति प्रधान नहीं अपितु समष्टि प्रधान है, अत: वह प्रकृति के परिवर्तन को उत्सव के रूप में मनाती है।

मानव प्रकृति का एक अंग है। वह प्रकृति ही उसे पूर्ण बनाती है, उस प्रकृति को जान करके ही व्यक्ति अपना समुन्नत विकास कर सकता है। भारतीय ऋषि-ज्ञान परंपरा ने बहुत गहन अध्ययन और प्रयोगों के उपरांत उनसे मिलने वाले परिणामों को देखते हुए जन सामान्य को अनुसरण करने के लिए कुछ पर्व के रूप में दिवस निर्दिष्ट किए। मानव और प्रकृति में जब तक सामंजस्य है, तब तक मानव स्वस्थ और दीर्घ जीवन जी सकता है- यह तथ्य भारतीय मनीषी बहुत पहले जान चुके थे। अत: भारतीय समाज प्रकृति की पूजा करता है और पूजा का अर्थ होता है “यथायोग्य व्यवहार करना”।

भारतीय समाज जानता था कि प्रकृति का शोषण नहीं बल्कि “तेन त्यक्तेन भुञ्जीथाः” त्याग पूर्वक भोग करना चाहिए। यही त्याग पूर्वक भोग ही प्रकृति की पूजा है, जिसमें किसी प्राणी की हिंसा नहीं अपितु समर्पण होता है। व्यक्ति दैनंदिन की व्यस्तता में यह भूल सकता है अत: पर्व के रूप में उस दिन विशेष को वह पुन: स्मरण करता है और अपने परिश्रम के उपरांत प्राप्त फल के लिए धन्यवाद ज्ञापन करते हुए प्रसन्न हो कर मिल बाँट कर खाता है। अतः ये पर्व मानव जीवन में न्यूनताओं को पूर्ण करने वाले होते हैं। जिनको भारतीय मानव समुदाय बड़ी प्रसन्नता उत्साह के साथ मनाता है।

हम सब होली दिवाली इत्यादि बड़े पर्व से परिचित हैं इसी श्रृंखला में शरद पूर्णिमा भी एक पर्व है और उसके बाद प्रारम्भ होने वाला कार्तिक मास का प्रात:स्नान। पृथ्वी की परिभ्रमण और परिक्रमण गति के कारण वर्ष में दो बार वह सूर्य के सबसे समीप होती है । ग्रीष्म ऋतु में उसकी समीपता रस की शोषक का कारक बनती है तो शरद ऋतु में उसकी समीपता रस की पोषक है।

आयुर्वेद में इस काल को विसर्ग काल कहा जाता है- “जनयति आप्यमंशम् प्राणिनां च बलमिति विसर्ग:’ अर्थात् इसमें वायु की रुक्षता कम हो जाती है और चन्द्रमा का बल बढ़ जाता है। सूर्य जब दक्षिणायन होता है तो उत्तरी गोलार्ध में पड़ने के कारण भारतवर्ष सूर्य से दूर हो जाता, जिससे भूभाग शीतल रहता। इस काल में चन्द्रमा भी पृथ्वी के सबसे अधिक समीप होता है और वह समस्त संसार पर अपनी सौम्य एवं स्निग्ध किरणें बिखेर कर जगत को निरंतर तृप्त करता रहता है।

शरद ऋतु में चन्द्रमा पूर्ण बली होकर जलीय स्नेहांश को बढ़ाने लगता है, जिससे द्रव्यों में मधुर रस की वृद्धि होती है और उसके उपयोग से प्राणियों के शरीर में बल की वृद्धि होने लगाती है। चन्द्रमा के साहचर्य से वायु भी अपने योगवाही गुण के कारण चन्द्रमा के शैत्य आदि गुणों की वृद्धि कराती है। शरद ऋतु के प्रारम्भ में दिन थोड़े गर्म और रातें शीतल हो जाया करती हैं। आयुर्वेद के अनुसार “वर्षाशीतोचिताङ्गानां सहसैवार्करश्मिभि:।

तप्तानामचितं पित्तं प्राय: शरदि कुप्यति” अर्थात् वर्षा ऋतु में शरीर वर्षाकालीन शीत का अभ्यस्त रहता है और ऐसे शरीरांगों पर जब सहसा शरद ऋतु के सूर्य की किरणें पड़ती हैं तो शरीर के अवयव संतप्त हो जाते हैं और वर्षा ऋतु में संचित हुआ पित्त शरद ऋतु में प्रकुपित हो सकता है। अत: प्रकृति के इस परिवर्तन को देखते हुए मनुष्य को अपने आहार-विहार, पथ्य-अपथ्य का ध्यान रखना चाहिए। इसका प्रारम्भ नवरात्रि के उपवास से ही हो जाता है।

भारतीय समाज में शरद पूर्णिमा के बाद प्रारम्भ होने वाले कार्तिक मास में ब्रह्म मुहूर्त में शीतल जल के स्नान की परम्परा है। आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रन्थ चरक संहिता में इस जल को ‘हंसोदक’ कहा गया है क्योंकि दिन के समय सूर्य की किरणों से तपा और रात के समय चन्द्रमा की किरणों के स्पर्श से शीतलकाल स्वभाव में पका हुआ होने से निर्दोष एवं अगस्त्यतारा के उदय होने के प्रभाव से निर्विष हो जाता है।

‘हंस’ शब्द से सूर्य, चन्द्रमा और हंस पक्षी इन तीनों का ग्रहण होता है अत: सूर्य और चन्द्रमा दोनों की किरणों के संपर्क से शुद्ध हुए जल को भी हंस-उदक कहा जाता है। उस जल में स्नान करना, उसका पान करना और उसमें डुबकी लगाना अमृत के सामान फल देने वाला होता है। हमारे पूर्वजों ने इस परंपरा का बड़ी श्रद्धा और निष्ठा से निर्वहण किया है और हम तक सुरक्षित पहुँचाया है।

ये पर्व प्रवाही काल का साक्षात्कार है। मनुष्य द्वारा ऋतु को बदलते देखना, उसकी रंगत पहचानना, उस रंगत का असर अपने भीतर अनुभव करना पर्व का लक्ष्य है। हमारे पर्व-त्यौहार हमारी संवेदनाओं और परंपराओं का जीवंत रूप हैं, जिन्हें मनाना या यूँ कहें कि बार-बार मनाना, हर वर्ष मनाना हमारे लिए गर्व का विषय है। पूरी दुनिया में भारत ही एक ऐसा देश है, जहाँ मौसम के बदलाव की सूचना भी पर्व/त्यौहारों से मिलती है।

इन मान्यताओं, परंपराओं और विचारों में हमारी सभ्यता और संस्कृति के अनगिनत वैज्ञानिक तथ्य छुपे हैं। जीवन के अनोखे रंग समेटे हमारे जीवन में रंग भरने वाली हमारी उत्सवधर्मिता की सोच, मन में उमंग और उत्साह के नए प्रवाह को जन्म देती है। हमारी संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहाँ पर मनाए जाने वाले सभी त्यौहार समाज में मानवीय गुणों को स्थापित करके लोगों में प्रेम और एकता को बढ़ाते हैं।

त्यौहारों और उत्सवों का संबंध किसी जाति, भाषा या क्षेत्र से न होकर समभाव से है। सभी त्यौहारों के पीछे की भावना मानवीय गरिमा को समृद्धि प्रदान करना है। प्रत्‍येक त्‍यौहार अलग अवसर से संबंधित है, कुछ वर्ष की ऋतुओं का, फसल कटाई का, वर्षा ऋतु का अथवा पूर्णिमा का स्‍वागत करते हैं। दूसरों में धार्मिक अवसर, ईश्‍वरीय सत्‍ता/परमात्‍मा व संतों के जन्‍म दिन अथवा नए वर्ष की शुरुआत के अवसर पर मनाए जाते हैं।

‘प्रदेश के हर गाँव से अयोध्या जाने की सुविधा, सबको कराएँगे दर्शन’: CM योगी ने चित्रकूट में किया अखंड रामायण पाठ का शुभारम्भ

कोरोना काल ख़त्म होते ही उत्तर प्रदेश के हर नागरिक को अयोध्या में भगवान श्रीराम का दर्शन करने में सुगमता हो, इसके लिए योगी आदित्यनाथ की सरकार ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी ने शुक्रवार (अक्टूबर 30, 2020) को चित्रकूट में कहा कि राज्य के हर एक गाँव से अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए व्यवस्था कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर कोरोना बीच में नहीं आता तो अभी तक लोगों को अयोध्या भेजने के लिए व्यवस्था हो चुकी होती।

वाल्मीकि जयंती के अवसर पर चित्रकूट के लालापुर स्थित वाल्मीकि आश्रम पहुँचे यूपी सीएम ने लोगों से ये बातें कहीं। अपने कार्यकाल में 7वीं बार चित्रकूट पहुँचे योगी आदित्यनाथ पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जो पद पर रहते हुए इतनी बार यहाँ आए। सीएम ने कहा कि भारत के रामायणकालीन अति प्राचीन परंपरा के वाहक दो ऋषियों की जयंती है, जिनमें पहले वाल्मीकि जी, जिन्होंने भगवान राम से साक्षात्कार कराया है, और दूसरे हैं राष्ट्रऋषि नानाजी। 

उन्होंने दोनों को नमन करते हुए कहा कि जो धरती हजारों वर्षों से रामायणकालीन इतिहास को समेटे है, वो उसका दर्शन करना चाहते थे। रामायण के दौरान भगवान श्रीराम यहाँ आए थे और फिर यहीं से चित्रकूट के लिए प्रस्थान किया था। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर देव मंदिर में रामकथा का अखंड पाठ हो रहा है, जिससे महर्षि वाल्मीकि ने हमें साक्षात्कार कराया था और जिसे लेकर तुलसीदास घर-घर तक गए।

महर्षि वाल्मीकि की पूजा करने के बाद सीएम योगी पर्वत के शिखर में स्थित वाल्मीकि आश्रम पहुँचे, जहाँ उन्होंने अखंड रामायण पाठ का शुभारंभ किया। इसके बाद उन्होंने कुछ देर तक संतों के साथ बैठ कर चर्चा भी की। उन्होंने कहा कि नए डिफेंस कॉरिडोर के तहत अब चित्रकूट में तोपों का निर्माण होगा और महर्षि वाल्मीकि व तुलसीदास की भूमि दुश्मनों के दाँत खट्टे करेगी। उन्होंने चित्रकूट में हर घर पीने योग्य जल पहुँचाने का वादा भी किया।

बता दें कि शनिवार को गुजरात के केवड़िया में पीएम मोदी ने भी कहा कि सोमनाथ के पुनर्निर्माण से सरदार पटेल ने भारत के सांस्कृतिक गौरव को लौटाने का जो यज्ञ शुरू किया था, उसका विस्तार देश ने अयोध्या में भी देखा है। साथ ही उन्होंने इसे वर्तमान से जोड़ते हुए कहा कि आज देश राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का साक्षी बना है और भव्य राम मंदिर को बनते भी देख रहा है। PM मोदी ने सरदार पटेल की जयंती के अवसर पर वहाँ जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

मिर्जापुर सीरीज के ‘मुन्ना’ से प्रभावित होकर तौसीफ ने चलाई थी निकिता पर गोली: मामा ने जेल से कराई हथियार की व्यवस्था

मेवात में हुए निकिता हत्याकांड के मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। निकिता की गोली मार कर हत्या करने वाला आरोपित तौसीफ मिर्जापुर वेब सीरीज़ से प्रभावित था जिसमें मुख्य अभिनेता नायिका द्वारा नकार दिए जाने के बाद उसकी हत्या कर देता है। दैनिक जागरण में प्रकाशित ख़बर के अनुसार पूछताछ के दौरान निकिता की हत्या के आरोपित तौसीफ ने इस बात का खुलासा किया कि वह मिर्जापुर के किरदार ‘मुन्ना’ से प्रभावित था। 

तौसीफ ने बेहद स्पष्ट रूप से कहा कि जिस तरह मिर्जापुर वेब सीरीज़ में ‘मुन्ना’ एक लड़की द्वारा नकार दिए जाने पर उसकी हत्या कर देता है, इस बात से प्रभावित होकर उसने निकिता तोमर की हत्या करने की योजना बनाई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) द्वारा की जा रही पूछताछ में उसने खुलासा किया कि जब निकिता ने उसका प्रस्ताव ठुकरा दिया तब उसे समझ नहीं आया कि उसे क्या करना चाहिए। इसके बाद उसने हाल ही में आई इस वेब सीरीज़ मिर्जापुर की दूसरी किस्त देखी और उससे प्रभावित होकर उसने निकिता की हत्या को अंजाम दिया। 

इसके अलावा पूछताछ में और भी कई हैरान कर देने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट में एक और बात सामने आई है कि आरोपित तौसीफ के मामा ने ही उसे घटना को अंजाम देने के लिए हथियार उपलब्ध कराया था। उसका मामा इस्लामुदीन अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि की वजह से पहले ही जेल में बंद है, उसने जेल के भीतर रहते हुए तौसीफ को हथियार उपलब्ध कराया था। साल 2018 में एक पुलिस अधिकारी का अपहरण करने के आरोप में उसे 10 वर्ष की सज़ा सुनाई गई थी। फ़िलहाल वह इस मामले की सज़ा के लिए जेल में बंद है। 

निकिता तोमर की हत्या

आरोपित तौसीफ 21 वर्षीय छात्रा निकिता तोमर पर लगातार इस्लाम कबूल करने का दबाव बना रहा था। जब निकिता ने उसके प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया, तब उसने निकिता की गोली मार कर हत्या कर दी। इस हफ्ते की शुरुआत में फ़रीदाबाद के वल्लभगढ़ स्थित अग्रवाल कॉलेज के सामने दो लोगों ने दिनदहाड़े निकिता को गोली मार दी थी। जिसमें से एक आरोपित तौसीफ लगातार उसे धमकी दे रहा था और धर्म परिवर्तन का दबाव भी बना रहा था। 

इस संबंध में निकिता ने पिछले महीने छेड़छाड़ और उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी हालाँकि, बाद में इस मामले में समझौता हो गया था। यह पूरी घटना कैमरे में रिकॉर्ड हो गई थी और कुछ ही देर बाद पूरे सोशल मीडिया पर इसे लेकर प्रतिक्रियाएँ उठने लगी थी। इसके कुछ ही समय बाद पुलिस ने दोनों आरोपितों तौसीफ और रेहान को गिरफ्तार कर लिया था।

मेवात में दलित नर्स का अपहरण: पीड़िता के पिता ने कहा- इकबाल बनाता था शादी और धर्म परिवर्तन का दबाव, FIR दर्ज

हरियाणा के मेवात से लगातार ऐसी ख़बरें सामने आ रही हैं जिनमें हिन्दू समुदाय के लोगों के साथ अत्याचार हो रहा है। इसमें भी विशेष रूप से हिन्दू समुदाय की लड़कियाँ जिनका मर्ज़ी के विरुद्ध धर्म परिवर्तन कराया जाता है, ऐसा ही एक मामला मेवात के बिछौर थाना क्षेत्र के अंतर्गत नीमका गाँव में सामने आया है। इस घटना में इकबाल नाम के युवक ने दलित समुदाय की नर्स का अपहरण किया था, जिसके बाद लड़की के पिता ने आरोपित के विरुद्ध अपहरण और दुष्कर्म समेत अन्य गम्भीर धाराओं में मामला दर्ज कराया है। इसके बाद पुलिस ने आरोपित की तलाश शुरू कर दी है। 

महेंद्रगढ़ के निवासी पीड़िता नर्स के पिता ने पुलिस को दी गई शिकायत में कहा कि वह अनुसूचित जाति से संबंध रखते हैं। उनकी बेटी पुन्हाना उपमंडल के गाँव सिंगार स्थित पीएचसी में स्टाफ नर्स के पद पर कार्यरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि ड्यूटी के दौरान नीमका गाँव के रहने वाले इकबाल नाम के युवक ने छेड़छाड़ की। इसके बाद उसने धर्म परिवर्तन करके निकाह करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। शादी नहीं करने की बात पर उसने अपहरण, दुष्कर्म और जान से मारने की धमकी तक दी थी। पीड़िता ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी लगभग 20 दिन पहले गाँव आकर अपने परिजनों को दी थी। 

इसके बाद लड़की के पिता ने बताया कि जब वह ड्यूटी के लिए सिंगार पीएचसी वापस गई तब से उसका फोन बंद है। काफी समय तक उसकी कोई जानकारी नहीं मिलने पर वह सिंगार पीएचसी आए और अपनी बेटी की तलाश शुरू की लेकिन फिर भी कुछ पता नहीं चला। इस खोजबीन के दौरान लड़की के पिता इकबाल के घर गए तो वहाँ पता चला कि वह किसी लड़की को लेकर गया है। लेकिन आस-पास वालों को इस बात की जानकारी नहीं थी कि वह किस लड़की को अपने साथ लेकर गया है। 

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लड़की के पिता ने इस घटना के 20 दिन पहले अपहरण की आशंका जताई थी। उन्होंने कहा था कि इकबाल उनकी बेटी का धर्म परिवर्तन करवाने के बाद शादी करना चाहता था इसलिए उसने उनकी बेटी का अपहरण किया।

इस मुद्दे पर बिछौर थाना प्रभारी कृष्ण कुमार का कहना है कि पीड़िता नर्स के पिता की शिकायत के आधार पर नीमका निवासी इकबाल पर अपहरण समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366, 506 और 3 (1) मुख्य रूप से शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने आरोपित की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी है।    

‘फ्रेंच प्रॉडक्ट्स रखने वाले दुकानदारों के पास नहीं जाएँगे मुस्लिम’: कॉन्ग्रेस ने कहा- पैगम्बर मुहम्मद के खिलाफ कुछ भी बर्दाश्त नहीं

कॉन्ग्रेस पार्टी ने माँग की है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव फ्रेंच प्रोडक्ट्स को राज्य में प्रतिबंधित करें। ‘तेलंगाना कॉन्ग्रेस अल्पसंख्यक सेल’ के अध्यक्ष शेख अब्दुला सोहैल ने कई मुस्लिमों के साथ शुक्रवार (अक्टूबर 30, 2020) को एर्रागड्डा के प्रभात नगर स्थित मस्जिद-ए-रहमानिया के पास जुमे की नमाज के बाद विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपने बयान में इस्लाम का अपमान किया है।

उन्होंने तेलंगाना के मुख्यमंत्री से माँग करते हुए कहा कि वो न सिर्फ फ्रांस के राष्ट्रपति की निंदा करें, बल्कि तेलंगाना में फ्रेंच प्रॉडक्ट्स पर भी सम्पूर्ण पाबन्दी लगाएँ। उन्होंने सभी मुस्लिमों से अपील करते हुए कहा कि वो फ्रेंच प्रॉडक्ट्स का बॉयकॉट करें। कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने फ्रांस के राष्ट्रपति के कई पोस्टर भी जलाए। अब्दुल्ला सोहैल ने कहा कि फ्रेंच राष्ट्रपति के बयान को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने जानबूझ कर भारतीय मुस्लिम समुदाय को भड़काने के लिए फ्रांस के समर्थन के लिए कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि अगर पैगम्बर मुहम्मद के खिलाफ कोई कुछ भी बोलता है तो मुस्लिम समुदाय इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि भारत को किसी भी ऐसे व्यक्ति का संस्था का समर्थन नहीं करना चाहिए, जिसने किसी समुदाय की भावनाओं को भड़काने का काम किया हो।

उन्होंने कहा कि पूरे तेलंगाना, खासकर हैदराबाद के सभी रिटेल व होलसेल व्यापारियों को तुरंत फ्रांस में बने प्रॉडक्ट्स को हटाना चाहिए। साथ ही उन्होंने चेताया कि जो भी दुकानदार फ्रांस में बने प्रॉडक्ट्स को बेचेगा, मुस्लिम समुदाय के लोग वहाँ जाना बंद कर देंगे। उनके साथ कॉन्ग्रेस के कई कार्यकर्ता थे और बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग भी जुटे थे, जिन्होंने फ्रांस के खिलाफ जम कर नारेबाजी की।

बता दें कि गुरुवार (अक्टूबर 29, 2020) को भोपाल में भी हजारों मुस्लिमों की भीड़ सड़क पर उतर आई और प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कॉन्ग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने किया। विरोध प्रदर्शन के दौरान मसूद ने कहा कि अगर उनका बस चलता, तो वे राष्ट्रपति मैक्रों का चेहरा कुचल देते। उन्होंने आगे कहा, “हमारे हाथ बंधे हुए हैं क्योंकि हम कानून के पालन करने वाले नागरिक हैं और हमें हमारे अल्लाह के नबी द्वारा शांति की शिक्षा दी गई है।”

‘सुसाइड बॉम्बर’ सादिया अनवर बनी थी IS लड़ाका: 15 साल की उम्र से ही जुड़ी कट्टरपंथ से, जाकिर नाईक है आदर्श

एनआईए (नेशनल इंटेलिजेंस एजेंसी) ने अपनी चार्जशीट में खुलासा किया है, जिसके मुताबिक़ महाराष्ट्र के पुणे की रहने वाली एक महिला को दो बार कट्टरपंथ के चंगुल से मुक्त कराया गया था। इसके बावजूद वह आईएस (इस्लामिक स्टेट) की तरफ वापस चली गई

एनआईए के अनुसार पुणे के येरवड़ा की निवासी सादिया अनवर शेख को सबसे पहली बार साल 2015 में कट्टरपंथ से मुक्त कराया गया था, उस दौरान वह नाबालिग थी। इसके बाद साल 2018 में भी उसे कट्टरपंथ से आज़ाद कराने का प्रयास किया गया था। 

सादिया अनवर शेख को कट्टरपंथ से मुक्त कराने के सारे प्रयास असफल होने के बाद इस साल जुलाई महीने में उसे इस्लामिक स्टेट से ताल्लुक रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद एनआईए ने सितंबर में उसके विरुद्ध चार्जशीट दायर की थी।

साल 2015 में जब पहली बार वह एनआईए की जाँच के दायरे में आई, तब वह महज़ 15 साल की थी। सबसे पहले वह सोशल मीडिया पर कट्टर विषय वस्तु और विवादित सामग्री साझा करने की वजह से सुर्ख़ियों में आई थी। एनआईए ने अपनी चार्जशीट में यह भी कहा है कि कट्टर इस्लामी ज़ाकिर नाईक उसका आदर्श है। 

एनआईए द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक़ सादिया सुसाइड बॉम्बर बनने की ख्वाहिश रखती है। साल 2015 में पुणे के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने उसे कट्टरपंथ से आज़ाद कराने के बाद छोड़ दिया था।

NIA का यह प्रयास हालाँकि व्यर्थ गया। इसके बाद सादिया ने सोशल मीडिया पर दोबारा विवादित और कट्टर विचार साझा करना शुरू कर दिए। इसके बाद साल 2018 में जम्मू कश्मीर पुलिस ने भी उसके तौर-तरीके और मानसिकता में सुधार का प्रयास किया था। तब भी इस प्रक्रिया के बाद उसे छोड़ दिया गया था। 

एनआईए ने अपनी चार्जशीट में दावा किया है कि सादिया 2015 से ही अनेक आतंकवादी संगठनों से जुड़े लोगों के संपर्क में थी। इसमें इस्लामिक स्टेट खोरासन प्रोविंस (आईएसकेपी), इस्लामिक स्टेट इन जम्मू एंड कश्मीर (आईएसजेके), अल कायदा, अंसार गज़वत उल हिन्द (एजीएच) पाकिस्तान, श्रीलंका और अफग़ानिस्तान मुख्य थे। 

इतना ही नहीं, वह फ़िलीपीन्स स्थित आईएस के ‘ऑनलाइन मोटिवेटर’ करेन ऐशा हमीदोन (karen aisha hamidon) से लगातार संपर्क में थी।  इसने भारत के तमाम युवाओं को कट्टरपंथ अपनाने में अहम भूमिका निभाई है। एनआईए के अधिकारी अप्रैल 2018 के दौरान हमीदोन से पूछताछ करने के लिए मनीला भी गए थे।        

‘जो भी कपिल मिश्रा का सिर काटेगा, उसे मेरी तरफ से ₹1 लाख का इनाम’: अजहरुद्दीन अंसारी की खुलेआम धमकी

भाजपा नेता कपिल मिश्रा को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के जरिए जान से मार डालने की धमकी दी गई है। अजहरुद्दीन नामक व्यक्ति ने उनके एक फेसबुक पोस्ट पर टिप्पणी की है कि जो भी कपिल मिश्रा का सिर काट कर ले आएगा, उसे वो 1 लाख रुपए का इनाम देगा। साथ ही उसने कपिल मिश्रा के लिए गाली का भी प्रयोग किया। दिल्ली के पूर्व मंत्री ने ट्विटर पर अजहरुद्दीन की टिप्पणी का स्क्रीनशॉट डाल कर उसकी पोल खोली।

साथ ही उन्होंने धमकी देने वाले अजहरुद्दीन के फेसबुक प्रोफाइल का लिंक और उसकी तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “ये कमेंट मेरे फेसबुक पर किया गया हैं। मेरा सिर काटने पर एक लाख का ईनाम घोषित करने वाला ये आदमी दिल्ली में ही रहता है।” अजहरुद्दीन अपने फेसबुक टाइमलाइन पर भी अक्सर भाजपा विरोधी पोस्ट डालता रहता है। अजहरुद्दीन अंसारी ने अपना निवास स्थान दिल्ली ही डाल रखा है।

कपिल मिश्रा द्वारा उसकी करतूतों को शेयर किए जाने के बाद गुस्साए लोगों ने पुलिस से उसके खिलाफ कार्रवाई की माँग की। कई लोगों ने अजहरुद्दीन की तस्वीर शेयर कर दिल्ली पुलिस को टैग किया और उसकी गिरफ़्तारी की माँग की। लोगों ने याद दिलाया कि आजकल फ्रांस में जो कुछ भी हो रहा है, उसे देखते हुए ऐसे तत्वों पर कड़ी कार्रवाई की ज़रूरत है क्योंकि ये कुछ भी कर सकते हैं। कई लोगों ने कपिल मिश्रा के प्रति समर्थन जताया।

बता दें कि कपिल मिश्रा ने सोशल मीडिया पर फ्रांस का समर्थन किया और हो रही आतंकी घटनाओं की निंदा की थी। साथ ही राजस्थान में जब पुजारी की हत्या हुई थी तो उन्होंने धन इकट्ठा कर के पीड़ित परिवार की मदद की थी। वो दिल्ली के आदर्श नगर में मार डाले गए राहुल राजपूत के भी परिजनों से मिले थे। इन कारणों से वो हमेशा से इस्लामी कट्टरवादियों की आलोचना का शिकार बनते रहे हैं। उन्होंने दिल्ली दंगे के पीड़ितों के लिए भी डोनेशन अभियान चलाया था।

कोरोना वैक्सीन का BJP का वादा आचार संहिता का उल्लंघन नहीं: राहुल गाँधी के करीबी को चुनाव आयोग से झटका

भारतीय जनता पार्टी ने बिहार चुनाव के लिए घोषणापत्र जारी करते हुए वादा किया था कि पार्टी अगर सत्ता में आती है तो राज्य के हर नागरिक को निःशुल्क कोरोना वायरस की वैक्सीन दी जाएगी। इसके बाद विपक्षी पार्टियों ने इसे केंन्द्र सरकार का ‘सिर्फ बिहार के लिए’ किया गया वादा समझ कर जबरदस्त विरोध किया था। अब चुनाव आयोग ने भी भाजपा को क्लीन चिट देते हुए कहा है कि इस वादे में कुछ भी गलत नहीं है।

पिछले सप्ताह भाजपा के खिलाफ शिकायत दायर की गई थी, जिस पर फैसला सुनाते हुए चुनाव आयोग ने ये बात कही। तथाकथित RTI एक्टिविस्ट और राहुल गाँधी के करीबी साकेत गोखले ने चुनाव आयोग के समक्ष शिकायत दायर करते हुए आरोप लगाया था कि ये केंद्र सरकार की शक्तियों का खुला उल्लंघन है और मतदाताओं को भ्रमित करने की एक चाल है। उनका कहना था कि ये गलत है, क्योंकि अब तक ‘वैक्सीन पॉलिसी’ पर फैसला नहीं आया है।

हालाँकि, चुनाव आयोग का तब भी यही स्टैंड था जब 2019 लोकसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपनी ‘न्याय योजना’ के जरिए 25 करोड़ लोगों को 72,000 रुपए प्रति महीने देने का वादा किया था। आयोग ने इसके खिलाफ आई शिकायत पर कॉन्ग्रेस के पक्ष में फैसला सुनाया था। आयोग ने गोखले को दिए गए रिप्लाई में कहा है कि वादे में ऐसा कुछ नहीं होना चाहिए, जो भारतीय संविधान के विरुद्ध जाता हो।

साथ ही आदर्श आचार संहिता के हवाले से दूसरी बात ये बताई गई है कि ऐसा कुछ नहीं होना चाहिए, जिससे मतदाताओ पर किसी ऐसी प्रक्रिया से लुभाया जाए, जो चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता को भंग करता हो। इस प्रतिक्रिया में चुनाव आयोग ने कहा है कि घोषणापत्र किसी खास चुनाव के लिए ही बनाए जाते हैं। साथ ही कहा कि इस वादे में आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का कोई भी मामला नहीं बनता है।

इसका विरोध करते हुए राजद ने कहा था कि कोरोना वायरस की वैक्सीन पर पूरे देश का अधिकार है, ये भाजपा का नहीं है। पार्टी ने कहा था कि बिहार के लोगों के पास आत्मसम्मान है और वो कुछ रुपयों के लिए अपने बच्चों के भविष्य को नहीं बेचेंगे। बिहार में भाजपा के प्रभारी भूपेंद्र यादव ने कहा कि स्वास्थ्य एक सार्वजनिक नीति है और इस पर घोषणा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि ये ऐसा ही है, जैसे कर्जमाफी की घोषणाएँ की जाती हैं।

अमेरिका में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बायडेन (Joe Biden) ने भी अपने देशवासियों से वादा किया है कि अगर उनकी जीत होती है तो वो मुफ्त में कोरोना वायरस की वैक्सीन मुहैया कराएँगे। उन्होंने शुक्रवार (अक्टूबर 23, 2020) को कहा था कि अगर वो राष्ट्रपति बनते हैं तो सभी अमेरिकी नागरिकों को मुफ्त कोरोना वैक्सीन मिलेगी। उन्होंने कहा था कि सुरक्षित और प्रभावशाली वैक्सीन के आते ही ये सबके लिए उपलब्ध होनी चाहिए, भले ही किसी ने स्वास्थ्य बीमा कराया हो या नहीं।

‘लव जिहाद’ को लेकर बेटियों-परिवारों को सचेत करने वाले 3 ग्रुप को फेसबुक ने हटाया, TOI ने की थी शिकायत

फेसबुक ने ‘लव जिहाद’ का विरोध करने वाले तीन ग्रुप्स को हटा दिया है। दुनिया के सबसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का कहना है कि ये ग्रुप्स उसके नियमों का उल्लंघन कर रहे थे, इसीलिए उन्हें हटाया गया है। ‘TOI’ का कहना है कि इन ग्रुप्स द्वारा आपत्तिजनक सामग्रियाँ फैलाई जा रही थीं। साथ ही मीडिया संस्थान ने ये भी दावा किया कि इन सोशल ग्रुप्स द्वारा कई सालों से ‘एडल्ट न्यूडिटी’ और ‘हेट स्पीच’ फैलाए जा रहे थे।

‘TOI’ ने अपने तथाकथित अध्ययन के हवाले से दावा किया था कि इन पेजों पर इंटरफेथ कपल्स (जिसमें पति-पत्नी अलग-अलग मजहब से होते हैं) की पहचान सार्वजनिक कर के उनकी सुरक्षा को खतरा पैदा किया जा रहा था और उनकी प्रिवेसी को नुकसान पहुँचाया जा रहा था। इसने इन पेजों को ‘मोरल पुलिसिंग’ और ‘जबरन दबाव बनाने’ का दोषी करार दिया था। फेसबुक ने कम्युनिटी स्टैण्डर्ड के उल्लंघन के आरोप में ऐसे 3 ग्रुप्स को बंद कर दिया।

ये सभी ऐसे ग्रुप्स थे, जिनमें ‘लव जिहाद’ की आलोचना की जा रही थी। TOI का दावा है कि इनमें लोग इन ग्रुप्स में अल्पसंख्यक समुदाय के आर्थिक बहिष्कार की अपील कर रहे थे और उनके खिलाफ भड़काया जा रहा था। इनमें से एक ग्रुप को अगस्त 27, 2014 को बनाया गया था और उसमें ‘दिशानिर्देश’ जारी किए जा रहे थे कि अभिभावक अपनी बेटियों के कॉलेज आने-जाने के समय को नोट करें। ऐसे 4 ओपन ग्रुप्स के अध्ययन के हवाले से ‘TOI’ ने दावा किया है,

“इन ग्रुप्स में लव जिहाद को अल्पसंख्यक पुरुषों और उनके मौलवियों की साजिश बताया जा रहा था और कहा जा रहा था कि ये लोग हिन्दू महिलाओं की आँखों में धूल झोंक कर धर्मान्तरण कराते हैं। जब हमने ऐसे 4 ग्रुप्स के अध्ययन के बाद सोशल मीडिया जायंट फेसबुक को इसके विवरण भेजे तो उसने इन ग्रुप्स के कंटेंट्स को हटा दिया। हालाँकि, ऐसे कई सारे प्राइवेट ग्रुप्स फेसबुक पर मौजूद हैं। हमने अपने एक सप्ताह के रिसर्च में पाया कि इन ग्रुप्स में अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा था।”

TOI ने दावा किया है कि इन ग्रुप्स के ‘दिशानिर्देशों’ में लड़कियों के अभिभावकों से कहा जा रहा था कि वो अपनी बेटियों पर खासकर तब ज्यादा नजर रखें, जब आसपास के इलाके में मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हों। साथ ही इन अभिभावकों को अपने घर की लड़कियों के मोबाइल फोन्स पर भी नज़र रखने को कहा गया था, ताकि पता चले कि वो किन लोगों से बातचीत करती हैं। अब फेसबुक ने ऐसे 3 ग्रुप्स पर कार्रवाई की है।

बता दें कि हाल ही में कई ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं, जिन्हें ‘लव जिहाद’ का नाम दिया गया है। फरीदाबाद में निकिता तोमर की हत्या की वारदात से अभी देश उबरा नहीं है। निकिता तोमर के पिता का दावा है कि आरोपित तौसीफ ही नहीं बल्कि उसकी माँ भी उनकी बेटी निकिता पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाती रहती थी। छात्रा के पिता ने आरोपित तौसीफ की माँ पर आरोप लगाया है कि वह बार-बार फोन कर के उनकी बेटी पर दबाव डालती थी कि उनका मजहब कबूल कर लो।

‘उसके (अल्लाह) खिलाफ गुस्ताखी की तो सिर तन से जुदा कर देंगे’ – AMU के छात्र नेता फरहान ने चिल्ला-चिल्ला कर कहा

फ्रांस के शिक्षक की गला काट कर हत्या कर दिए जाने के बाद फ्रांस की सरकार ने कट्टरपंथी मुस्लिमों के विरुद्ध मोर्चा खोल रखा है। नतीजतन दुनिया भर के तमाम इस्लामी मुल्कों का कट्टर वर्ग फ्रांस के विरोध में नज़र आ रहा है। इसी तरह भारत में भी इस्लाम का एक कट्टरपंथी हिस्सा फ्रांस का विरोध कर रहा है जबकि भारत सरकार इस मुद्दे पर स्पष्ट रूप से फ्रांस का समर्थन करती है। हैरान कर देने वाले मामले में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्रसंघ सदस्य को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि उसके (अल्लाह) खिलाफ़ कोई गुस्ताख़ी की, तो हम उसका सिर कलम कर देंगे। 

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र नेता फरहान ज़ुबैरी को वीडियो में और भी कई हैरान करने वाली बातें कहते हुए सुना जा सकता है। वीडियो की शुरुआत में वह कहता है:

“अगर उनके (अल्लाह) के खिलाफ़ कोई गुस्ताख़ी भरी हरकत की, तो हम उसका सिर कलम कर देंगे/उसका सिर तन से जुदा कर देंगे। क्योंकि हमारी बुनियाद, इस्लाम की बुनियाद कलमे से है और कलमा है ला इलाहा इल्लल्लाह मोहम्मदुर रसूलुल्लाह। तो जिसकी खातिर हम ज़िंदगी में हैं, जिसकी उम्मत में हैं, अगर उसके लिए कोई गलत चीज़ करेगा तो तो हम बिलकुल बर्दाश्त नहीं करेंगे।” 

इस घटनाक्रम के साथ और भी हैरानी की बात यह है कि मौके पर तमाम लोग मौजूद थे और वह छात्र की बात पर चिल्ला कर सहमति भी दर्ज कराते हैं। इसके बाद फरहान जुबैर ने कहा कि एक देश के राष्ट्रपति कहते हैं कि इमारत पर जो कार्टून दिखाया गया है, वह फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन (अभिव्यक्ति की आज़ादी) है।     

इसके अलावा टाइम्स नाउ में हुई परिचर्चा के दौरान भी फरहान ज़ुबैरी की जहरीली बयानबाज़ी जारी रहती है। सिर तन से जुदा करने के बयान पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उसने कहा, “बिलकुल! गुस्ताख़ी करने की हिम्मत कैसे होगी, क्यों करेगा कोई गुस्ताख़ी?” पूरी परिचर्चा के दौरान फरहान ज़ुबैरी ने चीखना और चिल्लाना जारी रखा। अपने बयान के लिए माफ़ी माँगना तो दूर उसने वीडियो में कई बार यहाँ तक कह दिया कि वह अपने बयान से पीछे नहीं हटेगा।   

वीडियो और प्रकरण के चर्चा में आने के बाद उत्तर प्रदेश की अलीगढ़ पुलिस ने तत्काल प्रभाव से इसका संज्ञान लिया। अलीगढ़ पुलिस ने इस मामले पर ट्वीट करते हुए कहा कि प्रकरण में जाँच हेतु एएमयू प्रशासन से पत्राचार किया जा रहा है।

ठीक इसी तरह महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई स्थित भिंडी बाज़ार में फ्रांस के राष्ट्रपति का पोस्टर सड़क पर चिपका कर विरोध किया गया था। इस विरोध प्रदर्शन के वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि रास्ते पर मैक्रों के पोस्टर चिपके हुए हैं और उसके ऊपर से वाहन गुज़र रहे हैं। इस दौरान सबसे ज़्यादा हैरानी की बात तब हुई, जब एक मौलाना ने इस प्रकरण पर बयान दिया था। 

रज़ा एकेडमी के मौलाना अब्बास रिज़वी ने कहा, “फ्रांस के राष्ट्रपति ने अल्लाह के रसूल की शान में जो गुस्ताखी की है, उसको ऐसी ही सज़ा मिलनी चाहिए।” इसके अलावा मौलाना अब्बास रिज़वी ने मुंबई की सड़कों पर फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों का पोस्टर लगाए जाने और उसके ऊपर चप्पल-जूते पहन कर चलते लोगों के साथ कुत्ते-बिल्लियों के चलने का समर्थन भी किया था

इसी तरह मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इस्लामी कट्टरपंथियों ने ‘अद्भुत मिसाल’ पेश की थी। भोपाल के इकबाल मैदान में कॉन्ग्रेस विधायक आरिफ़ मसूद की अगुवाई में हज़ारों की तादाद में लोग इकट्ठा हुए और उन्होंने अपना विरोध दर्ज कराया था। इतना ही नहीं, मौजूद लोगों ने फ्रांस के राष्ट्रपति से माफ़ी माँगने तक की बात कह दी थी।