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‘कॉन्ग्रेस और उसके साथियों ने लोकतंत्र को शर्मसार किया, चौथे स्तम्भ पर हमला’: अर्णब पर कार्रवाई पर अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के संस्थापक अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी की निंदा की है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस और उसके गठबंधन साथियों ने एक बार फिर से लोकतंत्र को शर्मसार किया है।

उन्होंने कहा कि ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ और अर्णब गोस्वामी के खिलाफ सत्ता की शक्ति का दुरूपयोग करना व्यक्तिगत अधिकारों का हनन है। अमित शाह ने गोस्वामी पर कार्रवाई को लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ पर हमला करार दिया।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अर्णब गोस्वामी के खिलाफ मुंबई पुलिस की कार्रवाई को ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया। उन्होंने कहा कि ये स्वतंत्र पत्रकारिता पर हमला है और इसका विरोध होना ही चाहिए।

कंगना रनौत ने महाराष्ट्र की सरकार को ‘सोनिया सेना’ करार देते हुए कहा कि उनसे पहले तो कितने ही बलिदानियों के गले काटे गए और उन्हें लटका दिया गया, सिर्फ फ्री स्पीच के लिए। उन्होंने कहा, “एक आवाज़ बंद करेंगे तो कई आवाज़ें उठ जाएँगी। कितनी आवाजों को बंद करेंगे आप?” कंगना ने पूछा कि आपको कोई पेंगुइन, पप्पू सेना या सोनिया सेना कहता है तो गुस्सा क्यों आता है? उन्होंने कहा कि आप ये सब हो, तभी कोई कहता है।

कपिल मिश्रा ने आरोप लगाया कि अर्णब गोस्वामी के साथ-साथ मीडिया और मीडिया की आज़ादी को कुचलने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि इस ‘लोकतंत्र की हत्या’ के खिलाफ किसी को भी चुप नहीं रहना चाहिए। उन्होंने इसे मीडिया का गला दबाने की कोशिश बताते हुए कहा कि हथियारबंद पुलिस एक पत्रकार के घर में घुस कर उनके घर को गाड़ियों से घेर कर दिखाना क्या चाहती है?

7,686,369,774,870 × 2,465,099,745,779 का उत्तर क्या होगा? वो महिला, जिन्होंने मात्र 28 सेकेंड्स में बता दिया था…

आपने हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘शकुंतला देवी’ का नाम सुना होगा, जो जुलाई 31, 2020 को ‘अमेज़न प्राइम वीडियो’ पर स्ट्रीम हुई थी। इसमें मशहूर अभिनेत्री विद्या बालन ने ‘ह्यूमन कम्प्यूटर’ कही जाने वाली शकुंतला देवी का किरदार निभाया था। शकुंतला देवी (1929-2013) के पास औपचारिक शिक्षा में बड़ी-बड़ी डिग्रियाँ नहीं थीं, परीक्षाओं में वो असाधारण परिणाम नहीं लाती थीं, लेकिन गणित की गणनाओं में उनका कोई सानी न था।

वो बड़े से बड़े कैलकुलेशंस भी इतने कम समय में कर दिया करती थीं कि कैलकुलेटर को भी शर्म आ जाए। यहाँ हम आपको बताएँगे कि आखिर क्यों वो लोकप्रिय हुईं और वो कौन सी उपलब्धियाँ थीं, जिन्होंने उन्हें महान बनाया। सबसे पहले तो आते हैं क्यूब रूट्स पर। 1930 के दशक में जब वो बच्ची थीं, तभी वो बड़े-बड़े क्यूब रूट्स तेज़ी से निकाल दिया करती थीं। अब बात करते हैं इसके 58 साल बाद 1988 की एक घटना की।

स्थान था बर्केले का ‘यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया’, जिसके बारे में कोई परिचय देने की ज़रूरत ही नहीं है। मनोवैज्ञानिक आर्थर जेन्सेन ने शकुंतला देवी की क्षमताओं का परीक्षण किया। पूरी दुनिया की नजरें इस पर थीं। वहाँ पर उन्होंने 95,443,993 (उत्तर- 457), 204,336,469 (उत्तर- 589) और 2,373,927,704 (उत्तर- 1334) के क्यूब रूट्स क्रमशः मात्र 2, 5 और 10 सेकेंड्स में कैलकुलेट कर लिया।

ये सब उन्होंने मन ही मन किया, बिना कागज-कलम का इस्तेमाल किए। स्क्वायर रूट्स और क्यूब रूट्स तो दूर की बात है, उन्होंने मात्र 40 सेकेंड्स में 455,762,531,836,562,695,930,666,032,734,375 जैसी विशाल संख्या का 7वाँ रूट निकाल लिया था। इसका उत्तर 46,295 होगा। इसका अर्थ ये हुआ कि अगर आप इस संख्या को 7 बार इसी संख्या से ही गुणा करेंगे, तो इसका उत्तर वो 27 डिजिट्स वाली विशाल संख्या होगी।

ये भी उसी टेस्ट में हुआ और इसे औपचारिक रूप से रिकॉर्ड में भी रखा गया। अब आ जाते हैं बड़े-बड़े गुणा पर। ये एक ऐसी कला थी, जिसके कारण उन्हें 1982 में ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स’ में स्थान मिला। जून 18, 1980 में शकुंतला देवी को 13 अंकों की दो संख्याएँ दी गईं और उन्हें गुणा कर के परिणाम बताने को कहा गया। उन्होंने मात्र 28 सेकेंड्स में उसका उत्तर निकाल लिया। ये गुणा और इसका जवाब कुछ इस प्रकार था:

7,686,369,774,870 × 2,465,099,745,779 = 18,947,668,177,995,426,462,773,730

शकुंतला देवी की एक खासियत ये थी कि वो किसी भी तारीख को देख कर ही बता देती थीं कि उस डेट को कौन सा दिन रहा होगा। अगर आपसे हम पूछें कि जुलाई 31, 1920 को कौन सा दिन था, तो आप गूगल कैलेंडर पर ढूँढने लगेंगे। लेकिन, शकुंतला देवी ने तुरंत बता दिया था कि उस दिन शनिवार था। अगर आप उन्हें इसे महीना-तारीख-वर्ष के हिसाब से बताते, (जैसे जुलाई 13, 1920) तो वो मात्र एक सेकेण्ड में इसका उत्तर दे देती थीं।

वहीं अगर उन्हें वर्ष-महीना-तारीख के फॉर्मेट में बताया जाता था तो वो इतने कम समय में उत्तर बता देती थीं कि उत्तर बताने के समय की गणना के लिए आपको स्टॉपवॉच चालू करना पड़ता, ऐसा विशेषज्ञों ने पाया था। ये सब उन्होंने खुद ही सीखा था। उन्हें किसी स्कूल-कॉलेज में ये सब नहीं सिखाया गया। उनके पिता सर्कस में काम करते थे और इसीलिए उन्हें बचपन से ही माता-पिता के साथ घूमना पड़ता था।

वो कार्ड ट्रिक्स से खेलते-खेलते गणनाएँ सीख गईं और कब उनके दिमाग ने कम्प्यूटर की तरह काम करना शुरू कर दिया, पता ही नहीं चला। जब उन्होंने बड़े-बड़े क्यूब रूट्स के कैलक्युलेशन्स सीखे तो वो इस पर परफॉरमेंस भी देने लगीं। अपनी युवावस्था के पहले ही वो दुनिया भर में कई कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में घूम-घूम कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी थीं। एक तरह से उन्होंने खुद की प्रतिभा को खुद ही निखारा।

उन्होंने कई किताबें लिखीं, जिनमें से गणित के पजल्स और कई ट्रिक्स के बारे में सिखाया। उन्होंने बच्चों को गणित की शिक्षा देने के लिए भी किताबें लिखीं। इन किताबों से पता चलता है कि उन्हें गणित के बारे में वो सब पता था, जो छात्रों को औपचारिक रूप से पढ़ाया जाता है। उन्होंने ये सारे गुर खुद ही बड़ी-बड़ी किताबों को पढ़ कर सीखा था। उनकी मानसिक क्षमताओं पर रिसर्च हुए थे, जर्नल्स भी प्रकाशित हुए थे।

लेकिन, बड़े-बड़े मनोवैज्ञानिक भी ये नहीं खोज पाए कि आखिर उनकी ऐसी क्षमताओं के पीछे क्या कारण थे और वो कैसे इतने बड़े-बड़े कैलकुलेशंस कर लिया करती थीं। पाया गया कि ये सब उन्होंने बचपन में ही सीख लिया और फिर बाद में सब कुछ ऑटोमैटिक हो गया। ऐसी थी उनकी प्रतिभा! कहा जाता था कि उन्हें बड़े-बड़े अंकों की संख्याएँ अपने सामने उसी तरह से दिखती थीं, जैसे हमें एक-दो अंकों की संख्याएँ दिखती हैं।

उनके बारे में एक और बात जानने लायक ये है कि वो समलैंगिक विषय (Homosexuality) पर एक पुस्तक भी लिख चुकी हैं। समलैंगिकों के लिए उनके मन में एक सॉफ्ट कॉर्नर था। उनका कहना था कि हर व्यक्ति की सेक्सुअल टेन्डेन्सीज अलग-अलग होती हैं और अलग-अलग समय पर अलग ओरिएंटेशन हो सकते हैं। इन सबके अलावा वो एस्ट्रोलॉजी और कुकिंग पर भी पुस्तक लिख चुकी हैं। उन्होंने ‘ह्यूमन कम्प्यूटर’ टाइटल को अपने लिए पसंद नहीं किया, क्योंकि वो मानती थीं कि मनुष्य का दिमाग कम्प्यूटर से कहीं ज्यादा तेज़ है।

‘कितनों का गला दबाएगी सोनिया सेना, सच्चाई दिखाना गलती है?: अर्णब गोस्वामी के साथ खड़े हुए कंगना और कपिल मिश्रा

‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के संस्थापक अर्णब गोस्वामी को मुंबई पुलिस गिरफ्तार कर के ले गई, जिसके बाद अभिनेत्री कंगना रनौत और भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने उद्धव ठाकरे सरकार की इस कार्रवाई की निंदा की है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से पूछा कि आज अर्णब गोस्वामी के घर में घुस कर पुलिस ने मारा-पीटा है और उनके बाल नोचे हैं, उस तरह से आप कितने घर तोड़ेंगे, कितने गले दबाएँगे और कितनों के बाल नोचेंगे? उन्होंने पूछा कि महाराष्ट्र सरकार कितनों की आवाज़ें दबाएँगी?

कंगना रनौत ने महाराष्ट्र की सरकार को ‘सोनिया सेना’ करार देते हुए कहा कि उनसे पहले तो कितने ही बलिदानियों के गले काटे गए और उन्हें लटका दिया गया, सिर्फ फ्री स्पीच के लिए। उन्होंने कहा, “एक आवाज़ बंद करेंगे तो कई आवाज़ें उठ जाएँगी। कितनी आवाजों को बंद करेंगे आप?” कंगना ने पूछा कि आपको कोई पेंगुइन, पप्पू सेना या सोनिया सेना कहता है तो गुस्सा क्यों आता है? उन्होंने कहा कि आप ये सब हो, तभी कोई कहता है।

इसके अलावा भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने भी इस घटना की निंदा की है। उन्होंने कहा कि अर्णब गोस्वामी के पास जो पुलिस गई है, ऐसा ‘पुलिसिया अत्याचार’ मीडिया के खिलाफ पहली बार दिख रहा है। उन्होंने पूछा कि अर्णब गोस्वामी की गलती क्या है, सवाल उठाना गलती है या फिर सच्चाई दिखाना गलती है? उन्होंने पूछा कि अपने दम पर इतना बड़ा चैनल खड़ा कर देना गलती है या फिर बाकी चैनल पीछे छूट गए, इसकी सज़ा दी जा रही है।

कपिल मिश्रा ने आरोप लगाया कि अर्णब गोस्वामी के साथ-साथ मीडिया और मीडिया की आज़ादी को कुचलने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि इस ‘लोकतंत्र की हत्या’ के खिलाफ किसी को भी चुप नहीं रहना चाहिए। उन्होंने इसे मीडिया का गला दबाने की कोशिश बताते हुए कहा कि हथियारबंद पुलिस एक पत्रकार के घर में घुस कर उनके घर को गाड़ियों से घेर कर दिखाना क्या चाहती है?

कपिल मिश्रा ने कहा कि लोकतंत्र इस प्रकार से नहीं चल सकता है, ये महाराष्ट्र सरकार को समझ आ जाना चाहिए। उधर अब ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ भी नींद से जाग गई है और उसने महाराष्ट्र सरकार की इस कार्रवाई की निंदा करते हुए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से अपील की है कि अर्णब गोस्वामी के साथ न्यायोचित व्यवहार किया जाए और सरकार के आलोचकों के खिलाफ सत्ता की शक्ति का इस्तेमाल न किया जाए। कंगना और कपिल मिश्रा, दोनों ने अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी के लिए उद्धव को निशाना बनाया।

अर्णब ने अपने रिपोर्टर के सामने पुलिस वैन से अपनी बात रखते हुए बताया कि न केवल पुलिस ने उनके साथ मारपीट व दुर्व्यवहार किया बल्कि उनके बेटे को भी पीटा। उन्होंने बताया कि मुंबई पुलिस ने उन्हें उनके परिवार तक से नहीं मिलने दिया। उन्हें उनके सास-ससुर से भी बात नहीं करने दी गई। चैनल का कहना है कि अर्णब के घर पहुँची पुलिस टीम के पास कोई समन, दस्तावेज या कोर्ट के पेपर तक नहीं थे।

बिहार में 10 नवंबर को क्या होगा? उलझे समीकरणों के बीच जमीन के संकेत स्पष्ट हैं

बिहार विधानसभा की 243 सीटों के लिए तीन चरणों में हो रहा चुनाव अब अंतिम दौर में है। आखिरी चरण का मतदान 7 नवंबर को होना है। 10 नवंबर को नतीजे आएँगे। ऐसे में एक सवाल जो बार-बार लोग पूछ रहे हैं और जिसकी हम भी लगातार तलाश कर रहे हैं, वह है- किसकी सरकार बनने वाली है?

कितनी सीटें फँसी हैं?

असल में इस चुनाव में किसी की लहर जमीन पर नहीं दिखती। लिहाजा, हर सीट के अपने-अपने समीकरण हैं। 40 की करीब सीटें ऐसी हैं, जहाँ एनडीए या राजद के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत लोजपा, जाप, रालोसपा और निर्दलीय तय करेंगे या यूँ कहें कि इनमें से कुछ सीटें अन्य के खाते में जानी तय है। मसलन, जमुई की चकाई सीट पर निर्दलीय सुमित सिंह। सीतामढ़ी की सुरसंड सीट से लोजपा के अनिल चौधरी। बेनीपुर में लोजपा के ही कमल सेठ। हसनपुर में पप्पू यादव की जाप के अर्जुन यादव। शिवहर में जाप के मोहम्मद वामिक और बसपा के संजीव कुमार गुप्ता। हरलाखी में निर्दलीय मंदाकिनी चौधरी वगैरह, वगैरह…

चुनाव के तीन पिच

क्रिकेट की भाषा में कहें तो यह चुनाव तीन पिच पर लड़ी जा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण किसी के पक्ष में लहर नहीं होना है। पहली पिच तेजस्वी यादव की है। वे चुनाव को रोजगार के मुद्दे पर केंद्रित करने की लगातार कोशिश करते रहे हैं पर अभी तक इसमें पूरी तरह सफल नहीं हुए हैं। नीतीश कुमार इसे लालू-राबड़ी शासनकाल के कथित जंगलराज की पिच पर लड़ना चाहते हैं, लेकिन अब उनके खिलाफ नाराजगी भी दिखती है। बीजेपी इसे मोदी सरकार के कामकाज के इर्द-गिर्द केंद्रित रखने की कोशिश में है। लेकिन यह फॉर्मूला भी हर सीट पर कारगर नहीं है।

यानी, जमीन पर उम्मीदवार का निजी प्रभाव और छवि इस बार सबसे असरकारी है। जो लगातार 10-15 साल से विधायक हैं, उनमें से ज्यादातर मुश्किल मुकाबले में फँसे हैं। चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें कई जगह वोटरों का विरोध झेलना पड़ा है। जिन जगहों पर प्रमुख दलों ने फ्रेश चेहरे या पिछली बार हार गए उम्मीदवार को मौका दिया है, वे थोड़ी बेहतर स्थिति में हैं। इसका कारण यह है कि नीतीश सरकार के इस 5 साल को हर कोई निराशाजनक मान रहा है।

मोदी, नीतीश और तेजस्वी का कितना प्रभाव है?

यादव और मुस्लिम मतदाता ज्यादातर सीटों पर राजद के पीछे गोलबंद हैं। वे मानकर बैठे हैं कि यह फिर से सत्ता में प्रभाव में आने का अवसर है और तेजस्वी यादव का मुख्यमंत्री बनना तय है। तेजस्वी यादव अपनी सभाओं के लिए ऐसी जगह भी चुन रहे हैं, जिसके आसपास इन मतदाताओं का बाहुल्य हो। इसका असर उनकी सभाओं में भीड़ के तौर पर दिख भी रहा है। लेकिन, इस वर्ग के लोगों को भी उनके रोजगार के वादे पर भरोसा नहीं है।

नीतीश कुमार को लेकर नाराजगी दिखती है। लेकिन, उन्होंने जो अपना वोट बैंक इन सालों में बनाया है, वह ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में है। ये वोटर साइलेंट हैं। महिलाओं में अब भी उनका असर बना हुआ है। महादलित और अतिपिछड़ों के बीच उनकी पकड़ थोड़ी कमजोर हुई है।

मोदी का प्रभाव बना हुआ है। बिहार सरकार में बीजेपी के कोटे से मंत्री रहे कई उम्मीदवारों ने भी हमें ऑफ द रिकॉर्ड बताया कि उनकी उम्मीदें मोदी की सभा पर टिकी है। कोरोना के कारण पैदा हुए संकट के दौरान ग्रामीण इलाकों में लोगों को जो सरकारी सहायता मिली है, उसका भी असर है। मोदी का चेहरा कई सीटों पर वोटरों को हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर भी लामबंद कर रहा है।

बची हुई 200 सीटों पर क्या हो सकता है?

अन्य के प्रभाव वाली 40 सीटों को छोड़ दें तो इस चुनावी लड़ाई में बीजेपी सबसे आगे दिखती है। राजद और जदयू उसके पीछे। एनडीए के लिए अच्छी बात यह है कि नीतीश से नाराजगी के बावजूद जदयू का प्रदर्शन कॉन्ग्रेस के स्तर तक गिरने की कोई संभावना नहीं दिखती। राजद और कॉन्ग्रेस 2015 के नंबर के आसपास पहुँचती नहीं दिख रही।

तेजस्वी की इतनी चर्चा होने की एक बड़ी वजह यह है कि कुछ महीने पहले तक यह चुनाव एकतरफा लग रहा था, जिसे उन्होंने लड़ाई में बदल दी है और जदयू से राजद स्पष्ट तौर पर आगे दिखती है। राजद के पक्ष में लहर नहीं होने की बात इससे भी समझी जा सकती है कि हसनपुर से लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव की जीत इस सीट पर मतदान के बाद भी पक्की नहीं बताई जा रही। इसी तरह सुरसंड सीट पर लालू परिवार के खासमखास अबू दुजाना को इलाके में विरोध तक झेलना पड़ा है और वे भी मुश्किल में हैं। मुस्लिम बहुल केवटी सीट पर बीजेपी प्रत्याशी मुरारी मोहन झा की छवि के आगे माई समीरकण टूटता दिख रहा है और मतदान तक यही ट्रेंड बना रहा तो राजद के बड़े नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी के लिए जीत मुश्किल हो जाएगी।

ई बिहार छै, थाह नै लागत

कल 3 नवंबर को बिहार की जिन सीटों पर मतदान हुआ, उसमें एक मधुबनी भी थी। शहर में सन्नाटा पसरा था और इक्का-दुक्का दुकानें ही खुली थीं। राजद के समीर महासेठ को यहाँ मतदान से पहले बढ़त दिख रही थी। मतदान के बाद वीआईपी के सुमन महासेठ के जीतने की भी चर्चा होने लगी है।

3 नवंबर को ही मधुबनी जिला मुख्यालय से कुछ किलोमीटर दूर कलुआही में चहल-पहल थी। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय की सभा हुई। लेकिन, इसी दिन इसी जिले के हरलाखी में नीतीश कुमार को विरोध झेलना पड़ा।

कलुआही से सटे ढंगा गाँव के काली मंदिर के पास सत्यनारायण मिश्र मिले। वे कहते हैं, “उम्हर जरैल, दामोदरपुर सब आ इम्हर हरिपुर ढंगा सब युगेश्वर झा का बनायल इलाका छै।” उनके कहने का मतलब था कि बेनीपट्टी विधानसभा क्षेत्र के जरैल, दामोदरपुर, ढंगा जैसे इलाके युगेश्वर झा का गढ़ रहा है। दिवंगत युगेश्वर झा इस सीट से कॉन्ग्रेस की टिकट पर लड़ रहीं निवर्तमान विधायक भावना झा के पिता थे। पिछली बार उन्होंने बीजेपी के विनोद नारायण झा को करीबी मुकाबले में इसी इलाके में मिले इकतरफा वोट की बदौलत हराया था।

सत्यनारायण मिश्र ने अपने आँगन में ‘हर घर नल जल’ योजना के तहत लगा नल दिखाया, साथ ही बताया कि इसमें पानी अभी नहीं आता। मैंने उन्हें बगल के गाँव में पानी आने का हवाला दिया तो उन्होंने बताया कि कई बार सुना है कि अब पानी शुरू हो जाएगा लेकिन आज तक यहाँ पानी नहीं आया। मिश्र का दावा है कि वे मोदी समर्थक हैं और बीजेपी को ही वोट देंगे। पर वे आश्वस्त नहीं हैं कि बीजेपी यह सीट निकाल ही लेगी।

हालाँकि उनका मानना है कि अब उनके गॉंव में एकतरफा कॉन्ग्रेस वाला माहौल नहीं रहा। उनके गाँव के ज्यादातर ब्राह्मणों का झुकाव भावना झा की तरफ है। लेकिन, अन्य जतियाँ बीजेपी उम्मीदवार विनोद नारायण झा का खुलकर समर्थन कर रही हैं। इसकी वजह कोरोना के कारण पैदा हुए संकट के दौरान मिली सरकारी सहायताएँ हैं।

मंदिर के पास ही मिले महेंद्र झा कहते हैं, “ई बिहार छै बाबू, थाह नै लागत। लोग किछ कहत वोट ककरो द देतै।” यानी, ये बि​हार है। लोग बात किसी की करते हैं और वोट किसी को देते हैं।

उनकी बातें आसानी से खारिज नहीं की जा सकतीं। मोतिहारी के गाँधी मैदान में कैमरे के सामने जो युवा रोजगार और बदलाव की बातें कर रहे थे, उनमें से कई कैमरा बंद होते ही हिंदुत्व के मुद्दे पर बीजेपी का समर्थन करने की बात करने लगे थे। ग्रामीणों इलाकों में लोग कैमरे के सामने आने से बचते हैं। बिना कैमरे के उनसे बात करिए तो वे आपको जंगलराज की याद दिलाने लगते हैं। इससे समझा जा सकता है कि बदलाव और रोजगार का विपक्ष का वादा उन्हें नहीं लुभा रहा। इसी तरह खासकर, यादव विकास के दावों को खारिज कर लालू प्रसाद यादव को फँसाने की बात करने लगते हैं।

…तो क्या होगा?

असल में मेनस्ट्रीम मीडिया और सोशल मीडिया में जो बातें आ रही हैं, वह मुखर वोटरों का है। ये शहरों में रहते हैं। अगड़ी जातियों अथवा यादव होते हैं। इनकी गोलबंदी साफ दिखती है। पर ग्रामीण इलाकों में जहाँ वोटिंग ज्यादा होती है, वहाँ के वोटर साइलेंट हैं। बीजेपी के एलजेपी के साथ सरकार बना लेने की कोई संभावना नहीं दिखती। एनडीए ही बहुमत के करीब पहुँचती फिलहाल दिख रही है। अन्य के निर्णायक वाली सीटों के अंतिम नतीजे ही तय करेंगे कि एनडीए को मजबूत बहुमत मिलेगा या या फिर बहुमत से दूर नजर आ रहा विपक्ष और मजबूत होगा।

‘इन्होंने मेरे बेटे को मारा’ – मुंबई पुलिस की वैन से अर्णब ने सुनाई आपबीती, प्रकाश जावड़ेकर ने कहा – ‘आपातकाल की याद’

मुंबई पुलिस ने आज (नवंबर 4, 2020) अर्णब गोस्वामी के साथ बदसलूकी करने की हर हद्द को पार करते हुए उनके घर में घुस कर उनसे मारपीट की और उन्हें गिरफ्तार करके अपने साथ ले गए।

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस घटना की सूचना पाते ही प्रेस पर हुए हमले की निंदा की और इस पूरे घटनाक्रम को आपातकाल जैसा बताया।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “महाराष्ट्र में प्रेस पर हुए हमले की हम निंदा करते हैं। यह कोई तरीका नहीं है प्रेस से बर्ताव का। ये हमको आपातकाल के दिनों की याद दिलाता है, जब प्रेस के साथ ऐसा बर्ताव होता था।”

दूसरी ओर रिपब्लिक टीवी की कवरेज में अर्णब अपने रिपोर्टर के सामने पुलिस वैन से अपनी बात रखते नजर आ रहे हैं। अर्णब ने बताया कि न केवल पुलिस ने उनके साथ मारपीट व दुर्व्यवहार किया बल्कि उनके बेटे को भी पीटा।

वीडियो में अर्णब को कहते सुना जा सकता है कि मुंबई पुलिस ने उन्हें उनके परिवार तक से नहीं मिलने दिया। उन्हें उनके सास-ससुर से भी बात नहीं करने दी गई।

वह कहते हैं, “इन्होंने मुझे मारा। मुझे प्रताड़ित किया। इन्होंने मुझे मेरे परिवार से मिलने नहीं दिया। मेरे सास-ससुर से मिलने नहीं दिया। इन्होंने मेरे बेटे को मारा। इन्होंने मुझे मेरे घर में शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। “

रिपब्लिक टीवी के मुताबिक, अर्णब के घर पहुँची पुलिस टीम के पास कोई समन, दस्तावेज या कोर्ट के पेपर तक नहीं थे। इसके बाद भी पुलिस ने अपनी जाँच का हवाला दे-दे कर चैनल के पत्रकार निरंजन नारायणस्वामी और संजय पाठक को अर्णब के घर में घुसने से रोका, साथ ही सभी प्रवेश व निकास की जगहों को बंद करवा दिया।

बता दें कि अर्णब के घर आज भारी तादाद में पुलिसकर्मी उन्हें गिरफ्तार करने पहुँचे थे। मौके पर पहुँचे रिपब्लिक टीवी के पत्रकारों ने बताया कि पुलिस द्वारा उन्हें बाहर निकाल दिया गया है और अंदर क्या चल रहा है, इसका उन्हें कुछ भी पता नहीं।

इसके बाद मुंबई पुलिस अर्णब गोस्वामी को एक गाड़ी में लेकर चले गए। अर्णब ने किसी तरह वैन की खिड़की खोल कर आरोप लगाया कि मुंबई पुलिसकर्मियों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। चैनल का कहना है कि उन्हें कुछ इस तरह से वैन में लेकर जाया गया, जैसे वो एक अपराधी हों। उनकी पत्नी ने उन पुलिसकर्मियों को ‘एनकाउंटर कॉप्स’ बताया और चैनल ने इसे अघोषित आपातकाल का फासीवादी कदम।

जावेद चला रहा था अवैध पटाखों का गोदाम, आग लगने से एक बच्ची सहित 4 की मौत: 10-11 घायल

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर के कप्तानगंज कस्बे के मंगल बाजार में एक अवैध पटाखा गोदाम में आग लगने से बुधवार (नवंबर 4, 2020) को 4 लोगों की मौत हो गई। यह अवैध पटाखों का गोदाम जावेद का था। घटना में जावेद समेत 4 लोग जिंदा जल गए। इनमें एक 52 साल की महिला फातिमा और एक 14 साल की बच्ची नाजिया भी थी। इसके अलावा एक अन्य की अस्पताल ले जाते हुए मौत हुई।

दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक, बुधवार की सुबह गोदाम में आग लगी तो पटाखों की आवाज सुनकर गली-मोहल्ले वाले सकते में आ गए। उन्होंने जब बाहर निकल कर देखा तो घर से धुआँ निकल रहा था और पटाखे फूटने की आवाजें आ रही थीं।

लोगों ने घबरा कर पुलिस व फायर ब्रिगेड को इसकी सूचना दी। बाद में बड़ी मशक्कत करके पुलिस व फायर ब्रिगेड ने किसी तरह घर में लगी आग को बुझाया। वहीं, जब बचाव कार्य शुरू हुआ तो जावेद, फातिमा, नाजिया के तीन शव भीतर से बरामद हुए। ताजा रिपोर्ट्स में मरने वालों की संख्या 4 बताई जा रही है।

खबरों की मानें तो जावेद ने दीपावली को लेकर अपने घर के ही एक हिस्से में अवैध पटाखा जमा कर रखे था। बुधवार सुबह 7 बजे जब घर में अचानक आग लगी तो घर में पटाखे होने के कारण आग आस पास के घरों में भी फैल गई, जिससे कुछ अन्य घायल भी हुए।

एसपी विनोद कुमार सिंह ने मीडिया को बताया कि पुलिस व फायर ब्रिगेडकर्मी आग बुझाने में जुटे हुए हैं। बचाव कार्य के दौरान शव बरामद हुए। अंदर कितने लोग थे, यह अभी पता नहीं चल पा रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही इस पर काबू पा लिया जाएगा।

पुलिस का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में जहाँ 4 मौते हुई हैं, वहीं 10-11 लोग घायल भी हुए हैं। अब आगे मकान मालिक पर रिहायशी इलाके में पटाखा रख गोदाम बनाने का मामला दर्ज किया जाएगा।

यहाँ बता दें कि कुछ दिन पहले कुशीनगर जिला पुलिस ने पडरौना कोतवाली क्षेत्र के बाड़ी टोला में अवैध रूप से गोदाम में रखे पटाखों की खेप बरामद की थी। इसकी अनुमानित कीमत करीब बीस लाख थीं।

फ्रांस के ग्रेट मस्जिद में सूअर का कटा हुआ सिर: तुर्की मुस्लिम समूह का आरोप, मस्जिद मैनेजमेंट ने की शिकायत

फ्रांस में बढ़ रहे इस्लामी आतंकी हमलों के कारण वहाँ की जनता में आक्रोश है। अब तुर्की मीडिया के अनुसार सोमवार को मुस्लिम समुदाय को मजहबी तौर से ठेस पहुँचाने वाली एक घटना उत्तरी फ्रांस में घटी है। अंतरराष्ट्रीय खबरें बताती हैं कि उत्तरी फ्रांस में एक मस्जिद के अंदर सूअर का एक कटा हुआ सिर मिला।

यह घटना ओइसे के कॉमपिइने (Compiegne) शहर में स्थित ग्रेट मस्जिद में घटी, जिसमें कुछ समय से मरम्मत का काम चल रहा था। यह जानकारी कॉमपिइने के डिटिब नाम के तुर्की मुस्लिम समूह ने सोमवार को बयान जारी करके दी।

उन्होंने इस घटना की निंदा की। साथ ही मस्जिद के मैनेजमेंट ने भी इस संबंध में शिकायत की। फ्रेंच काउंसिल फॉर मुस्लिम ने भी इस घटना की निंदा की और मस्जिद व समुदाय के नेतृत्व के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि यह घटना फ्रांस के राष्ट्रपति इम्मैनुएल मैक्रों के विवादित बयान के बाद सामने आई है।

यहाँ बता दें कि पिछले महीने मैक्रों ने इस्लाम पर एक बयान दिया था। इसके बाद से उनकी निंदा मुस्लिम देशों द्वारा की जा रही थी। कई इस्लामी देशों ने फ्रांस के उत्पादों का बॉयकॉट करने का आह्वान किया। वहीं दूसरी ओर देश में कई आतंकी हमले की घटनाएँ भी हुई।

उल्लेखनीय है कि मैक्रों ने अपने विवादित बयान में कहा था, “इस्लाम एक ऐसा मज़हब है जिस पर पूरी दुनिया में संकट है, ऐसा सिर्फ हम अपने देश में नहीं देख रहे हैं।”

इसके अलावा उन्होंने पेरिस में शिक्षक की हत्या के बाद भी अपना पक्ष मजबूती से रखा था और हाल में हुई लगातार आतंकी हमलों का जवाब देते हुए फ्रांस ने अलकायदा के आतंकियों पर फ्रांस ने तगड़ा प्रहार किया था।

फ्रांस की वायुसेना ने अफ्रीकी देश माली में सक्रिय अलकायदा के आतंकवादियों पर जोरदार हवाई हमला बोला था। फ्रांस एयरफोर्स ने माली में बुरकिनो फासो और नाइजर की सीमा के पास एक एयर स्ट्राइक की थी, जिसमें कम से कम अलकायदा के 50 आतंकियों के मारे जाने की खबर सामने आई थी। फ्रांस ने यह हमला सोमवार (नवंबर 2, 2020) को ही किया था। इसके लिए उन्होंने मिराज फाइटर जेट और ड्रोन्स का इस्तेमाल किया था।

अर्णब गोस्वामी को ‘एनकाउंटर कॉप्स’ गाड़ी में उठा कर ले गए, पुलिस वैन से कहा – ‘इन्होंने मुझे मारा, दुर्व्यवहार किया’

मुंबई पुलिस लगातार अर्णब गोस्वामी के पीछे पड़ी हुई है। अब खबर मिली है कि मुंबई पुलिस ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के संस्थापक अर्णब गोस्वामी के घर में घुस गई है। मीडिया संस्थान द्वारा जारी किए गए वीडियो में पुलिसकर्मियों को एक पत्रकार को डाँटते हुए देखा जा सकता है। इस वीडियो में वो पत्रकार से कहते दिख रहे हैं कि वो उनके कार्य में बाधा न पहुँचाएँ। साथ ही मुंबई पुलिस ने अर्णब गोस्वामी के साथ भी दुर्व्यवहार किया, ऐसा चैनल का आरोप है।

मुंबई पुलिस ने पत्रकार से कहा, “हमारी कार्रवाई के बीच में मत आओ। हमें हमारी ड्यूटी करने दो।” उक्त पत्रकार बार-बार कहता रहा कि वो बस रिपोर्टिंग कर रहा है, लेकिन पुलिसकर्मी उसे ऐसा करने से रोकते रहे। बताया गया है कि करीब 10 पुलिसकर्मी अर्णब गोस्वामी के घर पहुँचे थे। बाहर पुलिस की कई गाड़ियाँ भी लगी हुई हैं। हथियारबंद पुलिसकर्मियों ने ये बताया भी नहीं कि वो किस लिए वहाँ आए हैं।

इसके बाद वीडियो में अर्णब गोस्वामी के साथ पुलिसकर्मी धक्का-मुक्की करते हुए भी दिख रहे हैं। अर्णब मुंबई पुलिस के अधिकारियों को बार-बार सोशल डिस्टेन्सिंग मेंटेन करने के लिए कहते हैं लेकिन मुंबई पुलिस के लोग पूछते नज़र आ रहे हैं कि वो ‘लीगल कैपेसिटी’ में वहाँ आए हैं और वो उनके साथ चलेंगे या नहीं? साथ ही उन्होंने अर्णब गोस्वामी को घर का दरवाजा बंद करने से भी रोक दिया और भीतर घुस गए।

पत्रकारों ने बताया कि उन्हें बाहर निकाल दिया गया है और अंदर क्या चल रहा है, इसका उन्हें कुछ भी पता नहीं। इसके बाद मुंबई पुलिस अर्णब गोस्वामी को एक गाड़ी में लेकर चले गए। उन्हें क्यों लेकर जाया गया है, ये नहीं पता। लेकिन चैनल का आरोप है कि मुंबई पुलिसकर्मियों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। चैनल का कहना है कि उन्हें कुछ इस तरह से वैन में लेकर जाया गया, जैसे वो एक अपराधी हों। उनकी पत्नी ने उन पुलिसकर्मियों को ‘एनकाउंटर कॉप्स’ बताया।

अर्णब गोस्वामी ने पुलिस वैन से कहा, “इन्होंने मुझे मारा है। मेरे साथ शारीरिक रूप से दुर्व्यवहार किया है।” बता दें कि महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी ने आपराधिक मामला दायर किया था। इस ‘रिट पेटिशन’ पर सुनवाई के दौरान उद्धव ठाकरे की सरकार की तरफ से कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने बतौर अधिवक्ता हिस्सा लिया। महाराष्ट्र की उद्धव सरकार का कोर्ट में प्रतिनिधित्व करने के लिए कपिल सिब्बल को 10 लाख रुपए और वकील राहुल चिंटिस को 1.5 लाख रुपए प्रति सुनवाई दिए जाने का निर्णय लिया गया था।

गीता और कुरान में हिंसा की बातें और इस्लामी आतंक | ‘Violence’ in Gita & Quran and Islamic terror

जब बर्बरता तुम्हारी शिक्षा की आधारशिला है, हत्या तुम्हारे लिए एक सम्मानजनक कर्म है, बलात्कार पुण्य और काफिरों के धार्मिक स्थल तोड़ना जन्नत-उल-फिरदौस में कमरे रिजर्व करवाता है, फिर कोई सामान्य बुद्धि-विवेक वाला तुम्हें या तुम्हारे मजहब को स्नेहाशिक्त भाव से कैसे देख सकता है?

ऑस्ट्रिया पर हुए इस्लामी हमले के बाद जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्कल ने अपने बयान में कहा है कि इस्लामी आतंक हमारा साझा दुश्मन है। यहाँ ध्यातव्य यह है कि उन्होंने ‘रेडिकल इस्लामी टेरर’ नहीं कहा, बस इस्लामी टेरर कहा है।

वैसे ही, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने भी ‘रेडिकल’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था। इसका सीधा अर्थ बस यह है कि अब लोगों को आतंक का सही रूप, अपने सही रूप में ही दिख रहा है न कि ‘सेकुलर’ शब्दावली के साथ।

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ये हिजड़ों की हुकूमत मुझे कहीं भेजना चाहती है तो Pak नहीं अरब भेजे, हम वहीं से आए हैं- मुनव्वर राणा

पिछले दिनों फ्रांस में हुए आतंकी हमले को जायज ठहराने वाले मुनव्वर राणा के ख़िलाफ़ यूपी पुलिस ने शिकायत दर्ज की है। हाल में उन्होंने अपने बयान के जरिए पेरिस में शिक्षक का गला रेतने वाले आतंकी का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि अगर उस लड़के की जगह वह होते तो वह भी यही करते।

विवादित शायर मुनव्वर राणा के इस बयान को लेकर काफी बवाल हुआ। इस पूरे विवादित घटनाक्रम को लेकर नवभारत टाइम्स के हिमांशु तिवारी ने मुनव्वर राणा से खास बातचीत की। इस दौरान मुनव्वर राणा ने कहा कि यह हिजड़ों की हुकूमत (हिजड़ों की सरकार) है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर सरकार उन्हें कहीं भेजना चाहती है तो अरब भेज दे, जहाँ से वो आए हैं।

वहीं, हजरतगंज थाने में दर्ज केस के बारे में पूछे जाने पर उनका कहना था कि अगर उनके बयान में दोष होता तो कोई कायदे का व्यक्ति का एफआईआर दर्ज करता। उन्होंने एफआईआर दर्ज करने वाले दरोगा को नकल करके हाई स्कूल पास किया हुआ बताया।

उन्होंने आगे केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “मजहब की आग बहुत तेज होती है इसमें हाथ नहीं डालना चाहिए। हिंदुस्तान में गाय के नाम पर इतने लोग मारे गए हैं कितने लोगों को फाँसी दे दी आपने। आपके केंद्र का वजीर कातिलों को हार पहना रहा है। मेरा बयान विवादित दिखाई दे रहा है।”

फ्रांस मुद्दे पर असदुद्दीन ओवैसी के बयान को लेकर जब उनसे सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, “असदुद्दीन एक दुकान हैं जो समुदाय को बेचते हैं। मैंने यह काम नहीं किया। मैंने अपना धर्म नहीं बेचा है।” यह पूछे जाने पर कि क्या वो मानते हैं कि उनके बयान में हेरफेर हुई है, उनसे गलती हुई है, उनका कहना था कि हो सकता है कि उनसे कोई गलती हुई हो। वो खुदाई किताब नहीं हैं। वो गीता या कुरान नहीं हैं। उसके लिए यह बोलना कि वो आतंकी हैं, यह पूरी तरह गलत है।

बता दें कि इससे पहले मुनव्वर राणा ने जी न्यूज से बात करते हुए कहा था, “अगर अभी कोई शख्स मेरे बाप का कार्टून कोई ऐसा बना दे कोई गंदा कार्टून, मेरी माँ का कोई ऐसा गंदा कार्टून बना दे, तो हम तो उसको मार देंगे। अगर कोई हमारे हिंदुस्तान में हमारे देवी-देवता का, माँ सीता का या भगवान राम का ऐसा कोई कार्टून बना दे जो गंदा हो, आपत्तिजनक हो, तो हम उसको मार देंगे।”

उन्होंने आगे कहा था, “हिंदुस्तान में हजारों सालों से ऑनर किलिंग को जायज मान लिया जाता है, कोई सजा नहीं होती है। तो फिर आप उसको नाजायज कैसे कह सकते हैं।”

बता दें कि पिछले दिनों पेरिस में एक शिक्षक ने अपनी कक्षा में छात्रों के सामने पैगंबर मोहम्मद के विवादित कैरिकेचर को दिखा दिया था। इसके बाद एक कट्टरपंथी छात्र ने उन्हें दिनदहाड़े बेरहमी से मार डाला। हालाँकि बाद में उस छात्र को भी एनकाउंटर में मार डाला गया। लेकिन, इस घटना के बाद फ्रांस और इस्लामी देशों व मजहबी कट्टरपंथियों के बीच नया विवाद छिड़ गया। इसी विवाद के बीच मुनव्वर राणा ने भी अपना बयान दिया था।