Homeवीडियो'मैन ऑफ अमित शाह' क्यों कहते हैं इन्हें? | Bihar Elections: 'Man of Amit...

‘मैन ऑफ अमित शाह’ क्यों कहते हैं इन्हें? | Bihar Elections: ‘Man of Amit Shah’ talks to OpIndia

उनके लिए जनता का झुकाव पार्टी से परे जाकर भी है। उन्होंने बताया कि वो छात्र जीवन से ही सामाजिक कार्यों में लगे रहे हैं। उन्होंने हर जाति-दल के लोगों की मदद की है। यही कारण है कि आज लोग जाति-दल से ऊपर उठ कर उनका समर्थन कर रहे हैं।

बिहार की चुनावी यात्रा के दौरान ऑपइंडिया ने ‘मैन ऑफ अमित शाह’ कहे जाने वाले मुरारी मोहन झा से मुस्लिम बहुल केवटी विधानसभा क्षेत्र के मुद्दों पर बातचीत की। यह पूछे जाने पर कि वह जनता के बीच किन मुद्दों को लेकर जाएँगे, उनका कहना है कि वो प्रधानमंत्री की योजनाओं के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दों को लेकर जनता के बीच जा रहे हैं।

यात्रा के दौरान हमने पाया कि उनके लिए जनता का झुकाव पार्टी से परे जाकर भी है। जब हमने इस बारे में उनसे जानने की कोशिश की तो उन्होंने बताया कि वो छात्र जीवन से ही सामाजिक कार्यों में लगे रहे हैं। उन्होंने हर जाति-दल के लोगों की मदद की है। यही कारण है कि आज लोग जाति-दल से ऊपर उठ कर उनका समर्थन कर रहे हैं।

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक करके देखें

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अजीत झा
अजीत झा
संपादक, ऑपइंडिया (हिंदी)

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

क्या भारत की राजनीति पहली बार पूरी तरह ‘हिन्दू-केंद्रित’ हो गई है?

क्या भारत की राजनीति का सबसे बड़ा बदलाव चुनावी नतीजों में नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस के केंद्र में हुआ है? PM मोदी मजबूत हों या कमजोर, सत्ता में BJP रहे या विपक्ष आए, क्या हिन्दू पहचान और हिन्दू समाज से जुड़े सवाल अब भारतीय राजनीति के केंद्रीय विमर्श का हिस्सा बन चुके हैं?

कुएँ में कूदने की जगह नहीं बची तो रोने लगीं हिंदू महिलाएँ: जानिए- 1947 में रावलपिंडी के तोहा खालसा में 90 हिंदू-सिख महिलाओं ने...

जानिए 1947 के रावलपिंडी दंगों में तोहा खालसा की 93 हिंदू महिलाओं के कुएँ में एक साथ कूदकर जान देने की दर्दनाक कहानी।
- विज्ञापन -