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उइगर पर नहीं जगा जमीर, टीवी सीरियल पर ‘चीन के बहिष्कार’ की आवाज लगा रहा अर्सलन हिदायत

फ्रांस में पैगंबर मोहम्मद के कैरिकेचर के चित्रण पर व्यापक विवाद के बीच, चीन द्वारा संचालित टीवी चैनल चाइना सेंट्रल टेलीविज़न (सीसीटीवी) पर प्रसारित टीवी सीरीज का एक वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रहा है।

उइगर मानवाधिकार कार्यकर्ता अर्सलन हिदायत ने ट्विटर पर एक चीनी टीवी सीरीज का एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें तांग राजवंश के शासन के दौरान अरब राजदूत के चीन जाने के सीन को दिखाया गया है। वीडियो में अरब राजदूत को पैगंबर मोहम्मद के चित्र को चीनी सम्राट को भेंट करते हुए देखा जा सकता है।

इंटरनेट पर वायरल हुए वीडियो में चीनी टीवी सीरीज ‘कैरोल ऑफ झेंगुआन’ में प्रदर्शित पैगंबर मोहम्मद की छवि को देखा जा सकता है। अर्सलन हिदायत के अनुसार, शो में चित्रित राजदूत कहते हैं, “यह हमारे देश के भगवान मोहम्मद का चित्र है।”

चीनी शो में पैगंबर के चित्रण ने अब मजहबी दुनिया पर सवाल उठाते हुए एक बहस शुरू कर दी है कि क्या वे फ्रांस के शिक्षक की निंदा के बाद पैगंबर मुहम्मद के कैरिकेचर के चित्रण के लिए चीन की निंदा करेंगे? इस रिपोर्ट को लेकर न तो चीनी अधिकारियों और न ही चीन सेंट्रल टेलीविज़न (सीसीटीवी) सीरीज के निर्माताओं ने अपनी टीवी सीरीज में पैगंबर मोहम्मद के चित्रण के दावों का खंडन किया है। इससे पता चलता है कि चीनी अधिकारियों को अपने टीवी शो में पैगंबर मोहम्मद को चित्रित करने में कोई समस्या नहीं है। हालाँकि, इन दिनों उनकी छवि को चित्रित करना उनके लिए निंदनीय हो गया।

क्या इस्लाम में मोहम्मद का चित्रण हमेशा मना किया गया है?

हिदायत द्वारा शेयर किए गए वीडियो के बाद ये बहस तेज हो गई है कि क्या अतीत में पैगंबर मोहम्मद का चित्रण वास्तव में ईश निंदा था। इस चीनी टीवी सीन के इंटरनेट पर वायरल होने के साथ, विभिन्न सोशल मीडिया यूजर्स अब बता रहे हैं कि पैगंबर मोहम्मद के चित्रों का चित्रण अतीत में मना नहीं था।

एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मोना सिद्दीकी के अनुसार , कुरान में ऐसा कुछ भी जिक्र नहीं है, जो स्पष्ट रूप से पैगंबर के चित्रण को मना करता है। यह विचार हदीसों से उत्पन्न हुआ।

सिद्दीकी यह भी बताते हैं कि मजहबी कलाकारों द्वारा मंगोल और ओटोमन साम्राज्यों में मोहम्मद के चित्रण हैं। इनमें से कुछ चित्रों में, मोहम्मद के चेहरे की विशेषताएँ छिपी हुई हैं, हालाँकि, यह स्पष्ट है कि यह वही हैं। उन्होंने कहा कि चित्र भक्ति से प्रेरित थे। उन्होंने कहा, “अधिकांश लोगों ने इन चित्रों को प्रेम और मन्नत से बाहर निकाला, न कि मूर्तिपूजा के इरादे से।” विशेषज्ञों का मानना ​​है कि पैगंबर मोहम्मद की छवियाँ विलासिता का प्रतीक बन गईं, जिनका उद्देश्य केवल मूर्तिपूजा से बचने के लिए निजी तौर पर देखा जाना था।

मजहबी देश ने पैगंबर के चित्रण के लिए फ्रांस का बहिष्कार किया

पिछले हफ्ते पेरिस में फ्रांसीसी शिक्षक पर हुए भयानक हमले और शार्ली एब्दो में छपी कार्टून पर ‘ईश निंदा’ का आरोप लगाए जाने एवं फ्रांसीसी निवासियों के सार्वजनिक प्रदर्शन के बाद फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने इस्लामिक आतंकी हमले के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। इस्लामवादियों द्वारा पूरे विश्व में उत्पन्न संकट को चिह्नित करते हुए इमैनुएल मैक्राँ ने खुल कर बोला था कि इस्लाम एक ऐसा मजहब है जो पूरे विश्व में संकट में है। इसके साथ ही दिसंबर में एक बिल पेश करने की कसम खाई जिससे कि फ्रांस में आधिकारिक तौर पर चर्च और राज्य को अलग करने वाले कानून को मजबूत किया जा सके।

छात्रों को पैगंबर मुहम्मद के कार्टून दिखाने के लिए एक आतंकवादी द्वारा पेरिस की सड़कों पर सैमुअल पैटी की बर्बरतापूर्ण हत्या के कुछ दिनों बाद, फ्रांसीसी समुदायों में मृत शिक्षक का समर्थन करने वालों का समर्थन किया था, जो सैमुअल पैटी की हत्या की निंदा करने के लिए सड़कों पर उतरे थे।

बता दें कि पेरिस में पिछले शुक्रवार (अक्टूबर 16, 2020) को सैम्युल पैटी नामक शिक्षक की हत्या की गई थी। उनकी गलती बस ये थी कि उन्होंने क्लास के दौरान ‘शार्ली एब्दो’ अख़बार में प्रकाशित पैगम्बर मोहम्मद का कार्टून दिखाया, जिसके बाद एक लड़के ने दिन दहाड़े उनका सिर कलम कर के उनकी हत्या कर दी। बाद में पुलिस ने भी हत्यारे छात्र को मार गिराया।

47 वर्षीय इतिहास के शिक्षक सैमुअल पैटी (Samuel Paty) को फ्रांस ने अपना सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार देने का फैसला किया। इसके साथ ही फ्रांस 231 विदेशी कट्टरपंथी नागरिकों को बाहर निकालने की तैयारी कर रहा है। फ्रांस सरकार की तरफ से होने वाली यह कार्रवाई कट्टरपंथ और आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में एक अहम कदम माना जा रहा है। 

फ्रांस के राष्ट्रपति के इस्लामी आतंकवाद संबंधी बयान को लेकर मजहबी देशों ने फ्रांस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। फ्रांस की उत्पादों के बहिष्कार की माँग जोर पकड़ती जा रही है। सऊदी अरब, कुवैत, जॉर्डन और कतर में कई दुकानों से फ्रांस निर्मित सामान को हटा दिया गया है। इतना ही नहीं, पाकिस्तान, तुर्की और बांग्लादेश में भी फ्रांस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए हैं।

क्या टीवी सीरीज पर पैगंबर के चित्रण के लिए चीन का बहिष्कार किया जाएगा?

चीनी टीवी सीरीज में खुले तौर पर पैगंबर मोहम्मद का चित्रण करने पर क्या चीन का बहिष्कार किया जाएगा? सोशल मीडिया यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि जिस तरह से फ्रांस के राष्ट्रपति की निंदा की गई और वहाँ के उत्पादों का बहिष्कार किया गया, क्या उसी तरह से मजहबी दुनिया चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की निंदा करेगी और वहाँ के उत्पादों का बहिष्कार करेगी? वह भी ऐसे में जब चीनी सरकार ने उइगरों के साथ अत्याचार किया है, जिस पर आमतौर पर पाकिस्तान जैसे कुछ इस्लामी देशों ने चुप्पी साध रखी है।

चूँकि पाकिस्तान ने पहले ही फ्रांसीसी उत्पादों के बहिष्कार का आह्वान किया है, इसलिए यह देखना होगा कि पाकिस्तान क्या विकल्प चुनता है – ‘इस्लाम’ को बचाने के लिए चीन के खिलाफ लड़ाई या चीनी ‘ईश निंदा’ कार्यों को अनदेखा करना।

मुंगेर में कई जगह मतदान का बहिष्कार: चड़ौन में ग्रामीणों ने जला डाली वोटिंग की पर्ची, घर-घर जाकर गिड़गिड़ा रहे राजनीतिक दलों के लोग

बिहार के मुंगेर में दुर्गा पूजा विसर्जन के दौरान पुलिस की बर्बरता की ख़बरों के बीच बिहार में प्रथम चरण का मतदान भी हो रहा है। बुधवार (अक्टूबर 28, 2020) को बिहार में जहाँ-जहाँ मतदान हो रहा है, उन इलाकों में मुंगेर भी शामिल है। इसी दौरान हमें खबर आ रही है कि चड़ौन सहित मुंगेर के कई इलाकों में मतदान का प्रतिशत काफी धीमा है। मुंगेर के टाउनहॉल वोटिंग बूथ पर तो वोटिंग प्रतिशत मात्र 2.7% ही था। दोपहर 12 बजे तक मुंगेर में मात्र 15% वोटिंग हुई थी।

इसी तरह से कई अन्य इलाकों में भी काफी कम वोटिंग प्रतिशत देखने को मिला, जिससे प्रत्याशियों की नींद हराम हो गई है और वो घर-घर जाकर लोगों को वोट डालने के लिए बोल रहे हैं। उदाहरण के लिए मुंगेर के नौवागढ़ी क्षेत्र में स्थित चड़ौन गाँव को ही देख लीजिए, जहाँ एक तरह से ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार कर रखा है। हर दल के लोग घर-घर जाकर मतदान करने कह रहे हैं, लेकिन 2 दिन पहले हुई घटना के कारण लोग आक्रोशित हैं।

हमने गाँव के कुछ स्थानीय युवाओं से बातचीत की, जिन्होंने बताया कि उनका गाँव उस जगह से 8 किलोमीटर के दायरे में ही है, जहाँ ये घटना हुई। गाँव के लोग दुर्गा पूजा में वहीं जाते हैं और उनका बाजार भी वहीं है। लोगों का गुस्सा न सिर्फ पुलिस-प्रशासन बल्कि सत्ताधारी पार्टियों, खासकर भाजपा से भी है। इनमें से अधिकतर भाजपा के वोटर रहे हैं और वो अब पार्टी द्वारा खुल कर स्टैंड न लेने से नाराज़ हैं।

हमारी बातचीत गाँव के ही नेहा चौधरी से हुई, जिन्होंने बताया कि इस घटना के बाद से ही गाँव में आक्रोश है। कई ग्रामीणों ने वोट डालने के लिए पर्ची भी कटा ली थी। मंगलवार को चुनाव से 1 दिन पहले ही उन्होंने अपने-अपने घरों से उन पर्चियों को निकाला और उसमें आग लगा दी। बता दें कि ये पर्चियाँ उन्हें प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों द्वारा भी वोटिंग लिस्ट में उनका नाम देख कर उन्हें उपलब्ध कराई जाती है।

साथ ही युवकों ने पूरे गाँव में घूम-घूम कर अपील किया कि वो वोट देने न जाएँ। नेहा ने बताया कि दोपहर तक गाँव के 10-15 लोगों ने ही वोट डाला था। इनमें से अधिकार बुजुर्ग ही हैं। सबसे ज्यादा बुरी स्थिति बूथ संख्या 232 की है, जहाँ राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के प्रतिनिधि घूम-घूम कर वोट डालने के लिए बोल रहे हैं। वो गिड़गिड़ा रहे हैं कि केवल आधार कार्ड भी हो तो लोग लेकर जाएँ और वोट करें, लेकिन ग्रामीण टस से मस नहीं हो रहे।

नेहा ने बताया कि इस गाँव में अधिकतर भाजपा को ही वोट जाता रहा है। उन्होंने बताया कि अब बूथ से जब वोटिंग ही नहीं हो रही है तो प्रत्याशियों के लोग गाड़ी लेकर घूम रहे हैं और लोगों से वोट डालने को कह रहे हैं। हालाँकि, ग्रामीणों का कहना है कि अगर उन्हें ज्यादा परेशान किया गया तो वो इन राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों को गाँव से भगाएँगे भी। इस गुस्से की एक ही वजह है – दुर्गा विसर्जन में पुलिस पर लगे बर्बरता के आरोप।

नेहा चौधरी बताती हैं कि उनके घर के लोग भी उस दिन मुंगेर में ही थे और दुर्गा पूजा विसर्जन में हिस्सा लेने गए थे। गाँव के कई लोग इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी हैं, जिन्होंने इस वारदात को देखा-सुना है। ऐसे में उनके जेहन में भी वो डरावने पल बैठे हुए हैं। उनके घर पर भी राजनीतिक दलों के लोग पहुँचे थे और वोट करने को कहा, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। कमोबेश पूरे गाँव में यही स्थिति है।

आखिर गाँव के लोग क्यों वोट नहीं करना चाहते? इसके जवाब में राहुल कुमार और रितेश चौधरी सहित अन्य ग्रामीण कहते हैं कि हिन्दुओं को हमेशा से दबाया जा रहा है और प्रशासन का रवैया सही नहीं होने के कारण उससे लोग आक्रोशित हैं। दो लोगों के मरने की खबर है और न जाने कितने घायल हुए हैं। ये लोग यही सवाल पूछ रहे हैं, “आखिर प्रशासन ने इतनी बड़ी वारदात को क्यों और कैसे अंजाम दे दिया?

वहीं नेहा चौधरी और दीपिका कुमारी जैसे युवाओं का भी गुस्सा इसी बात को लेकर है कि जिस पार्टी को वो लोग वोट देते आए हैं, उसके राज में आखिर इस तरह की घटना कैसे हो गई? अगर हो भी गई तो फिर इसके बाद अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई? आज जब मुंगेर के पोलिंग बूथों पर सन्नाटा पसरा हुआ है, हर दल के प्रत्याशियों की साँसें अटकी हुई हैं कि आखिर जनता अब क्या फैसला सुनाने वाली है।

मुंगेर में सोमवार (अक्टूबर 26, 2020) की रात माँ दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन यात्रा पर मुंगेर पुलिस के लाठीचार्ज का वीडियो के वायरल होने के बाद जिला प्रशासन की खासी आलोचना हो रही है। एक के बाद एक आई हृदयविदारक तस्वीरों से लोग आक्रोशित हैं। एसपी और जदयू सांसद आरसीपी सिंह की बेटी लिपि सिंह ने दावा किया था कि प्रतिमा विसर्जन के दौरान असामाजिक तत्वों ने पुलिस पर पथराव किया और गोलीबारी की, जिसके बाद अपने बचाव में पुलिस ने कार्रवाई की।

हालाँकि, बेंगलुरु की वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी डी रूपा ने नियम समझाते हुए कहा कि पुलिस को गोली चलाने से पहले चेतावनी देनी चाहिए, या फिर आँसू गैस के गोलों का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर दुःख जताया कि मुंगेर में इनमें से किसी भी नियम का पालन नहीं किया गया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस के न्यूनतम बल का उपयोग किया जाना चाहिए। साथ ही याद दिलाया कि भीड़ द्वारा अवरोध पैदा करने पर फोर्स की उचित संख्याबल का भी निर्धारण किया जाता है।

अलवर: मेम चंद को बनाया मोहम्मद अनस, फिर दी जान से मारने की धमकी- दलित परिवार पहुँचा कोर्ट

राजस्थान के अलवर जिले में एक दलित व्यक्ति के कथित जबरन धर्म परिवर्तन का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मेम चंद नाम के दलित व्यक्ति को कुछ अज्ञात लोगों द्वारा कथित रूप से मुस्लिम बनने के लिए मजबूर किया गया था। इतना ही नहीं, मेम चंद की पत्नी से भी जबरन इस्लाम कबूल करवाया गया था।

मेम चंद ने अब अलवर की एक अदालत से हिंदू धर्म में वापस लाने की माँग की है। अदालत ने पुलिस को पीड़ित को हर संभव मदद मुहैया कराने का निर्देश दिया है। समाचार चैनल ‘टाइम्स नाउ’ के पास उपलब्ध डिटेल्स के अनुसार, मेम चंद राजस्थान के अलवर जिले में बड़ौदा मेव क्षेत्र के मूल निवासी थे। इस्लाम में उनके जबरन धर्म परिवर्तन के बाद, मेम चंद को एक नया नाम और एक नया पता दिया गया।

धर्मांतरण के बाद मेम चंद के नए नाम मोहम्मद अनस रखा गया है। मेम चंद उर्फ मोहम्मद अनस ने ‘टाइम्स नाउ’ को बताया कि उनके गाँव में हरियाणा के फिरोजपुर झिरका के इब्राहिम बास गाँव के मेव समाज के लोगों की रिश्तेदारी है। वे लोग अक्‍सर यहाँ आते-जाते रहते हैं। 

साभार: Timesnow

मेम चंद ने आरोप लगाया कि 15 अन्य लोग उनका जबरन धर्म परिवर्तन कराने के लिए उन्हें हरियाणा ले गए। वहाँ उनका खतना भी कराया गया। उसके बाद रहने के लिए जमीन दी। यह कहते हुए जबरन धर्म परिवर्तन कराया कि इस धर्म (हिंदू धर्म) में कुछ नहीं है। इस्लाम में बहुत कुछ है। मेम चंद से कहा गया कि इस्लाम में तुम्हारी इज्जत होगी। उसके बाद आरोपित उन्हें जमात में शामिल करने के लिए जम्मू-कश्मीर लेकर गए। वहाँ उनके बच्चों को मारने की धमकी दी कि कुछ करोगे तो तुम्हारी जान को खतरा हो सकता है।

साभार: Timesnow

अनस ने कोर्ट के समक्ष दिए हलफनामे में आरोप लगाया है, “आरोपितों ने मुझे इब्राहिम बास गाँव बुलाया और वहाँ पर मुझसे कहा कि यदि मैं हिंदू धर्म को त्याग कर मुस्लिम धर्म अपनाऊँ तो यह लोग मुझे रहने हेतु जमीन देंगे। जिस पर मैंने मना कर दिया तो इन लोगों ने मेरी पत्नी बच्चों को बंधक बना लिया और धमकी दी कि ढेड, चमार, चुहड़ो यदि तुम लोगों ने अपना धर्म परिवर्तन नहीं किया को ये लोग मुझे व मेरे परिवार को जान से मार देगा तथा यह भी कहा कि हिंदू धर्म के तुम लोग नीची जाति के हो। हिंदू धर्म में तुम्हारी कोई इज्जत नहींहै। जिस कारण मैं भयभीत हो गया और आरोपितों के कहे अनुसार मैंने दिनांक 29-01-2018 को अपना धर्म परिवर्तन कर लिया।” 

साभार: Timesnow

उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपित धर्म परिवर्तन कराने के बाद उनकी बीवी पर गंदी नजर रखने लगे। उससे जबरन संबंध बनाने के लिये दबाव बनाया गया। इसके बाद वे जैसे-तैसे करके मौका देखकर जम्मू-कश्मीर से वापस भाग निकले। एडवोकेट बनवारीलाल ने बताया कि इस संबंध में परिवाद आया था। अदालत से आदेश हुए हैं कि जिन लोगों ने उन पर अत्याचार किया है उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

मुंगेर हत्याकांड: एसपी लिपि सिंह के निलंबन की खबरों के बीच मुंगेर पुलिस की ‘ट्विटर आईडी’ रातों-रात डीएक्टिवेट

बिहार के मुंगेर हत्याकांड के बाद पुलिस की भूमिका लगातार शक के घेरे में है। भले ही वहाँ की पुलिस की ओर से कहा जा रहा हो कि गोलियाँ बदमाशों की ओर से चली, लेकिन कई ऐसे तथ्य व बयान निकल कर सामने आ रहे हैं जो बताते हैं कि पुलिस पर लग रहे आरोप निराधार नहीं है। इसी बीच मुंगेर पुलिस द्वारा रातोंरात ट्विटर से अकॉउंट डीएक्टिवेट कर दिया जाना भी कई सवाल खड़े करता है।

जी हाँ, कल तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर मौजूद मुंगेर पुलिस का अकॉउंट आज डिएक्टिवेट किया जा चुका है। कल तक इस अकॉउंट पर एसपी लिपि सिंह की तस्वीर थी। यूजर आईडी से कुल 149 ट्वीट हो चुके थे, लेकिन कल के बाद अकॉउंट रातोंरात गायब गया। इस अकॉउंट पर पुलिस द्वारा गिरफ्तारी आदि की तस्वीरें व खबरें पोस्ट की जाती थी।

गौरतलब है कि मुंगेर में प्रतिमा विसर्जन के बाद गोलीबारी के कारण तीन दिनों से माहौल गर्म है। साथ ही, सुबह से कुछ लोग यह भी लिख रहे हैं कि मुंगेर की विवादित एसपी लिपि सिंह को निलंबित कर दिया गया है। हालाँकि, हम इसका सत्यापन कर पाने में असमर्थ रहे।

मुंगेर पुलिस का ट्विटर रातोंरात गायब
मुंगेर पुलिस का ट्विटर रातोंरात गायब

अलग-अलग स्रोतों से आ रही खबरों के अनुसार चार लोगों के मरने की खबरें भी आ रही हैं, जबकि आधिकारिक तौर पर एक की ही मृत्यु बताई गई है। एक खबर के अनुसार, मतदान का प्रतिशत बहुत ही कम बताया जा रहा है और किसी-किसी गाँव में पूरे बूथ पर 10-20 वोट ही जाले जाने की बातें भी सामने आ रही हैं।

इससे पहले सोशल मीडिया पर मुंगेर में दुर्गा पूजा के विसर्जन के दौरान पुलिस की बर्बरता के वीडियो सामने आ चुकी हैं। इन वीडियो में पुलिस को श्रद्धालुओं पर लाठियाँ बरसाते हुए देखा जा सकता है। इस घटनाक्रम में एक व्यक्ति की मौत भी हुई है। मृतक के परिजनों ने पुलिस पर गोली चलाने का आरोप लगाया है। वहीं, पुलिस का कहना है कि कुछ लोगों ने जानबूझकर पथराव किया।

छत्तीसगढ़: माँ दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन में कलीम खान के नेतृत्व में पुलिस ने श्रद्धालुओं को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा

जहाँ एक तरफ मुंगेर में दुर्गा पूजा विसर्जन के दौरान पुलिस बर्बरता के आरोपों की ख़बरों से देश उबरा भी नहीं था कि दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से ऐसी ही ख़बरें आ रही हैं। माँ दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन के दौरान सिटी कोतवाली पुलिस ने गाड़ी रोक ली। इस कारण लोग आक्रोशित हो गए और थाने में जम कर विरोध प्रदर्शन किया। पत्थरबाजी के बाद पुलिस ने लाठियाँ चटकानी शुरू की, जिसके बाद श्रद्धालु विसर्जन छोड़ कर भागने लगे।

‘दैनिक भास्कर’ की खबर के अनुसार, पुलिस ने श्रद्धालुओं को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। फिर पुलिस लाइन से अतिरिक्त बल भी बुलाया गया। सिटी कोतवाली से पचरीघाट तक पुलिस की तैनाती के बाद विसर्जन फिर से शुरू कराया गया। ये घटना मंगलवार (अक्टूबर 27, 2020) की देर रात साढ़े 10 बजे की है। घटना उस समय हुई, जब दुर्गा विसर्जन के क्रम में लोग गाते-बजाते हुए प्रतिमा लेकर विसर्जन के लिए जा रहे थे।

तेलीपारा दुर्गोत्सव समिति के लोग जैसे ही पुलिस थाने के पास से गुजरे, पुलिस ने शोर-शराबे का हवाला देते हुए उनकी डीजे गाड़ी को जब्त कर लिया और अपने साथ थाने लेकर चले गए। इसके बाद माँ दुर्गा की प्रतिमा वाली गाड़ी भी रोक दी गई। फिर समिति के लोग वहाँ से थाने पहुँचे। यहाँ उनके लाख गुहार लगाने के बावजूद पुलिस ने डीजे गाड़ी नहीं छोड़ी। इससे श्रद्धालु आक्रोशित हो गए और उनकी पुलिस के साथ कहासुनी शुरू हो गई।

भीड़ और पुलिस के बीच कहासुनी के दौरान ही किसी ने थाने में एक पत्थर चला दिया और यहीं से बात बिगड़ गई। टीआई कलीम खान के नेतृत्व में पुलिस बल ने श्रद्धालुओं को दौड़ा-दौड़ा कर पीटना शुरू कर दिया। इससे आम लोग भी भड़क गए और उन्होंने नारेबाजी शरू कर दी। इसकी सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुँच कर विसर्जन को पूरा कराया। देर रात तक बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहे।

‘दैनिक भास्कर’ के स्थानीय संस्करण में प्रकाशित खबर

बिलासपुर में हर साल दुर्गा पूजा काफी धूमधाम से होता है लेकिन इस बार कोरोना के कारण कम संख्या में ही पंडाल बनाए गए थे। ये पहली बार हुआ है जब रात में गाड़ी रोक कर पुलिस ने इस तरह लाठियाँ चटकाई। एक कॉन्स्टेबल ने तो तेलीपारा पूजा समिति के एक सदस्य की पिटाई भी कर दी। टीआई कलीम खान का कहना है कि भीड़ थाने में घुस गई थी, इसीलिए उन्हें खदेड़ा गया। दावा किया कि उनके पास वीडियो है। एसएसपी सिटी उमेश कश्यप ने कहा कि थाने में घुसने वालों पर कार्रवाई होगी।

इससे पहले जिला प्रशासन ने आदेश दिया था कि मूर्ति की ऊँचाई 6 फीट और चौड़ाई 5 फीट और मूर्ति स्थापना वाले पंडाल का आकार 15 वर्गफीट से अधिक नहीं होना चाहिए। पंडाल के सामने पर्याप्त खुली जगह हो। पंडाल एवं सामने खुली जगह से सड़क अथवा गली प्रभावित न हो। पंडाल में दर्शकों के बैठने के लिए पृथक व्यवस्था न हो। कुर्सी न लगाया जाए। किसी भी एक समय में पंडाल में सामने मिलकर कुल 20 व्यक्ति से अधिक नहीं होने चाहिए। एक पंडाल से दूसरे पंडाल की दूरी 250 मीटर से कम न हो।

उधर बिहार के मुंगेर जिले में दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन के दौरान पुलिस और सुरक्षाबलों के बीच झड़प में एक युवक की मौत और 6 से ज्यादा लोग घायल हो गए। घायलों का इलाज सदर अस्पताल में किया जा रहा है। आक्रोशित लोगों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने बेगुनाहों पर गोली चलाई है। चश्मदीदों ने दो थाना प्रभारियों पर आरोप लगाया है। पुलिस-प्रशासन को दिए गए पत्र में स्थानीय लोगों ने 24 लोगों के नामों की सूची भी दी है, जो लापता हैं।

दोहा एयरपोर्ट पर महिला यात्रियों की उतरवाई गई पैंट, प्राइवेट पार्ट्स छूकर जाँच करने के आदेश से विवाद

कतर के दोहा एयरपोर्ट पर सिडनी जाने वाली महिला यात्रियों से पैंट उतारकर उनके प्राइवेट पार्ट्स की जाँच का आदेश दिया गया। इस घटना को लेकर काफी विवाद पैदा हो गया। महिला यात्रियों को फ्लाइट से उतारकर उन्हें जबरन एंबुलेंस में बैठाया गया और कपड़े उतारने का आदेश दिया गया। यात्रियों से महिला नर्सों ने कहा कि विमान पर वापस जाने से पहले उनकी योनि की जाँच करने की आवश्यकता है।

विवाद इस बात को लेकर और भी तब बढ़ गया जब इस जाँच के दौरान उनके प्राइवेट पार्ट्स को छूकर जाँच करने की बात कही गई। दरअसल, टर्मिनल के बाथरूम में एक प्रीमेच्योर बेबी के मिलने पर इस तरह के आदेश दिए गए थे। एयरपोर्ट ने अपील की थी कि बच्‍चे की माँ आगे आए और उसे ले जाए।

ऑस्‍ट्रेलिया की विदेश मंत्री ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। जिसके बाद कतर ने बुधवार (अक्टूबर 28, 2020) को माफी माँग ली। ऑस्‍ट्रेलिया के विदेश मंत्री ने कहा कि 10 यात्री विमानों की महिला यात्रियों की जबरन जाँच की गई।

दरअसल, कतर एयरपोर्ट के बाथरूम से एक लावारिस नवजात बच्‍चा म‍िला था, इसके बाद दोहा एयरपोर्ट के अधिकारियों ने महिलाओं को प्राइवेट पार्ट की जाँच करवाने के लिए मजबूर किया। ऑस्‍ट्रेलिया की विदेश मंत्री मरिसे पायने ने सीनेट में सुनवाई के दौरान कहा था कि कुल 10 एयरक्राफ्ट की महिला यात्रियों को तलाशी का शिकार होना पड़ा जो पूरी तरह से परेशान करने वाला है।

ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने बताया था कि फ्लाइट संख्या 908 के कतर की राजधानी से गुजरने के दौरान जिन महिलाओं की जाँच की गई, उनमें से एक महिला ऑस्ट्रेलियाई नर्स थी, जिसने इस पर नाराजगी जताई।

महिलाओं में से एक ने ऑस्ट्रेलिया में संवाददाताओं से कहा था, “कोई भी अंग्रेजी नहीं बोलता और न ही हमें बताता है कि क्या हो रहा था। यह भयानक था। हम 13 थे और हम सभी को वहाँ से निकलना पड़ा। एक माँ ने अपने सोते हुए बच्चों को विमान पर छोड़ दिया था।”

एक यात्री ने बताया था, “जब मैं एम्बुलेंस में गई, तो एक महिला थी, जहाँ पर एक महिला मास्क पहने हुई थी और फिर अधिकारियों ने मेरे पीछे एम्बुलेंस को बंद कर दिया। मैंने कहा मैं ऐसा नहीं करुँगी और उसने मुझे कुछ भी नहीं समझाया। वह सिर्फ कहती रही, “हमें इसे देखने की जरूरत है, हमें इसे देखने की जरूरत है।” महिला ने कहा कि उसने एम्बुलेंस से निकलने की कोशिश की और दूसरी तरफ के अधिकारियों ने दरवाजा खोल दिया। वो बाहर कूद गई और निकल गई।

ऑ‍स्‍ट्रेलियाई विदेश मंत्री ने कहा कि दो अक्‍टूबर को सिडनी जाने वाली 18 महिलाएँ (13 ऑस्ट्रेलिया की थीं) और फ्रांसीसी समेत अन्‍य विदेशी महिला यात्री इस जाँच का शिकार हुईं। उन्‍होंने यह नहीं बताया कि अन्‍य महिला यात्री कहाँ जा रही थीं। इस घटना के बाद अब ऑस्‍ट्रेलिया और कतर के बीच में राजनयिक विवाद पैदा हो गया है। ऑस्‍ट्रेलिया ने इस घटना पर विरोध दर्ज कराया था।

ऑस्‍ट्रेलिया के अधिकारी अन्‍य देशों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं जहाँ महिलाएँ इस दुर्व्‍यवहार का शिकार हुई थी। इससे पहले दोहा के हमद एयरपोर्ट ने इस बात की पुष्टि की थी कि यह घटना हुई है। हालाँकि उसने विस्‍तृत विवरण देने से मना कर दिया।

ऑस्ट्रेलिया के विदेश मामलों और व्यापार विभाग के प्रमुख फ्रांसिस एडम्सन ने कहा था कि ऐसी गहन पूछताछ कैसी हो सकती है। यह बहुत ही गंभीर और परेशान करने वाला मामला है। अधिकारियों ने कहा था कि ऑस्ट्रेलिया भी अन्य देशों के साथ दोहा के समक्ष इस मामले को गंभीरता से उठाने की तरफ आगे बढ़ रहा है।

अधिकारियों ने एक बयान में कहा था, “आस्ट्रेलियाई सरकार दोहा हवाई अड्डे पर हाल ही में कतर एयरवेज की उड़ान में कुछ महिला यात्रियों के साथ हुए व्यवहार से चिंतित है।” सरकार ने यात्रियों के साथ हुई घटना को आक्रामक, घोर अनुचित और परिस्थितियों से परे बताया। मामले को ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस को भेजा गया है, जिसने कहा कि वे इस मामले से अवगत थे।

14 साल से न्याय माँग रही हूँ जबकि पति के हत्यारे अंसारी को कॉन्ग्रेस दे रही संरक्षण: भाजपा MLA ने प्रियंका वाड्रा को लिखा पत्र

भाजपा के दिवंगत विधायक कृष्णानंद राय की पत्नी और मोहम्मदाबाद से भाजपा विधायक अलका राय ने कॉन्ग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा को पत्र लिख कर कहा है कि वो उनके पति के हत्यारे मुख़्तार अंसारी को बचाना बंद करें। गाजीपुर के मुहम्मदाबाद से विधायक अलका राय ने पत्र में खुद को विधवा बताते हुए लिखा है कि वो विगत डेढ़ दशक से अपने पति की नृशंस हत्या के मामले में इंसाफ की लड़ाई लड़ रही हैं। अलका राय का कहना है कि वह 14 साल से पति की हत्या का इंसाफ पाने के लिए लड़ रही हैं, लेकिन कॉन्ग्रेस उस जुल्मी (मुख्तार अंसारी) को खुला संरक्षण दे रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि आज जब उत्तर प्रदेश की कई अदालतों द्वारा मुख़्तार अंसारी को तलब किया जा रहा है, पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार उन्हें भेजने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि हर बार कोई न कोई बहाना बना कर उन जैसे सैकड़ों पीड़ितों को न्याय से वंचित किया जा रहा है। अलका राय ने पूछा कि आखिर कॉन्ग्रेस पार्टी की सरकार इतने शर्मनाक तरीके से और निर्लज्जता से एक दुर्दांत अपराधी के साथ कैसे खड़ी हैं? उन्होंने पत्र में लिखा:

“कोई भी ये स्वीकार नहीं करेगा कि ये सब आपके (प्रियंका गाँधी) और राहुल गाँधी की मर्जी के बगैर हो रहा है। मुख़्तार अंसारी एक पेशेवर अपराधी है, जिसने तमाम निर्दोष लोगों की हत्याएँ की हैं। अनेक माताओं-बहनों का उसने सुहाग उजाड़ा है और कई बच्चों के सिर से उसने पिता का साया छीना है। प्रत्येक पीड़ित को उस क्षण की प्रतीक्षा है, जब उसे अपने किए की कड़ी सज़ा मिलेगी। न्याय की आस में हमारा हर दिन तिल-तिल कर गुजर रहा है। आप खुद एक महिला हैं। आप ऐसा क्यों कर रही हैं? क्या आपको हम जैसी अबलाओं का दर्द नहीं दिख रहा? मेरी खुद की कहानी इसका प्रमाण है कि मुख़्तार कैसे सालों से क़ानून का मजाक उड़ा कर सुरक्षित बचा हुआ है।”

अलका राय ने प्रियंका गाँधी से कहा कि ये बेहद खेदजनक है कि वो और उनकी कॉन्ग्रेस पार्टी मुख़्तार अंसारी जैसे घिनौने अपराधियों के साथ खुल कर खड़ी है। उन्होंने कहा कि उन्हें मीडिया से पता चला है कि जब उत्तर प्रदेश की गाड़ियाँ मुख़्तार अंसारी को लेने पहुँचीं तो उसे 3 महीने का बेड रेस्ट दे दिया गया। उन्होंने कहा कि वो और उन जैसे सैकड़ों लोग इस बात से हताश हैं, जिन्हें न्याय का इन्तजार है।

विधायक अलका राय ने प्रियंका गाँधी पर अपने पति के हत्यारों को बचाने का लगाया आरोप

बकौल अलका राय, आज उत्तर प्रदेश की पूरी जनता के मन में संदेह है कि मुख़्तार अंसारी को लेकर उठ रहे सवालों पर राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी चुप क्यों हैं? उन्होंने सवाल दागा कि वोट बैंक की मज़बूरी में ये दोनों एक कुख्यात अपराधी को बचाने की कोशिश क्यों कर रहे हैं? उन्होंने लिखा कि उन्हें प्रियंका गाँधी के जवाब का इंतजार रहेगा। उन्होंने कहा कि अगर आपके मन में थोड़ी भी संवेदना हैं तो पत्र का जवाब दें और मुख़्तार अंसारी को सज़ा दिलाने में मदद करें।

बता दें कि 29 नवंबर 2005 के दिन बेख़ौफ़ हत्यारों ने एके-47 से 400 राउंड गोलियाँ चलाई थीं, जिसमें तत्कालीन भाजपा विधायक कृष्णानंद राय सहित 6 लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों के शरीर से 67 गोलियाँ निकाली गई थीं। इस मामले के चश्मदीद गवाह शशिकांत राय शराब पीने के बाद संदिग्ध स्थिति में सड़क पर बेहोश पड़े पाए गए, जिसके बाद उनकी मौत हो गई थी। डेढ़ महीने के भीतर ही एक और गवाह मनोज गौड़ की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।

‘हमारा मजहब कबूल कर के मेरे बेटे की हो जाओ’: तौसीफ की अम्मी ने भी बनाया था निकिता पर धर्म परिवर्तन का दबाव

हरियाणा के बल्लभगढ़ में कॉलेज से निकल रही छात्रा निकिता पर घात लगाए तौसीफ और रेहान ने हमला कर दिया। सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि दोनों आरोपितों ने पहले निकिता का अपहरण करने की कोशिश की। इसमें नाकाम रहने पर निकिता की कनपटी पर गोली मारने के बाद तौसीफ अपने साथी रेहान के साथ फरार हो गया। 

पीड़िता के पिता का दावा है कि आरोपित तौसीफ ही नहीं बल्कि उसकी माँ भी उनकी बेटी निकिता पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाती रहती थी। यह सिलसिला बीते दो साल से चल रहा था। छात्रा के पिता ने आरोपित तौसीफ की माँ पर आरोप लगाया है कि वह बार-बार फोन कर के उनकी बेटी पर दबाव डालती थी कि तुम हमारा मजहब कबूल कर लो। यह सिलसिला उस वक्त से चल रहा था जब 2018 में तौसीफ ने पहली बार निकिता का अपहरण किया था।

पीड़िता के पिता का कहना है कि पहली बार जब बच्ची का अपहरण हुआ था तो उसे छुड़ा लिया गया था। लेकिन उस हादसे के बाद से ही तौसीफ की माँ बार-बार निकिता को फोन कर कहती थी, “तुम हमारा मजहब कबूल कर लो। अब तुमसे कौन शादी करेगा। तुम्हारा अपहरण भी हो गया है और अब तुम्हारा क्या होगा। तुम हमारा मजहब कबूल कर मेरे बेटे की हो जाओ।”

26 अक्टूबर को हुए इस हत्याकांड के मामले में मुख्य आरोपित तौसीफ और उसके दोस्त रेहान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार करने के बाद दोनों आरोपितों को कोर्ट में पेश किया गया है, जहाँ से उन्हें 2 दिन के पुलिस रिमांड में भेज दिया गया। बताया जा रहा है कि पुलिस पूछताछ में आरोपित ने अपना गुनाह कबूल लिया है और हत्या के पीछे का मकसद भी बताया है।

तौसीफ ने कहा- किसी और से करने वाली थी शादी, इसलिए मारा

जानकारी के मुताबिक पुलिस गिरफ्त में आए तौसीक ने पूछताछ में बताया कि वो (निकिता) किसी और से शादी करने वाली थी, इसलिए उसने उसे मार दिया। आरोपित ने पुलिस को यह भी बताया कि उसकी छात्रा से 24 से 25 अक्टूबर की रात लंबी बातचीत हुई थी। दोनों के बीच करीब 1000 सेकंड तक बात हुई थी। 

तौसीफ ने पुलिस को यह भी बताया कि उसकी मेडिकल की पढ़ाई अधूरी रह गई थी, क्योंकि उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। तौसीफ ने पुलिस से पूछताछ में बताया है कि उसने अपनी गिरफ्तारी का बदला लिया है। उसने पुलिस को बताया, “मैं मेडिकल की पढ़ाई नहीं कर सका क्योंकि मैं गिरफ्तार हो गया था। इसलिए मैंने ये बदला लिया।”

दरअसल, तौसीफ 12वीं कक्षा तक निकिता के साथ पढ़ा था। वह उस पर दोस्ती के लिए दबाव डालता था। आरोपित ने साल 2018 में छात्रा का अपहरण भी किया था, लेकिन बाद में समझौता हो गया था। बदनामी से बचने के लिए निकिता के परिजन बात को ज्यादा आगे नहीं बढ़ाना चाहते थे। आरोपित तौसीफ के परिजन भी निकिता के घर आए और एक पंचायत में माफी के साथ यह तय हुआ कि आगे से ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी। समझौता करने के बाद उन्होंने केस वापस ले लिया था। 

परिवार की तरफ से यह भी बताया गया कि तौसीफ कुछ दिनों से निकिता पर शादी का दबाव बना रहा था। सोमवार शाम को वो परीक्षा देकर बाहर निकल रही थी तभी तौसीफ आया और जबरदस्ती गाड़ी में खींचने लगा। जब लड़की नहीं मानी तो उसने गोली मार दी। 

गौरतलब है कि निकिता तोमर के घरवालों ने आरोप लगाया है कि निकिता पर तौसीफ धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहा था। तीन साल पहले इस संबंध में पंचों के सामने फैसला भी हुआ, लेकिन अभी हाल में दोबारा तौसीफ ने लड़की के संपर्क में आने का प्रयास किया। उसने बार बार निकिता को यही कहा, ‘मुस्लिम बन जा हम निकाह कर लेंगे’ मगर जब लड़की ने उसकी बात नहीं सुनी तो उसकी गोली मार कर हत्या कर दी।

दिल्ली: DJ की आवाज पर टोका तो अब्दुल सत्तार और उसके 4 बेटों ने की कर दी सुशील की हत्या, 2 भाई घायल

दिल्ली में एक व्यक्ति की सिर्फ इसीलिए हत्या कर दी गई, क्योंकि उसने तेज़ आवाज़ में बज रहे गाने पर आपत्ति जताई। मंगलवार (अक्टूबर 27, 2020) को हुई इस घटना में 29 साल के सुशील की हत्या कर दी गई और उनके दोनों भाइयों को पीट-पीट कर घायल कर दिया गया। इस मामले में सुशील के ही पड़ोसी अब्दुल सत्तार और उसके 4 बेटों पर हत्या का मामला दर्ज किया गया है। ये घटना महेंद्र पार्क थाना क्षेत्र की है।

बताया जा रहा है कि अब्दुल सत्तार के घर में काफी तेज़ आवाज़ में डीजे बज रहा था, जिससे आसपास के लोगों को खासी परेशानी हो रही थी। उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के सराय पीपल थाला क्षेत्र में ये घटना मंगलवार को दोपहर में हुई। अब्दुल सत्तार और उसके 4 बेटों सहित 6 लोगों ने सुशील के परिवार पर हमला किया, जिसमें से 4 को गिरफ्तार कर लिया गया है और 2 अभी भी फरार हैं। इन सभी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है।

उस इलाके में पुलिस को तैनात कर दिया गया है क्योंकि मामला दो समुदायों के बीच का होने के कारण आशंका है कि सांप्रदायिक तनाव फ़ैल सकता है। पुलिस का कहना है कि उसे मामले की पूरी जानकारी है और कार्रवाई भी की जा रही है, ऐसे में किसी को भी अफवाहों पर भरोसा करने की ज़रूरत नहीं है। ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ की खबर के अनुसार, एडिशनल डीएसपी विक्रम हरिमोहन मीणा ने कहा कि इस मामले में कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं है।

उन्होंने कहा कि ये दो पड़ोसी परिवारों का मामला है, जो तेज़ में गाने बजाने को लेकर लड़ गए। दिल्ली पुलिस ने बताया कि बृहस्पतिवार की दोपहर 3:15 बजे उनके कण्ट्रोल रूम को एक कॉल आई जिसमें बताया गया कि आदर्श नगर मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 4 के पास के इलाके में स्थित एक झोपड़पट्टी में लड़ाई-झगड़ा हो रहा है। वहाँ पहुँची पुलिस ने देखा कि सुशील व उनके दोनों भाइयों पर अब्दुल सत्तार व उसके परिवार के 6 लोगों ने हथियारों से हमला किया गया था।

तुरंत ही घायलों को बाबू जगजीवन राम मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया। सुशील की मौत हो गई। उनके दोनों भाइयों सुनील और अनिल का बयान दर्ज किया गया है। उन्हें इलाज के लिए सफदरगंज अस्पताल रेफर किया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि इन तीनों पर चाकुओं से हमला किया गया था। पीड़ित परिवार का कहना है कि आरोपित पहले से हत्या की ताक में थे, तेज़ आवाज़ में गाने बजाना तो एक बहाना था।

PTI की खबर के अनुसार, अब्दुल सत्तार आज़ादपुर मंडी में लहसुन का व्यापार करता है। उसके चारों बेटे का नाम शाहनवाज, आफ्ताक, चाँद और हसीं है। इस घटना में अब्दुल की पत्नी शाहजहाँ को भी चोट आई है। हालाँकि, सुशील के बारे में पुलिस ने बताया है कि उस पर पहले शराब की तस्करी का आपराधिक मामला दर्ज था। सुशील की पत्नी और एक बेटा है। शाहनवाज और आफ्ताक को गिरफ्तार कर लिया गया है। अनिल की हालत अभी भी गंभीर है।

आदर्श नगर इलाके में ही हुई थी राहुल की हत्या

ज्ञात हो कि दिल्ली के आदर्श नगर में ही कुछ दिनों पहले राहुल राजपूत की हत्या कर दी गई थी। 19 वर्षीय राहुल राजपूत दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के स्कूल ऑफ ओपन लर्निग (SOS) से बीए अंग्रेजी ऑनर्स की पढ़ाई कर रहा था। उसकी लड़की दोस्त ने बताया था कि वो कहती रही कि राहुल की तबियत खराब है, उसे मत मारो – लेकिन उसके भाई मुहम्मद और अफरोज उसे पीटते रहे। पिटाई के समय राहुल को किशोरी बचाने की कोशिश कर रही थी।

मुंगेर: वरिष्ठ महिला IPS अधिकारी ने SP लिपि सिंह को याद दिलाए नियम, कहा- चेतावनी व आँसू गैस का था विकल्प

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मुंगेर में माँ दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन में पुलिस व जनता की भिड़ंत में 2 लोगों के मरने और 23 के घायल होने की बात सामने आई है। अब बेंगलुरु की वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी डी रूपा ने मुंगेर की एसपी व जदयू सांसद आरसीपी सिंह की बेटी लिपि सिंह को उनका कर्तव्य याद दिलाया है। सोशल मीडिया पर लोग लिपि सिंह की तस्वीर शेयर कर के उनकी तुलना जनरल डायर तक से कर रहे हैं।

कर्नाटक सरकार की गृह सचिव डी रूपा ने सीधा आरोप लगाया कि मुंगेर में माँ दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन के दौरान लोगों को काबू में करने के लिए पुलिस द्वारा तमाम नियम-क़ानूनों की धज्जियाँ उड़ाई गई हैं। रूपा ने मुंगेर की एसपी लिपि सिंह को सीआरपीसी की धाराओं की याद दिलाते हुए कहा कि भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस के न्यूनतम बल का उपयोग किया जाना चाहिए। साथ ही याद दिलाया कि भीड़ द्वारा अवरोध पैदा करने पर फोर्स की उचित संख्याबल का भी निर्धारण किया जाता है।

उन्होंने नियम समझाते हुए कहा कि पुलिस को गोली चलाने से पहले चेतावनी दें चाहिए, या फिर आँसू गैस के गोलों का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर दुःख जताया कि मुंगेर में इनमें से किसी भी नियम का पालन नहीं किया गया। मुंगेर में हुई घटना को लेकर विपक्षी दलों और जनता ने भी पुलिस को दोषी ठहराया है। वायरल हुए वीडियो के आधार पर पुलिस को ही इस घटना के लिए दोषी माना जा रहा है।

मुंगेर के दीनदयाल चौक के पास हुई इस घटना के वायरल वीडियो के जाँच किए जाने की बात कही जा रही है। पुलिस ने इस बात से इनकार किया है कि उसकी गोली से किसी की मृत्यु हुई है, या फिर कोई घायल हुआ है। डीएम राजेश मीणा वायरल वीडियो के जाँच के बाद ही टिप्पणी करने की बात करते हुए कहते हैं कि जिले में अस्थिरता और अशांति फैलाने का काम किया जा रहा है। पुलिस-प्रशासन ने अपनी गलती होने से इनकार कर दिया है।

इस घटना के प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि थाना प्रभारियों ने उन लोगों पर मूर्ति आगे बढ़ाने का दबाव बनाया। उन लोगों ने थाना प्रभारी की बात भी मान ली और आपस में कुछ विचार-विमर्श करने लगे कि तभी थाना प्रभारी को पुलिस की तरफ से फोन आया, वो लोग मैडम-मैडम करके बात कर रहे थे। उनका कहना है कि पुलिस ने फायरिंग करने के बाद उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया। उन लोगों ने काफी मुश्किल से साइकिल से, रिक्शा से, मोटरसाइकिल पर, कंधा पर, जैसे संभव हो सका, हॉस्पिटल लेकर आए और उनका इलाज करवा रहे हैं। 

अनंत सिंह के अड्डों पर छापेमारी से चर्चा में आई थी लिपि सिंह

बता दें कि आईपीएस अधिकारी लिपि सिंह बिहार के बाहुबली नेता अनंत सिंह के ठिकानों पर छापेमारी के बाद चर्चा में आई थीं। उन्होंने अनंत सिंह के खिलाफ यूएपीए के तहत एफआईआर दर्ज की थी, जिसके बाद विधायक अनंत सिंह को फरार होना पड़ा था। अनंत पटना के मोकामा से बतौर MLA हैट्रिक लगा चुके हैं। अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी ने आरोप लगाया था कि वो जानबूझ कर उनके करीबियों को परेशान कर रही हैं, जिसके बाद उनका ट्रांसफर हुआ था।