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पैगंबर मोहम्मद का जन्मदिन मनाने के बहाने सुनसान जगह ले जाकर गैंगरेप: शाहिद गिरफ्तार

पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त स्थित लाहौर की एक यूनिवर्सिटी की छात्रा को शाहिद अली ने पैगंबर मोहम्मद का जन्मदिन से संबंधित समारोह में हिस्सा लेने की बात कहकर अपने साथ ले गया और फिर तीन दोस्तों के साथ मिलकर उसके साथ गैंगरेप किया। बता दें कि भारत और पाकिस्तान में इस्लाम के अनुयायी हर साल 30 अक्टूबर के दिन पैगम्बर मोहम्मद का जन्मदिन मनाते हैं जिसे ईद उल नबी भी कहा जाता है।

पीड़िता फैसलाबाद में गवर्नमेंट कॉलेज (जीसी) विश्वविद्यालय की एक छात्रा है। पीड़िता ने पुलिस के पास दर्ज शिकायत में आरोप लगाया कि उसका सहपाठी शाहिद अली गत 23 अक्टूबर को उसे अपने साथ लाहौर से लगभग 150 किलोमीटर दूर अपने गाँव चिन्योट ले गया। शाहिद अली उसे पैगंबर मोहम्मद के जन्म की बरसी के संबंध में एक समारोह में भाग लेने के बहाने लेकर गया था।

उसने आरोप लगाया कि जब वे चिन्योट पहुँचे, तो शाहिद उसे बंदूक की नोक पर एक सुनसान जगह पर ले गया और उसके तीन अन्य दोस्तों – इमरान, रियाज़ और तसव्वर के साथ मिलकर उसका गैंगरेप किया। पुलिस ने कहा कि लड़की के मेडिकल टेस्ट में बलात्कार की पुष्टि हुई है।

पुलिस ने मुख्य आरोपित शाहिद को गिरफ्तार कर लिया है और अन्य अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। पंजाब के पुलिस महानिरीक्षक इनाम घानी ने घटना का संज्ञान लिया और फैसलाबाद क्षेत्रीय पुलिस अधिकारी (आरपीओ) को अन्य आरोपितों को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया।

गौरतलब है कि पिछले दिनों पाकिस्तान के पेशावर जिले के चारसद्दा (Charsadda) से 29 महीने की मासूम को अगवा कर बलात्कार और निर्मम हत्या का मामला सामने आया था। पुलिस को बच्ची का शव पेशावर के जब्बा कोरोना इलाके में मिला। चारसद्दा के जिला पुलिस अधिकारी मोहम्मद शोएब खान ने कहा कि पुलिस ने बच्ची की पिता की शिकायत पर अज्ञात अपहरणकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। उन्होंने कहा था कि बच्ची के शरीर पर प्रताड़ना के निशान मिले थे। 

वहीं मथुरा में विदेशी नाबालिग लड़की का बलात्कार करने के आरोप में 2 सितंबर, 2020 को यूपी पुलिस ने एक पाकिस्तानी युवक को गिरफ्तार किया था। यूक्रेन निवासी पीड़िता के पिता द्वारा कोतवाली में दर्ज कराए गए मुकदमे के अनुसार 31 अगस्त को रात करीब 8:30 बजे पाकिस्तानी युवक लड़की के यहाँ आया और नाबालिग को अकेला पाकर उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया

अगस्त में पाकिस्तान के सिंध प्रान्त स्थित कंदियारो की एक मस्जिद में बच्ची से रेप का मामला सामने आया था। पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन ने एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा था, “सिंध-पाकिस्तान के नंदशहरो फिरोज, कंदियारो में इस्लामिक मौलवी ने मस्जिद में एक बच्ची के साथ कुरान पढ़ते हुए बलात्कार किया। यह देशभर (पकिस्तान) में हर रोज होता है। लेकिन इस्लाम में इसे ईशनिंदा नहीं माना जाता है। यहाँ 1000 लोग लिंचिंग कर उन्हें मार देते हैं, या फिर झूठे आरोपों में मौत की सजा देते हैं।”

मुंगेर हत्याकांड: पुलिस कार्रवाई के बाद से ही गायब हैं 24 लोग, स्थानीय लोगों ने प्रशासन को लिखा पत्र

बिहार के मुंगेर जिले में दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन के दौरान पुलिस और सुरक्षाबलों के बीच झड़प में एक युवक की मौत और 6 से ज्यादा लोग घायल हो गए। घायलों का इलाज सदर अस्पताल में किया जा रहा है। आक्रोशित लोगों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने बेगुनाहों पर गोली चलाई है। चश्मदीदों ने दो थाना प्रभारियों पर आरोप लगाया है।

अब मामले में कई लोगों के गायब होने की खबरें भी सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि दुर्गा विसर्जन के जुलूस पर पुलिस की कार्रवाई के बाद से कई लोग लापता हैं। लापता लोगों में से अधिकांश दुर्गा प्रतिमा के आसपास के समूह से सबंधित हैं, जिन पर पुलिस ने कार्रवाई की। ये लोग वीडियो में दिखाई दे रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने इस बारे में प्रशासन को पत्र लिखा है। उन्होंने मुंगेर के एसपी को पत्र लिखते हुए निवेदन किया है कि वो गायब लोगों की स्थिति की बारे में बताने की कृपा करें। उनका कहना है कि वो घटना वाली रात से ही बच्चों को खोज रहे हैं, वो बच्चे सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखे जा रहे हैं, लेकिन उनका कुछ पता नहीं चल पा रहा है। इस पत्र में उन्होंने 24 लोगों के नामों की सूची भी दी है, जो लापता हैं।

बता दें कि इससे पहले घटना का दो नया वीडियो आया था। जिसमें गोली चलने की आवाज सुनी जा सकती है। इसके अलावा एक वीडियो में चश्मदीदों ने बासुदेवपुर थाना प्रभारी शिशिर कुमार सिंह और मुफस्सिल थाना प्रभारी ब्रजेश कुमार सिंह पर आरोप लगाया। उनका कहना था कि उन्होंने बिना कोई अग्रिम सूचना दिए एक-दो हवाई फायरिंग करके लोगों पर गोलियाँ चलानी शुरू कर दी। एक लड़के के सिर में गोली लगी और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद भी गोलियाँ चलती रही। उन्होंने दोनों थाना प्रभारियों के बर्खास्तगी की माँग की।

गौरतलब है कि डीएम राजेश मीणा और एसपी लिपि सिंह ने इस मामले में सफाई देते हुए बयान जारी किए थे। एसपी ने दावा किया था कि प्रतिमा विसर्जन के दौरान असामाजिक तत्वों ने पुलिस पर पथराव किया और गोलीबारी की, जिसके बाद अपने बचाव में पुलिस ने कार्रवाई की। बता दें कि एसपी लिपि सिंह, जदयू (JDU) के राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह की बेटी हैं।

पत्नी पर गलत नजर रख रहे मोहम्मद आलम ने की रामू संतराम की चाकू से हत्या: 3 गिरफ्तार

गुजरात के सूरत में एक व्यक्ति ने अपने दो साथियों के साथ मिल कर एक कारखाना मालिक की हत्या कर दी। सूरत में आरोपित मोहम्मद आलम ने कारखाना मालिक रामू संतराम गोस्वामी की पत्नी और 3 साल की बच्ची के सामने ही नृशंस तरीके से उनकी हत्या कर डाली। आरोपित मोहम्मद आलम का दावा है कि वो मृतक रामू संतराम की पत्नी से प्यार करता था। पुलिस ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर के आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

‘दैनिक भास्कर’ की खबर के अनुसार, अमरोली के रहने वाले रामू संतराम गोस्वामी कतारगाम क्षेत्र में कपड़ा पॉलिस करने का कारखाना चलाते थे। कुछ दिन पहले उनकी पत्नी के मोबाइल फोन पर किसी अज्ञात व्यक्ति का कॉल आया। वो बार-बार पूजा से बात कराने की जिद पर अड़ा हुआ था। पत्नी ने रॉन्ग नंबर बता कर कॉल काट दिया, लेकिन वो बार-बार परेशान करता रहा। 3-4 कॉल्स के बाद आरोपित ने बताया कि वो उनसे ही बात करना चाहता है।

इसकी शिकायत उन्होंने अपने पति से की। जब छानबीन की गई तो पता चला कि ये संतराम के ही परिचित आलम का फोन नंबर है। आलम की इस करतूत के बाद संतराम उसके घर पहुँचे हुए उसे समझाया। साथ ही उन्होंने पुलिस में जाने की भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा था कि अगर आलम ने उनकी पत्नी को परेशान करना नहीं छोड़ा तो वो थाने में शिकायत करेंगे। इसके बाद अगले 2-3 दिन तक आलम शांत रहा और उसने फोन कर के परेशान नहीं किया।

अचानक रविवार (अक्टूबर 25, 2020) की रात 11 बजे आलम अपने दो साथियों अली और सातला के साथ संतराम के घर पर आ धमका। दरवाजा खुलते ही तीनों अपराधी घर में घुसे और उन्होंने गेट को अंदर से लगा दिया। इसके बाद पत्नी व 3 साल की बेटी के सामने ही संतराम के पेट व सीने में कई बार चाकू से वार किया। फिर वो तीनों फरार हो गए। अस्पताल में इलाज के दौरान पीड़ित की मौत हो गई। इस घटना के अगले ही दिन लड़के पुलिस ने तीनों को धर-दबोचा।

अभी पूरा देश हरियाणा के फरीदाबाद स्थित बल्लभगढ़ में ‘लव जिहाद’ के मामले में तौफीक द्वारा छात्रा निकिता तोमर की हत्या की वारदात से उबल रहा है। कॉन्ग्रेस के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री खुर्शीद अहमद निकिता के हत्यारे के चचेरे दादा लगते हैं। इसी तरह वर्तमान में मेवात के नूँह से कॉन्ग्रेस विधायक आफताब अहमद आरोपित तौसीफ के चाचा हैं। दिनदहाड़े हुई इस घटना का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

छपरा के ‘नाथ’ जिसे अपने ही चेले से मिली हार तो बदले में उसे बम से उड़ाया, RJD से बेटा लड़ रहा चुनाव

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 को लेकर राजनीतिक गर्मागर्मी अपने चरम पर है। वास्तव में, बिहार की राजनीति ही असल मायनों में ‘गर्मागर्मी’ का सही और प्रत्यक्ष उदाहरण है। यहाँ चुनाव में जन समर्थन के साथ पैसा और बाहुबल का भी खेल देखने को मिलता है। चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आज राजनीति के एक ऐसे गुरु प्रभुनाथ सिंह की बात करेंगे, जिसे अपने ही शागिर्द से हार मिली। बदले की आग में उसने अपने शागिर्द की ही हत्या कर दी।

अपने सियासी गुरु को शिकस्त देना अशोक सिंह को पड़ा भारी

शागिर्द को विधायक बने हुए 6 महीने भी नहीं हुए थे कि उसके सियासी गुरु ने उसे बम से उड़ाकर उसकी हत्या करवा दी थी। इस विधायक का नाम था अशोक सिंह। जो किसी जमाने में बाहुबली राजनेता प्रभुनाथ सिंह के शागिर्द थे और बाद में उन्हें ही चुनावी जंग में शिकस्त दे दी। माना जाता है कि इस हार के एवज में प्रभुनाथ सिंह ने अशोक सिंह पर बम से हमला करवाकर उनके चिथड़े करवा दिए थे।

वह छपरा के कहलाते थे ‘नाथ’

प्रभुनाथ सिंह वह राजनेता रहे हैं, जिसकी किसी जमाने में बिहार के सारण में अपनी सरकार थी। जिसे जनता छपरा का ‘नाथ’ कहती थी। सियासत का वह प्रभुनाथ इन दिनों विधायक अशोक सिंह हत्याकांड मामले में जेल की कालकोठरी में रातें गिन रहा है। सजा सुनाने के दौरान हजारीबाग कोर्ट में पीड़ित पक्ष के वकील ने टिप्पणी की थी कि प्रभुनाथ सिंह ने कानून व्यवस्था को कभी समझा ही नहीं, लेकिन कोर्ट ने इसे सब कुछ समझा दिया।

बाहुबल के दम पर 30 साल सियासत में बना रहा

प्रभुनाथ सिंह बिहार की सियासत का वह नाम है, जो शिखर पर पहुँचा, लेकिन उसे अपने ही शागिर्द अशोक सिंह से शिकस्त मिली। प्रभुनाथ सिंह ने कभी लालू प्रसाद यादव का हाथ थामा तो कभी नीतीश कुमार के कैंप की शोभा बढ़ाते हुए देखे गए। लेकिन सत्ता और बाहुबल के नशे में वह भूल गए कि कानून से बड़ा कोई नहीं है। सीमेंट कारोबारी प्रभुनाथ सिंह बाहुबल के दम पर करीब 30 साल सत्ता में बना रहा। 

छपरा के मशरख विधानसभा सीट से पहली बार प्रभुनाथ सिंह निर्दलीय 1985 में चुनाव जीता। विधायक बनने से पहले प्रभुनाथ सिंह पर आरोप था कि उसने मशरक के तत्कालीन विधायक रामदेव सिंह काका की हत्या करवाई है। 1990 में प्रभुनाथ सिंह जनता दल के टिकट पर फिर से विधानसभा पहुँचा। इस दौर में अशोक सिंह प्रभुनाथ सिंह के साया बने हुए थे। लोग कहते हैं कि अशोक सिंह ही प्रभुनाथ सिंह के असल शागिर्द थे।

शागिर्द से मिली हार को पचा नहीं पाए छपरा के ‘नाथ’

प्रभुनाथ सिंह ने कभी सोचा भी ना था कि अशोक सिंह यूँ उसके शागिर्द बनकर उसकी ही राजनीतिक जमीन खिसका देंगे। जनता दल ने जब अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की तो प्रभुनाथ सिंह भौचक्क रह गया। पार्टी ने उसके शागिर्द कहे जाने वाले अशोक सिंह को मशरख से प्रत्याशी बनाया। अपने चेले के सामने अपनी ताकत को दिखाने के लिए प्रभुनाथ सिंह बिहार पीपुल्स पार्टी के टिकट पर चुनाव में उतरे, लेकिन काफी धनबल खर्च करने के बाद भी उसे करारी हार मिली। इस तरह अशोक सिंह छपरा के प्रभु की कुर्सी हथियाने में कामयाब रहे। 

इसके बाद अशोक सिंह पटना में रहकर अपना राजनीतिक कद बढ़ाने में जुट गए। वहीं, एक समय अशोक सिंह के कथित गुरु रह चुके प्रभुनाथ सिंह इस हार की आग में जल रहे थे। यह वह वक्त था जब प्रभुनाथ सिंह ने समझौते को अपनाया, लेकिन साथ ही बदले के लिए सही मौके की तलाश करते रहे। 3 जुलाई 1995 को अशोक सिंह को विधायक बने हुए तीन महीने भी नहीं हुए थे कि पटना आवास पर उन्हें बम से उड़ा दिया गया। 

जिस वक्त अशोक को बम से उड़ाया था उस वक्त प्रभुनाथ सिंह के भाई दीनानाथ सिंह भी मौके पर मौजूद थे। हत्या में प्रभुनाथ सिंह, उनके भाई दीनानाथ सिंह तथा मशरक के रितेश सिंह को नामजद अभियुक्त बनाया गया। हत्याकांड के बाद प्रभुनाथ सिंह ने पटना की राजनीति छोड़कर दिल्ली का रुख किया और लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट गया। हालाँकि, इस मामले में वो बाद में दोषी पाया गया और अब जेल में सजा काट रहा है।

नीतीश के सहयोग से संसद पहुँचा प्रभुनाथ

इसके बाद लगा कि छपरा में प्रभुनाथ सिंह का एकक्षत्र राज्य हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। इस हत्याकांड के बाद प्रभुनाथ सिंह का पतन शुरू हो गया। अशोक सिंह की पत्नी चांदनी कानून के सामने इंसाफ के लिए डटी रहीं। कोर्ट की हर तारीख पर उनका हौसला देखते ही बनता था। इसी बीच प्रभुनाथ सिंह समता पार्टी में चला गया और 1998 के लोकसभा चुनाव में महाराजगंज लोकसभा सीट से जीतकर संसद पहुँच गया।

नीतीश से रार, लालू से प्यार

24 अगस्त 2006 को लोकसभा की बैठक में प्रभुनाथ सिंह ने लालू प्रसाद यादव पर सीधे आरोप लगाया था कि आरा में हुई एक हत्या में लालू के रिश्तेदार शामिल थे। लालू प्रसाद यादव ने प्रभुनाथ सिंह को सदन में गुंडा तक कहा था। प्रभुनाथ सिंह अगस्त 2010 में नीतीश से अलग हुआ और अपने चिर प्रतिद्वंदी लालू प्रसाद यादव से हाथ मिला लिया।

प्रभुनाथ की राष्ट्रीय सियासत में दखल

प्रभुनाथ सिंह ने उस दौर में बिहार की सियासत में कदम रखा, जब बंदूक और लाठी के बल पर चुनाव का फ़ैसला होता था। नेता अपने साथ लठैतों और बंदूकवाले गुंडों की फौज पालते थे, जो अपने नेता के लिए नोट और वोट बटोरने से लेकर बूथ कैप्चरिंग का भी काम करते थे लेकिन दौर बदला और लाठी और बंदूक रखने वाले गुंडे खुद उन राजनेताओं के सिर पर पैर रखकर आगे निकलने लगे।

सांसद होने के बावजूद यह वह दौर था जब प्रभुनाथ सिंह पर कई मुकदमे दर्ज हुए। कभी डीएम को धमकाने के मामले में तो कभी चुनाव अयोग पर तंज कसने को लेकर। लेकिन सच तो ये है कि प्रभुनाथ सिंह ने सियासी रसूख के चलते हर बार कानूनी शिकंजे से दूर रहा। नोट को वोट में बदलना और बाहुबल का दम दिखाना, बिहार के इस पूर्वी इलाके की पहचान रही है। 

हालाँकि, सियासत में कूदने से पहले ही प्रभुनाथ का आस्तीन दाग़दार हो चुका था। 1980 में मशरक के विधायक रामदेव सिंह की हत्या हुई थी और आरोप लगा था प्रभुनाथ सिंह पर। कहा जाता था कि अपनी चुनावी पारी शुरू करने के लिए रामदेव सिंह को एक कारोबारी ने अपने रास्ते से हटा दिया। चाहे दामन पर कितने भी दाग क्यों न हो, वो अपने रसूख का इस्तेमाल कर दागदार दामन को बेदाग करने की जुगत में लगा रहा। ऐसा नहीं है कि कामयाबी नहीं मिली बल्कि इसी दौरान सबूतों के अभाव में रामदेव सिंह काका की हत्या के आरोप से वो बरी भी हुआ।

1998 के आम चुनाव में प्रभुनाथ सिंह ने समता पार्टी के टिकट पर राजपूत वोटों का गढ़ कहे जाने वाले महाराजगंज लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और स्थानीय राजपूतों के सपोर्ट के बिना कॉन्ग्रेस के महाचंद्र प्रसाद सिंह को हराकर लोकसभा में पहुँचा। 1999 में हुए लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने यहाँ से जीत दर्ज की।

उसके बाद प्रभुनाथ सिंह की सियासी नजदीकियाँ नीतीश कुमार से बढ़ने लगी और 2004 में हुए आम चुनाव में जदयू के टिकट पर उन्होंने जीत हासिल की। 2009 के लोकसभा चुनाव में वे फिर जीत की हैट्रिक लगाने से चूक गए और राजद के उमाशंकर सिंह के हाथों उसे पराजय झेलनी पड़ी।

वर्ष 2012 में महाराजगंज सांसद उमाशंकर सिंह का निधन हो गया और उपचुनाव से ठीक पहले प्रभुनाथ सिंह ने नीतीश यादव का हाथ छोड़ लालू प्रसाद यादव से हाथ मिलाया और राजद में शामिल हो गया। 2013 में महाराजगंज लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में राजद के टिकट पर प्रभुनाथ सिंह को जीत मिली। इस चुनाव को नीतीश और लालू की नाक की लड़ाई की तौर पर देखा जा रहा था। प्रभुनाथ सिंह छपरा ज़िले की महाराजगंज सीट से आरजेडी के चुनाव चिन्ह पर फिर से ताल ठोकने उतरा और लालू यादव अपने पुराने प्रतिद्वंदी को चुनाव जिताने पहुँचे। वोटिंग हुई, और चाहे जैसे कहें प्रभुनाथ सिंह ने बाज़ी मार ली। 

साल 2014, लोकसभा चुनाव

बीजेपी ने प्रधानमंत्री पद के लिए गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी को प्रोजेक्ट किया। जनता दल युनाइटेड के नीतीश को नरेंद्र मोदी का साथ स्वीकार नहीं था और दोनों पार्टियों का सालों का नाता टूट गया। सियासी समीकरण उलट चुके थे, ये मोदी की लहर थी और इसमें विरोधी दलों में किसी के लिए भी सीट बचा पाना काफी मुश्किल होने वाला था, प्रभुनाथ को इसका इल्म था, लिहाज़ा एक बार फिर उसका बाहुबली रूप सामने आया जो चुनावी रैलियों में खुलेआम अपने समर्थकों से बूथ कैप्चरिंग तक करने की बात कह देता था।

प्रभुनाथ सिंह ने रैली में खुलेआम कहा था, “एक बटन दबाना हो, एक दबाओ, मौका मिले तो दो तीन चार भी दबाओ और अगर कोई सामने आए उसे अपनी ताकत भी दिखाओ।” साम, दाम, दंड, भेद, कुछ काम नहीं आया और साल 2014 के लोकसभा चुनावों में प्रभुनाथ सिंह हार गया, लेकिन ऐसा नहीं था कि इससे उसका सियासी रसूख कम हो गया था। अपने छोटे भाई केदारनाथ सिंह को तीन बार विधायक बनवा चुका था और 2014 के उपचुनाव में छपरा विधानसभा सीट से अपने वारिस रणधीर कुमार सिंह को भी MLA बनवा चुका था।

बेटे और भाई को भी बनवाया विधायक

प्रभुनाथ सिंह अपने सियासी रुतबे और बाहुबल के दम पर भाई केदारनाथ को मशरक और बनिया विधानसभा सीट से तीन बार विधायक बनवाने में सफल रहा। इसके अलावा 2014 के उपचुनाव में छपरा सीट से बेटे रणदीप को भी विधायकी के चुनाव में जीत दिलवाया। लेकिन 2015 के विधानसभा चुनाव में बेटे की कारारी हार हुई। इसके बाद से प्रभुनाथ सिंह का सियासी पतन शुरू हो गया। क्योंकि कोर्ट में यह दबंग पूरी तरह घिरता चला गया। प्रभुनाथ सिंह का सूरज अस्त हो रहा था। उसका वर्चस्व कम होता जा रहा था। उधर महागठबंधन की सरकार बनी लेकिन गठबंधन ज़्यादा दिन चल नहीं सका। इस बीच में वो वक़्त आता है जब होता है प्रभुनाथ सिंह के गुनाहों का हिसाब।

अब सलाखों के पीछे कट रही जिंदगी

विधायक अशोक सिंह की हत्या मामले में अदालत ने प्रभुनाथ सिंह, उसके भाई दीनानाथ सिंह और भतीजे रितेश सिंह को दोषी ठहराया और 23 मई 2017 को तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई। 22 साल बाद उम्मीद इंसाफ की चौखट पर जीत गई और बाहुबल के दम पर ताउम्र जनता के रहनुमा होने का भ्रम खरीदने वाले प्रभुनाथ सिंह को सलाखों में कैद कर दिया गया। जेल में भी उसने बाहुबल और धनबल का प्रयोग किया और इसकी बानगी तब देखने को मिली जब जेल में छापेमारी के दौरान प्रभुनाथ सिंह के कब्जे से 76 हजार रूपए नगद और मोबाइल फोन बरामद हुआ। 

प्रभुनाथ सिंह जेल में है, सज़ायाफ़्ता होने की वजह से वो चुनाव नहीं लड़ सकता, बेटा रणधीर सिंह सियासी विरासत को आगे बढ़ाते हुए छपरा सीट से 2020 में ताल ठोक रहा है, देखना है डर के आधार पर वर्चस्व एक फिर कायम हो पाएगा या नहीं। प्रभुनाथ सिंह के खिलाफ लगभग 40 गंभीर मुकदमे हैं, लेकिन उसे अब तक केवल एक ही केस में सजा मिली है।

बिहार में बाहुबलियों को टिकट दे मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँचना चाहते हैं तेजस्वी यादव 

लालू प्रसाद यादव की पार्टी राजद का कमान संभाल रहे तेजस्वी यादव किसी भी कीमत पर चुनाव जीतना चाहते हैं। चुनाव जितने के लिए उन्होंने खुलकर बाहुबलियों पर भरोसा किया है। राजद ने छपरा से प्रभुनाथ सिंह के बेटे रणधीर सिंह को टिकट दिया है। तेजस्वी यादव ने बाहुबलियों को या फिर उनकी पत्नियों और बेटों को बड़ी संख्या में अपना उम्मीदवार बनाया है। 

दूसरी ओर पार्टी ने सहरसा से बाहुबली सांसद रहे आनंद मोहन की पत्नी को इस बार चुनावी मैदान में उतारा है। राजद ने आनंद मोहन की पत्नी और उनके बेटे चेतन आनंद को भी टिकट दिया है। चेतन आनंद जहाँ अपने परिवार की परंपरागत सीट शिवहर से चुनावी मैदान में होंगे तो वहीं उनकी माँ लवली आनंद सरसा से चुनाव लड़ेंगी।

इसके अलावा राजद ने जेल में बंद बाहुबली विधायक अनंत सिंह जैसे नेताओं को भी टिकट दिया है जो कि इस बार मोकामा से चुनावी ताल ठोक रहे हैं और नामांकन भी कर चुके हैं। राजद से जिन बाहुबलियों के परिवार को टिकट मिला है उनमें रामा सिंह, अरूण यादव, राजबल्लभ यादव जैसे चेहरे भी शामिल हैं।

मुंगेर हत्याकांड: चश्मदीदों ने दो थाना प्रभारियों पर लगाया आरोप, बताया पूरा घटनाक्रम

बिहार चुनाव के बीच मुंगेर जिले में दुर्गा विसर्जन के दौरान हिंसक वारदात हुई है। शहर के दीन दयाल चौक पर बदमाशों द्वारा फायरिंग और पत्थरबाजी की घटना को अंजाम दिया गया जिसमें आधा दर्जन से अधिक लोगों को गोली लगी है और कई घायल हो गए हैं। 

वहीं, इस घटना में एक युवक की मौत भी हो गई है और दूसरे युवक को भागलपुर रेफर किया गया है। आक्रोशित लोगों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने बेगुनाहों पर गोली चलाई है। चश्मदीदों ने दो थाना प्रभारियों पर आरोप लगाया है।

इसका एक वीडियो सामने आया है, जिसमें चश्मदीद मीडिया के जरिए अपनी बात रख रहे हैं। इसमें उन्होंने बासुदेवपुर थाना प्रभारी शिशिर कुमार सिंह और मुफस्सिल थाना प्रभारी ब्रजेश कुमार सिंह पर आरोप लगाया है।

चश्मदीद का कहना है कि थाना प्रभारियों ने उन लोगों पर मूर्ति आगे बढ़ाने का दबाव बनाया। उन लोगों ने थाना प्रभारी की बात भी मान ली और आपस में कुछ विचार-विमर्श करने लगे कि तभी थाना प्रभारी को पुलिस की तरफ से फोन आया, वो लोग मैडम-मैडम करके बात कर रहे थे।

चश्मदीद आगे कहता है, “शायद उनको उधर से आदेश मिला कि दंडात्मक कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाए, दबाव बनाया जाए। इसके बाद उन लोगों ने बिना कोई अग्रिम सूचना दिए एक- दो हवाई फायरिंग करके लोगों पर गोलियाँ चलानी शुरू कर दी। वहीं पर एक लड़का खड़ा था, जिसकी उम्र 15 से 18 साल होगी, उसके सिर में गोली लगी और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद भी गोलियाँ चलती रही। लगभग 6 गोली तो हमने लगते देखा है। दोनों थाना प्रभारी के साथ 25-30 की संख्या में सीआरपीएफ की फोर्स थी, वो चाहते तो हॉस्पिटल पहुँचा सकते थे, लेकिन उन लोगों ने मानवता को तार-तार किया है। उन लोगों ने फोन पर बात किया, जिसमें शायद उनसे कहा गया कि छोड़ दो सारे को।”

उन्होंने बताया कि पुलिस ने फायरिंग करने के बाद उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया। उन लोगों ने काफी मुश्किल से साइकिल से, रिक्शा से, मोटरसाइकिल पर, कंधा पर, जैसे संभव हो सका, हॉस्पिटल लेकर आए और उनका इलाज करवा रहे हैं। डॉक्टरों ने तत्काल इलाज शुरू किया।

इसके साथ ही चश्मदीदों ने मीडिया के माध्यम से बिहार के डीजीपी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वो त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों थाना प्रभारी को अविलंब बर्खास्त किया जाए। आक्रोशित भीड़ ने सीबीआई जाँच की भी माँग की है।

गौरतलब है कि घटना का दो नया वीडियो आया है। जिसमें गोली चलने की आवाज सुनी जा सकती है। डीएम राजेश मीणा और एसपी लिपि सिंह ने इस मामले में सफाई देते हुए बयान जारी किए थे। एसपी ने दावा किया था कि प्रतिमा विसर्जन के दौरान असामाजिक तत्वों ने पुलिस पर पथराव किया और गोलीबारी की, जिसके बाद अपने बचाव में पुलिस ने कार्रवाई की। बता दें कि एसपी लिपि सिंह, जदयू (JDU) के राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह की बेटी हैं।

J&K में नया भूमि कानून लागू होते ही विपक्षी नेताओं ने शुरू किया ‘विलाप’, किसी ने कहा- ‘अस्वीकार्य’ तो कोई ‘हाईवे डाका’

गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीद-बिक्री के संबंध में मंगलवार (अक्टूबर 27, 2020) को महत्वपूर्ण सूचना जारी की। मंत्रालय द्वारा जारी किए गए निर्देश के मुताबिक अब केंद्र शासित प्रदेश में कोई भी व्यक्ति जमीन खरीद सकता है और वहाँ बस सकता है। हालाँकि, अभी खेती की जमीन को लेकर रोक जारी रहेगी।

नए भूमि कानून के पास होने के साथ ही विपक्षी दल और ‘सेकुलर’ नेताओं का मेल्टडाउन शुरू हो गया है। इस पर उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लिखा कि जम्मू-कश्मीर में जमीन के मालिकाना हक के कानून में जो बदलाव किए गए हैं, वो अस्वीकार्य हैं। अब तो बिना खेती वाली जमीन के लिए स्थानीयता का सबूत भी नहीं देना है। इसी के साथ कृषि भूमि के ट्रांसफर को और आसान बना दिया गया है। अब जम्मू-कश्मीर बिकने के लिए तैयार है, जो गरीब जमीन का मालिक है अब उसे और मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। 

माकपा के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी ने नए भूमि कानून को “हाइवे डाका” के रूप में वर्णित किया और घोषित किया, “इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।”

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री व पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भी नए भूमि कानून की आलोचन करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने आखिरकार जम्मू-कश्मीर को बेचना शुरू कर दिया। उन्होंने नए कानून को केंद्र सरकार का नापाक मंसूबा करार देते हुए कहा कि इसका मकसद जम्मू-कश्मीर के लोगों को अधिकारविहीन करना है। उन्होंने लिखा कि असंवैधानिक तरीके से अनुच्छेद 370 हटाने से लेकर जम्मू-कश्मीर के प्राकृतिक स्रोतों की लूट और अब जम्मू-कश्मीर की जमीन को बेचना सब केंद्र सरकार की साजिश है।

पाकिस्तानी संसद की कश्मीर कमेटी ने भी अपने नापाक मंसूबों को पूरा करने के लिए इस मेल्टडाउन में हिस्सा लिया। इसने दावा किया कि नया भूमि कानून कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का उल्लंघन है।

मेल्टडाउन राजनीतिक स्पेक्ट्रम के उदारवादी गिरोह के कुछ ‘बौद्धिक’ हलकों में भी स्पष्ट रूप से देखने को मिला। देविका मित्तल, जो दिल्ली विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर होने का दावा करती हैं, ने दावा किया कि नया भूमि कानून ‘फासीवादी शासन द्वारा आक्रमण का कार्य’ है।

यहाँ यह जानना उचित है कि नया भूमि कानून शेष भारत में कानूनों के अनुरूप है। अब तक, जम्मू और कश्मीर के लोग भारत के अन्य क्षेत्रों में भूमि खरीद सकते थे, लेकिन अन्य राज्यों के भारतीयों को जम्मू-कश्मीर में भूमि का अधिकार नहीं था। नया कानून अनुच्छेद 370 के उन्मूलन के उद्देश्य को आगे बढ़ाता है, जो कि भारतीय मुख्यधारा के साथ जम्मू-कश्मीर का एकीकरण है।

मुंगेर हत्याकांड: दो वीडियो जो बताते हैं कि गोली कब चली और लगातार कितनी चली

बिहार के मुंगेर में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान जमकर बवाल हुआ। विसर्जन के दौरान गोली चली, जिसमें अभी तक दो लोग घायल बताए जा रहे हैं, जबकि एक शख्स की मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने पुलिस पर गोली चलाने का आरोप लगाया। वहीं, पुलिस का कहना है कि कुछ लोगों ने जानबूझकर पथराव किया। अब इसका दो नया वीडियो आया है। जिसमें गोली चलने की आवाज सुनी जा सकती है।

इसके दूसरे वीडियो में पुलिस फोर्स की टीम दौड़ती हुई नजर आती है और फिर गोलियों की आवाज सुनाई देती है। यहीं से पहली फायरिंग की शुरुआत होती है। सोमवार (अक्टूबर 26, 2020) की रात माँ दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन यात्रा पर मुंगेर पुलिस के लाठीचार्ज के वीडियो के वायरल होने के बाद जिला प्रशासन की खासी आलोचना हो रही है।

गौरतलब है कि डीएम राजेश मीणा और एसपी लिपि सिंह ने इस मामले में सफाई देते हुए बयान जारी किए थे। बता दें कि एसपी लिपि सिंह, जदयू (JDU) के राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह की बेटी हैं। एसपी ने दावा किया था कि प्रतिमा विसर्जन के दौरान असामाजिक तत्वों ने पुलिस पर पथराव किया और गोलीबारी की, जिसके बाद अपने बचाव में पुलिस ने कार्रवाई की।

मुंगेर पुलिस का कहना था कि दुर्गा पूजा विसर्जन के दौरान हुई इस घटना में उसके 20 जवान घायल हुए हैं और एक SHO स्तर के अधिकारी का सिर फट गया। एसपी ने युवक की मौत के लिए भी असामाजिक तत्वों की गोलीबारी को जिम्मेदार ठहराया था। वहीं, डीएम राजेश मीणा ने अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील करते हुए कहा था कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। सभी प्रतिमाओं का विसर्जन किया जा चुका है। लेकिन, सोशल मीडिया पर घटना की आलोचना हो रही है।

इस घटना के लिए चुनाव आयोग पर भी निशाना साधा जा रहा है क्योंकि बिहार में आदर्श अचार संहिता लागू है और प्रथम चरण के चुनाव के लिए प्रचार का शोर भी थम ही चुका है। चुनावों के दौरान पुलिस-प्रशासन का नियंत्रण चुनाव आयोग के पास होता है, इसीलिए उस से सवाल किए जा रहे हैं कि क्या चुनाव के तारीखों की घोषणा के वक़्त दुर्गा पूजा और दशहरा को ध्यान में नहीं रखा गया? बिहार में हर गली-मोहल्ले में पंडाल बनते आ रहे हैं और दुर्गा पूजा काफी ऊर्जा के साथ मनाई जाती है।

हंसा रिसर्च ने ET की रिपोर्ट का नकारा, कहा- रिपब्लिक के साथ कोई बिजनेस डील नहीं, मुंबई पुलिस द्वारा फैलाया गया ‘सफेद झूठ’

पैसे देकर फर्जी तरीके से टीआरपी हासिल करने के मामले की जाँच कर रही मुंबई पुलिस की अपराध शाखा का दावा है कि उसे रिपब्लिक और हंसा रिसर्च कंपनी के कर्मचारियों के बीच 32 लाख रुपए के लेन देन के सबूत मिले हैं। द इकॉनॉमिक्स टाइम्स में पुलिस के हवाले से यह दावा किया गया, जिसका हंसा रिसर्च ने स्पष्ट रूप से खंडन किया है। इकॉनॉमिक्स टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से दावा किया था कि हंसा रिसर्च द्वारा रिपब्लिक टीवी को 32 लाख रुपए दिए गए थे।

कथित टीआरपी घोटाले की जाँच करने वाले एक पुलिस अधिकारी ने ईटी को बताया, “हंसा ने रिपब्लिक टीवी को 32 लाख का भुगतान किया है। जब कंपनी (हंसा) के निदेशक से पूछताछ की गई, तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की। हालाँकि, जब रिपब्लिक टीवी के सीएफओ एस सुंदरम से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्वीकार किया कि कंपनी को हंसा से 32 लाख का भुगतान मिला था। लेकिन उन्हें विवरण के बारे में कुछ याद नहीं है।”

एक प्रेस रिलीज में हंसा रिसर्च ने ऐसे सभी आरोपों से इनकार किया है। इस प्रेस रिलीज में कहा गया है, “हंसा रिसर्च में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि रिपब्लिक टीवी के साथ इसका कोई व्यापारिक लेन-देन नहीं हुआ है और न ही चैनल को कोई भुगतान किया गया है और न ही इसे चैनल से प्राप्त किया गया है। मीडिया में दर्ज एक बयान में, TRP घोटाले की जाँच कर रहे क्राइम ब्रांच के प्रवक्ता ने आरोप लगाया है कि हंसा रिसर्च ने रिपब्लिक टीवी को 32 लाख रुपए का भुगतान किया है जो गलत है।”

हंसा के ग्रुप सीईओ शेखर स्वामी ने कहा, “हमारी ग्रुप कंपनी हंसा विजन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड विज्ञापन व्यवसाय में है। यह अपने ग्राहकों के लिए विभिन्न टीवी चैनलों, समाचार पत्रों, रेडियो, डिजिटल प्लेटफार्मों और अन्य मीडिया में विज्ञापन समय और स्थान खरीदता है। यह सामान्य, नियमित व्यवसाय है। पिछली बार हंसा विजन ने रिपब्लिक टीवी में विज्ञापन का समय दो साल पहले 108 लाख रुपए के लिए सितंबर 2017 से अक्टूबर 2018 की अवधि के लिए खरीदा था। मुंबई पुलिस शायद इसे गलत तरीके से मौजूदा टीआरपी से जुड़ी जाँच से जोड़ रही है।”

तब से, फर्म ने अपने ग्राहकों के लिए 13.42 करोड़ रुपए में 55 टीवी चैनलों से विज्ञापन समय खरीदा है। प्रेस रिलीज में कहा गया है कि 2019 और 2020 में फर्म ने रिपब्लिक टीवी से कोई विज्ञापन समय नहीं खरीदा है।

शेखर स्वामी ने आगे कहा, “हंसा रिसर्च के सीईओ और टीम को बार-बार क्राइम ब्रांच के एपीआई श्री सचिन वज़े द्वारा बुलाया जाता है, और देर तक रुकने के लिए कहा जाता है। वे जाँच में सहयोग कर रहे हैं और उनके द्वारा माँगे गए विभिन्न दस्तावेज जमा किए हैं। हंसा रिसर्च और इस कंपनी के लिए काम करने वाले लोगों का ग्रुप कंपनी हंसा विजन की विज्ञापन गतिविधियों से कोई लेना-देना नहीं है।”

ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस अधिकारी ने दावा किया कि लेनदेन “संदिग्ध” था और जाँच की जा रही है। यहाँ यह ध्यान रखना आवश्यक है कि घटनाओं की शृंखला मुंबई के पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह के साथ शुरू हुई थी, जिन्होंने टीआरपी घोटाले में रिपब्लिक टीवी पर आरोप लगाया, जबकि हंसा रिसर्च रिपोर्ट और एफआईआर में इंडिया टुडे का नाम था।

गौरतलब है कि रिपब्लिक टीवी ने मिड-डे और इकॉनॉमिक टाइम्स और बेनेट, कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड को 24 घंटे का नोटिस जारी किया था, जिसमें रिपोर्ट पर माफी माँगने और शुद्धि-पत्र (प्रिंट, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर और अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर) जारी करने के लिए कहा गया था। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि हंसा रिसर्च ग्रुप प्राइवेट लिमिटेड (‘हंसा रिसर्च’) ने रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क को पैसा दिया था।

यह आरोप लगाते हुए कि इन ‘प्रकाशनों में प्रकाशित फर्जी खबरें प्रथम दृष्टया मुंबई पुलिस द्वारा फैलाए गए’ प्रतीत होते हैं, रिपब्लिक टीवी ने कहा कि उन्होंने मुंबई पुलिस को भी 9 बजे तक का समय दिया है ताकि या तो इनकार कर सकें या रिपोर्ट की पुष्टि कर सकें।

चाय स्टॉल पर शिवसेना नेता राहुल शेट्टी की 3 गोली मारकर हत्या, 30 साल पहले पिता के साथ भी यही हुआ था

पूर्व शिवसेना नेता उमेश शेट्टी के बेटे व लोनावला शहर में शिवसेना के पूर्व प्रमुख राहुल शेट्टी की कल (अक्टूबर 26, 2020) लोनावला में ही गोली मार कर हत्या कर दी गई। घटना सुबह 9:30 बजे की है। राहुल के ऊपर उनके आवास के बाहर हमला हुआ। उन्हें लगातार तीन बार गोली मारी गई।

इतना ही नहीं, हमलावरों ने उनके गर्दन पर चाकू से हमला भी किया। वारदात के बाद उन्हें फौरन परमार अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें वहाँ मृत घोषित कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शेट्टी पर हमला उस समय हुआ जब वह अपने घर के पास चाय के स्टाल पर चाय पी रहे थे। हमलावरों ने उनपर नजदीक आकर तीन गोली चलाई। 2 बार उनके सिर पर और एक बार छाती पर। इससे उनकी वही मौत हो गई।

मामले की सूचना पाते ही घटनास्थल पर पुलिस भी पहुँची। उन्होंने आशंका जताई कि आपसी रंजिश अथवा राजनीतिक रंजिश के चलते घटना को अंजाम दिया गया होगा। अब आगे की जाँच जारी है।

बता दें कि वारदात से कुछ टाइम पहले राहुल शेट्टी ने लोनावला सिटी पुलिस स्टेशन में अपनी जान को खतरा होने की जानकारी पुलिस को दी थी। दरअसल, उन्हें कहीं से इस बात की सूचना मिली थी कि कुछ लोग उन्हें मारने का प्लान बना रहे हैं।

ज्ञात हो कि शेट्टी के पिता उमेश शेट्टी को भी इसी तरह 30-35 साल पहले गोली मारकर मौत के घाट उतारा गया था। अब पुलिस इस मामले की जाँच में सीसीटीवी फुटेज खँगाल रही है। एक संदिग्ध को हिरासत में भी लिया गया है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है कि आखिर हत्या करने के पीछे क्या उद्देश्य था।

लोनावला स्थित जयचंद चौक पर दिनदहाड़े हुई इस वारदात के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है। मौके पर भारी संख्या में पुलिसबल तैनात है। घटना को लेकर अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया किया गया है।

राहुल शेट्टी के अलावा एक और हत्या का ममाला लोनावला के हनुमान हिल एरिया से सामने आया था। इस घटना से मात्र एक दिन पहले रविवार की रात करीब 10 बजे वहाँ गणेश नायडू नाम के शख्स की हत्या हुई थी। उस पर कुल्हाड़ी से वार किया गया था। पुलिस दोनों मामलों को देखते हुए इस बात की जाँच भी कर रही है कि दोनों का कहीं आपस में तो कोई संबंध नहीं है।

‘थाना प्रभारी रंजीत मंडल ने इंजीनियर आशुतोष पाठक के कपड़े उतारे, की बर्बरता’: हत्या का मामला दर्ज, किए गए सस्पेंड

बिहार के भागलपुर में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर आशुतोष पाठक की हत्या कर दी गई। मृतक के परिजनों ने इस हत्याकांड के लिए पुलिस को दोषी ठहराया है। उनका आरोप है कि आशुतोष पाठक दुर्गाष्टमी के दिन अपने परिवार के साथ माता का दर्शन कर लौट रहे थे, तभी उन्होंने एक बैरियर के पास पुलिस से कुछ सवाल कर दिए और गुस्से में पुलिस ने उनके पत्नी व बच्चे के सामने इतना पीटा की उनकी मौत हो गई।

आशुतोष पाठक उर्फ़ अप्पू पाठक भागलपुर के बिहपुर स्थित गोड्डा सिनेमा हॉल चौक के निवासी थे। इस दौरान वो दुर्गास्थान में दुर्गा पूजा में परिवार के साथ माता का दर्शन करने गए थे। परिजनों का आरोप है कि मरवा गाँव लौटते समय एक पुलिस बैरियर के पास उनकी गाड़ी रोकी गई, जहाँ उनकी पुलिस के साथ कहासुनी हुई। उनके भाई सूरज पाठक का कहना है कि पुलिस ने गाली-गलौज के बाद आशुतोष को अपनी गाड़ी में बिठाया और थाने ले जाकर लॉकअप में बंद कर दिया, जहाँ उनके साथ बर्बरता की गई।

पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर आशुतोष पाठक कुछ ही दिनों पहले टायफायड जैसी बीमारी से उबरे थे। इस कारण वो कमजोर भी थे। गोड्डा के कई युवकों ने इस मामले में पुलिस पर कार्रवाई की माँग करते हुए ट्विटर पर ‘जस्टिस फॉर आशुतोष’ ट्रेंड कराया। भागलपुर के सांसद और भाजपा नेता निशिकांत दुबे ने फेसबुक पर आशुतोष पाठक की हत्या मामले में न्याय की माँग करते हुए तस्वीर डाल कर लिखा है, ‘न्याय मिलेगा, पुलिस को होगी फाँसी।

स्थानीय सांसद ने भी पुलिस को बताया दोषी

मृतक के चाचा प्रफुल्ल पाठक ने ओपी अध्यक्ष को दिए गए शिकायत ज्ञापन में लिखा है कि अक्टूबर 24, 2020 को उनका भतीजा परिवार के साथ लौट रहा था, तभी NH-31 के पास मौजूद पुलिसकर्मी उससे उलझ गए। ज्ञापन में आगे उन्होंने आरोप लगाया है कि थाने में उनके भतीजे के कपड़े उतार कर उसकी पिटाई की गई। साथ ही पुलिस परिजनों से भी बदसलूकी से पेश आई, ऐसा आरोप है। बता दें कि बिहार में फ़िलहाल चुनाव भी चल रहे हैं।

उन्होंने अपनी शिकायत में लिखा है, “जब पुलिस ने आशुतोष को परिजनों के सुपुर्द किया, तब हम उसे लेकर बिहपुर में डॉक्टर राजेश के क्लिनिक लेकर भागे। एम्बुलेंस में हमने आशुतोष को खून से लथपथ देखा।” तत्पश्चात, बेहतर इलाज के लिए भागलपुर स्थित मंगलम हॉस्पिटल में रेफर किया गया। उन्होंने ओपी अध्यक्ष से माँग की है कि उक्त पुलिसकर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और उन्हें सज़ा दी जाए।

ओपी अध्यक्ष को भेजे गए ज्ञापन में मृतक के चाचा ने दिया घटना का विवरण

बिहपुर थाना क्षेत्र में लोगों ने कई घंटों तक सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया और पुलिस के खिलाफ आक्रोश जताया। मृतक के चाचा ने बताया कि आशुतोष अपनी पत्नी स्नेहा और अपनी 2 वर्षीय बच्ची को लेकर दुर्गा स्थान से दोपहर के करीब 3 बजे वापस अपने गाँव मड़वा लौट रहे थे, जहाँ रास्ते में महेश स्थान चौक के पास उपस्थित पुलिस अधिकारियों ने उनके भतीजे को रोककर गाली-गलौज की। उन्होंने आगे बताया,

“पुलिस के गाली-गलौज का विरोध करने पर मेरे भतीजे को बिहपुर थानाध्यक्ष रंजीत कुमार मंडल व वहाँ मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने हथियार के कुंदों एवं लाठी से मेरे भतीजे को पीटा। इस दौरान एक ड्राइवर के साथ पुलिस की ही गाड़ी से मेरे भतीजे को थाना ले जाया गया। इस पूरी घटना को आशुतोष के चचेरे भाई सूरज पाठक ने अपनी आँखों से देखा है और उनके साथ बर्बरता करने वालों को भी उन्होंने पहचाना है। जब वो मरणासन्न स्थिति में आ गया तो उसे हवालात से निकाल कर हमें सौंप दिया गया, जिसके बाद इलाज के दौरान ही उसकी मृत्यु हो गई।”

आशुतोष की ‘मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट’ की तस्वीर

परिजनों का कहना है कि आशुतोष के शरीर पर घाव व मारपीट के निशान पुलिस की बर्बरता की गवाही दे रहे थे। उनके सिर और नाक से लगातार खून बह रहा था। साथ ही बताया कि छाती पर बन्दूक की नोंक से मारे जाने के भी निशान थे। उनकी पत्नी स्नेहा का कहना है कि जब परिवार वाले लॉकअप में बंद आशुतोष से मिलने गए थे, तब लाख गिड़गिड़ाने के बावजूद उन्हें मिलने नहीं दिया गया।

स्थानीय पोर्टल ‘MaiHuGodda’ के अनुसार, आशुतोष बचपन से पढ़ाई में अच्छे थे और जिला स्तर पर बतौर तेज गेंदबाज क्रिकेट भी खेला था। आशुतोष दो भाई और एक बहन थे और हाल ही में उनके पिता की मौत के बाद घर चलाने के दारोमदार इन्हीं दोनों भाइयों पर आ गया था। उनके दोस्तों का कहना है कि उनका स्वभाव भी बहुत अच्छा था, ऐसे में उनके साथ ऐसा क्यों किया गया, ये उनकी समझ से परे है।

नीचे हम उस वीडियो को संलग्न कर रहे हैं, जिसमें सूरज रो रहे हैं और उनके भाई आशुतोष पाठक जमीन पर पड़े हुए हैं। इस वीडियो में बार-बार पुलिस पर आरोप लगाते हुए सूरज यही पूछ रहे हैं कि बाहर नौकरी करने वाले उनके भाई ने ऐसा क्या किया था कि उन्हें इतनी बेरहमी से मारा गया? इस दौरान वो अपने भाई के शरीर पर ऊपर नाक से लेकर पाँवों तक चोट और जख्म के कई निशान भी दिखाते हैं।

अपने भाई के साथ हुए अत्याचार पर बात करते सूरज पाठक

इस पूरे मामले के संज्ञान में आने के बाद नवगछिया के एसपी स्वप्नाजी मेश्राम ने तात्कालिक कार्रवाई की और बिहपुर थानाध्यक्ष रंजीत कुमार मंडल को निलंबित कर दिया है। साथ ही उन्हीं के थाने में उनके खिलाफ परिवार के बयान को आधार बना कर हत्या का मामला दर्ज किया गया है। एसपी ने कहा है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच हो, इसीलिए ये कार्रवाई की गई। पुलिस ने अपनी ‘डेथ रिव्यू रिपोर्ट’ में आशुतोष के शरीर पर चोट व जख्म के निशान मिलने की पुष्टि की है।

ऑपइंडिया ने भी आशुतोष पाठक की हत्या मामले में हुई कार्रवाई के बारे में जानने के लिए भागलपुर के बिहपुर थाने से संपर्क किया, जहाँ थानाध्यक्ष मंडल के सस्पेंड होने की पुष्टि की गई। पुलिस की ‘डेथ रिव्यू रिपोर्ट’ के अनुसार, मृतक के सीना, दोनों पैर के घुटने, नाक पर चोट व खून का दाग और शरीर के पिछले हिस्सों में चोट के कई निशान मिले हैं। भागलपुर रेंज के आईजी सुजीत कुमार खुद इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं। उनके निर्देश के बाद ही डेड बॉडी के पोस्टमॉर्टम के लिए मेडिकल टीम का गठन किया गया और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफ़ी भी हुई।

प्रतिनियुक्त किए गए मजिस्ट्रेट की निगरानी में पोस्टमॉर्टम की पूरी प्रक्रिया संपन्न कराई गई। डीआईजी ने स्पष्ट किया है कि जाँच के साथ कोई कम्प्रमाइज नहीं किया जाएगा और नियम-क़ानून के तहत जाँच होगी, जिसकी रिपोर्ट आते ही उस आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उधर थानेदार मंडल ने भी मारपीट का आरोप लगाते हुए अपनी नाक पर चोट लगने का दावा किया है। पुलिस ने कहा है कि बिना पक्षपात के जाँच की जाएगी।