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मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने मुझे पोर्न दिखाया, गंदे सवाल किए, अंगों को ले कर अश्लील गालियाँ दी: साध्वी प्रज्ञा

रिपब्लिक टीवी को साक्षात्कार देते हुए भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा ने आज अर्नब गोस्वामी और पूरे देश के सामने लगातार कई चौंकाने वाले खुलासे किए। इस इंटरव्यू में उन्होंने मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह पर गंभीर आरोप लगाए।

उन्होंने कहा है कि 3-4 पुलिसकर्मियों की उपस्थिति में उनको व्यक्तिगत रूप से बहुत ज्यादा प्रताड़ित किया और हिरासत में लेकर उन्हें बेल्ट से इस तरह पीटा गया कि उन्हें वेंटीलेटर तक पर जाना पड़ा। उनकी रीढ़ की हड्डी भी टूट गई।

इतना ही नहीं भगवा आतंक के नाम पर पुलिस बर्बरता झेल चुकी साध्वी प्रज्ञा का कहना है कि जब जब उनकी बेल की बात चली तो न्यायाधीशों तक को धमकी देने का काम हुआ। उन्होंने परमबीर सिंह पर आरोप लगाया है कि उन्हें हिरासत के दौरान पॉर्न वीडियो दिखाई गईं और उनसे भद्दे सवाल किए गए।

साध्वी प्रज्ञा ने यह भी कहा कि उन्हें 7-8 लोगों के सर्कल के बीच में उन्हें मारा गया। उनके पैरों के तलों तक में बेल्ट से पिटाई हुई। साध्वी ने इस इंटरव्यू में कहा है कि वह परमबीर के षड्यंत्र के विरुद्ध कुछ करने वाली हैं, जिन जिन लोगों ने उन्हें प्रताड़ित किया, उन पर भी केस होगा और उन्हें दंड दिलवाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि पहले उनको भगवा आतंकी कहा गया कहा गया और फिर भारत को आतंकवादी देश घोषित करवाने का प्रयास हुआ। उनका आरोप है कि ये सारा षड्यंत्र कॉन्ग्रेस का था।

तू कौन? मैं ख़ामख़ा: इमरान खान ने पूरे समुदाय को लिखी चिट्ठी, कहाँ पहुँची, पता नहीं

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान लगातार यूरोप में बढ़ रहे इस्लामोफोबिया के ख़िलाफ़ मजहबी देशों को इकट्ठा करने में जुटे हुए हैं। उन्होंने एक बार दोबारा मजहबी देशों को पत्र लिख कर पश्चिमी देशों का विरोध करने के लिए उकसाया है। हालाँकि, ये पत्र कहाँ पहुँचा है इसका किसी को कुछ मालूम नहीं चला।

इस पत्र में इमरान खान ने कश्मीर का मुद्दा भी उठाया। साथ ही इस्लामोफोबिया का मुकाबला करने के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने की बात की है।

इमरान खान ने लिखा, “हम अपने उम्मा के बीच बढ़ती चिंता और बेचैनी का सामना कर रहे हैं क्योंकि वे इस्लामोफोबिया और इस्लाम पर हमलों के बढ़ते ज्वार को देखते हैं, पश्चिमी देशों में ऐसा हो रहा है, विशेष रूप से यूरोप में तो ऐसा हमारे प्यारे पैगंबर का उपहास और मजाक उड़ाकर हुआ।”

इमरान खान ने अपने पत्र में कुरान की मर्यादा का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि इस्लामोफोबिया बहुत तेजी से यूरोपीय देशों में बढ़ रहा है। वहाँ मस्जिदों को भी बंद कर दिया गया है। महिलाओं के कपड़े पहनने की पसंद और अधिकार को भी नकारा जा रहा है, वहीं सार्वजनकि स्थानों पर नन और पुजारियों को उनके धार्मिक पहनावे के साथ रहने में किसी को कोई आपत्ति नहीं है। इन देशों में भेदभाव सिर्फ़ समुदाय की महिलाओं के साथ बढ़ रहा है।

इमरान खान ने इस्लामी देशों के सामने अपनी अपील रखते हुए यूरोपीय लीडरशिप पर सवाल उठाया और लिखा कि यूरोप की लीडरशिप ये समझने में असमर्थ है कि समुदाय को अपने पैगंबर मोहम्मद साहब व कुरान में कितना विश्वास है या वह उसे कितना प्यार करते हैं।

यूरोप देश समेत पूरे विश्व भर में इस्लामी आतंक को मात्र प्रतिक्रिया भर कहकर जस्टिफाई करते हुए इमरान खान ने कहा कि जो यूरोप का नेतृत्व उनकी भावनाओं को समझ नहीं पा रहा उसके परिणाम खतरनाक क्रिया-प्रतिक्रिया के तौर पर सामने आ रहे हैं क्योंकि मजहब के लोग देख रहे हैं कि उनके विश्वास, सबसे अजीज पैगंबर मोहम्मद को निशाना बनाकर उनसे भेदभाव किया जा रहा है, उनको प्रभावहीन बनाया जा रहा है। इसलिए वह लोग भी गुस्से में ऐसे कदम उठा रहे हैं जिससे दक्षिणपंथी ताकतों को हालात भड़काने में मदद मिल रही है।

इमरान खान कहते हैं कि इस्लामी देश के नेताओं को घृणा और अतिवाद जो हिंसा और मृत्यु को बढ़ावा दे रहा है, उसके खिलाफ एकजुट होकर पहल करनी होगी। उन्होंने अपील की है कि सभी मजहबी नेता अपनी आवाज बुलंद करें और दूसरे देशों को पवित्र पुस्तक कुरान व पैगंबर मोहम्मद साहब की प्रति प्रेम भावना और श्रद्धा से परिचित कराएँ।

इमरान खान ने इस्लामी देशों के नेताओं से कहा कि उन्हें पश्चिमी देशों को यह बताना चाहिए कि सभी व्यवस्थाओं में सामाजिक, धार्मिक और जातीय समूह के जीवन मूल्य अलग-अलग होते हैं। यहूदियों के सर्वनाश से जुड़े नाजी की तबाही, जिसने पश्चिम, खास तौर पर यूरोपीय देशों को उस रास्ते पर पहुँचाया जहाँ यहूदी पर अत्याचार को अपराध माना गया है। वह इसको समझते हैं और सम्मान भी करते हैं।

पाक पीएम ने कश्मीर को अपने पत्र में घुसाते हुए कहा कि अब समय है कि समुदाय के लोगों को भी ऐसे ही सम्मान दिया जाए, जिन्होंने बड़ी-बड़ी तादाद में बोस्निया से लेकर इराक, अफगानिस्तान, भारत द्वारा कब्जा किए गए कश्मीर में अपने लोगों को मरते देखा है, लेकिन उनके लिए उनके पैगंबर का मजाक उड़ाना, उनके विश्वास पर हमला होता देखा सबसे बड़ा दुख है, इससे वह आहत होते हैं। उन्होंने कहा है कि उनके मजहब में पैगंबर की ईशनिंदा अस्वीकार्य है।

इस्लामोफोबिया के ख़िलाफ़ मजहबी देशों से स्पष्ट संदेश देने की अपील भी इमरान खान ने की। बता दें कि इससे पहले प्रधानमंत्री इमरान खान ने फेसबुक संस्थापक मार्क जुकरबर्ग को भी पत्र लिख कर इस्लामोफोबिया संबंधित सामग्री पर नकेल कसने को कहा था।

उनके इस हालिया पोस्ट पर कई समुदाय विशेष के लोगों ने उनकी सरहाना की है। वहीं, कई ऐसे हैं जिन्होंने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हमले के मामलों को उठाकर उन्हें सलाह दी है कि वह अपने देश में माइनॉरिटी की सुरक्षा सुनिश्चित करें। उनके धार्मिक स्थलों को बचाएँ।

‘अपना नाम विद्ड्रॉ करो जाकर’: दिग्विजय सिंह ने पार्षदी का लालच देकर सपा प्रत्याशी रौशन मिर्जा को किया फोन, ऑडियो लीक

मध्यप्रदेश में उपचुनावों के मद्देनजर कॉन्ग्रेस ने अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए एक नया रास्ता अपनाया है। पार्टी के दिग्गज नेता दूसरे उम्मीदवारों को धमका कर, उन्हें नीचा दिखा कर, पैसे का लालच देकर चुनाव से अपना नाम वापस लेने की सलाह दे रहे हैं।

इस हकीकत का खुलासा खुद सपा नेता रौशन मिर्जा ने मीडिया से बातचीत के दौरान किया है। इसके अलावा दिग्विजय सिंह और मिर्जा के बीच हुई बातचीत की एक ऑडियो भी लीक हुई है जिसमें वह रौशन मिर्जा से कह रहे हैं कि वो चुनाव से नाम वापस लें।

इस लीक ऑडियो में सुना जा सकता है कि कॉन्ग्रेस नेता खुद पुष्टि करते हैं कि वह दिग्विजय सिंह बोल रहे हैं। इसके बाद वह कहते हैं, “अरे तुम काहे को चुनाव लड़ रहे हो भाजपा को जिताने के लिए?” इस पर मिर्जा मना करते हुए कहते हैं कि वो चुनाव अपने लिए लड़ रहे हैं, भाजपा को क्यों जिताएँगे।

दिग्विजय सिंह फिर कहते हैं, “तुम जानते हो चुनाव कैसा होता है, क्यों होता है? तुम क्यों बेमतलब चुनाव लड़ रहे हो। नाम वापस लो। जो भी होगा, तुम्हारा ख्याल हम रखेंगे। जाकर मिल लेना सुनील से, लेकिन अभी नाम वापस ले लो। देवेंद्र से भी मिल लो। मत लड़ो चुनाव।”

दिग्विजय सिंह आगे कहते हैं, “तुम देख रहे हो भाजपा और कॉन्ग्रेस किन हालातों में चुनाव लड़ रही हैं। फिर तुम इसमें क्यों पड़ रहे हो। सुनील शर्मा से नाराजगी है क्या?” इस पर सुनील कहते हैं, “मैं सुनील शर्मा के पास गया था। मैंने उनसे कहा (पार्षदी के लिए) था। उन्होंने कहा तुम आते ही मुझसे सौदेबाजी कर रहे हो। मैने चर्चा भी की। उन्होंने मना कर दिया।”

दिग्विजय सिंह ने इस पर कहा, “जब पार्षदी का चुनाव आए तो बताना मैं करवा दूँगा, अभी विद्ड्रॉ कर जाके। मैं तेरे से कह रहा हूँ मुझसे आके मिल लेना मैं करवाऊँगा।”

इस ऑडियो लीक के अलावा रौशन मिर्जा की वीडियो भी सामने आई है। इसमें वह बताते नजर आ रहे हैं कि वह इस बार समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं और उनके पास दिग्विजय सिंह ने फोन किया था। रौशन मिर्जा के अनुसार, “दिग्विजय सिंह ने कहा कि आप चुनाव क्यों लड़ रहे हो आपको तो चुनाव लड़ना आता ही नहीं है और आप देख रहे हो कि भाजपा और कॉन्ग्रेस किस परिस्थिति में चुनाव लड़ रही है।”

मिर्जा कहते हैं, “चुनाव तो कोई भी लड़ सकता है। आजाद भारत है। सबको अधिकार है चुनाव लड़ने का और हम भी पार्टी से लड़ रहे हैं।”

आगे की बात बताते हुए सपा प्रत्याक्षी कहते हैं, “उन्होंने मुझे बोला कि चुनाव मत लड़ो विद्ड्रॉ कर लो और पार्षदी का टिकट हम देंगे आपको। लेकिन मैंने कहा, पार्षदी के चुनाव की कोई बात नहीं है, हम सुनील शर्मा के पास भी गए थे, उनसे भी हमारी चर्चा हुई थी, लेकिन उन्होंने मना कर दी कि हम टिकट नहीं देंगे। इस पर वह कहने लगे कि जाकर उनसे मिल लो, हम तुम्हारा करवाएँगे।”

रौशन बताते हैं कि चुनाव से नाम वापस लेने के लिए उन्हें लालच भी दिया गया। हालाँकि, ये दिग्विजय सिंह ने खुद नहीं दिया। कॉन्ग्रेस के अन्य दो-तीन नेता हैं, उन्होंने कॉल किया था और 10 लाख रुपए देने की बात कही थी। मगर मिर्जा ने मना कर दिया क्योंकि उनका कहना है कि वह चुनावों से अपना नाम वापस नहीं ले सकते।

उनका कहना है कि उनका जो समाज है उसकी गिनती वैसे भी कहीं नहीं होती है। चुनाव में उन्हें जितने भी वोट आएँगे, कम से कम वह दिखा तो पाएँगे, अपनी बात को तो रख पाएँगे।

सपा उम्मीदवार का आरोप है कि जब उन्होंने कॉन्ग्रेस नेताओं की बात मानने से इंकार कर दिया तो उन पर इल्जाम लगाए जाने लगे कि उन्हें भाजपा की ओर से खड़ा किया गया है और पैसे लेकर वह खड़े हुए हैं।

पकड़ी गई ‘लुटेरी दुल्हन’ नजमा शेख उर्फ नेहा पाटिल: 4 युवकों से शादी कर हड़पी थी मोटी रकम, तलाश रही थी 5वाँ शिकार

जयपुर पुलिस ने एक ऐसी महिला को गिरफ्तार किया है, जो शादी का झाँसा देकर मोटी रकम हड़पती थी और फरार हो जाती थी। इससे पहले इस गिरोह के 4 अपराधियों को पुलिस ने अपने शिकंजे में लिया था। उन सभी को जेल भेज दिया गया है। लेकिन, पुलिस को इस गिरोह की सबसे बड़ी सरगना नजमा शेख की तलाश थी, जो नेहा पाटिल के नाम से जयपुर में नॉर्थ जिले की गलता गेट थाना की पुलिस उसकी तलाश में लगी हुई थी।

वो मुंबई से जैसे ही जयपुर पहुँची, उसे धर-दबोचा गया। थाना प्रभारी आरपीएस धर्मवीर सिंह चौधरी के नेतृत्व में पुलिस ने ये कार्रवाई की। 40 साल की नजमा शेख उर्फ़ नेहा पाटिल मुंबई के ठाणे की निवासी है। जयसिंहपुरा खोर ब्रह्मपुरी निवासी शोभारानी सोलंकी व नोरतमल जैन, बदनपुरा गलतागेट निवासी राहुल खंडेलवाल व पंचवटी कॉलोनी जयसिंहपुरा खोर निवासी रवि खंडेलवाल भी इसकी गैंग में शामिल थे, जो गिरफ्तार हो चुके हैं।

नजमा शेख ने जयपुर में ब्रह्मपुरी, सीकर के लक्ष्मणगढ़ और जोधपुर के युवकों से शादी कर के उनसे मोटी रकम हड़प ली। ‘दैनिक भास्कर’ की खबर के अनुसार, एडिशनल डीसीपी सुमित गुप्ता ने बताया कि नजमा शेख उर्फ नेहा पाटिल किसी दूसरी लड़की के चेहरे से मिलते-जुलते आधार कार्ड पर अपना फोटो चिपका कर उसका रंगीन प्रिंटआउट निकलवा लेती है। इसके बाद उसे ही अपने आइडेंटिफिकेशन डक्यूमेंट के रूप में प्रयोग में लाती थी।

इसके बाद उसके गैंग के दलाल सक्रिय हो जाते थे, जो शादी के लिए घूम रहे युवकों और उनके परिवारों से संपर्क करते थे। साथ ही जल्दबाजी में शादी का दबाव बना कर मंदिर में शादी करवा देते थे। साजिश के तहत ससुराल जाते ही नजमा शेख वहाँ रखे रुपए और गहनों को बटोर कर फरार हो जाती थी। फरार होने के बाद वो मुंबई पहुँच जाती थी और वहीं पर अपनी फरारी के दिन काटा करती थी।

25 फरवरी को उसके विरुद्ध बदनपुरा की रहने वाली सुनीता खंडेलवाल ने गलतागेट थाने में दर्ज कराए गए मुक़दमे में बताया कि शोभारानी सोलंकी नाम की महिला ने उनसे संपर्क किया और एक लड़की से उसके बेटे की शादी कराने का झाँसा देकर एक लाख रुपए हड़प डाले। इसके बाद उसके गैंग के बाकी सदस्य धरे गए। नजमा शेख ट्रेस होने से बचने के लिए मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करती थी। अब तक वो 4 युवकों को ठग चुकी थी और 5वें शिकार की तलाश में थी।

गौहत्या करने वालों को हर हाल में भेजा जाएगा जेल, हम गौ माता की रक्षा के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे: CM योगी

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर गौकशी करने वालों के खिलाफ़ सख्त से सख्त कार्रवाई करने की बात की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है, “जो कोई भी इस कृत्य में शामिल होगा उसे हर हाल में जेल भेजा जाएगा।”

बंगरमऊ (Bangarmau) विधानसभा में जनता के बीच अपनी बात रखते हुए योगी आदित्यनाथ ने गौकशी करने वालों के खिलाफ़ अपना यह बयान दिया। इस विधानसभा सीट पर 3 नवंबर को उपचुनाव होने हैं। भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के जेल जाने के बाद से यह सीट खाली है।

गौरक्षा मामले पर अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब सरकार गायों के जीवन से किसी को खेलने नहीं देगी। उन्होंने यह भी कहा कि गौरक्षा सबकी जिम्मेदारी है। गायों की सुरक्षा के लिए हर जिले में आश्रय स्थल बनाए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री बोले, “अगर कोई गौकशी करेगा तो सरकार कानून के दायरे में उसे जेल में ठूसने का काम भी करेगी। हम गौ माता की रक्षा के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ नहीं होने देंगे।”

सीएम योगी ने कहा कि सरकारी योजनाओं को लागू करते हुए उनकी सरकार ने जाति और धर्म के साथ भेदभाव नहीं किया, वहीं विकास कार्य में महामारी के दौरान निरंतर चलता रहा। उन्होंने उत्तरप्रदेश को प्रगति की कुंजी भी बताया।

उन्होंने देश में अपराधियों के ऊपर होने वाली कार्रवाई को लेकर कहा कि पहले अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिलता था। वह राजनैतिक दलों की शोभा बढ़ाते थे। लेकिन अब उनकी अवैध संपत्तियाँ जब्त की जा रही हैं। उन पर बुल्डोजर चल रहा है। इससे गरीब की आस जगती है कि वहाँ पर पीएम आवास बन पाएगा और उसे भी पक्की छत मिलेगी। इसके अलावा उपद्रवी भी अब राज्य में साम्प्रदायिक तनाव फैलाने से पहले सोचते हैं। उन्हें मालूम है कि अगर वह ऐसा कुछ करेंगे तो उन्हें जेल में डाल दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री बोले कि पिछले पिछले साढ़े तीन साल में सूबे में कोई दंगा नहीं हुआ। रामराज्य की संकल्पना को यथार्थ करने का कार्य मोदी सरकार कर रही है। सीएम ने पार्टी प्रत्याशी श्रीकांत कटियार को जिताने की अपील की। साथ ही कहा कि सपा, बसपा और कॉन्ग्रेस के लिए परिवार ही पार्टी है, जबकि बीजेपी में कार्यकर्ता हर पद पर पहुँच सकता है।

सीएम ने प्रदेश सरकार की उपलब्धियाँ को बताते हुए कहा कि पहले 100 रुपए में 90 रुपए चाटुकार व बिचौलिए खा जाते थे। लेकिन पीएम मोदी के नेतृत्व में पूरा पैसा गरीब के खातों में पहुँच रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी सरकार ने 3 वर्ष में 3 लाख नौकरी दी। किसी का जाति, मजहब नहीं देखा। 30 लाख आवास दिए, 1 करोड़ बिजली कनेक्शन दिए और 46 लाख गैस सिलेंडर उपलब्ध करवाए। उनके लिए प्रदेश की 24 करोड़ जनता ही परिवार है।

‘हम मूलनिवासी-आदिवासी, राम का पुतला जला रहे हैं क्योंकि रावण ज्यादा तपस्वी था’: 4 युवक गिरफ्तार

इस दशहरे पर अमृतसर के कस्बा मानावाला में रावण की बजाय प्रभु श्रीराम के पुतला फूँक दिया गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वकील अशोक सरीन ने इस वायरल वीडियो के संबंध में शिकायत दर्ज करवाई है। अशोक सरीन का कहना है कि उनके मोबाइल पर यह वीडियो गत 27 अक्टूबर को पहुँचा। उनके अनुसार, इस वीडियो में कुछ शरारती तत्व भगवान श्री राम का पुतला तैयार कर जला रहे थे और गंदी शब्दावली का प्रयोग कर रहे थे।

वायरल वीडियो में कुछ लोग रावण की जगह भगवान राम के पुतले को जलाते दिख रहे हैं। पुतला जलाने से पहले ये युवक यह भी कहते हुए देखे जा सकते हैं कि रावण बहुत तपस्वी था और राम जो भी था, वह रावण से कम तपस्वी था, इसलिए वह भगवान राम का पुतला जला रहे हैं। उनका कहना है कि हम मूलनिवासी, आदिवासी राम का पुतला जला रहे हैं, क्योंकि रावण बहुत ज्ञानी था और उसे चारों वेदों का ज्ञान था।

जानकारी मिलने पर इस संबंध में पुलिस ने वहाँ 14 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया और चार लोगों को इस संबंध में गिरफ्तार भी किया गया। इस सबंध में थाना लोपोके में 27 अक्टूबर को आईपीएस की धारा 295ए, 298, 149 और आईटी एक्ट 66 के तहत मामला दर्ज किया गया था और आरोपितों को पकड़ने के लिए छापेमारी की गई। पूरी घटना अमृतसर जिले के लोपोके थाने के मनावला गाँव की है।

जालंधर पुलिस थाने के सब इंस्पेक्टर मुकेश कुमार ने इस शिकायत की जानकारी देते हुए कहा है कि उन्होंने मामले को दर्ज किया है। अब जाँच के बाद इस संबंध में एक्शन लिया जाएगा। भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) ने भी इस सम्बन्ध में शहीद भगत सिंह चौक में प्रदर्शन किया। 

बता दें कि इससे पहले पंजाब में धार्मिक माहौल खराब करने की खबरें मीडिया में सामने आई थीं। बताया गया था कि अमृतसर जिले में कुछ लोगों ने दशहरा के अवसर पर रावण का पुतला दहन करने की जगह श्रीराम भगवान का पुतला जला दिया। विश्व हिंदू परिषद ने अमृतसर में प्रभु श्री राम का पुतला जलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है।

वीडियो को आप इस यूट्यूब लिंक पर देख सकते हैं –

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार डीएसपी गुरु प्रताप सिंह सहोता ने कहा है कि वीडियो में दिखने वाले आरोपितों की पहचान करवाई जा रही है। अमृतसर पुलिस का कहना है कि मंगलवार की रात सब इंस्पेक्टर हरपाल सिंह के मोबाइल पर एक नंबर से वीडियो भेजी गई थी। वीडियो में कुछ शरारती लोग श्री राम का पुतला जलाकर उसे आग के हवाले कर रहे थे।

उल्लेखनीय है कि घटना की वीडियो सामने आने के बाद हिंदुओं संगठनों ने इसका कड़ा विरोध किया है। ऑल इंडिया टक्साली दल के नेता सुनील अरोड़ा ने चेतावनी दी है कि अगर आरोपितों के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो वह सड़कों को जाम करेंगे।

सोशल मीडिया पर भी यह खबर आने के बाद लोग इसका विरोध कर रहे हैं और कॉन्ग्रेस शासित प्रदेश में ऐसी हरकत के लिए सरकार से सवाल कर रहे हैं। पंजाबी हिंदू के ट्विटर हैंडल से लिखा गया, “भगवान श्री राम जी की राम लीला में तोड़फोड़ हुई । पठानकोट में पंजाब सरकार ने क्या संज्ञान लिया। अब अमृतसर में प्रभु श्री राम का पुतला जलाया गया है। मेरे आराध्य प्रभु श्री राम का पुतला जलाया जा रहा है। उम्मीद तो थी कॉन्ग्रेस नीचे गिरेगी पर इतना गिर जाएगी सोचा ना था।”

पिता MP, पति DM, खुद SP: मुंगेर की ‘जनरल डायर’, जिस पर लगा था पुलिस के काम के लिए नेता की गाड़ी के इस्तेमाल का आरोप

मुंगेर में दुर्गा पूजा के बाद माता की प्रतिमा के विसर्जन के दौरान पुलिस पर बर्बरता के आरोप लगे। इस घटना में दो लोगों के मरने की बात कही जा रही है और दो दर्जन के करीब घायल हैं। पुलिस की इस कार्रवाई के बीच एक नाम जो बार-बार उछल कर सामने आ रहा है और जिसकी तुलना लोग जालियाँवाला बाग़ नरसंहार के जनरल डायर से कर रहे हैं, वो हैं मुंगेर की एसपी और जदयू सांसद रामचंद्र प्रसाद (RCP) सिंह की बेटी लिपि सिंह का।

इस घटना के बाद लिपि सिंह ने जिस तरह के बयान दिए, उससे पुलिस के प्रति लोगों के गुस्से में और उछाल ही आया। उन्होंने पुलिस द्वारा फायरिंग की बात से साफ़ इनकार कर दिया और इसके लिए ‘असामाजिक तत्वों’ को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने ‘बदमाशों’ पर पत्थरबाजी के आरोप लगाए। अब लोगों का सवाल ये है कि ये ‘असामाजिक तत्व’ हैं कौन? श्रद्धालु? हिन्दू? माँ दुर्गा की पूजा करने वाले उनके भक्त?

लिपि सिंह काफी चर्चे में रहती आई है और मीडिया का एक धड़ा उन्हें ‘लेडी सिंघम’ कह कर भी पुकारता है। बिहार में वैसे भी पिछले कुछ वर्षों में गुप्तेश्वर पांडेय, मनु महाराज और शिवदीप लांडे जैसे आईपीएस अधिकारी काफी चर्चित रहे हैं। लिपि सिंह की छवि भी मीडिया ने कुछ वैसी ही बनाई है। उनकी कार्रवाइयाँ खबरें बनती हैं और उनके बयान स्थानीय मीडिया में चर्चा का विषय। लेकिन, इस बार वो जबर्दस्त आलोचना का शिकार हो रही हैं।

कौन हैं मुंगेर एसपी लिपि सिंह के पिता RCP सिंह?

लिपि सिंह के बारे में जानने से पहले हमें ये समझना पड़ेगा कि उनके पिता RCP सिंह कौन हैं। उन्हें जदयू का संकटमोचक माना जाता है, जो नीतीश कुमार के दाएँ हाथ कहे जाते हैं। यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी रहे आरसीपी सिंह ने 2010 में राजनीति में कदम रखा था और उन्हें राज्यसभा सांसद बनाया गया था। 2016 में उनका कार्यकाल पूरा होने के बाद फिर से उन पर भरोसा जताया गया।

आरसीपी सिंह नीतीश कुमार के प्रधान सचिव रह चुके हैं। दोनों का गृह जिला नालंदा ही है। 62 वर्षीय आरसीपी सिंह ने उत्तर प्रदेश के कई विभागों में बड़े पद संभाले थे। जब नीतीश कुमार केंद्रीय रेल मंत्री थे, तब उन्होंने उनके सचिव के रूप में काम किया था और यहीं से दोनों की घनिष्ठता बढ़ती चली गई। नीतीश कुमार के हर फैसले में उनकी राय ज़रूर ली जाती है। 2017 में मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार के दौरान तो उन्हें केंद्रीय मंत्री बनाए जाने की भी चर्चा थी।

जदयू के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह

एक समय तो दोनों में अनबन की बातें भी सामने आई थीं, जब बिहार में प्रशांत किशोर की एंट्री हुई थी। मीडिया में चर्चा थी कि आरसीपी सिंह पर निर्भरता कम करने और उनके दबदबे को घटाने के लिए ही प्रशांत किशोर को मंत्री के स्तर का दर्जा दिया गया है। इस बार भी वो विधानसभा चुनाव की तैयारियों में लगे हुए हैं और जदयू नेताओं के साथ बैठक कर फीडबैक लेते रहते हैं। उनके अलावा एक ललन सिंह ही हैं, जिन्हें नीतीश का इतना करीबी माना जाता है। ललन सिंह मुंगेर से दूसरी बार सांसद बने हैं।

मीडिया में अक्सर चर्चा में रहती हैं लिपि सिंह

बिहार में कई पुलिस अधिकारी ऐसे हैं, जिन्हें किसी खास क्षेत्र में सिर्फ इसीलिए भेजा गया, ताकि वो किसी खास ‘बाहुबली’ पर लगाम लगा सकें। बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने बेगूसराय में माफिया अशोक सम्राट के खिलाफ कार्रवाई की। लिपि सिंह बिहार के बाहुबली नेता अनंत सिंह के ठिकानों पर छापेमारी के बाद चर्चा में आई थीं। उन्होंने अनंत सिंह के खिलाफ यूएपीए के तहत एफआईआर दर्ज की थी, जिसके बाद विधायक अनंत सिंह को फरार होना पड़ा था।

बिहार में ‘छोटे सरकार’ कहे जाने वाले अनंत पटना के मोकामा से बतौर MLA हैट्रिक लगा चुके हैं। अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी ने आरोप लगाया था कि वो जानबूझ कर उनके करीबियों को परेशान कर रही हैं, जिसके बाद उनका ट्रांसफर हुआ था। इस छापेमारी में एक एके-47 राइफल सहित कई कारतूस व खोखे भी मिले थे। 2019 लोकसभा चुनाव के बाद लिपि सिंह को बाढ़ का एसडीपीओ बना कर भेजा गया।

हालाँकि, नीलम देवी लोकसभा चुनाव हार गईं और जदयू के ललन सिंह विजयी रहे। इसके बाद उन्होंने भी लिपि सिंह को अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई के लिए खुली छूट दे दी। उन्होंने एक-एक कर के अनंत समर्थकों व उनके गिरोह के लोगों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया। हालाँकि, बाद में मोकामा से पिछले 15 साल से विधायक अनंत सिंह ने भी आत्मसमर्पण कर दिया और उन्हें जेल भेज दिया गया।

लिपि सिंह के पति सुहर्ष भगत भी आईएएस अधिकारी हैं और वो फ़िलहाल बाँका के डीएम हैं। ये चर्चा आम है कि चुनाव के दौरान ट्रांसफर के क्रम में लिपि सिंह का स्थानांतरण क्यों नहीं किया गया? उनके जदयू कनेक्शंस के बावजूद उन्हें चुनावी ड्यूटी पर लगाने को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अनंत सिंह पर कार्रवाई के कुछ महीने बाद वो एएसपी से एसपी बनी थीं। अनंत ने भी आरोप लगाया था कि वो अपने पिता के इशारों पर उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही थीं।

लिपि सिंह 2016 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं। 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान जब आयोग ने उनके ट्रांसफर किया था, तब उन्हें ‘एंटी टेररिज्म स्क्वाड’ में एएसपी बनाया गया था। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि बिहार एक पुरुष प्रधान राज्य है। उनका कहना था कि एक महिला होने के कारण किसी को नहीं लगता कि वो रात में छापेमारी कर सकती हैं और ऐसा होने पर लोग आश्चर्य में पड़ जाते हैं।

अगस्त 2019 में लिपि सिंह पर आरोप लगा था कि वो दिल्ली के साकेत कोर्ट में अनंत सिंह के लिए जब ट्रांजिट रिमांड लेने गई थीं, तो उन्होंने जदयू नेता की गाड़ी का इस्तेमाल किया था। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि वो जदयू के विधान पार्षद रणवीर नंदन की गाड़ी से दिल्ली गई थीं। तब कॉन्ग्रेस एमएलसी प्रेमचंद मिश्रा ने भी यही आरोप लगाए थे। कॉन्ग्रेस ने जाँच की माँग उठाते हुए पूछा था कि उन्होंने पुलिस की गाड़ी का उपयोग क्यों नहीं किया?

हालाँकि, तब जदयू प्रवक्ता ने इसका बचाव करते हुए पूछा था कि क्या किसी नेता की गाड़ी का प्रयोग करना गुनाह है? सत्ताधारी पार्टी के नेताओं को इसमें कुछ भी गलत नहीं लगा था। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी अब नीतीश कुमार से सवाल दागा है कि पुलिस को जनरल डायर बन निर्दोषों पर क्रूरतापूर्वक गोली चलाने की अनुमति किसने दी? साथ ही अपनी सरकार बनने पर दोषियों को सज़ा देने की बात कही है।

इधर भाजपा आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय का कहना है कि बिहार में हुई इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का राजद राजनीतिकरण कर रहा है। उनका कहना है कि बिहार में फ़िलहाल चुनाव चल रहे हैं और वहाँ प्रशासन की जिम्मेदारी चुनाव आयोग के पास है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजद के ही एक स्थानीय गुट ने क्षेत्र में चुनाव से पहले तनाव फैलाने के इरादे से फायरिंग की। जो भी हो, मुंगेर में जनता ने मतदान में सक्रियता न दिखा कर अपना आक्रोश सभी राजनीतिक दलों के सामने प्रकट कर दिया है।

निकिता मर्डर केस में 2018 से होगी जाँच, आरोपित तौसीफ कॉन्ग्रेस नेताओं का रिश्तेदार, किसी हालत में बख्शेंगे नहीं: अनिल विज

हरियाणा के फरीदाबाद के निकिता मर्डर केस में क्राइम ब्रांच की एसआईटी ने जाँच शुरू कर दी है। एसआईटी की टीम दोनों आरोपितों तौसीफ और रेहान को लेकर जाँच के लिए निकली है। पुलिस के दोनों की 2 दिन की रिमांड है। हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज इस घटना से काफी खफा हैं। विज ने मंगलवार (अक्टूबर 27, 2020) को ही इस मामले में एसआईटी गठन करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही उन्‍होंने SIT को लव जिहाद के एंगल से भी इस हत्‍याकांड की जाँच करने के आदेश दिए हैं।

इस पूरे मामले पर हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “वल्लभगढ़ की जो घटना हुई है, उसमें कॉन्ग्रेस का ही दबाव है। कॉन्ग्रेस के नेताओं का ही वो रिश्तेदार है और मुझे लगता है कि 2018 में जो उस परिवार ने अपहरण का मामला दर्ज कराया था, वो कॉन्ग्रेस नेताओं के दबाव में ही माँ-बाप ने वापस ले लिया। माँ-बाप और बेचारे करें क्या। अब जो मैंने SIT बनाई है, उसे हमने कहा है कि जाँच 2018 से की जाए कि वो क्या परिस्थितियाँ थी कि माँ-बाप को मजबूर होकर मुकदमा वापस लेने के लिए एफिट-डेविट देना पड़ा।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं एक बात साफ बता देना चाहता हूँ कि ये दबंगई नहीं चलने दूँगा। मैं सिसक-सिसक कर लड़कियों को मरने नहीं दूँगा। जो भी कड़ी से कड़ी सजा हो सकती होगी, वो दी जाएगी। एसआईटी का गठन हुआ, जो 2018 से मामले की जाँच करेगी। लव जिहाद, अपहरण जैसे सभी मामले पुर्नजीवित हो सकते हैं। किसी भी हालत में किसी को बख्शेंगे नहीं।”

बता दें कि कॉन्ग्रेस के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री खुर्शीद अहमद निकिता के हत्यारे के चचेरे दादा लगते हैं। इसी तरह वर्तमान में मेवात के नूँह से कॉन्ग्रेस विधायक आफताब अहमद आरोपित तौसीफ के चाचा हैं।

वहीं, मृतका के भाई ने भी मीडिया को दिए इंटरव्यू में इस बात का खुलासा किया था कि तौसीफ को बचाने के लिए लगातार पॉलिटिकल प्रेशर बनाया जा रहा है। निकिता के भाई ने अपने बयान में कॉन्ग्रेस नेता आफताब अहमद का भी नाम लिया था।

वहीं पीड़िता के पिता का दावा है कि आरोपित तौसीफ ही नहीं बल्कि उसकी माँ भी उनकी बेटी निकिता पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाती रहती थी। यह सिलसिला बीते दो साल से चल रहा था। छात्रा के पिता ने आरोपित तौसीफ की माँ पर आरोप लगाया है कि वह बार-बार फोन कर के उनकी बेटी पर दबाव डालती थी कि तुम हमारा मजहब कबूल कर लो। यह सिलसिला उस वक्त से चल रहा था जब 2018 में तौसीफ ने पहली बार निकिता का अपहरण किया था।

गौरतलब है कि निकिता तोमर के घरवालों ने आरोप लगाया है कि निकिता पर तौसीफ धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहा था। तीन साल पहले इस संबंध में पंचों के सामने फैसला भी हुआ, लेकिन अभी हाल में दोबारा तौसीफ ने लड़की के संपर्क में आने का प्रयास किया। उसने बार-बार निकिता को यही कहा, “मुस्लिम बन जा हम निकाह कर लेंगे” मगर जब लड़की ने उसकी बात नहीं सुनी तो उसकी गोली मार कर हत्या कर दी।

10 जगहों पर NIA की रेड: हुर्रियत नेता युसूफ सोफी, एक्टिविस्ट खुर्रम परवेज, ग्रेटर कश्मीर के कार्यालय सहित 2 NGO भी जद में

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने बुधवार (अक्टूबर 28, 2020) को कश्मीर में कई जगह छापेमारी की है। इनमें ग्रेटर कश्मीर का मुख्य कार्यालय व मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज का आवास भी शामिल है। 

अधिकारियों ने बताया है कि श्रीनगर और बांदीपोरा के कई स्थानों को मिलाकर आज 10 जगहों पर रेड मारी गई है। एक अधिकारी के अनुसार अखबार के कार्यालय और कार्यकर्ता के आवास के अलावा, एनआईए की टीमों ने हैदरपोरा (Hyderpora) और नवाकदल (Nawakadal) में 2 एनजीओ, 1 पत्रकार के घर, एक हाउसबोट के मालिक और हुर्रियत कार्यकर्ता के कार्यालयों पर भी छापेमारी की।

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, उनके सूत्रों ने इस हुर्रियत नेता की पहचान युसूफ सोफी के रूप में की है जो बांदोपोरा के बरार गाँव का रहने वाला है। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि छापेमारी लगातार की जा रही है और कई गुप्त दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त किया गया है।

वहीं एनआईए की टीम ने एनजीओ में हो रहे रूपयों के हेरफेर का पता लगाने के लिए नया मामला दर्ज किया है। इसके तहत एनआईए रूपयों के सोर्स, खर्च का पता लगाएगी। इस एनजीओ पर लंबे समय से हवाला रैकेट, गलत तरीके से फंड जुटाने और आतंकियों को आर्थिक मदद देने के आरोप लगते रहे हैं।

टीम ने ऐसे ही तीन और अन्य एनजीओ पर छापा मारा है। इन पर भी यह आरोप है कि इन्हें अज्ञात दानदाताओं से पैसा मिल रहे थे, जिसका इस्तेमाल आतंकवाद को आर्थिक मदद पहुँचाने में किया जा रहा था। वहीं इससे पहले एनआईए की टीम ने 2019 में ग्रेटर कश्मीर अखबार के एडिटर इन चीफ फयाज कालू से कुछ आर्टिकल्स के संबंध में पूछताछ की थी। 

इन लेखों को बुरहान वानी की मौत के बाद अखबारों में प्रकाशित किया गया था। इसी तरह खुर्रम परवेज की भी गिरफ्तारी साल 2016 में हुई थी।

उल्लेखनीय है कि पीडीपी अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इस छापेनमारी की निंदा की है। उन्होंने अपने ट्विटर पर लिखा, ”NIA ने श्रीनगर में मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज और ग्रेटर कश्मीर के कार्यालय पर छापामारी की। ये अभिव्यक्ति की आजादी और असंतोष पर भारत सरकार की दोषपूर्ण कार्रवाई का एक और उदाहरण है। अफसोस की बात है कि NIA उन लोगों को डराने और धमकाने के लिए BJP की पालतू एजेंसी बन गई है, जो लाइन में लगने से इनकार करते हैं।”

सरकारी बूटों तले रौंदी गई हिन्दुओं की परम्परा, गोलियाँ चलीं, कहारों के कंधों के बजाय ट्रैक्टर, जेसीबी से हुआ विसर्जन

महाभारत काल के कर्ण का जो ‘अंग’ प्रदेश होता था, उसे आज का मुंगेर माना जाता है। ऐतिहासिक रूप से ये नगर कितना महत्वपूर्ण रहा होगा, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि 1862 में एशिया का सबसे बड़ा और आज सबसे पुराना रेल कारखाना यहीं के जमालपुर में स्थापित है। इसके अलावा यहाँ आर्म्स फैक्ट्री होती है।

दशकों से हथियारों के निर्माण से जुड़े होने के कारण बिहार में जो देसी कट्टे पकड़े जाते हैं उन्हें भी कभी-कभी ‘मुंगेरी’ ही बुलाया जाता है। ये भागलपुर के पास है और गंगा नदी के बिलकुल किनारे पर बसा हुआ है इसलिए रेल के अलावा सड़क और नदी के रास्तों से भी अच्छी तरह जुड़ा है।

शिक्षा के मामले में भी ये कोई अनपढ़ों का इलाका नहीं कहा जा सकता क्यों सात वर्ष से ऊपर की आयु में यहाँ शिक्षा 81% से ऊपर है। आबादी का हिसाब बाकी भारत जैसा ही लगभग 81% हिन्दू, करीब 18% मोहम्मडेन और बाकी में सिक्ख और इसाई आदि आते हैं।

नगर पुराना है तो परम्पराएँ भी उतनी ही पुरानी है। विसर्जन के वक्त, सबसे पहले बड़ी दुर्गा महारानी, फिर छोटी दुर्गा, फिर बड़ी काली और छोटी काली के जाने की परंपरा है। इनमें से बड़ी दुर्गा, छोटी दुर्गा और बड़ी काली देवी को 32 कहारों के कंधे पर ले जाया जाता है।

एक दशकों से मार्ग तय है जिस पर से ये देवियों की यात्रा निकलेगी और रास्ते में मिलन, आरती इत्यादि के लिए रुकने का स्थान भी निश्चित है। इस बार भी इसमें कोई अंतर नहीं था। हाँ, कोविड-19 की वजह से मेला नहीं लगा तो रौनक कम जरूर थी।

अज्ञात कारणों से शहर के एसपी को ही हिन्दुओं के इस त्यौहार में ‘बड़ी दुर्गा समिति’ का शीर्ष अधिकारी तय कर रखा गया है। शीर्ष अधिकारी से जब समिति के लोगों ने कहा मुंगेर में चुनावों के लिए कोई अलग तारीख रखवाने का प्रयास करें तो वो हुआ नहीं। विसर्जन को भी 29 को रखने का प्रस्ताव किया गया, ताकि मतदान के बाद का वक्त मिले, वो भी ‘शीर्ष अधिकारी’ ने नहीं माना।

इस बार विसर्जन की यात्रा शाम 4 बजे शुरू हुई थी। शहर बीएसएफ और सीआरपीएफ से भरा हुआ था। अधिकारी और उनके नुमाइंदे लोगों से जल्दी करने को भी कह रहे थे। जो बत्तीस लोग कहार की तरह पालकी उठाएँगे, उनके लिए नियम भी तय होते हैं। वो भूखे-प्यासे उपवास में होंगे, शरीर पर चमड़े का कुछ भी नहीं होगा, नंगे पाँव उन्हें पालकी उठाकर चलना है।

रास्ते में पालकी रखने के बाद उठ नहीं रही थी तो प्रशासन ने कहारों के बदले इसे खुद ही उठाने का प्रयास किया। स्थानीय सूत्र ऐसा बताते हैं कि प्रशासनिक कर्मचारियों के 17 बार प्रयास के बाद भी मूर्ती अपनी जगह से नहीं हिली। जब प्रशासन से भी बड़ी दुर्गा उठी नहीं तो दूसरी देवियों को बड़ी दुर्गा से आगे ले जाने का आदेश हुआ।

इस पर लोगों ने विरोध किया और फिर जद (यू) नेता की सुपुत्री, जो वहाँ एसपी भी हैं, उनके आदेश पर आँसू गैस और गोलियाँ चली। देखते ही देखते भीड़ खाली हो गई और लाठी चार्ज के बाद वहाँ देवी को उठा रहे कहार भी नहीं बचे।

परम्पराओं और मान्यताओं को सरकारी बूटों तले रौंदने के बाद बिना आरती इत्यादि के ही दूसरी देवियों के बाद बड़ी दुर्गा को विसर्जित किया गया। जिस भक्त ने देवी को आभूषण पहनाए होते हैं, वही देवी के आभूषण उतारता है। विसर्जन से पहले नकली आभूषण पहना दिए जाते हैं। इस बार वो भी नहीं हुआ। छोटी दुर्गा भी कहारों के कंधे पर आती हैं, इस बार उन्हें किसी मुंसीपाल्टी के ट्रैक्टर में लाया गया। जेसीबी इत्यादि के इस्तेमाल से देवियों का विसर्जन हुआ।

अब कहा जा रहा है कि गलती प्रशासन की नहीं बल्कि स्थानीय लोगों की ही थी। क्या इसी वजह से लोगों पर गोलियाँ चलाने की जरुरत पड़ गई? हिन्दुओं को जो अपनी पूजा विधियों के पालन का अधिकार संविधान देता है, उसे हर बार दरकिनार क्यों किया जाता है, क्या ये पूछा नहीं जाना चाहिए? जो जानें गईं उनके लिए आखिर कौन जिम्मेदार है?

चुनावों के पहले चरण के मतदान से ठीक पहले हुई इस घटना का राजनैतिक प्रभाव क्या होगा? यहाँ ये भी सोचने लायक है कि मुंगेर की मौजूदा एसपी एक बड़े जद(यू) नेता की पुत्री हैं। मुख्य धारा की मीडिया अगर इस घटना पर चुप्पी साधे रखे और खोजी पत्रकार भी मुद्दे की तह में जाने के बदले मुँह दूसरी तरफ फेर लें, तो भी आश्चर्य नहीं किया जाना चाहिए। हाँ ये जरूर है कि मुंगेर संसदीय क्षेत्र से लोजपा उम्मीदवार पहले भी जीत चुकी हैं। विधानसभा चुनावों पर इसका सीधा असर होने से बिलकुल भी इंकार नहीं किया जा सकता।

नोट: मुंगेर हत्याकांड के मद्देनजर ट्विटर पर मुंगेर के ही स्थानीय निवासी अनुपम सिंह (@AnupamS40753639) ने ट्वीट्स की श्रृंखला लिखी है। अनुपम ने इस ट्विटर थ्रेड में मुंगेर में हुई घटना से आहत होकर इस क्षेत्र के छोटे-छोटे पहलुओं को उजागर किया है। लेख में मौजूद अधिकांश बातें भी इस थ्रेड में लिखी गई हैं।