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DDLJ से लेकर IPL तक: PM मोदी के आज शाम 6 बजे के राष्ट्र के नाम संबोधन पर यूजर्स ने किए मजेदार कमेंट्स

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (अक्टूबर 20, 2020) को एक ट्वीट पोस्ट कर कहा कि वह शाम 6 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “आज शाम 6 बजे राष्ट्र के नाम संदेश दूँगा। आप जरूर जुड़ें।”

चूँकि, पीएम नरेंद्र मोदी के ‘राष्ट्र के नाम संबोधन’ में 2016 में नोटबंदी और फिर इस वर्ष लॉकडाउन जैसे निर्णयों की घोषणा अचानक से की गई, तो अब उनके इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने अटकलें लगानी शुरू कर दीं कि आगे क्या हो सकता है?

सोशल मीडिया यूजर्स की मनोरंजक प्रतिक्रियाएँ

प्रधानमंत्री मोदी आज शाम में किस विषयों पर चर्चा करेंगे, इसको लेकर सोशल मीडिया यूजर्स काफी मजाकिया अंदाज में नजर आए।

एक ट्विटर यूजर ने लिखा कि पीएम मोदी बॉलीवुड फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनियाँ ले जाएँगे’ (DDLJ) की 25वीं सालगिरह मनाएँगे।

इसी तरह की भावनाएँ एक अन्य ट्विटर उपयोगकर्ता द्वारा भी शेयर की गईं, जिन्होंने कहा कि पीएम मोदी शाहरुख खान और डीडीएलजे के रिकॉर्ड पर गर्व महसूस कर रहे हैं और वह अपनी घोषणा में राष्ट्र के साथ आज उसी खुशी को साझा करने जा रहे हैं।

एक अन्य ट्विटर यूजर ने लिखा कि पीएम मोदी इस बार को IPL में चेन्नई सुपर किंग्स पर पैसा लगा कर हारने वालों के लिए विशेष पैकेज का ऐलान करेंगे। बता दें कि इस बार के IPL में चेन्नई सुपर किंग्स की परफॉर्मेंस सबसे खराब रही है।

इसी तरह एक अन्य ट्विटर यूजर ने लिखा कि क्या पीएम मोदी शाम 6 बजे महेंद्र सिंह धोनी के आईपीएल से रिटायर होने के बारे में बताने वाले हैं।

एक अन्य चेन्नई सुपरकिंग्स के फैन ने टीम की लगातार हार से परेशान होकर पीएम मोदी से कहा कि वो CSK को टॉप 4 में भेज दें।

इन मजाकिया टिप्पणियों से इतर पीएम मोदी से आज शाम देश के नाम संदेश में देश को कोरोना वायरस प्रकोप के खिलाफ देश की लड़ाई से अवगत कराने और लोगों को त्योहारों, सर्दियों के महीनों के दृष्टिकोण के रूप में COVID-19 प्रोटोकॉल का पालन जारी रखने के लिए सावधानी बरतने की उम्मीद है।

पेरिस: फ़्रांस ने की मृतक शिक्षक को सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ला लिजियन डी ऑनर’ देने की घोषणा

पेरिस में आतंकी घटना में जान गँवाने वाले 47 वर्षीय इतिहास के शिक्षक सैमुअल पैटी (Samuel Paty) को फ्रांस ने अपना सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार देने का फैसला किया है। यह घोषणा मंगलवार (अक्टूबर 20, 2020) की सुबह बीएफएम टीवी को दिए एक इंटरव्यू में वहाँ के शिक्षा मंत्री जीन-मिशेल ब्लैंकर (Jean-Michel Blanquer) ने की है। इस सर्वोच्च पुरस्कार का नाम ‘ला लिजियन डी ऑनर’ (Legion d’Honneur) है।

बता दें कि पेरिस में पिछले शुक्रवार (अक्टूबर 16, 2020) को सैम्युल पैटी नामक शिक्षक की हत्या की गई थी। उनकी गलती बस ये थी कि उन्होंने क्लास के दौरान ‘शार्ली एब्दो’ अख़बार में प्रकाशित पैगम्बर मोहम्मद का कार्टून दिखाया, जिसके बाद एक लड़के ने दिन दहाड़े उनका सिर कलम कर के उनकी हत्या कर दी। बाद में पुलिस ने भी हत्यारे छात्र को मार गिराया।

पड़ताल में पता चला कि उसने एक किचेन नाइफ का प्रयोग करते हुए शिक्षक का सिर कलम किया। पुलिस ने जानकारी दी कि इस घटना की जाँच एंटी-टेरर जज द्वारा की जा रही थी। पुलिस ने बताया है कि हत्यारा मॉस्को चेचन्या मूल का मुस्लिम था।

मामले की जाँच में जुटी पुलिस ने अब तक इस संबंध में 15 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें 4 स्कूल के छात्र हैं। इसके अतिरिक्त पुलिस ने सोमवार को 40 जगहों पर रेड भी मारी है। शिक्षक की हत्या की निंदा हर ओर से की जा रही है। शार्ली एब्दो की ओर से भी मृतक के परिवार के साथ संवेदनाएँ व्यक्त की गई।

गौरतलब हो कि शिक्षक की हत्या करने वाले ‘छात्र’ की उम्र महज 18 साल थी। रिपोर्ट्स में घटना को लेकर बताया गया कि 47 वर्षीय इतिहास-भूगोल के प्रोफेसर स्कूल में क्लास ले रहे थे। फ्राँस में ये दोनों ही विषय साथ में ही पढ़ाए जाते हैं। इसके अलावा उन्हें ‘नैतिक और व्यवहार विषयक शिक्षा’ का भी दायित्व सौंपा गया था। क्लास में सारे विद्यार्थी लगभग 12-14 वर्ष के थे। क्लास के दौरान ही शिक्षक ने ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच’ (FoE) के बारे में समझाते हुए ‘शार्ली एब्दो’ में प्रकाशित पैगम्बर मोहम्मद का कार्टून दिखाया।

इसके बाद कई छात्रों के परिवार इससे नाराज हो गए और उन्होंने पुलिस में औपचारिक शिकायत दायर की। ‘नाराज’ आरोपित ने उक्त शिक्षक पर हमला बोल दिया और उन्हें मार डाला। उसने हमले की तस्वीरों को सोशल मीडिया पर भी अपलोड किया। स्थानीय पुलिस ने राष्ट्रीय स्तर के अधिकारियों को इस पर सूचित किया कि पेरिस सबअर्ब स्थित य्वेलिनेस कंफ्लॉस-सेंट-हॉरोनिन में एक लाश मिली है। ये इलाका पेरिस के नार्थ-वेस्ट में स्थित है।

इसके बाद पुलिस ने तत्काल हत्यारे का पीछा करना शुरू किया और उस पर कई गोलियाँ दागी गईं। पुलिस द्वारा कई बार चेतावनी देने के बावजूद उसने आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया और उल्टा पुलिस को धमकी भी दी। उसने सुसाइड वेस्ट भी पहन रखा था, जिस कारण पुलिस को उस पूरे एरिया को सील करना पड़ा। शिक्षक का हत्यारा ‘अल्लाहु अकबर’ भी चिल्ला रहा था।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने इस घटना पर रोष जताते हुए कहा था, “यह एक इस्लामी आतंकवादी हमला है। देश के हर नागरिक को इस चरमपंथ के विरोध में एक साथ आगे आना होगा। इसे किसी भी हालत में रोकना ही होगा क्योंकि यह हमारे देश के लिए बड़ा ख़तरा साबित हो सकता है।”

BJP का गया दुर्ग कितना मजबूत, क्या लगातार 8वीं बार कामयाब रहेंगे प्रेम कुमार?

चुनावी नतीजों को तय करने में एंटी इंकम्बेंसी फैक्टर, यानी सत्ता विरोधी लहर भी काम करती है। कई बार मतदाता नए चेहरे को मौका देने के नाम पर भी बदलाव कर देते हैं। लेकिन, बीते तीन दशक से बिहार की गया नगर सीट पर ऐसा कोई भी फॉर्मूला काम करता नहीं देखा गया है।

यहाँ से बीजेपी के प्रेम कुमार 1990 से विधायक हैं। लगातार आठवीं जीत को लेकर भी वे पूरी तरह आशवस्त दिखते हैं। राज्य के निवर्तमान कृषि मंत्री प्रेम कुमार छोटी-छोटी सभाएँ करते हैं। देर रात खुद एक-एक कार्यकर्ता से दिनभर की फीडबैक लेते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार मंत्री होते हुए भी वे सुलभ हैं।

तो क्या यह मान लिया जाए गया में सबकुछ चकाचक है?

गया राज्य के प्रमुख शहरों में एक है। भगवान बुद्ध से जुड़े होने के कारण यहाँ विदेशी सैलानियों का आना लगा रहता है। पितरों का पिंडदान करने के लिए भी देश के अलग-अलग हिस्सों से लोगों यहाँ आते हैं। हालाँकि वैश्विक कोरोना संकट की वजह से यह सब बंद है। जाम इस शहर की पहचान है। शहर की सड़कें संकरी हैं। हालिया स्वच्छता सर्वेक्षण में 10 लाख से कम की आबादी वाले शहरों में गया देश में सबसे गंदा पाया गया है।

बावजूद इसके प्रेम कुमार की सफलता का राज क्या है? क्यों हर बार विपक्ष को उनके खिलाफ चेहरा बदलना पड़ता है?

हमने अपनी यात्रा के दौरान स्थानीय लोगों से जो बात की उससे निम्नलिखित तथ्य उभरकर सामने आए:

  • प्रेम कुमार लगातार जनता के संपर्क में रहते हैं। किसी भी स्थिति में आप उनसे संपर्क करें, वे उपलब्ध हो जाते हैं।
  • कारोबारियों का कहना है कि उन्हें धंधा करने में सहूलियत है। कानून-व्यवस्था की स्थिति सुधरी है। इस सीट पर करीब 50 हजार वोटर वैश्य हैं।
  • सड़क और बिजली की स्थिति में सुधार की बात भी लोग करते हैं। प्रेम कुमार के नगर विकास मंत्री रहते हुए शहर में हुए काम की भी वे चर्चा करते हैं। जैसा कि धनंजय शर्मा कहते हैं, “आप कभी भी गया में आइए विकास का कुछ न कुछ काम होता रहता है।”
  • लॉकडाउन की वजह से रोजी-रोजगार प्रभावित होने की शिकायत भी लोग करते हैं। पंडा भी नाराज हैं। उद्योगों के अभाव में पलायन की मजबूरी का दर्द भी लोग बयाँ करते हैं।

इस संबंध में पूछे जाने पर प्रेम कुमार कहते हैं कि जाम की समस्या से शहर को निजात दिलाने के लिए पटना की तरह जगह-जगह फ्लाइओवर बनाने की योजना है। दो परियोजनाओं का जिक्र करते हुए वे बताते हैं कि इनके पूरा होने पर बाहर जाने वाले वाहनों को शहर में आने की जरूरत नहीं होगी। इस बार उनका मुख्य वादा हर घर तक पीने के लिए गंगा का जल पहुँचाना है। अगले साल तक वे इसके पूरा हो जाने की बात करते हैं।

विस्तृत बातचीत आप नीचे सुन सकते हैं;

गया से बीजेपी उम्मीदवार प्रेम कुमार से बातचीत

गंदगी का ठीकरा वे कॉन्ग्रेस शासित नगर निगम पर फोड़ते हैं। दिलचस्प यह है कि इस बार उनके मुकाबले कॉन्ग्रेस ने डिप्टी मेयर अखौरी ओंकार नाथ उर्फ मोहन श्रीवास्तव को उतारा है।

गया जिले का गणित

गया जिले में विधानसभा की 10 सीटें हैं। ये हैं- गया नगर, बोधगया, वजीरगंज, टिकारी, अतरी, इमामगंज, गुरुआ, बेलागंज, बाराचट्टी और शेरघाटी। इमामगंज, बोधगया और बाराचट्टी सुरक्षित सीटें हैं।इन सभी सीटों पर पहले चरण में 28 अक्टूबर को वोट डाले जाएँगे। फिलहाल इन 10 सीटों में सबसे अधिक 4 सीटें राजद के खाते में हैं। इस बार राजद ने यहाँ की 7 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। कॉन्ग्रेस तीन सीटों पर लड़ रही है। भाजपा और जदयू ने पिछले चुनाव में तीन-तीन सीटें जीती थीं। इस बार भाजपा 4, जदयू 3 और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की हम 3 तीन सीटों पर लड़ रही है।

2015 के चुनाव में बीजेपी गया नगर और गुरुआ में जीती थी। इस बार उसने गया नगर, वजीरगंज, गुरुआ और बोधगया से उम्मीदवार उतारे हैं। जदयू पिछली बार शेरघाटी और टिकारी से जीती थी। अबकी बार शेरघाटी, बेलागंज और अतरी के मैदान में है। हम को 2015 में इमामगंज में सफलता मिली थी। इस बार उसे लड़ने के लिए इमामगंज, बाराचट्टी और टिकारी मिली है। गया टाउन, वजीरगंज और टिकारी में कॉन्ग्रेस ने इस बार उम्मीदवार उतारे हैं। पिछली बार उसे वजीरगंज में सफलता मिली थी। 2015 में बेलागंज, बोधगया, बाराचट्टी और अतरी में जीत हासिल करने वाली राजद ने इन चार सीटों के अलावा इमामगंज, शेरघाटी, गुरुआ से भी उम्मीदवार उतारे हैं।

5 सीटें परिवारों के प्रभाव वाली

जिले की 5 सीटें ऐसी हैं जहाँ कमोबेश अरसे से एक ही परिवार का प्रभाव बना रहा है। मसलन, बेलागंज से सुरेंद्र यादव सात बार विधायक रहे हैं। इस बार भी वे राजद के उम्मीदवार हैं। अतरी में राजेंद्र यादव के परिवार का दबदबा है। पिछली बार यहाँ से उनकी पत्नी कुंती देवी जीतीं थी। वजीरगंज से अवधेश सिंह 5 बार जीत चुके हैं। पिछली बार भी महागठबंधन उम्मीदवार के तौर पर वही जीते थे। इस बार कॉन्ग्रेस ने उनके बेटे शशि शेखर सिंह को उतारा है। इमामगंज से कभी नीतीश कुमार के करीबी रहे उदय नारायण चौधरी 5 बार विधायक रहे हैं। इस बार वे राजद के टिकट पर मैदान में हैं। बाराचट्टी में भगवती देवी के परिवार का प्रभाव है। खुद भगवती देवी तीन बार विधायक रहीं। 2015 में उनकी बेटी समता देवी जीतीं। इस बार भी वे राजद की उम्मीदवार हैं। गया सुरक्षित सीट से सांसद भी भगवती देवी के बेटे विजय कुमार हैं। हालाँकि विजय जदयू के साथ हैं।

एक वीआईपी सीट यह भी

इमामगंज के चुनावी टक्कर की चर्चा भी जोरों से हैं। यहाँ राज्य को दो राजनीतिक दिग्गजों उदय नारायण चौधरी और जीतनराम मांझी के बीच मुकाबला है। दोनों का इलाके में अपना-अपना प्रभाव है। जदयू के साथ होने से मांझी की स्थिति मजबूत बताई जाती है। सीधे मुकाबले वाले इस सीट पर तीसरा कोण लोजपा की शोभा सिन्हा बना रही हैं। बताया जाता है कि शोभा सिन्हा बीजेपी के टिकट पर बोधगया से दावेदार थीं। मौका नहीं मिलने पर लोजपा से टिकट लेकर वे इमामगंज के मैदान में हैं।

बोधगया से बीजेपी के उम्मीदवार हरि माँझी हैं। वे 2005 में इस सीट से विधायक रहे हैं। सांसद भी रह चुके हैं। जीतनराम माँझी का भी इस सीट पर खासा प्रभाव है और वे भी यहाँ से विधायक रह चुके हैं। इसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है। इस सीट पर यादव और माँझी के बराबर वोट हैं। पासवान, चौधरी, वैश्य, चंद्रवंशी, कुशवाहा, राजपूत, भूमिहार, भोक्ता और अल्पसंख्यक वोट निर्णायक माना जाता है। राजद ने निवर्तमान विधायक सरबजीत को मैदान में उतारा है।

टिकारी में हम के अनिल कुमार और कॉन्ग्रेस के सुमंत कुमार के बीच मुकाबला है। लोजपा के कमलेश शर्मा यहाँ जीत-हार का अंतर पैदा कर सकते हैं। बाराचट्टी में भी जीतनराम मांझी की प्रतिष्ठा दांव पर है। हम की उम्मीदवार उनकी समधन ज्योति देवी हैं। ऐसे ही बेलागंज में लोजपा के रामाश्रय शर्मा निर्णायक फैक्टर बताए जा रहे हैं। गुरुआ और अतरी में सीधा मुकाबला है।

सबसे ​रोचक लड़ाई शेरघाटी की है। मुख्य मुकाबला निवर्तमान जदयू विधायक विनोद प्रसाद यादव और राजद की मंजू अग्रवाल के बीच है। लेकिन नतीजे लोजपा के मुकेश कुमार यादव और पप्पू यादव की पार्टी जाप के उम्मैर खां को मिलने वाले वोट तय करेंगे। अतरी से जदयू ने विधानपार्षद मनोरमा देवी को तो राजद ने अजय यादव उर्फ रंजीत यादव को उतारा है। दोनों नए चेहरे हैं।

पिछला चुनाव हारने के बावजूद इलाके में लगातार सक्रिय रहने का फायदा वजीरगंज के बीजेपी उम्मीदवार वीरेंद्र सिंह को दिखता है। हालाँकि कुरकीहार जैसे कुछ भूमिहार बहुल गाँवों में पूर्व सांसद अरुण कुमार की पार्टी को वोट मिलने की बात भी लोगों ने कही।

बेंगलुरु दंगे के आरोपितों की रिहाई के लिए जज को भेजा विस्फोटक से भरा पार्सल, पत्र में की ‘बेगुनाह’ छोड़ने की माँग

कर्नाटक में फिल्मी शख्सियतों से जुड़े ड्रग्स के एक मामले और बेंगलुरु दंगों की सुनवाई कर रहे एक एनडीपीएस विशेष न्यायाधीश को बेंगलुरु में सोमवार (अक्टूबर 19, 2020) को दो धमकी भरे पत्रों के साथ एक विस्फोटक सामग्री वाला पार्सल मिला। इस पार्सल के साथ आए पत्रों में सैंडलवुड ड्रग केस की आरोपित रागिनी द्विवेदी और संजना गरलानी की रिहाई की माँग की गई साथ ही, इसमें बेंगलुरु में दंगा करने वाले लोगों को ‘बेगुनाह’ कहकर छोड़ने की बात भी कही गई।

पत्र में जज से कहा गया कि वह आरोपितों को बेल दें और जेसीपी संदीप पाटिल को कहा गया कि वह इस केस दूर रहें। वहीं, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार धमकी भरा पत्र भेजने के सिलसिले में दो व्यक्तियों को राज्य के तुमकुरु जिले में हिरासत में लिया गया है।

पत्र लिखने वाले व्यक्ति ने चेतावनी दी थी कि माँगे पूरी नहीं होने पर एक विस्फोट किया जाएगा। बाद में जाँच से पता चला कि पार्सल में कोई विस्फोटक नहीं बल्कि डराने के लिए मात्र कुछ तारें थीं जिससे ऐसा लगा कि यह एक डेटोनेटर है। 

रिपोर्ट के अनुसार, सिटी सिविल कोर्ट के हॉल नंबर 37 के बाहर पार्सल छोड़ा गया था। जब कोर्ट स्टाफ ने पार्सल खोला तो उन्हें विस्फोटक जैसा पदार्थ मिला। उन्होंने हलासुरुगेट पुलिस को फोन किया और बॉम्ब स्क्वॉयड भी वहाँ पहुँची। ज्वाइंट कमिश्नर संदीप पाटिल ने कहा कि इस केस में अज्ञात के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है। वहीं दूसरी ओर पुलिस ने अपनी जाँच भी शुरू कर दी है। पता लगाया जा रहा है कि आखिर पत्र आया कहाँ से?

हलासुरुगेट (Halasurugate) के पुलिस अधिकारी अब सीसीटीवी कैमरा फुटेज की जाँच कर रहे हैं और हाउसकीपिंग स्टाफ व मुख्य सुरक्षाकर्मियों से भी पूछताछ कर रहे हैं। इस बीच, पुलिस बम के खतरों के मद्देनजर उक्त मजिस्ट्रेट की सुरक्षा बढ़ाने पर भी विचार कर रही है।

बेंगलुरु दंगों में कॉन्ग्रेस की भूमिका

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ कॉन्ग्रेस पार्टी बेंगलुरु दंगों में अपनी किसी भी प्रकार की भूमिका से इंकार कर रही है वहीं समाचार चैनल ‘टाइम्स नाउ’ ने इस पूरे केस में पार्टी के लिंक निकाले हैं। रिपोर्ट बताती है कि दंगों के मुख्य आरोपित और कॉन्ग्रेस के पूर्व मेयर संपथ राय के बीच हुई बातचीत के कॉल रिकॉर्ड सामने आए हैं जिसे टाइम्स नाउ ने एक्सेस किया है।

इनसे मालूम पड़ता है कि दंगाइयों व कॉन्ग्रेस नेता के बीच काफी गहरी बातचीत थी। रिपोर्ट की मानें तो इन कॉल डिटेल्स के सामने आने से स्पष्ट हो रहा है कि दंगों में संपथ रॉय की कुछ न कुछ भूमिका थी। उनके कई करीबियों के नंबर से भी ऐसे लोगों को फोन किया गया जो हिंसा के समय घटनास्थल पर थे।

याद दिला दें कि बेंगलुरु में अभी हाल में एक फेसबुक पोस्ट के कारण आगजनी का भीषण नजारा देखने को मिला था। इस पूरे हमले में केजी हल्ली, डीजे हल्ली और पुल्केशी नगर सबसे अधिक प्रभावित हुए थे। सैंकड़ों की तादाद में संप्रदाय विशेष की भीड़ ने स्थानीय विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर को घेर कर तोड़फोड़ की थी। उनका आरोप था कि विधायक के रिश्तेदार ने पैगम्बर मुहम्मद को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट किया।

इस मामले में पुलिस ने 5 ऐसे लोगों के नाम दर्ज किए थे जिन्होंने भीड़ का नेतृत्व किया। उस दिन भड़की हिंसा में 3 लोगों की मौत हुई थी और 60 से अधिक घायल हुए थे। दंगाई भीड़ ने 10 वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया था और डीजे हल्ली थाने के सामने उनमें आग लगा दी थी।

‘परमबीर सिंह ने 26/11 मुंबई हमले के दौरान आतंकियों का मुकाबला करने से इनकार किया था’: पढ़िए उनका ‘काला-चिट्ठा’

26/11 के मुंबई आतंकवादी हमलों के दौरान मुंबई के पुलिस आयुक्त रहे हसन गफूर ने परम बीर सिंह सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर आरोप लगाया कि उन्होंने आतंकवादियों से मुकाबला करने से इनकार कर दिया था। गफूर ने कहा था कि कानून-व्यवस्था के संयुक्त आयुक्त केएल प्रसाद, अपराध शाखा के अतिरिक्त आयुक्त देवेन भारती, दक्षिणी क्षेत्र के अतिरिक्त आयुक्त के वेंकटेशम और आतंकवाद-रोधी दस्ते के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह मुंबई आतंकी हमले के दौरान अपनी ड्यूटी निभाने में विफल रहे थे।

गफूर की टिप्पणी के अनुसार, परम बीर सिंह ने उन्हें ‘बदनाम’ करने के लिए कानूनी कार्रवाई की धमकी दी थी। सिंह ने खुद का बचाव करते हुए दावा किया था कि उन्हें कई टीवी चैनलों पर देखा गया था, जब वह होटल ताज और ओबेरॉय में थे। खबरों के मुताबिक टेलीविजन चैनलों के लाइव प्रसारण ने आतंकियों की मदद की थी।

परम बीर सिंह के पिता होशियार सिंह ने मार्च 2010 में हसन गफूर के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था, जिस पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्टे जारी कर दिया था।

26/11 मुंबई आतंकी हमला

26 नवंबर 2008 को लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकवादियों ने मुंबई को बम धमाकों और गोलीबारी से दहला दिया था। हमले में 160 से ज्यादा लोग मारे गए थे और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। मुंबई हमले को याद करके आज भी लोगों को दिल दहल उठता है। दक्षिणी मुंबई का लियोपोल्ड कैफे भी उन चंद जगहों में से एक था जो तीन दिन तक चले इस हमले के शुरुआती निशाने थे। यह मुंबई के नामचीन होटलों में से एक है, इसलिए वहाँ हुई गोलीबारी में मारे गए 10 लोगों में कई विदेशी भी शामिल थे, जबकि बहुत से घायल भी हुए। 1871 से मेहमानों की ख़ातिरदारी कर रहे लियोपोल्ड कैफे की दीवारों में धँसी गोलियाँ हमले के निशान छोड़ गई।

तीन दिन तक सुरक्षा बल आतंकवादियों से जूझते रहे। इस दौरान, धमाके हुए, आग लगी, गोलियाँ चली और बंधकों को लेकर उम्मीद टूटती जुड़ती रही और ना सिर्फ भारत से सवा अरब लोगों की बल्कि दुनिया भर की नज़रें ताज, ओबेरॉय और नरीमन हाउस पर टिकी रहीं।

परम बीर सिंह के खिलाफ याचिका

2009 में 26/11 मुंबई आतंकवादी हमले के तुरंत बाद हमले के दौरान कर्तव्य की लापरवाही के आरोप में परमबीर सिंह और तीन अन्य अतिरिक्त पुलिस कमिश्नरों के खिलाफ याचिका दायर की गई थी।

एक जनहित याचिका (PIL) में इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि परमबीर सिंह जैसे अधिकारी तत्कालीन पुलिस कमिश्नर के आदेशों का पालन करने में विफल रहे थे।

याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि अगर वरिष्ठ अधिकारियों ने आदेशों का पालन किया होता तो स्थिति को बहुत पहले ही नियंत्रण में लाया जा सकता था और कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी। याचिकाओं में कहा गया था कि अगर अधिकारी ठीक से काम करते तो 2 और आतंकवादी जिंदा पकड़े जा सकते थे।

याचिका में मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर हसन गफूर के हवाले से कहा गया था कि इन अधिकारियों ने उनके आदेशों की अवहेलना की थी और मुंबई आतंकी हमले के दौरान अपनी ड्यूटी निभाने में विफल रहे थे। इसके साथ ही याचिका में कहा गया था कि अधिकारियों ने आतंकवादियों से मुकाबला करने से इनकार कर दिया था और परेशानी वाले क्षेत्रों से दूर रहकर कंट्रोल रूम को गलत रिपोर्ट दी। यह याचिका हसन गफूर के बयान पर दायर की गई थी।

मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त जूलियो रिबेरो ने सिंह को एक ‘बुरा पुलिस’ कहा

जुलाई 2018 में, रिबेरो ने ‘मुंबई पुलिस आयुक्त के पद के लिए लड़ रहे दो पुलिस’ पर एक लेख लिखा था। परम बीर सिंह का नाम लिए बिना, रिबेरो ने ‘अच्छे पुलिस-बुरे पुलिस’ वाले सादृश्य को तैयार किया था, जहाँ परम बीर सिंह को ‘बुरा पुलिस’ कहा गया। उसी को अपराध मानते हुए, सिंह ने रिबेरो से माफी माँगने के लिए कहा था। इतना ही नहीं, उन्होंने उन पर मुकदमा चलाने की भी धमकी दी थी।

साध्वी प्रज्ञा ने लगाए परम बीर सिंह के खिलाफ अत्याचार के आरोप

परम बीर सिंह के सबसे विवादास्पद कार्यकालों में से एक एटीएस में उनका कार्यकाल था। परम बीर सिंह पर भोपाल की वर्तमान सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह साध्वी ने गंभीर अत्याचार का आरोप लगाया गया था।

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया था कि कथित ‘भगवा आतंक मामले’ में उनकी भूमिका को जबरदस्ती कबूल करने के लिए मुंबई एटीएस द्वारा उन पर काफी अत्याचार किया गया था। मुंबई एटीएस के सदस्यों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए साध्वी प्रज्ञा ने खुलासा किया था कि परम बीर सिंह सहित एटीएस अधिकारियों ने उन्हें अवैध हिरासत में रखा था और 13 दिनों तक उन्हें प्रताड़ित किया था।

साध्वी प्रज्ञा ने आरोप लगाया था कि खानविलकर, परम बीर सिंह और (दिवंगत) हेमंत करकरे, सभी ने उन्हें प्रताड़ित किया। साध्वी प्रज्ञा का कहना था कि आजादी से पहले या बाद में कभी भी किसी महिला को इतना प्रताड़ित नहीं किया गया होगा, जितना उन्हें किया गया।

परमबीर सिंह ने सिंचाई घोटाले में अजित पवार को क्लीनचिट दे दी

1988 बैच के आईपीएस अधिकारी परम बीर सिंह को इस साल फरवरी में मुंबई पुलिस आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया था। मुंबई पुलिस प्रमुख के तौर पर नियुक्ति से पहले वे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के महानिदेशक (DG) थे।

महाराष्ट्र एसीबी में भी परम बीर सिंह का कार्यकाल विवादास्पद रहा है। सिंह ने पिछले साल दिसंबर में सिंचाई घोटाले में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार को क्लीनचिट दे दी थी। अजित पवार 12 विदर्भ सिंचाई विकास निगम (VIDC) परियोजनाओं से जुड़े एक घोटाले में आरोपित थे।

2009 में परम बीर सिंह पर ड्रग मामले में प्रोवोग के सह-मालिक सलिल चतुर्वेदी को झूठे केस में फँसाने का आरोप लगाया गया था। एसीपी पश्चिमी क्षेत्र के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान सिंह और उनकी टीम ने ड्रग के मामले में सलिल चतुर्वेदी को गिरफ्तार किया था। हालाँकि, सालों बाद चतुर्वेदी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।

चतुर्वेदी की रिहाई के बाद, बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुणे स्थित राज्य सीआईडी को मामले में पुलिसकर्मियों की भूमिका की जाँच करने का निर्देश दिया था। जाँच के बाद, महाराष्ट्र CID ने पाया कि कुछ पुलिस अधिकारियों ने चतुर्वेदी के आवास में कोकीन प्लांट किया था।

सलिल चतुर्वेदी पर छापा मारने वाले पुलिसकर्मियों में से एक अशोक भोसले ने कबूल किया था कि उन्हें वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर व्यवसायी के घर में ड्रग्स प्लांट करने के लिए कहा गया था। हालाँकि, बाद में सीआईडी के सामने वो अपने बयान से पलट गए। तब सीआईडी ने आरोप लगाया था कि भोसले ने ऐसा परम बीर सिंह के दबाव में आकर किया।

अब MP में मदरसों को सरकारी फंडिंग बंद करने की माँग, कैबिनेट मंत्री ने कहा- राष्ट्रवाद में बाधा डालने वाली चीजें राष्ट्रहित में बंद होनी चाहिए

असम में सरकारी मदरसों पर कार्रवाई के बाद अब यह मामला मध्य प्रदेश में गरमा गया है। मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री उषा ठाकुर ने मदरसों को लेकर माँग की है कि मदरसों को दिए जाने वाली शासकीय सहायता को बंद किया जाना चाहिए क्योंकि सभी आंतकी मदरसों से ही निकले हैं।

उन्होंने कहा कि मदरसों को शासकीय सहायता बंद होनी चाहिए, वक्फ बोर्ड अपने आप में खुद एक सक्षम संस्था है। उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई निजी तौर पर मदद करना चाहता है तो हमारा संविधान उसकी इजाजत देता है, लेकिन हम खून पसीने की गाढ़ी कमाई को जाया नहीं होने देंगे। हम उस पैसे का इस्तेमाल विकास के कामों लगाएँगे।

उन्होंने कहा, “वे (मदरसे) कौन-सी संस्कृति पढ़ा रहे हैं? यदि आप इस देश के नागरिक हैं, तो आप देखिए कि सारे कट्टरवादी और सारे आतंकवादी मदरसों में पले और बढ़े हैं। जम्मू-कश्मीर को आतंकवादियों की फैक्ट्री बना कर रख दिया था।”

साभार- न्यूज़ 18

पर्यटन और संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर ने कहा, “सभी बच्चों को समान शिक्षा दी जानी चाहिए। धर्म आधारित शिक्षा कट्टरता फैला रही है। नफरत फैला रही है। ऐसे मदरसे जो हमें राष्ट्रवाद और समाज की मुख्यधारा से नहीं जोड़ सकते, हमें उन्हें ही सही शिक्षा से जोड़ना चाहिए और समाज को सबकी प्रगति के लिए आगे लेकर जाना चाहिए।”

BJP नेता ने एक सवाल पर कहा, “असम में (सरकार द्वारा संचालित) मदरसे बंद करने का फैसला करके दिखा दिया गया है कि राष्ट्रवाद में बाधा डालने वाली सारी चीजें राष्ट्रहित में बंद होनी चाहिए।” ठाकुर ने बीजेपी के आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा, “बच्चे, बच्चे और विद्यार्थी, विद्यार्थी होते हैं। इसलिए मेरा मानना है कि सभी धर्मों के विद्यार्थियों को सामूहिक रूप से समान शिक्षा दी जानी चाहिए। धर्म आधारित शिक्षा कट्टरता पनपा रही है और विद्वेष का भाव फैला रही है।”

गौरतलब है कि असम के शिक्षा मंत्री हिमांत विश्व शर्मा ने बृहस्पतिवार (8 अक्टूबर 2020) को यह साफ़ करते हुए कहा कि मजहबी शिक्षा का खर्च जनता के रुपए से नहीं उठाया जा सकता है।

शर्मा ने कहा था, “राज्य में कोई भी धार्मिक शैक्षणिक संस्थान सरकारी खर्च पर नहीं चलाया जा सकता है। हम इस प्रक्रिया को लागू करने के लिए आगामी नवंबर में ही एक अधिसूचना जारी करेंगे। इसके अलावा हमें निजी तौर पर चल रहे मदरसों को लेकर कुछ नहीं कहना है।”

उन्होंने कहा कि संस्कृत टोल (संस्कृत विद्यालय) की बात अलग है। लोगों की आपत्ति इस बात पर है कि सरकारी खर्च पर चलने वाले संस्कृत टोल पारदर्शी नहीं हैं, हम इस मुद्दे पर भी जल्द ही निष्कर्ष निकाल लेंगे।  

कश्मीर में आतंकियों को ड्रोन से बम गिराना सिखाएगा पाकिस्तान, ISIS से चुराया फ़ॉर्मूला

पाकिस्तान की फ़ौज ने अब सीमा पर भारत की चाक-चौबंद सुरक्षा को देखते हुए आतंकी समूहों की ट्रेनिंग को और बड़े स्तर पर ले जाने की तैयारी कर ली है। पाकिस्तान की फ़ौज अब आतंकियों को ड्रोन्स का इस्तेमाल कर के बम बरसाने की ट्रेनिंग दे रही है, ताकि जम्मू कश्मीर के हिस्सों को निशाना बनाया जा सके। ISIS ने सालों से इराक और सीरिया में क्वाडकॉप्टर ड्रोन्स की मदद से बमबारी कर के इस फॉर्मूले को आजमाता रहा है।

‘हिंदुस्तान टाइम्स’ में शिशिर गुप्ता की खबर के अनुसार, ख़ुफ़िया इनपुट्स कहते हैं कि पाकिस्तान की इंटेलिजेंस एजेंसियों ने ISIS वाला फॉर्मूला अपनाते हुए जम्मू कश्मीर में सस्ते कमर्शियल ड्रोन्स का इस्तेमाल कर के बमबारी करने का निर्णय लिया है और इसके लिए साजिश चल रही है। इस साल अप्रैल में इस सम्बन्ध में पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI की आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के साथ तक्षशिला में बैठक भी हुई थी।

पंजाब प्रान्त में हुई इस बैठक के बाद साजिश को अंतिम रूप देने के लिए पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के कोटली जिले में ISI और बड़े आतंकी सरगनाओं की बैठक हुई। इन बैठकों में इस पर विचार-विमर्श किया गया कि क्वाडकॉप्टर्स 3 किलोमीटर तक के दायरे में यात्रा कर सकते हैं और एक बार में 5 किलो विस्फोटक ले जाने की क्षमता रखते हैं, इसीलिए भारत के खिलाफ छद्म युद्ध में इसे आजमाया जाए।

बैठक में इस पर भी चर्चा हुई कि ‘दुश्मन भारत’ के निशानों पर ऐसे ही छोटे-छोटे हमले किए जाएँ। ISIS ने इसी तरह से ‘Killer Bees’ के जरिए कई देशों में तबाही मचाई है और उसके ड्रोन्स को रोकने के लिए अमेरिका और कई ड्रोन बनाने वाली कंपनियों को नई तकनीकों पर काम करना पड़ा। भारतीय BSF को पहले से ही इसका भान है कि सीमा पर अचानक से ड्रोन्स की संख्या में इजाफा हुआ है।

वहीं भारतीय सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि अगर पाकिस्तान ऐसी हिमाकत करता है तो उसे इसी प्रकार से करारा जवाब दिया जाएगा। उनका कहना है कि भारत ड्रोन्स के साथ और उसके बिना भी जवाब देना जानता है। ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ और ‘एयर स्ट्राइक’ की तर्ज पर भारत भी ड्रोन्स को सीमा पार करने की अनुमति दे देगा। जब से ये ख़ुफ़िया सूचना आई, तभी से भारत ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है।

हाल ही में भारत में ISIS का ब्रांच खोलने की कोशिश में लगे 15 आतंकियों को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने सजा सुनाई थी। इनलोगों की साजिश थी कि युवाओं को भड़का कर उन्हें ISIS में शामिल किया जाए। इन सभी को 10 से 5 साल तक की सजा सुनाई गई। ये मामला 2015 का है, जिसकी जाँच NIA ने की है। एजेंसी के मुताबिक, सभी आरोपित भारत में ISIS का एक सहयोगी संगठन तैयार कर रहे थे।

पूर्व PM मनमोहन के सलाहकार व NDTV पत्रकार ने फैलाया झूठ, कहा- चीन से भारत में होने वाला आयात 27% बढ़ा

पत्रकार पंकज पचौरी ने भारत-चीन तनाव के बीच झूठ फैलाया है। NDTV में 15 वर्षों तक काम कर चुके पंकज पचौरी ने दावा किया कि जहाँ सीमा पर ‘लाइन ऑफ एक्चुअल कण्ट्रोल (LAC)’ पर चीन के सामने भारत अपनी आँखें लाल कर रहा है और QUAD राष्ट्रों को चीन को घेरने के लिए आमंत्रित कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ चीन से होने वाले आयात (Imports) में अप्रैल-अगस्त के बीच 27% की बढ़ोतरी हुई है।

इसके साथ ही उन्होंने लिखा कि ‘राजनीति का कारोबार’ कभी भी ‘असली व्यापार’ के रास्ते का रोड़ा नहीं बन सकता, कभी नहीं। हालाँकि, ट्विटर पर ‘PIB फैक्ट-चेक’ ने उनके इस दावे की धज्जियाँ उड़ा दी। दरअसल, अप्रैल-अगस्त की अवधि में भारत में आयत नहीं, बल्कि भारत का निर्यात (Exports) इस अवधि में 27% बढ़ा है। यानी, भारत ने चीन को पिछली अवधि के मुकाबले ज्यादा सामान बेचा है।

यहाँ पंकज पचौरी आयात और निर्यात (Imports & Exports) के बीच का अंतर भूल बैठे और इस डेटा को बिना जाने-समझे ट्वीट कर दिया। ‘PIB फैक्ट-चेक’ ने इस दावे को फेक बताते हुए जानकारी दी कि चीन से भारत में होने वाले आयात में 27.63% की कमी आई है, न कि ये बढ़ा है। बढ़ा है तो निर्यात। अपनी पोल खुलने के बाद पंकज पचौरी दावा करने लगे कि कुछ भी हो, व्यापार तो बढ़ा है और वो इसी की बात कर रहे थे।

NDTV के मैनेजिंग एडिटर रहे पंकज पचौरी को डॉक्टर मनमोहन सिंह ने जनवरी 2012 में अपना मीडिया सलाहकार नियुक्त किया था। उन्हें ‘कम्युनिकेशंस एडवाइजर’ का पद दिया गया था। तब पीएम मनमोहन के मीडिया सलाहकार रहे हरीश खरे के इस्तीफे के बाद उन्हें इस पद पर लाया गया था। अब वो ‘GoNewsIndia’ नामक मीडिया पोर्टल चलाते हैं, जिसके संस्थापक भी वही हैं। उन्होंने कई दफा मनमोहन सरकार का बचाव भी किया था।

चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने भी कहा था कि 1 साल में भारत-चीन के बीच व्यापार में 10.9% की कमी आई है। चीन के आँकड़े अनुसार, चीन से भारत में होने वाला आयात में 17.7% नीचे गिरा है। और भारत से चीन में भारत से होने वाला निर्यात इतना ही बढ़ा है। चीन इस बात से घबराया हुआ है कि कहीं भारत में उसका बाजार ख़त्म न हो जाए। हाल ही में भारत ने कई चीनी एप्लीकेशंस को बैन किया

राहुल गाँधी ने ‘आइटम’ कमलनाथ की भाषा पर जताई आपत्ति, कमलनाथ ने कहा- ‘माफ़ी नहीं माँगूँगा, ये राहुल के विचार हैं’

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने ‘आइटम’ वाले बयान को लेकर अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को फटकार लगाई, तो उन्होंने भी पलट कर जवाब दे दिया। अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड के दौरे पर गए राहुल गाँधी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि कोई भी महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार नहीं कर सकता है और वो कमलनाथ के बयान से सहमत नहीं हैं।

राहुल गाँधी ने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से कमलनाथ द्वारा प्रयोग में लाई गई भाषा पसंद नहीं है। उन्होंने कहा कि वो इस चीज की प्रशंसा नहीं करते हैं और महिलाओं के साथ किए जाने वाले व्यवहार में सभी को सुधार लाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “महिलाएँ हमारी शान हैं।” उन्होंने कमलनाथ की टिप्पणी को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताते हुए कहा कि वो सामान्य बयान दे रहे हैं कि इस देश में हर स्तर पर सभी को महिलाओं के साथ किए जाने वाले व्यवहार में सुधार लाने की ज़रूरत है।

वहीं अब कमलनाथ ने भी अपनी पार्टी के पूर्व-अध्यक्ष के बयान पर प्रतिक्रिया दी है। मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा, “ये तो राहुल गाँधी की राय है। उन्हें जो समझाया गया कि मैंने किस सन्दर्भ में ये कहा था। मैं तो साफ़ कर चुका हूँ कि मैंने किस सन्दर्भ में ये कहा था। मैं क्यों माफ़ी माँगूँगा?” उन्होंने कहा कि वो पहले ही खेद प्रकट कर चुके हैं, अगर कोई उनके बयान से अपमानित महसूस कर रहा है तो।

बता दें कि मध्य प्रदेश के डबरा में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र राजेश के लिए प्रचार करने पहुँचे पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंच से भाषण देते वक्त कहा था,

“सुरेंद्र राजेश हमारे उम्मीदवार हैं, सरल स्वभाव के सीधे-साधे हैं। यह उसके जैसे नहीं है, क्या है उसका नाम? मैं क्या उसका नाम लूँ आप तो उसको मुझसे ज्यादा अच्छे से जानते हैं, आपको तो मुझे पहले ही सावधान कर देना चाहिए था, यह क्या आइटम है।”

इमरती देवी, उन पूर्व विधायकों में से एक हैं जिन्होंने कॉन्ग्रेस छोड़ भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था। इमरती देवी को ज्योतिरादित्य सिंधिया का कट्टर समर्थक माना जाता है। भाजपा नेता इमरती देवी को आइटम बोलने के बाद कॉन्ग्रेस नेता व पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के कार्यालय से इस पर हास्यास्पद स्पष्टीकरण आया था। इसमें कहा गया था कि आइटम शब्द में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है। हर कोई ‘आइटम’ ही होता है।

गाय चाहिए तो ‘प्रदूषण सर्टिफिकेट’ लाइए: NGT ने गोशाला खोलने के लिए जारी किए नए दिशानिर्देश

किसानों को गाय पालने के लिए अब शहर या गाँव से 200 मीटर दूर कोई जगह चुननी होगी। सीपीसीबी (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) ने हाल में गौशाला और डेयरी फार्म के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) को यह जानकारी दी है।

नए दिशा-निर्देश के तहत शहर हो या गाँव, जहाँ आबादी होगी, उससे 200 मीटर की दूरी पर ही डेयरी फार्म और गौशाला खोलने की इजाजत मिलेगी। इनमें कहा गया है कि गौशाला और डेयरी खोलने के लिए नगर नियम व अन्य स्थानीय निकायों से वायु और जल अधिनियम के तहत मंजूरी लेनी होगी। इन दिशा निर्देशों को NGT(राष्ट्रीय हरित अधिकरण) ने भी मंजूरी दे दी है।

नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, शहर हो या गाँव, आबादी वाले क्षेत्र से 200 मीटर की दूरी पर डेयरी फार्म और गौशाला खोलने की इजाजत के अलावा नदी, तालाब, झील के अलावा अस्पताल और शिक्षण संस्थानों से कम से कम 500 मीटर की दूरी पर ही कोई डेयरी फार्म या गौशाला खोल पाएगा। इसी तरह राष्ट्रीय राजमार्ग और नहरों से 200 मीटर की दूरी पर खोलने की इजाजत होगी

एनजीटी ने गौशाला और डेयरी फार्म खोलने और इसके नियमन के लिए जारी दिशा-निर्देश को मंजूरी देते हुए इसे लागू करने की हरी झंडी दे दी है। एनजीटी प्रमुख जस्टिस एके गोयल की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष डेयरी फार्म और गौशाला के नियमन के लिए तैयार की गई दिशा-निर्देश पेश करते हुए सीपीसीबी ने यह जानकारी दी है।

यह नए दिशा निर्देश ट्रिब्यूनल ने नुग्गेहाली जयसिम्हा की ओर से दाखिल याचिका के बाद जारी किए हैं जिनका सोशल मीडिया पर बहुत विरोध किया जा रहा है। 21 राज्यों ने नई दिशा-निर्देश को लागू करने पर सहमति दी है। जिन प्रदेशों ने इन निर्देशों को माना है उसमें कर्नाटक भी है।

ऐसे में गिरीश अल्वा जैसे सक्रिय सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि अगर ऐसा नियम होगा जहाँ गायों को पालन के लिए पॉल्यूशन क्लियरेंस लेना पड़ेगा तो इसका सीधा प्रभाव किसानों की जिंदगी और गौशालाओं पर पड़ेगा। लोग इस बाबत सीएम येदियुरप्पा को, पशुपालन मंत्री को टैग करके इस आदेश को वापस लेने की गुहार लगा रहे हैं।

एक यूजर कहता है एनजीटी के दिशा निर्देश पर आधारित यह आदेश डेरी फार्म और गौशालाों पर लागू होगा। कई हद्द तक यह डेरी फार्म के लिए स्वीकार्य है मगर गौशालों के लिए यह बिलकुल स्वीकार्य नहीं है। इससे भ्रष्टाचार बढ़ेगा और गौशालाएँ बंद होंगी। लोगों को लग रहा है कि ऐसे आदेशों के पीछे बूचड़खाना चलाने वाली लॉबी की साजिश भी हो सकती है।

शिशिर हेगड़े लिखते हैं कि अगर गोशाला और किसानों को पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से इजाजत लेनी पड़ेगी तो कोई भी आम आदमी गो पालन नहीं कर पाएगा। इस फैसले की निंदा होनी चाहिए और इस ‘अवैज्ञानिक’ फैसले को वापस लिया जाना चाहिए।

शिशिर पूछते हैं कि जब यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हुआ है कि गो-पालन से वायु-जल प्रदूषण में नियंत्रण होता है तो यह बहुत दुखद है कि किसानों को अब गाय पालने से पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की इजाजत लेनी होगी। वह 200 मीटर दूर डेयरी फार्म और गोशाला खोलने की बात कर कहते हैं कि इससे चोरो और कसाइयों को आसानी होगी। आखिर कैसे उस समय पशुओं का ख्याल रखा जा सकेगा? कैसे पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी? और कौन गाय पालने वालों को उनके घर या गाँव से 200 किमी दूर जगह देगा? उनका कहना है कि ये सब ऐसा लग रहा है कि ये एक एजेंडा हो ताकि लोगों को गाय पालने से रोका जाए।