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एक दीया सैनिकों के लिए भी जलाएँ, खरीददारी में स्‍थानीय उत्पादों को दें प्राथमिकता: PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (अक्टूबर 25, 2020) को ‘मन की बात’ के जरिए देशवासियों को सम्बोधित किया। दशहरा को उन्होंने असत्य पर सत्य की जीत का त्यौहार बताते हुए शुभकामनाएँ दी और कहा कि पहले, दुर्गा पंडाल में, माँ के दर्शनों के लिए इतनी भीड़ जुट जाती थी। एकदम, मेले जैसा माहौल रहता था, लेकिन, इस बार ऐसा नहीं हो पाया। PM मोदी ने कहा कि पहले, दशहरा पर भी बड़े-बड़े मेले लगते थे, लेकिन इस बार उनका स्वरूप भी अलग ही है।

एक दिया सैनिकों के नाम

दशहरा व अन्य त्यौहारों के मौके पर पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में याद दिलाया कि हमें अपने उन जाँबाज सैनिकों को भी याद रखना है, जो, इन त्योहारों में भी सीमाओं पर डटे हैं और भारत-माता की सेवा और सुरक्षा कर रहें हैं। पीएम मोदी ने कहा कि हमें उनको याद करके ही अपने त्योहार मनाने हैं। साथ ही अपील की कि हमें घर में एक दीया, भारत माता के इन वीर बेटे-बेटियों के सम्मान में भी जलाना है। उन्होंने देश के वीर जवानों से कहा कि आप भले ही सीमा पर हैं, लेकिन पूरा देश आपके साथ हैं, आपके लिए कामना कर रहा है।

वोकल फॉर लोकल

पीएम मोदी ने कहा कि आज जब हम लोकल के लिए वोकल हो रहे हैं तो दुनिया भी हमारे लोकल उत्पादों की फैन हो रही है। हमारे कई स्थानीय उत्पादों में वैश्विक होने की बहुत बड़ी शक्ति है। पीएम ने इस दौरान खादी का उदाहरण दिया। उन्होंने ‘मन की बात’ में कहा कि लम्बे समय तक खादी, सादगी की पहचान रही है, लेकिन, हमारी खादी आज, ‘इको-फ्रेंडली फैब्रिक’ के रूप में जानी जा रही है। स्वास्थ्य की दृष्टि से ये ‘बॉडी फ्रेंडली फैब्रिक’ है, ‘ऑल वेदर फैब्रिक’ है और आज खादी फैशन स्टेटमेंट तो बन ही रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि खादी की लोकप्रियता तो बढ़ ही रही है, साथ ही, दुनिया में कई जगह, खादी बनाई भी जा रही है। उन्होंने उदाहरण के लिए मेक्सिको के ओहाका (Oaxaca) का नाम लिया। उन्होंने बताया कि इस इलाके में कई गाँव ऐसे है, जहाँ स्थानीय ग्रामीण, खादी बुनने का काम करते है। आज, यहाँ की खादी ‘ओहाका खादी’ के नाम से प्रसिद्ध हो चुकी है। उन्होंने कहा कि ओहाका में खादी कैसे पहुँचीं, ये भी कम रोचक नहीं है।

पीएम मोदी ने कहा कि दरअसल, मेक्सिको के एक युवा मार्क ब्राउन ने एक बार महात्मा गाँधी पर एक फिल्म देखी। ब्राउन ये फिल्म देखकर बापू से इतना प्रभावित हुए कि वो भारत में बापू के आश्रम आए और बापू के बारे में और गहराई से जाना-समझा। पीएम मोदी ने आगे बताया कि तब ब्राउन को एहसास हुआ कि खादी केवल एक कपड़ा ही नहीं है बल्कि ये तो एक पूरी जीवन पद्धति है। इससे किस तरह से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता का दर्शन जुड़ा है ब्राउन इससे बहुत प्रभावित हुए।

यहीं से ब्राउन ने ठाना कि वो मेक्सिको में जाकर खादी का काम शुरू करेंगे। उन्होंने, मेक्सिको के ओहाका में ग्रामीणों को खादी का काम सिखाया, उन्हें प्रशिक्षित किया और आज ‘ओहाका खादी’ एक ब्रांड बन गया है। इस प्रोजेक्ट की वेबसाइट पर लिखा है ‘The Symbol of Dharma in Motion’। उन्होंने जानकारी दी कि दिल्ली के कनॉट प्लेस के खादी स्टोर में इस बार गाँधी जयंती पर एक ही दिन में एक करोड़ रुपए से ज्यादा की खरीदारी हुई। पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में कहा:

“आपको ये जानकार खुशी होगी कि पूरे भारत में अनेक लोग हैं जिन्हें ज्ञान के प्रसार से अपार खुशी मिलती है। ये वो लोग हैं जो हमेशा इस बात के लिए तत्पर रहते हैं कि हर कोई पढ़ने के लिए प्रेरित हो। मध्य प्रदेश के सिंगरौली की शिक्षिका, उषा दुबे जी ने तो स्कूटी को ही मोबाइल लाइब्रेरी में बदल दिया। वे प्रतिदिन अपने चलते-फिरते पुस्तकालय के साथ किसी न किसी गाँव में पहुँच जाती हैं और वहाँ बच्चों को पढ़ाती हैं। बच्चे उन्हें प्यार से किताबों वाली दीदी कह कर बुलाते हैं। इस साल अगस्त में अरुणाचल प्रदेश के निरजुली के रायो गाँव में एक ‘सेल्फ-हेल्प लाइब्रेरी’ बनाई गई है। दरअसल, यहाँ की मीना गुरुंग और दिवांग होसाई को जब पता चला कि कस्बे में कोई लाइब्रेरी नहीं है तो उन्होंने इसकी फंडिंग के लिए हाथ बढ़ाया।”

“आपको ये जानकार हैरानी होगी कि इस लाइब्रेरी के लिए कोई सदस्यता शुल्क ही नहीं है। कोई भी व्यक्ति दो हफ्ते के लिए किताब ले जा सकता है। पढ़ने के बाद उसे वापस करना होता है। ये लाइब्रेरी सातों दिन, चौबीसों घंटे खुली रहती है। आस-पड़ोस के अभिभावक यह देखकर काफी खुश हैं, कि उनके बच्चे किताब पढ़ने में जुटे हैं। खासकर उस समय जब स्कूलों ने भी ऑनलाइन क्लासेज शुरू कर दी हैं। वहीं चंडीगढ़ में एक NGO चलाने वाले संदीप कुमार जी ने एक छोटी गाड़ी में मोबाइल लाइब्रेरी बनाई है, इसके माध्यम से गरीब बच्चों को पढ़ने के लिए मुफ्त में किताबें दी जाती हैं।”

“इसके साथ ही गुजरात के भावनगर की भी दो संस्थाओं के बारे में जानता हूँ जो बेहतरीन कार्य कर रही हैं। उनमें से एक है ‘विकास वर्तुल ट्रस्ट’। यह संस्था प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए बहुत मददगार है। यह ट्रस्ट 1975 से काम कर रहा है और ये 5000 पुस्तकों के साथ 140 से अधिक पत्रिकाएँ उपलब्ध कराता है। ऐसी एक संस्था ‘पुस्तक परब’ है। ये एक नए किस्म का प्रोजेक्ट है जो साहित्यिक पुस्तकों के साथ ही दूसरी किताबें निशुल्क उपलब्ध कराते हैं। इस लाइब्रेरी में आध्यात्मिक, आयुर्वेदिक उपचार, और कई अन्य विषयों से सम्बंधित पुस्तकें भी शामिल हैं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में ऐसे ही एक व्यक्ति पोन मरियप्पन से भी बात की, जो अपने सैलून में ही पुस्तकालय चलाते हैं। पीएम मोदी ने सरदार पटेल को भी याद किया। उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ में देशवासियों की असाधारण उपलब्धियाँ, हमारे देश, हमारी संस्कृति के अलग-अलग आयामों पर, आप सबसे बात करने का अवसर मिला। पीएम मोदी ने कहा कि हमारा देश प्रतिभावान लोगों से भरा हुआ है। पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ के जरिए न सिर्फ दशहरा बल्कि वाल्मीकि जयंती सहित कई अन्य आने वाले त्यौहारों की भी चर्चा की।

‘एक फोन से किसी का भी काम छीन लेते हैं महेश भट्ट’: पूजा भट्ट ने कहा- लवीना हमारी रिश्तेदार नहीं

सुशांत सिंह राजपूत मामले में बॉलीवुड के वरिष्ठ फिल्म निर्देशक व निर्माता महेश भट्ट पर अब ड्रग्स नेटवर्क चलाने का आरोप लगे हैं, जिसके बाद उन्होंने आरोप लगाने वाली लवीना लोध के खिलाफ ही कानूनी कार्रवाई का मन बना लिया है। सुमित सभरवाल की पत्नी लवीना लोध ने खुद को महेश भट्ट के भाँजे सुमित सभरवाल की पत्नी बताते हुए कई आरोप लगाए थे। महेश भट्ट की बेटी पूजा भट्ट ने तो इस बात से भी इनकार कर दिया कि लवीना लोध उनके पिता महेश भट्ट की रिश्तेदार है।

महेश भट्ट की बेटी पूजा ने कहा कि आरोप लगाने वाली महिला उनके परिवार की रिश्तेदार नहीं है और सुमित भी उनके पिता के भाँजे नहीं हैं। उन्होंने बताया कि सुमित उनके पिता की कम्पनी ‘विशेष फिल्म्स’ के सीनियर प्रोडक्शन मैनेजर / हेड ऑफ प्रोडक्शन हैं। वहीं महेश भट्ट के वकील ने अपने क्लाइंट की तरफ से इन आरोपों को नकारा है। उन्होंने इन आरोपों को ‘झूठा और मानहानिकारक’ बताते हुए कहा कि क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि वकीलों की सलाह के बाद महेश भट्ट क़ानूनी कार्रवाई को लेकर निर्णय लेंगे। लवीना ने आरोप लगाया था कि उन्हें उनके पति सुमित के फोन में कई लड़कियों की तस्वीरें मिली, जिन्हें वो निर्देशकों को सप्लाई करते हैं और महेश भट्ट को इन सबकी जानकारी है। उन्होंने महेश भट्ट को इंडस्ट्री का सबसे बड़ा डॉन बताते हुए कहा था कि उनके हिसाब से न चलने पर वो किसी का भी जीना हराम कर देते हैं।

लवीना ने आरोप लगाया कि महेश भट्ट ने कितने लोगों की जिंदगी बर्बाद कर दी है, कितने एक्टर्स, डायरेक्टर्स को उन्होंने काम से निकाल दिया है, वो एक फोन करते हैं पीछे से और लोगों का काम चला जाता है। उन्होंने कहा कि महेश भट्ट उनके घर में घुसने की कोशिश कर रहे हैं और पुलिस में कोई उनकी शिकायत भी नहीं लिखता। उन्होंने भट्ट को ताकतवर और प्रभावशाली बताते हुए अपनी सुरक्षा को खतरा होने की बात कही।

वहीं, सुमित की तरफ से अमायरा और पब्बी को ड्रग्स दिए जाने के आरोपों पर अमायरा दस्तूर के वकील ने कहा है कि उनके क्लाइंट को इस बात का दुःख है कि कुछ लोग आरोप लगाने के लिए इस हद तक गिर सकते हैं। क़ानूनी कार्रवाई की बात करते हुए उन्होंने कहा कि ये वीडियो झूठ और गलत तथ्यों पर आधारित है। उन्होंने अमायरा की तरफ से सारे आरोपों को नकार दिया। अभी तक इस मामले में पुलिस की तरफ से शिकायत दर्ज किए जाने की सूचना नहीं है।

लवीना ने कहा था “अगर कल कोई हादसा मेरे साथ या मेरे परिवार के साथ होता है तो उसके पीछे केवल महेश भट्ट, मुकेश भट्ट, सुमित सबरवाल, साहिल सहगल, कुमकुम सहगल जिम्मेदार होंगे। कम से कम लोगों को पता तो चले कि बंद दरवाजे के पीछे इन्होंने कितने लोगों की जिंदगी बर्बाद की है और ये क्या क्या कर सकते हैं। क्योंकि महेश भट्ट बहुत ताकतवर और रसूख वाला इंसान है।”

आदित्य ठाकरे को ‘बेबी पेंगुइन’ कहने पर ट्विटर यूज़र को मुंबई पुलिस ने किया गिरफ्तार

मुंबई और नागपुर पुलिस ने नागपुर के रहने वाले समित ठक्कर को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि महाराष्ट्र सरकार को आदित्य ठाकरे को बेबी पेंगुइन कहे जाने से आपत्ति है। गिरफ्तारी की वजह यह भी बताई गई है कि समित ठक्कर ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे पर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। बताया जा रहा है कि ट्विटर यूजर समित ठक्कर ने सोशल मीडिया पर आदित्य ठाकरे को बेबी पेंगुइन कहा था। 

समित ठक्कर पर मामला दर्ज 

2 जुलाई को समित पर दो प्राथमिकी दर्ज की गई, पहली नागपुर में और दूसरी वीपी रोड पुलिस थाना मुंबई। समित पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया मंचों पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे और नितिन राउत पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। 1 और 30 जून को समित ने ठाकरे परिवार पर टिप्पणी की थी 1 जुलाई को राउत पर टिप्पणी की थी।

अदालत ने दिया वीपी रोड पुलिस थाने में हाजिर होने का आदेश

ठक्कर ने इस प्रकरण में अपनी गिरफ्तारी टालने के लिए बॉम्बे उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। साथ ही अदालत से निवेदन किया है कि एफ़आईआर ख़त्म कर दी जाए। 1 अक्टूबर को हुई इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश एसएस शिंदे और एमएस कर्णिक की पीठ ने आदेश दिया कि ठक्कर जाँच में सहयोग करें और बयान दर्ज कराने के लिए वीपी पुलिस थाने में मौजूद हों।

5 अक्टूबर को समित ठक्कर ने वीपी रोड पुलिस थाने में अपने दो वकीलों के साथ आए और उन्होंने अपना बयान दर्ज कराया। इस दौरान मुंबई पुलिस की साइबर सेल टीम भी मौजूद थी, इसके बाद ठक्कर वाशरूम जाने का बहाना बना कर थाने से भाग गया। 9 अक्टूबर को समित ने बॉम्बे उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान बयान दिया था कि वह थाने से इसलिए भागा क्योंकि उसे डर था कि साइबर सेल की टीम उसे गिरफ्तार कर लेगी। फिर अदालत ने अपने आदेश में कहा कि फ़िलहाल समित पर किसी भी तरह की कार्रवाई न की जाए और पुलिस एफ़आईआर की कॉपी उपलब्ध करा कर उसका बयान दर्ज कराए। 

जारी किए गए आदेशानुसार 16 अक्टूबर को दोबारा ठक्कर को पुलिस थाने में पेश होना था लेकिन वह पेश नहीं हुआ। 23 अक्टूबर को ठक्कर के अधिवक्ता ने अभिनव चंद्रचूड़ उसकी जगह पर पेश होने से मना कर दिया था साथ ही ‘ब्रीफ़’ भी लौटा दी। इसके बाद अधिवक्ता रसपाल सिंह रेनू ने न्यायालय क इस बात की जानकारी दी कि चंद्रचूड़ ने ब्रीफ़ लौटा दी है और नया अधिवक्ता प्रदान करने के लिए मोहलत दी जाए।

ठक्कर के समर्थन में ट्विटर पर #BabyPenguin कर रहा है ट्रेंड

समित ठक्कर को कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में गिरफ्तार किए जाने पर सोशल मीडिया यूजर्स उसके समर्थन में उतर आए और ट्विटर पर #BabyPenguin ट्रेंड करने लगा। ठक्कर पर आरोप है कि उसने आदित्य ठाकरे को महाराष्ट्र का ‘मोहम्मद आज़म शाह’ उर्फ़ ‘बेबी पेंगुइन’ कहा था। इसके अलावा ठक्कर ने उद्धव ठाकरे को आधुनिक युग का ‘औरंगज़ेब’ कहा था और नितिन राउत पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। 

क्यों कहा जाता है आदित्य ठाकरे को बेबी पेंगुइन 

सोशल मीडिया पर अक्सर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे का ‘पेंगुइन’ कहकर मजाक बनाया जाता है। इसके पीछे वजह यह है कि महाराष्ट्र में देवेन्द्र फडणवीस सरकार के दौरान उन्होंने मुंबई के चिड़ियाघर में पेंगुइन लाने पर जोर दिया था।

आदित्य ठाकरे की जबरदस्ती पर पेंगुइन को दक्षिण कोरिया के सियोल से मुंबई चिड़ियाघर में लाने के लिए एक असफल परियोजना शुरू की गई थी। और फिर इसके लिए कृत्रिम वातावरण बनाया गया था, लेकिन कुछ दिनों के बाद, कुछ पेंगुइन्स की मौत हो गई।

मुंबई में मौसम ऐसे पक्षियों के अनुकूल नहीं है और ऐसे प्रोजेक्ट पर अनावश्यक रूप से पैसा लगाया गया। पेंगुइन के प्रति आदित्य ठाकरे परिवार और उनकी पार्टी के लगाव के कारण ही उन्हें ‘बेबी पेंगुइन’ नाम देकर मजाक बनाया जाता है।

अतीक अहमद के 11 बैंक खातों को योगी सरकार ने किया सीज, ₹250 करोड़ की संपत्ति हो चुकी धूल

उत्तर प्रदेश के कथित बाहुबलियों पर हो रही कार्रवाई के क्रम में अतीक अहमद के कई बैंक खातों को सीज कर दिया गया है। प्रयागराज डेवलपमेंट अथॉरिटी (PDA) द्वारा पूर्व सांसद की 200 करोड़ रुपए से भी अधिक की सम्पत्तियों को नेस्तनाबूत किए जाने के बाद अब जिला प्रशासन उसके 11 बैंक खातों को कुर्क करने की कार्रवाई में जुट गया है। बैंकों को पत्र भेज कर इन खातों को सीज किया जाएगा और उसमें पड़े रुपए भी जब्त होंगे।

प्रयागराज के डीएम ने गैंगस्टर एक्ट के तहत ये कार्रवाई करने का आदेश दिया है। शुक्रवार (अक्टूबर 30, 2020) तक इन बैंक खातों की जब्ती की प्रक्रिया पूरी कर के डीएम को रिपोर्ट भेजी जानी है। उसने कई शहरों के कई बैंकों में खाते खुलवा रखे थे। मौजूदा बैंक खातों में से 7 प्रयागराज में, 2 नई दिल्ली में और 2 बलरामपुर में हैं। दिल्ली पार्लियामेंट हाउस की स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ब्रांच और लखनऊ सचिवालय के बैंक अकाउंट की जब्ती की कार्रवाई पहले ही की जा चुकी है।

वहीं उसकी एक और संपत्ति की कुर्की की प्रक्रिया पूरी की गई है। शनिवार को अतीक अहमद के 450 वर्ग गज के एक प्लॉट को जब्त कर लिया गया। शहर के धूमनगंज थाना क्षेत्र के नीम सरांय कालोनी में प्रयागराज कानपुर हाईवे पर स्थित इस प्लॉट की कीमत 4.5 करोड़ रुपए है। प्रशासन ने अपनी जाँच में पाया है कि अतीक अहमद ने अपनी अवैध कमाई से इसे बनवाया था। इस जगह को सरकारी कब्जे में लेकर यहाँ सरकार का बोर्ड लगा दिया गया है।

‘Zee News’ की खबर में दिए गए आँकड़ों के अनुसार, अतीक अहमद की अब तक 200 करोड़ रुपए से अधिक की सम्पत्तियों को जब्त किया जा चुका है। इसके साथ ही उसके कई गुर्गों के खिलाफ भी ऐसी ही कार्रवाई की गई है। उसके गुर्गों की 50 करोड़ रुपए की संपत्ति पर बुलडोजर चला है। इस तरह से कुल आँकड़ा 250 करोड़ रुपए हो जाता है। अभी कार्रवाई रुकी नहीं है और उसकी और सम्पत्तियों को नेस्तनाबूत किया जाना है।

हाल ही में पंजाब के जेल में बंद विधायक मुख़्तार अंसारी के करीबी आजम कादरी के गाजीपुर स्थित अस्पताल सहित अवैध सम्पत्तियों को ध्वस्त किया गया। वहाँ स्थित उसकी ‘शम्म-ए-हुसैनी हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर’ अस्पताल को बुलडोजर की मदद से धूल में मिला दिया गया, जो अवैध रूप से कब्ज़ा की गई ज़मीन पर बनी हुई थी। मुख़्तार अंसारी के करीबी आजम ने हमीद सेतु के पास व गंगा के ठीक किनारे इस अस्पताल को बनवाया हुआ था। 

बायडेन ने ‘चुराया’ भाजपा का ‘बिहार मॉडल’: जीतने पर अमेरिकी नागरिकों को देंगे फ्री वैक्सीन

अमेरिका में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बायडेन (Joe Biden) ने अपने देशवासियों से वादा किया है कि अगर उनकी जीत होती है तो वो मुफ्त में कोरोना वायरस की वैक्सीन मुहैया कराएँगे। उन्होंने शुक्रवार (अक्टूबर 23, 2020) को कहा कि अगर वो राष्ट्रपति बनते हैं तो सभी अमेरिकी नागरिकों को मुफ्त कोरोना वैक्सीन मिलेगी। उन्होंने कहा कि सुरक्षित और प्रभावशाली वैक्सीन के आते ही ये सबके लिए उपलब्ध होनी चाहिए, भले ही किसी ने स्वास्थ्य बीमा कराया हो या नहीं।

अमेरिका में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों में अब 10 दिन से भी कम समय शेष है। हालाँकि, अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति और रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प भी कह चुके हैं कि अगले कुछ हफ़्तों में वैक्सीन आ जाएगी और इसे सबके लिए मुफ्त होनी चाहिए। लेकिन, 2.25 लाख अमेरिकी नागरिकों के मारे जाने के बाद जो बायडेन कोरोना वायरस के खिलाफ कमजोर तैयारी के लिए ट्रम्प को घेर रहे हैं।

बायडेन ने कहा कि ये वायरस पिछले कुछ दशकों में आई सबसे बड़ी आपदा है और ये धीमा होने का नाम ही नहीं ले रहा है, इससे अमेरिका के सभी प्रांतों के लोग मर रहे हैं। 77 वर्षीय राष्ट्रपति उम्मीदवार ने कहा कि वायरस के आने के 8 महीने बीत जाने के बावजूद डोनाल्ड ट्रम्प के पास इससे निपटने के लिए कोई योजना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रम्प ने हाथ खड़े कर दिए हैं और इतनी संख्या में हुई मौतों पर वो चुप हैं।

उन्होंने कहा कि वो जैसे ही जीतेंगे, कोरोना वायरस से आगे निकलने के लिए एक राष्ट्रीय रणनीति तैयार की जाएगी, ताकि जीवन पहले की तरह पटरी पर लौट सके। उन्होंने कहा कि वो एक ‘नेशनल टेस्टिंग प्लान’ तो बनाएँगे ही, साथ में ही सरकारी इमारतों और ट्रांसपोर्ट्स में ‘नेशनल मास्क मैंडेट’ की भी घोषणा करेंगे। उन्होंने सत्ता में आते ही कॉन्ग्रेस में इससे सम्बंधित बिल पारित कराने का वादा किया है।

बता दें कि बिहार चुनाव में घोषणापत्र जारी करते हुए भाजपा ने भी सरकार बनने के बाद सभी को मुफ्त में कोरोना वायरस की वैक्सीन मुहैया कराने का वादा किया है। इसके बाद विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि केवल बिहार के लिए ऐसा किया जा रहा है। जबकि सच्चाई ये थी कि ये स्वास्थ्य योजनाओं को लागू करने का दायित्व राज्य सरकारों पर होता है और भाजपा ने बिहार में सरकार बनने पर मुफ्त वैक्सीन मुहैया कराने का वादा किया।

शिवसेना के संजय राउत तो भाजपा से यहाँ तक पूछ बैठे कि बाकी राज्य पाकिस्तान में हैं क्या? विपक्षी दलों और मीडिया ने इसे ‘केवल बिहार में मुफ्त वैक्सीन’ कह कर प्रचारित किया, जिससे दूसरे राज्यों में संशय का माहौल बने। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने भी कहा कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है और हर पार्टी ये घोषणा करने को स्वतंत्र है कि वो सत्ता में आने पर क्या करेगी। हालाँकि, यही विपक्षी नेता जो बायडेन के बयान पर चुप हैं।

अमेरिका में चुनाव प्रचार के दौरान डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत की हवा को गंदा बता दिया था। इसके जवाब में बायडेन ने उन्हें दिलाया कि ‘दोस्तों’ के लिए ऐसे शब्दों का उपयोग नहीं किया जाता और ये वैश्विक क्लाइमेट चेंज से निपटने का तरीका नहीं है। रिपब्लिकन उप-राष्ट्रपति उम्मीदवार कमला हैरिस भी भारतीय-तमिल मूल की हैं। बायडेन ने कहा था कि रूस और चीन गंदे हैं, भारत गन्दा नहीं है। हालाँकि, ट्रम्प भी भारतीय मूल के वोटरों को रिझाने में लगे हुए हैं।

ये भी याद करने की ज़रूरत है कि 1992 में अमेरिकी सीनेट के फॉरेन रिलेशंस कमिटी ने रूस से कहा कि वो भारत के साथ 250 मिलियन डॉलर के करार पर आगे बढ़ा तो उसे 24 बिलियन डॉलर की अमेरिका की आर्थिक सहायता नहीं मिलेगी। कमिटी के तब अध्यक्ष रहे जो बायडेन ने तब इसे ‘खतरनाक’ बताते हुए इसे रोकने के लिए प्रस्ताव दिया था। उन्होंने इसे मानवाधिकार और आर्म्स करारों के उल्लंघन के साथ जोड़ कर देखा था। जबकि, तत्कालीन राष्ट्रपति सीनियर बुश को इससे कोई आपत्ति नहीं थी।

‘संजुक्ता बासु घिनौना जीव है’ – TimesNow को यह कहने के लिए माँगनी होगी माफी

न्यूज़ ब्रॉडकास्ट स्टैंडर्ड अथॉरिटी (NBSA) ने टाइम्स नाउ को आदेश दिया है कि वह राहुल गाँधी की घनघोर प्रशंसक संजुक्ता से माफ़ी माँगे। इसकी वजह यह है कि टाइम्स नाउ ने संजुक्ता बासु को हिन्दू हेटर (Hindu Hater) कह कर संबोधित किया था और इन दावों का खंडन करने का मौका भी नहीं दिया। 

क्या है मामले की पृष्ठभूमि 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार टाइम्स नाउ ने 6 अप्रैल 2018 में एक कार्यक्रम का प्रसारण किया था, जिसमें संजुक्ता बासु को ‘हिन्दू हेटर’, ‘आर्मी हेटर’, ‘राहुल गाँधी की ट्रोल आर्मी’ और ‘वाइल क्रियेचर’ (घिनौना जीव) जैसे नामों से संबोधित किया था। इस पर संजुक्ता बासु ने आरोप लगाया था कि टाइम्स नाउ ने इस विवाद में उनका नाम बेहद अपमानजनक और अभद्र तरीके से घसीटा है। इसके बाद कॉन्ग्रेस की परम प्रिय संजुक्ता ने यह भी कहा कि इस मामले पर उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर भी नहीं दिया गया। 

संजुक्ता ने कहा, “मेरा ऐसा मानना है कि कार्यक्रम विश्वसनीय नहीं था क्योंकि उसका आधार ही गलत था और उसमें दिए गए तर्क भी बेहद सीमित थे। मिसाल के तौर पर उन्होंने (टाइम्स नाउ) ने खुद यह बात स्वीकार की थी कि 6 अप्रैल 2018 को भाजपा नेता अमित शाह द्वारा किए गए किसी ‘कुत्ते बिल्ली हँसी मज़ाक’ की प्रतिक्रिया में यह कार्यक्रम प्रसारित किया गया था।

संजुक्ता बासु के NBSA में शिकायत दर्ज कराने के 19 महीने के बाद टाइम्स नाउ को यह आदेश दिया गया। इस मामले के संबंध में हो रही सुनवाई पर NBSA की निष्क्रियता को देखते हुए संजुक्ता बासु ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद समूह ने मामले में दखल दिया और टाइम्स नाउ को माफ़ी माँगने का आदेश दिया। 

NBSA का आदेश – सीधे प्रसारण के दौरान माँगी जाए माफ़ी

NBSA ने अपने आदेश कहा है कि 27 अक्टूबर को टाइम्स नाउ संजुक्ता बासु के नाम का बड़े अक्षरों में उल्लेख करते हुए (ऑन एयर) माफ़ी माँगे। 

आदेश में लिखा है, “हम इस बात पर खेद जताते हैं कि 6-04-2018 को टाइम्स नाउ चैनल पर रात 8 बजे प्रसारित किए गए India Upfronr@ और 9 बजे प्रसारित किए गए “The Newshour Debate’@ के संबंध में हमने संजुक्ता बासु की शिकायत का पक्ष शामिल नहीं किया। इसलिए रिपोर्टिंग के दौरान निष्पक्षता और तटस्थता के सिद्धांतों की अवहेलना करने की बात को ध्यान में रखते हुए इस बात पर स्पष्टीकरण देते हैं कि इसका उद्देश्य संजुक्ता बासु का अपमान करना नहीं था।” 

चैनल को इस बात का भी आदेश दिया गया है कि वह एक हफ़्ते के भीतर माफ़ी माँगने के प्रसारण की सीडी भी उपलब्ध कराए। इसके अलावा टाइम्स नाउ को यह आदेश भी दिया गया है कि वह एक हफ़्ते के अंदर अपनी वेबसाइट और यूट्यूब पर मौजूद इस मामले से जुड़े हर अपमानजनक वीडियो लिंक भी हटा दे।

संजुक्ता बासु ने राहुल गाँधी को दिया इस जीत का श्रेय

संजुक्ता बासु ने इस बात के लिए पूरा श्रेय राहुल गाँधी को दिया है। संजुक्ता बासु ने कहा कि राहुल गाँधी से मुलाक़ात के बाद यह लड़ाई शुरू हुई और इस वजह से यह ऐतिहासिक है। 

वह इस बात से उत्साहित थीं कि टाइम्स नाउ द्वारा ‘हिन्दू हेटर’ कहे जाने के बावजूद राहुल गाँधी ने उनसे मुलाक़ात करने में झेंपने की बजाय ट्विटर पर फॉलो बैक किया। 

संजुक्ता बासु के मुताबिक़ पुलवामा भीतर का षड्यंत्र था

पुलवामा में हुए भयावह आतंकवादी हमले के कुछ ही घंटे बाद संजुक्ता बासु ने पाकिस्तान प्रायोजित सीआरपीएफ़ जवानों पर हुए हमले को देश के भीतर की साजिश घोषित किया था। बिना किसी का नाम लिए उनका कहना था कि यह हमला भारतीय जनता पार्टी के निर्देश पर हुआ है। 

राहुल गाँधी भी करते हैं फॉलो 

पिछले साल 2019 के लोकसभा चुनावों में हार के कुछ हफ़्तों बाद राहुल गाँधी ने संजुक्ता बासु को फॉलो किया था। राहुल गाँधी ने ऐसा तब किया था, जब संजुक्ता बासु ने कहा था कि ट्विटर पर सिर्फ उनकी और राहुल गाँधी की बात को अहमियत दी जाती है। 

इस मामले में भी बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा कि ट्विटर पर ऐसे सिर्फ 2 लोग हैं, जिनकी आवाज़ कुछ महत्वपूर्ण है और इन दोनों को ही चंद्रयान 2 की लॉन्चिंग से कोई फर्क नहीं पड़ता है। आखिरकार अंतरिक्ष तकनीक के आधुनिकरण से ऐसे दो लोगों को क्यों फर्क पड़ना चाहिए, जिनकी बातों का ट्विटर पर महत्व है।

इसके बाद संजुक्ता ने यहाँ तक कह दिया कि सिर्फ इन दो लोगों को ही देश के भविष्य की चिंता है। इसके बाद उन्होंने खुद ही बताया था कि उन दो लोगों में एक वह खुद हैं और दूसरा आप लोग (नेटिज़न्स/फॉलोअर्स) बताएँ। 

अगले दिन जब उस दूसरे व्यक्ति को कोई नहीं पहचान पाया, तब उन्होंने खुद इस बात की घोषणा कर दी कि ट्विटर पर पूरे दिल से काम करने वाले दूसरे व्यक्ति राहुल गाँधी हैं। इसके बाद संजुक्ता बासु ने कहा कि राहुल गाँधी ने शीला दीक्षित ने निधन पर ट्वीट किया, कश्मीर को लेकर ट्रंप के बयान का पर ट्वीट किया, इन दोनों बातों को भारत ने सिरे से खारिज कर दिया था। 

इतना ही नहीं राहुल गाँधी के इस्तीफ़े ने संजुक्ता बासु की आँख में आँसू ला दिए थे। 

संजुक्ता बासु इतनी अवसादग्रस्त को गई थीं कि उन्होंने देश को ही ‘गुडबाय/अलविदा’ कह दिया था। हालाँकि फ़िलहाल वह भारत में ही रह रही हैं।         

ससुर-नौकर से Sex करती है ब्राह्मण परिवार की बहू: ‘Mirzapur 2’ में श्रीकृष्ण की कथाएँ हैं ‘फ़िल्मी बातें’

‘अमेज़न प्राइम वीडियोज’ ने बृहस्पतिवार (अक्टूबर 22, 2020) को अपनी बहुचर्चित वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ का दूसरा सीजन 10 एपिसोड्स के साथ लाइव कर दिया। इसे तय समय से 3 घंटे पहले ही लाइव किया गया। इसमें अली फजल और दिव्येंदु शर्मा मुख्य किरदारों में हैं लेकिन दूसरे सीजन को कालीन भइया यानी, पंकज त्रिपाठी के नाम पर ही बेचा गया। सीजन-2 में विजय वर्मा को 2 जुड़वाँ किरदारों के रूप में एंट्री दी है है, जो ‘बिहार के गुंडे’ होते हैं।

अब सीधा पॉइंट पर आते हैं। अली फजल ने किस कदर दिल्ली के दंगाइयों का समर्थन किया था और हिन्दुओं की लाशों में अपने लिए ‘मजा’ ढूँढा था, ये तो सभी को पता है। दिव्येंदु शर्मा ने विरोध को दरकिनार करते हुए दावा किया था कि इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है। वहीं, इस शो के निर्माताओं में से एक फरहान अख्तर, जो बिना कुछ जाने-समझे CAA विरोधी रैलियों में जाते थे, उनसे हिन्दुओं की भावनाओं के सम्मान की अपेक्षा ही बेमानी है।

पहले सीजन की तरह ‘मिर्जापुर’ का दूसरा सीजन भी गालियों से भरा पड़ा है, जहाँ गालियाँ न सिर्फ गुस्से में दी जाती है, बल्कि ये भी दिखाया गया है कि यूपी-बिहार के युवक आपस में बातचीत करते हुए मजाक में भी एक-दूसरे के माँ-बाप और परिवार को माँ-बहन की गालियाँ बकते हैं। अश्लीलता के प्रदर्शन में भी कोई कमी नहीं रखी गई है। हाँ, ‘वफादार’ मुस्लिम किरदारों का महिमामंडन ज़रूर जारी रखा गया है।

‘मिर्जापुर’ के दूसरे सीजन के पहले ही एपिसोड में एक दृश्य आता है, जहाँ मुन्ना त्रिपाठी किसी तरह बच कर अपने घर में ही बिस्तर पर पड़ा होता है और उसका इलाज चल रहा होता है। उसके पिता अखंडानंद त्रिपाठी उर्फ़ ‘कालीन भइया’ उसकी ‘लम्बी उम्र’ के लिए पूजा रखवाते हैं। वैसे भी बॉलीवुड में पूजा करते हुए उन्हीं लोगों को दिखाया जाता है, जो या तो एकदम ‘डम्ब’ होते हैं, या फिर पुराने ख़यालात वाले होते हैं।

इसमें भी ऐसा ही होता है। पूजा वाले दृश्य में मुन्ना त्रिपाठी पूजा-अर्चना की प्रक्रिया में कोई दिलचस्पी नहीं ले रहा है, क्योंकि वो ‘कूल’ है और ‘नए जमाने’ का है। इतना ही नहीं, वो पंडित की तरफ हिकारत भरी नजरों से भी देखता नज़र आता है। यहाँ पूजा कराने वाले पंडित का जो चित्रण किया गया है, वो बॉलीवुड की दशकों पुरानी प्रथा का निर्वहन है, जिसके हिसाब से ब्राह्मण चुगलखोर, लालची और रूढ़िवादी होता है।

सामने पंडित की बैठ कर प्लेट में खीर खाते हुए ‘सुर्र-सुर्र’ की आवाज़ कर रहे होते हैं। पूरे दृश्य में एक एक ही अनाड़ी बैठा हुआ है और वो है ब्राह्मण, जिसका किरदार पंडित शिवेश शर्मा ने निभाया है। अचानक से मुन्ना त्रिपाठी को गुस्सा आता है और वो कहता है, “हो गया आपका? क्या इतनी देर से सुर्र-सुर्र करने में लगे हुए हैं। बाल्टी मँगवा दें? खा लीजिएगा उसमें।” इसके बाद मुन्ना धोती पहने हुए पंडित को वहाँ से भगा देता है।

यह एक दृश्य ये बताने को काफी है कि ब्राह्मणों को लेकर बॉलीवुड का नजरिया अभी भी वहीं का वहीं है। धोती पहने एक अनाड़ी सा आदमी, जिसे पूर्व-पश्चिम कुछ भी पता नहीं, एक जोकर और एक लालची इंसान – पंडितों को इसी तरह से दिखाया जाता रहा है और इसमें भी ऐसा ही किया गया है। एक और दृश्य ऐसा आता है, जहाँ ‘कालीन भइया’ के बूढ़े पिता और ‘भूतपूर्व गैंगस्टर’ सत्यानंद त्रिपाठी जाति-प्रथा को लेकर ज्ञान देते हैं।

बूढ़े त्रिपाठी का ‘दिव्य ज्ञान’ ये है कि जाति-प्रथा बनाई ही इसीलिए गई थी, ताकि सत्ता ब्राह्मणों के हाथ में रहे। ऐसे डायलॉग्स जानबूझ कर लिखे जाते हैं, जिसके पीछे न तो कोई ऐतिहासिक तर्क होता है और न ही कोई रिसर्च। ऐसे डायलॉग्स के जरिए समाज के एक वर्ग को ये एहसास दिलाया जाता है कि देखो, कैसे ब्राह्मणों ने तुम्हारा सैकड़ों सालों से शोषण किया है। इसी बात को यहाँ त्रिपाठी परिवार के सबसे वृद्ध सदस्य से बुलवाने की कोशिश हुई है।

एक और दृश्य है एपिसोड-6 में, जहाँ हर तरह के अवैध और उटपटांग कारनामों में लिप्त ‘रॉबिन’ अपनी गर्लफ्रेंड और गुड्डू पंडित की बहन डिम्पी को अपना असली नाम बताता है – राधेश्याम अग्रवाल। यहाँ भगवान श्रीकृष्ण के बारे में भी ‘चर्चा’ होती है। वो समझाता है कि अंग्रेजी नाम होने पर जनता ज्यादा भरोसा करती है। फिर डिम्पी उसे बताती है कि ये नाम उस पर सूट करता है, क्योंकि वो ‘रंगीन’ है। रंग की बात आते हैं राधेश्याम कहता है, “भगवान कृष्ण के भी वैसे काफी रंग थे। लेकिन, प्रेम उनका एक से ही था।“

यहाँ डिम्पी ‘फ़िल्मी बातें’ करने के लिए उस पर तंज कसती है और पढ़ाई करने लगती है। अर्थात, इनके लिए महाभारत और रामायण ‘फ़िल्मी बातें’ हैं। जो हिन्दुओं का इतिहास है, जो हमारी प्राचीन गाथाएँ हैं, उनके लिए इनके मन में यही भावना है कि वो फिल्मों के जैसे ही हैं। जहाँ भी कृष्ण की चर्चा होती है, केवल ‘रासलीला’ को गलत सन्दर्भ में पेश कर के इसी तरह से रंग और रंगीनियत की बातें की जाती हैं।

साथ ही महिलाओं का हर लिहाज से इसमें अपमान किया गया है। एक ब्राह्मण परिवार में एक महिला का अपने ससुर के साथ सम्बन्ध होता है और नौकर के साथ सम्बन्ध होता है। जब घर में नई बहू आती है तो ससुर की उस पर गलत नजर होती है। वेश्याओं को ‘विधवाओं के गेटअप’ में लाया जाता है और फिर वो कपड़े खोल कर नाचने लगती हैं। फिर ऐसे ही सीरीज बनाने वाले लोग महिला अधिकारों के झंडाबरदार भी बनते हैं।

वहीं, जो किरदार मुस्लिम है, वो अपने उसूलों का पक्का है। मकबूल त्रिपाठी खानदान का वफादार है और चाहे कुछ भी हो जाए, वो तब तक अपमान का घूँट पीता रहता है जब तक त्रिपाठी उसकी अम्मी को नहीं मार डालते। लाला भी मुस्लिम हैं, लेकिन वो खुद को व्यापारी बताता है और गुंडे-बदमाशों से दूर रहने की बातें करता है। जब कोई गवाह गोलीकांड पर बयान देने को राजी नहीं होता, तो बूढ़ा इमरान ही क़ानून का सहायक बन कर सामने आता है, सबसे हिम्मती वही है।

देखा जाए तो सीजन-1 में जो हिन्दू-विरोधी प्रोपेगंडा की नींव खड़ी की गई थी, सीजन-2 में उस पर एक कमरा बना दिया गया है। ब्राह्मण परिवारों में महिलाओं का आदर नहीं होता है, ये दिखाने का प्रयास किया गया है। त्रिपाठी, शुक्ला और पंडित सरनेम वाले तो पहले से ही गुंडे-बदमाश थे, अब बिहार के त्यागी को लाया गया है। यानी, चारों के चारों गुंडे घराने ब्राह्मण ही हैं। और अच्छा है तो सिर्फ इमरान, मकबूल और लाला।

निजाम व अंग्रेजों से लड़ने वाले योद्धा कोमाराम भीम को फिल्म में पहनाई मुस्लिम ‘स्कल कैप’, आदिवासियों ने किया विरोध

‘बाहुबली’ फिल्म सीरीज से लोकप्रियता बटोरने वाले निर्देशक एसएस राजामौली की अगली फिल्म ‘RRR’ को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भारत में ब्रिटिश शासन के दौर में आदिवासी योद्धाओं पे आधारित इस फिल्म में रामचरण तेजा और जूनियर एनटीआर प्रमुख भूमिकाओं में हैं। फिल्म में जूनियर एनटीआर कोमाराम भीम का किरदार निभा रहे हैं, जिन्होंने ‘जल, जंगल और जमीन’ का नारा देते हुए निजाम व उसकी फ़ौज से लोहा लिया है। उन्हें स्कल कैप पहले दिखाया गया है।

कोमाराम भीम ने हैदराबाद को निजाम की सत्ता से आज़ादी दिलाने के लिए लड़ाई लड़ी थी, लेकिन फिल्म में उन्हें ही इस्लामी ‘स्कल कैप’ पहने हुए दिखाया गया है। लोगों ने इस पर आपत्ति जताई है कि आदिवासी योद्धा कोमाराम भीम ने जिन इस्लामी आक्रांताओं के खिलाफ लड़ाई लड़ी, उन्हें इस्लामी स्कल कैप में कैसे दिखाया जा सकता है? गुरिल्ला युद्ध कला के धनी भीम ने निजाम राज के जमींदारों के अत्याचार के विरुद्ध हथियार उठाया था।

आदिवासी युवाओं ने शनिवार (अक्टूबर 24, 2020) को आदिलाबाद जिले के उदनूर में गोंड योद्धा कोमाराम भीम की प्रतिमा का अभिषेक किया। वे इस बात से नाराज हैं कि भीम के किरदार को निभाने वाले जूनियर एनटीआर को ‘RRR’ के टीज़र में स्कल कैप में दिखाया गया है। आदिवासी संगठनों का कहना है कि एसएस राजामौली को इतिहास की समझ के साथ फिल्म बनानी चाहिए। उन्होंने चेताया है कि अगर इस्लामी टोपी नहीं हटाई गई तो वो आंदोलन करेंगे।

इसी तरह से उनकी फिल्म ‘बाहुबली’ में भी आदिवासियों के अपमान को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ था। आदिलाबाद के आदिवासी संगठनों का कहना है कि कोमाराम भीम पर फिल्म बनने से उनकी कहानी ज्यादा लोगों तक पहुँचेगी, लेकिन इस तरह से छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। 20 साल पहले भी उन पर फिल्म बन चुकी है। इस फिल्म में भीम के अलावा अल्लुरी सीताराम राजू की भी कहानी दिखाई गई है।

वहीं सोशल मीडिया पर इतिहास को लेकर ट्वीट करने वाले ‘ट्रू इंडोलॉजी’ ने लिखा कि कोमाराम भीम की बेटी का ही निजाम के तालुकदार अब्दुल सत्तार ने अपहरण कर लिया था और जबरन इस्लामी धर्मान्तरण करा दिया था। उसने पूछा कि 400 करोड़ रुपए के भारी बजट में बनाई जा रही फिल्म में ऐसा झूठ क्यों दिखाया जा रहा है? साथ ही कहा कि असलियत में ऐसा कभी नहीं हुआ है कि भीम ने इस्लाम का अनुसरण किया हो।

बता दें कि हैदराबाद सल्तनत ने सन 1799 में टीपू सुल्तान के ख़िलाफ़ लड़ाई में ईस्ट इंडिया कम्पनी की मदद की थी। इसके बदले में अंग्रेजों ने निज़ाम को टीपू के राज्य का एक टुकड़ा दिया। टीपू सुल्तान की अंग्रेजों के हाथों हार हुई और वह मारा गया। मराठों के ख़िलाफ़ युद्ध में भी हैदराबाद के निज़ाम ने अंग्रेजों का साथ दिया और बदले में सिंधिया के राज्य सहित कई मराठा जिले उसे इनाम के रूप में मिले। मीर अली उस्मान ख़ान बहादुर हैदराबाद का अंतिम निज़ाम था।

वसीम खान ने माता की झाँकी देखने मंदिर गई 3 साल की बच्ची को चॉकलेट का लालच देकर ऑटो में किया बलात्कार

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक ऑटो चालक वसीम खान ने मंदिर में खेल रही पड़ोस में रहने वाली 3 साल की बच्ची को चॉकलेट का लालच देकर अपने ऑटो में बिठाकर बलात्कार किया। बच्ची जब घर पहुँची तब वह दर्द की वजह से रोने लगी और फिर उसने अपनी दादी को वसीम की हैवानियत की पूरी बात बताई।

दुष्कर्म की घटना को अंजाम देने वाले वसीम खान (32) को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। घटना ग्वालियर शहर के अंतर्गत आने वाले सेवानगर क्षेत्र की है। इस मामले के सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव बरकरार है।

उपनगर ग्वालियर के सेवानगर क्षेत्र में रहने वाले बच्ची के 30 वर्षीय पिता एक निजी संस्था में कर्मचारी हैं, उनका पूरा परिवार उनके साथ ही रहता है। पीड़ित बच्ची शुक्रवार (अक्टूबर 23, 2020) की रात लगभग 8:40 बजे पड़ोस में रहने वाले बच्चों के साथ माता की झाँकी देखने के लिए गई थी। वहाँ से वापसी के दौरान रास्ते में उसे वसीम खान मिला और वह बच्ची को चॉकलेट का लालच देकर अपने साथ ले गया। इसके बाद बच्ची को ऑटो की पिछली सीट पर बैठा कर उसके साथ बलात्कार किया। जब बच्ची ने भागने का प्रयास किया तब वसीम ने मासूम का मुँह दबा कर उसके साथ ज़्यादती की।   

इसके बाद बच्ची रोते हुए अपने घर आई, वहाँ उसकी दादी बैठी हुई थीं। बच्ची अपनी दादी से लिपटकर रोने लगी। बच्ची के कपड़ों पर खून लगा हुआ था। इसके बाद उसने घरवालों को पूरी आपबीती सुनाई। पूरी बात सामने आने के बाद पड़ोस के तमाम लोग वहाँ इकट्ठा हो गए। बच्ची के परिजन उसे लेकर आरोपित वसीम खान के घर पहुँचे लेकिन वह मौके से फरार हो चुका था। आरोपित वसीम ने छिपने का प्रयास किया पर लोगों ने उसे खोज लिया और जमकर पीटा। 

पुलिस ने ऑटो स्टैंड पर पहुँच कर वसीम को गिरफ्तार कर लिया। इसके अलावा पुलिस ने वसीम पर पॉक्सो एक्ट (POCSO- यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण करने संबंधी अधिनियम) के तहत मामला भी दर्ज कर लिया है। मामला दो सम्प्रदायों से जुड़ा हुआ है इस बात को मद्देनज़र रखते हुए क्षेत्र में पुलिसबल तैनात कर दिया गया है। घटना की रात मौके पर एसपी अमित सांघी भी पहुँच गए थे।

महाष्टमी की पूजा के बाद माँ दुर्गा के मंदिर में तोड़फोड़, प्रतिमाएँ विखंडित की: Pak के हिन्दू बहुल इलाके में भी सुरक्षित नहीं हिन्दू

जहाँ एक तरफ पूरी दुनिया में हिन्दू नवरात्र का पर्व मना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान में माँ दुर्गा की प्रतिमा को ही विखंडित कर दिया गया। पाकिस्तान के सिंध प्रान्त के नगरपारकर स्थित में माँ दुर्गा के प्राचीन मंदिर में जम कर तोड़फोड़ की गई और साथ ही प्रतिमा को भी विखंडित कर दिया गया। पाकिस्तान की पत्रकार नायला इनायत ने सोशल मीडिया के जरिए विखंडित प्रतिमाओं की तस्वीरें शेयर की।

उन्होंने असामाजिक तत्वों की करतूतों के बारे में बताया। नायला ने लिखा कि हिन्दू समुदाय द्वारा वहाँ पर नवरात्र की पूजा किए जाने के बाद ये घटना हुई। तस्वीरों में देखा जा सकता है कि माँ दुर्गा की प्रतिमा के मस्तक को ही तोड़ कर अलग कर दिया गया है। साथ ही उनके वाहन शेर की मूर्ति के साथ भी तोड़फोड़ मचाई गई है। पाकिस्तान का हिन्दू समुदाय वहाँ के इस्लामी कट्टरपंथियों के भय के साए में जीता आ रहा है।

हालाँकि, सिंध पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का दावा है कि उन्हें इस घटना की सूचना मिली है और वो दोषियों की गिरफ़्तारी के लिए प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जाँच के दौरान उन्हें कुछ इनपुट्स भी मिले हैं। ये घटना महाष्टमी के दिन हुई, जिसे दुर्गा पूजा के 9 दिन में सबसे पवित्र माना जाता है और इस दिन माँ महागौरी की पूजा की जाती है। स्थानीय पुलिस से हिन्दू समुदाय नाराज़ है और दोषियों की जल्द गिरफ़्तारी की माँग की गई है।

ये मंदिर थारपारकर जिले में स्थित है। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के मुख्यमंत्री के स्पेशल असिस्टेंट पूंजो भील ने इस घटना पर दुःख जताते हुए कहा कि उन्होंने एसएसपी से बात की है। भील ने थारपारकर को मोहब्बत, अमन और भाईचारे की भूमि बताते हुए कहा कि यहाँ के सह-अस्तित्व को इस घटना के द्वारा चुनौती दी जा रही है। भारत और पाकिस्तान के कई अन्य हिन्दुओं ने सोशल मीडिया पर विरोध जताया।

थारपारकर के बारे में बता दें कि इस क्षेत्र में हिन्दू बहुसंख्यक हैं। क्षेत्र की 1.5 लाख की जनसंख्या में से 90,000 हिन्दू समुदाय से आते हैं। यहाँ प्राचीन काल में भी हिन्दुओं की बसावट रही है और आज भी इसे प्रमाण मिलते हैं। ऐतिहासिक जैन मंदिर यहाँ स्थित है। इसके अलावा चूडियो जबल दुर्गा माता मंदिर भी खासा लोकप्रिय है। यहाँ सदियों से जैन और हिन्दू समुदाय के लोग रहते आ रहे हैं, लेकिन अब इस्लामी मुल्क में उनके लिए खतरा पैदा हो गया है।

इससे पहले पाकिस्तान के सिंध के बदीन ज़िला स्थित कड़ियू घनौर शहर में अक्टूबर 10, 2020 को एक हिन्दू मंदिर में तोड़फोड़ की घटना सामने आई थी। स्थानीय पुलिस ने इस मामले में मोहम्मद इस्माइल शैदी नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। इस्माइल ने मंदिर में रखी मूर्तियों को क्षतिग्रस्त कर दिया था और फिर मौके से फरार हो गया था। पाकिस्तान में आए दिन ऐसी घटनाएँ होती रहती हैं।