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PAK में ‘गृहयुद्ध’: सेना के खिलाफ लगे सड़कों पर नारे, नवाज शरीफ के दामाद की गिरफ्तारी पर आर्मी चीफ को देने पड़े जाँच के आदेश

पाकिस्तान में इमरान सरकार और पाक सेना को लेकर विपक्ष का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा। ताजा खबर है कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ ने अपनी सेना पर लग रहे आरोपों के मद्देनजर जाँच के आदेश दे दिए हैं। पाक आर्मी पर आरोप है कि उन्होंने सिंध के पुलिस चीफ का अपहरण किया ताकि वह पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शऱीफ के दामाद की गिरफ्तारी करवा सकें।

अपने बयान में मिलिट्री ने कहा आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा ने कराची की पोर्ट सिटी में मिलिट्री पर लग रहे आरोपों की जाँच शुरू करने के आदेश दिए हैं।

मंगलवार (अक्टूबर 20, 2020) को ऐसे ही खींचतान के बीच द इंटरनेशनल हेराल्ड ने ट्विटर पर एक वीडियो डाली। इस वीडियो में बाजवा के ख़िलाफ़ नारे लग रहे थे। ट्वीट में कैप्शन देते हुए पाकिस्तान की स्थिति को ‘सिविल वॉर’ करार दिया। बाद में खबर आई कि इस झड़प में 10 कराची पुलिस ऑफिसर मारे गए। हालाँकि, पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन ने अपने वेबसाइट पर ऐसी कोई खबर पब्लिश नहीं की।

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान में यह सारी हलचल ठीक तब शुरू हुई जब विपक्ष ने प्रधानमंत्री इमरान खान के प्रशासन के खिलाफ़ रैली निकाली और नवाज शरीफ के दामाद गिरफ्तार कर लिए गए।  सफदर को तो कोर्ट ने बाद में बेल देकर रिहा कर दिया, पर इस बीच पाकिस्तान आर्मी पर आरोप लगने लगे कि पाक सेना ने उन्हें गिरफ्तार किया व सिंध प्रांत के पुलिस चीफ मुश्ताक मेहर का अपहरण करके सफदर की गिरफ्तारी के लिए दवाब बनाया।

वैसे बता दें कि अभी तक इन आरोपों पर न किसी जवान ने और न पीएम इमरान खान ने कोई टिप्पणी की है। मगर, मेहर के साथ हुए दुर्व्यवहार से वहाँ कई पुलिस अधिकारियों में गुस्सा है। अधिकारियों का कहना है कि पुलिस ने शुरू में ही सफदर को गिरफ्तार करने से मना किया था। 

इस संबंध में 20 अक्टूबर को सिंध पुलिस ने कई ट्वीट किए हैं। एक ट्वीट में उन्होंने बताया कि 18/19 अक्टूबर को हुई घटना ने सिंध पुलिस को आहत किया है। इस घटना के बाद सिंध पुलिस चीफ ने छुट्टी पर जाने का निर्णय लिया लेकिन बाद में जाँच हेतु फैसला बदल लिया। उन्होंने यह नहीं बताया है कि किसने उनका अपहरण करके किसने उन्हें रेंजर्स के पास पहुँचाया। 

सिंध पुलिस ने अपने ट्वीट थ्रेड में चीफ के साथ हुई घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। साथ ही मामले में जाँच का आदेश देने के लिए आर्मी चीफ का आभार व्यक्त किया। ज्ञात हो कि नवाज शरीफ के दामाद को कराची में उनके होटल से गिरफ्तार किया गया था।

सिंध पुलिस के ट्वीट

गोहत्या करने से मना करता था युवक, मुन्नू कुरैशी और कइल ने गला रेत कर मार डाला: माँ ने झारखण्ड सरकार से लगाई न्याय की गुहार

झारखण्ड के गढ़वा में सदर थाना स्थित उचरी मोहल्ले में एक युवक की सिर्फ इसीलिए गला रेत कर हत्या कर दी गई, क्योंकि उसने गायों को बचाने की कोशिश की थी। ये घटना सोमवार (अक्टूबर 19, 2020) की देर रात हुई। उक्त मुस्लिम युवक ने गोहत्या करने से रोका था, जिसके बाद उसके ही समुदाय के लोगों ने उसे मार डाला। पुलिस ने उसी समुदाय के दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है, जिन्होंने युवक का गला रेत डाला था।

उंचरी निवासी मोहम्मद हबीब के 18 वर्षीय पुत्र मोहम्मद आरजू की हत्या के अगले दिन उसके शव को पोस्टमॉर्टम के लिए गढ़वा स्थित सदर अस्पताल में लाया गया। सुबह-सुबह ही झारखण्ड के पेयजल मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर भी अस्पताल का निरीक्षण करने पहुँचे। उन्हें मृतक की माँ आयशा ने बताया कि उनका बेटा आसपास के लोगों को गोहत्या करने से मना करता था, जिसके कारण उसकी हत्या कर दी गई।

मोहल्ले के ही मुन्नू कुरैशी और कइल कुरैशी ने उसे मार डाला। महिला ने झारखण्ड सरकार के मंत्री के सामने माँग रखी कि उनके बेटे के हत्यारों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। महिला के निवेदन पर मंत्री ने वहाँ उपस्थित थाना प्रभारी राजीव कुमार सिंह को निर्देश दिया कि इस मामले में कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। मृतक की उम्र मात्र 18 साल ही थी।

मृतक की माँ ने बताया कि चूँकि उनका बेटा आरजू मोहल्ले के लोगों को गोहत्या न करने के लिए कहता था और इसके खिलाफ आवाज़ भी उठाता था, इसीलिए उन्हें अपने ही समुदाय का आक्रोश झेलना पड़ता था। गढ़वा जिला झारखण्ड के पलामू प्रमंडल में पड़ता है। झारखण्ड में इससे पहले भी गोहत्या को लेकर तनाव के मामले सामने आते रहे हैं। हेमंत सोरेन की सरकार बनने के बाद ऐसी गतिविधियों में वृद्धि देखी गई है।

पूर्व IIT प्रोफेसर ने विदेश से लाए थे माओवादी साहित्य, उमर खालिद था ‘अर्बन पार्टी मेंबर’: ‘दलित आतंकवाद’ पर हो रहा था काम

‘एल्गार परिषद’ मामले में एक गवाह ने ‘राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA)’ को बताया कि एक बैठक के दौरान कथित एक्टिविस्ट और बुद्धिजीवी आनंद तेलतुंबड़े ने ‘दलित आतंकवाद’ को नए रूप में पुनर्जीवित करने की बात कही थी। साथ ही उसने माओवादी आंदोलन के ‘क्रन्तिकारी पुनरुत्थान’ की बात भी कही थी। NIA कोर्ट में दायर हुई सप्लीमेंट्री चार्जशीट में ये बयान दर्ज है। भीमा-कोरेगाँव मामले में इस चार्जशीट में 6 गवाहों के बयान दर्ज हैं, जिनमें से किसी की पहचान छिपाई नहीं गई है।

NIA के अनुसार, एक अन्य गवाह ने बताया कि भीमा-कोरेगाँव हिंसा का साजिशकर्ता आनंद तेलतुंबड़े फिलीपींस, पेरू और तुर्की में कई अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में हिस्सा लिया करता था। वो अकादमिक दौरे के नाम पर ऐसा किया करता था और वहाँ से माओवादी साहित्य वीडियो और डिजिटल रूप में लाया करता था। इन वीडियोज और साहित्य को CPI (माओवादी) के कार्यकर्ताओं को उनके प्रशिक्षण के दौरान दिखाया गया था। बता दें कि ये संगठन प्रतिबंधित है।

साथ ही एक अन्य आरोपित पी वरवरा राव ने माओवादी बैनर तले ‘क्रांति को एकजुट करने’ की बात की थी, वहीं शोमा सेन ने महिलाओं को माओवादी आंदोलन में शामिल होने के लिए मनाया था। हनी बाबू और रोमा विल्सन ने दिल्ली के छात्रों को माओवादी विचारधारा का पाठ पढ़ाया था और माओवादियों के लिए उनके मन में सहानुभूति बिठाई थी। अक्टूबर 9, 2020 को दायर हुए सप्लीमेंट्री चार्जशीट में 8 आरोपित हैं।

आनंद तेलतुंबड़े को अप्रैल 14, 2020 को गिरफ्तार किया गया था। दिसंबर 31, 2017 को हुई ‘एल्गार परिषद’ की बैठक के अगले ही दिन भीमा-कोरेगाँव में जबरदस्त हिंसा भड़की थी। आनंद का भाई मिलिंद तेलतुंबडे भी शहरी क्षेत्रों में माओवादी आंदोलन को तेज करने की साजिश रच रहा था। वो आनंद से दिशानिर्देश लेता रहता था। गवाहों के अनुसार, वो कहा करता था कि उसेक बड़े भाई के कारण ही वो माओवादी बना है।

ये भी खुलासा हुआ है कि जेएनयू का छात्र नेता रहा उमर खालिद उनका ‘अर्बन पार्टी मेंबर’ था और उसे दिल्ली में माओवादी एजेंडा फैलाने के लिए नियुक्त किया गया था। ‘एल्गार परिषद’ की बैठक के दौरान उसने भी भाषण दिया था। गौतम नवलखा, जिसने माओवादियों के लिए साहित्य भी लिख रखा है, उसने एक स्वीडिश लेखक के साथ जंगलों में जाकर माओवादियों से मुलाकात की थी। वो वरवरा राव का अच्छा दोस्त था।

गौतम नवलखा ने ही मानवाधिकार समूहों को माओवादी आंदोलन से जोड़ा था। झारखण्ड में स्टेन स्वामी का अपना अलग संगठन है, NGO है, और ‘अर्बन नक्सल्स’ ने पाया था कि उनकी अलग पहचान है, इसीलिए उन्हें भी जिम्मेदारी सौपी गई थी। बता दें कि आनंद तेलतुंबड़े IIT खड़गपुर में प्रोफेसर रह चुका है। उसका कहना है कि आनंद तेलतुंबड़े कब का घर छोड़ चुका है, इसीलिए उसके कारण उसे फँसाया जा रहा है।

साथ ही राजनैतिक कैदियों के लिए क़ानूनी सपोर्ट मुहैया कराने हेतु विल्सन को लाया गया था। साथ ही दिल्ली में ऐसे दलित छात्रों को चिह्नित किया जाता था, जो पिछड़े परिवारों से आते हैं, इसके बाद उनके मन में माओवादी आंदोलन के लिए सहानुभूति बिठाई जाती थी। सामाजिक कार्यकर्ताओं, डॉक्टरों, अधिवक्ताओं और शिक्षकों के माध्यम से माओवादी विचारधारा फैलाई जा रही है, जिसकी परिणीति अंत में हिंसा के रूप में ही होनी थी।

बता दें कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भीमा-कोरेगाँव हिंसा मामले में आरोपित पादरी स्टेन स्वामी के समर्थन में उतर आए थे। स्टेन स्वामी को NIA ने हिरासत में लिया था। हेमंत सोरेन ने पूछा था, “गरीब, वंचितों और आदिवासियों की आवाज़ उठाने’ वाले 83 वर्षीय वृद्ध ‘स्टेन स्वामी’ को गिरफ्तार कर केंद्र की भाजपा सरकार क्या संदेश देना चाहती है?” साथ ही कहा है, “अपने विरोध की हर आवाज को दबाने की ये कैसी जिद?

सूरजभान सिंह: वो बाहुबली, जिसके जुर्म की तपिश से सिहर उठा था बिहार, परिवार हो गया खाक, शर्म से पिता और भाई ने की आत्महत्या

बिहार में बात जब राजनीति की आती है तो कर्पूरी ठाकुर, लालू यादव और नीतीश कुमार की बात होती है, लेकिन अगर डॉन, बाहुबलियों और अपराधियों का जिक्र न हो तो बिहार की सियायत अधूरी कहलाएगी। या यूँ कहें कि बिहार की सियासत लंबे समय तक नेता और बाहुबली से बनी धुरी पर ही घूमती रही है। शहाबुद्दीन, अनंत सिंह जैसे दबंगों के बीच एक बाहुबली नेता ऐसा भी रहा, जिसके गुनाहों का सूरज उसकी उम्र के साथ चढ़ता चला गया।

5 मार्च 1965 को गंगा किनारे बसे पटना जिले के मोकामा में जन्मे सूरजभान सिंह की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। अपराध की सीढ़ियाँ सूरजभान ने इतनी तेजी से चढ़ीं कि लोग उसके नाम से ही काँपने लगे। रंगदारी, अपहरण और हत्या जैसे अपराध उसके लिए आम हो चुके थे।

बिहार की राजनीति में रंगदारी, अपहरण और हत्या जैसे अपराध करने वाले सूरजभान सिंह दबंगई के बाद राजनीति में भी किस्मत आजमाने उतर गए। मोकामा की छोटी गलियाँ जब उनके अपराध के लिए संकरी पड़ने लगीं तो उसने पूरे बिहार को अपना निशाना बनाना शुरू किया। पहले दबंगई फिर विधायक और बाद में सांसद तक बने। पहले निर्दलीय विधायक बने फिर पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी का दामन थाम लिए।

मोकामा के एक छोटे से गाँव की गलियों में खेलते-कूदते बड़े हुए सूरजभान सिंह के पिता एक व्यापारी सरदार गुलजीत सिंह की दुकान पर नौकरी करते थे। इसी से घर चलता था। उनके बड़े भाई की नौकरी सीआरपीएफ में लगी तो परिवार को बड़ा सहारा मिला। पिता सोचते थे कि लंबी-चौड़ी कद काठी वाला छोटा बेटा भी फौज में जाएगा। 

लेकिन किस्मत को तो कुछ और ही मँजूर था। सूरजभान की किस्मत की लकीरें तो उसे सियासत और जुर्म की उस दुनिया में ले गईं, जहाँ उसके नाम का सिक्का चलता था। सूरजभान पहले बाहुबली, फिर विधायक और इसके बाद सांसद बने। शुरुआत में सूरजभान को ऐसे लोगों की संगत मिली, जिनके साथ मिलकर पहले उसने रंगदारी और फिर वसूली करनी शुरू कर दी।

ऐसे बढ़ा क्राइम का ग्राफ

5 मार्च 1965 को बिहार के मोकामा जिले में जन्मे सूरजभान सिंह पर तकरीबन 30 संगीन मामले दर्ज हैं। बताया जाता है कि 80 के दशक में सूरजभान छोटा-मोटा अपराध करता था। लेकिन नब्बे का दशक आते-आते उसके क्राइम का ग्राफ तेजी से बढ़ने लगा। उसे आगे बढ़ाने का श्रेय दो लोगों को जाता है- कॉन्ग्रेस के विधायक और मंत्री रह चुके श्याम सुंदर सिंह धीरज और अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप सिंह को।

दरअसल, कभी श्याम सुंदर के लिए बूथ कब्जा करने वाले बाहुबली दिलीप सिंह ने उन्हें चुनावी रण में न सिर्फ चुनौती दी बल्कि लालू प्रसाद यादव की सरकार में मंत्री बन गए। दिलीप सिंह को धीरज ने ही पाला-पोसा था। ऐसे में उनके पाले-पोसे शख्स ने उन्हें ही चुनावी मैदान में शिकस्त दे दी, इस बात से वे बौखला गए। इस दौरान उनकी नजर पड़ी दिलीप गैंग के ही एक लड़के पर, जिसमें जुर्म की दुनिया में छा जाने का भूत सवार था। वो लड़का सूरजभान ही था।

जब दिलीप मंत्री बनकर वाइट कॉलर जॉब में आ गए तो उन्हें सियासत भी करनी थी और रुतबा भी बरकरार रखना था। इस दौरान सूरजभान ने उस गुलजीत सिंह से भी रंगदारी माँग ली, जो उनकी आँखों के सामने बड़ा हुआ था और जिनके यहाँ पिता नौकरी करते थे। गुलजीत इस बर्ताव से दंग थे। उन्होंने सूरज के पिता को बताया। पिता ने बेटे को समझाने की खूब कोशिश की लेकिन तब तक ‘गंगा में बहुत पानी बह चुका था’।

जुर्म की आँच में परिवार ही खाक हो गया, भाई और पिता ने शर्म से की आत्महत्या

बिहार के एक आम परिवार से संबंध रखने वाले सूरजभान सिंह आज अपराध और बिहार की राजनीति में जाना-माना नाम है। लेकिन कहा जाता है कि सूरजभान के चाल-चलन से उनके पिता रामनंदन सिंह और उनके भाई काफी दु:खी रहते थे। सूरजभान मूल रूप से मोकामा के शंकरबार टोला के निवासी हैं। मोकामा में इनके पिता एक व्यवसायी की दुकान पर काम किया करते थे। 

लेकिन जब सूरजभान ने आपराधिक रास्ता अपनाकर मोकामा में रंगदारी और वसूली शुरू की तो उसने उन लोगों से भी वसूली और मार-पीट की जिनसे उनके परिवार की रोजी-रोटी चलती थी। पिता ने सूरजभान को काफी समझाने की कोशिश की लेकिन उसने एक न मानी। मोकामा वासियों की मानें तो इन्हीं घटनाओं से परेशान होकर सूरजभान के पिता ने गंगा में कूदकर आत्महत्या कर ली। इस घटना के कुछ दिन बाद सीआरपीएफ में कार्यरत उसके इकलौते भाई ने भी आत्महत्या कर ली। 

अशोक सम्राट ने सूरजभान पर मोकामा में हमला भी करवाया था

अब सूरजभान के सिर पर दिलीप सिंह का हाथ था। सूरजभान सिंह मोकामा में उस वक्त छाया, जब उसका सामना उत्तर बिहार के डॉन माने जाने वाले अशोक सम्राट से हुआ। अशोक सम्राट ने सूरजभान पर मोकामा में हमला भी करवाया था। इस हमले में सूरजभान के पैर में गोली लगने के बाद भी वह बच गया था लेकिन उसका चचेरा भाई मारा गया था। कहा जाता है कि अशोक सम्राट जब तक जिन्दा रहा, सूरजभान मोकामा से बाहर नहीं निकल पाया था। 

हाजीपुर में पुलिस मठभेड़ में अशोक सम्राट के मारे जाने के बाद सूरजभान ने अपने कार्यक्षेत्र का विस्तार किया। इसी बीच सूरजभान के चचेरे भाई मोती सिंह की गैंगस्टर नागा सिंह ने हत्या कर दी थी। जिसके बाद सूरजभान का मोकामा विधायक दिलीप सिंह से दुश्मनी बढ़ी और उस दौर में अपराधियों के हो रहे राजनीतिकरण में सूरजभान का भी नाम जुड़ गया। इस दौरान श्याम सुंदर धीरज को भी एक बाहुबली की जरूरत थी। सूरजभान ने धीरज का हाथ पकड़ा जरूर लेकिन अब उसके सपने बड़े हो चुके थे।

साल 2000 में बने विधायक फिर सांसद

सूरजभान ने मोकामा से साल 2000 में तत्कालीन बिहार सरकार में मंत्री दिलीप सिंह के खिलाफ विधानसभा चुनाव लड़ा और भारी मतों से जीतकर निर्दलीय विधायक बन गए। उस वक्त पुलिस रिकॉर्ड में उन पर उत्तर प्रदेश और बिहार में कुल 26 मामले दर्ज थे। इसके बाद साल 2004 में वह रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट से बलिया (बिहार) के सांसद बने। 

अपराधों की लंबी फेहरिस्त

जनवरी 1992 में बेगूसराय के मधुरापुर में रहने वाले रामी सिंह की हत्या हुई। तड़के 5 बजे रामी सिंह पर चार लोगों ने गोलियाँ चलाकर मौत की नींद सुला दिया। इसमें सूरजभान का भी नाम आया और लोअर कोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। 

इसी मामले में सजायाफ्ता होने के कारण सूरजभान पर चुनाव लड़ने से प्रतिबंध लगा है। रामी सिंह हत्याकांड के मुख्य गवाहों और यहाँ तक कि सरकारी वकील राम नरेश शर्मा की भी हत्या हो गई थी। सूरजभान अन्य मामलों की तरह इसमें भी बरी हो जाते अगर केस का एक गवाह और टूट गया होता। 

मगर गवाहों में एक व्यक्ति ऐसा भी था, जिसका नाता बेगूसराय के डॉन रह चुके कामदेव सिंह के परिवार से था। उस परिवार से जुड़े लोग बताते हैं कि सूरजभान के लोग आदतन उस गवाह को भी धमकाने गए। कामदेव सिंह का परिवार सफेदपोश कारोबारी हो चुका है। जब पता चला कि सूरजभान ने उनके किसी रिश्तेदार को जान से मारने की धमकी दी है तो सूरजभान को उसी के अंदाज में संदेश भिजवाया गया- “हमने हथियार चलाना बंद किया है, हथियार रखना नहीं। हमारी बंदूकों से अब भी लोहा ही निकलेगा।”

मामला कुछ फिल्मी सा था। वैसे मोकामा बेगूसराय इलाके के लोगों के बीच रहें तो आप इसे सहज पाएँगे। उनकी रोजमर्रा की बातें और बोलने का अंदाज अलहदा रहता है। डॉन को पूर्व डॉन की धमक का अंदाजा था। कामदेव सिंह के बहुत से चेले-चपाटे अपराध की दुनिया में धीरे-धीरे अपनी पकड़ बना रहे थे। सूरजभान सिंह को पीछे हटना पड़ा। 

पूर्व मंत्री बृज बिहारी की हत्या से दहल गया था राज्य

3 जून 1998 की शाम थी। बृज बिहारी प्रसाद, राबड़ी देवी सरकार में साइंस एंड टेक्नोलॉजी मंत्री थे। इलाज के लिए उन्हें पटना के इंदिरा गाँधी आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती कराया गया था। जब वह पार्क में शाम को टहल रहे थे तो 6-7 हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियाँ चलाईं। गोलियाँ चलाने वालों में गोरखपुर का नामी डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला भी था। इस घटना ने पूरे प्रदेश को दहलाकर रख दिया। मामले में सूरजभान को पुलिस ने आरोपित बनाया गया था। खूब बवाल मचा और जाँच सीबीआई को सौंपी गई। साल 2009 में निचली अदालत ने सूरजभान समेत सारे अपराधियों को आजीवन कारावास की सजा दी। हालाँकि, बाद में हाईकोर्ट ने सूरजभान को बरी कर दिया था। 

उमेश यादव हत्याकांड

साल 2003 में दिनदहाड़े मोकामा के पूर्व पार्षद और अपराधी उमेश यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उमेश के परिजनों ने सूरजभान पर इल्जाम लगाया। लेकिन मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद सूरजभान को बरी कर दिया गया। 

हालाँकि, ये तो ऐसे मामले हैं, जो कानून और पुलिस की निगाहों में आए। लेकिन कुछ अपराधों का चिट्ठा तो कभी खुला ही नहीं। कभी लोग सूरजभान के नाम से डरते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं है। सूरजभान के चुनाव लड़ने पर रोक है। हालाँकि, उनकी पत्नी वीणा देवी मुंगेर की सांसद रह चुकी हैं। उनके बेटे आशुतोष सिंह की साल 2018 में एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी।

ये तो ऐसे अपराधों की लिस्ट थी, जो कानून की नजर में आई थी। लेकिन कितनों का तो कोई हिसाब ही नहीं है। कहते हैं एक वक्त था जब लोग सूरजभान सिंह के नाम से ही डरते थे। लेकिन आज हालात ऐसे नहीं हैं। फिलहाल सूरजभान सिंह पर चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी गई है। लेकिन इनकी पत्नी वीणा देवी बिहार मुंगेर की सांसद रह चुकी हैं और बिहार की राजनीति में सक्रिय भी हैं। 

पत्नी ने दी थी तलाक की धमकी

लोकसभा इलेक्शन के दौरान जब भाजपा और लोजपा में गठबंधन हुआ, तब वीणा देवी ने एक सभा में कहा था कि उन्होंने अपने पति सूरजभान के सामने दो विकल्प रखा था। पहला या तो वे रामविलास पासवान से अलग हो जाएँ, अगर वे ऐसा नहीं करेंगे तो हम उन्हें तलाक देकर भाजपा में चले जाएँगे। वीणा देवी ने कहा कि उनकी इस धमकी के बाद ही पति सूरजभान सिंह भाजपा से गठबंधन के लिए सचेत हुए थे।

तीन दशक से मोकामा पर बाहुबलियों का राज

मोकामा का नाम आते ही बिहार की राजनैतिक सरगर्मी बढ़ जाती है क्योंकि ये वो इलाका है जहाँ पिछले तीन दशक से बाहुबलियों का राज है। यानी बाहुबली ही विधायक चुने जाते रहे हैं। इसकी शुरुआत अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप कुमार सिंह से हुई थी जो साल 1990 में जनता दल के टिकट पर चुने गए थे। 1995 में भी दिलीप सिंह ही जीते थे, लेकिन साल 2000 में दूसरा बाहुबली सूरजभान सिंह यहाँ से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीता और विधानसभा पहुँचा। सूरजभान सिंह भी भूमिहार जाति से ही आता है। सूरजभान और अनंत सिंह के परिवारों के बीच दुश्मनी का इतिहास भी पुराना रहा है।

2005 के विधान सभा चुनाव में अनंत सिंह ने जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीते। उसी साल फिर उपचुनाव में फिर से अनंत सिंह ने जीत हासिल की। साल 2010 में भी जदयू के टिकट पर अनंत सिंह फिर से लड़े और जीत गए। 2015 में अनंत सिंह चौथी बार निर्दलीय लड़े और इसमें भी जीत गए। इस बार 2020 के विधान सभा में बाहुबली अनंत सिंह आरजेडी का दामन थाम फिर से चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। इस बार की सबसे खास बात ये है कि जहाँ बाहुबली खुद आरजेडी के उम्मीदवार हैं वहीं पत्नी को निर्दलीय सीट पर खड़ा कर दिया है। मतलब साफ है कि अगर अंतिम दौर में कोई अड़चन आए तो सीट हाथ से ना जाने पाए। खुद जीतें या पत्नी, लेकिन जीत इनकी झोली में हीं आए।

बिहार का ताजा हालात ये है कि पिछले चुनाव में कुछ लोग जो दूसरे दलों के टिकट पर जीत कर आए थे या जिन्होंने चुनाव में अपना हाथ आजमाया था और जिनका रिश्ता किसी न किसी रूप में अपराध जगत से जुड़ा है वो लोग सत्ताधारी दल में आ चुके हैं या आने के लिए प्रयासरत हैंl सच ही कहा गया है कि अपराध का सबसे अच्छा संरक्षण और पोषण सत्ता के संसर्ग में ही होता हैl आपराधिक जमीन के विस्तार के लिए राजनीतिक जमीन की तलाश निहायत ही जरूरी हैl

37 वर्षीय रेहान बेग ने मुर्गियों को बनाया हवस का शिकार: पत्नी हलीमा रिकॉर्ड करती थी वीडियो, 3 साल की जेल

ब्रिटेन में एक शख्स को मुर्गियों के साथ सेक्स करने के आरोप में कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई है। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि इस दौरान उसकी पत्नी वीडियो शूट करती थी। पुलिस को छापे के दौरान उसके घर से ऐसे कई वीडियो मिले हैं। इन वीडियोज में वह अपनी पत्नी और मुर्गियों के साथ सेक्स करता दिखाई दे रहा था। ब्रिटेन की ब्रैडफोर्ड क्राउन कोर्ट ने सबूतों को देखने के बाद आरोपित को दोषी मानते हुए तीन साल की सजा सुनाई है।

मुर्गियों से साथ सेक्स में पत्नी भी देती थी साथ

जानकारी के मुताबिक, दोषी शख्स का नाम रेहान बेग है। 37 साल का रेहान ब्रिटेन के ब्रैडफोर्ड में एक पोल्ट्री फार्म की देखरेख करता था। इसी दौरान उसने अपनी पत्नी हलीमा के साथ ऐसी कई वीडियो को शूट किया था। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि रेहान के इस कृत्य के दौरान कई मुर्गियों की मौत भी हो गई थी।

कोर्ट ने माना नीच, घिनौना और विकृत काम

ब्रैडफोर्ड क्राउन कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसले में रेहान बेग के अपराध को नीच, घिनौना और विकृत माना। कोर्ट ने कहा कि उसका अपराध समाज के किसी भी सही सोच वाले सदस्य को स्वीकार नहीं होगा। रेहान बेग की 39 वर्षीय पत्नी हलीम बेग ने अपने पति की घिनौने हरकतों को कोर्ट में स्वीकार किया। कोर्ट उसे भी जेल भेजने वाली थी, लेकिन जब उसने बताया कि उसका पति घरेलू हिंसा करता था तब कोर्ट ने उसे बरी कर दिया।

खबरों के मुताबिक, इस दंपति ने पहले एक कुत्ते के साथ सेक्स किया था और उसकी तस्वीरें भी ली थीं। उन्होंने 49 वीभत्स तस्वीरें ली थी, जिसमें से 11 काफी घिनौने थे और कुछ बच्चों की उम्र तो 6 साल से भी कम थी।

चाइल्ड पोर्नोग्राफी के आरोप में मारा गया था छापा

ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी ने पिछले साल 9 जुलाई को बच्चों के यौन शोषण वाले फोटोज की तलाश में रेहान बेग के ग्रेट हॉर्टन ब्रैडफोर्ड वेस्ट यॉर्कशायर में स्थित घर पर छापा मारा था। इस दौरान पुलिस ने दो कंप्यूटर एक लैपटॉप और एक मोबाइल फोन को जब्त किया था। जाँच के दौरान बच्चों के यौन शोषण के फोटोज के अलावा मुर्गियों के साथ यौन शोषण के वीडियो बरामद हुए।

पुलिस ने कोर्ट को सुनाई घिनौनी दास्ताँ

पुलिस की अभियोजक अबीगैल लैंगफोर्ड ने कोर्ट को बताया कि मूविंग इमेज में रेहान बेग कई मुर्गियों के साथ सेक्स करता हुआ दिखाई दिया। इनमें से कुछ वीडियो में उसकी पत्नी हलीमा बेग भी दिखी। अभियोजन ने कहा कि वीडियो देखने के बाद यह स्पष्ट है कि इसे दोषी बेग के घर के तहखाने में फिल्माया गया है। इस दौरान कई मुर्गियों की मौत भी हुई। एक वीडियो में बेग ने एक मरे हुए जानवर को ब्लैक बिन बैग में डालने से पहले भी उसके साथ सेक्स किया था।

#Tweet4Bharat: राष्ट्रीय महत्त्व के मुद्दों पर हिंदी श्रेणी में विजेताओं की सूची और उनको जीत दिलाने वाले ट्वीट थ्रेड्स यहाँ देखें

रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी (RMP) ने भारत में अगस्त में ऑपइंडिया के सहयोग से “#Tweet4Bharat” नामक पहली ट्विटर-थ्रेड प्रतियोगिता की शुरुआत की, जिसमें लोगों को पोर्टल पर अपने ट्वीट थ्रेड को प्रकाशित करने और इस प्रक्रिया में नकद पुरस्कार जीतने का अवसर दिया गया।

RMP, 1982 से अपने ‘सार्वजनिक जागृति’ मिशन के हिस्से के रूप में सेमिनार और कार्यक्रमों के माध्यम से सार्वजनिक बातचीत को आकार देने के लिए काम कर रहा है। “#Tweet4Bharat” का उद्देश्य राष्ट्रीय महत्व के महत्वपूर्ण मुद्दों पर लिखने, चर्चा करने और विचार-विमर्श करने के लिए युवाओं को ‘ट्विटर थ्रेड्स’ का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित और प्रेरित करना था।

इस प्रतियोगिता में उम्मीद से काफी अधिक लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और आखिरकार बहुत अधिक विचार-विमर्श के बाद अब हम विजेताओं की घोषणा करने की स्थिति में हैं। प्रत्येक श्रेणी में प्रतिभागियों के जीतने के थ्रेड यहाँ भी पढ़े जा सकते हैं।

हिंदी भाषा

हिंदी भाषा श्रेणी के राष्ट्रीय एकीकरण सेक्शन में विजेता हैं:
सर्वश्रेष्ठ थ्रेड: @THESHUBHAMV
सबसे रचनात्मक थ्रेड: @TheSignOfFive
लोगों की पसंद: @ManishJangidJNU

हिंदी भाषा श्रेणी के लैंगिक समानता सेक्शन में विजेता हैं:
बेस्ट थ्रेड: @SaffronKoffee
सबसे रचनात्मक थ्रेड: @RealIndianSon
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इन विजेताओं में से प्रत्येक के थ्रेड अब नीचे लिस्टेड होंगे।

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@TheSignofFive द्वारा किया गया ट्वीट थ्रेड हिंदी-राष्ट्रीय एकता श्रेणी में सबसे रचनात्मक थ्रेड है।

वहीं @ManishJangidJNU का ट्वीट थ्रेड हिंदी-राष्ट्रीय एकता श्रेणी में सबसे अधिक लोगों द्वारा पसंद किया गया।

@SaffronKoffee का ट्वीट थ्रेड हिंदी लैंगिक-समानता श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ थ्रेड रहा।

@RealIndianSon द्वारा किया गया ट्वीट थ्रेड हिंदी लैंगिक-समानता श्रेणी में सबसे अधिक रचनात्मक थ्रेड रहा।

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@deeptibharadwaj द्वारा किया गया ट्वीट थ्रेड हिंदी-सामाजिक न्याय श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ थ्रेड रहा।

@bhav2406 द्वारा किया गया ट्वीट थ्रेड हिंदी-सामाजिक न्याय श्रेणी में सबसे अधिक रचनात्मक थ्रेड रहा।

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मराठी भाषा

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सभी विजेताओं को बधाई और भाग लेने वाले सभी ट्विटर यूजर्स को बहुत-बहुत धन्यवाद!

क्या India Today का खेल खत्म? CBI ने TRP घोटाले में दर्ज की FIR: यूपी सरकार द्वारा की गई थी जाँच की सिफारिश

पिछले कुछ दिनों से चल रहे टीआरपी घोटाले ने एक नया मोड़ ले लिया है। महाराष्ट्र के बाद अब यह मामला उत्तर प्रदेश में भी सामने आया है। जिसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले के संबंध में एक शिकायत दर्ज की और राज्य सरकार ने सीबीआई को जाँच सौंपने का अनुरोध किया था। ताजा जानकारी के मुताबिक, सीबीआई ने टीआरपी घोटाले की जाँच के लिए एक FIR दर्ज कर ली है। यहाँ पर बता दें कि शुरुआत में इस मामले के संबंध में मुंबई पुलिस की FIR में इंडिया टुडे चैनल का नाम सामने आया था।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यूपी सरकार ने इस मामले की सीबीआई जाँच की माँग की थी क्योंकि यह एक ऐसा मामला है जो कई राज्यों में फैला हुआ है। TRP में हेराफेरी करने वाले चैनलों से जुड़ी मूल शिकायत में कहा गया कि उन्हें अनुचित लाभ दिया गया। हमारे सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इसकी निजी शिकायत गोल्डन रैबिट कंपनी के सीआईओ कमल शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई थी। शिकायत लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई।

गौरतलब है कि टीआरपी के नए मामले में मुंबई पुलिस के पूर्व असिस्टेंट कमिश्नर इकबाल शेख ने मुंबई के एक कोर्ट में याचिका दायर कर रिपब्लिक टीवी, आर भारत और अर्नब गोस्वामी पर कथित TRP घोटाले की रिपोर्टिंग से रोक लगाने की माँग की है। इसके साथ ही मुंबई के पूर्व सहायक पुलिस आयुक्त इकबाल शेख द्वारा दायर मुकदमे में मुंबई पुलिस के खिलाफ ‘अपमानजनक रिपोर्ट’ के कारण हुई मानसिक पीड़ा के लिए 5 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति की भी माँग की गई है।

इससे पहले रिपब्लिक टीवी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार (अक्टूबर 19, 2020) को कहा था कि रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी TRP मामले में आरोपित नहीं हैं। इसके बाद रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क और अर्नब गोस्वामी की तरफ से इस मुद्दे पर प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई। जिसमें उन्होंने मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह पर 200 करोड़ के मानहानि के मुक़दमे की बात कही।

सुनवाई के दौरान मुंबई पुलिस ने कोर्ट में परमबीर का सिंह का साथ देने से इनकार कर दिया था। कोर्ट में मुंबई पुलिस भी पीछे हट गई।  महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस ने अदालत में यह बात स्वीकार ली कि टीआरपी मामले में दर्ज की गई एफ़आईआर में रिपब्लिक टीवी का नाम शामिल नहीं है। कोर्ट में उनके वकील ने भी माना कि रिपब्लिक आरोपित नहीं हैं। बता दें कि महाराष्ट्र राज्य और मुंबई पुलिस की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल पेश हुए थे।

हाथरस कांड में CBI जाँच तेज: अलीगढ़ JNMC के डॉ. मो अजीमुद्दीन और डॉ. उबेद इम्तियाज टर्मिनेट, रेप सैंपल पर दी थी राय

उत्तर प्रदेश के हाथरस हत्याकांड की सीबीआई जाँच अपनी रफ्तार के साथ जारी है। लेकिन इसी बीच, अलीगढ़ के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में काम कर रहे दो डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से टर्मिनेट कर दिया गया है। हाथरस रेप पीड़िता को दिल्ली शिफ्ट किए जाने से पहले उसकी इसी अस्पताल में इलाज हुई थी।

हाथरस कांड की जाँच कर रही सीबीआई टीम ने एक दिन पहले अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जेएन मेडिकल कॉलेज में उन डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ से पूछताछ की थी, जिन्होंने पीड़िता का इलाज किया था। अब एएमयू के वाइस चांसलर ने कड़ा एक्शन लेते हुए लीव वैकेंसी पर कार्यरत जेएन मेडिकल कॉलेज के सीएमओ डॉ. मोहम्मद अजीमुद्दीन मलिक और डॉक्टर उबेद इम्तियाज उल हक को तत्काल प्रभाव से टर्मिनेट कर​ दिया है।

ट्रॉमा सेंटर और इमरजेंसी के कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज डॉ. एसएएच जैदी की तरफ से जारी किए गए पत्र में कहा गया है कि संबंधित दोनों डॉक्टर किसी भी प्रकार की अपनी ड्यूटी को आगे परफॉर्म न करें।

बता दें कि दोनों डॉक्टर हाथरस की कथित गैंगरेप पीड़िता के इलाज व उसकी मेडिकल रिपोर्ट तैयार करने में शामिल थे। एक डॉक्टर ने विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए थे। कहा था कि घटना के 11 दिन बाद रेप की पुष्टि नहीं हो सकती है। यदि शुरुआत में पुलिस ने जाँच कराई होती तो पुष्टि हो सकती थी। हालाँकि, बाद में उन्होंने इसे अपना निजी विचार बताया था।

पद से हटाए गए डॉक्टरों ने वीसी के इस एक्शन को लेकर रोष जताया है। उनका कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने अपनी सेवाएँ दीं। इसके बाद भी उनके संबंध में सहानुभूति से विचार नहीं किया गया। 

डॉक्टर मोहम्मद अजीमुद्दीन मलिक ने कहा, ”अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में कार्यरत 6 डॉक्टरों के कोरोना संक्रमित होने पर हमें ड्यूटी पर बुलाया गया था। उस भयंकर दौर में कोई भी ड्यूटी करना नहीं चाहता था। तब हमने यहाँ ड्यूटी की। इसी दौरान ढाई माह बाद हाथरस कांड हुआ। जिसमें हमने मीडिया को कोई इंटरव्यू नहीं दिया। किसी मीडिया कर्मी ने यदि कॉल पर एफएसएल संबंधित कोई ओपिनियन पूछी तो दे दी गई। वह हम डॉक्टर की हैसियत से दे सकते हैं।”

डॉक्टर उबेद इम्तियाज उल हक ने कहा, ”कल सीबीआई भी आई थी। लेकिन हमसे सीबीआई टीम की कोई डायरेक्ट बात नहीं हुई। वहीं आज हमको सीएमओ मेडिकल इंचार्ज डॉक्टर एसएएच जैदी द्वारा लिखित रूप से अवगत कराया गया है। आज से हम दोनों डॉक्टरों की सेवाएँ समाप्त की जाती है।”

उन्होंने कहा, “हम अन्य स्थान से नौकरी छोड़ कर आए और यहाँ आकर कोविड-19 काल मैं ड्यूटी जॉइन करके अपनी सेवाएँ दी। जब यहाँ कोई सेवा देने को तैयार नहीं था। किस कारण से हमारी सेवाएँ समाप्त की गई हैं यह हमें बताया जाए। हमारी स्वतंत्रता की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। हमने भी वीसी साहब को पत्र लिखा है और वह हमारे भविष्य के हित में सोचेंगे। यह हमें उनसे उम्मीद है।”

‘माफिया ऑन बेड रेस्ट’: मुख्तार अंसारी को लेने गई UP पुलिस को पंजाब से आना पड़ा खाली हाथ, कहा- 3 महीने आराम की मिली है सलाह

माफिया मुख्तार अंसारी को पंजाब के रोपड़ जेल से उत्तरप्रदेश वापस लाने गई यूपी पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा। पंजाब पहुँचकर यूपी पुलिस को बताया गया कि अंसारी को डॉक्टर ने 3 माह का बेड रेस्ट कहा है। 

दरअसल, अंसारी के ख़िलाफ़ पिछले कुछ महीनों में कई नए मामले दर्ज हुए हैं। इनमें एक फर्जी नाम पते से शस्त्र लाइसेंस हासिल करने का भी मुकदमा है। इसी बाबत यूपी पुलिस उसे लेने पंजाब गई थी और यहाँ लाकर उसे एमपी/एमएलए कोर्ट में पेश करना चाहती थी। मगर, पंजाब पहुँचकर उनके हाथ सिर्फ़ निराशा लगी। 

रोपड़ जेल में यूपी पुलिस को अंसारी की मेडिकल रिपोर्ट थमा दी गई। रिपोर्ट में मुख्तार को डायबिटीज और डिप्रेशन का शिकार बताया गया। साथ ही ये भी कहा गया कि जेल के मेडिकल बोर्ड ने मुख्तार को बेड रेस्ट की सलाह दी है।

मेडिकल रिपोर्ट

यहाँ गौरतलब है कि इससे पहले भी कई बार यूपी पुलिस पंजाब जाकर मुख्तार अंसारी को प्रदेश लाने की कोशिश करती रही है। हालाँकि हर बार वह बहाने बना कर बचते रहे और इस बार भी जब यूपी पुलिस कोर्ट का ऑर्डर लेकर पहुँची तो उसे मेडिकल सर्टिफिकेट थमा दिया गया। 

उधर, मुख्तार को यूपी न भेजने पर पंजाब के पुलिस अधिकारियों पर यूपी प्रशासन खासा नाराज है। मामले की गहन मॉनिट्रिंग कर रहे डीजीपी मुख्यालय भी हैरानी में हैं। उनके कहने पर ही गाजीपुर पुलिस ने मुख्तार को लाने के लिए टीम भेजी थी किंतु, वहाँ मेडिकल बोर्ड ने उसका बचाव करते हुए कई रोगों का मरीज बता दिया। साथ ही आराम करने की सलाह दी।

बता दें कि मुख्तार अंसारी के ख़िलाफ़ योगी सरकार लगातार कार्रवाई कर रही है। उसके कई अवैध ठिकानों पर छापेमारी के साथ उसकी पत्नी, उसके दोनों बेटों पर भी केस दर्ज हैं। पुलिस उन सबकी तलाश कर रही है।

दूसरी ओर मुख्तार अंसारी के एक बार दोबारा यूपी न आने से सोशल मीडिया पर तरह तरह के कयास लगने शुरू हो गए हैं। एबीपी न्यूज के पत्रकार विकास भदौरिया लिखते हैं, “माफिया मुख़्तार अंसारी को यूपी पुलिस पंजाब के रोपड़ जेल लेने गई, यूपी पुलिस की गाड़ियाँ मुख़्तार को लेने के लिए खड़ी रही, आख़िर में जेल प्रशासन ने डायबटीज़, डिप्रेशन की मेडिकल रिपोर्ट देकर कहा कि मुख़्तार को नहीं भेज सकते, सवाल ये है पंजाब सरकार मुख़्तार को क्यों बचा रही है?”

सीएम योगी के सूचना सलाहकार शलब मणि त्रिपाठी कहते हैं, “माफिया ऑन बेडरेस्ट- सुना है कभी, तो देखिए कैसे प्रियंका और उनकी सरकार मुख्तार जैसे दुर्दांत को बचाने में जुटी है। योगी जी की ‘TUV’ जब-जब मुख़्तार को पंजाब से यूपी लाने जाती है, तब-तब पंजाब सरकार मुख़्तार की मददगार बन खड़ी हो जाती। पं कृष्णानंद के हत्यारों से क्या डील है प्रियंका जी।”

लॉकडाउन भले चला गया हो, मगर वायरस नहीं गया, थोड़ी सी लापरवाही हमारी खुशियों को धूमिल कर सकती है: PM मोदी

पीएम नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (अक्टूबर 20, 2020) को शाम 6 बजे राष्ट्र को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में जनता कर्फ्यू से लेकर आज तक हम भारतवासियों ने बहुत लंबा सफर तय किया है।

उन्होंने कहा, “हमें ये भूलना नहीं है कि लॉकडाउन भले चला गया हो, मगर वायरस नहीं गया है। बीते 7-8 महीनों में, प्रत्येक भारतीय के प्रयास से, भारत आज जिस संभली हुई स्थिति में हैं, हमें उसे बिगड़ने नहीं देना है और अधिक सुधार करना है।”

वो कहते हैं कि आज देश में रिकवरी रेट अच्छी है, Fatality Rate कम है। दुनिया के साधन-संपन्न देशों की तुलना में भारत अपने ज्यादा से ज्यादा नागरिकों का जीवन बचाने में सफल हो रहा है। कोविड महामारी के खिलाफ लड़ाई में टेस्ट की बढ़ती संख्या हमारी एक बड़ी ताकत रही है।

मोदी ने कहा कि साधन संपन्न देशों की तुलना में भारत अपने ज्यादा से ज्यादा नागरिकों का जीवन बचाने में सफल हो रहा है। देश में कोरोना मरीजों के लिए 90 लाख से ज्यादा बेड हैं, 12000 क्वारंटाइन सेंटर हैं, कोरोना टेस्टिंग के लिए 2000 लैब काम कर रही हैं। देश में टेस्ट की संख्या जल्द ही 10 करोड़ को पार कर जाएगी।

सेवा परमो धर्म: के मंत्र पर चलते हुए हमारे डॉक्टर्स, नर्स, हेल्थ वर्कर्स, इतनी बड़ी आबादी की निस्वार्थ सेवा कर रहे हैं। इन सभी प्रयासों के बीच, ये समय लापरवाह होने का नहीं है। ये समय ये मान लेने का नहीं है कि कोरोना चला गया, या फिर अब कोरोना से कोई खतरा नहीं है

आज देश में रिकवरी रेट अच्छी है, मृत्यु-दर कम है। दुनिया के साधन-संपन्न देशों की तुलना में भारत अपने ज्यादा से ज्यादा नागरिकों का जीवन बचाने में सफल हो रहा है। कोविड महामारी के खिलाफ लड़ाई में टेस्ट की बढ़ती संख्या हमारी एक बड़ी ताकत रही है।

पीएम मोदी ने कहा, “आप ध्यान रखिए, आज अमेरिका हो, या फिर यूरोप के दूसरे देश, इन देशों में कोरोना के मामले कम हो रहे थे, लेकिन अचानक से फिर बढ़ने लगे। जब तक सफलता पूरी न मिल जाए, लापरवाही नहीं करनी चाहिए। जब तक इस महामारी की वैक्सीन नहीं आ जाती, हमें कोरोना से अपनी लड़ाई को कमजोर नहीं पड़ने देना है।”

पीएम ने कहा, “बरसों बाद हम ऐसा होता देख रहे हैं कि मानवता को बचाने के लिए युद्धस्तर पर काम हो रहा है। अनेक देश इसके लिए काम कर रहे हैं। हमारे देश के वैज्ञानिक भी वैक्सीन के लिए जी-जान से जुटे हैं। भारत में अभी कोरोना की कई वैक्सीन्स पर काम चल रहा है। इनमें से कुछ एडवान्स स्टेज पर हैं।”

उन्होंने कहा कि कोरोना की वैक्सीन जब भी आएगी, वो जल्द से जल्द प्रत्येक भारतीय तक कैसे पहुँचे इसके लिए भी सरकार की तैयारी जारी है। एक-एक नागरिक तक वैक्सीन पहुँचे, इसके लिए तेजी से काम हो रहा है।

पीएम ने आगे कहा, “एक कठिन समय से निकलकर हम आगे बढ़ रहे हैं, थोड़ी सी लापरवाही हमारी गति को रोक सकती है, हमारी खुशियों को धूमिल कर सकती है। जीवन की ज़िम्मेदारियों को निभाना और सतर्कता ये दोनो साथ-साथ चलेंगे तभी जीवन में ख़ुशियाँ बनी रहेंगी।”

गौरतलब है कि इससे पहले कोरोना संकट से देश की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए जब पहले राहत पैकेज का ऐलान हुआ था तब भी पीएम मोदी ने इसी तरह देश के नाम संबोधन में इसकी जानकारी दी थी। इसके बाद वित्त मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 20 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज की डिटेल जानकारी दी।

प्रधानमंत्री मोदी ने 19 मार्च को दिए 29 मिनट के भाषण में 22 मार्च को जनता कर्फ्यू का पालन करने की अपील की थी इसके साथ ही लोगों से कोरोना वॉरियर्स के लिए ताली, थाली, घंटी आदि बजाने की भी अपील की थी। 24 अप्रैल को प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में 21 दिन के लॉकडाउन का ऐलान किया था। इसके बाद पीएम मोदी ने 3 अप्रैल को सोशल मीडिया के माध्यम से 12 मिनट एक वीडियो साझा कर 9 मिनट के लिए लाइटें बंद करके दीये जलाने की अपील की थी।