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अनुराग कश्यप मामले में ऋचा चड्ढा ने पायल घोष के खिलाफ किया ₹1.1 करोड़ की मानहानि का केस, सुनवाई 7 अक्टूबर को

अनुराग कश्यप पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली अभिनेत्री पायल घोष के ख़िलाफ़ बॉलीवुड एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा ने कानूनी कार्रवाई करते हुए 1.1 करोड़ रुपए का मानहानि का दावा किया है।

ऋचा ने बॉम्बे हाईकोर्ट में इस संबंध में कल याचिका दायर करवाई। हालाँकि, कोर्ट ने आज इस याचिका को 7 अक्टूबर तक के लिए खारिज कर दिया। कोर्ट की तरफ से ऐसा उत्तरदाताओं (respondents) को नोटिस नहीं दिए जाने को लेकर किया गया है। 

गौरतलब है कि पिछले दिनों मीटू अभियान के तहत पायल घोष ने अनुराग कश्यप के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कई एक्ट्रेस का नाम इस मामले में उजागर किया था। उस समय उन्होंने अनुराग पर आरोप लगाते हुए कहा था कि जब उन्होंने अनुराग की हरकतों का विरोध किया था तो उन्होंने उनसे कहा कि ये सब तो नॉर्मल बात है।

इसके अलावा पायल के मुताबिक कश्यप ने घोष से यह भी कहा था कि बॉलीवुड की कई एक्ट्रेस उनके साथ बहुत सहज हैं। इस बातचीत को उजागर करते हुए पायल घोष ने ऋचा चड्ढा का नाम भी शामिल किया था और उसके बाद ही ऋचा चड्ढा ने एक्ट्रेस को कानूनी तरीकों से जवाब देने के लिए मानहानि की याचिका दायर की।

बताया जा रहा है सबसे पहले एक्ट्रेस ने 21 सितंबर को ही अपनी लीगल टीम की ओर से नोटिस जारी कर दिया था और लीगल कार्रवाई करने की बात कही थी। इसके बाद एक्ट्रेस ने महिला आयोग में भी इस मामले की शिकायत की थी। ऋचा ने पायल को लीगल नोटिस भेजा था, मगर उनके स्टाफ ने उसे स्वीकार नहीं किया था, जिसके बाद ऋचा ने नोटिस की सॉफ्ट कॉपी एक्ट्रेस को मेल की थी।

अपने लीगल नोटिस में ऋचा ने लिखा था, “मैं हर महिला के लिए न्याय चाहती हूँ। लेकिन किसी भी महिला द्वारा उसकी आजादी का दुरुपयोग दूसरी महिलाओं के खिलाफ निराधार, बिना किसी वजूद के, झूठे और आधारहीन आरोप लगाने के लिए नहीं किया जा सकता।”

बता दें कि ऋचा ने पायल के अलावा कमाल आर खान और एक न्यूज चैनल पर भी मानहानि केस किया है। एक्ट्रेस का दावा है कि इन सभी ने कई आपत्तिजनक बयान दिए हैं, जिससे उनकी छवि को ठेस पहुँची है। ऋचा ने माँग की है कि सोशल मीडिया पर इस केस संबंधित उनके खिलाफ डाले गए वीडियो और बयानों को भी डिलीट करवाया जाए।

इस मामले पर सोमवार को बॉम्बे हाइकोर्ट के जज अनिल मेनन के समक्ष सुनवाई की गई थी। इस दौरान ऋचा चड्ढा के आरोपों पर एक्ट्रेस घोष की ओर से कोई भी कोर्ट में पेश नहीं हुआ। अब इस मामले पर 7 अक्टूबर को फिर से कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा और सभी दस्तावेज फिर से पेश करने होंगे।

VIDEO: हाथरस मामले पर प्रदर्शन के दौरान भीम आर्मी से भिड़े कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता, हुई सख्त कार्रवाई की माँग

हाथरस मामले में योगी सरकार का विरोध करते-करते सोमवार (अक्टूबर 5, 2020) को कॉन्ग्रेस और भीम आर्मी वाले आपस में झगड़ पड़े। बात इतनी बढ़ गई कि मारपीट तक पहुँच गई। पूरा मामला छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चंपा जिले का है। विरोध प्रदर्शन के दौरान दोनों दलों के बीच जमकर मारपीट शुरू हो गई।

रिपोर्ट्स के अनुसार, भीम आर्मी ने विरोध प्रदर्शन के दौरान कॉन्ग्रेस पार्टी के ख़िलाफ नारेबाजी करनी शुरू कर दी थी, इसी के कारण दोनों दलों में झड़प हुई। प्रदर्शन के दौरान भीम आर्मी के सदस्यों ने छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस सरकार के खिलाफ दलित विरोधी होने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की, जिसके कारण कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता भड़क गए। नतीजतन, दूसरी ओर से भी भीम आर्मी पर हमला बोल दिया गया।

समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा जारी की गई वीडियो में देख सकते हैं कि दोनों दल के कार्यकर्ता एक दूसरे को पकड़ कर मारने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं पुलिस उन्हें छुड़ा-छुड़ा कर अलग कर रही है। इसके बाद वीडियो में दोनों समूहों को एक दूसरे के खिलाफ अपमानजनक नारे लगाते हुए भी देखा जा सकता है।

पुलिस अधिकारी ने इस संबंध में कहा, “कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता हाथरस मामले में प्रदर्शन कर रहे थे। इस बीच भीम आर्मी वाले आ गए और उनके ख़िलाफ़ नारेबाजी करनी शुरू कर दी। इसके बाद ही हिंसा भड़की।”

जांजगीर इलाके के एसडीएम का कहना है कि जिला प्रशासन को भी इस संबंध में महिला कॉन्ग्रेस से शिकायत मिली है। उन्होंने इस केस में भीम आर्मी के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की माँग की है। अधिकारी ने यह भी कहा कि अब मामले में जाँच की जा रही हैं और प्रदर्शन के दौरान माहौल बिगाड़ने वालों के ख़िलाफ़ सख्त एक्शन लिया जाएगा।

गौरतलब है कि पिछले दिनों हाथरस में एक लड़की के साथ कथिततौर पर गैंगरेप की वारदात सामने आई थी। इसके बाद उसकी मौत की खबर से पूरा देश फिर हिल गया और बाद में आधी रात में हुए अंतिम संस्कार से तो देश में आक्रोश का माहौल फैल गया। कई विपक्षी पार्टियों ने इसका राजनीतिकरण करना शुरू कर दिया। कॉन्ग्रेस, टीएमसी, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी सब हाथरस की ओर कूच करने लगे और मीडिया में लगातार योगी सरकार पर सवाल उठना शुरू हो गया। वहीं अब इस मामले में योगी सरकार के खिलाफ लगातार साजिशों का भी खुलासा हो रहा है।

‘सुशांत केस में सोशल मीडिया पर मुंबई पुलिस को गाली देने वाले होंगे गिरफ्तार’, ‘सामना’ में राउत ने की UP की पाकिस्तान से तुलना

महाराष्ट्र में मुंबई पुलिस को बदनाम करने के आरोप में कई लोगों और सोशल मीडिया हैंडल्स के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने कहा है कि कई सोशल मीडिया हैंडल्स सिर्फ इसीलिए बनाए गए थे, ताकि सुशांत मामले में मुंबई पुलिस को बदनाम किया जा सके – उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि उन सोशल मीडिया हैंडल्स को ट्रैक किया जा रहा है और इस मामले में जल्द ही गिरफ्तारियाँ शुरू होंगी।

‘मुंबई मिरर’ के विनय दलवी से पुलिस कमिश्नर ने कहा कि कई सोशल मीडिया हैंडल्स ने पुलिस पर बिके होने के साथ-साथ सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने और उन्हें मिटाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि जब बिहार में इस मामले में FIR दर्ज की गई और फिर सीबीआई को मामला ट्रांसफर किया गया, उसके बाद मुंबई पुलिस को सोशल मीडिया पर जम कर गालियाँ बकी गई थीं। पुलिस कमिश्नर ने कहा, “सच्चाई की हमेशा जीत होती है।

उन्होंने कहा कि उन्हें शुरू से न तो सुशांत सिंह राजपूत मामले में मुंबई पुलिस की जाँच पर शक था और न ही कूपर हॉस्पिटल द्वारा तैयार किए गए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को लेकर कोई शंका थी। उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक टीम ने भी प्रोफेशनल तरीके से अपना काम किया। उन्होंने कहा कि सभी का अंत में यही मानना था कि सुशांत ने आत्महत्या की लेकिन कुछ लोगों ने मुंबई पुलिस को लेकर गलत सूचनाएँ फैलाईं।

कमिश्नर ने दावा किया कि एम्स की रिपोर्ट में और कूपर हॉस्पिटल की रिपोर्ट में कोई अंतर नहीं है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी मुंबई पुलिस की जाँच से सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि सीबीआई को केस ट्रांसफर के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई पुलिस को भी जाँच की अनुमति दी थी। उन्होंने कहा कि रिया चक्रवर्ती द्वारा सुशांत को गलत दवाएँ देने के मामले में दर्ज FIR की भी जाँच सीबीआई ही कर रही है।

उन्होंने कहा कि अगर मुंबई पुलिस के समक्ष सुशांत की मौत के मामले में किसी साजिश या आत्महत्या के लिए उकसाने जैसे मामले आए होते तो वो पहले ही एफआईआर दर्ज कर लेती। साथ ही उन्होंने दावा किया कि जून 16 को दिए गए बयान में सुशांत के परिवार ने किसी संदिग्ध का नाम नहीं लिया था। उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि परिवार फिर कोई शिकायत दर्ज कराने आया ही नहीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सीबीआई ‘प्रोफेशनल जाँच’ करेगी।

मुंबई पुलिस ने दावा किया है कि सुशांत की मौत के बाद 84,000 फेक सोशल मीडिया हैंडल्स सिर्फ मुंबई पुलिस को बदनाम करने के लिए बनाए गए थे। साथ ही कहा कि इटली, जापान, फ़्रांस और इंडोनेशिया जैसे देशों से फेक एकाउंट्स बनाए गए थे। बताया गया है कि इन सबके खिलाफ आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। कमिश्नर और पुलिस के खिलाफ ‘गाली वाली भाषा’ के प्रयोग करने का भी आरोप है।

उधर शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ के एग्जीक्यूटिव एडिटर संजय राउत ने उत्तर प्रदेश की तुलना पाकिस्तान से करते हुए कहा है कि यूपी में वही सब हो रहा है, जो पाक में होता है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ नारे की आलोचना करते हुए राउत ने लिखा कि लड़कियों को अगवा कर के उनके रेप और हत्या की वारदातें तो पाकिस्तान में होती हैं। उन्होंने महिला आयोग पर भी इस मामले में ‘चुप बैठने’ के आरोप लगाए।

इससे पहले शिवसेना के मुखपत्र सामना ने अपने संपादकीय में सुशांत सिंह राजपूत को असफल और चरित्रहीन कलाकार बताया था। अपने संपादकीय में सामना ने कहा था कि बीते दिनों बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे को महाराष्ट्र द्वेष का गुप्तरोग हो गया था और देश के कई अन्य ‘गुप्तेश्वरों’ को (जो महाराष्ट्र पुलिस या सरकार पर सवाल उठा रहे थे) भी यह रोग हो गया था। इसमें पूछा गया है कि जिस ‘एम्स’ पर देश के गृह मंत्री को विश्वास है, उस ‘एम्स’ ने सुशांत मामले में जो रिपोर्ट दी है, उसे अंधभक्त नकारेंगे क्या?

द वायर ने सुशांत के न्याय के मुहीम को झुठलाने के लिए सैय्यदा अकबर सहित 5 की ‘मनगढ़ंत’ रिपोर्ट को बताया मिशिगन यूनिवर्सिटी का ‘अध्य्यन’

प्रोपगेंडा पोर्टल द वायर को हाल ही में एक बार फिर सोशल मीडिया पर फजीहत का सामना करना पड़ा। दरअसल, द वायर ने अपनी एक रिपोर्ट में 5 लोगों के ‘मनगढ़ंत अध्य्यन’ को यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन का अध्य्यन बताकर पेश किया। वायर ने अपना यह कारनामा सिर्फ़ इस आधार पर किया क्योंकि 5 लोगों में एक व्यक्ति मिशिगन विश्वविद्यालय से जुड़ा हुआ है।

वायर के इस आर्टिकल का शीर्षक ही यह है- “सुशांत सिंह राजपूत: कॉन्सपिरेसी थ्योरी को बढ़ावा देने में भाजपा का हाथ”, इस लेख में द वायर दावा करता है कि मिशिगन यूनिवर्सिटी ने एक स्टडी की है जिसमें बताया गया कि सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध हालातों में हुई मौत पर कॉन्सपिरेसी थ्योरी को भाजपा सदस्यों ने बढ़ावा दिया था।

‘अध्ययन’ में बताया गया कि शोधकर्ताओं ने सोशल मीडिया के ट्रेंड्स का पिछले तीन महीने में विश्लेषण किया है ताकि यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि बीजेपी समर्थक सोशल मीडिया पर अफवाहों को कैसे बढ़ाते हैं।

द वायर ने ‘मनगढ़ंत’ ‘अध्य्यन’ का हवाला देकर बताया कि अभिनेता की मौत पर जिन लोगों ने भी मुंबई पुलिस से सुशांत सिंह राजपूत के मामले में निष्पक्ष जाँच की माँग की, वह सब ट्रोल हमले थे। इस पूरे आर्टिकल में कहीं भी यह नहीं बताया गया कि यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन का यह आधिकारिक अध्य्यन नहीं है।

दिलचस्प बात यह है कि जिस ‘मनगढ़ंत’ अध्य्यन का हवाला देकर द वायर ने अपना पूरा आर्टिकल लिखा, उसे करने वाले 5 लोगों के नाम सैय्यदा जैनब अकबर, अंकुर शर्मा, हिमानी नेगी, अनमोल पांडा और जोयोजीता पाल है और इनमें से सैयदा ज़ैनब अकबर, अंकुर शर्मा, हिमांशी नेगी और अमोल पांडा सभी माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च, बेंगलुरु के शोधकर्ता हैं। वहीं जोयोजीता पाल के कई आर्टिकल पहले भी द वायर पर पब्लिश हो चुके हैं।

गौरतलब है ऑपइंडिया ने इस अध्य्यन से जुड़े सवालों की बाबत यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन को संपर्क किया था। मगर, अभी उनकी तरफ से इस संबंध में कोई जवाब नहीं आया है। जैसे ही हमें कोई प्रतिक्रिया मिलती है, हम यह रिपोर्ट अपडेट करेंगे।

बता दें कि सोशल मीडिया पर द वायर की यह रिपोर्ट मीडिया गिरोह लोगों द्वारा शेयर की जा रही है। हालाँकि, खुलासा होने के बाद कई ट्विटर यूजर अब हकीकत थ्रेड में डाल कर सवाल कर रहे हैं कि ‘अपने द वायर’ से ठगे जाने के बाद उन्हें कैसा लग रहा है?

दरअसल, इस रिपोर्ट को सागरिका घोष ने शेयर करते हुए लिखा था, “मिशिगन यूनिवर्सिटी का अध्य्यन खुलासा करता है कि कॉन्सपिरेसी थ्योरी को फैलाने और बढ़ाने में भाजपा का हाथ है।” इस पर शैश नाम का सक्रिय ट्विटर यूजर लिखता है- “मिशिगन यूनिवर्सिटी का अध्य्यन? छोटी गंगा बोलेके नाले में कुदा दिया तुमको।”

इस्लाम पर बहस के बाद साथी फ़ारुन माद ने ही कर दी अल्पसंख्यक प्रोफेसर की हत्या, शरीर में धँस गईं 5 गोलियाँ

पाकिस्तान के पेशावर से एक ऐसी घटना सामने आई है, जहाँ एक प्रोफेसर के साथ इस्लाम पर बहस के बाद उनके दोस्त ने ही गोली मार कर उनकी हत्या कर दी। ये घटना सोमवार (अक्टूबर 5, 2020) की है। अल्पसंख्यक अहमदिया समुदाय से आने वाले प्रोफेसर नईम खटक की एक दूसरे प्रोफेसर फ़ारुन माद के साथ इस्लाम को लेकर बहस हुई थी। इसके बाद फ़ारुन ने फायरिंग शुरू कर दी और प्रोफेसर नईम खटक की हत्या कर डाली।

आरोपित प्रोफेसर ने इस हत्याकांड में एक गनमैन की भी मदद ली। प्रोफेसर नईम खटक पर तब हमला किया गया, जब वो कॉलेज जा रहे थे। वो गवर्नमेंट सुपीरियर साइंस कॉलेज में फैकल्टी मेंबर के रूप में कार्यरत थे। मृतक प्रोफेसर के भाई की तहरीर पर एक FIR दर्ज की गई है, जिसमें कहा गया है कि मजहबी मुद्दों पर हुई बहस के कारण उनकी हत्या हुई। खटक के भाई ने बताया कि वो भी कॉलेज गए थे और वहाँ से साथ में निकल रहे थे।

उन्होंने बताया कि वो बाइक पर थे और खटक कार में जा रहे थे। जब वो दोपहर के 1:30 बजे वजीरबाग से गुजर रहे थे, तभी दो बाइक सवारों ने उनकी गाड़ी रोकी और फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद वो दोनों ही आरोपित वहाँ से भाग निकले। उनके शरीर में पाँच गोलियाँ मारी गईं और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। उनके परिवार में पत्नी के अलावा दो बेटे और तीन बेटियाँ भी हैं। पुलिस ने कहा है कि आरोपितों की पहचान हो गई है।

पुलिस ने घटनास्थल के आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ करने के बाद आरोपितों की गिरफ़्तारी के लिए तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। पाकिस्तान में अहमदी समुदाय के प्रवक्ता सलीमुद्दीन ने कहा कि खटक ने जूलॉजी में अपनी डॉक्टरेट पूरी की थी और उन्हें अपनी धारणाओं की वजह से परेशान किया जा रहा था। उन्हें पहले से ही धमकियाँ दी जा रही थीं। पिछले कई सालों से अहमदिया समुदाय पर लगातार हमले हो रहे हैं।

इसी तरह जुलाई 2020 में ईशनिंदा के आरोपित ताहिर शमीम अहमद को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया था। ताहिर को मारने वाले का नाम खालिद खान था। सोशल मीडिया पर सामाजिक कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन ने दावा किया था कि खालिद ने ताहिर को गोली मार कर कहा कि उसके सपने में पैगंबर आए थे। इसलिए उसने ताहिर को गोली मारी। वहीं पुलिस की हिरासत में खालिद ने ये माना था कि उसने ताहिर को इसलिए गोली मारी. क्योंकि वह अहमदिया समुदाय का था।

‘गैंगरेप की बात कहो तो ₹50 लाख दूँगा’, हाथरस केस में यह कैसी ‘साजिश’: एक नेता और पत्रकार के खिलाफ राजद्रोह का केस

हाथरस मामले को लेकर हुई बड़ी साजिश के मामले में उत्तर प्रदेश की पुलिस ने 19 FIR दर्ज किए हैं। हाथरस जिले में लोगों को दंगे के लिए भड़काने और उकसाने के आरोप में एक राजनेता और एक पत्रकार के खिलाफ भी राजद्रोह का मामला दर्ज हुआ है। अज्ञात के रूप में इन दोनों के नाम FIR में दर्ज हैं। इन सभी पर लोगों को उकसाने के साथ-साथ आपराधिक साजिश रचने और हाथरस कांड को लेकर झूठी अफवाह फैलाने का आरोप है।

हाथरस के चंदप्पा थाने में ये मामला दर्ज हुआ है। साथ ही यहाँ दर्ज हुई 3 FIR में ‘भीम आर्मी’ के मुखिया चंद्रशेखर आजाद उर्फ़ ‘रावण’ समेत 680 लोगों के खिलाफ धारा-144 के उल्लंघन का ममला दर्ज किया गया है। उत्तर प्रदेश में दर्ज हुई 19 FIR के बाद इसे दर्ज किया गया है। इससे पहले रविवार (अक्टूबर 4, 2020) को एक पुलिसकर्मी की तरफ से की गई शिकायत के आधार पर दर्ज FIR में पीड़िता के परिवार पर दबाव बनाने के आरोप लगाए गए थे।

इस शिकायत में कहा गया था कि पीड़िता के परिवार पर गलत बयान देने का दबाव था और इसके एवज में उन्हें 50 लाख रुपए देने का लालच एक राजनेता ने दिया था। साथ ही एक पत्रकार द्वारा पीड़िता के भाई को कहा गया था कि वो पिता को मीडिया में उसका मनपसंद बयान देने के लिए मनाए। पिता पर मीडिया में ये कहने का दबाव था कि वो सरकार की कार्रवाई से खुश नहीं हैं। एडीजी प्रशांत कुमार ने भी इसकी पुष्टि की है कि राज्य में अशांति फैलाने की कोशिश हो रही थी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कहा कि बाहर से धन मँगा कर उत्तर प्रदेश में दंगे व अशांति फैलाने की साजिश रची गई थी। सब-इंस्पेक्टर अवधेश कुमार की ओर से दर्ज शिकायत के आधार पर इस मामले में FIR दर्ज की गई है। इस शिकायत में कहा गया है कि असामाजिक तत्व मिल कर सामाजिक सौहार्द को भंग करने के लिए सरकार के खिलाफ सुनियोजित साजिश रच रहे हैं। हाथरस गेट थाने में भी इस मामले में मुकदमे दर्ज हुए हैं।

सोशल मीडिया में झूठे पोस्ट डालने, सीएम योगी आदित्यनाथ की एडिटेड तस्वीरें अपलोड करने, जाति आधारित संघर्ष और देश की एकता-अखंडता को भंग करने के प्रयास करने और सरकार की छवि बिगाड़ने के लिए द्वेषपूर्ण सूचनाएँ फैलाने के आरोप हैं। बिजनौर, सहारनपुर, बुलंदशहर, प्रयागराज, हाथरस, अयोध्‍या और लखनऊ में कुल 13 अभियोग पंजीकृत किए गए। दुष्कर्म वाली बात कहने के लिए भी परिवार पर दबाव डाला गया।

उधर प्रवर्तन निदेशालय (ED) के निदेशक ने बताया कि धारा-153A के तहत दर्ज हुआ मुकदमा मनी लॉन्ड्रिंग के अंतर्गत अपराध की श्रेणी में आता है। हाथरस पर रातोंरात बनी वेबसाइट का डोमेन किसने खरीदा, मेल आईडी व फोन नंबर किसने इस्तेमाल किया और इसके लिए कितने रुपए कहाँ से जमा किए गए थे, इसकी जाँच अब ED करने वाला है। सर्वर प्रोवाइडर से जानकारी ली जाएगी और धन के अवैध आवागमन के स्रोत का पता लगाया जाएगा।

यूपी पुलिस ने एक राजनीतिक दल के प्रतिनिधिमंडल के खिलाफ हाथरस के चंदपा पुलिस स्टेशन में एक प्राथमिकी दर्ज की है, जिन्होंने मृतका के घर का दौरा किया था। पुलिस ने उन पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मृतका के परिजनों का प्रोपेगेंडा आधारित वीडियो/ऑडियो प्रसारित करने का आरोप लगाया। उन पर भादवि की धारा- 147, 148, 323, 504, 332, 353, 427, 188 और सीएलए अधिनियम 7 के तहत आरोप लगाए गए हैं।

दिल्ली से हाथरस जाते पकड़े गए 4 PFI सदस्य: UP में जातीय हिंसा फैलाने की साजिश का है आरोप

दिल्ली से उत्तर प्रदेश के हाथरस जाते हुए 4 संदिग्ध लोगों को मथुरा पुलिस ने कल (अक्टूबर 5, 2020) गिरफ्तार किया। पड़ताल में पता चला कि इनके लिंक पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) से हैं। टोल प्लाजा पर चेकिंग के दौरान इनकी गिरफ्तारी हुई। अब मथुरा पुलिस इनके ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रही है।

एडीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार ने बताया कि उन्हें ऐसी सूचना मिली थी कि कुछ संदिग्ध व्यक्ति दिल्ली से हाथरस की तरफ जा रहे हैं, जिसके आधार पर सोमवार को मथुरा के मांट टोल प्लाजा पर संदिग्ध वाहनों की चेकिंग चल रही थी।

इस दौरान एक स्विफ्ट डिजायर कार (DL 01 jdc 1203) को रोका गया। उसमें चार लोग थे। पुलिस ने इन्हें इनकी संदिग्ध गतिविधियों के कारण रोका और अपनी पूछताछ शुरू की। पुलिस को पड़ताल में मालूम चला कि इन सबका संबंध पीएफआई से है।

पुलिस ने इनकी पहचान उर रहमान पुत्र रौनक अली निवासी नगला थाना रतनपुरी जिला मुजफ्फरनगर; सिद्दीकी पुत्र मोहम्मद चैरूर निवासी बेंगारा थाना मल्लपुरम केरल; मसूद अहमद निवासी कस्बा व थाना जरवल जिला बहराइच व आलम पुत्र लईक पहलवान निवासी घेर फतेह खान थाना कोतवाली जिला रामपुर, के रूप में की।

पुलिस ने पूछताछ के बाद इन्हें अपनी हिरासत में ले लिया व इनके पास से मोबाइल, लैपटॉप एवं शांति व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला संदिग्ध साहित्य बरामद किया। अब चारों के विरुद्ध मांट थाने के द्वारा कार्रवाई की जा रही है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि ये चारों उत्तर प्रदेश में जातीय और सांप्रदायिक हिंसा करने की साजिश में जुटे हुए थे।

गौरतलब है कि इससे पहले उत्तर प्रदेश के हाथरस में आम आदमी पार्टी का प्रतिनिधि मंडल जब पीड़ित परिवार से मिलने गया था, उस समय भी युवक ने अपने नारों में पीएफआई का जिक्र करके आप नेताओं पर गुस्सा जाहिर किया था। उसने AAP नेता संजय सिंह पर इंक फेंकते हुए कहा था- “PFI के दलालों वापस जाओ…वापस जाओ…PFI के गिद्धों वापस जाओ…लाशों पर राजनीति करना बंद करो।”

इससे पहले खुफिया एजेंसियों ने भी इस मामले पर खुलासे किए थे कि उन्हें ऐसे सुराग हाथ लगे हैं जो साबित करते हैं कि हाथरस मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ-साथ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी बदनाम करने की बड़ी साजिश रची गई। इसके लिए एमनेस्टी इंटरनेशनल के साथ-साथ कई इस्लामी मुल्कों ने भी फंडिंग की थी। रातोंरात ‘जस्टिस फॉर हाथरस’ नाम से एक वेबसाइट भी बना ली गई थी। इस वेबसाइट पर विरोध प्रदर्शन की आड़ में देश-प्रदेश में दंगे करने और उसके बाद उससे बचने के तौर-तरीके बताए गए थे।

गोकशी के लिए बछिया लेकर जा रहा फुरकान अली गिरफ्तार: मुठभेड़ में पुलिस ने पाँव में मारी गोली, घायल

नोएडा में पुलिस ने गोकशी के लिए गाय को ले जाते हुए एक अपराधी को धर-दबोचने में सफलता पाई है। नोएडा पुलिस कमिश्नर ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से जानकारी दी है कि सोमवार (अक्टूबर 5, 2020) को जारचा थाना क्षेत्र के चोना नहर की पटरी पर पुलिस और गोकशी करने वाले बदमाशों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें फुरकान अली नामक अपराधी अपने पाँव में गोली लगने से घायल हो गया।

पैर में गोली लगने से घायल अपराधी फुरकान अली को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उक्त अपराधी के पिता का नाम महमूद है, जो मेरठ के भावनपुर थाना क्षेत्र स्थित नंगला साहू का निवासी है। फिलहाल वो हापुड़ के हाफिजपुर थाना क्षेत्र स्थित बड़ोदा में रह रहा था। वहीं उसका साथी बदमाश मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश के लिए पुलिस कॉम्बिंग ऑपरेशन चला रही है। उसकी भी गिरफ़्तारी जल्द हो सकती है।

पुलिस ने जानकारी दी है कि गिरफ्तार अभियुक्त फुरकान अली पर पहले से ही 9 मामले दर्ज हैं। उसके कब्जे से एक बिना नंबर की वैगनआर कार भी बरामद की गई है। साथ ही उस गाड़ी के पीछे की सीट से एक बछिया भी बँधी हुई मिली। साथ ही उसके पास से रस्सी और चाकू भी जब्त हुए। गिरफ्तार अपराधी के पास से 315 बोर का तमंचा, 2 ज़िंदा कारतूस और 1 खोखा कारतूस पुलिस ने जब्त किया। दोनों अपराधी गोवंश को किसी सुनसान इलाके में जे जाकर उसकी हत्या करना चाहते थे।

घायल होने के कारण उक्त बदमाश को जिला अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। साथ ही उसके आपराधिक इतिहास के बारे में पूरी छानबीन की जा रही है। उसके सीट के पीछे बँधी हुई गाय की बछिया को भी बचा लिया गया है, जिसे वो गोकशी के लिए लेकर जा रहा था। पुलिस ने इस पूरे मामले के सम्बन्ध में वीडियो भी जारी किया और अपने बयान के जरिए पूरे प्रकरण के बारे में समझाया।

बता दें कि पहले यूपी में गोहत्या के आरोपित 7 साल के कारावास की सज़ा के प्रावधान के कारण जमानत पाने में सफल हो जाते थे। इसे ध्यान में रखते हुए सज़ा को अधिकतम 10 साल कर दिया गया है। साथ ही गोहत्या पर लगने वाले जुर्माने को भी 3 लाख रुपए से बढ़ा कर 5 लाख रुपए कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश में अब जो भी गोहत्या या गो-तस्करी में संलिप्त होगा, उसके फोटो भी सार्वजनिक रूप से चस्पा होंगे। जून 2020 में ही यूपी कैबिनेट ने ये फ़ैसला लिया गया था।

UP: मुख्तार अंसारी की बीवी और सालों पर ₹25-25 ​हजार का इनाम, पुलिस की 4 टीमें कर रही तलाश

उत्तर प्रदेश में बाहुबलियों के खिलाफ पुलिस प्रशासन की सख्ती जारी है। मऊ सदर के विधायक मुख्तार अंसारी की बीवी आफसा और साले शरजील रजा तथा अनवर शाहजहां पर गाजीपुर पुलिस ने 25-25 हज़ार रुपए के इनाम का ऐलान किया है। कोर्ट की ओर जारी वारंट पर हाजिर नहीं होने के कारण तीनों पर कार्रवाई की गई है।

गैंगस्टर न्यायालय ने तीनों को पेश होने का आदेश दिया था।। मुख्तार अंसारी की पत्नी और सालों की तलाश जनपद की कुल चार पुलिस टीमें कर रही हैं। इसमें एसओजी, सर्विलांस, करंडा और जंगीपुर शामिल हैं। शासन से लेकर प्रशासन तक पुलिस लखनऊ, वाराणसी, मऊ, गृह जनपद गाजीपुर में भी एक एक करके कार्रवाई कर रही है।    

तीनों पर आरोप है कि यह संगठित आपराधिक गिरोह के रूप में काम करते हैं। शरजील और अनवर पर सरकारी ठेका हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेज़ देने का आरोप है। जिसके बाद पुलिस ने इस मामले में दोनों पर मुकदमा दर्ज किया था। वहीं आफसा अंसारी पर सरकारी पैसों के गबन और अमानत में खयानत की आपराधिक गतिविधि के संबंध में मामला दर्ज है। 

इन पर कई जमीनों पर अवैध रूप से कब्जे का भी आरोप है। जिलाधिकारी गाजीपुर ने शहर कोतवाली की छावनी लाइन स्थित ज़मीन गाटा संख्या 162 को कुर्क शुदा घोषित किया था, तीनों पर इस ज़मीन को कब्जे में करने का आरोप है। इसके अलावा थाना मौजा बवेरी भूमि आराजी संख्या 598 (कुर्क शुदा) पर भी अवैध रूप से कब्जा करने का आरोप है। फ़िलहाल पुलिस तीनों की तलाश कर रही है।   

इससे पहले मुख्तार अंसारी के बेटों उमर और अब्बास पर 25-25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया था। यह कार्रवाई हजरतगंज के डालीबाग में सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण कराने के मुकदमे में की गई थी।

आरोपितों की गिरफ्तारी, हिंसा की अंतरराष्ट्रीय साजिश और पॉलिटिकल प्रोपेगेंडा: हाथरस केस में दर्ज FIR की डिटेल

उत्तर प्रदेश पुलिस ने हाथरस की घटना के संबंध में कई एफआईआर दर्ज की है। यहाँ पिछले सप्ताह मंगलवार को एक 19 वर्षीय पीड़िता की मौत हो गई थी। इस संदर्भ में पुलिस ने एक प्रेस स्टेटमेंट जारी किया है। इस स्टेटमेंट में मामले में कई व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज की गई विभिन्न एफआईआर की जानकारी दी गई है।

उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि पीड़िता के भाई की गवाही के आधार पर आरोपितों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद 3 सदस्यीय एसआईटी जाँच का आदेश दिया गया और फिर मामले में सीबीआई जाँच की सिफारिश की गई है। इसके बावजूद कुछ संगठन और निहित स्वार्थ वाले व्यक्ति सरकार की छवि को धूमिल करने के लिए जातीय और सांप्रदायिक हिंसा फैलाने पर आमादा हैं।

इसके लिए वे विभिन्न सोशल मीडिया वेबसाइटों पर बिना सोचे-समझे और फर्जी दावे पोस्ट कर रहे थे और सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन में भाग लेने के लिए COVID-19 के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए गैरकानूनी तरीके से गाँव के बाहर लोगों को इकट्ठा कर रहे थे।

इस संबंध में पुलिस द्वारा कई FIR दर्ज की गई हैं। यूपी पुलिस द्वारा उनकी प्रेस रिलीज में शेयर की गई जानकारी इस प्रकार हैं-

जातीय हिंसा को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय साजिश रचने पर FIR

यह सामने आने के बाद कि हाथरस की घटना पर विरोध-प्रदर्शन करने के बहाने उत्तर प्रदेश में दंगे भड़काने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय साजिश रची जा रही है, यूपी पुलिस ने हाथरस में जाति आधारित दंगों की साजिश रचने के लिए एक प्राथमिकी दर्ज की।

हाथरस पुलिस स्टेशन में विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिसमें राज्य में जातीय और सांप्रदायिक दंगों की साजिश रचने, अराजकता फैलाने, दंगा करने के बहाने योगी सरकार को बदनाम करना, अफवाहें फैलाना, पीड़ित परिवार को योगी सरकार के खिलाफ भड़काना, फर्जी फोटो, फर्जी सूचना, फोटोशॉप्ड तस्वीरों के जरिए नफरत फैलाना शामिल है। 

पुलिस ने इस संबंध में आईपीसी की धारा 109, 120 (बी), 124-ए, 153-ए, 153-ए (1), 153-ए (1) (ए), 153-ए (1) b), 153-A (1) (c), 153-B, 195, 195-A, 465, 468, 469, 501, 505 (1), 505 (1) (b), 505 (1) (c) ), 505 (2), और 67 के तहत FIR दर्ज की है।

पीड़ित और उसके परिवार के बारे में प्रोपेगेंडा वीडियो प्रसारित करने के लिए एक राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल के खिलाफ FIR दर्ज

यूपी पुलिस ने एक राजनीतिक दल के प्रतिनिधिमंडल के खिलाफ हाथरस के चंदपा पुलिस स्टेशन में एक प्राथमिकी दर्ज की है, जिन्होंने मृतका के घर का दौरा किया था। पुलिस ने उन पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मृतका के परिजनों का प्रोपेगेंडा आधारित वीडियो/ऑडियो प्रसारित करने का आरोप लगाया। उन पर भादवि की धारा- 147, 148, 323, 504, 332, 353, 427, 188 और सीएलए अधिनियम 7 के तहत आरोप लगाए गए हैं।

एक राजनीतिक दल के सदस्यों के खिलाफ हंगामा करने और पुलिस अधिकारियों पर पथराव करने के लिए FIR दर्ज की गई

मामले में तीसरी FIR एक पार्टी के राजनीतिक सदस्यों के अनधिकृत दौरे से संबंधित है। पुलिस के अनुसार, राजनीतिक दल के प्रतिनिधिमंडल की बैठक के बाद पार्टी के कई सदस्यों और समर्थकों ने बिना अनुमति के गाँव में प्रवेश किया और धारा 144 का उल्लंघन किया। उन पर कानून प्रवर्तन अधिकारियों को गाली देने और उनके साथ हाथापाई करने का भी आरोप है। राजनीतिक पार्टी समर्थकों द्वारा उन पर पथराव करने के बाद कई पुलिस अधिकारी घायल हो गए। उन पर भादवि की धारा -148, 148, 323, 504, 332, 353, 427, 188 और सीएलए अधिनियम 7 के तहत आरोप लगाए गए हैं।

भड़काऊ भाषण वाले वीडियो प्रसारित करने के लिए FIR

उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक राजनीतिक पार्टी के एक सदस्य के खिलाफ सार्वजनिक रूप से एक वीडियो प्रसारित करने के लिए एक एफआईआर दर्ज की, जिसमें भड़काऊ बयान दिए गए। इस भाषण में पुलिसकर्मियों का हाथ काटने, पुलिस अधिकारियों को निलंबित करना और जाति/समुदायों के बीच सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना आदि शामिल था। आरोपित के खिलाफ भादवि की धारा-153 ए, 505, 506, 489 और आईटी एक्ट की धारा 84 सी के तहत मामला दर्ज किया गया है।

धारा 144 का उल्लंघन करने और यातायात अवरुद्ध करने के लिए भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद और 400-500 अन्य के खिलाफ FIR दर्ज

हाथरस में मार्च करते हुए पीड़िता के परिजनों से मिलने के लिए जाने के दौरान भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद और 400-500 अन्य के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 144 का उल्लंघन करने के लिए FIR दर्ज की गई। आजाद और उनके समर्थकों ने पुलिस के लिए कानून और व्यवस्था की स्थिति पैदा कर दी थी, क्योंकि उन्होंने जबरन गाँव में घुसने और पीड़ित के रिश्तेदारों से मिलने की कोशिश की थी। जब उन्हों रोका गया, तो वे सड़क पर यातायात बाधित कर प्रदर्शन पर बैठ गए, जिसके बाद उनके खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गई।

कोविड-19 के दिशा-निर्देशों और सीआरपीसी की धारा 144 के उल्लंघन के लिए लगभग 200 लोगों के खिलाफ FIR

उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा बसंत बाग कॉलोनी में कोविड-19 के दिशा-निर्देशों और सीआरपीसी की धारा 144 का उल्लंघन कर बड़ी संख्या में इकट्ठा होने के लिए लगभग 200 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया।

इसके अलावा, बिजनौर, सहारनपुर, बुलंदशहर, प्रयागराज, हाथरस और अयोध्या जैसे जिलों में विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर आपत्तिजनक पोस्ट करने की शिकायतें दर्ज की गईं। कम से कम 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।

पुलिस ने कमिश्नरेट लखनऊ में विवादित पोस्टर लगाने के लिए एक व्यक्ति के खिलाफ मामला भी दर्ज किया था। इस संबंध में एक व्यक्ति को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट अपलोड करने के आरोप में लखनऊ ग्रामीण में गिरफ्तारी की गई है। वहीं मथुरा में कैम्पस फ्रंट ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के कोषाध्यक्ष को 3-4 अन्य पदाधिकारियों के साथ सीआरपीसी की धारा 151 के तहत प्रतिबंधित किया गया है।