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हाथरस मामले में सवर्ण समाज के दो दर्जन से अधिक गाँवों की पंचायत: नार्को टेस्ट कराने की माँग, आरोपितों के निर्दोष होने पर बरी करने की अपील

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में उत्तर प्रदेश में ठाकुर समुदाय के सदस्यों को हाथरस मामले में आरोपितों की गिरफ्तारी पर पीड़ा व्यक्त करते हुए सुना जा सकता है। साथ ही वे यह दावा भी कर रहे है कि अभियुक्तों को झूठे मामले में झूठा फँसाया जा रहा है। इस सभा का आयोजन शुक्रवार को दो दर्जन से अधिक गाँवों के सवर्ण समाज द्वारा किया गया था।

वीडियो में सभा की भीड़ में यह कहते हुए सुना जा सकता है, “एफएसएल रिपोर्ट कहती है कि बलात्कार नहीं था लेकिन राजनेताओं और मीडिया का दावा था कि बलात्कार हुआ था।” सभा के एक नेता का कहना है कि मामले में निष्पक्ष जाँच की जानी चाहिए और यदि कोई भी आरोपित दोषी नहीं पाया जाता है, तो उन्हें बिना जमानत दिए छोड़ दिया जाना चाहिए। उनका का कहना है कि समुदाय की प्रतिष्ठा धूमिल हुई है।

सभा को संबोधित करते हुए व्यक्ति यह भी कहता है कि कोई भी उपद्रव नहीं करेगा और किसी भी तरह की गुंडागर्दी का सहारा नहीं लेना है। साथ ही व्यक्ति ने इस बात पर जोर दिया कि कोई भी राजनीतिक दल उनके बीच नहीं आना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि हर किसी ने उनके बच्चों और उनके समुदाय की थूं-थूं की है और इसकी वजह से उनकी भावनाओं को ठेस पहुँची है। वे कहते है, “केवल राजनीतिक दलों का विरोध करते हैं, बाकी खुद वो समस्या को हल कर लेंगे।”

पंचायत ने सभी आरोपितों का नार्को टेस्ट कराने का भी समर्थन किया है। इस बीच जागरण की एक रिपोर्ट में भी दावा किया गया है कि हाथरस मामला शुरू में हत्या के प्रयास से संबंधित था। रिपोर्ट में कहा गया है कि शुरुआत में मृतक के भाई ने केवल हत्या के प्रयास से संबंधित मामला दर्ज करवाया था और प्रारंभिक शिकायत में बलात्कार का आरोप नहीं लगाया गया था।

जागरण रिपोर्ट

रिपोर्ट के अनुसार, शुरू के 5 दिनों तक कोई अन्य शिकायत नहीं की गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि कहानी में पहला मोड़ 19 सितंबर को कुछ नेताओं द्वारा पीड़िता से मिलने के बाद आया। जिसके बाद पीड़िता द्वारा शिकायत में छेड़छाड़ का आरोप जोड़ा गया था। फिर 22 सितंबर को आरोपों में बलात्कार का मामला जोड़ा गया। साथ भी तीन अन्य नाम भी आरोपितों की सूची में डाले गए। बताया जा रहा है कि कॉन्ग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने 19 सितंबर को पीड़ित से मुलाकात की थी।

गौरतलब है कि मेडिकल रिपोर्ट ने भी बलात्कार से इंकार किया है। इसके अलावा जागरण की रिपोर्ट में कहा गया है कि कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व राज्य सचिव श्योराज जीवन द्वारा पीड़ित परिवार और पीड़िता से मिलने के बाद कहानी में बदलाव आना शुरू हुआ था। वहीं कॉन्ग्रेस नेता का एक बयान भी वायरल हो रहा जिसमें कहा गया था, “हमारी बेटी ने अपना सम्मान बचाया है, लेकिन पापियों ने उसकी जीभ काट दी है, उसकी रीढ़ टूट गई है।”

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मामले का राजनीतिकरण होने के बाद छेड़छाड़ और बलात्कार के आरोप जोड़े गए। जिसके बाद पुलिस ने मामले में प्रासंगिक धाराएँ जोड़ते हुए चार आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। वहीं इन आरोपितों के परिवारवालों ने आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने दावा किया है कि आरोप झूठे हैं और पीड़ित परिवार के साथ एक पुराने पारिवारिक झगड़े से प्रेरित हैं।

गौरतलब है कि दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में हाथरस की कथित सामूहिक बलात्कार पीड़िता की मौत हो गई थी। जिसके बाद से ही मामले में सभी विपक्षी पार्टियों को अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेकने का मौका मिल गया है। खबरों के अनुसार, उसके साथ दो सप्ताह पहले कथित तौर पर बलात्कार किया गया था। वहीं लोगों का गुस्सा तब और भड़क गया जब सोशल मीडिया पर यह भ्रामक खबर चलाई गई कि हाथरस पुलिस ने परिवार के सदस्यों की सहमति के बिना लड़की का जबरन अंतिम संस्कार कर दिया। हालाँकि, पुलिस ने बाद में खबरों को खरिज करते हुए कहा था कि दाह संस्कार के दौरान मृतका के पिता मौजूद थे।

एडीजी प्रशांत कुमार ने एएनआई से बात करते हुए बताया था कि फोरेंसिक रिपोर्ट के मुताबिक़ लड़की के साथ बलात्कार की घटना नहीं हुई थी। पीड़िता के साथ किसी भी तरह का यौन शोषण नहीं हुआ था। मौत का कारण गला दबाना और रीढ़ की हड्डी में लगी चोटें थीं।

मुंबई: फैयाज शेख, सादिक और नदीम ने अश्लील वीडियो बना कर 22 वर्षीय महिला का 2 साल तक किया बलात्कार

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में एक दिल दहलाने वाला बलात्कार का मामला सामने आया है। नॉर्थ मुंबई के दिंडोशी में तीन लोगों ने 22 वर्षीय महिला के साथ दो साल तक ब्लैकमेल कर दुष्कर्म के वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने मामले में 2 आरोपित 31 वर्षीय फैयाज शेख और 27 वर्षीय सादिक को गिरफ्तार कर लिया है, वहीं तीसरा आरोपित नदीम फरार है।

पीड़िता के अनुसार, इसकी शुरुआत 2018 से शुरू हुई, जब फैयाज शेख ने उसे किसी काम के बहाने अपने घर बुलाया और चाकू की नोक पर उसके साथ कथित रूप से बलात्कार किया। उसने यौन हमले का वीडियो भी फिल्माया और धमकी दी कि अगर उसने कभी इस बारे में बात की तो वह उस पर एसिड से हमला कर देगा। बाद में, उसने उन वीडियो का इस्तेमाल करते हुए उसे ब्लैकमेल किया और कई बार उसका बलात्कार किया।

यह दरिंदगी यहीं नहीं रुकी। फैयाज ने फिर महिला की वीडियो को अपने दोस्त को भी व्हाट्सएप कर दिया और साथ ही महिला का नंबर भी दे दिया। वीडियो देखते ही सादिक की भी हैवानियत जाग गई। उसने भी महिला को ब्लैकमेल किया और जबरन कई बार उसका बलात्कार किया।

सादिक ने फिर अपने एक खास दोस्त नदीम को महिला के बारे में बताया। साथ ही उसने खुद के और फैयाज द्वारा बनाई गई महिला की अश्लील वीडियो को नदीम को दिखाया। फिर नदीम ने भी फैयाज और सादिक की तरह महिला को अपने हवस का शिकार बना लिया। वहीं महिला के विरोध करने पर उसने उसके पति को दोनों पुरुषों के बारे में बताने की धमकी दी।

वीडियो के बलबूते पर इन दरिंदों ने कई बार महिला का शिकार किया और महिला अपनी शादी को बचाने के लिए आरोपितों की दरिंदगी सहती रही। हालाँकि, यह यहीं समाप्त नहीं हुआ, महिला को तीनों आरोपितों के अन्य दोस्तों द्वारा फोन कॉल के माध्यम से ब्लैकमेल और परेशान किया जा रहा था।

वहीं जब महिला की सहन शक्ति ने जब जवाब दे दिया तो तंग आकर उसने सारी बाते अपने पति को बता दी। महिला ने जब इस मामले में दिंडोशी पुलिस स्टेशन में जाकर तीनों आरोपितों के खिलाफ तहरीर दी तो उसकी कहानी सुनकर पुलिसकर्मियों की भी रूह काँप गई।

रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता की उम्र 22 साल है। यानी 2018 में वह महज 19 साल की थी। उसकी हाल ही में शादी हुई थी। ऐसे में वह अपनी शादीशुदा ज़िन्दगी को बचाए रखने के लिए इस प्रताड़ना को बर्दाश्त करती रही।

पुलिस ने 29 सितंबर को 376 (2) एन, 354, 345 डी, 506 (2) के तहत आईटी एक्ट 66 ई सहित कई मामले दर्ज किए। पुलिस ने 29 सितंबर को फैयाज शेख और सादिक पटेल को गिरफ्तार कर लिया लेकिन नदीम को अपने दो दोस्तों की गिरफ्तारी की जैसे ही खबर मिली वह फरार हो गया है। जिसकी धर-पकड़ में पुलिस जुटी है

पुलिस ने सादिक और फैयाज के मोबाइल को जब्त कर वीडियो भी बरामद कर लिया है। पुलिस ने मोबाइल फ़ॉरेंसिक टीम को दिया है, जिससे यह पता लग सके कि आरोपितों ने वीडियो को और कितने लोगों को भेजा है।

‘हाथरस मामले पर दंगा करवाना चाहता है विपक्ष’: योगी के मंत्री का बड़ा आरोप, कहा- ट्वीट्स, ऑडियो टेप से साजिश का इशारा

यूपी के हाथरस में 19 साल की लड़की की दुर्भाग्यपूर्ण मौत के राजनीतिकरण का विपक्ष द्वारा समर्थन किए जाने के कुछ दिनों बाद, भाजपा नेता और योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री, रमापति शास्त्री ने विपक्षी नेताओं पर क्षेत्र में जातिगत दंगा भड़काने की कोशिश करने का आरोप लगाया। 

रमापति शास्त्री ने समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए कहा कि इस मामले में विपक्ष गैर जिम्मेदाराना रवैया अपना रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे के बहाने जातीय दंगा करवाना चाह रहा है। साथ ही मामले में सच्चाई को भी दबाना चाहता है। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि इस घटनाक्रम में विपक्ष के ट्वीट्स, ऑडियो टेप और पुरानी घटनाएँ, ये सब दंगे की साजिश की ओर इशारा करती हैं।

कैबिनेट मंत्री ने बसपा प्रमुख मायावती पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मायावती इस मामले की संवेदनशीलता नहीं समझ रही। शास्त्री ने कहा कि मायावती ने इस मामले में बयान देकर एक दलित बेटी का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि मायावती प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री हैं, उन्हें इस मामले की संवेदनशीलता को समझना चाहिए।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि सरकार इस मामले को लेकर पूरी तरह गंभीर है। सरकार ने कार्रवाई भी शुरू कर दी है। शास्त्री ने कहा कि सरकार ने इस मामले में एसआईटी का गठन कर दिया है और प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई भी शुरू हो चुकी है। साथ ही मुख्यमंत्री ने नार्को और पॉलिग्राफ टेस्ट के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की पहल से मामले का सच जरूर सामने आएगा।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने सख्त कानून बनाए हैं। वो आगे कहते हैं, “इससे न्यायालयों को एक निर्धारित समय के भीतर पीड़िता को न्याय दिलाने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपए के मुआवजे की भी घोषणा की है।”

 इससे पहले कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा यह सूचना दी गई थी कि राहुल गाँधी, अपनी बहन और पार्टी की महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा के साथ शनिवार को एक बार फिर हाथरस जाने की कोशिश की क्योंकि वे पीड़िता के परिवार से मुलाकात करना चाहते हैं और उनका पक्ष जानना चाहते हैं।

इसे देखते हुए यूपी पुलिस ने ना सिर्फ हाथरस ज़िले की सीमा पर, बल्कि नोएडा-दिल्ली बॉर्डर पर भी पुलिस की अतिरिक्त तैनाती कर दी थी। लेकिन बाद में उन्हें मिलने की परमिशन दे दी गई। वहीं अब खबर आ रही है कि लंदन से लौटने के बाद समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने 4 अक्टूबर को हाथरस पहुँचने का फैसला किया है।

हाथरस टेप लीक मामले में सवाल पूछने पर इंडिया टुडे कर रहा यूजर्स को ब्लॉक: लोगों ने शेयर किए स्क्रीनशॉट

ऑपइंडिया द्वारा हाथरस केस में इंडिया टुडे की पत्रकार के टेप का खुलासा करने के बाद अब सोशल मीडिया यूजर्स इंडिया टुडे से सवाल पूछ रहे हैं। इस टेप में इंडिया टुडे की पत्रकार तनुश्री पांडेय मृतका के भाई संदीप से बातचीत कर रही थीं। वो संदीप से ऐसा स्टेटमेंट देने के लिए बोल रही थीं, जिसमें मृतका के पिता आरोप लगाए कि उनके ऊपर प्रशासन की ओर से बहुत दबाव था।

बाद में चैनल की तरफ से एक बयान जारी किया गया था, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया था कि टेप प्रामाणिक था। इसके बाद, नेटिज़न्स ने उनकी पत्रकारिता की नैतिकता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। इंडिया टुडे ने सवाल करने वाले ट्विटर यूजर्स को ब्लॉक करना शुरू कर दिया।

एक ट्विटर यूजर (@BefittingFacts) ने इंडिया टुडे द्वारा ब्लॉक किए जाने का स्क्रीनशॉट शेयर किया। यूजर ने मीडिया हाउस को उनके पत्रकार द्वारा पीड़िता के भाई को फोन पर काल्पनिक कहानी बनाने पर क्लास लगाई। उन्होंने कहा कि एक सच्चे पत्रकार को कॉल टैपिंग से कभी डर नहीं लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर पत्रकार “लीक” से डरता है तो इसका मतलब है कि वह कुछ छिपा रहा है या नहीं चाहता कि सच्चाई सामने आए।

ट्विटर यूजर के अनुसार, इंडिया टुडे के हिप्पोक्रेसी को उजागर करने के बाद उन्हें ब्लॉक किया गया। उन्होंने सवाल किया था कि उनके फोन टैप किए जाने के बाद टेप को किस कानून के तहत लीक किया गया था, जबकि इससे पहले, इसी चैनल ने सुशांत सिंह राजपूत और उनके वेल्थ मैनेजरों के बीच बातचीत की रिपोर्टिंग की थी।

इंडिया टुडे उस घमंडी बच्चे की तरह व्यवहार करने लगता है, जो झूठ पकड़े जाने पर नखरे करने लगता है। कई लोगों ने यह भी शेयर किया कि हाथरस टेप पर चैनल से सवाल करने के बाद इंडिया टुडे ने कैसे उन्हें ब्लॉक कर दिया।

इंडिया टुडे हाथरस टेप की प्रामाणिकता को स्वीकार करता है

गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर ‘इंडिया टुडे’ की पत्रकार तनुश्री पांडेय और हाथरस मामले की मृतका के भाई संदीप के बीच हुई बातचीत के लीक हुए फ़ोन ऑडियो के विषय में चैनल ने पूछा था कि सबसे पहला सवाल तो ये है कि हाथरस मामले को कवर कर रहीं उसके पत्रकार का फोन टैप क्यों किया जा रहा है? चैनल ने आशंका जताई थी कि अगर मृतका के शोक-संतप्त परिजनों का फोन सर्विलांस पर है या टैप किया जा रहा है तो इसके लिए सरकार को जवाब देना पड़ेगा।

अपनी किरकिरी होने के बाद चैनल ने बयान जारी करते हुए कहा था कि जिस टेलीफोन कॉल को ‘अवैध तरीके से’ लीक कर दिया गया, उसमें उसकी पत्रकार तनुश्री पांडेय मृतका के भाई से ‘दृढ़ता से’ कह रही हैं कि वो पीड़ित पिता का वीडियो शूट करें और उन्हें भेजें। चैनल ने दावा किया है कि इस ऑडियो को बदनीयत से लीक किया गया है। 

अपनी सफाई में चैनल ने आगे कहा था, “मृतका के पीड़ित परिजनों को सरकार द्वारा मिल रही धमकियों और दबाव के बीच अपनी आवाज़ उठाने के लिए तैयार करना उसी प्रक्रिया का एक भाग है, जो एक पत्रकार को करना ही चाहिए। ‘इंडिया टुडे’ चैनल इस मामले में अपने पत्रकार के साथ खड़ा है। हम यूपी सरकार से भी माँग करते हैं कि सारे प्रतिबन्ध हटाए जाएँ और और बिना ‘डर या एहसान’ के पत्रकारों को हाथरस मामले की ग्राउंड रिपोर्टिंग करने दिया जाए।”

हाथरस मामले में स्मृति ईरानी ने कॉन्ग्रेस को घेरा, कहा- यह राहुल की राजनीति का हिस्सा, न्याय दिलाने से कोई सम्बन्ध नहीं

हाथरस मामले पर मीडिया को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने दुर्भाग्यपूर्ण घटना का राजनीतिकरण करने के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी पर तंज कसा। उन्होंने कहा, “लोग कॉन्ग्रेस की रणनीति के बारे में जानते हैं, इसलिए उन्होंने 2019 में भाजपा के लिए ऐतिहासिक जीत सुनिश्चित की। लोग जानते हैं कि राहुल गाँधी का हाथरस जाना उनकी राजनीति का ही एक हिस्सा है और इससे पीड़िता को न्याय दिलाने का कोई संबंध नहीं है।

वहीं कॉन्ग्रेस नेता और राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत द्वारा घिनौने बलात्कार मामले पर की गई अशोभनीय टिप्पणी की निंदा और गाँधी परिवार द्वारा कुछ चयनात्मक मुद्दे पर आक्रोश जाहिर करने को लेकर स्मृति ईरानी ने कहा, “उनका यह कहना कि लड़की अपनी मर्जी से गई थी, यह बयान निंदनीय है। और उन्हें उम्मीद है कि किसी दिन राहुल गाँधी या श्रीमती वाड्रा कम से कम राजस्थान के सीएम को उनके अपमानजनक टिप्पणी के लिए एक कॉल करेंगे।”

इस बीच मीडिया से बात करते हुए स्मृति ईरानी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के लिए, चाहे वह राजनीतिज्ञ हो या कोई और, किसी भी बलात्कार पीड़िता के लिए इस तरह की असंवेदनशील और अभद्र टिप्पणी करना बेहद निंदनीय है।

हाथरस गैंगरेप मामले में तेज होती राजनीति की आलोचना करते हुए स्मृति इरानी ने कहा कि उन्हें यकीन है कि सीएम योगी आदित्यनाथ इस मामले में गहन जाँच के जरिए न्याय करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जिसने भी जाँच को बाधित करने या सबूतों को दबाने या मिटाने की कोशिश की उसे सख्त सजा दी जाएगी।

केंद्रीय मंत्री ने पीड़ित के परिजनों को न्याय का आश्वासन देते हुए कहा कि उन्हें यकीन है कि हाथरस मामले की जाँच में SIT की रिपोर्ट आने के बाद आधिकारिक स्तर पर योगी जी उन सभी लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई करेंगे जिन लोगों ने हस्तक्षेप किया या जिनकी वजह से पीड़िता को संपूर्ण न्याय न मिले इस प्रकार की साजिश रची गई।

यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि कॉन्ग्रेस पार्टी अपने डूबते राजनीतिक भाग्य को फिर से मजबूत करने के लिए हाथरस की घटना में अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेकने में लगी है। एक तरफ जहाँ भाई बहन हाथरस मामले में यूपी सरकार को नीचा दिखाने के लिए तरह-तरह के कारनामे कर रहे है। एक तरफ जहाँ राहुल गाँधी 144 लागू होने के बावजूद पीड़ित परिवार से मिलने अपने काफिले के साथ निकल लिए थे। जिस दौरान पुलिस द्वारा रोके जाने पर वह एक सुरक्षित स्थान को ढूढ़ते हुए खुद ही गिरते पड़ते नजर आए थे। वहीं पुलिस से एक बहस के दौरान बार-बार कैमरे की डिमांड करते हुए (“भैया कैमेरा लाओ“) लोगों के सामने अपनी राजनीति चमकाने में भी लगे थे।

गौरतलब है कि हाथरस मामले की लीक हुई बातचीत से पता चला कि कॉन्ग्रेस ने भावनात्मक रूप से कैसे पीड़ित परिवार को ब्लैकमेल किया और राज्य में भाजपा सरकार को नीचा दिखाने के लिए पीड़ित परिवार से जबरदस्ती प्रशासन के खिलाफ बुलवाने की कोशिश की।

ऑपइंडिया द्वारा कल प्रकाशित किए गए एक रिपोर्ट में इंडिया टुडे की पत्रकार और मृतक के भाई संदीप के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत का खुलासा किया गया था। ऑडियो क्लीप में संदीप से इंडिया टुडे की पत्रकार तनुश्री ऐसा स्टेटमेंट देने के लिए बोल रही थीं, जिसमें मृतका के पिता आरोप लगाए कि उनके ऊपर प्रशासन की ओर से बहुत दबाव था।

ऑडियो में यह कहते सुना जा सकता है, “संदीप, प्लीज मेरे लिए एक चीज कर दो। मैं तुमसे वादा करती हूँ कि जब तक तुम्हारे परिवार को इंसाफ नहीं मिल जाता मैं यहाँ से हिलूँगी भी नहीं… संदीप एक वीडियो अपने पिता की बनाओ जिसमें वो कहें- हाँ, मुझ पर ऐसा बयान जारी करने का बहुत प्रेशर था कि मैं संतुष्ट हूँ। मैं जाँच चाहता हूँ क्योंकि हमारी बेटी मरी है और हमें न उसे देखने का मौका मिला और न उसके अंतिम संस्कार का।” वे आगे कहती हैं, ”सिर्फ 5 मिनट लगेंगे। जल्दी से वीडियो बनाओ और सिर्फ़ मुझे भेज दो।” इस बातचीत में तनुश्री बार-बार संदीप को एसआईटी के खिलाफ भड़काती है।

वहीं एक अन्य ऑडियो में एक अज्ञात व्यक्ति संदीप से बात कर रहा है। वह उनसे कह रहा है कि वो घर से कहीं न जाएँ, क्योंकि कॉन्ग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गाँधी उनके घर आने वाली हैं। इस बातचीत में व्यक्ति यह भी कहते सुना जा सकता है:

“अगर कोई भी तुम्हें कहीं भी लेकर जाता है, तो तुम्हें कहीं नहीं जाना है, अब प्रियंका गाँधी घर आएँगी। कोई कहता है कि तुम्हें हाथरस जाना है, यहाँ जाना है -वहाँ जाना है, तुम्हें कहीं नहीं जाना है। उन्हें (प्रियंका गाँधी को) बताना है- पुलिस प्रशासन दबाव बना रहा है। मीडिया को आने नहीं दे रहा। रिश्तेदारों को आने नहीं दे रहा । कहना है ये हमारे प्रोटेक्शन में लगा रखे हैं या ठाकुरों के प्रोटेक्शन में। ठीक है, ये सब उनको बताना है।”

हाथरस पर हंगामा करने वाली TMC बंगाल में बलात्कार मामले को राजनीतिक षड्यंत्र बताकर दे चुकी है क्लीनचिट, जानिए क्या था मामला?

अब तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) भी हाथरस मुद्दे पर अपने राजनीतिक अभियान को आगे बढ़ाने के लिए कमर कस चुकी है। इस सिलसिले में राहुल और प्रियंका गाँधी का अनुसरण करते हुए तृणमूल कॉन्ग्रेस के चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पार्टी के वरिष्ठ नेता डेरेक ओ ब्रायन के नेतृत्व में शुक्रवार (सितंबर 3, 2020) को हाथरस की पीड़िता से मिलकर संवेदना व्यक्त करने के लिए निकले। हालाँकि, पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया।

टीएमसी भी उस मामले में कूद पड़ी है, जिसमें अभी तक बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई है। हालाँकि, इससे पहले वह पश्चिम बंगाल में यौन शोषण के मामलों को ‘राजनीतिक साजिश’ करार देते हुए उसे शर्मनाक, चरित्र हनन और यहाँ तक कि यौन उत्पीड़न केस का सहारा लिया था। ऐसा ही एक उदाहरण पार्क स्ट्रीट बलात्कार मामले में पार्टी की तरफ दी गई प्रतिक्रिया का है।

पार्क स्ट्रीट मामले में बलात्कार के आरोपों को खारिज करते हुए टीएमसी ने पीड़िता को दोषी ठहराया

6 फरवरी, 2012 को सुज़ैन बर्नर्ट नाम की एक एंग्लो इंडियन महिला जब कोलकाता में पार्क स्ट्रीट से घर लौट रही थी, तो पाँच युवकों ने चलती कार में उसके साथ बलात्कार किया था। इस खबर के सामने आने के तुरंत बाद TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी ने सभी आरोपितों को आरोपों से मुक्त कर दिया था। इसके साथ ही उन्होंने इसे ‘मनगढंत घटना’ करार दिया। जिसे कथित तौर पर ‘सरकार को बदनाम करने के लिए गढ़ा गया था।’

एक समाचार चैनल से बात करते हुए, टीएमसी सांसद काकोली घोष धस्तीदार ने पीड़िता के चरित्र पर ऊँगलियाँ उठाते हुए बलात्कार के एंगल को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा था, “यदि आप पार्क स्ट्रीट मामले की बात कर रहे हैं, तो यह पूरी तरह से एक अलग मामला है। यह बलात्कार का मामला बिल्कुल नहीं है। यह महिला और उसके क्लाइंट के बीच प्रोफेशनल डीलिंग करने वाले दो लोगों के बीच की गलतफहमी थी।”

इसके साथ ही, तत्कालीन परिवहन मंत्री ने भी पीड़िता के चरित्र पर सवाल उठाया था और शिकायत को फर्जी बताया था। 3 साल बाद 2015 में, कोलकाता कोर्ट ने पार्क स्ट्रीट मामले में बलात्कार के आरोपों को बरकरार रखा और आरोपित नासिर खान, रुमान खान और सुमित बजाज को दोषी पाया

उसी साल बर्दवान के कटवा में एक और बलात्कार मामला सामने आया। इस दौरान भी ममता बनर्जी ने बलात्कार के आरोपों को फिर से खारिज कर दिया, वो भी जाँच पूरी होने से पहले ही। उन्हें कहते हुए सुना गया था, “एक राजनीतिक दल बलात्कार का नारा लगाते हुए यह सब कर रही है। वे यह नाटक खेल रहे हैं। वे पश्चिम बंगाल को बदनाम करने के लिए ऐसा कर रहे हैं।”

2013 में, राज्य में बलात्कार के बढ़ते मामलों के बारे में पश्चिम बंगाल विधान सभा में एक बहस के दौरान सीएम ने ममता बनर्जी ने कहा था कि यह राज्य की जनसंख्या में वृद्धि के कारण हुआ। बढ़ते बलात्कार मामलों के लिए उन्होंने आधुनिकीकरण, शॉपिंग मॉल में वृद्धि और मल्टीप्लेक्सों को दोषी ठहराया था।

तृणमूल कॉन्ग्रेस हाथरस मामले में खुद को ‘न्याय के योद्धा’ के रूप में चित्रित करने की कोशिश कर रही है, मगर सच्चाई तो यह है कि बलात्कार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर पार्टी का ट्रैक रिकॉर्ड गंभीर सवाल उठाता है।

अरविंद केजरीवाल ने योगी सरकार पर साधा निशाना

शुक्रवार को दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने AAP के अन्य नेताओं के साथ मिलकर योगी सरकार के खिलाफ जंतर-मंतर पर धरना दिया था। अभियुक्तों के लिए मृत्युदंड की माँग करते हुए उन्होंने कहा, “पूरा देश आरोपितों को कड़ी से कड़ी सजा देने की माँग कर रहा है। उन्हें फाँसी दें ताकि देश में ऐसी घटना कभी न दोहराई जाए। कुछ लोगों को लगता है कि आरोपित को बचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। परिवार ने अपनी बेटी को खो दिया है। उन्हें सरकार और समाज से सहानुभूति एवं समर्थन की जरूरत है। लेकिन उनसे जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह गलत है।”

मामले में कवरअप का आरोप लगाते हुए, केजरीवाल ने कहा, “हाथरस सामूहिक बलात्कार की घटना में हालिया घटनाक्रम यह बताता है कि इसमें कवरअप करने की कोशिश की जा रही है। कई दिनों तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई; तब उचित देखभाल (मृतक को) नहीं दी गई थी। जब उसने दम तोड़ दिया, तो रात में उसके शव का अंतिम संस्कार किया गया। और अब वे कह रहे हैं कि बलात्कार नहीं हुआ था।”

‘घटना के वक्त एक आरोपित गाँव में नहीं था’: पत्रकार का ऑडियो लीक होने के बाद हाथरस केस में इंडिया टुडे का यू-टर्न

हाथरस केस में ऑपइंडिया ने शुक्रवार (अक्टूबर 2, 2020) को कुछ लीक ऑडियो पर रिपोर्ट की थी। इसमें से एक ऑडियो में इंडिया टुडे की पत्रकार तनुश्री पांडेय मृतका के भाई संदीप से बातचीत कर रही थीं। इसमें संदीप से तनुश्री ऐसा स्टेटमेंट देने के लिए बोल रही थीं, जिसमें मृतका के पिता आरोप लगाए कि उनके ऊपर प्रशासन की ओर से बहुत दबाव था।

ऑपइंडिया द्वारा इसे उजागर किए जाने के एक दिन बाद इंडिया टुडे ने यू-टर्न ले लिया है। अब, इंडिया टुडे ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें कहा गया है कि हाथरस मामले का एक आरोपित रामू, घटना के दौरान गाँव में मौजूद नहीं था। 

इंडिया टुडे के हिंदी चैनल ‘आज तक’ के रिपोर्टर ने अपनी रिपोर्ट में हाथरस केस में बड़ा खुलासा करते हुए बताया है कि आरोपित रामू घटना के समय गाँव में नहीं था! जिस डेयरी प्लांट में वो नौकरी करता था उसके मालिक ने बताया कि घटना के वक्त रामू प्लांट पर काम कर रहा था, उसे 25 से भी ज़्यादा लोगों ने प्लांट पर देखा था।

डेयरी प्लांट के मालिक का कहना है कि रामू फैक्ट्री में काम कर रहा था और उस गाँव में मौजूद भी नहीं था जहाँ यह घटना घटी। रामू के बारे में पूछे जाने पर प्लांट के मालिक का कहना है कि रामू को सुनने में थोड़ी कठिनाई है, मगर वह सीधा आदमी है।

Zee News के अनुसार, कारखाने के शिफ्ट मैनेजर मधुसूदन ने कारखाने के इंटर्नल व्हाट्सएप ग्रुप में उस दिन की रामू की तस्वीर भी दिखाई। बता दें कि रामकुमार (रामू) मुख्य आरोपित संदीप का चाचा है।

ज़ी न्यूज़ ने बताया है कि शिफ्ट मैनेजर के अनुसार, रामू की उपस्थिति 14 और 15 सितंबर, दोनों दिन के लिए उपस्थिति कैलेंडर में अंकित है, जो यह साबित करता है कि हाथरस में अपराध के दौरान वह उपस्थित नहीं हो सकता।

रामू के पिता राकेश ने कहा कि उनका बेटा किसी भी कथित बलात्कार या सामूहिक बलात्कार में शामिल नहीं था। एक ही परिवार का होने के कारण उन्हें मामले में फँसाया गया है। हाथरस पीड़िता को अपनी बेटी बताते हुए, राकेश ने ज़ी न्यूज़ से कहा कि अगर उनका बेटा सामूहिक बलात्कार का दोषी है, तो उस पर कोई मुक़दमा चलाने के बजाय गोली मारकर उसकी हत्या कर दी जानी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि वह रामू को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। अगर उसके बेटे के खिलाफ सामूहिक बलात्कार के आरोप साबित होते हैं, तो उसे मार दिया जाना चाहिए।

इसके अलावा, रामू के पिता राकेश कुमार का यह भी कहना है कि रामू को पहले हिरासत में लिया गया था और फिर रिहा कर दिया गया था। हालाँकि, केवल कुछ दिनों बाद जब बलात्कार के आरोप जोड़े गए, तो उसे फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। राकेश कुमार ने एसआईटी पर पूरा भरोसा जताया और कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि मामले की सच्चाई सामने आ जाएगी।

इंडिया टुडे का यू-टर्न एक दिलचस्प मोड़ लाता है। 24 घंटे भी नहीं हुए, जब ऑडियो क्लिप लीक होने के बाद उनके रिपोर्टर को पीड़ित के परिवार पर दबाव डालते हुए उजागर किया गया था। इंडिया टुडे के मामले में यह घटनाक्रम दिलचस्प है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से इंडिया टुडे को इस बात पर यकीन नहीं हो रहा है कि उन्होंने इस घटना के बारे में जो नैरेटिव सेट किया है और जिस पर कॉन्ग्रेस द्वारा घेराव किया जा रहा है, वह पूरी तरह सच है। हालाँकि, यह इंडिया टुडे और मीडिया रिपोर्टिंग के बारे में कई सवाल उठाता है।

उल्लेखनीय है कि पुलिस के अनुसार मेडिकल रिपोर्ट में बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई है। अब इंडिया टुडे के हिंदी चैनल द्वारा किए गए दावे कि एक आरोपित गाँव में मौजूद नहीं था से यह सवाल फिर से खड़ा होता है कि वास्तव में हाथरस में क्या हुआ था।

लीक ऑडियो से इंडिया टुडे और कॉन्ग्रेस कठघरे में

गौरतलब है कि इंडिया टुडे की पत्रकार और मृतका के भाई संदीप की फोन पर बातचीत वायरल हुई। इस ऑडियो को ऑपइंडिया ने भी एक्सेस किया। इसमें सुना जा रहा है कि इंडिया टुडे पत्रकार तनुश्री मृतका के भाई संदीप को ऐसा स्टेटमेंट देने के लिए बोल रही हैं, जिसमें लड़की के पिता आरोप लगाए कि उनके ऊपर प्रशासन की ओर से बहुत दबाव था।

बातचीत को सुनकर यह साफ पता चलता था कि तनुश्री पीड़िता के भाई से एक निश्चित बयान दिलवाने का प्रयास कर रही हैं और संदीप की दबी आवाज सुनकर लग रहा है जैसे वह ऐसा नहीं करना चाहते। संदीप इस ऑडियो में पहले दबाव की बात कहते हैं। मगर बाद में कहते हैं कि उनके पिता इस बात को लेकर स्पष्ट नहीं है कि उन पर दबाव बनाया गया या नहीं।

इस बातचीत का मकसद सिर्फ़ मृतका के पिता का वीडियो निकलवाना था, जिसमें पिता किसी भी तरह बस यही बोल दें कि उनपर दबाव बनवाकर बयान दिलवाया गया कि वह संतुष्ट हैं।

तनुश्री को ऑडियो में कहते सुना जा सकता है, “संदीप, प्लीज मेरे लिए एक चीज कर दो। मैं तुमसे वादा करती हूँ कि जब तक तुम्हारे परिवार को इंसाफ नहीं मिल जाता मैं यहाँ से हिलूँगी भी नहीं… संदीप एक वीडियो अपने पिता की बनाओ जिसमें वो कहें- हाँ, मुझ पर ऐसा बयान जारी करने का बहुत प्रेशर था कि मैं संतुष्ट हूँ। मैं जाँच चाहता हूँ क्योंकि हमारी बेटी मरी है और हमें न उसे देखने का मौका मिला और न उसके अंतिम संस्कार का।”

वह आगे कहती हैं, ”सिर्फ 5 मिनट लगेंगे। जल्दी से वीडियो बनाओ और सिर्फ़ मुझे भेज दो।” इस बातचीत में तनुश्री बार-बार संदीप को एसआईटी के ख़िलाफ़ भड़काती है। मगर, लड़की का भाई कहता है कि जाँच टीम सिर्फ़ उसे जरूरी सवाल कर रही थी और फिर वह चली गई।

बता दें कि इसके बाद और ऑडियो सामने आए थे। इनमें से एक में में एक अज्ञात व्यक्ति संदीप से बात कर रहा है। वह उससे कहता है, “अगर कोई भी तुम्हें कहीं भी लेकर जाता है, तो तुम्हें कहीं नहीं जाना है, अब प्रियंका गाँधी घर आएँगी। कोई कहता है कि तुम्हें हाथरस जाना है, यहाँ जाना है-वहाँ जाना है, तुम्हें कहीं नहीं जाना है। उन्हें (प्रियंका गाँधी को) बताना है- पुलिस प्रशासन दबाव बना रहा है। मीडिया को आने नहीं दे रहा। रिश्तेदारों को आने नहीं दे रहा । कहना है ये हमारे प्रोटेक्शन में लगा रखे हैं या ठाकुरों के प्रोटेक्शन में। ठीक है, ये सब उनको बताना है।”

दलितों को भड़काने की साजिश: हाथरस के बहाने बिहार चुनाव साधने चला विपक्ष, साथ में मीडिया गिरोह भी

सियासत की इस पिच का नाम है बिहार। प्रैक्टिस उत्तर प्रदेश के हाथरस में हो रही। मकसद है दो-दो बार आम चुनावों के पिच पर औंधे मुँह गिरे राहुल गाँधी और उत्तर प्रदेश में ढेर हुई उनकी बहन प्रियंका गाँधी को फिर से लॉन्च करना।

इसके लिए परिवार का वफादार मीडिया गिरोह फिल्डिंग में जुट गया है। ‘दलित प्रेम’ को गेंद बनाकर बिहार विधानसभा चुनाव के लिए उछाला जा रहा है, ताकि बीजेपी नीत एनडीए के हाथ से जीती हुई बाजी फिसल जाए।

ऐसा हम नहीं कह रहे। ये मीडिया गिरोह की हालिया रिपोर्टों से झलकता है। हम सिलसिलेवार तरीके से यह जानेंगे कि बिहार चुनाव से ठीक पहले हाथरस केस पर सियासी रोटी सेंकने की कोशिश कैसे हो रही है? सोशल मीडिया में अमेरिका के ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ की तर्ज पर ‘दलित लाइव्स मैटर’ ट्रेंड क्यों कराया जा रहा?

अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉएड की मौत के बाद उक्त ट्रेंड चला था, जिसकी नक़ल कर हाथरस केस पर प्रोपेगेंडा फैलाने में की जा रही। विदेशी आन्दोलनों से नक़ल कर सुर्खियाँ बटोरने की ये कवायद जामिया में हुए प्रदर्शनों में भी दिखा था, जब आयशा और लदीदा को पेश किया गया था। दोनों ने हिजाब पहन सूडान की सलाहा की नक़ल कर दीवार पर खड़े होकर स्पीच दी थी।

अब यही कीड़ा बिहार चुनाव से पहले कुलबुलाने लगा है। वैसे तो ‘राहुल गाँधी हैज अराइव्ड’ और ‘राहुल इज बैक’ कर के तो हर साल कई लेखों के जरिए उन्हें लॉन्च किया जाता है। इसी क्रम में इस बार हाथरस को मुद्दा बनाया जा रहा है। ‘इंडिया टुडे’ में एक प्रकाशित खबर में राहुल-प्रियंका की तुलना इंदिरा गाँधी से की गई है, जिन्होंने 1977 में बिहार के बेल्ची में दलितों के नरसंहार के बाद वहाँ भाषण दिया था।

तो क्या ऐसे लेख लिखने वाले मानते हैं कि ये नेतागण सिर्फ वोट्स के लिए ऐसा कर रहे हैं और उन्हें पीड़ितों का दुःख-दर्द सुनने से कोई मतलब नहीं है? और क्या ये मीडिया संस्थान इस चीज का महिमामंडन भी कर रहे? राहुल का हाथरस जाने के क्रम में ‘सुर्खियाँ’ बनने और प्रियंका का वाल्मीकि मंदिर में प्रार्थना करने को ‘मास्टरस्ट्रोक’ बताया जा रहा है। साथ ही बिहार में चुनावी नैरेटिव बदलने की बात कही गई है।

तो क्या मान लिया जाए कि ये सब बिहार चुनाव के लिए हो रहा है, पीड़ित परिवार के लिए नहीं? इससे राहुल व प्रियंका गाँधी का गुणगान करने वाले मीडिया संस्थानों को इसलिए कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि इससे बिहार में भाजपा के वोटरों के प्रभावित होने की संभावना है? ‘इंडिया टुडे’ को इस बात का भी अफ़सोस है कि रामविलास पासवान और जीतन राम माँझी जैसे दलित नेता राजग का हिस्सा क्यों हैं। स्पष्ट है, बिहार चुनाव को हाथरस के नाम पर प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।

इसी तरह शेखर गुप्ता की ‘द प्रिंट’ ने भाजपा नेताओं के हवाले से दावा किया है कि जिस तरह से उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार का हाथरस मामले में रवैया रहा है, इससे डर है कि बिहार में भाजपा पर प्रभाव पड़ सकता है। एक अनाम भाजपा नेता के हवाले से दावा किया गया है कि सीएम योगी ने तो तेज़ी से एक्शन लिया, लेकिन जिस तरह विपक्ष ने सक्रियता दिखाई है, बिहार में इस मामले को उठाए जाने से भाजपा को खतरा हो सकता है।

हालाँकि, गया के पूर्व सांसद और बिहार के महादलित नेता हरि माँझी को ऐसा नहीं लगता। उन्होंने तो राहुल गाँधी के हाथरस जाने के क्रम में गिरने और प्रियंका गाँधी के बयानों को एक्टिंग करार दिया। वो इन दोनों को ‘पप्पू-पिंकी’ कहते हैं। माँझी कहते हैं कि ‘दलितों पर अत्याचार सिर्फ़ भाजपा शासित राज्य में होता है, बाक़ी ग़ैर भाजपा शासित राज्य में पलकों पर बिठाकर रखते है’- ऐसा वामपंथी-कॉन्ग्रेसी और उनके दरबारी पत्रकारों का तर्क रहता है।

शेखर गुप्ता की ‘द प्रिंट’ ने भी हाथरस और बिहार चुनाव को जोड़ा

उनका आरोप है कि यही लोग ग़ैर-भाजपा शासित राज्य में दलितों पर हो रहे अत्याचार पर चुप रहते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अख़बार की दो कतरनें शेयर कर के हाथरस पर हंगामा करने वालों को आड़े हाथों लिया। इसमें से एक में पिछले एक महीने में नाबालिगों के साथ हुई हैवानियत की 12 घटनाओं का जिक्र था और सभी आरोपित मुस्लिम थे। एक अन्य मेरठ की खबर थी, जहाँ एक सिनेमा हॉल के पास दलित लड़की से गैंगरेप की बात थी और आरोपित मुस्लिम थे।

‘इंडिया टुडे’ ने भी फैलाया ‘दलित लाइव्स मैटर’ का हौवा

गया से लगातार 10 वर्ष सांसद रह चुके हरि माँझी ने पूछा कि दलितों के ठेकेदार इन ख़बरों पर क्यूँ नहीं बोलते? मायावती से लेकर रावण, उदित राज तक सब चुप रहेंगे। उन्होंने कहा कि इन पर बोलने से इनका राजनीतिक करियर और खोखला सेक्युलरिज़म ख़तरे में आ जाएगा। बिहार चुनाव पर उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के लोग अभी और खिसियाएँगे, क्योंकि आगामी बिहार चुनाव में उन्हें नील बटे सन्नाटा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि उन्हें सुनने में आया है एक दलित ठेकेदार पार्टी के प्रचार के लिए बिहार आए हुए हैं जो, कि कुछ दिन पहले भाजपा में थे। साथ ही तंज कसा कि वो जैसे ही कॉन्ग्रेस में गए, उनका हश्र क्या हुआ हम सभी जानते है। ज्ञात हो कि कॉन्ग्रेस पार्टी के अनुसूचित जाति-जनजाति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदित राज फ़िलहाल बिहार दौरे पर हैं। बिहार में लगे सारे ‘कल कारखानों’ और ‘विकास कार्यों’ का श्रेय कॉन्ग्रेस को देते फिर रहे हैं।

‘बिहार में डरे हुए हैं भाजपा के दलित नेता’: ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ ने फैलाया डर

बता दें कि बिहार के तीन बड़े दलित नेताओं का राजग के पाले में आना विपक्षी पार्टियों को अखर रहा है और इसके जरिए दलित मतों को भाजपा से तोड़ने की कोशिश के तहत ये सब किया जा रहा है। बिहार में दलित वोटरों की संख्या 16% है, जो किसी भी सीट पर हार-जीत का समीकरण तय करने में सक्षम है। लगभग इतनी ही संख्या मुस्लिम वोटरों की है और 12% यादव हैं। ऐसे में राजद-कॉन्ग्रेस अपने लिए 28% ‘माई’ वोटरों के अलावे दलितों का वोट भी काटना चाहती है।

‘मनी कण्ट्रोल’ ने भी बिहार में दलितों को लेकर हाथरस को जोड़ा

पहले बड़े नेता हैं रामविलास पासवान और अब उनके पुत्र चिराग पासवान भी राजनीति में अच्छी तरह सक्रिय हैं, जो आजकल लोजपा के सारे निर्णय ले रहे हैं। लोजपा के राजग में होने से बिहार में 5% पासवान वोटरों के लोजपा के साथ होने का भय इन दलों को सता रहा है, क्योंकि रामविलास इस वर्ग के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं, जो कांशीराम और मायावती से भी 15 वर्ष पहले राजनीति में आए थे।

दूसरे तुरुप का इक्का हैं जीतन राम माँझी, जो बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं और अपनी अलग पार्टी बना कर चुनावी मैदान में उतरते रहे हैं। चुनाव के ऐन वक़्त पर उन्हें अपने पाले में कर नीतीश कुमार ने महादलितों के वोट्स को साधने में मजबूती हासिल कर ली है। खासकर गया और जहानाबाद व उससे सटे जिलों में माँझी से चुनाव प्रचार करवाया जाएगा। वो अपने बयानों के कारण पहले से ही सुर्ख़ियों में रहते हैं।

बिहार में तीसरे जिस वाइल्ड कार्ड की एंट्री हुई है, वो हैं अशोक चौधरी। बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी को नीतीश कुमार ने जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष का बड़ा पद देकर एक बड़ा दाँव खेला है। कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे अशोक चौधरी राबड़ी मंत्रिमंडल का भी हिस्सा रहे हैं और उन्होंने प्रदेश में कॉन्ग्रेस को मजबूत करने के लिए काफी मेहनत की थी। जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार के नीचे अब वो पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं।

ये तीन इक्के कॉन्ग्रेस-राजद के लिए परेशानी का सबब हैं और बिहार चुनाव से पहले ये लोग किसी ऐसे मुद्दे को उठाने की फ़िराक में थे, जिससे बिहार में दलितों को भड़काया जा सके। हाथरस के रूप में उन्हें ये मुद्दा मिला, वरना बलरामपुर में भी एक दलित समुदाय की लड़की का गैंगरेप हुआ और इनमें से कोई पूछने तक नहीं गया, क्योंकि आरोपित मुस्लिम हैं। हाथरस के नाम पर अब मीडिया भी माहौल बना रहा।

‘मनी कण्ट्रोल’ लिखता है कि चुनाव से पहले बिहार में हाथरस मुद्दे को लेकर आक्रोश है और बिहार के 243 में से उन 38 सीटों पर राजग को परेशानी हो सकती है, जो दलितों के लिए आरक्षित हैं। इसमें तेजस्वी यादव के बयान का जिक्र है, जिन्होंने भाजपा सरकार के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान पर तंज कसते हुए भाजपा को दलित-विरोधी और महिला-विरोधी पार्टी बताया। राजद के बाकी नेता भी यही राग अलाप रहे हैं।

इसी तरह ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ भी लिखता है कि बिहार में भाजपा के दलित नेता हाथरस मामले के उठने के बाद डरे हुए हैं। इसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय पासवान का बयान है, जिन्होंने कहा है कि पीएम मोदी ने सीएम योगी को इस मामले में सख्त कार्रवाई करने की बात कह के अपना काम कर दिया है। उनका कहना है कि हाथरस मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है और स्पष्ट है कि इसमें मीडिया ट्रायल चल रहा है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री का कहना है कि जब प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री से कड़ी कार्रवाई करने को कहा है, तो हमें इंतजार करना चाहिए। उन्होंने इस मामले को सोशल मीडिया पर पोर्नोग्राफिक कंटेंट्स को भी जोड़ कर देखा और कहा कि सोशल मीडिया पर अनुशासन की त्वरित ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि जाँच तो होनी चाहिए लेकिन मीडिया ट्रायल को टाला जा सकता था। एक अन्य दलित नेता का बयान लेकर डराने की कोशिश की गई है।

इसी तरह सरसंघचालक मोहन भागवत के बयान को लेकर 2015 बिहार चुनाव में डर फैलाया गया था। ये हौवा फैलाया गया कि भाजपा आरक्षण ख़त्म कर देगी। साथ ही पूरे चुनाव में इसी को मुद्दा बनाया गया। उस समय भाजपा और जदयू का साथ नहीं था, और भाजपा को हार का मुँह देखना पड़ा। जैसे पिछले बार ‘आरक्षण ख़त्म होने’ की बात की गई, इस बार ‘भाजपा शासित राज्यों में दलित लड़की से कथित बलात्कार’ को भुनाने की कोशिश हो रही।

आगरा में वाल्मीकि समाज के लोगों ने हाथरस केस में विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर किया पर पथराव, लाठीचार्ज

उत्तर प्रदेश के आगरा में हाथरस कांड को लेकर सफाई कर्मचारियों ने जमकर बवाल किया। रिपोर्ट के अनुसार, अनिश्चित कालीन हड़ताल स्थगित करने के वाल्मीकि समाज के फैसले के विरोध में सफाई कर्मचारी सड़क पर उतर आए। नगर निगम अधिकारियों द्वारा कूड़ा उठाने वाले गाड़ियाँ निकलवाने के मामले ने उग्र रूप ले लिया।

एक तरफ पुलिस प्रशासन स्थिति को नियंत्रित करने और किसी भी प्रकार के दंगे फसाद को रोकने की पुरजोर कोशिश में लगी है वहीं वाल्मीकि समाज के लोगों ने आज विरोध प्रदर्शन करते हुए पुलिस पर पथराव और लाठीचार्ज किया।

तनाव इस कदर बढ़ गया कि आगरा में मौके पर भारी पुलिस फोर्स तैनात करना पड़ा। वहीं एसपी सिटी ने पथराव करने वालों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।

बता दें यूपी में जगह-जगह हाथरस कांड को लेकर लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे है। उसी कड़ी में आगरा में भी हाथरस मामले को लेकर सफाई कर्मचारियों ने जमकर प्रदर्शन किया। अनिश्चितकालीन हड़ताल स्थगित करने के वाल्मीकि समाज के फैसले के विरोध में सफाई कर्मचारी सड़क पर उतर आए। उसी दौरान पुलिस पर भी पथराव किया गया।

इस घटना पर एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद का कहना है कि पथराव करने वालों को चिन्हित किया जा रहा है। पथराव करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और एहतियातन पुलिस फोर्स तैनात किया गया है। सोशल मीडिया पर लगातार नजर रखी जा रही है और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष नजर रखी जा रही है।

हाथरस- तीन लीक ऑडियो क्लिप, दो वीडियो और नई बातें: अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti on Hathras Case leaked audio clips

एक ऑडियो क्लिप लीक हुआ है। इसमें इंडिया टुडे की एक पत्रकार हाथरस पीड़िता के भाई से कहती है, “संदीप, प्लीज मुझे अपने पिता का एक 5 मिनट का एक छोटा सा वीडियो दिलवा दो, जिसमें वो कह रहे हों कि प्रशासन ने उन पर झूठ बोलने के लिए दबाव डाला है।” इसके बाद दो और ऑडियो लीक हुआ। एक प्रियंका गाँधी की टीम के एक लड़के का है, जो पीड़िता के भाई को समझा रहा है कि प्रियंका के आने पर उसे क्या-क्या बोलना है।

तीसरे ऑडियो क्लिप में लड़के की एक जानकार उसे समझा रही है कि मोदी तुम्हें 25 के बदले 50 लाख दे, तो भी फैसला मत करना। वहीं लोगों का कहना है कि मीडिया को इस मामले में घुसने क्यों नहीं दिया जा रहा है। तो इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं। एक वजह ये है कि प्रशासन नहीं चाहती हो कि इनके आने से मामला और बिगड़े और जिस तरह से मुद्दे का राजनीतिकरण किया जा रहा है, उस पर रोक लग सके।

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