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ठहाके लगाते हुए हाथरस जाते राहुल-प्रियंका का वीडियो वायरल, महादलित नेता ने कहा- हमारी भावनाओं से मत खेलिए

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी कार से हाथरस जाते हुए दिख रहे हैं। हाथरस के पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी इस वीडियो में ठहाके लगाते हुए दिख रहे हैं। ऐसे में लोग ये सवाल पूछ रहे हैं कि ऐसे वक़्त पर राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी इस तरह संवेदनहीन होकर हँसी-मजाक करते हुए कैसे जा यात्रा कर सकते हैं?

शनिवार (अक्टूबर 3, 2020) की सुबह ही पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने ट्वीट किया था कि उन्हें हाथरस के पीड़ित परिवार से मिलने से दुनिया की कोई ताक़त नहीं रोक सकती है। इससे पहले भी वो हाथरस जाने की कोशिश करते हुए पुलिस से झड़प के दौरान गिर पड़े थे, जिसे कई लोगों ने ‘नाटक’ करार दिया था। प्रियंका गाँधी भी इस दौरान खासी सक्रिय रही थी। अब हाथरस जाते हुए दोनों भाई-बहन हँसी-ठिठोली करते दिख रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा कि ये बेहद शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि हाथरस की बेटी के लिए ग़म और शोक मनाने निकले ‘भइया-बहना’ का असली चेहरा देख लीजिए, देखिए कि कैमरा देखते ही मातम मनाने वाले राहु़ल, प्रियंका गाड़ी में कैसे हँसी-ठहाके लगाते और मस्ती करते हाथरस आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि दरअसल ये ख़ुशी यूपी में नफरत की आग फैलाने को लेकर है, हाथरस बहाना है, यूपी जलाना है।

वहीं गया के पूर्व-सांसद और महादलित नेता हरि माँझी ने तंज कसते हुए कहा, “दलित भाइयों-बहनों का दुःख बाँटने जा रहे हैं दोनों भाई-बहन। इनको इतना दुःख है कि ये लोग ठहाका लगाकर दुःख बाँटने हाथरस जा रहे हैं।आपको हक़ नहीं कि हम दलित हिंदुओं के भावनाओं के साथ खेलें।” साथ ही भाजपा नेता ने सलाह दी कि कभी राजस्थान भी हो लीजिए।

हम नहीं चाहते सीबीआई जाँच करे, नार्को टेस्ट भी नहीं देंगे: हाथरस केस में मृतका की माँ का बयान

हाथरस की घटना ने देश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर लोगों को आक्रोशित कर दिया है। मामले की तह तक जाने के लिए हर कोई गहन जाँच की माँग कर रहा है। हालाँकि पीड़ित परिवार ने मामले में सीबीआई जाँच और खुद के नार्को टेस्ट से साफ इनकार किया है।

आजतक की एक पत्रकार से बात करते हुए मृतका की माँ ने मामले की सीबीआई जाँच से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि परिवार सीबीआई जाँच नहीं चाहता है और इसके बजाय वह सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में एक टीम से जाँच चाहती है।

मृतका की माँ से जब पत्रकार ने पूछा कि क्या हाथरस मामले को देश की प्रमुख जाँच एजेंसी को ट्रांसफर किया जाना चाहिए? तो उन्होंने जवाब दिया, “नहीं, हम नहीं चाहते कि सीबीआई मामले की जाँच करे। हम चाहते हैं कि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में एक टीम इस मामले की जाँच करे।”

बता दें कि कल उत्तरप्रदेश की योगी सरकार ने इस केस से जुड़े सभी पक्षों का नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट करवाने का फैसला किया था। लेकिन मृतका की माँ ने इससे इनकार करते हुए कहा कि उनका परिवार नार्को टेस्ट से नहीं गुजरेगा।

मृतका की माँ के इनकार करने पर आजतक के रिपोर्टर ने दुखी माँ पर दबाव बनाते हुए इस बात पर जोर दिया कि नार्को टेस्ट से मामले के छिपे हुए तथ्यों का पता लगाया जाएगा, उसके बावजूद माँ ने जवाब दिया, “हमें नहीं पता कि नार्को टेस्ट क्या है और हम इसे नहीं कराना चाहते हैं।”

वहीं जब पीड़ित परिवार द्वारा दिए गए शुरुआती बयानों के बारे में माँ से पूछा गया, जिसमें उन्होंने सिर्फ हमले के बारे में पुष्टि की थी और यौन उत्पीड़न को लेकर कुछ नहीं कहा था, तो उन्होंने खुद का बचाव करते हुए कहा कि वह इस घटना से बहुत दुखी थी और घबराई हुई थी।

गौरतलब है कि दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में हाथरस की कथित सामूहिक बलात्कार पीड़िता की मौत हो गई थी। खबरों के अनुसार, उसके साथ दो सप्ताह पहले कथित तौर पर बलात्कार किया गया था। वहीं लोगों का गुस्सा तब और भड़क गया जब सोशल मीडिया पर यह भ्रामक चलाई गई कि हाथरस पुलिस ने परिवार के सदस्यों की सहमति के बिना लड़की का जबरन अंतिम संस्कार कर दिया। हालाँकि पुलिस ने बाद में खबरों को खरिज करते हुए कहा था कि दाह संस्कार के दौरान मृतका के पिता मौजूद थे।

एडीजी प्रशांत कुमार ने एएनआई से बात करते हुए बताया था कि फोरेंसिक रिपोर्ट मिल गई है और उसके मुताबिक़ लड़की के साथ बलात्कार की घटना नहीं हुई थी। पीड़िता के साथ किसी भी तरह का यौन शोषण नहीं हुआ था। मौत का कारण गला दबाना और रीढ़ की हड्डी में लगी चोटें थीं।

पुलिस ने कहा था कि हमलावरों का विरोध करने के दौरान पीड़िता की जीभ कट गई थी और गला घोंटने की वजह से उसकी रीढ़ पर चोटें आई थी। पीड़िता ने बाद में पुलिस को बताया था कि उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था। हालाँकि, यूपी पुलिस ने कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ऐसी किसी भी चोट का जिक्र नहीं किया गया है, जिसमे बलात्कार या यौन उत्पीड़न का संकेत दिया गया हो।

वहीं हाथरस मामले में योगी सरकार ने प्राथमिक जाँच की रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन द्वारा बरती गई लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए हाथरस के एसपी, डीएसपी, इंस्पेक्टर और कुछ अन्य अधिकारियों को निलंबित करने का भी निर्देश दिया था।

उल्लेखनीय है कि यूपी प्रशासन ने मीडिया को अनुमति दे दी है कि वह पीड़ित परिवार वालों से मिलकर बात कर सकते हैं। एसडीएम ने कहा, “इस मामले में एसआईटी की जाँच पूरी हो चुकी है इसलिए मीडिया के लिए लगाई गई पाबंदी भी हटा दी गई है। फ़िलहाल उस इलाके में सीआरपीसी की धारा 144 लागू है, इसलिए एक समय पर 5 से अधिक मीडियाकर्मी मौजूद नहीं रह सकते हैं।”

उन्होंने कहा, “अभी वहाँ सिर्फ मीडियाकर्मियों को जाने की अनुमति है। जब प्रतिनिधिमंडल के लिए हरी झंडी दिखाई जाएगी तब हम सभी को प्रवेश करने की अनुमति देंगे। इस तरह के जितने भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि पीड़िता के परिवार वालों के फोन लिए जा चुके हैं या उन्हें घर में बंद करके रखा गया है, यह सभी आरोप बेबुनियाद है।” उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन पर इस तरह के आरोप लगाए गए थे कि उन्होंने पीड़िता के परिवार वालों के फोन जब्त कर लिए हैं।

गलवान में बलिदान हुए भारत के 20 सैनिकों की याद में लद्दाख में बना वॉर मेमोरियल: चीनी सैनिकों को पहुँचाई थी भारी क्षति

पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ झड़प में वीरगति को प्राप्त हुए 20 भारतीय सैनिकों के नाम हमेशा के लिए अमर हो गए हैं। पूर्वी लद्दाख में बलिदान हुए सैनिकों के लिए युद्ध स्मारक (War memorial) बनाया गया है, जिसमें 20 जवानों के नाम अंकित किए गए हैं।

वीरगति को प्राप्त हुए ये 20 सैनिक वे हैं, जिन्होंने भारतीय सीमा की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योच्छावर कर दिए। यह स्मारक KM-120 पोस्ट के पास यूनिट लेवल पर बनाया गया है। यह पोस्ट रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण डरबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी की स्ट्रेटजिक रोड पर स्थित है।

स्मारक पर लगाए गए ऑपरेशन डीटेल्स के अनुसार, “15 जून, 2020 को गलवान घाटी में 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल बी संतोष बाबू के नेतृत्व में क्विक रिएक्शन फोर्स का गठन किया गया और टुकड़ी को जनरल Y नाला से PLA सैनिकों को बेदखल कर पेट्रोलिंग पॉइंट 14 की तरफ बढ़ने का काम सौंपा।”

ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के तहत वाई-जंक्शन क्षेत्र के पास ये सैनिक विरगति को प्राप्त हो गए थे। लद्दाख की गलवान घाटी में ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के तहत Y-जंक्शन के पास चीन की PLA (पीपल्स लिबरेशन आर्मी) को ऑब्जर्वेशन पोस्ट से हटाने के बाद भारत और चीन के बीच जो कुछ हुआ वह किसी छोटे युद्ध से कम नहीं था। भले इस लड़ाई में गोली-बम नहीं चले लेकिन फिर भी दोनों देशों ने अपने सैनिक गँवा दिए। हालाँकि, चीन ने अपने बलिदान सैनिकों को किसी प्रकार का सम्मान नहीं दिया।

बता दें भारत और चीन के बीच अप्रैल-मई से लद्दाख में तनातनी बनी हुई है। लद्दाख की गलवान घाटी में 15-16 जून की रात दोनों देशों के बीच की ये तनातनी हिंसक झड़प में बदल गई, जिसमें भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए। चीन को भी इसमें अच्छा खासा नुकसान पहुँचा।

गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच वार्ता का क्रम भी जारी है। भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद पर हाल ही में एक और दौर की कूटनीतिक वार्ता की। दोनों देशों ने गलतफहमी को टालने तथा जमीन पर स्थिरता कायम रखने के लिए छठे दौर की सैन्य वार्ता में लिए गए फैसलों को क्रियान्वित करने पर जोर दिया।

हाथरस केस में नार्को टेस्ट रुकवाने हाई कोर्ट पहुँचा कॉन्ग्रेस समर्थक साकेत गोखले

कॉन्ग्रेस के वफादार साकेत गोखले ने हाथरस केस से जुड़े लोगों के नार्को/पॉलीग्राफ टेस्ट पर रोक लगाने के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय का रुख किया है। बता दें, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार (2 अक्टूबर 2020) को इस मामले के शिकायतकर्ता, आरोपितों और इससे जुड़े पुलिसकर्मियों के टेस्ट का ऑर्डर दिया था।

गोखले ने अपनी याचिका में अदालत से हाथरस मामले के पीड़ित परिवार के नार्को टेस्ट पर तत्काल रोक लगाने का आग्रह किया है।

साकेत गोखले द्वारा कोर्ट में दायर याचिका
साकेत गोखले द्वारा कोर्ट में दायर याचिका

कॉन्ग्रेस समर्थक गोखले के अनुसार नार्को टेस्ट एक तरह से पीड़ित परिवार के साथ जबरदस्ती करना है। इसका मकसद कोर्ट के समक्ष गवाही के वक्त उन्हें भयभीत करना है।ताकि परिवारवालों को न्यायालय के सामने गवाही के समय भयभीत किया जा सके। गोखले ने कहा कि यह “जबरदस्ती” न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन है।दायर याचिका में कहा गया है, “पीड़ित परिवार का नार्को टेस्ट प्राकृतिक न्याय के सभी सिद्धांतों के खिलाफ है, क्योंकि उन पर कोई आरोप नहीं है। पीड़ित परिवार के साथ ऐसा करना एक तरह की जोर-जबरदस्ती है।”

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मामले में सुनवाई की तारीख 12 अक्टूबर तय की है। उम्मीद है कि इस दिन गवाही देने के पीड़ित परिवार अदालत में पेश होंगे।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने हाथरस मामले में निष्पक्ष और गहन जाँच को सुनिश्चित करने के लिए मामले में शामिल सभी लोगों पर नार्को टेस्ट कराने का फैसला किया था।

सीएम योगी ने कल ही ट्वीट कर कहा था कि उत्तर प्रदेश में महिलाओं को किसी भी प्रकार की नुकसान पहुँचाने की सोच रखने वालों को किसी तरह बख्शा नहीं जाएगा।

वहीं हाथरस मामले में योगी सरकार ने प्राथमिक जाँच की रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन द्वारा बरती गई लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए हाथरस के एसपी, डीएसपी, इंस्पेक्टर और कुछ अन्य अधिकारियों को निलंबित करने का भी निर्देश दिया था।

उल्लेखनीय है कल हाथरस केस में कुछ ऑडियो भी लीक हुए थे। इनमें हुई बातचीत से पता चलता है कि राज्य में भाजपा सरकार को नीचा दिखाने के लिए राजनेता और मीडिया इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रहे हैं। पहले प्रकाशित की गई एक रिपोर्ट में हमने खुलासा किया था कि किस तरह इंडिया टुडे की पत्रकार तनुश्री पांडे द्वारा मृतका के भाई को झूठ और भावनात्मक ब्लैकमेल के साथ उकसाने का प्रयास किया गया था।

वहीं एक अन्य ऑडियो में एक अज्ञात व्यक्ति मृतका के भाई संदीप से बात कर रहा है। वह उनसे कह रहा है कि वो घर से कहीं न जाएँ, क्योंकि कॉन्ग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गाँधी उनके घर आने वाली हैं। इस बातचीत में व्यक्ति यह भी कहते सुना जा सकता है:

“अगर कोई भी तुम्हें कहीं भी लेकर जाता है, तो तुम्हें कहीं नहीं जाना है, अब प्रियंका गाँधी घर आएँगी। कोई कहता है कि तुम्हें हाथरस जाना है, यहाँ जाना है -वहाँ जाना है, तुम्हें कहीं नहीं जाना है। उन्हें (प्रियंका गाँधी को) बताना है- पुलिस प्रशासन दबाव बना रहा है। मीडिया को आने नहीं दे रहा। रिश्तेदारों को आने नहीं दे रहा । कहना है ये हमारे प्रोटेक्शन में लगा रखे हैं या ठाकुरों के प्रोटेक्शन में। ठीक है, ये सब उनको बताना है।”

बातचीत की शुरुआत में ही संदीप इस व्यक्ति को कहता है कि “एसआईटी उनके घर आई हुई और कोई ‘संजय भैया’, संदीप के पिता और दो अन्य लोग कुछ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ उनके पास बैठे हैं। फिर वह आदमी संदीप से कहता है, “ठीक है, कहीं मत जाना। अब प्रियंका गाँधी आएँगी और उन्हें बताना कि तुम पर दबाव बनाया गया है और तुम इसका वीडियो बनाना चाहते हो।”

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब गोखले ने इस तरह की याचिका कोर्ट में दायर की है। इससे पहले भी गोखले ने राम मंदिर भूमिपूजन को रोकने के लिए कोर्ट का रुख लिया था। स्वघोषित पत्रकार साकेत गोखले की ओर से दाखिल PIL में कहा गया था कि राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन कोरोना के अनलॉक-2 गाइडलाइन का उल्लंघन है। कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा था कि याचिका केवल आशंकाओं पर आधारित है, इसमें तथ्य नहीं हैं।

हाथरस कांड- राहुल-प्रियंका और बिहार चुनाव के लिए अखलाक की खोज: अजीत भारती का वीडियो | Rahul-Priyanka exploit Hathras Case

हाथरस केस हर बीतते घंटे और दिन के साथ नया रूप लेता जा रहा है। नई जानकारियाँ सामने आ रही हैं। कुछ पत्रकार और नेता इसे वैसा ही बनाना चाहते हैं, जैसा कि इन्होंने ठीक 5 साल पहले 2015 के 28 सितंबर को अखलाक की लिंचिंग केस में किया था। 29 सितंबर से इस देश की जनता अचानक से अहिष्णु हो गई थी, क्योंकि आगे बिहार का चुनाव था।

सपा की सरकार थी, लेकिन दोष मढ़ा गया बीजेपी और नरेंद्र मोदी पर। फिर जनवरी 2016 में रोहित वेमुला कांड होता है। इसके बाद असम, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल और पुडुचेरी में हुए चुनाव में अखलाक और रोहित वेमुला केस को लगातार भुनाया गया। हाथरस कांड में सामने आई मेडिकल और बॉडी स्टेटस में अब तक रेप की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन केस को हाथरस की ‘निर्भया’ बनाया जा रहा है। आप सोचिए, निर्भया कांड क्या था और इसमें तो अभी तक रेप की पुष्टि भी नहीं हुई है। 

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक करके देखें

बेगूसराय में बजरंग दल कार्यकर्ता की मॉब लिंचिंग की कोशिश, हथियारों के साथ 400 की मुस्लिम भीड़ ने घेरा

असहाय, बेबस और कथिततौर पर लव जिहाद का शिकार हुई पीड़िता की मदद करना, बिहार के बेगूसराय में बजरंग दल कार्यकर्ताओं को मॉब लिंचिंग की कगार पर लाकर खड़ा कर देगा, यह शुभम भारद्वाज, पंकज सिंह, विकास भारती ने कभी सोचा भी नहीं था। उनके पास तो बस कल (2 अक्टूबर 2020) सुबह-सुबह करीब 8:32 पर एक हिंदू महिला का फोन का आया और उसने बहुत घबराई आवाज में मदद माँगी।

पीड़िता ने कहा कि उसका पति आफताब आलम उसके साथ घर आकर बहुत मारपीट कर रहा है और उसे बस किसी तरह बचा लिया जाए। पीड़िता की बात सुनते ही 8-9 किमी दूर से प्रदेश सह संयोजक शुभम भारद्वाज अपने सभी काम छोड़ कर नवाब चौक से थोड़ी दूर पोखरिया स्थित महिला के घर सुबह करीब 10 बजे पहुँचे। उनके साथ विभाग संयोजक पंकज सिंह और वीएचपी जिला मंत्री विकास भारती भी थे। 

महिला की स्थिति देखकर तीनों को आफताब पर बहुत गुस्सा आया। तीनों ने आफताब से मारपीट को लेकर सवाल करने शुरू किए। इसी बीच शुभम फेसबुक पर लाइव आ गए और दुनिया को उसका घिनौना चेहरा बताने लगे। लाइव खत्म हुए कुछ समय ही हुआ होगा कि उन्होंने देखा अचानक 300-400 लोगों की भीड़ घर के बाहर इकट्ठा हो गई। यह भीड़ समुदाय विशेष की थी। इनमें से कुछ के हाथ में पिस्टल थी। कुछ के हाथ में बकरा काटने का धारधार हथियार (छूरा) था। बार-बार यह लोग सिर्फ़ बजरंग दल के प्रदेश सह संयोजक शुभम भारद्वाज को अपने पास बुला रहे थे और कह रहे थे आज इसे खत्म कर देंगे।

घटना के बाद कार्यकर्ताओं की बैठक की तस्वीर

शुभम भारद्वाज इस पूरी घटना की बाबत दो बार फेसबुक लाइव आए। इसमें उन्होंने जानकारी दी कि उनकी हत्या करने की कोशिश चल रही है। सैंकड़ों लोगों की भीड़ घर के बाहर है और वह लोग किसी तरह गेट को मजबूती से बंद करके अपनी जान बचा रहे हैं।

शुभम भारद्वाज ने रेस्कयू के बाद कहा- नहीं देखी थी कभी ऐसी स्थिति

ऑपइंडिया ने इस घटना की जानकारी पाते ही शुभम भारद्वाज से बात करने का प्रयास किया। शुभम ने महादेव को धन्यवाद कहते हुए हमें बताया कि उन्हें कल के बाद बस जीवनदान मिला है। इससे पहले उन्होंने अपने जीवन में ऐसी स्थिति नहीं देखी थी। हर ओर मुस्लिम लोगों की भीड़ थी और आवाज आ रही थी कि शुभम को बस नीचे भेज दो। यह भीड़ इतनी उग्र थी कि इन्होंने लोहे का गेट तक तोड़ दिया था और कैसे भी करके अंदर आना चाह रही थी।

उन्होंने बताया कि घटना के समय उनके साथ पंकज सिंह, विकास भारती, महिला के पिता व 1-2 और लोग थे। सबने मिलकर गेट को धक्का देकर बंद किया हुआ था ताकि भीड़ अंदर न आ सके। मगर, उग्र भीड़ लगातार अंदर घुसने की कोशिश कर रही थी और हथौड़े से गेट तोड़ रही थी। 

पीड़ित महिला की मदद करने पहुँचे शुभम और उनके साथियों को सारा माहौल देखकर मृत्यु बहुत करीब लग रही थी। मगर, फिर भी एक उम्मीद में उन्होंने पुलिस अधिकारियों को दोबारा फोन किया और थोड़ी देर के लिए फेसबुक लाइव आकर बाकी लोगों को यह जानकारी दी कि नवाब चौक इलाके में रहने वाली बहुसंख्यक आबादी क्या करने की फिराक में है।

फेसबुक लाइव से लिया गया स्क्रीनशॉट

वह अनुमान लगाते हुए कहते हैं कि शायद आफताब आलम ने भीड़ को पहले ही बता रखा था कि वह जाकर अपनी पत्नी से मारपीट करेगा और पत्नी उनको बुलाएगी। इसके बाद यह सब होगा। वह बताते हैं कि सीएए एनसारसी के विरोध प्रदर्शनों के दौरान इसी नवाब चौक इलाके से खुलेआम उनकी मॉब लिंचिंग करने की धमकी दी गई थी और कल यह घटना भी हो गई।

मौत के मुँह से निकलने के बाद शुभम भारद्वाज (ग्रे टीशर्ट) और पंकज सिंह (पीली टीशर्ट)

वह कहते हैं कि बस महादेव ने उनकी सुरक्षा की और थाना प्रभारी अमरेंद्र झा मौके पर पहुँच गए। उन्होंने भीड़ को हटाकर घर में फँसे सभी लोगों का रेस्क्यू किया और आफताब को मौके से गिरफ्तार किया। घटना के बाद शुभम आज बुखार में तप रहे हैं। उनकी आँखों के सामने शायद वह भीड़ रह रह कर आ रही होगी। जिसे देख वह तो घबराए ही थे और उन लोगों के बीच में रहने वाली पीड़िता खुद बार-बार कह रही थी- “मार देगा भैया… अब क्या करें भैया..क्या करें।”

शुभम कहते हैं कि उनकी जान को खतरा देखकर पहले उनके पास सिक्योरिटी थी। मगर, एक वंचित समाज की महिला को न्याय दिलाने के लिए जब उन्होंने कुछ समय पहले आंदोलन किया तो उसके बाद उनसे वो सिक्योरिटी वापस ले ली गई। बाद में कई पत्र लिख कर प्रशासन से सुरक्षा वापस माँगी गई। मगर अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। वह कहते हैं चाहे कुछ भी हो जाए वह इस दिशा में अपना कर्तव्य पालन आगे भी करते रहेंगे।

भीड़ के हाथ में बकरा काटने वाला धारधार हथियार और पिस्टल थी: बजरंग दल विभाग संयोजक पंकज सिंह

इस घटना के समय शुभम के साथ घर में मौजूद बजरंग दल के विभाग संयोजक पंकज सिंह नवाब चौक को बेगूसराय में पाकिस्तान का कराची बताते हैं। वह कहते हैं कि सभी समुदाय विशेष के कई रसूख वाले लोग इस इलाके में रहते हैं और यह काफी संवेदनशील इलाका है। उनके मुताबिक, शुभम भारद्वाज ने उन्हें कॉल करके घटना की जानकारी दी थी। इसके बाद वह और वीएचपी जिला मंत्री विकास भारती भी पीड़िता के घर पहुँचे। 

पंकज के अनुसार घटनास्थल पर पहुँचने से पहले ही उन लोगों ने पुलिस प्रशासन को जानकारी दे दी थी और पुलिस ने कहा था कि मामला उनके संज्ञान में है, टीम पहुँच रही है। हालाँकि, कार्यकर्ताओं के पहुँचने के बाद भी पुलिस वहाँ नहीं आई थी। पंकज बताते हैं, जब शुभम लाइव आए और लोगों को आफताब के कुकर्म से अवगत कराने लगे, तभी भीड़ को उनके वहाँ होने की जानकारी हुई और सब हथियार लेकर इकट्ठा हो गए। उन लोगों ने जब घर पर देखा तो एकदम से चौंक गए। उन लोगों की यह सब पहले से प्लॉनिंग थी।

कार्यकर्ताओं के साथ विभाग संयोजक पंकज सिंह

सीएए-एनआरसी विरोध प्रदर्शनों में शुभम भारद्वाज को मिली धमकियों का जिक्र करते हुए वह कहते हैं, “मॉब लिंचिंग को लेकर धमकाना तो पहले से ही चल रहा था, पर कल जैसे ही फेसबुक लाइव देखा तो इन लोगों को मौका मिल गया। इन्हें लगा कि इनके इलाके में हम अकेले हैं, तो हमें घेर लिया गया। भीड़ में शामिल कुछ लोगों के हाथ में बकरा काटने वाला धारधार हथियार था। पिस्टल थी। हमने घबराकर प्रशासन को फोन किया। यही लगा कि पिछले 2 घंटे में जब कोई पुलिस नहीं आई तो अब कैसे आएगी। इसलिए हमने अपने कार्यकर्ताओं को फोन किया और फेसबुक लाइव के कारण भी कई लोग मौके पर पहुँच गए। दूसरी ओर प्रशासन भी सकते में आ गया। नतीजन जो पुलिस दो घंटे में नहीं पहुँची, वो पुलिस पूरी फोर्स के साथ 7-8 मिनट में वहाँ थी।”

पंकज सिंह द्वारा साझा की गई जानकारी

वह कहते हैं, “इस बीच भीड़ भी लोहे का गेट तोड़ चुकी थी और ऊपर आकर कह रही थी कि आज यहाँ से बच कर कोई नहीं जाना चाहिए।” हालाँकि, इसी बीच पुलिस के पहुँच जाने से वह लोग तितर-बितर हुए और घर के अंदर फँसे सभी लोगों का रेस्क्यू किया। पुलिस ने उनसे कहा, ‘यह पति-पत्नी का मामला था। आप लोगों को इसमें नहीं पड़ना चाहिए था।’ पंकज पूछते हैं, “अगर कोई लव जिहाद की पीड़िता हमें मदद के लिए कहेगी तो हम क्या करेंगे? इंतजार करेंगे? हम वैसे भी पहले ही पुलिस को सूचना दे चुके थे।”

पंकज कहते हैं कि कल फेसबुक लाइव के माध्यम से सैंकड़ों लोग वहाँ नहीं आते और पुलिस समय से नहीं पहुँचती तो हम लोग जा चुके होते। बकौल पंकज, “कल पूरी रात वही भीड़ और उनकी आवाज सोते टाइम भी सामने आती रही। इतने साल संगठन में हो गए मगर ऐसा पहले कभी कुछ नहीं देखा था। कई लोगों को हमने बचाया है। मगर जैसे कल खुद को अकेले घिरा पाया, सब पहली बार था। अगर हम मॉब का वीडियो बनाते तो शायद दरवाजा तोड़ कर वो भीड़ हमें मार देती।”

कल हो जाती हम सबकी मॉब लिंचिंग: पीड़ित हिंदू महिला

इस घटना पर ऑपइंडिया ने पीड़िता से बात की। पीड़िता ने बताया कि कल की घटना के बाद कह सकते हैं कि उन्हें नई जिंदगी मिली है। अगर भीड़ अंदर घुस आती तो न शुभम भारद्वाज को छोड़ती, न उनको छोड़ती और न उनकी दोनों बच्चियों को बख्शती। सब मारे जाते। वह कहती हैं कि कल सुबग 7-8 बजे आफताब उनके घर के बाहर आकर गंदी-गंदी गालियाँ दे रहा था। उस समय उसके साथ उसका दोस्त भी था।

बाद में दोनों घर में आकर पीड़िता से मारपीट करने लगे। आफताब उनके सीने पर चढ़ कर उनका गला दबाने की कोशिश करने लगा और उसके दोस्त ने पिस्टल निकाल कर गोली चला देने की बात भी की। किसी तरह पीड़ित महिला ने खुद को बचाते हुए पुलिस को फोन किया। मगर जब पुलिस समय पर नहीं पहुँची, तब उन्होंने शुभम भारद्वाज से मदद माँगी। इसके बाद शुभम अपने साथियों के साथ वहाँ आए।

वह कहती हैं कि उन लोगों के आते ही बाहर माहौल गरमा गया। आवाज आने लगी, ‘शुभम बाहर निकल आज तुझे नहीं छोड़ेगें।’ वह लोग उन्हें पिस्टल दिखाने लगे। उन्होंने हालात बिगड़ता देख थाना प्रभारी को फोन किया और कहा, “सर प्लीज बचाइए। अब हम लोग नहीं बचेंगे।” इसके बाद वह लोग वहाँ पहुँचे जबकि पहली पुलिस की गाड़ी यह कहती रही कि घर ही नहीं मिल रहा।

बजरंग दल कार्यकर्ताओं की लिंचिंग के लिए इक्कट्ठा हुई उग्र भीड़ का उत्पात, लोहे का दरवाजा तक तोड़ डाला

हिंदू पीड़िता के अनुसार, समुदाय विशेष की भीड़ ने उनके घर के दरवाजे और लॉक आदि सब तोड़ दिए। उनकी पूरी प्लॉनिंग थी कि दरवाजा टूटेगा और वह अंदर के लोगों को मार देंगे। महिला कहती है कि भीड़ को देखकर आफताब की हिम्मत इतनी बढ़ गई थी कि वह बार बार कह रहा था ‘घुसो..घुसो अंदर घुसो…घर पर चढ़ जाओ…सबको मार दो।’ वह बताती हैं कि उनके घर के दरवाजों में दरारे आ गई हैं। वह टूट चुके हैं। इसके अलावा फिलहाल उन्होंने पुलिस द्वारा रेस्क्यू किए जाने के बाद थाने में केस दर्ज करवा दिया है और आफताब गिरफ्तार भी हो चुका है। उनका कहना है, “कल हम लोगों की मॉब लिंचिंग हो गई हो गई होती। वो क्षण वही था।” उनके अनुसार, उनकी बेटी को लग रहा था कि सब लोग पागल हो गए हैं। उसे मासूमियत में समझ नहीं आ रहा था कि अगर आज गेट टूट गया तो सब मार दिए जाएँगे।

घर के भीतर से भीड़ को उकसाने वाला आफताब

महिला ने हमले के बाद अपने घर की एक वीडियो भी हमसे साझा की है। इस वीडियो में लोहे का गेट टूटा हुआ साफ देखा जा सकता है। ईंट-पत्थर भी हर जगह पड़े नजर आ रहे हैं। घर की चीजें इधर-उधर बिखरी हुई हैं। लकड़ी के गेट पर पर हमले के निशान और दरारे भी वीडियो में स्पष्ट तौर पर नजर आ रही हैं।

क्या है आफताब आलम और हिंदू महिला का पूरा मामला?

कुछ दिन पहले बेगूसराय जिले के बजरंग दल प्रदेश सह संयोजक शुभम से पूजा (बदला हुआ नाम) नामक हिंदू महिला ने पत्र लिख कर मदद की गुहार लगाई थी। उसने अपने पत्र में बताया था कि उन्हें अपने पति आफताब से तलाक चाहिए। उन्होंने यह भी लिखा था कि शादी से पहले उन्हें नहीं पता था कि आफ़ताब को शराब की लत है, लेकिन धीरे-धीरे जब वह साथ रहने लगीं तो उन्हें यह सब पता चला।

बजरंग दल के पास आई शिकायत

महिला ने बताया था कि इसके बाद से उनका पति नशे में धुत होकर उन्हें मारता और गाली गलौच करता। इसलिए अब उन्हें अपनी जान का खतरा सताने लगा है और आगे वह आफताब के साथ नहीं रहना चाहतीं। मगर, उनका पति उन्हें तलाक देने से मना कर रहा है। पीड़िता ने बजरंग दल को ऐसे सबूत भी पेश किए थे जिनमें आरोपित के संबंध दूसरी औरतों से साफ देखे जा सकते हैं।

दूसरी महिला के साथ आफताब आलम

इस मामले के संज्ञान में आने के बाद से लगातार बजरंग दल सोशल मीडिया पर पीड़िता के साथ खड़े होने की बात कर रहा था। इस बाबत आफताब ने एक बार शुभम को कॉल भी किया, मगर उन्होंने उसे डाँट कर फोन रख दिया। इस बीच आफताब ने एक बार दोबारा आकर घर के नीचे जाकर पीड़िता से गाली गलौच की थी और शुक्रवार को उसे मारने के लिहाज से उस पर हमला बोल दिया।

पुलिस कार्रवाई

बता दें कि पुलिस ने शुक्रवार को हुई घटना पर मुकदमा दर्ज होने की पुष्टि की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नगर थाना अध्यक्ष अमरेंद्र कुमार झा ने बताया कि आफताब आलम पर उनकी पत्नी जानलेवा हमला समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज करवाया है। उन्होंने यह भी बताया कि पहले भी शहर में अपने घर में शराब पीकर हंगामा करने के आरोप में पुलिस ने कई शराब बोतलों के साथ आफताब आलम को गिरफ्तार किया था। 14 सितंबर को उसकी पत्नी ने कई संगीन धाराओं में उसके खिलाफ मामला दर्ज करवाया था।

नोट: महिला और आफताब के बीच का पूरा विवाद आप इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं। ऑपइंडिया ने इस पर विस्तृत रिपोर्ट की है।

नोएडा में धराया फर्जी पत्रकार अफसार अली उर्फ़ एके चौधरी, स्टिंग के जरिए ₹5 करोड़ की उगाही में लगा था

नोएडा से चलने वाले एक डिजिटल न्यूज़ चैनल के प्रमुख अफसार अली उर्फ़ एके चौधरी को गिरफ्तार किया गया है। दिल्ली पुलिस ने अफसार अली को रंगदारी और ब्लैकमेलिंग के आरोप में गिरफ्तार किया है। आईपीसी की धारा-384 (जबरन वसूली) के तहत एक मामला भी दर्ज किया गया है। नोएडा में रहने वाले अफसार अली को गिरफ्तार करने के बाद दिल्ली पुलिस इस मामले में आगे की जाँच कर रही है।

अफसार अली उर्फ़ एके चौधरी ‘जनसत्य’ नामक न्यूज़ चैनल का संचालन कर रहा था। इसके साथ ही वो फिल्म सिटी में ‘ग्लोबल न्यूज़ मीडिया प्राइवेट लिमिटेड’ नामक कम्पनी के नाम से न्यूज़ चैनल के दफ्तर और स्टूडियो का भी संचालन कर रहा था। इस मामले में ग्रेटर कैलाश पुलिस स्टेशन में u/s 384/34 IPC केस दर्ज किया गया है, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर उससे पूछताछ की जा रही है।

अफसार अली उर्फ़ एके चौधरी पर आरोप है कि उसने दक्षिणी दिल्ली के एक वकील को धमकाया था कि अगर उसने 5 करोड़ रुपए नहीं दिए तो उसका ‘स्टिंग’ सार्वजनिक कर दिया जाएगा, जो उसके चैनल ने किया था। पुलिस ने शुक्रवार (अक्टूबर 2, 2020) को बताया कि आरोपित ने ‘स्टिंग’ को सोशल मीडिया पर अपलोड करने की धमकी दी थी। उक्त फर्जी पत्रकार इससे पहले भी 3 मामलों में घिर चुका है।

उस पर इससे पहले गाड़ी चोरी और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। उसके खिलाफ 2010-15 के बीच दिल्ली और उत्तर प्रदेश में एफआईआर दर्ज किए गए थे। डीसीपी साउथ अतुल ठाकुर ने बताया कि अफसार अली लोगों के वीडियो धोखे से रिकॉर्ड कर उन्हें अपने चैनल पर वायरल करने की धमकी दे रुपए ऐंठता था। पीड़ित अधिवक्ता ने पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस हरकत में आई और अफसार अली को गिरफ्तार किया गया।

अफसार अली अमीरों को निशाना बनाता था और बड़े फार्म हाउस खरीदने वाला बनकर स्टिंग ऑपरेशन को अंजाम दिया करता था। इसी क्रम में वह लोगों का स्टिंग वीडियो बना लेता था। वह अपने साथ कुछ फोटोग्राफर्स को भी रखता था। उसके मीडिया संस्थान में 40 लोग कार्यरत थे, जिस ताला लटक गया है। दिल्ली के साकेत कोर्ट में पेशी के बाद पत्रकार अफसार अली को 5 दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।

हाथरस केस: मीडिया को पीड़ित परिवार से बात करने की इजाजत, फोन जब्त करने के इंडिया टुडे के दावों को एसडीएम ने नकारा

सदर एसडीएम प्रेम प्रकाश के मुताबिक़ हाथरस मामले में एसआईटी जाँच पूरी हो चुकी है। इसके साथ ही प्रशासन ने मीडिया को भी अनुमति दे दी है कि वह पीड़ित परिवार वालों से मिलकर बात कर सकते हैं। एसडीएम ने कहा, “इस मामले में एसआईटी की जाँच पूरी हो चुकी है इसलिए मीडिया के लिए लगाई गई पाबंदी भी हटा दी गई है। फ़िलहाल उस इलाके में सीआरपीसी की धारा 144 लागू है, इसलिए एक समय पर 5 से अधिक मीडियाकर्मी मौजूद नहीं रह सकते हैं।”

उन्होंने कहा, “अभी वहाँ सिर्फ मीडियाकर्मियों को जाने की अनुमति है। जब प्रतिनिधिमंडल के लिए हरी झंडी दिखाई जाएगी तब हम सभी को प्रवेश करने की अनुमति देंगे। इस तरह के जितने भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि पीड़िता के परिवार वालों के फोन लिए जा चुके हैं या उन्हें घर में बंद करके रखा गया है, यह सभी आरोप बेबुनियाद है।” उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन पर इस तरह के आरोप लगाए गए थे कि उन्होंने पीड़िता के परिवार वालों के फोन जब्त कर लिए हैं। 

इस मुद्दे को लेकर सबसे पहले इंडिया टुडे समूह ने ख़बर प्रकाशित की थी। राहुल कँवल ने उत्तर प्रदेश सरकार से कुछ ‘कठिन प्रश्न’ पूछे थे, जब उनके संस्थान की एक कर्मचारी का ऑडियो ऑपइंडिया ने चलाया था। इसके अलावा भी तमाम मीडिया संस्थानों ने यह ख़बर चलाई थी कि पीड़िता के परिजनों का मोबाइल फोन पुलिस ने जब्त कर लिया है।

परिवार द्वारा लगाए गए फोन जब्त करने के आरोप भी ठीक उस समय ही सामने आए जब मीडिया वालों की पीड़िता के भाई से फोन पर बातचीत की ऑडियो लीक हुई।

पीड़िता की चोटों की वजह से मृत्यु होने के बाद से ही हाथरस मुद्दे पर बहस और राजनीतिक खींचतान का दौर जारी है। ऐसा आरोप लगाया जा रहा था कि 2 हफ्ते पहले पीड़िता के साथ बलात्कार हुआ था। घटना को लेकर पूरे देश के लोगों में काफी गुस्सा था। इसके बाद कई मीडिया संस्थाओं ने आरोप लगाया कि परिवार की रज़ामंदी के बिना पीड़िता का अंतिम संस्कार कर दिया गया था। बाद में पता चला कि अंतिम संस्कार के दौरान पीड़िता के पिता भी मौजूद थे। 

एडीजी प्रशांत कुमार ने एएनआई से बात करते हुए बताया था कि फोरेंसिक रिपोर्ट मिल गई है और उसके मुताबिक़ लड़की के साथ बलात्कार की घटना नहीं हुई थी। पीड़िता के साथ किसी भी तरह का यौन शोषण नहीं हुआ था। मौत का कारण गला दबाना और रीढ़ की हड्डी में लगी चोटें थीं। कल (2 अक्टूबर 2020) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर बड़ी कार्रवाई करते हुए हाथरस के एसपी, डीएसपी और इंस्पेक्टर समेत अन्य अधिकारियों को निलंबित किया था। उन्होंने यह फैसला जाँच की प्राथमिक रिपोर्ट सामने आने के बाद किया था। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार के जिस तरह प्रशासन ने हाथरस मामले पर कार्रवाई की थी उससे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाराज़ थे। इस पूरे घटनाक्रम जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया था कि हाथरस के एसपी और आईपीएस अधिकारी विक्रांत वीर को निलंबित किया जा रहा है। उन्होंने इस पूरे मामले पर लापरवाही दिखाई है। ऐसे ही डीएसपी राम शबद, इंस्पेक्टर दिनेश वर्मा, सब इंस्पेक्टर जगवीर सिंह और हेड कांस्टेबल महेश पाल को निलंबित किया जा चुका है। इस कार्रवाई के बाद शामली के एसपी विनीत जायसवाल को हाथरस का एसपी नियुक्त किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी किए गए इस बयान में यह भी कहा गया है कि आरोपित, जाँच में शामिल पुलिस वालों और पीड़ित परिवार का नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया जाएगा।     

लोन मोरेटोरियम पर केंद्र सरकार ने दी बड़ी राहत, अब नहीं देना होगा ब्याज पर ब्याज

केंद्र सरकार ने बैंक से लोन लेने वालों को अच्छी खबर दी है। सुप्रीम कोर्ट में दायर किए गए एक हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा है कि अब लोगों को लोन ली गई राशि पर लग रहे ब्याज पर ब्याज नहीं देना होगा। एमएसएमई लोन, एजुकेशन, हाउसिंग, कंज्यूमर, ऑटो, क्रेडिट कार्ड बकाया और उपभोग लोन पर लगे सभी प्रकार के चक्रवृद्धि ब्याज को माफ़ किया जाएगा। इससे आमलोगों और मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिली है।

केंद्र सरकार ने कहा है कि लोन मोरेटोरियम पर 6 महीने की अवधि में 2 करोड़ रुपए तक की धनराशि पर लगने वाले ब्याज के ऊपर जो ब्याज लगता था, वो अब नहीं लगेगा। यानी, इन पर अब चक्रवृद्धि ब्याज ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा। वित्त मंत्रालय ने कोरोना आपदा को देखते हुए छोटे कर्जदारों की मदद के लिए ये फैसला लिया है।

केंद्रीय वित्त मंत्रालय का कहना है कि कोरोना संक्रमण के कारण आई आपदा के बीच छोटे उद्योगों और मध्यम वर्ग के लोगों को जो मार पड़ी है, उसे देखते हुए ये उचित है कि सरकार ही कर्ज के ब्याज पर लगने वाला ब्याज वहन करे। ब्याज की छूट का भार अब सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। सरकार ने इसे ही मौजूदा ऋण समस्या का समाधान मानते हुए आश्वस्त किया है कि जल्द ही इसके लिए संसद से अनुमति ली जाएगी।

इस विषय में अनुदान के लिए संसद से अनुमति ली जाएगी। कोरोना आपदा को देखते हुए मार्च में जो लॉकडाउन लगाया गया था, उससे बाजार पर बड़ी मार पड़ी थी और सामान्य लोग ईएमआई भरने की स्थिति में नहीं थे। कमाई और कारोबार ठप्प होने के कारण कर्ज चुकाने में भी कई लोग सक्षम नहीं थे। ऐसे में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने ऐसे लोगों से लोन न चुकाने के लिए बैंकों से 6 महीने की मोहलत दिलाई।

लेकिन, मोरेटोरियम के बदले लगने वाला अतिरिक्त चार्ज इन फैसलों की राह में सबसे बड़ी बाधा बन कर सामने आ रहा था, क्योंकि जो लोग ब्याज न देने की स्थिति में थे, वो ब्याज पर ब्याज कहाँ से देते? अब सरकार के इस फैसले के बाद मोरेटोरियम का लाभ ले रहे लोगों को ब्याज पर अतिरिक्त धनराशि खर्च नहीं करनी होगी। ग्राहकों को अब सिर्फ लोन पर सामान्य ब्याज ही देना होगा, इसके अतिरिक्त कुछ नहीं।

इसी साल अगस्त महीने में सुप्रीम कोर्ट ने भी मोरेटोरियम मामले में सुनवाई करते हुए कहा था कि केंद्र सरकार को हलफनामा दायर कर इस बारे में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कारोबार के साथ-साथ लोगों की परेशानियाँ देखने को भी कहा था। राजीव महर्षि वाली विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के बाद सरकार ने भी लोगों को राहत देने का मन बनाया।

एक दुखी परिवार बलरामपुर में भी है, हाथरस पॉलिटिक्स से फुर्सत मिले तो उनकी भी सुध ले लीजिए राहुल जी

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने शनिवार (अक्टूबर 3, 2020) को ट्वीट किया कि दुनिया की कोई भी ताक़त उन्हें हाथरस के ‘इस दुखी परिवार से मिलकर उनका दर्द बाँटने’ से नहीं रोक सकती। राहुल गाँधी एक बार हाथरस जाने की कोशिश कर चुके हैं और अब वो दूसरी बार वहाँ जाने वाले हैं। लेकिन, राजस्थान तो दूर की बात, यूपी में ही स्थित बलरामपुर में भी एक पीड़ित परिवार है, जिसकी उन्होंने सुध तक न ली।

हाथरस वाली घटना के एक सप्ताह के भीतर यूपी के बलरामपुर जिले में दो युवकों– शाहिद पुत्र हबीबुल्ला निवासी गैंसड़ी और साहिल पुत्र हमीदुल्ला निवासी गैंसड़ी द्वारा सामूहिक बलात्कार की घटना सामने आई। दोस्ती के बहाने घर ले जाकर दोनों आरोपितों ने लड़की सामूहिक दुष्कर्म किया और गंभीर हालत में एक रिक्शे पर बैठाकर घर भेज दिया। 22 वर्षीय पीड़िता युवती की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। 

वहाँ भी पीड़िता दलित है। वो भी उत्तर प्रदेश का ही हिस्सा है, जहाँ योगी आदित्यनाथ की ही सरकार है। लेकिन, राहुल गाँधी ने शायद सिर्फ एक वजह से बलरामपुर के पीड़ित परिवार की सुध नहीं ली है, क्योंकि वहाँ आरोपितों के नाम शाहिद और साहिल हैं। यहाँ उन्हें ‘वर्ग विशेष’ कह कर किसी हिन्दू जाति को निशाना बनाने का मौका नहीं मिलेगा। वहीं हाथरस में पूरा मीडिया जुटा हुआ है, कैमरा है और ड्रामा का स्कोप भी- इसलिए राहुल वहाँ जाने की जिद कर रहे हैं।

हाथरस जाने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे पर राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी 132 किलोमीटर पैदल चलने के लिए निकल गए, जबकि उन्हें भी पता है कि इतनी दूरी पैदल तय करने में कितना समय लगता है। रास्ते में उन्होंने गिरने का भी ‘नाटक’ किया, कई कार्यकर्ताओं ने पुलिस से संघर्ष किया, वो कैमरा अपनी तरफ लाते हुए कहते पाए गए और पुलिस के साथ बहस की। हाथरस पर राजनीतिक रोटी सेंकने की भरपूर कोशिश की।

हाथरस मामले में ही लीक हुआ एक ऑडियो इस मामले में चल रही राजनीति के बारे में काफी कुछ खुलासा करती है। ऑडियो टेप में किसी अज्ञात व्यक्ति को हाथरस मृतका के भाई संदीप से कहते हुए सुना जा सकता है कि वो वहीं पर रहें, प्रियंका गाँधी आने वाली हैं। साथ ही वो पीड़ित परिवार से ये भी कहता है कि वो पुलिस-प्रशासन के साथ किसी प्रकार का समझौता न करें, उनके कहने पर कहीं न जाएँ। प्रियंका गाँधी कुछ ही देर में पहुँचेंगी।

पीड़ित परिवार को भड़काया जाता है कि वो ये बोलें कि उनके सम्बन्धियों और परिचितों को उनसे मिलने नहीं आने दिया जा रहा है, साथ ही ये पूछें कि गाँव में इतनी कड़ी सुरक्षा-व्यवस्था उनके लिए है या फिर ठाकुरों के लिए? साथ ही पीड़ित परिवार को कहा जा रहा है कि वो 50 लाख लेकर भी समझौता न करें और प्रियंका गाँधी के सामने कहें कि उनलोगों पर दबाव बनाया जा रहा है और वो इसका वीडियो बनाना चाहते हैं।

वहीं बलरामपुर वाले मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी मृतका के शरीर पर 10 घाव के निशान मिले हैं। आरोपितों की गिरफ़्तारी भी हुई है और पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करने के बाद बताया कि कैसे, क्या हुआ। लेकिन, राहुल गाँधी ने उस पीड़ित परिवार की सुध तक न ली। मुख्य धारा की मीडिया का भी रवैया ऐसा है ही।

राजस्थान में कॉन्ग्रेस की सरकार है और बलात्कार के नित नए मामले सामने आ रहे हैं। बाँसवाड़ा में जहाँ एक लड़की की नग्न लाश हॉस्पिटल में मिली है, वहीं सिरोही में महज 6 साल की मासूम के साथ दरिंदगी की हदें पार की गईं। जयपुर में एक महिला से होटल में ही गैंगरेप किया गया। अजमेर में एक महिला को बंधक बना कर उसके साथ बलात्कार किया गया। जाहिर है, राहुल गाँधी बलरामपुर की तरह इन पीड़ित परिवारों की भी सुध नहीं लेंगे।

उधर सपा के मुखिया अखिलेश यादव भी लंदन से दिल्ली पहुँचने वाले हैं, जिसके बाद वे हाथरस जाएँगे। उन्होंने योगी सरकार से माँग की है कि वो डीएम और असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाए। बता दें कि इस मामले एसपी, डीएसपी और इंस्पेक्टर सहित कई अधिकारियों को पहले ही सस्पेंड किया जा चुका है।