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‘हिजाब उतार कर मैच खेलो या पहन कर बाहर बैठो’ – नाजाह अकील ने नहीं खेला मैच, अमेरिका में छिड़ी बहस

अमेरिका के टेनैसी प्रांत में एक खिलाड़ी को वॉलीबॉल मैच के दौरान बाहर कर दिया गया। ऐसा करने की वजह यह थी कि नाजाह अकील नाम की खिलाड़ी ने मैच के दौरान हिजाब पहन रखा था। नाजाह नैशविले वेलोर कोलगियेट प्रेप की छात्रा हैं। जिस दौरान उनके साथ यह घटना हुई उस वक्त वह 15 सितंबर को होने वाले वॉलीबॉल मैच का अभ्यास कर रही थीं। वहाँ मौजूद रेफ़री ने कोच से कहा कि नाजाह को हिजाब पहन कर मैच खेलने की अनुमति दी जाए। 

इसके बाद रेफ़री ने टेनेसी सेकेंड्री स्कूल एथलेटिक एसोसिएशन (TSSAA) की नियमावली का हवाला दिया। हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि किन नियमों के आधार पर हिजाब पहन कर खेला जा सकता है। इस पर नाजाह का कहना था कि उसके पास इस तरह की कोई आधिकारिक अनुमति नहीं थी लेकिन अभी तक इस वजह से कोई परेशानी नहीं हुई। नाजाह के सामने दो ही विकल्प थे, वह हिजाब उतार कर मैच का हिस्सा बन सकती थी या फिर हिजाब पहन कर बाहर बैठ सकती थी। नाजाह ने मैच नहीं खेलने का विकल्प चुना। 

उसने सीएनएन न्यूज़ से बात करते कहा, “मुझे इस बात से बहुत ज्यादा गुस्सा आया और हैरानी भी हुई। मैंने इस तरह के नियम के बारे में पहले कभी नहीं सुना था। नियमावली में इस तरह का नियम रखने का क्या मतलब है। सिर्फ हिजाब को इस नियम के तहत रखा गया है। मेरे लिए यह समझना मुश्किल है कि जब हिजाब मेरे धर्म का हिस्सा है तब मुझे यह पहनने के लिए अनुमति की ज़रूरत क्यों है।” 

नाजाह अकील (साभार – CNN)

इस घटना की जानकारी मिलने पर नेशनल फेडरेशन ऑफ़ स्टेट हाईस्कूल एसोसिएशन (NFSH) की निदेशक कैरिसा निहोफ़ ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया। उन्होंने कहा, “विश्वविद्यालय के दिशा-निर्देश सख्त नियमों की श्रेणी में नहीं आते हैं। इसके अलावा एक राज्य अपवादों को देखते हुए उनमें बदलाव भी कर सकता है। विशेषज्ञों को इस मुद्दे पर गंभीरता दिखानी चाहिए थी, अनुमति के लिए पत्र बाद में भी भरा जा सकता था।” यह अमेरिका में संस्था हाईस्कूल स्तर के खेल कूद संबंधी नियमावली तैयार करती है। 

दरअसल NFSH हाईस्कूल स्तर के खेलों के दौरान पहनावे को लेकर दिशा निर्देश जारी करती है। इसके द्वारा तय की गई नियमावली के आधार पर ‘किसी भी खिलाड़ी के धर्म में कोई अलग तरह का पहनावा शामिल है तो उसके साथ खेल का हिस्सा बनने के लिए अनुमति लेनी होती है। चाहे हिजाब हो या कुछ और। हालाँकि अमेरिकी संस्था द्वारा यह नियम सभी धर्म के लोगों पर लागू होते हैं। अमेरिका में लगभग हर खेल को लेकर स्कूलों में नियमावली बनाई जाती है, जिसके तहत हिजाब वाला नियम आता है।  

ब्रह्मोस, निर्भय, आकाश से मिलेगा चीन को करारा जवाब, बॉर्डर पर भारत की सबसे खतरनाक मिसाइलें तैनात

भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर तनाव बरकरार है। भारत की तरफ से चीन बॉर्डर पर करीब एक लाख सैनिक तैनात हैं। सेना और वायुसेना पूरी तरह से अलर्ट है और लगातार चौकसी बरत रही है।

इस बीच ऐसी भी खबरें हैं कि भारत की तरफ से चीन की किसी भी गुस्‍ताखी का जवाब देने के लिए ब्रह्मोस और निर्भय क्रूज मिसाइल के अलावा जमीन से हवा में मार करने वाली आकाश मिसाइल को भी तैनात कर दिया है। भारत और चीन के बीच टकराव को अब 150 दिन होने वाले हैं और दोनों देशों के सैनिक बस दो किलोमीटर के दायरे में आमने-सामने हैं।

ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल की रेंज 500 किलोमीटर है। ब्रह्मोस भारत का सबसे बड़ा हथियार है। यह मिसाइल न सिर्फ हवा से हवा में बल्कि जमीन से भी हवा में कर सकती है। ब्रह्मोस मिसाइल 300 किलोग्राम तक के वॉरहेड ले जाने में सक्षम है। गलवान हिंसा के बाद चीनी सेनाओं की तरफ से एयरस्‍पेस में गतिविधियाँ बढ़ा दी गई है। चीन की तरफ सुखोई-30 और बॉम्‍बर्स को भारतीय सीमा के करीब तैनात किया गया था।

भारत की तरफ से ये मिसाइलें तब तैनात की गई, जब चीन की पीपुल्‍स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) ने शिनजियांग और तिब्‍बत क्षेत्र में मिसाइलों को तैनात कर डाला है। पीएलए की वेस्‍टर्न थियेटर कमांड की तरफ से 2000 किलोमीटर की रेंज में हमला करने वाले हथियारों को तैनात कर दिया गया है। साथ ही तिब्‍बत और शिनजियांग में टकराव शुरू होने के तुरंत बाद ही आकाश मिसाइलों की तरह ही मिसाइलों को तैनात कर दिया गया था। 

हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक चीन की तरफ से यह तैनाती उसके कब्‍जे वाले अक्‍साई चीन तक ही सीमित नहीं है बल्कि काश्‍गर, होटान, ल्‍हासा और नियाइनग्‍शी में भी तैनाती को बढ़ाया गया है। सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल और सबसोनिक निर्भय को किसी भी बुरी स्थिति से निबटने को तैनात किया गया है। निर्भय की रेंज 800 किलोमीटर है। यह मिसाइल 1,000 किमी तक पहुँच सकती है, और इसमें समुद्री स्किमिंग और लोइटरिंग क्षमता दोनों हैं।

इसका मतलब है कि यह मिसाइल जमीन से 100 मीटर से चार किमी के बीच उड़ान भरने में सक्षम है और इससे पहले कि कोई अवरोध उत्पन्न हो, यह अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है। निर्भय मिसाइल का सतह से सतह वर्जन है।

भारतीय सेना द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला तीसरा स्टैंड-ऑफ हथियार आकाश एसएएम है, जिसे लद्दाख सेक्टर में एलएसी के पार किसी भी पीएलए विमान घुसपैठ का मुकाबला करने के लिए पर्याप्त संख्या में तैनात किया गया है।

अपने तीन आयामी राजेंद्र के साथ आकाश मिसाइल, एक निष्क्रिय इलेक्ट्रॉनिक रूप से स्कैन की गई रडार है, जो एक समय में 64 लक्ष्यों को ट्रैक करने और साथ ही उनमें से 12 को संलग्न करने की क्षमता रखती है। मिसाइल में लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों और बैलिस्टिक मिसाइलों सहित सभी हवाई लक्ष्यों को शामिल करने की क्षमता है।

गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच सीमा गतिरोध जारी है और सर्दियों का महीना आ रहा है। इसको देखते हुए भारतीय सेना ने विरोधियों से लड़ने के लिए पूरी तरह से कमर कस ली है। इससे पहले खबर आई थी कि भारतीय सेना ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC)  पर लद्दाख के चुमार-डेमचोक क्षेत्र में टैंक और बख्तरबंद वाहनों को तैनात किया है।

सेना ने BMP-2 इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स के साथ T-90 और T-72 टैंकों की तैनाती की है। अंधेरे में मार करने में सक्षम इन टैंकों की खासियत यह है कि इन्हें माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में संचालित किया जा सकता है।

NDTV के एम अतहरुद्दीन की प्लाज्मा थेरेपी में मदद को आगे आई दिल्ली पुलिस

एनडीटीवी (NDTV) में काम करने वाले एम अतहरउद्दीन उर्फ मुन्ने भारती की मदद के लिए सोमवार (सितंबर 28, 2020) को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल सामने आई है। मुन्ने भारती इस समय चीनी कोरोना वायरस से संक्रमित हैं और उन्हें प्लाज्मा की जरूरत है। आज सुबह ही उन्होंने एक ट्वीट करते हुए तत्काल प्लाज्मा डोनेशन का अनुरोध किया था।

पत्रकार राहुल पंडिता ने मुन्ने भारती के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए प्लाज्मा डोनेट करने की अपील की। दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने तत्काल ट्वीट पर संज्ञान लिया और कहा कि उन्होंने अपनी यूनिट से एक शख्स को प्लाज्मा डोनर के रूप में भेजा है।

उल्लेखनीय है कि प्लाज्मा थेरेपी एक चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें कोरोना वायरस से ठीक हुए मरीज के शरीर के खून का इस्तेमाल संक्रमित मरीज के शरीर में एंटीबॉडी बनाने के लिए किया जाता है।

गौरतलब है कि कोरोना महामारी के इस संकट में दिल्ली पुलिस देवदूत बनकर आम जनता के सामने आ रही है। कोरोना से जंग के बीच दिल्ली पुलिस पूरी तरह सहायता करती हुई नजर आ रही है। पिछले दिनों लॉकडाउन के दौरान दिल्ली के बदरपुर में पुलिस ने समय पर एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुँचाया था।

नवजात बच्ची के पिता पंकज ने इसके लिए दिल्ली पुलिस का आभार व्यक्त किया करते हुए कहा था, “1 अप्रैल को जब मेरी पत्नी को प्रसव पीड़ा हुई तो मैंने 108, 102, 1031 आदि कई हेल्पलाइन नंबर पर कॉल किया। मगर संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद मैंने दिल्ली पुलिस को कॉल किया, जो 20 मिनट में हमारे पास पहुँची और हमें अस्पताल ले गई। हम उनके आभारी हैं।” 

वहीं नवजात बच्ची की माँ ने कहा था, “कोरोना वायरस फैला हुआ है और दिल्ली पुलिस हमारे लिए फरिश्ता बनकर आई है। हम तहे दिल से उनका शुक्रिया अदा करना चाहते हैं। दिल्ली पुलिस का काम बहुत अच्छा है। अगर कोई बोलता है कि वो मदद नहीं कर रहे हैं तो ये गलत है।” 

जब भारत गुलाम था, तब हम स्वतंत्र थे: नेपाली राजदूत ने कहा- चीन नहीं, भारत ने हमारी जमीन पर किया कब्जा

नेपाल में चीन की घुसपैठ से वहाँ के अधिकारी परेशान हैं। बताया जाता है कि नेपाल की कम्युनिस्ट सरकार ने चीनी अतिक्रमण पर आँख मूँद रखी है। इस बीच, चीन में नेपाल के राजदूत महेंद्र बहादुर पांडेय ने उलटा भारत पर ही अपने देश की जमीन कब्जाने का आरोप लगा दिया है।

उन्होंने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की नेपाल यात्रा और नेपाली नेताओं की चीन यात्रा के दौरान 20 से भी अधिक MoU साइन किए गए, जिन पर अब दोनों देश आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ से ये बातें कही।

चीन में नेपाल के राजदूत महेंद्र बहादुर पांडेय से ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने पूछा कि जिस तरह से विदेशी मीडिया, खासकर भारत की, ये खबर फैला रही है कि चीन के नेपाल से बढ़ते रिश्तों के कारण क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं, इस पर वो क्या कहेंगे? नेपाल के राजदूत ने इसे एकपक्षीय और बिना फैक्ट्स वाला करार दिया। उन्होंने कहा कि ‘फियर साइकोलॉजी’ के कारण ऐसा किया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि जब भारत एक कॉलोनी हुआ करता था, परतंत्र था, तब नेपाल एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र था। उन्होंने कहा कि नेपाल न तो खास विचारधारा और न किसी खास सत्ता की तरफ झुकाव रखता है। उन्होंने कहा कि या तो भारतीय मीडिया पक्षपाती है या फिर उसे किसी ने भ्रम में डाल रखा है। भारत के बारे में उन्होंने कहा कि पड़ोसियों को पड़ोसियों से डरना नहीं चाहिए, हाथ मिला कर समझ विकसित करनी चाहिए।

साथ ही उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत की लम्बी सीमा पर कई सारी समस्याएँ हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ चीन के साथ नेपाल का सारा सीमा विवाद सुलझा लिया गया है, भारत ने नेपाल की जमीन पर कब्ज़ा कर रखा है। उन्होंने ये भी कहा कि 1962 के युद्ध में हार के बाद कुछ भारतीय सैनिक नेपाल की जमीन पर ही रह गए थे और बाद में उस पर दावा ठोक दिया। उन्होंने कहा कि भारत लगातार निवेदन के बावजूद नज़रअंदाज़ करता रहा, लेकिन अब बातचीत की टेबल पर बैठने के लिए तैयार है।

उन्होंने कोरोना वायरस को ‘नियंत्रित’ करने के लिए भी चीन की तारीफ करते हुए कहा कि यहाँ के नेताओं ने लोगों की जान की कीमत को समझा और नेपाल की भी सहायता की। उन्होंने ‘वन चाइना पॉलिसी’ का समर्थन करते हुए कहा कि तिब्बत पूरी तरह चीन का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि तिब्बत और नेपाल की संस्कृति समान है, लेकिन भारत से नेपाल में कुछ लोग घुस आते हैं, जो हमारी जमीन का दुरूपयोग करते हैं।

चीन में नेपाल के राजदूत ने कहा कि भारत में मीडिया ने जम कर ‘फेक प्रोपेगेंडा’ फैलाया कि नेपाल और चीन के रिश्ते अच्छे नहीं हैं, लेकिन ऐसा कोई कारण ही नहीं है जिससे नेपाल के साथ चीन के रिश्ते बिगड़े। साथ ही उन्होंने हॉन्गकॉन्ग और ताइवान को भी चीन का हिस्सा करार दिया। उन्होंने नेपाल और चीन के बीच रेलवे प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने की बात की। साथ ही कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग मैत्रीपूर्ण और स्वभाविक है।

मूल रूप से नुवाकोट के महेंद्र बहादुर पांडेय नेपाल के विदेश मंत्री भी रहे हैं और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो के सदस्य भी हैं। उन्हीने 1975-95 में 20 सालों तक त्रिभुवन विश्वविद्यालय में बतौर अंग्रेजी प्रोफेसर कार्य किया। वहीं से अंग्रेजी में मास्टर्स की डिग्री लेने वाले पांडेय ने वकालत की पढ़ाई भी की है। 1999 में उन्हें पहली बार संसद के लिए चुना गया और 2006 में वो पार्टी के चीफ ह्विप बने। अब उन्हें चीन में राजदूत बना कर भेजा गया है।

हाल ही में नेपाल की जमीन पर चीन द्वारा 9 इमारतें खड़ी किए जाने की बात सामने आई थी। ताज़ा मामला हुमला जिले में स्थित नामखा-6 के लाप्चा गाँव का है। ये इलाका नेपाल के कर्णाली प्रान्त का हिस्सा है। शिकायत मिलने के बाद ‘चीफ डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर (CDO)’ चिरंजीवी गिरी के नेतृत्व में नेपाली अधिकारियों की टीम ने घटनास्थल का दौरा किया, लेकिन चीन की फौज ने अधिकारियों को भगा दिया था।

मध्य प्रदेश: परस्त्री से कथित संबंध पर पत्नी ने उठाई आवाज, स्पेशल DG ने पीटा, सरकार ने ड्यूटी से हटाया

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से एक वीडियो सामने आई है। यह वीडियो प्रदेश के स्पेशल डीजी पुरुषोत्तम शर्मा की है। वीडियो में वह अपनी पत्नी प्रिया शर्मा के साथ बेरहमी से मारपीट करते देखे जा सकते हैं। वीडियो वायरल होने के बाद शर्मा का तबादला कर सरकार ने उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर दिया है।

खबरों की मानें तो स्पेशल डीजी को उनकी पत्नी ने किसी अन्य महिला के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ा था। इसके बाद दोनों के बीच कहासुनी हुई और बाद में मामला मारपीट तक पहुँच गया।

डीजी के बेटे को घटना का पता चलते ही उसने अपने पिता की शिकायत डीजीपी से की और उन्हें पूरी घटना की वीडियो भेजी। शर्मा के बेटे ने अपने पिता के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की माँग की है। अब यह वीडियो हर जगह है।

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने भी कहा है कि डीजी को नोटिस जारी किया जाएगा। उनका कहना है कि उनके पास अभी कोई शिकायत तो नहीं आई है, पर इस मामले में वह खुद संज्ञान लेंगे।

इसके अलावा राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा, “डीजी पुरुषोत्तम शर्मा को बर्खास्त कर, जेल भेज देना चाहिए। मैं इसे लेकर सीएम शिवराज सिंह चौहान और गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को लिखूँगी।”

उल्लेखनीय है कि डीजी पुरुषोत्तम शर्मा इससे पहले भी विवादों में घिर चुके हैं। उस समय वह साइबर सेल और एसटीएफ के स्पेशल डीजी थे। जाँच में उनका नाम हनी ट्रैप में सामने आया था।

हालाँकि, तब उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया था और पुलिस महानिदेशक पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह पुलिस विभाग की छवि खराब कर रहे हैं।

मामला सामने आने के तत्काल बाद राज्य के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि इस बारे में उन्होंने न्यूजपेपर में पढ़ा है और वीडियो देखा है। अगर कोई शिकायत आती है, तो कार्रवाई करेंगे। इसके कुछ देर बाद पुरुषोत्तम शर्मा को ट्रांसफर कर ड्यूटी से हटा दिया गया।

स्पेशल डीजी पुरुषोत्तम शर्मा ने मीडिया से बात करते हुए अपने किए को पारिवारिक मामला करार दिया है। उन्होंने कहा, “ये मेरा पारिवारिक मामला है। मैं इस संबंध से तंग आ चुका हूँ। आगे की कार्रवाई के लिए मैं तैयार हूँ। मेरे हाथ में कोई हथियार नहीं था। पत्नी के हाथ में कैंची थी।”

‘नहीं हटना चाहिए मथुरा का शाही ईदगाह मस्जिद’ – कॉन्ग्रेस नेता ने की श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति याचिका की निंदा

उत्तर प्रदेश के मथुरा में स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि को मुक्त कराने का मामला दिन पर दिन गर्माता जा रहा है। कहा जा रहा है कि शाही ईदगाह मस्जिद कहाँ स्थित है, वहीं पर कंस के कारगर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। रविवार (सितम्बर 27, 2020) को कॉन्ग्रेस नेता की अध्यक्षता वाले एक संगठन ने उस याचिका की निंदा की है, जिसमें मथुरा कोर्ट से श्रीकृष्ण जन्मभूमि में अतिक्रमण से मुक्ति की माँग की गई है।

‘अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा’ ने उन लोगों की आलोचना की है, जो 17वीं शताब्दी की मस्जिद को हटाने की माँग लेकर कोर्ट पहुँचे हुए हैं। संगठन ने कहा कि मथुरा के शांति-सद्भाव को बिगाड़ने के लिए इस तरह से मुद्दे उठाए जा रहे हैं। महासभा के अध्यक्ष और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता महेश पाठक ने दावा किया है कि इस मामले में 20वीं सदी में ही समझौता हो चुका है, इसीलिए मथुरा में मंदिर-मस्जिद का कोई विवाद ही नहीं है।

उन्होंने इस मामले को उठाने वाले लोगों को बाहरी करार दिया। उन्होंने मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर हुए अतिक्रमण पर बोलते हुए कहा कि अगल-बगल में मंदिर-मस्जिद होने से भावनात्मक एकता बढ़ती है और साथ ही दावा किया कि यहाँ दोनों समुदायों में परस्पर सद्भाव है। लखनऊ निवासी रंजना अग्निहोत्री समेत 6 लोगों ने कोर्ट से श्रीकृष्ण जन्मभूमि को अतिक्रमण-मुक्त करने की माँग की है।

शुक्रवार को मथुरा की एक अदालत में याचिका दायर कर के वकील विष्णु शंकर जैन ने माँग की है कि 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान एवं शाही ईदगाह प्रबंध समिति के बीच हुआ समझौता पूरी तरह गलत है और उसे निरस्त किया जाए। ज्ञात हो कि महेश पाठक मथुरा से कॉन्ग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। 2019 लोकसभा चुनाव में उन्हें मात्र 28,084 (2.55%) वोट ही मिले थे और भाजपा की हेमा मालिनी लगातार दूसरी बार विजयी हुई थीं।

बाबरी पक्षकार इकबाल अंसारी ने भी कहा है कि हिन्दू-मुस्लिम की राजनीति करने वाले इस मामले को तूल दे रहे हैं। उसने कहा कि चंद लोग मंदिर-मस्जिद विवाद को अपनी रोजी-रोटी के लिए चलते रहने देना चाहते हैं। उसने कहा कि हिन्दू-मुस्लिम न किया जाए तो हिंदुस्तान दुनिया में शिखर पर होगा। इसके लिए उसने बाबरी मस्जिद मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि ये कोर्ट में 50 वर्ष चला। उसने मथुरा की मुक्ति की बात करने वालों को हिंदुस्तान की तरक्की रोकने वाला करार दिया।

उधर ‘बजरंग दल’ के संस्थापक विनय कटियार ने स्पष्ट किया कि जहाँ भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, मथुरा में उसी जगह पर आज मस्जिद खड़ी है। उन्होंने कहा कि उस मस्जिद का रास्ता श्रीकृष्ण जन्मभूमि से होकर जाता है। उन्होंने दावा किया कि इस पर दूसरे संप्रदाय के लोगों ने बलपूर्वक कब्ज़ा कर रखा है। उन्होंने कहा कि बिना किसी बड़े आंदोलन के प्रशासन की नींद नहीं खुलेगी, इसीलिए इसकी रूपरेखा बनानी पड़ेगी।

अनिल अंबानी के खिलाफ चीन के 3 बैंको ने शुरू की कार्रवाई: 5276 करोड़ रुपए का है मामला

बैंकों के कर्जे में डूब रखे अनिल अंबानी की परेशानियाँ दिन पर दिन बढ़ती जा रही हैं। खबर है कि उन्होंने जिन तीन चीनी बैंकों से 5,276 करोड़ रुपए का कर्जा लिया था, अब वह उनकी दुनिया भर में फैली संपत्तियों के बारे में पता लगाएँगे। यह कार्रवाई यूके अदालत के आदेश के बाद हो रही है।

गौरतलब है कि एक समय दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शुमार अनिल अंबानी को यूके की अदालत ने 22 मई को 5,276 रुपए भुगतान करने के आदेश दिए थे। इसमें 7.04 करोड़ रुपए ब्याज के शामिल हैं। इसके अलावा तीनों बैंक ने कानूनी कार्रवाई में आए खर्चे की माँग भी अदालत के सामने रखी थी। यह राशि 29 जून तक 5,278 करोड़ हो गई थी। इस मामले में बैंकों का प्रतिनिधित्व कर रहे बंकिम थंकी क्यूरी ने यूके की अदालत को बताया था कि अनिल अंबानी उन्हें एक भी पैसा देने से बिलकुल इंकार कर रहे थे।

शुक्रवार को सुनवाई के बाद बैंक ने अपने बयान में कहा कि वे अंबानी के ख़िलाफ़ प्रवर्तन कार्रवाई और हर मुमकिन उपाय करने जा रहे हैं। बैंकों की ओर से कहा गया है कि वह क्रॉस एग्जामिनेशन के जरिए अपने अधिकारों के बचाव हेतु हर कानूनी कार्रवाई करेंगे और अंबानी से अपना लोन वापस लेंगे।

हालाँकि, बता दें कि चीनी बैंक भारत में अनिल अंबानी की संपत्ति पर प्रवर्तन कार्रवाई नहीं कर सकते, क्योंकि भारत में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया भी अंबानी के ख़िलाफ़ दिवालिया केस चला रहा है (जिस पर फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट ने रोक लगाई है)। इसलिए यह अनुमान है कि उनके ख़िलाफ़ प्रवर्तन कार्यवाही भारत के बाहर होगी।

बता दें कि कुछ समय पहले इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ़ चाइना लिमिटेड, चाइना डेवलपमेंट बैंक और एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक ऑफ़ चाइना ने अंबानी पर ब्याज सहित 708 मिलियन डॉलर का ऋण चुकाने में विफल होने के लिए मुकदमा दायर किया था। यह ऋण उनकी कंपनी, Reliance Communications द्वारा लिया गया था। बैंकों के अनुसार ऋण के लिए उन्होंने पर्सनल गारंटी दी थी।

इसके बाद 29 जून को हाईकोर्ट ने अंबानी को एक हलफनामा दायर करने के लिए कहा था। जिसमें उनसे उनकी सारी संपत्ति बताने को कहा गया था। इस आदेश को मानते हुए अनिल अंबानी ने अपने हलफनामे में खुलासा किया था कि उनकी संपत्ति की कीमत 1,00,000 डॉलर (74 लाख) के करीब है। एफिडेविट में अनिल अंबानी से यह भी बताने को कहा गया था कि क्या उनकी इस संपत्ति में किसी और की भी भागीदारी है।

अपने इस हलफनामे में अंबानी ने बताया कि उन्होंने रिलायंस इनोवेंचर्स को 5 अरब रुपए का लोन दिया है और रिलायंस इनोवेंचर्स में 1.20 करोड़ इक्विटी शेयर की कीमत नहीं है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि अपने पारिवारिक ट्रस्ट समेत दुनिया भर के किसी भी ट्रस्ट में उनका कोई आर्थिक हित नहीं है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले उद्योगपति अनिल अंबानी ने लंदन हाईकोर्ट को बताया था कि लोन चुकाने और क़ानूनी लड़ाइयाँ लड़ने के लिए उन्हें अपने सारे गहने बेचने पड़े हैं। इससे उन्हें 10 करोड़ रुपए मिले। फिलहाल उनका खर्च पत्नी टीना अम्बानी और परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा वहन किया जा रहा है।

अनिल अंबानी सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए थे। इस दौरान उनसे उनकी संपत्ति, ऋण और खर्चों के हिसाब-किताब के बारे में 3 घंटे तक सवाज-जवाब किए गए। लक्जरी गाड़ियों को लेकर चल रही खबर को मीडिया द्वारा फैलाई गई अफवाह करार देते हुए बताया कि उन्होंने बेटे से भी लोन ले रखा है।

अंबानी ने कोर्ट के समक्ष इस सुनवाई को प्राइवेट रखने का अनुरोध किया था। मगर जज ने कहा कि व्यक्तिगत शर्मिंदगी से बचने के लिए उन्होंने ये अनुरोध किया था। हालाँकि, इसे अस्वीकार कर दिया गया।

जिसने जसवंत सिंह को रुलाया, वो उन्हीं के नाम पर BJP-मोदी को कोस रहा: सुधींद्र कुलकर्णी की वरिष्ठ पत्रकार ने खोली पोल

पूर्व भाजपा नेता सुधींद्र कुलकर्णी ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में एक लेख लिख कर ये बताने की कोशिश की है कि कैसे वायपेयी-आडवाणी के विश्वासपात्र रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह एक ‘समावेशी और दयालु’ भारत चाहते थे और ‘मोदी-शाह की भाजपा’ में वो पूरी तरह से ‘मिसफिट’ नेता थे। इस लेख में सुधींद्र कुलकर्णी ने लिखा है कि अगर जसवंत सिंह स्वस्थ रहे होते तो उनका पीएम मोदी की ‘सांप्रदायिक ध्रुवीकरण’ की राजनीति से मोहभंग हो गया होता।

केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले ‘राजा राममोहन रॉय लाइब्रेरी फाउंडेशन’ के अध्यक्ष कंचन गुप्ता ने दिवंगत जसवंत सिंह के नाम पर भाजपा और मोदी-शाह को कोसने वाले सुधींद्र कुलकर्णी को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने 2009 के लोकसभा चुनाव से पहले की एक घटना को याद किया, जब भाजपा का घोषणापत्र तैयार करने के लिए वेंकैया नायडू के घर पर बैठक चल रही थी।

कंचन गुप्ता ने बताया कि उस बैठक में उपस्थित सुधींद्र कुलकर्णी ने जसवंत सिंह के लिए आपत्तिजनक विशेषणों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें ‘मूर्ख’ कहते हुए बोला था, “आपको गिनती तक गिनने नहीं आती है।” कंचन गुप्ता ने बताया कि ऐसा कह कर सुधींद्र कुलकर्णी वहाँ से गुस्से में निकल गए थे और अपमानित जसवंत सिंह अपने आँसू पोछ रहे थे। 2009 लोकसभा चुनाव में लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में भाजपा को बुरी हार मिली थी।

उसी सुधींद्र कुलकर्णी ने अब लिखा है कि भाजपा के पूर्व वरिष्ठों अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा की तरह जसवंत सिंह भी आज की भाजपा और पीएम नरेंद्र मोदी के कड़े आलोचक होते। ज्ञात हो कि वाजपेयी सरकार में वित्त, रक्षा और विदेश मंत्रालय संभाल चुके जसवंत सिंह का 82 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वो 5 सालों से कोमा में थे। कुलकर्णी ने दावा किया है कि जसवंत सिंह को बाद में भाजपा ने किनारे किया।

सुधींद्र कुलकर्णी इस लेख में ये दावा करने से भी नहीं चूके कि अगर जसवंत सिंह स्वस्थ होते तो वो पाते कि जिस पार्टी की उन्होंने 4 दशक तक सेवा की, वो अब पहचान में ही नहीं आ रही है – एकदम बदल गई है। उनके इसी लेख पर प्रतिक्रिया देते हुए कंचन गुप्ता ने 2009 की उस बैठक को याद किया, जिसमें कुलकर्णी द्वारा की गई हरकत के लिए परेशान वेंकैया नायडू ने जसवंत सिंह से खेद जताया और सांत्वना और दिलासा दिया था।

वाजपेयी सरकार के समय PMO में कार्यरत रहे कंचन गुप्ता ने बताया कि उस बैठक की एक-एक डिटेल्स उनके पास हैं। उन्होंने कुलकर्णी पर निशाना साधते हुए कहा कि अपनी चूक के लिए किसी वरिष्ठ नेता की मौत का इस्तेमाल करना एक नीचता भरा कृत्य है और उससे भी ज्यादा नीच है चुनावी प्रचार का खाका तैयार कर रहे नेताओं को ये कहना कि वो नरेंद्र मोदी (तब गुजरात के मुख्यमंत्री) को नज़रअंदाज़ करें। कंचन गुप्ता ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के इस लेख की बखिया उधेड़ दी।

बता दें कि आईआईटी बॉम्बे से पढ़े सुधींद्र कुलकर्णी पहले वामपंथी पार्टी सीपीआई (एम) के नेता थे, जिन्होंने भाजपा तो 1996 में जॉइन की लेकिन वो 80 के दशक में राम मंदिर आंदोलन के समय से भी अटल बिहार वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के साथ काम करते आ रहे थे। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में डायरेक्टर, कम्युनिकेशंस एंड रिसर्च के रूप में भी काम किया। अक्टूबर 2015 में पाकिस्तानी विदेश मंत्री की पुस्तक का लॉन्च आयोजित करने के कारण शिवसेना ने उनके चेहरे पर स्याही फेंकी थी।

नाम कफील लेकिन फेसबुक पर ‘करण’… लड़कियों को भेजता था अश्लील मैसेज, हुआ गिरफ्तार

फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाकर महिलाओं को अश्लील मैसेज भेजने वाले दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक छात्र को दक्षिणी दिल्ली पुलिस ने शनिवार (सितंबर 26, 2020) को गिरफ्तार कर लिया। आरोपित की पहचान 23 वर्षीय कफील के रूप में हुई। वह महरौली का रहने वाला है और बीए के प्रथम वर्ष का छात्र है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दक्षिणी दिल्ली के डीसीपी अतुल ठाकुर ने इस संबंध में बताया कि महरौली की एक महिला ने कुछ दिन पहले एक शिकायत की थी। उसमें उसने बताया था कि उसे कोई करण नाम का लड़का फेसबुक पर भद्दे व अश्लील मैसेज भेजता है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस ने जब इस मामले में अपनी जाँच शुरू की, तो तकनीकी निगरानी की सहायता से आरोपित पकड़ में आया और शनिवार को उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

पड़ताल में मालूम चला कि आरोपित का नाम कफील है। जो शिकायत करने वाली महिला पर ऑनलाइन नजर रख रहा था और खुद को जिम ट्रेनर बताता था। उसने फेसबुक पर करण नाम से फर्जी प्रोफाइल तैयार की थी और उसी से वह महिलाओं को फेसबुक पर अश्लील मैसेज भेजता था।

वहीं, हकीकत यह है कि कफील दिल्ली विश्वविद्यालय से डिस्टेंस एजुकेशन का छात्र है। वह वहाँ से बीए कर रहा है। उसके पिता महरौली में मीट शॉप चलाते हैं। पुलिस ने उसका मोबाइल जब्त कर लिया है।

पूछताछ के दौरान, आरोपित कफील ने बताया कि वह महिलाओं से दोस्ती करने और उन्हें अश्लील संदेश भेजने के लिए फर्जी फेसबुक आईडी का इस्तेमाल करता था। उसने यह भी बताया कि पहचान का खुलासा होने से बचने के लिए वह हॉटस्पॉट या वाईफाई सेवाओं का इस्तेमाल करता था।

75 सालों से एक पेड़ के नीचे बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक: नहीं लेते कोई सरकारी सहायता, देते हैं गीता का ज्ञान भी

ओडिशा के जाजपुर में एक ऐसे बुजुर्ग हैं, जो पिछले 75 वर्षों से अपने क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं, बिना एक भी रुपया लिए। उन्होंने 75 सालों में न जाने कितने ही छात्रों को शिक्षा दी लेकिन कभी इसका शुल्क नहीं लिया। इनका नाम है नंदा प्रस्टी, एक वयोवृद्ध शिक्षक, जो न सिर्फ बच्चों को पढ़ाते हैं बल्कि रात के समय वयस्क लोगों को भी शिक्षा देते हैं। ओडिशा के नंदा प्रस्टी किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता लेने से भी इनकार कर देते हैं।

बच्चे जब चौथी कक्षा तक पढ़ लेते हैं, उसके बाद नंदा प्रस्टी उन्हें प्राइमरी स्कूल में भेज देते हैं। शिक्षा देने के प्रति उनका जोश ऐसा है कि पिछले 75 वर्षों से उन्होंने अपनी कमाई के बारे में कुछ नहीं सोचा और इसी तरह से अपना जीवन-यापन करते रहे, बिना किसी आर्थिक ज़रूरत के। उन्होंने जाजपुर जिले के बच्चों को अपनी कमाई के उपर प्राथमिकता दी। वो जाजपुर के बरटांडा गाँव के रहने वाले हैं।

गाँव के सरपंच ने उनसे अनुरोध किया है कि वो सरकारी सहायता स्वीकार करें, ताकि सरकार उनके लिए एक इंफ्रास्ट्रक्चर बना सके। उन्होंने इससे पहले भी कई बार एक भवन निर्माण की योजना नंदा प्रस्टी के सामने रखी, जहाँ वो आराम से बच्चों की शिक्षा-दीक्षा के काम में लगे रहें। लेकिन, उन्होंने हर बार इसे नकार दिया। गाँव में एक घना पेड़ है, जहाँ बैठ कर वो बच्चों को पढ़ाना पसंद करते हैं।

समाचार एजेंसी ANI की खबर के अनुसार, नंदा प्रस्टी ने बताया कि वो पहले खेतों में काम करते थे और उन्होंने देखा कि गाँव में कई ऐसे लोग हैं, जो निरक्षर हैं। उन्हें ये देख कर बुरा लगता था कि अधिकतर को तो अपना हस्ताक्षर तक करने नहीं आता और वो इसकी जगह अंगूठा लगाया करते थे। वो कहते हैं कि उन्होंने लोगों को बुला कर उन्हें हस्ताक्षर करना सिखाना शुरू किया लेकिन कइयों ने पढ़ने में रुचि दिखाई और वो भगवद्गीता का पाठ सीखने लगे।

ओडिशा के बुजुर्ग शिक्षक नंदा प्रस्टी बताते हैं कि उनका पढ़ाया हुआ पहला बैच जो निकला था, अब उन लोगों के परपोते उनसे पढ़ने आते हैं। गाँव के सरपंच का कहना है कि उनके नकारने के बावजूद वो इस कोशिश में लगे हैं कि एक अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया जाए, जहाँ वो बच्चों को पढ़ा सकें। सरपंच ने ANI को बताया कि चाहे मौसम कितना भी खराब हो, ठण्ड हो या गर्मी, या फिर तेज़ हवा ही क्यों न चल रही हो – नंदा प्रस्टी बच्चों को पढ़ाने में लगे रहते हैं।