सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के सचिव तस्लीम रहमानी ने अयोध्या में फिर से बाबरी मस्जिद बनाने की धमकी दी है। यह भड़काऊ टिप्पणी उन्होंने ज़ी न्यूज़ पर कृष्ण जन्मभूमि मुद्दे पर चल रही डिबेट के दौरान अपने सह-पैनेलिस्ट के धमकी देते हुए की। रहमानी ने कहा कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद फिर से बनाई जाएगी, भले ही 1000 साल लगें।
एक तरफ जहाँ रहमानी ने कहा कि वह संविधान और सर्वोच्च न्यायालय में विश्वास रखते हैं, वहीं दूसरी ओर उन्होंने अयोध्या पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर सवाल भी खड़ा कर दिया। तस्लीम रहमानी ने कहा, मस्जिद वहाँ थी, वहाँ है और वहीं रहेगी।” उसने कहा, “एक हजार साल भी अगर लग गया तो भी वहीं मस्जिद बनेगी। मैं फिर दोहरा रहा हूँ। मस्जिद थी, मस्जिद है, मस्जिद रहेगी।”
जब एंकर ने रहमानी को दोहरे मापदंड रखने के लिए लताड़ा तो उन्होंने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट में विश्वास रखते हैं, इसलिए उसके गलत फैसले को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा,” सुप्रीम कोर्ट को मानते हैं इसलिए तो गलत फैसले पर भी सब्र किया।”
बेंगलुरु दंगे में SDPI की भूमिका
गौरतलब है कि एसडीपीआई पर अगस्त में बेंगलुरु में हुए भयावह दंगों में शामिल होने का आरोप है।था। दंगों की जाँच कर रही राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने भीड़ को उकसाने के लिए बेंगलुरु की सड़कों पर हिंसा भड़काने के लिए एसडीपीआई नेता मुज़म्मिल पाशा को गिरफ्तार किया था।
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में 12वीं पास युवक द्वारा चलाए जा रहे फर्जी नर्सिंग होम का पर्दाफाश हुआ है। फर्जी डॉक्टर बन निहार मलिक नर्सिंग होम चला रहा था। बलरामपुर जिले के वाड्रफ नगर विकास खंड के बरतीकला गाँव से आने वाले मरीजों का इलाज भी करता था।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार मामले में खुलासा तब हुआ जब छत्तीसगढ़ में लागू नर्सिंग होम एक्ट के सफल संचालन और तय मानकों के अनुरूप सुविधाएँ उपलब्ध कराने की मंशा से टीम बलरामपुर इलाके में पहुँची। बता दें इन दिनों बलरामपुर में जाँच अभियान चलाया जा रहा है। खबरों के अनुसार, एसडीएम विशाल महाराणा के नेतृत्व में स्वास्थ्य और राजस्व विभाग की एक टीम ने कई शिकायतें मिलने के बाद बरतीकला में दीप मेडिकल स्टोर पर छापा मारा।
जब टीम के सदस्य वहाँ पहुँचे तो उन्होंने संचालक निहार से दवा दुकान संचालन को लेकर दस्तावेज प्रस्तुत करने का आदेश दिया, जिस पर वह हड़बड़ा गया। उसके पास फार्मासिस्ट का लाइसेंस नहीं था। अधिकारियों के कहने पर फर्जी डॉक्टर ने दस्तावेज के नाम पर खुद का 12वीं का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें गलत तरीके से डॉक्टर भी लिखा हुआ था।
इसके बाद एसडीएम विशाल महाराणा, नायब तहसीलदार विनीत सिंह और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की टीम मेडिकल स्टोर के पीछे एक चार बेड वाला नर्सिंग होम देख अवाक रह गई। मलिक के फर्जी नर्सिंग होम में उस वक्त बुखार से पीड़ित एक महिला भी भर्ती थी, जिसका वह इलाज कर रहा था।
वहीं जब महिला मरीज के बारे में टीम ने मलिक से पूछताछ की तो पता चला कि महिला को केवल बुखार था, लेकिन टाइफाइड के लिए उसका इलाज किया जा रहा था। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, क्लीनिक में कई ऐसी दवाइयाँ भी मौजूद थी, जिन्हें विशेषज्ञ डॉक्टर भी इस्तेमाल करने से बचते हैं। यह जानकारी भी सामने आई है कि इलाज के लिए हाई एंटीबायोटिक सहित अन्य साइड इफेक्ट वाली दवाओं का भी उपयोग किया जा रहा था।
गौरतलब है कि नियमों का उल्लंघन करने पर मेडिकल स्टोर और क्लीनिक को सील कर दिया गया है। मलिक को अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों पेश करने का मौका दिया गया है। एसडीएम विशाल महाराणा ने बताया कि टीम उचित कार्रवाई करने से पहले अधिकारियों और विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श कर रही है।
उत्तर प्रदेश के हाथरस केस को लेकर कॉन्ग्रेस लगातार योगी सरकार को घेरने की कोशिश में लगी है। ऐसे में आज पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की एक वी़डियो सोशल मीडिया पर आई। इस वीडियो के सामने आने के बाद ट्विटर पर ‘एक्ट लाइक पप्पू’ ट्रेंड करने लगा। इस ट्रेंड में लोग क्या पोस्ट कर रहे हैं और राहुल गाँधी की वीडियो में क्या है, आइए जानते हैं।
दरअसल, आज राहुल गाँधी अपने काफिले के साथ हाथरस में पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे थे। तभी यूपी पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस के साथ उनकी नोंकझोंक भी हुई। मगर वह आगे बढ़ते रहे और पुलिस उन्हें रोकने का प्रयास करती रही। इसी बीच वह थोड़ी दूर जाकर झाड़ियों में गिर गए और यह पूरी घटना वीडियो में कैद हो गई।
क्लोज इनफ!
इसके बाद राहुल ने बयान में कहा, “देखो, पुलिस ने कैसे मुझे धक्का दिया, मुझ पर लाठीचार्ज किया और जमीन पर गिरा दिया। मैं पूछना चाहता हूँ कि क्या इस देश में सिर्फ मोदी जी ही घूम सकते हैं? क्या आम आदमी कहीं आ-जा नहीं सकता?” उन्होंने आगे कहा, “हमारी गाड़ी रोक दी गई, इसलिए हम पैदल चलने लगे।”
अब एक ओर जहाँ इस घटना में राहुल गाँधी के चोटिल होने का दावा कॉन्ग्रेस की ओर से किया जा रहा है, वहीं राहुल गाँधी का यह वीडियो देखते वक्त यह प्रतीत हो रहा है कि वह सुरक्षित जगह देखने के बाद घास के ऊपर खुद ही गिर गए थे।
इसीलिए सोशल मीडिया पर इस घटना की वीडियो देखकर लोग राहुल गाँधी की चुटकी ले रहे हैं और तरह-तरह के मीम्स शेयर करके ये कहना चाह रहे हैं कि राहुल गाँधी को धक्का देकर नहीं गिराया गया। वह जमीन पर खुद गिर गए। अपनी इसी बात को सारे यूजर्स #ActLikePappu के अंतर्गत रख रहे हैं।
घटना की वीडियो शेयर करके लिखा जा रहा है,”यही राहुल गाँधी की प्रतिबद्धता है। हर कोई उन्हें गिरने से रोकता रहा। लेकिन बंदे ने डिसाइड कर लिया था कि गिरेगा तो गिरके ही माना।”
यूजर्स एक बच्चे की वीडियो पर राहुल का मीम बनाकर भी ट्विटर पर शेयर कर रहे हैं। इसमें देखा जा सकता है कि एक झूले पर जाकर हल्के से हाथ मारता है और जब झूला वापस उसके पेट से टच होचा है तो वह खुद ही जमीन पर गिरकर छटपटाने लगा है। लोगों का इस वीडियो पर कहना है कि आज राहुल गाँधी ने नोएडा एक्सप्रेस हाईवे पर यही मेलोड्रामा किया।
एक डेलीसोप की वीडियो भी आज की स्थिति के साथ जोड़ कर शेयर की जा रही है और पूछा जा रहा है ओवरएक्टिंग किसने अच्छी की। एक तरफ राहुल की वीडियोज हैं और दूसरी तरह डेली सोप का सीन, जिसमें धक्का मिलने पर लड़की पर्दा पकड़ती है और सीन ऐसे शूट होता है जैसे खुले पर्दे में उसका गला फँस गया।
बता दें, अधिकांश लोग जहाँ मीम्स को लेकर राहुल की चुटकी ले रहे हैं। वहीं कुछ लोग गंभीर रूप बाते भी कर रहे हैं। एक अकाउंट से लिखा गया है, “साफ़ दिख रहा है पुलिस वाला राहुल गाँधी को गिरने से बचाने की कोशिश कर रहा है, जब अचानक कोई गिरने लगता है तो बचाने वाला ये नहीं देखता की मैं क्या पकड़ रहा हूँ, लेकिन जिनकी मानसिकता ही घटिया हो उनकी सोच कोई बदल नहीं सकता।”
इस हैशटैग में राहुल गाँधी को लोग ड्रामेबाज और नेमार जूनियर से जोड़ कह रहे हैं। इसके अलावा उनके पुराने वीडियोज शेयर करके सवाल पूछ रहे हैं कि इलेक्शन में गिरने के बाद और कितना गिरोगे।
कुछ का कहना है कि राहुल गाँधी पुश और पुल के बीच फर्क करना भी नहीं जानते हैं, क्योंकि तस्वीर में साफ दिख रहा है पुलिस उन्हें खींच रही है और वह नीचे गिर रहे हैं।
कुछ राहुल गाँधी के प्रशंसक भी हैं जो इस हैशटैग का इस्तेमाल करके उन्हें ‘पप्पू’ बोले जाने पर सवाल उठा रहे हैं। आकाश नाम का यूजर कहता है, “हम भले ही उन्हें उनके भाषणों के लिए पप्पू बोल लें। लेकिन सच है कि वही एक नेता है जिसने रेप पीड़िता के घरवालों का समर्थन किया।”
दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में चल रही जाँच हर दिन तूल पकड़ती जा रही है। इसमें अभी तक 700 एफआईआर और कई चार्जशीट फाइल हो चुकी हैं। इसके साथ ही उमर खालिद, ताहिर हुसैन, खालिद सैफी, पिंजड़ा तोड़ के सदस्य, कॉन्ग्रेस नेता इशरत जहाँ जैसे लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है। अब दिल्ली पुलिस ने पहला ऐसा आरोप-पत्र दायर किया है, जिसमें दिल्ली को जलाने के लिए रची गई साजिश की सारी डिटेल हैं।
एफआईआर नंबर 59/200 में दायर आरोप पत्र बताता है कि साजिश 5 दिसंबर 2019 से रची जानी शुरू हो चुकी थी और मास्टरमाइंड शर्जील इमाम, उमर खालिद व अन्य ने लोगों को उकसाना शुरू कर दिया था। इसके अलावा इस आरोप-पत्र में योगेंद्र यादव जैसे लोगों की भूमिका का भी जिक्र है, जिन्हें अभी तक हिरासत में नहीं लिया गया है। योगेंद्र यादव का नाम चार्जशीट की शुरुआत में ही है। उन्होंने 8 दिसंबर को शर्जील इमाम, उमर खालिद व अन्य के साथ गुप्त बैठक की थी।
8 दिसंबर को दायर हुई चार्जशीट
एफआईआर संख्या 59/2020 में दायर हुई चार्जशीट, जिसमें पूरी साजिश का विवरण है, लगभग 17,000 पृष्ठों की है। मगर मीडिया इसमें से कोई छोटी सी जानकारी उठाकर झूठ फैलाता है और केवल आधा सच बताकर अपना नैरेटिव चलाता है।
हाल में एक ऐसा झूठ कपिल मिश्रा के नाम पर सामने आया था। मीडिया ने फैलाया कि चार्जशीट में पुलिस ने कपिल मिश्रा को ‘whistleblower’ कहा है।
बाद में इस झूठ को कई मीडिया संस्थानों ने चलाया और एनडीटीवी से लेकर बार एंड बेंच और प्रोपेगेंडा वेबसाइट द क्विंट के पत्रकारों ने भी इसे फैलाया।
Coming up on NDTV, the Delhi Police riots chargesheet describes the BJP’s inciter-in-chief Kapil Mishra as a ‘whistleblower.’@Saurabh_Unmute with the details.
एनडीटीवी ने कपिल मिश्रा को ‘घृणा फैलाने वाला नेता’ बताया और दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें चार्जशीट में ‘whistleblower’ कहा है। फिर इंडिया टुडे ने भी इसका अनुकरण किया और अपने आर्टिकल का शीर्षक दिया, “दिल्ली दंगे: क्या कपिल मिश्रा एक ‘whistleblower है? पुलिस चार्जशीट यही इशारा करती है।”
चार्जशीट के ऊपर इंडिया टुडे का आर्टिकल
इंडिया टुडे ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया “दिल्ली पुलिस यह कहती दिख रही है कि साजिशकर्ता खुद को बचाने के लिए ‘झूठी कहानी’ बना रहे थे। इसके अलावा यह ये संकेत भी देती है कि भाजपा नेता कपिल मिश्रा दिल्ली के दंगों के मामले में “व्हिसल ब्लोअर” में से एक हो सकते हैं।”
द क्विंट ने भी चार्जशीट का हवाला देकर लिखा, “चैट से पुष्टि होती है कि साजिशकर्ताओं को पर्दाफाश होने का डर था। इसलिए उन्होंने झूठी कहानी बनाकर दोष खुद को बेगुनहाह बताने की कोशिश की और व्हिसल ब्लोअर्स को धमकाया भी।” अपनी रिपोर्ट में उन्होंने इस ओर इशारा किया कि हो सकता है ये whistleblower कपिल मिश्रा ही हो, जिसका आरोप-पत्र में जिक्र है।
इसके बाद कानूनी मामलों पर सबसे प्रमाणिक जानकारी के लिए एक विश्वसनीय स्रोत के रूप में पहचाना जाने वाला बार एंड बेंच ने भी दुर्भावनापूर्ण तरीके से इस झूठ को आगे बढ़ाया।
बार एंड बेंच का आर्टिकल
कॉन्ग्रेस नेताओं और उनके ट्रोलर्स के हाथों में ये बात पहुँचने के बाद इस झूठ को और रफ्तार मिली। कई ऐसे लोग सामने आए जिन्होंने मीडिया के फर्जी दावे को आगे फैलाया।
सच्चाई क्या है? क्या दिल्ली दंगे मामले में दायर चार्जशीट में कपिल मिश्रा को वाकई ‘whistleblower’ कहा गया है।
हर मीडिया रिपोर्ट, जिसमें दावा किया गया कि दिल्ली दंगों की चार्जशीट में कपिल मिश्रा को ही ‘whistleblower’ कहा गया है, उसने अपनी बातों को सिद्ध करने के लिए कुछ स्क्रीनशॉट का इस्तेमाल किया।
चार्जशीट की स्क्रीनशॉट जिसे मीडिया ने भुनाया
यह तस्वीर बार एंड बेंच की है। इसी को इंडिया टुडे ने भी इस्तेमाल किया है ये बताने के लिए कि चार्जशीट में कपिल मिश्रा को ‘whistleblower’ कहा गया।
हालाँकि ऐसे दावे करते हुए इन सभी मीडिया चैनलों ने एक सच को बड़ी चालाकी से दरकिनार कर दिया। दरअसल, चार्जशीट में पहले कहा गया, “चैट से पुष्टि होती है कि साजिशकर्ताओं को पर्दाफाश होने का डर था। इसलिए उन्होंने झूठी कहानी बनाकर दोष खुद को बेगुनाह बताने की कोशिश की और व्हिसल ब्लोअर्स को धमकाया भी।” मगर आगे यह आरोप-पत्र यह भी कहता है कि इसकी पुष्टि संरक्षित गवाहों (protected witnesses) से की गई है।
अब यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि आखिर कैसे मीडिया ने तस्वीर को क्रॉप करके उसका इस्तेमाल किया और सबसे महत्तवपूर्ण भाग को रिपोर्ट्स में शामिल करना जरूरी भी नहीं समझा कि आखिर कैसे ‘whistleblowers’ को डराया गया।
सबसे पहले किसी को भी ध्यान देना होगा कि पुलिस कहती है, “फर्जी नैरेटिव बनाकर और whistleblower को धमका कर।” इसमें दो बातें निकलतीं है। पहली फर्जी नैरेटिव गढ़ना और दूसरा whistleblowers को धमकाना।
इस भाग में दिल्ली पुलिस ने पहले “Delhi Protest Support Group” (DPSG) ग्रुप के स्क्रीनशॉट शेयर किए, जहाँ खालिद सैफी, राहुल रॉय और अन्य कपिल मिश्रा के ख़िलाफ़ एफआईआर करवाने की बात कर रहे थे।
इसमें नोटिस करने वाली बात यह है कि दिल्ली प्रोटेस्ट सपोर्ट ग्रुप में हुई यह चैट 24 फरवरी रात 1 बजे की है। वही समय जब हिंसा शुरू हो चुकी थी। मगर, मीडिया ने बड़े सलीके से आगे 700 से अधिक पृष्ठों को दरकिनार कर दिया, जिसमें इस बात पर गौर करवाया गया है कि पूरी साजिश 5 दिसंबर से होनी शुरू हुई।
चार्जशीट में आगे पुलिस ने जब कपिल मिश्रा से संबंधित चैट का हवाला दिया, जिससे यह संकेत मिल रहा था कि कैसे दंगे करवाने वालों ने सारी साजिश में अपनी भूमिका कबूल की और खालिद सैफी जैसे ने ध्यान भटकाने के लिए कपिल मिश्रा को फँसाने की कोशिश की और झूठा नैरेटिव गढ़ा।
इन चैट्स जिनमें whistleblower को धमकाने की बात सामने आती है, उसी से साफ हो जाता है कि कपिल मिश्रा का इससे कोई लेना-देना नहीं है। यहाँ यह शब्द उनके लिए है, जिन्हें धमकाया गया।
यह वो तस्वीर है जिसे मीडिया ने क्रॉप कर दिया।
मीडिया ने चार्जशीट में क्या छोड़ दिया
देखिए। इस चैट में, दंगे के पूरे एक दिन बाद, राहुल रॉय लोगों को ग्रुप से मैसेज लीक करने पर धमकाता है। इसके अलावा इस रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि ग्रुप में स्वीकार किया गया है कि दंगे मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोगों और डीएसपीजी ग्रुप के लोगों ने भड़काए। बता दें पूरी चैट 25 फरवरी की है।
इन चैट्स से पता चलता है कि इसके बाद राहुल राय और कुछ लोगों में बहस शुरू हो गई थी, जिन्होंने पिंजरा तोड़ और अन्य मास्टरमाइंड पर आरोप लगाया था कि उनके कारण आम लोगों का जीवन खतरे में आ गया है। इसी के बाद राहुल रॉय ने 25 फरवरी को लोगों को धमकी दी।
यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि दिल्ली पुलिस के पास कई ऐसे गवाह हैं जिन्होंने ग्रुप में विरोध किया था और हिंसा पर आपत्ति जताने पर उन्हें धमकाया और चुप रहने को कहा जा रहा था।
तो इस प्रकार, इस मामले में मीडिया ने जो कुछ भी किया है, उसे 3000-पृष्ठ की अंतिम रिपोर्ट में से लिया गया है और केवल उस हिस्से को उजागर किया गया है जहाँ चार्जशीट में कपिल मिश्रा का उल्लेख है। इतने में भी उसे बिना किसी संदर्भ के कोट किया गया ताकि राहुल द्वारा भेजी गई चैट को छिपाया जा सके। यह सब लगभग वैसा ही है, जैसे कि मीडिया ने सीधे तौर पर “कपिल मिश्रा” शब्द खोजा और पूरी चार्जशीट को पढ़े बिना ही उसमें से एक झूठी कहानी लिख दी, जबकि रिपोर्ट बहुत विस्तृत है।
बता दें कि राहुल रॉय और उनकी पत्नी सबा दीवान को कुछ समय पहले दिल्ली पुलिस ने दिल्ली दंगों के कनेक्शन और मास्टरमाइंड होने के लिए समन जारी किया था। शॉर्ट फिल्म मेकर राहुल रॉय ने ही DSPG समूह की शुरुआत की थी और उन्हें दंगों के प्रमुख साजिशकर्ताओं में से एक के रूप में देखा जा रहा है।
सबा दीवान और राहुल रॉय
कपिल मिश्रा को चार्जशीट में नहीं कहा गया ‘व्हिसल ब्लोअर’, दिल्ली पुलिस ने खुद की पुष्टि
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले कपिल मिश्रा को लेकर उपजे विवाद पर दिल्ली पुलिस ने एनडीटीवी की पत्रकार को बयान जारी करके लताड़ लगाई थी। दिल्ली पुलिस ने अपने ऊपर लगे आरोपों के ख़िलाफ़ बयान जारी करते हुए बताया था कि एनडीटीवी की एंकर जिस तरह से अपने शो में दावा कर रही हैं कि पुलिस ने कपिल मिश्रा को ‘व्हिसल ब्लोअर’ कहा, वह दावा सत्य से कोसों दूर हैं। दिल्ली पुलिस ने अपने बयान में कहा था कि पुलिस ने कहीं भी कपिल मिश्रा को व्हिसल ब्लोअर नहीं कहा है और न उन्होंने ऐसा कुछ कहीं लिखा है।
बयान में आगे लिखा गया, “शायद एंकर का नैरेटिव तब पूरा होता यदि दिल्ली पुलिस ने कपिल मिश्रा का विस्तृत बयान न लिया होता। परंतु अन्वेषण, स्टूडियो और कैमरा के सामने नहीं होता। कपिल मिश्रा का विस्तृत बयान रिकॉर्ड पर आ जाने से आहत एंकर ने सच्चे व्हिसल ब्लोअर को नजरअंदाज करते हुए दर्शकों को गुमराह करने का प्रयास किया है।”
इस बयान में आगे बताया गया था कि एंकर ने अपने शो में दूसरा कौन सा मुद्दा उठाया। बयान के मुताबिक:
“रिपोर्ट में दूसरा मुद्दा यह उठाया गया कि कपिल मिश्रा के मौजपुर में रहते ही पत्थरबाजी शुरू हो गई थी। दिल्ली पुलिस ने तमाम अन्वेषण के बाद पाया कि दंगे और पत्थरबाजी 23 फरवरी को चाँद बाग के दंगाइयों ने सोची-समझी साजिश के तहत, लगभग 11 बजे सुबह से ही शुरू कर दी थी और प्रथम घायल पीड़ित की एमएलसी 12;15 बजे, दिन को अस्पताल में बनी थी, जबकि कपिल मिश्रा 23 तारीख को 3:30 बजे दोपहर मौजपुर आए थे। इससे स्पष्ट है कि पुलिस और पब्लिक पर सीएए विरोधियों द्वारा हमला 23 फरवरी की सुबह ही शुरू हो गया था।”
दिल्ली पुलिस का दावा था कि एनडीटीवी एंकर ने इन सभी तथ्यों को छिपाते हुए एक कहानी रचने की शरारतपूर्ण कोशिश की है। परंतु NDTV के अपनी ही रिपोर्टर की यह टिप्पणी कि डीएसपी Anti riot gear पहने हुए थे और आसपास पत्थर भी दिखाई पड़ रहे थे, से पुलिस की चार्जशीट में लिखी इस बात की जाने-अनजाने में पुष्टि होती है कि पथराव लगभग 11 बजे सुबह से ही शुरू हो गया था।
(नुपूर जे शर्मा द्वारा मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई यह रिपोर्ट यहाँ क्लिक कर पढ़ सकते हैं)
हाथरस घटना में पीड़िता की मौत की बाद मामले में राजनीति शुरू हो चुकी है। मीडिया में भी तरह-तरह की भ्रामक खबरें चलाई जा रही है। वहीं हाथरस पुलिस ने गुरुवार को मामले की जानकारी देते हुए कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में “जबरन यौन संबंध” बनाने का पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्ट में गला गला दबाने से हुए जख्म को मौत का कारण बताया गया है।
बता दें मंगलवार को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में कथित सामूहिक बलात्कार पीड़िता की मौत हो गई थी। खबरों के अनुसार, उसके साथ दो सप्ताह पहले कथित तौर पर बलात्कार किया गया था। वहीं इस घटना में लोगों का गुस्सा तब और फूटा जब सोशल मीडिया पर यह भ्रामक खबर चलाई गई कि हाथरस पुलिस ने परिवार के सदस्यों की सहमति के बिना मंगलवार रात लड़की का जबरन अंतिम संस्कार कर दिया। हालाँकि पुलिस ने बाद में खबरों को खरिज करते हुए कहा था कि दाह संस्कार के दौरान पीड़िता के पिता मौजूद थे।
एएनआई से बात करते हुए, एडीजी प्रशांत कुमार ने आज जानकारी दी है कि फोरेंसिक रिपोर्ट आ गई है। एडीजी ने कहा कि एफएसएल रिपोर्ट में पीड़िता के शरीर से सैंपल इकट्ठे किए गए थे, उसमें किसी तरह का स्पर्म या शुक्राणु नहीं पाया गया है। उन्होंने आगे कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता से किसी भी प्रकार का यौन शोषण नहीं किया गया था।
#WATCH Postmortem report says victim died due to her neck injury. FSL report hasn’t found sperm in samples, making it clear that some ppl twisted the matter to stir caste-based tension. Such people will be identified & legal action will be taken: ADG Prshant Kumar on Hathras case pic.twitter.com/qMOUct7t92
उन्होंने आगे कहा, “इससे स्पष्ट होता है कि कुछ लोगों के द्वारा प्रदेश में जातीय तनाव पैदा करने के लिए इस तरह की चीजें कराई गईं। पुलिस ने शुरू से इसमें त्वरित कार्रवाई की है। अब हम आगे की विधिक कार्रवाई करेंगे। ऐसे लोगों की पहचान की जाएगी जो प्रदेश में सामाजिक सद्भाव बिगाड़ना और जातीय हिंसा भड़काना चाहते थे।”
एडीजी प्रशांत ने कहा कि पुलिस ऐसे लोगों की पहचान करेगी, जिन्होंने मामले से राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए फर्जी खबरें और झूठे तथ्य फैलाए हैं। यूपी पुलिस पहले ही मामले में चार दोषियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
वहीं एसपी विक्रम वीर ने एएनआई से बात करते हुए कहा कि विशेष जाँच दल फिलहाल शहर में है। उन्होंने बुधवार को अपराध और घटनास्थल का दौरा किया और परिवार के सदस्यों से बात की।
गौरतलब 14 सितंबर को पीड़िता चारा इकट्ठा करने के लिए खेत में गई थी, जब युवकों के एक समूह ने उस पर पीछे से हमला किया था। किशोरी को उसके गले में दुपट्टे से बाँधकर घसीट कर खेत में ले जाया गया, जहाँ कथित तौर पर उसके साथ बलात्कार किया गया। शायद घसीटने की वजह से ही उसकी रीढ़ की हड्डी में चोट आई थी। दुष्कर्म का विरोध करने पर आरोपितों ने पीड़िता की गला दबा कर हत्या करने की कोशिश की। पुलिस ने कहा कि इसी दौरान पीड़िता की जीभ दाँत के बीच में आ गई और कट गई।
वहीं इस मामले पर संज्ञान लेते हुए पीएम मोदी ने भी यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से मामले में जानकारी ली थी और आरोपितों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए थे। घटना की जाँच के लिए सीएम ने एक विशेष टीम बनाने का आदेश दिया था, जो अगले सात दिनों में रिपोर्ट सौंपेगी।
इसके अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाथरस गैंगरेप पीड़िता के परिजनों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की थी। जिस दौरान दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीड़ित परिवार के लिए कई घोषणाएँ कीं थी। इसमें परिवार को कुल 25 लाख रुपए की सहायता राशि उपलब्ध की जाएगी। परिवार के एक सदस्य को कनिष्ठ सहायक के पद पर नौकरी दी जाएगी। सूडा योजना के अंतर्गत हाथरस शहर में एक घर का आवंटन किया जाएगा। इसके अलावा सीएम ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई अनुमति दे दी है।
उल्लेखनीय है कि कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा आज (अक्टूबर 01, 2020) अपने भाई राहुल गाँधी के साथ पीड़ित परिवार से मुलाकात करने के लिए एक बड़ा काफिला लेकर हाथरस निकली थीं। जिस कारण हाइवे पर लंबा जाम लग गया है। बता दें हाथरस में इस वक्त धारा 144 लागू है।
हाथरस में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना से पूरा देश दुखी है। 14 सितंबर को 4 युवकों ने 19 साल की दलित लड़की को उत्तर प्रदेश स्थित हाथरस में जान से मारने का प्रयास किया। घटना के एक हफ्ते बाद पीड़िता ने पुलिस को बयान दिया कि 4 युवकों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था। इसके बाद से पीड़िता की स्थिति नाज़ुक बनी हुई थी, अंत में मंगलवार 29 सितंबर 2020 को उसने अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस घटना की वजह से पूरे देश के लोग आक्रोश में हैं।
पीड़िता ने अपने बयान में था कि उसके साथ दुष्कर्म की घटना हुई है, लेकिन शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई थी। हाथरस के एसपी ने कहा था कि अलीगढ़ अस्पताल से आई मेडिकल रिपोर्ट में चोट की बात थी, लेकिन दुष्कर्म की पुष्टि नहीं की गई थी। यहाँ तक की डॉक्टर्स ने भी अभी तक दुष्कर्म की पुष्टि नहीं की है, एफएसएल रिपोर्ट आना अभी बाकी है। इस घटना पर समाज का दुःख और आक्रोश ख़त्म नहीं हुआ था कि उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में 22 साल की दलित युवती के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना हुई, लेकिन क्या इस घटना पर भी उतनी ही प्रतिक्रिया आई? सीधा जवाब है- नहीं।
द वायर की कर्मचारी रोहिणी सिंह ने ऐसे अपराधों पर ‘लिबरल’ हिपोक्रेसी की ब्रांड एम्बेसडर का जिम्मा सँभाल रखा है। जैसे ही रोहिणी सिंह ने इस घटनाक्रम में जातिवादी पहलू खोजने का प्रयास किया, वैसे ही उनसे सवाल किया गया। पूछे गए सवाल पर रोहिणी सिंह का जवाब कुछ इस तरह का था।
The girl is on a ventilator fighting for her life. Rape is not about sex as much as it is about power and showing a woman her place. Rapes of Dalit women, by upper caste men, are usually a lesson the rapist wants to give to her community. A Mishra won’t understand that. But try. https://t.co/AYfEGwP81C
रोहिणी ने अपने ट्वीट में दावा करते हुए कहा कि बलात्कार सिर्फ सेक्स से संबंधित नहीं है, यह महिलाओं को उनका स्थान बताने के लिए भी किया जाता है। रोहिणी के अनुसार ऊँची जाति वाले लोग नीची जाति की महिलाओं के साथ दुष्कर्म इसलिए करते हैं, जिससे वह निम्न समुदाय के लोगों को संदेश दे सकें। जिस ट्विटर यूज़र ने प्रश्न किया था उसका उपनाम मिश्रा था जो कि एक ऊँची जाति है। इस बात को आधार बनाते हुए रोहिणी ने कहा कि वह इस बात को नहीं समझ सकती, जबकि रोहिणी खुद एक ऊँची जाति से आती हैं। रोहिणी सिंह ने बलरामपुर में हुई बलात्कार और हत्या की घटना पर किस तरह की प्रतिक्रिया दी होगी? जब उसे पता लगा होगा कि 22 साल की दलित लड़की के साथ दुष्कर्म करने वाले शाहिद और सलील थे।
The usual suspects are thrilled the suspects in the #Balrampur gang rape are Muslims. But shouldn’t they be angry that the state is so lawless that unspeakable brutality against women & children are happening so frequently?The culprits have to be punished severely. But will they?
जब एक दलित लड़की के साथ दुष्कर्म करने वाले युवक उच्च जाति के नहीं थे, बल्कि दो मुस्लिम युवक इस घटना के लिए ज़िम्मेदार है। ऐसे में यह मामला क़ानून व्यवस्था का विषय बन गया, साफ़ देखा जा सकता है कि कैसे एक ही तरह की घटनाओं के सामने होने पर लोगों का नज़रिया बदल जाता है। अगर अपराधी उच्च जाति के हिन्दू न होकर मुस्लिम युवक हैं, तब अपराध की परिभाषा की बदल जाती है।
इसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस पर उचित कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए रोहिणी सिंह ने कुछ ऐसा लिखा,
हाथरस में एक दलित बेटी का गैंगरेप हुआ, उसकी जीभ काटी गयी, शरीर पर अनगिनत ज़ख्म दिए गए और मरने के लिए छोड़ दिया गया। पहले पुलिस ने उसे ‘छेड़खानी’ समझा, दबाव बना तो रेप का मुक़दमा दर्ज हुआ, फिर उसे फेक न्यूज भी बताया गया।
आज वो बेटी नहीं रही, यही UP का आज है, बाक़ी सब रामराज है।
साफ़ देखा जा सकता है कि रोहिणी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से नाराज हैं। अब यहाँ कुछ ऐसा हुआ कि कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान के बारां जिले में 13 और 15 साल की नाबालिग लड़कियों के साथ दुष्कर्म की घटना हुई। दोनों ने इस बात को कैमरे पर स्वीकार किया कि उनके साथ दुष्कर्म हुआ था। लड़कियों ने आरोप लगाया कि आरोपित उन्हें कोटा, अजमेर और जयपुर लेकर गए और वहाँ उनके साथ पूरे 3 दिनों तक लगातार दुष्कर्म किया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आरोपित भी नाबालिग थे।
इस घटना पर ट्वीट करते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लिखा कि हाथरस और राजस्थान में हुई घटना की तुलना करना अनुचित है, क्योंकि लड़कियों ने मजिस्ट्रेट के सामने यह बात स्वीकार की है कि वह अपनी मर्ज़ी से लड़कों के साथ गई थीं।
कुल मिला कर अशोक गहलोत के मुताबिक़ 2 नाबालिग लड़कियों ने मजिस्ट्रेट के सामने जो कुछ कहा वह अपनी मर्ज़ी से कहा और इसके पहले जो कैमरे पर कहा था वह वह गलत था। नाबालिग के साथ भले ही कोई भी घटना क्यों न हुई हो, भले मर्ज़ी के साथ लेकिन वह बलात्कार की श्रेणी में आएगी। रोहिणी सिंह ने पहले तो अशोक गहलोत के ट्वीट को रीट्वीट किया, लेकिन जब उनकी बात में संदेह महसूस हुआ तब उसे अनडू (Undo) कर दिया।
बलात्कार की घटनाओं में तमाम पहलू देख समझ कर आक्रोश व्यक्ति करना रोहिणी सिंह की हिप्पोक्रेसी ही कही जाएगी। इस तरह के हिप्पोक्रेट अगर यह कहते कि उन्हें दोनों घटनाओं में इंसाफ चाहिए, वैसी आलोचना में तर्क है। पहली घटना में रोहिणी सिंह समेत कई लिबरल्स ने आरोपित की जाति देखी और आलोचना करना शुरू कर दिया। भले लोग उनसे कह रहे थे कि इसमें जाति लेकर आने का क्या मतलब।
पत्रकार पल्लवी घोष को इतने ज्यादा अपशब्द कहे गए जब उन्होंने कहा कि बलात्कार जैसी घटना को जाति तक सीमित नहीं कर देना चाहिए।
Lets not reduce the heinous crime against the hathras victim as a crime against a dalit – its a reflection of how mean and cruel we have become – we have failed the women of our country yet again
उन पर यह आरोप भी लगाया गया कि कि वह दलितों को उपदेश दे रही हैं कि वह अपनी कहानी किस तरह बताएँ।
Lets not reduce the heinous crime against the hathras victim as a crime against a dalit – its a reflection of how mean and cruel we have become – we have failed the women of our country yet again
अगर उच्च वर्ग से आने वाले दलितों को यह उपदेश दे रहे हैं कि उन्हें अपनी कहानी कैसे बतानी है तो दूसरे मामले में पहचान को केंद्र में क्यों नहीं रखा जा रहा है? जिसमें दो मुस्लिम युवकों ने एक दलित लड़की के साथ बलात्कार किया? क्या आपराधिक मामलों में जाति की तरह मजहब अहम पहलू नहीं होता है? यह विचार खुद में कितना विचित्र है, क्योंकि समाज में मजहब की भूमिका अहम होती है, चाहे वह लोगों की मानसिकता को आकार देना ही क्यों न हो। तब हम मजहब को क्यों पीछे छोड़ देते हैं? लोग कुछ ही सालों में ‘आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता से हिन्दू आतंकवाद’ पर चले आए हैं। ठीक इसी तरह सिर्फ कुछ घंटों में ही ‘बलात्कार करने वालों की जाति होती है से बलात्कार करने वालों का कोई मजहब नहीं होता है’ पर आ गए।
8 जून 2020: रिया चकवर्ती का दावा रहा है कि इसी तारीख को वे सुशांत सिंह राजपूत का फ्लैट छोड़कर चली गईं थी। इसके बाद से दोनों का संपर्क नहीं था।
14 जून 2020: सुशांत अपने घर में फँदे से लटके मिले थे।
सुशांत सिंह राजपूत की मौत शुरुआत में आत्महत्या लग रही थी। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया मौत को लेकर रहस्य गहराता गया। उनकी गर्लफ्रेंड रहीं रिया चकवर्ती जो इस समय ड्रग्स मामले में जेल में बंद हैं, पर कई सवाल उठे। अब बीजेपी नेता के एक दावे से रिया की भूमिका और संदिग्ध हो गई है। इसके मुताबिक 13 जून को सुशांत और रिया की मुलाकात हुई थी। सुशांत उन्हें घर छोड़ने भी गए थे।
मुंबई बीजेपी के महासचिव विवेकानंद गुप्ता ने रिपब्लिक टीवी को दिए एक इंटरव्यू में दावा किया, “13 जून की देर रात को एक पार्टी के बाद सुशांत रिया को छोड़ने उनके अपार्टमेंट में आए थे। इसकी जानकारी उन्हें एक चश्मदीद ने दी है।” उन्होंने चश्मदीद की बातों का जिक्र करते हुए बताया 13 और 14 की दरम्यानी रात की यह घटना है। सुशांत सिंह राजपूत रात के 2 या 3 बजे के आसपास रिया को छोड़ने उसके फ्लैट तक गए थे। फिर 14 की सुबह वे मृत मिले। इसलिए यह कहना कि 8 जून को छोड़ दिया था, यह गुमराह करने की बात है क्योंकि चश्मदीद ने उन्हें साथ में देखा है।”
Nite of 13th – 14th June who came to drop #rheachakroborty till her residence/flat. A sena minister has tweeted thr was party on 13th June night. If he knows about party den he ” knows” who all attended the party. #SushantWasMurdered
उन्होंने कहा, “मैंने हर चीज के बारे में ट्वीट किया है और सभी ट्वीट में सीबीआई को टैग किया है। अगर वो मुझसे संपर्क करते है तो मैं चश्मदीद की पहचान और सभी जानकारी सीबीआई को दे दूँगा। लेकिन इस मामले में मैं मुंबई पुलिस को कोई जानकारी साझा नहीं करूँगा।”
The time of death not mentioned in Post Mortem report by the Drs, clearly indicates that the murder of #SushantSinghRajput was to be brushed under the carpet, by the powerful. An imp medico lacune by Cooper hospital doctors.#sushantwaskilled#JusticeForSushantSinghRajput
इसके अलावा उन्होंने कूपर अस्पताल द्वारा किए गए पोस्टमार्टम पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा, “मुंबई पुलिस दवाब में काम कर रही थी, जिसके कारण दो-तीन दिन की जाँच को 55 दिन खींच दिया गया। ये हत्या का मामला है जिसे बिना जाँच के ही पुलिस ने आत्महत्या करार दिया था।” बता दें बीजेपी नेता का यह बयान सुशांत के मर्डर केस को एक अलग दिशा दे सकता है।
सुशांत की बॉडी नीचे उतारने वाले पिठानी बन सकते हैं सरकारी गवाह
सुशांत मामले में चल रही जाँच में सिद्धार्थ पिठानी सरकारी गवाह बन सकते हैं। रिपब्लिक टीवी के अनुसार, वह धारा 164 के तहत केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को अपना बयान दर्ज करा सकते हैं।
बता दें पिठानी ने CBI को दिए अपने बयान में दावा किया था कि “सुशांत अपनी मैनेजर दिशा सालियान की मौत की खबर सुनकर बेहोश हो गए थे। होश में आने के बाद, उन्होंने कहा कि ‘मुझे मार दिया जाएगा’ और इसके एक हफ्ते बाद ही उनकी मौत हो गई।” रिपब्लिक टीवी के सूत्रों के मुताबिक, पिठानी ने अपने बयान में ये भी बताया कि ‘दिशा की मौत के बाद सुशांत की लिव-इन-गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती उनका लैपटॉप और अन्य उपकरणों के साथ घर छोड़कर चली गई थी।”
रिटायरमेंट के बाद अमूमन लोग अपना बाकी जीवन परिवार के साथ गुजर-बसर करने के सपने देखते हैं। लेकिन सीमा सुरक्षा बल (BSF) के एक अधिकारी ने रिटायर होने के 10 साल बाद राष्ट्र सेवा में अपनी जान गँवा दी। इस अधिकारी का नाम है- एससी नेगी।
हिमाचल प्रदेश से चीन सीमा तक पहुँचने का छोटा या शॉर्टकट रास्ता खोजते हुए बीएसएफ के सेवानिवृत्त अधिकारी नेगी की बुधवार (30 सितंबर 2020) को मौत हो गई। 70 वर्ष की उम्र में वह चीन सीमा तक पहुँचने का सबसे छोटा मार्ग खोज रही टीम का नेतृत्व कर रहे थे, लेकिन अभियान के दौरान ही उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए।
साल 2010 में रिटायर हो चुके एससी नेगी इस अभियान में स्वेच्छा से गए थे। उनके परिवार ने उनकी उम्र के कारण उन्हें अभियान पर जाने से मना किया था। लेकिन, परिवार को आश्वास्त करते हुए उन्होंने कहा था, “यह मेरा अंतिम अभियान होगा”। किसे पता था कि सेवानिवृत्त अधिकारी के कहे शब्द इस तरह से सिद्ध होंगे। उन्होंने दुर्गम पहाड़ियों में सर्वेक्षण टीम का नेतृत्व किया और रास्ते में ही अपनी आखिरी साँस ली।
DG BSF and all ranks pay heartfelt condolences to braveheart of nation Lt Sh SC Negi DIG(Rtd) BSF who scale the Mt Everest at the age of56years. He took is last breath in mountain yesterday leading a recce of SF to explore shortest route to China Border even after his retirement pic.twitter.com/KAEhxSFt93
बीएसएफ ने एक बयान में कहा है, “उन्होंने हिमाचल की पहाड़ियों में आखिरी साँस ली, रिटायर होने के बावजूद वे स्वेच्छा से सुरक्षा बलों की एक टीम के साथ चीन के लिए नजदीकी रास्ते की तलाश कर रहे थे।”
सीमा सुरक्षा बल ने कहा कि उनकी उम्र को देखते हुए उनके परिवार ने उन्हें सलाह दी थी कि वे इस अभियान पर न जाएँ, लेकिन नेगी ने कहा कि ये उनका आखिरी दौरा होगा। इसके साथ ही वे इस ट्रिप पर निकल पड़े। ये नियति की इच्छा ही थी कि उनके कहे मुताबिक उनका ये आखिरी अभियान बन गया।
आईटीबीपी ने कहा कि उसकी पेट्रोलिंग पार्टी ने किन्नौर जिले के नेसंग गाँव के नजदीक एससी नेगी को रेस्क्यू किया। ये इलाका एलएसी के नजदीक पड़ता है। ITBP की पेट्रोलिंग टीम ने नेगी को बेहोशी की हालत में पाया, उनके शरीर पर कई फ्रैक्चर थे। जब आईटीबीपी के जवान उन्हें इलाज के लिए ले जा रहे थे तो इसी दौरान उनकी मौत हो गई।
आईटीबीपी के मुताबिक, एससी नेगी का पार्थिव शरीर 18600 फीट की ऊँचाई पर ITBP के पोस्ट पर रखा हुआ था। पार्थिव शरीर को भेजने के लिए हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल हुआ। बीएसएफ ने बताया कि 1977 बैच के अफसर नेगी माउंट एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ाई करने वाले सबसे बुजुर्ग पुलिस अधिकारी माने जाते हैं। उन्होंने 2006 में 56 साल की उम्र में माउंट एवरेस्ट पर विजय हासिल की थी। इसके अलावा वे बीएसएफ की केंद्रीय पर्वतारोही टीम के सीनियर सदस्य भी थे।
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के फतेहपुर थाना के एक गाँव में अपनी ही नाबालिग बेटी से अब्बू द्वारा दुष्कर्म करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपित अब्बू, गुलाम रसूल ने पिछले 1 साल से अपनी ही 16 साल की बेटी को हवस शिकार बनाया। वहीं लगातार दुष्कर्म के बाद जब उसकी बेटी 7 माह गर्भवती हो गई तब मामले का खुलासा हुआ।
इस मामले में पीड़ित किशोरी ने अपने अब्बू गुलाम रसूल के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज करवाया है। बाप बेटी के रिश्तें को शर्मसार करती इस घटना को लेकर पुलिस अधीक्षक डॉ अरविंद चतुर्वेदी ने बुधवार (30 सितंबर, 2020) को बताया कि शहर कोतवाली के फतेहपुर क्षेत्र निवासी एक 16 साल की गर्भवती किशोरी ने अपने अब्बू पर दुष्कर्म का आरोप लगाया है।
दर्ज शिकायत के अनुसार आरोपित गुलाम रसूल को लेकर पुलिस ने बताया कि वह आपराधिक प्रवृत्ति का है और अपने आपराधिक कारनामों की वजह से कई बार जेल भी जा चुका है। उस पर डकैती और हमले के कई मामले भी दर्ज है। गुलाम रसूल की पत्नी की 2 साल पहले ही मृत्यु हो गई थी जब वह अपने 8 वें संतान को जन्म दे रही थी।
पत्नी की मौत के बाद उसने अपनी 16 साल को बेटी को हवस का शिकार बनाना शुरू कर दिया। घर में उसकी दरिंदगी को रोकने वाला भी कोई नहीं था। वहीं बेटी के विरोध करने पर वह उसे मारता-पिटता और धमका कर रखता था। लगभग एक साल से उसने अपनी बेटी का कई बार यौन शोषण किया। इसी दौरान वह गर्भवती हो गई। गर्भवती होने के बावजूद अब्बू अपनी बेटी से शारीरिक संबंध बनाता रहा।
इस दरिंदगी के बारे में किशोरी की बुआ को 24 सितंबर को पता चला, जब पीड़िता के भाई का निकाह समारोह था। घर मे काफी नाते रिश्तदार मौजूद थे। इसी बीच घर का काम करने के दौरान उसके पेट में तेज दर्द शुरू हो गया। जिसके बाद लड़की के फूफी को अपने भाई की दरिंदगी की जानकारी हुई तो उनके होश उड़ गए। पीड़िता की फूफी ने उसे अपने साथ लेकर इलाके के थाने में शिकायत दर्ज कराई। जिसके बाद से आरोपित गुलाम रसूल फरार है।
पुलिस ने बताया कि किशोरी जब मुकदमा दर्ज कराने आई थी तो उसकी हालत ठीक नहीं थी। इस कारण उसे सीएचसी में भर्ती कराया गया, हालत में सुधार न होने पर चिकित्सकों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। बुधवार को किशोरी ने बच्ची को जन्म दिया, पर उसकी मृत्यु हो गई।
पुलिस अधीक्षक ने बताया की फरार आरोपित गुलाम रसूल की तत्काल सूचना अपने आला अधिकारियों को दे दी गई थी। किशोरी और मृत बच्चें का मेडिकल कराया गया है। आरोपी पिता गुलाम रसूल के विरुद्ध कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर उसकी तलाश की जा रही है।
कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा आज बृहस्पतिवार (अक्टूबर 01, 2020) को अपने भाई राहुल गाँधी के साथ हाथरस कांड की पीड़िता के परिवार से मुलाकात करने के लिए दिल्ली से रवाना हुए हैं। कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ताओं की भीड़ को जब पुलिस द्वारा रोका गया तो दोनों भाई-बहन अपने कार्यकर्ताओं के साथ पैदल ही निकल पड़े। इस बीच खबर आ रही है कि राहुल गाँधी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
इस बीच राहुल गाँधी के काफिले को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा बॉर्डर पर ही रोक दिया गया और उनके साथ धक्का-मुक्की की बातें भी सामने आ रही हैं। जब पुलिस ने राहुल गाँधी को रोकने का प्रयास किया तो राहुल गाँधी जमीन पर गिर गए। हालाँकि, राहुल गाँधी का यह वीडियो देखते वक्त यह प्रतीत हो रहा है कि वह सुरक्षित जगह देखने के बाद घास के ऊपर खुद ही गिर गए थे। राहुल गाँधी ने कहा कि प्रशासन चाहे कितना भी रोके वो हाथरस जाकर रहेंगे।
ध्यान से देखो.. गिरने की जगह भी नही थी.. बंदे ने पहले जगह बनाई.. फिर मुलायम घाँस देखी फिर गिरा.. ?? pic.twitter.com/8E4N5NOq18
पुलिस ने राहुल गाँधी से कहा कि आपको आगे नहीं जाने देंगे, आपको अरेस्ट कर रहे हैं। राहुल गाँधी ने पुलिस से कहा कि मैं अकेले जाना चाह रहा हूँ। इस पर पुलिस ने कहा कि आप को धारा 188 के तहत अरेस्ट कर रहा हूँ। पुलिस ने कहा कि धारा 188 के तहत आप भीड़ के साथ नहीं जा सकते।
प्रियंका गाँधी के भाई राहुल गाँधी ने कहा, ”अभी-अभी पुलिस ने मुझे धक्का दिया, मुझ पर लाठीचार्ज किया और मुझे जमीन पर फेंक दिया। मैं पूछना चाहता हूँ कि क्या केवल मोदी जी ही इस देश में चल सकते हैं? एक सामान्य व्यक्ति नहीं चल सकता है? हमारा वाहन रोक दिया गया, इसलिए हमने चलना शुरू किया।”
बहन प्रियंका भी लगा चुकी है झूठे आरोप
गौरतलब है कि पुलिस पर इस प्रकार का झूठा आरोप राहुल गाँधी की बहन प्रियंका गाँधी वाड्रा भी लगाती आई हैं। दिसम्बर 2019 में ही नागरिकता कानून को लेकर चल रही राजनीति के बीच प्रियंका गाँधी ने झूठा आरोप लगाते हुए कहा था कि एक महिला अधिकारी ने उनका गला दबाया और धक्का देकर गिरा दिया।
प्रियंका गॉंधी से कथित बदसलूकी को लेकर कॉन्ग्रेस ने एक वीडियो भी जारी किया था लेकिन दिलचस्प बात यह थी कि इस वीडियो में प्रियंका गॉंधी के साथ कोई जोर-जबर्दस्ती नहीं दिखाई पड़ी।
प्रियंका गाँधी और राहुल गाँधी एक बड़ा काफीला लेकर पीड़ित परिवार से मिलने निकले हैं जिस कारण हाइवे पर लंबा जाम लग गया है। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की संख्या अधिक होने से यूपी पुलिस इस काफिले को दिल्ली वापस नहीं कर पाई। हाथरस के जिलाधिकारी का कहना है कि जिले की सीमाएँ सील हैं और धारा 144 लागू कर दी गई है।
कॉन्ग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से ट्वीट कर लिखा कि सत्य और अहिंसा की लड़ाई में हर बार हिंसा बाधक बनी है, लेकिन हर बार सत्य ने अहिंसा के बल पर हिंसा को हराया है।
उल्लेखनीय है कि गत 14 सितंबर को उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के चंदपा थाना क्षेत्र स्थित एक गाँव में 19 साल की एक दलित लड़की के साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। घटना के बाद पुलिस ने इस मामले में 4 आरोपितों को गिरफ्तार किया है।