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रिया चक्रवर्ती गिरफ्तार, NCB के सामने लिए 25 बॉलीवुड सितारों के नाम: बड़े ड्रग्स नेटवर्क का होगा खुलासा!

NCB ने रिया चक्रवर्ती को गिरफ्तार कर लिया है। रिया पहले कहती आ रही थीं कि वो सुशांत के लिए ड्रग्स खरीदती थीं लेकिन खुद इस्तेमाल नहीं करती थीं पर अब उन्होंने कबूल कर लिया है कि वो ड्रग्स का सेवन करती थीं। रिया ने मान लिया है कि उन्होंने ड्रग्स लिया था और इसके लिए सुशांत सिंह राजपूत ने मजबूर किया था, ऐसा मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है। अब वो गिरफ्तार की जा चुकी हैं, जिसके बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा।

सुशांत सिंह राजपूत मामले में ड्रग्स एंगल सामने आने के बाद नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) रिया चक्रवर्ती और उनके करीबियों से लगातार पूछताछ कर रहा है, जिसमें कई अहम खुलासे हुए हैं। रिया चक्रवर्ती ने खुद के ड्रग्स लेने की बात मानी है और साथ ही 25 ऐसे बॉलीवुड के लोगों के नाम लिए हैं, जो इस ड्रग्स नेटवर्क में शामिल हैं। लगातार 3 दिनों तक चली NCB द्वारा रिया की पूछताछ के बाद अब उन 25 सितारों पर एजेंसी की नजर है।

NCB सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि जल्द ही उन 25 बॉलीवुड सितारों को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शौविक के मोबाइल फोन और लैपटॉप की फॉरेंसिक जाँच की गई। दोनों 2017 से ही ड्रग्स के इस खेल में जुड़े हुए हैं। फोन कॉल्स, चैट्स और मैसेजों से पता चला है कि दोनों कई ड्रग्स सप्लायरों से संपर्क में हैं। रिया पहले भी कबूल कर चुकी हैं कि वो सुशांत के लिए ड्रग्स खरीदती थीं।

इससे पहले नार्कोटिक्स ब्यूरो ने मामले के इस पहलू पर जाँच करते हुए रिया के घर से कई अहम सबूत भी इकट्ठा कर लिए थे। नार्कोटिक्स ब्यूरो की एक और टीम ने सैमुएल मिरांडा के घर भी छापेमारी की थी। आज (4 सितंबर 2020) को सुबह के लगभग 6:30 बजे NCB की टीम छापा मारने के लिए रिया चक्रवर्ती के घर पहुँची थी। छापा मारने वाले नार्कोटिक्स ब्यूरो के इस समूह में कुल 8 सदस्य थे। अब रिया को कस्टडी में लिया जा सकता है।

पंचर बनाने वाले, सिलाई करने वाले कैसे महँगे कपड़े पहनकर हिंदू लड़कियों को बनाते हैं लव जिहाद का शिकार? जानिए बजरंग दल से

देशभर में लव जिहाद के तमाम किस्से होने के बावजूद वामपंथियों का ऐसा मानना रहा है कि इसकी संकल्पना दक्षिणपंथियों ने तैयार की है, वास्तविकता में इसका समाज से कोई लेना देना नहीं है। अब हालाँकि उनकी यह सोच कितनी गलत है इसे पुराने उदाहरणों से न समझकर एकदम ताजा केसों पर बात करते हैं।

पिछले दिनों हमने देखा कि उत्तर प्रदेश के पश्चिमी इलाके खासकर कानपुर में लव जिहाद के तमाम मामले उजागर हुए। चाहे फिर वह जूही कालोनी की शालिनी यादव का हो या लखीमपुर खेरी की वह 18 वर्षीय दलित जिसके शव को काट कर किसी दिलशाद ने तालाब में फेंक दिया था। इसके बाद पंकी मामला जहाँ मोहसिन और आमिर को मुस्कान केस में गिरफ्तार किया था और फिर गोविंद नगर का केस जहाँ ‘काला जादू करके’ लड़की का ब्रेनवॉश किया और उसका धर्मपरिवर्तन कराया गया। ये सभी मामले कानपुर से आने के बाद इन मामले में एसआईटी की टीम अब वहाँ लव जिहाद मामले की जाँच में जुटी है।

हालाँकि, देखने वाली बात ये है कि ऐसे केस जब भी सामने आते हैं तो एक बहुत ही तय पैटर्न देखने को मिलता है। जैसे, इन मामलों में प्रायः, संप्रदाय विशेष का युवक का परिवार आर्थिक रूप से मजबूत नहीं होता, वो या तो बेरोजगार होता है या फिर छोटे-मोटे काम करके अपना पेट पालता है। लेकिन, सोचने वाली बात ये है कि जब उन लोगों को हिंदू लड़कियों को फँसाना होता है तो अचानक खुद को मेंटेन रखने के लिए इन पर पैसे आ जाते हैं। वह महँगे कपड़े पहनते हैं, महँगे तोहफे खरीदते हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात जब वह पकड़े जाते हैं तो कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए उन्हें अव्वल दर्जे की कानूनी मदद भी मिलती है।

इन सबको देखते हुए सवाल तो उठता है कि आखिर हिंदू लड़कियों से प्रेम के दौरान खुद को सजाने के लिए उनके पास पैसा कहाँ से आता है? शालिनी यादव के केस में उसके भाई ने पूछा था कि फैजल बेरोजगार है, और उसके पिता फर्नीचर डीलर हैं, तो उसके पास आखिर शालिनी को पहले कानपुर से दिल्ली और दिल्ली से प्रयागराज ले जाने के पैसे कहाँ से आए? किसने उसे फंड दिया? आखिर कैसे उसका केस वरिष्ठ वकील न केवल दिल्ली हाईकोर्ट में लड़ रहे हैं, बल्कि इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी लड़ रहे हैं?

रिपोर्ट बताती है कि पंकी केस में भी यही हुआ था। मोहसिन खान और आमिर गरीब परिवार से थे, फिर भी उन्हें छुड़ाने के लिए पैसा पानी की तरह बहाया गया। लड़की के पिता का कहना था कि इंसाफ की गुहार लिए जब वह कोर्ट गए तो 100 से ज्यादा युवक आरोपितों के समर्थन में खड़े थे।

ऑपइंडिया की बजरंग दल की राष्ट्रीय महिला परिषद मुखिया निधि अवस्थी से बातचीत

लव जिहाद के इसी पैटर्न को गहराई से समझने के लिए ऑपइंडिया ने बजरंग दल की राष्ट्रीय महिला परिषद मुखिया निधि अवस्थी से बात की। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के पश्चिम में इस तरह के अपराध जो सामने आए हैं वो किसी एक का काम नहीं हो सकते। ये संगठित अपराध है। इसमें इन्हें आर्थिक व अन्य जरूरी सामान इस्लामिक संस्थान मुहैया करवाते हैं। वे कहती हैं कि इस्लामी कट्टरपंथी जो ऐसी संस्थाओं को संचालित करते हैं उनका उद्देश्य ही कई हिंदुओं का धर्म परिवर्तन करवाना होता है। इसलिए, वह इसके लिए इसी समुदाय के ऐसे नौजवानों को नियुक्त करते है, जो दिखने में अच्छे हो और बातचीत भी सही से करना जानते हैं। इसके अलावा जो थोड़े गरीब घर के होते हैं, उन्हें हिंदू लड़कियों के फँसाने और ब्रेनवॉश की तकनीक सिखाई जाती है।

लव जिहाद के ख़िलाफ़ आवाज उठाते बजरंग दल कार्यकर्ता

निधि अवस्थी के अनुसार, हिंदू लड़कियों की जाति से तय होता है समुदाय विशेष के लड़कों को कितना पैसा मिलेगा। अगर लड़की ब्राह्मण या ठाकुर है तो उन्हें 5 लाख मिलते हैं। लड़की यादव या गुप्ता होती है तो उसका रेट 3 लाख होता है। लड़की एससी/एसटी हो तो उसे 2-2.5 लाख रुपए मिलते हैं। बजरंग दल की राष्ट्रीय महिला परिषद की मानें तो कानपुर में लव जिहाद का शिकार होने वाली अधिकांश लड़कियाँ कानपुर की हैं।

उनका कहना है कि इन मंसूबों को कामयाब बनाने में सोशल मीडिया की मुख्य भूमिका होती है। चूँकि वहाँ किसी की आर्थिक स्थिति पहचान पाना बेहद मुश्किल होता है तो ये लड़के वहाँ तस्वीरें डालते हैं और हिंदू लड़कियाँ आकर्षित होकर उनसे मिलने चली जाती हैं। इन लड़कों को प्रशिक्षित किया जाता है कि कैसे लड़की को प्रभावित करना है। ये लड़की से बात करते हुए उसकी कमजोरी जानते हैं फिर उसी के हिसाब से उसे जाल में फँसाते हैं।

गौरतलब है कि कानपुर में एक के बाद एक करके लव जिहाद के 9 केस सामने आने के कारण अब इस मामले पर एसआईटी जाँच कर रही है। उन्होंने कानपुर में पीएफआई और सिमी जैसे कट्टरपंथी संगठनों को भी प्रतिबंध कर दिया है। कुछ रिपोर्ट्स में आशंका जाहिर की गई है कि हो सकता है इन केसों के पीछे पाकिस्तान का हाथ हो। एसआईटी टीम का नेतृत्व करने वाले एसपी दीपर भूकर ने टीम को निर्देश दिया है कि वह ऐसे संगठनों के बारे में व आरोपितों के मोबाइल नंबरों के बारे में जानकारी एकत्र करें। वहीं बजरंग दल भी बड़ी सक्रियता से इस विषय पर काम कर रहा है। बलरंग दल के राज्य सचिव रामजी तिवारी का भी दावा है कि राष्ट्र विरोधी ताकतें ऐसे संगठनों की मददगार हैं।

बजरंग दल के राज्य सचिव रामजी तिवारी कानपुर में लव जिहाद पर प्रदर्शन करते हुए

उनका कहना है कि लव जिहाद देश भर में व्यापक स्तर पर हो रहा है। ये राष्ट्र को सिविल वॉर की ओर धकेलने का एक प्रयास है। यह कट्टरपंथी हिंदुओं के प्रति नफरत फैलाना चाहते हैं। ये लगातार कोशिशें करते हैं कि भारत की सभ्यता को कलंकित करें। बजरंग दल के राज्य सचिव इसे संगठित साजिश करार देते हैं। वह कहते हैं कि इस्लामिक संगठन ऐसे लोगों को फंड व साज सज्जा का सामान देता है और बदले में ये लोग उनके कट्टरपंथी एजेंडा चलाने में उनकी मदद करते हैं।

गौरतलब है कि लव जिहाद मामले में कई बार सामूहिक रूप से किए गए अध्य्यन में पाया गया कि समुदाय विशेष के युवक सोशल मीडिया पर फेक आईडी बनाकर हिंदू लड़कियों को फँसाते हैं। वह पहले हिंदुओं की तरह वेशभूषा धारण करते हैं फिर उनसे रिश्ता बनाकर शारीरिक संबंध स्थापित करते हैं। कई बार इस अपराध की वीडियो बना ली जाती है। बाद में रिकॉर्डिंग दिखा कर या तो उनका धर्म परिवर्तन हो जाता है या फिर निकाह।

ऐसे अधिकतर रिश्ते शरीया कानून के हिसाब से ही चलते हैं जहाँ लड़की का धर्म परिवर्तन अनिवार्य बताया जाता है। ये लड़कियाँ अधिकांश 15-20 साल की होती हैं। जब निकाह के बाद इन लड़कियों के परिवार इन्हें छोड़ देते हैं तब इन्हें ऐसे बंधन में बाँध कर रखा जाता है जहाँ औरत को कोई अधिकार नहीं होते। जब वह आवाज उठाती हैं तो उन्हें कई बार प्रताड़ित किया जाता है और कई बार जान से मार दिया जाता है।

साथ ही, ऐसे कई मामलों में यह भी देखा गया है कि लड़कियों का सामूहिक शारीरिक शोषण से ले कर, अपने दोस्तों, भाई, पिता आदि से बलात्कार तक करवाते हैं। जब ऐसे मामले सामने आते हैं तो पता चलता है कि लक्ष्य प्रेम का नहीं, बल्कि हिन्दू लड़कियों और उनके परिवारों को समाज में नीचा दिखाना और परिवारों को तबाह करना होता है।

पश्चिम बंगाल में ताशीनारा बीबी के परिजनों ने की हॉस्पिटल स्टाफ सौम्यदीप की पिटाई, सेन ने कहा- अब मैं यहाँ काम नहीं कर पाऊँगा

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना में बडगे बुडगे क्षेत्र में जगन्नाथ गुप्ता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज अस्पताल में 45 वर्षीय मरीज ताशीराना बीबी के परिजनों ने हॉस्पिटल के एक कर्मचारी की बेरहमी से पिटाई की।

अधिकारियों के अनुसार, ताशीनारा बीबी को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। डॉक्टरों ने मरीज के परिवार को बताया कि उसे ICU में भर्ती किया जाना है। मगर इसके साथ ही उन्होंने खेद जताते हुए यह भी कहा कि फिलहाल कोई बेड खाली नहीं है, सभी बेड भरे हुए हैं। इसी बीच, मरीज के परिजन बिना अनुमति के आईसीयू वार्ड में घुस गए और तस्वीरें क्लिक करने लगे। बाद में, वो फिर से अस्पताल आए और फ्रंटलाइन वर्कर सौम्यदीप सेन की पिटाई करनी शुरू कर दी, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए। 

उसी समय, परिवार के एक अन्य सदस्य ने घातक हथियार के साथ अस्पताल में एक सुरक्षाकर्मी को डराया। खबर 24 X 7 से बात करते हुए, एक सुरक्षा गार्ड ने कहा, “वे मरीज के साथ आपातकालीन वार्ड में आए थे। मरीज के साथ दो लोग थे। हमने आपातकालीन वार्ड में एक व्यक्ति को अनुमति दी और दूसरे व्यक्ति को इंतजार करने के लिए कहा।”

उन्होंने आगे कहा, “डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि एक आईसीयू बिस्तर की आवश्यकता होगी, लेकिन फिलहाल कोई भी बेड उपलब्ध नहीं था। तभी परिवार के कई अन्य सदस्य आए और जबरदस्ती आईसीयू में घुस गए। उनमें से एक ने मुझे एक हथियार दिखाया और पूछा, ‘क्या आप यह चाहते हैं?’ इस बीच, उन्होंने हमारे स्टाफ सदस्य की पिटाई शुरू कर दी।” उन्होंने आगे कहा कि वे प्रदर्शन करेंगे, सहकर्मी फ्रंटलाइन वर्कर के लिए न्याय की माँग करेंगे। उन्हेंने पूछा, “हमारे स्टाफ के सदस्य पर हमला क्यों किया गया?” 

बीजेपी बंगाल द्वारा साझा किए गए वीडियो में, पीड़ित के हाथ में क्रेप बैंडेज लगा हुआ देखा जा सकता है। सौम्यदीप सेन ने कहा, “मैं कोरोना वायरस टेस्टके लिए ICMR फॉर्म भर रहा था। तभी एक परिवार का सदस्य मेरे पास आया और मरीज के स्वास्थ्य के बारे में पूछा। कोंकण दा (अस्पताल के एक अन्य कर्मचारी) ने मुझे बताया कि मरीज को आईसीयू बिस्तर की जरूरत थी। मैंने परिवार के सदस्य से विनम्रता से कहा कि मरीज के लिए कोई बिस्तर उपलब्ध नहीं है। परिवार के अन्य सदस्यों ने मुझे आईसीयू में उनके साथ जाने के लिए कहा, लेकिन मैंने अपने काम करना जारी रखा।”

रिपोर्टर द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या वह ठीक होने के बाद काम करना जारी रखेंगे, सेन ने रोते हुए कहा, “मैं अब यहाँ काम नहीं कर पाऊँगा। मैं अब 8 साल से बुडगे क्षेत्र में रह रहा हूँ। मैं आखिरी बार दुर्गा पूजा के दौरान घर गया था। मुझे लीवर की समस्या है। मैं पिछले 3 दिनों से saline पर हूँ। ”

पीड़ित ने रिपोर्टर से कहा, “मैं दर्द में हूँ, लेकिन फिर भी मैं लोगों के लिए COVID वार्ड में अपनी ड्यूटी कर रहा हूँ। मैंने उन्हें सौहार्दपूर्ण और इमानदारी भरे शब्दों में कहा कि ICU में कोई बिस्तर नहीं है। उन्होंने मेरी बात नहीं मानी और (इसके बजाय मेरी पिटाई की) और मैं चाहता हूँ कि किसी और हॉस्पिटल वर्कर की पिटाई न हो, जैसा कि मेरे साथ हुआ। मैं अत्यंत कष्ट में हूँ।”

भाजपा की राज्य इकाई ने इस घटना की निंदा की और पुलिस कार्रवाई में कमी की शिकायत की। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को संबोधित एक ट्वीट में, पार्टी ने कहा, “ताशीनारा बीबी के परिजनों ने बंगाल के एक मेडिकल कॉलेज में हथियार के साथ COVID फ्रंट-लाइनर्स पर शारीरिक हमला किया और धमकी दी। अस्पताल का कर्मचारी अभी भी सदमे में है। उम्मीद के मुताबिक 24 घंटे के बाद भी कोई पुलिस कार्रवाई नहीं हुई।”

गौरतलब है कि कोलकाता स्थित नील रतन सरकार मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में सोमवार (10 जून) को एक बुजुर्ग मरीज मोहम्मद शाहिद की मौत के बाद उसके परिजनों ने डॉक्टर परिबाह मुखोपाध्याय पर घातक हमला किया। डॉक्टर्स के मुताबिक, करीब 200 की भीड़ ने मोहम्मद शाहिद की मौत के बाद अस्पताल में जमकर उत्पात मचाया। इस घटना के बाद राज्य के विभिन्न अस्पतालों के डॉक्टर न्याय की माँग करते हुए हड़ताल पर चले गए थे।

हिन्दू युवक से विवाह के कारण MP में अब्बू का शव कब्रिस्तान में दफनाने से इनकार, पुलिस के आने पर हुआ अंतिम संस्कार

मध्य प्रदेश के श्योपुर में एक हिंदू लड़के से शादी करने पर समुदाय विशेष की महिला को अपने समुदाय की प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। रवीना शर्मा (विवाह के बाद बदला हुआ नाम) नाम की इस महिला के अब्बू की जब मौत हुई, तो उसके समुदाय द्वारा कब्रिस्तान में दफनाने से उन्हें रोक दिया गया। यहाँ तक कि बाद में पुलिस विभाग में आईजी स्तर के हस्तक्षेप के बाद ही महिला के पिता के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हो पाई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रविवार (सितम्बर 06, 2020) को सलपुरा कब्रिस्तान के पास पुराने घरों में रहने वाली रवीना के अब्बू इदा खान की मौत हो गई। लेकिन समुदाय विशेष के कुछ लोगों ने शव को कब्रिस्तान में दफनाने का विरोध किया। रवीना ने अपने समुदाय के लोगों से बहुत प्रार्थना की लेकिन उनकी बातों का लोगों पर कोई प्रभाव नहीं हुआ।

रवीना का अपराध यह था कि उसने कुछ ही समय पहले एक हिन्दू युवक से लव मैरिज की थी। और इसी कारण उसके पहले मजहब के लोगों ने उसे सबक सिखाने का यह अमानवीय तरीका अपनाया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, जब रवीना के अब्बू इदा खान का शव कब्रिस्तान में दफनाने से रोका गया तो उसने स्थानीय पुलिस से मदद माँगी लेकिन पुलिस से भी उसे कोई मदद नहीं मिली। इसके बाद चंबल आईजी से फोन पर मदद माँगी गई और स्थानीय पुलिस मदद के लिए मौके पर पहुँची। मौके पर पुलिस के पहुँचने के बाद ही रवीना के अब्बू इदा खान का अंतिम संस्कार हो पाया।

पुलिस ने कहा – मजहब नहीं बल्कि कब्रिस्तान की जमीन को लेकर है विवाद

बताया जा रहा है कि इस कब्रिस्तान की जमीन पर वक्फ कमेटी और इदा खान के बीच एक केस चल रहा है। इसी विवाद के चलते कब्रिस्तान की भूमि पर एक घर के निर्माण को लेकर इदा खान की बेटी रवीना शर्मा की रिपोर्ट पर एक FIR भी दर्ज की गई थी। पुलिस का कहना है कि पिछले दिनों ही जमीन पर मकान बनाने को लेकर 30 लोगों ने इदा खान पर हमला भी किया था।

हालाँकि, रवीना ने आरोप लगाया है कि उसके समुदाय के लोग इस कारण भी उससे नाराज हैं क्योंकि उसने अपने मजहब के बजाए एक हिन्दू युवक से विवाह किया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, श्योपुर पुलिस का कहना है कि शव को दफनाने से रोका जरूर गया था, लेकिन किसी अन्य धर्म में बेटी की शादी को लेकर विवाद जैसी कोई बात नहीं थी।

480000 स्वयंसेवक, 85701 स्थानों पर सेवा, 11055000 परिवारों को राशन: कोरोना के खिलाफ जंग में जन-जन के संग RSS

कोरोना संकट की इस घड़ी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शुरू से समाजसेवा में लगा है। अब घरों में शाखा लगाकर बच्चों को भारतीय संस्कृति से अवगत करवाने के साथ-साथ कोरोना वायरस से खुद का व दूसरों का बचाव करने के लिए उपाय बताए जा रहे हैं। जिला प्रशासन के सहयोग से आरएसएस जरूरतमंदों तक भोजन पहुँचाने में भी जुटा है। आरएसएस के सर संघचालक मोहन भागवत के निर्देशों का पालन करते हुए आसपास के पाँच जरूरतमंद परिवारों की मदद करने का अभियान भी जारी है।

हालाँकि, अब लॉकडाउन धीरे-धीरे खुल रहा है, मगर अभी भी दिहाड़ी पर दिन भर मजदूरी करके शाम को दिन भर की कमाई से पेट भरने वालों के पास अभी भी काम की समस्या है। आरएसएस ऐसे लोगों को लगातार भोजन उपलब्ध करा रहा है। आरएसएस के स्वयंसेवक इन लोगों के लिए खाना बनाने से लेकर उनकी पैकिंग और उनके वितरण तक में सोशल डिस्टेंसिंग का खास ख्याल रख रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 4,80,000 स्वयंसेवकों ने अरुणाचल प्रदेश से लेकर कश्मीर और कन्याकुमारी तक 85,701 स्थानों पर सेवा भारती के माध्यम से 1,10,55,000 परिवारों को राशन के किट पहुँचाए हैं। इसके अलावा जरूरतमंदों के बीच 71146000 भोजन के पैकेट्स बाँटे गए हैं। करीब 63,00000 मास्क का वितरण किया गया है।

इन स्वयंसेवकों ने विभिन्न राज्यों में रहने वाले अन्य राज्यों के 13,00000 लोगों की भी सहायता की है। इतना ही नहीं,40,000 यूनिट्स रक्तदान किया है। प्रवासी मजदूरों की सहायता हेतु 1,341 केंद्रों के माध्यम से 23,65,000 प्रवासी मजदूरों को भोजन और 1,00000 मजदूरों को दवाई एवं अन्य मेडिकल सहायता प्रदान की गई है।

इन सबके साथ ही स्वयंसेवकों ने घुमंतू जनजाति, किन्नर, देह व्यापार करने वाले, धार्मिक स्थानों पर श्रद्धालुओं पर निर्भर बंदर, पशु-पक्षी, गोवंश आदि की भी सहायता की है। भीड़ नियंत्रण, स्थानांतर करने वाले श्रमिकों के नाम दर्ज करना, ऐसे असंख्य कार्य प्रशासन के आह्वान पर जगह-जगह स्वयंसेवकों ने किए हैं।  

पुणे में आरएसएस के 1016 स्वयंसेवक, कार्यकर्ताओं ने 27 अप्रैल से अब तक एक लाख लोगों की स्क्रीनिंग की। यह स्क्रीनिंग पुणे के सबसे ज्यादा प्रभावित यानी 168 हॉटस्पॉट जोन में की गई। संघ की ओर से दावा किया गया है कि यह देश में संभवत: पहली बार है, जब संघ स्वयंसेवक प्रशासन के साथ इस तरह से घर-घर जाकर स्क्रीनिंग का काम कर रहे हैं। इसके अलावा पढ़ने के लिए बड़े नगरों में आए और अपने स्थान पर फँसे छात्रों की सहायता की है। खास कर उत्तर पूर्वांचल के छात्रों के लिए विशेष ‘हेल्प लाइन’ बना कर उनकी सहायता भी की और उनके परिवारजन से उनकी बातचीत भी करवाई। मंदिर आदि धार्मिक स्थानों पर भिक्षावृत्ति करने वाले भी इस सहायता यज्ञ के प्रसाद से वंचित नहीं रहे।

आरएसएस का मानना है कि लॉकडाउन वाले स्थानों पर कमजोर तबके के लोगों को राशन आदि की दिक्कत हो सकती है। ऐसे में मानवता का तकाजा है कि ऐसे जरूरतमंदों तक दैनिक जरूरत की वस्तुएँ पहुँचाई जाएँ, जिससे लॉकडाउन की स्थिति में भी भोजन सामग्री के अभाव में कोई  भूखा न रहने पाए।

कोरोना वायरस के इस अभूतपूर्व संकट के समय शासकीय और अर्ध-शासकीय कर्मचारियों के साथ-साथ समाज का बहुत बड़ा वर्ग अपने प्राण संकट में डाल कर पूरे देश में, पहले दिन से आज तक सतत सक्रिय रहा है। बाढ़, भूकंप जैसी अन्य नैसर्गिक आपदाओं के समय राहत कार्य करना और इस संक्रमणशील बीमारी के समय, स्वयं संक्रमित होने की आशंका को देखते हुए भी सक्रिय होना, इनमें अंतर है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ी संगठन ‘सेवा भारती’ लगातार जरूरतमंदों तक मदद पहुँचा रही है। इसके लिए भारतीय कप्तान विराट कोहली ने भी सेवा भारती के कदमों की सराहना की थी।

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने 0.42 मिनट की एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा था, “हैलो दोस्तों, आपका दिन शुभ हो। आपको हैलो के लिए ये मेरा छोटा सा संदेश है। मुझे आशा हैै कि आप लोग स्वस्थ होंगे। मैं दिल्ली सेवा भारती को बधाई देना चाहता हूँ, जिसने पूरे साल अद्भुत काम किया।”

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सेवा कार्यों की सबसे अहम विशेषता यह है कि इसमें किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होता। स्वयं सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने 26 अप्रैल के अपने भाषण में यह स्पष्ट रूप से कहा था, “सेवा-कार्य बिना किसी भेदभाव के सबके लिए करना है। जिन्हें सहायता की आवश्यकता है वे सभी अपने हैं, उनमें कोई अंतर नहीं करना। अपने लोगों की सेवा उपकार नहीं है, वरन हमारा कर्तव्य है।”

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का यह सेवा भाव आज हम सभी लोगों के लिए एक सीख है। प्राचीन भारत के मनीषियों ने हमें निःस्वार्थ सेवा के नैतिक गुण सिखाए थे, लेकिन बाद के सालों में हम यह गुण भूल गए। आज संघ के लोग अपने सेवा कार्यों से हमें यही गुण फिर से सिखा रहे हैं। स्वयंसेवक हमें सिखा रहे हैं कि हमने समाज से लिया तो बहुत कुछ है, लेकिन क्या हम समाज को कुछ दे भी पा रहे हैं या नहीं। ऐसे में जरूरी है कि हम सभी अपने अंदर के स्वयंसेवक को जगाएँ और इस आपदा की घड़ी में माँ भारती की सेवा में जुट जाएँ।

कंगना रनौत को गाली देने वाले 3 नेताओं का CM उद्धव ने किया प्रमोशन: संजय राउत बने शिवसेना के मुख्य प्रवक्ता

लगातार विवादों में रहने वाले शिवसेना नेता और पार्टी मुखपत्र ‘सामना’ के एग्जीक्यूटिव एडिटर संजय राउत के परफॉरमेंस से खुश होकर उन्हें उद्धव ठाकरे ने पार्टी का मुख्य प्रवक्ता के पद से नवाजा है। संजय राउत ने हाल ही में कंगना रनौत के लिए आपत्तिजनक शब्द का प्रयोग किया था और बाद में कहा था कि वो उन्हें ‘नॉटी’ कहना चाह रहे थे। संजय राउत को अब शिवसेना में प्रमोशन मिला है। वो पार्टी के मुख्य प्रवक्ता बन गए हैं।

मंगलवार (सितम्बर 8, 2020) को शिवसेना सुप्रीमो और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने ‘सामना’ के जरिए इसकी घोषणा की। शिवसेना के सांसद अरविंद सावंत, प्रियंका चतुर्वेदी और धीरशिल माने, महाराष्ट्र के मंत्री अनिल परब, उदय सामंत और गुलाबराव पाटिल, विधायक नीलम गोरे, प्रताप सरनाईक और सुनील प्रभु सहित 10 नेताओं को प्रवक्ता के रूप में नियुक्त किया गया। मुंबई की मेयर किशोरी पेडनेकर को भी प्रवक्ता बनाया गया।

ज्ञात हो कि मुंबई की मेयर और शिवसेना नेता किशोर पेडनेकर ने भी कंगना रनौत पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘कंस मामा का वरदान’ बताया था। मेयर ने ‘टीवी 9 मराठी’ के एक ट्वीट की रिप्लाई में मराठी भाषा में ये टिप्पणी की थी। उस खबर में बताया गया था कि कंगना ने मुंबई को अपनी कर्मभूमि बताते हुए कहा था कि वो इस शहर को माँ यशोदा के रूप में देखती हैं, जिसने उन्हें अपनाया और उन्हें अपनी कर्मभूमि के लिए प्यार को साबित करने की कोई ज़रूरत नहीं।

प्रवक्ता बनाए गए प्रताप सरनाईक भी कंगना के खिलाफ धमकी भरी टिप्पणी कर चुके हैं। विधायक ने कहा था कि अगर अभिनेत्री मुंबई में घुसती हैं तो उनकी टाँगें तोड़ दी जाएँगी। धमकी देने के मामले में NCW ने महाराष्ट्र के डीजीपी को पत्र लिखा था। रेखा शर्मा ने कहा था कि कंगना को शिवसेना विधायक की धमकी काफी आपत्तिजनक है। जिन तीन नेताओं का प्रमोशन हुआ, वो सभी कंगना रनौत के खिलाफ टिप्पणी कर चुके हैं।

बाद में संजय राउत ने अपनी सफाई दी और कहा कि महाराष्ट्र में इसका दूसरा मतलब होता है। यहाँ पर इसका मतलब नॉटी और बेईमान होता है। संजय राउत ने कहा, “अगर कोई राजनीति करना चाहता है या फिर माहौल बनाना चाहता है तो किसी भी शब्द का कोई भी अर्थ निकाला जा सकता है। हमारे महाराष्ट्र में जब भी बात करते हैं तो हरामखोर का मतलब नॉटी और बेईमान कहा जाता है। कंगना रनौत नॉटी गर्ल है। मैंने देखा और पढ़ा है कि वह मजाक करती हैं। मैंने अपनी भाषा में कंगना को बेईमान कहा।”

अब नागाओं का वास्तविक हितधारक और हितैषी नहीं है NSCN (IM): अन्य स्टेकहोल्डर्स को भी शामिल किए जाने की माँग

सन 2014 में मोदी सरकार और एनएससीएन (आईएम) के बीच हुए समझौते में इस हिंसावादी संगठन ने कई अनुचित माँगों को डलवाया था। समझौते के दौरान एनएससीएन (आईएम) द्वारा रखी गई एक शर्त विशेष रूप से उल्लेखनीय है।

इस संगठन ने समझौते में यह शर्त रखी थी कि शांति-वार्ता केवल भारत सरकार के शांति-वार्ताकार और एनएससीएन (आईएम) (नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड) के बीच ही हो। उसमें अन्य सशस्त्र संगठनों, शांति-समूहों या व्यापक नागरिक समाज की कोई भागीदारी न हो। इस शर्त के माध्यम से इस संगठन ने अन्य सभी ‘स्टेकहोल्डर्स’ को हाशिए पर कर दिया है, और अपनी केन्द्रीय भूमिका और स्थिति सुनिश्चित कर ली है।

इस शर्त का मूल कारण यह है कि यह संगठन नागा-समस्या के समाधान की प्रक्रिया पर अपना एकाधिकार और वर्चस्व बनाए रखना चाहता है। जबकि, आज नागा-समस्या के वास्तविक स्टेकहोल्डर्स कई अन्य संगठन हैं।

नागालैंड में कुल 14 नागा समुदाय रहते हैं। उनकी संख्या कुल नागा जनसंख्या का 80 फीसदी है। इन समुदायों के अलग-अलग छात्र संगठन और महिला संगठन हैं। इसके नागालैंड गाँव बूढ़ा फेडरेशन (1585 गाँव प्रमुखों की सर्वोच्च संस्था), नागा ट्राइब्स कौंसिल और नागा नेशनल पॉलिटिकल ग्रुप जैसे अनेक प्रभावी संगठन हैं, जो कि नागा अस्मिता और अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण ढंग से कार्यरत हैं।

ये ‘नागा क्लब’ और ‘नागा पीपुल्स कन्वेंशन’ जैसे संगठनों की वैचारिक विरासत और कार्यशैली के उत्तराधिकारी संगठन हैं। ये संगठन नागा समुदाय के वास्तविक हितैषी और हितधारक हैं। 7 नागा नेशनल पॉलिटिकल ग्रुपों ने मिलकर शांति-वार्ता में भागीदारी और समस्या के समाधान के लिए एक ‘वर्किंग कमेटी’ भी बनाई है।

इनके अलावा 7 सशस्त्र संगठन भी हैं, जो भूमिगत सक्रिय हैं। इन संगठनों के साथ एनएससीएन (आईएम) की हिंसक प्रतिद्वंद्विता है। केंद्र की सरकारों द्वारा शांति-वार्ता और संघर्ष-विराम के दौरान इस संगठन को दिए अत्यधिक महत्व ने उत्तरोत्तर इसका भाव बढ़ाया है। बारीकी से देखें तो केंद्र सरकार ने इस हिंसावादी संगठन को नागा हितों का ‘कॉपी राइट’ देकर इसकी शक्ति और महत्व को अनायास बढ़ाया है। इस संगठन को नागा हितों का एकमात्र प्रतिनिधि संगठन और हितधारक मानना और सिर्फ इसके साथ ही शांति-वार्ता और संघर्ष-विराम करना ऐतिहासिक रणनीतिक भूल है।

अपनी स्थापना के प्रारम्भिक समय में इस संगठन ने बेहिसाब खून-खराबे और दहशतगर्दी के बल पर खूब राष्ट्रीय सुर्खियाँ बटोरीं। यह उसकी कुटिल रणनीति थी जो बेहद कामयाब हुई। उसने न सिर्फ सुरक्षा बलों, पुलिसवालों, उद्योग-धंधे चलाने वालों और राजनेताओं की नृशंस हत्याएँ कीं, बल्कि अपने असंख्य नागा भाई-बहिनों को भी बेरहमी से मौत के घाट उतारा।

इस खून-ख़राबे और दहशत के बल पर यह संगठन नागा अस्मिता और अधिकारों का स्वघोषित एकमात्र संगठन बन बैठा। इस संगठन को नागा हितों का एकमात्र झंडाबरदार बनाने में राष्ट्रीय मीडिया और एक-के-बाद एक आने वाली केंद्र सरकारों की भी बड़ी भूमिका रही है। पिछले 24 साल में हुई शांति-वार्ताओं और संघर्ष-विरामों ने इस संगठन को लगातार खुराक दी है।

एकदम शुरू में विभिन्न नागा समुदायों की काफी बड़ी संख्या का इस संगठन से भावनात्मक जुड़ाव था। लेकिन इसके सभी महत्वपूर्ण पदों पर मणिपुर के तन्ग्खुल समुदाय के हावी होते जाने से लोगों का मोहभंग होने लगा। उल्लेखनीय है कि इस संगठन का स्वयंभू चीफ थुंगालेंग मुइवा भी मणिपुर के अल्पसंख्यक नागा समुदाय तन्ग्खुल से ही है।

उसने सुनियोजित ढंग से अपने समुदाय को आगे बढ़ाकर अन्य समुदायों को किनारे कर दिया और अपनी और अपने समुदाय की स्थिति अत्यंत मजबूत कर ली। किन्तु इस प्रक्रिया में इस संगठन की विश्वसनीयता में भारी गिरावट आयी और मुइवा का यह जेबी संगठन नागाओं का प्रतिनिधि संगठन न रहकर तन्ग्खुल समुदाय का प्रतिनधि संगठन मात्र रह गया है।

परिणामस्वरूप अनेक नागा समुदायों ने अपने पृथक और स्वतंत्र संगठन बना लिए हैं। उन्होंने एनएससीएन (आईएम) या कहें तन्ग्खुल समुदाय के वर्चस्व वाले पैन नागा हो-हो, नागा स्टूडेंट फेडरेशन और नागा मदर्स एसोसिएशन जैसे संगठनों से सम्बन्ध और सदस्यता-विच्छेद कर लिया है।

यह इस संगठन के सीमित और अल्पसंख्यक आधार का प्रमाण है। इसकी स्वीकार्यता और विश्वसनीयता में भारी गिरावट आई है। इसलिए केवल एनएससीएन (आईएम) को नागाओं का प्रतिनधि संगठन और एकमात्र हितधारक मानकर उससे ही वार्तालाप करना अन्य संगठनों और समुदायों की ‘आवाज’ की उपेक्षा करने जैसा है।

केंद्र सरकार और उसके रणनीतिकारों को इस बार उस भूल से बचने की जरूरत है, जो पिछले 24 साल में बार-बार दुहराई गई यह भूल नागा-समस्या के समाधान के लिए होने वाली शांति-वार्ता का एक मात्र स्टेकहोल्डर एनएससीएन (आईएम) को मानने और उसकी आपराधिक गतिविधियों का गंभीर संज्ञान लेकर उन पर अंकुश न लगाने की थी।

शांति-वार्ता और तद्जन्य संघर्ष-विराम को नई-नई वजहों से लम्बा खींचना उसकी पुरानी और अत्यंत लाभप्रद रणनीति रही है। इस बार केंद्र सरकार को शांति-वार्ता को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के लक्ष्य के साथ अन्य स्टेकहोल्डर्स को भी वार्ता के दायरे में शामिल करना चाहिए।

गालिब खाँ, नावेद, रिजवान, रहीमुद्दीन कर रहे थे अवैध तमंचे-पिस्टल का निर्माण: UP पुलिस के साथ मुठभेड़ में हुए गिरफ्तार

उत्तरप्रदेश के थाना बहादुरगढ़ में अवैध हथियारों को बनाकर उन्हें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्रों (NCR) में बेचने के आरोप में हापुड़ पुलिस ने कल (सितंबर 7, 2020) 4 लोगों की गिरफ्तारी की। इनकी पहचान गालिब खाँ, नावेद अहमद, रिजवान, रहीमुद्दीन सैफी के रूप में हुई।

पुलिस ने बताया कि उन्होंने अवैध हथियार बनाने एवं NCR क्षेत्र में सप्लाई करने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर इन 4 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार इनके कब्जे से उन्होंने 11 पिस्टल, 21 तमंचे, 8 अधबने तमंचे, 5 रायफल, भारी मात्रा में हथियार बनाने के उपकरण/कारतूस एवं ब्रेजा कार बरामद की।

हापुड़ पुलिस के ट्विटर पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, इन आरोपितों ने पूछताछ में बताया कि देशी असलहा, पिस्टल, तमंचे बनाकर बेचने का काम ये सभी काफी समय से मेरठ में कर रहे थे। अभी कुछ दिन पहले जब मेरठ पुलिस को इसकी भनक लगी, तो यह पकड़े जाने के डर से भाग आए।

इनका कहना है कि चूँकि कोरोना की वजह से मंदी चल रही है इसलिए कुछ दिन इन्होंने गालिब के घर पर असलहा बनाने का काम किया। मगर, मेरठ में दिलशाद के घर पर जिस मशीन पर वह तमंचों की नाल आदि ढालते थे वह भारी होने के कारण वहाँ से नहीं आ पाई।

ऐसे में फिर भी अधिकतर सामान गालिब के घर पर आ गया था। इसी के बाद इन आरोपितों ने बहादुरगढ़ में पिस्टल तमंचे व बंदूक बनाने का काम शुरू किया। इनका कहना है कि क्योंकि प्रधानी के चुनाव आ रहे हैं। इसलिए इस समय इनकी माँग बढ़ती है।

आरोपित बताते हैं कि अभी तक उन्होंने जितने भी पिस्टल तमंचे बनाए उन्हें वह चोरी छिपे बेचने जा रहे थे। लेकिन पुलिस ने पकड़ लिया। एक पिस्टल की कीमत 35 हजार रुपए है। तमंचा 5 हजार व बंदूक 10 हजार की है। इनके ऊपर पुलिस ने आईपीसी की धारा 147, 149, 307 और 34 के तहत मामला दर्ज किया है। इसके अलावा अभी दो अभियुक्त मामले में फरार हैं। इनकी पहचान निखिल और दिलशाद के रूप में हुई है।

परिवार ने जबरन दी पागलपन की दवाई, हाउस अरेस्ट में रखा… करण जौहर ने किया अपमानित: आमिर का भाई फैसल खान

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान के भाई फैसल ने अपने परिवार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्हें जबरन एक साल तक हाउस अरेस्ट में रखा गया और गलत-गलत दवाएँ खिलाई गईं। करण जौहर का नाम लेते हुए उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में पूर्वग्रह या पक्षपात कोई नई चीज नहीं है और ये हमेशा से अस्तित्व में रही है, उन्होंने व्यक्तिगत रूप से इसे अनुभव किया है। साथ ही उन्होंने उस घटना को भी याद किया, जब फिल्म निर्देशक करण जौहर ने उनका अपमान किया।

‘बॉलीवुड हंगामा’ को दिए गए इंटरव्यू में फैसल खान ने कहा कि अगर आपकी फिल्म फ्लॉप हो जाए तो आपके साथ वो लोग अच्छे से व्यवहार नहीं करते। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति को वो लोग देखते तक नहीं और ऐसा उनके साथ हो चुका है। उन्होंने कहा कि वो नाम तो नहीं लेना चाहते लेकिन एक बार ऐसा हुआ कि जब वो किसी से बात कर रहे थे तो करण जौहर ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उनका अपमान किया।

फैसल ने अपने भाई आमिर के साथ आई फिल्म ‘मेला’ की बात करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि उनके काम की तारीफ होगी लेकिन उन्हें पूरी तरह साइडलाइन कर दिया गया। हालाँकि, उन्होंने ये भी कहा कि बाहरी लोगों के लिए फिल्म इंडस्ट्री में स्थान बनाना असंभव नहीं है। उन्होंने इसके लिए शाहरुख़ खान, अक्षय कुमार और आयुष्मान खुराना का उदाहरण दिया। उन्होंने माना कई स्टार किड्स के साथ शुरू में फायदा रहता है लेकिन बाद में वो अपने काम से जज किए जाते हैं।

फैसल खान ने इससे पहले 2007 में भी आमिर खान और अपने परिवार पर आरोप लगाया था कि उन्हें जानबूझ कर मानसिक बीमारी की दवाएँ दी गईं और 1 साल के लिए हाउस अरेस्ट में रखा गया। इसे याद करते हुए फैसल ने कहा कि उन्हें जबरन पागल घोषित करने का प्रयास किया गया था। उन्होंने कहा कि करण जौहर ने उन्हें उनके भाई आमिर खान के 50वें जन्मदिन के मौके पर आयोजित पार्टी में ही अपमानित किया था।

बता दें कि आमिर खान पहले से ही विवादों में चल रहे हैं। भारत के खिलाफ जहर उगलने और मजहब वालों का मसीहा बनने की कोशिश में लगे तुर्की की प्रथम महिला एमीन एर्दोगन से बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान ने शनिवार (अगस्त 15, 2020) को मुलाकात की थी। इस्तांबुल के ह्यूबर मेंशन के राष्ट्रपति निवास में यह मुलाकात हुई। आमिर खान ने मुलाकात का अनुरोध किया था। वे वाटर फाउंडेशन के काम के बारे में एर्दोगन को जानकारी देना चाहते थे। 

कंगना रनौत के ऑफिस में कुछ नहीं मिला तो लीकेज का नोटिस चिपका कर चले गए BMC वाले

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के मुंबई स्थित कार्यालय पर सोमवार (सितंबर 7, 2020) को बीएमसी ने रेड मारने के बाद उन्हें आज (सितंबर 8, 2020) नोटिस जारी कर दिया है। लंबी पड़ताल के बाद जब बीएमसी को कार्यालय में कुछ नहीं मिला तो उन्होंने इस नोटिस में लीकेज का हवाला देकर वहाँ चल रहे काम को रोकने के निर्देश दिए हैं।

बीएमसी ने म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट के सेक्शन 354ए के तहत यह नोटिस जारी किया है, जिसे कंगना के ऑफिस के गेट पर भी चस्पा किया गया है। इसमें बीएमसी ने कंगना के ऑफिस में हो रहे लीकेज को रोकने के लिए कहा है।

नोटिस चस्पा होने के बाद कंगना ने भी इसकी जानकारी अपने ट्विटर पर दी है। उन्होंने लिखा, “सोशल मीडिया पर मेरे दोस्तों की आलोचना सहने के कारण बीएमसी वाले बुलडोजर के साथ नहीं आए। इसके बदले उन्होंने मेरे कार्यालय में हो रहे लीकेज को रोकने का नोटिस चिपका दिया। दोस्तों मुझे खतरा बहुत है। लेकिन मैंने आप सबसे बहुत सारा प्यार और समर्थन पाया है।”

गौरतलब है कि इससे पहले सोमवार को कंगना के मुंबई स्थित दफ्तर पर बीएमसी ने रेड मारी थी। जिसकी जानकारी अभिनेत्री ने वीडियो ट्वीट करते हुए दी थी। साथ ही इसे बदले की कार्रवाई बताया था।

कंगना रनौत ने ट्वीट कर लिखा था, “ये मुंबई में मणिकर्णिका फ़िल्म्स का ऑफ़िस है। इसे मैंने पंद्रह साल मेहनत कर कमाया है। मेरा ज़िंदगी में एक ही सपना था कि मैं जब भी फ़िल्म निर्माता बनूँ, मेरा अपना खुद का ऑफ़िस हो। मगर लगता है ये सपना टूटने का वक़्त आ गया है। आज वहाँ अचानक बीएमसी के कुछ लोग आए हैं।”

कंगना ने फिर दूसरा वीडियो शेयर किया, जिसमें बीएमसी के लोग कंगना के ऑफिस में सब कुछ नाप रहे हैं। इस वीडियो को शेयर करते हुए कंगना ने लिखा, “वे जबरदस्ती मेरे ऑफिस में घुस गए और सब कुछ नापने लगे। जब मेरे पड़ोसियों ने आपत्ति जताई तो उन्हें भी परेशान किया। अधिकारियों की भाषा कुछ इस तरह थी- वो जो मैडम है उसकी करतूत का परिणाम सबको भरना होगा। मुझे सूचित किया गया कि वे कल मेरी संपत्ति को ध्वस्त कर रहे हैं।”

अभिनेत्री ने तीसरा ट्वीट करते हुए लिखा, “मेरे पास सभी कागज हैं और बीएमसी की परमिशन भी। मैंने अपनी प्रॉपर्टी में कुछ भी गैरकानूनी नहीं किया है। बीएमसी को स्ट्रक्चर प्लान भेजना चाहिए यह दिखाने के लिए कहाँ गैरकानूनी कंस्ट्रक्शन हुई है, वो भी नोटिस के साथ। लेकिन उन्होंने आज मेरे ऑफिस पर रेड मारी बिना किसी नोटिस के और कल वह सब कुछ ध्वस्त कर देंगे।”

उल्लेखनीय है कि कंगना रनौत और महाराष्ट्र सरकार के बीच विवाद दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। कंगना के कार्यालय पर ये कार्रवाई भी उन्हें केंद्र सरकार से Y-कैटेगरी की सुरक्षा मिलने के चंद घंटे बाद हुई थी।