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ISI से जुड़ा है आतंकियों का सरगना सैयद सलाहुद्दीन, पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट करवाने की तैयारी

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किया है, जिससे आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का संबंध पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से होने का पता चलता है। यह भी पता चला है कि आतंकी संगठन का मुखिया सैयद सलाहुद्दीन ISI के लिए आधिकारिक तौर पर काम करता है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह दस्तावेज पाकिस्तान के खुफिया निदेशालय, इस्लामाबाद की ओर से जारी किया गया है। दस्तावेज में हिजबुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन को आधिकारिक तौर पर ‘पाकिस्तान की एजेंसी आईएसआई’ के साथ काम करने वाला अधिकारी बताया गया है।

निदेशक/कमांडिंग अधिकारी वजाहत अली खान के नाम एक पत्र जारी किया गया है। इसमें कहा गया है, “यह प्रमाणित है कि सैयद मुहम्मद यूसुफ शाह (सैयद सलाहुद्दीन), इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई, इस्लामाबाद) के साथ काम कर रहे हैं। वह इस विभाग के अधिकारी हैं।” सलाहुद्दीन के वाहन का विवरण साझा करते हुए निर्देश दिया गया है कि उन्हें सुरक्षा की मॅंजूरी दे दी गई है और अनावश्यक रूप से रोका नहीं जाना चाहिए। इस पत्र में यूसुफ शाह को हिजबुल मुजाहिदीन का अमीर यानी मुखिया बताया गया है।

पत्र की कॉपी (साभार: Times of India)

यह दस्तावेज़ 20 सितंबर 2019 को इस्लामाबाद से जारी किया गया है और यह 31 दिसंबर 2020 तक मान्य है। सलाउद्दीन को हाल ही में पाकिस्तान के रावलपिंडी में मारे गए हिजबुल आतंकवादी रियाज नाइकू के मारे जाने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए देखा गया था।

भारतीय एजेंसियों का मानना है कि यह दस्तावेज सितंबर में होने वाले फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) में पाकिस्तान के खिलाफ काफी महत्वपूर्ण होगा। भारत में आतंकी हमलों में पाकिस्तान की संलिप्तता को लेकर यह एक मजबूत और प्रमाणिक प्रमाण हाथ लगा है। 14 सितंबर को होने वाली समीक्षा में पाकिस्तान को टेरर फंडिंग के लिए ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है।

बता दें ब्लैकलिस्टिंग को रोकने के लिए तीन वोटों की आवश्यकता होती है, पाकिस्तान मलेशिया, तुर्की और चीन को लुभाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान ने हाल ही में वित्तीय प्रतिबंधों से बचने के लिए, आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई को दिखाने के लिए कुछ कदम उठाए है। उनमें से एक सांविधिक नियामक आदेश (एसआरओ) शामिल था। इसमें उसने 88 नामित आतंकवादियों के मूवमेंट को ‘प्रतिबंधित’ करने की बात कही है।

गौरतलब है कि सैयद सलाहुद्दीन 2016 में पंजाब में पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले के मुख्य मास्टरमाइंड हैं। 1946 में पैदा हुआ सलाउद्दीन श्रीनगर के एसपी कॉलेज से ग्रेजुएट और 1971 में कश्मीर विश्वविद्यालय से पॉलिटिकल साइंस में पोस्ट ग्रेजुएट है। उसने 1987 में मुस्लिम संयुक्त मोर्चा के टिकट पर अमीराकदल निर्वाचन क्षेत्र से जम्मू-कश्मीर विधानसभा का चुनाव लड़ा था और हार गया था।

हिजबुल आतंकी सैयद संयुक्त जिहाद परिषद (UJC) भी संचालित करता है जो लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे अन्य कट्टरपंथी इस्लामी समूहों के लिए एक छत्र संगठन के रूप में काम करता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सलाहुद्दीन भारत में प्रॉक्सी एनजीओ और आईएसआई समर्थित चैरिटी जैसे जम्मू और कश्मीर प्रभावित राहत ट्रस्ट (JKART) के माध्यम से काम करता है।

हिज्बुल आतंकवादी इन संगठनों का उपयोग वित्तीय प्रोत्साहन देकर नई नए-नवेले आतंकवादियों की भर्ती करने के लिए करता है। जेकेएआरटी का मुख्य कार्यालय रावलपिंडी में है, जबकि इसकी शाखाएँ इस्लामाबाद, मुजफ्फराबाद सहित कई जगहों पर हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पहले सलाहुद्दीन और 11 अन्य आरोपियों के खिलाफ आतंक के वित्तपोषण से जुड़े मामले में केस दर्ज किया था।

दिल्ली हिंदू विरोधी दंगे: हथियार के साथ मुस्तकीम सैफी गिरफ्तार, शिव विहार में हुई थी राहुल सोलंकी की हत्या

दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने हिंदू विरोधी दंगे के दौरान शिव विहार में राहुल सोलंकी की हत्या के आरोप में मुस्तकीम सैफी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसके पास से हथियार भी बरामद किए हैं।

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और रिकॉर्ड के आधार पर राहुल सोलंकी की हत्या के आरोप में संप्रदाय विशेष के सात युवकों को आरोपित ठहराया था। अब पुलिस ने मुस्तकीम सैफी को गिरफ्तार किया है।

राहुल सोलंकी की फरवरी में दिल्ली के शिव विहार में हिंदू विरोधी दंगों के दौरान संप्रदाय विशेष की भीड़ ने हत्या कर दी थी। जून में, दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने 27 वर्षीय राहुल सोलंकी की हत्या मामले में आरोप-पत्र दायर किया था।

आरोप-पत्र में कहा गया था कि 24 फरवरी को शाम 5 बजे के आसपास शिव विहार के पास हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान सोलंकी की दयालपुर इलाके में उनके घर के पास हत्या कर दी गई थी।

शिव विहार निवासी राहुल सोलंकी गाजियाबाद के एक निजी कॉलेज से एलएलबी कर रहे थे। वह दूध लेने के लिए अपने घर से निकले थे, तभी दंगाइयों ने उनके गले के पास दाहिने कंधे में गोली मार दी थी। जब दंगाइयों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी, उस समय वह राजधानी स्कूल से सटे पाल डेयरी गली के पास खड़े थे।

इससे पहले, आरोपितों में से एक, सलमान ने पुलिस को बताया था कि वह राहुल को अच्छी तरह से जानता था क्योंकि राहुल का भाई रोहित उसके ग्रुप के साथ क्रिकेट खेलता था। सलमान ने पुलिस से कहा था कि वह हिंसक भीड़ में शामिल हो गया और दिल्ली की सड़कों पर ‘इस्लाम को बचाने के लिए’ आतंक फैलाया। 24 फरवरी को संप्रदाय विशेष की भीड़ ने एक और हिंदू युवक दिलबर सिंह नेगी की अनिल स्वीट्स का पास जलाकर हत्या कर दी थी।

शिव विहार – हिंदू विरोधी दंगों में सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक

शिव विहार ऐसा इलाक़ा था जहाँ के हालात दंगों के वक्त बदतर  थे। शिव विहार तिराहा तीन पुलिस थानों के अंतर्गत आता है। करावल नगर, दयालपुर और गोकुलपुरी। शिव विहार तिराहे की एक सड़क मुस्तफाबाद की तरफ जाती है जो कि संप्रदाय विशेष बाहुल्य क्षेत्र है। दूसरी सड़क शिव विहार और बाबू नगर की तरफ जाती है, जहाँ मिली-जुली आबादी रहती है। जिन क्षेत्रों में हिंदू आबादी ज़्यादा है, वहाँ भी संप्रदाय विशेष के लोगों के घर बने हुए हैं। शिव विहार तिराहे पर हुई हिंसा हिंदुओं के लिए भयावह थी

24 फरवरी की दोपहर में जिस पहले व्यक्ति का शव मिला था, वह था दिलबर नेगी। उसके हाथ-पैर काट दिए गए थे और राजधानी स्कूल के सामने स्थित अनिल स्वीट्स में उसे जला दिया गया था।    

हिंसा के दौरान भयावह नज़ारा सामने आया शिव विहार चौराहे स्थित राजधानी स्कूल की छत से। इस स्कूल के मालिक का नाम है फैजल फारुख। इस स्कूल की छत से संप्रदाय विशेष की भीड़ ने गोलियाँ चलाई, एसिड की बोतलें फेंकी और पत्थर भी चलाए। दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के मामले में जो पहली चार्जशीट दायर की गई थी, उसका संबंध राजधानी स्कूल में हुई हिंसा की घटनाओं और 24-25 फरवरी के दिन हुई घटनाओं से भी था। इस मामले में यतेन्द्र शर्मा ने शिकायत दर्ज कराई थी जो की डीआरपी स्कूल के मालिक हैं। डीआरपी स्कूल, राजधानी स्कूल के ठीक बगल में स्थित था। 

गले का निशान तिरछा क्यों नहीं? Ligature strangulation क्यों खारिज? निशान कुर्ता से क्यों? AIIMS के डॉक्टरों के सवाल

मृत्यु के बाद सुशांत सिंह राजपूत की गर्दन पर दिखे निशान को लेकर हो रही चर्चा अब सीबीआई जाँच तक पहुँच गई है। AIIMS के डॉक्टरों की टीम ने इस सम्बन्ध में कूपर हॉस्पिटल के उन डॉक्टरों से जवाब माँगा है, जिन्होंने सुशांत सिंह राजपूत का पोस्टमॉर्टम किया था। एम्स के तीन डॉक्टरों की टीम ने कूपर हॉस्पिटल के डॉक्टरों से पूछताछ की। एम्स के डॉक्टरों ने इस दौरान सुशांत के गले में बने निशान को लेकर भी सवाल दागे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सवाल यहाँ अटका हुआ है कि सुशांत के गले में दिखे जख्म के निशान उनके गले के बीच में थी और एकदम सीधी रेखा की तरह दिखाई दे रही थी। जबकि अगर कोई व्यक्ति इस तरह से आत्महत्या करता है तो ये निशान तिरछा बनता है और गर्दन के ऊपर होता है। साथ ही ये खरोंच की तरह भी दिखता है। एम्स के 3 डॉक्टरों की टीम ने सुशांत का पोस्टमॉर्टम करने वाली 5 डॉक्टरों की टीम से इस बाबत सवाल-जवाब किया।

साथ ही ये सवाल भी पूछा गया कि पोस्टमॉर्टम में Ligature strangulation की आशंका को कैसे ख़ारिज कर दिया गया? साथ ही गले पर के निशान कुर्ता से कैसे पैदा हो सकते हैं, ये भी पूछा गया। बताया गया था कि सुशांत सिंह राजपूत ने कुर्ते को ही फाँसी का फंदा बना कर आत्महत्या की थी। कई तथ्यों के आधार पर इसे हत्या कहा जा रहा है, इसे नकारने के लिए कूपर हॉस्पिटल के डॉक्टरों के पास क्या सबूत हैं, ये भी पूछा गया।

एम्स के डॉक्टर टी मिल्लव, डॉ आदर्श कुमार और डॉ अभिषेक यादव मुंबई में पोस्टमॉर्टम से जुड़े तथ्यों की तहकीकात करने के लिए मुंबई पहुँचे हुए हैं। इन डॉक्टरों को घटनास्थल और पोस्टमॉर्टम वाली जगह पर जाने का अधिकार दिया गया है। इन्होंने मॉर्चरी के कर्मचारियों से भी पूछताछ की है। 3 दिन मुंबई में रह कर जाँच करने के दौरान क्या निकला, इस बारे में उन्होंने आधिकारिक रूप से कुछ सार्वजनिक नहीं किया है।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत का मामला बॉलीवुड और भारत से निकल कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन रहा है। ब्रिटेन में मल्टीप्लेक्सों के सामने सितम्बर 14, 2020 को बड़े विरोध-प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है। प्रदर्शन की तैयारी कर रहे लोगों का कहना है कि ब्रिटेन में ऐसा कर वे बॉलीवुड को सन्देश देना चाहते हैं कि वो जनता ही है, जिसने उन लोगों को यहाँ तक पहुँचाया है। बॉलीवुड के लोग भगवान नहीं हैं, ये उन्हें याद रखना चाहिए। 

‘अगर वह लड़की महाराष्ट्र से माफी माँगती है तो…’ – कंगना रनौत पर ‘हरामखोर’ गाली वाले संजय राउत का बयान

सुशांत सिंह मामले को हत्या और गहरी साजिश बताने वाले लोगों पर लगातार महाराष्ट्र सरकार पलटवार करते हुए नजर आ रही है। इसी बीच बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत और शिवसेना नेता संजय राउत के बीच जुबानी जंग लगातार तेज होती जा रही है। वहीं राउत अब कंगना को गाली (हरामखोर) देने के बाद उन्हें धमकी देने पर उतारू हो गए हैं।

कंगना के महाराष्ट्र पुलिस और सरकार पर दिए गए बयान से संजय राउत इतना बौखला गए हैं कि वह कब क्या बोल रहे, उन्हें खुद भी नहीं पता। राउत ने अब सोशल मीडिया के जरिए कंगना पर निशाना साधा है। माना जा रहा है कि उन्होंने ट्वीट के जरिए कंगना को धमकाने की कोशिश की है।

राउत ने ट्वीट किया, “मेरी हिम्मत को परखने की गुस्ताखी न करना, पहले भी कई तूफानों का रुख मोड़ चुका हूँ”।

वहीं शिवसेना नेता संजय राउत ने कंगना पर दिए गए अपने किसी भी बयान पर माफी माँगने से साफ इनकार कर दिया है। अभिनेत्री के साथ किए गए गाली गलौच को लेकर राउत ने मीडिया से कहा, “अगर वह लड़की महाराष्ट्र से माफी माँगती है तो मैं माफी माँगने के बारे में सोचूँगा।” उन्होंने आगे कहा,”‘वह मुंबई को मिनी पाकिस्तान कहती है। क्या उसमें हिम्मत है कि वह यही बात अहमदाबाद के लिए कह दे?”

गौरतलब है कि शनिवार (सितंबर 5, 2020) को संजय राउत ने सारी हदें पार करते हुए कैमरे के सामने कंगना रनौत को गाली (हरामखोर) दे दी। इससे पहले शिवसेना के एक विधायक ने कंगना की टाँग तोड़ने की धमकी दी थी। न्यूज़ नेशन रिपोर्टर द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या वह कंगना रनौत को मुंबई में प्रवेश से रोकने के लिए गैरकानूनी कदम उठाएँगे, संजय राउत ने जवाब दिया, “महाराष्ट्र सिर्फ शिवसेना की जागीर नहीं है, सभी पार्टियों की है। हम सब मिल कर तय करेंगे।”

जब रिपोर्टर ने यह पूछा कि क्या वह कानून के खिलाफ कोई कदम उठाएँगे, संजय राउत ने कहा, “क्या होता है कानून? उस लड़की ने जिस तरह से बात किया, क्या वह कानून के लिए सम्मान था? आप क्या उस ‘हरामखोर’ लड़की की वकीली कर रहे हैं। जिसने शिवाजी महाराज का अपमान किया, जिसने महाराष्ट्र का अपमान किया है, आपका चैनल उसकी तरफदारी कर रहा है।”

उल्लेखनीय है कि संजय राउत की हर टिप्पणी पर कंगना ने मुंहतोड़ जवाब देने की कोशिश की है। कंगना रनौत ने राउत का जवाब देते हुए ट्वीट कर लिखा, “2008 में मूवी माफिया ने मुझे एक साइको घोषित कर दिया था। इतना ही नहीं 2016 में उन्होंने मुझे एक चुड़ैल कहा और 2020 में महाराष्ट्र के मंत्री ने मुझे हरामखोर लड़की का खिताब दिया। इन सभी लोगों ने मेरे साथ ऐसा इसलिए किया क्योंकि मैंने कहा कि एक हत्या के बाद मैं मुंबई में असुरक्षित महसूस करती हूँ। इस वक्त डिबेट करने वाले योद्धा कहाँ हैं?”

सेना से चिढ़ने वाले लिबरल गैंग अब रिया के पिता के आर्मी बैकग्राउंड की दे रहे दुहाई: क्या है डर, किसका साध रहे हित?

नार्कोटिक्स कण्ट्रोल ब्यूरो (NCB) ने रिया चक्रवर्ती के भाई शौविक चक्रवर्ती और सुशांत सिंह राजपूत के हाउस मैनेजर रहे सैमुअल मिरांडा को गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद रिया के पिता इंद्रजीत चक्रवर्ती ने बयान जारी किया है। इसके बाद से लिबरल गैंग ने रिया के पिता के आर्मी बैकग्राउंड से होने को भुनाना शुरू कर दिया है। इसमें राजदीप सरदेसाई और स्वरा भास्कर जैसे लोग लग भी गए हैं, जो ‘विक्टिम कार्ड’ को नए रूप में पेश कर रहे हैं।

इंद्रजीत चक्रवर्ती ने ‘इंडिया टुडे’ को ये बयान दिया, जिसे फैलाने में लिबरल गैंग के लोग जी-जान से जुट गए। ‘इंडिया टुडे/आजतक’ ने ही रिया चक्रवर्ती का भी इंटरव्यू लिया था, जिसके बाद चैनल के बॉयकॉट के लिए लोगों ने अभियान चलाया था। राजदीप सरदेसाई और राहुल कँवल जैसे पत्रकारों ने रिया के इंटरव्यू में कही गई बातों को काट-काट कर सोशल मीडिया पर खूब फैलाया। वो लोग अभी भी रिया के लिए सहानुभूति बटोरने में लगे हुए हैं।

रिया के पिता इंद्रजीत चक्रवर्ती ने कहा कि उनका परिवार मध्यम वर्गीय है, उनके बेटे को गिरफ्तार किया ही जा चुका है, अब उनकी बेटी को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ‘न्याय’ के नाम पर एक मध्यमवर्गीय परिवार को बर्बाद कर दिया गया और इसमें सब कुछ जायज बताया जा रहा है। ‘बधाई हो भारत’ कहते हुए उन्होंने अपनी बात रखी। उन्होंने ‘जय हिन्द’ से अपनी बात ख़त्म की। इसके बाद राजदीप ने उनके कर्नल होने और सेना ने रिटायर होने की बात को हाइलाइट किया।

लेकिन, यही राजदीप जैसे लोग तो चिल्ला-चिल्ला कर कहते हैं कि भाजपा समर्थक और हिंदुत्ववादी लोग बात-बात में सेना को घुसा देते हैं। अब क्या ज़रूरत आन पड़ गई कि उन्हें एक ऐसे व्यक्ति को बचाने के लिए उसके पिता के सेना में होने (भूतपूर्व ही सही) की दुहाई देनी पड़ रही है, जो तीन-तीन केंद्रीय एजेंसियों की रडार पर है। ये मामला ड्रग्स से जुड़ा है, सुशांत की मौत से जुड़ा है और रुपयों के लेनदेन से जुड़ा है- बावजूद इसके आरोपित के बचाव में उसके पिता के सेना में होने का तर्क?

ऐसे ही अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने लिखा कि ये दिल तोड़ने वाला है। उन्होंने शायद ही सुशांत सिंह राजपूत के पिता के लिए अफ़सोस जताया हो, जिनके जवान बेटे की मौत हो गई और उन्हें पता ही नहीं है कि मौत का कारण क्या था? उन्होंने आरोप लगाया कि लोग दूसरों को दर्द में देख कर आनंद ले रहे हैं, जिसके लिए उन्हें शर्म करना चाहिए। यहाँ बताना ज़रूरी है कि इसमें सुशांत के परिवार के दर्द की बात नहीं की जा रही है, उनकी नजर में वो लोग पीड़ित नहीं हैं।

जब खबर आ रही है कि बॉलीवुड के 14 बड़े नामों की चर्चा ड्रग्स के लेनदेन में हो रही है, ऐसे में इन लोगों के डर का कारण क्या है? आखिर एनसीबी की कार्रवाई से ये लोग क्यों डरे हुए हैं? ऊपर से जहाँ मामला करोड़ों और लाखों के लेनदेन का हो, वहाँ आरोपित और उसका परिवार मध्यम वर्गीय कैसे हुआ? फिर भारत ने एक मध्यम वर्गीय परिवार को कैसे बर्बाद कर दिया, जैसा कि दावा किया जा रहा है। रिया के समर्थन में इनका क्या हित है?

राजदीप जैसे लोग ही लिखते हैं कि आर्मी वाले भी तो ‘जॉब ही करते हैं’, और फिर राजदीप जैसे ही लोग किसी पिता को उसके आर्मी से होने के कारण उसके आरोपित बाल-बच्चों को संत की तरह दिखाना चाहते हैं। बेटा-बेटी ड्रग्स रैकेट का हिस्सा हो या उसमें शामिल होने का आरोप हो तो इसमें ‘बधाई हो भारत’ का एंगल कहाँ से आता है? इसी तरह रोहिणी सिंह, ज़ेबा वारसी और चैती नरूला जैसे लोगों ने भी इस मामले को ‘देशभक्ति’ से जोड़ कर दिखाने के चक्कर में इस ट्वीट को शेयर किया।

अगर राजदीप और स्वरा जैसों को डर नहीं है तो फिर वो लोग इतनी बेचैनी में क्यों हैं और रिया के पिता के आर्मी बैकग्राउंड को भुना कर लोगों की सहानुभूति बटोरने में क्यों लगे हुए हैं? किसी आरोपित के घर जाकर इंटरव्यू लेने वाले व्यक्ति से और अपेक्षा भी क्या की जा सकती है। अब जब रिया चक्रवर्ती पर गिरफ़्तारी की तलवार लटक रही है, ऐसे में इससे ऐन पहले माहौल बनाने की साजिश के पीछे कोई न कोई मंशा तो ज़रूर है।

माँ और 13 साल की बेटी के साथ गैंगरेप: कासिम, मो. ताजीब सहित 5 पर केस, पीड़ित-आरोपित हैं समधी-समधन

बिहार के पूर्णिया जिले से 40 वर्षीय महिला और 13 साल की नाबालिक लड़की के साथ सामुहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है। पुलिस ने पीड़िता की माँ की शिकायत पर गाँव के ही 5 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है। साथ ही मामले में एक की गिरफ्तारी भी हुई है। पुलिस ने बताया कि मामला आपसी संबंधियों के बीच का है।

दैनिक अखबार हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार केनगर थाना क्षेत्र के झुनीइस्तम पंचायत के बेगमपुर गाँव में रहने वाली 40 वर्षीय महिला ने अपनी नाबालिग बेटी और अपने साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले में मो. बिरू, मो. ताजीब, मो. खुशबू एवं मो. तरीकुल और मुख्य आरोपित कासिम के खिलाफ शिकायत दर्ज किया है। दर्ज शिकायत के अनुसार आरोपितों ने जबरन पीड़िता की बेटी को घर से उठा कर बांसबाड़ी में ले जाकर बलात्कर किया। उसके बाद पीड़िता को बंदी बना कासिम ने अपने घर में बलात्कार किया।

4 सितंबर को दर्ज एफआईआर के अनुसार, पीड़िता के बेटे और बहू के बीच की अनबन को लेकर घर के सामने पंचायत रखी गई थी। जिस दौरान बहु के घर वालों ने अपनी बेटी को तलाक दिए जाने के बदले 3 लाख रुपए की माँग रखी। पैसों की तंगी के चलते महिला ने बहु के परिजनों से कुछ दिन का समय माँगा। जिस पर नाराज होते हुए बहु के मायके वालों ने सभी को बंधक बना लिया। इस दौरान महिला को पति और बेटे से अलग कासिम के घर रखा गया।

महिला ने रिपोर्ट में बताया कि कासिम ने मौके का फायदा उठाते हुए उसके साथ 2 बार दुष्कर्म किया। पहले उसने अपने घर में बंधक बना कर उसके साथ बलात्कार किया। बाद में अजीजुल एवं तैमूर के घर में बंधक बना कर दुष्कर्म किया। पीड़िता ने बताया कि उसके समधियों ने उसकी नाबालिग बेटी को भी नहीं बख्शा। उसे भी रात 10 बजे घर से उठा बांसबाड़ी ले गए और सभी ने मिल कर उसके साथ दुष्कर्म किया।

मामले की जानकारी देते हुए सदर एसडीपीओ आनंद कुमार पांडे ने बताया कि महिला की शिकायत पर आरोपितों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने एक आरोपित को गिरफ्तार भी किया है।

ऑपइंडिया को थाना अधिकारी ने जानकारी दी कि मामले में शामिल सभी लोग एक ही गाँव के रहने वाले है और आपसी संबंधी हैं। मामले को संज्ञान में लेते हुए पुलिस इसकी जाँच में जुट गई है। अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए सघन छापेमारी की जा रही है।

गुजरात दंगे में 3 रिश्तेदार की हत्या, ₹ 23 करोड़ का मुआवजा: PM मोदी के बेवजह दाखिल किए गए नाम को कोर्ट ने हटाया

गुजरात के सबारकांठा जिले की कोर्ट ने 2002 के दंगों में ब्रिटिश नागरिक की तरफ से मुआवजे को लेकर दाखिल मुकदमे से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम हटा दिया है। ब्रिटिश नागरिक इमरान और शिरीन दाउद ने दंगों में मारे गए तीन रिश्तेदारों के लिए मुआवजे के तौर पर 23 करोड़ रुपए की राशि की माँग की थी।

अदालत ने शनिवार (6 सितंबर, 2020) पीएम मोदी का नाम शामिल करने के लिए उचित वजह नहीं होने का तर्क दिया है और इस केस से उनका नाम हटा दिया है। प्रिंसपल सिविल जज एस के गढ़वी ने कहा, “अभियोग को पढ़ते हुए यह लगा कि अभियुक्त 1 (मोदी) के खिलाफ बेवजह के आरोप लगाए गए हैं। इससे घटना पर सवालिया निशान लगता है।”

जज ने आगे कहा, “मेरे ख्याल से अभियुक्त 1 के खिलाफ बिना सबूत के ऐसे निराधार आरोप से ऐक्शन लिए जाने की कोई वजह नहीं बन पाएगी।” बता दें कि इस केस से पीएम मोदी का नाम हटान के लिए आवेदन किया गया था। जिसमें कहा गया था कि इस घटना के लिए व्यक्तिगत तौर पर नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इसके लिए स्टेट जवाबदेह हो सकता है। उस वक्त नरेंद्र मोदी गुजरात के सीएम थे।

गौरतलब है कि साल 2004 में ब्रिटिश नागरिक इमरान और दाउद ने नरेंद्र मोदी समेत 14 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। उनके रिश्तेदार सईद दाउद, शकील दाउद, मोहम्मद असवत दंगों में मारे गए थे। 28 फरवरी 2002 को जयपुर से नवसरी वापस आते वक्त ये तीनों दंगाइयों के हाथ लग गए थे, जिन्होंने इन लोगों की हत्या कर दी थी। इन्हीं के मौत के मुआवजे को लेकर केस दर्ज किया गया था।

‘सांसद पति ने शराब पीकर मुझे पीटा, फिल्म इंडस्ट्री की कई महिलाओं से संबंध’ – सलमान के फैन BJD सांसद पर केस

ओडिशा की सत्ताधारी बीजू जनता दल के सांसद अनुभव मोहंती की पत्नी ने उन पर घेरलू हिंसा का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया है। उड़िया फिल्म इंडस्ट्री की अभिनेत्री वर्षा प्रियदर्शिनी ने अपने पति और केंद्रपारा के सांसद अनुभव मोहंती के खिलाफ कटक के SDJM कोर्ट में केस दर्ज कराया। ये मामला ‘प्रोटेक्शन ऑफ वुमन फ्रॉम डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट’ के सेक्शन 12 के तहत दर्ज कराया गया। इससे विवादित बीजद सांसद की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

वर्षा प्रियदर्शिनी ने आरोप लगाया है कि उनके पति अनुभव मोहंती ने उनके साथ मारपीट की और प्रताड़ित किया। अभिनेत्री ने कोर्ट में दायर की गई अपनी याचिका में अपने पति से ‘मेंटेनेन्स’ की माँग भी की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्षा ने आरोप लगाया है कि उनके पति को शराब की लत है और अपने घर पर साथियों संग शराब की महफ़िल जमाते रहते हैं। अभिनेत्री ने उन पर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है।

वर्षा ने आरोप लगाया है कि उन्होंने जब भी अपने सांसद पति को शराब पीने से रोकना चाहा या शराब न पीने की सलाह दी तो वो हिंसक हो जाते थे और उन पर हमला कर देते थे। साथ ही वो वर्षा को घर से बाहर निकालने का प्रयास भी करते थे। साथ ही ये भी आरोप लगाया कि अनुभव मोहंती के ऑलीवुड इंडस्ट्री की कई महिलाओं के साथ विवाहेतर सम्बन्ध हैं। अनुभव ने दावा किया है कि फ़िलहाल उन्हें कोर्ट से कोई नोटिस नहीं मिला है।

अनुभव मोहंती ने कहा कि उन्हें इस मामले में कोर्ट की तरफ से अभी तक किसी भी प्रकार का नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि नोटिस मिलते ही वो सार्वजनिक रूप से सभी को इसकी जानकारी देंगे। अभिनेता से राजनेता बने मोहंती ने कहा कि नोटिस मिलने तक इन्तजार करना ही ठीक रहेगा। इस मामले को कोर्ट की वेबसाइट पर भी लिस्ट कर लिया गया है और 7 सितम्बर को सुनवाई भी होनी है, ऐसे में सभी की नजरें उसी पर टिकी हैं।

जहाँ तक अनुभव मोहंती की बात है, वो सलमान खान के बड़े फैन हैं। वो अक्सर सोशल मीडिया पर सलमान खान की तस्वीरें डालते रहते हैं और उनसे लाइक करने की गुहार भी लगाते रहते हैं। उन्होंने एक बार लिखा था कि सलमान खान उनके आइडल हैं और उन्होंने एक बार माँ दुर्गा की पूजा की थी और भगवान से माँगा था कि वो सलमान खान की तरह दिखने लगे। वो सलमान खान से मिल भी चुके हैं।

इससे पहले उन्होंने प्रेस रिलीज जारी कर एक मीडिया संस्थान और पत्रकारों को धमकाया था। सांसद मोहंती ने धमकी देते हुए कहा था कि वो इन पत्रकारों का वही हश्र कर देंगे, जो अभिजीत अय्यर मित्रा का किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि ‘ओडिशा टेलिविजन नेटवर्क (OTN)’ हर वो गलत चीजें कर रहा है, जो मीडिया को नहीं करनी चाहिए। बता दें कि ओडिशा में उनकी ही पार्टी की सरकार है। नवीन पटनायक पार्टी और सरकार के मुखिया हैं।

कॉन्ग्रेस गिरा देगी मोदी सरकार? चीनी मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने लिखा, BJP ने राहुल गाँधी से कहा – ‘सार्वजनिक कीजिए डिटेल्स’

चीन के सरकारी मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने कॉन्ग्रेस को लेकर ट्वीट करते हुए मोदी सरकार को घेरा, जिसके बाद भाजपा ने सीधे गाँधी परिवार पर निशाना साधा है। भाजपा ने ‘ग्लोबल टाइम्स’ की रिपोर्ट के बहाने कॉन्ग्रेस और गाँधी परिवार को निशाने पर लिया। चीन को दुश्मन देश बताते हुए भाजपा ने कहा कि अब वो भारत पर निशाना साधने के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी का इस्तेमाल कर रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने पार्टी की तरफ से बयान दिया।

संबित पात्रा ने कहा कि जिस तरह से इश्क और मुश्क छिपाने से भी नहीं छिपते, ठीक वैसे ही कॉन्ग्रेस और चीन के बीच चल रहे प्रेम के बारे में सभी को पता है। उन्होंने दावा किया कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और भारत की कॉन्ग्रेस पार्टी के बीच समझौते हुए हैं, जिसकी जानकारी अब सार्वजनिक की जानी चाहिए। ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने अपनी रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से कहा था कि कॉन्ग्रेस पार्टी मोदी सरकार के खिलाफ मुखर है।

कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ने लिखा कि चीन के साथ सीमा विवाद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा भारी दबाव में हैं क्योंकि भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस विफल घरेलू शासन और जोखिम भरी विदेश नीति की कड़ी आलोचना करके भाजपा सरकार को हिलाने के मौके का इन्तजार कर रही है। इस ट्वीट के बाद संबित पात्रा ने कॉन्ग्रेस पर चीनी एजेंडे के लिए काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अखबार की ये तारीफ सामान्य नहीं है।

उन्होंने कहा कि भारत ने जिस तरह से चीन के हमलों को नाकाम करते हुए उसकी विस्तारवादी नीति को करारा जवाब दिया है, उससे वहाँ की हताश सरकार अब कॉन्ग्रेस पार्टी को उम्मीद भरी नज़र से देख रही है, ताकि वो उसका एजेंडा चला सके। उन्होंने कहा कि 2008 में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और कॉन्ग्रेस ने एक MOU पर हस्ताक्षर किए थे, इसीलिए दोनों के बीच का प्रेम किसी से छिपा हुआ नहीं है। ये मसला भी उससे ही जुड़ा हुआ है।

संबित पात्रा ने सवाल दागा कि चाहे पाकिस्तान हो, आतंकवादी हो या चीन, आखिर ये सभी कॉन्ग्रेस को ही क्यों पसंद करते हैं? उन्होंने इस दौरान मोदी सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के फैसले को याद करते हुए कहा कि उस दौरान जब पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में भारत के खिलाफ जो डोजियर सौंपा था, उसमें राहुल गाँधी का बयान भी था। उन्होंने राहुल को ‘भारत का जीरो’ और ‘पाकिस्तान का हीरो’ बताया।

ज्ञात हो कि भारत-चीन तनाव के बीच फ़िलहाल LAC पर 39 ऐसी जगहें हैं, जहाँ ITBP के जवानों ने रणनीतिक रूप से उन्हें अपने अधिकार में ले रखा है। विस्तारवादी चीन की चाल इस बार असफल रही है। भारतीय सेना के मुताबिक, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी पीएलए के करीब 500 सैनिकों ने 29-30 अगस्त की रात काला टॉप और हेमलेट टॉप इलाकों पर यथास्थिति बदलने की कोशिश की, लेकिन सतर्क भारतीय सैनिकों ने ऐसा नहीं होने दिया।

‘घर-जमीन सब छोड़ आए, खौफ था वहाँ… यहाँ सुरक्षित हैं’ – अफगानिस्तान से लौटे 200 सिख परिवारों की कहानी

अफगानिस्तान में इस्लामी आतंक के साए में तिल-तिल कर जीने को मजबूर थे कई सिख परिवार। बहुत कुछ सहते हुए झेल रहे थे। लेकिन गुरुद्वारे में हुए आतंकी हमले और इसमें मारे गए 27 लोगों की घटना ने इनके सब्र का बांध तोड़ दिया। भारत सरकार ने भी तब अपने लोगों की सुरक्षा को लेकर कदम उठाना शुरू किया।

अफगानिस्तान में रहने वालों सिखों को धीरे-धीरे वीजा प्रक्रिया और उसके बाद भारत वापसी के प्रयास किए गए। इसका नतीजा अब दिखने लगा है। पहली खेप में सिर्फ 11 सिख भारत आए थे। इनकी संख्या अब 200 परिवार की हो गई है।

ये सभी विस्थापित हैं, इस्लामी आतंक के सताए हुए हैं। जहाँ कभी इनके खून-पसीने के बनाए हुए घर थे, वो अब विदेश हो चुका है। अब इन 200 परिवारों का घर भारत है। इन्हें दिल्ली में बसाया गया है।

दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमिटी के गुरुद्वारों में इन विस्थापित सिखों को फिलहाल रहने के लिए छत मिला है। इनमें से 63 साल के बलबीर सिंह का कहना है:

“हमने वहाँ सब कुछ छोड़ दिया, घर-बार, जमीन-जायदाद सब कुछ। वहाँ हमारे जीवन को खतरा था, हम यहाँ सुरक्षित महसूस करते हैं।”

31 कमरे, 138 लोग

दिल्ली के मोती बाग इलाके में एक गुरुद्वारा है। अफगानिस्तान से आए सिखों का यह एक बड़ा ठिकाना है। यहाँ के 31 कमरों में 138 लोग फिलहाल रह रहे हैं। इस गुरुद्वारा के चीफ वीसी हरजीत एस बेदी के अनुसार इनके बच्चों को गुरु हरकिशन पब्लिक स्कूल में नाम लिखवाने का भी प्रयास किया जा रहा है।

आपको बता दें कि अफगान सिख समुदाय द्वारा दूतावास से अपील करने और गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर 25 मार्च को गुरु हर राय साहिब गुरुद्वारे में हमले के बाद तत्काल निकासी और बचाव की माँग के बाद भारत सरकार की ओर से यह कदम उठाया गया। तब पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी अफगानिस्तान में फँसे सिख परिवारों को भारत लाने की गुहार मोदी सरकार से लगाई थी।