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ड्रग्स मामले में दीपेश गिरफ्तार, NCB कर रही ‘बड़ी मछली’ की तलाश: मौत से पहले अपने पैसों को लेकर चिंतित थे सुशांत

बॉलीवुड एक्‍टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में सामने आए ड्रग कनेक्‍शन के बाद नारकोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) को अब ‘एक बड़ी मछली’ की तलाश है। NCB ने अब सुशांत के घर के हेल्पर दीपेश सावंत को भी गिरफ्तार कर लिया है। वहीं एक चैट के जरिए इस बात का खुलासा हुआ है कि मौत से पहले सुशांत अपने पैसों को लेकर काफी चिंतित थे।

एनसीबी के डिप्टी डायरेक्टर केपीएस मल्होत्रा ने कहा, “एनसीबी ने सुशांत सिंह मौत केस को लेकर उनके हाउस हेल्पर दीपेश सावंत को गिरफ्तार किया है। मल्होत्रा ने कहा, “ड्रग्स की खरीद और उसके रख-रखाव में सावंत के खिलाफ डिजिटल साक्ष्य और बयानों के आधार पर यह गिरफ्तारी हुई है। उसे रविवार की सुबह 11 बजे कोर्ट में पेश किया जाएगा। गिरफ्तार किए गए लोगों की आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की जा रही है।”

बता दें ड्रग्स मामले में एनसीबी ने अबतक 4 लोगों को हिरासत में लिया है। जिनमें शोविक चक्रवर्ती, सैमुअल मिरांडा, जैद विलात्रा (21) और आब्देल बासित परिहार (23) शामिल है। रिया का भाई शोविक और सुशांत के हाउस मैनेजर रहे सैमुअल 9 सितंबर तक एनसीबी की रिमांड पर रहेंगे। ड्रग्स की खरीदारी की बात कबूलने पर एनसीबी उनके खिलाफ IPC सेक्शन 20 (B) के तहत केस दर्ज किया है।

NCB के अधिकारी ने कहा, “कस्टडी में लेने का मुख्य मकसद उनके रोल के बारे में जानना है। हमें मीडिया से काफी सबूत मिले हैं। एनसीबी कंप्लेंट केस दर्ज करती है पुलिस की तरह FIR नहीं होती है। कंप्लेंट केस में हमारे पास 60 दिन का समय होता है लेकिन बड़े केस में हमें 6 महीने मिलते हैं। पूछताछ के लिए जो लोग रिलेवेंट हैं हम उसे बुलाएँगे। जिसमें रिया भी शामिल है। हमें बड़ी मछली की तलाश है।”

अधिकारी ने कहा, ‘हम इस जाँच को रेशनल रिजल्ट तक ले जाएँगे। अगर इस मामले में कंगना रनौत कुछ शेयर करेंगी तो उसकी भी तहकीकात की जाएगी। साथ ही ड्रग्स केस में कोई इंटरनेशनल और इंटरस्टेट कड़ी होने की स्थिति में उसकी भी जाँच की जाएगी।

चैट से हुआ खुलासा, पैसों को लेकर चिंतित थे सुशांत

एबीपी की एक्सक्लूसिव जानकारी के अनुसार, सुशांत सिंह राजपूत और महिंद्रा बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर हरीश के बीच हुए व्हाट्सएप चैट के जरिए यह बात सामने आई है कि सुशांत अपनी मेहनत की कमाई के पैसों को लेकर काफी टेंशन में थे। वो किसी से अपने पैसों को बचाना चाहते थे। एक तरफ जहाँ सुशांत अपने फिज़ूल खर्चे को रोकना चाहते थे वहीं वे बैंक अकाउंट का ऐक्सेस भी अपने कंट्रोल में करना चाहते थे।

वहीं सुशांत के फ्लैटमेट सिद्धार्थ ने भी जाँच एजेंसी को दिए अपने बयान में कहा था, “सुशांत ने मुझे बताया कि उनकी हालात फ़िलहाल ठीक नहीं उन्हें मेरे साथ की जरुरत है। मैं फ़ौरन अहमदाबाद से मुंबई सुशांत के घर पहुँचा जब मैं सुशांत के बेडरूम में पहुँचा तो सुशांत मुझ से गले लगकर रोने लगा। रोते रोते उसने मुझे बताया कि वो एक्टिंग छोड़कर घर का सब कुछ बेचकर पावना के फार्म पर रहने जाने वाले है। साथ सुशांत ने बताया कि अब महिने के घर का खर्च का बजट केवल 30000 में पूरा करना है। सुशांत ने आगे कहा कि वो पावना के फार्म हाउस में खेती करने वाले है।”

मोइन कुरैशी ने हिंदू लड़की से शादी से पहले धर्म नहीं बदलने का किया वादा, बाद में इस्लाम अपनाने के लिए करने लगा अत्याचार

अहमदाबाद पुलिस ने मोइन कुरैशी नाम के युवक के खिलाफ उसी की पत्नी के शिकायत पर एफआईआर दर्ज किया है। पत्नी ने अपने शौहर के खिलाफ धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। कुरैशी की पत्नी नयना (बदला हुआ नाम) जन्म से हिंदू है। उसने बताया कि उसके पति ने शादी से पहले उससे वादा किया कि वह कभी भी उसे हिंदू धर्म छोड़ने और इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर नहीं करेगा। लेकिन बाद में मोईन कुरैशी ने कथित तौर पर उसपर अत्याचार करना शुरू कर दिया और नयना पर इस्लाम धर्म कबूलने का दबाव डाला।

अहमदाबाद पुलिस ने उसकी शिकायत के आधार पर, मोइन कुरैशी के खिलाफ आईपीसी की धारा 498-ए और 294-बी के तहत मामला दर्ज किया है और मामले की जाँच शुरू कर दी है।

सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में नयना बताती है कि उसके साथ वास्तव में क्या हुआ था। गुजराती में बोलते हुए, नयना कहती हैं कि शादी से पहले कुरैशी ने उससे अहमदाबाद के पॉश इलाके शाहीबाग में रहने का दावा किया था। लेकिन बाद में यह सामने आया कि कुरैशी दुधेश्वर नामक किसी इलाके में रहते था।

उसने आगे कहा कुरैशी ने उससे वादा किया था कि उसे इस्लाम में धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा और शादी के बाद भी हिंदू धर्म के अनुसार रह सकती है। पहले डेढ़ साल तक कुरैशी ने कुछ नहीं कहा, लेकिन उसके बाद चीजें बदल गई।

पिछले डेढ़ महीने से अपने माता-पिता के साथ रह रही हिंदू लड़की नयना ने कहा कि फरवरी 2017 में उसने मोइन से साथ कोर्ट मैरिज की थी। कुरैशी ने 2018 में रमज़ान के दौरान उसपर इस्लाम अपनाने के लिए दबाव डालना शुरू किया। इसके अलावा छोटी-छोटी बातों पर उसने झगड़े शुरू कर दिए।

वहीं 16 जनवरी, 2020 को उसके बेटे का जन्म हुआ तो कुरैशी ने नयना को अपने बेटे का हिंदू नाम रखने से मना कर दिया। नयना बताया कि बच्चे के जन्म के बाद उनका रिश्ता और अधिक तनावपूर्ण हो गया था। जब उसने अपनी समस्याओं के बारे में अपनी माँ से बात की तो उसे समझौता करने के लिए कहा गया। 23 जुलाई, 2020 को कुरैशी ने नयना और अपने बेटे को उसके माता-पिता के घर ले गया और उन्हें वहाँ छोड़ दिया। तब से नयना, अपने बेटे के साथ अपने माता-पिता के साथ रह रही है। नयना ने अपने पति पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए न्याय माँगा है।

चोरी के संदेह में शख्स की पेड़ से बाँधकर पिटाई, कॉन्ग्रेस नेता सलमान निजामी ने दिया सांप्रदायिक स्पिन: जानें क्या है सच

विवादास्पद कॉन्ग्रेस नेता सलमान निजामी ने शनिवार (सितंबर 5, 2020) को उत्तर प्रदेश के बरेली में हुई एक घटना को सांप्रदायिक स्पिन देते हुए फर्जी सूचना फैलाने की कोशिश की। बता दें कि सलमान निजामी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर भारत विरोधी प्रोपेगेंडा फैलाने का पुराना इतिहास रहा है।

कॉन्ग्रेस नेता ने ट्वीट करते हुए दावा किया कि 32 वर्षीय बशीद खान को उत्तर प्रदेश के बरेली में एक पेड़ से बाँधकर घंटों तक पीटा गया। सलमान निजामी ने आरोप लगाया कि राज्य में भाजपा सरकार ने संप्रदाय विशेष के लोगों पर अत्याचार करने और उन्हें मारने की खुली छूट दे रखी है।

अपने ट्वीट के जरिए सलमान निजामी ने बड़ी ही धूर्तता से इस तरफ इशारा किया कि बशीद खान को भीड़ ने उसके धर्म की वजह से उसे मार दिया।

सलमान निजामी के ट्वीट के बाद कई अन्य सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे सांप्रदायिक एंगल देते हुए इसी गलत सूचना को फैलाया कि भीड़ द्वारा यह जानने के बाद कि वह शख्स संप्रदाय विशेष से है, उसे मार दिया गया।

सैयद रफ़ी नाम के एक सोशल मीडिया यूज़र ने सलमान निज़ामी के सुर में सुर मिलाते हुए इस मामले से जुड़े तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश किया कि बशीद ख़ान को ‘हिंदू भीड़’ ने मार डाला। घटना को सांप्रदायिक रूप देते हुए, रफी ने घोषणा की कि इस मामले में कोई भी दोषी नहीं होगा। इसके साथ ही उसने कटाक्ष करते हुए यह भी लिखा कि क्या अब इस देश के हिंदू को किसी संप्रदाय विशेष वाले को मारने की भी आजादी नहीं?

फैजान नाम के एक सोशल मीडिया यूजर ने कहा कि गाय और चोरी के संदेह के नाम पर संप्रदाय विशेष के लोगों और दलितों को मारा जा रहा है।

एक अन्य सोशल मीडिया यूजर्स ने लिखा कि मॉब लिंचिंग भारत में न्यू नॉर्मल हो गया है।

फैक्ट चेक

कॉन्ग्रेस नेता सलमान निजामी का दावा है कि बशीद खान को इसलिए मार दिया गया क्योंकि वह संप्रदाय विशेष से था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार (सितंबर 3, 2020) को रात उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के एक गाँव में चोरी के संदेह में भीड़ द्वारा पेड़ से बाँधने और भीड़ द्वारा पिटाई करने के बाद 32 वर्षीय व्यक्ति बशीद खान की मौत हो गई।

बाद में, यह पाया गया कि मृतक व्यक्ति, जिसकी पहचान बशीद खान के रूप में हुई, वह चोर नहीं, बल्कि शराबी था। एक सुरक्षा गार्ड को बशीद खान पर चोर होने का संदेह हुआ था, जिसके बाद उसे गुरुवार रात पकड़ लिया गया था। मौके पर भीड़ जमा हो गई और चोर होने के संदेह पर उसकी पिटाई कर दी। हालाँकि, बाद में उसे पुलिस को सौंप दिया गया।

जानकारी के मुताबिक पुलिस ने कथित चोर को जाने दिया, क्योंकि किसी ने औपचारिक रूप से उसके खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। इसके बाद बशीद खान के परिवार ने उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया था। मगर खान ने स्थानीय अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। बशीद खान की मृत्यु आंतरिक रक्तस्राव के कारण हुई।

सलमान निज़ामी और अन्य सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के दावों के विपरीत, इस घटना का कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं है, क्योंकि ग्रामीणों ने खान के खिलाफ केवल चोर होने का संदेह करने के लिए कार्रवाई की थी, न कि इसलिए कि वह संप्रदाय विशेष से था। ग्रामीणों ने कानूनी कार्रवाई शुरू करने के लिए कथित चोर को स्थानीय पुलिस को भी सौंप दिया था।

गाली-गलौज पर उतरे शिवसेना सांसद संजय राउत, कंगना को कहा- ‘हरामखोर’, अभिनेत्री ने दिया मुँहतोड़ जवाब

बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत और शिवसेना नेता संजय राउत के बीच चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन दोनों एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं और इसके लिए शब्दों के तीखे तीर भी छोड़े जा रहे हैं लेकिन शनिवार (सितंबर 5, 2020) को संजय राउत ने सारी हदें पार करते हुए कैमरे के सामने कंगना रनौत को गाली (हरामखोर) दे दी। इससे पहले शिवसेना के एक विधायक ने कंगना की टाँग तोड़ने की धमकी दी थी।

कंगना ने पिछले दिनों खुद को मराठा बताते हुए ट्वीट किया था, ”किसी के बाप का नहीं है महाराष्ट्र, महाराष्ट्र उसी का है जिसने मराठी गौरव को प्रतिष्ठित किया है। और मैं डंके की चोट पर कहती हूँ, हाँ मैं मराठा हूँ, उखाड़ो मेरा क्या उखाड़ोगे?”

कंगना की इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए संज राउत ने कहा, “महाराष्ट्र का बाप छत्रपति शिवाजी महाराज है… मुझे लगता है कि ऐसे व्यक्ति को उसके बाप को लेकर इधर आना पड़ेगा.. आपका (रिपोर्टर) भी बाप दिखाए, अगर है तो…”

न्यूज़ नेशन रिपोर्टर द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या वह कंगना रनौत को मुंबई में प्रवेश से रोकने के लिए गैरकानूनी कदम उठाएँगे, संजय राउत ने जवाब दिया, “महाराष्ट्र सिर्फ शिवसेना की जागीर नहीं है, सभी पार्टियों की है। हम सब मिलकर तय करेंगे।”

जब रिपोर्टर ने यह पूछा कि क्या वह कानून के खिलाफ कोई कदम उठाएँगे, संजय राउत ने कहा, “क्या होता है कानून? उस लड़की ने जिस तरह से बात किया, क्या वह कानून के लिए सम्मान था? आप क्या उस ‘हरामखोर’ लड़की की वकीली कर रहे हैं। जिसने शिवाजी महाराज का अपमान किया, जिसने महाराष्ट्र का अपमान किया है, आपका चैनल उसकी तरफदारी कर रहा है।”

कंगना ने दिया मुँहतोड़ जवाब

कंगना रनौत ने इसका जवाब देते हुए ट्वीट कर लिखा, “2008 में मूवी माफिया ने मुझे एक साइको घोषित कर दिया था। इतना ही नहीं 2016 में उन्होंने मुझे एक चुड़ैल कहा और 2020 में महाराष्ट्र के मंत्री ने मुझे हरामखोर लड़की का खिताब दिया। इन सभी लोगों ने मेरे साथ ऐसा इसलिए किया क्योंकि मैंने कहा कि एक हत्या के बाद मैं मुंबई में असुरक्षित महसूस करती हूँ। इस वक्त डिबेट करने वाले योद्धा कहाँ हैं?”

गौरतलब है कि इससे पहले शिवसेना नेता संजय राउत ने बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत को धमकी देते हुए कहा था कि वह फिल्म ‘माफिया’ से ज्यादा शहर के पुलिस बल से डरने वाले अपने बयान के बाद वापस मुंबई जाने से परहेज करें।

शिवसेना नेता संजय राउत ने शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में रनौत के बयानों को खारिज करते हुए लिखा कि अभिनेत्री का ‘विश्वासघात’ शर्मनाक है और वह मुंबई में रहने के बावजूद शहर के पुलिस बल की आलोचना करती है।

राउत ने लिखा, “हम उनसे मुंबई न आने का अनुरोध करते हैं। यह मुंबई पुलिस का अपमान करने के अलावा और कुछ नहीं है। गृह मंत्रालय को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।”

अभिनेत्री कंगना रनौत दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह की मौत के बाद से ड्रग माफिया और नेपोटिज्म की बहस में काफी खुलकर बयान दे रही हैं।

कंगना रनौत ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि जब वे माइनर थीं तब उनकी ड्रिंक्स में ड्रग्स मिला दी जाती थी ताकि वो पुलिस के पास ना जा सकें। लेकिन जब उन्हें बॉलीवुड पार्टीज में जाने की एंट्री मिलने लगी, तब उन्हें इस दुनिया की हकीकत पता चली कि इस रंगीन दुनिया के पीछे काला अंधेरा था और बॉलीवुड माफिया ने इस इंडस्ट्री को पूरी तरह मुट्ठी में दबा रखा था।

प्रयागराज के पूर्व सांसद अतीक अहमद पर योगी सरकार ने कसा शिकंजा: साढ़ू इमरान की अवैध संपत्तियों को किया ध्वस्त

उत्तरप्रदेश योगी सरकार ने सभी बड़े माफियाओं, बाहुबलियों, बदमाशों और उनके सगे संबंधियों के अवैध कारनामों पर नकेल कसना शुरू कर दिया है। प्रशासन ने लखनऊ में बाहुबली मुख्तार अंसारी की संपत्ति गिराने के बाद प्रयागराज के पूर्व सांसद अतीक अहमद और उनके करीबियों पर कार्रवाई तेज करते हुए उनके साढ़ू इमरान के कब्जे वाली बिल्डिंग को जेसीबी से ध्वस्त कर दिया है।

प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) ने शनिवार को पुलिस की मदद से अतीक के करीबी रिश्तेदार इमरान के सिविल लाइंस इलाके में स्थित करोड़ों रुपए की नजूल की जमीन पर कब्जे वाली बिल्डिंग को जेसीबी से ध्वस्त कर दिया। बता दें आईएस 227 गैंग के सरगना अतीक अहमद का साढू इमरान 25 हजार का इनामी है। उसने बिना पीडीए से नक्शा पास कराए जमीन पर निर्माण था।

यही नहीं इसके बाद अतीक अहमद की सिविल लाइंस के नवाब यूसुफ रोड इलाके में बने एक अवैध कब्जे को भी ध्वस्त किया जाएगा। इस दौरान सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए भारी पुलिसबल की तैनाती की गई है। रिपोर्ट के अनुसार प्रशासन की तरफ से भूमाफियाओं के खिलाफ इस तरह की और कार्रवाई की जाएगी। अभी तक पुलिस अतीक अहमद की लगभग 60 करोड़ की संपत्ति कुर्क कर चुकी है।

गौरतलब है कि इससे पहले प्रशासन ने अतीक अहमद की कुल 7 संपत्तियों को ध्वस्त कर दिया था। इन 7 संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 60 करोड़ रुपए था। प्रयागराज जिला प्रशासन के मुताबिक़ अतीक अहमद पर 38 मामले दर्ज हैं। इसके अलावा प्रशासन ने अतीक अहमद और उसके रिश्तेदारों के 12 हथियारों के लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

अतीक अहमद के बेटे अब्बास अहमद पर भी लखनऊ स्थित आवास पर 7 हथियारों के लाइसेंस लेने पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जिसे बाद में दिल्ली स्थित आवास के पते पर स्थानांतरित किया जा चुका था। अभी तक ऐसे 16 हथियारों का पता चला है जो अतीक अहमद द्वारा इस्तेमाल किए जाते थे। अभी तक अतीक अहमद के कुल 6 प्लाट, 6 घर, 2 गाड़ियाँ जब्त की जा चुकी हैं। 6 बैंक एकाउंट भी बंद किए जा चुके हैं। अतीक के गैंग से जुड़े लोगों पर भी कार्रवाई जारी है।

CAA विरोधी बेंगलुरु आर्कबिशप पीटर मैकाडो पर $42 मिलियन के घोटाले का आरोप: जानें क्या है मामला

कर्नाटक कैथोलिक क्रिश्चियन एसोसिएशन (AKCCA) ने बेंगलुरु आर्कबिशप पीटर मैकाडो पर मल्टी-मिलियन डॉलर के घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया है। मैकाडो को पोप फ्रांसिस द्वारा बैंगलोर के महानगर आर्कबिशप के रूप में नियुक्त किया गया था। वह नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के एक मुखर आलोचक रहे हैं।

28 अगस्त को, AKCCA ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा आशा धर्मार्थ ट्रस्ट के वित्तीय गबन की जाँच करने की माँग की है, जो कि अभिलेखागार के स्वामित्व में है। समूह ने बेंगलुरु में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में ट्रस्ट पर 3 बिलियन ($ 42 मिलियन) के बेइमानी का आरोप लगाया है।

AKCCA नेता राफेल राज ने मीडिया को सूचित करते हुए बताया, “यह तीन अरब का घोटाला है, और इसकी जाँच की जरूरत है।” राज ने कहा कि विदेशों से धन इकट्ठा किया गया, मगर वादे के मुताबिक उसका इस्तेमाल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं को उजागर किया गया था, लेकिन अभिलेखागार ने इसे नजरअंदाज कर दिया और ‘दोषी’ के खिलाफ कार्रवाई नहीं की।

अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए, मैकाडो ने बुधवार को कहा, “मैं किसी भी जाँच के लिए तैयार हूँ, क्योंकि मेरे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। वे राई को पहाड़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं।” उन्होंने ₹2 मिलियन ($ 28,000) की ‘हेरफेर’ के बारे में पता चलने के बाद एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने का दावा किया। कथित तौर पर इस मामले की बेंगलुरु पुलिस द्वारा जाँच की जा रही है।

गोवा क्रॉनिकल में एक रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश माइकल एफ सल्दान्हा ने 2018 में कूर्ग आपदा राहत कार्य के लिए एकत्रित 49.5 करोड़ रुपए के आपराधिक गबन के लिए पीटर मैकाडो और मैसुरु के बिशप केए विलियम के लिए दोषी ठहराया था।

विलियम पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए, उन्होंने लिखा, “हर कोई इस तथ्य को नजरअंदाज कर देता है कि यह आदमी वास्तव में धोखा दे रहा था और लूट रहा था क्योंकि चार महीने बाद भी पीड़ितों तक एक रुपया नहीं पहुँचा। प्राकृतिक आपदा के मामलों में राहत तत्काल और तेज होनी चाहिए। मगर इस मामले में कभी नहीं हुआ।”

पूर्व न्यायाधीश ने खुलासा किया कि विलियम और मैकाडो दोनों ने मिलकर दान के नाम पर 6 करोड़ रुपए जुटाए। उन्होंने कहा कि दोनों ने गायक सोनू निगम को सेंट जोसेफ हाई स्कूल ग्राउंड में मुफ्त में प्रदर्शन करने के लिए मना लिया, जबकि उन्होंने टिकट, प्रायोजकों से 13 करोड़ रुपए का शुल्क लिया। कुल मिलाकर, उन्होंने 49.50 करोड़ रुपए एकत्र किए। 

विलियम ने राहत कार्य का वादा किया था, मगर प्रभावित लोग 24 महीने समाप्त होने के बाद अभी भी संघर्ष कर रहे हैं। पूर्व न्यायाधीश ने अफसोस जताते हुए कहा कि इस आदमी ने यीशु का नाम लेकर कहा था कि पुनर्वास वास्तविक और सार्थक होगा।

मैकाडो पर गलत व्यवहार का आरोप लगाते हुए, पूर्व न्यायाधीश माइकल एफ सल्दान्हा ने लिखा, “शायद आर्कबिशप पीटर मैकाडो हमें बता सकते हैं कि बेघर व्यक्तियों के लिए कितने रैन बसेरों का निर्माण किया है क्योंकि संगीत समारोह के समय एक वर्ष पहले उनकी एक अपील यह भी थी। यदि यह अनुलग्नक में लिखा गया है तो वह निश्चित रूप से जवाबदेह है।”

Letter by Justice Michael F Saldanha – Page 1 (Image Courtesy: Goa Chronicle)

अपने बचाव में, पीटर मैकाडो ने कहा, “जस्टिस सलदान्हा के लिए बहुत सम्मान है लेकिन मुझे नहीं पता कि वह तथ्यों को सत्यापित किए बिना इस तरह के आरोप क्यों लगाते हैं। अगर हम पारदर्शी नहीं थे, तो हमने पुलिस को सूचना क्यों दी? सलदान्हा जैसे व्यक्ति से इस परिमाण के आरोप केवल चर्च की छवि को धूमिल करेंगे। हमें मिलने वाले हर पैसे का हिसाब है। हम हर साल अपने खातों का ऑडिट करते हैं और आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं।”

गौरलब है कि इससे पहले जनवरी में, बेंगलुरु आर्कबिशप ने प्रधानमंत्री से नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) पर अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की थी। इस तथ्य की पूरी अवहेलना के साथ कि इस्लामिक गणराज्य पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को धार्मिक आधार पर प्रताड़ित किया गया, पीटर मैकाडो ने एक ज्ञापन में कहा, “हम केंद्र सरकार से अपील करते हैं कि वह उनके धर्मों के आधार पर नहीं, बल्कि योग्यता के आधार पर अवैध प्रवासियों को नागरिकता न दें।” ध्रुवीकरण के ‘खतरों ’पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने आगे कहा, “धर्म कभी भी किसी देश की नागरिकता का मापदंड नहीं होना चाहिए। और न ही मतभेद होने पर हिंसा उसका समाधान हो सकता है।”

सपा नेता आज़म खान के ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ आला हजरत हज हाउस के निर्माण की होगी जाँच: योगी सरकार ने दिए आदेश

सीतापुर जेल में बंद समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान की मुश्किलें और भी बढ़ने वाली है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने समाजवादी पार्टी के कार्यकाल के दौरान गाजियाबाद में 51 करोड़ रुपए की लागत से निर्माण किए गए आला हजरत हज हाउस की जाँच के आदेश दिए है। राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नंद गोपाल नंदी ने हज हाउस के निर्माण में जरूरत से ज्यादा खर्च हुए धनराशि का पता चलने के बाद एसआईटी को जाँच के आदेश दिए है।

राज्य सरकार ने 31 अगस्त को यूपी पुलिस महानिदेशक एचसी अवस्थी को जारी किए आदेश में कहा कि विशेष जाँच दल (एसआईटी) को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट जमा करनी है।

गृह विभाग के अनुसार, यूपी राज्य हज समिति के सचिव और कार्यकारी अधिकारी राहुल गुप्ता ने 11 जून को एक विज्ञप्ति में योगी सरकार को हज हाउस के निर्माण में हुई गड़बड़ी के बारे में सचेत किया था। उन्होंने लिखा था कि निर्माण पर भारी धनराशि खर्च करने के बावजूद, कमियों को सुधारने और आम जनता के लिए प्रतिष्ठान को तैयार करने का कोई प्रयास नहीं किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि एग्जेक्युटिंग एजेंसी, कंस्ट्रक्शन एंड डिज़ाइन सर्विसेज (C& DS) ने अब तक निर्माण के दौरान हुए खर्च का कोई विवरण नहीं दिया है।

गौरतलब है गाजियाबाद में यह हज हाउस सपा के कार्यकाल के दौरान बनाया गया था। उस वक्त सपा मुखिया अखिलेश यादव को तमाम तरह के मामलों से घिरे थे। वहीं चोरी और जालसाजी जैसे कई मामलों में आरोपित सपा नेता आज़म खान उनके मंत्रिमंडल का हिस्सा थे। सऊदी अरब के मक्का की तीर्थयात्रा पर जाने वाले मुस्लिमों को सहायता देने के लिए 51 करोड़ रुपए की लागत से आला हजरत हज हाउस का निर्माण किया गया था।

4.3 एकड़ के क्षेत्र में फैले इस परिसर में 47 डोरमेट्री हॉल और 36 वीआईपी कमरे शामिल हैं। हज हाउस में 1,886 व्यक्ति बैठ सकते हैं। इस हज हाउस का उद्घाटन यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और राज्य के पूर्व अल्पसंख्यक मंत्री आज़म खान ने 4 सितंबर 2016 को किया था। इसे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट न होने के कारण फरवरी 2018 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सील कर दिया था।

वहीं योगी आदित्यनाथ सरकार ने कोरोना वायरस को मद्देनजर रखते हुए गाजियाबाद के अर्थला में बने आलीशन आला हजरत हज हाउस को 500 बेड के आइसोलेशन सेंटर में बदलने की घोषणा की थी। ताकि इसमें कोरोना वायरस से संक्रमित या ग्रसित मरीजों को रखा जा सके।

चीन के मानवाधिकार कार्यकर्ता ज्होऊ फेंगसुओ ने कहा- कोरोना वायरस महामारी और थियानमेन नरसंहार एक जैसे

चीन संबंधी मामलों के जानकारी और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा पैदा की जा रही है चुनौतियों से निपटने के लिए चर्चा की। यह चर्चा एक वेबिनार के ज़रिए आयोजित की गई और इसका शीर्षक था ‘Emperor Has No Clothes: China Under Xi Jinping’। इस आयोजन में अपने विचार रखने वाले मुख्य लोग थे ह्यूमैनिटेरियन चीन के सह संस्थापक, अध्यक्ष और तियानानमेन छात्र नेता ज्होऊ फेंगसुओ। द तिब्बत ब्यूरो और जेनेवा के विशेष कर्मचारी थिनले चुक्की और पत्रकार आदित्य राज कौल। 

अपने थियानमेन स्क्वायर प्रोटेस्ट के दौरान अपने संघर्षों को याद करते हुए ज्होऊ फेंगसुओ ने कहा ‘मेरी कहानी साल 1989 में शुरू हुई थी। जब थियानमेन विरोध प्रदर्शन हुआ था, इस विरोध प्रदर्शन ने चीन के लोगों ने आज़ादी और लोकतंत्र का सपना देखा था। यह पहला ऐसा मौक़ा था जब चीन के लोगों ने आज़ादी के लिए अपना प्यार और जुनून जाहिर किया था। तब से मैं संघर्ष कर रहा हूँ कि चीन का आने वाला कल आज़ादी और लोकतंत्र की बुनियाद पर खड़ा हो। सिर्फ इस वजह से ही आज मैं यहाँ पर हूँ।’ 

इसके बाद फेंगसुओ ने कहा ‘मेरा संस्था ह्यूमैनिटेरियन चाइना चीन में आम लोगों के मानवाधिकारों के लिए काम करती है। हम हर साल चीन की जेलों में बंद 100 से 200 राजनीतिक कैदियों की मदद करते हैं। यह संख्या काफी ज़्यादा है फिर हम ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचने की कोशिश करते हैं। दुर्भाग्य की बात है कि चीन में ऐसे राजनीतिक कैदियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। हमारा लक्ष्य है कि हम ऐसे लोग चीन में प्रताड़ित किए जा रहे हैं उन्हें बाहर की दुनिया और लोगों से जोड़ें। इसके अलावा चीन में आज़ादी के लिए जारी प्रदर्शन को बढ़ावा मिले।

इसके अलावा फेंगसुओ ने चीन के थियानमेन प्रदर्शन को नियंत्रित करने के तरीके और वुहान कोरोना कोरोना वायरस महामारी के बीच तुलना की। तुलना के दौरान उन्होंने कहा, “हाल ही में पेकिंग यूनिवर्सिटी के प्राध्यापक को कई साल के कारावास की सज़ा सुनाई गई थी। जेल में रहने हुए उन्होंने चीन में फैली इस महामारी पर एक पत्र लिखा था और दुनिया के देशों से निवेदन किया था कि वह इस मुद्दे पर कार्रवाई करें।” 

वुहान काफी कुछ थियानमेन जैसा है, लोगों को यहाँ बात करने की आज़ादी नहीं है। लोगों के पास ऐसा कोई ज़रिया ही नहीं है जिसकी मदद से वह अपनी बात रख सकें। चीन की कम्युनिस्ट सरकार के तानाशाही रवैये की वजह से कोरोना वायरस महामारी एक वैश्विक ख़तरा बन गई। हैरानी की यह थी कि चीन के मेडिकल जनरल ने 26 फरवरी को दावा किया था कि उन्होंने कोरोना वायरस की वैक्सीन बना ली है।

मानवाधिकार कार्यकर्ता ने इस बात पर भी ज़ोर किया कि कैसे चीन दुनिया के लिए एक ख़तरा है। उन्होंने भारत के चीनी एप्लीकेशन पर पाबंदी लगाने के फैसले की सराहना की। साथ ही यह भी कहा कि भारत की तरह दुनिया के अन्य देशों को ऐसे कदम उठाने चाहिए। फिर उन्होंने इस बात की उम्मीद भी जताई की भारत और ताइवान के बीच कूटनीतिक स्तर पर अच्छे संबंध बनें। इसके अलावा उन्होंने चीनी फायरवॉल पर भी चिंता जताई। 

फ़िलहाल फेंगसुओ को चीन से देश निकाला दिया जा चुका है। थियानमेन में हुए नरसंहार के दौरान वह एक छात्र नेता थे। प्रदर्शन में शामिल होने की वजह से उन्हें भी जेल भेज दिया गया था। चीनी सरकार ने थियानमेन में हुए विरोध प्रदर्शन को दबाने का प्रयास किया था जिसके बाद नरसंहार हुआ था। इतने सालों के बावजूद इस बात का पता नहीं चल पाया है कि उस नरसंहार में कुल कितने लोग मारे गए थे। 

सबा नकवी ने ‘ब्राह्मण सांभर पाउडर’ को लेकर फैलाया था झूठ: जानिए क्या है सच

उद्यमी अरुण पुदुर ने शुक्रवार (सितंबर 4, 2020) को ‘पत्रकार’ सबा नकवी द्वारा 2018 में पोस्ट किया गया एक पुराना ट्वीट खोज निकाला है। इस ट्वीट में सबा नकवी ने सांभर पाउडर मसाला के भगवाकरण के बारे में उल्लेख करते हुए अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाया है। ईस्टर्न कंडीमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड (Eastern Condiments Pvt Ltd) द्वारा निर्मित ‘ब्राह्मण सांभर पाउडर’ की एक तस्वीर पोस्ट करते हुए पत्रकार ने ट्वीट किया था, “कर्नाटक के तट के पास कारवार क्षेत्र में मेरी खोज। अनंत कुमार हेगड़े देश (एक हिंदू भूमि की तरफ इशारा करते हुए)…..”

सबा नकवी के आरोपों का जवाब देते हुए कि यह उत्पाद ब्राह्मणवादी वर्चस्व का परिणाम है, अरुण पुदुर ने ट्वीट किया, “पत्रकार’ ब्राह्मणों पर हमला करती रहती हैं, जबकि उनमें से किसी ने भी न तो कोई दंगा किया और न ही खुद को उड़ा लिया!” नकवी पर बौद्धिक बेईमानी का आरोप लगाते हुए उद्यमी ने उक्त मसाला पाउडर के पीछे की असली कहानी बताई।

ब्राह्मण मसाला पाउडर की सच्चाई

ईस्टर्न कंडीमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड (Eastern Condiments Pvt Ltd) की वेबसाइट पर जाकर हमने कंपनी के इतिहास के बारे में पता किया। कंपनी (जो पहले ईस्टर्न ट्रेडिंग कंपनी के रूप में जानी जाती थी) की स्थापना एमई मीरान ने की थी। वो केरल में एक मुस्लिम परिवार से थे। उनके मुस्लिम धर्म के प्रति आस्था के बारे में पता लगाने के लिए हमने ऑनलाइन रिपोर्टों की जाँच की। इस दौरान हमें 2011 में उनकी मृत्यु के बाद प्रकाशित एक लेख मिला। जिसमें लिखा गया था कि उन्हें शाम पाँच बजे  Adimaly Jamath Mosque में दफनाया जाएगा।

Screengrab of the Eastern Condiments website

इससे यह स्पष्ट होता है कि ‘ब्राह्मण सांभर पाउडर’ हिंदुओं द्वारा संचालित कंपनी द्वारा निर्मित नहीं है। ब्राह्मण भोजन या तमिल ब्राह्मण भोजन अनिवार्य रूप से ’सात्विक’ भोजन है, जिसमें प्याज या लहसुन शामिल नहीं है। कुछ पारंपरिक ब्राह्मण घरों में ड्रमस्टिक्स, लौकी, गाजर आदि शामिल नहीं हैं, क्योंकि उन्हें ‘सात्विक’ नहीं माना जाता है। हालाँकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दूसरे लोग इसे खरीद या खा नहीं सकते हैं। ‘ब्राह्मण सांभर पाउडर’ के मामले में भी यह किसी भयावहता के बजाय एक व्यंजन विशिष्ट घटक है।

सात्विक भोजन हलाल की तरह भेदभाव नहीं करता है

सात्विक भोजन के विपरीत, हलाल केवल एक मुस्लिम व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है। इस प्रकार, हलाल फर्म में गैर-मुस्लिमों को स्वचालित रूप से रोजगार से वंचित कर दिया जाता है। हलाल में जानवर की गले की नस में चीरा लगाकर छोड़ दिया जाता है, और जानवर खून बहने से तड़प-तड़प कर मरता है।

इसके अलावा मारे जाते समय जानवर को मुस्लिमों के पवित्र स्थल मक्का की तरफ़ ही चेहरा करना होगा। लेकिन सबसे आपत्तिजनक शर्तों में से एक है कि हलाल मांस के काम में ‘काफ़िरों’ (‘बुतपरस्त’, गैर-मुस्लिम, जैसे हिन्दू) को रोज़गार नहीं मिलेगा। यानी कि यह काम सिर्फ मुस्लिम ही कर सकता है।

इसमें जानवर/पक्षी को काटने से लेकर, पैकेजिंग तक में सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम ही शामिल हो सकते हैं। मतलब, इस पूरी प्रक्रिया में, पूरी इंडस्ट्री में एक भी नौकरी गैर-मुस्लिमों के लिए नहीं है। यह पूरा कॉन्सेप्ट ही हर नागरिक को रोजगार के समान अवसर देने की अवधारणा के खिलाफ है। बता दें कि आज McDonald’s और Licious जैसी कंपनियाँ सिर्फ हलाल मांस बेचती है।

रेलवे 3 श्रेणियों में करेगा 1 लाख 40 हजार भर्तियाँ, 15 दिसंबर से शुरू होगी परीक्षा: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट कर दी जानकारी

भारतीय रेलवे (Indian Railways) जल्द ही कई पदों पर भर्तियाँ करेगा। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार (सितंबर 5, 2020) को ट्वीट करते हुए बताया कि रेलवे में 1 लाख 40 हजार, 640 पद खाली पड़े हैं, जिस पर नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी।

देश के बेरोजगार युवाओं की चिंता को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट कर कहा है कि रेलवे में विभिन्न पदों की सभी 3 श्रेणियों के लिए भर्ती प्रक्रिया के आवेदनों की जाँच पूर्ण की जा चुकी है, विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए परीक्षाओं का आयोजन 15 दिसंबर से शुरु किया जाएगा।

पीयूष गोयल ने कहा इन पदों के लिए हमें 2 करोड़ 42 लाख आवेदन मिले हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण भारतीय रेलवे इन पदों के लिए एग्जाम का आयोजन नहीं करवा पाया था, इसलिए अब परीक्षाओं का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि कंप्यूटर बेस टेस्ट के आधार पर इन पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

बता दें कि कोरोना महामारी की वजह से कई सरकारी विभागों में नई बहाली लंबित है। ऐसे में बेरोजगार युवा काफी निराश हैं। इन नौजवानों का कहना है कि सरकार जब NEET व JEE जैसे परीक्षा को हर हाल में आयोजित करा रही है तो SSC व रेलवे की परीक्षाओं को लेकर सरकार कोई फैसला क्यों नहीं ले रही है।  

गौरतलब है कि रेलवे ने बिहार में NEET और JEE परीक्षा के अभ्यर्थियों के लिए 2 से 15 सितंबर तक 20 जोड़ी विशेष ट्रेनें चलाने का फैसला किया। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि यह सुविधा नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों को भी दी जाएगी।

मंत्री ने ट्वीट किया था, “बिहार में JEE Mains, NEET व NDA में शामिल होने वाले परीक्षार्थियों को परीक्षा सेंटर तक आने-जाने की सुविधा हेतु भारतीय रेलवे ने 2 से 15 सितंबर तक 20 जोड़ी MEMU/DEMU स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है।” राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) 13 सितम्बर को जबकि इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई-मेन एक से छह सितम्बर तक आयोजित करने की योजना बनायी गई है। कॉमन एनडीए 2020 परीक्षा 6 सितम्बर को निर्धारित है।