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नेपाल में मिली 3800 साल पुरानी किराट देवी की मूर्ति: धुलीखेल में सतह से 300 मीटर अंदर पाया गया, देख कर दंग हुए लोग

धरती के गर्भ में आज भी कई रहस्य छिपे हुए हैं। समय-समय पर धरती से चौंकाने वाली चीजें मिलती रही हैं। हाल ही में नेपाल में मिली एक प्राचीन मूर्ति इन दिनों चर्चा में है। इसका आकार प्रकार देखकर कहा जा रहा है कि यह किसी देवी की मूर्ति है। बताया जा रहा है कि यह मूर्ति किराट देवी की है।

इसके संबंध में पुरातत्वविदों का मानना है कि यह महज सैकड़ों साल नहीं बल्कि हजारों साल पुरानी है। उनके मुताबिक यह कम से कम 38 हजार साल पुरानी मूर्ति है। यह मूर्ति नेपाल के धुलीखेल में मिली है।

माइरिपब्लिका वेबसाइट ने स्‍थानीय पुरातत्‍वविद श्रीकृष्‍ण धीमाल के हवाले से बताया कि इन मूर्तियों को सबसे पहले शुक्रवार को एक निर्माण के दौरान बरामद किया गया था। यह जमीन से तकरीबन 300 मीटर नीचे पाया गया। श्रीकृष्ण धीमल वहाँ के स्थानीय होने के साथ ही पंचाल घाटी पुरातत्व अध्ययन और अनुसंधान समिति के सदस्य भी हैं।

उनका कहना है कि मूर्ति की बनावट इतनी खूबसूरत थी कि लोग देखकर दंग रह गए। मूर्तिकला की इस अनूठी रचना को देखने के बाद, धीमल ने अन्य लोगों के साथ मिलकर पुरातत्वविदों से परामर्श करने का फैसला किया और उनका मानना है कि यह ईसा पूर्व या दूसरी शताब्दी का है।

धीमल बताते हैं कि टुकड़ा एक देवी की मूर्ति की तरह दिखता है। इसे गहनों से सुसज्जित किया गया है। इसका दाहिना हाथ विच्छिन्न है और मूर्ति केवल उसकी कमर तक है। हालाँकि, इसके बावजूद यह अनुमान लगाया जा सकता है कि मूर्ति काफी महत्वपूर्ण, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक है।

माना जा रहा है कि यह मूर्ति किराट देवी की है। यह एक किराटी महिला से मिलता जुलता है, और माना जाता है कि यह किराट काल की है। धीमल ने कहा कि अगर ऐसा है तो प्रतिमा करीब 3,800 साल पुरानी है।

वहीं एक अन्‍य पुरातत्‍वविद उधव आचार्य का कहना है कि ये मूर्तियाँ आदिम काल की लग रही हैं। इसे देखकर लग रहा है कि ये दूसरी या तीसरे ईसापूर्व की हैं। यह नेपाल की सबसे पुरानी मूर्तियों में से एक है। पुरातत्‍वविदों ने इस इलाके में म्‍यूजियम बनाए जाने की माँग की है। उन्‍होंने इलाके में और ज्‍यादा खुदाई कराने की भी माँग की है।

अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि मूर्ति की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए तत्काल जाँच की जानी चाहिए। धीमल के वेबसाइट हिमालतखंड.कॉम पर त्रिभुवन विश्वविद्यालय में पुरातत्व विभाग के प्रमुख मदन कुमार रिमल ने मूर्ति पर टिप्पणी करते हुए कहा, “धूलिकेल में एक प्राचीन नेपाली महिला की यह अद्भुत आकर्षक प्रतिमा नेपाली कला और इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है।”

मोढेरा सूर्य मंदिर, PM मोदी ने शेयर की जिसकी वीडियो: प्रतिमा पर सबसे पहले पड़ती थी सूर्य की किरणें, गजनी-खिलजी ने किया था खंडित

भारत के मंदिर शिल्पकला का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करते हैं, जिनकी चर्चा पूरी दुनिया में होती है। लेकिन, हमारे अपने ही देश में उन्हें वो सम्मान नहीं दिया जाता, जिनके वो अधिकारी हैं। जहाँ दक्षिण भारत के मंदिरों की चर्चा अक्सर होती आ रही है, शेष भारत में भी ऐसे-ऐसे मंदिर हैं, जो शिल्पकला का उत्कृष्ट नमूना पेश करते हैं। उन्हें में से एक है, गुजरात के पाटन से 30 किलोमीटर दक्षिण में स्थित मोढेरा सूर्य मंदिर।

गुजरात के मोढेरा सूर्य मंदिर का भूगोल

यही वो मंदिर है, जिसका वीडियो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (अगस्त 26, 2020) को शेयर किया। उन्होंने ट्विटर पर इसका वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि मोढेरा का प्रतिष्ठित सूर्य मंदिर बारिश के दिनों में शानदार दिखता है, एक नजर डालिए। इसके बाद से ही इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई। यहाँ हम आपको बताते हैं कि इस मंदिर का इतिहास क्या है और ये कहाँ स्थित है। साथ ही इसके शिल्पकला के बारे में भी।

‘गुजरात टूरिज्म’ की वेबसाइट के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जब गुजरात की लम्बाई-चौड़ाई को मापने निकलता है तो उसका सामना सोलंकी वंश द्वारा बनवाई गई भव्य संरचनाओं से होता है, जो शिल्पकला की लिगेसी का बेहतरीन नमूना पेश करते हैं। उन स्मारकों को देख कर लोग मुग्ध हो जाते हैं। मेहसाणा से बहुचारजी देवी मंदिर की ओर जब आप बढ़ते हैं तो 35 किलोमीटर जाने पर मोढेरा गाँव से आपका सामना होता है।

गुजरात स्थित मोढेरा का सूर्य मंदिर (फोटो साभार: गुजरात टूरिज्म)

ये ऐसा क्षेत्र है, जो पुष्पवती नदी के किनारे बसा हुआ है और चारों तरफ से बगीचों से घिरा हुआ है। वैदिक देवी-देवताओं के दृश्य आपको भावविह्वल कर देंगे। बता दें कि ये मंदिर भी सोलंकी वंश के शासनकाल में बना था, जिसे राज्य का स्वर्ण युग कहा जाता है। मंदिर परिसर में दीवारों पर उकेरी गई कलाकृतियाँ और अंदर स्थित कुंड आपको किसी अलग ही दुनिया में ले जाते हैं। शायद इसीलिए पीएम मोदी भी इसे शेयर करने से खुद को रोक नहीं पाए।

कैसी हैं यहाँ की कलाकृतियाँ?

पूरे मंदिर को बनाने में हजारों कारीगर लगे थे। कई ऐसी चीजें थीं, जिसे महमूद गजनी के आक्रमण ने नष्ट कर दिया था। आप ये जान कर चौंक जाएँगे कि इसे ओडिशा के कोणार्क में स्थित सूर्य मंदिर से भी पहले बनाया गया था, जो काफी चर्चित है। पूरे मंदिर को कमल के फूल के आकर के पिलर के ऊपर बनाया गया है। इसके हर एक भाग पर आपको महीन और बारीकी से की हुई कलाकृतियाँ मिलेंगी।

पूरे मंदिर को तीन भागों में विभाजित किया गया है। मंदिर के सामने ही सूर्य कुंड (या राम कुंड) स्थित है। इसका इस्तेमाल प्राचीन काल में शुद्ध जल को जमा करने में किया जाता था। हालाँकि, आजकल तो इसमें बारिश का पानी ही जमा हो जाता है लेकिन पहले के जमाने में इसमें अंडरग्राउंड स्प्रिंग लगा हुआ था, ऐसा बताया जाता है। इन सबके अलावा एक सभा मंडल है, जहाँ पहले लोग जमा होते थे और श्रद्धालु जुटते थे।

सभा मंडप में लोगों के बैठने और आराम करने की भी व्यवस्था की गई थी। इसके बाद कई स्तम्भों को पार कर के आप प्रमुख मंडप के पास पहुँचेंगे, जो और भी भव्य हैं। यहीं पर भगवान सूर्य की प्रतिमा स्थित थी, जिसे महमूद गजनी ने खंडित कर दिया और तोड़ डाला। इन सबके बावजूद दीवारों पर बनीं भगवान सूर्य के 12 महीने के 12 स्वरूपों की कलाकृतियाँ आपको मुग्ध कर देने के लिए काफी है।

इसे आप मृत्यु से मोक्ष की यात्रा के रूप में समझ सकते हैं, जैसा कि प्राचीन काल में माना जाता था। कुंड से गुडा मंडप तक की यात्रा को इसी रूप में देखा जाता रहा है। इसे चालुक्य या सोलंकी वंश के भीमदेव प्रथम (भीम-1) के राज में बनवाया गया था। 11वीं शताब्दी के प्रारम्भ में बने इस मंदिर की चर्चा स्कन्द पुराण और ब्रह्म पुराण में भी है। कहा जाता है कि भगवान श्रीराम यहाँ आए थे। इस क्षेत्र को पहले धर्मारण्य के रूप में भी जाना जाता था, अर्थात- धर्म का वन।

आजकल इस मंदिर को ASI ने अपने नियंत्रण में रखा हुआ है, जो इसके जीर्णोद्धार और देखरेख के काम में लगी हुई है। 2014 में तो यूनेस्को ने भी इसे वर्ल्ड हेरिटेज की कैटेगरी में डाला था। अब बात विज्ञान की। साल में दो बार ऐसा होता है, जब पृथ्वी की भूमध्य रेखा से सूर्य के केंद्र का आमना-सामना होता है। इसे Equinox कहते हैं। 20 मार्च और 23 सितम्बर के आसपास हर साल यह होता है।

गुजरात: मोढेरा के सूर्य मंदिर के स्तम्भों पर कलाकृतियाँ

सीधे शब्दों में कहें तो यही वो मौका होता है जब सूर्य का केंद्र सीधा भूमध्य रेखा के ऊपर होता है। अब आप सोच रहे होंगे कि ये तो आजकल की बातें हैं, इसका गुजरात के मोढेरा सूर्य मंदिर से क्या लेना-देना? दरअसल, ऐसा नहीं है। जब Equinox के दिन सूर्योदय होता था तो सूर्य की किरणें सबसे पहले यहाँ सूर्य की प्रतिमा के सिर पर स्थित हीरे के ऊपर पड़ती थी। इसके बाद पूरा मंदिर स्वर्ण प्रकाश से नहा जाता था। ‘इनक्रेडिबल इंडिया’ की वेबसाइट के अनुसार:

“सूर्य भगवान को समर्पित यह मंदिर मोढेरा गांव में है, जो गुजरात के अहमदाबाद शहर से 101 किलोमीटर दूर पुष्पावती नदी के किनारे पर स्थित है। वर्तमान में इस मंदिर में पूजा-अर्चना नहीं होती। इसका संरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन है तथा यह यूनेस्को विश्व विरासत धरोहर की सूची में शामिल है। इस मंदिर का निर्माण शिल्प एवं वास्तुशास्त्र के सिद्धांतों को ध्यान में रखकर किया गया था, जो वास्तुकला व बनावट का प्राचीन विज्ञान है। संपूर्ण मंदिर देखने में ऐसा लगता है मानो जल में कमल खिल रहा हो। इसका मुख्य परिसर तीन भागों में विभाजित है। मंदिर का प्रवेशद्वार जो सभा मंडप कहलाता है, अंतराल जो गलियार है तथा गर्भगृह इसका पवित्र स्थल है। मंदिर परिसर एवं मूर्तियों से सुसज्जित जलकुंड सोलंकी राजाओं के काल में बने भवनों के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।”

इतना ही नहीं, मंदिर का निर्माण इस तरीके से हुआ था कि सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक सूर्य कहीं भी हो, गर्भगृह के पास स्थित दो स्तम्भ हमेशा उसके प्रकाश से नहाए रहते थे। ये था हमारे पूर्वजों का विज्ञान, जिसकी आज हम सिर्फ कल्पना ही कर सकते हैं। सभा मंडप में जो 52 स्तम्भ हैं, वो साल के 52 सप्ताह की ओर इशारा करते हैं। सूर्य के साथ वायु, जल, पृथ्वी और अंतरिक्ष को दर्शाई गई कलाकृतियाँ आज भी मौजूद है।

मंदिर का इतिहास: गजनी व खिलजी ने कर दिया था खंडित

सोमनाथ मंदिर पर महमूद गजनी के हमले को लेकर तो काफी कुछ लिखा जा चुका है लेकिन मोढेरा में उसके हमले और मंदिर को तहस-नहस किए जाने को लेकर बहुत कम वर्णन मिलता है। सोलंकी सूर्यवंशी राजा थे और सूर्य की पूजा वो अपने कुलदेवता के रूप में करते थे। यही कारण था कि सूर्य को लेकर उनकी श्रद्धा अगाध थी। इस मंदिर पर अल्लाउद्दीन खिलजी ने भी हमला किया था।

मान्यता है कि रावण वध के पश्चात भगवान श्रीराम ने खुद को ब्रह्महत्या का दोषी माना था और उन्होंने ऋषि-मुनियों से इसके प्रायश्चित का विधान पूछा था। इसी दौरान उन्होंने गुरु वशिष्ठ से आत्मशुद्धि के लिए एक ऐसा स्थल बताने को कहा जो उपयुक्त हो। गुरु वशिष्ठ ने श्रीराम को यहीं आने की सलाह दी थी, जिसके बाद ये स्थल रामायण से भी जुड़ गया। मंदिर को इस्लामी आक्रांताओं द्वारा खंडित किए जाने के कारण यहाँ पूजा नहीं होती।

चावल के बोरों से हिन्दू आत्माओं की डकैती करने वाली करुणा और सद्भावना की मूर्ति मदर टेरेसा

संत वेलेंटाइन प्रेम के मसीहा थे और मदर टेरेसा करुणा और सेवाभाव की मूर्ति! सभ्यता के विस्तार के साथ विश्वभर में हुए कुछ चुनिन्दा और सबसे बड़े घोटालों में ये 2 घोटाले सबसे ज्यादा जिक्र किए जाने लायक हैं। इसके पीछे कारण यह है कि सैंट वेलेंटाइन, जो कि नॉन-बिलीवर्स यानी, जीसस में यकीन ना करने वालों का उपचार करने से मना कर दिया करते थे और मदर टेरेसा, जिन्हें चावल के बोरों का माफिया कहा जाना ज्यादा बेहतर होता, जो ‘प्रेयर्स’ के माध्यम से उपचार करने की चमत्कारी शक्ति के कारण ‘मदर टेरेसा’ बना दीं गईं।

लेकिन क्या प्रार्थनाओं से ठीक कर देने की कहानियों को भी आप उसी भाव से देखते हैं जिस भाव से ‘प्रेयर्स’ के जरिए उपचार करने वालों को? ‘प्रार्थना’ और ‘प्रेयर्स’ में चावल के बैग्स का अंतर सबसे प्रमुख है।

भारत देश की कमान आजादी के बाद भी कुछ ऐसे हाथों में रही, जिनकी आस्था पाश्चात्य शक्तियों में अपने घर से अधिक रही। यदि ऐसा न होता तो आज सेवाभाव के नाम पर मिशनरी उद्देश्यों को दिशा देने वाली नोबल पुरस्कार विजेता मदर टेरेसा के नाम में ‘ग्लैमर’ देखने वाले लोग 35 साल की उम्र में ही अपनी वकालत छोड़कर समाजसेवा शुरू करने वाले बाबा आम्टे के नाम से भी परिचित होते। बाबा आम्टे का दुर्भाग्य यह था कि वे हिन्दू होने के साथ ही भारतीय थे और उन्होंने कभी भी पीड़ितों के कष्टों को जीसस को दी गई यातनाओं से कम बताने का प्रयास नहीं किया।

मदर टेरेसा में चर्च को मानवता की प्राकृतिक आभा के साथ एक कमजोर बूढ़ी औरत मिली, जो ज्यादातर बूढ़ी महिलाओं को प्रेरित करती है। चर्च ऐसी छवि वाली महिला की एक भव्य कहानी के जरिए अपने प्रयास में सफल रहा। टेरेसा के रूप में एक ऐसी छवि का निर्माण किया गया जो जमीन स्तर पर मौजूद ही नहीं थी, इसे शानदार तरीकों से मानवीय भावनों के साथ खिलवाड़ कर तैयार किया गया।

यदि हम मदर टेरेसा से जुड़ी घटनाओं के आधिकारिक संस्करण पर विश्वास करते हैं, जिन मतों पर समाज के व्यापक वर्ग द्वारा भी विश्वास किया जाता है, तो टेरेसा गरीबों की मसीहा थीं। चर्च द्वारा संत की उपाधि भी उन्हें प्राप्त है, हमें बताया गया है कि उन्होंने अपना पूरा प्रयास दलितों के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया है। लेकिन उनके जीवन के बारे में कुछ तथ्य हैं, जो उनकी छवि में सेंध लगाते नजर आते हैं और वर्षों से सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं।

‘टेरेसा शोषित और वंचित वर्ग की हितैषी थीं’ – ऐसी तमाम कहानियों के विपरीत तानाशाहों के साथ भी उनके बहुत अच्छे संबंध थे। अपने जीवन के दौरान, उसने अक्सर क्रूर तानाशाहों का समर्थन किया और इस तरह अपने अत्याचार को वैधता का लिबास देने का प्रयास किया। 1971-86 के बीच पुलिस राज्य के रूप में हैती पर शासन करने वाले दुवैलियर के साथ टेरेसा के अच्छे संबंध थे। 1981 में अपनी यात्रा के दौरान, उन्होंने शासन को ‘गरीबों का दोस्त’ बताया, वही शासन जिसके शासकों ने 1986 के विद्रोह के बाद लाखों डॉलर के लिए हैतियों को लूट लिया था।

इतना ही नहीं, उसने कम्युनिस्ट तानाशाह एनवर होक्सा की कब्र पर माल्यार्पण भी किया, जिसने अपने मूल देश अल्बानिया में हिंसक रूप से धर्म का दमन किया था। अपने घर के करीब, टेरेसा ने आपातकाल के क्रूर दौर का समर्थन किया और कहा था, ‘लोग खुश हैं, ज्यादा रोजगार भी हैं। कोई हड़ताल नहीं है।”

जेसुइट पादरी डोनल्ड जे मग्वायर मदर टेरेसा का आध्यात्मिक सलाहकार था। उसने 11 साल के एक लड़के का यौन शोषण किया – एक बार नहीं, हजारों बार। उसके खिलाफ यौन संबंधों के बारे में जब रिपोर्ट आई थी, तब मदर टेरेसा ने सभी आरोपों को असत्य बताया था। 

एक महत्वपूर्ण घटना, जो टेरेसा की व्यक्तिगत निष्ठा के विपरीत जाती है, वह चार्ल्स केटिंग के साथ उनका संबंध है, जो खुद कैथोलिक हैं, जिन्हें बचत और ऋण घोटाले में शामिल होने के लिए यूएसए में धोखाधड़ी, धमकी और साजिश का दोषी ठहराया गया था। इस अपराधी ने कई ग्राहकों के लिए बेकार के ‘जंक बॉन्ड’ खरीदे। उन्होंने 80 के दशक में टेरेसा को एक बड़ी राशि दान की थी और बदले में टेरेसा ने उसकी सजा की सुनवाई के दौरान क्षमादान की अपील की थी।

अभियोजन पक्ष के वकील पॉल टर्नर इस घटना से बहुत प्रभावित नहीं थे। एक पत्र में, उन्होंने कहा, “किसी भी चर्च को खुद को अपराधी की अंतरात्मा की आवाज के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।” इसके अलावा, उन्होंने सुझाव दिया कि टेरेसा उन मेहनती लोगों को पैसे लौटाए, जो इस फर्जीवाड़े में ठगे गए थे। लेकिन टर्नर को कभी भी उनके पत्र का जवाब नहीं मिला, न ही कभी पैसा वापस मिला।

गरीबों के प्रति मदर टेरेसा के कथित दान के मिथक में भी कई खामियाँ समय-समय पर सामने आईं। मैरी लाउडन और सुसान शील्ड्स जैसे कई स्वयंसेवक इसका सबसे प्रमुख उदाहरण हैं, जिन्होंने टेरेसा के क्लीनिक में सुविधाओं की गंभीर कमी के खिलाफ बात की है।

टेरेसा की कहानी वास्तव में बहुत ही पेचीदा है। अपने दौर में उनके ‘इलाज’ के तरीकों में स्पष्ट खामियों के बावजूद एक साधारण शहर में एक साधारण अल्बेनियाई परिवार में पैदा हुई अगनेस गोंझा बोयाजिजू विश्व स्तर पर पूजनीय मसीहा बन गई। उनके मिथक भारतीय समाज के व्यापक वर्गों द्वारा माने भी जाते हैं।

ऐसे ही इंसानियत के कुछ मिशनरी मसीहाओं को देखते हुए स्वामी विवेकानंद का भी स्मरण हो आता है, जिन्होंने कहा था कि दरिद्र नारायण का कोई धर्म नहीं होता और भूखे पेट का धर्म तय कर पाना कठिन है। वास्तव में यह औपनिवेशिक दमन के काल में जी रहे गरीब वर्ग की त्रासदी को स्पष्ट अवश्य करता है लेकिन स्वामी विवेकानंद की इन्हीं बातों पर ध्यान दिया जाए तो उन्होंने भूखे पेट और दरिद्र नारायण की भूख का सौदा चावल और कैथोलिक ईसाइयों के साथ करने की भी वकालत नहीं की थी।

सवाल मदर टेरेसा जैसों के समाज सेवा के नाम पर की जाने वाली धाँधलियों का भी नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि यदि इनका उद्देश्य गरीब और शोषितों की मदद करना मात्र था, तो फिर इसके लिए उनकी आस्था का सौदा क्यों किया जाता रहा? इसके अलावा, हमारी मुख्यधारा के मीडिया के पास जवाब देने के लिए बहुत कुछ है। इसने लगातार उत्पीड़ितों की एकमात्र आवाज होने का दावा करते हुए टेरेसा की पीठ थपथपाई है।

खैर, मदर टेरेसा की आज 110वीं जयंती है। कम से कम आज का दिन उनके दुसरे उद्देश्यों पर बात करने का नहीं होना चाहिए। चमत्कारिक तरीके से पीड़ितों का उपचार करने के लिए मदर टेरेसा हमेशा ही हमेशा याद की जाती रहेंगी।

पुलवामा हमले में शामिल एकमात्र लड़की, आतंकियों को मिली जिससे भरपूर मदद, जिसके घर में बनाया गया वो ‘आखिरी वीडियो’

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने फरवरी, 2019 में हुए पुलवामा आतंकी हमले में शामिल 19 आतंकवादियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है। एनआईए की चार्जशीट में 23 साल की एक लड़की इंशा जान (Insha Jan) का नाम भी शामिल है। एनआईए के अनुसार, पुलवामा के हकरीपोरा स्थित उसके घर का इस्तेमाल पुलवामा हमले में शामिल आतंकवादियों को रसद पहुँचाने और उनके ठहरने के लिए किया गया था।

इस वर्ष मार्च के माह में ही एनआईए ने पुलवामा आतंकी हमले के मामले में 50 वर्षीय एक शख्स तारिक अहमद शाह (Tariq Ahmed Shah) और उसकी 23 वर्षीय बेटी इंशा जान (Insha Jan) को गिरफ्तार किया था। वे जम्मू और कश्मीर में पुलवामा जिले के हकीपोरा गाँव के निवासी हैं। तारिक अहमद शाह दक्षिण कश्मीर के जम्मू कश्मीर में ट्रक ड्राइविंग का काम करता है।

आतंकियों से फोन और सोशल मीडिया से जुड़ी थी इंशा जान

एनआईए के अनुसार, इंशा जान ने वर्ष 2018-19 के दौरान 15 बार से ज्यादा और हर बार 2-4 दिनों के लिए अपने घर पर आतंकवादियों को रहने और खाने में मदद की। एनआईए की प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि इंशा जान पाकिस्तानी IED निर्माता मोहम्मद उमर फारूक से लगातार संपर्क में थी और टेलीफोन और अन्य सोशल मीडिया के माध्यम से उसके सम्पर्क में थी।

जैश ए मोहम्मद के आतंकी उमर फारूक को सुरक्षाबलों ने इसी साल मार्च के माह एक मुठभेड़ में ढेर कर दिया था। उमर फारूक की पुलवामा हमले में उसकी मुख्य भूमिका बताई गई है। सुरक्षाबलों को फारूक के पास से पाकिस्तान का पहचान पत्र भी मिला था।

एनआईए ने पुलवामा आतंकवादी हमले की साजिश रचने और उसे अंजाम देने के मामले में मंगलवार (अगस्त 24, 2020) को एक विशेष अदालत में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश ए मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर समेत 19 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र (चार्ज शीट) दायर की। इस चार्जशीट में जैश ए मोहम्मद के आतंकी उमर फारूक का भी नाम है।

एनआईए की जाँच में खुलासा हुआ है कि पुलवामा आतंकी हमले की तैयारियाँ 2 साल पहले से ही की जा रही थी। यह सिलसिला तब शुरू हुआ, जब आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद अपने आतंकियों को अल कायदा तालिबान जैश ए मोहम्मद और हक्कानी जैश ए मोहम्मद के ट्रेनिंग कैंप में भेजा। आतंकी हमले का मुख्य आरोपित उमर फारूक वर्ष 2016 और 2017 में इस कैंप में ट्रेनिंग लेकर आया था।

अप्रैल 2018 में आतंकी उमर फारूक ने जम्मू सांबा सेक्टर से घुसपैठ की और पुलवामा पहुँच गया। यहाँ उसे पुलवामा के लिए जैश ए मोहम्मद कमांडर की कमान दी गई। उमर ने अपने पाकिस्तानी साथी मोहम्मद कामरान, मोहम्मद इस्माइल, कारी यासिर और स्थानीय आतंकी आदिल डार और समीर डार के साथ पुलवामा हमले की साजिश रची।

इन आतंकियों को पुलवामा की तैयारी करने में मदद करने वाले नामों में से एक नाम इंशा जान का भी है। इंशा जान और उसके पिता तारिक अहमद शाह को मार्च, 2020 में गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलवामा हमले के फिदायीन आतंकी आदिल डार ने हमले से पहले इंशा जान के ही घर में ही ठिकाना बनाया था। तारिक अहमद दक्षिण कश्मीर में डंपर ड्राइवर का काम करता था।

एनआईए की पूछताछ में आरोपित तारिक अहमद शाह ने खुलासा किया था कि जम्मू कश्मीर के पुलवामा के हकरीपोरा के उसके घर का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए किया गया था। तारिक अहमद ने बताया कि उसने फिदायीन आदिल अहमद डार, IED बनाने वाले पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद उमर फारूक, कामरान, समीर अहमद डार और मोहम्मद इस्माइल को पनाह दी थी। उमर फारूक और कामरान को भारतीय सुरक्षा बल मुठभेड़ में मार चुके हैं।

इंशा जान और उसके पिता तारिक अहमद के घर का इस्तेमाल फिदायीन आदिल अहमद डार का वीडियो बनाने के लिए भी किया गया था जिसे जैश ए मोहम्मद ने पुलवामा हमले के तुरंत बाद जारी किया था।

पुलवामा आतंकी हमला

फरवरी 14, 2019 को पुलवामा में श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग पर CRPF की बस पर हमला हुआ था। दोपहर करीब 3.30 बजे फिदायीन आतंकी आदिल अहमद डार एक कार में आया और उसने CRPF के काफिले में घुसा दी। जिसके बाद बस में बड़ा धमाका हुआ और CRPF के जवानों से भरी बस खाक हो गई। बस के आस-पास जो अन्य वाहन थे, उन्हें भी नुकसान पहुँचा और इस आतंकी हमले में 40 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे।

‘चाय में 4 बूँद डाल कर पिला दो, फिर देखो’: रिया के चैट से ड्रग्स एंगल, कर रही थी ‘माल’ ख़त्म होने की बात

सुशांत सिंह राजपूत की कथित आत्महत्या मामले में एक नया मोड़ आया है। इस मामले में सामने आए व्हाट्सप्प चैट से बड़ा खुलासा हुआ है। रिया चक्रवर्ती के व्हाट्सप्प चैट के सामने आने के बाद अब इस मामले में ड्रग्स एंगल आ रहा है, जिसके आरोप भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी भी लगा चुके हैं। रिया चक्रवर्ती के ‘रिट्रीव चैट्स’ के हवाले से ये खुलासा हुआ है, जिसे अभिनेत्री ने डिलीट कर दिया था।

‘टाइम्स नाउ’ की खबर के अनुसार, ये चैट रिया चक्रवर्ती और गौरव आर्या के बीच का है। बताया गया है कि गौरव एक ड्रग डीलर है, जो इस कारोबार में कई सालों से लगा हुआ है। मार्च 8, 2020 को भेजे गए मैसेज में रिया ने लिखा था कि अगर हम हार्ड ड्रग्‍स की बात करें तो मैंने ज्‍यादा ड्रग्‍स का इस्‍तेमाल नहीं किया है। वहीं दूसरी चैट में रिया ड्रग डीलर गौरव से पूछ रही हैं कि क्या उसके पास MD है?

बता दें कि MDMA को शॉर्ट फॉर्म में MD कहा जाता है। इसका आशय Methylenedioxymethamphetamine से है, जिसे काफी स्ट्रॉन्ग ड्रग माना जाता है। इसके अलावा नवम्बर 25, 2019 की एक और चैट का खुलासा हुआ है, जिसमें रिया ने जया साहा से कहा है कि उन्होंने श्रुति से कोऑर्डिनेट करने को कहा है। इसके बाद रिया ने जया को धन्यवाद भी कहा था। जया ने जवाब दिया था कि कोई समस्या नहीं है, ये मददगार साबित होगा।

सबसे ज्यादा चौंकाने वाला चैट पाँचवाँ है, जिसमें रिया चक्रवर्ती से जया ने कहा, “चाय, कॉफी या पानी में 4 बूंदें डालो और उसे पीने दो। असर देखने के लिए 30 से 40 मिनट रुको।” अप्रैल 2020 में एक अन्य चैट में मिरांडा ने जया से कहा कि ‘स्टफ’ लगभग ख़त्म हो चुका है। अप्रैल 2020 की ही एक चैट में शौविक से Hash और Bud लेने की बात हो रही है, जो लोअर लेवल का ड्रग्स है।

दूसरी तरफ गौरव ने ड्रग्स से जुड़े होने की बात नकार दी है। रिया के वकील ने तो यहाँ तक कहा कि उनकी क्लाइंट ब्लड टेस्ट के लिए भी तैयार है, जिसके बाद ये साबित हो जाएगा कि वो ड्रग्स नहीं लेती हैं। इधर सुशांत की दोस्त स्मिता पारीख ने भी सिद्धार्थ पिठानी को लेकर खुलासा किया है। बकौल स्मिता, जब उन्होंने सिद्धार्थ से पूछा कि 14 जून को सुशांत को फाँसी के फंदे पर देखा तो रिया को कॉल क्यों नहीं किया, तो जवाब में उन्होंने कहा कि वो भूल गए थे।

सिद्धार्थ ने बताया कि उसके दिमाग में सुशांत की बहन नीतू का नाम आया और उसने उन्हें ही सबसे पहले कॉल किया, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। स्मिता ने आरोप लगाया कि वो रिया को बचाने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि एक फ्लैट में सब साथ रह रहे थे और उसे रिया को कॉल करने का ख्याल नहीं आया। स्मिता ने कहा कि उसे सिद्धार्थ और रिया ने एक साथ ही कॉल किया था और सिद्धार्थ मुंबई पुलिस की जाँच से खुश भी था।

स्मिता ने संदीप सिंह से पूछताछ की माँग करते हुए कहा कि परिवार भी यही चाहता है क्योंकि उसने 14 जून को जल्दबाजी में सबूत मिटाने की कोशिश की थी। सारी प्रक्रिया उसने ही पूरी कराई थी और सभी को निर्देश दे रहा था। वहीं 17 अप्रैल के एक अन्य चैट से भी चीजें रहस्यमयी हो रही हैं, जिसमें रिया ने मिरांडा को लिखा था कि माल ख़त्म हो चुका है। अब नारकोटिक्स ब्यूरो भी इस मामले की जाँच कर रहा है।

ये भी पता चला है कि संदीप सिह ने एंबुलेस के ड्राइवर को कॉल किया था। संदीप ने 14 जून को 3 बार और 16 जून को एक बार ड्राइवर को कॉल किया था। कुल मिलाकर संदीप और एंबुलेंस ड्राइवर के बीच 4 बार बात हुई थी। एंबुलेंस ड्राइवर से जब इस बारे में पूछा गया तो उसने कुछ भी बोलने से मना कर दिया है। कॉल डिटेल से यह भी खुलासा हुआ है कि संदीप सिंह द्वारा कॉन्ग्रेस नेता संजय निरुपम और अभिनेता सूरज पंचोली की माँ जरीना वहाब को भी कॉल किए गए थे।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष चुनाव: सोनिया ने, सोनिया को, सोनिया से: अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti on Sonia vs Sonia vs Sonia at INC CWC

7 घंटे तक कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी की मीटिंग चली। मीटिंग इस बात पर हुई कि अध्यक्ष कौन बनेगा? हालाँकि, इसका कोई औचित्य नहीं है। ये बस दिखाने के लिए है कि कॉन्ग्रेस में लोकतंत्र है और हर बातें लोकतांत्रिक तरीके से मानी जाती है। ये अलग बात है कि कॉन्ग्रेस की सर्वेसर्वा सोनिया गाँधी हैं, और जब उनका मन इससे उबल जाता है, तो राहुल गाँधी को सर्वेसर्वा बनाया जाता है। बीच-बीच में प्रियंका गाँधी को भी मजबूत और सशक्त नेतृत्व के रूप में दर्शाया जाता है।

इस बार थोड़ा सा मसाला देखने को मिला। पार्टी के 23 बुजुर्ग नेताओं ने सोनिया को चिट्ठी लिखकर बदलाव की माँग की। कपिल सिब्बल ने कहा कि 30 सालों से उन्होंने बीजेपी के समर्थन में एक शब्द भी नहीं बोला, फिर भी उन पर बीजेपी से मिलीभगत का आरोप लगा है। कुछ लोग मीटिंग से भी उठकर चले गए।

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तेलंगाना के भैंसा में कट्टरपंथी भीड़ के हमले में बेघर हुए हिंदू परिवारों के लिए घर बनवा रही सेवा भारती

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ी संस्था ‘सेवा भारती’ ने तेलंगाना के आदिलाबाद जिले के भैंसा शहर में जनवरी 2020 में इस्लामी भीड़ द्वारा विस्थापित हिंदू परिवारों की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया है। इस्लामी भीड़ ने हिंदू परिवार के घरों को जला दिया था।

इन परिवारों का समर्थन करने के लिए, सेवा भारती ने विस्थापित परिवारों के लिए नए घरों के निर्माण के लिए 24 अगस्त को एक भूमि पूजा का आयोजन किया।

इस कार्यक्रम में आरएसएस के प्रांत प्रचारक श्री देवेंद्र जी, सेवा भारती के श्री दुर्गारेड्डी के साथ ही विभिन्न सामाजिक एवं स्वयंसेवी संगठनों और स्वयंसेवकों ने भाग लिया।

गौरतलब है कि 12 जनवरी को, तेलंगाना के भैंसा शहर में संप्रदाय विशेष की भीड़ ने हिंदू समुदाय के सदस्यों पर हमला किया और उनकी संपत्ति को लूट लिया और जला दिया। संप्रदाय विशेष की उग्र भीड़ ने हिंदुओं के 18 घर जला दिए गए और उनकी संपत्तियों को लूट लिया गया। भीड़ ने घटनास्थल पर पहुँची पुलिस के ऊपर भी पथराव किया।

मुसीबत तब शुरू हुई जब संप्रदाय विशेष के एक युवक को बुजुर्गों ने भैंसा नगर में कोरबा गली के निवासियों के खिलाफ गाली-गलौज और अपशब्द के लिए टोका। स्थानीय निवासियों के अनुसार संप्रदाय विशेष का युवक रात 9 बजे के बाद लगभग 400-500 की भीड़ के साथ वहाँ पर आए और हिंसा शुरू कर दी। भीड़ ने पहले पास में खड़े दोपहिया वाहनों को जलाना शुरू किया और बाद में निवासियों पर पथराव करने लगे।

भाजपा विधायक राजा सिंह ने आरोप लगाया कि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने लोगों को भड़का कर हिंसा को बढ़ावा दिया। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव पी मुरलीधर राव ने कहा कि ओवैसी की पार्टी पिछले कई दिनों से इलाक़े में गुटबंदी करके हिंसा की साज़िश रच रही थी। उन्होंने दावा किया कि राज्य की सत्ताधारी पार्टी टीआरएस ने भी एआईएमआईएम की करतूतों में पूरा सहयोग दिया। 

इलाक़े में कर्फ्यू लगा कर स्थिति को नियंत्रित किया गया। 2008 में इसी इलाक़े में एक मस्जिद के आगे हिंसा भड़क गई थी। दुर्गा पूजा के विसर्जन के दौरान जुलुस जैसे ही मस्जिद के पास पहुँचा, हिंसा भड़क गई।

तेलंगाना स्थित निज़ामाबाद के सांसद अरविन्द धर्मपुरी ने भी आरोप लगाया कि आगजनी व पत्थरबाजी करने वाली हिंसक भीड़ ने हिन्दुओं की संपत्ति व उनके घरों को निशाना बनाया। उन्होंने स्थानीय पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस भी एआईएमआईएम के साथ है क्योंकि उसे केसीआर की पार्टी का समर्थन प्राप्त है। 

बता दें कि कोरोना कहर के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी संगठन ‘सेवा भारती’ लगातार जरूरतमंदों तक मदद पहुँचा रही है। गौरतलब है कि दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काफ़ी काम कर रहा है और लगातार जनसेवा में लगा हुआ है। संघ के संगठन ‘सेवा भारती’ ने पूरी दिल्ली में ग़रीबों को खाना खिलाने से लेकर बेसहारा लोगों को ज़रूरी संसाधन मुहैया कराने के लिए दिन-रात एक किया हुआ है। 

दिल्ली में 5000 संघ कार्यकर्ता लगातार लोगों के बीच भोजन बाँटने में लगे रहे। विषम परिस्थिति आने पर रोजाना डेढ़ लाख भोजन के पैकेट वितरित किए गए। रोजाना तकरीबन 75 हज़ार भोजन के पैकेट रोज बाँटे गए।

पूरी दिल्ली में 45 किचेन काम में लगे रहे। समाजसेवा में डॉक्टरों और सरकार की सलाहों का भी पूरा ध्यान रखा गया। सोशल डिस्टेन्सिंग का पालन किया गया। प्रत्येक कार्यकर्ता की जिम्मेदारी थी कि वो एक स्थानीय बुजुर्ग की पूरी जिम्मेदारी उठाए और उनकी दवाओं से लेकर भोजन तक का इंतजाम करे।

बार एंड बेंच, लाइव लॉ करते हैं सुनवाई की गलत और एकतरफा रिपोर्टिंग: जस्टिस मिश्रा ने लगाई लीगल मीडिया पोर्टल्स को लताड़

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा ने लीगल मीडिया पोर्टल ‘बार एंड बेंच’ और ‘लाइव लॉ’ द्वारा कोर्ट की सुनवाइयों की, की जाने वाली रिपोर्टिंग के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि मुकदमों की लाइव रिपोर्टिंग जिस तरह से की जाती है, वह अक्सर एकतरफा होती है और वह भी गलत अंदाज में। विडंबना यह है कि इस मामले को बार और बेंच ने खुद अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट भी किया है।

प्रशांत भूषण अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर ली है। सजा की मात्रा पर फैसला आना बाकी है। इससे पहले बहस के दौरान जस्टिस मिश्रा ने कहा कि रिटायर होने से पहले यह सब कुछ करना बेहद कष्टदायक है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट हमेशा आलोचना के लिए तैयार रहा है। मुकदमों की जिस तरह से लाइव रिपोर्टिंग की जाती है वह अक्सर एकतरफा होती है। क्या कभी कोर्ट ने उसमें कार्रवाई की? कोर्ट ने कहा कि कम से कम वरिष्ठ सदस्यों से ऐसी उम्मीद नहीं की जाती और आजकल यह चलन बन चुका है।

जस्टिस अरूण मिश्रा ने कहा, “अपने ट्वीट्स के बचाव में दिए गए प्रशांत भूषण के जवाब निराशाजनक और अनुचित थे। आपको सहनशील होना होगा। कोर्ट ने कहा कि आप देखें कि अदालत क्या कर रही है और क्यों कर रही है? सिर्फ हमला मत करिए, जज खुद का बचाव करने या समझाने के लिए प्रेस के पास नहीं जा सकते। क्या लोग हमारी आलोचना नहीं कर रहे हैं? इतने लोग हमारी आलोचना करते हैं, लेकिन हमने कितने लोगों को दोषी ठहराया या सजा दी है?”

सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण को फिर से उन आरोपों के बारे में ‘विचार करने’ के लिए कहा और कहा कि अगर वह चाहते हैं तो अपना बयान वापस ले सकते हैं, कोर्ट की सुनवाई 30 मिनट बाद फिर से शुरू होगी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है।

अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब बुनियाद हिलाने का दुस्साहस कोई करे तो कुछ न कुछ करना होगा। इसके लिए उन्होंने (प्रशांत भूषण) अपना सच गढ़ा और उसकी ही आड़ ली। ये बहुत नकारात्मक है और कई मामलों में हतोत्साह करने वाला भी।

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल और प्रशांत भूषण के वकील राजीव धवन ने सजा नहीं देने की माँग की। इस सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रशांत भूषण का ट्वीट अनुचित था। कोर्ट ने कहा कि हमारे बुनियादी तथ्य और वास्तविकता इनसे अलग हैं और हमें इनके (प्रशांत भूषण) के बयान दुर्भावना से भरे लग रहे हैं।

इसके पहले कोर्ट की सुनवाई शुरू होने के साथ अपने प्राथमिक सबमिशन में प्रशांत भूषण के वकील राजीव धवन ने 2009 अवमानना मामले को संविधान पीठ को दिए जाने की माँग की थी, जिसे कोर्ट ने दूसरी बेंच को सौंपने की सिफारिश कर दी। इस तरह से तहलका इंटरव्यू वाले केस को एक दूसरी बेंच को सौंप दिया गया। और इसकी सुनवाई 10 सितंबर को होगी।

फैक्ट चेक: क्या भारत सरकार ने राम मंदिर भूमि पूजन या मंदिर निर्माण के लिए भुगतान किया है?

जब से देश के सर्वोच्च न्यायालय ने रामलला विराजमान के पक्ष में फैसला सुनाया और अयोध्या में दशकों से चले आ रहे भूमि विवाद को समाप्त कर राम मंदिर के निर्माण की अनुमति दी, तभी से राम मंदिर के निर्माण में उपयोग किए जाने वाले धन को लेकर कई तरह की अफवाहें फैलाई जा रही है।

5 अगस्त 2020 को राम मंदिर भूमि पूजन समारोह के आसपास, कुछ लोग, जो राम मंदिर के निर्माण के खिलाफ हैं, ने आरोप लगाया कि भारत सरकार भूमि पूजन और राम मंदिर निर्माण पर करदाताओं का पैसा खर्च कर रही है।

क्या सरकार भूमि पूजन या राम मंदिर पर पैसा खर्च कर रही है?

ऑपइंडिया ने मामले में सच्चाई जानने के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के प्रवक्ता चंपत राय से संपर्क किया। जब हमने उनसे पूछा कि भूमि पूजन समारोह के लिए भुगतान किसने किया, तो उन्होंने कहा कि इस समारोह का खर्च ट्रस्ट वहन करेगा। हालाँकि, उन्हें अभी तक बिल नहीं मिले हैं। वो कहते हैं कि जैसे ही उन्हें आपूर्तिकर्ताओं से बिल मिलेंगे, वे भुगतान प्रक्रिया शुरू कर देंगे।

जब उनसे ओवैसी जैसे विपक्षी नेताओं के सवाल को लेकर पूछा गया कि वो राम मंदिर या भूमि पूजन के निर्माण पर सवाल उठाते हैं और इसकी तुलना राज्य सरकारों द्वारा आयोजित इफ्तार पार्टियों से करते हैं, तो चंपत राय ने उस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि उन्हें राजनीतिक बयानों में कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्होंने कहा कि वे जो चाहें कह सकते हैं। उसे कोई फर्क नहीं पड़ता।

राम मंदिर निर्माण के लिए भारत सरकार द्वारा दान किया गया धन

भारत सरकार ने वास्तव में राम मंदिर के निर्माण के लिए धन दान किया है। राम मंदिर ट्रस्ट को दिए गए एक रुपए का पहला दान केंद्र सरकार ने ट्रस्ट के गठन के बाद किया था। इस पहले दान के बाद, निर्माण के लिए केंद्र सरकार द्वारा कोई पैसा नहीं दिया गया है।

राम मंदिर निर्माण के लिए योगी आदित्यनाथ द्वारा दिया गया धन

मार्च 2020 में, उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर के निर्माण के लिए 11 लाख रुपए का दान दिया था। हालाँकि, यह धनराशि उन्होंने अपनी बचत में से दान की थी, न कि यूपी सरकार के फंड से। योगी आदित्यनाथ द्वारा राम मंदिर ट्रस्ट को दिया गया चेक सोशल मीडिया पर काफी शेयर किया गया।

प्रधानमंत्री की सुरक्षा केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। केंद्र सरकार विशेष सुरक्षा समूह का वित्त पोषण करती है, जो विशेष रूप से भारत के प्रधानमंत्री की सुरक्षा का ध्यान रखता है। यदि प्रधानमंत्री किसी भी कारण से किसी भी कार्यक्रम में जा रहे हैं, तो एसपीजी स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर पीएम की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

क्या भारत सरकार ने भूमि पूजन या राम मंदिर निर्माण के लिए भुगतान किया?

हमारी टीम ने पाया कि केंद्र सरकार द्वारा शुरुआती दान 1 रुपए के अलावा, केंद्र सरकार ने भूमि पूजन या राम मंदिर निर्माण पर एक पैसा भी खर्च नहीं किया है। सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा किए गए दावे नकली हैं। राम मंदिर ट्रस्ट, दान के माध्यम से दुनिया भर के हिंदू भक्तों से पैसा इकट्ठा कर रहा है। ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं से निर्माण के लिए ताँबे की पट्टी दान करने का भी अनुरोध किया है।

सुशांत सिंह राजपूत मामले में CBI ने मुंबई पुलिस के जाँच अधिकारी और सब इंस्पेक्टर को भेजा समन

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में CBI ने मुंबई पुलिस के जाँच अधिकारी भूषण बेलनेकर और एक सब इंस्पेक्टर को समन भेजा है। बेलनेकर सुशांत मामले की जाँच कर रहे थे। केंद्रीय जाँच एजेंसी ने पिछले दिनों जाँच अधिकारी का बयान लिया था। अब उन्हें पूछताछ के लिए समन भेजा है

वहीं, दूसरी ओर सुशांत के चार्टर्ड अकाउंटैंट संदीप श्रीधर, सुशांत के दोस्त सिद्धार्थ पिठानी, रसोइए नीरज, रजत मेवाती और केशव समेत सीबीआइ 6 लोगों से डीआरडीओ गेस्ट हाउस में पूछताछ की गई। इसी गेस्टहाउस में सुशांत के केस की जाँच कर रही सीबीआई की टीम ठहरी हुई है। माना जा रहा है अब सीबीआइ रिया चक्रवर्ती को कभी भी पूछताछ के लिए बुला सकती है।

गौरतलब है कि सुशांत 14 जून को अपने बेडरूम में मृत पाए गए थे। उस दिन कुल 4 लोग घर में थे। उनमें से घर के नौकर नीरज सिंह को आज लगातार पाँचवे दिन DRDO गेस्ट हाउस लाया गया। नीरज सुशांत को फंदे से लटकते हुए देखने वालो में से एक है। क्रिएटिव आर्ट डिजायनर सिद्धार्थ पीठानी से भी लगातार पूछताछ हो रही है। सिद्धार्थ ने ही दरवाजा नहीं खुलने पर चाबी वाले को बुलाया था। लॉक तोड़ने के बाद चाबी वाले को बेडरूम में जाने नहीं दिया था।

सुशांत को पंखे से बंधे फंदे पर लटकते देख सुशान्त की बहन मीतू सिंह को फोन पर बताया और फिर मीतू सिंह के कहने पर सुशांत सिंह राजपूत का शव नीचे उतारा था। हाउस कीपर दीपेश सावंत भी उस दिन सुशान्त कमरे में सिद्धार्थ के साथ गया था और  सुशान्त का शव उतारने में मदद की थी। कुक केशव ने सुबह सुशांत को केला ,जूस और नारियल पानी देने का दावा किया था। 

सोमवार को, सीबीआई की टीम मुंबई स्थित रिजॉर्ट का दौरा किया, जहाँ राजपूत ने कुछ महीने बिताए थे। सीबीआई अधिकारियों ने शुक्रवार को पिठानी और नीरज के बयानों को दर्ज किया था। शनिवार को जाँच टीम पिठानी, नीरज और सावंत को राजपूत के फ्लैट में ले गए और वहाँ घटनाओं को सिलसिलेवार ढंग से फिर से रचा। तीनों को रविवार को फिर से फ्लैट पर ले जाया गया और सीबीआई ने डीआरडीओ गेस्ट हाउस पर उनसे फिर से पूछताछ की गई।

उल्लेखनीय है कि सुशांत सिंह को जहर देने का भी आरोप लगाया जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने मामले पर ट्वीट करते हुए लिखा, “हत्यारों और उनकी शैतानी मानसिकता की पहुँच धीरे-धीरे सामने आ रही है। ऑटॉप्सी को जानबूझकर लेट किया गया, ताकि सुशांत सिंह के पेट में जहर घुल जाए।” उन्होंने यह भी कहा कि जो जिम्मेदार हैं, उन पर नकेल कसने की जरूरत है।

इसके अलावा उन्होंने संदिग्ध संदीप सिंह से भी सवाल-जवाब करने की बात कही। बता दें कि संदीप सिंह की कॉल डिटेल से खुलासा हुआ है कि उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता संजय निरुपम और अभिनेता सूरज पंचोली की माँ जरीना वहाब को कॉल किए थे। कॉल रिकॉर्ड के अनुसार, संदीप सिंह पिछले 10 महीनों से सुशांत के साथ संपर्क में नहीं थे। सुशांत सिंह के साथ संदीप की अंतिम बार बातचीच सितंबर, 2019 में हुई थी।