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क्या अहमदनगर के बाबाभाई पठान ने 2 ‘अनाथ’ लड़कियों को ‘गोद’ ले उनकी हिंदू रीति से शादी करवाई?

हाल ही में, सोशल मीडिया पर संप्रदाय विशेष के एक व्यक्ति के दो लड़कियों को ‘गोद लेने’ और बाद में हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार उनकी शादी कराने की एक दिल को छू लेने वाली कहानी काफी शेयर की गई।

मीडिया में कई रिपोर्टों के मुताबिक, महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के रहने वाले बाबाभाई पठान ने दो अनाथ बहनों को ‘गोद लिया’ और फिर हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार अपने खर्च से उनकी शादी की।

इसी कहानी को आईपीएस अधिकारी दीपांशु काबरा ने भी शेयर किया। उन्होंने बाबाभाई पठान की प्रशंसा करते हुए ट्वीट किया, “मिलिए बाबाभाई पठान से। अहमदनगर, महाराष्ट्र के रहने वाले बाबाभाई ने 2 अनाथ बच्चियों को गोद लिया और हिन्दू रीति-रिवाजों के अनुसार खुद उनकी शादी करवाई तथा एकता और मानवता की अद्वितीय मिसाल कायम की। उनके जैसे लोगों के कारण ही इंसानियत पर करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास अटल है।”

मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि संप्रदाय विशेष के व्यक्ति ने अनाथ लड़कियों को परोपकारी भाव से अपनाया और हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार उनसे शादी की। हालाँकि सच्चाई मीडिया रिपोर्ट के विपरीत है। सच्चाई यह है कि दुल्हनों को न तो गोद लिया गया, न ही अनाथ और उनकी माँ अभी भी जीवित हैं।

लोकप्रिय मराठी ब्लॉगर और स्तंभकार समीर गायकवाड़ के अनुसार, बाबाभाई पठान दुल्हन की माँ के राखी के भाई हैं और उन्होंने अहमदनगर के बोधेगाँव में भुसारे परिवार की दो बेटियों की शादी में मामा की रस्में निभाईं। दुल्हनों की माँ हर साल बाबाभाई पठान को राखी बाँधती है, क्योंकि उनका अपना कोई सगा भाई नहीं है।

इस सच्चाई के सामने आने के बाद कि लड़कियों को बाबभाई पठान द्वारा ‘अनाथ’ के रूप में नहीं अपनाया गया था, जैसा कि मीडिया में बताया जा रहा है और लड़कियों की माँ द्वारा शादियों का आयोजन किया गया था, आईपीएस काबरा ने इस घटना पर स्पष्टीकरण ट्वीट जारी करके खुद को सही किया।

अपने पिछले ट्वीट को लेकर स्पष्टीकरण देते हुए, IPS काबरा ने कहा कि उन्हें मीडिया सोर्स से अपडेट मिला है कि दोनों बहनें अनाथ नहीं थीं और उनकी माँ हर साल बाबभाई पठान को राखी बाँधती थीं, क्योंकि उनका कोई सगा भाई नहीं था।

बात से नहीं माना चीन तो सैन्य विकल्प पर विचार: सीमा पर तनातनी के बीच CDS जनरल बिपिन रावत

सीमा पर भारत और चीन के बीच जारी तनातनी के बीच चीफ़ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत ने बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा है कि यदि बातचीत की मेज पर चीन के साथ समाधान नहीं निकला तो सैन्य विकल्प भी मौजूद हैं।

उन्होंने कहा ऐसा केवल उस स्थिति में होगा अगर कूटनीतिक स्तर पर जारी वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकलता है। उन्होंने कहा कि अगर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को लेकर चीन के साथ बातचीत असफल रहती है तो सैन्य विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।

पिछले 2 महीने के दौरान भारत और चीन के बीच कई बार कूटनीतिक स्तर पर बात हुई लेकिन अभी तक कोई ठोस परिणाम हासिल नहीं हुए हैं। अप्रैल और मई महीने से ही फिंगर एरिया, गलवान घाटी, हॉट स्प्रिंग और कुंगरंग समेत कई इलाक़ों में गतिरोध जारी है। जनरल रावत ने कहा, 

“लद्दाख और आसपास के क्षेत्र में चीनी सेना द्वारा किए जा रहे अतिक्रमण का सामना करने के लिए हमारे पास सैन्य विकल्प मौजूद हैं। लेकिन इस विकल्प पर विचार सिर्फ तब किया जाएगा जब कूटनीतिक और राजनीतिक स्तर पर जारी वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकलेगा।” हालॉंकि जनरल रावत ने सैन्य विकल्पों पर विस्तार से चर्चा करने से इनकार कर दिया।

अप्रैल और मई से लेकर अब तक भारत और चीन के बीच कूटनीतिक स्तर पर कई बार वार्ता हो चुकी है। पिछले हफ्ते ही दोनों देशों के बीच विवाद को सुलझाने के लिए वार्ता हुई थी। इसमें पाँच लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की वार्ता भी शामिल है। चीनी सेना जुलाई के दौरान एलएसी के आसपास कई क्षेत्रो में दाख़िल हो गई थी। जिसके बाद दोनों देशों की सेना के बीच काफी विवाद हुआ।

ख़बरों के मुताबिक़ चीनी सेना खुद इस वार्ता पर कोई ठोस प्रस्ताव स्वीकार करने के पक्ष में नहीं थीं। इस पर भारतीय सेना ने स्पष्ट कर दिया था कि एलएसी पर उन्हें किसी भी तरह का बदलाव स्वीकार नहीं है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को फिंगर क्षेत्र छोड़ कर पीछे हटना होगा लेकिन वह क्षेत्र छोड़ने को तैयार नहीं थे। नतीजतन सैन्य कमांडर्स ने एलएसी पर मौजूद कमांडिंग अधिकारियों को किसी भी तरह के हालातों से निपटने के लिए तैयार रहने का आदेश दिया है।  

इसके अलावा भारतीय सेना ने सीमा पर मौजूद जवानों को आधुनिक हथियारों के साथ तैयार रहने के लिए कहा है। 15 जून 2020 को दोनों देशों की सीमाओं के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद से सीमा पर हालात संवेदनशील बने हुए हैं। दोनों देशों की सीमाओं के बीच हुई इस मुठभेड़ में भारतीय सेना के 20 जवान बलिदान हो गए थे। वहीं चीनी सेना के 40 से अधिक जवान मारे गए थे। लेकिन चीन की सरकार ने इस बात की पुष्टि कभी नहीं की।     

शेखर गुप्ता ने आनंद रंगनाथन, संजीव सान्याल और संजय दीक्षित पर ब्लूम्सबरी को धमकाने का झूठा आरोप लगाया

इस्लामी कट्टरपंथियों और वामपंथी लॉबी के दबाव में आकर ब्लूम्सबरी पब्लिकेशन ने दिल्ली दंगों पर किताब ‘दिल्ली रायट्स 2020: द अनटोल्ड स्टोरी’ का प्रकाशन वापस ले लिया। इस पर जारी बहस के बीच ‘द प्रिंट’ के संस्थापक शेखर गुप्ता ने लेखकों संजीव सान्याल, डॉ. आनंद रंगनाथन और संजय दीक्षित के खिलाफ झूठे आरोप लगाए हैं।

अपने वीडियो शो ‘Cut The Clutter’ में, गुप्ता ने दिल्ली दंगा 2020 पर आधारित पुस्तक प्रकाशित न करने के लिए ब्लूम्सबरी पर वामपंथियों द्वारा डाले गए दबाव पर लीपापोती तो किया ही, साथ ही लेखकों संजीव सान्याल, डॉ. आनंद रंगनाथन और संजय दीक्षित पर ब्लूम्सबरी को धमकी देने का दोष मढ़ा।

शेखर गुप्ता ने अपने वीडियो शो में उन लोगों, ‘सेक्युलर-लिबरलों’ का नाम नहीं लेते हैं, जिन्होंने वास्तव में ब्लूम्सबरी पर उक्त पुस्तक को डी-प्लेटफॉर्म करने के लिए दबाव डाला था।

बता दें कि शेखर गुप्ता, द एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के प्रोसिडेंट भी हैं। उन्होंने वीडियो में आरोप लगाया कि ब्लूम्सबरी द्वारा दिल्ली दंगा 2020 पर आधारित पुस्तक के प्रकाशन को रद्द करने का निर्णय संजीव सान्याल, डॉ. आनंद रंगनाथन और संजय दीक्षित जैसे लेखकों की धमकी के बाद लिया गया था। इसमें कहा गया कि इन लेखकों ने पब्लिकेशन हाउस से अपनी कई पुस्तकें प्रकाशित करवाई हैं और इन्होंने ऑर्गेनाइजेशन के साथ अपने संबंध तोड़ने की धमकी दी है।

सच्चाई यह है कि प्रकाशक ब्लूम्सबरी इंडिया द्वारा मोनिका अरोड़ा, सोनाली चितलकर और प्रेरणा मल्होत्रा की पुस्तक ‘Delhi Riots 2020: The Untold Story’ के प्रकाशन को वापस लेने के मनमाने फैसले पर संजीव सान्याल, डॉ. आनंद रंगनाथन, संजय दीक्षित, शेफाली वैद्य और कई अन्य लेखकों ने ट्विटर पर इसकी निंदा की।

ब्लूम्सबरी के गैर पेशेवर रवैए की वजह से कई लेखकों ने यह भी घोषणा की कि वे अब एक ऐसे संगठन के साथ नहीं जुड़े रहेंगे, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने में सक्रिय रूप से भाग लेता है।

शेखर गुप्ता के वीडियो शो में लेखकों के जिस ट्वीट को ब्लूम्सबरी के लिए ‘धमकी’ बताया जा रहा है, वह दिल्ली दंगों से जुड़ी किताब को प्रकाशित न करने के फैसले के फलस्वरूप उभरा विरोध था। वह ट्वीट ब्लूम्सबरी द्वारा किताब के प्रकाशन के वापस लेने के फैसले के बाद किया गया था।

हालाँकि, गुप्ता ने पब्लिकेशन हाउस के अस्वीकार्य व्यवहार के बारे में लेखकों द्वारा की गई शिकायतों को गलत ठहराया और उन्हें गलत तरीके से प्रस्तुत किया। उन्होंने दावा किया कि ब्लूम्सबरी ने इन लेखकों द्वारा पोस्ट किए गए ट्वीट के बाद पुस्तक के प्रकाशन को वापस ले लिया।

शेखर गुप्ता की धूर्तता को लेकर संजीव सान्याल ने उन्हें निशाने पर लिया। संजीव सान्याल ने ‘द प्रिंट’ के फाउंडर को उनको और डॉ. आनंद रंगनाथन के ट्वीट को गलत तरीके से पेश करने के लिए स्पष्टीकरण माँगा। उन्होंने कहा कि उनके शो में जो दिखाया गया, इसके विपरीत वह और डॉ. रंगनाथन फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन की वकालत कर रहे थे और पब्लिकेशन हाउस द्वारा पुस्तक के प्रकाशन को रद्द करने के फैसले का विरोध कर रहे हैं।

डॉ. आनंद रंगनाथन ने भी शेखर गुप्ता को उनके और संजीव सान्याल के बारे में झूठ बोलने को लेकर तीखे आलोचनात्मक ट्वीट किए। रंगनाथन ने कहा कि गुप्ता अपने पेशे के लिए शर्मिंदगी हैं और ब्लूम्सबरी द्वारा बुक रद्द करने पर उनका विश्लेषण अपरिपक्व और झूठ से भरा था। उन्होंने शेखर गुप्ता पर उनके और संजय सान्याल के ट्वीट्स को गलत तरीके से पेश करने के लिए मुकदमा करने की धमकी भी दी। 

गुप्ता और द प्रिंट द्वारा की गई धूर्तता के पकड़े जाने के तुरंत बाद, YouTube पर पोस्ट किए गए वीडियो को ‘प्राइवेट’ कर दिया गया, ताकि यूजर्स इसे न देख सकें।

गौरतलब है कि अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा, सोनाली चितलकर और प्रेरणा मल्होत्रा की पुस्तक ‘Delhi Riots 2020: The Untold Story’ का प्रकाशन ब्लूम्सबरी ने वापस ले लिया है। प्रकाशन संस्थान ने इस्लामी कट्टरपंथियों और वामपंथी लॉबी के दबाव में आकर ऐसा किया।

30 साल तक BJP के समर्थन में एक शब्द नहीं, आज राहुल गाँधी मिले होने का आरोप लगा रहे: कपिल सिब्बल का दर्द

कॉन्ग्रेस कार्यकारिणी की मीटिंग के दौरान राहुल गाँधी पार्टी के स्थाई अध्यक्ष बनाए जाने की माँग वाले पत्र पर बेहद नाराज नजर आ रहे हैं। शायद यही वजह है कि अब कॉन्ग्रेस पार्टी के ही वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी के गुस्से का शिकार हो रहे हैं।

राहुल गाँधी ने आरोप लगाया है कि इस पत्र के पीछे मौजूद कॉन्ग्रेस नेताओं की भाजपा से साँठ-गाँठ है। राहुल गाँधी के इस बयान से कपिल सिब्बल और गुलाम नबी आजाद ने खुलकर अपनी नाराजगी प्रकट की है। गुलाम नबी आजाद ने इस्तीफे तक की बात कह डाली है।

कपिल सिब्बल ने ट्विटर के जरिए कॉन्ग्रेस के प्रति अपने सेवा और भक्ति के बारे में ट्विटर पर लिखा है, “राहुल गाँधी कहते हैं कि हमारी बीजेपी के साथ साँठ-गाँठ है, राजस्थान हाईकोर्ट में पार्टी को सफलता दिलाई। मणिपुर में बीजेपी के खिलाफ पूरी ताकत से पार्टी का बचाव किया। पिछले 30 सालों में बीजेपी के पक्ष में एक भी बयान नहीं दिया। फिर भी हम पर बीजेपी से साँठ-गाँठ का आरोप लग रहा है।”

वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने CWC की बैठक के दौरान ही यह ट्वीट किया है।

वहीं, कॉन्ग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कार्यकारिणी की बैठक में कहा है कि अगर राहुल गाँधी इन आरोपों को प्रमाणित कर सकते हैं तो वे इस्तीफा दे देंगे। गौरतलब है कि कपिल सिब्बल और गुलाम नबी आजाद उन 23 नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी से पहले पत्र लिखा था।

इस पत्र में कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर सवाल खड़े किए गए और कहा गया कि इस वक्त एक ऐसे अध्यक्ष की माँग है, जो पूर्ण रूप से कॉन्ग्रेस पार्टी को वक्त दे सके।

सोमवार (अगस्त 24, 2020) को हुई इस बैठक में इस पत्र को लेकर काफी विवाद हुआ है। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की पेशकश की। हालाँकि, कई वरिष्ठ नेताओं ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। साथ ही, यह पत्र लिखने वालों पर राहुल गाँधी ने अपना गुस्सा व्यक्त किया और इसकी टाइमिंग पर सवाल खड़े किए।

‘गाँधी ही हो कॉन्ग्रेस अध्यक्ष’: परिवार के लिए रॉबर्ट वाड्रा के चेले से लेकर दिग्विजय-कमलनाथ तक ने की बैटिंग

कॉन्ग्रेस कार्यसमिति की सोमवार (24 अगस्त 2020) को चल रही बैठक में सोनिया गॉंधी अंतरिम अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश कर चुकी हैं। राहुल गॉंधी दोबारा से अध्यक्ष की जिम्मेदारी सॅंभालने से इनकार कर रहे हैं। लेकिन पार्टी के नेता ‘परिवारवाद’ से मुक्ति नहीं चाहते हैं। या ये कहें कि उनके लिए कॉन्ग्रेस पार्टी का मतलब ही ‘परिवार’ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कार्यसमिति की बैठक सुबह करीब 11:20 पर शुरू हुई। इससे पहले पार्टी हेडक्वार्टर के बाहर अलग नजारे देखने को मिले। दिल्ली कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता व रॉबर्ट वाड्रा का स्वघोषित ‘चेला’ जगदीश शर्मा हेडक्वार्टर के बाहर कई लोगों के साथ गाँधी परिवार के ही किसी सदस्य को पार्टी अध्यक्ष बनाने के लिए नारेबाजी करता दिखा।

जगदीश शर्मा ने कहा, “हमें केवल गाँधी परिवार का ही अध्यक्ष चाहिए। अगर कोई बाहरी अध्यक्ष बन गया तो पार्टी नष्ट हो जाएगी या टूट जाएगी।”

उधर, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय सिंह ने भी सिर्फ़ गाँधी परिवार को ही अध्यक्ष पद पर देखने की इच्छा जताई। कमलनाथ ने ट्वीट करते हुए जहाँ ये बताया कि उन्हें इंदिरा गाँधी, संजय गाँधी, राजीव गाँधी और राहुल गाँधी के साथ काम करने का सौभाग्य मिला। इसलिए अब वह आगे भी केवल गाँधी परिवार को ही अध्यक्ष पद पर आसीन देखना चाहते हैं।

वहीं, दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया, “सोनिया गाँधी का नेतृत्व सर्वमान्य है। यदि सोनिया गाँधी कॉन्ग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ना ही चाहती हैं तो राहुल गाँधी को अपनी जिद छोड़कर अध्यक्ष का पद स्वीकार कर लेना चाहिए। देश का आम कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता और किसी को स्वीकार नहीं करेगा।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आज कार्यसमिति बैठक आरंभ होने के बाद सोनिया गाँधी ने पार्टी नेताओं के समक्ष कहा कि वह अब अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर काम नहीं करना चाहतीं। इसके बाद मनमोहन सिंह और कुछ नेताओं ने उन्हें आग्रह किया कि वह पद पर बनी रहें।

इसके बाद राहुल गाँधी ने बैठक को संबोधित करते हुए पार्टी के दो खेमों में बँटने की बात पर अपनी नाराजगी जाहिर की। कहा जा रहा है कि उन्होंने हाल में सोनिया गाँधी को लिखे गए पत्र पर अपना गुस्सा व्यक्त किया और नेताओं पर भाजपा से साँठ-गाँठ का आरोप लगाया। इसके बाद गुलाम नबी आजाद ने कहा कि अगर भाजपा के साथ ऐसा कुछ साबित हो जाए तो वह पार्टी से इस्तीफा दे देंगे।

कैलाश पर्वत के इलाके में चीन कर रहा मिसाइलों की तैनाती, निर्माण कार्य भी हुआ पूरा: इंडिया टुडे की रिपोर्ट

चीन ने मानसरोवर कैलाश पर्वत के पास अपनी मिसाइलों को तैनात करने के लिए निर्माण कार्य पूरा कर लिया है। यह दावा इंडिया टुडे ने हालिया सैटेलाइट द्वारा ली गई तस्वीरों का हवाला देते हुए किया है।

रिपोर्ट का दावा है कि यह निर्माण कार्य इसी वर्ष अप्रैल में शुरू हुआ था, जिसे चीन ने भारत के क्षेत्रों को घेरने के लिहाज से प्रारंभ किया था। अब चीन हमारे उस क्षेत्र का भारी सैन्यकरण कर रहा है, जो बौद्धों और हिंदुओं दोनों के लिए आस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

रिपोर्ट में हालिया सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर दावा किया गया है कि इलाके में सेना की मूवमेंट शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि तस्वीरों में तिरपाल के कवर में HQ-9 SAM (Surface To Air Missile – SAM) सिस्टम देखा जा रहा है।

PLA Site
साभार: इंडिया टुडे

इसके अलावा जिस पैटर्न के साथ इनकी तैनाती की जा रही है, वह चार से आठ SAB ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर और तीन रडार कैंपों के साथ TELs के लिए कुल चार प्लेटफॉर्मों की ओर इशारा करता है।

ये मिसाइलें भारतीय सीमा से मात्र 90 किलोमीटर दूर तैनात की जाएँगी। ये मध्यम रेंज की मिसाइलें होंगी। इस साइट के जरिए चीन का उद्देश्य यह होगा कि यदि उन्हें आने वाले समय में इसकी जरूरत पड़े तो वह इसे जल्द से जल्द इस्तेमाल कर पाए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने यहाँ पहले तीर्थयात्रियों के बहाने एक छोटा सा अस्थाई रहवास जैसा निर्माण करवाया था और फिर तिब्बतियों के घरों को बुनियादी सुविधाओं के नाम पर अपने कब्जे में लेकर वहाँ होटल व अन्य सुविधाओं को खड़ा करके चकित कर दिया था।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट यह भी बताती है कि पहले एक छोटे इलाके को ही वहाँ की पुलिस ने निष्क्रिय किया था। लेकिन अब इसके आस-पास बने कई घरों और होटलों पर पूर्ण रूप से उनका कब्जा दिखाया गया है।

सैटेलाइट से मिली तस्वीरों से इस बात का खुलासा भी होता है कि चीन मानसरोवर झील के किनारे HT-233 रडार सिस्टम लगा रहा है, जिससे मिसाइल का फायर सिस्टम काम करता है। इसके अलावा टाइप 305बी, टाइप 120, टाइप 305ए, वाईएलसी-20 और डीडब्ल्यूएल-002 रडार सिस्टम भी लगाए जा रहे हैं। ये सभी टारगेट्स को ट्रैक कर उन्हें खत्म करने में मदद करते हैं।

कैलाश मानसरोवर की महत्ता और चीन की चालाकी

कैलाश मानसरोवर को लेकर हिंदुओं में काफी आस्था है। लोग यहाँ तीर्थयात्रा के लिहाज से जाते हैं। इसकी पवित्रता का उल्लेख न केवल हिंदू ग्रंथों में है बल्कि बौद्ध ग्रंथों में भी इसका जिक्र है। पर अफसोस, चीन ने अब व्यापक स्तर पर सेना तैनात करके इसे युद्ध क्षेत्र बना दिया है।

बीते समय की बात करें तो इन इलाकों पर भारत का नियंत्रण हुआ करता था। लेकिन जब चीन ने तिब्बत पर कब्जा किया तो माउंट कैलाश वाला इलाका भी अपने हिस्से में ले लिया। अब चीन सड़कों को बंद करके उन क्षेत्रों तक पहुँचकर उन्हें नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है, जो लोगों को यहाँ तक पहुँचा सकते हैं। बता दें यहाँ तक जाने के लिए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के माध्यम से एक रास्ता खुला रहता है लेकिन पूरे वर्ष भर में इसे सबसे चुनौतीपूर्ण मार्ग माना जाता है।

गौरतलब है कि कैलाश-मानसरोवर जैसे धार्मिक स्थान को सैनिकों से घेर देना चीन की एक साजिश का हिस्सा है। वह लद्दाख वाले तनाव के बाद से ऐसा कर रहा है। चीन ने भारत द्वारा लिपुलेख में सड़क बनाए जाने के विरोध में भी इस साइट का निर्माण कराया है। जहाँ भारत ने 17 हजार फीट की ऊँचाई पर स्थित कैलाश मानसरोवर जाने के लिए लिपुलेख के पास 80 किलोमीटर लंबी सड़क बनवाई थी।

बता दें कि लिपुलेख को लेकर इस समय भारत और नेपाल के बीच तनाव चल रहा है। इसी तनाव का चीन फायदा उठाना चाहता है। वह नेपाल के साथ आकर भारत को परेशान करने की कोशिश कर रहा है।

बीते दिनों ऐसी ही नापाक हरकतों के कारण गलवान घाटी में सैनिकों के बीच झड़प हुई थी। भारत ने उस झड़प में अपने 20 सैनिकों को खोया था और चीन ने आधिकारिक तौर पर अपने हताहत सैनिकों का आँकड़ा ही नहीं बताया था। इसके बाद भारत ने चीन के ख़िलाफ़ सख्त कदम उठाते हुए सुरक्षा कारणों से उनकी कुछ ऐप्स को बैन कर दिया था। त्योहारों में भी बाजार में चीनी माल की बिक्री पर इसका असर देखने को मिला ।

मुर्गे की दुकान पर अनवर, शाहिद ने राहुल को दी ‘जाति वाली गाली’, भड़की हिंसा: 5 हिरासत में

उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के चिरैयाकोट में शनिवार (अगस्त 22, 2020) को साम्प्रदायिक तनाव जैसा माहौल पैदा हो गया। वहाँ मुर्गे की दुकान के बाहर खड़े अनवर और शाहिद ने राहुल कनौजिया उर्फ काजू के ऊपर कथित तौर पर जातिसूचक टिप्पणी की।

इसके बाद झगड़ा इतना बढ़ गया कि वहाँ देखते ही देखते कई लोग इकट्ठा हो गए। बाद में पुलिस ने घटनास्थल पर पहुँचकर मामला शांत करवाया और कुछ उपद्रवियों को हिरासत में लिया।

अमर उजाला की रिपोर्ट बताती है कि यह लड़ाई किसी बड़े मुद्दे पर नहीं भड़की थी लेकिन माहौल शांत होते-होते 10 लोग घायल हो गए। स्थिति देखते हुए पुलिस को गाँव में फोर्स की तैनाती करनी पड़ी। हालाँकि हैरानी की बात है कि दोनों तरफ से किसी पक्ष ने पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं करवाई। लेकिन बताया जा रहा है कि पुलिस ने 5 लोगों को हिरासत में लिया है और इस मामले पर आगे कार्रवाई भी की जाएगी।

पूरा मामला छपरा गाँव में मुर्गे की एक दुकान से शुरू हुआ। यहाँ गाँव के ही तीन युवक अनवर, शाहिद और राहुल उर्फ काजू कन्नौजिया खड़े थे। इस दौरान अनवर और शाहिद ने जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए राहुल को मारने की बात कही।

इतना ही नहीं, बीते 3 अगस्त को नहाने के दौरान पानी में डूबने से हुई मौत की घटना का जिक्र करते हुए लड़कों ने अपशब्दों का प्रयोग किया। इन बातों को सुन वहाँ खड़े व्यक्ति ने विरोध किया।

इस पर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी के बाद हाथापाई हो गई। मारपीट होने पर दोनों युवकों के परिवार के सदस्य भी वहाँ पहुँचे और दोनों तरफ से जमकर ईंट-पत्थर और लाठी-डंडा चला।

घटना में एक तरफ से अंकुर (18), पंकज (50), ऊषा (55), अनूप (30), राहुल (28), निशा (30), जबकि दूसरे तरफ से साकीना (22), साबिया (45), कासिम (40), महताब (19) आदि घायल हुए।

बता दें कि 3 अगस्त के जिस मामले को लेकर दो पक्षों में बहस बढ़ी, उसमें अमन कनौजिया नाम के एक युवक की मौत हो गई थी और कनौजिया के परिवार ने इस मामले में आरोप लगाया था कि गाँव के ही दो युवक उसे नदी पर लेकर गए थे और वहाँ जबरदस्ती उसे पुल से छलांग लगवाई।

क्या तुम ला-इलाहा-इल्लल्लाह का मतलब भूल गए?- गणेश चतुर्थी पर तिलक लगाए शाहरुख को समझाया ‘इस्लाम’

गणपति उत्सव के मौके पर कई बॉलीवुड सितारे अपने घरों में भगवान गणेश की प्रतिमा लेकर आते हैं। शाहरूख खान इस सूची में सबसे चर्चित नाम हैं। इस बार भी वह गणेश चतुर्थी के मौके पर प्रतिमा घर लेकर आए। भगवान गणपति की पूजा-पाठ की, उनका विसर्जन किया। 

सभी कार्य संपन्न होने के बाद शाहरूख खान ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी देते हुए गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएँ भी दीं। उन्होंने लिखा, “प्रार्थना और विसर्जन हो गया… इस गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश आप और आपके प्रियजनों पर कृपा बरसाएँ, आशीर्वाद और खुशियाँ। गणपति बप्पा मोरया।”

इस संदेश के बदले शाहरुख खान के फैन्स ने उन्हें बहुत सराहा। हालाँकि, इस मौके पर कुछ लोग ऐसे भी थे, जिन्हें शाहरुख के माथे पर टीका और गणपति के प्रति इतना प्रेम नहीं पचा और वह उन्हें संप्रदाय विशेष से होने के मायने समझाने लगे।

एक कामराम नाम के यूजर ने लिखा, “मुझे लगता है कि आप ला इलाहा इल इल्लाह” का मतलब भूल गए हैं। भगवान सिर्फ़ एक है, ‘अल्लाह’। दुनिया का प्यार पाने के लिए आप क्या बन गए हैं। क्या आप अपनी अगली जिंदगी के बारे में नहीं सोचते?

इसी रिप्लाई पर एक अबरार अहमद नाम का यूजर लिखता है, “वह अच्छे से जानते हैं लेकिन ये सब वह अपनी खुशी के लिए नहीं कर रहे। ये वह अपने फैन्स के लिए और अपनी पत्नी के लिए कर रहे हैं।”

इसके बाद एक शैफी अल फिराशाह नाम के यूजर ने शाहरुख ने ट्वीट पर गणपति का अपमान करने के लिए लिखा, “क्या हाथी के सिर वाला व्यक्ति वाकई होता है?”

जौहेर खान इसी बीच अपना अजेंडा चलाने के लिए बीच में लिखता है, “क्या फर्क पड़ता कि कितने उर्दू नामों ने यहाँ अपना सेकुलरिज्म साबित करने की कोशिश की। लेकिन हिंदुत्व के गुंडे (असली हिंदू नहीं) केवल तभी खुश होंगे जब वह अपने सभ्यता और परंपरा को गाली देंगे।”

जकारिया ने लिखा, “अल्लाह तुम्हारे किसी भी पाप को माफ कर सकता है। लेकिन एक चीज जिसे वह माफ नहीं कर सकता है। वह किसी के साथ भी साझेदारी।”

सैयद अब्दुल बासित ने शाहरुख खान के पोस्ट पर रिप्लाई करते हुए लिखा, “क्या तुम मुस्लिम हो? अगर हो तो यह शिर्क है। शिर्क़ का मतलब अल्लाह के अलावा दूसरे को भी मानना या बोलना जो आपने अभी बोला वो भी शिर्क है। अगर आप समझते हो।”

बता दें कि शाहरुख खान को पहली बार हिंदू त्योहार मनाने पर कट्टरपंथियों से इस्लाम की परिभाषा सुनने को नहीं मिली है। पिछली बार भी उनके पोस्ट पर ऐसा ही कुछ देखने को मिला था। उनके अलावा बॉलीवुड में कई और कलाकार हैं, जो अक्सर अपनी हिंदू देवी-देवताओं के साथ फोटो अपलोड करते हैं और कट्टरपंथी उनसे नाराज हो जाते हैं।

पिछले साल गणेश चतुर्थी के अवसर पर सैफ अली खान की बेटी और बॉलीवुड अदाकारा सारा अली खान को कट्टरपंथियों ने निशाने पर लिया था। साथ ही उनके साथ गाली-गलौच भी की थी। इसके अलावा राम जन्मभूमि की बधाई देने पर भी कई सेकुलरों का चेहरा सोशल मीडिया पर सामने आया था।

‘मैडम सोनिया जी रहेंगी अध्यक्ष… या BJP के खिलाफ अकेले लड़ने वाले श्री राहुल जी बनेंगे’ – AICC (SC) का फैसला

बस कुछ घंटे बाद… यानी सोमवार (24 अगस्त 2020) को कॉन्ग्रेस कार्यसमिति की बैठक है। लेकिन इसी कॉन्ग्रेस के एक धड़े ने गाँधी परिवार (माँ-बेटे) पर मुहर लगा दी है।

अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमिटी (एआईसीसी) की अनुसूचित जाति (SC) संभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि सोनिया गाँधी को ही कॉन्ग्रेस अध्यक्ष रहना चाहिए। क्यों रहना चाहिए? इसका भी तर्क AICC (SC) ने दे दिया है।

AICC (SC) ने रविवार (23 अगस्त को, कॉन्ग्रेस कार्यसमिति की बैठक से ठीक एक दिन पहले) को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से एक मीटिंग की। मीटिंग में कहा गया कि सोनिया गाँधी ने सबसे महत्वपूर्ण समय में पार्टी का नेतृत्व किया था, पार्टी को सत्ता में लाया था और एक दशक तक नेतृत्व किया था।

सोनिया गाँधी के विकल्प के तौर पर अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमिटी (एआईसीसी) की अनुसूचित जाति (SC) संभाग ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि पार्टी अध्यक्ष के तौर पर सिर्फ और सिर्फ राहुल गाँधी को ही देखते हैं। क्यों? सिर्फ राहुल गाँधी ही क्यों?

AICC (SC) ने राहुल गाँधी को अध्यक्ष के तौर पर देखने के पीछे तर्क दिया कि वो यंग विजनरी लीडर हैं। राहुल गाँधी देश की जनता के लिए ईमानदारी के साथ खड़े हुए और BJP सरकार के खिलाफ (जो आम आदमी के अधिकारों को कुचल रही है) अकेले लड़े।

कॉन्ग्रेस कार्यसमिति की बैठक से ठीक एक दिन पहले अनुसूचित जातियों की लॉबी ने गाँधी परिवार के लिए पासा क्यों फेंका? क्या इसका उन 23 बड़े नेताओं के द्वारा सोनिया गाँधी को लिखे पत्र से कोई कनेक्शन है? क्या प्रियंका गाँधी वाला ‘गैर गाँधी अध्यक्ष’ इंटरव्यू या राहुल गाँधी का अध्यक्ष न बनने की जिद सिर्फ एक जुमला भर था? जनता देख रही है, चंद घंटों में सब क्लियर हो जाएगा।

गरुड़ प्रकाशन से दिल्ली दंगों पर आएगी किताब, वामपंथियो और कट्टरपंथियों के दबाव में झुक गया था ब्लूम्सबरी

ब्लूम्सबरी (Bloomsbury) प्रकाशन समूह दिल्ली दंगों पर आधारित किताब Delhi Riots 2020: The Untold Story प्रकाशित करने वाला था। लेकिन इस्लामी और वामपंथियों के दबाव में आकर उसने किताब का प्रकाशन रोक दिया। अब इस किताब को गरुड़ प्रकाशन समूह प्रकाशित करेगा। इस किताब की लेखिका मोनिका अरोड़ा, सोनाली चितालकर और प्रेरणा मल्होत्रा हैं।

बीते दिन (22 अगस्त 2020) इस किताब के वर्चुअल विमोचन के दौरान ब्लूम्सबरी यूके मुख्यालय से दबाव बनाया गया। जिसके बाद प्रकाशन समूह ने अचानक ही किताब प्रकाशित करने से मना कर दिया था।  

किताब की लेखिका मोनिका अरोड़ा ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लोगों को भावना देखते हुए उन्होंने फैसला किया है कि गरुड़ प्रकाशन समूह के साथ जाएँगे। यह फ़िलहाल स्टार्टअप की तरह चल रहा है। लेखिका ने ब्लूम्सबरी प्रकाशन समूह को इस संबंध में मेल भी किया था। लेकिन वहाँ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने के बाद उन्होंने यह फैसला किया। मेल में उन्होंने साफ़ तौर पर पूछा कि क्या वह इस किताब का प्रकाशन रोक रहे हैं? वह इस बात को लिखित में दें लेकिन ब्लूम्सबरी ने फोन पर ही इस बात की जानकारी दी। यानी समझौता ख़त्म करने के लिए कोई लिखित कार्रवाई नहीं की गई।

किताब की लेखिका मोनिका अरोड़ा ने भी इस मुद्दे पर ट्वीट कर भी जानकारी दी। ट्वीट में उन्होंने लिखा “निवेदन के बाद हमसे से लिखित तौर पर कोई संवाद नहीं किया गया। हम अपनी किताब की हत्या नहीं कर सकते हैं, लोग इस किताब को खरीदना चाहते हैं। हमारे पास दूसरे प्रकाशन समूह को स्वीकार करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचता है।”  

किताब की लेखिका का ट्वीट

इस बात की पुष्टि करते हुए गरुड़ प्रकाश ने भी ट्वीट किया। साथ ही उन्होंने किताब की लेखिका मोनिका अरोड़ा का आभार भी जताया। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “दोस्तों! आप सभी के सहयोग के लिए धन्यवाद। आइए इस किताब को घर-घर तक पहुँचाते हैं।” इसके बाद प्रकाशन समूह ने ट्वीट करके यह जानकारी भी दी कि किताब हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषा में विमोचित की जाएगी। जल्द ही यह किताब उपलब्ध कराई जाएगी।  

उल्लेखनीय बात यह रही कि जैसे ही ब्लूम्सबरी ने किताब छापने से मना कर किया गरुड़ प्रकाशन समूह ने इसे प्रकाशित करने का प्रस्ताव दिया था।  

पूरी किताब The book of ‘Delhi Riots 2020: The Untold Story इसकी लेखिकाओं द्वारा की गई जाँच – पड़ताल और साक्षात्कार पर आधारित है। अगले महीने यह किताब प्रकाशित होनी थी। किताब की 100 प्रतियाँ लेखिका को उपलब्ध भी कराई जा चुकी थी। इसके अलावा किताब अमेज़न पर प्री ऑर्डर के लिए उपलब्ध भी थी। लेकिन जैसे ही लेखिकाओं ने भाजपा नेता कपिल मिश्रा की मौजूदगी में वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए किताब विमोचन की बात कही, वैसे ही कॉन्ग्रेस समेत तमाम वामपंथी नेताओं ने इसके विरोध में अभियान चलना शुरू कर दिया।  

विलियम डेलरीमैपल जैसे वामपंथी इतिहासकारों की टीका टिप्पणी और आक्षेप के बाद ब्लूम्सबरी ने किताब प्रकाशित करने से मना कर दिया। ऐसा करने से पहले उन्होंने किताब की लेखिका को सूचित करना भी ज़रूरी नहीं समझा। गरुड़ प्रकाशन एक भारतीय प्रकाशन समूह है। इसकी शुरुआत संक्रांत सानू ने की थी और इसमें उनके साथ थे अंकुर पाठक। हाल ही में इस प्रकाशन समूह ने विवेक अग्निहोत्री की अर्बन नक्सल का प्रकाशन किया था।