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‘ईसा मसीह चीनी महिला के रूप में धरती पर लौट आए हैं’- ‘चर्च ऑफ ऑलमाइटी गॉड’ का दावा: प्रतिबंधित संप्रदाय भारत में जमा रहा जड़ें

नागालैंड में सबसे शक्तिशाली चर्च निकाय ने अपने अनुयायियों को ‘खतरनाक’ चीनी संप्रदाय और इसकी ऑनलाइन गतिविधियों के खिलाफ चेतावनी जारी की है। नगालैंड बैपटिस्ट चर्च काउंसिल (NBCC) ने पूर्वोत्तर भारत में चर्च के नेताओं को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि राज्य में चीनी संप्रदाय अपनी जड़ें फैला रहा है। इससे सावधान रहने की जरूरत है।

बता दें कि यह संप्रदाय अपने चर्च को ‘चर्च ऑफ ऑलमाइटी गॉड’ के नाम से प्रचारित करता है। इनका मानना है कि ईसा मसीह (जीसस) ने फिर से अवतार लिया है और इस बार वह एक महिला के रूप में धरती पर वापस आए हैं। ‘चर्च ऑफ ऑलमाइटी गॉड’ पर आरोप लगाया जाता है कि यह गलत शिक्षा देने के साथ ही ईसाई धर्म के सिद्धांत बारे में झूठ को फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाता है।

एनबीसीसी के महासचिव जेलो कीहो ने बैपटिस्ट संघों के सभी कार्यकारी सचिवों और निदेशकों को एक पत्र जारी किया। उन्होंने लिखा है कि वह चीन के ‘चर्च ऑफ ऑलमाइटी गॉड’ के बारे में चिंतित हैं क्योंकि वे उत्तर-पूर्व भारत में प्रवेश कर रहे हैं।

उन्होंने चेताया है कि यह संप्रदाय ईसाई धर्म के सिद्धांतों के बारे में गलत प्रचार कर रहा है और उन्होंने इस फर्जी धर्म के प्रति सभी को सभी तरह के सुरक्षात्मक उपाय करने और उसके प्रति सावधान रहने को कहा है। 

उन्होंने आगे कहा है, “चर्च ऑफ ऑलमाइटी गॉड या ईस्टर्न लाइटनिंग कल्ट पूरी तरह से एक संगठित समूह है, जिसका बहुत ही तेजी से फेसबुक पेज तैयार किए जा रहा है और उस पर रंगीन चित्रकारी की जा रही है जो बाइबिल से जुड़ी और मोहक प्रतीत होती हैं।” बता दें कि यह चेतावनी भरा पत्र 19 अगस्त को भेजा गया था।

समाचार एजेंसी आईएएनएस के अनुसार, पत्र में कहा गया है, “हमें इस खतरनाक संप्रदाय से सावधान रहना होगा, क्योंकि वे सक्रिय रूप से गलत सिद्धांत और झूठी शिक्षाओं का प्रसार कर रहे हैं। हमें उनके बारे में जानकारी इकट्ठा कर उनका पर्दाफाश करना होगा। हमें उनके झूठे धर्म से अपनी धार्मिक सभा को बचाने के लिए हर तरह का उपाय करना होगा।”

पत्रकारों से बात करते हुए, कीहो ने कहा, “हम अपने चर्चों में विभिन्न सम्मेलनों और मीडिया के माध्यम से जागरुकता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि मिजोरम, मेघालय, नागालैंड और मणिपुर में 5.5 मिलियन से अधिक ईसाई रह रहे हैं। अन्य पूर्वोत्तर राज्यों जैसे असम, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा में बड़ी संख्या में ईसाई रहते हैं। उनके अनुसार, ऐसे हिंसक संप्रदाय ईसाइयों के लिए खतरा हैं।

इसके साथ ही एनबीसीसी के युवा सचिव विकुओ री ने कहा है कि उन्हें पता है कि वे लोग नगालैंड और उत्तरपूर्व भारत में पहले ही दाखिल हो चुके हैं। लेकिन, अभी यह पता लगाना है कि यहाँ पर वे कितने हैं। वे लोग फेसबुक और व्हास्टऐप पर बहुत ही ज्यादा ऐक्टिव हैं। वे लोगों खासकर युवाओं को फुसलाना चाहते हैं।

गौरतलब है कि ईस्टर्न लाइटनिंग कल्ट ऑफ चाइना यह बताता है कि ईसा मसीह का धरती पर एक महिला के रूप में पुनर्वतार हुआ है, जिसका नाम यांग जियांगबिन है और उन्हें लाइटनिंग डेंग के नाम से भी प्रचार-प्रसार करते हैं। चीन में क्रिश्चियनों के इस नए संप्रदाय का 1991 में गठन किया गया। चीन में 1991 में एक नए संप्रदाय का उदय हुआ, जिसके संस्थापक को उनके अनुयायियों ने प्रभु ईसा मसीह या जीसस का नया अवतार बताना शुरू कर दिया।

उसकी संस्थापक यांग जियांगबिन नाम की एक महिला थी, इसलिए वह चाइनीज ‘फीमेल जीसस’ के नाम से जानी जाने लगीं। महिला के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह माना जाता है कि वह उत्तर पश्चिमी चीन में पैदा हुई थी।

इस संप्रदाय का इतिहास काफी हिंसक रहा है। 100 से अधिक हिंसा वाले मामले संप्रदाय से जुड़े हैं। चीनी सरकार को पंथ पर प्रतिबंध लगाना पड़ा क्योंकि उन्होंने आम जनता के लिए खतरा पैदा करना शुरू कर दिया। इस समूह का निर्माण 1990 में एक पूर्व फिजिक्स शिक्षक झाओ वीशान द्वारा किया गया था।

यह अमेरिका से संचालित होता है, लेकिन भारत सहित 35 से अधिक देशों में इसकी शाखाएँ हैं। संस्थापकों झाओ वीशान और यांग जियांगबिन ने अमेरिका में राजनीतिक शरण ली और अपना अभियान शुरू किया। उन्होंने चीन में चर्च की शिक्षाओं को फैलाने के साथ शुरुआत की और अन्य देशों के अनुयायियों को जोड़ा। जल्द ही उन्हें सोशल मीडिया के पावर का एहसास हुआ, और अब वे नियमित रूप से वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फिल्में, धार्मिक सामग्री और ऑडियो लेक्चर पोस्ट करते हैं।

चर्च ऑफ ऑलमाइटी गॉड के हिंसक इतिहास के उल्लेखनीय मामले

हालाँकि चर्च की वेबसाइट की सामग्री पहली नज़र में उनके हिंसक व्यवहार की तरफ इशारा नहीं करती है, लेकिन चर्च से जुड़े विवाद उनके इरादों पर सवाल उठाने के लिए पर्याप्त हैं।

  • 2002 में, ‘चर्च ऑफ ऑलमाइटी गॉड’ के सदस्यों ने कथित तौर पर चीन के 30 चर्च नेताओं को अगवा किया था। उन्होंने उन्हें दो महीने तक बंधक बनाकर रखा और उनका धर्मांतरण कराने की कोशिश की।
  • 2012 में लोगों को डराने के लिए फिल्म “2012” के दृश्यों का इस्तेमाल किया। इसके जरिए उन्होंने लोगों के मन में भय पैदा करने की कोशिश की कि कयामत आने वाला है। इतना ही नहीं, उन्होंने प्रोपेगेंडा वीडियो, पैम्पलेट और अन्य सामग्री का उपयोग लोगों को लुभाने के लिए किया ताकि वे उनके संप्रदाय में शामिल हों। उनके भय के कारण चीन में व्यापक दंगे हुए और हेनान प्रांत में एक महिला और 23 छात्रों की छुरा घोंपने सहित कई उल्लेखनीय घटनाएँ हुईं। संप्रदाय के 100 से अधिक सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था।
  • 2014 में, संप्रदाय के सदस्यों ने चीन में मैकडॉनल्ड्स में एक 37 वर्षीय महिला की हत्या कर दी, क्योंकि उसने अपना नंबर देने से इनकार कर दिया था। संप्रदाय के सदस्यों ने दावा किया कि एक दानव उसके पास था।
  • 2019 में, चर्च के सदस्यों ने इज़राइल में चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश की जिसके कारण हिब्रू भाषा में राजनीतिक मैसेज पोस्ट करने वाले सैकड़ों अकाउंट सस्पेंड हो गए।

चीन सरकार ने चर्च पर प्रतिबंध लगा दिया है। हालाँकि, चर्च के सदस्य अपने संप्रदाय को दुनिया के विभिन्न हिस्सों में फैलाने के लिए बड़े पैमाने पर काम कर रहे हैं।

लंदन से भारतीय महिला का अपहरण, बांग्लादेश ले जाकर कबूल करवाया इस्लाम: NIA ने ‘लव जिहाद’ एंगल से शुरू की जाँच

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी NIA ने बांग्लदेश के कुछ नागरिकों के खिलाफ मानव तस्करी का मामला दर्ज किया है। मामला चेन्नई की एक महिला का अपहरण कर के उसे बांग्लादेश ले जाए जाने का है, जिसमें अब ‘लव जिहाद’ का एंगल भी सामने आ रहा है। मई 21, 2020 को पीड़िता के पिता ने चेन्नई पुलिस के समक्ष इस सम्बन्ध में शिकायत दर्ज की थी। इसके बाद जुलाई में ये मामला NIA को सौंप दिया गया था।

पीड़िता लंदन में हायर स्टडीज के लिए गई हुई थी। उसी दौरान बांग्लादेशी नागरिक नफीस ने उसे लुभाना शुरू कर दिया। वो महिला को रिलेशनशिप में आने के लिए जाल बिछा रहा था। इस काम में आरोपित का पिता सरदार शेखावत हुसैन के साथ-साथ यासीर और नौमान अली खान नामक दो अन्य लोग भी शामिल थे। आरोप है कि नफीस इन सबकी मदद से पीड़िता का अपहरण कर बांग्लादेश ले गया।

बांग्लादेश ले जाकर महिला से जबरन इस्लाम कबूल करवाया गया। साथ ही उसे घर में बंद कर के रखा जाता था, ताकि वो किसी को भी अपने साथ हुए अत्याचार के सम्बन्ध में कुछ भी बताने की स्थिति में न रहे। लेकिन, महिला किसी तरह फोन कॉल करने में सक्षम रही और अपने माता-पिता को बताया कि बांग्लादेश में उसका यौन शोषण किया जा रहा है और उसे लगातार प्रताड़ना झेलनी पड़ती है।

पीड़िता के पिता चेन्नई ने रोयापुरम में एक कारोबारी हैं और कुछ ही सालों पहले उत्तर भारत से वहाँ जाकर बसे हैं। पिता ने बेटी के फोन कॉल के बाद नफीस से संपर्क किया और अपनी बेटी को रिहा करने को कहा। लेकिन, जब नफीस ने बदले में रुपए की माँग की तो पिता ने चेन्नई पुलिस कमिश्नर के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद ये मामला सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) को सौंप दिया गया था।

शुरुआती जाँच के बाद सीसीबी ने डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस जेके त्रिपाठी के माध्यम से तमिलनाडु सरकार से निवेदन किया कि इस मामले को दिल्ली स्थित NIA को ट्रांसफर कर दिया जाए। इसके बाद केंद्र ने तमिलनाडु सरकार से नफीस के खिलाफ शिकायत रिसीव की। नफीस के खिलाफ भारतीय महिला को फँसा कर उसका अपहरण करने का मामला दर्ज किया गया।

इस मामले में NIA द्वारा आईपीसी की धाराओं 120B (साजिश), 294 (b) (प्रताड़ित करना), 363 (किसी भारतीय नागरिक का अपहरण), 364A (किसी व्यक्ति का अपहरण कर के उसे नजरबन्द रखना), 368 (जानबूझ कर किसी अपहृत किए गए व्यक्ति को गलत तरीके से कैद में रखना), 370 (मानव तस्करी – दास के रूप में किसी व्यक्ति को खरीदना या बेचना), धारा 384 (जबरन वसूली) और 506 (i) (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इस मामले में ज़ाकिर नाइक लिंक की भी जाँच की जा रही है। आशंका जताई गई है कि एक संगठित बांग्लादेशी समूह हो सकता है, जो इस तरह की हरकतों में लगा हो। इसीलिए ज़ाकिर नाइक को भी इस मामले में आरोपित बनाया गया है। नफीस के बारे में पता चला है कि वो बांग्लादेश के एक पूर्व सांसद का बेटा है, इसीलिए इस मामले में प्रभावशाली लोगों के शामिल होने से इनकार नहीं किया जा सकता।

बता दें कि भारतीय हिन्दू महिलाओं के साथ देश में और बाहर ‘लव जिहाद’ के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। हाल ही में कानपुर से शालिनी यादव के गायब होने की खबर आई, जो मोहम्मद फैसल से शादी के बाद इस्लाम अपना कर दुनिया के सामने आई। वो जिस जूही कॉलनी में थी, वहाँ कई लड़कियों को संप्रदाय विशेष के युवकों द्वारा ‘लव जिहाद’ का शिकार बनाया जा चुका है। मोहम्मद फैसल भी शालिनी के बगल वाली कॉलनी में ही रहता है।

पिछले 2 महीने में कानपुर इलाके में घर से 5 लड़कियाँ भाग गईं। इन पाँचों लड़कियों के भागने और जिन आरोपितों के संग वो भागीं,उससे सम्बंधित एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया था कि कैसे अब जूही कॉलनी ‘लव जिहाद’ का अड्डा बन गया है और यहाँ की लड़कियों को इसका शिकार बनाया जाता है। अंदेशा जताया गया है कि विभिन्न थानों में दर्ज भागने वाली लड़कियों की जाँच अगर अच्छे से की जाए तो यह संख्या एक दर्जन से अधिक होगी और सभी आरोपितों के तार जूही कॉलनी से जुड़े मिलेंगे।

जिस बच्ची ने बहादुरी भरी गवाही से कसाब को मौत के फंदे तक पहुँचाया, महाराष्ट्र सरकार से मुआवजे के लिए आज भी है मोहताज

मुंबई में हुए 26/11 आतंकवादी हमले (Mumbai Terror Attack) की सर्वाइवर और प्रत्यक्षदर्शी देविका रोतावन (Devika Rotawan) ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उसने महाराष्ट्र सरकार से माँग की है कि ईडब्ल्यूएस स्कीम के तहत मकान देने का जो वादा किया गया था, उसे पूरा किया जाए। रोतावन का पूरा परिवार फिलहाल भारी वित्तीय संकट से जूझ रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रोतावन ने 21 अगस्त को बॉम्बे हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है। जिसमें उन्होंने कहा है कि महाराष्ट्र सरकार की तरफ से उसके परिवार को मकान दिया जाए और कुछ ऐसा प्रबंध किया जाए जिससे कि वह अपनी आगे की पढ़ाई जारी रख सके।

देविका रोतावन अब 21 साल की है। बता दें रोतावन 26/11 मुंबई आतंकवादी हमलों में शामिल लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी अजमल कसाब के खिलाफ गवाही देने वाली सबसे कम उम्र की गवाह थी। मुंबई हमलों के दौरान रोतावन महज दस साल थी और वे पुणे जाने के लिए अपने पिता और भाई के साथ छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) पहुँची थी।

गौरतलब है कि 26/11 की भयावह रात आतंकवादियों द्वारा चलाई गई गोली उसके पैर पर लगी थी। गोली लगने के बाद वह बेहोश हो गई और उसे सेंट जॉर्ज अस्पताल ले जाया गया। हमले के बाद देविका के दो महीने के भीतर 6 सर्जिकल ऑपरेशन हुए और उसे 6 महीने बेड पर रहना पड़ा। जिसके बाद उसने आतंकवादी अजमल कसाब के खिलाफ गवाही दी थी। वह मुंबई आतंकवादी हमले के मामले में सबसे कम उम्र की गवाह बनी थी।

अपनी याचिका में रोतावन ने कहा कि आर्थिक तंगी के चलते किराया नहीं देने की वजह से उसके परिवार को जल्द मुंबई के बांद्रा में स्थित अपने वर्तमान घर को खाली करना पड़ेगा। उसने कहा कि लॉकडाउन की वजह से उसके पिता और भाई को कहीं नौकरी नहीं मिली। जिसके चलते घर के मासिक किराए को देने में दिक्कत हुई है। रोतावन ने बांद्रा चेतना कॉलेज में स्नातक पाठ्यक्रम हयूमैनिटिज़ में दाखिला लिया है। आगे चल कर वे सिविल सर्विसेज की तैयारी करना चाहती है।

याचिका में कहा गया कि हमले के तुरंत बाद, उसे केंद्र और राज्य सरकार के कई प्रतिनिधियों द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) कोटे के तहत आवास देने का वादा किया गया था। हालाँकि राहत माँगने के लिए कई पत्र लिखने के बावजूद, उसे किसी प्रकार की सहायता प्रदान नहीं की गई।

देविका ने कहा, “लॉकडाउन के दौरान कई परेशानियाँ बढ़ गई हैं। मैं महाराष्ट्र सरकार की ओर से मदद चाहती हूँ। सरकार की ओर से मुझे कहा गया था कि मकान मिलेगा। अन्य मदद का भी वादा किया गया। लेकिन अभी तक यह पूरा नहीं हो पाया है। मुझे पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से 10 लाख की सहायता राशि मिली थी जो मेरे टीबी के इलाज में खर्च हो गया। मैं इसके लिए शुक्रगुजार हूँ लेकिन जो वादे मेरे से किए गए, वे अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं।”

देविका ने कहा कि पिछले महीने उसने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को पत्र लिख कर ईडब्ल्यूएस कोटा के तहत आवासीय आवास की माँग की थी। उन्होंने आगे कहा कि सरकार द्वारा प्राप्त सभी सहायता उनके इलाज और देखभाल पर खर्च की गई और यह उनकी शिक्षा के लिए अपर्याप्त थी।

PM मोदी की तुलना आसाराम और गुरमीत राम रहीम से… जिसने किया, वो एक कॉन्ग्रेसी नेता है

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मोर के साथ तस्वीर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर विरोधी खेमे की ओर से विभिन्न किस्म की प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। इस वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने आधिकारिक आवास पर मोर को खिलाते हुए देखा गया।

लेकिन यह वीडियो सिर्फ इसी वजह से अब चर्चा में नहीं है। वीडियो में पीएम मोदी का नया लुक भी विरोधियों के लिए समस्या का कारण बन गया है। यही वजह है कि कॉन्ग्रेस नेताओं ने अपनी कुत्सित मानसिकता का परिचय देते हुए पीएम मोदी के नए लुक की तुलना गुरमीत राम रहीम और आसाराम सी कर डाली। कॉन्ग्रेस नेता गौरव पाँधी ने कहा कि पीएम मोदी का नया रूप ‘आसाराम और राम रहीम का डरावना मिश्रण’ है।

ट्विटर पर कॉन्ग्रेस नेता गौरव पाँधी ने लिखा, “मुझे नहीं पता कि उनकी पीआर टीम क्या करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उन्होंने उन्हें आसाराम और राम रहीम का खौफनाक मिश्रण बना दिया है।”

पीएम मोदी द्वारा अपने इंस्टाग्राम पेज पर एक वीडियो पोस्ट किए जाने के कुछ दिनों बाद पाँधी की यह टिप्पणी आई है। पीएम मोदी ने जो वीडियो पोस्ट किया था, उसमें वह अपने सुबह के व्यायाम के दौरान अपने आवास पर मोर को दूध पिलाते हुए दिखाई दे रहे हैं। 1.47 मिनट के इस वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी आवास से उनके कार्यालय तक चलने की कुछ झलकियाँ भी हैं।

कॉन्ग्रेस नेता गौरव पाँधी के इस घृणित ट्वीट पर सोशल मीडिया यूजर्स की मिश्रित प्रतिक्रिया मिली है। कुछ लोगों ने पाँधी का समर्थन किया, जबकि अन्य ने उनकी इसके लिए निंदा की है।

सृष्ठि राजीव शर्मा ने इस घटिया तुलना पर अपनी प्रतिक्रिया में लिखा है, “ये इस संगठन के राष्ट्रीय स्तर के पद धारक हैं। ये लोग अपनी पार्टी में 2 मिनट की लोकप्रियता के लिए 2 कौड़ी के वान्नाबी ट्रोल की तरह व्यवहार करते हैं।”

एक अन्य ट्विटर यूजर ने लिखा है, “यह वही है, जिस पर आकर अब कॉन्ग्रेस ठहर गई है – अपराधियों के साथ पीएम की तुलना करना। क्या यह गाँधी परिवार की आंतरिक मंडली की CWC बैठक और दरार को छिपाने के लिए है? किसी भी तरह से आप सत्ता में वापस नहीं आएँगे। यदि यह आपको खुश करता है, तो आगे बढ़ें।”

रिया के साथ अब वो हॉस्पिटल भी लपेटे में, जहाँ चुपके से शव-गृह में घुस गई थी सुशांत की ‘गर्लफ्रेंड’

अभिनेता सुशांत सिंह केस में महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग ने रिया चक्रवर्ती के कूपर अस्पताल की मोर्चरी में जाने पर नोटिस जारी किया है। कूपर अस्पताल और डीसीपी अभिषेक त्रिमुखे को नोटिस भेजकर जवाब माँगा है कि किस नियम के आधार पर रिया को मोर्चरी के अंदर जाने दिया गया। पुलिस ने उन्हें क्यों नहीं रोका। मुम्बई पुलिस और अस्पताल से जवाब माँगा गया है।

बता दें कि सुशांत की मौत के बाद उनका पोस्टमॉर्टम मुंबई के कूपर अस्पताल में ही किया गया था। पोस्टमॉर्टम के अगले दिन रिया सुशांत के शव को देखने के लिए अस्पताल पहुँची थी। अस्पताल की ओर से रिया को शव को देखने की इजाजत दी गई थी। इसी पर महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग ने कूपर अस्पताल और मुंबई पुलिस से जवाब माँगा है।

गौरतलब है कि सुशांत के निधन के बाद रिया सुशांत के शव को देखने के बाद रोने लगीं और सॉरी बाबू कहा था। सुशांत के दोस्त और फिल्म मेकर सुरजीत सिंह राठौर ने हाल ही में रिपब्लिक टीवी को दिए गए इंटरव्यू में बताया था कि 15 जून को रिया चक्रवर्ती को वो ही सुशांत का शव दिखाने के लिए मोर्चरी लेकर गए थे।

सुरजीत सिंह राठौर ने बताया था कि रिया चक्रवर्ती 15 जून को कूपर अस्पताल में सुशांत के अंतिम दर्शन के लिए गई थीं। इस दौरान रिया ने सुशांत के शव को देखकर कहा था ‘सॉरी बाबू’। रिया की इस बात को सुन सुरजीत को भी थोड़ा अटपटा लगा था। इसके बाद से रिया के ऊपर और भी सवाल उठने लगे।

बता दें कि इस पूरे मामले में रिया चक्रवर्ती मुख्य आरोपित हैं। रिया और रिया के परिवार वालों से ईडी ने इस मामले में पूछताछ की थी। माना जा रहा है कि सुशांत की मौत की जाँच कर रही सीबीआई रिया और उनके परिवार से पूछताछ कर सकती है। सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में अब सीबीआई एक-एक करके सभी संदिग्धों से पूछताछ कर रही है। 

एक्टर की मौत के बाद मामले की जाँच करने वाले मुंबई पुलिस के अधिकारी भी अब सीबीआई के शक के दायरे में आ गए हैं। मंगलवार (अगस्त 25, 2020) को केस से जुड़े कुछ लोगों से पूछताछ की गई है। वहीं, सीबीआई ने इस मामले में मुंबई पुलिस के 2 अधिकारियों के खिलाफ समन जारी किया है। समन पाने वालों में से एक मुंबई पुलिस के जाँच अधिकारी और दूसरे सब इंस्पेक्टर हैं।

इसके अलावा रिया चक्रवर्ती के ड्रग्स वाली चैट सामने आने के बाद सीबीआई इस बारे में सिद्धार्थ पिठानी, कुक केशव ठाकुर, कुक नीरज, हाउस मैनेजर सैमुअल मीरांडा, स्टाफ दीपेश सावंत से भी ड्रग्स वाली बात को लेकर एक बार फिर पूछताछ कर सकती है।

4 महीने तक नाबालिग का बलात्कार करने वाला इरफान हुआ गिरफ्तार: लड़की के गर्भवती होने के बाद दर्ज हुआ था मामला

बिहार के पूर्णिया जिला के कसबा में एक महादलित लड़की के साथ कई महीनों तक दुष्कर्म करने और उसे जान से मारने की धमकी देने के आरोप में मोहम्मद इरफान को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया गया है। यह जानकारी कसबा थानाध्यक्ष ने ही मीडिया को दी है।

भास्कर की खबर के अनुसार, कसबा थानाध्यक्ष पंकज आनंद ने बताया कि थाना क्षेत्र के धनखनियाँ गाँव में नाबालिग महादलित लड़की के दुष्कर्म व यौन शोषण केस में नामजद आरोपित मोहम्मद इरफान को गुप्त सूचना के आधार पर गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके बाद उसे मंडल कारागार पूर्णिया भेज दिया गया।

उल्लेखनीय है कि 13 वर्षीय नाबालिग के साथ दुष्कर्म का यह मामला कुछ दिनों पहले उजागर हुआ था। रिपोर्ट्स में बताया गया था कि मोहम्मद इरफान ने पीड़िता के साथ लगातार चार महीने तक दुष्कर्म किया। वह पीड़िता को धमकी भी दिया करता था कि अगर उसने इस घटना के बारे में किसी को बताया तो उसे जान से मार देगा।

इस दौरान पीड़िता गर्भवती भी हो गई। पीड़िता ने पूछताछ के दौरान एसडीपीओ आनंद पांडेय को बताया कि उसने गर्भवती होने की बात अपनी भाभी को बताई थी। जिसके बाद उन्होंने अपने पति यानी पीड़िता के भाई को इसके बारे में बताया। फिर भाई ने आरोपित इरफान के खिलाफ कसबा थाना में शिकायत दर्ज करवाई और पुलिस ने पीड़िता को मेडिकल जाँच के लिए सदर अस्पताल भेज दिया।

पीड़िता के भाई के अनुसार उन्हें इस घटना की जानकारी मई में ही मिली थी। उस समय वह पंजाब में थे और लॉकडाउन की वजह से वापस नहीं आ पा रहे थे। उन्होंने बताया कि पीड़िता और उसकी भाभी मोहम्मद इरफान की वजह से कसबा थाना में जाकर रिपोर्ट दर्ज नहीं करवा रही थी।

कुछ समय पहले भी आया था महादलित लड़ती से दुष्कर्म का मामला

यहाँ बता दें कसबा थाना क्षेत्र में ही पिछले दिनों एक 15 वर्षीय महादलित युवती को अगवा कर गाँव के ही तीन युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। दुष्कर्म के बाद उसे बंधक बना लिया गया, जिसे पुलिस ने छुड़ाया।

हालाँकि, पुलिस ने गैंगरेप की बात से इनकार कर दिया था। मौके से सभी आरोपित भी फरार हो गए थे। मामले में मोहम्मद मुजफ्फर मुख्य आरोपित था। मोहम्मद मुजफ्फर अपने सहयोगियों नवाजिश और अबू बकर के साथ मिलकर पीड़िता का अपहरण कर लिया था।

पीड़िता की माँ ने दावा किया था कि अगवा करने से पहले उनकी बेटी को बेहोश किया गया था। आरोपितों ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया। पीड़िता की माँ ने बताया कि सुबह उसे घर में न पाकर परिजन बेचैन हो गए और तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बाद पता चला कि पीड़िता को मोहम्मद मुजफ्फर ने बंधक बना कर रखा था।

ड्रग एंगल का खुलासा होने के बाद ED ने जया साहा को भी भेजा समन: CBI कर सकती है रिया की चैट का विश्लेषण

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले ‘ड्रग’ एंगल का खुलासा होने के बाद ईडी ने रिया चक्रवर्ती की टैलेंट मैनेजर जया साहा को समन भेजा है। जया साहा का नाम रिया के साथ हुई ‘ड्रग्स’ चैट में सामने आया था।

प्रवर्तन निदेशालय के अलावा नारकोटिक्‍स ब्‍यूरो के अध‍िकारी भी अब इस संबंध में मीटिंग करने वाले हैं। इस मीटिंग में सुशांत केस में ‘ड्रग ऐंगल’ पर चर्चा होगी और आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इनके अलावा सीबीआई की टीम भी अब ईडी के साथ मिलकर रिया के फोन का विश्लेषण कर सकती है।

जया साहा के साथ ड्रग्स पर हुई बातचीत का खुलासा जिस चैट से हुआ, उसमें रिया ने जया से कहा था,  “चाय, कॉफी या पानी में 4 बूंदें डालो और उसे पीने दो। असर देखने के लिए 30 से 40 मिनट रुको।” इसके अलावा अप्रैल 2020 में एक अन्य चैट में मिरांडा ने जया से कहा कि ‘स्टफ’ लगभग ख़त्म हो चुका है। अप्रैल 2020 की ही एक चैट में शौविक से Hash और Bud लेने की बात हो रही है, जो लोअर लेवल के ड्रग्स हैं।

इस चैट का खुलासा होने के बाद सुशांत सिंह राजपूत की बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने भी ट्वीट कर सीबीआई से तुरंत ऐक्शन लिए जाने की गुहार लगाई है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “यह एक आपराधिक मामला है। सीबीआई को इस पर तुरंत ऐक्शन लेना चाहिए।”

वहीं, दूसरी ओर व्हॉट्सएप चैट्स में ड्रग्स के लेन-देन की बात सामने आते ही रिया के वकील ने दावा किया है कि रिया ने जिंदगी में कभी भी ड्रग्स नहीं लिया और वो ब्लड टेस्ट के लिए तैयार है।

याद दिला दें, इससे पहले भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी सुशांत को ड्रग दिए जाने के बिंदु को उठाया था। उन्होंने पूछा था कि आखिर एक्टर की मुलाकात दुबई के ड्रग डीलर से क्यों हुई थी। उन्होंने ये भी दावा किया था कि सुशांत मामले में पोस्टमार्टम देर से करवाया गया ताकि पेट में जहर घुल सके।

बता दें कि सुशांत सिंह की मौत के बाद से उनके परिवार वाले और उनके फैन्स इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने सुशांत से जुड़े कई लोगों को शक के घेरे में रखा था। जिसके बाद से अब तक मामले की पड़ताल में सुशांत की गर्लफ्रेंड रहीं रिया चक्रवर्ती, रिया के भाई शोविक, पिता इंद्रजीत, सुशांत के सीए संदीप श्रीधर, सुशांत की पूर्व मैनेजर और रिया की मैनेजर श्रुति मोदी, रिया के सीए रितेश शाह, सुशांत के फ्लैटमेट सिद्धार्थ पिठानी, हाउस मैनेजर सैमुअल मिरांडा और दिवंगत अभिनेता के अन्य निजी स्टाफ से पूछताछ की जा चुकी है और कइयों की भूमिका अब तक संदिग्ध है।

‘प्रशांत भूषण और राहुल गाँधी एक हो जाएँ’ – Pak मीडिया दोनों पर फिदा, दक्षिणपंथी ताकतों से लड़ने को उकसाया

पाकिस्तानी मीडिया अब प्रशांत भूषण का फैन हो गया है। पाकिस्तान के सबसे बड़े अखबार ‘डॉन’ में लिखे एक लेख में अधिवक्ता प्रशांत भूषण और पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी की जम कर तारीफ करते हुए उन्हें साथ मिल कर काम करने की सलाह दी गई है। लिखा है कि प्रशांत का मतलब शांत होता है लेकिन वो ऐसे नहीं हैं जबकि राहुल का मतलब विजेता होता है लेकिन फ़िलहाल वो इसमें फिट नहीं बैठते।

पाकिस्तानी अख़बार ने लिखा कि राहुल गाँधी एक दुर्लभ विपक्षी नेता हैं, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मनमानी’ वाले शासन के खिलाफ आवाज उठाते हैं और इसके लिए उनकी सराहना होनी चाहिए। साथ ही सलाह दी गई है कि अगर वो और प्रशांत भूषण अपनी ‘विशालकाय’ ऊर्जा के साथ एक हो जाएँ तो भारत में ‘कठोर’ दक्षिणपंथी शासन द्वारा लोकतंत्र को कुचलने से रोका जा सकता है। ये लेख ‘डॉन’ के दिल्ली संवाददाता जावेद नकवी ने लिखा है।

उन्होंने लिखा है कि लोकसभा में 10% से भी कम सीटों पर सिमटी कॉन्ग्रेस ही एकमात्र पार्टी है, जिसकी पहुँच कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक है। साथ ही लिखा कि कॉन्ग्रेस पिछले कई सालों में हुई गलतियों की भी प्रतिनिधि है, जिससे दक्षिणपंथी नेताओं को सत्ता पाने का मौका मिला। दावा किया गया है कि कॉन्ग्रेस ने क्रोनी कैपिटलिज्म को ऑक्सीजन दिया, जिससे सामाजिक विभाजनकारी ताकतों ने सत्ता ले ली।

पाकिस्तानी अख़बार का दावा है कि प्रशांत भूषण उद्योगपतियों और राजनेताओं के बीच के नेक्सस को ख़त्म करने का प्रयास करते रहे हैं। साथ ही उन्हें दलितों और संप्रदाय विशेष के लिए बोलने वाला बताया गया है। लेख में लिखा है कि वो कश्मीर के अधिकार के लिए भी आवाज़ उठाते रहे हैं। उन्हें असहमति के असंख्य समर्थकों और अमूल-चूल बदलाव का वाहक एक्टिविस्ट करार दिया गया है। बताया गया है कि वो अरुंधति रॉय के फैन हैं, जिन्होंने कोर्ट की अवमानना का सामना किया था। लेख में आगे लिखा है:

“अरुंधति रॉय की तरह ही प्रशांत भूषण ने भी सुप्रीम कोर्ट में जजों से माफ़ी माँगने से इनकार कर दिया। प्रशांत भूषण का राजनीतिक अनुभव बड़ा है। वो आम आदमी पार्टी में थे, जिसने मोदी लहर को 2015 में रोका। जब केजरीवाल ने अपने साथियों को धमकाना शुरू किया तो वो पार्टी से अलग हो गए। वो अमीर उद्योगपतियों के खिलाफ रहे हैं, जो राजनितिक सत्ता चलाते हैं। लेकिन, वो जानते हैं कि वो अकेले नहीं लड़ सकते। उन्हें एक साथी की ज़रूत है। वो उस सपने के प्रतीक हैं, जो एक आदर्श नेता का होता है – आम आदमी के लिए शक्तिशाली लोगों के खिलाफ आवाज़ बुलंद करना।”

इसके बाद राहुल गाँधी की तारीफ करते हुए दोनों को एक होने की सलाह दी गई है। कहा गया है कि राहुल को मीडिया और भाजपा ने बदनाम कर रखा है। दावा किया गया है कि अयोध्या में राम मंदिर भूमिपूजन पर उनकी नाराजगी को सत्तापक्ष ने हाईजैक कर लिया। लेख के अनुसार, राहुल गाँधी ने राम मंदिर, चीन विवाद, कोरोना आपदा और राफेल पर सरकार के खिलाफ बोला। सलाह दी गई कि दोनों अपने नामों के बहकावे में न आकर भाग्य के प्रस्ताव को स्वीकारें और एक हो जाएँ।

बता दें कि प्रशांत भूषण अवमानना के मामलों में घिरे हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि प्रशांत भूषण ने अपनी टिप्पणी के जवाब में जो बयान दिया है, वह ज्यादा अपमानजनक है। सुनवाई में प्रशांत भूषण ने वर्ष 2009 में दिए अपने बयान पर खेद जताया था लेकिन बिना शर्त माफ़ी नहीं माँगी थी। उन्होंने कहा था कि तब मेरे कहने का तात्पर्य भ्रष्टाचार कहना नहीं था, बल्कि सही तरीक़े से कर्तव्य न निभाने की बात थी।

पाँव छू कर मिन्नतें करती रही माँ, सिमरन नहीं कर सकी बात: अपहरण कर बलात्कार और इस्लाम कबूल करने को किया गया था मजबूर

पाकिस्तान में हिन्दू लड़कियों का अपहरण करके उनको जबरन इस्लाम कबूल करवाने और निकाह कराए जाने के कई मामलों के बीच सिमरन नाम की बच्चीं के साथ भी ऐसा ही किए जाने की खबर आई थी, जिसके बाद परिवार का फूट-फूट कर रोते हुए वीडियो वायरल हो गया था। अब सिमरन के परिवार को अपनी बच्ची से मिलने की इजाजत तो दे दी गई है लेकिन उसकी मानसिक अवस्था ऐसी हो गई है कि वो किसी से कुछ बात करने को तैयार नहीं।

‘वॉइस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी’ ने ट्विटर पर उस वीडियो को शेयर क़िया, जिसमें पाकिस्तान का पीड़ित हिन्दू परिवार अपनी बच्ची सिमरन से मिल रहा है लेकिन वो किसी से कुछ बात नहीं कर रही है और न ही किसी के सवालों का जवाब दे रही है। सिमरन की माँ और चाची को उससे मुलाकात करने की इजाजत दी गई। वीडियो में उसकी माँ को उससे मिन्नतें करते हुए देखा जा सकता है।

बताया गया है कि सिमरन को इतना प्रताड़ित किया गया है, धमकियाँ दी गई हैं और उस स्तर पर उसका ब्रेनवॉश किया गया है कि वो एक मूर्ति की तरह बैठी हुई है और उसकी माँ द्वारा उसके पैर छू कर मिन्नतें किए जाने को बावजूद कुछ भी बोल पाने की स्थिति में नहीं है। उसकी माँ बार-बार उसके पाँव छूती है, उसे पुचकारती है और उसे प्यार से सहलाती है लेकिन सिमरन ने उनके किसी सवाल का जवाब नहीं दिया।

बताते चलें कि सिमरन का कुछ समय पहले घोटकी-सिंध के मीरपुर इलाके से कट्टरपंथियों ने अपहरण किया था। फिर बलात्कार कर उसे इस्लाम कबूल करवा दिया गया। परिवार ने इंसाफ के लिए कोर्ट में अर्जी लगाई। लेकिन कोर्ट ने उसे यह कहकर खारिज कर दिया कि एक इस्लाम मानने वाले का गैर-इस्लामी परिवार से कोई संबंध नहीं होता। अगर उन्हें उनसे मिलना है तो उन्हें भी इस्लाम कबूल करना होगा।

राहत ऑस्टिन का सिमरन मामले में कहना है कि कोर्ट ने यह फैसला लिखित में नहीं दिया। जब परिवार को यह बात बोली गई तब लड़की कठघरे में न्यायाधीश के सामने थी। लेकिन माँ और हिंदू परिजनों को उससे मिलने नहीं दिया गया। जज ने धर्म परिवर्तन की बात भी तब बोली जब उन्होंने अपनी बेटी से मिलने का अनुरोध किया। ऐसे कई मामले हैं जो पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की दयनीय स्थिति को बयान करते हैं।

ऑनलाइन क्लास के लिए पहाड़ी पर झोपड़ी में रहने वाली छात्रा की मदद के लिए आगे आया PMO और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय

नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या के कारण घर से दूर पहाड़ी पर झोपड़ी बनाकर पढ़ने वाली महाराष्ट्र की छात्रा स्वप्नाली सुतार की मदद के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय आगे आया है। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा सीधे हस्तक्षेप से सुनिश्चित किया गया कि स्वप्नाली को नेटवर्क कनेक्टिविटी के कारण अपनी ऑनलाइन क्लासेज में कोई समस्या न आए। प्रधानमंत्री कार्यालय और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की मदद से कुछ ही दिन पहले चर्चा में आई स्वप्नाली सुतार अब अपने घर से ही अपनी ऑनलाइन क्लासेज जॉइन कर पा रही हैं।

महाराष्ट्र स्थित सिंधुदुर्ग जिले के दुर्गम इलाके में मौजूद दरिस्ते गाँव की निवासी स्वप्नाली सुतार के पढ़ाई के प्रति जूनून की कहानी जब आकाशवाणी और दूरदर्शन के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संज्ञान में आई तो कुछ ही दिनों में प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा इस समस्या का तत्काल निवारण किया गया और अब स्वप्नाली अपनी पढ़ाई इन्टरनेट के जरिए घर से ही जारी रख पा रही है।

आकाशवाणी संवाददाता की रिपोर्ट में ही बताया गया कि इस वर्ष के स्वतंत्रता दिवस के भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भारत के प्रत्येक गाँव को अगले हजार दिनों के भीतर एक ऑप्टिकल फाइबर इंटरनेट मिलेगा। स्वप्नाली सुतार ने शायद ही सोचा होगा कि यह वास्तविकता में भी तब्दील हो सकता है और उसके दूरदराज के गाँव में इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध हो सकेगा।

कोरोना वायरस के दौरान जारी लॉकडाउन के कारण स्वप्नाली अपने ही गाँव में रह गई और इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं होने के कारण स्वप्नाली मुंबई वेटरनरी कॉलेज द्वारा आयोजित ऑनलाइन कक्षाओं में भाग लेने में असमर्थ थी। इस समस्या के निवारण के लिए स्वप्नाली के भाइयों ने उसके लिए 2 किलोमीटर दूर एक पहाड़ी के ऊपर एक झोपड़ी के आकार का शेड बनाने में मदद की, ताकि उसके मोबाइल में नेटवर्क आ सके और उसे वह बिना किसी समस्या के अपनी पढ़ाई जारी रख सके।

स्थानीय और राष्ट्रीय मीडिया द्वारा स्वप्नाली के संकल्प को सराहा गया और इस कहानी को चैनलों पर दिखाया गया, जिस कारण यह प्रधानमंत्री कार्यालय की नज़र में भी आ सका। एक सप्ताह के भीतर ही इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों ने स्वप्नाली के गाँव पहुँचकर ग्राम पंचायत के माध्यम से स्वप्नाली के घर तक सीधे केबल बिछाई। मीडिया और सरकार को उनकी त्वरित कार्रवाई के लिए धन्यवाद देते हुए, स्वप्नाली ने कहा कि वह अब अपने घर से ही सुरक्षित तरीके से अध्ययन कर सकती है।