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पुराना vs नया: सोनिया फिर महारानी, पर इन 3 वजहों से कॉन्ग्रेस को बहुत भारी पड़ेगी ये कलह

सोनिया गॉंधी को कॉन्ग्रेस ने भले फिर से अंतरिम अध्यक्ष चुन लिया हो, लेकिन इसने पार्टी के अंदरूनी कलह को बेनकाब कर दिया है। ताजा घमासान के बाद सब कुछ सामान्य होने और नुकसान का ठीक-ठीक पता लग पाने में ही महीनों लग सकते हैं।

सोनिया के दोबारा अंतरिम अध्यक्ष बनने से पहले उनके इस्तीफे की खबर आई। फिर जल्द ही दावा किया गया कि उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया था। फिर, कॉन्ग्रेस के ही ‘बागी’ नेता, जो कि हर हाल में केवल गाँधी परिवार के निष्ठावान कहे जा सकते हैं, एक पत्र लिखते हैं जिसमें पार्टी के नेतृत्व में स्थायी फेरबदल की माँग की जाती है।

इस बीच, ख़बरें सामने आती हैं कि राहुल गाँधी के फिर से कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बनने की माँग को लेकर ‘विरोध-प्रदर्शन’ हो रहे हैं। इसी बीच, प्रियंका गाँधी वाड्रा ने कहा कि एक गैर-गाँधी को पार्टी अध्यक्ष बनना चाहिए, लेकिन कुछ अन्य कॉन्ग्रेस सदस्यों ने विरोध किया और कहा कि अगर गाँधी परिवार का कोई सदस्य पार्टी का नेतृत्व नहीं करता है तो पार्टी बिखर जाएगी।

इस क्रोनोलोजी में CWC में चीजें और भी भ्रामक हो गईं। मीडिया में सोनिया गाँधी ‘त्याग की प्रतिमा’ के रूप में काम कर रही हैं, जो केवल वही चाहती हैं, जो उनके राज्य (कॉन्ग्रेस) और उनके उत्तराधिकारी (राहुल गाँधी) के लिए सबसे बेहतर हो। जबकि इस पूरे धारावाहिक में राहुल गाँधी एक ऐसे बेटे की भूमिका निभा रहे हैं, जो अपनी माँ के राजकीय सम्मान और विरासत के लिए सब कुछ न्योछावर करने को राजी हैं।

सोनिया गाँधी ने पहले कहा कि वह पार्टी को अपना विकल्प खोजने के लिए समय दे रही हैं और वे ऐसा करने के बाद, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के रूप में अपने पद से हट जाएँगी। राहुल गाँधी कथित तौर पर इस असहमति पत्र से नाखुश थे और उन्होंने इस पत्र की ‘टाइमिंग’ पर सवाल उठाए थे।

इस बीच NDTV ने खबर फैलाई कि राहुल गाँधी ने कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पर भाजपा से साँठ-गाँठ होने के आरोप लगाए। इस बात से कपिल सिब्बल जैसे नेताओं ने उन्हें तीस साल की अपनी स्वामिभक्ति के बारे में अवगत कराया और गुलाम नबी आजादी ने कॉन्ग्रेस से इस्तीफा देने तक की बात कह दी।

लेकिन कुछ ही देर बाद कहा कि राहुल गाँधी ने उन्हें व्यक्तिगत तौर पर बताया कि उन्होंने ऐसे आरोप नहीं लगाए। सिब्बल ने एक और ट्वीट कर के स्पष्ट किया कि राहुल ने उन्हें आश्वस्त किया कि उन्होंने ऐसी कोई बात नहीं कही है।

इस पूरी राजनीतिक चकल्लस के बीच सिर्फ यही निष्कर्ष निकल पाया कि कॉन्ग्रेस में अब सिर्फ दो ही पक्ष हैं, पहला – जो सोनिया गाँधी को ही पार्टी अध्यक्ष बने रहने देना चाहता है, और दूसरा- जो राहुल गाँधी को ही पार्टी अध्यक्ष बने रहने देना चाहता है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस का एक बड़ा वर्ग ‘महारानी’ को ही नेतृत्व करते देखना चाहता है। यही कारण है कि बीच का रास्ता निकालते हुए सोनिया को 6 और महीने के लिए अंतरिम अध्यक्ष आखिर में चुन लिया गया।

गाँधी बनाम ‘बाहरी’

अध्यक्ष पद की इस पारिवारिक चकल्लस के बीच कॉन्ग्रेस में किसी भी प्रकार के परिवर्तन को प्रभावित करने वाला एक सामूहिक विद्रोह कॉन्ग्रेस पार्टी में होने की संभावना नहीं है। अतीत में भी कॉन्ग्रेस में बगावत के स्वर सुनाई दिए गए, जिन्होंने तब भी पार्टी नेतृत्व में परिवर्तन को जरुरी बताने का साहस किया था। हालाँकि, उन्हें गंभीरता से लेने का दिखावा करने के बाद अंततः, उन्हें हटा दिया गया और गाँधी परिवार की हुकूमत को ही सर्वोपरि रखा गया।

यहाँ तक कि रामचंद्र गुहा जैसे इतिहासकार, जो कि लंबे समय से विशेष परिवार के वफादार रह चुके हैं, वो भी अब इस सिद्दांत में यकीन करने लगे हैं कि एक गैर-गाँधी को ही अब पार्टी का नेतृत्व करना चाहिए।

युवा बनाम बुजुर्ग

गाँधी परिवार की इस पार्टी में यह जंग एक तरह से ‘युवा बनाम बुजुर्ग’ की हो चुकी है। हालाँकि, सम्भावना यही है कि 6 महीने बाद भी चुनाव परिवार के भीतर से ही होना है। राहुल गाँधी द्वारा कॉन्ग्रेसी नेताओं पर भाजपा से साँठ-गाँठ होने के आरोप की खबर सामने आते ही कॉन्ग्रेस की भक्ति में लीन मीडिया की नई पीढ़ी और पुरानी पीढ़ी भी अपने-अपने प्रतिनिधि चुनती हुई देखी गई।

एक ओर जहाँ कुछ लोग वरिष्ठ नेताओं को निशाना बनाए जाने की निंदा करते देखे गए वहीं दूसरी और ऐसी भी जमात थी, जो फ़ौरन राहुल गाँधी के बचाव में उतर गई। हालाँकि, बाद में यह खबरें भी सामने आईं कि यह सब खेल NDTV के सूत्रों के आधार पर ही तय किया गया, लेकिन तब तक कॉन्ग्रेस के भीतर तैयार हो चुके कम से कम 2 गुट तो अपने अपने नए स्वामी चुन ही चुके थे।

यहाँ तक कि हार्दिक पटेल जैसे कॉन्ग्रेस के युवा और नए चहरे भी राहुल गाँधी को ही अपना नेता चुन चुके थे। इसलिए यह जंग राहुल और सोनिया गाँधी के बीच होने से ज्यादा उन समर्थकों और विचारों के बीच बनती नजर आ रही है, जो कॉन्ग्रेस के पारम्परिक और नवीन विचारों के पक्षधर और विरोधी हैं।

MEME या मीडिया?

जब राहुल गाँधी ने कपिल सिब्बल और अन्य पर भाजपा के साथ मिलकर काम करने का आरोप लगाया, तब कॉन्ग्रेस की वफादार पल्लवी घोष ने वरिष्ठ नेताओं का बचाव करने के लिए तुरंत मुहिम छेड़ दी। उसने कहा कि पत्र लिखने के लिए नेताओं की आलोचना की जा सकती है, लेकिन उन पर भाजपा की मदद करने का आरोप लगाना ठीक नहीं है।

इस पर दिव्या स्पंदना की प्रतिक्रिया एकदम विपरीत नजर आई। कपिल सिब्बल द्वारा डिलीट किए गए ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए कॉन्ग्रेस समर्थक दिव्या स्पंदना ने कहा कि राहुल गाँधी को यह कहना चाहिए था कि असहमति पत्र लिखने वाले नेता न केवल बीजेपी के साथ, बल्कि मीडिया के साथ भी साँठ-गाँठ कर रहे थे।

मीडिया और MEME ऐसे संसाधन हैं, जिन पर कांग्रेस का भविष्य टिका है। कोई सोच सकता है कि सोनिया गाँधी ट्विटर ट्रोल्स के बजाए पारंपरिक मीडिया और पत्रकारों में निवेश करना चाहेंगी। जबकि, राहुल गाँधी ‘ट्विटर सेना’ और मीम (MEME) निर्माताओं में निवेश करने के ज्यादा इच्छुक होंगे, जैसा कि हम देखते ही रहे हैं।

पल्लवी घोष और दिव्या स्पंदना के विरोधाभासी ट्वीट इस तथ्य का प्रमाण हो सकते हैं। राहुल गाँधी ने दिव्या स्पंदना पर भारी विश्वास जताया था, जो भाजपा के खिलाफ राजनीतिक हथियार के रूप में फर्जी खबरें फैलाने, आपत्तिजनक मीम्स और बयान शेयर करने का काम करती थी। हालाँकि, कॉन्ग्रेस के प्रति वफादार रहते हुए पल्लवी घोष ने कॉन्ग्रेस के एजेंडे को आगे बढ़ाने में थोड़ी ज्यादा चालाकी बरती है।

मेरी माँ को कहते थे काफिर, आशिक, अरशद समेत 7 ने उन्हें बेरहमी से मारा: मृतका संतोला देवी के बेटे का दावा

तीन बेटों की माँ संतोला देवी संप्रदाय विशेष बाहुल्य गाँव जगनीपुर बाजार में अकेले रहकर अपना जीवन-यापन करती थीं। ऐसा नहीं था कि उनके बच्चे उन्हें अपने पास आकर रहने को नहीं कहते थे। लेकिन उनका ये सोचना था कि अगर वह अपने बच्चों के साथ रहने लगीं तो उनके पुरखों के घर का क्या होगा? उनकी मिठाई की दुकान का क्या होगा?

लेकिन उन्हें क्या पता था कि पुरखों की जमीन से यही मोहब्बत एक दिन उनकी जान ले लेगी। दूसरे समुदाय के लोग 4-5 साल से उन्हें लगातार सता रहे थे। कभी उन्हें ‘काफिर’ कहते तो कभी ‘इस्लाम का दुश्मन’। 26 मई 2020 को संप्रदाय विशेष के परिवार के 7 लोगों ने उन पर बेदर्दी से हमला बोला और अकेले होने के कारण वह कुछ नहीं कर पाईं।

घटना उत्तरप्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के थाना क्षेत्र फतनपुर में एक गाँव जगनीपुर की है। ठीक ईद के एक दिन बाद इसे अंजाम दिया गया था। हालाँकि, उस दिन संतोला देवी का आसपास रहने वाले संप्रदाय विशेष के लोगों के साथ कोई झगड़ा नहीं हुआ था।

संतोला देवी
संतोला देवी

लड़ाई केवल दो आपसी पटिदारों में हुई थी और उन लोगों ने इसकी शिकायत भी करवाई थी। संतोला देवी की गलती इतनी थी कि उन्होंने एक पक्ष के समर्थन में अपना बयान दे दिया और जिसकी गलती थी उसके ख़िलाफ़ बोल गई।

बस इसी की बुनियाद पर उस परिवार के 7 लोगों ने उन पर 26 मई 2020 को हमला बोला और उन्हें अधमरा कर दिया। अगले दिन अस्पताल में संतोला देवी ने अपनी आखिरी साँस ली। घटना से नाराज परिजनों ने न्याय की गुहार की। लेकिन प्रशासन के कुछ अधिकारियों के रवैए ने उन्हें निराश कर दिया। बाद में एसपी और इलाके के विधायक के कारण इस मामले में उपयुक्त कार्रवाई हुई। हाल में ये तीन महीने पुराना मामला तब उछला जब इंटरनेट पर संतोला देवी के बेटे की वीडियो सामने आई जिसमें वह अपने लिए इंसाफ की गुहार कर रहे थे और पुलिस पर गंभीर आरोप मढ़ रहे थे।

ऑपइंडिया से संतोला देवी के बेटे प्रदीप की बातचीत

हमने इसी बाबत संतोला देवी के पुत्र प्रदीप कुमार से संपर्क किया। प्रदीप लंबे समय से गोवा में रहते हैं। लेकिन उनके दो भाई सुशील कुमार और सतीश कुमार माँ के घर के आसपास ही रहते हैं। प्रदीप से जब हमने पूरे मामले की जानकारी लेने का प्रयास किया तो उन्होंने हमें विस्तार से सारी बातें बताईं।

उन्होंने बताया कि उनकी माँ को वह लोग ‘काफिर’ और ‘इस्लाम का दुश्मन’ तक कहते थे। जिसकी वजह से माँ थाने में तहरीर भी देती थी। मगर, पुलिस कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं करती थी। जब वह हमसे इसकी चर्चा करती तो हम उन्हें अपने पास बुलाते या भाई के पास जाकर रहने की सलाह देते, लेकिन वह घर छोड़ना नहीं चाहती थीं।

प्रदीप ने बताया कि उनके एक भाई के दोनों पैर नहीं है। लेकिन उस दिन जब उसे हमले की खबर मिली तो वह फौरन माँ के दरवाजे पर पहुँचा। पर, लाचार होने के कारण वह कुछ कर न सका। इसके बाद उसकी बीवी ने माँ को बचाने का प्रयास किया। 

थोड़ी देर में दूसरा भाई और उसकी बीवी भी घर पर पहुँच गए और थाने में शिकायत दर्ज करवानी चाही। लेकिन थाने में पुलिस ने उन्हें दो घंटे बिठाए रखा। बाद में जाकर शिकायत लिखी गई।

इसके बाद वह लोग अपनी माँ को अस्पताल लेकर गए। जहाँ उन्हें इलाहाबाद के लिए रेफर किया गया और फिर लखनऊ। मगर, पैसे न होने कारण वह लोग अपनी माँ को वापस ले आए। प्रदीप बताते हैं कि घटना के 8-10 घंटे बाद तक माँ जीवित थीं। इसलिए उन लोगों ने इधर-उधर से पैसे का इंतजाम कर पास के अस्पताल में भर्ती करवाया, जहाँ उनकी मृत्यु हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी बताती है कि उन्हें तीन जगह चोटें आईं और रक्त रिसाव के कारण मौत हुई।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट

प्रदीप बताते हैं कि उनकी 65 वर्षीय माँ को आशिक अली, अरशद, मिनाज, जहानाबानो समेत 7 लोगों ने बेरहमी से मारा था। लेकिन पुलिस की कार्रवाई तब तक नहीं हुई जब तक इलाके के विधायक धीरज ओझा और एसपी ने इस मामले पर संज्ञान नहीं लिया।

संतोला देवी की मृत्यु के बाद अपने पुश्तैनी घर लौटे प्रदीप ने देखा कि इतने सब के बावजूद आरोपितों की दबंगई रुकी नहीं। अरशद नाम के आरोपित की माँ ने उन्हें गेट के बाहर आकर धमकाया, “एक बार हमारे बच्चों को छूटकर आने दो तब तुम लोगों को दिखाएँगे।” साथ ही ये भी कहा, “हमने पैसे पहुँचा दिया है।”

प्रदीप की मानें तो अब इस समय उन पर कुछ तथाकथित सेकुलर हिंदू दबाव बना रहे हैं कि वह पैसा लेकर इस केस को वापस ले लें। लेकिन वह कहते हैं, “हम लोगों को इंसाफ चाहिए पैसा नहीं। आज हमारे साथ हुआ कल किसी और के साथ होगा। इसलिए हमें इस तरह से नहीं करना चाहिए। हम हिंदुस्तान में रहते हैं।”

गौरतलब है कि संतोला देवी के पुत्र प्रदीप का आरोप है कि जब उनके भाई ने जहानाबानो की गिरफ्तारी के संबंध में पुलिस से बातचीत की तो इंस्पेक्टर ने उन्हें धमकाया और कहा “तुम चुप हो जाओ वरना तुम्हें भी फँसा देंगे और जेल में डाल देंगे।” इसके अलावा उनकी माँ की हत्या पर यह भी कहा गया, “वह औरत कभी न कभी तो मर ही जाती।”

प्रदीप द्वारा भेजी गई शिकायत जिसमें पुलिस अधिकारी पर आरोप है

प्रदीप कहते हैं कि उनकी दो बेटियाँ हैं और वह लंबे समय से उन्हें लेकर अपने गाँव नहीं गए थे। कारण पूछने पर वह बताते हैं कि गाँव के माहौल के कारण उन्हें हमेशा डर लगता था। संप्रदाय विशेष के 100 घरों में अब मुश्किल से 10 परिवार हिंदू बचे हैं। ऐसे में जब अपनी माँ के बारे में उन्हें पता चला तो वह रात भर सो नहीं पाए और जब पुलिस की निष्क्रियता देखी तो बड़े होकर पुलिस बनने का सपना देखने वाली अपनी बेटी को कहा कि कुछ भी बनना लेकिन पुलिस नहीं। और अगर, कभी बन जाओ तो भी किसी नेक इंसान की मदद करना।

कार्रवाई

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इसे बकरी पर शुरू हुआ विवाद बताया जा रहा है। लेकिन उक्त सभी जानकारी हमने संतोला देवी के बेटे प्रदीप के हवाले से दी है। उन्होंने हमें बताया कि घटना वाले दिन हुआ बकरी का विवाद केवल एक बहाना था। दरअसल झगड़े की पृष्ठभूमि पहले से ही तैयार की जा चुकी थी।

वे कहते हैं उस दिन तो बस घर मे थूक कर और बकरियों को भेजकर झगड़ा शुरू किया गया था। जब उनकी माँ ने इसपर आवाज उठाई, विरोध किया तो घटना को अंजाम दिया गया। हम आगे इस रिपोर्ट में जहानाबानो की गिरफ्तारी पर अपडेट जानने का भी प्रयास कर रहे हैं। जैसे ही हमें इसकी सूचना मिलेगी। हम अपनी खबर अपडेट करेंगे।

फिलहाल की कार्रवाई को लेकर प्रतापगढ़ पुलिस ने ट्विटर पर यह जानकारी दी है कि मामले में 6 आरोपित गिरफ्तार हो चुके हैं और संतोला देवी के पुत्र ने भी इसी बात को बताया है। लेकिन, इसके साथ ही उनका कहना ये भी है कि आरोपित महिला बुर्के की आड़ लेकर छिपते घूम रही हैं। पीड़ित परिवार की माँग है कि उसकी गिरफ्तारी भी जल्द हो और उन्हें न्याय मिले।

सोशल मीडिया पर वीडियो में क्या?

अश्विनी श्रीवास्तव के अकाउंट से डाली गई वीडियो में हम देख सकते हैं कि संतोला देवी के पुत्र इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं। साथ ही पुलिस पर आरोप भी लगा रहे हैं। वे कहते हैं कि पुलिस ने उनकी सहायता करने की बजाय संप्रदाय विशेष के लोगों से रिश्वत लेकर उनकी मदद कर रहे थे। लेकिन विधायक के दबाव में यह मामला लिखा गया। पर, पुलिस वाले अब भी उनके परिवार को धमका रहे हैं कि केस वापस लो, नहीं तो दूसरे केस में फँसा देंगे।

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प्रदीप के मुताबिक, झूठ केस में उनके भाइयों को फँसाने की कोशिश हो रही है। पुलिस कहती है कि 4 दिन का समय दे रहे हैं- सोच लो-समझ लो, नहीं तो जैसे आशा राम बापू को जेल में डाला, वैसे ही आप लोगों को भी डाल देंगे। इस वीडियो में प्रदीप आरोपितों का नाम बता रहे हैं। वे कहते हैं- आशिक अली, अरशद, हासमिन, मिन्हाज, बिटान, अन्नो, गिरफ्तार हैं जबकि जहानाबानो को पकड़ने में पुलिस नाकाम है।

कुर्सी बचाकर बोलीं सोनिया- जो हुआ सो हुआ, राहुल को अध्यक्ष बनाने के लिए पार्षद ने खून से लिखी चिट्ठी

कॉन्ग्रेस कार्यसमिति की सोमवार (24 अगस्त 2020) को हुई बैठक का पटाक्षेप उम्मीदों के अनुसार ही रहा। ​इस्तीफे की पेशकश के बाद सोनिया गॉंधी फिर से अंतरिम अध्यक्ष बने रहने के लिए मान गईं।

वे अंतरिम अधक्ष पद पर तब तक बनी रहेंगी, जब तक कोई ‘योग्य’ उम्मीदवार नजर नहीं आ जाता। इसके अलावा एक पैनल का भी गठन किया गया है, जो उन्हें रोजाना गतिविधियों में मदद करेगा। बैठक में फैसला लिया गया कि 6 महीने तक सोनिया कॉन्ग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष बनी रहेंगी और 6 महीने बाद अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होगा।

इस बैठक के बाद सोनिया गाँधी का पहला बयान आया है। सोनिया गाँधी ने कहा कि मैं दुखी हूँ लेकिन वो मेरे सहयोगी हैं। जो हुआ सो हुआ, हमें साथ में काम करना चाहिए। पत्र लिखने वालों के खिलाफ मेरे मन में कोई दुर्भावना नहीं है।

गौरतलब है कि सोनिया गाँधी का समर्थन करने वाले नेताओं पर निशाना साधने वाले पत्र के बाद CWC की बैठक में आज दिनभर हमेशा की ही तरह ड्रामा हुआ। चिट्ठी में सशक्त केंद्रीय नेतृत्व के साथ पार्टी को चलाने की सही रणनीति पर जोर दिया गया था। इसमें कहा गया था कि नेतृत्व ऐसा हो जो सक्रिय हो और जमीन पर काम करता दिखे।

बैठक के दौरान पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने कहा कि वो अब आगे पार्टी अध्यक्ष नहीं बने रहना चाहती हैं। लेकिन कई नेताओं ने उन्हें पद पर बने रहने की अपील की थी।

आखिरकार पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, वरिष्ठ नेता एके एंटनी और अन्य ने उनसे नए अध्यक्ष चुने जाने तक इस पद पर बने रहने का आग्रह किया। राहुल गाँधी ने कहा कि पूरे प्रकरण में भाजपा के साथ मिलीभगत होने के बाद विवाद हुआ था। इसके बाद कपिल सिब्बल और गुलाम नबी आज़ाद नाराज हो गए थे और गुलाम नबी आजाद ने इस्तीफा देने तक की भी बात कह डाली।

इसके बाद सिब्बल ने कहा कि राहुल गाँधी ने उनसे यह स्पष्ट किया है कि उन्होंने ऐसी कोई बात नहीं कही। हालाँकि, सोनिया गाँधी कथित तौर पर अध्यक्ष पद छोड़ने पर अड़ी हुई हैं और उन्होंने CWC सदस्यों से नए पार्टी प्रमुख की तलाश की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है।

कॉन्ग्रेस कार्यकारिणी की दिनभर चली उबाऊ बैठक के बीच एक अलग किस्म का वाकया भी सामने आया। सोनिया गाँधी के ही अंतरिम अध्यक्ष चुने जाने के कुछ ही देर पहले दिल्ली कॉन्ग्रेस नेता संदीप तंवर ने सोनिया गाँधी को कथित रूप से खून से एक पत्र लिखा। इसमें राहुल गाँधी को पार्टी अध्यक्ष बनाने की माँग की गई थी।

पत्र में संदीप तंवर ने लिखा, “श्रीमती सोनिया गाँधी जी, नमस्कार, श्री राहुल गाँधी जी ने पार्टी को अपने खून पसीने से सींचा है। बुरे समय में देश के लोगों की आवाज सड़क से संसद तक उठाई है। अगर राहुल जी को अध्यक्ष नहीं बनाया गया, तो यह फैसला पार्टी हित में नहीं होगा। धन्यवाद संदीप तंवर।”

दिल्ली: मंदिर के भीतर मिली आपत्तिजनक मूर्तियों का क्या है सच?

राजधानी दिल्ली के विवेक विहार स्थित हनुमान बालाजी मंदिर से खजुराहो जैसी मूर्तियाँ मिलने के बाद हिन्दू संगठन से जुड़े लोगों और समाजसेवियों ने हंगामा खड़ा कर दिया था। इन लोगों ने इलाके को घेर कर रोड जाम कर दिया। पुलिस ने हालात पर काबू पाने के लिए पूरे इलाके को सील कर दिया। लोगों में मंदिर के अंदर आपत्तिजनक मूर्तियों के मिलने से आक्रोश था। उनका कहना था कि यह सब हिन्दू समाज को बदनाम करने की एक कोशिश है।

इसके पीछे का सच क्या है?

हालाँकि सच्चाई कुछ और है। वहाँ के एक स्थानीय कार्यकर्ता ने मंदिर के अंदर अश्लील मूर्तियों के बनने की बात को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि इस तरह से इसे आगे प्रसारित कर हिन्दू धर्म के लोगों ने बिना सच जाने अपने ही भगवान, अपने ही धर्म का मजाक बना रहे हैं।

वो कहते हैं कि लोग धड़ल्ले से इस फोटो को सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। उन्हें सोचना चाहिए कि ऐसा करके वो अपने धर्म को सपोर्ट करने की बजाय उसका मजाक बनवा रहे हैं। कार्यकर्ता ने बताया कि मीडिया रिपोर्ट में जो भी चीजें बताई जा रही हैं, वो सभी गलत हैं। 

स्थानीय कार्यकर्ता ने कहा, “मंदिर में लगातार निर्माण कार्य चल रहा है। जहाँ से मंदिर के लिए मूर्तियाँ बनकर आती है, उसी फैक्ट्री में किसी फॉर्महाउस का गंदी मूर्तियाँ बनाने के ऑर्डर था। वहाँ से एक ही ट्रक पर दोनों ऑर्डर निकले। गलती से लेबर ने सारी मूर्तियाँ यहीं पर उतार ली। जब मंदिर वालों ने पैकेट खोल कर मूर्ति देखी तो तुरंत उन्हें फोन करके कहा कि गलत मूर्तियाँ यहाँ पर आ गई है। इसे तुरंत उठवाओ। उन्होंने कहा कि मेरी दूसरी गाड़ी 4-5 दिन में आ रही है, वो इसे उठाकर ले जाएगी।”

कार्यकर्ता ने आगे कहा, “इसी बीच किसी ने ये बात लीक कर दी कि मंदिर वाले मूर्तियाँ बना रहे हैं। मंदिर में मूर्तियाँ बनती नहीं है। मंदिर में मूर्तियाँ राजस्थान की फैक्ट्री से आती हैं। मंदिर वालों की सिर्फ इतनी गलती है कि उन्होंने इन मूर्तियों को 4-5 दिन अपने यहाँ पड़ी रहने दी।”

ISI का आतंकी प्लान: लोकल गैंगस्टर, सेक्स वर्कर और गोरखपुर का मोहम्मद आरिफ…

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती से पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) अपने आतंकी मॅंसूबों को पूरा नहीं कर पा रही है। इस बौखलाहट में अब वह लोकल गैंगस्टरों को जोड़ने की फिराक में है ताकि भारत में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब की जा सके।

साथ ही गोरखपुर में पकड़े गए पाकिस्तानी जासूस मोहम्मद आरिफ को लेकर भी नया खुलासा हुआ है। पता चला है कि आईएसआई ने उसे सेक्स वर्कर की मदद से अपना जासूस बनाया था। असल में 51 साल का आरिफ अपने रिश्तेदार से मिलने कराची गया था। वहीं वह आईएसआई के संपर्क में आया। इसका जरिया एक सेक्स वर्कर बनी। गोरखपुर लौटने के बाद वह पाकिस्तान को जानकारियॉं भेजने लगा। गिरफ्तार कर उससे पूछताछ की जा रही है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार आईएसआई और स्थानीय गैंगस्टरों के बीच सॉंगठॉंठ को लेकर खुफिया एजेंसियों ने अलर्ट​ किया है। हाल ही में चंडीगढ़ की इंटेलिजेंस यूनिट ने देश की तमाम खुफ़िया एजेंसी को इस बात की जानकारी दी।

इंटेलिजेंस यूनिट के मुताबिक़ ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें स्थानीय गैंगस्टर और आतंकवादियों के बीच गठजोड़ की जानकारी मिली है। ऐसे अपराधियों और गैंगस्टर की सूची जारी करते हुए इंटेलिजेंस यूनिट ने बाकी इकाइयों को चौकन्ना रहने को कहा है। इंटेलिजेंस यूनिट ने कहा है कि आईएसआई देश के स्थानीय अपराधियों के साथ मिल कर बड़े आतंकी हमले की योजना बना रही है। इनमें से कुछ अपराधी फ़रार हैं तो कुछ अभी जेल में बंद हैं।

एक दिग्गज अधिकारी द्वारा किए गए दावे के मुताबिक़ ऐसा हो सकता है कि पाकिस्तान की खुफ़िया एजेंसी यहाँ के गैंगस्टर से संपर्क में हो या संपर्क बनाने की कोशिश कर रही हो। ख़ासकर ऐसे गैंगस्टर जिनका अपने क्षेत्र में दबदबा है।

कुछ दिनों पहले केंद्रीय खुफ़िया एजेंसी की पंजाब इकाई ने इस संबंध में जानकारी साझा की थी। जानकारी के मुताबिक़ आईएसआई समेत कई आतंकवादी संगठन कुछ नेताओं को निशाना बनाने के लिए 5 स्थानीय अपराधियों के संपर्क में थे। इन 5 अपराधियों में से 2 फ़िलहाल फ़रार चल रहे हैं और वहीं 3 पंजाब के अलग-अलग कारावासों में बंद हैं।  

इन 3 अपराधियों पर दर्जनों हत्या, डकैती, नशे से जुड़े मामले समेत कई गंभीर आरोप हैं। स्थानीय पुलिस को भी इस बात के सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वह इन अपराधियों की हर हरकत पर कड़ी नज़र रखें। भले वह जेल में ही क्यों न बंद हों। एक और सीनियर अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक़ स्लीपर सेल के आतंकियों ने आतंकवादी हमलों को अंजाम देने से साफ़ मना कर दिया है। क्योंकि भारत की सुरक्षा एजेंसी उन पर तुरंत कार्रवाई करती है। इसके अलावा देश में शायद ही कोई उच्च स्तरीय आतंकी कमांडर बचा है जो छोटे आतंकियों की अगुवाई कर सके। ऐसे में आईएसआई आतंकवादी हमलों को अंजाम देने के लिए भारत के स्थानीय गैंगस्टर से संपर्क कर रही है।       

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने शुक्रवार देर रात एनकाउंटर के बाद वैश्विक आतंकी संगठन ISIS के अबू यूसुफ खान को गिरफ्तार किया था। अब तक जो जानकारी सामने आई है उससे पता चला कि वह लोन वुल्फ अटैक की फिराक में था। निशाने पर कोई बड़ी हस्ती थी। अबू बाइक पर विस्फोटक लेकर दिल्ली में आतंकी हमले को अंजाम देने की कोशिश में था। पुलिस ने 15 किलो IED और कुकर बम भी बरामद किया था।

आतंकी अबू यूसुफ खान उत्तर प्रदेश के बलरामपुर का रहने वाला था। लोधी कॉलोनी स्थित दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के दफ्तर में उससे पूछताछ की गई है। वह दिल्ली में ही किसी बड़े हमले को अंजाम देने की फिराक में था लेकिन पुलिस ने समय रहते उसे धर दबोचा। उक्त आतंकी ने कई जगह रेकी भी की थी, ताकि बाद में आसानी से हमला कर सके।

क्या लव जिहाद का ट्रेनिंग ग्राउंड है जूही कॉलनी? शालिनी बनी फिजा के वीडियो के बाद से चर्चे में है यह मुहल्ला

पिछले 2 महीने से गायब शालिनी यादव का अब पता चल चुका है। उसकी बनाई वीडियो वायरल हो चुकी है, उसका नाम नेशनल मीडिया में छप चुका है। फर्क सिर्फ इतना है कि जिस शालिनी यादव को खोजा जा रहा था, वो अब फिजा फातिमा बन गई है। जो माँ-बाप अब तक अपनी बेटी को खोज रहे थे, अचानक से वही अब उसके और उसके पति मोहम्मद फैसल की जान के दुश्मन हैं!

यह सब कुछ पिछले 3-4 दिन में घटित हुआ है। शालिनी यादव (फिजा फातिमा) का फेसबुक पर वीडियो अपलोड करना, परिवार वालों को चकमा देकर भागने और धर्म बदलकर शादी की कहानी सुनाना… अब तक सब कुछ क्लियर है। लेकिन इसी कहानी में एक राज छुपा है। राज शालिनी के पति मोहम्मद फैसल से जुड़ा हुआ है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार यह राज मोहम्मद फैसल जिस कॉलनी में रहता है, उससे जुड़ा हुआ है। कॉलनी का नाम है – जूही कॉलनी। और राज है – इस कॉलनी के संप्रदाय विशेष के लड़कों का हिंदू लड़कियों से अफेयर। हालाँकि यह गैर-कानूनी नहीं है, लेकिन अगर इसमें कोई पैटर्न या ट्रेंड दिखता है तो जरूर सोचनीय है।

गौर करने वाली बात यह है शालिनी उर्फ फिजा ने जो वीडियो जारी किया था उसमें उसने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उसने अपनी मर्जी से शादी की है। उस पर किसी तरह का दबाव नहीं है। लेकिन इस वीडियो के सामने आने के बाद शालिनी के भाई ने दावा किया था कि यह लव जेहाद का मामला है। उसने कहा था कि शालिनी घर से 10 लाख रुपए लेकर निकली थी। फैसल ने उसे बहला-फुसलाकर प्रेमजाल में फँसाया है। उसने लव जिहाद गैंग होने की बात भी कही थी।

जूही कॉलनी क्यों चर्चा में?

कानुपर की जूही कॉलनी शालिनी यादव मामले के बाद से खबरों की चर्चा में है। लेकिन स्थानीय लोग इसके बारे में पहले से बात करते आ रहे हैं। 20 जून को जब शालिनी लापता हुईं तो उनके पिता ने जूही कॉलनी के युवक सहित सात लोगों पर अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। लेकिन किसी एक अपराध से पूरी कॉलनी चर्चा में क्यों?

दैनिक जागरण के कानुपर एडिशन में प्रकाशित खबर

यहीं पेंच है। जूही कॉलनी शालिनी यादव मामले से चर्चा में जरूर आई लेकिन तह तक जाने पर मामला लव जिहाद की ओर मुड़ता नजर आया। लव जिहाद ऐसा, जो संगठित है। और इसकी जड़ें इसी जूही कॉलनी में मिली। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार इस कॉलनी के संप्रदाय विशेष के लड़के संगठित लव जिहाद कर रहे हैं।

पिछले 2 महीने में कानपुर इलाके में घर से भागी 5 लड़कियाँ। इन पाँचों लड़कियों के भागने और जिन आरोपितों के संग वो भागीं, पूरी रिकॉर्ड्स दैनिक जागरण के पास है। जूही कॉलनी में चल रहे लव जिहाद का संगठित नेक्सस या ट्रेनिंग इन्हीं पाँचों भागी लड़कियों के आधार पर समझ सकते हैं।

  • भागी शालिनी यादव – आरोपित मोहम्मद फैसल – रहने वाला जूही कॉलनी का
  • कल्याणपुर के आवास विकास निवासी दो सगी बहनें भागीं – आरोपित शाहरुख (पिता का नाम कमाल) और शाहरुख (पिता का नाम खलील) – रहने वाला दोनों जूही कॉलनी का
  • पनकी रतनपुर कॉलनी निवासी युवती व उसकी छोटी बहन – आरोपित मो. मोसीन, छोटी बहन सतर्क हुई तो मामला खुल गया – रहने वाला जूही कॉलनी का

जिन स्थानीय लोगों से बातचीत पर दैनिक जागरण की रिपोर्ट आधारित है, उसके अनुसार आरोपित युवकों के कई लड़कियों से संबंध हैं। रिपोर्ट में यह भी संदेह जताई गई है कि अभी तक कुछ ही थानों के मामले निकाले गए हैं और 5 हिंदू लड़कियों के संप्रदाय विशेष के लड़कों से प्रेम-प्रसंग (जो एक ही इलाके से होने के कारण संगठित लव जिहाद की ओर इशारा कर रहे हैं) की बात सामने आई है लेकिन विभिन्न थानों में दर्ज भागने वाली लड़कियों की जाँच अगर अच्छे से की जाए तो यह संख्या एक दर्जन से अधिक होगी और सभी आरोपितों के तार जूही कॉलनी से जुड़े मिलेंगे।

शिवसेना को नहीं भाया जैन मंदिर खोलने का आदेश, कहा- यस माय लॉर्ड कह हर फैसला कबूल करना पड़ता है

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को (21 अगस्त 2020) मुंबई के तीन जैन मंदिरों को खोलने और पर्युषण पूजा की सशर्त अनुमति दी थी। शिवसेना को यह फैसला रास नहीं आया है। पार्टी मुखपत्र सामना में इसकी आलोचना करते हुए कहा गया है कि अदालत का हर फैसला ‘यस माय लॉर्ड’ कह कर कबूल करना पड़ता है।

फैसले की निंदा करते हुए महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ शिवसेना ने कहा कि कोरोना के भय के कारण सर्वोच्च न्यायालय का कामकाज भी हमेशा की तरह खुले ढंग से नहीं चल रहा। लेकिन उसी न्यायालय को ऐसा लगता है कि सरकार को अन्य सभी पाबंदियों को शिथिल कर देना चाहिए। 

शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में कहा गया है, “कोरोना का डर न होता तो न्यायालय भी ‘वर्चुअल’ पद्धति से नहीं चल रहे होते। मगर हमें न्यायालय का हर निर्णय, ‘यस माय लॉर्ड…, ‘जी महाराज’ कहते हुए गर्दन झुकाकर ही स्वीकार करना पड़ता है। उस पर इस निर्णय का स्वरूप धार्मिक होने के कारण इसका सम्मान करना ही होगा।”

देश की सर्वोच्च ने पर्युषण पूजा के लिए 3 जैन मंदिरों को खोलने की अनुमति देते हुए महाराष्ट्र सरकार को फटकार भी लगाई थी। अदालत ने कहा था कि जब बाकी आर्थिक गतिविधियाँ चल रही हैं तो कोरोना का डर नहीं है, लेकिन धार्मिक स्थलों को खोलते वक्त कोरोना क्यों याद आता है। इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर प्रबंधन को कहा कि वो अंडरटेकिंग दें कि कोरोना को लेकर SoP और सरकार की गाइडलाइन का पालन किया जाएगा।

मुंबई में पर्युषण पर्व के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दादर, बाइकूला और चेंबूर स्थित 3 जैन मंदिरों को 22 और 23 अगस्त को खोलने की सशर्त इजाजत दी थी। इसी को लेकर शिवसेना ने सामना में लिखा है। इसमें कहा गया कि कोरोना कोई राज्य अथवा किसी सरकार द्वारा नहीं लाया गया है। इसमें राजनीति का ऐसा कोई संबंध होता तो देश के गृहमंत्री अमित भाई शाह व केंद्रीय कैबिनेट के पाँच-छह मंत्रियों को ‘कोरोना’ के संक्रमण के कारण अस्पताल नहीं जाना पड़ा होता।

संपादकीय में आगे कहा गया, “हम खुद मंदिर, व्यायामशाला खोल दिए जाएँ, ऐसा मत रखते हैं। मंदिर की भी एक अर्थनीति होती ही है और उस पर भी कई लोगों की आजीविका निर्भर है। भजन-प्रवचन करने वाले महाराज तो हैं ही, लेकिन उनके साथ-साथ पेटी, तबला बजाने वाले, कीर्तन गानेवाले भी हैं। कोई भी राज्य लोगों की बदहाली नहीं देख सकता है। यह सब खोल दिए जाएँ और लोग काम-धंधे पर जा सकें, यह सभी की चाहत है। मंदिर जनता का श्रद्धास्थल है और मंदिर में बैठे भगवान दुर्बलों को सहारा देते हैं। यह हर किसी के विश्वास पर निर्भर है। करोड़ों लोगों की आजीविका का प्रश्न मंदिर व अन्य प्रार्थनास्थल हल करते हैं। इसलिए मंदिरों का मुद्दा भी वित्तीय कारोबार का ही है माय लॉर्ड। भूल चूक माफ!”

‘रिया चकवर्ती के 2 डैडी ने मिलकर रची सुशांत की हत्या की साजिश, वो डिप्रेशन में कभी नहीं था’

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए सीबीआई लगातार पूछताछ कर साक्ष्य जुटा रही है। दूसरी ओर, सुशांत और रिया चकवर्ती को जानने वाले लोग भी लगातार चौंकाने वाले खुलासे कर रहे हैं। इनसे रिया की भूमिका और संदिग्ध होती जा रही है।

इसी कड़ी में सुशांत के जिम पाटर्नर सुनील शुक्ला ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके मुताबिक रिया चकवर्ती के ‘दो डैडी’ ने मिलकर सुशांत की हत्या की साजिश रची। उनके अनुसार सुशांत डिप्रेशन में नहीं थे और रिया उन्हें अपने पिता द्वारा दी गई दवाइयॉं दे रही थीं।

सुनील शुक्ला ने कहा, “सुशांत सिंह राजपूत की हत्या की साजिश ‘दो डैडी’ द्वारा की गई थी। इसमें एक रिया चक्रवर्ती के जैविक पिता इंद्रजीत चकवर्ती और दूसरे उनके ‘शुगर डैडी’ महेश भट्ट हैं।”

शुक्ला ने दावा किया रिया ने अपने पिता के द्वारा दी गई दवाएँ सुशांत को दी और रिया के घर छोड़कर जाने के बाद घर के किस व्यक्ति ने उसे दवा दी? घर में सुशांत के अलावा उनके फ्लैटमेट सिद्धार्थ पिठानी, कुक नीरज और मैनेजर दीपेश सावंत था।

सुशांत सिंह राजपूत के बारे में बात करते हुए सुनील शुक्ला ने दावा किया है कि उनकी मानसिक क्षमता में कोई कमी नहीं थी। सुनील के अनुसार, वह उनसे जिम में मिलते थे और वर्कआउट करते थे। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि वह मल्टीविटामिन सप्लीमेंट ले रहे थे।

इसके अलावा दूसरा एंगल जो सुशांत केस में पता चला है वो यह कि रिया ने स्पर्श उपचार के नाम पर एक्टर की मुलाकात मोहन जोशी से करवाई थी। वही, मोहन जोशी जिन्होंने हाल में एक वीडियो के जरिए सुशांत को डिप्रेशन से ठीक करने की बात भी कही थी। मोहन के मुताबिक, रिया ने उन्हें संपर्क किया था।

मनोज जोशी की मानें तो साल 2019 में रिया ने उन्हें ये बताया कि सुशांत डिप्रेशन में हैं। इसके बाद उन्हें ललित होटल के पीछे वाटर स्टोन रिसॉर्ट में बुलाया गया। जहाँ उन्होंने एक्टर का 25 मिनट इलाज किया और अगले ही दिन उन्हें यह कह दिया गया कि वह 90% ठीक हो गए हैं। साथ ही बहुत दिन बाद हँसे भी हैं।

अब मनोज जोशी के इन्हीं दावों के बाद सीबीआई टीम रिसॉर्ट पहुँची। बताया जा रहा है कि सीबीआई ने पूछताछ के लिए मनोज जोशी को भी समन भेजा है।

गौरतलब है कि एक्टर की मौत के मामले में जाँच के दौरान सीबीआई ने रिपोर्ट का विश्लेषण करने और स्वास्थ्य-कानूनी राय देने के लिए एम्स फॉरेंसिक टीम की मदद भी माँगी है। अधिकारियों ने सुशांत के मैनेजर सैमुअल मिरांडा और बावर्ची नीरज के साथ बांद्रा में दिवंगत अभिनेता के घर का दोबारा से दौरा भी किया ताकि सीन री-क्रिएट हो सके। इसके अलावा सिद्धार्थ पिठानी और नीरज के बयान लिए गए हैं, जो पहले मैच नहीं हुए थे। इसलिए हो सकता है आगे इन्हें समन फिर भेजा जाए।

NDTV ही है असली ‘गोदी मीडिया’… कॉन्ग्रेस ने आज डिक्लियर कर दिया: सोशल मीडिया पर लोग माँग रहे सफाई

कॉन्ग्रेस पार्टी की मीटिंग हुई। आंतरिक लोकतंत्र के लिए। मीटिंग में युवा राहुल गाँधी ने कह दिया कि जो लोग लेटरबाजी कर रहे थे वो सब BJP से मिले हुए हैं। युवा पूर्व अध्यक्ष की बात पर वरिष्ठ नेता लोग भड़क गए। कपिल सिब्बल ने बात सार्वजनिक कर दी। गुलाम नबी आजाद ने तो इस्तीफे की ही पेशकश कर दी।

देश की सबसे पुरानी पार्टी में इतनी उठा-पटक हो और समाचार चैनल वाले बैठे रहें, यह संभव नहीं। NDTV भी बैठा नहीं रह पाया। हालाँकि कॉन्ग्रेस के मामले में पहले वो फूँक-फूक कर कदम रखता था, आज स्लिप कर गया। स्लिप कर गया तो खामियाजा भी उठाना पड़ा।

NDTV ने एक ट्वीट किया, सूत्रों के हवाले से। पहले ये ट्वीट देखिए।

यह ट्वीट पत्रकारिता के एकमात्र स्तंभ NDTV के गले की फाँस बन गया। कॉन्ग्रेसी नेता से लेकर कॉन्ग्रेसी खेमे के तथाकथित पत्रकार लोग भी NDTV पर टूट पड़े। जो अब तक BJP को घेरने के लिए गोदी मीडिया जैसे विशेषणों का प्रयोग करते थे, खुद उनके माथे पर उनके ही समर्थक ‘गोदी मीडिया’ गोद गए।

कॉन्ग्रेस के नेता तक NDTV को फेक न्यूज फैलाने वाला सोर्स बताने लगे।

फिर कूदे तथाकथित पत्रकार, जो अब तक NDTV के साथ मिलकर गोदी मीडिया-गोदी मीडिया खेल रहे थे। एक दिन भी बर्दाश्त नहीं कर सके गाँधी-भक्ति के खिलाफ, जो सुबह-शाम भक्त की माला जप कर दूसरों को संबोधित करते हैं।

चोट दिल पर लगी है, बड़ी जोर लगी है। इसलिए एक कॉन्ग्रेसी ने तो NDTV को गोदी मीडिया कहने से ही इनकार कर दिया। उसने नया नाम दिया है – झाड़ू मीडिया।

गाँधी जैसे मिलते-जुलते नाम वाले पाँधी ने तो कमाल ही कर दिया। परोक्ष रूप से उन्होंने NDTV पर बिकाऊ होने का आरोप तक लगा डाला।

45 साल की गुलामी सिर्फ इसलिए… जनेऊधारियों के साथ जाने से यही होता है: गुलाम नबी पर ओवैसी का तंज

राहुल गाँधी द्वारा कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पर भाजपा से मिलीभगत होने के आरोप के बाद कॉन्ग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने अपना इस्तीफा देने तक की बात कही। इसके बाद AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी ने गुलाम नबी आजाद पर कटाक्ष करते हुए ट्वीट किया है।

ओवैसी ने अपने ट्वीट में लिखा, “आदर्श न्याय, गुलाम नबी साहब मुझ पर यही आरोप लगाते थे। अब आप पर भी यही आरोप लगा है। 45 साल की गुलामी सिर्फ इसलिए? अब ये साबित हो गया है कि जनेऊधारी लीडरशिप का विरोध करने वाला बी-टीम ही कहलाया जाएगा। मुझे उम्मीद है कि मुस्लिम समुदाय के लोग समझेंगे कि कॉन्ग्रेस के साथ रहने से क्या होता है।”

दरअसल आज, सोमवार सुबह ही राहुल गाँधी ने कॉन्ग्रेस CWC की बैठक में कथित तौर पर आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में बदलाव की माँग करने के लिए लिखे गए इस इस पत्र के पीछे कॉन्ग्रेस के नेताओं का भाजपा से साँठ-गाँठ है। राहुल गाँधी के इस बयान से कपिल सिब्बल और गुलाम नबी आजाद ने खुलकर अपनी नाराजगी प्रकट की है। गुलाम नबी आजाद ने इस्तीफे तक की बात कह डाली।

इस पर कपिल सिब्बल ने ट्विटर के जरिए कॉन्ग्रेस के प्रति अपने सेवा और भक्ति के बारे में ट्विटर पर लिखा है, “राहुल गाँधी कहते हैं कि हमारी बीजेपी के साथ साँठ-गाँठ है, राजस्थान हाईकोर्ट में पार्टी को सफलता दिलाई। मणिपुर में बीजेपी के खिलाफ पूरी ताकत से पार्टी का बचाव किया। पिछले 30 सालों में बीजेपी के पक्ष में एक भी बयान नहीं दिया। फिर भी हम पर बीजेपी से साँठ-गाँठ का आरोप लग रहा है।”

वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने CWC की बैठक के दौरान ही यह ट्वीट किया है। लेकिन, इसके कुछ ही देर बाद एक और ट्वीट में कपिल सिब्बल ने लिखा कि उन्होंने राहुल गाँधी से इस बारे में ग़लतफ़हमी को दूर कर लिया है और वह ट्वीट वापस लेते हैं।

कॉन्ग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कार्यकारिणी की बैठक में कहा है कि अगर राहुल गाँधी इन आरोपों को प्रमाणित कर सकते हैं तो वे इस्तीफा दे देंगे। गौरतलब है कि कपिल सिब्बल और गुलाम नबी आजाद उन 23 नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी से पहले पत्र लिखा था।

इस पत्र में कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर सवाल खड़े किए गए और कहा गया कि इस वक्त एक ऐसे अध्यक्ष की जरूरत है जो स्थायी नेतृत्व दे सके। CWC बैठक की शुरुआत में पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की इच्छा जाहिर की। उन्होंने कहा कि मुझे रिप्लेस करने की प्रक्रिया शुरू करें।

सोमवार (अगस्त 24, 2020) को हुई इस बैठक में इस पत्र को लेकर काफी विवाद हुआ है। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की पेशकश की। हालाँकि, कई वरिष्ठ नेताओं ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। साथ ही, यह पत्र लिखने वालों पर राहुल गाँधी ने अपना गुस्सा व्यक्त किया और इसकी टाइमिंग पर सवाल खड़े किए।