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एटा में हिंदू दंपत्ति को ईसाई बनाने की कोशिश में लगा था दिल्ली का शख्स, गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश पुलिस ने रविवार (अगस्त 23, 2020) को एक शख्स को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार किया। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली का 30 वर्षीय मनदीप कुमार एटा में रह रहा था, जहाँ वह लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने की कोशिश कर रहा था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मनदीप कुमार ने शनिवार (अगस्त 22, 2020) को शिवसिंहपुर गाँव में हिंदू दंपती के घर पर उसे बाइबिल पढ़ाने की कोशिश की थी। आरोपित मनदीप कुमार पिछले एक महीने से अपनी पत्नी मार्गेट एंथोनी के साथ एटा में किराए के मकान पर रह रहा था।

जानकारी के मुताबिक मनदीप कुमार को शिवसिंहपुर गाँव में विनोद कुमार के घर जाते समय ग्रामीणों ने पकड़ लिया था। ग्रामीणों ने बताया कि वो मनदीप के भ्रमण के खिलाफ थे। उन्होंने विनोद को भी सलाह दी थी कि वो उसे अपने घर आने की अनुमति न दे। जैसे ही ग्रामीणों को पता चला कि मनदीप लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने की कोशिश कर रहा था, उन्होंने पुलिस को सूचित किया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस की एक टीम पूछताछ के लिए मनदीप को कोतवाली थाने ले आई। कोतवाली पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर (क्राइम) संजीव त्यागी ने कहा कि पूछताछ के दौरान, मनदीप सिंह ने स्वीकार किया है कि वह विनोद के परिवार को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने की कोशिश कर रहा था। वह एक ईसाई मिशनरी से जुड़ा है, और उसकी पत्नी मार्गेट एंथोनी भी ईसाई है।

पुलिस ने मनदीप सिंह के टारगेट विनोद से भी बात की। विनोद ने पुलिस को बताया कि वह मनदीप से प्रभावित होकर बाइबिल पढ़ रहा था। इसके साथ ही उसने ग्रामीणों के आरोपों की भी पुष्टि की।

मनदीप सिंह पर भारतीय दंड संहिता की धारा 295-ए के तहत मामला दर्ज किया गया है। गिरफ्तारी के बाद, मनदीप सिंह को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। फिलहाल पुलिस मार्गेट एंथोनी की भी धर्मांतरण में भूमिका की जाँच कर रही है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों झारखंड के धनबाद शहर में धर्मांतरण का मामला सामने आया था। लोगों के पुनर्वास के नाम पर दो दर्जन परिवारों का धर्म परिवर्तन कर उन्हें ईसाई बना दिया गया था। मामला सामने आने के बाद हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों ने इसका जमकर विरोध किया था और साथ ही प्रशासन को शिकायत भी की थी। स्थानीय लोगों ने यहाँ नवनिर्मित चर्च को घेर घंटों हंगामा किया। चर्च के ऊपर लगे धार्मिक चिन्ह (क्रॉस) को भी लोगों ने तोड़ दिया था।

एक थी रामगोपाल वर्मा की आग और एक है कॉन्ग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी, दोनों में बस धुआँ ही धुआँ है

​2007 में एक फिल्म आई थी। नाम था रामगोपाल वर्मा की आग। शोले से प्रेरित इस फिल्म पर बात करना वक्त और की बोर्ड के टिकटिक की बर्बादी ही है। फिर आप पूछेंगे कि मैंने इसका जिक्र क्यों किया?

असल में कॉन्ग्रेस में अध्यक्ष पद को लेकर जो कुछ चल रहा है उसे सहज तरीके से समझाने के लिए मुझे इस फिल्म से बेहतर कुछ नहीं मिला। जैसे उस फिल्म से बड़े नाम जुड़े थे पर जब पर्दा उठा तो धुआँ ही धुआँ था, वैसे ही कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर दिख रही रस्साकशी से जब भी पर्दा उठेगा तो गाँधी ही निकलेंगे। या तो कुर्सी पर बैठा गाँधी या फिर पर्दे के पीछे से कुर्सी को नचाता गाँधी। ठीक वैसे ही जैसे 2004-14 तक पीएम की कुर्सी नाचती रही।

यही कारण है कि एक तरफ सूत्रों ने यह खबर उड़ाई कि सोनिया गॉंधी ने अंतरिम अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है, अगले पल आधिकारिक तौर पर रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आकर इसका खंडन कर दिया। वैसे, यह कोई नई बात नहीं है। ज्यादा दिन नहीं बीते हैं जब प्रियंका गाँधी ‘गैर गॉंधी अध्यक्ष’ वाले इंटरव्यू को लेकर चर्चा में थीं। फिर सुरजेवाला ने इसे साल भर पुरानी बात कह इसकी हवा निकाल दी।

क्या बिना इशारों के सुरजेवाला ने यह क्या होगा? क्या बिन इशारों के ही सूत्रों ने इस्तीफे की खबर उड़ा दी होगी?

सोमवार (24 अगस्त 2020) को कॉन्ग्रेस कार्यसमिति की बैठक है। अप्रसांगिक हो चुकी कॉन्ग्रेस की इस बैठक को चर्चा में रखने के लिए पहले एक पत्र की बात सामने आई। पार्टी के 23 वरिष्ठ नेताओं जिनमें 5 पूर्व में मुख्यमंत्री रह चुके हैं, के इस पत्र में पार्टी में बड़े बदलावों की पैरोकारी की गई। इसके बाद सूत्रों के हवाले से दिनभर मीडिया गिरोह दावे करती रही। कभी सोनिया के इस्तीफे की तो कभी दलित को पार्टी का अगला अध्यक्ष बनाने की।

पर आधिकारिक रूप से जो नेता सामने आए उन्होंने या तो सोनिया के इस्तीफे का खंडन किया या फिर यह कहा कि यदि सोनिया नहीं चाहतीं तो राहुल गाँधी को यह जिम्मेदारी सँभालनी चाहिए। ध्यान रखने की बात यह है कि पत्र लिखने वालों से लेकर सार्वजनिक तौर पर बयान देने वाले ये वही कॉन्ग्रेसी हैं, जो पिछले साल राहुल गाँधी के इस्तीफे बाद उनसे इसे वापस लेने की चिरौरी कर रहे थे। मान-मनौव्वल के बाद भी जब वे नहीं माने तो अध्यक्ष चुनने के नाम पर सोनिया गाँधी के तौर पर अंतरिम अध्यक्ष चुन लिया। जबकि उस समय राहुल ने स्पष्ट शब्दों में परिवार के बाहर के किसी सदस्य को पार्टी का अध्यक्ष चुनने की पैरोकारी थी।

लेकिन, पूरी पार्टी ने ही इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई। स्पष्ट है कि कॉन्ग्रेस में किसी को गैर गाँधी नहीं चाहिए। सबके निजी हित हैं और इसी से प्रेरित हो वे सक्रिय होते हैं। मसलन, मल्लिकार्जु्न खड़गे का राज्यसभा में होना गुलाम नबी आजाद से लेकर आनंद शर्मा तक के हित प्रभावित करता है। सो, आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि 23 नेताओं में आजाद का भी नाम है।

जवाहर लाल नेह​रू ने कहा था, “तेजी से बदलती दुनिया में दिमाग के जड़ हो जाने और मुगालते में रहने से ज्यादा खतरनाक कोई चीज नहीं है।” 2014 और 2019 के चुनावी सफाए ने कॉन्ग्रेस के दिमाग को ही जड़ नहीं किया है, बल्कि जमीन पर भी उसका जड़ साफ हो चुका है। पर चूॅंकि कॉन्ग्रेसियों से बेहतर मुगालते में रहने की कला कोई जानता नहीं तो समय-समय पर पार्टी-संगठन के नाम पर आपस में ही हुतूतू खेल वे जड़ की ओर लौट जाते हैं।

या जैसा कि प्रवीण झा लिखते हैं, “मेरे दफ्तर में एक बुजुर्ग हैं, लोग उम्र का सम्मान देते हैं और जब कभी उनको अपने सम्मान में कमी या फिर कोई खरोंच लगती तो वे कहने लगते- मैं छोड़ दूॅंगा सब, अपना देखे कंपनी! इससे थोड़े दिन के लिए फिर से लोग उनको भाव देने लगते।”

यह भाव पाने से ज्यादा परिवार के प्रति वफादारी साबित करने में बीस पड़ने का खेल है। मौका मिले तो मुखौटा बनने की रेस में सबसे आगे होने की दौड़ है।

नरेंद्र मोदी विरोध का इमरान खान को इनाम, ‘The Muslim 500’ ने दिया मैन ऑफ द ईयर का खिताब

जॉर्डन बेस्ड पब्लिकेशन, The Muslim 500 ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को ‘मैन ऑफ द ईयर’ घोषित किया है। विवादास्पद अमेरिकी कॉन्ग्रेस की सदस्य रशीदा तलीब को ‘वुमन ऑफ द ईयर’ का सम्मान दिया है। इसके अलावा, इमरान खान को दुनिया के 16वें सबसे प्रभावशाली मुस्लिम के रूप में भी नामित किया गया है।

रशीदा तलीब को पुरस्कृत करते हुए पब्लिकेशन ने कहा, “उन्होंने अपने पद की शपथ कुरान पर हाथ रखकर ली। यद्यपि वह अपना पहला कार्यकाल निभा रही हैं, लेकिन वह निश्चित रूप से सबसे अधिक लोकप्रिय सदस्यों में से एक हैं। खास तौर पर राष्ट्रपति ट्रम्प के कारण, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से उन पर और तीन अन्य कॉन्ग्रेस वुमन पर अमेरिका में नफरत फैलाने का आरोप लगाया और साथ ही कहा कि वे ‘जहाँ से आए थे, वहाँ वापस जाएँ’।”

इससे लगता है की रशीदा तलीब को मुख्य रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के विरोध के कारण सम्मानित किया गया है। पब्लिकेशन की तरफ से कहा गया है कि सितंबर 2019 में रशीदा ने ट्रंप के खिलाफ महाभियोग का आह्वान किया। उन्होंने भारी दबाव के सामने काफी जोश और गरिमा दिखाई है और इसने उन्हें दुनिया भर में एक प्रेरणा बना दिया है।

इसी तरह, इमरान खान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करने की वजह से पुरस्कार दिया गया प्रतीत होता है। भारत के साथ शांति स्थापित करने के उनके कथित प्रयासों की सराहना करते हुए, द मुस्लिम 500 ने कहा, “जैसा कि इमरान खान को पता है, यह वह भारत नहीं है, जो हम में से बहुत से लोग याद करते हैं और सोचते हैं। भारत के नाम पर हम महात्मा गाँधी, नेहरू के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस पार्टी या गाँधी परिवार और उनके दल के बारे में सुनते थे।”

आगे कहा गया, “भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री और उनकी सत्ताधारी पार्टी, जिसने कॉन्ग्रेस शासन को समाप्त कर दिया, उसे हिंदू वर्चस्ववादी आंदोलन- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने आकार दिया है। मोदी और उनके कई मंत्री इस आंदोलन के सदस्य बने हुए हैं, जिन्हें हिंदू धार्मिक फासीवाद के रूप में वर्णित किया जा सकता है।”

पब्लिकेशन ने कहा है कि इमरान खान ने ऐसे लोगों के साथ कोशिश की, जिनकी शांति में दिलचस्पी नहीं है। ऐसे में अब खान के प्रयासों पर वैश्विक राय बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए, ताकि आरएसएस के नेतृत्व में भारत वैश्विक तौर पर अछूत बन सके।

‘मैं सीएम कैंडिडेट नहीं’: पूर्व CJI रंजन गोगोई ने असम में बीजेपी का चेहरा होने के दावों को किया खारिज

पूर्व न्यायाधीश रंजन गोगोई को लेकर विपक्ष ने दुष्प्रचार अभियान छेड़ रखा है। इसी कड़ी में आज दावा किया गया कि वे असम के अगले विधानसभा चुनावों में भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। इंडिया टुडे से बातचीत में गोगोई ने इसका खंडन किया है। इससे पहले बीजेपी भी इन दावों को नकार चुकी है।

पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “मेरा कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है और न ही मैं चुनाव लड़ने की इच्छा रखता हूँ। किसी ने भी मुझसे इस तरह की संभावनाओं का ज़िक्र नहीं किया है।” इसके अलावा उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्यसभा की सदस्यता स्वीकार करने का यह मतलब नहीं है कि वह राजनीति में शामिल होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि सदन अपने विचार रखने का माध्यम है, यहाँ सदस्यों को अपनी बात कहने की पूरी स्वतंत्रता है। यही कारण था कि मैंने राज्यसभा का प्रस्ताव स्वीकार किया। इसका राजनीति या चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है।

दरअसल असम के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता तरुण गोगोई ने कहा था, “भाजपा राम मंदिर के फैसले की वजह से रंजन गोगोई से बहुत खुश है। नतीजतन मुख्य न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें राज्यसभा के लिए निर्वाचित किया। वह (रंजन गोगोई) राज्यसभा के प्रस्ताव को ठुकरा भी सकते थे, लेकिन उन्होंने सक्रिय राजनीति के लालच में ऐसा नहीं किया।”

इसके अलावा उन्होंने कहा था, “मैंने सूत्रों से सुना था कि भाजपा के मुख्यमंत्री पद के दावेदारों की सूची में रंजन गोगोई का नाम सबसे आगे है। इस बात की पूरी उम्मीद है कि असम के आगामी विधानसभा चुनावों में पूर्व मुख्य न्यायाधीश भाजपा के मुख्यमंत्री प्रत्याशी हो सकते हैं।”

इनका जवाब देते हुए गोगोई ने कहा, “मैं अपनी मर्ज़ी से राज्यसभा का सदस्य निर्वाचित किया गया हूँ। यह एक ज़रिया है लोकतांत्रिक मंच पर अपना नज़रिया रखने का और इसकी वजह से मैं नेता नहीं बन जाता हूँ।” उन्होंने कहा यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोगों को यह भी नहीं पता कि राज्यसभा का सदस्य निर्वाचित होना और किसी राजनीतिक दल से चुने जाने पर सदन का सदस्य बनना अलग-अलग बात है।  

इससे पहले असम की भाजपा इकाई ने कॉन्ग्रेस नेता के दावों को मनगढ़ंत और झूठा बताया था। असम भाजपा के अध्यक्ष रंजीत कुमार दास ने कहा, “जब लोग बूढ़े हो जाते हैं तब वह इस तरह की निरर्थक बातें करने लगते हैं। हम तरुण गोगोई के बयान को इस श्रेणी में ही रखना चाहते हैं। मैं कई मुख्यमंत्रियों से पहले मिल चुका हूँ लेकिन तरुण गोगोई जैसी बेबुनियादी बातें कोई और नहीं करता है। उनकी इस बात में बिलकुल भी सच्चाई नहीं है। न जाने किस आधार पर उन्होंने इतना बड़ा दावा कर दिया।”    

गणपति की वे मूर्तियाँ… बहरीन में बुर्का वाली ने जिन्हें तोड़ा, दिव्य ने उन्हें घर में स्थापित कर किया विसर्जित

पिछले हफ्ते बहरीन के सुपरमार्केट में संप्रदाय विशेष की एक महिला का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वो गणपति बप्पा की मूर्तियों को तोड़ रही थी। इससे हिंदू समुदाय में खासी नाराजगी देखने को मिली थी। ताजा जानकारी के मुताबिक भारतीय समुदाय के दिव्य पांडे ने उन विखंडित मूर्तियों का विसर्जन कर दिया है, जिसके वो हकदार थे।

ऑपइंडिया से बात करते हुए, दिव्य पांडे ने कहा कि वायरल वीडियो को देखने के बाद वे उसे अपने दिमाग से निकाल नहीं सके। वह कहते हैं, “यह चौंकाने वाला था, क्योंकि बहरीन अन्य धर्मों के सम्मान के मामले में बहुत खुले विचारों वाला है। बहरीन के लोग बहुत मिलनसार हैं। इसलिए बुर्का पहनी महिला ने जो कुछ किया वह देखना विचित्र था।”

दिव्य पांडे ने कहा कि वे किसी भी तरह से अपने घर पर गणपति की मूर्ति लाने की योजना बना रहे थे। इसलिए उन्होंने सुपरमार्केट को फोन किया और उन मूर्तियों को खरीदने की पेशकश की। उन्होंने कहा, “वे मूर्तियाँ स्थापना और विसर्जन की पात्र थीं। जब मैंने वीडियो देखा तो मैंने तुरंत सुपरमार्केट को पहचान लिया क्योंकि यह मेरी घर के बहुत पास है। मैंने वहाँ जाकर उनसे निवेदन किया कि मैं मूर्तियों की स्थापना और विसर्जन के लिए खरीदना चाहता हूँ। हालाँकि, कानूनी मामले के कारण, वे उन्हें मुझे देने में सक्षम नहीं थे।”

गणपति की प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाते दिव्य पांडे

इसके बावजूद दिव्य पांडे लगातार कोशिशों में जुटे थे। गणेश चतुर्थी पर, उनके पास फोन आया कि चूँकि अब कानूनी कार्यवाही में सबूत के रूप में मूर्तियों की आवश्यकता नहीं है, इसलिए वह आकर उन्हें ले जा सकते हैं। दिव्य पांडे कहते हैं, “मैं इंतजार नहीं कर सकता था। मैं जल्दी से अपनी कार में बैठा और गणपति बप्पा को घर लाने के लिए चल पड़ा। उन्होंने कहा कि किसी को खंडित मूर्ति की स्थापना नहीं करनी चाहिए। हालाँकि मैं इसे खंडित मूर्ति नहीं मानता। क्योंकि उन्हें जान-बूझकर तोड़ा गया। मैं उन्हें घर ले आया, स्थापना किया, छोटी सी पूजा की और फिर विसर्जन के साथ गणपति बप्पा को अलविदा कहा।”

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते सोशल मीडिया पर एक सुपरमार्केट में एक बुर्का पहने महिला की भगवान गणेश की मूर्तियों को तोड़ने का वीडियो वायरल हुआ था। कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने ट्विटर पर मूर्तियों को तोड़ने वाली महिला की सराहना की थी। बाद में बहरीन पुलिस ने गणपति की मूर्तियों को तोड़ने वाली महिला के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 54 वर्षीय महिला पर एक समुदाय की धार्मिक भावनाओं और अनुष्ठानों का अपमान करने का आरोप लगाया गया है।

बहरीन के आंतरिक मंत्रालय ने कहा कि पुलिस ने एक दुकान को नुकसान पहुँचाने और एक संप्रदाय और उसके अनुष्ठानों को बदनाम करने के लिए महिला के खिलाफ कानूनी कदम उठाए हैं।

बाबू मोशाय ये ‘वामपंथी रसभरी’ है, हर मुद्दे पर ‘विशेषज्ञ’ बनती और फिर ट्रोल होती है

ट्विटर पर एक ट्रेंड चल रहा था देश की तथाकथित अभिनेत्री स्वरा भास्कर के नाम का! ट्विटर पर किसी हैशटैग के ट्रेंड करने की अमूमन दो ही वजहें होती हैं। पहला या तो कुछ बहुत अच्छा होता है या बहुत बुरा। दो दिन पहले यानी 21 अगस्त को एक वेब सीरीज़ आई ‘फ्लेश’ जिसमें स्वरा भास्कर ने मुख्य भूमिका निभाई है। तमाम लोगों को यह भ्रम हो सकता है कि इस वेब सीरीज़ की चर्चा के चलते स्वरा भास्कर का नाम ट्रेंड कर रहा होगा।

लेकिन अफ़सोस ऐसा नहीं है। कम से से कम आभासी दुनिया की जनता यानी नेटीजन्स के ट्वीट देख कर ऐसा बिलकुल नहीं कहा जा सकता। एक ट्विटर यूज़र ने स्वरा भास्कर का ज़िक्र करते हुए ट्वीट किया है। हालॉंकि वह ट्वीट कम और मीम ज़्यादा है। इसका मतलब यह है कि स्वरा हर मुद्दे की विशेषज्ञ बन जाती है। भले मौसम हो या कुछ और। आप किसी भी मसले पर स्वरा की राय से वंचित नहीं रह सकते।

ऐसे कुछ और ट्वीट हैं जो स्वरा भास्कर को उनके अतिउत्साही रवैए के लिए अद्भुत तरीके से ट्रोल करते हैं। एक का तो कहना है कि स्वरा भास्कर भले कितनी बड़ी जानकार क्यों न हों, लेकिन लोगों को उनकी बातों में कोई रूचि ही नहीं है। लोगों को सुनना ही नहीं है कि स्वरा क्या कहना चाहती है।

यह ट्वीट कहने और सुनने के दायरे से बाहर है। इसे देख कर पूरी बात एक झटके में समझी जा सकती है।  

अब वापस लौटते हैं मूल प्रश्न पर, क्या वाकई स्वरा भास्कर हर मुद्दे पर विशेषज्ञ/एक्सपर्ट बन जाती हैं? यह सार्वभौमिक सत्य है कि एक इंसान (अगर वह इंसान है तो) सब कुछ नहीं जान सकता। लेकिन स्वरा भास्कर इसके उलट हैं। पिछले कुछ सालों की ऐसी तमाम घटनाएँ हैं। जिन्हें देखने-सुनने के बाद किसी के लिए भी समझना आसान होगा कि कैसे स्वरा भास्कर हर मुद्दे पर “मेरे को सब पता है” का नारा लगाने लगती हैं।

पहली घटना है इस साल के फरवरी महीने की। देश भर में सीएए और एनआरसी को लेकर बहस जारी थी। एबीपी न्यूज़ ने इस मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए स्वरा भास्कर को बतौर पैनालिस्ट बुलाया। यहीं से सारा फसाद शुरू हुआ, स्वरा एक साँस में कहे जा रही थीं कि सीएए लागू हो गया है। इसके बाद एनआरसी भी लागू हो जाएगा, एनपीआर पर भी बहस शुरू हो ही गई है। इसके बाद पैनल की मॉडरेटर ने स्वरा भास्कर को टोका और साफ़ किया कि एनपीआर का नागरिकता से कोई लेना देना नहीं है, यह सीएए से पूरी तरह अलग है। एनपीआर का संबंध जनगणना से है और यह साल 2010 में भी हुआ था।

स्वरा भास्कर ने इतने के बाद में साँस नहीं ली। तब मॉडरेटर ने उनसे सवाल किया, “क्या आपने एनपीआर या एनआरसी का ड्राफ्ट पढ़ा है?” इस पर स्वरा फिर अपनी बात दोहराने लगीं कि इस सरकार ने लोगों पर सब कुछ थोपा है। यहाँ तक कि स्वरा ने सीएए से जुड़े सवालों का जवाब तक नहीं दिया। जिस क़ानून के विरोध में किए गए हर बड़े आयोजन में पूरी सक्रियता के साथ नज़र आई थीं।  

समय में थोड़ा और पीछे चलते हैं खुद के पैर पर अतिउत्साह की कुल्हाड़ी मारने की दूसरी घटना की ओर। हर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्वरा भास्कर का एक वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में स्वरा ने एक बार फिर एक साँस में कहा “मेरे पास जन्म-प्रमाण पत्र नहीं है, बाप-दादा की ज़मीन के कोई कागज़ नहीं हैं। मेरा नाम छूट गया एनआरसी से तब।” वीडियो के दूसरे हिस्से में स्वरा की बातों का जवाब दिया सद्गुरु ने।  

उन्होंने कहा यह सभी के लिए है, हम सभी को अपना पंजीयन कराना पड़ेगा। इसके लिए सरकार ने विकल्प दिए हैं आप अपना जन्म-प्रमाण पत्र दिखाइए। वह नहीं है तो स्कूल के दस्तावेज़ दिखाइए। वह भी नहीं है तो अपना राशन कार्ड दिखाइए अगर किन्हीं कारणों से वह भी नहीं है तो मतदाता पहचान-पत्र दिखाइए। इसके बाद उन्होंने अंग्रेजी में कहा अगर आपके पास यह भी नहीं है “then who the hell are you।” 

स्वरा भास्कर की ट्रोलिंग सिर्फ आभासी दुनिया यांनी सोशल मीडिया तक नहीं सीमित है। अक्सर जनता उन्हें आमने-सामने भी ट्रोल कर देती है। बात है साल 2019 के मई महीने की जिस दौरान स्वरा भास्कर बेगूसराय से चुनाव लड़ रहे कन्हैया कुमार का समर्थन करने गई थीं। वह हवाई अड्डे पर पहुँची कि तभी एक युवक उनके नज़दीक आया। स्वरा को लगा कि वह सेल्फी लेना चाहता है लेकिन उसने छोटा सा वीडियो बनाया। और वीडियो में कहा चाहे जितना बोल लो “आएगा तो मोदी ही।” फिर क्या था? ट्विटर से लेकर फेसबुक तक और फेसबुक से लेकर इन्स्टाग्राम तक हर जगह वीडियो वायरल हुआ।  

19 जून 2020 को स्वरा भास्कर की एक वेब सीरीज़ आई थी ‘रसभरी’। नाम से अंदाजा लगाया जाता है इसमें क्या कुछ होगा या कहें क्या कुछ हो सकता है। इस वेब सीरीज़ की तारीफ़ करते हुए स्वरा भास्कर के पिता जी ने एक ट्वीट किया। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा, चाहे छोटा पर्दा हो या बड़ा पर्दा। स्वरा का बहुआयामी अभिनय हर जगह उम्दा है। स्वरा ने जवाब दिया “लेकिन आप यह वेब सीरीज़ मेरे साथ बैठ कर मत देखिएगा।” 

एक बार फिर ट्विटर पर स्वरा की ट्रोलिंग शुरू हो गई। एक व्यक्ति ने तो यहाँ तक लिख दिया “जब इतनी बुरी एक्टिंग करती हो कि पिता जी को भी देखने में शर्म आ जाए। तो अभिनय छोड़ क्यों नहीं देती हो? कम से कम दर्शक तो प्रताड़ित होने से बच जाएँगे।” बाकी इस वेब सीरीज़ को रेटिंग भी कुछ ऐसी ही मिली थी कि नेटीजन्स न चाहते हुए भी ऐसी बातें कहने के लिए मजबूर हो जाते हैं।  

यह तो कुछ मौके थे जिनका ब्यौरा मौजूद है। इसके अलावा ऐसे न जाने कितने किस्से और मौके होंगे जब स्वरा भास्कर को यूँ ही ट्रोल किया जाता होगा। या स्वरा भास्कर के नाम का हैशटैग ट्विटर पर ट्रेंड करता होगा, जिसकी वजह कुछ ऐसी ही होती होगी। इस बात से भले कौन असहमत हो सकता है कि एक इंसान सब कुछ नहीं जान सकता है। भले देश के संविधान का अनुच्छेद 19 अभिव्यक्ति की आज़ादी देता है।  

लेकिन उसका मतलब यह नहीं कि सामाजिक राजनीतिक मुद्दों को बिना जाने उनके बारे में कुछ भी कहा जाए। विरोध देश के लोकतंत्र का सबसे सकारात्मक पहलू है। यानी लोकतंत्र में विशेषज्ञ बनना भी आसान है लेकिन बिना तर्क, तथ्य और दलीलों के विरोध करना या विशेषज्ञ बनने का क्या अर्थ? खैर ट्रोलिंग जारी है और इसकी रफ़्तार से इतना साफ़ है कि यह जारी रहेगी। आखिर हर मुद्दे पर विशेषज्ञ बनने की कोई न कोई कीमत तो होगी ही।         

आखिर क्यों अपनी माँ का नाम बदलवाना चाहती हैं महबूबा मुफ्ती की बेटी ?

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती की छोटी बेटी अपने पासपोर्ट में माँ का नाम बदलकर महबूबा सैयद कराना चाहती है। इस संबंध में महबूबा मुफ्ती की बेटी इर्तिका जावेद ने एक स्थानीय न्यूज पेपर में नोटिस भी प्रकाशित करवाया है।

इस नोटिस में लिखा गया है, “मैं इर्तिका जावेद, पुत्री जावेद इकबाल शाह, निवासी फेयरव्यू हाउस गुपकर रोड, श्रीनगर, कश्मीर-190001, अपने पासपोर्ट में अपनी माँ का नाम महबूबा मुफ्ती से बदलकर महबूबा सैयद कराना चाहती हूँ।”

नोटिस में आगे लिखा गया है, “अगर किसी को इससे संबंधित कोई आपत्ति है, तो कृपया सात दिनों की अवधि के भीतर संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं। उसके बाद कोई आपत्ति दर्ज नहीं की जाएगी।”

बता दें कि महबूबा मुफ्ती ने साल 1984 में जावेद इकबाल से शादी की थी, लेकिन यह शादी लंबे समय तक नहीं चली और 1987 में दोनों अलग हो गए। फिलहाल, दोनों साथ नहीं रहते हैं। महबूबा और जावेद की दो बेटियाँ हैं, जिनका नाम इर्तिका और इल्तिजा है। 

महबूबा की बड़ी बेटी इल्तिजा अपनी माँ के नक्शेकदम पर चली और उसने अपने नाम के पीछे मुफ्ती लगाने का फैसला किया। इर्तिका अपने पिता के काफी करीब है और उसने पिता के सरनेम को चुना।

खैर राजनीति की बात करें तो इन दिनों महबूबा मुफ्ती अपने आधिकारिक आवास में नजरबंद हैं। पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की नजरबंदी को सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत तीन महीने के लिए बढ़ा दिया गया। अब वे 5 नवंबर तक हिरासत में रहेंगी। उल्लेखनीय है कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से ही वे नजरबंदी में हैं। पिछले महीने पूर्व मंत्री और पीपुल्स काॉन्फ्रेंस प्रमुख सज्जाद गनी लोन को 360 दिनों बाद नजरबंदी से रिहा कर दिया गया।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधान खत्म करने के दिन 5 अगस्त 2019 को सरकार ने तमाम राजनेताओं को हिरासत में लिया था। इस दौरान पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, डॉ. फारूख अब्दुल्ला सहित कई अन्य राजनेता भी हिरासत में लिए गए थे। बीते दिनों उमर, फारूक समेत कई नेताओं को रिहा कर दिया गया था, लेकिन महबूबा व शाह फैसल अब भी हिरासत में ही हैं।

अब्बू अनजान-बीवी को करतूतों का भान, चाहिए माफी: युसूफ जैसा ही होता है आतंकी का ‘आदर्श’ परिवार

करीम। बेचारा करीम। वो तो गाड़ी से जा रहा था, लेकिन आतंकरोधी दस्ते ने घेर कर मार डाला। वो करीम, जिसने ISIS आतंकियों के कई ऑफर्स को ठुकरा दिया था, उसे इसी संगठन का आतंकी पेंट कर दिया गया। करीम की एक गर्लफ्रेंड भी है, जो सच्चाई का पता लगाती है। आतंकवाद में बहन-बीवी वाला तड़का लगता है और तैयार हो जाती है एक उम्दा कहानी।

फ़िल्मी दुनिया और वास्तविकता: आतंकियों को ‘आम आदमी’ बनाने की कहानी

अमेज़न प्राइम की एक बड़ी ही लोकप्रिय सीरीज आई थी, ‘द फॅमिली मैन’, इस घटना को उसी में दिखाया गया है। ये दिखाता है कि कैसे एक खा समझब का व्यक्ति ‘बेचारा’ किसी मंत्री की पार्टी के खाने में बीफ मिलाने जा रहा था और उसके साथी ने बस गोली क्या चला दी, सुरक्षा एजेंसियों ने उसका सम्बन्ध ISIS से घोषित कर दिया। इस ऑपरेशन को अंजाम देने वाला अधिकारी ये सोच-सोच कर शोकाकुल हो जाता है।

हाथीराम चौधरी एक ऐसा पुलिस अधिकारी है, जिसे उसके वरिष्ठ अक्षम मानते हैं। कुछ लोगों की गिरफ़्तारी का मामला उसे जाँच करने के लिए दिया जाता है लेकिन अचानक से मामला उसके हाथ से ले लिया जाता है और सीबीआई इसमें घुसती है। सीबीआई तुरंत उन ‘साधारण अपराधियों’ को आईएसआईएस का बता कर मामले को रफा-दफा करती है। इन अपराधियों की भी गर्लफ्रेंड है और ‘उच्च जाति’ के क्रूर अत्याचार की पुरानी कहानी है।

ये कहानी दिखाई गई है अमेज़न प्राइम की ही एक दूसरी सीरीज ‘पाताल लोक’ में, जिसमें दिखाया गया है कि सीबीआई कितनी जल्दी-जल्दी मामले को सुलझाने के लिए किसी अपराध में किसी को बचाने के लिए ISIS से जोड़ देती है। आतंकियों का बाप होता है, भाई-बहन-बीवी-गर्लफ्रेंड सब होते हैं, वो भी आम आदमी हैं- ये सब अब फिल्मों से निकल कर वास्तविक दुनिया में आ गया है और कुछ पत्रकार इसके सिद्धहस्त हैं।

लेकिन, वास्तविकता ये है कि असलियत इसके एकदम उलट है। यहाँ किसी करीम की गर्लफ्रेंड ये साबित करने के लिए नहीं संघर्ष करती है कि उसका मृत बॉयफ्रेंड आतंकी नहीं था, बल्कि यहाँ किसी अशफाक की बीवी अपने ‘जान’ को एक हिन्दू नेता की क्रूर हत्या के बाद वापस आने के लिए बड़े प्यार से बोलती है। असलियत में किसी युसूफ की बीवी अपने आतंकवादी पति के गुनाहों को माफ़ करने को कहती है।

बीवी, अब्बू और भाई: आतंकी को बचाने के लिए सब आ जाते हैं साथ

ये सब बावजूद इसके होता है कि उसे अपने शौहर की करतूतों के बारे में सब कुछ पता है। दिल्ली से गिरफ्तार किया गया युसूफ खान राम मंदिर भूमिपूजन का बदला लेने के लिए दिल्ली में आतंकी हमला करने वाला था। लेकिन IED विस्फोटकों के साथ ही पकड़ा गया। इसके बाद उसकी बीवी कहती है कि उसका शौहर लगभग दो साल से थोड़ा-थोड़ा कर के सामान (बारूद) लाता था और एक खाली बक्से में रखता था।

बीवी ये भी कहती है कि उसे इसकी कोई जानकारी नहीं है कि इसकी ट्रेनिंग उसने मोबाइल से ली या किसी और से और युसूफ ये सब किसके लिए कर रहा था। उसकी बीवी कहती है कि उसे बाबरी मस्जिद से कोई लगाव नहीं था। अफ़सोस जताने की बात करते हुए उसने कहा कि युसूफ उसके ऊपर सख्ती कर रहा था कि ये सब किसी को भी मत बताना। इसके बाद फिर वही ‘इमोशनल अत्याचार’ शुरू होता है।

ISIS के आतंकी युसूफ खान की बीवी अपने 4 बच्चों की बात करते हुए पूछती है कि वो उन्हें लेकर कहाँ जाएगी? वो कहती है कि उसके शौहर की गलती को माफ़ कर दिया जाए। ये काफी अजीबोगरीब और हास्यास्पद है। दुनिया के सबसे खूँखार आतंकी संगठन से जुड़े आतंकवादी, जो हिन्दुओं के प्रति घृणा के कारण खतरनाक विस्फोटकों के साथ हमले की तैयारी में धरा गया, उसे माफ़ करने की अपील उसकी बीवी कर रही है, जिसे उसकी सच्चाई पता थी।

आतंकियों के छोटे-छोटे बच्चे, गरीब माँ-बाप, सीधी-सादी गर्लफ्रेंड, मासूम बीवी, उसकी दर्दनाक कहानी और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा उसके साथ की गई ‘बर्बरता’- ये सब फिल्मों में कहानियों के लिए अच्छे मटेरियल होते हैं और वास्तविकता में मीडिया का प्रपंच होता है। हाँ, ये बिकता दोनों जगह है। युसूफ की बीवी को ये सब पता है। इसीलिए, वो अपने आतंकी पति के आतंकवाद को माफ़ करने की बात इतनी आसानी से कर देती है।

और पत्नी ही क्यों, ऐसे मामलों में अब्बू भी क्यों पीछे रहे? उत्तर प्रदेश स्थित बलरामपुर के इस ISIS आतंकी अबू युसूफ खान का अब्बा कहता है कि उसके बेटे की रीढ़ की हड्डी खिसकी हुई है, जिसका 2 साल से लखनऊ में इलाज चल रहा है। उसका कहना है कि वो शुक्रवार को लखनऊ अपने मामा के बेटे की किडनी के इलाज के लिए गया था। उसने अपनी बहन को बताया कि वो उसके घर पर रुकेगा पर वहाँ पहुँचा नहीं और उसका फोन बंद आने लगा।

फिल्म ‘वेलकम’ में भी एक किरदार होता है, जो मजनूँ शेट्टी के ‘बता इसे’ बोलते ही ‘मेरी एक टाँग नकली है…’ वाली बात दोहराने लगता है। आप याद कीजिए कमलेश तिवारी का मामला। ‘स्क्रॉल’ ने तो कमलेश तिवारी के दो हत्यारों के अब्बू खुर्शीद आलम का दो कमरे का छोटा फ्लैट है, ये तक बता दिया। उसने दावा किया था कि ‘बेचारे’ परिवार का आज तक पुलिस का सामना नहीं हुआ, लेकिन अब उन्हें बताया जा रहा है कि उनका दो बेटा आतंकी है।

उस बुजुर्ग आदमी को ये तक पता था कि प्रोपेगेंडा कैसे खेलना है, जैसे उसे कोई ट्रेनिंग दी गई हो। 75 साल के उस आदमी ने पूछा था कि कमेलश तिवारी की माँ के आरोपों के आधार पर भाजपा नेता को हत्या के आरोप में क्यों नहीं गिरफ्तार किया जा रहा है? इसके बाद ‘स्क्रॉल’ जैसा मीडिया संस्थान है ही इन चीजों को आगे बढ़ाने के लिए। बस यही किस्सा ISIS आतंकी युसूफ के अब्बू का भी है।

वो कहता है कि उसने अपने बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में लिखवाई थी। वो बताता है कि उसे कुछ पता नहीं था, वरना वो उसको रोकता, घर से निकाल देता। अब तो जो भी करेगी पुलिस करेगी। साथ ही वो ये भी कहता है कि वो माफ़ी चाहता है। उसकी माँग है कि एक मर्तबा उसे माफी दे दें और वो दोबारा करे तो कुछ भी कर दीजिएगा। ये अजीब बयान है क्योंकि एक तरफ वो उसे घर से निकालने की बात करता है, दूसरी तरफ प्रशासन से कहता है कि उसे छोड़ दो।

ये अच्छी-अच्छी बातें हैं, जिन्हें मीडिया तुरंत लपक लेता है और दिखाता है कि कैसे एक आतंकी का बाप अपने बेटे के आतंकी निकल जाने के बाद उसे घर से निकालने की बातें करता है और एक अच्छा नागरिक का धर्म निभाता है। भले ही सच्चाई इससे कोसों दूर हो। जहाँ बीवी को सब पता है, अब्बू को कुछ नहीं पता। लेकिन हाँ, माफ़ी दोनों चाहते हैं। इस मामले में भाई इन दोनों के बीच में है।

ISIS आतंकी युसूफ खान का भाई कहता है कि उसे ISIS के झंडे की पहचान नहीं है पर रात को झंडा देखा। काले रंग के झंडे पर सफेद रंग से अरबी में ‘अल्लाह हू अकबर ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुन रसूलुल्लाह‘ लिखा था। आकिब ने बताया कि उसका भाई सऊदी और अन्य जगहों पर रहा था। ये बात पुलिस ने भी बताई है। सऊदी में कमाने के बाद वो आतंकियों के संपर्क में आया था, जहाँ से वो सीधे टॉप कमांडर्स से बातें करता था।

आतंकियों के प्रति सब कुछ जानते हुए भी उनके परिवारों की सहानुभूति को समझने के लिए एक बार फिर से कमलेश तिवारी वाली घटना को देखते हैं। लीक हुए फोन कॉल में बीवी ने अशफाक को ‘जान’ कहते हुए घर आने की गुजारिश की थी और कहा था कि वो उसके बाद परिवार उसे बचाने के लिए बाकी प्रक्रिया करेगा। वही फोन पर अब्बा अल्लाह का बार-बार नाम लेते हुए कहता है कि सब ठीक होगा।

युसूफ खान भी अलग नहीं है। हिन्दुओं के प्रति घृणा उसके मन में भी थी, क्योंकि वो राम मंदिर का बदला लेना चाहता था। साथ ही उसने अपने गाँव के कब्रिस्तान में बम का ट्रायल भी किया था। वो अंतररष्ट्रीय आतंकियों के संपर्क में था। उसके पास खतरनाक विस्फोटक थे। कोई बड़ी हस्ती उसके निशाने पर थी। उसकी फिदायीन हमले की योजना थी। क्या ऐसा आतंकी माफ़ी के लायक है?

असल में समस्या ये है कि जब तक ये लोग पकड़ में नहीं आते हैं, तब तक सब एक होते हैं। जैसे ही इनकी करतूत पकड़ी जाती है और इनके पास क़ानून की कार्रवाई से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं होता, इन्हें गरीब का बेटा बना दिया जाता है। जब ये मारे जाते हैं तो कहना ही क्या… ये गणित के शिक्षक भी हो सकते हैं। वामपंथियों का ये फेवरेट सब्जेक्ट है। उन्हें आतंकी के आतंक के अलावा बाकी सभी चीजों को उछालने से मतलब होता है, क्योंकि उनका लगाव तो आतंकी के साथ होता है, लेकिन दुनिया के सामने उसे बचाने के लिए अन्य चीजें सामने लानी होती है।

ISIS आतंकी युसूफ खान की गिरफ़्तारी: अब तक क्या-क्या हुआ?

ज्ञात हो कि ISIS आतंकी अबू युसूफ खान को दिल्ली के करोलबाग और धौलाकुआँ के बीच रिज रोड इलाके से गिरफ्तार किया गया था। उसने पुलिस पर फायरिंग भी की थी। पुलिस ने उस पिस्टल को भी जब्त कर लिया है, जिसका इस्तेमाल कर उसने गोली चलाई थी। गिरफ्तार करने से पहले पुलिस और आतंकी के बीच कुछ देर तक शूटआउट भी चला। उसे आधी रात 12 बजे के करीब गिरफ्तार किया गया। 

ISIS आतंकी अबू युसूफ खान के घर से दो मानव बम जैकेट, विस्फोटक और भड़काऊ साहित्य के अलावा पत्नी तथा चार बच्चों के पासपोर्ट बरामद करने में पुलिस ने सफलता पाई है। बलरामपुर में तलाशी के बाद देर रात दिल्ली पुलिस आतंकी को लेकर वापस राष्ट्रीय राजधानी के लिए निकल गई। उससे जुड़े 3 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पूरी यूपी अलर्ट पर है।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने शुक्रवार देर रात एनकाउंटर के बाद वैश्विक आतंकी संगठन ISIS के अबू यूसुफ खान को गिरफ्तार किया था। अब जो जानकारी सामने आई है उससे पता चला है कि वह लोन वुल्फ अटैक की फिराक में था। निशाने पर कोई बड़ी हस्ती थी। एक आतंकी के फरार होने की बात भी कही जा रही है। अबू बाइक पर विस्फोटक लेकर दिल्ली में आतंकी हमले को अंजाम देने की कोशिश में था। पुलिस ने 15 किलो IED और कुकर बम बरामद किया था।

नेपाल से तीन पाकिस्तानी आतंकियों के घुसने की आशंका, बिहार में बॉर्डर पर हाई अलर्ट

सुरक्षा एजेंसियों ने 3 पाक आतंकियों के नेपाल के रास्ते भारत में घुसने की सूचना दी है। इसके बाद बिहार में नेपाल सीमा पर हाई अलर्ट जारी किया गया है। पूर्वी चंपारण के रक्‍सौल तथा सीतामढ़ी के बैरगनिया के पास सीमा पर चौकसी विशेष तौर पर बढ़ा दी गई है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताब़िक इसके मद्देनजर इंडो-नेपाल बॉर्डर पर विशेष सतर्कता के निर्देश दिए गए हैं। वहीं सीतामढ़ी के एसपी अनिल कुमार ने कहा है कि लॉकडाउन के कारण सीमा सील है। पूर्व से सुरक्षा सख्त है। ग्रामीण क्षेत्र के रास्तों पर सशस्त्र सीमा बल ( एसएसबी) के जवान तैनात हैं। सीमावर्ती थानों को सुरक्षा एजेंसियों से समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया गया है। 

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों खबर आई थी कि भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा बलों की कड़ी निगरानी के कारण अब ISI नेपाल के जरिए जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले की साजिश रच रही है। बताया गया था कि अब आतंकियों को नेपाल में मौजूद स्लीपर सेल के जरिए भारतीय सुरक्षा बलों पर हमले के निर्देश दिए जा रहे हैं।

वहीं राम मंदिर पर फैसला आने से तकरीबन 10 दिन पहले खबर आई थी कि अयोध्या में बड़े आतंकी हमले की साजिश रची जा रही थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों का एक जत्था घुस गया था, जो राम मंदिर मामले के बीच दहशत फैलाना चाहता था।

बताया गया कि नेपाल के रास्ते 7 आतंकवादी उत्तर प्रदेश में घुस चुके थे। ख़ुफ़िया सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा था कि ये सभी पाकिस्तानी आतंकवादी थे, जिन्हें अयोध्या में आतंक फैलाने के लिए भेजा गया था। सात में से पाँच आतंकियों की पहचान भी हो गई थी। पहचाने गए आतंकियों के नाम मोहम्मद याकूब, अबू हमजा, मोहम्मद शाहबाज, निसार अहमद और मोहम्मद कौमी चौधरी थे।

इसके अलावा पाकिस्तान, नेपाल के सहारे भारत में कोरोना फैलाने की भी साजिश रच रहा था। इसका पूरा प्लान जालिम मुखिया ने तैयार किया था, जो हथियारों का तस्कर होने के साथ ही नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी की राजनीति में भी सक्रिय था। जालिम की योजना भारत में नेपाल की सीमा से कोरोना पॉजिटिव लोगों की एंट्री कराने की थी। इसके लिए करीब तीन सौ लोग नेपाल के चंदनबसरा तथा खैरवा की मस्जिद और मदरसे में जमा किए गए थे। इनमें कुछ भारतीय थे, तो कुछ पाकिस्तानी थे।

नेपाली गर्लफ्रेंड वाले तारिक से लेकर कवर बिजनेस देखने वाले फिरोज तक: दाऊद इब्राहिम गैंग के 11 गुर्गों की पूरी डिटेल

हाल ही में ख़बर आई थी कि आतंकी दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में है, ऐसा खुद इस्लामी मुल्क ने स्वीकार किया है। इसके बाद पाकिस्तान अपने ही कहे से पलट गया। इधर ड्रग से क्राइम सिंडिकेट तक दाऊद इब्राहिम का काम देखने वाले उसके गैंग के आतंकियों की एक सूची ‘मिड डे’ ने समाचार एजेंसी IANS के हवाले से प्रकाशित की है, जिसे हम सूचीबद्ध तरीके से आपके समक्ष पेश कर रहे हैं।

  • डॉक्टर जावेद चुटानी: ये पाकिस्तानी है, जो दाऊद के साथ लगातार संपर्क में रहता है। वो एक बुकी है लेकिन रियल एस्टेट में खासी दिलचस्पी रखता है। दाऊद इब्राहिम के साथ इसका पारिवारिक रिश्ता भी है। वो कराची में उसी क्षेत्र में रहता है, जहाँ उसका आका। उसकी बेटी यूके में रहती है। वो भी यूके का नंबर यूज करता है।
  • अमीस इब्राहिम: ये दुबई के नंबर का इस्तेमाल करता है। जब छोटा शकील की बेटी की शादी के लिए होटल नहीं मिल रहा था तो इसी ने उसके लिए जुगाड़ करने का प्रयास किया था। उसने मुंबई के किसी चौधरी से इस बारे में बात की थी। काफी ज्यादा अतिथियों के कारण होटल बुकिंग में दिक्कतें आ रही थीं। वह मनी ट्रांजैक्शंस भी करता रहा है।
  • छोटा शकील: ये दाऊद इब्राहिम का सबसे क़रीबी गुर्गा है। वह पाकिस्तान में ही रहता है। कुछ दिनों पहले वह अपने आके के जन्मदिन पर किसी को इन्वाइट करते हुए सुना गया था। वो लगभग डी-कम्पनी के सभी सदस्यों से संपर्क में रहता है।
  • जावेद भाई: ये ज्यादातर मौकों पर दाऊद के साथ ही रहता है। दाऊद के व्यक्तिगत फ़ोन कॉल्स भी यही रिसीव करता है। उसे मोती भाई या जवार भाई के नाम से भी जानते हैं। ये दाऊद के बैंकिंग और पेमेंट्स की भी डीलिंग करता है। ये दाऊद के बनाए सोसाइटीज और अपार्टमेंट्स को देखता है। एक फोन कॉल में वो तारिक के साथ एक डील की बातें करता हुआ सुना गया था।
  • तारिक: दाऊद का ये गुर्गा दुबई में रहता है। वो छोटा शकील और गैंग के अन्य सदस्यों के साथ संपर्क में रहता है। वो दुबई में उसके बिजनेस को देखता है। 2014 में उसके एक फोन कॉल से पता चला था कि दाऊद का भाई अनीस शारजाह में है। वो भी छोटा शकील के बेटी की शादी के बारे में बात करते सुना गया था। उसकी एक नेपाली गर्लफ्रेंड है, जो फ़िलहाल मुंबई के एक ब्यूटी पार्लर में कार्यरत है। वो दाऊद को यूके के किसी मित्र (म्यूजिक डायरेक्टर्स नदीम?) की गिरफ़्तारी की सूचना देते हुए सुना गया था। उसने दाऊद के लिए टोयटा लैंडक्रूजर्स को खरीद कर पाकिस्तान भेजा था। ये गाड़ियाँ बुलेटप्रूफ हैं। तारिक का अस्सिस्टेंट अल्ताफ है।
  • इकबाल: ये दुबई और पाकिस्तान में कंस्ट्रक्शन का बिजनेस करता है। एक इंटर्सेप्टेड कॉल के अनुसार, उसने दाऊद इब्राहिम के घर की मरम्मत का काम कराया था और इसके लिए कश्मीर से मजदूर मँगाए गए थे। इसका घर भी शायद कराची में ही है और वो दाऊद से मिलता-जुलता रहता है। वो अफ्रीकन देशों में डी-कम्पनी का काम देख रहा है। आसिफ और मुस्तफा उसके बेटे हैं। वो पाकिस्तान में रहता है। उसकी बेटी का नाम सना है।
  • अहमद जमाल: दाऊद का करीबी, जो कराची में रहता है। 2014 में उसकी बेटी की शादी हुई थी। अगस्त 2014 में 2 दिन दाऊद ने उसे किसी शादी के फंक्शन में बुलाया था। वो एक भारतीय माजिद बाबा के संपर्क में भी रहता है।
  • फिरोज: दाऊद गैंग का अहम सदस्य, जो उसका कवर बिजनेस देखता है और देश-विदेश में कम्पनियाँ चलाता है। उसे तमिल, अरबी, हिन्दू और अंग्रेजी में बात करते सुना गया है, जिससे पता चलता है कि वो दक्षिण भारतीय है और काफी शिक्षित है। वो अफ्रीका से हीरे की स्मगलिंग करता है। मुंबई में उसके कॉन्टेक्ट्स हैं।
  • सिराज: दाऊद, छोटा शकील और तारिक के बीच एक कड़ी है और इन तीनों का करीबी है। वो दाऊद के जन्मदिन पर 650 लोगों की उपस्थिति वाली एक पार्टी के आयोजन की बातें करते हुए सुना गया था।
  • अहमद: छोटा शकील का आदमी जो व्यापारियों से रुपए वसूलता है। हाल ही में ये किसी कम्पनी में रुपए के हेरफेर के लिए कर्मचारियों से बात करते हुए सुना गया था।
  • फहीम: छोटा शकील के साथ कराची में रहता है। वो जवाहर और रमेश के बीच रुपयों के विवाद को थामने के लिए किसी श्याम केशवानी से संपर्क में था।

ज्ञात हो कि आतंकी फंडिंग की निगरानी रखने वाली संस्था एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने के लिए पाकिस्‍तान ने एक और कवायद की है। पाकिस्तान ने 88 प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों और हाफिज सईद, मसूद अजहर और दाऊद इब्राहिम समेत उनके आकाओं पर और तथाकथित कड़े वित्तीय प्रतिबंध लगाए हैं। यह पहली बार है जब पाकिस्‍तान ने खुले तौर पर स्‍वीकार किया है कि दाऊद उसके यहाँ है (बाद में मुकर गया, वो अलग बात है)।

माना जा रहा है कि पाकिस्‍तान ने यह कार्रवाई एफएटीएफ द्वारा ब्‍लैक लिस्‍ट किए जाने की आशंका से घबराकर की है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्‍तान ने 88 प्रतिबंधित आतंकी संगठनों और हाफिज, मसूद और दाऊद जैसे आतंकी आकाओं की सभी संपत्तियों को जब्त करने और बैंक खातों को सील करने के आदेश जारी किए हैं। उनकी विदेश यात्रा पर भी बैन लगा दिया गया है। हालाँकि, बाद में पाकिस्तान दाऊद को लेकर अपने दावों से पलट गया।