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कराची में हनुमान मंदिर पर बुलडोजर चलाकर पठान ने बनाया घर: बहुमूल्य प्राचीन मूर्तियाँ गायब

पाकिस्तान के कराची में एक पठान ने घर बनाने के लिए प्राचीन हनुमान मंदिर पर बुलडोजर चला दिया। मंदिर से पौराणिक वस्तुएँ और बहुमूल्य मूर्तियाँ भी गायब बताई जा रही हैं।

इसकी जानकारी मंदिर के महाराज ने एक न्यूज चैनल को दी। महाराज ने बताया कि कोरोना वायरस के समय में मंदिर-मस्जिद सब बंद रहने के आदेश दिए गए थे। इसलिए वह खामोश होकर बैठ गए। लेकिन अब उन्हें मालूम चला कि उनका मंदिर तोड़ दिया गया है। यह सूचना देते हुए मंदिर के महाराज बेहद दुखी थे और रोते उन्होंने अपना बयान दिया है।

‘वॉयस ऑफ पाकिस्तान मायनॉरिटी’ ने इसकी वीडियो ट्विटर पर अपलोड की है। इस ट्वीट में लिखा है, “अल्पसंख्यकों के पूजास्थल ध्वस्त करके, तुम केवल भावनाएँ आहत नहीं कर रहे, बल्कि इतिहास भी नष्ट कर रहे हो। कराची के सिंध में स्थित पौराणिक हनुमान मंदिर पर एक रसूखदार ने बुलडोजर चलवा दिया क्योंकि वह वहाँ घर बनाना चाहता था।”

इसके बाद दूसरी ट्वीट में अकॉउंट से महाराज की वीडियो अपलोड की गई। महाराज को कहते सुना जा सकता है कि उन्होंने मंदिर की खबर सुनने के बाद बड़े महाराज से अनुरोध किया कि वे क्या कर रहे हैं? उन लोगों की पूजा रुकी हुई है।

वे कहते हैं, “हमने बड़े महाराज से कहा कि हमारी पूजा 5-6 महीने से रुकी हुई है। आप कहते हो कि हो जाएगा-हो जाएगा। लेकिन अब ये मुकाम आ गया है कि इन्होंने हमारा मंदिर तोड़ दिया।” इतना कहते ही महाराज रोने लगते हैं।

महाराज बताते हैं कि मंदिर के पास रह रहे लोगों को घर से बाहर कर दिया गया है। उनकी जगह पर जो घर बनने जा रहे हैं उसके लिए 5 लोगों ने बुकिंग की है। लेकिन उन्हें भी अभी घर नहीं मिले हैं।

इसके बाद एक अन्य युवक ने बताया कि इस मामले पर पहले से विवाद था। लेकिन कुछ समय पहले लोगों ने जगह की घेराबंदी की और फिर बिना किसी को कुछ भी बताए मंदिर को तोड़ दिया।

युवक ने बताया कि मंदिर से मूर्तियाँ भी गायब हैं और जब पूछा जा रहा है कि मूर्तियों को कहाँ रखा गया, तो वह कहते हैं कि उन्हें कुछ पता ही नहीं है। ज्ञात हो कि इस संबंध में मंदिर प्रशासन ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है, लेकिन अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं आया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी इस मसले पर बात चल रही है।

गौरतलब है कि इससे पहले पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थल पर हमले की खबर पर एक मामला गुरुद्वारे का भी आया था। जब एक इस्लामी उलेमा ने भाई तारू सिंह के नाम पर बने गुरुद्वारे की भूमि पर कब्जा कर लिया था और वीडियो जारी करके धमकी भी दी थी।

पाकिस्तान मौलवी
मौलवी ने गुरुद्वारे की जमीन पर किया कब्जा

अलीगढ़: भगवान राम की पूजा करने पर BJP नेता को कट्टरपंथियों ने दी जिंदा जलाकर मारने की धमकी, लगाए धमकी भरे पोस्टर

अलीगढ़ में संप्रदाय विशेष की भाजपा नेत्री ने पाँच अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास के समय घर में पूजन किया था। उन्होंने रक्षाबंधन पर रामलला को राखी भेजी थी। अब इसकी वजह से उन्हें धमकी मिल रही है। अलीगढ़ शहर में उनके क्षेत्र में आपत्तिजनक पोस्टर लगाए गए हैं। पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है।

देहली गेट की एडीए कॉलोनी शाहजमाल की रहने वाली रूबी आसिफ खान भारतीय जनता पार्टी की महावीरगंज मंडल महिला मोर्चा की अध्यक्ष हैं। रूबी आसिफ खान ने 30 जुलाई को राम लला को राखी भेजी थी। पाँच अगस्त को जब अयोध्या में राममंदिर का शिलान्यास समारोह हुआ तब उन्होंने अपने घर पर आरती और पूजा भी की थी। इसके साथ-साथ 5100 रुपए का चेक राम मंदिर ट्रस्ट को भेजा था। 

रूबी आसिफ खान का आरोप है कि अब इन्हीं बातों को लेकर कुछ लोग उन्हें जिंदा जलाने और जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। इसके अलावा उन्हें इस्लाम से खारिज किए जाने की धमकी दी जा रही है। उनके मोहल्ले व क्षेत्र में दीवारों पर रूबी के पूजा करते हुए फोटो छपवाकर ऊपरकोट इलाके में दीवारों पर चस्पा कर दिए।

पोस्टरों पर लिखा है कि रूबी और नर्गिस ने मंदिर निर्माण की खुशी में अपने घर में पूजा की। ऐसे लोगों को इस्लाम से खारिज करो। धमकी भरे पर्चे छपवा कर बँटवाए जा रहे हैं। पोस्टर के जरिए परिवार समेत घर के अंदर जलाकर हत्या करने की धमकी दी गई है। इसके साथ ही शरीयत के मुताबिक इस्लाम से बेदखल करने की भी धमकी दी गई है।

वहीं इस मामले में बीजेपी से जुड़े हिंदूवादी कार्यकर्ता संप्रदाय विशेष की महिला नेत्री के समर्थन में साथ आ गए हैं। इसकी लिखित शिकायत रूबी आसिफ खान ने भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ जाकर थाना देहली गेट में की है। पुलिस मामले की जाँच पड़ताल में जुट गई है।

पुलिस के मुताबिक उन्हें 17 अगस्त की शाम, शाह जमाल एडीए कॉलोनी निवासी रूबी आसिफ खान के बायकाट और धमकी से जुड़े पर्चे बाँटे जाने की खबर मिली थी। और पुलिस की टीम इस मामले पर नजर बनाए हुए है।

पूर्व गृहमंत्री समेत BJP नेताओं को मारने के लिए छोटा शकील ने भेजा शॉर्पशूटर: गुजरात ATS के हत्थे चढ़ा

गुजरात के आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) ने कुख्यात बदमाश छोटा शकील की ओर से एक भाजपा नेता की कथित तौर पर हत्या के लिए भेजे गए एक ‘शार्प शूटर’ को गिरफ्तार किया है। एटीएस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार (अगस्त 19, 2020) को यह जानकारी दी। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्‍तान की ओर से इन्‍हें गुजरात भाजपा नेताओं की सुपारी दी गई थी। इनके मोबाइल में गुजरात प्रदेश भाजपा के मुख्‍यालय श्रीकमलम का वीडियो तथा राज्‍य के पूर्व गृह राज्यमंत्री गोरधन झड़ाफिया का फोटो मिला है। इसी वजह से माना जा रहा है कि झड़ाफिया इनके मुख्‍य निशाने पर थे।

एटीएस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मंगलवार देर रात को एटीएस ने अहमदाबाद में रिलीफ रोड पर स्थित एक होटल पर छापा मारा जहाँ आरोपित ठहरा था। आरोपित ने एटीएस पर गोली चलाई, लेकिन बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

एटीएस के सीनियर अधिकारी ने कहा, “गोपनीय सूचना मिली थी कि छोटा शकील ने एक बीजेपी नेता की हत्या करने के लिए एक शार्प शूटर भेजा है। सूचना के आधार पर हमारे दल ने पिछली रात होटल पर छापा मारा। जब हमने आरोपित को पकड़ने की कोशिश की तो उसने हम पर एक गोली चलाई। सौभाग्य से कोई घायल नहीं हुआ। बाद में हम उसे पकड़ने में कामयाब रहे।” 

उन्होंने कहा कि आरोपित के पास से दो पिस्तौल बरामद हुई हैं। एटीएस के सीनियर अधिकारी ने कहा कि आरंभिक पूछताछ समाप्त होने के बाद आरोपित की पहचान उजागर की जाएगी। होटल के प्रबंधक के अनुसार मुंबई के एक निवासी ने होटल में मंगलवार को कमरा लिया था और बाद में एटीएस उसे पकड़ कर ले गई।

इस बीच गिर सोमनाथ जिले में भाजपा नेता गोरधन झड़ाफिया ने कहा कि उन्हें सूचना मिली थी कि आरोपित उन्हें जान से मारने के लिए भेजा गया था। झड़ाफिया ने कहा, ”गुजरात के गृहमंत्री प्रदीप सिंह जडेजा ने मुझे बताया कि मुझे मारने के लिए भेजे गए एक शार्प शूटर को गिरफ्तार किया गया है।”

बताया जा रहा है कि आरोपित भाजपा कार्यालय व भाजपा नेताओं के ठिकानों की कई बार रेकी कर चुके थे। झड़ाफिया फिलहाल गुजरात भाजपा के नवनियुक्‍त अध्‍यक्ष सी आर पाटिल के सोमनाथ दौरे में उनके साथ हैं।

‘समझ नहीं आता लोगों को सुशांत सिंह को डिप्रेस्ड मानने में क्या समस्या है?’ स्वरा भास्कर ने जताई नसीरुद्दीन से सहमति

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर ट्विटर ट्रोल और पार्ट टाइम अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने अभिनेता की हत्या की जाँच की माँग कर रहे लोगों से ही सवाल किया है कि आखिर वो ये मानने को तैयार क्यों नहीं हैं कि सुशांत सिंह राजपूत डिप्रेशन के शिकार थे।

सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु को शुरू से ही उनके मानसिक स्वास्थ्य के साथ जोड़ते हुए इसे आत्महत्या बताने के तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में, यदि कंगना रानौत, कुछ गिने-चुने समाचार चैनल और सोशल मीडिया पर लोगों द्वारा इस बहस को आगे नहीं बढ़ाया जाता तो शायद ही इस पर आज सीबीआई जाँच हो रही होती और यह मामला कबका आत्महत्या का बताकर बंद भी कर दिया गया होता।

सुशांत सिंह राजपूत के कई करीबियों द्वारा उनके डिप्रेशन और मानसिक स्वास्थ्य की बातों से इनकार किया गया है। इसके बावजूद भी सुशांत की मौत में अपना करियर तलाश रहे स्वरा भास्कर, राजदीप सरदेसाई और नसीरुद्दीन शाह जैसे लोग इस मामले को ‘अनावश्यक बहस’ साबित करने का प्रयास करते हुए देखे जा रहे हैं।

हाल ही में इंडिया टुडे को दिए एक साक्षात्कार में, नसीरुद्दीन शाह ने सुशांत सिंह की मृत्यु के कवरेज को ‘बीमारी’ कहा था, और कहा कि इसकी जाँच अधिकारियों पर छोड़ दी जानी चाहिए।

इंडिया टुडे के अनुसार, रसभरी वेब सीरिज की अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने नसीरुद्दीन शाह के इस बयान से सहमति व्यक्त करते हुए कहा, “मैं बिल्कुल नसीर सर से सहमत हूँ। वास्तव में मैं यह कई दिनों से कह रही हूँ। आप इसे मेरे सोशल मीडिया पर देख सकते हैं, यह देखने के लिए कि यह कैसे सोशल मीडिया और कई मीडिया घरानों ने अपनी कॉन्सपिरेसी थ्योरी को शुरू किया है और जनता को झूठ का शिकार बना रहे हैं।”

नसीरुद्दीन शाह ने इस इंटरव्यू में कहा कि ‘मैं इन खबरों को नहीं देखता हूँ, यह बेकार हैं। सुशांत सिंह को नहीं जानता था लेकिन उनका भविष्य उज्जवल था।’

सुशांत सिंह की मौत का कारण डिप्रेशन बताने पर जोर देते हुए स्वरा भास्कर ने कहा- “लोगों के लिए यह स्वीकार करना इतना मुश्किल क्यों है कि वह डिप्रेस्ड हो सकता है? मैंने एक लेख पढ़ा जहाँ किसी ने कहा कि वह डिप्रेस्ड नहीं था, ये कौन सी थ्योरी है? कोई इसे कैसे देख सकता है? सिर्फ इसलिए कि कोई फेमस है, इसका मतलब यह नहीं है कि चीजें गलत नहीं हो सकती हैं। हमें एक समाज के रूप में मानसिक स्वास्थ्य को अधिक महत्व देने की आवश्यकता है।”

उल्लेखनीय है कि दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह के पिता ने अभिनेता की प्रेमिका रिया चक्रवर्ती पर आत्महत्या के लिए उकसाने और उनके रूपए हड़पने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही रिया चक्रवर्ती पर यह भी आरोप लगाए गए हैं कि उन्होंने सुशांत सिंह को दवाओं की ओवरडोज देकर मानसिक रूप से बीमार करने का प्रयास किया था।

बंगाल में नागिन डांस के साथ मनाया स्वतंत्रता दिवस: TMC के आयोजन में पहले भी हो चुका है ‘सैंया जी गमछा बिछाई के…’ पर डांस

सोशल मीडिया पर इस वक्त पश्चिम बंगाल का एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो में मंच पर स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए तृणमूल कॉन्ग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी और उनकी ही पार्टी के सांसद अभिषेक बनर्जी मौजूद हैं, जिनके पीछे एक बड़ा सा बैनर लगा हुआ है। जिसके सामने ‘नागिन-नागिन’ गाने पर कुछ लड़कियाँ उत्तेजक डांस करती हुई नजर आ रही है। इनका नृत्य देखकर वहाँ मौजूद लोग सीटियाँ बजाते हुए हूटिंग कर रहे।

इंडिया टुडे के रिपोर्ट के अनुसार यह वीडियो 15 अगस्त को स्वतन्त्रता दिवस की वर्षगाँठ के मौके पर पश्चिम बंगाल के 24 परगना में हुए एक कार्यक्रम के दौरान का है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर बंगाल में सत्तारूढ़ पार्टी के इस वीडियो की जमकर आलोचना हो रही है। यह कार्यक्रम स्थानीय तृणमूल कॉन्ग्रेस समिति द्वारा उत्तर 24 परगना जिले डींगा के सोहाई-स्वेतपुर क्षेत्र में आयोजित किया गया था।

मंच पर जारी डांस के बीच एक स्थानीय तृणमूल नेता वीडियो में कहते है, “सोहाई-स्वेतपुर तृणमूल कॉन्ग्रेस समिति ने 74 वें स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाने के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया है। हमारे पंचायत समिति के नेता जल्द ही हमें संबोधित करेंगे।”

वहीं वीडियो के वायरल होने के बाद टीएमसी के जिला प्रवक्ता सुनील मुखर्जी ने इस पर पार्टी की तरफ से सफाई पेश की है। उन्होंने कोरोना वायरस का हवाला तो दिया, लेकिन राष्ट्रीय के सम्मान में इस तरह के आयोजन करने पर कोई टिप्पणी नहीं की।

मुखर्जी ने कहा, “हमारे सीएम ने बार-बार पार्टी कार्यकर्ताओं से महामारी के दौरान इस तरह के आयोजन नहीं करने के लिए कहा है। मैंने व्हाट्सएप पर वीडियो देखा है। यह निस्संदेह गलत है।”

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में इससे पहले भी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तृणमूल कॉन्ग्रेस द्वारा एक अश्लील कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। जिसमें एक लड़की तिरंगे से सजे मंच पर ‘सैंया जी गमछा बिछाई के…’ पर अश्लील डांस करते हुए नजर आ रहीं है।

इसके अलावा वीडियो में मौजूद लोग सिटी बजाते, चिल्लाते और लड़की को पैसे देते हुए भी नजर आ रहे है।

तबलीगी जमात फंडिंग केस: ED की दिल्ली-मुंबई समेत 20 लोकेशंस पर रेड, यहाँ रहते हैं मौलाना साद के खास लोग

तबलीगी जमात मामले में केंद्रीय जाँच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा कुल 20 लोकेशन पर छापेमारी की गई है। जानकारी के मुताबिक जिन लोकेशंस पर छापेमारी की गई है, उनमें दिल्ली के सात ठिकाने शामिल हैं। वहीं मुंबई की पाँच लोकेशंस, हैदराबाद की 4 और 3 ठिकाने केरल के हैं।

माना जाता है कि इन तमाम जगहों पर मौलाना के खास लोग रहते हैं और इन जगहों पर फंडिग के सुराग मिल सकते हैं। दिल्ली के ठिकानों में जाकिर नगर अहम है, ये वो इलाका है जहाँ तबलीगी जमात का हेडक्वार्टर मौजूद है। इसके अलावा कोच्चि की 3 जबकि एक अंकलेश्वर में रेड की गई है।

सूत्रों के मुताबिक, तबलीगी जमात के प्रमुख मौलाना साद अपने दिल्ली के जाकिर नगर स्थित आवास पर नहीं हैं। कहा जा रहा है कि मौलाना साद फिलहाल यूपी में हैं, लेकिन परिवार के अन्य सदस्यों की मौजूदगी में ED उसके ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।

महाराष्ट्र, हैदराबाद, दिल्ली और केरल जैसे शहरों में ईडी ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मरकज़ की फंडिग के पीछे कौन हैं? ईडी की टीम ने दिल्ली के जाकिर नगर इलाके में भी छापेमारी की है। बताया जा रहा है कि यहीं पर जमात के मुखिया मौलाना साद का घर है।

गौरतलब है कि तबलीगी जमात का कोरोना कनेक्शन सामने आने के बाद उसके मुखिया मौलाना साद पर पुलिस ने शिकंजा कसा था। अप्रैल में ही ईडी ने मौलाना साद समेत पाँच लोगों पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। ईडी ने मौलाना साद के चार सहयोगियों से पूछताछ भी की थी।

इन लोगों से पूछताछ के दौरान ईडी अधिकारियों की ओर से जानने की कोशिश की जा रही है मरकज के फंड की देखभाल कौन करता था। मरकज के लिए फंड कहाँ से और कैसे आता है। क्या यह फंड डोनेशन के जरिए आता है। ईडी ने मौलाना साद को भी पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन अभी तक वह हाजिर नहीं हुआ है।

बता दें कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 31 मार्च को मौलाना साद और तबलीगी जमात के कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। यह एफआईआर लॉकडाउन के आदेश का उल्लंघन करते हुए धार्मिक आयोजन में लोगों की भीड़ जमा करने के मामले में दर्ज की गई थी। इसके बाद मौलान साद और उसके साथियों के खिलाफ ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था।

बता दें कि तबलीगी जमात का नाम कोरोना को लेकर सुर्खियों में आया था और इल्जाम लगा था कि जमात के लोग जान बूझकर कोरोना फैला रहे हैं। इस मामले के बाद लगातार वबाल होता रहा और जमात के चीफ मौलाना साद के खिलाफ कार्रवाई की माँग होती रही है लेकिन कोई कार्रवाई हो नहीं पाई है।

पिछले दिनों क्राइम ब्रांच ने मौलाना साद के बेटे को अपने कार्यालय में बुलाकर करीब 2 घंटे पूछताछ की। पूछताछ के दौरान उन्होंने साद के बेटे से 20 लोगों की जानकारी माँगी जो दिल्ली के मरकज में न केवल शामिल थे, बल्कि मरकज़ प्रबंधन टीम का हिस्सा थे।

‘डिप्रेशन का धंधा चलाने वालों को पब्लिक ने उनकी औकात दिखा दी’: कंगना ने साधा ‘रिया समर्थकों’ पर निशाना

सुशांत सिंह राजपूत केस में सुप्रीम कोर्ट ने आज (अगस्त 19, 2020) सीबीआई जाँच पर अपनी मोहर लगा दी। कोर्ट के फैसले के बाद सुशांत के लिए इंसाफ की माँग करने वालों ने इसे जीत की ओर पहला कदम बताया। वहीं कई फिल्मी सितारों ने भी इस फैसले का स्वागत किया। इसी क्रम में कंगना रनौत की भी प्रतिक्रिया आई।

अपने एक ट्वीट में तो कंगना रनौत ने इस फैसले को इंसानियत की जीत बताया और सुशांत के लिए लड़ने वाले हर व्यक्ति को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि वह पहली बार ऐसी सामूहिक चेतना की इतनी प्रबल ताकत को महसूस किया है। अदभुत।

इसके बाद अपने दूसरे ट्वीट में उन्होंने उन सभी लोगों पर निशाना साधा जिन्हें मूवी माफिया और बॉलीवुड नेक्सस के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। कंगना ने लिखा, “डिप्रेशन का धंधा चलाने वालों को जनता ने उनकी औकात दिखा दी।”

गौरतलब है कि कंगना ही वो बॉलीवुड अभिनेत्री हैं जिन्होंने सुशांत मामले में खुल कर अपनी राय रखी और मूवी माफिया की बहस व नेपोटिज्म को केंद्र में लाकर रखा। उन्होंने बताया कि कैसे पूरा नेक्सस एक बाहर से आए कलाकार के लिए माहौल तैयार करता है। जिसके लिए मीडिया भी उनका समर्थन करती है।

सुशांत केस की जाँच के लिए यह फैसला आने पर कंगना कहती हैं, “उन लोगों ने उसे एल्कहोलिक, ड्रग एडिक्ट, रेपिस्ट और दिमागी रूप से बीमार कहकर खारिज करना चाहा। लेकिन आज देखो सामूहिक चेतना के कारण उसे भारत में और हर जगह एक पुण्यात्मा का स्थान मिल गया है।”

इकोनॉमिक टाइम्स से बात करते हुए कंगना रनौत ने इसे बहुत बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि हमने मिशनरियों को धारण निर्मित नहीं करने दी। हमने उसी अनुभूति का निर्माण किया जो हमने महसूस किया और दिल से कहा।

बता दें, कल सुशांत मामले के ऊपर अपनी खुलकर राय रखने के लिए नसीरुद्दीन शाह ने कंगना को कम पढ़ा-लिखा कहा था। जिसके बाद कंगना ने उन पर तंज कसते हुए सवाल पूछा था, “धन्यवाद नसीर जी, आपने मेरे सारे अवॉर्ड और उपलब्ध‍ियों को तोल दिया, जो कि नेपोटिज्म के स्केल पर मेरे किसी भी समकालीन प्रतिद्वंदियों के पास नहीं है। मैं इसकी आद‍ि हो चुकी हूँ पर अगर मैं प्रकाश पादुकोण या अन‍िल कपूर की बेटी होती तो भी क्या आप मुझे यही कहते?”

राहुल गाँधी होंगे अब से ‘राओल विंची’ ताकि बहन पिरंका की बात बनी रहे सच कि ‘बिना गाँधी’ नाम वाला हो अध्यक्ष

कोरोना, लॉकडाउन, प्रवासी, PM CARES फंड और ऐसे ही तमाम मुद्दों पर पिछले कुछ माह ‘जनता के मुद्दों’ के नाम पर कॉन्ग्रेस ने बर्बाद कर दिए। आखिरकार इंदिरा गाँधी की पोती ने कमान संभाली और कॉन्ग्रेस पार्टी को वापस पारंपरिक विषय पर डालने का ऐतिहासिक काम किया।

पिरंका ने मुद्दों की कमी से जर्जर होती जा रही कॉन्ग्रेस में नई जान फूँकने के लिए बयान जारी किया और कॉन्ग्रेस की कमान किसी गैर गाँधी शख्स को सौंपे जाने की वकालत की। यानी, किसी ऐसी हस्ती को ही पार्टी की कमान सौंपी जाए, जिसके नाम में ‘गाँधी’ न हो।

लेकिन इससे पहले कि भाजपा समर्थक इस फैसले को कॉन्ग्रेस पार्टी लाइन के खिलाफ बताकर पिरंका के विरोध में शाहीनबाग़ खड़ा करते, गाँधी परिवार ने एक और बयान जारी करते हुए बताया कि राहुल गाँधी का नाम आज से राओल विंची ही माना जाएगा।

राहुल गाँधी के राजनैतिक गुरु दिग्विजय सिंह ने भी फौरन पेपर में इश्तिहार दे दिया कि राहुल गाँधी अब राओल विंची कहलाएँगे। इसके पीछे बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि विदेशी किस्म के नामों में कॉन्ग्रेस परिवार और समर्थकों की नेहरू जी के जमाने से ही विशेष आस्था रही है। हालाँकि, अभी भी भूमिभक्षी रॉबर्ट वाड्रा और रेहान वाड्रा को कॉन्ग्रेस का नेतृत्व सौंपे जाने की उम्मीदें कायम हैं।

पिरंका के मुँह से किसी गैर-गाँधी के पास कॉन्ग्रेस की सत्ता जाने की बात सुनकर सावन माह के शिवभक्त और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ जी तो एक बार को बगावती हो गए थे और उन्होंने फौरन उन्हें देशद्रोही तक घोषित कर दिया था। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी लाइन के खिलाफ बात करने वाला सज्जन कोई भी हो, एंटी नेशनल कहलाएगा।

लेकिन जब उन्हें अगले दिन के अखबार में दिग्विजय सिंह जी द्वारा भेजा गया राहुल गाँधी का नाम राओल विंची किए जाने का इश्तिहार मिला तब जाकर वो अपने क्रोध पर नियंत्रण कर पाए।

हालाँकि, इस बीच कमलनाथ जी ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भी फोन कर के ‘वही कलाकारी’ दोबारा दिखाने की भी सिफारिश कर डाली जिसे करने से मध्य प्रदेश में कमलनाथ चूक गए थे।

हमने दिग्विजय सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि वो पिरंका जी का सम्मान करते हैं और उनके एक तिहाई भाग में गाँधी होने के कारण कोई भी कॉन्ग्रेसी उनकी किसी बात को काट नहीं सकता। साथ ही राहुल गाँधी जैसे दूरदर्शी व्यक्तित्व के नेतृत्व से पार्टी को अलग रखना निहायत ही गलत सोच होगी। अतः अपने मास्टरस्ट्रोक का प्रयोग करते हुए उन्होंने कहा कि ‘साला! नामे बदल दिहिस!’

दिग्विजय की इस बात का भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने स्वागत किया है। संबित पात्रा ने कहा, “देखिए, हम नहीं चाहते कि कॉन्ग्रेस की आंतरिक कलह का प्रभाव भाजपा पर पड़े। इसलिए राहुल गाँधी चाहे राओल विंची बन कर नेतृत्व दें, या आउल विनोद बन जाएँ, हमें किसी भी शर्त पर कॉन्ग्रेस में इस व्यक्ति को शीर्ष में बने रहना देखना है।”

मौलाना-रोधी भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि अगर कॉन्ग्रेस इससे थोड़ा भी दाहिने-बाएँ जाती है, तो हम सुप्रीम कोर्ट को छोड़िए इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस का भी दरवाजा खटखटाएँगे।

गुप्त सूत्रों से यह खबर भी आ रही है कि पिरंका जी अब अपनी बात से मुकर रही हैं क्योंकि रात में उन्हें माताजी का एक वीडियो कॉल आया और उन्होंने कहा, “अे कीया कार डीया बेटी! असा नेही केना ठा।”

हमारे सूत्र बताते हैं कि कल पिरंका जी ये भी कह सकती हैं कि उन्होंने तो यूएस कॉन्ग्रेस के बारे में ऐसा कहा था जिसे मीडिया ने अपने हिसाब से प्रस्तुत किया है। पिरंका के इस बयान से मची उथल-पुथल पर कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ इंग्लिशाचार्य शशि थरूर ने नाराजगी प्रकट करते हुआ कड़े शब्दों में कहा – “एपड़ी बैका”

लेकिन कुछ देर बाद जब शशि थरूर को होश आया तो उन्होंने माफी माँगते हुए कहा कि किसी गैर गाँधी को कॉन्ग्रेस की कमान देने की बात सुनकर वो अपने होशोहवास में नहीं थे, जिसके चलते उन्होंने इंग्लिश के बजाए पहाड़ी/गढ़वाली शब्द का प्रयोग कर दिया।

उन्होंने कहा कि इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सदियों से एक परिवार विशेष के लिए समर्पित रहने वाली जमात-ए-कॉन्ग्रेस कितनी व्यथित और उनकी क्या हालत रही होगी जब पिरंका ने किसी बिना गाँधी नाम वाले व्यक्ति को उनका लीडर होने की बात कही।

जब उनसे पूछा गया कि क्या ‘एपड़ी बैका’ किसी प्रकार की गाली होती है? इस पर शशि थरूर ने जवाब देते हुए सवाल किया कि क्या किसी बिना गाँधी नाम वाले के हाथ में कॉन्ग्रेस की कमान सौंपने के बारे में विचार करना गाली नहीं है?

राहुल को राओल विंची बना देने के बावजूद भी अभी कुछ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता अपने मन को बहला पाने में असमर्थ हैं और पिरंका द्वारा दीए गए इस बयान में साजिश की बू तलाश रहे हैं। दरअसल, राहुल गाँधी के इन समर्थकों ने हमारे गुप्त सूत्रों को बताया है कि पिरंका का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राहुल गाँधी को उनके ही नेताओं द्वारा नशेड़ी कहे जाने की चर्चा एकबार फिर बाजार में गर्म है।

‘तहलका’ के संपादक और सेक्स स्कैंडल में फँसे तरुण तेजपाल ने राहुल गाँधी के 2005 के इस इंटरव्यू को दबा दिया था। उस समय कई लोग कॉन्ग्रेस में इस चिंता में पड़ गए थे कि उनकी ‘नौकरी’ चली जाएगी और वो कहने लगे थे कि ये किस व्यक्ति से बात कर लिया, ये तो नशेड़ी है।

वहीं, भाजपा ने भी पिरंका के बयान को पहली बार गम्भीरता से लेते हुए फौरन एक उच्चस्तरीय आपात बैठक बुलाई और इस बात पर चर्चा की कि अगर वाकई में राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस के लीडर नहीं रहे तो ऐसी परिस्थिति में भाजपा के लिए परिस्थितियाँ एकदम उलट हो जाएँगी।

पिरंका द्वारा कॉन्ग्रेस पार्टी के नेतृत्व पर विचार रखने पर मशहूर शायर और रं** के भाव विशेषज्ञ मुनव्वर राना ने भी अपनी एक नज्म याद करते हुए कहा – “कई बातें मुहब्बत सबको बुनियादी बताती है, जो परदादी बताती थी वही दादी बताती है।”

केरल: गर्भवती भैंस काटकर पूर्ण विकसित भ्रूण निकालकर खाया, अबू और सुहैल समेत 6 गिरफ्तार

केरल में गर्भवती हथिनी की मौत की खबर के बाद एक गर्भवती जंगली भैंस को मारने की घटना सामने आई है। सैकड़ों लोगों ने मिलकर क्रूरतापूर्ण तरीके से गोली मारकर एक गर्भवती जंगली भैंस को मार दिया।

ऑर्गेनाइजर की एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के वन अधिकारियों ने 10 अगस्त को हुई इस घटना के सिलसिले में मलप्पुरम जिले के छह मूल निवासियों को गिरफ्तार किया है। पुल्लारा अबू उर्फ ​​नानिप्पा (47), मुहम्मद बुस्तान (30), मुहम्मद अंसिफ (23), आशिक (27) और सुहैल ( 28) समेत एक अन्य आरोपित बाबू को रविवार (अगस्त 16, 2020) को गिरफ्तार किया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपितों ने न केवल भैंस का माँस आपस में बाँटा बल्कि भैंस को चीरकर उसके पेट में पूर्ण विकसित भ्रूण के माँस को भी बाँट लिया।

इस मामले के आरोपित अबू ने अपनी ही बंदूक से जंगली भैंस को गोली मारी। भैंस को मारने के बाद उन्होंने उसके पेट से पूरी तरह से विकसित भ्रूण को भी निकाल लिया, और अपनी टीम के अन्य सदस्यों के बीच बाँट लिया। आरोपितों ने खोपड़ी सहित भैंस के शेष हिस्सों को जंगल में अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिया।

इस क्रूर घटना के मामले में पहले आरोपित अबू के घर से 25 किलो माँस बरामद हुआ है। इस गिरोह के शेष सदस्य भी हिरासत में हैं। रेंज अधिकारी का अनुमान है कि इस घटना में इनके साथ और भी सहयोगी मौजूद थे। शुरूआती कार्रवाई पूरी करने के बाद आरोपितों को मंजेरी अदालत में पेश किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि कुछ माह पहले ही केरल के साइलेंट वैली नेशनल पार्क की एक गर्भवती हथिनी को कुछ लोगों ने पटाखों से भरा अनानास खिला दिया था। अनानास चबाते ही उसमें हुए विस्फोट से हथिनी का जबड़ा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था।

हफ्तेभर बाद 27 मई को पलक्कड़ में वेल्लियार नदी में हथिनी की मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला कि हथिनी गर्भवती थी। इस घटना को लेकर देशभर में लोगों ने बड़े स्तर पर अपना विरोध प्रकट किया था।

ये डर अच्छा है: प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट से सजा सुनाने से पहले डाली नई अर्ज़ी

वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक अर्जी दायर की जिसमें अवमानना मामले के संबंध में उनकी सजा पर सुनवाई टालने की माँग की गई है। इसमें कहा गया है कि जब तक इस संबंध में एक समीक्षा याचिका दायर नहीं की जाती है और अदालत द्वारा इस पर विचार नहीं किया जाता है, तब तक सजा पर सुनवाई को टाल दिया जाए। 

बुधवार (अगस्त 20, 2020) को सजा पर बहस होने वाली है। 14 अगस्त को शीर्ष अदालत ने वकील प्रशांत भूषण को कोर्ट की अवमानना वाले मामले में दोषी करार दिया। न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने भूषण को अवमानना का दोषी ठहराते हुए कहा कि इसकी सजा की मात्रा के मुद्दे पर 20 अगस्त को बहस सुनी जाएगी। शीर्ष अदालत ने पाँच अगस्त को इस मामले में सुनवाई पूरी फैसला सुरक्षित कर लिया था। 

इससे पहले, अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने उन दो ट्वीट का बचाव किया था, जिसमें कथित तौर पर अदालत की अवमानना की गई है। उन्होंने कहा था कि वे ट्वीट न्यायाधीशों के खिलाफ उनके व्यक्तिगत स्तर पर आचरण को लेकर थे और वे न्याय प्रशासन में बाधा उत्पन्न नहीं करते। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (अगस्त 10, 2020) को वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ 2009 का आपराधिक अवमानना मामला खारिज करने से इनकार कर दिया। 11 साल पुराने इस केस में कोर्ट ने प्रशांत भूषण की स्पष्टीकरण और माफ़ी माँगने से इनकार कर दिया है।

ज्ञात हो कि यह केस प्रशांत भूषण की ओर से तहलका पत्रिका को दिए गए इंटरव्यू को लेकर है। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत के पिछले 16 मुख्य न्यायाधीशों में से आधे भ्रष्ट थे। तरुण तेजपाल उस समय तहलका पत्रिका के संपादक थे। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।

गौरतलब है कि वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने देश के सर्वोच्च न्यायलय और मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबड़े के खिलाफ ट्वीट किया था, जिस पर स्वत: संज्ञान लेकर कोर्ट कार्यवाही कर रहा है। अपने ट्वीट में प्रशांत भूषण ने कहा था, “जब भविष्य में इतिहासकार वापस मुड़कर देखेंगे कि किस तरह से पिछले 6 वर्षों में औपचारिक आपातकाल के बिना ही भारत में लोकतंत्र को नष्ट किया गया है, तो वे विशेष रूप से इस विनाश में सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका को चिह्नित करेंगे, और पिछले 4 CJI की भूमिका को और भी अधिक विशेष रूप से।”