Wednesday, July 28, 2021
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रायबरेली में बने भव्य बाबरी मस्जिद, सुप्रीम कोर्ट ने नहीं माना कि राम मंदिर तोड़ कर मस्जिद बनी थी: मुनव्वर राना

"मैं चाहता हूँ कि इस जमीन पर बाबरी मस्जिद की एक ऐसी शानदार इमारत का निर्माण किया जाए कि दुनिया के जो भी लोग इधर से गुजरें, वो बाबरी मस्जिद का दीदार कर सकें। इसमें मेरा कोई निजी स्वार्थ नहीं है क्योंकि मैं बोर्ड में किसी पद की लालसा नहीं रखता हूँ। मैं सिर्फ ज़मीन देने वाला व्यक्ति ही बना रहना चाहता हूँ। सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर मामले में फैसला तो दिया है, लेकिन ये न्याय नहीं है।"

उर्दू शायर मुनव्वर राना एक बार फिर से अपने विवादित बोल के कारण चर्चा में आए हैं। उन्होंने माँग की है कि अयोध्या के धन्नीपुर गाँव में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को मस्जिद के लिए जो 5 एकड़ ज़मीन मिली है, वहाँ भगवान राम के पिता राजा दशरथ के नाम पर अस्पताल बनवाया जाए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर उक्त माँग की है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दी गई या जबरदस्ती हासिल की गई ज़मीन पर मस्जिद नहीं बनता।

मुनव्वर राना ने संप्रदाय विशेष की छवि सुधारने के लिए ये आईडिया दिया। उन्होंने इसके पीछे का कारण बताते हुए कहा कि लम्बे समय से संप्रदाय विशेष के बारे में ये प्रचारित किया जा रहा है कि उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर तोड़ कर मस्जिद बनाई थी लेकिन सच्चाई यह है कि संप्रदाय विशेष का कोई भी कभी किसी अवैध कब्जे की जगह पर मस्जिद नहीं बना सकता। उन्होंने कहा कि संप्रदाय विशेष के लोग हमेशा से अपने वतन, यहाँ के निवासियों व उनकी भावनाओं का सम्मान करते हैं।

मुनव्वर राना ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

शायर मुनव्वर राना ने कहा कि इन्हीं बातों का सन्देश देने के लिए संप्रदाय विशेष के लोगों को अयोध्या में राजा दशरथ के नाम पर अस्पताल बनवाना चाहिए। उन्होंने यहाँ तक दावा किया कि वो मस्जिद निर्माण के लिए रायबरेली में सई नदी के किनारे स्थित अपनी साढ़े 5 बीघा जमीन देने के लिए तैयार हैं। ये ज़मीन उनके बेटे तबरेज के नाम पर पंजीकृत है। साथ ही उन्होंने वक़्फ़ की सम्पत्तियों पर अवैध कब्जे हटाने की माँग की, ताकि संप्रदाय विशेष की भलाई के लिए उसका इस्तेमाल हो सके। उन्होंने कहा:

मैं चाहता हूँ कि इस जमीन पर बाबरी मस्जिद की एक ऐसी शानदार इमारत का निर्माण किया जाए कि दुनिया के जो भी लोग इधर से गुजरें, वो बाबरी मस्जिद का दीदार कर सकें। एक नए वक्फ बोर्ड का गठन कर सभी वक्फ संपत्तियों को उससे संबद्ध कर दिया जाए। इसमें मेरा कोई निजी स्वार्थ नहीं है क्योंकि मैं बोर्ड में किसी पद की लालसा नहीं रखता हूँ। मैं सिर्फ ज़मीन देने वाला व्यक्ति ही बना रहना चाहता हूँ। सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर मामले में फैसला तो दिया है, लेकिन ये न्याय नहीं है।

वहीं ‘आजतक’ की मानसी मिश्रा से बातचीत करते हुए मुनव्वर राना की बेटी सुमैया ने बताया कि उनके पिता कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे रंजन गोगोई ने अपने फैसले में लिखा कि कोई साक्ष्य नहीं मिला है कि वहाँ मंदिर तोड़कर मस्ज‍िद बनाई गई। सुमैया ने कहा कि राम मंदिर परिसर में ही छोटी सी मस्जिद बनाने के लिए इजाजत दी जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि रायबरेली वाली ज़मीन पर मस्जिद बनाने के लिए कागजात भी तैयार किए जा रहे हैं।

बता दें कि सीएए विरोध प्रदर्शनों के दौरान मुनव्वर राना की बेटी सुमैया ने कहा था कि हमें ध्यान रखना है कि हमें इतना भी न्यूट्रल (तटस्थ) नहीं होना है कि हमारी पहचान ही खत्म हो जाए। उन्होंने कहा था कि पहले हम इस्लाम के मानने वाले हैं और उसके बाद कुछ और हैं। सुमैया ने ये भी कहा था कि हमारे अंदर का जो दीन है, जो इमान है, वह जिंदा रहना चाहिए। कहीं ऐसा न हो कि हम अल्लाह को भी मुँह दिखाने लायक न रह जाएँ।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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