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‘राम नहीं अल्लाह बोलो, हिन्दू महिलाओं से छेड़छाड़’: भूमिपूजन की खुशी मनाते परिवार ने अमानतुल्लाह के करीबियों पर लगाया आरोप

राम मंदिर भूमि पूजन के बाद 5 अगस्त का दिन पूरे देश में दीपावली की तरह मनाया गया। हर हिंदू ने इस बहुप्रतीक्षित अवसर पर अपने घर में दीया जलाकर इस दिन की खुशियाँ मनाईं। लेकिन इस बीच कुछ क्षेत्र ऐसे भी रहे जहाँ खुशियाँ मनाते-मनाते हिंसा भड़क गई। दिल्ली के कालिंदी कुंज के पास मदनपुर खादर इलाके की गली नंबर 4 में भी कुछ ऐसा ही हुआ।

यहाँ 5 अगस्त के दिन एक आपसी झड़प की खबर मीडिया में सामने आई। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, यह बच्चों की लड़ाई का मामला था। जो बाद में बड़ों के बीच विवाद का कारण बन गया और देखते ही देखते वहाँ ईंट, लोहे की रॉड और तलवारें तक चल गईं। खबर में यह भी बताया गया कि पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इनका नाम गगन, मुकेश और दीपक है।

रिपोर्ट्स से यह भी सूचना मिली कि इस मामले को सुलझाने आए मिन्नतुल्लाह खान को दूसरे पक्ष के लोगों द्वारा तलवार से मारा गया, जिसके कारण वह बेहोश हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। बाद में इस संबंध में पुलिस को सूचना दी गई।

ऑपइंडिया के संज्ञान में जब यह मामला आया तो हमने पूरी घटना को जानने का प्रयास किया। हमें इस बीच मिन्नतुल्लाह खान द्वारा कालिंदी कुंज थाने में कराई गई एफआईआर की कॉपी मिली और साथ ही दूसरे पक्ष की शिकायत की प्रति भी मिली।

दोनों पक्षों के अपने-अपने मत थे। लेकिन हैरानी इस बात की थी कि मिन्नतुल्लाह खान की ओर से की गई एफआईआर पर त्वरित कार्रवाई हो चुकी थी। जबकि दूसरा पक्ष अब भी अपनी एफआईआर के लिए जद्दोजहद कर रहा है और घटना के एक हफ्ते बाद भी उनकी कोई सुनवाई नहीं है।

हमने पूरा मामला समझते हुए दूसरे पक्ष से संपर्क किया और उस परिवार से बात की जिनका झगड़ा 5 अगस्त के ही दिन अपने इलाके में रहने वाले दूसरे समुदाय के कुछ लोगों से हुआ था।

परिवार के सदस्य जीतेंद्र ने हमें बताया, “5 अगस्त के दिन राम मंदिर भूमिपूजन की खुशी के अवसर पर हमारे परिवार के बच्चे घर के बाहर दीया जलाकर खुशियाँ मना रहे थे। तभी घर के पास रहने वाले मिन्नतुल्लाह खान उर्फ बुच्ची की ओर से 3-4 लोग आए और बच्चों को धमका कर दीये में लात मार दी। ये सब देख कर हमारे घर की औरतें बीच-बचाव करने पहुँची। लेकिन वह लोग उनसे ही उलझ गए। तभी घर के दो पुरूष (मुकेश और गगन) भी वहाँ गए और उन 4-5 लोगों ने उन पर भी हमला बोल दिया। जब पूरा मामला बढ़ गया तो यह लोग वहाँ से चले गए और कुछ मिनट बाद 30-40 की संख्या के साथ वापस आए।”

जीतेंद्र के अनुसार, “भीड़ ने दोबारा आते ही बगल वाले घर से ईंट उठा कर हमारे घर पर हमला बोल दिया और जो दीया बाहर रखा था उसे भी घर में फेंक कर बाइक में आग लगाने की कोशिश की। जब हमने इस संबंध में पुलिस को संपर्क किया तो पुलिस आई और मुकेश के साथ गगन को भी थाने में ले गई। जब सवाल किया गया तो पता चला कि दूसरे ओर से शिकायत दर्ज हुई है।”

ऑपइंडिया ने यह जानने के बाद जीतेंद्र से पूछा कि आखिर किन कारणों से मुकेश और गगन को गिरफ्तार किया गया? जिस पर जीतेंद्र ने हमें बताया, “दरअसल, उस दिन जब वह लोग हमारी माँ बेटियों के साथ दुर्व्यव्हार कर रहे थे तब मिन्नतुल्लाह खान नलके के हत्थे से हमारे घर की बेटी वर्षा को मारने जा रहा था। लेकिन तभी वर्षा ने अपने सिर पर हाथ लगा लिया जिससे वह बच गई। मगर गगन को यह सब देखकर गुस्सा आया और वह अपनी शादी की तलवार उठाकर ले आया। उसने तलवार के उसके हैंडल से मिन्नतुल्लाह खान के सिर पर मार दिया।”

https://www.youtube.com/watch?v=PQVtziBMl1A

जीतेंद्र ने हमें इस पूरी घटना की वीडियो उपलब्ध करवाई। साथ ही यह भी कहा कि दूसरे पक्ष ने पुलिस का ध्यान केवल तलवार वाली घटना पर गौर दिलवाकर मुकेश-गगन को गिरफ्तार करवा दिया है। हमसे कोई बातचीत नहीं की। इनके अलावा एक दीपक नाम का साथी भी जेल में डाल दिया गया। जिसकी कोई गलती भी नहीं थी। वह घटनास्थल पर भी बाद में आया था। मगर, तब भी वह मुकेश और गगन के साथ तिहाड़ में डाल दिया गया।

जीतेंद्र के अनुसार, मिन्नतुल्लाह खान आम आदमी पार्टी नेता व इलाके के विधायक अमानतुल्लाह खान का खास है। जिसके ऊपर पहले से कई आपराधिक केस दर्ज हैं। लेकिन तब भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही। उनके मुताबिक पुलिस से पूछने पर पुलिस उनसे कहती है कि दूसरे पक्ष की ओर से इस मामले में एफआईआर दर्ज है इसलिए कार्रवाई चल रही है।

बता दें कि जब ऑपइंडिया ने हिन्दू परिवार से बात की तब तक उनकी FIR दर्ज नहीं हुई थी। हालाँकि, आज मालूम चला कि घटना के 6 दिन बाद यानी कल उनकी शिकायत पर FIR हो गई है।

ऑपइंडिया को बताया गया कि काफी जद्दोजहद के बाद हमारी शिकायत को पुलिस ने 11 अगस्त 2020 को अंततः FIR के रूप में दर्ज किया। हिन्दुओं की तरफ से दर्ज कराई गई FIR की प्रति यहाँ संलग्न है। अब इस पर आगे जो भी कार्रवाई होती है वो आने वाले समय में ही पता लगेगा।

हिन्दू पक्ष की ओर से दर्ज FIR-1
हिन्दू पक्ष की ओर से दर्ज FIR-2
हिन्दू पक्ष की ओर से दर्ज FIR-3

घर की महिलाओं का क्या कहना है?

गगन की पत्नी बबीता बताती हैं कि 5 अगस्त के दिन उनके घर के बच्चे दीया जलाकर खुशियाँ मना रहे थे। तभी वह लोग बाहर लड्डू लेने गए। लेकिन दूसरे मजहब के बच्चों ने उनसे कहा कि राम-राम मत बोलो अल्लाह-अल्लाह बोलो। बबीता के मुताबिक, “हमारे बच्चों ने अल्लाह-अल्लाह बोलने से मना कर दिया जिसके कारण वह बच्चे मारपीट करने लगे। हमारे बच्चों ने हमसे शिकायत की। लेकिन तब तक पीछे से वह लोग आ गए और मारपीट करने लगे। इस बीच हमारी भांजी पर हमला कर दिया गया। हम उसे बचाने भी गए, पर तब भी मारपीट होती रही। वह लोग हमारे घर पर पत्थर बरसा कर गए।”

बबीता के अनुसार, दूसरे पक्ष की भीड़ ने इस दौरान उनका हाथ पकड़ा और उनकी छाती में हाथ भी डाला। उनसे कहा गया कि वह सब मिलकर उनकी जिंदगी बर्बाद कर देंगे और कोई कुछ कर भी नहीं पाएगा।

बबीता के बाद दीपक की माताजी ने इस पूरे मामले के लिए मिन्नतुल्लाह खान को जिम्मेदार ठहराया। वहीं भांजी वर्षा भी बताती हैं कि उस दिन उनके भाइयों के साथ जब बदसलूकी हुई तो वह बाहर गईं। लेकिन उन लोगों ने उनके प्राइवेट पार्ट्स पर हाथ मारे और मुँह पर भी मारा।

वे कहती हैं कि उनकी बस यही माँग है कि उनके मामले में मिन्नतुल्लाह खान के ख़िलाफ़ जल्द से जल्द कार्रवाई हो और आने वाले समय में यदि कोई उनके छोटे भाई-बहनों को कुछ भी करे तो उसके जिम्मेदार भी उन्हें ही माना जाए।

सुदर्शन वाहिनी संगठन के दिल्ली प्रदेश के उपाध्यक्ष सागर मलिक

सुदर्शन वाहिनी संगठन के दिल्ली प्रदेश उपाध्यक्ष सागर मलिक भी इस मुद्दे पर इस समय पुलिस से कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह सब साम्प्रदायिक हिंसा भड़काने के लिहाज से हुआ है। हिंदू पक्ष ने जो कुछ भी किया वो अपनी बहन-बेटियों की रक्षा में किया। गगन ने जो बिन धार वाली तलवार को मिन्नतुल्लाह खान के सिर पर मारा वह भी बचाव में ही था। 

इसलिए उनके हिसाब से इस मामले में दोनों हिसाब से केस दर्ज होना चाहिए था। लेकिन तब भी एक ही पक्ष की शिकायत पर कार्रवाई हुई और गगन के अलावा मुकेश व दीपक भी थाने में बुला कर जेल में डाल दिए गए।

सागर कहते हैं कि इस मामले में राजनीतिक दबाव के कारण हिंदू पक्ष की शिकायत पर कार्रवाई नहीं हो रही और उन्हीं के लोगों को जेल में डाला गया है।

पुलिस से संपर्क

बता दें, ऑपइंडिया ने इस संबंध में कालिंदी कुंज थाने में अपडेट जानने के लिए संपर्क किया था। लेकिन पुलिस ने इस मामले पर डीएसपी से बात करने को कह दिया। इसके बाद डीएसपी से हमारा संपर्क नहीं हो पाया। अगर आगे कोई भी जानकारी हमें मिलेगी तो हम इस खबर को अपडेट करेंगे।

मिन्नतुल्लाह खान की ओर से दर्ज कराई गई FIR में क्या शिकायत है?

मिन्नतुल्लाह खान की ओर से दायर करवाई गई एफआईआर में उन्होंने खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि 5 अगस्त को राम मंदिर भूमि पूजन के बाद कुछ लोग दीया जला रहे थे। तभी उनके बड़े बेटे का फोन आया कि उनके छोटे बेटे को गगन ने चांटा मार दिया है और जब वह उसे बचाने गया तो उस पर भी हथौड़े से वार हुआ है।

मिन्नतुल्लाह खान के अनुसार, इसी कारण वह गगन से पूछने गए कि उसने बच्चों की आपसी लड़ाई में उनके बड़े लड़के को क्यों मारा।

मिन्नतुल्लाह खान की एफआईआर

लेकिन, तभी मुकेश ने नल के हत्थे से उनपर वार कर दिया और खुद को बचाने में उनके बाएँ हाथ में चोट आ गई। इसके बाद गगन भी घर से तलवार ले आया और जान से मारने के इरादे से हमला किया। फिर दीपक और सुशील समेत कई लोग आ गए और उन पर ईंट पत्थरों से वार करने लगे। 

इसके बाद ईंट लगने से वह घटनास्थल पर बेहोश हो गए जब होश आया तो वह अपोलो में थे। उन्होंने अपनी एफआईआर में यह माँग की है कि उनके बच्चों पर जानलेवा हमला करने वालों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो।

बता दें, इस संबंध में पुलिस ने मिन्नतुल्लाह खान की ओर से दूसरे पक्ष पर धारा 307 और 34 के तहत मामला दर्ज किया है।

हिंदू पक्ष की शिकायत में किन लोगों का नाम है?

हिंदू पक्ष की ओर से दी गई शिकायत में उन्होंने मिन्नतुल्लाह खान उर्फ बुच्ची, जोया, सद्दाम, इरफान, बुच्ची की पत्नी चुन्ना, कौशर, कौशर की पत्न, उस्मान अली मंसूरी, सलमान, समीर, शाहरूख, राजा, अमन, अब्दुल्ला, सैम्यूल मैसी व उनके अन्य साथियों के ख़िलाफ़ शिकायत करते हुए कड़ी कार्रवाई की माँग की है। 

इनकी शिकायत में आरोप है कि इनके साथ मारपीट, पथराव, घर की महिलाओं के साथ बदसलूकी के अलावा इनके घर के दीये को उठाकर फेंका गया और बाइक में आग लगाने की कोशिश हुई।

शिकायत में यह भी स्पष्ट लिखा है कि इतनी भीड़ के बीच में उन्होंने खुद को असहाय देखा और जब उनके घर की महिलाओं व छोटी बच्चियों के साथ छेड़छाड़ हुई तो एक साथ उन्हें रोकने का प्रयास किया। इस बीच उन लोगों को भी चोट आई और ये लोग भी घायल हुए।

परिवार ने शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि कि दूसरे पक्ष के लोग आपराधिक प्रवृति के हैं। उनके ख़िलाफ़ बहुत से मामले दर्ज हैं। ये लोग फेसबुक पर भी बंदूक के साथ फोटो डालते हैं। अगर आने वाले समय में कोई भी अप्रिय घटना घटित हुई तो उसके लिए ये लोग जिम्मेदार होंगे। 

ऑपइंडिया को मिली वीडियो में क्या है?

घटना से संबंधित वीडियोज में हम देख सकते हैं कि उस दिन काफी लोगों की भीड़ वीडियो बनाने वाले युवक के घर पर गाली-गलौच करते हुए पथराव कर रही थी। बड़ी-बड़ी ईंटों को उठाकर घर पर फेंकी जा रही था। बगल के घर से पत्थर उखाड़ कर भी हमले के लिए प्रयोग किया गया।

एक अन्य वीडियो में दिखता है कि एक युवक बाइक में तोड़फोड़ करता है। फिर घर में जल रहे चिराग को गिराया जाता है और वहाँ खड़ी बाइक पर हमला होता है। दूसरा व्यक्ति बार-बार समझाता है, “बुच्ची भाई बाइक मेरी है” लेकिन उपद्रवी भीड़ नहीं सुनती है और लगातार पत्थरबाजी और गाली गलौच चलता रहता है।

एक वीडियो में यह भी साफ नजर आता है कि गगन अपने घर से तलवार लेकर मिन्नतुल्लाह खान पर हमला करता है और उसके बाद वह लोग वहाँ से भागने लगते हैं। बाद में दूसरी ओर से पथराव भी होता है। बीच में कुछ महिलाएँ बीच-बचाव करने पहुँचती हैं। लेकिन माहौल शांत नहीं होता। आखिर में घर का ही युवक इलाके की वीडियो बनाता है और उसे फेसबुक पर डालने की बात कहता है।

महेश भट्ट की सड़क-2 के ट्रेलर ने बनाया डिसलाइक का नया रिकॉर्ड: केवल यूट्यूब पर 1.3 मिलियन ने कुछ ही घंटो में किया ख़ारिज

सड़क- 2 का ट्रेलर बुधवार (12 अगस्त, 2020) सुबह लॉन्च हो चुका है। वहीं YouTube पर अपने प्रीमियर के कुछ ही घंटों के भीतर इसके ट्रेलर को 1.3 मिलियन डिसलाइक मिल चुके है। जिस वजह से वीडियो स्ट्रीमिंग साइट पर यह अब तक का सबसे अधिक नापसंद करने वाला ट्रेलर बन गया है। ज्ञात हो कि सड़क-2 फ़िल्म , 28 अगस्त को डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर रिलीज करने की घोषणा हुई। है।

सड़क-2 ट्रेलर, 1.3 मिलियन डिसलाइक

गौरतलब है कि जहाँ इस ट्रेलर को 1.3 मिलियन लोगों ने नापसंद (डिसलाइक) किया है। वहीं 1 लाख से भी कम लोगों ने इसे पसंद (लाइक) किया है। ट्रेलर को लाइक्स से ज्यादा डिस्लाइक्स मिल रहे हैं।

इससे पहले, विहिप ने हिंदू भावनाओं को आहत करने के लिए महेश भट्ट की फिल्म के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की माँग की थी। संजय दत्त, आलिया भट्ट और आदित्य रॉय कपूर स्टारर फिल्म “नकली साधु” के साथ हीरो की मुठभेड़ के चारों ओर घूमती है। मूल रूप से फिल्म में आलिया का चरित्र एक नकली गुरु और उसके आश्रम को भंडाफोड़ करने के लिए है। संजय दत्त का किरदार आलिया को बाबा की सच्चाई को उजागर करने में मदद करेगा।

पिछले महीने सड़क-2 के पोस्टर रिलीज के समय भी काफी विवाद हुआ था। हिंदू भावनाओं को आहत करने के लिए फिल्म निर्माताओं के खिलाफ बिहार के मुजफ्फरपुर में एक अदालत के समक्ष शिकायत दर्ज की गई थी।

हालाँकि, इसके ट्रेलर को भी ऑडियंस ने नापसंद कर दिया है। ट्रेलर को लोगों का खास रिस्पॉन्स नहीं मिल रहा है। लोगों ने फिल्म की कहानी को घिसा पिटा बताया है। कई लोग सोशल मीडिया पर स्टारकिड्स को बायकॉट करने की माँग भी कर रहे हैं।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से ही यह फिल्म सोशल मीडिया पर बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद की मिसाल के तौर पर पेश की गई। सुशांत के केस में महेश भट्ट का नाम भी सामने आया था। सुशांत की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती संग महेश की कुछ तस्वीरों ने बवाल मचा दिया था। इसके अलावा नेपोट‍िज्म को लेकर भी काफी हंगामा हुआ।

काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद मामला: सुन्नी सेंट्रल वक़्फ बोर्ड को नोटिस जारी, अगली सुनवाई 1 सितंबर को तय

अयोध्या में श्रीराम मंदिर का भव्य निर्माण शुरू होने के साथ ही अब वाराणसी में ‘ज्ञानवापी परिसर’ को मुक्त कराने की कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। इस मुद्दे पर सोमवार को वाराणसी की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में सुनवाई हुई थी। वहीं जिला जज की अदालत ने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से कोर्ट में उपस्थिति न होने के कारण सुनवाई की अगली तारीख 1 सितंबर को निर्धारित कर दी है। इससे पहले प्रतिवादी अंजुमन इंतजामिया मस्जिद की तरफ से 1 जुलाई को इस मुद्दे पर याचिका दाखिल की गई थी।

अयोध्या में रामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के शिलान्यास के बाद से ही काशी और मथुरा का मुद्दा भी गरमाता नजर आ रहा है। लोगों की निगाहें अब काशी विश्वनाथ मंदिर के फैसले पर टिकी हुई है।

गौरतलब है कि प्रतिवादी अंजुमन इंतजामिया मस्जिद की ओर से अर्जी दी गई कि मामले में सुनवाई नहीं हो सकती हैं। इस मामले की सुनवाई सिविल कोर्ट के क्षेत्राधिकार में नहीं है। कोर्ट ने सुनवाई के बाद प्रतिवादी की याचिका खारिज कर सुनवाई चालू रखने का आदेश दिया। उधर प्रतिवादी की ओर से एक और अर्जी दी गई। कहा गया कि लखनऊ वफ्फ बोर्ड ट्रिब्यूनल न्यायाधिकरण के पास प्रकरण को भेजा जाए। अदालत ने इस अर्जी को 25 फरवरी को खारिज कर दिया। इसी आदेश के खिलाफ प्रतिवादी ने जिला जज की अदालत में एक जुलाई को याचिका दाखिल की है।

वहीं एक जुलाई को दायर याचिका की सुनवाई करते हुए जिला जज की अदालत ने प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को नोटिस जारी करने का आदेश देते हुए अग्रिम सुनवाई के लिए एक सितंबर की तिथि तय की है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर की ओर से पंडित सोमनाथ व्यास और डॉ. रामरंग शर्मा ने ज्ञानवापी में नए मंदिर के निर्माण और हिंदुओं को पूजा-पाठ का अधिकार देने आदि को लेकर वर्ष 1991 में मुकदमा दायर किया है। जिस पर बाद में हाईकोर्ट की ओर से स्टे दे दिया गया।

पिछले वर्ष दिसंबर में वादमित्र ने सिविल कोर्ट (सीनियर डिवीजन-फास्टट्रैक) में एक और याचिका दाखिल कर पूरे परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने की माँग की। कहा कि लम्बा समय होने के कारण पूर्व के स्टे का आदेश स्वत: खारिज हो जाता है। लिहाजा, इस मामले में सुनवाई शुरू की जाए।

दिवंगत वादी पंडित सोमनाथ व्यास और डॉ. रामरंग शर्मा के स्थान पर प्रतिनिधित्व करने के लिए पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता (सिविल) विजय शंकर रस्तोगी को न्याय मित्र नियुक्ति किया गया।

उल्लेखनीय है कि इस मामले में भगवान विश्वेश्वर पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील राजेंद्र प्रताप पांडेय पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अंजुमन इंतेजामि‍या बनारस और यूपी सुन्‍नी सेंट्रल चाहता था कि इस कार्यवाही को स्थगित कर दी जाए और आगे कोई सुनवाई न हो। कोर्ट द्वारा उनकी माँगें ख़ारिज किए जाने के बाद अब इस मामले में कार्यवाही चलेगी। नवम्बर 2019 में सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर के पक्ष में फ़ैसला आने के बाद अब लोगों के भीतर उम्मीद जगी है कि मथुरा व काशी विवाद में भी हिन्दुओं को न्याय मिलेगा।

काशी विश्वनाथ व ज्ञानवापी मस्जिद का मामला हाईकोर्ट और सेशन कोर्ट, दोनों में ही चल रहा था। बाद में हाईकोर्ट ने कहा कि मुकदमा एक ही कोर्ट में चलेगा और सेशन कोर्ट में जारी रहेगा। वादी पक्ष की तरफ से पूरे ज्ञानवापी परिसर के एएसआई द्वारा भौतिक सर्वे कराने के लिए आवेदन दिया गया था, जिस पर संप्रदाय विशेष के पक्ष ने आपत्ति जताई थी। उसका कहना था कि हाईकोर्ट के 1998 में दिए गए आदेश के अनुसार इस मामले में स्टे लगा हुआ है।

बेगूसराय में नाबालिग लड़की के अपहरण को पुलिस ने बताया प्रेम प्रसंग: न आरोपित से पूछताछ और न POCSO में केस दर्ज

बिहार के बेगूसराय के बछवारा पुलिस थाने के अंतर्गत भिखम चक गाँव से गत 26 जुलाई को एक नाबालिग हिंदू लड़की को बंदूक की नोक पर उस समय अगवा कर लिया गया था, जब वह अपने पिता के साथ बाजार से लौट रही थी।

नाबालिग लड़की के पिता दिनेश ने आरोप लगाया था कि जब वह बेगूसराय जिले के मंसूरचक ब्लॉक में बेहरामपुर में पंचायत भवन को पार कर रहे थे, उसी वक्त मुख्य आरोपित नजमुल और एक महिला सहित सात लोगों ने एक बोलेरो कार में उसकी बेटी को जबरन बंदूक की नोक पर अगवा कर ले गए।

इस घटना को घटित हुए 17 दिन हो गए हैं। लेकिन अभी तक माता-पिता के पास अपनी बेटी के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। ऑपइंडिया से बात करते हुए, लड़की के पिता दिनेश ने कहा कि उनकी बेटी अभी भी लापता है। पिता ने आरोप लगाया कि पुलिस उसकी तलाश के लिए कुछ नहीं कर रही है।

दिनेश कुमार पंडित ने मुख्य आरोपित इज़मुल खान उर्फ ​​नजमुल उर्फ ​​आर्यन और उसके साथी, मोहम्मद नरूल अंसारी, मोहम्मद मुनफ़र अंजुम अंसारी अलार चंद, फ़रत और अन्य लोगों के खिलाफ़ एफआईआर दर्ज कराई थी। वहीं, दिनेश ने यह भी बताया था कि पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) 2 अगस्त को उनसे मिलने आए थे और उन्हें धमकाया।

घटना के बारे में बात करते हुए, दिनेश ने कहा कि पुलिस उनकी शिकायतों पर विश्वास नहीं कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बेगूसराय के डीएसपी ने उनकी बातों को बेतुका करार दिया है। इसके अलावा उन्होंने घटना को एक मनगढंत कहानी भी बताया है।

पुलिस ने दिनेश से सबूत माँगा

बेटी के अपहरण के मामले में पुलिस की उदासीनता के बारे में बताते हुए, दिनेश ने कहा कि उनके परिवार के सदस्य नियमित रूप से मुख्य आरोपित नजमुल के भाई को पड़ोस के गाँव में उनके घर में देखते हैं। वह 10 अगस्त को भी वहीं था, लेकिन जब भी वे पुलिस से पूछते हैं कि वे उसे गिरफ्तार क्यों नहीं कर रहे हैं, तो पुलिस यह दावा करते है कि जब भी वे नजमुल के घर पर छापा मारते हैं तो कोई भी वहाँ मौजूद नहीं होता है।

नाबालिक लड़की के पिता ने कहा- “पुलिस ने मुझे कुछ सुराग देने के लिए कहा। मैं एक गरीब और असहाय आदमी हूँ, मैं कहाँ से सुबूत इकट्ठा करके उन्हें दूँगा?”

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने पुलिस को सूचित किया कि उनके परिवार के सदस्यों ने कल भी नजमुल के भाई को देखा था? दिनेश ने जवाब दिया कि पुलिस को सूचित किया गया था, लेकिन उन्हें इस बारे में नहीं पता है कि जानकारी प्राप्त करने के बाद में क्या कार्रवाई हुई।

बातचीत के दौरान, दिनेश ने यह भी पुष्टि की कि उन्हें इस घटना के बाद उनकी बेटी या अपहरणकर्ताओं की तरफ से कोई कॉल नहीं आया है। किसी भी लड़की के पिता के लिए इससे अधिक चुनौतीपूर्ण कुछ भी नहीं हो सकता है कि उसकी नाबालिग बेटी 17 दिन से से गायब है और उन्हें नहीं पता कि किस तरह वह अपनी बेटी को सुरक्षित वापस लाएँ।

दिनेश ने बताया कि बेटी के अगवा होने के बाद उसकी माँ की हालत बहुत ही खराब है। पूरा परिवार बेहद निराश है। दिनेश ने कहा कि अपनी बेटी को ढूँढने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी है। और सभी बड़े और प्रभावशाली लोगों से संपर्क करने की भी कोशिश की, जिनसे वो परिचित था। सभी ने आश्वासन दिया कि वे इस मामले को देखेंगे, लेकिन किसी को परवाह नहीं है। पीड़िता के पिता दिनेश का कहना है कि किसी ने भी उनके मामले में कोई दिलचस्पी नहीं ली।

हमनें सुना था कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं, लेकिन ये सब किताबी बातें हैं: नाबालिक लड़की के पिता

दिनेश ने ऑपइंडिया को बताया कि उन्होंने बेगूसराय के पूर्व विधायक और बिहार कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के राज्य कार्यकारिणी के सदस्य अवधेश कुमार राय से संपर्क किया और उनसे अनुरोध किया कि वह पुलिस को मामले में कुछ ठोस कार्रवाई करने का निर्देश दें। दिनेश ने बताया कि, आश्वासन के बावजूद, सीपीआई सदस्य अवधेश ने पुलिस से संपर्क नहीं किया। उन्होंने आगे कहा, “चाहे पंचायत सरपंच हो या मुखिया, मैंने सभी के दरवाजे खटखटाए हैं, लेकिन बदले में मुझे सिर्फ निराशा ही हाथ लगी।”

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने कॉन्ग्रेस के स्थानीय विधायक रामदेव राय से संपर्क किया? इस पर दिनेश ने पुष्टि की कि हालाँकि उन्होंने सीधे उनसे संपर्क नहीं किया था, लेकिन उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी के ब्लॉक प्रतिनिधि से बात की थी। वो शुरू में पुलिस अधिकारियों से मिले क्योंकि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता ने कहा कि यह उनके लिए फायदेमंद होगा और उनके मामले को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। उस दिन के बाद ब्लॉक प्रतिनिधि ने भी उनसे संपर्क नहीं किया है। न ही इस मामले में कोई आगे की कार्रवाई की।

लड़की के पिता ने आगे कहा, “अमिय कश्यप सहित कुछ ही भाजपा सदस्य सांत्वना देने और हमें फिर से आश्वासन देने के लिए हमारे पास आते रहते हैं, अन्यथा कोई भी हमारे पास नहीं आता है। किसी भी मीडिया ने हमसे संपर्क नहीं किया।”

यह कहते हुए कि उनका परिवार अब अपनी बेटी को वापस पाने की उम्मीद और न्यायिक प्रणाली में अपने विश्वास को खो रहा है, नाबालिग लड़की के निराश पिता ने कहा – “हमनें सुना था कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं, लेकिन ये सब किताबी बातें हैं। गरीब आदमी को कोई देखने वाला नहीं है इस हिंदुस्तान में।”

दिनेश से बात करने और पुलिस और न्यायपालिका के साथ उनकी शिकायतों को सुनने के बाद, ऑपइंडिया ने बेगूसराय के डीएसपी ओम प्रकाश से इस घटना का संस्करण जानने के लिए संपर्क किया।

यह सब प्यार मोहब्बत का चक्कर है, किडनैपिंग की कहानी गलत है: बेगूसराय डीएसपी ओम प्रकाश

जैसे ही हमने उनसे बताया कि किस घटना के बारे में हम उससे बात करना चाहते हैं, डीएसपी ने कहा, “आपको गलत जानकारी दी गई है। किसी भी नाबालिग लड़की का अपहरण नहीं हुआ। लड़की का लड़के के साथ प्रेम संबंध था।”

बेगूसराय डीएसपी ने कहा कि पहले दो बार (हिंदू नाबालिग लड़की और संप्रदाय विशेष का लड़का, नजमुल) दो बार पकड़े गए हैं। लड़की के पिता की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पंचायत सदस्यों ने डेढ़ साल पहले लड़के को तब पीटा भी था, जब वह लड़की को प्रेमपत्र देते हुए पकड़ा गया था। वहीं, पहले भी 2 बार लड़की के पिता ने उसका मोबाइल फोन उस समय तोड़ दिया, जब वह नजमुल से बात करते हुए पकड़ी गई थी। डीएसपी ने दावा किया कि यह चीजें बहुत लंबे समय तक गाँव में छुपी नहीं रह सकती हैं।

डीएसपी ने कहा कि इस बार भी दिनेश ने 26 जुलाई की देर शाम तक बेटी के वापस न आने पर ग्राम पंचायत से संपर्क किया था। उन्होंने अपनी बेटी को वापस पाने के लिए पंचायत सदस्यों से आग्रह किया। यह पंचायत की बैठक ग्राम पंचायत के प्रमुखों, सरपंच, लड़की के परिवार के सदस्यों और लड़के के भाई की उपस्थिति में आयोजित की गई थी। जिस दौरान दिनेश ने सदस्यों से नजमुल के भाई से नजमुल के संपर्क विवरण देने के लिए कहा था। लेकिन लड़के के भाई ने कहा कि उसे कुछ पता नहीं है और उसके पास नजमुल का कॉन्टेक्ट डिटेल नहीं है।

‘आप सोचिए, यहाँ दिन दहाड़े कोई भी बंदूक की नोक पर क्या ऐसे किसी को उठा के ले जा सकते हैं?’ बेगूसराय डीएसपी ने यह सवाल पूछते हुए कहा कि पीड़िता का पिता दिनेश झूठ बोल रहा था।

डीसीपी ने आगे कहा, पंचायत सदस्यों ने इससे आगे हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, क्योंकि यह पहली बार नहीं था। जब दोनों ने दोनों शादी के करने के लिए भाग गए थे। तब दिनेश ने इसे काल्पनिक कहानी बना कर इस घटना को धर्म का एंगल दे दिया।

बिहार चुनाव के चलते इस घटना पर हो रही राजनीति: डीसीपी

डीएसपी ने कहा- “यह बिहार है। यहाँ बहुत भ्रष्टाचार है। लोग गंदी राजनीति करते हैं। और अब जब चुनाव दिन आसपास हैं, संयोग से यह विशेष मामला एक हिंदू लड़की और संप्रदाय विशेष के एक लड़के से संबंधित है, कुछ भाजपा नेता दिनेश और इस घटना का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए कर रहे हैं। यही वजह है कि दिनेश ने इस घटना को सांप्रदायिक मोड़ देते हुए एफआईआर दर्ज की है।”

हालाँकि, बातचीत के दौरान डीएसपी की आवाज बीच में स्पष्ट रूप से सुनी नहीं गई, लेकिन उन्हें ‘पाकिस्तान एंगल’ का उल्लेख करते हुए भी सुना जाता है, जिसके द्वारा हम मानते हैं कि वह दिनेश द्वारा दिए गए बयान के बारे में बात कर। दिनेश ने FIR में इस बात का जिक्र किया था कि नजमुल ने कथित तौर पर लड़की के पिता से कहा था अगर यह पाकिस्तान होता, तो वे लड़की को घर से ले जाते।

डीएसपी ने कहा कि लड़की के पिता ने पाकिस्तान के बयान का सपना देखा है। इस घटना पर हँसते हुए डीएसपी ने कहा, “आप कल्पना कर सकते हैं, प्राथमिकी में लड़के की 17-18 वर्षीय बहन, उसकी माँ, दो भाइयों का सह-अभियुक्त के रूप में उल्लेख किया गया है। क्या यह संभव है कि ये लोग किसी का अपहरण कर सकते हैं, वह भी गनपॉइंट पर?”

डीएसपी ओम प्रकाश ने कहा, “यह एक साधारण प्रेम संबंध का मामला है। जिसे लड़की के परिवार वाले तमाशा बना रहे हैं।” जब डीएसपी ने इस आरोप के बारे में पूछा गया कि पुलिस पीड़ित परिवार का सहयोग नहीं कर रही है, तो उन्होंने उल्टा लड़की के पिता पर ही आरोप लगा दिया कि दिनेश जाँच में सहायता नहीं कर रहे थे। डीसीपी ने कहा कि लड़की के पिता ने अपना मोबाइल नंबर पुलिस को नहीं दिया और थाने में बुलाने पर भी वह नहीं गए।

डीएसपी ने कह कि वो सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जब परिवार के सदस्य सहयोग नहीं करते हैं तो क्या कर सकते हैं। अधिकारी ने आगे कहा कि वह मानते हैं कि दोनों कोलकाता भाग गए हैं। डीएसपी ओम प्रकाश ने कहा कि पुलिस को 4-5 मोबाइल नंबर मिले, जिससे उन्होंने पता लगाने की कोशिश की, लेकिन जाँच की शुरुआत से ही ये नंबर बंद आ रहे हैं।

डीएसपी ने कहा कि दिव्यांशु नाम के एक नजमुल के दोस्त ने किसी को बताया था कि कोलकाता में उनके दोस्त ने नजमुल को अपनी गर्लफ्रेंड के साथ आने का सुझाव दिया था। डीएसपी ने कहा कि चूँकि बिहार चुनाव पास आ रहे हैं, इसलिए कुछ लोग भ्रम पैदा करना चाहते हैं। यह एक तनावपूर्ण माहौल है और इस घटना से राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

सिर्फ लड़की के परिजनों से कर रही है बेगूसराय की पुलिस पूछताछ

यह पूछे जाने पर कि क्या पुलिस ने आरोपित लड़के के परिवार को भी तलब किया है? डीएसपी ने आश्चर्यजनक रूप से हमें बताया कि उन्होंने केवल उस परिवार से पूछताछ की थी, जिसने पंचायत (लड़की के परिवार) से संपर्क किया था। हालाँकि, यह एक रहस्य बना हुआ है कि जब पीड़ित लड़की नाबालिग थी, तो लड़के के परिवारवालों से क्यों पूछताछ नहीं की गई थी? उन्होंने कहा कि उन्हें 30 जुलाई को सूचना दी थी कि एक नाबालिग लड़की का बंदूक की नोक पर अपहरण कर लिया गया था।

नाबालिग लड़की के पिता दिनेश ने बताया कि शाम 5 बजे के आसपास, एक महिला सहित सात लोग, एक बोलेरो कार में उनके पास पहुँचे, जब वे बेगूसराय जिले के मंसूरचक ब्लॉक में बेहरामपुर में पंचायत भवन पार कर रहे थे। और जबरन बेटी को बंदूक की नोक पर उठा के गए।

नजमुल को छह अन्य लोगों के साथ मुख्य आरोपित के रूप में नामित करते हुए, दिनेश ने अपनी शिकायत में लिखा था कि घटना के बाद, वह और उसकी पत्नी इज़मुल खान के घर गए थे, जहाँ उन्हें उसकी माँ हसीना खातुन मिली थी। शिकायत में लिखा गया है कि जब उन्होंने हसीना खातून से इस घटना के बारे में बताने की कोशिश की, तो वह चीखने चिल्लाने लगी थी। उन्होंने भीड़ इकट्ठा कर लड़की के पिता के साथ बदसलूकी और मारपीट भी की।

पीड़ित लड़की के पिता दिनेश ने शिकायत में कहा है कि उन्होंने उनकी पत्नी का मंगलसूत्र खींचकर धमकी दी थी कि अगर वे उसके घर से तुरंत बाहर नहीं निकलेंगे, तो वह उसकी बेटी को बांग्लादेश में बेच देगी और उसे वेश्यावृत्ति में धकेल देगी।

वहीं, लड़की के नाबालिग होने के बावजूद, SHO ने पुष्टि की थी कि इस मामले में POCSO अधिनियम को लागू नहीं किया जाएगा और आरोपितों पर IPC की धारा 366, 323, 341, 379, 384 और 504 के तहत अपहरण और चोट पहुँचने का मामला दर्ज किया गया था।

दंगाइयों के संपत्ति से की जाएगी नुकसान की भरपाई: कर्नाटक के गृहमंत्री का ऐलान, तेजस्वी सूर्या ने योगी सरकार की तर्ज पर की थी माँग

कर्नाटक के गृह मंत्री बसवराज बोम्मई ने बुधवार (अगस्त 12, 2020) को कहा कि राज्य सरकार बेंगलुरु हिंसा की घटना में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। बोम्मई ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि सार्वजनिक संपत्ति और वाहनों को नुकसान की भरपाई क्षति पहुँचाने वाले दंगाइयों को करना होगा।

मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए, कर्नाटक के गृह मंत्री ने कहा, “मैं संपत्ति की वसूली को लेकर एक महत्वपूर्ण घोषणा करना चाहता हूँ कि सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि हिंसा के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सार्वजनिक संपत्ति की भरपाई उन व्यक्तियों द्वारा किया जाना चाहिए जिन्होंने नुकसान पहुँचाया है। हम तुरंत कार्रवाई करने जा रहे हैं। हम व्यक्तियों की पहचान कर रहे हैं और नुकसान का आकलन कर रहे हैं। इसके बाद दंगाइयों द्वारा नुकसान की वसूली की जाएगी।”

उन्होंने पुष्टि की कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक बुलाई है, जहाँ आगजनी में लिप्त लोगों से नुकसान की वसूली के बारे में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

मंत्री ने कहा, “मैं लोगों को चेतावनी देना चाहता हूँ कि जो लोग कानून को हाथ में ले रहे हैं उन्हें सबक सिखाया जाएगा। (बेंगलुरु हिंसा) के पीछे की साजिश का पर्दाफाश किया जाएगा।”

बता दें कि इससे पहले बेंगलुरु दक्षिण के सांसद (बीजेपी) तेजस्वी सूर्या ने इस बाबत कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को पत्र लिखा था। पत्र में तेजस्वी सूर्या ने येदियुरप्पा से उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की तरह दंगे में हुई व्यापक क्षति की भरपाई दंगाइयों की संपत्ति जब्त करके करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा था कि सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की वसूली दंगाइयों की संपत्ति जब्त करके करें।

भाजपा सांसद ने अपने पत्र को ट्विटर पर पत्र शेयर किया, जिसमें उन्होंने येदियुरप्पा से योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार के उदाहरण का पालन करने का आग्रह किया, जिसमें उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को दोहराया नहीं जाएगा।

उत्तर प्रदेश के सीएम ने आगजनी में शामिल दंगाइयों की संपत्तियों को कैसे कुर्क किया, इसका उदाहरण देते हुए तेजस्वी ने कहा कि हिंसा के आरोपित व्यक्तियों की होर्डिंग्स लगाई गई और अकेले लखनऊ में 50 लोगों को 1.55 करोड़ रुपए की वसूली नोटिस जारी किए गए। उन्होंने दंगाइयों से सख्ती से निपटने का अनुरोध किया।

सीएम येदियुरप्पा को तेजस्वी सूर्या का लिखा गया पत्र

बता दें कि मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की रात पूर्वी बेंगलुरु केजी हल्ली, डीजे हल्ली और पुल्केशी नगर में अल्लाह-हो-अकबर और नारा-ए-तकबीर के नारों के बीच हिंसा फैल गई। संप्रदाय विशेष की 1000 से भी अधिक की भीड़ ने अल्लाह-हो-अकबर और नारा-ए-तकबीर के नारों के बीच पुलिस स्टेशन को जला डाला। यह दंगे पैगंबर मुहम्मद पर कथित रूप से आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट को लेकर भड़के थे।

1000 से भी अधिक की संप्रदाय विशेष की भीड़ ने स्थानीय विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर को घेर लिया और तोड़फोड़ शुरू कर दी। सबसे पहले तो केजी हल्ली पुलिस स्टेशन के सामने एक हज़ार से ज्यादा की संख्या में संप्रदाय विशेष के लोग इकट्ठे हो गए और कॉन्ग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के रिश्तेदार नवीन की गिरफ्तारी की माँग करने लगे। इसके बाद उन्होंने विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू कर दी। इसी तरह विधायक के आवास के बाहर भी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। उनके घर के बाहर गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया। कई घण्टों तक आगजनी चली।

पुलिस स्टेशन के बाहर मजहबी नारेबाजी हुई, पत्थरबाजी की गई और गाड़ियों को फूँक दिया गया। पूर्वी भीमाशंकर के डीसीपी को डंडों और पत्थरों से निशाना बनाया गया। वहीं डीजे हल्ली में पुलिस की एक गाड़ी को आग के हवाले कर दिया गया। रात के करीब 10:30 बजे अतिरिक्त पुलिस बल की टुकड़ियाँ आईं। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने हवाई फायरिंग की। यहाँ तक कि पुलिस को थाने के भीतर घुसने के लिए भी संप्रदाय विशेष की भीड़ ने जगह नहीं दी।

सुशांत ज़िंदा था तो उतना फेमस नहीं था जितना मौत के बाद बना दिया गया: आतंकी याकूब के वकील रहे NCP नेता मजीद मेमन

सुशांत सिंह राजपूत की कथित आत्महत्या मामले में महाराष्ट्र की सत्ताधारी पार्टियों में से एक एनसीपी (NCP) के नेता मजीद मेमन ने संवेदनहीन टिप्पणी की है। इसके बाद परिवार ने एक 9 पन्ने का पत्र जारी कर सुशांत सिंह राजपूत के लिए न्याय की माँग करने वालों के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाने वालों को जवाब दिया है। मजीद मेमन ने बुधवार (अगस्त 12, 2020) को कहा कि सुशांत जब ज़िंदा थे तब वो उतने लोकप्रिय नहीं थे, जितना उन्हें मरने के बाद बना दिया गया है।

साथ ही मजीद मेमन ने तंज कसते हुए कहा कि सुशांत सिंह राजपूत को आजकल मीडिया में उतनी जगह मिल रही है, जितनी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को भी नहीं मिलती। उन्होंने दावा किया ऐसे मामलों की जब जाँच होती है तो गोपनीयता बरकरार रखनी होती है। उन्होंने कहा कि हर विवरण को मीडिया में डालने का अर्थ है कि इससे जाँच पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

इसके बाद एनसीपी (NCP) नेता ने अपनी ट्वीट्स पर हुए बवाल पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनका ये बिलकुल भी मतलब नहीं था कि सुशांत सिंह राजपूत जब ज़िंदा थे तब लोकप्रिय नहीं थे तो उन्हें मौत के बाद न्याय नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उनके ट्वीट का सुशांत को अपमानित करने का कोई इरादा नहीं था, इसीलिए इसका गलत अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर एनसीपी नेता मजीद मेमन के विवादित बोल

भाजपा नेशनल मीडिया पैनेलिस्ट तुहिन सिन्हा ने मजीद मेमन के इस बयान की आलोचना करते हुए कहा कि वो मेमन सहित 1993 बम ब्लास्ट के कई आरोपितों के वकील रहे हैं और उन्हें क़ानून का पालन करते हुए खुद को स्थापित करने वाले लोगों से घृणा है। वहीं एनसीपी ने मजीद मेमन के इस बयान से पल्ला झाड़ लिया। प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि उनकी पार्टी इस बयान का किसी भी रूप में समर्थन नहीं करती।

मजीद मेमन पहले भी अपने बिगड़े बोल के कारण विवादों में रहे हैं। अप्रैल 2019 में उन्होंने पीएम मोदी के बारे में कहा था, “मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री भी एक अनपढ़, जाहिल या रास्ते पर चलने वाले आदमी की तरह बात करते हैं। वो इतने बड़े पद पर बैठे हैं, उनका पद एक संवैधानिक पद है। उस संवैधानिक पद के लिए प्रधानमंत्री रास्ते में नहीं चुना जाता।” उन्होंने याकूब की पैरवी करते हुए कोर्ट में कहा था कि उसे संप्रदाय विशेष के होने की सज़ा दी जा रही है।

उधर सुशांत सिंह राजपूत के परिवार ने शिवसेना सांसद संजय राउत द्वारा पार्टी मुखपत्र ‘सामना’ में लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए कहा है कि लोग इस बात की कल्पना ही नहीं कर सकते कि पिछले 8-10 साल में उनके साथ क्या हुआ है। रिया चक्रवर्ती का नाम लिए बिना इस पत्र में कहा गया है कि सुशांत की वीभत्स हत्या की गई है और ‘उस बदमाश ने’ उन्हें फँसा लिया और अब महँगे वकील किए जा रहे हैं।

महेश भट्ट की फिल्म सड़क 2 में हिन्दू आस्था को अपमानित करने का आरोप: VHP ने की कार्रवाई की माँग

बॉलीवुड निर्देशक महेश भट्ट निर्देशित फिल्म ‘सड़क-2’ रिलीज से पहले ही विवादों में आ गई है। बता दें कि यह आलिया भट्ट की पहली होम प्रोडक्शन फिल्म है और उनके पिता महेश भट्ट की 21 साल बाद निर्देशक के रूप में वापसी भी है।

फिल्म को लेकर विश्व हिन्दू परिषद ने बड़ा गंभीर आरोप लगाया है। वहीं फिल्म की स्टारकास्ट को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। अब वीएचपी नेता विजय शंकर तिवारी ने फिल्म ‘सड़क-2’ को लेकर हिन्दू आस्था को अपमानित करने का आरोप लगाया है।

बॉलीवुड में अक्सर पंडितों और साधु-संतों को धोखेबाज और बलात्कारी दिखाया जाता रहा है जबकि संप्रदाय विशेष के किरदारों को ईमानदार और देश के लिए मर-मिटने वाला प्रदर्शित किया जाता रहा है। इसी तरह ‘सड़क-2’ में भी महेश भट्ट एक ऐसी कहानी लेकर आ रहे हैं, जिसमें एक साधु को बुरा दिखाया जाएगा और उसके काले कृत्यों का खुलासा किया जाएगा।

वीएचपी नेता विजय शंकर तिवारी ने ट्वीट करते हुए लिखा, “महेश भट्ट के निर्देशन में बनी फिल्म सड़क 2 में एक बार फिर हिन्दू आस्था को अपमानित किया गया है जिसे हॉटस्टार में दिखाया जाएगा, फिल्म में केवल नेपोटिज्म के प्रोडक्ट्स भरे पड़े हैं, जिन्हें महेश भट्ट आगे बढ़ा रहे हैं। केन्द्र सरकार इस पर कार्यवाही करे।”

संजय दत्त, आलिया भट्ट और आदित्य रॉय कपूर अभिनीत फिल्म “नकली साधु” के साथ नायक की मुठभेड़ के चारों ओर घूमती है। इस फिल्म में आलिया भट्ट का किरदार एक ऐसी महिला का होगा, जो एक ‘फेक बाबा’ से पंगा लेती है। दिखाया जाएगा कि दुनिया के सामने अच्छा बना रहे वाला गुरु कितना बड़ा अपराधी है और उसका असली चेहरा कुछ और है। ये आलिया बनाम एक आश्रम चलाने वाले बाबा की कहानी है। संजय दत्त का किरदार बाबा को ‘एक्सपोज’ करने में आलिया की मदद करेगा।

पिछले महीने, जब फिल्म का पोस्टर जारी किया गया था, तब भी विवादों में घिर गई थी। उस समय बिहार के मुजफ्फरपुर में एक अदालत के समक्ष दायर शिकायत में, फिल्म निर्माता महेश भट्ट और मुकेश भट्ट, अभिनेत्री आलिया भट्ट के अलावा, पोस्टर के माध्यम से ‘हिंदू भावनाओं को आहत’ करने का आरोप लगाया गया था।

फिल्म में कैलाश पर्वत के फोटो पर सड़क 2 लिखकर वायरल किया गया है जिसे हिन्दुओं की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने को लेकर परिवाद दाखिल किया गया है। शिकायतकर्ता ने बताया कि फिल्म निर्देशक महेश भट्ट, निर्माता मुकेश भट्ट अभिनेत्री आलिया भट्ट पर फिल्म सड़क 2 में कैलाश पर्वत की तस्वीर को लेकर फोटो दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि कैलाश पर्वत हिन्दुओं के लिए धर्मिक रूप से महत्वपूर्ण है इसलिए इन लोगों पर केस दाखिल हुआ है।

वीएचपी नेता विजय शंकर तिवारी ने एक अन्य ट्वीट में इस तरफ ध्यान दिलाया कि किस तरह से महेश भट्ट की यह फिल्म भाई-भतीजावाद का समर्थन करती है। उन्होंने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा है, “सुनील दत्त के बेटे हैं संजय दत्त, महेश भट्ट की बेटियाँ हैं पूजा और आलिया, सिद्धार्थ रॉय कपूर के भाई हैं आदित्य, इन सबकी फिल्म है सड़क-2, जो आज रिलीज हुई है, अब महेश भट्ट को बताना होगा कि तुम्हारा और तुम्हारी फिल्म का हश्र खान ब्रदर्स जैसा ही होगा। यही नेपोटिज्म है।”

फिल्म का पहला पोस्टर रिलीज होने के बाद भी आलिया भट्ट और महेश भट्ट को सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल किया गया था। कई यूजर्स ने फिल्म को 2020 का अगला डिजास्टर बताते हुए फिल्म के बॉयकॉट की बात कही थी और अभी भी सोशल मीडिया पर ऐसे ही रिएक्शन देखने को मिल रहे हैं।

सोशल मीडिया पर भी इस दौरान ‘अनइंस्टॉल हॉटस्टार’ ट्रेंड होता रहा क्योंकि लोगों का कहना है कि इस फिल्म में केवल नेपोटिज्म के प्रोडक्ट्स भरे पड़े हैं, जिन्हें महेश भट्ट आगे बढ़ा रहे हैं। चूँकि इसे ‘डिजनी हॉटस्टार’ पर रिलीज किया जाना है, इसीलिए इसका विरोध हो रहा है। सोशल मीडिया में कई लोगों ने हॉटस्टार को अनइंस्टॉल कर के स्क्रीनशॉट्स भी शेयर किए। 

सोशल मीडिया पर हर तरफ आलिया भट्ट की फिल्म को बॉयकॉट करने की माँग उठ रही है। सोशल मीडिया पर सड़क 2 को लेकर मुहिम शुरू कर दी गई है। फिल्म के खिलाफ #BoycottBollywoodFilms ट्रेंड कर रहा है। नेपोटिज्म को लेकर हर कोई आलिया पर निशाना साध रहा है और उनकी आने वाली फिल्म को फ्लॉप बोल रहा है।

वहीं दूसरी तरफ एक्ट्रेस ने ट्रोल्स से परेशान हो कर अपना कमेंट सेक्शन बंद कर रखा है, जिसे लेकर भी उन्हें ट्रोल किया जा रहा है। हर कोई उनसे सवाल कर रहा है कि आखिर उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स के कमेंट सेक्शन बंद क्यों कर रखा है।

बता दें कि 14 जून को सुशांत सिंह राजपूत बांद्रा के अपने घर में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। 8 जून को उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान ने आत्महत्या की थी। खुलासा हुआ है कि इसी दिन सुशांत का घर उनकी गर्लफ्रेंड रिया चकवर्ती ने छोड़ा था। 8 से 13 जून के बीच महेश भट्ट और रिया चकवर्ती के बीच फोन पर कई बार बात हुई।

सौ या हजार नहीं… 60000 की भीड़ ने किए दंगे: बेंगलुरु से प्रत्यक्षदर्शी ने बताया सब कुछ, दलित MLA की बहन का बुरा हाल

पूर्वी बेंगलुरु में पुल्केशी नगर के विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के एक रिश्तेदार नवीन पर आरोप लगा कि उसने पैगम्बर मुहम्मद को लेकर फेसबुक पोस्ट डाला है और इसके बाद संप्रदाय विशेष की हज़ारों की भीड़ ने दंगे व आगजनी की। पहले संप्रदाय विशेष की भीड़ में दंगाइयों की संख्या 100 बताई जा रही थी लेकिन ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ ने एक प्रत्यक्षदर्शी के हवाले से दावा किया है कि वहाँ 50-60 हजार दंगाई रुके हुए थे।

अपडेट: हिंदुस्तान टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट से 60000 वाली संप्रदाय विशेष की दंगाइयों की भीड़ की बात हटा दी है। लेकिन नीचे आप सिविल डिफेंस से जुड़े लड़के शरीफ का बयान सुन सकते हैं, जिसमें वो स्पष्ट यह कह रहे हैं कि भीड़ की संख्या लगभग 50-60 हजार थी।

विधायक के आवास और केजी हल्ली पुलिस थाने की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया। मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की रात भड़की इस हिंसा में संप्रदाय विशेष की भीड़ ने न सिर्फ विधायक बल्कि थाने की गाड़ियों को भी आग के हवाले कर दिया। डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन पर भी हमला किया गया और शरीफ नाम का प्रत्यक्षदर्शी वहीं पर मौजूद था। उसने पुलिस में भी अपना बयान दर्ज कराया है। वो सिविल डिफेंस का सदस्य है, जो पुलिसकर्मियों को दंगाइयों से बचाने की कोशिश कर रहा था।

उसने स्पष्ट कहा है कि इस पूरे काण्ड में पुलिस की कोई गलती नहीं है बल्कि हिंसा कर रहे दंगाइयों ने सब कुछ किया। उसने कहा कि ये पुलिस थाना उसके लिए मंदिर-मस्जिद की तरह है और वो पुलिस का सहयोग करना चाहता है। अब तक इस मामले में 165 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। दोनों पुलिस थानों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। साथ ही पूरे बेंगलुरु में धारा-144 लागू कर दिया गया है।

उधर ‘न्यूज़ 18’ की एक खबर के अनुसार, पूरा पुल्केशी नगर विधानसभा क्षेत्र किसी युद्धस्थल की तरह दिख रहा है, जहाँ चीजें अस्त-व्यस्त पड़ी हुई हैं। कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया, उसके मलबे पड़े हुए हैं। घरों की खिड़कियों के शीशे टूटे हुए हैं और दरवाजे क्षतिग्रस्त हैं। सूनी पड़ी सड़कों पर ईंट और पत्थर पड़े हुए हैं। पुलिस की फायरिंग में 3 लोगों के मारे जाने की ख़बर है।

बुधवार को भी तड़के सुबह तक दंगे जारी रहे और पुलिस से संघर्ष होता रहा। दलित कॉन्ग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति की बहन जयंती ने रोते हुए बताया कि जब ये सब हो रहा था तब वो लोग घर पर नहीं थे। उन्होंने कहा कि सांत्वना की बात ये है कि उनके भाई और परिवार के लोग सुरक्षित हैं। पुलिस थाने की दीवार पर अभी भी काले निशान दिख रहे हैं, जो जलाने के कारण आए हैं।

कर्नाटक के गृह मंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा है कि लूटपाट, दंगा और आगजनी- ये सब आपराधिक कृत्य हैं। उन्होंने कहा कि लोग कुछ भी कहना चाहते हों, कोई भी माँग उठाना चाहते हों, उन्हें ये सब क़ानूनी रूप दे करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस को कार्रवाई के लिए खुली छूट दे दी गई है। उन्होंने आश्वस्त किया कि जिसने भी क़ानून को अपने हाथों में लिया है, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने दंगाइयों की संपत्ति जब्त करने की माँग की है।

पता चला है कि मुजम्मिल पाशा के साथ SDPI के दो और नेता साथ थे जो लगातार लोगों को भड़का रहे थे। उसके सहयोगी नेताओं जफ़र और खलील ने संप्रदाय विशेष की भीड़ को पत्थरबाजी करने और थाने के बाहर गाड़ियों को आग के हवाले करने के लिए भड़काया था। जहाँ पुलिस मुजम्मिल पाशा को गिरफ्तार करने में कामयाब रही है, वहीं बाकी 2 नेता फरार हो गए। सीसीटीवी फुटेज से भी इस मामले में बड़ा खुलासा हुआ है।

‘जल्दी अपलोड कर’ – बेंगलुरु में संप्रदाय विशेष के लोगों का मंदिर बचाने का ड्रामा अंत के 5 सेकंड में फुस्स, नए वीडियो से खुली पोल

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। यह वीडियो बेंगलुरु के उस जगह का है, जहाँ पर पैगंबर मुहम्मद पर कथित रूप से आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट को लेकर दंगे भड़के। इसके बाद संप्रदाय विशेष की दंगाई भीड़ ने पुलिस स्टेशन और पुलिस पर हमला किया।

यह वीडियो कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय सचिव और सोशल मीडिया प्रभारी जाकिया खान ने शेयर किया। 11-12 अगस्त की रात लगभग 2 बजे इस वीडियो को शेयर किया गया। इस वीडियो को शेयर करते हुए जाकिया खान ने दावा किया कि संप्रदाय विशेष के युवकों ने मंदिर को ‘अनियंत्रित भीड़’ से ‘बचाने के लिए’ ‘मानव श्रृंखला’ का निर्माण किया।

इस ट्वीट में बड़ी ही चतुराई से ‘temples’ हैशटैग का इस्तेमाल किया गया और ‘अनियंत्रित भीड़’ के धर्म को छिपाया गया, जबकि ‘मानव श्रृंखला’ बनाने वाले युवकों के धर्म को उजागर किया गया। जबकि सच्चाई यह है कि ‘अनियंत्रित भीड़’ का धर्म भी इस्लाम था।

हिंदुओं ने तो शायद कभी अपनी कल्पना में भी नहीं सोचा था कि अचानक से कोई आ जाएगा और फेसबुक पोस्ट की वजह से उनके मंदिरों को नष्ट कर देगा। हालाँकि, यह ‘मंदिर की रक्षा’ एक खतरा सा मालूम होता है कि मंदिरों को एक ऐसी पोस्ट पर ध्वस्त किया जा सकता है, जिसे संप्रदाय विशेष के लोग अपमानजनक मानते हैं।

यह विशेष रूप से राम मंदिर भूमिपूजन की पूर्व संध्या पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा की गई धमकी के बाद और अधिक भयावह प्रतीत होता है, जहाँ इस्लामी निकाय ने हागिया सोफिया का उदाहरण दिया था और धमकी दी थी कि कैसे एक बार बनी मस्जिद हमेशा एक मस्जिद ही बनी रहेगी।

ट्वीट में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने लिखा था, “बाबरी मस्जिद थी, और हमेशा एक मस्जिद रहेगी। हागिया सोफिया हमारे लिए एक बेहतरीन उदाहरण है। अन्यायपूर्ण, दमनकारी, शर्मनाक और बहुसंख्यक तुष्टिकरण वाले फैसले से भूमि का पुनर्निमाण इसे बदल नहीं सकता है। दुखी होने की जरूरत नहीं है। परिस्थति हमेशा के लिए नहीं रहती है।”

एक सोशल मीडिया यूजर मुहम्मद नुम्मिर ने भी इसी वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा कि यही तो भारत की सुंदरता है। लेकिन मंदिर को बचाने के लिए मानव श्रृंखला का उल्लेख करते हुए नुम्मिर यह आसानी से भूल गए कि हमलावर भी उनके अपने भाई थे।

कॉन्ग्रेस नेता सलमान निजामी ने भी दंगाई को ‘भीड़’ के रूप में प्रदर्शित किया, मगर मंदिरों को बचाने के लिए संप्रदाय विशेष के लोगों ने मानव श्रृंखला बनाई’ थी।

बता दें कि निजामी ने 2001 के संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को शहीद बताया था और 5 अगस्त को ‘काला दिन’ घोषित किया था, जिस दिन भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त किया था।

समाचार एजेंसी एएनआई ने भी उस इलाके का वीडियो शेयर किया, जिसमें उसने दंगाइयों को ‘आगजनी करने वाला’ बताया।

इंडिया टुडे के कर्मचारी राजदीप सरदेसाई ने भी संप्रदाय विशेष के लोगों को ‘मानव श्रृंखला’ कहा। इन आगजनी करने वालों का कोई धर्म नहीं है, मगर मंदिरों की रक्षा के लिए मानव श्रृंखला बनाने वाले युवकों का धर्म है।

हालाँकि कई सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि यह वीडियो फर्जी है। इसे कॉन्ग्रेस के नेताओं ने पीआर स्टंट के लिए बनवाया है, क्योंकि कॉन्ग्रेस नेता ही इस वीडियो को वायरल करने में लगे हुए हैं।

उसी स्थान से एक और वीडियो अब सामने आया है। वीडियो शूट करने वाले व्यक्ति को बैकग्राउंड से किसी को ये कहते हुए सुना जा सकता है कि इसे ‘जल्दी से अपलोड करे।’

यह इस बात की उत्सुकता जागृत करती है कि क्या सोशल मीडिया पोस्ट की वजह से शहर को उपद्रवियों द्वारा जला दिए जाने के बाद मंदिर की रक्षा के लिए संप्रदाय विशेष के लोगों द्वारा मानव श्रृंखला का वीडियो महज एक पब्लिसिटी स्टंट था।

अब्दुल अब्दुल अब्दुल… सौ में लगा धागा, अब्दुल आग लगा कर भागा

अब्दुल के पीछे पुलिस, पुलिस के पीछे अब्दुल, अब्दुल-अब्दुल-अब्दुल… आगे आगे अब्दुल, पीछे पीछे अब्दुल… कहाँ जा रहा अब्दुल? अब्दुल के दो आगे अब्दुल, अब्दुल के दो पीछे अब्दुल… अक्कड़ बक्कड़ बैंग्लोर बो, अब्दुल शहर को फूँक दो! सौ में लगा धागा, अब्दुल मशाल ले के भागा! मशाल में डाला तेल, अब्दुल जाएगा जेल!

अटकन मटकन दही चटाकन, थाने में बस आग लगावन। अब्दुल अब्दुल अब्दुल… अब्दुल आग लगाएगा, फिर ह्यूमन चेन बनाएगा, फिर फोटो भी खिंचवाएगा, फिर अच्छा अब्दुल कहलाएगा! पर अब्दुल भाई ये तो बोलो, अपने दिल के राज तो खोलो, मंदिर को बचा रहे थे किस से? जलाने वाले थे किस मजहब के!

माँ, कह एक कहानी, बेटा क्या समझ लिया है तूने मुझको अपनी नानी? कह माँ, कह लेटी ही लेटी, अब्दुल था या थी सलमा रानी? माँ, कह एक कहानी! तू है हठी मानधन मेरे! सुन, बैंग्लोर में साँझ के बेरे, तात भ्रमण पर निकले तेरे, आई व्हाट्सएप्प पर वाणी। आई व्हाट्सऐप पर वाणी? टेक्नीकल हुई कहानी। व्हाट्सएप्प जब अब्दुल ने पाया, पढ़ कर उसका मन हर्षाया, उसने तब मशाल उठाया, जम कर उसको तेल पिलाया, तेल नहीं था पानी, अब बढ़ चली कहानी! अब्दुल ने तब भीड़ जुटाई, झूठी सबको बात बताई, बोला कर लो सब तैयारी, फूँकना है सब अबकी बारी, हिंसक हुई कहानी? हाँ, बेटे हिंसक हुई कहानी! एक हजार अब्दुल तब आए, कोई पत्थर-ईंट उठाए, पेट्रोल बम भी साथ में लाए, सबने तब दंगे भड़काए, खून बहा जैसे था पानी, रक्तिम हुई कहानी! खूनी हुई कहानी? नॉट अ गुड कहानी!

उठो लाल अब आँखें खोलो, पेट्रोल लाई हूँ मुँह को धो लो। बीती रात, सलमा है आई, कैसी तूने आग लगाई, कपड़े काले हुए हैं जल कर, लिबरल चहक रहे ट्विटर पर, ह्यूमन चेन लगे अतिसुंदर। बैंग्लोर ने क्या जली छवि पाई, अब्दुल तूने ही आग लगाई! भोर हुई सूरज अग आया, जल में है कलुषित सी छाया। तेरे मशाल की किरणें आईं, थाने जले, समुदाय मुस्काई। इतना सुंदर समय मत खोओ, अब्दुल प्यारे अब मत सोओ?

नमस्कार,
मैं बकैत कुमार! बैंग्लोर में दंगे हो गए, कॉन्ग्रेस के विधायक के भतीजे ने किसी हिन्दूघृणा से रिसते पोस्ट के नीचे कोई दूसरा कमेंट किया और अल्पसंख्यक समुदाय को बुरा लग गया। जिस हिसाब से आजकल रेखाएँ क्षीण और धुँधली होती जा रही हैं, भाजपा वालों के काम भी कॉन्ग्रेस वाले करते नजर आ रहे हैं। हालाँकि, हमारे चैनल या रिपोर्टरों की फौज ने उस भतीजे के बचपन के दोस्तों के फेसबुक पोस्ट निकालने शुरु कर दिए हैं कि कोई भाजपाई या बजरंग दल का निकल आए तो हम आपको कह सकें कि वास्तव में भतीजा तो ठीक-ठाक था, लेकिन उसी भाजपाई के संगत में आ कर साम्प्रदायिकता फैलाने लगा था। हम लगे हुए हैं, जैसा भी होगा, कभी भी फेसबुक आदि पर सूचित करेंगे आपको।

खैर, बुरा इसलिए लगा क्योंकि बुरा लगने पर सिर्फ उनका ही हक है। ‘आहत होना’ या ‘संवेदनशील मैटर’ आदि का मसला भारतीय समाज के उन संसाधनों जैसा है जिस पर मनमोहन सिंह ने कहा था कि इस पर पहला हक अल्पसंख्यकों का ही है। हिन्दू लोग कट्टर होते हैं। अब किसी ने कृष्ण को थोड़ा सा बलात्कारी कह ही दिया तो क्या हो गया? अनभिज्ञ होगा, पढ़ता-लिखता नहीं होगा, कह दिया थोड़ा सा। अब कह ही दिया तो बात बढ़ाने की क्या जरूरत थी? क्या एक अल्पसंख्यक संविधान प्रदत्त अधकारों का प्रयोग नहीं कर सकता?

क्या वो एक पोस्ट भी नहीं कर सकता? थोड़ा सा कह दिया तो क्या हो गया? मैं भी हिंदू हूँ, दिन भर फेसबुक पर ही बकैती लिखता रहता हूँ, लेकिन मुझे आपने देखा कहीं लिखते हुए कि किसकी कितनी बीवियाँ थीं, कौन किस बीवी के साथ, कब क्या कर रहा था? नहीं, लिखा क्योंकि मैं 2014 के बाद से कटवा-छिलवा के लिबरल हो गया हूँ। मैंने तय कर लिया कि कब लिखना है, क्या लिखना है। ऐसे ही मगशैसे नहीं मिल जाता है, आत्मा बेचनी पड़ती है। हें, हें, हें…

आप ही बताइए कि अब्दुल कहाँ जाएगा? तीन तलीक छीन लिया, उसके कौमी भाइयों के नरसंहार की छूट पर पाबंदी लगा दी 370 हटा कर, राम मंदिर में ये मान लिया कोर्ट ने कि नीचे मंदिर था, फिर CAA ले आए… ये सारी बातें अब्दुल को पसंद नहीं इसलिए अब्दुल भारत के बड़े शहरों को अपनी मशाल से जला देगा।

आप ही बताइए कि सारे फैसले अल्पसंख्यकों के विरोध में ही जा रहे हैं तो वो क्या करेंगे? कहाँ जाएँगे? क्या उनके द्वारा फैसला सड़कों पर नहीं होना चाहिए? बिलकुल होना चाहिए क्योंकि सड़क का टैक्स तो सब भरते हैं, किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़े ही है?

कुछ लोग कह रहे हैं कि घंटे भर में भीड़ जुटा ली गई! वाह मोदी जी, वाह! मतलब कोई समुदाय व्यवस्थित है, ऑर्गेनाइज्ड है, व्हाट्सऐप पर संगठित है, डिसिप्लिन में रहता है, एक आवाज लगाने पर लोगों के सुख-दुख में निकल आते हैं सड़कों पर इंसाफ की उम्मीद में… इससे भी दिक्कत है लोगों को? ये फासीवाद नहीं है तो और क्या है? ये आपातकाल नहीं है तो और क्या है? ये अत्याचार हो रहा है… बचाओ, बचाओ… बिनोद-बिनोद… बिनोद को बचाओ! नहीं-नहीं, अब्दुल को बचाओ!

सताया हुआ अब्दुल, डरा हुआ अब्दुल, खौफजदा अब्दुल, सलमा का आशिक अब्दुल, अहमद का जानूँ अब्दुल… अब्दुल ही अब्दुल, तकिए ही तकिए, अल तकिया ही अल तकिया, फ्लोर ही फ्लोर, तौलिए ही तौलिए…

आखिर अब्दुल के सामने विकल्प क्या थे इस फासीवादी समाज में? जब सारे तंत्र आपके विचारों के विपरीत हो जाएँ तो मन के विकार बाहर आएँगे ही। अब्दुल ने आत्मनिर्भर भारत के नारे को शब्दशः लिया और घर ही में बम बनाया, तौलिए को तेल से भिगा कर मशाल बना ली, वाइपर के डंडे पर तौलिए को लपेट दिया और बताया कि शांतिप्रिय मजहब के खिलाफ कोई पोस्ट-कमेंट बर्दाश्त नहीं की जाएगी, भले ही वो हिन्दुओं के खिलाफ लिखे पोस्ट के जवाब में हो।

अब्दुल की सोच तो यह है कि हिन्दुओं के भगवान को अब्दुल के भाई या सलमा के जाने जिगर जानेमन सलीम ने बलात्कारी कह दिया तो उस पर प्रतिक्रिया देना हिन्दुओं का काम है, अब्दुल को इससे क्या? अब्दुल को बस इससे मतलब है कि उसके मजहब के किसी बात को ले कर तो किसी ने कुछ नहीं लिखा न। हिन्दू आग नहीं लगाते, बम नहीं बना सकते, तो ये उनकी समस्या है, अब्दुल की नहीं। अब्दुल तो मुद्रा लोन ले कर कुटीर उद्योग लगा कर मिनटों में मशाल और बम बना लेता है।

किसी किताब में पढ़ा था कि अगर आप कोई काम दस हजार घंटे करेंगे तो आप परफैक्ट हो जाएँगे। हिन्दुओं ने ये पूछने में परफैक्शन पाई है कि ‘आज लिबरल चुप क्यों हैं’, जबकि अब्दुल गुल के डिब्बे में बारूद रख कर, सुतली बाँध कर धीरे से रैक पर रख देता है! अब्दुल के घर में भले ही अँधेरा रहे, लेकिन वो कनस्तर का तेल मशाल पर डाल कर मजहब की रक्षा के लिए बाहर निकल जाएगा। हिन्दू का हेडेक अब्दुल काहे लेगा?

और हाँ, ये बैंग्लोर है कहाँ? है भी कि नहीं? क्या आप गए हैं देखने कि भारत में ऐसी जगह है या फिर बस एक समुदाय के लोगों को निशाना बनाने के लिए ऐसी एक जगह गढ़ दी गई, कुछ तस्वीरें दिखा दी गईं और आप एक समुदाय पर साम्प्रदायिक टिप्पणियाँ करने लगे? जैसा कि सोशल मीडिया यूजर डीके उर्फ धैर्यकांत ने लिखा है कि जब तक ऑल्ट न्यूज का फैक्टचेक इस पर नहीं आता, मैं, बैंग्लोर के दंगे क्या, बैंग्लोर इस देश में है भी कि नहीं, ये भी नहीं मानूँगा। बात करते हैं!

अंत में, ऐसे साहित्यिक ह्यूमन चेन मौके पर, दो गजलें सुनाना चाहूँगा। जैसा कि आहत इंदौरी कह कर गए हैं (ये मैं कर के दिखाऊँगा):

मेरे एक-एक शेर करोड़ों रुपयों के हैं, इसलिए किसी दो कौड़ी के दंगाई समुदाय का नाम ले कर जीभ गंदा नहीं करूँगा। अर्ज किया है… मेरा जहर आप तक पहुँचे विश्वास भाई तो हिन्दू होने के बाद भी दाद जरूर दीजिएगा कि…

मशाल लाए हो? इधर रख दो
देख रहे हो थाना? खाक कर दो

दस मंदिर जलाने के बाद,
ह्यूमन चेन दिखा कर सब साफ कर दो

बैंग्लोर हो कि दिल्ली या बंबई
मजहब के नाम पर ‘पाक’ कर दो

अरे! बुज्दिलों की कौम हो क्या?
राह में जो भी आए, हलाक कर दो

और इस गजल का अंतिम शेर देखें के…
हमारे भी बाप का है हिन्दोस्तान
जब जी चाहे, जला कर राख कर दो

एक और गजल देखिए कि,

सलमा बुलाती है, मगर जाने का नय
शहर फूँक देने का, पर उससे पहले इश्क लड़ाने का नय

प्यार, इक्स, प्रेम, मोहब्बत, सेस्क तो होतो रहेगो ससुर
चुपके से मंदिर जलाने का, पर कैमरे के सामने दिखाने का नय

वामपंथी तो अपनी मुट्ठी में है, लिब्रांडुओं की मर गई मैया
तुमको बस आग लगाने का, मीडिया से खौफ खाने का नय

ह्यूमन चेन बनाते रहने का, फोटो खिंचवाते रहने का
वायर, स्क्रॉल, NDTV खुद करेगा अपना काम, गिड़गिड़ाने का नय

विक्टिम कार्ड निकाल के, तलवार-मशाल ले कर उतर जा
कोई पुलिस आए, सरकार आए, इन सब से डर जाने का नय

और यहाँ, एक जहरीला शेर देखें के…
हाथ जल जाए अपना, तो जल जाने दे
लेकिन उनके घरों को राख किए बिना, अपने घर वापस आने का नय

और अम्मी कर रही होगी घर पर इंतज़ार
हलाल गोश्त खाने का, शर्माने का नय