Home Blog Page 4603

राजस्थान में बढ़ी सियासी सरगर्मी: BJP ने अपने 12 MLA को गुजरात शिफ्ट किया, राज्य पुलिस ने देशद्रोह मामले में बंद की फाइल

राजस्थान की राजनीति एक बार फिर से गरमा रही है। भाजपा अपने कुछ विधायकों को गुजरात ले गई है, जहाँ पार्टी की ही सरकार है। बता दें कि 14 अगस्त से राज्य में विधानसभा सत्र शुरू होने वाला है, जिसमें बहुमत परीक्षण की माँग उठने की भी उम्मीद है। पार्टी को आशंका है कि उसके विधायकों को खरीदने की कोशिश हो सकती है, इसीलिए उसने ऐसा किया। 11 अगस्त को बसपा-कॉन्ग्रेस मर्जर पर भी कोर्ट का फैसला आना है

इस मामले में राजस्थान हाइकोर्ट की सिंगल बेंच सुनवाई कर रही है। भाजपा को डर है कि अगर भाजपा में मिले 6 बसपा विधायकों को डिसक्वालीफाई किया जाता है तो उसके विधायकों के खरीद-फरोख्त का प्रयास हो सकता है, इसीलिए उसने इस निर्णय और विधानसभा सत्र से पहले ही विधायकों को गुजरात ले जाने का फैसला किया। इसी कड़ी में उदयपुर के 5 विधायकों को गुजरात ले जाया गया है। इससे वहाँ सरगर्मी फिर बढ़ गई है।

उधर राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी सक्रिय हो गई हैं। राजनीतिक सरगर्मी के बीच वो धौलपुर से दिल्ली के लिए रवाना हुई हैं। राजे बुधवार (अगस्त 5, 2020) को दिल्ली के लिए निकलीं। माना जा रहा है कि दिल्ली दौरे के दौरान उन्होंने पार्टी के कई नेताओं से मुलाकात की है। वो पिछले कुछ दिनों से राजधानी जयपुर में नहीं थीं, जिसके बाद उनके रुख को लेकर चर्चा चलने लगी थी। अब वो वरिष्ठ भाजपा नेताओं से मिल रही हैं।

उन्होंने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिल कर भी नाराजगी जताई है और प्रदेश में अपने ख़िलाफ़ हुई बयानबाजी को लेकर चर्चा की। बता दें कि कुछ लोगों ने वसुंधरा राजे और अशोक गहलोत में मिलीभगत का आरोप लगाया था। प्रदेश में पार्टी के अलग-अलग गुट बनने के कारण वो नाराज़ हैं। कहा जा रहा है कि अब तक भाजपा ने अपने 12 विधायकों को गुजरात शिफ्ट किया है। उदयपुर से गुजरात की दूरी भी कम है।

उधर राजस्थान पुलिस की SOG ने राष्ट्रद्रोह के 3 मामलों की जाँच बन्द कर दी है, जिसमें पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट को भी नोटिस भेजा गया था। ये मामला अशोक गहलोत सरकार को उखाड़ फेंकने के आरोपों से जुड़ा हुआ था। अब इस मामले में केस बंद करते हुए फाइनल रिपोर्ट डाल दी गई है। भाजपा ने इस मामले में कॉन्ग्रेस पर हमला किया है। पार्टी ने कहा कि 28 दिन जाँच चली लेकिन कुछ नहीं निकला।

इधर राम मंदिर का भूमिपूजन, उधर ‘Burnol’ के सर्च में भारी उछाल: नॉर्थ-ईस्ट ने दिखाई सबसे ज्यादा दिलचस्पी

अयोध्या में 5 अगस्त 2020 को राम मंदिर का भूमिपूजन हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसमें हिस्सा लिया और राम मंदिर की आधारशिला रखी।

भूमिपूजन से पूरा देश आह्लादित और भावुक था। पर कुछ ‘लिबरल’ यह कह कर विलाप करने में व्यस्त थे कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण भारत की धर्मनिरपेक्ष पहचान के लिए घातक है।

लिबरलों के लिए यह सच स्वीकार करना काफी मुश्किल था कि भगवान राम आखिरकार अपनी जन्मभूमि पर विराजमान होंगे और वहॉं एक भव्य राम मंदिर बनाया जाएगा। लिबरलों के दुखी होने का एक कारण यह भी था कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से हो रहा है।

इस्लामिक कट्टरपंथियों और लिबरलों पर कटाक्ष करते हुए कई हिन्दुओं ने उन्हें सुझाव दिया कि राम मंदिर निर्माण से अपने ‘जले हुए जख्मों’ पर वे ‘बर्नोल‘ (Burnol) लगा लें।

दिलचस्प बात यह है कि सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर, हिंदुओं और भगवान राम के भक्तों ने लिबरल और इस्लामवादियों को डिजिटल बर्नोल वितरित किया। वहीं कई लोग Google पर बर्नोल सर्च करने में व्यस्त थे। इसका नतीजा यह हुआ कि राम मंदिर भूमि पूजन के दौरान 5 अगस्त को ‘बर्नोल’ के लिए सर्च रिजल्ट कई गुना बढ़ गए।

यदि कोई पिछले 90 दिनों के ग्राफ को देखता है, तो यह स्पष्ट है कि बर्नोल का सर्च रिजल्ट 5 अगस्त को काफी हद तक बढ़ गया था।

Google search for 'Burnol' in the past 90 days
Google search for ‘Burnol’ in the past 90 days

बता दें कि पिछले 90 दिनों में सबसे ज्यादा ‘बर्नोल’ त्रिपुरा में सर्च किया गया। इसके बाद उत्तराखंड, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और झारखंड में सर्च किए गए।

Google search for ‘Burnol’ in the past 90 days

इसके अलावा, ज्यादातर लोगों ने पिछले 90 दिनों में ‘बर्नोल इमेज’ सर्च की और 5 अगस्त को यह आँकड़ा सबसे अधिक था।

पिछले 30 दिनों में ‘बर्नोल’ का सर्च

पिछले 30 दिनों में बर्नोल के लिए Google सर्च एक दिलचस्प ट्रेंड दिखाती है। Google से पता चलता है कि मेघालय में लोग “बर्नोल” शब्द की खोज में सबसे अधिक रुचि रखते थे, जो राम मंदिर भूमि पूजन के दौरान 5 अगस्त को भी चरम पर था।

Google search for 'Burnol' in the past 30 days
Google search for ‘Burnol’ in the past 30 days

मेघालय के बाद, पिछले 30 दिनों में ‘बर्नोल’ के लिए गूगल सर्च में सबसे ऊपर आने वाले राज्यों में झारखंड, गोवा, उत्तराखंड और हरियाणा है।

दिलचस्प बात यह है कि सबसे ज्यादा संबंधित प्रश्न ‘बर्नोल मीम्स’ और ‘बर्नोल क्या है’ के लिए थे। 5 अगस्त को ‘बर्नोल’ क्यों वितरित किया जा रहा था, यह देखते हुए Google ने बर्नोल सर्च से संबंधित टॉपिक को ही ‘related topics’ बना दिया।

Google search for 'Burnol' in the past 30 days
Google search for ‘Burnol’ in the past 30 days

उस दिन Google के ‘related topics’ लिबरल, इंटरनेट मीम, भगवान राम और राम जन्मभूमि से संबंधित थे।

पिछले 7 दिनों में ‘बर्नोल’ का सर्च

पिछले 7 दिनों में गूगल सर्च पर काफी दिलचस्प परिणाम देखे गए। हालाँकि 5 अगस्त को 1:30 बजे दोपहर में बर्नोल का सर्च करने वाले शीर्ष राज्य झारखंड, असम, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और गोवा थे।

Google search for 'Burnol' in the past 7 days
Google search for ‘Burnol’ in the past 7 days

हालाँकि, सबसे दिलचस्प बात यह है कि Google द्वारा विश्लेषण में  ‘related queries’ सेक्शन में कुछ दिलचस्प परिणाम सामने आए। इसके मुताबिक पिछले सप्ताह में, ‘बर्नोल’ के लिए सबसे लोकप्रिय संबंधित प्रश्न ‘आज तक बर्नोल’, ‘आज तक बर्नोल विज्ञापन’ आदि थे।

Google search for 'Burnol' in the past 7 days
Google search for ‘Burnol’ in the past 7 days

राम मंदिर भूमि पूजन के दौरान Aaj Tank Burnol विज्ञापन

दरअसल 5 अगस्त को भूमि पूजन के दौरान लाइव दिखाते समय की एक तस्वीर वायरल हो रही है। इस तस्वीर में पीएम मोदी पूजन कर रहे होते हैं और उसी समय स्क्रीन पर बर्नोल का विज्ञापन दिखाया जाता है। यह फोटो नेटिज़न्स के लिए मनोरंजन का एक स्रोत बन गई, क्योंकि पूजा से ‘लिबरल और इस्लामी जल रहे थे’, तो उनके लिए इस विज्ञापन को दिखाना उपयुक्त माना गया।

हालाँकि इंडिया टुडे ने बाद में बताया कि ये तस्वीर एडिट की हुई थी। इंडिया टुडे ने ट्वीट कर कहा कि चैनल ने राम मंदिर के भूमि पूजन के दौरान बर्नोल का कोई विज्ञापन नहीं चलाया था। इसलिए, वायरल होने वाली यह फोटो नकली थी।

हिन्दुओं को गाली, लेकिन बुर्का, शरिया, मौलाना, मदरसा पर चुप्पी: जस्टिस काटजू ने ‘सेकुलर’ गैंग को लताड़ा

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कण्डेय काटजू ने हिन्दू धर्म को गाली देने वाले वामपंथी लिबरलों को जमकर लताड़ लगाई है। उन्होंने कहा है कि कन्हैया कुमार, शेहला रशीद और उमर खालिद जैसे जेएनयू के पूर्व छात्र नेता हिन्दू कट्टरवाद पर जम कर निशाना साधते हैं, लेकिन बुर्का, शरिया, मदरसा और मौलानाओं की कभी निंदा नहीं करते हैं।

मार्कण्डेय काटजू ने इसके पीछे का कारण भी बताया है। उन्होंने कहा कि ये सब चुनावों में खास मजहब के वोट बैंक को ध्यान में रखकर किया जाता है। पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि इनके सेकुलरिज्म की सच्चाई भी यही है।

उन्होंने इस्लामी कट्टरवादी पत्रकार राणा अयूब का एक वीडियो भी शेयर किया है। बकौल काटजू, इस वीडियो में अयूब ‘सेकुलरिज्म चैंपियन’ हैं और हिन्दू कट्टरवाद का विरोध करती हैं, लेकिन इस्लामी पिछड़ेपन पर कोई बात नहीं करती।

काटजू ने कहा कि 2014 से भारत में जो बहुसंख्यकवाद शुरू हुआ, वो उससे पहले दशकों तक सेकुलर पार्टियों द्वारा की गई हरकतों का नतीजा था। उन्होंने इसके पीछे वोट बैंक के तुष्टिकरण को कारण बताया। उन्होंने गिनाया कि कैसे हिन्दू लॉ को तो हटा दिया गया, लेकिन शरिया और तीन तलाक को बरकरार रखा गया। उन्होंने राजीव गाँधी द्वारा शाहबानो पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला बदलने की भी चर्चा की।

मार्कण्डेय काटजू ने इस्लामी कट्टरवादियों को लताड़ा

काटजू ने कहा कि पत्रकार आरफा खानम शेरवानी का सेकुलरिज्म ज्यादा से ज्यादा पाकिस्तान में हिन्दू मंदिर के निर्माण का समर्थन करने तक ही सीमित है। उन्होंने पूछा कि क्या वो मदरसों, मौलानाओं, शरिया और बुर्का का विरोध कर सकती हैं, जिन चीजों ने समुदाय विशेष को हमेशा पिछड़ा बनाए रखा। उन्होंने कहा कि आरफा और अयूब अगर सच में सेकुलर हैं तो क्या वो इन चीजों को हटाने का समर्थन करते हुए मजहब विशेष को आधुनिक बनाने की कोशिश कर सकती हैं।

ज्ञात हो कि आरफा ने यह मानने से इनकार कर दिया था कि तबलीगी जमात वाले महिलाओं के साथ बदसलूकी या उनका शोषण कर सकते हैं। उसने कहा था कि जमाती नि:स्वार्थ भाव से सेवा करने वाले लोग हैं, जो मजहब/समाज की सेवा के लिए दुनियादारी, यहॉं तक कि अपने परिवार से भी दूर रहते हैं।

इसी तरह राणा अयूब ने एक ऐसा वीडियो शेयर किया था, जिसमें एक मस्जिद को जलाया जा रहा था। अयूब ने इस वीडियो को दिल्ली का बता कर पेश किया था।

मार्कण्डेय काटजू ने अपना अनुभव शेयर करते हुए कहा कि जब वो हिन्दू कट्टरपंथ पर बोलते हैं तो दूसरे मजहब वाले उनकी खूब प्रशंसा करते हैं। लेकिन जैसे ही उन्होंने इस्लामी कट्टरपंथ और ग़लत रिवाजों पर बोलना शुरू किया तो मजहब विशेष ने उन्हें साम्प्रदायिक बताया ही। साथ में ये भी कहा कि वो कभी सेकुलर नहीं बन सकते। उन्होंने कहा कि सेकुलरिज्म ‘वन वे ट्रैफिक’ नहीं हो सकता।

₹1 लाख करोड़ के कृषि इंफ्रा फंड के शुभारंभ के साथ PM मोदी कल करेंगे 8.5 करोड़ किसानों को ₹17,000 करोड़ की 6वीं किस्त जारी

पीएम नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कल, रविवार (अगस्त 09, 2020) सुबह 11 बजे कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत ₹1 लाख करोड़ की आर्थिक सुविधा का शुभारंभ करेंगे। इसके साथ ही, पीएम मोदी PM-KISAN योजना के तहत 8.5 करोड़ किसानों को ₹17,000 करोड़ की 6वीं किस्त भी जारी करेंगे।

इस समारोह को देशभर के लाखों किसानों, सहकारी समितियों और नागरिकों द्वारा देखा जाएगा। कृषि और किसान कल्याण मंत्री, श्री नरेंद्र सिंह तोमर, भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹1 लाख करोड़ की ‘कृषि अवसंरचना कोष’ के तहत केंद्रीय वित्त पोषण योजना की केंद्रीय सुविधा को मंजूरी दे दी है। फ़सल कटाई के बाद के प्रबंधन के बुनियादी ढाँचे और सामुदायिक कृषि परिसंपत्तियों, जैसे – कोल्ड स्टोरेज, संग्रह केंद्रों, प्रोसेजिंग इकाइयों, आदि के निर्माण को बढ़ावा देगा।

इन एसेट्स के माध्यम से किसान अपनी उपज का अधिक मूल्य प्राप्त कर सकेंगे, क्योंकि इन सुविधाओं के परिणामस्वरूप किसान अपनी फसल को स्टोर करने में सक्षम होंगे और उन्हें ऊँची कीमतों पर बेच सकते हैं।

लोन देने वाली कई संस्थाओं के साथ साझेदारी में फंडिंग सुविधा के तहत 1 लाख करोड़ रूपए मंजूर किए जाएँगे, जिसके लिए 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से 11 ने पहले ही MOU पर हस्ताक्षर किए हैं।

PM-KISAN योजना

उल्लेखनीय है कि दिसंबर 01, 2018 को शुरू की गई प्रधानमंत्री किसान निधि (PM-KISAN) योजना में धनराशि को सीधे तौर पर प्रमाणित लाभार्थियों के बैंक खाते में हस्तांतरित किया जाता है, ताकि अवरोधों पर लगाम लगाई जा सके और किसानों के लिए सुविधा बढ़ाई जा सके।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को सालना ₹6,000 की आर्थिक मदद दी जाती है। किसानों के खातों में साल भर में तीन किस्त के जरिए यह पैसा ट्रांसफर किया जाता है। इस योजना के तहत अब तक पाँच किस्त जारी की जा चुकी हैं और अब छठी किस्त जारी की जा रही है।

अब तक जारी किस्त

  1. किसान योजना पहली किस्त – फरवरी 2019 में जारी की गई थी
  2. किसान योजना दूसरी किस्त – अप्रैल 2019 को जारी की गई थी
  3. किसान योजना तीसरी किस्त – अगस्त 2019 में जारी की गई थी
  4. किसान योजना चौथी किस्त – जनवरी 2020 में जारी की गई
  5. किसान योजना 5वीं किस्त – अप्रैल, 2020 में जारी की गई
  6. किसान योजना 6वीं किस्त – रूपए भेजे जाने शुरू कर दिए गए हैं

सरकार ने COVID-19 महामारी के दौरान किसानों को राहत देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए लॉकडाउन के दौरान किसानों की मदद के लिए लगभग ₹22,000 करोड़ जारी किए हैं।

बरखा के शो में रिया को क्लीनचिट देते हुए सुशांत को ‘बीमार’ बताने वाली थेरेपिस्ट सुसैन वॉकर पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

बॉलीवुड एक्टर सुशांत की तथाकथित थेरेपिस्ट सुसैन वॉकर मोफत ने पिछले दिनों विवादित पत्रकार बरखा दत्त को दिए इंटरव्यू में अभिनेता के मेडिकल रिकॉर्ड की गोपनीयता को नजरअंदाज करते हुए दावा किया कि उन्हें बाइपोलर डिसऑर्डर (bipolar disorder) था।

अब इसको लेकर महाराष्ट्र के भाजपा विधायक आशीष शेलार ने सुसैन वॉकर मोफत के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। इसके साथ ही भाजपा विधायक ने सुसैन वॉकर के खिलाफ कथित वित्तीय अनियमितताओं की जाँच की भी माँग की है।

बता दें कि आशीष शेलार पेशे से एक वकील हैं। जानकारी के मुताबिक उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग से सुसैन वॉकर मोफत के वित्तीय रिकॉर्ड की अनियमितता की जाँच करने के लिए कहा, जो मनी लॉन्ड्रिंग की तरफ इशारा करती है।

इसके लिए उन्होंने प्रवर्तन अधिकारियों से सुसैन वॉकर मोफत के क्लिनिक के सीसीटीवी फुटेज हासिल करने, क्लाइंट की लिस्ट को वेरिफाई करने और उनके वित्तीय रिकॉर्ड की जाँच करने के लिए कहा है, ताकि पता लगाया जा सके कि वो मनी लॉन्ड्रिंग के रैकेट का हिस्सा है या नहीं।

भाजपा विधायक ने मुंबई पुलिस आयुक्त, संयुक्त निदेशक (सीबीआई), संयुक्त निदेशक (ईडी), मुख्य आयुक्त (आयकर विभाग) और मुंबई पुलिस को दी अपनी शिकायत में थेरेपिस्ट पर दुर्व्यवहार और पुलिस जाँच को प्रभावित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने सुसैन वॉकर के भारत में रहने को लेकर मिले वीजा पर भी सवाल उठाए।

आशीष शेलार ने सवाल उठाया कि क्या किसी ने थेरेपिस्ट को गोपनीयता खंड का उल्लंघन करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने माँग की कि सुसैन वॉकर से मुंबई में पूछताछ की जानी चाहिए। इसके साथ ही शेलार ने एजेंसियों से मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम की धारा 23 (2) का उल्लंघन करने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया।

उन्होंने कहा कि वैध विदेशी लाइसेंस के बिना विदेशी नागरिक द्वारा सुशांत सिंह राजपूत का इलाज अवैध है। शेलार ने सुसैन वॉकर के क्लाइंट की लिस्ट की जाँच करने के लिए कहा, ताकि जो भी राजनेता या फिल्म स्टार उनके संपर्क में होंगे, उनकी पहचान हो सके।

गौरतलब है कि बरखा दत्त ने 1 अगस्त के दिन सुशांत सिंह राजपूत की तथाकथित थेरेपिस्ट सुसैन वॉकर मोफत के साक्षात्कार का एक वीडियो साझा किया था। जिस पर नेटिज़न्स ने गंभीर सवाल खड़े किए। अपने बयान में सुसैन वॉकर का कहना था कि यह उनकी ज़िम्मेदारी थी कि वह सार्वजनिक रूप से सामने आएँ।

इसके अलावा उनका यह भी कहना था कि रिया चक्रवर्ती सुशांत सिंह की भावनात्मक रूप से मदद ही करती थीं। फिलहाल सुशांत सिंह की मौत के मामले में रिया चक्रवर्ती के खिलाफ़ जाँच जारी है

बता दें कि थेरेपिस्ट के साथ बरखा दत्त के साक्षात्कार के बाद सुशांत के जीजा विशाल कीर्ति ने एनडीटीवी के पूर्व न्यूज एंकर बरखा दत्त को लताड़ लगाते हुए कहा था कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता फैलाने का अवसर नहीं है।

दलित होने के कारण केशव मौर्या को BJP ने भूमिपूजन में नहीं बुलाया: AAP सांसद संजय सिंह ने फैलाया झूठ

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया पर झूठ फैलाया है। उन्होंने भाजपा को दलित विरोधी पार्टी ठहराने के लिए ट्विटर पर झूठ फैलाया। इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ‘संजय सिंह झूठा है’ ट्रेंड करने लगा। आप नेता ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या को अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि कार्यक्रम में बुधवार (अगस्त 5, 2020) को नहीं बुलाया गया, क्योंकि वो दलित हैं।

दरअसल, ये झूठ है। मौर्या ने उसी दिन ट्विटर पर फोटो डाल कर बताया था कि वो श्री राम जन्मभूमि परिसर में आयोजित भूमि पूजन कार्यक्रम के साक्षी बन रहे हैं। उन्होंने ट्वीट किया था, “श्री राम जन्मभूमि परिसर में आयोजित भूमि पूजन कार्यक्रम के भव्य पंडाल में ऐतिहासिक दिन का साक्षी बन रहा हूॅं। परम सौभाग्य एवं अद्भुत और अलौकिक आनंद की अनुभूति कर रहा हूॅं।”

मौर्या ने 5 अगस्त को ही यह ट्वीट किया था। बावजूद 7 अगस्त को संजय सिंह ने ट्विटर पर लिखा कि उन्हें एक दलित नेता ने बताया है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को राम मंदिर भूमिपूजन कार्यक्रम में इसीलिए नहीं बुलाया गया क्योंकि वो दलित हैं और केशव प्रसाद मौर्या को भी इसीलिए नहीं बुलाया गया। उन्होंने पूछा कि भाजपा ऐसा क्यों करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा दलितों को मंदिर के बाहर रखना चाहती है।

उन्होंने ये भी ग़लत बोला कि केशव प्रसाद मौर्या दलित हैं। वो ओबीसी ओबीसी समुदाय से आते हैं। उनके प्रदेश अध्यक्ष रहते ही भाजपा को उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत से जीत मिली थी, जिसके बाद उन्हें उप-मुख्यमंत्री बनाया गया। अपने गरीबी के दिनों में चाय और अखबार बेच र गुजर-बसर चलाने वाले केशव प्रसाद मौर्या ने RSS से जुड़ने के बाद राम मंदिर और अयोध्या आंदोलन में हिस्सा लिया था।

जानने वाली बात ये भी है कि यजमान के रूप में भूमिपूजन में हिस्सा ले रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ओबीसी समुदाय से ही आते हैं। बावजूद इसके संजय सिंह ने केशव मौर्या को दलित बताया और साथ ही उन्हें भूमिपूजन में न बुलाए जाने की बात कही।

इससे पहले शाहीन बाग में हुई फायरिंग की घटना के तुरंत बाद आप नेता संजय सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा था कि यह सब बीजेपी की चाल है। बाद में तस्वीरों में कपिल गुर्जर को आप नेता आतिशी और संजय सिंह के साथ देखा गया था। वहीं तस्वीरों में आप नेता आतिशी, संजय सिंह और दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को फायरिंग करने वाले कपिल गुर्जर और उनके पिता का स्वागत करते हुए दिखाई दे रहे थे।

‘ये आँकड़े हैरान करने वाले हैं’: PM मोदी का समर्थन देख इंडिया टुडे के सर्वे से राजदीप सरदेसाई हुए हक्के-बक्के

शुक्रवार का दिन ‘वरिष्ठ जर्नलिस्ट’ राजदीप सरदेसाई के लिए बेहद मुश्किल रहा होगा। उन्होंने उसी चैनल के आँकड़ों को गुमराह करने वाला और अविश्वसनीय बताया जिसमें खुद काम करते हैं। नरेन्द्र मोदी सरकार को लेकर किए गए एक सर्वे के आँकड़ों पर उन्हें यह कारनाम करना पड़ा। सर्वे में भाग लेने वाले लोगों ने मोदी सरकार के काम करने के तरीकों को उत्कृष्ट और पूर्ववर्ती UPA सरकार से कहीं अधिक बेहतर बताया था।

2019 के लोकसभा चुनाव के एक साल बाद, समाचार चैनल ‘इंडिया टुडे’ पर ‘मूड ऑफ द नेशन’ पोल शुक्रवार (अगस्त 07, 2020) को प्रकाशित किया गया। कोरोना महामारी के बाद किए गए इस बेहद महत्वपूर्ण सर्वेक्षण में यह बात सामने आई कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रदर्शन से जनता बेहद संतुष्ट है।

क्या था सर्वे?

इंडिया टुडे द्वारा कराए गए ‘मूड ऑफ़ द नेशन पोल’ में भाग लेने वाले लगभग दो-तिहाई लोग मोदी सरकार के आर्थिक संकट से निपटने को लेकर किए गए कार्यों से खुश थे। कम से कम 71% नागरिकों ने मोदी सरकार को कोरोना महामारी के कारण होने वाले आर्थिक संकट से निपटने के लिए ‘शानदार’ या ‘अच्छा’ माना।

चित्र साभार- इंडिया टुडे

इंडिया टुडे के सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि भाग लेने वाले कुल लोगों में से 43% ने कहा कि मोदी सरकार ने पिछली मनमोहन सरकार की तुलना में आर्थिक संकट को बेहतर तरीके से सँभाला है। सर्वेक्षण से पता चला कि कम से कम 88% प्रतिभागियों ने कहा कि आर्थिक संकट से निपटने में पिछली सरकार की तुलना में मोदी सरकार बेहतर या बराबर थी।

चित्र साभार- इंडिया टुडे

पीएम मोदी को मिली ज्यादा रेटिंग तो बौखलाए राजदीप सरदेसाई

जैसे ही इंडिया टुडे के पत्रकार राहुल कंवल ने अपने शो में सर्वे के इन आँकड़ों को प्रकाशित किया, राजदीप सरदेसाई के चेहरे पर मायूसी छा गई। राजदीप के लिए मोदी सरकार को लेकर जनता की इस प्रतिक्रिया पर विश्वास करना बेहद मुश्किल था। खासकर, ऐसे समय में, जब लगभग पूरा विश्व ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है, अर्थव्यवस्था के मामले में मोदी सरकार को लेकर राजदीप कुछ और ही नतीजों की उम्मीद में थे, लेकिन परिणाम एकदम विपरीत रहे।

सर्वेक्षण पर टिप्पणी करते हुए, राजदीप सरदेसाई ने कहा कि वह सर्वेक्षण से ‘हैरान’ हैं। उन्होंने कहा कि वह चीन के साथ हाल ही में हुए झड़पों के मोदी सरकार पर इंडिया टुडे के सर्वेक्षण पर भरोसा कर सकते हैं, लेकिन अर्थव्यवस्था के मामले में मोदी सरकार को लेकर अनुकूल परिणाम दिखाने वाले पर नहीं।

अपने ही समाचार चैनल द्वारा किए गए सर्वे के नतीजों से हतप्रभ और निराश राजदीप ने कहा, “मैं कुछ हद तक चीन के नंबरों को समझ सकता हूँ, लेकिन मैं इन नंबरों को भयावह मानता हूँ। यह एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर आम आदमी को हमलावर होना चाहिए। यदि 24% लोग इसे उत्कृष्ट, और 48% अच्छा कहते हैं, तो यह कुल 72% है! चलो इसे समझने की कोशिश करते हैं!”

क्या रहा इंडिया टुडे के सर्वे का नतीजा

सर्वेक्षण में शामिल 78% लोगों ने पीएम मोदी के प्रदर्शन को उत्कृष्ट या अच्छा पाया। पीएम मोदी के समर्थन में यह रेटिंग वर्तमान में सबसे अधिक है। इंडिया टुडे का सर्वेक्षण ऐसे समय में आया है जब भारत कोरोना वायरस महामारी, आर्थिक संकट के साथ-साथ चीन के साथ बढ़ते सीमा तनाव के कारण कई संकटों से मुकाबिल है।

‘उन्होंने हमें बचा लिया’: कप्तान दीपक साठे की समझदारी की वजह से नहीं लगी विमान में आग, IAF में रह चुके थे विंग कमांडर

केरल में कोझिकोड एयरपोर्ट पर एअर इंडिया का विमान (AXB1344, B737) रनवे पर फिसल गया। रनवे पर विमान के फिसलने के बाद विमान क्रैश हो गया और दो हिस्सों में टूट गया। शुक्रवार (7 अगस्त, 2020) हादसे में 18 लोगों की दुखद मृत्यु हो गई। अधिकारियों ने बताया कि मृतकों में मुख्य पायलट कैप्टन दीपक साठे और उनके सह-पायलट अखिलेश कुमार भी शामिल हैं।

कप्तान दीपक वसंत साठे भारतीय वायुसेना में पहले विंग कमांडर रह चुके थे। शुक्रवार के विमान दुर्घटना में जीवित बचे लोगों ने कहा कि यह कैप्टन साठे ने आखिरी समय तक विमान को बचाने की पुरजोर कोशिश की। पायलट के समझदारी के कारण हादसे के बाद विमान में आग नहीं लगा। जिसकी वजह से वे जीवित बच सके।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, जैसे ही कैप्टन साठे को पता चला कि विमान दुर्घटनाग्रस्त हो जाएगा, उन्होंने विमान क्रैश होने से ठीक पहले इंजन को बंद कर दिया। जिससे उनके यात्रियों और केबिन क्रू की जान बच गई। प्रारंभिक रिपोर्टों से पता चलता है कि करिपुर टेबलटॉप एयरपोर्ट पर विमान लैंडिंग करते समय रनवे से फिसलकर खाई में गिर गया। इस हादसे में विमान को दो टुकड़े हो गए हैं।

इस भयानक हादसे से बचे लोगों ने बताया कि कि बहादुर पायलटों और स्थानीय निवासियों की वजह से विमान में सवार यात्री जिंदा बच सके है। हादसे का पता चलते ही राहत और बचाव के लिए तेज बारिश के बीच, स्थानीय लोग बड़ी संख्या में मौके पर जुट गए। और हादसे में घायल लोगों को तुरंत विमान में लगी थोड़ी आग और धुएँ के बावजूद बचाना शुरू किया।

इस हादसे में सुरक्षित बाहर निकलने के बाद वी इब्राहिम नाम के यात्री ने बताया, “मूसलाधार वर्षा हो रही थी। पायलट ने मौसम खराब होने की बात कहते हुए विमान उतारने से पहले चेतावनी दी थी। उन्होंने दो बार सुरक्षित लैंडिंग की कोशिश की लेकिन नियंत्रण खो दिया। विमान रनवे से फिसल गया और उसके दो टुकड़े हो गए। इस भयानक हादसे में जिनकी जान बच गई है, वे बहुत ही भाग्यशाली है।

कैप्टन दीपक साठे भारत के पूर्व वायु सेना के पायलट थे। वे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के पूर्व छात्र थे। उन्होंने जूलियट स्क्वाड्रन से एनडीए पुणे के 58 वें पाठ्यक्रम में पहला स्थान हासिल किया। इसके अलावा 1981 में AFA उन्होंने ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ जीता था।

दिलचस्प बात है कि कैप्टन दीपक साठे ने मिग-17 स्क्वाड्रन (गोल्डन एरो) के साथ भी काम किया है, जिसकी सिफारिश हाल ही में राफेल फाइटर जेट्स के साथ की गई थी। कैप्टन साठे जून 1981 में वायु सेना में शामिल हुए थे और जून 2003 में भारतीय वायुसेना को निर्धारित समय से पहले छोड़ दिया था।

कैप्टन डीवी साठे एक अनुभवी पायलट थे। वह भारतीय वायुसेना में भी एक प्रायोगिक परीक्षण पायलट थे। उन्होंने बोइंग 737 उड़ान भरने के लिए एयर इंडिया एक्सप्रेस में जाने से पहले एयर इंडिया के लिए एयरबस 310 को उड़ाया था।

रिटायर्ड एयर टेस्ट मार्शल मनमोहन बहादुर ने कहा, यह दुख की बात है। साठे मेरे साथ एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग इस्टैब्लिशमेंट (IAF की फ्लाइट टेस्टिंग इस्टैब्लिशमेंट) में हथियारों के कमांडर थे। उन्होंने आगे कहा- “RIP Tester.”, मनमोहन बहादुर ने बताया कि टेस्ट पायलट के कॉल साइन के तहत नाम के आगे ‘टेस्टर’ लगाया जाता है।

उनके सह-पायलट कैप्टन अखिलेश कुमार ने पिछले साल शादी की थी। इस वक्त दोनों पायलटों के शव कोझिकोड के MIMS अस्पताल में रखे गए हैं।

सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने बताया बोइंग 737 दुबई से कालीकट इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर वंदे भारत मिशन के तहत आ रहा था। विमान में 190 लोग सवार थे। यात्रियों में 10 बच्चे भी शामिल थे। भारी बारिश के कारण रनवे पर उतरने के बाद विमान फिसल गया और घाटी में गिर गया। बोर्ड पर मौजूद 190 लोगों में से 123 लोग घायल हुए हैं, और 20 लोग गंभीर स्थिति में हैं और कुछ लोगों की रीढ़ की हड्डी में भी चोट है।

अच्छी बेगम बनो, जिसने मुस्लिम बनाया उसके पास जाओ: 14 साल की ईसाई बच्ची के आँसू से भी नहीं पसीजा लाहौर हाईकोर्ट

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय का उत्पीड़न लगातार जारी है। इस बार अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले इस अत्याचार का ज़िम्मेदार कोई और नहीं बल्कि वहाँ की अदालत है। लाहौर हाई कोर्ट ने एक हैरान करने वाले फैसले में ईसाई नाबालिग लड़की को उस व्यक्ति के पास लौटने का हुक्म दिया है जिसने उसे अगवा किया। अपहरणकर्ता ने जबरन धर्मांतरण कर उससे निकाह कर लिया था।

14 साल की इस लड़की का नाम है मारिया शहबाज़ (Maria Shahbaz)। इस साल अप्रैल में मोहम्मद नक्श और उसके साथियों ने फैसलाबाद में उसे अगवा कर लिया था। काम पर जाते वक्त उसे अगवा किया गया था। इस मामले में फैसलाबाद की अदालत ने कहा था कि लड़की को पुनर्वास केंद्र भेजा जाए। साथ ही उसकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए। लेकिन लाहौर की हाईकोर्ट ने इस आदेश को ही बदल दिया।   

लाहौर हाई कोर्ट द्वारा जारी आदेश के मुताबिक़ लड़की को पुनर्वास केंद्र नहीं भेजा जाएगा। उसे उसी मोहम्मद नक्श के पास वापस जाना पड़ेगा जिसने उसे अगवा किया था। WION में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि लड़की ने स्वेच्छा से इस्लाम धर्म कबूल किया। उसने अपनी मर्ज़ी से ही अपहरण करने वाले व्यक्ति से शादी भी की। इसलिए उसे एक ‘अच्छी बेगम’ होने के नाते अपने पति के साथ रहना चाहिए।

कोर्ट ने उन दस्तावेज़ों को देखने और स्वीकार करने से साफ़ मना कर दिया था जिनमें यह साफ़ तौर पर लिखा था कि जब लड़की का अपहरण हुआ तब वह नाबालिग थी। ख़बरों के अनुसार, जब अदालत ने मोहम्मद नक्श के हक़ में फैसला सुनाया तब लड़की की आँखों में आँसू थे। रिपोर्ट्स की मानें तो पाकिस्तान में हर साल लगभग 1000 लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन कराया जाता है। इसके बाद उनकी मर्ज़ी के खिलाफ़ उनसे निकाह रचाया जाता है।   

इस मामले के तीन चश्मदीदों (परवेज़ मसीह, यूनुस मसीह और नईम मसीह) ने भी अपना बयान दर्ज कराया था। उन्होंने अपने बयान में कहा था कि मारिया का अपहरण किया गया था। उसने विरोध भी किया था लेकिन कुछ लोग उसे उठा कर गाड़ी में ले गए। उन सभी लोगों के पास हथियार भी थे, इसलिए कोई मारिया की मदद नहीं कर पाया। अगवा करने वालों ने लोगों में डर कायम करने के लिए हवाई गोलीबारी भी की थी। 

पीड़िता की माँ ने इस बारे में इंटरनेश्नल क्रिश्चयन कंसर्न से बातचीत भी की थी। उन्होंने अपनी बेटी के साथ दुष्कर्म होने की आशंका जताई थी। इसके अलावा उसके जबरन धर्म परिवर्तन पर दुःख जताया था। उनका कहना था कि जिस तरह के हालात हैं उन्हें देख कर हत्या का डर भी लगता है।

National Database and Registration Authority (NADRA) द्वारा जारी किए गए प्रमाण-पत्र के अनुसार मारिया की उम्र 18 साल से कम है। लेकिन मोहम्मद नक्श ने शादी के दस्तावेज़ों में उसे 18 से ज़्यादा का दिखाया है। इसके अलावा लड़की को भी अपना पक्ष सही से नहीं रखने दिया गया था।   

यह पहली ऐसी घटना नहीं है जब पाकिस्तान में ईसाई लड़कियों के साथ अत्याचार किया गया हो। हुमा यूनुस नाम की लड़की का पिछले साल 10 अक्टूबर को अपहरण किया गया था। लड़की को आरोपित अब्दुल जब्बार नाम के युवक ने कराची स्थित उसके घर से उठा लिया गया था। कुछ समय बाद ख़बर आई थी कि शारीरिक रूप से शोषण किए जाने के बाद वह गर्भवती हो गई थी। आरोपित ने पीड़ित को एक कमरे में बंद करके रखा था। यहाँ तक कि उसे अपने माता-पिता से भी नहीं मिलने देता था।  

सुशांत सिंह मामले में क्या छिपा रही मुंबई पुलिस, रिया ने किसको दिए पैसे: बिहारियों के लिए इसके मायने बता रहे अजीत भारती

सुशांत सिंह राजपूत की मौत को आत्महत्या कहना इस घटना का बेहद सतही आँकलन कहा जा सकता है। जैसे-जैसे जाँच आगे बढ़ रही है, इसमें हर दिन और हर पल नया खुलासा हो रहा है। इस केस में अभी तक मौन रहने का कारण यह भी था कि महज कॉन्सपिरेसी थ्योरी के आधार पर बॉलीवुड में व्याप्त नेपोटिज्म, माफियाराज आदि निष्कर्ष पर पहुँचना भी जायज नहीं था।

इस प्रकरण में अब सुशांत सिंह राजपूत की मौत से भी ज्यादा महत्वपूर्ण दो बातें होतीं चली गईं – सुशांत सिंह राजपूत का ‘बिहारी’ होना, और मुंबई पुलिस का बिहार पुलिस के साथ ‘बिहारी पुलिस’ जैसा बर्ताव किया जाना! उन्हें ‘बिहारियों’ के साथ होते रहने वाले सदियों पुराने माइंडसेट के चलते ही नीच और घटिया समझकर उनके साथ हेय बर्ताव करते हुए उन्हें जाँच से रोका गया, लेकिन बिहार पुलिस की जाँच में समस्या क्या थी?

सुशांत सिंह राजपूत की मौत को पीछे रखकर उनके मानसिक स्वास्थ्य को ही मुख्य विषय बनाने में मीडिया ने पूरी भागीदारी निभाई है। जस्टिस लोया की मौत, जो कि उनके परिवार द्वारा भी नैसर्गिक बताई गई थी, रवीश कुमार जैसे प्रपंचकारी आज तक सवाल खड़े करते हैं, तो फिर जिस सुशांत सिंह की मौत पर, और अब इसकी जाँच पर इतना बवाल है, उस पर रवीश कुमार क्यों सवाल नहीं कर रहे?

इस पूरे प्रकरण में सुशांत सिंह राजपूत की मौत, नेपोटिज्म पर बहस, सुशांत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत, महाराष्ट्र सरकार का हस्तक्षेप, बिहार और मुंबई पुलिस के बीच टकराव, सुशांत की पुरानी मित्र अंकिता लोखंडे के खुलासे, इन सभी बातों पर विस्तार से ऑपइंडिया के सम्पादक अजीत भारती का विवरण आप इस यूट्यूब लिंक पर देख सकते हैं।