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भूमिपूजन करते PM मोदी के हाथ में कॉन्ग्रेस MLA ने थमाया कटोरा, फिर डिलीट किया ट्वीट: तस्वीर से छेड़छाड़ को लेकर FIR

मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और कॉन्ग्रेस विधायक जीतू पटवारी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो के साथ छेड़छाड़ कर सोशल मीडिया में पोस्ट करने का आरोप लगा है। इस संबंध में इंदौर के छत्रीपुरा थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। विधायक के खिलाफ धारा 188 और 164 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

भाजपा नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे की शिकायत पर केस दर्ज किया गया। प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर के साथ छेड़खानी कर अपने ट्विटर अकाउंट से फोटो शेयर करने वाले विधायक पटवारी के खिलाफ भाजपा नेताओं ने शनिवार (अगस्त 8, 2020) रात डीआइजी से शिकायत की थी। छत्रीपुरा थाने के इंस्पेक्टर पवन सिंघल ने बताया कि मामले की जाँच की जा रही है।

शनिवार रात को भाजपा नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे, सांसद शंकर लालवानी, विधायक रमेश मेंदोला, मधु शर्मा, जेपी मूलचंदानी सहित अन्य नेता डीआइजी से उनके कार्यालय में जाकर मिले और ज्ञापन देकर विधायक पटवारी के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने की माँग की थी। नेताओं का कहना है कि पटवारी लगातार सोशल मीडिया पर सरकार और संगठन को लेकर अभद्र टिप्पणी करते हैं।

नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे ने विधायक जीतू पटवारी पर निशाना साधते हुए उनका मानसिक संतुलन खराब हो गया। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि हम विधानसभा में भी कॉन्ग्रेस विधायक की सदस्यता समाप्त करने की माँग करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने जीतू पटवारी की गिरफ्तारी की भी माँग की।

 MP: Complaint Against Congress MLA Jitu Patwari For Posting Morphed Image Of PM Modi; Second Such Post In Past 8 Days
जीतू पटवारी द्वारा किया गया ट्वीट

बता दें कि अयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण के भूमिपूजन के समय प्रधानमंत्री की तस्वीर में छेड़छाड़ कर पटवारी ने अर्थव्यवस्था, बेरोजगारी को लेकर टिप्पणी की थी। पटवारी द्वारा पोस्ट की गई फोटो में पीएम मोदी हाथ में कटोरा के साथ दिखाए गए थे। लेकिन पीएम के हाथ में भूमि पूजन के दौरान कहीं भी कटोरा नहीं था।

इसे लेकर भाजपा ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की ओरिजनल तस्वीर से छेड़छाड़ कर यह फोटो तैयार की गई है। हालाँकि विवाद बढ़ने पर जीतू पटवारी ने देर शाम अपने ट्विटर हैंडल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ में कटोरा लेने वाली तस्वीर को हटा दिया और ट्वीट भी डिलीट कर दिया।

गौरतलब है कि पिछले दिनों भी पूर्व मंत्री जीतू पटवारी अपने ट्वीट को लेकर बीजेपी के निशाने पर आए थे। उन्होंने एक विमान के अंदर की तस्वीर शेयर की थी। साथ ही यह दावा किया था कि यह प्रधानमंत्री का विमान है और तस्वीर उस विमान के अंदर की है। जीतू पटवारी द्वारा शेयर की गई यह तस्वीर वायरल हो गई थी बाद में पीआईबी ने पूरे मामले की पड़ताल करने पर इस तस्वीर को गलत ठहराया था।

7.2 करोड़ YouTube व्यूज के लिए रैपर बादशाह ने दिए थे ₹72 लाख: मुंबई क्राइम ब्रांच का खुलासा

मुंबई पुलिस ने रैपर बादशाह के साथ लगातार 3 दिनों तक चली पूछताछ के बाद खुलासा किया है कि उन्होंने अपने गाने ‘पागल है’ का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के लिए रुपए दिए थे। मुम्बई की क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट ने बताया कि रैपर बादशाह ने यूट्यूब पर 7.2 करोड़ व्यूज के लिए 72 लाख रुपए दिए थे। फेक एकाउंट्स, लाइक्स और व्यूज बेचे जाने का मामले में बादशाह से शनिवार (अगस्त 8, 2020) को लगातार तीसरे दिन पूछताछ हुई।

बादशाह ने पूछताछ के दौरान ही उक्त बातें कबूल की। बादशाह ने दावा किया था कि उनके गाने ‘पागल है’ ने रिलीज के पहले 24 घण्टे में ही यूट्यूब पर 7.5 करोड़ व्यूज पाए थे, लेकिन यूट्यूब की स्वामित्व वाली कम्पनी अल्फाबेट और गूगल ने इन दावों को नकार दिया था। आदित्य सिंह उर्फ बादशाह से पूछताछ के लिए पुलिस ने 25 सवालों की सूची तैयार की थी। इस दौरान रैपर ने कबूल किया कि उन्होंने एक कम्पनी को सोशल मीडिया पर व्यूज बटोरने के लिए रुपए दिए थे।

डीसीपी नंदकुमार ठाकुर ने कहा कि बादशाह किसी गाने की रिलीज के पहले 24 घण्टों का विश्व रिकॉर्ड सेट करना चाहते थे, इसीलिए उन्होंने ऐसा किया। अब पुलिस की रडार में बादशाह के कई अन्य गाने भी आ गए हैं, जिन्हें सोशल मीडिया पर रिलीज किया गया था। उनकी व्यूज में धोखाधड़ी की बात की भी जाँच की जाएगी। सोशल मीडिया मार्केटिंग एजेंसी के नाम पर फेक एकाउंट्स बेचे जाने के नेटवर्क का खुलासा हुआ है।

इस मामले में अब तक सेलेब्रिटीज और सोशल मीडिया मार्केटिंग कम्पनीज के लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं। अब तक 20 लोगों से पूछताछ हो चुकी है। 11 जुलाई को जब भूमि त्रिवेदी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि किसी ने उनका फेक एकाउंट बनाया है, तब जाकर इस रैकेट का खुलास हुआ। वहीं बादशाह ने कहा है कि वो इन चीजों में संलग्न नहीं थे और मुम्बई पुलिस की जाँच में सहयोग कर रहे हैं।

इससे पहले सोशल मीडिया ‘फर्जी फ़ॉलोअर्स केस’ में मुंबई पुलिस की क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट (CIU) ने 29 साल के काशिफ़ मंसूर को गिरफ्तार किया था। काशिफ़ मंसूर एक सिविल इंजीनियर है और उस पर इंस्टाग्राम, ट्विटर और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया पर लोगो को फेक ‘लाइक्स’, ‘व्यूज’ और ‘फॉलोअर्स’ मुहैया कराने का आरोप है। वो एक ऐसी वेबसाइट चलाता था, जो प्रोफ़ाइल यूजर, जिसमें मुख्यतः कई प्रसिद्ध हस्तियाँ भी शामिल थीं, को फ़ेक फॉलोवर्स बेचा करते थे।

जाँच का सबसे बड़ा चौंकाने वाला पहलू यह है कि बॉलीवुड सेलिब्रिटी दीपिका पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा जोनास के साथ 10 सेलिब्रिटीज के नाम फेक फॉलोअर्स की लिस्ट में शामिल हैं। पहले ही बताया गया था कि इस मामले में फ़िल्म और क्रिकेट जगत से जुड़े कुछ बड़े नाम भी हैं, जिन्हें पुलिस बयान के लिए तलब कर सकती है। इन फेक फॉलोअर्स को इंस्टाग्राम की भाषा मे ‘Bots’ कहा जाता है। अब मुंबई पुलिस जल्द ही इन सेलिब्रिटीज से पूछताछ कर सकती है।

‘गफ्फार के साथ दारू के नशे में लूट के लिए हुई मारपीट’: जबरन ‘जय श्री राम’ बुलवाने का लगाया था आरोप

राजस्थान के सीकर में एक ऑटो चालक ने आरोप लगाया कि उससे जबरदस्ती ‘जय श्री राम’ और ‘मोदी ज़िंदाबाद’ बुलवाया गया। जनसत्ता, आजतक और नवभारत टाइम्स सहित कई मीडिया संस्थानों ने इस घटना को जगह दी। इससे पहले भी कई ऐसे मामले आ चुके हैं जहाँ खास मजहब द्वारा लगाए गए ऐसे आरोप झूठे निकले हैं। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई भी की और दो लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

दरअसल, हुआ यूँ कि 52 वर्षीय ऑटो ड्राइवर गफ्फार अहमद ने सीकर सदर थाने में अपने साथ मारपीट की रिपोर्ट दर्ज कराई और साथ ही कहा कि उनसे जबरदस्ती ‘जय श्री राम’ और ‘मोदी ज़िंदाबाद’ बुलवाया गया।

तस्वीरों में गफ्फार के चेहरे पर चोट के निशान भी दिख रहे हैं। उनका आरोप है कि जब वो जिगरी छोटी गाँव से लौट रहे थे तो पिकअप वैन से आकर कुछ लोगों ने उन्हें रोका और उनके साथ मारपीट की।

सीकर पुलिस का कहना है कि ये घटना शनिवार (अगस्त 8, 2020) की है, जब उक्त ऑटो चालक कल्याण सर्कल से सवारियों को गाँव छोड़ कर वापस लौट रहा था। इसी दौरान आरोपितों ने उनसे जर्दा माँगा। इसके बाद हुई कहासुनी के बाद उन्होंने ऑटो ड्राइवर को खदेड़ कर उसके साथ मारपीट की। पुलिस ने मुकदमा दर्ज होने के 1 घंटे के भीतर ही आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। सदर थाना प्रभारी पुष्पेंद्र सिंह ने इसकी पुष्टि की।

पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि आरोपित शराब के नशे में थे और पहले भी लूटपाट की घटनाओं में संलिप्त रहे हैं। वो शराब के लिए रुपए भी माँग रहे थे। उन्होंने मारपीट के बाद रुपए भी छीन लिए। उनका इरादा लूटपाट का था।

थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपितों में से एक शंभु दयाल के ख़िलाफ़ पहले से ही 6 मामले दर्ज हैं। वहीं राजेन्द्र के ख़िलाफ़ पहले से ही मारपीट और एससी-एसटी एक्ट कर मामले दर्ज थे। वो पहले से अपराध करते रहे हैं।

सीकर मामले में पुलिस का बयान (साभार: अब तक न्यूज़)

हालाँकि, पुलिस ने ‘जय श्री राम’ और ‘मोदी ज़िंदाबाद’ बुलवाए जाने को लेकर कुछ नहीं कहा। पुलिस का अनुसंधान अभी भी जारी है। इसका मतलब है कि यह बात मनगढ़ंत भी हो सकती है, क्योंकि हमने पहले भी इस तरह के कई उदाहरण देखे हैं। जब आरोपितों से ऑटो ड्राइवर की कहासुनी हुई और वो पहले से अपराध करते रहे हैं, फिर मामला साम्प्रदायिक कैसे हो गया? पुलिस के बयान में इसकी चर्चा क्यों नहीं है।

FIR दर्ज होने के भीतर दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया। उनका किसी भी हिन्दू संगठन से कोई रिश्ता नहीं निकला है। ऊपर से पुलिस की अनुसंधान में अगर ऐसी कोई बात होती तो पुलिस ने अपने बयान में इस बारे में बताया होता। आरोपित स्थानीय ही हैं। उनकी गाड़ी भी जब्त कर ली गई है।

इससे पहले भी ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं जहाँ खास मजहब वालों ने इसी तरह की कहानी बनाई और बाद में झूठ पकड़े जाने पर कहा कि वो जल्दी न्याय के लिए ऐसा कर रहे थे। कभी इस्लामी टोपी उछालने तो कभी जबरदस्ती ‘जय श्री राम’ बोलने वाली बात कह के सुर्खियाँ तो बटोर ली और बाद में पकड़े गए। उन्हें पता होता है कि मीडिया का एक बड़ा वर्ग ऐसी खबरों को लपकने के लिए ताक में रहता है।

इसी तरह जुलाई 2019 में आज तक और इंडिया टुडे ने खबर चलाई थी कि उत्तर प्रदेश के चंदौली गाँव में खालिद ने जय श्री राम नहीं बोला, तो उसे आग में झोंक दिया गया। मगर चंदौली के एसपी संतोष कुमार सिंह ने इस बारे में बयान जारी करते हुए कहा था कि पुलिस ने खालिद के बयानों में विरोधाभास पाया है। उन्होंने बताया था कि एक चश्मदीद के बयान के मुताबिक, खालिद को किसी समूह ने आग में नहीं झोंका, बल्कि उसने खुद ही आग लगाई थी।

गफ्फार ने थाने में दर्ज कराई शिकायत

इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि जब पीड़ित “हाय, मुझे मेरी मर्ज़ी के खिलाफ ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए मजबूर किया गया” रो दे, तो हिन्दुओं को दुष्ट, साम्प्रदायिक दानव के रूप में दिखाने के लिए तैयार बैठे मीडिया गिद्ध केस को चमका देते हैं।

संस्कृत सिर्फ भाषा नहीं… संस्कृति, विज्ञान, तार्किक क्षमता और अन्य भाषाओं की प्राण भी है

संस्कृत भाषा के महत्व पर शंका करना अपने अस्तित्व पर शंका करने के बराबर है, क्योंकि जब तक मानव है, संस्कृत का महत्व तब तक असीम है। यह केवल वर्तमान भारत भूभाग की ही आधारशिला नहीं, अपितु मानवता की आधारशिला है।

वर्तमान समय में जब भी हम संस्कृत भाषा के महत्व की समीक्षा करते हैं, तब हम अंग्रेजी तथा अन्य भाषाओं के समानांतर इस भाषा को रखकर विचार करते हैं कि जैसे उन भाषाओं के ज्ञाता को धन की उपलब्धि होती है अथवा आजीविका मिलती है तो क्या ऐसा संस्कृत जानने वाले को भी उपलब्ध होगा?

संस्कृत भाषा के इस पक्ष में आई न्यूनता का मुख्य आधार परतंत्र इतिहास और स्वतंत्रता के बाद के शासन की त्रुटि है। इस पक्ष के अतिरिक्त आइए संस्कृत भाषा का महत्व विचारते हैं ।

ज्ञान की आदिमा भाषा

विश्व का सबसे प्राचीनतम उपलब्ध ग्रंथ ऋग्वेद है। यह तथ्य सर्वमान्य है। मैक्समूलर ने यहाँ तक कहा है, “जब तक मानव अपने इतिहास में रुचि लेता रहेगा और जब तक हम अपने पुस्तकालयों तथा संग्रहालयों में प्राचीन युग की स्मृतियों के चिन्ह सँजोए रहेंगे, तब तक मानव जाति के अभिलेखों से भरी-पूरी पुस्तकों की पंक्तियों के बीच पहली पुस्तक ऋग्वेद ही रहेगी।”

अत: मानव जाति के आदिम ग्रंथ की भाषा भी आदिमा है। अर्थात् संसार की प्रथम भाषा संस्कृत भाषा है। भाषा से भावों तथा ज्ञान की अभिव्यक्ति होती है तथा भाषा स्वैच्छिक वाचिक ध्वनि संकेतों की वह पद्धति है, जिसके द्वारा मानव समाज परस्पर विचारों का आदान-प्रदान करता है।

संस्कृत भाषा अन्य भाषाओं की तरह केवल अभिव्यक्ति का साधन मात्र ही नहीं है, अपितु वह मनुष्य के सर्वाधिक संपूर्ण विकास की कुंजी भी है। इस रहस्य को जानने वाले मनीषियों ने प्राचीन काल से ही संस्कृत को देव भाषा और अमृतवाणी के नाम से परिभाषित किया है।

संस्कृत केवल स्वविकसित भाषा नहीं बल्कि संस्कारित भाषा है। इसीलिए इसका नाम संस्कृत है। ऋग्वेद की भाषा विश्व के भाषाई अध्ययन में प्राचीनतम एवं महत्वपूर्ण स्थान रखती है। स्वयं ऋग्वेद में अनेक स्थलों पर भाषा तत्व के गंभीर सिद्धांत, दार्शनिक चिंतन, भाषा की परिशुद्धता, वैज्ञानिकता तथा सूक्ष्मता को जानना आवश्यक बताया गया है।

अत: मानव जाति के आदि स्रोत ग्रंथ को जानने के लिए संस्कृत का महत्व अनंत है। जो व्यक्ति ज्ञान के आदि स्रोत को नहीं जानना चाहता, उसके लिए उसकी भाषा का भी कोई महत्व नहीं है ।

देवताओं की भाषा

देवता शब्द से अभिप्राय है – जो देते हैं या जो प्रकाश वाले हैं “दानाद्वा दीपनाद्वा”। विश्व के आदिम ग्रंथ में प्रकृति के महत्व को बहुत अधिक सूक्ष्मता से बताया गया है। क्योंकि मानव का अस्तित्व प्रकृति के सामंजस्य पर ही निर्भर करता है तथा ज्ञान नैमित्तिक है, मनुष्य उसे प्रकृति से सीखता है। अत: उन ग्रंथों में सृष्टि के हर उस पदार्थ को जो मनुष्य को कुछ देता है, देवता या देव कहकर संबोधित किया गया है।

वेद में सृष्टि की दैवीय शक्तियों का मनुष्य को बोध (ज्ञान) कराया गया है। उस ज्ञान कराने की शैली स्तुति परक है। स्तुति के माध्यम से हम किसी भी पदार्थ के गुण और कर्मों को बताते हैं। वेदों में प्रकृति और उस प्रकृति के संचालक एवं नियामक के स्वरूप को बताया गया है, जो प्रत्येक मनुष्य को जानने योग्य है। संस्कृत भाषा देवों के स्वरूप बताने के कारण देवों की भाषा कहलाती है। प्रकृति और उसके नियामक के स्वरूप को जानने के लिए संस्कृत भाषा का महत्व सर्वदा रहेगा ।

संस्कृति का आधार

संस्कृति का अर्थ है परिमार्जित संस्कारों से युक्त मनुष्यों की सभ्यता। हमारी आत्मा, हमारी अस्मिता, भारत की भारतीयता उसकी संस्कृति में है, जिसका प्राण संस्कृत भाषा है। संस्कृति व्यक्ति के विकास के साथ-साथ आंतरिक विकास की भी बोधक होती है।

इसका लक्ष्य व्यक्ति का विकास और प्रकृति का संतुलन है। भाषा संस्कृति की वाहिका होती है। भारतीय संस्कृति के सभी पक्षों जैसे  ऐतिहासिक, आर्थिक, धार्मिक, प्राकृतिक, राजनैतिक तथा कला, ज्ञान, विज्ञान आदि का सूक्ष्म तथा वास्तविक ज्ञान संस्कृत भाषा के माध्यम से ही हो सकता है।

वैज्ञानिक तथा तार्किक क्षमता वर्धिका

संस्कृत भाषा में वैदिक साहित्य से अतिरिक्त भी अन्य सभी विद्याओं तथा ज्ञान-विज्ञान का बहुत सूक्ष्म अध्ययन उपलब्ध है। संस्कृत हमारे दार्शनिकों, वैज्ञानिकों, गणितज्ञों, कवियों, नाटककारों, व्याकरण आचार्यों आदि की भाषा थी। इसके माध्यम से भारत की उत्कृष्टतम मनीषा, प्रतिभा, अमूल्य चिंतन, मनन, विवेक, रचनात्मक, सर्जना और वैचारिक प्रज्ञा का अभिव्यंजन हुआ है।

व्याकरण के क्षेत्र में पाणिनी और पतंजली (अष्टाध्यायी और महाभाष्य के लेखक) के समतुल्य पूरे विश्व भर में कोई दूसरा नहीं है। खगोलशास्त्र और गणित के क्षेत्र में आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त और भास्कर के कार्यों ने मानव जगत को नवीन मार्ग दिखाया। वहीं औषधि के क्षेत्र में चरक और सुश्रुत ने महत्वपूर्ण कार्य किया।

दर्शन के क्षेत्र में गौतम (न्याय व्यवस्था के जन्मदाता) शंकराचार्य बृहस्पति आदि ने पूरे विश्व भर में विस्तृत दार्शनिक व्यवस्था को प्रतिपादित किया है। ये सब ग्रंथ संस्कृत भाषा की वैज्ञानिकता तथा तार्किकता के द्योतक हैं क्योंकि किसी भी विषय को कम से कम शब्दों में सूत्र रूप में कहना उस भाषा की वैज्ञानिकता को बताता है।

संस्कृत भाषा इतनी सक्षम है कि इसमें तकनीकि विचारों को पूरे विशुद्धता, तार्किकता और सुस्पष्टता के साथ व्यक्त किया जा सकता है। विज्ञान में परिशुद्धता कि आवश्यकता होती है, साथ ही विज्ञान को एक लिखित भाषा की जरूरत होती है, जिसमें विचारों को पूरे स्पष्टता और तार्किकता के साथ व्यक्त किया जा सके।

जैसे- अंग्रेजी के ‘A’ से ‘Z’ तक के वर्णों को किसी तार्किक आधार पर व्यवस्थित नहीं किया गया है। इसके पीछे कोई विशेष कारण नहीं है कि F, G से पहले क्यों आता है या P, Q से पहले क्यों आता है? अंग्रेजी के वर्णों को यादृच्छता के आधार पर व्यवस्थित किया गया है। जबकि दूसरी तरफ, पाणिनी ने अपने पहले 14 सूत्रों में संस्कृत भाषा को अत्यंत वैज्ञानिक व तार्किक आधार पर व्यवस्थित किया है।

संस्कृत के अतिरिक्त विश्व की किसी और भाषा के वर्णों को इस तरह से तार्किक व वैज्ञानिक रूप से नहीं रखा गया है। इस तरह से हम देखते हैं कि संस्कृत भाषा में छोटे-छोटे विषयों को कितनी गंभीरता से लिया गया है, बड़े-बड़े विषयों पर कितनी गहराई से चिंतन किया गया होगा।

संस्कृत के बारे में इंग्लैंड के विद्वान और एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल के फोर्ट विलियम के न्यायाधीश सर विलियम जोन्स ने 1786 में कहा था कि संस्कृत भाषा की प्राचीनता जो भी हो, यह एक अद्भुत संरचना है। यह ग्रीक भाषा से अधिक परिपूर्ण, लैटिन भाषा से अधिक समृद्ध और इन दोनों की अपेक्षा अधिक शुद्ध और मनोहारी है।

अत: ऐसी वैज्ञानिक भाषा के अध्ययन से व्यक्ति के मस्तिष्क का विकास होता है।

विश्वकल्याणकारी भाषा

संस्कृत भाषा की एक प्रमुख विशेषता यह है कि वह व्यष्टि से समष्टि को तथा परमेष्टि को जोड़ती है। उसकी प्रत्येक प्रार्थना में विश्व बंधुत्व की भावना व्याप्त है। जो विपुल ज्ञान भंडार संस्कृत में है, उसे देश की प्रगति और मानवता के कल्याण के लिए उपयोग में लाया जा सकता है।

संस्कृत के बारे में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपनी पुस्तक ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ में लिखा है, “यदि कोई मुझसे पूछता है कि भारत के पास बहुमूल्य खजाना क्या है और इसके पास सबसे बड़ी धरोहर क्या है, तो मैं बेहिचक कह सकता हूँ कि वह खजाना संस्कृत भाषा और उसमें निहित समस्त वांगमय है। यह एक महत्त्वपूर्ण विरासत है। यह जब तक सक्रिय रहेगी और हमारे सामाजिक जीवन को प्रभावित करेगी, तब तक भारत की आधारभूत बुद्धिमत्ता बनी रहेगी।”

अन्य भाषाओं की प्राण

संस्कृत भाषा से ही विश्व की अनेक भाषाओं की उत्पत्ति हुई है। विश्व की अधिकांश भाषाओं में संस्कृत भाषा के शब्द मिश्रित हैं, जो उनके व्यावहारिक प्रयोग को सरल करने में सहायक हैं।

संस्कृत भाषा हमारी भारतीय भाषाओं को भी बहुत सशक्त करती है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 251 में स्पष्टत: उल्लेख है कि ‘हम भारतीय भाषाओं को सशक्त करेंगे और भारतीय भाषाओं के विकास और समृद्धि के लिए संस्कृत अहम भूमिका निभाएगी।’

यह संस्कृत की ही विशिष्टता और सुंदरता है कि यदि संस्कृत में ‘आकाश:’ बोलते हैं, तो हिंदी में ‘आकाश’, तेलुगु में ‘आकाशमु’ और कन्नड़ में ‘आकाशवु’ बोलते हैं। इसी प्रकार संस्कृत में यदि ‘भूमि:’ बोलते हैं, तो हिंदी, तेलुगु और कन्नड़ में भी ‘भूमि’ ही बोलते हैं।

संस्कृत से अन्य भारतीय भाषाओं की तुलना करने पर अनेक मौलिक समानताओं को देखा जा सकता है। इस तथ्य को वैश्विक संदर्भ में देखने पर संस्कृत की अनेक पाश्चात्य भाषाओं में अंत: समानताएँ ज्ञात होती हैं।

तुलनात्मक भाषा विज्ञान के अध्ययन में विद्वानों ने संस्कृत की ग्रीक, लैटिन आदि भाषाओं से समानता को प्रदर्शित किया है और संस्कृत भाषा को ही तुलनात्मक भाषा विज्ञान का जनक माना है। अंग्रेजी और संस्कृत में भी अनेक समानताएँ स्पष्टत: दिखाई देती हैं, जिनके आधार पर संस्कृत से अंग्रेजी की उत्पत्ति मान सकते हैं।

जैसे माँ को संस्कृत में ‘मातर’ बोलते हैं तो अंग्रेजी में उसी को ‘मदर’ बोलते हैं। बेटी को संस्कृत में ‘दुहितर’ बोलते हैं, तो अंग्रेजी में ‘डॉटर’ बोलते हैं। इस प्रकार से देखा जाए, तो दुनिया की दर्जनों भाषाओं में संस्कृत का विपुल शब्द भंडार व्याप्त है।

इस प्रकार संस्कृत भाषा और इसके समृद्ध साहित्य का महत्व सहज ही स्पष्ट हो जाता है। प्राचीनता, अविच्छिन्नता, वैज्ञानिकता, व्यापकता, धार्मिक व सांस्कृतिक मूल्य तथा कलात्मक दृष्टि से ही नहीं अपितु धर्म व दर्शन के विचारात्मक अध्ययन की दृष्टि से भी संस्कृत भाषा का अपना निजी महत्त्व है।

11 साल के बेटे को रस्सी से बाँधा, खिड़की से लटका कर बेरहमी से पीटा: गुड्डू खान गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के आगरा के जगनेर थाना इलाके में एक बेरहम पिता ने अपने बेटे को बेहद क्रूरता से पीटा। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में गुड्डू खान अपने 11 साल के बेटे को रस्सी से बाँधकर खिड़की से उल्टा लटका कर पीट रहा है।

बेरहम गुड्डू खान अपने बच्चे को लगातार पीटे जा रहा है और बच्चा चीख रहा है, बचने के लिए चिल्ला रहा है। लेकिन वो चाहकर भी कहीं नहीं भाग सकता है, क्योंकि उसे रस्सी से बाँधकर खिड़की से उल्टा लटका रखा है। गुड्डू खान की इस बेरहमी का पड़ोस में रहने वाले लोगों ने वीडियो बना लिया और सोशल मीडिया में वायरल कर दिया। घटना शुक्रवार (अगस्त 7, 2020) की बताई जा रही है।

वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए पुलिस शनिवार (अगस्त 8, 2020) सुबह जगनेर थाना अंतर्गत मेवली गाँव में गुड्डू खान के घर पहुँची और उसे गिरफ्तार कर लिया।

पड़ोसियों ने खुलासा किया कि बच्चे की पिटाई इसलिए की गई थी क्योंकि उसने घर से गेहूँ चोरी करके पास की दुकान से बदले में मिठाई खरीद ली थी। उन्होंने आरोप लगाया कि गुड्डू खान ने बच्चे पर गर्म पानी भी फेंका था।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (आगरा पश्चिम) रवि कुमार ने कहा, “45 वर्षीय गुड्डू खान को अपने बेटे को प्रताड़ित करने के लिए गिरफ्तार किया गया है। बच्चे को मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया है। आगे की कार्रवाई के लिए उसका बयान दर्ज किया जाएगा।”

एएसपी ने बताया, “पूछताछ के दौरान खान ने दावा किया कि उसने शराब नहीं पी रखी थी, उसे सिर्फ अपने बेटे के व्यवहार को लेकर गुस्सा आ गया था। उस समय, उसकी पत्नी घर पर नहीं थी। वह तीन दिन पहले ही गुड्डू खान से झगड़े के बाद बहन के घर चली गई थी। उसके तीन बच्चे हैं। ये सबसे बड़ा लड़का है।”

जगनेर के स्टेशन हाउस ऑफिसर कुशलपाल सिंह ने कहा, “वायरल वीडियो के आधार पर, गुड्डू खान के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस ऐक्ट, 2015 की धारा 15 और आईपीसी की धारा 323 के तहत नाबालिग बेटे की बेरहमी से पिटाई करने का मामला दर्ज किया गया है।”

परिवार से अच्छे नहीं थे सुशांत के संबंध: संजय राउत ने बिहार के डीजीपी को बताया BJP का आदमी

सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर जारी चर्चा में अब शिवसेना सांसद नेता संजय राउत भी कूद गए हैं। संजय राउत ने शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के जरिए दावा किया है कि सुशांत सिंह राजपूत का उनके परिवार के साथ संबंध अच्छे नहीं थे। राउत ने बिहार पुलिस और केंद्र सरकार पर महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाते हुए यहाँ तक कहा कि बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे भाजपा के आदमी हैं।

शिवसेना सांसद ने आरोप लगाया कि बिहार सरकार की सिफारिश के बाद 1 ही दिन में सीबीआई जाँच के लिए स्वीकृति दे दी गई, जो बताता है कि सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियों का राजनीति के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है और यह झकझोर देने वाला है। राउत ने इसे राज्य सरकार की स्वायत्तता पर हमला करार दिया।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर ये मामला मुंबई पुलिस के हाथ में रहता तो इससे आसमान नहीं टूट पड़ता। लेकिन इस मामले में राजनीतिक दबाव और रुचि के कारण इसे सीबीआई को दिया गया है। उन्होंने आरोप लगया कि इस मामले की पटकथा पहले ही लिख ली गई थी और परदे के पीछे कुछ भी हुआ हो सकता है ताकि महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ साजिश रची जाए। उन्होंने मुंबई पुलिस को दुनिया की सर्वोच्च जाँच तंत्र बताते हुए कहा कि वो प्रोफेशनल है और दबाव में नहीं आती।

संजय राउत ने मुंबई पुलिस कि उपलब्धियाँ गिनाने के लिए शीना बोरा हत्याकांड और 26/11 मुंबई हमला का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सीबीआई एक निष्पक्ष और स्वतंत्र जाँच एजेंसी नहीं है, इसीलिए कई राज्यों ने इस पर रोक लगा रखी है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे ममता बनर्जी की बंगाल पुलिस ने शारदा चिट फंड घोटाले की जाँच के लिए गए सीबीआई के अधिकारियों को लॉकअप में डाल दिया था।

संजय राउत ने दावा किया कि सर्वोच्च न्यायालय से लेकर ईडी, सीबीआई जैसी संस्थाओं पर विगत कुछ वर्षों में सवालिया निशान लग चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि गोधरा के बाद मोदी-शाह नहीं चाहते थे कि इसकी जाँच सीबीआई के पास जाए, क्योंकि वो इसे एक स्वतंत्र एजेंसी नहीं मानते थे। उन्होंने कहा कि सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या की थी ये स्पष्ट है और इसे हत्या कहने का कोई आधार नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राज्य में शिवसेना की सरकार को गिरा नहीं पा रही है, इसीलिए पार्टी ने समाचार चैनलों के साथ मिल कर ‘गॉसिपिंग’ कर इसे बड़ा मुद्दा बना दिया है ताकि सरकार को बदनाम किया जा सके। उन्होंने लिखा कि सुशांत सिंह राजपूत का बिहार से कोई संबंध नहीं था और वो पूरी तरह मुंबईकर बन गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि संघर्ष के दिनों में बिहार उनके साथ नहीं था, उन्हें सारा वैभव मुंबई ने दिया।

राउत ने कहा कि सुशांत का उनके पिता के साथ संबंध अच्छे नहीं थे। पिता का दूसरा विवाह उन्हें स्वीकार नहीं था। उनके उनके पिता से कोई भावनात्मक संबंध नहीं था। उन्होंने गुप्तेश्वर पांडे को एक अनुशासनहीन पुलिस अधिकारी करार देते हुए कहा कि वो चैनलों पर जाकर मुंबई पुलिस के खिलाफ बोलते हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में बिहारियों को निशाना बनाते हुए शेखर गुप्ता की वेबसाइट ‘द प्रिंट’ ने एक लेख प्रकाशित किया। इस लेख का शीर्षक और इसकी तमाम बातें ऐसी हैं जिनका न तो कोई आधार है और न अर्थ। लेख की शैली से स्पष्ट था कि इसका उद्देश्य एक क्षेत्र और समूह के लोगों को निशाना बनाना है। सुशांत के बहनोई विशाल ने इसे टॉक्सिक जर्नलिज्म (विषाक्त पत्रकारिता) करार दिया और कहा कि इस बहाने बिहार को बदनाम किया जा रहा है।

पाकिस्तान से आए हिंदू परिवार के 11 लोगों की लाश राजस्थान के खेत में: हत्या या आत्महत्या, राज्य सरकार पर उठ रहे सवाल

राजस्थान के जोधपुर से एक दर्दनाक घटना सामने आई है। घटना देचू थाने के लोड़ता गाँव की है। पुलिस ने बताया कि जोधपुर जिले के एक खेत में रविवार (9 अगस्त, 2020) सुबह पाकिस्तान से आए एक हिंदू परिवार के ग्यारह सदस्य मृत पाए गए। फिलहाल मौत के कारणों का पता नहीं चल पाया है।

एक अधिकारी ने कहा कि परिवार के एक व्यक्ति को देचू क्षेत्र के लोड़ता गाँव में जीवित पाया गया है। पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) राहुल बारहट ने कहा कि जीवित पाए गए व्यक्ति ने इस घटना के बारे में कोई अनुमान नहीं होने का दावा किया है। लेकिन माना जा रहा है कि यह घटना बीते रात की है।

बारहट ने कहा, “हम अभी तक मौत के कारणों का पता नहीं लगा पाए हैं। लेकिन प्रथम दृष्टया जाहिर होता है कि सभी सदस्यों ने रात में किसी जहरीली रसायन का सेवन किया था, जिससे इन लोगों की मौत हुई है।” उन्होंने कहा कि झोंपड़ी में चारों ओर किसी रसायन की गंध थी, जिससे लगता है कि उन्होंने कुछ जहरील पदार्थ खाया होगा।

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि परिवार के सभी सदस्य भील समुदाय से थे। ये लोग पाकिस्तान के हिंदू प्रवासी थे और गाँव में खेत में एक झोपड़ी बना कर रहते थे। इसे इन्होंने खेती के लिए किराए पर लिया था।

एसपी ने कहा, “किसी भी शव पर न तो कोई चोट का निशान था और न ही किसी तरह के मारपीट के कोई सबूत मिले हैं, लेकिन किसी भी अंतिम निष्कर्ष पर पहुँचने के लिए फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वाड की सहायता से जाँच कर रहे हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि प्रारंभिक जानकारी से संकेत मिलता है कि परिवार में किसी मुद्दे पर कुछ विवाद था। इस मामले को देखते हुए परिवार के जीवित शख्स से पूछताछ किया जाएगा।

जानकारी के अनुसार इस घटना में छह व्यस्क व पाँच बच्चों की मौत हुई है। देचू थाना अधिकारी हनुमाना राम ने बताया कि इनमें सात महिला और चार पुरुष हैं।

वहीं इस घटना पर ट्वीट करते हुए केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लिखा है, “जोधपुर देचू में एक दर्जन पाक विस्थापित नागरिकों की मृत्यु अशोक गहलोत की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान है। मृतकों में 2 पुरुष, 4 महिलाएँ और 5 बच्चे हैं। एक के बाद एक, प्रदेश की बिगड़ी व्यवस्था की भयावह तस्वीरें सामने आ रही हैं। सरकार त्वरित कार्यवाही कर तथ्यों को सामने लाए।”

न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों के परिवार की एक बहन पेशे से नर्स थी। रक्षाबंधन के मौके पर वह अपने भाई को राखी बाँधने के लिए आई थी। लेकिन त्यौहार के बाद वह वापस नहीं गई, यहीं परिवारवालों के साथ ही रहने लगी थी। आसपास रहने वाले लोगों का मानना है कि बहन ने ही परिवार को 10 लोगों को जहरीला इंजेक्शन लगाया। उसके बाद उसने खुद को इंजेक्शन लगा लिया।

पुलिस जाँच में भी परिवार के सदस्यों और बहन की मौजूदगी के बारे में पता लगा है। आपको बता दें कि पुलिस की ओर से परिवार में जिंदा बचे एकमात्र सदस्य को भी शक की निगाह से देखा जा रहा है।

‘प्याज कहाँ से आई है, कहाँ की है? जानकारी नहीं है… तो मत खाइए’ – 640 लोग चपेट में, अमेरिकी CDC ने जारी की चेतावनी

दुनिया के सामने एक वायरस और उससे उपजी महामारी पहले से मौजूद है। लेकिन इसके साथ-साथ ऐसी बीमारियाँ भी सामने आ रही हैं, जो बेहद भयावह हैं। अमेरिका के कई प्रांतों में सैलमोनेला (salmonella) नाम का संक्रमण बहुत तेज़ी से फैल रहा है। यह संक्रमण बैक्टीरिया से होता है और ज़्यादातर प्याज़ खाने से होता है।  

पूरे अमेरिका में अब तक लगभग 640 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। इनमें से लगभग 85 लोगों को भर्ती किया जा चुका है। Centers for Disease Control and Prevention (CDC) ने इस बारे में जानकारी दी। CDC ने इस बारे में चेतावनी भी जारी की है। चेतावनी में उन्होंने कहा, “अगर आपको इस बात की जानकारी नहीं है कि आपकी प्याज़ कहाँ से आई है या कहाँ की है? तब उसे मत परोसिए, मत मत खाइए और न ही बेचिए।”

फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने भी इस बारे में चेतावनी जारी की है। उनका साफ़ तौर पर कहना है कि उपभोक्ता किसी भी सूरत में प्याज़ का सेवन न करें। विशेष तौर पर लाल, सफ़ेद, पीली और मीठी प्याज़ का तो कतई नहीं। CDC का इस मामले पर यह भी कहना था कि भारी मात्रा में प्याज़ बड़े स्टोर्स में बेची गई हैं। जैसे वालमार्ट, क्रोगर, फ्रेड मेयर, पब्लिक्स, जायंट इगल, फूड लायन और एचईबी। इतना ही नहीं इन स्टोर्स में प्याज़ ब्रांड के तहत बेची गई हैं।    

कई बड़े समूहों ने प्याज वापस बुलाई है। साथ ही ऐसे खाद्य उत्पाद भी वापस बुलाए हैं, जिनमें प्याज़ का इस्तेमाल होता है। इसमें चिकन सैलेड, मैक्रोनी सैलेड, फजीता स्टिर फ़्राय, पिज्जा और कच्ची प्याज़ भी शामिल है। CDC ने यह विशेष रूप से कहा है कि लोगों को जाँच करने की ज़रूरत है कि बड़े समूहों ने जिन खाद्य उत्पादों (प्याज़) को वापस बुलाया है, वैसे खाद्य उत्पाद उनके घरों में तो नहीं मौजूद हैं? अगर ऐसा है तो वह उसे तुरंत नष्ट कर दें। CDC के मुताबिक़ प्याज़ संबंधित किसी भी तरह के खाने को अभी के लिए नज़रअंदाज़ करना है।  

सैलमोनेला के मुख्य लक्षण डायरिया, बुखार और पेट में दर्द है। सैलमोनेला के बैक्टीरिया संपर्क में आने के बाद इस संक्रमण के लक्षण घंटे से लेकर 6 दिन के बीच नज़र आते हैं। इस संक्रमण का असर सबसे ज़्यादा उन पर पड़ता है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होती है। यानी 5 साल से कम उम्र के बच्चे और 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों पर इस संक्रमण का ख़तरा सबसे ज़्यादा रहता है। कुछ मामलों में संक्रमण आंतों से होते हुए शरीर के बाकी हिस्सों में भी फैल जाता है। इस तरह के मामलों में मरीज़ को भर्ती कराना पड़ता है।    

CDC अमेरिका के लोगों से इस बात का निवेदन कर रहा है कि अगर उनमें इसके लक्षण नज़र आते हैं, तो वह सबसे पहले इस बात की जानकारी दें कि उन्होंने बीमारी के एक हफ्ते के पहले क्या खाया था। वह स्वास्थ्य विभाग को इस बात का संक्षिप्त ब्यौरा दें और उसके बाद स्वास्थ्य अधिकारी उनकी जाँच करेंगे।    

इस संक्रमण के मामले अमेरिका के कई प्रांतों में नज़र आए हैं। इसमें एरिज़ोना, कैलिफोर्निया, कोलोराडो, फ्लोरिडा, इंडियाना, इलीनोयस, इडाहो, लोवा, कनसेस, केंटकी, माइने, मैरीलैंड, मिनेसोटा, मिसोरी, मोंटाना, नेवाडा, न्यूयॉर्क, नार्थ कैरोलाइना, नार्थ डकोटा, ओहियो, ऑरेगोन, पेन्सिल्वेनिया, साउथ कैरोलाइना, टेक्सस और वर्जीनिया जेर प्रांत मुख्य हैं।     

अब कॉन्ग्रेस के अस्तित्व पर संकट, जब्त हो सकता है ‘हाथ’ का निशान: जानें, क्यों पैदा हुए ये हालात

कॉन्ग्रेस के लिए अभी तक स्थायी अध्यक्ष न चुन पाना अब उनकी पार्टी के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकती है। संडे गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार अगर कॉन्ग्रेस, चुनाव आयोग को संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में विफल रहती है कि वह पिछले साल राहुल गाँधी के इस्तीफे के बाद स्थायी अध्यक्ष का चुनाव क्यों नहीं कर पाई है, तो पार्टी को निलंबन या अयोग्यता का सामना करना पड़ सकता है।

बता दें कि 2019 के आम चुनावों में हार के बाद राहुल गाँधी ने अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद कॉन्ग्रेस कार्य समिति द्वारा सोनिया गाँधी को अंतरिम अध्यक्ष बनाया गया था। सोमवार को बतौर अंतरिम अध्यक्ष उनका साल भर पूरा हो जाएगा।

पार्टी का दावा है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण नए प्रमुख का चुनाव करने की प्रक्रिया को स्थगित कर दिया गया है और सामान्य स्थिति बहाल होते ही चुनाव आयोग के प्रावधानों का अनुपालन करने का आश्वासन दिया गया है।

चुनाव आयोग प्राय: पार्टी के आंतरिक मुद्दों में हस्तक्षेप करने से दूर रहता है। हालाँकि, अगर वह चाहे तो किसी भी राजनीतिक पार्टी के खिलाफ नियमों और विनियमों का पालन करने में विफल रहने के लिए कार्रवाई शुरू कर सकता है। चुनाव आयोग सिंबल ऑर्डर के तहत चुनाव चिह्न को भी फ्रीज कर सकता है।

राजनीतिक दल, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29 (A), उप-खंड (V) द्वारा शासित होते हैं। इसकी शुरुआत 1989 में हुई। कॉन्ग्रेस सहित प्रत्येक राजनीतिक दल को खुद को फिर से पंजीकृत करना होगा, और भारत के संविधान के प्रति अपनी निष्ठा दिखाने और नियत समय पर होने वाले चुनावों में भाग लेने के लिए सहमत होना होगा।

हालाँकि अनिवार्य अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कोई नियम नहीं हैं। चुनाव आयोग समय-समय पर इस मामले पर निर्देश दे सकता है। चुनाव आयोग अब जाँच कर सकता है कि क्या कॉन्ग्रेस संगठन में पद खाली होने के बाद एक निश्चित अवधि के भीतर नए अध्यक्ष के चुनाव के संबंध में कोई विशेष प्रावधान है। आयोग पार्टी को इस निर्धारित समय सीमा के भीतर आंतरिक चुनाव कराने का आदेश दे सकता है।

ग्रैंड-ओल्ड-पार्टी के लिए चिंता का विषय यह है कि पार्टी के भीतर संकट और अधिक गहरा जाने की संभावना है। अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी को हाल ही में गंगा राम अस्पताल में कुछ स्वास्थ्य जटिलताओं के कारण भर्ती कराया गया था। यदि वह अपनी वार्षिक मेडिकल चेकअप के लिए विदेश जाने का फैसला करती है, तो पार्टी को उनकी जगह किसी और को चुनने की आवश्यकता हो सकती है, खासकर अगर राहुल गाँधी कार्यभार सँभालने के लिए अनिच्छुक हैं। पार्टी का अध्यक्ष केवल ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमिटी द्वारा ही चुना जा सकता है।

इस बीच, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं सहित पार्टी कैडर की माँग है कि AICC को जल्द से जल्द संगठनात्मक पदों पर नियुक्ति की जाए। साथ ही वे कॉन्ग्रेस संसदीय बोर्ड की विधिवत निर्वाचित कार्यसमिति के साथ, व्यापक आधार रखने वाले नेताओं को प्रतिनिधित्व प्रदान करने की भी माँग कर रहे हैं।

इन दिनों चूँकि कई पावर सेंटर्स उभरे हैं, इसलिए कॉन्ग्रेस पार्टी वर्तमान में भाजपा के दाँव-पेंच को लेकर काफी अतिसंवेदनशील और सतर्क है। कॉन्ग्रेस नेताओं का मानना है कि संगठन की वर्तमान स्थिति नेतृत्वहीन और दिशाहीन है।

मध्य प्रदेश में इस साल की शुरुआत में पार्टी की सरकार गिर गई थी। वहीं राजस्थान सरकार संकट का सामना कर रही है। ऐसी भी रिपोर्टें हैं, जो बताती हैं कि छत्तीसगढ़ सरकार भी मध्यप्रदेश की तरह गिर सकती है। झारखंड में गठबंधन की सरकार को भी अपना भविष्य खतरे में नजर आ रहा है। वहीं भाजपा, कॉन्ग्रेस के भीतर चल रहे ड्रामे पर करीब से नजर रखे हुए है और बदली परिस्थितियों का लाभ उठाने का इंतजार कर रही है।

कॉन्ग्रेस पार्टी के पास प्रमुख मुद्दों में से एक राहुल गाँधी की अस्पष्टता है। एक ओर उन्होंने कथित तौर पर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह पार्टी प्रमुख के रूप में वापस नहीं लौटना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर, जब उनके करीबी सहयोगी उनकी बहाली की माँग उठाते हैं, तो वह चुप रहना पसंद करते हैं।

इसके अलावा, सोनिया गाँधी का स्वास्थ्य उन्हें अध्यक्ष के रूप में सक्रिय रहने की अनुमति नहीं देता है। इसलिए, पार्टी को संगठन के हित में जल्द से जल्द उन्हें जिम्मेदारियों से मुक्त करना पड़ सकता है। हालाँकि, प्रमुख चिंताओं में से एक यह है कि उसके लंबे कार्यकाल ने निर्णय लेने की प्रक्रिया को केंद्रीकृत कर दिया है। पार्टी के ज्यादातर फैसले वे बिना किसी परामर्श प्रक्रिया के खुद ही लेती हैं।

जब से सोनिया गाँधी ने पार्टी की बागडोर सँभाली, वह सर्वोच्च नेता रही हैं। वह यूपीए शासन के दौरान राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की संयोजक भी थीं। कुछ का मानना है कि अधिकार और शक्ति का इस तरह एक हाथों में होने से पार्टी को नुकसान हुआ है। इसके अलावा, दलित-मुस्लिमों की तरफ झुकाव ने पार्टी को कमजोर कर दिया है।

पार्टी के वरिष्ठ नेता अब इस विचार में हैं कि एक बार राहुल गाँधी के निर्णय के बाद, पार्टी को संगठनात्मक चुनाव के जरिए गैर-गाँधी का चयन करना चाहिए। कुछ समय के लिए कमलनाथ या भूपिंदर सिंह हुड्डा जैसे को प्रमुख बनाया जा सकता है। युवा नेता चुनाव में भाग लेकर पार्टी के भीतर अपनी हैसियत का अंदाजा लगा सकेंगे। इन चुनावी बाधाओं को जीतने वाले नेताओं को भविष्य के नेताओं के रूप में चुना जा सकता है।

भगवान गणेश की मूर्ति के पास पेशाब करता कुत्ता: हिंदू विरोधी पोस्ट के लिए माउंट कार्मेल की टीचर सस्पेंड

महाराष्ट्र के अकोला में माउंट कार्मेल सेकेंडरी एंड हायर सेकेंडरी स्कूल ने शनिवार (8 अगस्त, 2020) को VI (A) स्टैण्डर्ड में पढ़ाने वाली सुनीता जोसफ नाम की एक शिक्षक को निलंबित कर दिया। जोसफ ने स्कूली छात्र-छात्राओं के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में शुक्रवार को एक अपमानजनक हिन्दुफोबिक फेसबुक पोस्ट शेयर किया था।

माउंट कार्मेल की शिक्षिका ने एक कुत्ते को भगवान गणेश की मूर्ति के पास पेशाब करते हुए एक आपत्तिजनक पोस्ट शेयर किया था। सुनीता ने इस हिंदू विरोधी पोस्ट के साथ एक बेहद ही घटिया कैप्शन भी दिया, “कुत्ते को पूरा विश्वास है कि यह पत्थर है और कुछ नहीं। लेकिन पता नहीं ये बात भारतीयों को क्यों समझ नहीं आती।”

हालाँकि, एक हिंदू देवता के प्रति घटिया मानसिकता वाली बात कहने और छोटे बच्चों के ब्रेनवॉश करने की नापाक कोशिश करने पर स्कूल अधिकारियों ने तुरंत इस मामले पर कार्रवाई की। माउंट कार्मेल हाई स्कूल के प्रिंसिपल फादर माथैव करिकाल ने शिक्षक सुनीता जोसेफ को संबोधित कर एक पत्र में बताया कि उन्हें तत्काल प्रभाव से शिक्षक पद से निलंबित कर दिया गया है।

निलंबन आदेश में लिखा गया, “यह मामला भले ही गलती से भी हुआ हो, लेकिन इसे किसी भी कीमत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुझे यह बताते हुए खेद है कि आपको तत्काल प्रभाव से सेवा से निलंबित कर दिया गया है।”