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रैपर बादशाह से मुंबई पुलिस ने पूछे 238 सवाल, 175 सितारों ने पैसे देकर बनाए फेक फॉलोवर्स: 50 कंपनी फर्जीवाड़े में शामिल

फेक फॉलोवर्स घोटाले में शुक्रवार को मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने रैपर बादशाह से पूछताछ की। उनसे करीब 238 सवाल ​किए गए। सोशल मीडिया पर फेक फॉलोवर्स बनाने के इस मामले में क्राइम ब्रांच ने गुरुवार (6 अगस्त, 2020) को भी बादशाह को तलब किया था।

बादशाह बॉलीवुड के पहले सेलिब्रिटी हैं जिनसे इस घोटाले को लेकर पूछताछ की गई है। संयोग से इसी समय सोशल मीडिया पर बादशाह को ‘अनफॉलो’ (Unfollow) करने वालों की संख्‍या में तेजी से इजाफा हुआ है। इसे देखते हुए क्राइम ब्रांच ने रैपर से उनके सभी फॉलोवर्स की सूची माँगी है।

हालाँकि बादशाह के रैप बेहद लोकप्रिय हैं। यूट्यूब पर उनके वीडियो लाखों लोग देखते हैं। लेकिन अजीब बात है कि इन गानों पर बहुत ही कम कमेंट किए गए है। मुंबई पुलिस ने उनसे इस संबंध में भी पूछताछ की है।

कथित तौर पर रैपर ने दावा किया था कि उनके गाने ‘पागल’ को एक दिन में 75 मिलियन यानी कि 7.5 करोड़ बार देखा गया था। हालाँकि यह दावा अब गूगल ने खारिज कर दिया है।

क्राइम ब्रांच अब उनके दावों के साथ-साथ व्यूज और कमेंट्स के बीच असमानता के कारणों की भी जाँच करेगी। इसके अलावा 175 अन्य हाई-प्रोफाइल सितारे हैं जिन्होंने कथित तौर पर सोशल मीडिया पर पैसे देकर फर्जी फॉलोवर्स बढ़ाए हैं।

गौरतलब है कि यह मामला तब सामने आया जब बॉलीवुड सिंगर भूमि त्रिवेदी ने सोशल मीडिया पर अपनी फर्जी प्रोफाइल मामले को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी।

उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले ही मुंबई पुलिस ने सोशल मीडिया पर फर्जी फॉलोवर उपलब्‍ध कराने वाले रैकेट का भंडाफोड़ किया था। इसके बाद कई सेलेब्रिटीज़ द्वारा फर्जी फॉलोवर्स खरीदने का पर्दाफाश हुआ था। पुलिस ने फर्जी फॉलोवर्स बढ़ाने के इस खेल में 50 से अधिक फर्म्स कंपनियों का पता लगाया था। ये सोशल मीडिया पर फॉलोवर्स, लाइक और कमेंट बेचने के धंधे में शामिल थे।

क्राइम ब्रांच की सेंट्रल इंटेलिजेंस यूनिट (CIU) ने 14 जुलाई को अभिषेक दावडे को गिरफ्तार किया था, जो इसी तरह की सर्विस लोगों को देता था। 21 वर्षीय अभिषेक अपने ग्राहकों की सोशल मीडिया अकाउंट पर इंगेजमेंट बढ़ाने के लिए बॉट्स (bots) या फर्जी प्रोफाइल का उपयोग कर रहा था। दावडे इन सब कामों के लिए 170 से ज्यादा अकाउंट्स का इस्तेमाल करता था। इन अकाउंट्स को ओरिजनल दिखाने के लिए अभिषेक ने इनमें पाँच लाख से ज्यादा फॉलोवर्स जोड़ रखे थे।

सुल्तानपुर: भूमिपूजन पर बॉंटी मिठाई तो घर पर समुदाय विशेष के लोगों ने बोला हमला, दुकान में तोड़फोड़

राम मंदिर भूमिपूजन के अवसर पर उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में भगवान राम के भक्तों पर हमला करने वाले उपद्रवियों के ख़िलाफ़ पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। उपद्रवियों पर आरोप है कि इन्होंने पहले एक व्यापारी के घर पर हमला किया, उसके परिवार को पीटा और फिर हनुमानगंज बाजार स्थित उसकी दुकान में भी तोड़फोड़ की

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना 5 अगस्त को उस समय घटी जब भूमिपूजन संपन्न होने के बाद ग्रामीण बाजार में इकट्ठा हुए और मिठाइयाँ बाँटनी शुरू की। इसी बीच यह सब देखकर दूसरे समुदाय के लोगों को गुस्सा आ गया और दर्जन भर लोगों ने सियाराम मोदनवाल के घर पर हमला बोलकर उनके परिजनों को पीट दिया।

जब पुलिस घटनास्थल पर हिंसा को रोकने पहुँची तो उन पर भी ईंट और पत्थरों से हमला किया गया। इस पूरी घटना में सियाराम घायल हो गए। लेकिन पुलिस ने उपद्रवियों को पकड़ लिया। वहीं इलाके में तनाव को देखते हुए पुलिस टीम को क्षेत्र में तैनात कर दिया।

गुरुवार की सुबह लंभुआ के डिविजनल ऑफिसर विद्धेष कुमार और सीओ लालचंद्रा चौधरी घटनास्थल पर पहुँचे व स्थिति का जायजा लिया। एसपी शिव हरि मीणा ने बताया कि कुलदीप मोदनवाल की बाइक पैदल जा रहे सद्दाम से टकरा गई थी। इसके बाद दोनों पक्षों में मारपीट हो गई। फिलहाल मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

ऑपइंडिया ने इस संबंध में पुलिस से बात करने का प्रयास किया। लेकिन संपर्क नहीं हो सका। जैसे ही इस मामले पर आगे जानकारी आएगी, हम अपनी खबर को अपडेट करेंगे।

लखीमपुर में भी मुस्लिम युवक ने की धार्मिक भावना भड़काने की कोशिश

उत्तरप्रदेश के लखीमपुर में भी कुछ समुदाय विशेष के युवकों पर धार्मिक भावना को भड़काने का आरोप लगा।

जानकारी के अनुसार, 5 अगस्त को मोहल्ला शुक्लापुर के मोहम्मद फैय्याज मंसूरी ने अपनी फेसबुक आईडी पर धार्मिक भावनाएँ भड़काने वाली पोस्ट की। मोहम्मद आरिफ, मोहम्मद शादाब व तीन चार अन्य लोगों ने इसका समर्थन किया।

इस संबंध में बाजारगंज निवासी सागर कपूर ने कल मामला दर्ज करवाया। लेकिन केस दर्ज होते ही आरोपित भाग निकले। इसके बाद कुछ हिंदू संगठन ने मोहम्मदी नाम के युवक की गिरफ्तारी के लिए जमकर हंगामा किया और सड़क जाम कर दीं।

राम मंदिर पर अपने ही दावे से पीछे हटी यूथ कॉन्ग्रेस, राजीव गाँधी के गान वाला ट्वीट डिलीट

राम मंदिर भूमिपूजन के दौरान कॉन्ग्रेस ने हिंदुओं को लुभाने के लिए तमाम पैंतरे अपनाएँ। लेकिन जब पार्टी का सॉफ्ट हिन्दू पैंतरा फैल हो गया तो वह वापस से तुष्टिकरण के अपने पुराने तौर-तरीकों पर लौट आई है। इसकी झलक गुरुवार (6 अगस्त, 2020) को तब दिखी जब कॉन्ग्रेस यूथ विंग ने भूमिपूजन के स्वागत का ट्वीट डिलीट कर दिया।

बुधवार को दिल्ली यूथ कॉन्ग्रेस ने एक ट्वीट किया था। इसमें दावा किया गया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने राम मंदिर के ताले खुलवाए थे। यूथ विंग ने यह भी दावा किया कि अयोध्या में ऐतिहासिक स्थल पर आधारशिला रखने वाले वे पहले व्यक्ति थे।

अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का श्रेय लेने का दावा करते हुए कॉन्ग्रेस पार्टी की यूथ विंग ने प्रधानमंत्री मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा, “फीता काटने वाला कोई भी हो राम मंदिर के ताले खुलवाने वाले राजीव गॉंधी थे।”

कॉन्ग्रेस मूल रूप से 1985 में रामजन्मभूमि के दरवाजे खोलने पर तत्कालीन राजीव गाँधी सरकार के फैसले का हवाला दे रही थी।

दिल्ली यूथ कॉन्ग्रेस की तरह ही दमन और दीव कॉन्ग्रेस सेवादल ने भी इसी तरह का एक ट्वीट किया था। इसमें कहा गया कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि अयोध्या में राम मंदिर का उद्घाटन किसने किया, क्योंकि यह राजीव गाँधी थे जिन्होंने 1985 में राम मंदिर का ताला तोड़ कर उसे मंदिर घोषित किया था। सेवादल ने राजीव गाँधी को ‘हिंदू शेर’ के रूप में संबोधित किया।

हालाँकि राम जन्मभूमि आंदोलन का श्रेय लेने के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी का उत्साह, लंबे समय तक नहीं रहा।

गौरतलब है कि राम मंदिर आयोजन के दौरान अपने द्वारा किए गए ट्वीट के लिए कॉन्ग्रेस को अपने वोटरों के समर्थन का डर सताने लगा। जिसके चलते दिल्ली यूथ कांग्रेस और दमन और दीव कॉन्ग्रेस सेवादल दोनों ने ही अयोध्या में राम मंदिर के लिए राजीव गाँधी को श्रेय देने वाले ट्वीट को बाद में डिलीट कर दिया।

भाजपा सरकार पर सांप्रदायिक होने का आरोप लगाते हुए कई मौलवी और संगठन खुले तौर पर भूमि पूजन की निंदा करते रहे हैं। असदुद्दीन ओवैसी जैसे कुछ राजनीतिक नेताओं ने कॉन्ग्रेस पर भी कथित अल्पसंख्यकों को धोखा देने और हिंदू वोटों के लिए सस्ती राजनीति करने का आरोप लगाया था।

वहीं हनुमान चालीसा का जाप करने और भगवान राम की पूजा करने पर एमपी कॉन्ग्रेस के कमलनाथ की भी एक मजहबी संगठन द्वारा आलोचना की गई थी।

‘घुस के मारो सालों को’: बंगाल में मुस्लिम भीड़ ने राम की पूजा कर रहे हिंदुओं को बनाया निशाना, देखें Video

5 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर का ऐतिहासिक भूमि पूजन हुआ। इस मौके पर भी पश्चिम बंगाल में हिंसा की घटनाएँ सामने आई। धीरे-धीरे कर इन हिंसक घटनाओं से जुड़ी कई जानकारी सामने आ रही है। ये घटनाएँ तब हुई जब राज्य सरकार ने 5 अगस्त को पूरे प्रदेश में लॉकडाउन लगा रखा था।

प्रदेश के खड़गपुर में अलग-अलग जगहों पर पूजा का आयोजन किया गया था। इन्हें पुलिस वालों ने जबरन रुकवाया था। ख़बरों के मुताबिक़ पुलिस ने मंदिरों में पूजा कर रहे लोगों को घसीटकर बाहर निकाला। लाठी चार्ज किया और मंदिरों को भी नुकसान पहुँचाया।

अब जो जानकारी सामने आ रही है उससे पता चलता है कि ऐसा केवल पुलिस ने ही नहीं किया। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी भारी संख्या में मंदिरों में घुस कर हिंदुओं को पूजा करने से रोका था।   

बीजेपी समेत कई हिंदू संगठनों ने कोलकाता में अलग-अलग जगहों पर पूजा का आयोजन किया था। इनमें से कई पूजा स्थलों पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया। इस काम में पुलिस भी उनका साथ दे रही थी। कोलकाता का रज़ा बाज़ार मुस्लिम बाहुल्य इलाका है। यहाँ मुस्लिम समुदाय के लोगों ने राम के नाम पर आयोजित की गई हर पूजा को निशाना बनाया।

मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भगवा झंडे पर भी गुस्सा जताया और हटाने की हरसंभव कोशिश की। वीडियो में साफ़ तौर पर देखा जा सकता है एक हिंदू ने अपनी दुकान के सामने भगवा झंडा लगा रखा है। इस वजह से एक मुस्लिम उससे विवाद कर रहा है। वीडियो में मुस्लिम व्यक्ति का भगवा झंडे को लेकर घृणा साफ नजर आ रहा है।

जवाब में जब हिंदू व्यक्ति ने कहा कि यह क्षेत्र किसी एक व्यक्ति का नहीं है, तब मुस्लिम ने धमकाते हुए कहा पूरा भारत मेरा है। इसके बाद उसने भगवा झंडा जलाने की धमकी तक दे डाली। इसके कुछ ही समय बाद मौके पर मुस्लिमों की भीड़ इकट्ठा हुई। इसकी वजह से दोनों समुदायों के बीच विवाद शुरू हुआ।   

रज़ा बाज़ार इलाके के दूसरे वीडियो में देखा जा सकता है मुस्लिमों की भीड़ भगवा झंडे उतारने में जुट जाती है। वीडियो में बेहद साफ़ तौर पर यह भी सुनाई देता है, जब एक आदमी कहता है- उतारो-उतारो सब को (झंडे)। इसके बाद दूसरा व्यक्ति कहता है-घुस के मारो सालों को। 

रज़ा बाज़ार के नरकेलदंगा इलाके में भी मुस्लिम समुदाय द्वारा उपद्रव की घटनाएँ नज़र आई। मुस्लिम इस बात पर आपत्ति जताते हुए देखे जा सकते हैं कि हिंदू राम की पूजा कर रहे हैं और राम के नारे लगा रहे हैं। पूजा रोकने के लिए मुस्लिमों ने रास्ते तक जाम कर दिए थे। घटनास्थल पर दंगे जैसे हालात होने के पहले पुलिस आ गई और स्थिति को नियंत्रण में किया।

जहाँ एक तरफ हिंदुओं पर 5 अगस्त के दिन राम मंदिर के नाम पर पूजा करके लॉकडाउन की अनदेखी का आरोप लगा। वहीं दूसरी तरफ मुस्लिम समुदाय के लोग अलग-अलग जगहों पर भारी संख्या में नज़र आए।   

सोशल मीडिया पर एक और वीडियो खूब चर्चा में रहा। इसमें साफ़ देखा जा सकता है कि मुस्लिम समुदाय के लोग पूजा रोक रहे हैं। वह इतने पर थमते नहीं हैं बल्कि नज़र आने वाले हर भगवा झंडे को फेंकते हैं। 5 अगस्त के दिन ममता बनर्जी की सरकार ने पश्चिम बंगाल में लॉकडाउन का ऐलान किया था।   

भाजपा सरकार ने इस सम्बन्ध में पश्चिम बंगाल सरकार से निवेदन भी किया था कि 5 अगस्त का लॉकडाउन किसी दूसरे दिन रखा जाए। लेकिन ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के इस आग्रह को ठुकरा दिया था।     

बच्चों का इस्तेमाल कैसे कर सकते, वे कैसी संस्कृति सीखेंगे: अधनंगे बदन पर पेंटिंग करवाने वाली रेहाना फातिमा से SC

केरल की रेहाना फातिमा को सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। मामला अर्ध नग्न शरीर पर अपने बच्चों से पेटिंग करवाते हुए एक वीडियो जारी करने से जुड़ा है।

इस संबंध में मामला दर्ज होने के बाद रेहाना ने केरल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। वहॉं अग्रिम जमानत नहीं मिलने पर वह सुप्रीम कोर्ट पहुॅंची थी।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया में यह अश्लीलता फैलाने का मामला है। इससे नाबालिग बच्चों पर देश की संस्कृति को लेकर क्या प्रभाव पड़ेगा। कोर्ट ने पूछा कि क्या वह सामाजिक कार्यकर्ता होते हुए कोई भी तर्कहीन हरकत करेंगी। इससे बच्चों पर क्या असर पड़ेगा?

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा के नेतृत्व वाली एक शीर्ष अदालत की बेंच ने कहा, “आप यह सब क्यों करती हैं? आप एक कार्यकर्ता हो सकती हैं लेकिन यह किस प्रकार की बकवास है? यह अश्लीलता फैला रही है क्या आप? यह समाज में एक बहुत बुरा असर छोड़ देगा।”

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ ने कहा, “इस तरह के मामले में कोई दिलचस्पी नहीं है। आप इसके लिए बच्चों का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं? बच्चे किस तरह की संस्कृति सीखेंगे?”

जवाब में रेहाना के वकील ने कहा कि वीडियो कामुकता को लेकर संकीर्ण विचारों पर जागरूकता फैलाने के इरादे से बनाया गया था। उन्होंने कहा, “उनका स्टैंड हमेशा से रहा है अगर कोई पुरुष आधा नग्न खड़ा है, तो उसके बारे में कुछ भी सेक्सुअल नहीं है, लेकिन अगर कोई महिला ऐसा करती है, तो यह अश्लील है। वह कहती हैं कि इसमें सुधार लाने का एकमात्र तरीका लोगों को इस बारे में संवेदनशील बनाना है।” इसके जवाब में न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, “वे इन बातों को समझने के लिए काफी उम्रदराज हैं।”

क्या है मामला?

रेहाना फातिमा ने 19 जून 2020 को ही यूट्यूब वीडियो फेसबुक पर शेयर किया था। इसमें उनके बेटे और बेटी को उनकी सेमी न्यूड बॉडी पर पेंटिंग करते देखा जा सकता है। इस वीडियो के साथ उन्होंने हैशटैग #BodyArtPolitics पोस्ट किया था।

रेहाना के मुताबिक, यह वीडियो उन्होंने इसलिए बनाया था, ताकि महिलाएंँ सेक्स और अपने शरीर को लेकर ज्यादा खुल सकें, वो भी ऐसे समाज में जहाँ यह दोनों चीजें प्रतिबंधित हैं।

हालाँकि, एक भाजपा नेता की शिकायत के बाद फातिमा को पॉक्सो एक्ट की धारा 13, 14, 15, आईटी एक्ट की धारा 67 (B) और धारा 75 के तहत एर्नाकुलम पुलिस ने मामला दर्ज किया था।

गौरतलब है कि रेहाना फातिमा अक्सर विवादों में रहती हैं। इससे पहले भी बहुत बार हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने के आरोप में उनपर मामला दर्ज हो चुका है। वहीं, केरल मुस्लिम जमात काउंसिल ने भी ‘लाखों हिंदू श्रद्धालुओं की भावनाएँ आहत करने’ को लेकर फातिमा को मुस्लिम समुदाय से निष्कासित कर दिया था।

फातिमा ने 2018 में तरबूजों के साथ टॉपलेस फोटो भी सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी। ये फोटो फातिमा द्वारा तब शेयर की गई थी जब कोझिकोड के एक प्रोफेसर ने महिलाओं के वक्ष की तुलना तरबूज से की थी। उस समय फातिमा की हरकत पर फेसबुक पर बहुत बवाल हुआ था।

सोमनाथ और अक्षरधाम मंदिरों से भी भव्य होगा राम मंदिर: लार्सन एंड टुब्रो जल्द शुरू करेगा निर्माण, 36-40 महीनों में पूर्ण होगा कार्य

अयोध्या में 5 अगस्त को पीएम मोदी द्वारा राममंदिर भूमिपूजन और शिलान्यास का कार्य संपन्न हो चुका है। अब बहुत जल्द ही दिग्गज कंस्ट्रक्शन कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (एल & टी) वहाँ पर नींव की खुदाई कर भव्य राममंदिर का निर्माण आरंभ करने जा रही है।

इकोनॉमिक टाइम्स रिपोर्ट के अनुसार राम मंदिर की पहली मंजिल अगले डेढ़ साल में बन कर तैयार हो जाएगी। संभावना है कि मंदिर स्थल की खुदाई का काम मॉनसून खत्म होने के बाद शुरू हो सकता है। इस कार्य को पूरा होने में लगभग 4-5 महीने लग सकते हैं।

वहीं मंदिर की नींव डालने के काम में लगभग 6 से 8 महीने लग सकते है। राम मंदिर 3 मंजिल का बनाया जाना है। जिसका पहला मंजिल लगभग 6 से 8 महीने में तैयार हो जाएगा।

उम्मीद है कि पूरे मंदिर का निर्माण लगभग 36 से 40 महीनों में हो जाएगा। बाकी बचे दो फ्लोर के निर्माण में 18 महीने का समय लग जाएगा। इसके अलावा मंदिर की सुंदरता और साज-सज्जा में 4 महीने का अतिरिक्त समय और लगेगा।

अयोध्या मंदिर के ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा के अनुसार, ट्रस्ट सबसे पहले मंदिर के लेआउट प्लान के लिए अयोध्या विकास प्राधिकरण से आधिकारिक अनुमति लेगा। लेआउट प्लान के लिए 2 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर के लिए अधिकांश पत्थरों को पहले से ही तैयार किया जा चुका है।

इकोनॉमिक्स टाइम्स रिपोर्ट के अनुसार मिश्रा ने बताया, मंदिर ट्रस्ट और पत्थरों की व्यवस्था भी करेगा क्योंकि मंदिर का आकार अपनी मूल योजना से लगभग दोगुना हो गया है। भव्य मंदिर निर्माण में लगभग 20 प्रतिशत और अधिक पत्थरों की आवश्यकता होगी। मंदिर की साइट पर एल & टी पहले से ही काम कर रहे हैं। जल्द ही कंपनी अपने उपकरणों को लाकर नींव रखने के लिए स्थल पर खुदाई का काम शुरू कर देगी।

मिश्रा ने कहा कि मंदिर मुख्य रूप से बांसी पहाड़पुर पत्थर से बना होगा। मिश्रा ने आगे कहा कि लार्सन एंड टुब्रो और सोमपुरा परिवार इस परियोजना पर एक साथ काम करेंगे। आशीष सोमपुरा वही हैं जिन्होंने मंदिर का संशोधित डिज़ाइन तैयार किया है। एल & टी सोमपुरा द्वारा निर्मित आर्किटेक्चरल डिजाइन का निर्माण करेगा।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राम मंदिर सोमनाथ मंदिर और अक्षरधाम मंदिरों से भी भव्य बनने जा रहा है। विहिप द्वारा ओरिजिनल मॉडल को सोमपुरा द्वारा डिजाइन में संशोधन किया गया था। जिससे प्रस्तावित मंदिर पहले से अधिक बड़ा और अद्भुत हो गया। संशोधित मॉडल में और शिखरों को भी जोड़ा गया है।

कॉल रिकॉर्ड से खुली रिया चकवर्ती की कुंडली: मुंबई के DCP के संपर्क में थी, महेश भट्ट का भी नाम

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत राजपूत की मौत के मामले में लगातार एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं। समाचार चैनल रिपब्लिक भारत ने रिया चक्रवर्ती की कॉल डिटेल (CDR) के हवाले से दावा किया है कि वह मुंबई पुलिस के एक टॉप अधिकारी के संपर्क में थी।

समाचार चैनल का दावा है कि कॉल रिकॉर्ड से ये बात सामने आई है कि बांद्रा के डीसीपी अभिषेक त्रिमुखे (Abhishek Trimukhe) और रिया के बीच मोबाइल फोन पर बातचीत हो रही थी और दोनों एक-दूसरे को मैसेज भेजे जा रहे थे। इस खुलासे से अभिनेता सुशांत सिंह की मौत में मुंबई पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है।

रिया चक्रवर्ती के कॉल डिटेल के विश्लेषण से यह जानकारी सामने आई है। मुंबई में बांद्रा के डीसीपी अभिषेक त्रिमुखे और रिया चक्रवर्ती के बीच 4 बार बातचीत हुई हैं और वो लगातार सम्पर्क में थे।

उल्लेखनीय है कि बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) गुप्तेश्वर पांडे ने इस सप्ताह की शुरुआत में मीडिया को बताया था कि रिया चक्रवर्ती भूमिगत हैं। पांडे ने 5 अगस्त को कहा था, उनके पास मुंबई पुलिस के संपर्क में होने की कोई सूचना नहीं है। जबकि, अब रिया चक्रवर्ती के सीडीआर से पता चलता है कि रिया कथित रूप से डीसीपी जोन 9, मुंबई के अभिषेक त्रिमुखे के संपर्क में थी।

यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि इस मामले की जाँच के लिए जब बिहार पुलिस की टीम मुंबई पहुँची तो वो रिया चक्रवर्ती से नहीं मिल सकी, क्योंकि अभिनेत्री की लोकेशन अज्ञात थी।

रिया चक्रवर्ती मनी-लॉन्ड्रिंग मामले में आज बलार्ड एस्टेट (मुंबई) में एजेंसी के कार्यालय में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने पेश हुई। उनके साथ उनके भाई शोविक चक्रवर्ती भी थे। यह मामला दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के पिता द्वारा बिहार पुलिस में उनकी मृत्यु के संबंध में दर्ज शिकायत से सामने आया है।

रिपोर्ट के अनुसार कॉल डिटेल से साफ है कि रिया ने सुशांत से कहीं ज्यादा कॉल श्रुति मोदी और सैमुअल मिरांडा को किए। सीबीआई के एफआईआर में भी इन दोनों का नाम है। सुशांत की श्रुति बिजनेस मैनेजर रह चुकी थी, जबकि सैमुअल उनका मैनेजर था। कॉल रिकॉर्ड में महेश भट्ट का भी नाम आया है।

गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत गत 14 जून को बांद्रा में अपने अपार्टमेंट में मृत पाए गए थे। मुंबई पुलिस ने आकस्मिक मौत की रिपोर्ट (एडीआर) दर्ज की थी। 25 जुलाई को, सुशांत के 74 वर्षीय पिता केके सिंह ने 28 वर्षीय रिया और 5 अन्य पर बिहार के पटना में अपनी प्राथमिकी में आत्महत्या करने के लिए उकसाने का आरोप लगाया था।

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने बृहस्पतिवार (अगस्त 06, 2020) को इस FIR को एक नए मामले के रूप में फिर से पंजीकृत किया और रिया सहित 6 को आरोपित बनाया है।

कमलनाथ ने कहा था वह हिंदुओं से निपट लेंगे तो भरोसा किया: जामिया निजामिया ने कॉन्ग्रेस से रिश्ता तोड़ा

अयोध्या में राम मंदिर भूमिपूजन ने एक तरफ इस्लामी कट्टरपंथियों के चेहरे का नकाब हटा दिया है तो दूसरी ओर कॉन्ग्रेस की मुसीबतें बढ़ा दी है। कॉन्ग्रेस नेताओं का राम राम करना न इस्लामिक संगठनों को न भाया है और न पार्टी के सहयोगी दलों को। यहॉं तक कि पार्टी के भीतर भी मतभेद सामने आ चुके हैं।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भूमिपूजन के मौके पर हनुमान चालीसा का पाठ और दीपोत्सव किया। इसके कारण पार्टी से जुड़े कई मजहबी समूह के लोग नाराज हो गए और उन्हें खुलकर इस पर अपनी आपत्ति जताई।

अब जामिया निजामिया ने इस मामले पर बयान जारी कर कहा है कि समुदाय विशेष ने जो कॉन्ग्रेस और कमलनाथ पर भरोसा किया था, वह बेकार गया। अब उन्हें इस बारे में दोबारा सोचने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि मजहबी समुदायों को शुरुआती समय से ही उन पर यकीन नहीं था। लेकिन फिर भी जब उन्होंने यह आश्वासन दिया कि वह हिंदुओं से निपट लेंगे तो मजहबी कौम ने उन पर भरोसा कर लिया।

मगर, पिछले दिनों जो चेहरा कमलनाथ का देखने को मिला उससे कई चीजें स्पष्ट हो गई। जामिया निजामिया ने कमलनाथ ने अपनी हिंदू परस्ती के बहुत नमूने दिए। कभी हनुमान की पूजा की और कभी राम मंदिर बनने का स्वागत किया। इन सबसे कौम को बहुत तकलीफ हुई और ये पता चला कि उन्हें मजहब के लोगों से कभी कोई हमदर्दी नहीं थी। समुदाय विशेष वाले उनके लिए सियासत करने के लिए प्यादे थे।

जामिया निजामी ने समुदाय के लोगों को कमलनाथ पर यकीन न करने की सलाह दी है। साथ ही कहा कि आपका साथ देने वाले प्रतिनिधि को सोच-समझकर वोट दें। बयान में कहा गया है, “इस देश में समुदाय का व्यक्ति अब अकेला है। इसलिए इस दौर में हमें अपने लिए सोच समझकर नेता का चयन करना होगा।”

इस बयान में जामिया निजामिया की ओर से कहा गया, “हमें विश्वास है कि अकाबिरों की बताए हुए रास्ते से हटना बड़ा नुकसान का कारण बन सकता है।” इसके बाद इसमे यह भी स्पष्ट किया गया कि अब उनका कमलनाथ और कॉन्ग्रेस से कोई ताल्लुक नहीं है। वह दीन पर बयान और फिक्र को लेकर हमेशा अपनी आवाज को बुलंद रखेंगे, क्योंकि उस्मत का नेतृत्व करना वह अपना दीनी कर्तव्य समझते हैं।

ऑल्टन्यूज के जुबैर ने छोटी बच्ची की तस्वीर कर दी पब्लिक, मिल रही है रेप की धमकियाँ, नहीं मान रहा गलती

इस्लामिक प्रोपेगेंडा वेबसाइट चलाने वाले स्वघोषित फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर ने एक ट्विटर यूजर को निशाना बनाते हुए एक नाबालिग लड़की की तस्वीर सार्वजानिक करने का नया घटिया कारनामा कर ऑल्टन्यूज़ की उपलब्धियों में एक और इतिहास रचा है।

फैक्ट चेकिंग के नाम पर लोगों की निजी और गोपनीय जानकारियाँ सार्वजानिक करने के लिए कुख्यात समूह ऑल्टन्यूज़ के संस्थापकों में से एक मोहम्मद जुबैर शुक्रवार (अगस्त 07, 2020) को जगदीश सिंह नाम के एक ट्विटर यूजर को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा कर रहा था, जब उसने एक नाबालिग युवती की तस्वीर को ही सार्वजानिक कर दिया। इस युवती को कथित तौर पर उन्हीं ट्विटर यूजर की जगदीश सिंह की पोती बताया जा रहा है।

दरअसल, आईपीएस अधिकारी दीपांशु काबरा ने एक ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें सड़क पर एक बड़े गड्ढे पर वाहन उछल रहे थे। इस पर मोहम्मद जुबैर ने उन्हें जवाब में अपना एक कथित ‘फैक्ट चेक’ लेख के बारे में बताया।

जुबैर ने ‘ऑल्टन्यूज़’ द्वारा किया हुआ एक ‘फैक्ट चेक’ पोस्ट किया, जिसमें कहा गया था कि यह चीन का एक पुराना वीडियो है। हालाँकि, दीपांशु काबरा ने यह दावा कहीं भी नहीं किया था कि यह वीडियो हाल ही का है, या यह किसी विशेष शहर का है।

आईपीएस काबरा ने इस वीडियो में सिर्फ शहर का अनुमान लगाने के लिए कहा था। लेकिन आदत से मजबूर ज़ुबैर ने मान लिया कि वह इसे भारत का होने का दावा कर रहे हैं, और लगे हाथ इस पर ‘फैक्ट चेक’ तैयार करते हुए कहा कि यह वीडियो चीन का है।

इस पर एक ट्विटर यूजर जगदीश सिंह मोहम्मद जुबैर की इस फर्जी के फैक्ट चेकर से सहमत नहीं थे और उन्होंने सोशल मीडिया पर ऑल्टन्यूज़ के लिए प्रचलित जुमले का इस्तेमाल करते हुए जुबैर के ट्वीट के जवाब में ‘ल*डे का फैक्ट चेकर’ कह दिया।

यह जुमला ऑल्टन्यूज़ के कथित ‘फैक्ट चेक्स’ के फर्जीवाड़ों के लिए इन्टरनेट पर युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय है। ट्विटर यूजर जगदीश सिंह के इस कमेंट पर मोहम्मद जुबैर ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और उन्हें सीधे तौर पर जवाब देने के बजाए, उनकी ट्विटर डीपी (डिस्प्ले इमेज) निकाल ली, जिसमें जगदीश सिंह कथित तौर पर अपनी पोती के साथ नजर आ रहे थे।

जुबैर ने जगदीश सिंह की प्रोफाइल में लगी तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा- “हेलो जगदीश सिंह, क्या आपकी प्यारी पोती सोशल मीडिया पर लोगों को गाली देने की आपकी पार्ट टाइम जॉब के बारे में जानती है?”

ट्विटर यूजर की निजी तस्वीर का गलत इस्तेमाल करते हुए मोहम्मद जुबैर ने उन्हें अपनी प्रोफाइल फोटो बदलने की सलाह भी दी।

जुबैर द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट

यह तथाकथित ‘फैक्ट चेकर’ द्वारा किया गया बेहद घिनौना काम था। सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति अपने सोशल मीडिया अकाउंट में परिवार के सदस्य की तस्वीर का उपयोग कर रहा है, उन्हें सोशल मीडिया के झगड़े में नहीं खींचा जा सकता है, खासकर जब वो नाबालिग बच्चे हों।

हालाँकि, जुबैर ने फोटो में लड़की के चेहरे को धुँधला कर दिया था, लेकिन यह तथ्य अभी भी बना हुआ है कि उसने इन्टरनेट पर एक बहस को जीतेने के लिए एक नाबालिग छोटी लड़की का इस्तेमाल किया।

यदि तस्वीर में मौजूद लड़की ट्विटर यूजर की पोती है तो भी, उस नाबालिग लड़की को सोशल मीडिया पर उसके दादा की हरकतों के लिए जिम्मेदार नहीं बनाया जा सकता है।

वास्तव में, मोहम्मद जुबैर का तर्क पीएम मोदी द्वारा ट्विटर पर फ़ॉलो किए जा रहे अकाउंट द्वारा पोस्ट किए गए हर ट्वीट के लिए मोदी को दोषी ठहराए जाने वाले तर्क से भी अधिक अतार्किक है।

इस्लामिक विचारधारा के समर्थक मोहम्मद जुबैर का सोशल मीडिया पर बड़ा फॉलोवर्स वर्ग है और वह एक ऐसी वेबसाइट के साथ भी जुड़ा हुआ है, जो अक्सर लोगों की निजी जानकारी को सार्वजानिक करने के लिए कुख्यात है।

किसी भी सोशल मीडिया वेबसाइट में कई लोग हैं, विशेष रूप से इस्लामिक विचारधारा के अनुयायी, जो व्यक्तिगत जानकारी का उपयोग कर उन लोगों को निशाना बना सकते हैं, जो उनके नजरिए और विचारधारा से समर्थन नहीं रखते।

तथ्य यह है कि जुबैर, जो इस्लामिक विचारधारा वालों के बीच बेहद लोकप्रिय है, ने एक बच्ची की तस्वीर का इस्तेमाल किया, ताकि वह अपने समर्थकों को भी इसी रणनीति का प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित कर सके; यानी, जिन लोगों के विचारों से आप सहमत ना हों, उनके परिवार के लोगों को बहस में घसीटें। अक्सर लोग किसी भी बहस में परिवार के लोगों को खींचे जाने पर बहस से दूर हो जाते हैं।

मोहम्मद जुबैर की इस हरकत का परिणाम इस एक ट्वीट में देखा जा सकता है। जुबैर द्वारा सार्वजानिक की गई तस्वीर में जगदीश सिंह के साथ नजर आ रही नाबालिग बच्ची के लिए की गई भाषा का इस्तेमाल एक उदाहरण है कि अपने विरोधी स्वरों के खिलाफ इस्लामिक प्रपंचकारी किस स्तर तक गिर सकते हैं।

मोहम्मद जुबैर के लिए बच्चियों की जानकारी सोशल मीडिया पर डालना आम है। जुबैर इन बच्चियों को मुस्लिम कट्टरपंथियों के सामने बलात्कार और हत्या की धमकियों के लिए खुला छोड़ देता है। इस मामले में भी वो अपने घिनौने कृत्य को सही बता रहा है।

यह एक ऐसी घिनौनी तरकीब है, जिसका उपयोग ऑल्टन्यूज़ के ही सह-संस्थापकों और अन्य प्रोपेगेंडाबाजों द्वारा किया जाता है। इससे पहले भी ऑल्टन्यूज़ और इसके संस्थापक ‘स्क्विंट नियोन’ नाम से ट्विटर अकाउंट चलाने वाले युवकों की निजी जानकारी सार्वजनिक कर इसे अपनी बड़ी कामयाबी साबित करने का प्रयास करते हुए देखे गए हैं।

ऑल्टन्यूज़ द्वारा हर उस ट्विटर अकाउंट की निजी जानकारी को सार्वजानिक किया गया था, जो उनकी विचारधारा के समर्थन में नहीं रहते हैं या फिर भाजपा का समर्थन करते हैं।

मोहम्मद जुबैर ने यही कारनामा आज जगदीश सिंह के साथ फिर दोहराया है और वो इसके लिए बिलकुल भी शर्मिंदा नजर नहीं आता है। ट्विटर पर जुबैर की इस हरकत के लिए उसे लताड़ भी पड़ रही हैं।

हालाँकि, जगदीश सिंह ने अब अपनी प्रोफाइल फोटो जरुर बदल दी है, ताकि जुबैर जैसे ही अन्य इस्लामिक विचारधारा के समर्थक उनकी तस्वीर का दुरुपयोग ना करें।

एक ट्विटर यूजर ने लिखा है कि मोहम्मद जुबैर आज भी 14वीं सदी की विचारधारा का ही अनुसरण करता नजर आ रहा है।

कुछ ट्विटर यूजर्स ने जुबैर की इस हरकत पर जगदीश सिंह को FIR दर्ज करने की भी सलाह दी है।

जुबैर की इस हरकत के बाद उसके नाम से जुड़े कुछ और भी ट्वीट सोशल मीडिया में सामने आए हैं, लेकिन जुबैर उनका फैक्ट चेक नहीं का रहा है।

प्रोपेगैंडा वेबसाइट ऑल्टन्यूज़ को बड़े पैमाने पर पूरे वामपंथी संगठन द्वारा फैक्ट चेकर कहा जाता है। हालाँकि, तथ्यों से ऑल्टन्यूज़ का कभी भी कोई वास्ता नहीं रहा है और उसका एकमात्र मकसद दक्षिणपंथी सरकार के विरोध के साथ हिन्दू-घृणा को फैलाते हुए इस्लामिक विचारधारा को बढ़ावा देना ही है।

चेक के नाम पर यह ऑल्टन्यूज़ हिन्दुओं के बारे में गलत, फर्जी, बेबुनियाद और झूठे आरोप विकसित करते हुए मुस्लिम अपराधों को क्लीन चिट देने का कारनामा कई बार कर चुका है। यहाँ तक ​​कि वे उन आतंकियों को बचाते हुए पकड़े गए, जिन्होंने श्रीलंका में बड़े आतंकी हमले को अंजाम दिया था। वास्तव में, ऐसे किसी मजहबी अपराध को ढूँढना मुश्किल होगा, जिसमें ऑल्टन्यूज़ ने अपना प्रोपेगेंडा नहीं इस्तेमाल किया है।

ऑल्टन्यूज़ को अरुंधति रॉय जैसे संरक्षकों का साथ प्राप्त है, जो नियमित रूप से एक ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं, जिसे कहा जा सकता है कि जो नक्सली आतंकियों की भाषा से मेल खाती है, और किसी भी तरह से भारत के टुकड़े करना चाहती है।

कुंभ में पैर धोने से भूमिपूजन का प्रथम प्रसाद तक, मोदी राज में दलितों का बज रहा डंका

5 अगस्त 2020 का दिन दुनियाभर के हिंदुओं के लिए ऐतिहासिक रहा। अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों भव्य राम मंदिर का भूमिपूजन सम्पन्न हुआ। संतगणों और धर्माचार्यों की उपस्थिति में राम मंदिर निर्माण के लिए पहली ईंट रखी गई।

इस कार्यक्रम की यूँ तो कई खास बातें रहीं। लेकिन जिसने सबका दिल जीता वो यह कि भूमिपूजन के बाद इसका सबसे पहला प्रसाद एक दलित परिवार को भेजा गया

Prasad of Bhoomi Pujan was first given to the Dalit family ...
भूमि पूजन के बाद दलित परिवार को मिला प्रसाद (साभार: टीवी9 भारतवर्ष)

हुई न हैरानी? लेकिन यह सच है कि इतने महंतों, संतों, पुजारियों, ब्राह्म्णों व दिग्गज नेताओं की उपस्थिति के बावजूद पहला प्रसाद एक दलित परिवार को भेजा गया। ये परिवार महावीर का है। इन्हें भूमिपूजन के प्रसाद के साथ श्री रामचरितमानस की एक प्रति और तुलसी माला भी भेंट दी गई। इन्हें प्रसाद पहुँचाने के बाद ही अयोध्या में अन्य लोगों को प्रसाद वितरण का कार्य शुरू हुआ।

Ram Mandir Bhumipujan first prasad send to that dalit family in ...
दलित परिवार के घर भोजन करते सीएम योगी आदित्यनाथ (साभार: जी न्यूज)

महावीर के बारे में थोड़ा याद दिला दें कि यह वहीं शख्स हैं जिन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत छत मिली और लोकसभा चुनावों के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने उनके घर बैठकर भोजन किया था।

अब सवाल है कि मोदी सरकार द्वारा एक दलित को इतनी महत्ता दी जा रही है, जबकि वामपंथी मीडिया और विपक्ष तो आज तक हमें यही समझाता आया है कि नरेंद्र मोदी सरकार ब्राह्मणवाद का चेहरा है। इस सरकार ने दलितों के लिए कभी कुछ नहीं किया और तो और 6 साल के कार्यकाल में भी वह केवल दलितों की अनदेखी करते रहे, उन पर अत्याचार करते रहे।

जिग्नेश मेवानी जैसे तथाकथित दलित नेता ने हमें बताया कि जितना अत्याचार दलितों पर मोदी सरकार ने किया है उतना अत्याचार तो कभी भी किसी सरकार ने दलितों पर नहीं किया।

राहुल गाँधी जंतर मंतर पर आयोजित एक रैली में कहा था कि प्रधानमंत्री के मन में दलितों के लिए कोई जगह नहीं है। क्योंकि अगर जगह होती तो उनके लिए बनाई गई नीतियाँ बिलकुल अलग होतीं।

दलित नेता मायावती दावा करती हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने जो दलित छात्र की आत्महत्या पर आँसू बहाए वे घड़ियाली आँसू थे। मोदी और उनकी सरकार दलित विरोधी है। उनके आँसू दलित प्रेम नहीं ,बल्कि एक नाटक हैं।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी कहते हैं भाजपा सरकार ने जनहित के लिए एक भी योजना लागू नहीं की। बल्कि सरकार ने तो समाज के दलित, वंचित और पिछड़ों के ख़िलाफ़ अभियान शुरू कर दिया है।

बावजूद इतने आरोपों के मोदी सरकार अपना काम करती रही। यदि याद हो आपको तो पिछले साल कुंभ के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने सफाई कर्मचारियों के पैर स्वयं धोए थे। उस समय विपक्ष ने पीएम मोदी का यह चेहरा देखकर उन पर नौटंकी की राजनीति करने के आरोप लगा दिए थे। मोदी विरोधियों ने इस छवि को खारिज करने के लिए सोशल मीडिया पर अस्थायी और स्थायी नौकरी का मुद्दा उठा दिया था। 

Kumbh 2019: PM Narendra Modi washes sanitary workers' feet, Evokes ...
साल 2019 में कुंभ के दौरान स्वच्छता अभियान में जुटे सफाईकर्मियों के पाँव धोते पीएम नरेंद्र मोदी (साभार: जनसत्ता)

हालाँकि, ऐसा ही कुछ इस बार भी हुआ। भूमिपूजन में कुछ लोगों की अनुपस्थिति को उनके दलित होने से जोड़कर दर्शाया गया। लेकिन प्रथम प्रसाद की खबरें आते ही इन लोगों को करारा जवाब मिला। स्वयं दलित परिवार के मुखिया महावीर ने कहा,

“मैं दलित हूँ। मुख्यमंत्री ने पहले मुझे और मेरे परिवार को भेजा। मैं उनका धन्यवाद करता हूँ कि उन्होंने मुझे याद रखा।” उन्होंने कहा, “यह हमारे लिए दोहरी खुशी की तरह है। पहला यह कि राम मंदिर का हमारा सपना पूरा हुआ और दूसरा ये कि हमें पहला प्रसाद मिला। हमें उम्मीद है कि अब राज्य में जातीय भेदभाव समाप्त हो जाएगा और हर कोई विकास और सबके कल्याण के बारे में सोचेगा।”

जिस सरकार की छवि बिगाड़ने के लिए विपक्ष ने उसे अन्य धर्म के लोगों के आगे कट्टर हिंदुत्ववादी बताया और दलितों के आगे ब्राह्मणवादी करार दे दिया, उसी सरकार ने कभी इन आरोपों का मौखिक रूप से खंडन नहीं किया, बल्कि अपनी कार्यनीतियों से विपक्ष को झुठलाते रहे।

6 साल के कार्यकाल में मोदी सरकार ने चुनाव नजदीक देखकर कभी दलितों के प्रति प्रेम नहीं दिखाया, बल्कि उन्होंने तो सत्ता सँभालने के साथ ही समाज के पिछड़े वर्ग के लिए कार्य करना शुरू कर दिया था।

आज शायद उसी प्रतिबद्धता का नतीजा है कि अगर हम आँकड़ों से मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल को निकाल भी दें तो भी इतनी योजनाएँ हमारे पास बचती हैं- जो यह बताती हैं कि दलित उत्थान के लिए मोदी सरकार के प्रयास कैसे 70 सालों की दिखावटी कोशिशों पर भारी हैं।

मोदी ने सरकार ने दलितों के लिए क्या किया?

सबका साथ सबका विकास के मूलमंत्र के साथ अपने दूसरे कार्यकाल के दूसरे साल में मोदी सरकार कुछ दिन पहले प्रवेश कर चुकी है। लेकिन मोदी सरकार ने दलितों के लिए योजनाएँ हाल फिलहाल में शुरू नहीं की है। उन्होंने साल 2014 में चुनाव जीतने के साथ ही इस पर काम करना शुरू किया और सुनिश्चित किया कि ये योजनाएँ केवल दस्तावेजों में लागू न हों, बल्कि जमीनी स्तर पर इनका फायदा समाज के पिछड़े समुदाय को मिले।

याद करिए साल 2017-18 को। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दलितों के उत्थान के लिए अपने बजट में क्रांतिकारी बदलाव किया था। एक समय तक जहाँ पुरानी सरकारी दलितों की आबादी के प्रतिशत के अनुपात में बजट से धन नहीं देती थी, वहीं मोदी सरकार ने जाधव समिति की सिफारिशों को लागू कर दिया।

इसके बाद दलितों की 2001 की जनगणना की जनसंख्या के अनुपातिक प्रतिशत के अनुसार बजट में धन की व्यवस्था की गई। ऐसे ही 2018-19 में दलित योजनाओं के लिए मोदी सरकार ने बजट में 8,63,944 करोड़ रुपए दिए, जो दलितों के लिए अब तक का सबसे अधिक आवंटन रहा। 

पिछड़े वर्ग के प्री मैट्रिक-पोस्ट मैट्रिक विद्यार्थियों के लिए भी मोदी सरकार ने किया आर्थिक मदद का इंतजाम:  साल 2017 में ही 19 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी ने दलित परिवारों के बच्चों को मिलने वाली आर्थिक मदद का दायरा बढ़ाया। 

पहलेहले यह मदद उन्हीं परिवारों के बच्चों को मिलती थी, जिनकी आमदनी सालाना 2 लाख रुपए थी। लेकिन मोदी सरकार ने इसे बढ़ाकर 2.5 लाख रुपए कर दिया। इसके साथ हॉस्टल में रहने वाले बच्चों को मिलने वाले 350 रुपए को बढ़ाकर 525 रुपए कर दिया और घर पर रहकर पढ़ने वाले बच्चों को 150 रुपए बढ़ाकर 250 रुपए कर दिया।

इसी तरह मैट्रिक से आगे पढाई पूरे करने वाले छात्रों को केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही योजना के तहत 100 प्रतिशत का धन दिया जाता है। इस योजना के तहत स्कॉलरशिप वाले छात्रों के लिए पुस्तक से लेकर पढ़ाई तक का खर्चा केंद्र सरकार वहन करती हैं।

सरकार ने दलित छात्रों की उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया: रिपोर्ट्स के अनुसार दलित छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए 2000 जूनियर फेलोशिप और सीनियर फेलोशिप प्रतिवर्ष यूजीसी से दिया जाता है। इसमें जूनियर के लिए 25 हजार रुपए और सीनियर के लिए 28 हजार रुपए का फेलोशिप निर्धारित है।

दलितों के अन्तरजातीय विवाह करने पर आर्थिक सहायता: मोदी सरकार ने दलितों के अन्तरजातीय विवाह के लिए पूरे देश में एक समान आर्थिक सहायता 2.5 लाख रुपयों की कर दी। इससे पहले राज्यों द्वारा दलितों को अन्तरजातीय विवाह के लिए अलग-अलग राशि दी जाती थी।

दलितों के लिए प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना ने सराहनीय काम किया: इस योजना के तहत उन गाँवों को आदर्शों गाँवों में विकसित किया गया, जहाँ आबादी में 50 प्रतिशत जनसंख्या दलितों की है। इन दलित बाहुल्य गाँवों में दलित परिवारों के लिए आवास, सड़कें, बिजली, रोजगार और सुरक्षा के लिए मोदी सरकार ने पूरा धन दिया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2018 तक 25,000 गाँवों में इस केंद्रीय योजना से दलितों का कल्याण कार्य चला।

दलित युवाओं के उद्यम और रोजगार की व्यवस्था की गई: दलित युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से कई योजनाएँ प्रथम कार्यकाल के प्रथम वर्ष से ही चलाई जा रही हैं। इनमे केंद्र सरकार State Scheduled Castes Development Corporations (SCDCs) को धन देती है जो दलित परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए कई योजनाओं के तहत लोन देती है।

देश में दलित युवाओं के लिए पहली बार वेंचर कैपिटल फंड की शुरुआत हुई: प्रधानमंत्री मोदी ने दलित युवाओं को स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रेरित करते हुए देश में पहली बार वेंचर कैपिटल फंड की शुरुआत 16 जनवरी 2015 को की।

इस योजना को IFCI Venture Capital Fund Ltd. नियंत्रित करता है। यह कोष दलित युवाओं में उद्यमिता को बढ़ावा देता है। यह उन दलित उद्यमियों की सहायता करता है जो कुछ नया करके समाज में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं।

दलितों को मुद्रा योजना का फायदा: समाज के पिछले वर्ग को आगे लेकर आने के लिए प्रधानमंभी ने मुद्रा योजना की भी शुरूआत की। केवल 31 मार्च 2017 तक दलितों के लिए 2,2500,194 मुद्रा खाते खुले, जो कुल मुद्रा खातों का 57 प्रतिशत है।

इसके बाद समुदाय के लोगों को 67,943.39 करोड़ का लोन आवंटित हुआ। साथ में ही नए उद्यमियों को हर संभव मदद देने के लिए अनुसूचित जाति/जनजाति हब की स्थापना की गई।

देश के सभी दलित गाँवों में बिजली पहुँची: प्रधानमंत्री के नेतृत्व में शुरू दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत आज देश के लगभग सभी गाँवों में बिजली पहुँचाई जा चुकी है। रिपोर्ट बताती है कि देश में 5,97,464 गाँवों में से 597,265 गाँवों में बिजली रिकॉर्ड समय में पहुँचाई गई।

दलित उत्पीड़न कानून को संशोधित कर सख्त बनाया: देश में दलितों को उत्पीड़न काफी समय से चला आ रहा है। ऐसे में मोदी सरकार ने दलित उत्पीड़न 1989 कानून को संशोधित करके अधिक सख्त बनाया और इसे 26 जनवरी 2016 को लागू भी कर दिया गया। इस संशोधन से दलितों को त्वरित न्याय दिलाने की मोदी सरकार की मुहिम को बल मिला।

इस कानून में सुनिश्चित किया गया कि दलित उत्पीड़न के मामलों की सुनवाई करने के लिए विशेष अदालतों के गठन और सरकारी वकीलों की उपलब्धता हो। नए कानून में यह भी सुनिश्चचित किया गया कि आरोप-पत्र दाखिल होने के 2 महीने के अंदर न्याय दे दिया जाए। नए कानून के तहत दलितों को मिलने वाली सहायता राशि को स्थिति के अनुसार 85,000 रुपए से 8,25,000 रुपए तक कर दिया गया।

गौरतलब है कि यह केवल कुछ चुनिंदा योजनाएँ है। जिन्हें मुख्यत: दलितों के नाम पर उन्हें आगे बढ़ाने के लिहाज से शुरू किया गया। लेकिन ध्यान रहे कि वे योजनाएँ जिनका फायदा समस्त भारतीयों को है उसके अंतर्गत भी दलित आते हैं और वह उसका फायदा भी उठाते हैं।

मोदी सरकार लगातार समाज में समरसता को बढ़ावा देने में प्रयासरत है। मगर, विपक्षी लगातार सरकार की आलोचना के नाम पर जनता को बरगलाकर और गिनी-चुनी घटनाओं का उल्लेख करके वर्तमान सरकार की छवि बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे।

हाँ, ये बात और है कि मोदी सरकार के बारे में बोलते हुए ये पार्टियाँ ये भी नहीं बताती कि उनकी पार्टी ने आखिर सत्ता में रहते हुए ऐसा क्या-क्या किया, जिसके आधार पर वो इतनी आलोचनाएँ कर रहे हैं। वे केवल जनता को कमियाँ गिनवाते हैं, जबकि आँकड़े बिलकुल उलट स्थिति बयान करते हैं।

जैसे NCRB 2016 की एक रिपोर्ट बताती है कि प्रधानमंत्री मोदी ने दलितों को सुरक्षा देने में पूर्ववर्ती सरकारों से काफी अच्छा काम किया है। दलितों के विरुद्ध अपराध करने वालों को सजा दिलाने में भाजपा शासित राज्य, कॉन्ग्रेस शासित राज्यों से कहीं आगे है।