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मथुरा व काशी की मुक्ति के विरोध मे उतरी कॉन्ग्रेस: इसका समर्थन करने वाले BJP नेता को गिरफ्तार करने की माँग

कॉन्ग्रेस पार्टी ने कर्नाटक के मंत्री केएस ईश्वरप्पा की सिर्फ इसीलिए गिरफ़्तारी की माँग कर दी क्योंकि उन्होंने काशी और मथुरा में इस्लामी आक्रांताओं द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटा कर हिंदुओं के पक्ष में न्याय की बात कही थी। ईश्वरप्पा ने कहा था कि अयोध्या की ही तरह काशी और मथुरा को भी मुक्त कराया जाएगा। इसी पर कर्नाटक कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने उनकी गिरफ़्तारी की माँग कर दी।

डीके शिवकुमार ने कहा कि ईश्वरप्पा को न सिर्फ़ कैबिनेट से इस्तीफा देना चाहिए बल्कि उन्हें गिरफ्तार भी किया जाना चाहिए। ईश्वरप्पा ने काशी में भव्य विश्वनाथ मंदिर और मथुरा में भव्य कृष्ण मंदिर की बात कही थी। बुधवार (अगस्त 5, 2020) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर का भूमिपजन कर के उसकी आधारशिला रखी थी, जिसके बाद ईश्वरप्पा ने ये बयान दिया था।

डीके शिवकुमार ने कहा कि कारसेवकों को अयोध्या की तरह ही आंदोलन करने की सलाह देकर मंत्री ईश्वरप्पा समाज की शांति को भंग करने का काम कर रहे हैं। बेल्लारी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने ये बात कही। उन्होंने कहा कि पुलिस को ऐसे लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करना चाहिए। शिवमोगा में मंत्री ईश्वरप्पा ने कहा था कि आज नहीं तो कल मथुरा और काशी में भव्य मंदिर बनेगा ही।

कर्नाटक भाजपा के पूर्व अध्यक्ष ईश्वरप्पा ने कहा था कि अयोध्या, काशी और मथुरा हिंदुओं की दासता के प्रतीक रहे हैं, जहाँ क्रमशः राम, शिव और कृष्ण के मंदिरों को ध्वस्त कर के वहाँ मस्जिदों का निर्माण कर दिया गया। डीके शिवकुमार ने ये भी पूछा कि या उनका रुख येदियुरप्पा सरकार के अधिकृत स्टैन्ड को दिखाता है? शिवकुमार ने सलाह दी कि उन्हें याद रखना चाहिए कि वो मंत्री हैं, कोई सामान्य नागरिक नहीं।

ज्ञात हो कि राम मंदिर भूमिपूजन के दौरान पंडित गंगाधर पाठक ने प्रधानमंत्री मोदी को यजमान बताते हुए कहा था कि अपने यजमान से दक्षिणा की माँग करना गलत नहीं होता है। आचार्य गंगाधर पाठक ने दक्षिणा में गोहत्या पर पाबंदी और काशी तथा मथुरा की मुक्ति की माँग रखी थी। बाद में उन्होंने कहा था कि पीएम श्री कृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ को मुक्त करवाएँ। इन दोनों दिव्य स्थानों से अतिक्रमण हटाया जाना चाहिए।   

NCPCR ने AltNews के मो. ज़ुबैर के ट्वीट का लिया संज्ञान, कार्रवाई के दिए आदेश: छोटी बच्ची की तस्वीर कर दी थी पब्लिक

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने एक ऐसे मामले का संज्ञान लिया है, जिसमें माइक्रोब्लॉगिंग साइट पर एक ट्विटर यूजर द्वारा एक नाबालिग लड़की को धमकाया और प्रताड़ित किया गया था। आयोग के चेयरपर्सन प्रियंक कानूनगो ने शनिवार (अगस्त 8, 2020) शाम ट्विटर पर इसकी जानकारी दी।

कानूनगो ने बताया कि ट्विटर इंडिया और संबंधित कानून प्रवर्तन अधिकारियों को ट्वीट के बारे में सूचित किया गया है, और उन्हें उचित कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।

बता दें कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) भारत की संसद के एक अधिनियम द्वारा स्थापित एक वैधानिक निकाय है। यह भारत सरकार के महिला और बाल विकास मंत्रालय के तहत काम करता है।

हालाँकि, NCPCR की चेयरपर्सन ने उस ट्वीट का जिक्र नहीं किया है, जिसके खिलाफ आयोग ने कार्रवाई की है, मगर हमारे सूत्रों ने जानकारी दी है कि यह इस्लामिक प्रोपेगेंडा वेबसाइट ऑल्टन्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर द्वारा पोस्ट किए गए एक ट्वीट से संबंधित है।

Forum for Indigenous Rights- North-East India नामक संस्था ने भी पुष्टि की है कि NCPCR मोहम्मद जुबैर के ट्वीट के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। बता दें कि Forum for Indigenous Rights- North-East India पूर्वोत्तर भारत के लोगों के अधिकारों के लिए काम करने वाला एक संगठन है।

ऑल्टन्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर द्वारा नाबालिग लड़की की तस्वीर सार्वजानिक करने के बाद संगठन ने लड़की के ऑनलाइन उत्पीड़न और धमकियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग करते हुए आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी।

उन्होंने जुबैर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट दर्ज करने के लिए आयोग से अनुरोध किया था, और उसके खिलाफ POCSO और अन्य संबंधित कानूनों के तहत मामला दर्ज करने को कहा था।

गौरतलब है कि फैक्ट चेकिंग के नाम पर लोगों की निजी और गोपनीय जानकारियाँ सार्वजानिक करने के लिए कुख्यात समूह ऑल्टन्यूज़ के संस्थापकों में से एक मोहम्मद जुबैर शुक्रवार (अगस्त 07, 2020) को जगदीश सिंह नाम के एक ट्विटर यूजर को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा कर रहा था, तब उसने एक नाबालिग युवती की तस्वीर को ही सार्वजानिक कर दिया। इस युवती को कथित तौर पर उन्हीं ट्विटर यूजर की जगदीश सिंह की पोती बताया जा रहा है।

हालाँकि, जुबैर ने फोटो में लड़की के चेहरे को धुँधला कर दिया था, लेकिन यह तथ्य अभी भी बना हुआ है कि उसने इन्टरनेट पर एक बहस को जीतेने के लिए एक नाबालिग छोटी लड़की का इस्तेमाल किया। इसके बाद बच्ची को रेप और हत्या की धमकियाँ मिलने लगी।

भारत में बड़े हमले की साजिश नाकाम: J&K से 6 आतंकी गिरफ्तार, टेरर फाइनेंसिंग के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़

जम्मू-कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा के लिए टेरर फंडिंग करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। अब तक 6 आतंकवादियों को गिरफ्तार भी किया गया है। बताया जा रहा है आतंकवादी भारत में बड़े हमले की साजिश रच रहे थे। इस गिरोह का पर्दाफाश कर पुलिस को आज (8 अगस्त, 2020) एक बड़ी कामयाबी आज हासिल हुई है।

आईजी मुकेश सिंह ने बताया, जम्मू में एक टेरर फाइनैंसिंग नेटवर्क जो लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों को पैसे पहुँचने की कोशिश कर रहा है, इस खबर पर स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) जम्मू ने मुदासिर फारूक भट से पूछताछ की। पूछताछ के दौरान उसने लश्कर के साथ अपने संबंधों को स्वीकारा।

पुलिस महानिरीक्षक ने बताया, हमने एमएफ भट्ट से अधिक जानकारी एकत्र की और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े 5 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया। जिन आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है उसमें, तौकीर अहमद भट, आसिफ भट, खालिद लतीफ भट, गाजी इकबाल और तारिक हुसैन मीर शामिल हैं।

जम्मू पुलिस महानिरीक्षक ने बताया, हमारे पास 15 अगस्त को लेकर किसी भी आतंकी गतिविधि योजना के बारे में कोई विशेष जानकारी नहीं है, लेकिन हाँ यह फिर से सक्रिय करने का प्रयास था और शायद, वे भविष्य में कुछ बड़ा करने की योजना बना रहे थे।

वहीं इससे पहले गुरुवार को जम्मू कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने बताया था कि केंद्रशासित प्रदेश में मानवरहित विमानों के जरिए हथियार और गोला-बारूद भेजने का पाकिस्तान ने एक नया तरीका अपना लिया है और पिछले कुछ समय में इस तरह की कई घटनाओं का पर्दाफाश हुआ है।

सिंह ने कहा, सीमा पार से 2020 के पहले सात महीनों में 75 प्रतिशत अधिक गोलीबारी हुई है। इस जुलाई तक पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी की 487 घटनाएँ हुईं, जबकि 2019 में इसी अवधि के दौरान इस तरह की 267 घटनाएं हुई थीं। पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों की घुसपैठ कराने के लिए इस साल सीमा पार से गोलीबारी में वृद्धि कर दी है। इस साल अब तक सीमा पार से केवल 26 आतंकी ही इस केंद्रशासित प्रदेश में प्रवेश कर पाए हैं।

पुलिस महानिदेशक ने कहा, यहाँ मौजूद आतंकवादियों के लिए हथियारों की भारी कमी हो गई है। इसके साथ ही लगातार चलाए गए आपरेशन की वजह से 300- 350 आतंकी की जगह जम्मू कश्मीर में वर्तमान में 200 से भी कम आतंकवादी सक्रिय हैं।

उन्होंने आगे कहा, इस साल अब तक 80 स्थानीय युवा आतंकवाद में शामिल हो चुके हैं, जिनमें से 38 मारे गए और 22 गिरफ्तार किए गए। आतंकवाद में शामिल होने वाले 20 लोग अभी सक्रिय हैं।

सुशांत के नाम पर बिहार को गाली, बिहारी परिवारों को बताया जहरीला: शेखर गुप्ता की वेबसाइट की करतूत पर रवीश भी चुप

सुशांत सिंह राजपूत की कथित आत्महत्या मामले ने अब मीडिया के एक ख़ास वर्ग को बिहार के खिलाफ ज़हर उगलने का मौका दे दिया है। जहाँ एक तरफ तो लोग रिया चक्रवर्ती के कारण बंगाल और बंगालियों को बदनाम न करने की सलाह दे रहे हैं (जो सही भी है) लेकिन दूरी तरफ लिबरल ब्रीड के कुछ लोग बिहार को भला-बुरा कह रहे हैं। आश्चर्य की बात तो ये है कि बिहार से आने वाले बड़े पत्रकार भी इसका विरोध नहीं कर रहे।

जिस तरह से रिया चक्रवर्ती के बहाने किसी को पूरे बंगाली समुदाय को लपेटे में लेने का कोई अधिकार नहीं है, ठीक उसी तरह सुशांत सिंह राजपूत के बारे में धारणाएँ बना कर बिहार और बिहारियों को लेकर अपनी हीन भावनाओं को प्रदर्शित करने का भी कोई हक नहीं है। और अगर ऐसा होता है तो कम से कम उन बिहारियों को तो कुछ बोलना ही चाहिए, जो मीडिया मे बड़े पदों पर बैठे हैं।

बात शुरू करते हैं शेखर गुप्ता की वेबसाइट ‘द प्रिन्ट’ के एक लेख से, जिसमें कहा गया है कि ‘विषाक्त’ बिहारी परिवारों में बच्चों पर श्रवण कुमार बनने की जिम्मेदारी होती है। सुशांत सिंह राजपूत के बहाने लिखा गया है कि सासें अपनी बहुओं को ‘डायन’ और ‘गोल्ड डिगर’ तक कहती हैं। साथ ही दावा किया गया है कि युवाओं के शहरी गर्लफ्रेंड को सारी चीजों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है।

इस लेख में बताया गया है कि परिवार के लोग बड़े होने पर भी युवाओं को ‘मेरा लाड़ला’ समझते हैं और शादी के मामले में उसके विचारों को नहीं मानते। लिखा गया है कि गर्लफ्रेंड या पत्नी पुरुष को उसके परिवार से अलग कर देती है, बिहार में ऐसी धारणा है। साथ ही इसमें बिहारी लोकगीतों को भी लपेटा गया है और बाद में इसका दायरा बढ़ा कर उत्तर बिहार कर दिया गया है। सुशांत सिंह राजपूत के परिवार को भी बदनाम किया गया है।

इस लेख को लिखने वाली ने शायद टीवी सिरियल्स नहीं देखे हैं। हमने बचपन में ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ से लेकर अभी ‘कुंडली भाग्य’ तक, साह-बहू के झगड़े अब तक सैकड़ों सीरियलों में दिखाए गए हैं और लड़कियों को ‘गोल्ड डिगर’ कहते हुए भी बताया गया है। लेकिन, इनमें से कितने सीरियल बिहारी परिवारों पर आधारित हैं? बेटे, उसकी गर्लफ्रेंड और माँओं के इस झोलमोल में कितनी कहानियाँ बिहार पर आधारित हैं? न के बराबर।

अब सोचने वाली बात ये है कि अगर बिहारी परिवारों में ही सिर्फ़ ऐसी सोच होती कि ‘लड़कियाँ घर तोड़ देती हैं, गोल्ड डिगर होती हैं, सास द्वारा बहू को अपमानित किया जाता है और बेटा हमेशा लाड़ला रहता है’ तो क्या इन टीवी सीरियलों की कहानियों में अधिकतर बिहारी परिवारों पर नहीं आधारित होते? साहित्य से लेकर सिनेमा तक अनगिनत बार नायक की गर्लफ्रेंड और परिवार में अनबन हुई है, इनमें से कितने बिहार पर आधारित कहानियाँ हैं?

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बहाने ‘द प्रिंट’ की बिहार को बदनाम करने की कोशिश

ये तो थी परदे की बात। अब आते हैं वास्तविकता पर। श्रीदेवीं, परवीन बॉबी, गुरुदत्त और दिव्या भारती तक कितनी ही संदिग्ध मौतें हुईं, इनमें से कितनों के राज्यों को इनकी मौत के लिए गाली दी गई? मुंबई से लेकर दिल्ली तक अनगिनत अनसुलझे मामले हैं, क्या उन सभी में राज्यों को गाली दी गई? आरुषि तलवार मामले में पूरी यूपी के माता-पिता को कोसा जा सकता है? इंद्राणी मुखर्जी मामले में पूरे बंगाल को गाली दी गई?

जहाँ तक बिहारी लोकगीतों की बात है, उसमें तो शादी के मंडप पर बैठे दामाद को भी गाली दी जाति है? तो क्या इसके लिए लेख लिख दिया जाएगा कि शादी के लिए गए बेचारे दूल्हे को टॉक्सिक महिलाएँ मिल कर गाली दे रही हैं? लोकगीतों और रीति-रिवाजों में किसी के मरने की बात भी कह दी जाती है, तो क्या इसे सचमुच का मान कर गाली बकी जाएगी? ऐसा वही कर सकते हैं जिन्हें इन चीजों की समझ ही नहीं।

जहाँ तक गर्लफ्रेंड पर आरोप लगने पर आउटरेज मचाने की बात है, बिहार तो छोड़िए बल्कि पूरी दुनिया में ऐसी न जाने कितनी ही घटनाएँ सामने आती रहती हैं जहाँ लड़की द्वारा उसके बॉयफ्रेंड का, या उसके पति की हत्या की गई। इसी तरह किसी पुरुष द्वारा भी उसकी गर्लफ्रेंड या पत्नी की हत्या का मामला सामने आता रहता है। अगर अमेरिका से ऐसी घटनाएँ आ गईं तो क्या वहाँ भी बिहारियों ने जाकर ये सब सिखा दिया?

सुशांत सिंह राजपूत की माँ कि मौत तभी हो गई थी, जब वो टीनेजर थे। उनके वृद्ध पिता मुंबई में उनके साथ नहीं रहते थे। अब शेखर गुप्ता की वेबसाइट के ‘मेरा लाड़ला’ वाली थ्योरी को सही मानें तो उन्हें तो मुंबई में रहना चाहिए था और अपने बेटे के हर काम में हस्तक्षेप करना चाहिए था? लेकिन, वो तो पटना में रहते थे। क्या एक बाप को अपने बेटे की मौत के बाद मिले सबूतों के आधार पर शिकायत तक दर्ज कराने का अधिकार नहीं है?

दिशा सालियान तो बिहारी नहीं थीं? उनकी माँ का कहना है कि उन्हें किसी खास आदमी पर शक तो नहीं है लेकिन बॉलीवुड एक डार्क इंडस्ट्री है जहाँ कुछ भी हो सकता है। अपनी बेटी की संदिग्ध मौत पर शक तो उन्हें भी है। लेकिन, मीडिया और लिबरालों का एक वर्ग चाहता है कि अगर मृतक के पीड़ित परिजनों के पास सबूत हों फिर भी उन्हें चुप रहना चाहिए, राज को दफन कर देना चाहिए, किसी पर शक भी हो तो बोलना नहीं चाहिए।

सुशांत सिंह राजपूत एक बिहारी थे और इस हिसाब से बॉलीवुड में आउटसाइडर थे। यही कारण है कि बिहार में उनकी मौत एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है। विवाद में सलमान खान का नाम आने पर उन्हें गाली देते हुए भोजपुरी गाने भी बने और राज्य में कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए। ये सब इसके बावजूद हुआ कि बिहार सलमान खान के बड़े बाजारों में से एक है। बिहार की भावनाएँ उबाल पर हैं।

हैरानी वाली बात ये भी है कि रवीश कुमार जैसे पत्रकार भी चुप हैं जबकि वो बार-बार अपने गृह प्रदेश बिहार की बात करते हुए गर्व करते रहे हैं। शेखर गुप्ता की वेबसाइट पर बिहारी परिवारों को गाली देते हुए लेख छपते हैं और रवीश चूँ तक नहीं करते? खाली नंगे पाँव ‘छठ का दउरा’ उठा कर चलने की तस्वीर डाल खुद के जमीनी बिहारी होने का एहसास दिलाने वाले रवीश को अब तो बोलना चाहिए?

एनकाउंटर के डर से विकास दुबे का साथी गले में तख्ती लटकाकर UP पुलिस के सामने हुआ दंडवत, कहा- मुझ पर रहम करो

कानपुर में दबिश देने गए पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या करने वाले खूँखार अपराधी विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद उसके साथी उमाकांत को भी पुलिस की कार्रवाई का डर सता रहा था। जिस वजह से आज (8 अगस्त, 2020) उसने खुद सरेंडर कर दिया। उमाकांत के सर पर पुलिस ने 50 हजार का इनाम रखा था। नाटकीय अंदाज में हुए इस सरेंडर में उमाकांत के साथ उसके बच्चे और पत्नी भी थी।

फोटो साभार: अमर उजाला

उमाकांत उन 21 वांछित अपराधियों में शुमार था, जिनकी यूपी पुलिस बिकरू हत्याकांड के बाद से तलाश कर रही थी। महीने भर से ज्यादा की फरारी काटने के बाद उमाकांत ने आखिरकार सरेंडर कर दिया। उसे एनकाउंटर का खौफ इस कदर था कि वह अपने परिवार के साथ थाने पहुँचा और दंडवत लेट गया।

इस दौरान उमाकांत शुक्ला ने गले में तख्ती लटकाई थी। जिसमें खुद के विकास दुबे का साथी होने और कानपुर कांड के बाद आत्मग्लानि की बात कही गई थी। तख्ती लटकाएँ हुए उमाकांत शुक्ला ने पुलिस से रहम की भीख माँगते हुए कहा कि मैं सरेंडर करने आया हूँ।

उमाकांत शुक्ला ने पुलिस से कहा मेरा नाम उमाकांत शुक्ला उर्फ गुड्डन है। कानपुर कांड में मैं विकास दुबे के साथ शामिल था। मुझे पकड़ने के लिए रोज पुलिस छापेमारी कर रही है, जिससे मैं बहुत डरा हुआ हूँ। हम लोगों द्वारा जो घटना की गई थी, उसकी हमें बहुत आत्मग्लानि है। मैं खुद पुलिस के सामने हाजिर हो रहा हूँ। मेरी जान की रक्षा की जाए, मुझ पर रहम किया जाए।

बता दें उमाकांत भी 8 पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोप में नामजद किया गया था। आत्मसमर्पण के दौरान उमाकांत शुक्ला की बेटी ने पुलिस से हाथ जोड़कर गुजारिश की कि उसके पापा सरेंडर करने आए हैं, पुलिस उस पर रहम करे।

फोटो साभार: अमर उजाला

विकास दुबे के गाँव बिकरू में 2-3 जुलाई की दरम्यानी रात को 8 पुलिसकर्मियों की नृशंस हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में विकास दुबे समेत उसके कई साथी शामिल थे। पुलिस ने हत्याकांड के बाद 21 वांछितों के पोस्टर जारी किए थे। उनमें से उमाकांत भी एक था। हत्याकांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे समेत 6 लोगों को पुलिस एनकाउंटर के दौरान मौत के घाट उतार चुकी है।

गौरतलब है कि विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद उससे संबंधित कई वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। गैंगस्टर विकास दुबे के राइट हैंड कहे जाने वाले अमर दुबे की 29 जून को हुई शादी का एक वीडियो सामने आया था। इस वीडियो में चौकी इंचार्ज केके शर्मा भी दिखाई दिए थे। यह केके शर्मा वहीं दारोगा थे जिसे विकास दुबे के लिए मुखबिरी के शक मे निलंबित कर दिया गया है।

वीडियो में दरोगा वर वधू को आशीर्वाद देते हुए नजर आए थे। उसी दौरान विकास दुबे दरोगा केके शर्मा से कह रहा था कि डरो नहीं पास आओ। वहीं विकास दुबे एक नवविवाहिता के साथ फोटो खिंचवाता दिख रहा है, जिसमें नवविवाहिता उसे मामा कहते हुए संबोधित करती है। और कहती है कि उसके साथ एक फोटो खिंचवा लो। जिस पर विकास दुबे जवाब देता है कि, वो बैठकर नहीं, खड़े होकर ही फोटो खिंचवाता है। यह वीडियो विकास के गुर्गे अमर दुबे और खुशी की शादी का है।

‘आधी उम्र की लड़कियों से रोमांस..’: अक्षय कुमार ने राम मंदिर का किया स्वागत तो भड़की AltNews की पत्रकार

स्वघोषित फैक्ट चेकिंग वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ (AltNews) जिसका स्टाकिंग, डॉकिंग, और सांप्रदायिक अपराधों को सुविधानुसार तोड़-मरोड़ कर पेश करने का इतिहास रहा है। यह वही वेबसाइट है जिसने जामिया हिंसा मामले में पत्थर को पर्स बता कर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की थी। जो अब राम मंदिर भूमिपूजन कार्यक्रम के बाद हिंदू घृणा के निम्नतम स्तर पर उतर आया है।

ऑल्ट न्यूज़ उन सभी कलाकारों को निशाना बना रहा है जिन्होंने भगवान राम के भव्य मंदिर शिलान्यास पर अपनी ख़ुशी जाहिर की। इसी कड़ी में अक्षय कुमार, कार्तिक आर्यन, वरुण धवन आदि को निशाना बनाया गया है।

गौरतलब है कि ऑल्ट न्यूज़ के संपादकों में से एक, पूजा चौधरी अब बॉलीवुड के उन कलाकारों के चारित्रिक हरण और मानसिक शोषण पर उतर आई है, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से अपने धार्मिक विचारों को अभिव्यक्त किया।

अक्षय कुमार पर ऑल्ट न्यूज़ की पत्रकार ने साधा निशाना

अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन के बाद, अभिनेता अक्षय कुमार ने इस ऐतिहासिक दिन की तुलना दिवाली से करते हुए लिखा, “इस साल की दिवाली जल्दी आ गई। ऐतिहासिक दिन वास्तव में ! जय सिया राम।” वहीं अक्षय की ट्वीट के बाद ऑल्ट न्यूज़ की एक पत्रकार पूजा चौधरी इतनी चिढ़ गई कि अपनी नफरत को बाहर निकालते हुए उन्होंने अक्षय की फिल्मों का बहिष्कार करने का आह्वान तक कर डाला।

इसके साथ यह भी कहा कि राममंदिर भूमिपूजन का जश्न मनाना आधी उम्र की लड़की से रोमांस करने से भी ज्यादा घटिया है।

जहर का डोज कम न हो जाए तो उसे बढ़ाने के लिए उन्होंने ट्वीट किया, “अगली बार एक और फ़िल्म रिलीज़ होगी जहाँ अक्षय कुमार अपनी उम्र से आधी उम्र की महिला से रोमांस करेंगे, याद रखें कि उन्हें ना देखने के लिए यही सबसे बदतर कारण हैं।”

पूजा ने सिर्फ अक्षय कुमार के चरित्र पर ही ऊँगली नहीं उठाई। उन्होंने ‘प्यार का पंचनामा’ फेम अभिनेता कार्तिक आर्यन पर भी निशाना साधा। जिन्होंने भगवान राम के भव्य मंदिर के लिए लंबे समय से चली आ रही लड़ाई में ‘धैर्य’ के महत्व को समझाया था। कार्तिक ने तरबूज खाते हुए एक तस्वीर साझा की और लिखा, “आज नाश्ते में सब्र का फल खाया…आप लोगों ने क्या खाया?

जघन्य अपराधों में लिप्त मुस्लिमों को बचाने के लिए फर्जी फैक्ट चेकर के रूप में प्रसिद्ध ऑल्ट न्यूज़ की यह हिन्दू घृणा से सनी पत्रकार ने कार्तिक के भी ट्वीट पर आपा खो बैठीं। उन्होंने दावा किया कि सेक्सिस्ट एक्टर (कार्तिक आर्यन) के पास तरबूज से भी कम टैलेंट है। उन्होंने ट्वीट किया, “थाली में रखे तरबूज में इस आदमी से अधिक टैलेंट हैं, जिसका पूरा करियर सेक्सिज्म के गुल्लक से बनाया गया है।”

हिन्दुफोबिया से ग्रसित पूजा ने इनके अलावा अभिनेता वरुण धवन को भी निशाना बनाया। अभिनेता ने भगवान राम और हनुमान की एक-दूसरे को गले लगाते हुए एक तस्वीर साझा की थी। ऑल्ट न्यूज़ की इस तथाकथित पत्रकार ने ट्वीट किया, “इस दोस्त के बारे में कुछ नहीं कहना है। आखिरी बार मुझे याद नहीं कि मैंने उनकी कोई फिल्म कब देखी थी।”

हालाँकि, वरुण धवन ने उनसे अपनी फिल्मों को देखने के लिए नहीं कहा था। फिर भी उन्होंने अपनी बात स्पष्ट कर दी कि जो कोई भी राम मंदिर के निर्माण की इच्छा रखता है या उसका जश्न मनाता है और उसे अपनी हिंदू विरासत पर गर्व है, उसकी निंदा करनी चाहिए। हिंदूधर्म के प्रति पूजा के नफ़रत भरे ट्वीट से यह भी पता चलता है कोई खुद को सेक्युलर तभी बना सकता है, जब वह हिंदुओं के प्रति घटिया मानसिकता को पोषित और प्रोत्साहित करने वाले इकोसिस्टम का हिस्सा हो।

ऑल्ट न्यूज़ एडिटर द्वारा नाबालिक लड़की का इस्तेमाल कर उसके दादा को निशाना बनाना

गौरतलब है कि ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने सोशल मीडिया यूजर के साथ अपने ट्विटर लड़ाई में एक नाबालिग लड़की को निशाना बनाया। मोहम्मद जुबैर शुक्रवार को जगदीश सिंह नाम के एक ट्विटर यूजर को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा कर रहा था, जब उसने एक नाबालिग बच्ची की तस्वीर को ही सार्वजानिक कर दिया। नाबालिक लड़की जगदीश सिंह की पोती है।

दरअसल, आईपीएस अधिकारी दीपांशु काबरा ने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें सड़क पर एक बड़े गड्ढे पर वाहन उछल रहे थे। इस पर मोहम्मद जुबैर ने उन्हें जवाब में अपना एक कथित ‘फैक्ट चेक’ लेख के बारे में बताया।

जुबैर ने ‘ऑल्टन्यूज़’ द्वारा किया हुआ एक ‘फैक्ट चेक’ पोस्ट किया, जिसमें कहा गया था कि यह चीन का एक पुराना वीडियो है। हालाँकि, दीपांशु काबरा ने यह दावा कहीं भी नहीं किया था कि यह वीडियो हाल ही का है, या यह किसी विशेष शहर का है।

आईपीएस काबरा ने इस वीडियो में सिर्फ शहर का अनुमान लगाने के लिए कहा था। लेकिन आदत से मजबूर ज़ुबैर ने मान लिया कि वह इसे भारत का होने का दावा कर रहे हैं, और लगे हाथ इस पर ‘फैक्ट चेक’ तैयार करते हुए कहा कि यह वीडियो चीन का है।

इस पर एक ट्विटर यूजर जगदीश सिंह मोहम्मद जुबैर की इस फर्जी के फैक्ट चेकर से सहमत नहीं थे और उन्होंने सोशल मीडिया पर ऑल्टन्यूज़ के लिए प्रचलित जुमले का इस्तेमाल करते हुए जुबैर के ट्वीट के जवाब में ‘ल*डे का फैक्ट चेकर’ कह दिया।

यह जुमला ऑल्टन्यूज़ के कथित ‘फैक्ट चेक्स’ के फर्जीवाड़ों के लिए इन्टरनेट पर युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय है। ट्विटर यूजर जगदीश सिंह के इस कमेंट पर मोहम्मद जुबैर ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और उन्हें सीधे तौर पर जवाब देने के बजाए, उनकी ट्विटर डीपी (डिस्प्ले इमेज) निकाल ली, जिसमें जगदीश सिंह कथित तौर पर अपनी पोती के साथ नजर आ रहे थे।

बच्चों से अधनंगे बदन पर पेंटिंग करवाने वाली रेहाना फातिमा ने किया आत्मसमर्पण: SC ने खारिज कर दी थी अग्रिम जमानत याचिका

केरल के सबरीमाला स्थित भगवान अयप्पा मंदिर में घुसने की कोशिश करने और साजिशन अपनी सोशल मीडिया पोस्ट से श्रद्धालुओं की भावनाओं को भड़काने को लेकर विवादों में आई एक्टिविस्ट रेहाना फातिमा ने शनिवार (अगस्त 8, 2020) की शाम को एर्नाकुलम साउथ पुलिस स्टेशन में आत्मसमर्पण कर दिया।

एर्नाकुलम साउथ पुलिस ने इसकी जानकारी दी। बता दें कि इससे पहले शुक्रवार (अगस्त 7, 2020) को रेहाना फातिमा को सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। मामला अर्ध नग्न शरीर पर अपने बच्चों से पेटिंग करवाते हुए एक वीडियो जारी करने से जुड़ा है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि प्रथम दृष्टया में यह अश्लीलता फैलाने का मामला है। इससे नाबालिग बच्चों पर देश की संस्कृति को लेकर क्या प्रभाव पड़ेगा। कोर्ट ने पूछा कि क्या वह सामाजिक कार्यकर्ता होते हुए कोई भी तर्कहीन हरकत करेंगी। इससे बच्चों पर क्या असर पड़ेगा?

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा के नेतृत्व वाली एक शीर्ष अदालत की बेंच ने कहा था, “आप यह सब क्यों करती हैं? आप एक कार्यकर्ता हो सकती हैं लेकिन यह किस प्रकार की बकवास है? यह अश्लीलता फैला रही है क्या आप? यह समाज में एक बहुत बुरा असर छोड़ देगा।”

रेहाना फातिमा ने 19 जून 2020 को ही यूट्यूब वीडियो फेसबुक पर शेयर किया था। इसमें उनके बेटे और बेटी को उनकी सेमी न्यूड बॉडी पर पेंटिंग करते देखा जा सकता है। इस वीडियो के साथ उन्होंने हैशटैग #BodyArtPolitics पोस्ट किया था।

रेहाना के मुताबिक, यह वीडियो उन्होंने इसलिए बनाया था, ताकि महिलाएंँ सेक्स और अपने शरीर को लेकर ज्यादा खुल सकें, वो भी ऐसे समाज में जहाँ यह दोनों चीजें प्रतिबंधित हैं।

हालाँकि, एक भाजपा नेता की शिकायत के बाद फातिमा को पॉक्सो एक्ट की धारा 13, 14, 15, आईटी एक्ट की धारा 67 (B) और धारा 75 के तहत एर्नाकुलम पुलिस ने मामला दर्ज किया था।

जिसके बाद सरकारी दूरसंचार कंपनी भारत संचार निगम लिमेटेड (BSNL) ने नोटिस जारी कर विवादित कार्यकर्ता और बर्खास्त कर्मचारी रेहाना फातिमा को सरकारी आवास खाली करने को कहा था। सरकारी दूरसंचार कंपनी का कहना था कि पुलिस की कार्रवाई से उसकी छवि को धक्का लगा है। 

गौरतलब है कि केरल के पथनमथिट्टा जिले की रहने वाली रेहाना फातिमा ने दो साल पहले सबरीमाला स्थित भगवान अयप्पा के मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की थी। हालाँकि, उनके इस कदम की काफी आलोचना हुई थी। उन्हें अपने फेसबुक पोस्ट के जरिए अयप्पा श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए 18 दिन जेल में भी बिताने पड़े थे।

रेहाना ने यूट्यूब पर एक कुकिंग वीडियो भी डाली थी। वीडियो में रेहाना बीफ की रेसेपी बताती नजर आई थीं। मगर, वीडियो की शुरुआत के 20 सेकेंड में उन्हें बीफ की जगह गौ माता बोलते सुना गया था।

दिशा सालियान की आखिरी रात की पूरी कहानी: ‘मौत’ से 1 घंटे पहले का वीडियो आया सामने, सुसाइड थ्योरी पर उठे कई नए सवाल

सुशांत सुसाइड केस में खुलासों के बीच उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सुशांत की मौत के साथ उनकी एक्स मैनेजर दिशा सानियान केस को जोड़ा जा रहा है। इस बीच आज एक वीडियो सामने आया है, जिसे दिशा का आखिरी वीडियो बताया जा रहा है। दावा है कि दिशा के 14 वें माले से गिरने से पहले का ये वीडियो हो सकता है।

गौरतलब है कि 34 वर्षीय सुशांत ने 14 जून को अपने बांद्रा स्थित घर में फाँसी लगाकर सुसाइड किया था। वहीं उनकी मौत से ठीक 6 दिन पहले दिशा सालियान का निधन हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार आत्महत्या से पहले दिशा एक पार्टी में गई थी। वायरल हुए वीडियो में दिशा दोस्तों के साथ खुश दिख रही हैं। वीडियो में दिशा अपने दोस्तों के साथ डांस करती हुई भी नजर आ रही हैं।

बता दें यह वीडियो दिशा ने ही रिकॉर्ड कर उसे अपने दोस्तों के WhatsApp ग्रुप पर भेजा था। सोशल मीडिया पर ऐसे दावे किए जा रहे हैं कि यह वीडियो 8 जून की रात रात 11 बजकर 48 मिनट पर दिशा द्वारा अपने दोस्तों के वॉट्सऐप ग्रुप में पोस्ट किया गया था। इसके तकरीबन एक घंटे के भीतर उन्होंने सुसाइड कर लिया था। यह वीडियो खुद दिशा ने ही बनाई है।

सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो को देख कर हर किसी के मन में यहीं सवाल है कि इतनी खुश दिखने वाली दिशा ने आखिर क्यों कुछ समय बाद सुसाइड कर लिया?

वहीं इस वीडियो के सामने आने के बाद मीडिया में तमाम तरह की बातें सामने आ रहीं हैं। एक मीडिया रिपार्ट में दिशा के दोस्त ने पार्टी की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि 9 जून को एक गेट टूगेदर पार्टी थी। जिसमें दिशा उसका मंगेतर और कुछ दोस्त भी शामिल थे। दिशा पार्टी में शराब पी कर सभी को लेकर कुछ कुछ शिकायतें कर रही थी। उसने बोला कि कोई उसका ख्याल नहीं रखता है किसी को उसकी परवाह नहीं है। इतना कहते ही दिशा पार्टी छोड़ कमरे में चली गई और दरवाजा बंद कर लिया।

काफी देर तक जब वह नहीं आई तो दोस्तों ने दरवाजा पीटा और उसे बुलाने की बहुत कोशिश की। लेकिन कमरे से कोई आवाज नहीं आने पर सबने दरवाजा तोड़ दिया। दरवाजा टूटने के बाद पार्टी में मौजूद सभी लोगों को इस बात का पता चला कि दिशा ने छत से कूद कर आत्महत्या कर ली है। जब तक सब नीचे पहुँचते वॉचमैन ने पुलिस को खबर कर दी थी। हॉस्पिटल ले जाते समय दिशा जिंदा थी। लेकिन बाद में उसे डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया।

गौरतलब है कि बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर हर दिन नए चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। दिवंगत अभिनेता के वकील, परिवार के सदस्यों, दोस्तों के बाद, अब उनके पूर्व कर्मचारी अंकित आचार्य ने चौंकाने वाला दावा किया है। अंकित बतौर सुशांत के निजी सहायक ने यह दावा है कि यह सुसाइड न होकर मर्डर है।

अंकित आचार्य ने एक इंटरव्यू में बताया, “सुशांत भैया खुश और सकारात्मक इंसान थे। वह हमेशा एक्टिव रहना चाहते थे। जब मैंने उनके साथ 2017 से 2019 तक काम किया, तब वह कभी उदास या परेशान नहीं रहते थे। वह कभी-कभी गुस्से में आ जाते थे, लेकिन 5 मिनट में शांत हो जाते थे। वह हमारे साथ परिवार और अपने भाइयों की तरह व्यवहार करते थे।”

आचार्य ने यह भी बताया कि अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती के जिंदगी में आने के बाद से सुशांत पूरी तरह से बदल गए थे। उन्होंने अपना ठिकाना बदल लिया। उनका पूरा स्टाफ भी बदल दिया गया। अंकित ने कहा कि जब वे अपनी 2 माह की सैलरी लेने के लिए सुशांत से मिलना चाहते थे तो उन्हें मिलने से रोक दिया गया था।

पिछली सरकारों ने नहीं दिया अयोध्या पर ध्यान, CM योगी के नेतृत्व में होगा राम जन्मस्थान का विकास: अयोध्या के शाही सदस्य

अयोध्या में राजवंश का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है। शाही परिवार के सदस्य बिमलेन्द्र प्रताप मिश्रा एक जानी-मानी शख्सियत हैं। हाल ही में उन्होंने टाइम्स नाउ के पद्मजा जोशी को इंटरव्यू दिया। इस दौरान मिश्रा ने पवित्र शहर अयोध्या को लेकर अपनी पुरानी यादें ताजा की।

इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा कि अयोध्या में एक भव्य राम मंदिर नहीं होने के कारण इसे इसकी महिमा से वंचित कर दिया गया था। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या अपने पवित्रता और वर्चस्व को पुनः प्राप्त करने की ओर अग्रसर है।

बिमलेन्द्र प्रताप मिश्रा ने अफसोस जताते हुए कहा कि तीन दशकों से सत्तारूढ़ सरकारों ने प्राचीन शहर को विकसित करने के लिए बहुत कम काम किया।

मिश्रा ने कहा, “अब यहाँ (यूपी) भाजपा की सरकार है, योगी आदित्यनाथ हमारे मुख्यमंत्री बने हैं, उनका पूरा ध्यान अयोध्या पर है। वह शहर का समग्र विकास चाहते है। अब इस बात की पूरी संभावना है कि अयोध्या एक विकसित शहर बनने की राह पर है।”

उन्होंने आगे कहा, “इससे पहले अन्य लोग सरकार में थे, उन्होंने अयोध्या पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया। यहाँ किसी तरह का विकास कार्य नहीं हुआ करता था। अब पूरे अयोध्या और यहाँ तक ​​कि भारत को भी उम्मीद है कि यह एक सुंदर शहर बनकर उभरेगा।” मिश्रा ने चुटकी लेते हुए यह भी कहा, “मुझे उम्मीद है कि अयोध्या वैटिकन सिटी के समान कद हासिल करेगा।”

उनसे जब अयोध्या में दशकों से चल रहे राजनीतिक उथल-पुथल को लेकर पूछा गया तो उन्होंने कहा, “राम मंदिर का मुद्दा काफी वास्तविक था। प्रभु राम का कहाँ जन्म हुआ था। उनका जन्म अयोध्या में हुआ था, वहाँ एक मंदिर का निर्माण होना बहुत आवश्यक था।”

बिमलेन्द्र प्रताप मिश्रा ने कहा कि बाबरी मस्जिद एक विवादित ढाँचा था जिसे एक मंदिर के विध्वंस के बाद बनाया गया था और इसे साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। उन्होंने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या का गौरव बहाल हुआ है, इसका सम्मान वापस लौटा है।

मिश्रा ने कोरियाई शाही परिवार के साथ अपने सौहार्दपूर्ण संबंध के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें शाही परिवार द्वारा दक्षिण कोरिया में आमंत्रित किया गया था क्योंकि उनका मानना ​​था कि वे अयोध्या की एक राजकुमारी के वंशज हैं। किम जोंग-पिल्म दक्षिण कोरिया के तत्कालीन प्रधान मंत्री, गराक साम्राज्य के राजा किम सुरो की 72 वीं पीढ़ी के वंशज थे।

बिमलेन्द्र प्रताप मिश्रा ने कहा कि कोरियाई शाही परिवार द्वारा उन्हें सरयू नदी के तट पर स्थापित रानी का एक स्मारक उपहार में दिया गया था। हर साल कोरियाई डेलिगेट्स रानी के रूप में कोरिया आने वाली अयोध्या की राजकुमारी को सम्मान देने के लिए उनके स्मारक जाते हैं। उन्होंने कहा कि अब यूपी सरकार साइट को और विकसित करने के लिए धन आवंटित कर रही है।

सुशांत सिंह राजपूत इतने बड़े स्टार नहीं थे कि मुंबई पुलिस पर इतना दबाव डाला जाए: राजदीप सरदेसाई

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच अब सीबीआई के पास पहुँच गई है। वहीं उनके लाखों फैंस और करीबी सुशांत के परिवार को न्याय दिलाने के लिए सोशल मीडिया पर #warriors4ssr के लगातार मुहिम छेड़े हुए हैं। सुशांत की मौत के पीछे किसी की संदिग्ध भूमिका की बात कही जा रही है।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत का केंद्र बिंदु बनने के साथ मीडिया संगठनों ने ट्रायल शुरू कर दिया है और वो स्वयं के आकलन के साथ सामने आ रहे हैं। जबकि कई लोग और मीडिया के कुछ वर्ग अभी भी सवाल उठा रहे हैं कि असल में हुआ क्या था और क्या अभिनेता की असामयिक मृत्यु ‘आत्महत्या’ थी, वहीं कई लुटियन पत्रकार हैं जो अब सामने आ रहे सबूतों पर लीपापोती करने में व्यस्त हैं।

शनिवार (अगस्त 8, 2020) को पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने लल्लनटॉप के शो में सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मुद्दे पर बोलते हुए मृतक अभिनेता के खिलाफ चौंकाने वाली घिनौनी टिप्पणी की, जिसमें दावा किया गया, “सुशांत वैसे भी कोई बड़े अभिनेता नहीं थे जिसके लिए मुंबई पुलिस को इतने दबाव में होना चाहिए।”

शो के दौरान एंकर सौरभ द्विवेदी ने राजदीप सरदेसाई से सुशांत सिंह मामले पर उनकी राय पूछी तो उन्होंने कहा, “लोगों ने पुलिस पर अपना भरोसा खो दिया है। सार्वजनिक संस्थानों, IPS अधिकारियों पर सवाल उठ रहे हैं, चाहे वह मुंबई हो या बिहार पुलिस। क्या वे वास्तव में निष्पक्ष जाँच कर रहे हैं? चलिए इसके बारे में बहुत ईमानदारी से बात करते हैं। सुशांत सिंह राजपूत इतने बड़े स्टार नहीं थे कि मुंबई पुलिस पर इतना दबाव डाला जाए।”

राजदीप सरदेसाई से पूछा गया, “वह कौन है जो पुलिस बल पर जाँच करने के लिए दबाव डाल रहा है?”

राजदीप सरदेसाई के बयान चौंकाने वाले थे। यदि कोई राजदीप द्वारा दिए गए तर्क पर गौर करे तो इसका मतलब होगा कि वह कह रहे है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच कम ध्यान और समर्पण की हकदार है क्योंकि वह “वह बड़े स्टार” नहीं थे।

इसके अलावा, पहले भी सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच को ‘सर्कस’ करार देते हुए, राजदीप सरदेसाई ने दावा किया कि यह मुद्दा अब मुंबई पुलिस और बिहार पुलिस के बीच एक दूसरी लड़ाई बन गई है। ‘वरिष्ठ पत्रकार’ ने आगे कहा कि व्यक्तिगत स्कोर तय करने के लिए कुछ लोगों के खिलाफ मीडिया ट्रायल चल रहा है।

बिहार डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय को जगह देने वाले मीडिया चैनलों पर विलाप करते हुए, राजदीप सरदेसाई ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पर यह कहते हुए हमला किया कि उन्होंने बिना किसी सबूत के निराधार आरोप लगाए हैं। जाँच को लेकर दोनों राज्यों के पुलिस के बीच हो रही असामंजस्य को देखते हुए राजदीप सरदेसाई का सोचना है कि केस ने राजनीतिक एंगल ले लिया है और दोनों राज्यों की पुलिस अपनी अपनी सरकार के साथ साइडिंग कर रहे हैं।

गौरतलब है कि भाजपा नेता नारायण राणे ने हाल ही में कहा था कि सुशांत सिंह ने आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि उनकी हत्या हुई थी। उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत केस जुड़े कई सवालों को उठाया और मुंबई पुलिस पर आरोप लगाया कि आदित्य ठाकरे को बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि मुंबई पुलिस सबूत छुपाने की कोशिश कर रही है। इस मामले में कहीं न कहीं आदित्य ठाकरे भी शामिल हैं। मुंबई पुलिस आदित्य को बचाने के लिए ऐसा कर रही है। राजदीप सरदेसाई ने नारायण राणे पर हमला किया और उन्हें सबूत पेश करने की चुनौती दी।