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भूमिपूजन के दिन धार्मिक उन्माद फैलाने की PFI ने रची थी साजिश: बहराइच से साहिबे आलम, डॉ.अलीम, कमरुद्दीन गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के बहराइच से रामजन्मभूमि पूजन के दौरान सोशल मीडिया पर लोगों को बरगलाने और उन्माद फैलाने के आरोप में पुलिस ने शुक्रवार (7 अगस्त, 2020) को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) से जुड़े एक डॉक्टर सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार यह लोग अयोध्या राम मंदिर भूमिपूजन कार्यक्रम के दिन सोशल मीडिया पोस्ट जरिए समुदाय विशेष के लोगों में आक्रोश फैलाना चाह रहे थे। जिससे सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठे।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कुँवर ज्ञानंजय ने कहा कि उन्हें बुधवार को जानकारी मिली थी कि कुछ लोग डॉ.अलीम के क्लिनिक में बैठ कर समुदाय विशेष के लोगों को व्हाट्सएप और ट्वीट के जरिए ऐसे मैसेज कर रहे हैं, जो सांप्रदायिक एकता और राष्ट्रीय अखंडता के खिलाफ थे।

गौरतलब है कि अयोध्या में रामजन्म मंदिर भूमि पूजन के शुभारंभ कार्यक्रम को लेकर पहले से ही अलर्ट जारी कर दिया गया था। इसी के आधार पर पुलिस व खुफिया तंत्र सरहद के साथ ही सोशल मीडिया पर चौकस थे। बुधवार को ट्विटर पर भूमि पूजन को बाधित करने के लिए सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन्माद फैलाने की कोशिश शुरू की गई, तभी खुफिया एजेंसियाँ सतर्क हो गईं और जरवल में छापेमारी कर डॉ. अलीम अहमद की क्लीनिक से उन्हें दो अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने डॉ. अलीम और उसके क्लीनिक में मौजूद कमरुद्दीन और साहिबे आलम को गिरफ्तार किया था। 24 घंटे पूछताछ के बाद गुरुवार को पुलिस ने तीनों पर मुकदमा दर्ज कर जेल रवाना कर दिया। 

पुलिस अधिकारी ने बताया कि इनमें साहिबे आलम पीएफआई के पूर्व पदाधिकारी और एसडीपीआई के मीडिया प्रभारी के रूप में काम कर रहा था। डॉ. अलीम और कमरुद्दीन दोनों एसडीपीआई व्हाट्सएप ग्रुप के सदस्य थे। उन्होंने कहा, एसडीपीआई और पीएफआई संगठनों के गिरफ्तार तीन सदस्यों से उनके नेटवर्क खंगाले जा रहे है और विस्तृत जाँच की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, इनके तार सऊदी अरब, दिल्ली, लखनऊ समेत कई जगहों से जुड़े बताए गए हैं। 

तीन सदस्यों के पकड़े जाने के बाद पीएफआइ व एसडीपीआइ के बहराइच में सक्रिय होने के सबूत ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। इन लोगों ने अयोध्या में हो रहे भूमिपूजन के कार्यक्रम को बाधित करने के लिए सोशल मीडिया पर गलत मैसेज प्रसारित कर मुस्लिमों में आक्रोश पैदा करने की योजना बनाई थी। लेकिन समय रहते पुलिस अधिकारियों को इसकी जानकारी हो गई, जिससे इनका मंसूबा नाकाम हो गया।

गौरतलब है कि भारतीय खुफिया एजेंसी को 5 अगस्त को अयोध्या और जम्मू-कश्मीर में बड़े आतंकी हमलों की सूचना मिली थी। एजेंसी के अनुसार यह साजिश पाकिस्तान द्वारा रची गई थी। इसके लिए उसने अफगानिस्तान में 20 तालिबानी आतंकियों को प्रशिक्षण दिया है, ऐसी भी खबर थी। खुफिया एजेंसियों ने इस खतरे को लेकर पुलिस और आर्मी को पहले से आगाह कर दिया था।

बता दें खुफिया एजेंसी को पिछले कुछ हफ़्तो से आतंकी हमलों को लेकर सूचना मिल रही थी। कहा गया था कि आतंकी 15 अगस्त तक किसी भी बड़े हमले को अंजाम दे सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा दी गई चेतावनी के बाद अयोध्या, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी।

सुशांत की डायरी के 4 पन्ने गायब, सबूतों से छेड़छाड़ का शक गहराया: अंकिता ने बताया था- डायरी में नोट करते थे हर बात

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से हर दिन इस मामले में कोई न कोई नई और चौंकाने वाली बात सामने आ रही है। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार सुशांत की पर्सनल डायरी के कुछ पन्ने गायब हैं। इससे सबूतों से छेड़छाड़ का शक और गहरा गया है।

रिपोर्ट के अनुसार सुशांत की डायरी के आखिरी चार पन्ने फटे हैं। पत्रकार नविका कुमार के अनुसार, सुशांत की एक्स गर्लफ्रेंड अंकिता ने 31 जुलाई को एक इंटरव्यू में इस बात को स्वीकारा था कि खुद से जुड़ी हर बात सुशांत अपनी डायरी में लिखते थे।

नविका ने अपने शो के दौरान कहा, डायरी के पन्नों का गायब होना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि कोई इस मामले के तथ्यों को छुपाना चाहता था। पत्रकार एस शिवशंकर ने कहा कि सुशांत की डायरी में कुछ लोगों के नामों का भी उल्लेख है। लेकिन इस समय मीडिया संस्थान उसका खुलासा नहीं कर सकती है।

सिद्धार्थ पीठानी ने चाभी बनाने वाले को नहीं जाने दिया कमरे के अंदर

सुशांत सिंह राजपूत के क्रिएटिव मैनेजर सिद्धार्थ पिठानी, ने सबसे पहले दिवंगत अभिनेता की लाश को देखा था।
पत्रकार नविका कुमार के अनुसार, पिठानी ने डुप्लीकेट चाबी खोजने की कोशिश करने के बजाय एक चाभी बनाने वाले को बुलाया।

सिद्धार्थ ने चाभी बनानेवाले को सुशांत के कमरे में प्रवेश करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। बाद में, पिठानी और एक अन्य व्यक्ति दीपेश ने दरवाजा खोला। कमरे के अंदर जाकर कथित तौर पर मृतक अभिनेता के ‘लटकते हुए शरीर’ को पंखे से नीचे उतारा। कुमार ने मुंबई पुलिस पर निष्क्रियता और उन लोगों से पूछताछ नहीं करने का आरोप लगाया, जिन्होंने सुशांत की लाश को पहली बार देखा था।

सीबीआई को सौंपा गया का मामला

गौरतलब है कि सुशांत सिंह की मृत्यु का मामला धीरे धीरे कई राज से पर्दा उठा रहा है। रिया चक्रवर्ती, जिन्हें लेकर सुशांत के पिता ने अपनी शिकायत दर्ज करवाई है। उन पर शिकंजा कसता जा रहा है। सीबीआई ने भी इस मामले की जाँच मिलने के बाद अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

सीबीआई ने इसके लिए स्पेशल टीम का गठन भी किया है। इस टीम में आईपीएस मनोज शशिधर, डीआईजी गगनदीप गंभीर और एसपी नुपूर प्रसाद शामिल हैं। जाँच एजेंसी 6 आरोपितों के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज कर चुकी है। उनका कहना है कि वह लगातार इस केस को लेकर बिहार पुलिस के संपर्क में हैं।

जॉंच एजेंसी ने जिनके खिलाफ मामला दर्ज किया है उनमें रिया चकवर्ती, इंद्रजीत चकवर्ती, संध्या चकवर्ती, सौविक चकवर्ती, सैम्युल मिरांडा, श्रुति मोदी शामिल हैं। बता दें, कि सीबीआई के अलावा इस मामले में अब ईडी भी सुंशांत के पैसों को लेकर हुई हेर-फेर की जाँच करने में जुटी है। सुशांत के पिता का आरोप है कि उनके बेटे के अकाउंट से ऐसे अकाउंट में पैसे ट्रांसफर हुए जो उसका था ही नहीं।

कारगिल युद्ध के लिए कॉन्ट्रैक्ट ठुकरा दिया, कश्मीरी दोस्तों से कहा- लड़ने को तैयार हूँ: शोएब अख्तर घास खाने को भी तैयार

पाकिस्तानी टीम के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर एक बार फिर अपने बड़बोलेपन को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने कहा है कि वह सेना का बजट बढ़ाने के लिए घास खाने को भी तैयार हैं। साथ ही दावा किया है कि कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना की सेवा करने के लिए काउंटी क्रिकेट का कॉन्ट्रैक्ट भी ठुकरा दिया था। 

ARY News से बातचीत में शोएब अख्तर ने कहा कि अगर अल्लाह की मर्ज़ी रही तो मैं खुद घास भी खा लूँगा। लेकिन अपने देश की सेना का बजट बढ़ाने के लिए हर कोशिश करूॅंगा। इसके बाद अख्तर ने कहा उन्हें समझ नहीं आता है देश का नागरिक आखिर सेना के साथ मिल कर साझा तौर पर काम क्यों नहीं कर सकता है।

रावलपिंडी एक्सप्रेस के नाम मशहूर शोएब ने कहा कि वे पाकिस्तानी सेना के मुखिया के साथ बैठकर उनसे फैसले लेने की गुज़ारिश करेंगे। उनसे कहेंगे कि अगर सेना का बजट 20 फ़ीसदी है तो इसे 60 फ़ीसदी तक बढ़ा दिया जाए। 

शोएब अख्तर ने यह भी कहा कि वह कारगिल युद्ध में अपनी तरफ से मदद करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने नॉटिंघमशायर के साथ 175,000 पाउंड (लगभग 1,20,75,000 रुपए, एक पाउंड 1999 के करेंसी रेट के हिसाब से लगभग 69 रुपए के बराबर था) का कॉन्ट्रैक्ट ठुकरा दिया था। साल 1999 के मई में करगिल युद्ध हुआ था।

साक्षात्कार के दौरान शोएब ने कहा, “लोग इस कहानी के बारे में बहुत कम ही जानते हैं। नॉटिंघम के साथ मेरा 175,000 पाउंड का करार था। फिर 2002 में मेरे पास एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट था। कारगिल युद्ध के होने पर मैंने दोनों को छोड़ दिया।”

उन्होंने कहा, “मैं लाहौर के बाहरी इलाके में खड़ा था। मुझे वहाँ देख कर एक जनरल ने पूछा कि मैं क्या कर रहा हूँ? मैंने कहा लड़ाई शुरू होने वाली है, हम साथ मरेंगे। मैंने इस तरह दो बार क्रिकेट छोड़ा था, जिस पर सब के सब हैरान हुए थे। मुझे इस बात की बिलकुल चिंता नहीं थी। मैंने कश्मीर में मौजूद अपने दोस्तों को फोन किया और उनसे कहा कि मैं लड़ने के लिए तैयार हूँ।” 

शोएब अख्तर सेना का बजट बढ़ाने की पैरोकारी ऐसे समय में कर रहे हैं जब पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति खस्ताहाल है। जुलाई में आई एशिया टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ 2 सालों के भीतर, इमरान खान की सरकार में पाकिस्तान पर 22 बिलियन डॉलर का क़र्ज़ लद चुका है। यह पूरी दुनिया के क़र्ज़ का 35 फ़ीसदी है।

कोरोना वायरस महामारी के चलते हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पाकिस्तान को 1.39 बिलियन डॉलर दिए थे। शोएब यह सुझाव भी दे चुके हैं कि कोरोना वायरस का सामना करने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच एक क्रिकेट मैच होना चाहिए। इस मैच से इकट्ठा होने राशि का इस्तेमाल कोरोना महामारी से लड़ने में उपयोग होना चाहिए। 

दिल्ली: भारी बारिश से गिरी CM हाउस की छत, सुरक्षित हैं अरविंद केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आधिकारिक आवास का एक हिस्सा पिछले हफ्ते शहर में भारी बारिश के बाद ढह गया। यह घर सिविल लाइंस स्थित फ्लैग स्टाफ रोड पर स्थित है। हालाँकि, इस घटना में किसी को कोई चोट नहीं आई है और मुख्यमंत्री केजरीवाल सुरक्षित हैं।

इस घटना के बाद 80 साल पुरानी इस इमारत का एमसीडी (MCD) ने सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। इस छत की मरम्मत हुई थी।

एक अधिकारी के अनुसार, “कमरे का इस्तेमाल खुद सीएम द्वारा किया जाता है और पिछले महीनों में कई बैठकें आयोजित की गई हैं, खासकर महामारी के दौरान। शुक्र है कि घटना के समय कोई भी कमरे में नहीं था।”

रिपोर्ट्स के अनुसार, केजरीवाल के घर का यह सबसे अहम हिस्सा है। उन्होंने घर के एक हिस्से को अपना कार्यालय बना रखा था, जहाँ पर कई महत्वपूर्ण बैठकें भी आयोजित की जाती रही हैं।

केजरीवाल के घर में जब छत पर मरम्मत की जा रही थी, तो बगल के शौचालय की छत भी ढह गई। इसके बाद शौचालय की दीवार में दरारें और ईंटें ढीली होने लगीं। अधिकारियों ने कहा कि पीडब्ल्यूडी के अधिकारी अब नुकसान और घर की संरचनात्मक सुरक्षा का आकलन कर रहे हैं, और एक रिपोर्ट तैयार कर जल्द ही प्रस्तुत की जाएगी।

बताया जा रहा है कि जिस घर में अभी मुख्यमंत्री केजरीवाल रह रहे हैं, उसे 1942 मे बनवाया गया था और इसके किसी ना किसी हिस्से में मरम्मत का कार्य चलता ही रहता है। इससे पहले, पूर्व डिप्टी स्पीकर अमरीश सिंह गौतम को यह घर आवंटित किया गया था। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित अपने कार्यकाल के दौरान मोतीलाल नेहरू मार्ग पर रहीं। केजरीवाल 1942 में बने इस घर में 2015 में अपने दूसरे कार्यकाल में चले गए थे।

‘राम मंदिर बन गया, कपिल सिब्बल कब करेंगे आत्महत्या’: रामलला के वकील रहे के पराशरण नहीं हैं ट्विटर पर

5 अगस्त 2020 को अयोध्या में भव्य राम मंदिर की नींव पड़ी। कई नाम ऐसे हैं जिनके कारण 500 साल चली यह लड़ाई कभी कमजोर नहीं पड़ी। इन नामों के बिना यह संघर्ष यात्रा अधूरी है। ऐसा ही एक नाम हैं 93 वर्षीय अधिवक्ता के पराशरण। उन्होंने राम जन्मभूमि की क़ानूनी लड़ाई लड़ी थी। सुप्रीम कोर्ट में रामलला विराजमान की पैरवी की थी।

राम मंदिर भूमि पूजन की तारीख आते ही सोशल मीडिया उन नामों की चर्चा बड़े पैमाने पर हुई जिन्होंने रामजन्मभूमि पाने की लड़ाई में अहम योगदान दिया। पराशरण की भी काफी चर्चा हुई। उनकी एक तस्वीर खूब वायरल हुई जिसमें दावा किया गया था कि वह अपने घर में बैठ कर भूमि पूजन देख रहे हैं। लेकिन उनके नाम की चर्चा केवल इतने तक सीमित नहीं थी। पिछले कुछ दिनों से उनके नाम का (@KPrasaran) एक सक्रिय ट्विटर अकाउंट सामने आया है।     

इस ट्विटर अकाउंट पर पराशरण की तस्वीर लगी थी। इसकी वजह से कुछ नेटिजन्स को लगा कि यह उनका वास्तविक अकाउंट है। कुछ ही देर में उस एकाउंट के फॉलोवर्स बढ़ गए। इस एकाउंट से पहला ट्वीट राम मंदिर भूमि पूजन से ठीक एक दिन पहले 4 अगस्त को किया गया था।

इसके बाद 5 अगस्त को इस अकाउंट से दूसरा ट्वीट किया गया, जिसमें उन्होंने राम मंदिर का सपना पूरा होने की बात लिखी थी।  

इस अकाउंट से किए गए सबसे ताज़ा ट्वीट में कपिल सिब्बल का ज़िक्र है। ट्वीट में लिखा है, “कपिल सिब्बल कह रहे थे कि वह राम मंदिर बनने पर आत्महत्या कर लेंगे। राम मंदिर बन गया, कब करेंगे आत्महत्या?”

राम मंदिर का भूमि पूजन होने की खुशी में तमाम लोगों ने इस अकाउंट को फॉलो कर लिया। उन्हें ऐसा लगा कि यह के पराशरण का असली ट्विटर अकाउंट है। यह रिपोर्ट तैयार करने के दौरान इस ट्विटर अकाउंट के 3737 फॉलोवर्स थे।

ऑपइंडिया ने अधिवक्ताओं के उस समूह से संपर्क किया जो राम मंदिर की सुनवाई के दौरान के पराशरण के साथ थे। पराशरण के सहयोगी योगेश्वरन ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया कि यह ट्विटर एकाउंट फ़र्ज़ी हैं, क्योंकि वे अभी तक ट्विटर पर नहीं आए हैं।   

इसके अलावा के पराशरण के दो और सहयोगियों ने इस बात की पुष्टि की। सबसे पहले ट्वीट में जिस तरह की भाषा इस्तेमाल की गई थी उससे ही साफ़ था कि यह उनका आधिकारिक ट्विटर अकाउंट नहीं हो सकता है। इतना ही नहीं अकाउंट द्वारा कपिल सिब्बल पर किया गया ट्वीट भी फ़र्ज़ी निकला, क्योंकि कपिल सिब्बल ने कभी इस तरह का दावा ही नहीं किया था कि मंदिर निर्माण होने पर आत्महत्या कर लेंगे। कपिल सिब्बल के इस बयान का कोई आधिकारिक स्रोत तक नहीं मौजूद है।   

के पराशरण सर्वोच्च न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। इसके अलावा उनका पूरा न्यायिक करियर 6 दशक तक जारी रहा। वह साल 1983 से लेकर साल 1986 तक भारत के अटॉर्नी जनरल पद थे। वह 1976 में तमिलनाडु के एडवोकेट जनरल भी रहे। उन्हें साल 2003 में पद्म भूषण और साल 2011 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। साल 2012 में राष्ट्रपति ने उन्हें राज्यसभा के लिए निर्वाचित किया था।   

40 दिनों तक चली राम जन्मभूमि मामले की सुनवाई के दौरान पराशरण ने अद्भुत ऊर्जा और इच्छा शक्ति का प्रदर्शन किया था। पराशरण सुबह 10:30 बजे से शुरू होने वाली सुनवाई में ठीक समय पर उपस्थित हो जाते थे। शाम 4 से 5 बजे तक चलने वाली सुनवाई में मौजूद रहते थे। पराशरण ने मामले से संबंधित हर ऐतिहासिक दलील का उल्लेख किया। उन्होंने सुनवाई के दौरान कहा कि 433 साल पहले बाबर ने रामलला के जन्मस्थान पर मस्जिद बना कर गलती की थीऔर इतनी बड़ी गलती को सुधारने की ज़रूरत है।   

इसके अलावा पराशरण ने यह भी कहा कि मुस्लिम अयोध्या में किसी दूसरी जगह नमाज़ पढ़ सकते हैं। पूरी अयोध्या में 50 से 60 मस्जिद मौजूद हैं। लेकिन हिंदुओं के लिए श्रीराम का जन्मस्थान एक ही है, वह किसी भी सूरत में नहीं बदला जा सकता है। साल 2016 के बाद पराशरण ने सिर्फ 2 मामलों की पैरवी की। पहला सबरीमाला और दूसरा राम मंदिर। वह अक्सर इस बात का ज़िक्र करते थे कि यह उनकी अंतिम इच्छा है कि उनके जीते हुए इन मामलों की सुनवाई पूरी हो।  

ED के सामने पेश हुईं रिया चक्रवर्ती: मनी लॉन्ड्रिंग पर पूछताछ जारी, पिता-भाई के साथ CA भी तलब

सुशांत सिंह के मामले की जाँच में कई बड़े कदम उठाए जाने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। सीबीआई और ईडी दोनों ने अपनी तरफ़ से मामले की जाँच शुरू कर दी है। ईडी ने रिया चक्रवर्ती से पूछताछ के लिए उन्हें समन भेजा था। लेकिन रिया ने सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई का हवाला देते हुए टालने की बात कही थी। जिसे ईडी ने अस्वीकार कर दिया है नतीजतन रिया चक्रवर्ती ईडी के सामने पूछताछ के लिए पेश हो रही हैं। रिया के पिता और भाई को भी तलब किया गया है।

वहीं इस बीच ईडी ने सुशांत की पूर्व बिजनस मैनेजर श्रुति मोदी को भी शुक्रवार को हाजिर होने के लिए कहा है। इसके अलावा सुशांत के फ्लैटमेट सिद्धार्थ पिठानी को भी 8 अगस्त को बुलाया गया है।

इस मामले में सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की है, जिसमें रिया चक्रवर्ती समेत उनके परिवार के 6 लोगों का नाम शामिल किया गया। इसके अलावा सीबीआई ने जाँच के लिए एक एसआईटी का गठन कर दिया है। एसआईटी की इस टीम के मुखिया गुजरात कैडर के आईपीएस मनोज शशिधर होंगे। वहीं ईडी ने इस मामले में रिया चक्रवर्ती को 7 अगस्त के दिन यानी आज पूछताछ के लिए बुलाया था। लेकिन रिया ने सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई का हवाला दिया था। इसके आधार पर रिया ने अपील की थी, उनका बयान आज नहीं दर्ज किया जाए। ईडी ने इस अपील को ठुकरा दिया था, जिसके चलते आज रिया पूछताछ में शामिल हो रही हैं। रिया चक्रवर्ती ईडी के दफ्तर पहुँच चुकी हैं। और उनसे पूछताछ जारी है।

ईडी ने रिया को व्हाट्सएप के ज़रिए समन भेजा था। उन्होंने इसका जवाब मेल करके दिया था। लेकिन ईडी ने रिया चक्रवर्ती की इस माँग को सिरे से खारिज कर दिया है। ईडी इस मामले की आर्थिक दृष्टिकोण से जाँच कर रहा है। सुशांत सिंह मामले में रिया पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया गया था।

सुशांत सिंह के पिता ने पटना में रिया चक्रवर्ती के खिलाफ़ मामला दर्ज कराया था। मामले के स्थानान्तरण के लिए उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। ख़बरों के मुताबिक़ रिया पिछली बार 1 अगस्त के दिन अपने से परिवार के साथ कुछ सामान लेकर बाहर जाती हुई थी नज़र आई थीं। इसकी जानकारी उनके इमारत के प्रबंधक ने दी थी। इसके पहले बुधवार के दिन रिया के सीए को भी समन भेजा जा चुका है लेकिन वह भारी बारिश का हवाला देते हुए पेश नहीं हुआ था। इसके अलावा ईडी पिछले कुछ समय में रिया से जुड़े कई लोगों से पूछताछ कर चुकी है।   

इस मामले पर बिहार पुलिस ने भी अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। जिसके बाद बिहार सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में हलफ़नामा दायर किया था। बिहार पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि रिया चक्रवर्ती सुशांत सिंह के रूपए हड़पने के लिए उनके संपर्क में आई थीं। इसके अलावा इन लोगों ने सुशांत सिंह को मानसिक रूप से बीमार बताना शुरू कर दिया।   

इतना ही नहीं बिहार पुलिस ने रिया चक्रवर्ती पर सुशांत सिंह को दवाओं का ओवरडोज़ देने का आरोप भी लगाया। बिहार सरकार की सिफ़ारिश के बाद सुशांत सिंह का मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था। जिसके बाद सीबीआई ने 6 अगस्त के दिन रिया चक्रवर्ती समेत कुल 6 लोगों के खिलाफ़ मामला दर्ज किया था।    

राहुल गाँधी के बहनोई के करीबी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने की 14 जगहों पर छापेमारी

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के बहनोई रॉबर्ट वाड्रा के करीबी संजय भंडारी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आज 14 ठिकानों पर छापेमारी की है। गौरतलब है कि ईडी संजय भंडारी को भगोड़ा घोषित करवाने के लिए कोर्ट में अर्जी लगा चुकी है।

अधिकारियों ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार (अगस्त 07, 2020) को भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए 75 बेसिक ट्रेनर विमानों की खरीद में कथित भ्रष्टाचार से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में विभिन्न शहरों में कई परिसरों पर छापे मारे हैं। उन्होंने कहा कि एजेंसी दिल्ली में एक दर्जन, गुड़गाँव और सूरत में एक-एक सहित कम से कम 14 परिसरों को कवर कर रही है।

क्या है मामला

संजय भंडारी के खिलाफ CBI ने जून 2019 में एयरफोर्स को 75 ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट दिलाने के नाम पर कमीशन लेने के आरोप का मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि संजय भंडारी ने अपनी कंपनी Offset India Solutions Pvt Ltd के जरिए ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट देने वाली कंपनी Pilatus Aircrats Ltd के साथ मिलकर ये कॉन्ट्रैक्ट दिलवाया। बदले में Pilatus ने संजय भंडारी को 350 करोड़ रुपए दिए।

मामला प्रकाश में तब आया था जब उपरोक्त सौदे के लिए Pilatus Aircrats Ltd की निकटतम प्रतिद्वंद्वी रही दक्षिण कोरियाई कंपनी कोरिया एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़ ने पिलैटस को यह करार दिए जाने के खिलाफ तत्कालीन यूपीए सरकार से विरोध दर्ज कराया था। उनका दावा था कि पिलैटस की बोली के दस्तावेज़ अधूरे थे, और इसलिए उसे मिला हुआ करार रद्द होना चाहिए।

दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री ने इस मामले में भारत के तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी से बात की थी और उनसे इस निर्णय पर पुनर्विचार का आग्रह किया था। लेकिन इसका भी कोई नतीजा नहीं निकला, और अंत में यह अनुबंध पिलैटस को ही दिया गया था

गौरतलब है कि 2008 से 2012 की अवधि में, हथियार डीलर संजय भंडारी कॉन्ग्रेस सरकार के तहत सक्रिय रूप से अपने ‘बिज़नेस’ के लिए वापसी कर रहे थे और दसाँ (Dassault) के ऑफ-सेट पार्टनर बनने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास भी कर रहे थे। दसाँ ने संजय भंडारी के ऑफ-सेट पार्टनर बनने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।

हालाँकि, भूमि सौदे को स्वीकार करते हुए, कॉन्ग्रेस ने राहुल गाँधी को भूमि के विक्रेता एचएल पाहवा के साथ संबंधों पर चुप्पी ही साध रखी है। 

ग्लोबल सिटीजन बनने के साथ छात्र अपनी जड़ों से भी जुड़े रहें: राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर PM मोदी का सम्बोधन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शुक्रवार (अगस्त 07, 2020) सुबह 11 बजे से ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा में परिवर्तनकारी सुधारों पर कॉन्क्लेव’ में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए उद्घाटन भाषण देते हुए अपने विचार रखे।

कार्यक्रम की शुरुआत में नई शिक्षा नीति-2020 पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि शिक्षा नीति पब्लिक डोमेन पर डालने के बाद जो सवा दो लाख से भी ज्यादा सुझाव आए हैं, उस एक-एक सुझाव का विश्लेषण करने के बाद जो अमृत निकला है वो आज आपके सामने है।

नई शिक्षा नीति पर बोलते हुए पीएम नरेन्द्र मोदी ने कहा कि लंबे मंथन के बाद नई शिक्षा नीति बनाई गई, जिसे लागू करना बेहद आसान है। पीएम मोदी ने कहा कि आज हर जगह इसकी चर्चा हो रही है और किसी भी वर्ग से ये बात नहीं उठी कि इसमें किसी तरह का पूर्वग्रह है, या किसी एक ओर झुकी हुई है।

पीएम मोदी ने कहा – “हर देश अपनी शिक्षा व्यवस्था को अपने राष्ट्रीय महत्व के साथ जोड़ते हुए, अपने राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुसार बदलाव करते हुए चलता है। जिसका मकसद ये होता है कि देश का एजुकेशन सिस्टम अपनी वर्तमान औऱ आने वाली पीढ़ियों को भविष्य के लिए तैयार रखें, ‘फ्यूचर रेडी’ करें।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्बोधन की प्रमुख बातें –

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 21 वीं सदी के भारत की नींव रखेगी। हमने इस राष्ट्रीय नीति को यह सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया है कि यह भारतीयों को अधिक सशक्त और अवसरों के लिए आसानी से आकर्षक बनाता है।
  • बीते अनेक वर्षों से हमारे शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव नहीं हुए थे। परिणाम ये हुआ कि हमारे समाज में जिज्ञासा और कल्पना की नीति को प्रमोट करने के बजाए भेड़ चाल को प्रोत्साहन मिलने लगा था।
  • आज गुरुदेव रबीन्द्रनाथ ठाकुर की पुण्यतिथि भी है। वो कहते थे – “उच्चतम शिक्षा वो है जो हमें सिर्फ जानकारी ही नहीं देती, बल्कि हमारे जीवन को समस्त अस्तित्व के साथ सद्भाव में लाती है।” निश्चित तौर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति का बृहद लक्ष्य इसी से जुड़ा है।
  • हमारे छात्रों में, हमारे युवाओं में क्रिटिकल थिंकिंग और इनोवेटिव थिंकिंग विकसित कैसे हो सकती है, जब तक हमारी शिक्षा में ललक न हो, फिलोसोफी ऑफ़ एजुकेशन, शिक्षा का उद्देश्य न हो।
  • इसके हिसाब से भारत का एजुकेशन सिस्टम खुद में बदलाव करे, ये भी किया जाना बहुत जरूरी था। School Curriculum के 10+2 स्ट्रक्चर से आगे बढ़कर अब 5+3+3+4 करिकुलम का ढाँचा देना, इसी दिशा में एक कदम है।
  • हर विद्यार्थी को ये अवसर मिलना ही चाहिए कि वो अपने Passion को फॉलो करे। वो अपनी सुविधा और ज़रूरत के हिसाब से किसी डिग्री या कोर्स को फॉलो कर सके और अगर उसका मन करे, तो वो छोड़ भी सके।
  • इस बात में कोई विवाद नहीं है कि बच्चों के घर की बोली और स्कूल में पढ़ाई की भाषा एक ही होने से बच्चों के सीखने की गति बेहतर होती है। ये एक बहुत बड़ी वजह है, जिसकी वजह से जहाँ तक संभव हो, पाँचवी कक्षा तक, बच्चों को उनकी मातृभाषा में ही पढ़ाने पर सहमति दी गई है।
  • आज मुझे संतोष है कि भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति को बनाते समय, इन सवालों पर गंभीरता से काम किया गया। बदलते समय के साथ एक नई विश्व व्यवस्था खड़ी हो रही है।
  • हमें हमारे छात्रों को ग्लोबल सिटिजन तो बनाना है, इसका भी ध्यान रखना है कि वो इसके साथ अपनी जड़ों से भी जुड़े रहें। जड़ से जग तक, मनुज से मानवता तक, अतीत से आधुनिकता तक, सभी बिंदुओं का समावेश करते हुए, इस राष्ट्रीय शिक्षा नीति का स्वरूप तय किया गया है।
  • जब एक शिक्षक सीखता है तो देश अग्रणी बनता है। हम सबको एकसाथ संकल्पबद्ध होकर काम करना है।

एक योगी के तौर पर मस्जिद के शिलान्यास में कतई नहीं जाऊँगा, टोपी पहन लेना ‘सेक्युलरिज्म’ नहीं ढोंग है: योगी आदित्यनाथ

अयोध्या में बनने वाली मस्जिद को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर दो टूक जवाब दिया है। उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा है कि वह बतौर योगी और बतौर हिंदू मस्जिद के शिलान्यास का हिस्सा नहीं बनेंगे। न तो वह ऐसे किसी कार्यक्रम में शामिल होंगे और न ही उन्हें ऐसी किसी कार्यक्रम से बुलावा आएगा।   

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एबीपी न्यूज़ के साथ साक्षात्कार के दौरान इस मुद्दे पर कई बातें कहीं। उन्होंने कहा कि बतौर राज्य के मुख्यमंत्री उन्हें किसी धर्म से परेशानी नहीं है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा “ऐसे नेता जो रोज़ा और इफ़्तार में शामिल होते हैं और टोपी लगा कर खुद को धर्म निरपेक्ष साबित करने में लगे रहते हैं। असल में यह धर्म निरपेक्षता नहीं है और जनता यह बात बहुत अच्छे से समझती है।” 

इसके बाद उन्होंने कहा “अगर आप मुझसे एक मुख्यमंत्री के रूप में पूछेंगे तो मुझे किसी मज़हब, संप्रदाय से परहेज नहीं है। अगर एक योगी के रूप में पूछेंगे तो कतई नहीं जाऊँगा। मैं इसलिए नहीं जाऊँगा क्योंकि क्योंकि मैं एक योगी हूँ। हिंदू धर्म का होने के नाते मेरे पास अपने तौर तरीकों से पूजा करने का अधिकार है। इसलिए न तो मुझे कोई मस्जिद के शिलान्यास में बुलाएगा। और न ही मैं इस तरह के किसी आयोजन का हिस्सा बनने वाला हूँ।”

इसके बाद योगी आदित्यनाथ ने कहा, “जिस दिन मुझे इस तरह का कोई आमंत्रण आ गया उस दिन सेक्युलरिज्म खतरे में आ जाएगा। और मैं ऐसा बिलकुल नहीं चाहता कि धर्म निरपेक्षता पर किसी भी तरह का ख़तरा हो। इसलिए बेहतर यही होगा कि मैं शांति से अपने कर्तव्य का पालन करता रहूँ। जिससे प्रदेश के हर नागरिक को चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या समुदाय का क्यों न हो। उसे सरकार की तरफ से किसी भी तरह की निराशा न हो।” 

भूमि पूजन के कार्यक्रम के बाद सभी अथितियों को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा था कि पाँच सदी के बाद आज 135 करोड़ भारतवासियों का संकल्प पूरा हो रहा है। राम मंदिर भूमि पूजन से इतर योगी आदित्यनाथ ने न्यूज चैनल आज तक के साथ खास बातचीत में मस्जिद के शिलान्यास पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कर दिया कि वो मस्जिद के शिलान्यास कार्यक्रम का हिस्सा नहीं होंगे।

बता दें कि मीडिया चैनल ने सीएम योगी से सवाल किया था, “विरोधी कह रहे हैं कि आपने सभी धर्मों के लोगों को राम मंदिर के भूमि पूजन में बुलाया और सब आए। लेकिन आने वालों दिनों में जब अयोध्या में मस्जिद का निर्माण शुरू होगा, तो कहा जा रहा है कि कि सीएम योगी वहाँ नहीं जाएँगे।”  सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसका जवाब देते हुए कहा, “मेरा जो काम है वो काम मैं करूँगा। मैं अपने कार्य को हमेशा कर्तव्य और धर्म मानकर चलता हूँ। मैं जानता हूँ कि मुझे कोई बुलाएगा नहीं इसलिए मैं जाऊँगा भी नहीं।”

मुंबई: फेसबुक लाइव में लोगों पर यकीन ना करने की सलाह देकर भोजपुरी अभिनेत्री ने कर ली आत्महत्या, धोखाधड़ी का लगाया आरोप

भोजपुरी अभिनेत्री अनुपमा पाठक मुंबई स्थित अपने घर पर फाँसी से लटकी पाई गई हैं। बताया जा रहा है कि शहर के दहिसर इलाके में 2 अगस्त को इस अभिनेत्री ने आत्महत्या कर ली थी। और 6 अगस्‍त को यह घटना खबर बनकर सामने आई। प्रारंभिक जाँच के आधार पर पुलिस ने 40 वर्षीय अभिनेत्री अनुपमा पाठक की मौत को आत्महत्या बताया है।

अनुपमा बिहार के पूर्णिया जिले से मुंबई चली गईं थीं, जहाँ उन्होंने भोजपुरी फिल्मों और टीवी कार्यक्रमों में काम किया। यह कदम उठाने से पहले भोजपुरी अभिनेत्री 10 मिनट के लिए फेसबुक पर लाइव आईं थीं। इस वीडियो में, उन्होंने अपनी परिस्थितियाँ सामने रखते हुए लोगों से किसी पर भरोसा न करने के लिए भी कहा। अभिनेत्री ने फेसबुक लाइव वीडियो में बताया था कि उनके साथ धोखा हुआ है और वह अब किसी पर भरोसा नहीं कर सकती हैं।  

अनुपमा पाठक ने कहा, “यदि आप किसी को बताते हैं कि आप कुछ समस्याओं से गुज़र रहे हैं और आत्महत्या करना चाहते हैं, तो वह व्यक्ति, चाहे वह कितना भी अच्छा दोस्त क्यों न हो, वह अपने आपको तुरंत आपकी समस्याओं से दूर रखने के लिए कहेगा, ताकि आपकी मौत के बाद वो किसी तरह की मुसीबत में न पड़े। इसके अलावा, लोग आपका मजाक बनाएँगे और दूसरों के सामने आपका अपमान करेंगे। इसलिए कभी भी अपनी समस्याओं को किसी के साथ शेयर न करें और कभी भी किसी को अपना दोस्त न समझें।”

फेसबुक लाइव में अभिनेत्री ने कहा – “वो इंसान बनें, जिस पर हर कोई भरोसा कर सकता है, लेकिन कभी किसी पर भरोसा मत करो। मैंने अपने जीवन में यही सीखा है। लोग बहुत स्वार्थी हैं और दूसरों की परवाह नहीं करते हैं।”

रात के 12 बजे किए गए अपने आखिरी फेसबुक पोस्ट में अनुपमा पाठक ने लिखा, “अलविदा और शुभ रात्रि।”

अभिनेत्री के घर से एक सुसाइड नोट भी बरामद किया हुआ है। इस नोट में उन्होंने आत्महत्या करने के कारणों में अपनी आर्थिक परेशानी का भी उल्लेख किया है। अभिनेत्री अनुपमा पाठक ने अपने सुसाइड नोट में एक शख्स मनीष झा के बारे में भी बताया है। अनुपमा पाठक ने आरोप लगाया कि उस आदमी ने मई में उसका दोपहिया वाहन ले लिया और उसे बाद में वापस करने से मना कर दिया।

अनुपमा के फ्लैट से मिले सुसाइड नोट में उन्होंने ये कदम उठाने के दो कारण बताए हैं। इस सुसाइड नोट में लिखा, “मैंने एक दोस्त की रिक्वेस्ट पर मलाड की विजडम प्रोड्यूसर कंपनी में 10 हजार रुपए निवेश किए थे। कंपनी को मेरे पैसे दिसंबर 2019 में वापस करने थे। कंपनी मेरा पैसा वापस करने में आनाकानी कर रही है।”

लगातार सामने आई हैं मनोरंजन उद्योग में आत्महत्या की घटनाएँ

अनुपमा पाठक की मौत ऐसे समय में हुई है, जब बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के सदमे से उबर रहा है। इससे पहले 9 जून को, राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन ऊँची इमारत से कूद गईं। एक महीने पहले, 15 मई को, टीवी अभिनेता मनमीत ग्रेवाल की उनके मुंबई स्थित घर पर आत्महत्या से मृत्यु हो गई थी।

44 वर्षीय टेलीविजन अभिनेता समीर शर्मा, जो कि ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ और ‘लेफ्ट राइट लेफ्ट’ में अपनी भूमिकाओं के लिए जाने जाते हैं, बुधवार को मलाड में अपने घर पर मृत पाए गए।