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देगंगा दंगा में 3 दिनों तक इस्लामी आतंक: हिंदुओं के घर-मंदिर सब राख, जिस सांसद पर आरोप… वो बना फिर MLA

बंगाल के देगंगा (Deganga) में सितंबर 06, 2010 को सोमवार के दिन दंगे शुरू हो गए थे और कई दिनों तक जारी रहे थे। कोलकाता से लगभग 150 किलोमीटर दूर उत्तर 24 परगना के बशीरहाट इलाके में मजहबी उपद्रवियों द्वारा हिन्दू परिवारों को निशाना बनाया गया, जिसमें कई हिन्दू परिवार और पुलिसकर्मी तक बुरी तरह घायल हुए। हिन्दुओं के घर और संपत्तियों को तहस-नहस कर दिया गया और पूरे इलाके में मौजूद मंदिरों को ध्वस्त कर दिया गया।

इसका परिणाम यह हुआ कि कई लोगों की निर्मम हत्याएँ हुईं और कई लोगों को बेघर होना पड़ा। इस दंगे की वजह सिर्फ यह थी कि विवादित कब्रिस्तान के चारों ओर एक दीवार का निर्माण किया जा रहा था। मजहबी कट्टरपंथियों का मकसद हिन्दुओं को वहाँ मौजूद दुर्गा मंदिर के पूजा पंडाल में प्रवेश करने से रोकना और उस भूमि पर अपना नियंत्रण स्थापित करना था।

पीड़ित हिन्दुओं के अधिकारों और उन पर दंगों के दौरान हुए अत्याचारों का हिसाब क्या रहा होगा, इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब देगंगा में शरणार्थी हिन्दू अपनी घरों से जान बचाने के लिए यहाँ-वहाँ भाग रहे थे, उस साल 2010 में पश्चिम बंगाल में वामपंथी सरकार थी, जिसके मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य थे और केंद्र में UPA सरकार थी, जिसकी लगाम लंबे दौर से सोनिया गाँधी के हाथों में ही थी।

भारत जैसे सेक्युलर देश में हिन्दुओं के खिलाफ ‘डरे हुए शंतिप्रियों’ द्वारा एक नहीं बल्कि अनेकों बार प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस ‘मनाए’ गए हैं। देगंगा दंगा इसी का एक और उदाहरण है। TMC सांसद नुरुल इस्लाम के नेतृत्व में दंगाई भीड़ के अत्याचारों के बाद दोनों ही धर्मों- ख़ास मजहब और हिन्दू, द्वारा अपने भाग्य पर छोड़ दिए हिन्दू इस देश की धर्म निरपेक्षता के असली गवाह हैं। हिन्दुओं के घरों में तोड़फोड़ की गई, हिन्दुओं की दुकानों में आग लगा दी गई, हिंदू मंदिरों को उजाड़ दिया गया। यह सब तब हुआ, जब इस्लामिक बर्बरता के छोटे से उदाहरण के सामने मजबूर होकर जिला प्रशासन और पुलिस ने कान पकड़ लिए थे। पश्चिम बंगाल में मार्क्सवादियों को समुदाय विशेष के समर्थन की जरूरत रहती आई है। जबकि, TMC की बुनियाद ही खास समुदाय के समर्थन से ज्यादा हिन्दू-घृणा पर टिकी है।

मीडिया द्वारा विवाद का कारण दुर्गा माता के एक मंदिर का मंडप बताया गया था- इस जगह हर साल बंगालियों का सबसे बड़ा धार्मिक त्योहार दुर्गा पूजा आयोजित किया जाता था। मंडप के पीछे की जमीन एक सुनसान और विवादित कब्रिस्तान है, जिसका मालिकाना हक अदालत में काफी समय से लंबित रहा। इस स्थान को ‘चट्टलपल्ली’ कहा जाता है। कोई भी बंगाली-भाषी व्यक्ति इस नाम से ही तुरंत समझ जाएगा कि यह गाँव पूर्वी बंगाल के चटग्राम या चटगाँव जिले के विभाजन के बाद हिंदू शरणार्थियों द्वारा स्थापित किया गया था।

यहीं पर एक संकरा कच्चा रास्ता दुर्गा मंडप और चट्टलपल्ली को मुख्य सड़क से जोड़ता है। स्थानीय कट्टपंथियों ने मुख्य सड़क से दुर्गा मंडप और गाँव, दोनों को अलग करने के लिए इस रास्ते पर एक नहर खोदना और दीवार निर्माण करना शुरू कर दिया। वे पहले ही विवादित कब्रिस्तान पर अपने अधिकार का दावा कर चुके थे। वो इस मार्ग को अवरुद्ध करना चाहते थे, जिससे उन्हें मंदिर की जमीन को जल्द से जल्द हासिल करने में मदद मिलती। लेकिन, स्थानीय हिंदुओं ने समुदाय विशेष वालों की इस हरकत का विरोध किया।

मंदिर के इस संकरे मार्ग को लेकर लोगों ने विवाद किया था (चित्र साभार- हिन्दूसमहाति ब्लॉग)

वर्ष 2010 में जब हिन्दुओं को उनके अधिकारों के लिए प्रताड़ित किया गया तो बंगाली मीडिया अपनी रिपोर्ट में यह नैरेटिव चलाने का काम कर रहा था कि हिंदू समूह सांप्रदायिक आग भड़का रहे हैं और बशीरहाट के तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद हाजी नुरुल इस्लाम (Haji Nurul Islam) को अपमानित कर रहे हैं। तृणमूल कॉन्ग्रेस के सासंद… जी हाँ, वही TMC, जिसकी मुखिया ममता बनर्जी आज बंगाल में हिन्दुओं को ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने पर गिरफ्तार कर लेती हैं। दंगा पीड़ित स्थानीय लोगों ने तब कहा था कि इन दंगों का असली जिम्मेदार इसी नुरुल हाजी ही था। इस सांसद को दंडित करने की माँग को लेकर बसीरहाट से 25 किलोमीटर दूर इलाके तक पोस्टर और लोगों द्वारा प्रदर्शन किए गए।

इस हिंसक रैली में हिंदुओं के सैकड़ों घरों और दुकानों को तबाह कर दिया गया, इसके अलावा वाहनों और पुलिस की गाड़ियों में आग लगा दी गई। स्थानीय निवासियों ने कहा था कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि इन दंगों का मुख्य खलनायक नुरुल इस्लाम ही था।

सदियों पुराने दुर्गा मंदिर को कब्जाना चाहते थे दंगाई

देगंगा के स्थानीय बहुसंख्यक दुर्गा मंडप की ओर जाने वाले हिंदूओं का मार्ग बाधित करने की कोशिश कर रहे थे। ये वो जगह थी, जहाँ तब पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से आए कई पीड़ित हिन्दू शरणार्थी रहा करते थे। पास के ही दूसरे मजहब के लोग उन्हें पूजा स्थलों और उनके घरों में घुसने से रोकते थे। लोगों द्वारा मंदिर पंडाल के रास्ते को खोदने का मुख्य कारण वहाँ बनाए गए ‘मजहबी कब्रिस्तान’ के नाम पर मंदिर की भूमि को हड़पना था।

इस्लामिक आतंक के तीन दिन

6 सितम्बर की सुबह उपद्रवियों ने दुर्गा मंदिर के पंडाल का मार्ग यह कहकर खोदना शुरू कर दिया कि वह कब्रिस्तान की जमीन है। लेकिन वास्तविकता यह थी कि इस दुर्गा मंदिर में पिछले चालीस वर्षों से विशाल दुर्गा पूजा का आयोजन होता आया था और इसे लेकर किसने भी आपत्ति नहीं की थी।

जब हिंदुओं ने मंदिर के रास्ते की खुदाई करने पर आपत्ति जताई तो उन पर मजहबी भीड़ द्वारा हमला किया गया। विवाद बढ़ने पर स्थानीय हिन्दू परिवारों ने पुलिस को इसकी सूचना दी। पुलिस जब वहाँ पहुँची और उपद्रवियों को रोकने की कोशिश की तो मजहबी भीड़ ने पुलिस को ही बुरी तरह से मारा और पीटा।

इस हिंसक झड़प में थाना प्रभारी अरूप घोष को सिर में चोटें आईं और एक हाथ में फ्रैक्चर हो गया। यही नहीं, उपद्रवियों ने शाम को फिर से हिंदुओं को अच्छा सबक सिखाने की धमकी दी।

शाम को लगभग 8.30 बजे, करीब 2000 लोगों की भीड़ देगंगा, कार्तिकपुर और बेलियाघाटा के बाजार क्षेत्रों पर उतरी और बड़े स्तर पर आगजनी, तोड़फोड़ और हिंसा की। हिंदुओं की दुकानें बुरी तरह से लूटी गईं, जला दी गईं और उन्हें नष्ट कर दिया गया। हिंदू समुदाय की बस्तियों से लगी सड़कों पर आग लगा दी गई।

अगले दिन, मंगलवार की सुबह, 7 सितंबर को TMC सांसद हाजी नुरुल इस्लाम के नेतृत्व में हथियारबंद कट्टरपंथियों की बड़ी भीड़ देगंगा पुलिस स्टेशन पहुँची और पुलिस को धमकाया। इस सशस्त्र मजहबी भीड़ का नेतृत्व मकबुर रहमान और मिंटू साहजी जैसे स्थानीय लोगों ने किया।

पुलिस द्वारा लगाई गई धारा 144 को ताक पर रखते हुए सभी आदेशों को नजरअंदाज कर दिया गया। मजहबी भीड़ ने भारी गोलाबारी की और बम फेंके। इसी बीच इसी भीड़ ने वहीं फाल्टी गाँव के एक मजहब विशेष के युवक को ही बेलियाघाटा पुल पर गलती से गोली मार दी और उसकी मौत हो गई।

इसके बाद, पुलिस दल और अधिकारी रैपिड एक्शन फोर्स के एक विशाल दल के साथ दंगों को नियंत्रित करने के लिए वहाँ पहुँचे। लेकिन, दोनों डीएसपी को भीड़ ने जमकर पीटा। अशोक रे को रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) द्वारा बचाया गया और एक नर्सिंग होम में स्थानांतरित कर दिया गया।

सुबह 11 बजे, डीआईजी (प्रेसीडेंसी रेंज) सिद्धनाथ गुप्ता, उत्तर 24 परगना के डीएसपी राहुल श्रीवास्तव और डीएम विनोद कुमार ने एक आपात बैठक बुलाई और जिले के 15 पुलिस थानों के पुलिसकर्मी मजहबी

दंगाइयों को रोकने में नाकाम रहे।

दोपहर 1.30 बजे, एसडीपीओ (बारासात) महमूद अख्तर ने धारा-144 की घोषणा की। जिला पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स और बीएसएफ भी हालात नियंत्रित करने में असफल रहे तो राज्य सरकार ने सेना को बुलाया।

शाम तक किसी तरह सेना की दो बटालियन देगंगा इलाके में प्रवेश कर पाईं। अब तक दंगों और यातनाओं को झेल रहे तड़पते हुए ग्रामीण हिन्दू इस आशा में अपने घरों से बाहर निकले कि अब उन्हें किसी सुरक्षित जगह ले जाया जा सकेगा।

कट्टरपंथियों ने हिन्दू मंदिरों को कर दिया था बुरी तरह से तबाह

दंगाइयों की सशस्त्र भीड़ ने हिंदू मंदिरों में बुरी तरह से तोड़फोड़ की। देगंगा की ही कॉलोनी में स्थित काली मंदिर को भीड़ ने खंडित कर दिया था। ये दंगाई वहाँ बेलियाघाटा, साशन और बशीरहाट से ट्रकों में पहुँचे थे। काली मंदिर को तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद हाजी नुरुल इस्लाम के नेतृत्व में तोड़ दिया गया।

जब वहाँ मौजूद हिंदुओं ने इसका विरोध किया तो उन्हें उपद्रवियों की भीड़ ने उनका पीछा तलवारों और खंजर से किया और उन पर बम फेंके गए। उन्होंने काकड़ा मिर्जा नगर काली मंदिर को भी जला दिया। कार्तिकपुर के शनि मंदिर को भी इस भीड़ द्वारा खंडित कर दिया गया था। इस पर देगंगा बाजार के पास मस्जिद का लाउडस्पीकर फहराता था, जबकि यह यह धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के प्रयोग पर उच्च न्यायालय के आदेश के भी खिलाफ था।

दंगों में जलाए गए घर, मंदिर, और नदी में डुबोई गई पुलिस के वैन की तस्वीरें –

बुधवार की सुबह, 8 सितंबर को रामनाथपुर और खेजुरंगा में एक सशस्त्र भीड़ ने सलिमपुकुर और अस्पताल में हिंदुओं को निशाना बनाया और उन पर हमला किया। सलिमपुकुर में 23 घरों में तोड़फोड़ की गई, पीड़ितों ने पास के कार्तिकपुर इलाके में शरण ली। देगंगा थाने के प्रभारी अधिकारी अरूप घोष ने दंगाइयों के खिलाफ एक पुलिस दल का नेतृत्व किया, जिन पर दंगाइयों ने जमकर पथराव किया और उन पर ईंट-पत्थर बरसाए। पुलिसकर्मियों के सिर पर इस पथराव में गंभीर चोट आई और वो घायल हो गए।

दंगों के बाद

भारी दंगों के बाद सेना की मौजूदगी के बावजूद आखिरकार बृहस्पतिवार को हिंसा की छिटपुट घटनाएँ होती रहीं। शुक्रवार के दिन तक किसी तरह स्थिति शांत हुई, हालाँकि पूरे क्षेत्र में तनाव और भय पसरा था।

हिन्दू, विशेषकर वो महिलाओं जो मजहबी दंगाइयों के उत्पीड़न के बाद अपने घरों से भाग गईं, अभी तक भी अपने घरों को नहीं लौटीं थीं। हिन्दुओं के घरों को निशाना बनाकर उन्हें तहस-नहस कर दिया गया था और संपत्तियों को लूटा गया था। मजहबी भीड़ ने हिन्दुओं के घरों को आग लगा दी थी और मंदिरों को खंडित कर दिया था। भयभीत लोग तीन-चार दिन बाद अपने घरों को वापस लौट आए।

पोस्टर में लिखा है – “हिन्दुओं से नफरत करने वालों के नेतृत्व में हिन्दुओं पर हमला क्यों किया गया था? मिर्ज़, मक़ुलाकर, सोहराब और तालेब (स्थानीय गुंडे और घटिया नेता)? हम सरकार से जवाब माँगते हैं। हस्ताक्षर – ग्रामीण।”

करीब साठ पीड़ित हिन्दुओं ने पुलिस स्टेशन में दंगाइयों के खिलाफ FIR दर्ज कराई थीं। जाँच दल ने अपनी इन्वेस्टिगेशन में पाया था कि 6 सितम्बर को शफ़िक, अलाउद्दीन, अरब, फ़रीद, फ़ज़लू, अफ़ज़ल, मोहम्मद याकूब और हसिया और डोगाचिया गाँव के 100 से अधिक लोग घरों में बनी कुल्हाड़ी, लोहे की रॉड और हथियारों से लैस थे, जिन्होंने लोगों पर हमला किया और हिंदू व्यापारियों की दुकानों को लूटना और उन्हें आग के हवाले करना शुरू कर दिया था।

दस साल बाद हुए दिल्ली के हिन्दू-विरोधी दंगों की झलक

बंगाल के देगंगा में हुए यह दंगे 2010 की घटना है, जबकि इसके ठीक दस साल बाद दिल्ली में जो हिन्दू-विरोधी दंगे हुए, उनमें भी यही तरीके देखे गए। जो यह बताता है कि एक सम्प्रदाय विशेष अपनी निशानदेही और दंगों के तरीकों में कितनी स्पष्ट रणनीति को अपनाता है।

देगंगा में भी पुलिस पर हमला किया गया था, पथराव किया गया था, निशाना बनाया गया, हिन्दुओं के परिवारों और उनकी दुकानों को निशाना बनाया गया था। कितनी दिलचस्प बात है कि ठीक यही शैली 2020 की शुरुआत में पूर्वोत्तर दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों में भी अपनाई गई थी।

यह सभी बातें, सभी घटनाएँ और तरीके सब एक ही निष्कर्ष तक पहुँचाती हैं। ‘अच्छा मजहबी और बुरा मजहबी’ जैसे वाक्यांशों को सिर्फ मिथक और कपोल कल्पना साबित करने पर मजबूर करती हैं। एक मजहब द्वारा हिन्दुओं को उन्हीं के देश में प्रताड़ित करने के ऐसे ही कई और किस्से हैं, जिन्हें मीडिया की कारस्तानी और राजनीतिक षड्यंत्रों ने कभी सामने आने ही नहीं दिया और जिन पर बात तक नहीं की गई है।

‘AAP नेता संजय सिंह की हुई पिटाई, मुँह भी किया काला… अपनी ही पार्टी के दलित कार्यकर्ताओं ने गुस्से में किया’

भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने बताया कि उन्हें आम आदमी पार्टी के एक दलित कार्यकर्ता ने फोन कर के बताया है कि शनिवार (अगस्त 8, 2020) की रात AAP दलित मोर्चा के लोगों ने संजय सिंह की पिटाई कर के उनका मुँह काला किया। दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने पूछा कि क्या ये सही है? बकौल कपिल मिश्रा, उन्हें सूचना मिली कि दलित गुस्से में पूछे रहे थे कि दिल्ली में दलित उप-मुख्यमंत्री क्यों नहीं है?

कपिल मिश्रा ने ट्विटर पर बताया कि संजय सिंह की पिटाई कर के उनका मुँह काला करने वाले उनकी ही पार्टी के दलित कार्यकर्ता ये पूछ रहे थे कि पार्टी PAC में कोई दलित क्यों नहीं है? साथ ही वो ये भी पूछ रहे थे कि आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा में किसी दलित को क्यों नहीं भेजा? बता दें कि कपिल मिश्रा भी AAP से ही भाजपा में आए हैं। उन्होंने दिल्ली दंगों को लेकर भी कई खुलासे किए थे।

हाल ही में आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया पर झूठ फैलाया था। उन्होंने भाजपा को दलित विरोधी पार्टी ठहराने के लिए ट्विटर पर झूठ फैलाया। इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ‘संजय सिंह झूठा है’ ट्रेंड करने लगा। AAP नेता ने दावा किया था कि उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या को अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि कार्यक्रम में बुधवार (अगस्त 5, 2020) को नहीं बुलाया गया, क्योंकि वो दलित हैं।

मौर्या ने उसी दिन ट्विटर पर फोटो डाल कर बताया था कि वो श्री राम जन्मभूमि परिसर में आयोजित भूमि पूजन कार्यक्रम के साक्षी बन रहे हैं। उन्होंने ट्वीट किया था, “श्री राम जन्मभूमि परिसर में आयोजित भूमि पूजन कार्यक्रम के भव्य पंडाल में ऐतिहासिक दिन का साक्षी बन रहा हूॅं। परम सौभाग्य एवं अद्भुत और अलौकिक आनंद की अनुभूति कर रहा हूॅं।”

मौर्या ने 5 अगस्त को ही यह ट्वीट किया था। बावजूद 7 अगस्त को संजय सिंह ने ट्विटर पर लिखा कि उन्हें एक दलित नेता ने बताया है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को राम मंदिर भूमिपूजन कार्यक्रम में इसीलिए नहीं बुलाया गया क्योंकि वो दलित हैं और केशव प्रसाद मौर्या को भी इसीलिए नहीं बुलाया गया। उन्होंने पूछा कि भाजपा ऐसा क्यों करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा दलितों को मंदिर के बाहर रखना चाहती है।

मौत बिहारियों को गाली देने का मौका नहीं: सुशांत सिंह के बहनोई ने जहरीली पत्रकारिता करने वालों को दिया जवाब

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में शेखर गुप्ता की वेबसाइट ‘द प्रिंट’ ने एक लेख प्रकाशित किया। इस लेख का शीर्षक और इसकी तमाम बातें ऐसी हैं जिनका न तो कोई आधार है और न अर्थ। लेख की शैली से स्पष्ट था कि इसका उद्देश्य एक क्षेत्र और समूह के लोगों को निशाना बनाना है। सुशांत सिंह के बहनोई विशाल कीर्ति ने इसका जवाब दिया है।

विशाल ने लिखा है कि वह इस लेख का जवाब नहीं देना चाहते थे। लेकिन जब उन्हें लगा कि इसका प्रभाव उनके नज़दीकी लोगों पर पड़ रहा है तो उन्होंने जवाब देने का फैसला किया।

प्रिंट के लेख में कहा गया था कि जिस तरह सुशांत सिंह के परिवार ने प्रतिक्रिया दी है उससे यह स्पष्ट है कि बिहारी परिवार में बेटा होना किसी बोझ से कम नहीं है। लेख में यह भी आरोप लगाया गया है कि बिहारी परिवार के लोगों का रवैया अपने बेटों के लिए बुरा होता है।

विशाल कीर्ति ने लिखा है कि इस मसले पर वे पूर्व में बरखा दत्त को जवाब दे चुके हैं। सुशांत सिंह की मौत मनोवैज्ञानिक मुद्दों पर बात करने का माध्यम नहीं हैं। सुसैन जो सुशांत के बाईपोलर होने का दावा कर रही थीं, उसका आधार क्या था? जानकार मनोविज्ञान से जुड़े ऐसे दावे करने में सालों खर्च करते हैं और सुसैन तो सुशांत से कुछ महीने पहले मिली थीं। अगर अदालत में यह साबित हो जाता है कि सुशांत अवसाद से जूझ रहे थे तो मैं सम्मान के साथ इसे सबसे पहले स्वीकार करूॅंगा।

विशाल ने लिखा है कि वे खुद एक बिहारी परिवार से हैं। उनके परिवार की भावना उनकी पत्नी को लेकर बिलकुल वैसी नहीं है जिस तरह के दावे फिलहाल किए जा रहे हैं। उन्होंने लिखा है कि बिहार में ऐसे लाखों शिक्षित और मध्यम वर्गीय परिवार हैं, जिनका रवैया अपने बेटे और उनकी पत्नी या गर्लफ़्रेंड के लिए बेहद सरल और सहज है। लेकिन कुछ परिवारों को देख कर इतना बड़ा दावा कर देना टॉक्सिक जर्नलिज्म (विषाक्त पत्रकारिता) से कम नहीं है। बिहार के परिवारों को लेकर इस तरह के पूर्वाग्रह और रुढ़िवादी मानसिकता खुद में घिनौना है।   ’

विशाल ने कहा है कि एफ़आईआर को महिला विरोधी पहलू देकर मुद्दे की दिशा बदली नहीं जा सकती है। मैं न तो किसी पर आपराधिक आरोप लगा रहा हूँ और न ही सुशांत के पिता की तरफ से बात कर रहा हूँ।   

उन्होंने कहा है, “मैंने पिछले कुछ समय में सुशांत की मृत्यु पर हुई पत्रकारिता और विमर्श को बहुत करीब से देखा है। मेरे और सुशांत के रिश्ते बहुत अच्छे थे। हम जब भी मिलते किताबों और फिल्मों पर बात करते थे। मैं उसे और उसकी बहन को 1997 से जानता हूँ। हम एक ही स्कूल में पढ़ते थे। सुशांत उन दिनों बहुत प्यारा और शर्मीला था। उसे ज़्यादातर लोग उसकी बहन की वजह से पहचानते थे। लोग हमें ‘जीजा-साला’ कह कर चिढ़ाते थे। मैं 2006 में अमेरिका चला गया था लेकिन सुशांत का स्वभाव ऐसा था कि 2019 तक उसके संपर्क में था।”  

विशाल ने लिखा है कि रिया द्वारा सुशांत को दवाओं का ओवरडोज़ देने की खबरें आ रही है। इससे पता चलता है कि उसका नुकसान ऐसे इंसान ने किया जिससे उसे बहुत ज्यादा लगाव था। जब तक यह बात साबित नहीं होती कि सुशांत ने मा​नसिक बीमारी के प्रभाव में आत्महत्या की है, तब तक मनोविज्ञान से जुड़े मुद्दे पर जागरूकता फैलाना किसी मूर्खता से कम नहीं है।  

सुशांत सिंह के बहनोई का पूरा जवाब इस लिंक पर पढ़ा जा सकता है।           

एनकाउंटर में मारा गया मुख्तार अंसारी का करीबी शूटर: 15 साल पहले BJP विधायक को गोलियों से भून डाला था

उत्तर प्रदेश STF की टीम ने हनुमान पांडेय उर्फ राकेश पांडेय को मार गिराया है। उस पर एक लाख रुपए का ईनाम था। वह बीजेपी के विधायक रहे कृष्णानंद राय की हत्या का आरोपित ​था।

लखनऊ के सरोजनी नगर में उसकी पुलिस के साथ मुठभेड़ हुई, जिसमें वो मारा गया। कोपागंज के रहने वाले हनुमान पांडेय पर कई संगीन आपराधिक मामले दर्ज थे।

हनुमान उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी और अपराधी मुन्ना बजरंगी का करीबी था। जहाँ मुख्तार अंसारी फिलहाल जेल में है, वहीं मुन्ना बजरंगी की हत्या हो चुकी है। उसकी हत्या के बाद हनुमान पांडेय ही अंसारी गैंग का मुख्य शूटर बन गया था। उसने अंसारी के गैंग D-5 में प्रमुख भूमिका प्राप्त कर ली थी। मऊ में ठेकेदार प्रकाश सिंह सहित दो लोगों की हत्या कर दी गई थी, उस मामले में भी ये आरोपित था।

नवंबर 29, 2005 को करीमुद्दीन इलाके में स्थित सोनाड़ी गाँव में एक स्टीकेट मैच का उद्घाटन करने पहुँचे भाजपा विधायक कृष्णनंदन राय की गोलियों से भून कर हत्या कर दी गई थी। उस दिन जोरों की बारिश हो रही थी, इसीलिए वो बुलेटप्रूफ गाड़ी छोड़ कर सहयोगियों सहित सामान्य गाड़ी से ही वहाँ चले गए थे। शाम 4 बजे जब वो अपने गाँव गोडउर लौट रहे थे, तभी बसनिया चट्टी के पास उनकी गाड़ी घेर ली गई।

इसके बाद एके-47 से फायरिंग कर के विधायक सहित 7 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था। हनुमान पांडेय राजधानी लखनऊ सहित रायबरेली, गाजीपुर और मऊ में 10 मुकदमे गंभीर धाराओं में पंजीकृत हैं। बनारस और लखनऊ की STF को इनपुट मिला था कि वह इनोवा कार से जा रहा है। इसके बाद लखनऊ-कानपुर हाइवे पर उसे रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन उसने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी।

जब कृष्णानंद राय व उनके सहयोगियों की हत्या हुई, उस समय कोई ऐसा भी था जो बच गया था। उस व्यक्ति का नाम था- शशिकांत राय। वह एक तरह से इस घटना के मुख्य चश्मदीद गवाह थे। थे इसलिए, क्योंकि अब वो नहीं रहे। सैंकड़ों राउंड गोलियों के बीच ज़िंदा बच जाने वाला शख्स शराब पीने के बाद संदिग्ध स्थिति में सड़क पर बेहोश पड़ा पाया गया, जिसके बाद उसकी मौत हो गई।

एक और गवाह था, उनका नाम था- मनोज गौड़। यह भी था, क्योंकि अब ये भी नहीं रहे। सितंबर 2006 को मनोज गौड़ की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इन दोनों घटनाओं के बीच मात्र डेढ़ महीने का अंतर था। उन्हें अस्पताल ले जाया गया था, जहाँ उन्हें डॉक्टरों ने ‘ब्रांको न्यूमोनिया’ की वजह से मृत करार दिया। जब वो अस्पताल में भर्ती थे, तब प्रशासन द्वारा किसी भी प्रकार की सुरक्षा मुहैया नहीं कराई गई थी। 

सेना से जुड़े 101 उत्पादों के आयात पर रोक: रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर, स्वदेशी बनाएगी सरकार

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के संबंध में आज कई बड़े ऐलान किए। यह ऐलान मुख्य रूप से रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए किए गए हैं।    ऐलान में सबसे पहले यह कहा गया कि रक्षा क्षेत्र से जुड़े 101 उत्पादों का आयात पूरी तरह बंद होगा। इस कदम का मूल उद्देश्य रक्षा क्षेत्र को ज़्यादा से ज़्यादा स्वदेशी बनाना है। 

प्रधानमंत्री ने कुल 5 स्तम्भों के आधार पर भारत को आत्मनिर्भर बनाने का मूल मंत्र दिया है। यह चार स्तम्भ अर्थव्यवस्था, आधार भूत संरचना, तंत्र, जनसांख्यिकी और माँग (Economy, Infrastructure, System, Demography & Demand) हैं। प्रधानमंत्री ने इसके लिए विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा भी की थी। राजनाथ सिंह ने कहा कि इस सूची में न केवल कुछ उपकरण शामिल हैं बल्कि उच्च प्रौद्योगिकी वाले हथियार मसलन असॉल्ट राइफलें, सोनार सिस्टम, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, LCH, रडार और कई अन्य चीजें शामिल हैं।  

इसके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस फैसले से सबसे पहले एक बड़ा बदलाव आएगा। भारत की रक्षा इंडस्ट्री को मौक़ा मिलेगा कि वह अपने तय मानकों, निर्देशों, क्षमता और डिज़ाइन के आधार पर ऐसे उत्पाद तैयार करेंगे, जिनकी भारतीय सेना को असल में ज़रूरत होती है। इस काम में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) उनकी पूरी मदद करेगा, जिससे बेहतर नतीजे हासिल हों।    

एक लंबे दौर के विमर्श के बाद रक्षा मंत्रालय ने ऐसे उत्पादों की सूची तैयार की है। सेना के अलावा निजी और सार्वजनिक क्षेत्र को निर्देश दिए जा चुके हैं। वह इसका निरीक्षण करे कि सेना के उपयोग में आने वाली ज़रूरत की चीज़ों का उत्पादन भारत में किस स्तर पर हो सकता है। इस प्रक्रिया के लिए लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपए अप्रैल से अगस्त 2020 के बीच जारी किए जाएँगे। आगामी 6 से 7 सालों के दौरान घरेलू इंडस्ट्री (रक्षा) में लगभग 4 लाख करोड़ रुपए तक के समझौते किए जाएँगे।    

थल और वायु सेना से जुड़े ऐसे उत्पादों में लगभग 1 लाख 30 हज़ार करोड़ रुपए का खर्च आएगा। वहीं दूसरी तरफ नौसेना के उत्पादों में 1 लाख 40 हज़ार करोड़ रुपए का खर्च आएगा। इसमें Armoured Fighting Vehicles (AFVs) भी शामिल हैं। दिसंबर 2021 तक इनके आयात पर रोक लगा दी जाएगी।    

‘भारत को खंडित करके ‘उर्दूस्तान’ बनाओ, लाल किले पर PM मोदी को नहीं फहराने देंगे झंडा’ – UP पुलिस ने दर्ज किया FIR

लखनऊ में शनिवार (अगस्त 8, 2020) की दोपहर तब अचानक से हड़कंप मच गया, जब पत्रकारों को विदेशी नम्बरों से फोन कॉल्स आने लगे। 12 बजे के बाद करीब 3 बजे तक ये सिलसिला चला। फोन कॉल्स का लोकेशन यूनाइटेड स्टेट्स और एटलांटा बता रहा था। साथ ही ये फोन कॉल्स पर ‘यूसुफ अली’ का नाम दिखा रहा था। इन फोन कॉल्स में अयोध्या के राम मंदिर भूमिपूजन को लेकर धमकियाँ दी जा रही थीं।

साथ ही मजहब विशेष वालों को भी भड़काया जा रहा है। अपील की जा रही है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध किया जाए और राम मंदिर भूमिपूजन को लेकर लोगों को भी भड़काया जा रहा है। लोगों को किए गए फोन कॉल्स में कहा गया कि भारत के मजहब विशेष वाले मिल कर अब एक अलग देश ‘उर्दूस्तान’ की माँग करें, जो भारत को खंडित कर के बनाया जाएगा। पत्रकारों ने तुरंत इस बात की शिकायत कराई।

लखनऊ स्थित हजरतगंज पुलिस स्टेशन में इसे लेकर मामला दर्ज किया गया है। लखनऊ के पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडेय ने बताया कि पत्रकारों के अलावा कई अन्य लोगों को भी फोन कॉल्स से वॉइस मैसेज प्राप्त हुए, जिसमें 15 अगस्त को होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोहों को लेकर धमकाया जा रहा है और साथ ही देश की एकता को खंडित किए जाने वाली बातें की जा रही हैं। इस मामले में FIR दर्ज हो गई है।

पांडेय ने आश्वासन दिया कि इस मामले में पुलिस कड़ी कार्रवाई करेगी। यूएपीए और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है। हालाँकि, कई पत्रकारों ने इंटरनेशनल नम्बर देख कर कॉल नहीं उठाया था। लेकिन, लखनऊ में यूपी इन्फॉर्मेशन डिपार्टमेंट से जितने भी पत्रकार जुड़े हुए हैं, उन सभी को फोन कॉल्स आए। उत्तर प्रदेश में सैकड़ों पत्रकारों को ये कॉल्स आए।

कहा गया कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर के राम मंदिर बनाया जा रहा है, इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले पर झंडा नहीं फहराने दिया जाएगा। साथ ही उदाहरण देते हुए भड़काया गया कि जिस तरह से सिख एक अलग खालिस्तान की माँग कर रहे हैं, उसी तरह से दूसरे मजहब वालों को भारत से कट कर एक अलग देश उर्दूस्तान के लिए प्रयास करना चाहिए। इसमें खालिस्तान का भी समर्थन किया गया।

सुशांत मामला: उद्धव सरकार के वकील बने कॉन्ग्रेसी नेता अभिषेक मनु सिंघवी, रिया चक्रवर्ती के भाई से 18 घंटे पूछताछ

रिया चक्रवर्ती के भाई शौविक चक्रवर्ती से प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूछताछ की है। शनिवार (अगस्त 8, 2020) को सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में आरोपित शौविक ED के समक्ष पेश हुए। इस मामले में सभी आरोपितों के बयान ‘Prevention Of Money Laundering Act’ के तहत दर्ज किए जा रहे हैं। इस मामले में रिया की पूर्व मैनेजर श्रुति मोदी से भी पूछताछ हुई है।

सोमवार को भी ED ने इस मामले में कई आरोपितों को समन किया है। सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह ने आरोप लगाया है कि कुछ ही समय में उनके बेटे के एकाउंट से 15 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए। CBI ने भी जाँच को अपने हाथ में ले लिया है और एजेंसी जल्द ही घटनास्थल का दौरा करेगी। सीबीआई इस मामले में आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर जाँच कर रही है।

सीबीआई इस मामले में पटना पुलिस की एफआईआर के आधार पर जाँच कर रही है। केके सिंह का आरोप है कि आरोपित सुशांत के करीब आ गए और उन्हें झाँसे में लेकर उनकी ज़िंदगी में हस्तक्षेप करने लगे। साथ ही उन पर विश्वस्त कर्मचारियों को हटाने, घर बदलने और मानसिक रूप से बीमार होने का एहसास दिलाया गया। आरोप है कि उन्हें डेंगू होने की बात कह के ड्रग्स का ओवरडोज दे दिया। इसके अलावा भी कई आरोप हैं।

बताया गया है कि शौविक चक्रवर्ती से कुल 18 घण्टे तक ED की गहन पूछताछ चली। शुक्रवार को उनसे 2 घण्टे तक पूछताछ चली थी। उस दिन रिया से भी 9 घंटे पूछताछ हुई थी। बिहार पुलिस ने भी इससे जुड़े सारे दस्तावेज सीबीआई को सौंप दिए हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात कर न्याय का आश्वासन दिया।

महाराष्ट्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई जाँच का विरोध कर रही है। सीनियर कॉन्ग्रेसी नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी इस मामले में उद्धव ठाकरे की सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखेंगे।

उधर दिशा सलियान की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, उसका शव निर्वस्त्र पाया गया था। जिसका मुंबई पुलिस ने अब तक खुलासा नहीं किया था। रिपब्लिक टीवी द्वारा एक्सेस की गई रिपोर्ट से पता चलता है कि दिशा सालियान के शरीर पर कपड़े नहीं थे, जब वह एक बिल्डिंग की 14 वीं मंजिल से गिरने के बाद मृत पाई गई थी।

पोस्टमॉर्टम रिपार्ट में सेक्स, स्पष्ट आयु, जाति या कास्ट के हेडिंग के तहत शरीर पर कपड़ों और गहनों का विवरण दिया जाता है। जहाँ दिशा की रिपोर्ट में कहा गया है, “महिला, 28 साल, नग्न शरीर।”

वहीं रिपोर्ट में कपड़ों की स्थिति का उल्लेख किया जाता है जैसे – शव पानी से गीला हो, खून से सना हो या उल्टी और मादक पदार्थ से सना हुआ हो। दिशा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के इस सेक्शन में ‘न्यूड (नग्न) शरीर कहा गया है।

J&K में एक और BJP नेता पर कातिलाना हमला, 5 दिनों में तीसरी घटना: जिलाध्यक्ष अब्दुल हामिद अस्पताल में भर्ती

घाटी में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं पर होने वाले हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताज़ा मामला जम्मू कश्मीर के बडगाम इलाके का है, जहाँ भाजपा के कार्यकर्ता पर हमला हुआ है। गोली लगने के बाद फ़िलहाल उन्हें श्री महाराजा हरी सिंह अस्पताल में भर्ती कराया गया है।    

पुलिस के मुताबिक़ अब्दुल हामिद नजर पर हमला उस वक्त हुआ, जब वह सुबह की सैर पर निकले थे। जैसे ही वह ओम्पोरा के पास पहुँचे, वैसे ही उन पर एक हथियारबंद व्यक्ति ने हमला कर दिया। 38 साल के अब्दुल हामिद नजर अन्य पिछड़ा वर्ग से आते हैं और भाजपा जिलाध्यक्ष हैं। यह पिछले 5 दिनों में किसी भाजपा नेता पर हुई तीसरी हमले की घटना है।  

हाल ही में कश्मीर के कुलगाम जिला स्थित काजीगुंड ब्लॉक के वेसू गाँव में आतंकवादियों ने भाजपा सरपंच सज्जाद अहमद खांडे की उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उन्होंने दम तोड़ दिया था। सज्जाद अहमद खांडे एक सुरक्षित प्रवासी शिविर में कई सरपंचों के साथ रह रहे थे। वह बृहस्पतिवार (अगस्त 05, 2020) सुबह अपने घर जाने वाले थे और उन्हें आतंकवादियों ने तब गोली का निशाना बनाया, जब जब वह अपने घर से मात्र 20 मीटर दूर थे।

भाजपा पार्टी के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने सभी सरपंचों के लिए सुरक्षा की माँग करते हुए कहा, “यह हताशा के कारण उठाया गया कदम है क्योंकि भाजपा पैर जमा रही है। मैं उन्हें बताना चाहता हूँ कि लड़ाई वैचारिक होनी चाहिए। आप उन लोगों को मारते हैं, जो गरीबों और वंचितों के लिए लड़ते हैं। मुझे लगता है कि उन सभी सरपंचों को जिन्हें सुरक्षा प्रदान नहीं की गई है, अब उन्हें सुरक्षा दी जानी चाहिए।”

इससे पहले आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले में उसी जिले के पंच आरिफ अहमद की मौत हो गई थी। घाटी में पिछले दो महीनों में, दो अन्य प्रमुख राजनीतिक नेताओं को आतंकवादियों ने मार डाला था। वसीम अहमद बारी को उनके भाई और पिता के साथ 9 जुलाई को मार दिया गया था, जबकि, कश्मीरी पंडित समुदाय के सरपंच अजय पंडिता भारती की जून के माह में हत्या कर दी गई थी।

सुशांत की पूर्व मैनेजर दिशा सलियान का शव निर्वस्त्र नहीं पाया गया था: मुंबई पुलिस

अपडेट: मुंबई पुलिस इस मामले में एक नई सूचना लेकर आई है। मुंबई जोन-11 के डीसीपी विशाल ठाकुर के अनुसार दिशा सलियान का शव निर्वस्त्र नहीं पाया गया था।

ऊपर आई सूचना से पहले जो खबर थी, उसे आप नीचे पढ़ सकते हैं।

सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की रहस्यमयी मौत के मामले में एक नया सनसनीखेज खुलासा हुआ है। दिशा की मौत को जहाँ एक तरफ मुंबई पुलिस आत्महत्या साबित करने में लगी थी। वहीं दिशा की पोस्टमॉर्टम रिपार्ट और वायरल कथित आखरी वीडियो कुछ और ही कहानी बयाँ कर रहा है। आरोप लगाया जा रहा है कि उनकी हत्या की गई थी और उनका मामला अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की रहस्यमयी मौत से जुड़ा है।

दिशा सलियान की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, उसका शव निर्वस्त्र पाया गया था। जिसका मुंबई पुलिस ने अब तक खुलासा नहीं किया था। रिपब्लिक टीवी द्वारा एक्सेस की गई रिपोर्ट से पता चलता है कि दिशा सालियान के शरीर पर कपड़े नहीं थे, जब वह एक बिल्डिंग की 14 वीं मंजिल से गिरने के बाद मृत पाई गई थी।

पोस्टमार्टम रिपार्ट में सेक्स, स्पष्ट आयु, जाति या कास्ट के हेडिंग के तहत शरीर पर कपड़ों और गहनों का विवरण दिया जाता है। जहाँ दिशा की रिपोर्ट में कहा गया है, “महिला, 28 साल, नग्न शरीर।”

वहीं रिपोर्ट में कपड़ों की स्थिति का उल्लेख किया जाता है जैसे – शव पानी से गीला हो, खून से सना हो या उल्टी और मादक पदार्थ से सना हुआ हो। दिशा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के इस सेक्शन में ‘न्यूड (नग्न) शरीर कहा गया है।

इस खुलासे ने मुंबई पुलिस के उस दावे पर सवाल उठाया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दिशा ने आत्महत्या की थी। जाहिरतौर पर यह हो ही नहीं सकता कि कोई व्यक्ति आत्महत्या करने के लिए 14 वीं मंजिल से कूदने से पहले शरीर से सारे कपड़े निकाल देगा। मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया जा रहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुए इस खुलासे से यह बात स्पष्ट हो चुका है कि दिशा का बलात्कार और हत्या की गई थी।

वहीं इससे पहले एक और विचलित करने वाला तथ्य सामने आया था कि दिशा सालियान का पोस्टमार्टम उनकी मृत्यु के दो दिन बाद किया गया था। 8-9 जून की रात को उसकी मृत्यु हो गई थी। जबकि दस्तावेजों से पता चलता है कि पोस्टमार्टम 11 जून को किया गया था।

बता दें सुशांत सिंह राजपूत की हत्या के बाद मुंबई पुलिस की जाँच पर कई बार संदेह किया जा चुका है। सुशांत के परिवार, फैन और कई राजनेताओं ने इस मामले को सीबीआई को सौंपने की अपील की थी। लेकिन हर बार उद्धव ठाकरे की सरकार ने इस मामले को मुंबई पुलिस तक ही सीमित रहने की बात कही। लेकिन बिहार पुलिस के अनुरोध पर यह केस CBI को सौंप दिया गया था। अब, दिशा के मामलों को भी सीबीआई को सौंपने की इसी तरह की माँग पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद सामने आई है।

गौरतलब है कि रिपोर्ट सामने आने के बाद दिशा और सुशांत की मौत का कनेक्शन को लेकर शक और भी गहराता जा रहा है। इस बीच आज एक वीडियो सामने आया है, जिसे दिशा का आखिरी वीडियो बताया जा रहा है। खबरों के मुताबिक आत्महत्या से पहले दिशा एक पार्टी में गई थी। वायरल हुए वीडियो में दिशा दोस्तों के साथ खुश दिख रही हैं। वीडियो में दिशा अपने दोस्तों के साथ डांस करती हुई भी नजर आ रही हैं।

उल्लेखनीय है कि यह वीडियो दिशा ने ही रिकॉर्ड कर उसे अपने दोस्तों के WhatsApp ग्रुप पर भेजा था। सोशल मीडिया पर ऐसे दावे किए जा रहे हैं कि यह वीडियो 8 जून की रात रात 11 बजकर 48 मिनट पर दिशा द्वारा अपने दोस्तों के वॉट्सऐप ग्रुप में पोस्ट किया गया था। इसके तकरीबन एक घंटे के भीतर उन्होंने सुसाइड कर लिया था। यह वीडियो खुद दिशा ने ही बनाई है।

सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो को देख कर हर किसी के मन में यहीं सवाल है कि इतनी खुश दिखने वाली दिशा ने आखिर क्यों कुछ समय बाद सुसाइड कर लिया।

‘यह अल्लाह की मस्जिद है, अनंत काल तक रहेगा, इससे फर्क नहीं पड़ता कि मंदिर बनता है और पीएम पहला पत्थर रखते हैं’

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण पर तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) ने चुप्पी साध रखी है, मगर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कैबिनेट के एक मंत्री ने राम मंदिर निर्माण के खिलाफ बात की है।

पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री और जमीयत-उलमा-ए-हिन्द के प्रदेश अध्यक्ष सिद्दीकुल्ला चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भूमि पूजन में भाग लेने के निर्णय को “गलती” बताते हुए कहा, ” मेरे लिए न बोलना गलत होगा।”

चौधरी ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से जारी एक वीडियो संदेश में पूछा, “मस्जिद के ऊपर मंदिर कैसे बनाया जा सकता है?”

चौधरी आगे कहते हैं, “हम अपने धैर्य को धारण किए हुए हैं, यह अल्लाह की मस्जिद है। यह अनंत काल तक रहेगा। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई मंदिर बनता है और पीएम जाते हैं और पहला पत्थर रखते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। पूरी दुनिया जानती है कि यह एक मस्जिद है।”

भाजपा पर भारतीय समुदाय विशेष को भड़काने का आरोप लगाते हुए सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने कहा, “बीजेपी और आरएसएस सोच रहे होंगे कि मुस्लिम सड़कों पर क्यों नहीं निकले हैं, क्योंकि भारतीय मुस्लिम कानून, भारतीय संविधान, लोकतंत्र और राष्ट्रीय एकता में विश्वास करते हैं। वे घृणा नहीं करते। जिन लोगों ने ऐसा किया है वे नफरत का इस्तेमाल कर देश को बाँटने की कोशिश कर रहे हैं।”

बंगाल के मंत्री ने आगे कहा, “कुछ लोग सोचते हैं कि बल का प्रयोग करने से जीत होगी और इसलिए जबरन मंदिर बनाने की ऐसी कोशिशें हुईं, जहाँ मस्जिद को गिरा दिया गया। इस्लाम शांति, प्रेम, अनुशासन और क्षमा का धर्म है। लेकिन लोगों को यह नहीं सोचना चाहिए कि हम कमजोर हैं। हम अपना धैर्य धारण किए हुए हैं।”

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में एक बार विवादित स्थल पर मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने वाले सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले पर टिप्पणी करते हुए, सिद्दीकुल्ला चौधरी ने कहा, ” हमें न्याय नहीं मिला, हमारे साथ अन्याय हुआ है। पीएम ने गलती की।

बता दें कि इससे पहले सिद्दीकुल्ला चौधरी ने रविवार (दिसंबर 22, 2019) को धमकी दी थी कि अगर नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को फौरन वापस नहीं लिया गया तो जब भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कोलकाता दौरे पर आएँगे, तो उन्हें एयरपोर्ट से बाहर कदम नहीं रखने दिया जाएगा।”

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रखी। भूमिपूजन के बाद पीएम मोदी ने कहा कि बरसों से टाट और टेंट के नीचे रह रहे हमारे रामलला के लिए अब एक भव्य मंदिर का निर्माण होगा। टूटना और फिर उठ खड़ा होना, सदियों से चल रहे इस व्यतिक्रम से रामजन्मभूमि आज मुक्त हो गई है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के लिए चले आंदोलन में अर्पण भी था, तर्पण भी था, संघर्ष भी था, संकल्प भी था।

उन्होंने याद दिलाया कि राम हमारे मन में गढ़े हुए हैं, हमारे भीतर घुल-मिल गए हैं। कोई काम करना हो, तो प्रेरणा के लिए हम भगवान राम की ओर ही देखते हैं। उन्होंने कहा कि आप भगवान राम की अद्भुत शक्ति देखिए, इमारतें नष्ट कर दी गईं, अस्तित्व मिटाने का प्रयास भी बहुत हुआ, लेकिन राम आज भी हमारे मन में बसे हैं, हमारी संस्कृति का आधार हैं।