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शिव भक्तों को काशी मिले-कृष्ण भक्तों को मथुरा, गोहत्या पर रोक के लिए बने कानून: यजमान मोदी से माँगी दक्षिणा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त को अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर की नींव रखी। मंदिर का भूमि पूजन कराने वाले आचार्य पंडित गंगाधर पाठक ने इस बारे में कई बातें कही है। उनकी बातों में सबसे ज़्यादा उल्लेखनीय था प्रधानमंत्री मोदी से दक्षिणा का निवेदन।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को यजमान बताते हुए कहा कि अपने यजमान से दक्षिणा की माँग करना गलत नहीं होता है। आचार्य गंगाधर पाठक ने दक्षिणा में गोहत्या पर पाबंदी और काशी तथा मथुरा की मुक्ति की माँग रखी।

आचार्य गंगाधर ने कहा यह मेरे लिए सौभाग्य की बात थी कि मेरे यजमान प्रधानमंत्री मोदी हैं। अपने यजमान से दक्षिणा की माँग करना अपराध नहीं है। ट्रस्ट के लोगों ने मौके पर माहौल को देखते हुए मुझे दक्षिणा की माँग करने से मना कर दिया था। इसलिए मैंने भी उनसे इशारों में दक्षिणा माँगी थी। लेकिन अब मैं यह बात खुल कर कहना चाहता हूँ। यह मेरे लिए एक विलक्षण अनुभव था, इसकी व्याख्या नहीं की जा सकती है।    

उन्होंने कहा कि वह केवल प्रधानमंत्री ही नहीं, बल्कि एक सात्विक पुरुष भी हैं। काफ़ी प्रसन्नता हुई, लोकतांत्रिक देश का प्रधानमंत्री सनातन परंपरा का निर्वहन कर रहा है। यह वाकई खुशी की बात है। दक्षिणा के सवाल का जवाब देते हुए पंडित गंगाधर ने कहा मैं प्रधानमंत्री से नहीं बल्कि अपने यजमान से दक्षिणा की अपेक्षा रखता हूँ। प्रधानमंत्री से तो वेतन लिया जाता है, मैं प्रधानमंत्री रूपी अपने यजमान से दक्षिणा की अपेक्षा रखता हूँ।   

मेरा उनसे निवेदन है कि भारत में गोहत्या बंद हो। प्रधानमंत्री जल्द गोहत्या पर पाबन्दी से जुड़ा कानून बनाएँ और इसे लागू करें। गौहत्या से देश की धरती दूषित हो जाती है। प्रधानमंत्री ने कई बड़े काम किए हैं। जो काम असंभव नज़र आते थे उन्होंने अपने कार्यकाल में ऐसे काम भी पूरे किए हैं। अगर वह देश में गोहत्या बंद करवाते हैं तो मेरे लिए यही सबसे बड़ी दक्षिणा होगी। इसके अलावा वह श्री कृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ को मुक्त करवाएँ। इन दोनों दिव्य स्थानों से अतिक्रमण हटाया जाना चाहिए।   

इसके बाद उन्होंने भूमि पूजन के बारे में भी कई बातें कहीं। उन्होंने कहा समारोह के दौरान भारत के मूर्धन्य व्यक्ति मौजूद थे। पूजन समारोह पूरे विधि-विधान से किया गया था और 22 विद्वान इसका हिस्सा बने थे। मौके पर उपस्थित लगभग हर व्यक्ति ने स्वेच्छा और श्रद्धा से भरपूर दान किया। इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि नई शिलाओं का पूजन किया गया। वहाँ कुल 9 शिलाएँ थीं जिनका पूजन किया गया।   

कुछ शिलाएँ हीरे और पन्ने की भी थीं और इनका प्रयोग भगवान के गर्भ गृह में होगा। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी भी अपने साथ एक कलश लेकर आए थे। उस कलश में क्या था इसके बारे में किसी को जानकारी नहीं थी। उन्होंने खुद इस बारे में प्रधानमंत्री से पूछना उचित नहीं समझा। जानकारी के मुताबिक़ वह प्रधानमंत्री मोदी की गुप्त संकल्पना थी। उस कलश की स्थापना आचार्य ने खुद कराई थी।           

मुहूर्त पर अपना पक्ष रखते हुए आचार्य गंगाधर ने कहा उनकी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविन्द गिरी से इस बारे में बात हुई थी। उनके अनुरोध पर करीब एक महीने पहले शास्त्र सम्मत होकर 5 अगस्त पर स्वीकृति बनी थी। लेकिन इसकी जानकारी सार्वजनिक होने पर शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने आपत्ति जताई।   

वह पूरे देश के आराध्य हैं लेकिन तिथि तय हो चुकी थी। नतीजतन मुझे उनकी बातों का खंडन करना पड़ा। वह खुद चलने में सामर्थ्यवान नहीं है ऐसे में स्वाभाविक है कि उनके आस-पास मौजूद लोगों ने उन्हें उकसाया हो।

मस्जिद में कुरान पढ़ती बच्ची से रेप का Video आया सामने, मौलवी फरार: पाकिस्तान के सिंध प्रांत की घटना

पाकिस्तान के सिंध प्रान्त स्थित कंदियारो की एक मस्जिद में बच्ची से रेप का मामला सामने आया है। आरोपित मौलवी अब्बास फरार बताया जा रहा है। पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन ने इस खबर को अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर किया है।

राहत ऑस्टिन ने एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, “सिंध-पाकिस्तान के नंदशहरो फिरोज, कंदियारो में इस्लामिक मौलवी ने मस्जिद में एक बच्ची के साथ कुरान पढ़ते हुए बलात्कार किया। यह देशभर (पकिस्तान) में हर रोज होता है। लेकिन इस्लाम में इसे ईशनिंदा नहीं माना जाता है। यहाँ 1000 लोग दूसरे धर्म वालों की लिंचिंग कर उन्हें मार देते हैं, या फिर झूठे आरोपों में मौत की सजा देते हैं।”

रिपोर्ट के अनुसार, मासूम के साथ मस्जिद में बलात्कार करने वाले आरोपित का नाम अब्बास है। इस प्रकरण के सामने आने के बाद से वह फरार है। अब्बास के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है।

राहत ऑस्टिन ने एक अन्य ट्वीट में लिखा है, “बलात्कार, अल्लाह के घर में यौन गतिविधियाँ ईशनिंदा नहीं है? छोटी-छोटी बातों पर दूसरे धर्म वालों को मारने वालों को सजा क्यों नहीं दी जाती? क्या कुरान और अल्लाह की मौजूदगी में ऐसा करना ठीक है? ऐसी जगह पर इस्लामिक प्रार्थना और नमाज का क्या? क्या एक ऐसी जगह पर नमाज़ करना ठीक है जहाँ एक मौलवी ने अपना वीर्य गिराया हो?”

‘जाँच केवल सबूतों पर आधारित’: दिल्ली पुलिस ने दंगों पर TOI के दावों का किया खंडन

दिल्ली पुलिस ने समाचार समूह टाइम्स ऑफ़ इंडिया (TOI) के एक संपादकीय पर आपत्ति जताई है। यह संपादकीय दिल्ली दंगों पर था। इसमें दंगों और दिल्ली पुलिस की जाँच से संबंधित कई बातें लिखी गई थी।

दिल्ली पुलिस ने साफ़ शब्दों में इस संपादकीय का खंडन किया है। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि जाँच सिर्फ सबूतों पर आधारित है। अखबार में जिस तरह की बातें लिखी हैं उसका सीधा असर लोगों के जेहन पर पड़ता है।   

यह संपादकीय (Capitol Aberration) 6 अगस्त के दिन टाइम्स ऑफ़ इंडिया के दिल्ली संस्करण में प्रकाशित हुआ था। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि पूरे संपादकीय में ऐसे तमाम आरोप लगाए गए हैं जिनका खंडन करने की ज़रूरत है। ऐसा नहीं करने पर जाँच से संबंधित रिकॉर्ड प्रभावित होंगे। इसके शुरूआती हिस्से में 1984 दंगों का ज़िक्र है। लेकिन इसके बाद लेखक अपना उद्देश्य स्पष्ट कर देता है। अगले हिस्से में फरवरी के दौरान हुए दंगों के मामले में प्रोफ़ेसर अपूर्वानंद की जाँच का उल्लेख है।    

दिल्ली पुलिस ने लिखा कि लेखक इतने पर ही रुकता नहीं है। इसके बाद लेखक ने न जाने किन वजहों को आधार बनाते हुए जाँच एजेंसियों पर भ्रामक बातें फैलाने का आरोप लगाया है। यह समझना मुश्किल है कि आखिर एक व्यक्ति की कानूनी जाँच गलत कैसे हो सकती है। दिल्ली पुलिस ने पूछा है कि अपूर्वानंद को न तो समन जारी किया गया है और न इस संबंध में कोई जानकारी सार्वजनिक की गई है, फिर किस आधार पर आरोप लगाए गए हैं।

इन बातों के आधार पर दिल्ली पुलिस ने कई सवाल भी खड़े किए हैं, 

  • जब जाँच की कोई जानकारी सामने नहीं आई है, तब लेखक ने किस आधार पर ऐसे आरोप लगाए हैं?
  • लेखक के इन दावों और जानकारियों का आधार क्या है?
  • क्या जाँच अधिकारी को लेखक से दिशा-निर्देश लेने पड़ेंगे कि किसकी जाँच करनी है या किसकी नहीं?
  • क्या लेखक पुलिस पर कार्रवाई के दौरान दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है?

पुलिस ने कहा है कि असल मायनों में इन दंगों की वजह से पूरे समाज को शर्मिंदा होना पड़ा था। पुलिस ने अपनी तरफ से जितना कुछ करना चाहिए था वह सब किया। दिल्ली पुलिस ने राजधानी में क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास किया। जिससे असल आरोपित सामने आएँ और कार्रवाई अभी तक जारी है। लेकिन इससे बहुत से लोग असहज होते हैं, लेख की मंशा से ऐसा ही समझ आता है।   

इसके अलावा दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि लेखक को एक बात बहुत अच्छे से समझने की ज़रूरत है कि दिल्ली पुलिस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इस मामले में इंसाफ़ हो। पुलिस से ज़्यादा चिंता किसे होगी जिसने 750 मामले दर्ज किए हैं और 1500 लोगों को गिरफ्तार किया है।   

इस मामले की जाँच में दिग्गज अधिकारी शामिल हैं और वह उपलब्ध दस्तावेज़ों, सबूतों के आधार पर कार्रवाई कर रहे हैं। सबसे ज़्यादा हैरानी की बात यह है कि मामले के आरोपित भी अपना पक्ष रख रहे हैं और बचाव कर रहे हैं। अधिकारियों को तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन यही देश का लोकतंत्र है। यहाँ क़ानून सबसे ऊपर है, उसके आगे कुछ नहीं है। दिल्ली पुलिस ने कहा कि वह जाँच प्रक्रिया को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं। दिल्ली पुलिस सबूतों के आधार पर निष्पक्ष रूप से कार्रवाई कर रही है।

केरल विमान हादसा: अब तक 18 के मरने की पुष्टि, IAF के विंग कमांडर रह चुके थे पायलट डीवी साठे

केरल विमान हादसे का शिकार होने वाले दो मृतक पायलट्स में से एक कैप्टन डीवी साठे भी थे, जो कि इंडियन एयरफोर्स में विंग कमांडर रह चुके थे। एयर इंडिया में शामिल होने से वह पहले भारतीय वायुसेना में एक प्रायोगिक परीक्षण पायलट थे।

कैप्टन दीपक साठे मिग 21 के भी पायलट थे, जो 17 स्क्वाड्रन (गोल्डन एरो) अंबाला में रहे। स्क्वाड्रन 1999 कारगिल युद्ध में भी गया था। कैप्टन साठे वायुसेना प्रशिक्षण अकादमी में प्रशिक्षक भी रहे।

गौरतलब है कि केरल में शुक्रवार (अगस्त 07, 2020) शाम दुबई से आ रहा एयर इंडिया का विमान क्रैश हो गया था। इस विमान में 190 लोग सवार थे। अब तक प्राप्त जानकारी के अनुसार हादसे में 18 लोगों की मौत हुई है।

मृतकों में दो पायलट भी शामिल हैं और हादसे में घायल 127 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बाकी लोगों को घर जाने दिया गया है। केंद्रीय उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसकी जानकारी दी। वह फिलहाल, केरल के लिए रवाना हो गए हैं।

उड्डयन मंत्री पुरी ने हादसे का संभावित कारण बताते हुए कहा कि ‘वंदे भारत मिशन’ के अंतर्गत यह विमान 190 यात्रियों को दुबई से लेकर आ रहा था। पायलट ने टेबलटॉप एयरपोर्ट के रन-वे के अंत तक विमान को रोकने की कोशिश की होगी, जहाँ मानसून से बनी स्थिति के कारण विमान फिसल गया होगा।

पुरी ने कहा, “हादसे में हुई एक भी मौत दुखद होती है। शुक्र है कि विमान में आग नहीं लगी। जाँच के लिए दो टीमें रवाना हो गई हैं। मैं खुद भी वहाँ जा रहा हूँ। हादसे में राहत और बचाव कार्य पूरा हो चुका है। मलबे को हटाने और ब्लैक बॉक्स की खोज की तैयारी हो रही है।”

ग्लोबल फ्लाइट ट्रैकर वेबसाइट ‘फ्लाइटरडार24‘ के अनुसार, केरल में एयर इंडिया के विमान ने कोझिकोड एयरपोर्ट पर दुर्घटनाग्रस्त होने से पहले कई बार ऊपर चक्कर लगाए थे और दो बार और उतरने की भी कोशिश की थी, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिल पाई थी। विमान रन-वे पर फिसल गया और घाटी में गिरने से उसके दो टुकड़े हो गए।

रिया के आने के बाद बदल गए थे सुशांत भैया, कुत्ते के बेल्ट से गला घोंटा गया होगा: पूर्व कर्मचारी का दावा- यह मर्डर है

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर हर दिन नए चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। दिवंगत अभिनेता के वकील, परिवार के सदस्यों, दोस्तों के बाद, अब उनके पूर्व कर्मचारी अंकित आचार्य ने चौंकाने वाला दावा किया है। अंकित बतौर निजी सहायक हमेशा उनके साथ रहते थे। उनका दावा है कि यह सुसाइड न होकर मर्डर है।

मनोरंजन और फिल्मों से जुड़ी ख़बरों की नामी मीडिया पोर्टल ‘पिंकविला’ को दिए साक्षात्कार में अंकित ने यह दावा किया है। अंकित आचार्य ने कहा, “सुशांत भैया खुश और सकारात्मक इंसान थे। वह हमेशा एक्टिव रहना चाहते थे। जब मैंने उनके साथ 2017 से 2019 तक काम किया, तब वह कभी उदास या परेशान नहीं रहते थे। वह कभी-कभी गुस्से में आ जाते थे, लेकिन 5 मिनट में शांत हो जाते थे। वह हमारे साथ परिवार और अपने भाइयों की तरह व्यवहार करते थे।”

इंटरव्यू में अंकित आचार्य ने बताया कि अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती के जिंदगी में आने के बाद से सुशांत पूरी तरह से बदल गए थे। उन्होंने अपना ठिकाना बदल लिया। उनका पूरा स्टाफ भी बदल दिया गया। अंकित ने कहा कि जब वे अपनी 2 माह की सैलरी लेने के लिए सुशांत से मिलना चाहते थे तो उन्हें मिलने से रोक दिया गया था।

अंकित आचार्य के अनुसार, बाद में जब एक दिन वे सुशांत से मिले तो उन्होंने उनकी सैलरी के अलावा 50 हजार रुपए भी दिए। अंकित ने कहा कि उस समय सुशांत बिल्कुल भी सामान्य नहीं थे, उनके चेहरे पर उदासी थी, आँखों में डार्क सर्कल और वो बेहद तनाव में नजर आ रहे थे।

बकौल अंकित, “मैं सुशांत भैया को अच्छी तरह से जानता था। मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि यह आत्महत्या है। यह निश्चित रूप से एक हत्या है। मान लो कि सुशांत भैया खुद को फाँसी से लटका लेते हैं, लेकिन जब इस तरह से आत्महत्या की जाती है, तो निशान हमेशा ‘U’ आकार में होता है। लेकिन जब कोई आपका गला घोंटता है, तो यह हमेशा ‘O’ के आकार में होता है। सुशांत भैया के मामले में, ‘O’ का निशान है। आत्महत्या करने वालों की आँखें बाहर निकलती हैं, जीभ बाहर निकलती है, वहाँ झाग होता है। इसमें से कुछ भी सुशांत भैया के शरीर में नहीं था। इसलिए यह निश्चित रूप से हत्या का मामला है।”

पिंकविला के साथ बातचीत में अंकित आचार्य ने एक चौंकाने वाला खुलासा ये भी किया कि सुशांत का गला जिस बेल्ट से घोंटा गया, वो उनके पालतू कुत्ते फ़ज (Fudge) की बेल्ट थी। अंकित ने कहा कि उनके पास सुशांत की तस्वीरें अभी तक भी हैं और वो उन्हें बार-बार देखते रहते हैं।

अंकित का मानना है कि अपराधियों ने सुशांत के पालतू कुत्ते Fudge की बेल्ट से उनका गला घोंटा होगा, जिससे उनकी मौत हो गई। सुशांत की मौत की जाँच सीबीआई को सौंपे जाने से वे खुश हैं। अंकित का कहना है कि वे चाहते हैं कि सुशांत को न्याय मिले ओर दोषियों को फाँसी की सजा हो।

‘मथुरा-काशी बाकी है’: 1947 का वो यज्ञ जब 3 दोस्तों ने खींचा हिंदुओं के 3 पवित्र स्थल को वापस पाने का खाका

यह तो पहली झाँकी है, मथुरा-काशी बाकी है। ये नारा तो बहुत बाद में बुलंद हुआ। उससे बरसों पहले तीन दोस्तों ने अयोध्या के साथ-साथ इन दो हिंदू पवित्र स्थलों को वापस पाने का एक विस्तृत खाका तैयार कर लिया था। हालाँकि राम जन्मभूमि की मुक्ति के लिए पहले से ही संघर्ष जारी था। पर इनकी योजना की वजह से आजाद भारत में यह सिरे चढ़ा।

5 अगस्त 2020 को अयोध्या में राम मंदिर भूमिपूजन के बाद फिर से मथुरा-काशी को वापस पाने की बातें जोर-शोर से होने लगी है। मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए तो बकायदा एक ट्रस्ट भी बनाया गया है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट से 14 राज्यों के 80 संत-महामंडलेश्वर जुड़े हैं। आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए हस्ताक्षर अभियान शुरू करने की योजना बनाई गई है।

असल में हिंदुओं के इन पवित्र स्थलों को वापस पाने की योजना एक खेल से भी जुड़ी हुई है। यह खेल है 12वीं सदी में उत्तरी फ्रांस से शुरू हुआ ‘जिउ दी पौमे’ (हथेली का खेल), जो 16वीं सदी में इंग्लैंड पहुँच टेनिस हो गया। 78 फीट लंबे और 27 फीट चौड़े कोर्ट में खेले जाने वाले लॉन टेनिस को अंग्रेज 1880 के दशक में हिंदुस्तान लेकर आ गए थे। 1920 आते-आते भारत ने डेविस कप में भाग लेना भी शुरू कर दिया था। हालाँकि भारतीय लॉन टेनिस का इतिहास भले 100 साल से भी पुराना हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छाप छोड़ने वाले हम चुनिंदा खिलाड़ी ही पैदा कर पाए हैं।

लेकिन, इस खेल ने हिंदू जीवन दर्शन के तीन पैरोकारों को इतनी प्रगाढ़ता से जोड़ा कि इसने आजाद भारत में अयोध्या के राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन की नींव डाल दी। ये तीन दोस्त थे, बलरामपुर स्टेट के महाराजा पटेश्वरी प्रसाद सिंह, नाथपंथी कनफटा साधुओं की शीर्ष पीठ गोरक्षपीठ के महंत दिग्विजय नाथ और इंडियन सिविल सर्विस (आईसीएस) के अधिकारी केकेके नायर। महाराजा घुड़सवारी और लॉन टेनिस में पारंगत थे। महंत लॉन टेनिस के माहिर और नायर का भी इस खेल से लगाव था।

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महाराजा हिंदू जीवन दर्शन के प्रचार-प्रसार को समर्पित थे। महंत तो बकायदा हिंदू महासभा के अधिकारी ही थे। नायर भी हिंदू महासभा के संपर्क में थे। लेकिन, कहते हैं कि तीनों की दोस्ती का आधार लॉन टेनिस के प्रति इनका लगाव ही था।

वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा ने अपनी किताब ‘युद्ध में अयोध्या’ में लिखा है कि 1947 के शुरुआती दिनों में महाराजा ने एक बड़े यज्ञ का आयोजन किया। केरल के एलप्पी के रहने वाले नायर जो 1930 में सिविल सर्विस से जुड़े थे, उस समय सरयू के उस पार फैजाबाद से सटे गोंडा जिले में तैनात थे। यज्ञ में महाराजा के गुरु स्वामी करपात्री जी भी शामिल हुए।

अंजुल भर भिक्षा लेने के कारण करपात्री कहलाए स्वामी जी सिद्ध दंडी संन्यासी, उद्भट विद्वान और प्रखर वक्ता थे। ‘रामराज्य और मार्क्सवाद’ नामक बहुचर्चित किताब उनकी ही लिखी है। 1940 में बनारस में हिंदू परंपराओं की रक्षा के लिए उन्होंने ‘धर्मसंघ’ की स्थापना की और 1941 में बनारस से दैनिक अखबार ‘सन्मार्ग’ शुरू किया। राजनीति में धर्म को उचित स्थान दिलाने के लिए ‘रामराज्य परिषद’ बनाया। 1951 में इस परिषद के 24 सदस्य राजस्थान विधानसभा के लिए चुने गए थे। कई लोग इस राजनीतिक दल के बैनर तले संसद भी पहुॅंचे।

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शर्मा के मुताबिक उन्हें खुद स्वामी करपात्री ने बताया था कि राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन की नींव उसी यज्ञ में पड़ी थी। नायर वहाँ पहले से थे और यज्ञ समाप्ति से एक दिन पहले महंत दिग्विजय नाथ भी पहुँच गए। उन हिंदू धर्म स्थलों की मुक्ति पर चर्चा हुई, जिन पर इस्लामी अक्रांताओं ने कब्जा किया था।

इसके बाद नायर एक विस्तृत योजना के साथ स्वामी करपात्री और महंत दिग्विजय नाथ से मिले। उन्होंने अयोध्या के साथ-साथ वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर और मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि को दोबारा हासिल करने का खाका पेश किया। नायर ने वादा किया कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए वे अपना सब कुछ दाँव पर लगाने को तैयार हैं। नौकरी भी।

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संयोग से 1 जून 1949 को नायर फैजाबाद के कलेक्टर बने। वहाँ सिटी मजिस्ट्रेट गुरुदत्त सिंह और अभिराम दास पहले से ही राम जन्मभूमि की मुक्ति के लिए प्रयासरत थे। मैथिल ब्राह्मण अभिराम दास नागा वैरागी यानी रामानंद संप्रदाय के 15 साल पुराने खाड़कू थे। हिंदू महासभा से जुड़े होने के कारण महंत दिग्विजय नाथ के करीबी थे। उनकी ख्याति राम जन्मभूमि के ‘उद्धारक’ के तौर पर थी। कहते हैं कि 3 दिसंबर 1981 को जब अभिराम दास की अंतिम यात्रा निकली तो ‘राम नाम’ की जगह ‘राम जन्मभूमि के उद्धारक अमर रहे’ की गूँज हर ओर से आ रही थी।

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नायर के फैजाबाद में तैनाती के कुछ महीने बाद ही 22-23 दिसंबर 1949 की दरम्यानी रात रामलला भाइयों के साथ विवादित गुंबद के भीतर प्रकट हुए। नायर ने उस समय के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के दबाव के बावजूद मूर्तियों को हटाने से इनकार कर दिया था। 1952 में जब फैजाबाद से उनका तबादला कर दिया गया तो उन्होंने नौकरी ही छोड़ दी।

जैसे-जैसे खुल रही परतें, रिया चकवर्ती पर कसता जा रहा शिकंजा: सुशांत की मौत में गर्लफ्रेंड के ‘विलेन’ बनने की पूरी कहानी

14 जून 2020 को बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत अपने मुंबई के बांद्रा वाले घर में फंदे से लटके मिले। उनके एक डोमेस्टिक हेल्पर ने इस बात की जानकारी पुलिस को फोन करके दी।

शुरूआती जाँच में पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला बताया और उनके पास से कोई सुसाइड नोट न मिलने का खुलासा किया। उनके चाहने वाले उनकी मौत की खबर सुनकर इस बात पर यकीन ही नहीं कर पाए कि सुशांत जैसा प्रतिभावान और जिंदादिल इंसान खुदकुशी कर सकता है। 

15 जून को मुंबई के विले पार्ले स्थित सेवा समाज श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार हो गया। सुशांत के अंतिम संस्कार में गिने-चुने लोग आए। इनमें एक नाम उनकी गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती का भी था। 

16 जून को इस मामले में जाँच के दौरान पता चला कि सुशांत ने आखिरी कॉल जिन लोगों को किया उनमें एक नंबर रिया चक्रवर्ती का भी था। इसके बाद से ही कयास लगने शुरू हो गए थे कि पुलिस इस मामले में उनसे पूछताछ करेगी।

17 जून को इस मामले में बांद्रा पुलिस ने पड़ताल शुरू की। रिया समेत 11 लोगों को सुशांत की ‘आत्महत्या’ के सिलसिले में पूछताछ के लिए बुलाया गया। यहाँ रिया दो साथियों के साथ पहुँची और अपनी स्टेटमेंट रिकॉर्ड करवाई।

दूसरी ओर तब तक सोशल मीडिया पर सुशांत की मौत को आत्महत्या मानने से इनकार किया जाना शुरू हो चुका था। कई लोग इस बीच रिया का नाम सुशांत की मौत का कारण बताकर उछाल रहे थे और महेश भट्ट के साथ उसकी तस्वीरें शेयर करते हुए दोनों पर संदेह जता रहे थे। 

इस बीच कंगना रनौत, रवीना टंडन जैसे कई कालाकारों ने बॉलीवुड नेक्सस का मुद्दा उठाया। 21 जून को एक बार फिर सबकी निगाहों में रिया चक्रवर्ती चढ़ना तब शुरू हुईं जब बिहार के मुजफ्फरपुर में पटाही निवासी एक युवक ने धारा 306, 109, 504, 506 के तहत रिया के ख़िलाफ़ कोर्ट में याचिका दर्ज करवाई और सुशांत की मौत के लिए रिया को जिम्मेदार बताया। 

16 जुलाई को रिया ने अपने ऊपर लग रहे सभी आरोपों का खंडन किया और ट्विटर पर गृहमंत्री अमित शाह से सीबीआई जाँच की माँग कर डाली। रिया ने कहा कि वह भी जानना चाहती है कि आखिर किस प्रेशर में सुशांत ने यह कदम उठाया।

सुशांत केस में नया मोड़ तो तब आया जब बेटे की मौत के सदमे से उबरते ही सुशांत के पिता ने 28 जुलाई को रिया चक्रवर्ती समेत 6 लोगों के ख़िलाफ़ अपने गृहनगर पटना में एफआईआर दर्ज करवाई। उन्होंने इस केस में रिया पर सुशांत को प्रेम में फँसाकर पैसे ऐंठने का आरोप लगाया। 

इस बीच सुशांत की पूर्व प्रेमिका अंकिता लोखंडे ने भी बिहार पुलिस को ऐसे साक्ष्य उपलब्ध करवा दिए जिनसे मालूम चला कि रिया चक्रवर्ती उनका उत्पीड़न करती थीं। देखते ही देखते पूरे मामले में सीबीआई जाँच की माँग ने जोर पकड़ लिया।

29 जुलाई जब बिहार पुलिस सुशांत के पिता की शिकायत पर चक्रवर्ती को पकड़ने मुंबई पहुँची तो वह ‘भूमिगत’ हो गई। कुछ समय में खबर आई कि रिया फरार नहीं हैं। उन्होंने सफेद सूट में वीडियो जारी किया। इस वीडियो उन्होंने कहा कि यकीन है कि उन्हें इंसाफ जरूर मिलेगा।

थोड़ी देर में पता चला कि रिया ने अपने बचाव के लिए शहर के सबसे महँगे वकील सतीश मानशिंदे को चुना है। वे सलमान खान और संजय दत्त जैसे लोगों का केस लड़ चुके थे। लोग यह सुनकर सवाल खड़े करने लगे कि क्या रिया ने इतना कमाया है कि वह इतना महँगा वकील कर सकें?

इसके बाद, रिया चक्रवर्ती को गिरफ्तार करने का मामला पीछे छूट गया और बिहार पुलिस व मुंबई पुलिस के बीच आपसी जंग छिड़ गई। महाराष्ट्र सरकार ने भी मामले को सीबीआई को सौंपने से मना कर दिया और साफ कह दिया कि इस मामले को किसी को नहीं सौंपा जाएगा। इस पर मुंबई पुलिस जाँच कर रही हैं।

सुशांत के पिता ने यह सब देखते हुए बिहार सरकार से गुहार लगाई और बिहार सरकार ने केके सिंह की अपील पर सीबीआई जाँच की सिफारिश केंद्र सरकार से की।  

31 जुलाई को सुशांत के बॉडीगार्ड की शिकायत और पिता की शिकायत पर में ईडी ने रिया के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया। उन पर सुशांत के 15 करोड़ रुपए की हेराफेरी का आरोप था। 

उधर, रिया की याचिका के विरोध में बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुँची। रिया ने अपनी याचिका में सारे मामले मुंबई ट्रांसफर करने की मॉंग की थी। 5 अगस्त को यह केस सीबीआई को सौंप दिया गया।

6 अगस्त से सीबीआई ने अपना काम शुरू कर दिया। जाँच एजेंसी ने एसआईटी टीम का गठन किया और त्वरित कार्रवाई नए सिरे से मामला दर्ज किया। 

6 अगस्त को इस मामले में 6 लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किए गए। इसमें रिया चकवर्ती, इंद्रजीत चकवर्ती, संध्या चकवर्ती, शौविक चकवर्ती, सैम्युल मिरांडा, श्रुति मोदी का नाम शामिल हैं।

6 अगस्त को ही इंडिया टुडे ने अपनी रिपोर्ट में नया खुलासा किया। रिपोर्ट में बताया गया कि रिया चक्रवर्ती ने दबाव बनाकर सुशांत को उनकी बहनों से अलग किया।

6 अगस्त यह भी पता चला कि रिया और उसके परिवार वाले सुशांत को मेंटल हॉस्पिटल भेजना चाहते थे। जिसके कारण उन्होंने अपनी बहनों से मदद माँगी थी। 

7 अगस्त को एक नया एंगल सामने आया। रिया के कॉल डिटेल से पता चला कि वह मुंबई पुलिस के टॉप अधिकारी के संपर्क में थी।

आज ईडी ने इस मामले में रिया चक्रवर्ती से पूछताछ की है। इस पूछताछ में रिया से पिछले तीन साल में उसके आय के स्रोत की जानकारी माँगी गई। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में रिया के द्वारा याचिका डाली गई। इसपर कोर्ट ने बिहार सरकार और महाराष्ट्र सरकार से जवाब माँगा और केंद्र ने खुद को एक पक्ष बनाए जाने का सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है।

इधर, बिहार पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में केस सीबीआई को ट्रांसफर किए जाने के कारणों पर हलफनामा दायर किया। इसमें बताया गया है कि एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती सुशांत सिंह राजपूत को अपने घर ले जाकर उन्हें मानसिक रूप से बीमार करने की कोशिश किया करती थी। वह पिछले कई दिनों से लगातार सुशांत को दवाइयों की ओवरडोज दे रही थी।

7 अगस्त को ही यह बात भी सामने आई कि रिया चक्रवर्ती के भाई शौविक चक्रवर्ती के खाते में सुशांत के बैंक अकाउंट से सीधे पैसे ट्रांस्फर किए जाते थे।

अब पंजाब कॉन्ग्रेस की गुटबाजी आई सामने, सांसदों ने कहा- पार्टी को बचाना है तो CM अमरिंदर को हटाओ

मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड के बाद अब पंजाब कॉन्ग्रेस का मतभेद भी खुलकर सामने आ गया है। राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार पर मॅंडरा रहे संकट के बीच पंजाब में सीएम अमरिंदर के ख़िलाफ पार्टी नेताओं ने घेराबंदी शुरू कर दी है।

पंजाब से कॉन्ग्रेस के दो राज्यसभा सदस्यों प्रताप सिंह बाजवा और शमशेर सिंह ढुल्लो ने शुक्रवार ( 7 अगस्त, 2020) को कहा कि अगर राज्य में पार्टी को बचाना है तो अमरिंदर और प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुनील जाखड़ को उनके पदों से हटाना होगा।

इसके साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर पार्टी आलाकमान ऐसा निर्णय नहीं लेता है, तो कॉन्ग्रेस का पंजाब में वही हाल होगा जो सिद्धार्थ शंकर राय (पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री) के बाद पश्चिम बंगाल में हुआ था।

बता दें इससे पहले राज्यसभा के दोनों सदस्यों ने जहरीली शराब से मौत के लेकर अपनी ही पार्टी की सरकार घेरा था। बाजवा और ढुल्लो ने राज्यपाल से मुलाकात कर इस मामले में सीबीआई और ईडी से जाँच करवाने की माँग की थी। उन्‍होंने गृह जनपद में दो अवैध डिस्टिलरी चलने का आरोप लगाते हुए राज्य में कानून-व्यवस्था फेल बताया था।

कैप्‍टन को हटाने के लिए कॉन्ग्रेस की राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष सोनिया गाँधी से माँग तक कर डाली है। उन्होंने कहा कि अमरिंदर सरकार ने सही समय पर सख्त कदम नहीं उठाए। इसकी वजह से 100 से ऊपर लोगों की मौत हो गई है।

वहीं पंजाब के कैबिनेट मंत्रियों ने जहरीली शराब मामले में राज्य सरकार की आलोचना करने पर बाजवा और ढुल्लो को तत्काल कॉन्ग्रेस से निष्कासित करने और अनुशासनहीनता को लेकर कार्रवाई करने की माँग की थी।

गौरतलब है कि कुछ महीने पहले मध्य प्रदेश में इसी तरह की स्थिति में कमलनाथ सरकार गिर गई थी। ज्योदितारित्य सिंधिया की कॉन्ग्रेस में उपेक्षा से नाराज उनके समर्थक विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था।

वहीं राजस्थान में सरकार बनने के बाद से ही उपेक्षा झेल रहे उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बगावती तेवर ने गहलोत सरकार को मुश्किल में डाल रखा है। सचिन पायलट के विद्रोह करने के बाद कॉन्ग्रेस के आलाकमान ने उन्हें उप मुख्यमंत्री पद से भी हटा दिया। बावजूद कॉन्ग्रेस हाईकमान इस बगावत खत्म करने में असफल रही। कॉन्ग्रेस ने अपने विधायकों की होटल में घेराबंदी कर रखी है।

पिछले दिनों झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार में उपेक्षा से परेशान कॉन्ग्रेस के नौ विधायकों ने आलाकमान से फरियाद लगाई थी। विधायकों ने दिल्ली पहुँच कर शिकायत की। राज्यसभा सदस्य धीरज साहू के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस के तीन विधायक इरफान अंसारी, राजेश कच्छप और उमाशंकर अकेला ने सोनिया गाँधी के सलाहकार अहमद पटेल और गुलाब नबी आजाद से गुहार लगाई थी।

विधायकों ने हाइकमान को आगाह किया था कि अगर इस मामले में कुछ एक्शन नहीं लिया जाता तो झारखंड में भी सरकार अस्थिर हो सकती है। दिल्ली में वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेताओं की ओर से उन्हें शांत रहने की नसीहत दी गई थी।

केरल में विमान के दो टुकड़े: खाई में गिरा दुबई से आया विमान, 191 लोग थे सवार

एयर इंडिया का विमान कारीपुर एयरपोर्ट के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह एयरपोर्ट केरल के कोझीकोड में हैं। विमान दुबई से आ रहा था।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार विमान रनवे पर फिसलने के बाद घाटी में जा गिरा। विमान के दो टुकड़े हो गए। पायलट की मौत की बात कही जा रही है। हालॉंकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

विमान में कुल 191 लोग सवार थे। इनमें 174 वयस्क यात्री, 10 नवजात, दो पायलट और 5 क्रू मेंबर थे। डीजीसीए ने दुर्घटना की जॉंच के आदेश दिए हैं। हादसे के बाद एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुॅंच गई है। यह प्लेन दुबई से शाम के 4 बजकर 45 मिनट पर उड़ा था।

रिपोर्ट्स के अनुसार रनवे पर पानी जमा होने के कारण लैंडिंग के वक्त दुर्घटना हुई। जलभराव की वजह से प्लेन रनवे से आगे निकल गया। करीब 30 फीट गहरी खाई में जा गिरा और इसके दो टुकड़े हो गए।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हादसे पर दुख जताया है। अपने ट्वीट कर कहा है, केरल के कोझिकोड में एयर इंडिया एक्सप्रेस के विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर सुनकर दुख हुआ। एनडीआरएफ की टीम को घटनास्थल पर पहुॅंचने और रेस्क्यू ऑपरेशन में मदद करने के निर्देश दिए हैं।

डीजीसीए के अनुसार हादसे का शिकार हुए एयर इंडिया का विमान बोइंग-737 था, हादसे में विमान के पायलट की मौत हो गई है। राहत एवं बचाव कार्य चलाया जा रहा है। कितने लोगों की मौत हुई है यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। केरल की कोंदोत्ती पुलिस के अनुसार आज शाम करीब 7 बजकर 45 मिनट पर विमान हादसे का शिकार हुआ है।

सुशांत सिंह के अकाउंट से रिया चकवर्ती के भाई के खाते में ट्रांसफर हुआ था पैसा: बैंक स्टेटमेंट के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में दावा

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में एक नया खुलासा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुशांत के बैंक अकाउंट से रिया चकवर्ती के भाई के खाते में पैसे ट्रांसफर किए गए थे।

सीबीआई ने गुरुवार को रिया सहित 6 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था। आज ईडी ने आगे की पड़ताल में रिया से उनकी पिछले 3 साल की आय के स्रोत का जवाब माँगा।

इस बीच खबर आई है कि रिया के भाई शौविक चक्रवर्ती के अकाउंट में पैसे सीधे सुशांत के अकाउंट से ट्रांस्फर हुए। इसका खुलासा सीएनएन- न्यूज 18 ने अपनी रिपोर्ट में किया

सीएनएन-न्यूज 18 का दावा है कि उनके हाथ शौविक की बैंक स्टेटमेंट लगी है। यह बताती है कि सुशांत के अकाउंट से पैसा शोविक के खाते में ट्रांसफर किया गया था।

गौरतलब है कि ईडी, सुशांत के पिता केके सिंह की शिकायत के बाद रिया और उनके परिजनों समेत 4 लोगों से पूछताछ कर रही है। इन पर आरोप है कि इन्होंने सुशांत के कमाए पैसों की हेर-फेर की।

अधिकारियों के अनुसार, आज रिया से इस संबंध में पूछताछ हुई। इसके लिए वह केंद्रीय एजेंसी के समक्ष अपने भाई शौविक से साथ आई। इसके अलावा श्रुति मोदी भी एजेंसी द्वारा तलब किए जाने के बाद पेश हुई।

टाइम्स नाऊ की खबर भी दावा करती है कि उनके पास शौविक की बैंक स्टेटमेंट है। जिसमें साफ पता चल रहा है कि सुशांत सिंह राजपूत ने शौविक के खाते में कई बार पैसे ट्रांसफर किए हैं

सुशांत के खाते से शौविक के खाते में सबसे बड़ा ट्रांजैक्शन 40,000 रुपए का 10 जून, 2019 को किया गया। इसके अलावा इससे कम रुपए के कई ट्रांजैक्शन किए गए।

उल्लेखनीय है कि सुशांत सिंह राजपूत ने अपनी मौत से कुछ दिन पहले बैंक से अपने खाते को बंद करने के लिए कहा था और वह नया खाते खोलने के लिए कहा था। इस बात की जानकारी सुशांत की फैमिली ने बिहार पुलिस को दी थी।

यहाँ यह भी बता दें कि शौविक चक्रवर्ती का नाम उन्हीं लोगों में है जिनके खिलाफ़ कल सीबीआई ने मामला दर्ज किया। इसके अलावा उसे लेकर ये भी कहा जा रहा है कि वह सुशांत सिंह राजपूत की कंपनी में हिस्सेदार रह चुके हैं।