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CM शिवराज से कॉन्ग्रेसी नेता ने लगाई गुहार, कहा – ‘प्लीज, सिंधिया कैम्प के किसी को राजस्व मंत्री न बनाएँ’

मध्य प्रदेश की राजनीति एक बार फिर सुर्ख़ियों में है। इस बार सुर्ख़ियों की वजह है ज्योतिरादित्य सिंधिया पर लगाए गए आरोप। हालाँकि कॉन्ग्रेस छोड़ने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया पर आरोप लगते ही रहे हैं लेकिन हैरानी की बात यह है कि कॉन्ग्रेस के एक नेता ने उन पर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से गुहार लगाई है।

कॉन्ग्रेस के नेता गोविंद सिंह ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री से आग्रह करते हुए कहा कि वह राजस्व पोर्टफोलियो सिंधिया कैम्प के किसी व्यक्ति को न दें। क्योंकि ऐसा होने पर राजस्व विभाग के मुखिया की मदद से वह सरकारी ज़मीन अपने ट्रस्ट के नाम करवा सकते हैं।  

कॉन्ग्रेस नेता गोविंद सिंह

गोविंद सिंह ने कहा –

“ग्वालियर उच्च न्यायालय के तमाम अधिवक्ता समेत कलेक्ट्रेट भी उनकी इस प्रक्रिया में मदद करते हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए राजस्व मंत्री की मदद से सरकारी ज़मीन अपने ट्रस्ट के नाम करवाना आसान हो जाता है। इसलिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मेरा निवेदन है कि वह सिंधिया कैम्प से जुड़े किसी भी व्यक्ति को राजस्व मंत्रालय का कार्यभार न दें। प्रदेश के 7 करोड़ लोगों का हित देखते हुए सरकार को यह ज़मीन बचानी चाहिए।” 

कॉन्ग्रेस नेता गोविंद सिंह ने यह भी कहा कि आज़ादी के बाद सिंधिया परिवार ने कई सरकारी ज़मीनों पर कब्ज़ा कर लिया था। आरोप लगाए जाने के बाद मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने जवाब दिया।

विश्वास सारंग ने कहा, “कॉन्ग्रेस के नेता अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं। अगर इस तरह के अ-मूल्य सुझाव पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को दिए गए होते तो जनता का हित बेहतर तरीके से सुनिश्चित होता। सिंधिया कॉन्ग्रेस में रहते हुए इंसाफ के लिए लड़ते रहे, जब किसानों का क़र्ज़ माफ़ नहीं हुआ तब उन्होंने कॉन्ग्रेस से इस्तीफ़ा दे दिया। उन्होंने कॉन्ग्रेस कभी अपने हित के लिए नहीं छोड़ी।”  

दिलचस्प बात यह है कि कमलनाथ सरकार के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया के सहयोगी गोविंद सिंह, राजस्व मंत्री थे। ऐसे में यह पूछा जाना चाहिए कि खुद गोविंद सिंह के राजस्व मंत्री रहते सिंधिया ने जनता की कितनी जमीन अपने ट्रस्ट के नाम करवाई थी?

चीन से अब ‘काली मौत’ का खतरा, अलर्ट जारी: आनंद महिंद्रा बोले- अब बर्दाश्त नहीं कर सकता

पूरी दुनिया को कोरोना संक्रमण देने वाले चीन में अब ब्‍यूबोनिक प्‍लेग (Bubonic plague) के मामले सामने आए हैं। इसे ब्लैक डेथ यानी काली मौत भी कहते हैं। यह भी इंसान से इंसान में आसानी से फैल सकता है।

ब्‍यूबोनिक प्‍लेग का संदिग्ध मामला मिलने के बाद चीन का स्वास्थ्य महकमा हाई अलर्ट पर है। मामले की जानकारी रविवार 5 जुलाई को मंगोलियाई स्वायत्त क्षेत्र से सामने आई। अभी से लगभग 8 महीने पहले ही ठीक इसी तरह की बीमारी के 2 मामले चीन के उत्तरी प्रांत से ही सामने आए थे। पिछले साल के नवम्बर महीने में पहला मामला मंगोलिया और दूसरा बीजिंग से आया था।  

आंतरिक मंगोलिया के बयन्नुर म्युनिसिपल हेल्थ कोर्पोरेशन ने इस मामले पर एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी। विज्ञप्ति के मुताबिक़ उराड मिडिल बैनर (चीन की प्रशासनिक इकाई) के तहत आने वाले पीपुल्स अस्पताल से शनिवार के दिन पहले प्रभावित मामले की जानकारी मिली। फिलहाल मरीज को आइसोलेट करके उसका उचित इलाज किया जा रहा है।  

चीन की समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार प्लेग से बचाव और नियंत्रण के लिए बयन्नुर प्रशासन ने तीसरे स्तर की चेतावनी जारी की है। इतना ही नहीं इस चेतावनी में दिए गए दिशा-निर्देश साल 2020 के अंत तक पूरे इलाके में लागू रहेंगे। स्थानीय प्रशासन ने यह भी कहा कि लोगों से लोगों के तक फैलने वाले इस इन्फेक्शन को रोकने के लिए उस पूरे इलाके में जानवरों को मारना प्रतिबंधित होगा।  

इसके अलावा प्रशासन ने यह आदेश भी दिए हैं कि अगर इलाके में किसी भी तरह के जानवर को मारा जाता है तो इसकी सूचना प्रशासन को दी जाए। साथ ही अगर किसी व्यक्ति में इस इन्फेक्शन के लक्षण नज़र आते हैं तो उसकी जानकारी भी प्रशासन दें।  

यह एक तरह का बैक्टीरियल इन्फेक्शन है जो कि यर्सीनिया पेस्टिस से होता है। यह प्लेग कुल 3 प्रकार का होता है, पहला सेप्टिकेमीक, जो खून में फैलता है।  दूसरा ब्यूबानिक जो लिम्फ को प्रभावित करता है और तीसरा न्यूमोनिक जो फेफड़ों पर असर डालता है। जिसमें से दूसरे और तीसरे प्रकार का इन्फेक्शन साल 2019 के नवम्बर महीने में आंतरिक मंगोलिया और बीजिंग से सामने आया था।  

चीन के स्वास्थ्य महकमे द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार मंगोलिया में ऐसे तमाम केंद्र हैं, जहां इंसानों को जानवरों से होने वाले इन्फेक्शन का ख़तरा बहुत ज़्यादा रहता है। ब्‍यूबोनिक प्लेग जितना सामान्य है उतना ही खतरनाक। साल 2014 में उत्तर पश्चिमी प्रांत गांसू में आने वाले शहर युमेन में प्लेग से 1 व्यक्ति की मौत के बाद पूरे शहर को लॉकडाउन किया गया था और लगभग 151 लोगों को क्वारनटाइन किया गया था।  

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक़ साल 2009 से लेकर साल 2018 के बीच चीन में इस बीमारी के 26 मामले सामने आए हैं और 11 लोगों की मौत हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार मेडागास्कर में साल 2017 के दौरान प्लेग ने महामारी का रूप लिया था। इस बीमारी के 2300 मामले सामने आए थे और 202 मौतें हुई थीं।  

चीन में यह मामले सामने आने के बाद भारतीय उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने चिंता जताते हुए ट्वीट किया है। उन्होंने कहा है कि अब मानवजाति पर रहम होना चाहिए। अब ऐसी खबरें सहन नहीं हो पा रही हैं। मैं ऐसे मामलों को अब और बर्दाश्‍त नहीं कर सकता हूॅं।

झारखंड: BJP नेता को गोली मार पैदल ही फरार हो गए 2 बदमाश, पार्टी ने कहा- जंगलराज लौट आया

झारखंड के लातेहार जिले के बरवाडीह बस स्टैंड पर भाजपा जिला महामंत्री जयवर्धन सिंह की रविवार (जुलाई 5, 2020) को गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना कल शाम करीब साढ़े 7 बजे घटी। आरोपित मौके से पैदल ही फरार हो गए। भाजपा ने आरोप लगाया कि झारखंड में जंगलराज की फिर वापसी हो गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार की शाम जयवर्धन सिंह बस स्टैंड के पास स्थित प्रज्ञा केंद्र के सामने बैठे हुए थे। तभी पीछे से दो युवक आए और उनके पीठ व गर्दन के पास सटा कर गोली मार दी। वह वहीं गिर गए।

गोली मारने के बाद दोनों बदमाश फायरिंग करते हुए बस स्टैंड से होते हुए बाजार के मुख्य सड़क से भाग निकले। लोगो ने दोनों युवकों का पीछा भी किया, लेकिन दोनों पैदल ही फरार हो गए।

इस घटना की सूचना पाते ही बरवाडीह डीएसपी अमरनाथ ने पुलिस इंस्पेक्टर उदय प्रताप सिंह व पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुँच कर गोली मारने वालों के बारे में जानकारी जुटाई। साथ ही उनकी धड़पकड़ के लिए छापेमारी अभियान शुरू किया।

पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस घटना पर कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। लातेहार भाजपा जिला महामंत्री जयवर्धन सिंह की सरेआम हत्या हो गई। इसकी जितनी भर्त्सना की जाए कम है। सरकार अपराधियों को तत्काल पकड़ कर कड़ी कार्रवाई करे। कानून-व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो भाजपा उग्र आंदोलन करेगी।

बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने जयवर्धन सिंह की हत्या पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि झारखंड में जंगलराज वापस आ गया है। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो गई है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। राज्य में पिछले 6 महीने में नक्सली और आपराधिक घटनाओं में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि हुई है।

गौरतलब है कि जयवर्धन सिंह पर पहले भी हमला हुआ था। 2018 में जब वह लातेहार व्यवहार न्यायालय में गवाही देने गए थे तभी कुछ लोगों ने हमला कर दिया था। हालाँकि इस घटना में पुलिस ने अपराधियों को फौरन पकड़ लिया था। इसके अलावा करीब 6 साल पहले भी उनपर जानलेवा हमले का प्रयास हुआ था।

लोगों के मुताबिक, वे लगातार अपने ऊपर हमले की आशंका जताते थे। इसके लिए उन्होंने हथियार की माँग भी की थी। लेकिन उनके आर्म्स विधानसभा चुनाव के दौरान थाने में जमा करवा लिए गए थे। चुनाव के बाद उन्होंने लिखित आवेदन देकर हथियार को वापस रिलीज करने की माँग की थी, मगर प्रशासन ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की।

7 मुस्लिम परिवारों ने स्वेच्छा से अपनाया हिंदू धर्म: दिल्ली पुलिस के सब-इंस्पेक्टर (रिटायर्ड) भी शामिल

दिल्ली से मात्र 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक गाँव है – भोगीपुर। हरियाणा के सोनीपत जिले का यह गाँव आज चर्चा में रहने वाला है। कारण है 7 मुस्लिम परिवारों का अपनी इच्छा से हिंदू धर्म का अपनाना। भोगीपुर में 7 मुस्लिम परिवारों ने स्वेच्छा से हिन्दू धर्म अपना लिया। न तो उन्हें धर्मान्तरण के लिए किसी तरह से मजबूर किया गया और न ही प्रलोभन दिया गया।

जिन 7 परिवारों ने हिंदू धर्म अपनाया है, इनके नाम, गोत्र सब हिन्दू वाले ही हैं। हालाँकि ये परिवार मुस्लिम रीति-रिवाजों का अनुसरण करते थे और मृतकों को दफनाया ही जाता था। अब हिन्दू धर्म अपना लिए जाने के बाद ये लोग हिन्दू रीति-रिवाजों और प्रक्रियाओं का पालन करेंगे।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मंडल प्रमुख सुमित अत्री द्वारा इन सभी परिवारों को पवित्र पुस्तकें भगवद्गीता और महाभारत भेंट की गईं और उनके हिन्दू धर्म में आने का स्वागत किया गया। हिन्दू धर्म अपनाने वालों में रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर बलबीर सिंह, सुरेश कुमार, रमेश कुमार, बिजेंद्र, अशोक, दीपक, सुनील, अमित कुमार, रोहित, मनोज कुमार, जोगेंद्र व योगेंद्र व इनके परिवार शामिल हैं।

हालाँकि, इनमें से अधिकतर लोगों ने कहा है कि उन्होंने भले ही अब हिन्दू धर्म में औपचारिक वापसी की प्रक्रिया पूरी की हो लेकिन उन्होंने पिछले कई दिनों से धीरे-धीरे हिंदुत्व को अपनाना शुरू कर दिया था। ‘अमर उजाला’ के अनुसार, उनमें से एक सुरेश ने स्वीकार किया कि दशकों पहले उनके पूर्वज हिन्दू ही थे, जिन्होंने मुस्लिम मजहब अपना लिया था। कुनबे में इस दावे को लेकर अलग-अलग बातें भी कही गईं।

पिछले कई सालों से उनके हिन्दू बनने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी और उन्होंने धीरे-धीरे हिन्दू रीति-रिवाजों को अपनाना शुरू कर दिया था। ये सभी परिवार धोबी समुदाय से सम्बन्ध रखते हैं, जिन्हें ‘मुस्लिम धोबी’ कहा जाता था। सातों परिवारों ने कहा कि अब ‘मुस्लिम’ शब्द हटा कर उन्होंने इस आखिरी कड़ी को भी समाप्त कर दिया है। अन्य ग्रामीणों ने भी उनके हिन्दू धर्म अपनाने का दिल से स्वागत किया।

सभी परिवारों ने दोहराया कि उन्होंने बिना किसी दबाव के स्वेच्छा से हिन्दू धर्म अपनाया है। उन्होंने इसके लिए हिन्दू संस्कृति की बात की और कहा कि इसमें किसी के द्वारा कोई भी मत अपनाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। गाँव के लोगों ने भी कहा कि उन्हें इस पर कोई आपत्ति नहीं है और वो सातों परिवारों के निर्णय का स्वागत करते हैं। ये कई दिनों से दीपावली, होली और करवा चौथ समेत कई हिन्दू त्यौहार मनाते आ रहे थे।

इन लोगों के परिवारों में शादियाँ भी मुस्लिम रीति-रिवाज से ही होती आ रही थी। हरियाणा के मेवात में जब दलितों पर अत्याचार कर के उन्हें जबरन इस्लामी धर्मान्तरण पर मजबूर किया जा रहा है, इस बीच ये ख़बर सुकून देने वाली है। बता दें कि सोनीपत से मात्र 140 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मेवात के बारे में पूर्व जज ने टिप्पणी की थी कि ये दलितों का कब्रगाह और दूसरा पाकिस्तान बनता जा रहा है।

भारत, नेपाल, रूस के बाद अब भूटान की जमीन पर चीन का दावा: GEF ने दावा किया दरकिनार

भारत और नेपाल के बाद अब चीन ने भूटान पर अपनी टेढ़ी नज़र डाली है। उसने अब भूटान की ज़मीन को अपना बताया है। इससे नई दिल्ली स्थित सत्ता के गलियारों में चिंता जताई गई है क्योंकि अभी तक भूटान की स्वायत्तता की रक्षा भारत ही करता आ रहा है।

पूर्वी भूटान के त्राशीगंग जिले में अमेरिका की ग्लोबल एनवायरनमेंट फैसिलिटी (GEF) ने एक ऑनलाइन बैठक में वहाँ वाइल्डलाइफ पार्क बनाने का निर्णय लिया था, जो चीन को रास नहीं आया। चीन ने इसके निर्माण को लेकर आपत्ति जताई है।

बता दें कि GEF दुनिया भर में पर्यावरण के क्षेत्र में प्रोजेक्ट्स की फंडिंग की व्यवस्था करता रहा है। अब जब GEF ने इस प्रोजेक्ट को फंडिंग के लिए अनुमति दे दी है, भूटान ने चीन के दावों पर आपत्ति जताई है। GEF ने भी चीन के दावों को दरकिनार कर दिया है।

वर्ल्ड बैंक के बोर्ड की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अपर्णा सुब्रमणि ने इस बैठक में भूटान का प्रतिनिधित्व किया। वो एक IAS अधिकारी हैं, जो सितंबर 2017 से ही इन मामलों में न सिर्फ भारत और भूटान बल्कि बांग्लादेश और श्रीलंका का भी प्रतिनिधित्व करती रही हैं।

जून 2 और 3 को हुई GEF की बैठकों में भी चीन ने इस पर आपत्ति जताई थी। काउंसिल की बैठक की डिटेल्स में भी चीनी आपत्ति को जगह दी गई है।

चीन ने कहा है कि सतकेन्ग वाइल्डलाइफ प्रोजेक्ट जहाँ स्थापित किया जा रहा है, वो एक विवादित जमीन है जो चीन-भूटान की सीमाओं के निर्धारण के लिए होने वाली बैठकों में चर्चा का हिस्सा बनता है। इसीलिए, चीन ने इसका विरोध करते हुए इस प्रोजेक्ट में किसी भी तरह की हिस्सेदारी से इनकार कर दिया।

कहा जा रहा है कि चीन द्वारा भारत को परेशान करने के लिए ये उसकी एक नई चाल है, जिसके लिए भूटान को निशाना बनाया जा रहा है।

चीन ने कहा है कि भूटान और उसकी सीमाओं का अभी निर्धारण ही नहीं हुआ है और वो किसी तीसरे पक्ष (भारत) द्वारा इसमें हस्तक्षेप करने का विरोध करता है। अब तक चीन ने पूर्वी सीमा पर ऐसी हरकत नहीं की थी। 2017 में भी डोकलाम में चीन ने घुसपैठ की थी, जिसका भारत ने तगड़ा जवाब दिया था।

भारत ने भूटान का प्रतिनिधित्व करते हुए चीन के दावों को पूरी तरह से नकार दिया। भूटान ने कहा कि ये भूमि न तो विवादित है और न ही चीन-भूटान की बातचीत का हिस्सा है। ये भूटान का एक अभिन्न अंग है।

बता दें कि नेपाल की ‘सर्वे डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर इंडस्ट्री’ ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कुल मिला कर चीन ने अब तक 10 अलग-अलग क्षेत्रों में नेपाल की 33 हेक्टेयर की जमीन का अवैध अतिक्रमण किया है।

6 बीघा जमीन, चौबेपुर थाना और विकास दुबे: UP, MP, राजस्थान के सेंटर तक पहुँचना चाहता है यह कुख्यात!

कानपुर के बिकरु गाँव में गुरुवार रात 8 पुलिसवालों के साथ जो हुआ, उसे भुला पाना लगभग नामुमकिन है। इस मामले पर पुलिस लगातार नए खुलासे कर रही है। ताजा अपडेट में बताया जा रहा है कि यह पूरी घटना मात्र 6 बीघा जमीन के कारण हुई और कुछ पुलिसवालों की मदद से ही विकास दुबे को पुलिस की दबिश का पहले से पता चल पाया।

घनश्यामपुर ग्राम पंचायत की इस जमीन को लेकर विकास के एक रिश्तेदार राहुल तिवारी ने चौबेपुर थाने में विकास दुबे के ख़िलाफ़ अपहरण का प्रयास, जानलेवा हमले की शिकायत दर्ज करवाई थी। लेकिन अब वह परिवार समेत फरार है।

वहीं, रविवार को गिरफ्तार हुए विकास दुबे के करीबी दयाशंकर अग्रिहोत्री ने यह बताया है कि विकास को पुलिस दबिश की सूचना पुलिस ने ही दी थी। इसी के बाद उसने अपने असलहाधारी साथियों को बुलाया।

अब इस मामले के संबंध में जाँच टीम ने चौबेपुर थाने की भूमिका को संदिग्ध पाया है। बताया जा रहा है कि 8 पुलिसकर्मियों की हत्या से एक दिन पहले तत्कालीन थानाध्यक्ष विनय तिवारी मामले की जाँच के लिए विकास दुबे के पास गए थे।

विकास दुबे ने इस दौरान अपने घर पर थानाध्यक्ष के साथ मारपीट की थी और उन पर बंदूक भी तानी थी। मगर, विनय तिवारी ने इतना सब हो जाने के बावजूद इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी।

अब विनय तिवारी को पुलिस रेड से पहले विकास दुबे के लिए मुखबरी करने के शक के आरोप में निलंबित किया गया है। इसके अलावा STF उनसे लगातार पूछताछ कर रही है।

विकास दुबे की कॉल डिटेल्स से यह भी खुलासा हुआ है कि वह चौबेपुर और शिवराजपुर पुलिस थानों के करीब 24 पुलिसकर्मियों के साथ संपर्क में थे। इसके अतिरिक्त, यह भी पाया गया है कि 60 केस में नाम होने के बावजूद इन थानों में कभी उसे टॉप क्रिमिनल्स की सूची में नहीं रखा गया। न ही उसकी गैंग कभी रजिस्टर की गई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सभी पहलुओं को देखते हुए पुलिस ने इस संबंध में 21 लोगों के खिलाफ नामजद और 60 से अधिक अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

आईजी रेंज कानपुर माेहित अग्रवाल ने कहा है अगर कोई आरोपित पाया जाता है तो उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जाएगा। उसे फौरन बर्खास्त किया जाएगा। पुलिस की मानें तो मामले में अभी तक 21 आरोपितों की पहचान हुई है। इनमें से 2 को पुलिस ने मुठभेड़ में मार डाला।

इसी बीच यह भी खबर आ रही है कि 8 पुलिसकर्मियों की हत्या का आरोपित विकास दुबे चंबल के बीहड़ों तक पहुँच गया है। उसकी मंजिल इटावा के रास्ते 3 राज्यों की सीमाओं को जोड़ने वाला आगरा सेंटर है। दरअसल, यह वो जगह है, जहाँ से केवल 30 मिनट में यूपी से मध्य प्रदेश और राजस्थान में आया जाया जा सकता है।

विकास दुबे से जुड़े हर कनेक्शन को गहराई से खंगालते हुए पुलिस ने हाल में तीन कार बरामद किया है। दरअसल काकादेव थाना प्रभारी के मुताबिक जाँच में सामने आया कि ब्रह्मनगर निवासी जय बाजपेई की तीनों गाड़ियाँ हैं।

उनके अनुसार गाड़ियाँ तो वह इस्तेमाल करता है लेकिन एक भी कार उसके नाम से नहीं है। इनमें से ऑडी भाजपा नेता प्रमोद विश्वकर्मा की है, जबकि फॉर्च्यूनर चकरपुर निवासी राहुल और हुंडै की वर्ना अशोक नगर निवासी कपिल सिंह के नाम है।

मामले की जाँच कर रहे हैं सीओ स्वरूप नगर अजीत सिंह चौहान कहते हैं कि तीनों गाड़ियों में नंबर प्लेट नहीं लगी है। यह गाड़ियाँ जिनके नाम से रजिस्टर्ड है उन्हें यह पता भी नहीं कि उनके नाम पर यह लग्जरी गाड़ियाँ खरीदी गई हैं।

‘पुलवामा बलिदानी मेरे पति की प्रतिमा और शहीद पार्क नहीं बनने दे रहे कॉन्ग्रेस MLA’ – पत्नी मधुबाला का गंभीर आरोप

पुलवामा हमले में वीरगति प्राप्त हुए हेमराज मीणा की पत्नी मधुबाला मीणा ने कॉन्ग्रेस के स्थानीय विधायक भरत सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला राजस्थान के कोटा सांगोद के पास स्थित गाँव विनोद कला का है।

मधुबाला का कहना है कि चूँकि उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता के कहने पर भी भाजपा उम्मीदवार ओम बिड़ला के ख़िलाफ़ चुनाव नहीं लड़ा, इसलिए अब उन्हें परेशान किया जा रहा है और उनके पति हेमराज मीणा का स्मारक बनने में अड़ंगे लगाए जा रहे हैं।

मधुबाला मीणा ने पूर्व सैनिक सेवा परिषद राजस्थान के बैनर तले आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान कॉन्ग्रेस नेता की यह पोल खोली। उन्होंने अपने पति का स्मारक और स्मृति पार्क नहीं बनने के लिए विधायक से नाराजगी जताई और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान साफ किया कि जब तक उनके पति के लिए स्मारक नहीं बनेगा, तब तक वह सरकार से लड़ती रहेंगी।

उन्होंने बताया कि ओम बिड़ला ने सांसद विकास निधि से उनके पति हेमराज मीणा के पैतृक गाँव विनोद कला में शहीद पार्क के विकास के लिए 20 लाख रुपए की राशि की अनुशंसा की थी। जिसके लिए स्थानीय ग्राम पंचायत द्वारा बाउंड्री बनाकर समतलीकरण कार्य और मिट्टी भराई का कार्य पूरा कर दिया गया था।

इसके बाद इस धनराशि से शहीद स्मृति पार्क में वीरगति प्राप्त हो चुके हेमराज की प्रतिमा लगाई जानी थी। लेकिन यह काम अभी तक संभव नहीं हो सका। जबकि जनसहयोग से प्रतिमा बनवाई जा चुकी है

मधुबाला मीणा की मानें तो कॉन्ग्रेस के विधायक उनके गाँव में पार्क और प्रतिमा निर्माण में रोड़े अटका रहे हैं। उन्होंने ही सारी जानकारी मिलने के बाद चंबल फर्टिलाइजर के अधिकारियों को बुलाकर दबाव बनाया। साथ ही यह कहा कि उनकी जानकारी के बिना क्षेत्र में कोई काम नहीं होगा।

वे कहती हैं, “पिछले लोकसभा चुनाव में विधायक भरत सिंह ने ओम बिड़ला के खिलाफ कॉन्ग्रेस से मुझे चुनाव लड़ाने के लिए प्रस्ताव भेजा था, तब मैंने चुनाव लड़ने से मना कर दिया था। इस बात से वो नाराज हो गए थे और अब शहीद स्मारक में रोड़ा अटका रहे हैं।”

मधुबाला मीणा ने यह भी बताया कि अदालत चौराहे पर उनके पति की मूर्ति लगाने के लिए बोला गया था, लेकिन कॉन्ग्रेस नेता अब वह भी नहीं होने दे रहे हैं। हेमराज की पत्नी कहती हैं कि एक बार वह कॉन्ग्रेस नेता से उनके एक कार्यक्रम में मिलने गई थी। लेकिन वहाँ बात करने की बजाय कॉन्ग्रेस नेता ने उन्हें बहुत कटुवचन बोल दिए थे।

अब पुलवामा के वीर की पत्नी की माँग है कि स्मृति पॉर्क और प्रतिमा स्थापना के अलावा सांगोद में अदालत चौराहे पर अविलंब उनके वीर पति की प्रतिमा स्थापित होनी चाहिए। इसके लिए पूर्व सैनिक सेवा परिषद ने भी इस पूरे मामले में मधुबाला का समर्थन किया है। परिषद ने भूख हड़ताल की चेतावनी देते हुए जिला सैनिक कल्याण अधिकारी को भी खरी-खरी सुनाई है।

आजतक की खबर के अनुसार, जब इस संबंध में कॉन्ग्रेस विधायक से बात हुई। तो उन्होंने अपनी सफाई में पूरे मामले से खुद को साइड कर लिया। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए कहा –

“राज्य सरकार ने वीरगति प्राप्त जवान का सम्मान किया है। जो भी मदद हो सकती थी हमने की है। उनके नाम से एक कॉलेज भी खोला है और वहाँ पर शीघ्र ही प्रतिमा भी लगवाई जाएगी। ये जिस जगह पर प्रतिमा लगाने की बात कर रहे हैं, उस जगह से हमारा कोई लेना-देना नहीं है। इस जगह प्रतिमा लगाने के लिए जिन्होंने पैसा दिया है, इसका जवाब भी वही देंगे।”

नेपाल में चीनी राजदूत की 2 कठपुतली, दोनों गुपचुप मिले: जानिए ओली और आर्मी चीफ ने क्या पकाई खिचड़ी

क्या चीन के इशारे पर नेपाल को पाकिस्तान बनाने की साजिश रची जा रही है? क्या नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के सह अध्यक्ष पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड गिरफ्तार किए जाएँगे?

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली पर इस्तीफे के लिए बढ़ते दबाव के बीच ये सारे सवाल खड़े हुए हैं। इसकी वजह ओली की आर्मी चीफ जनरल पूर्ण चंद्र थापा के साथ हुई गुपचुप बैठक है। इस बैठक की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। सूत्रों के अनुसार रविवार को दोनों की आकस्मिक बैठक हुई।

ओली और जनरल थापा दोनों चीनपरस्त बताए जाते हैं। बताया जाता है कि चीन की नेपाल में राजदूत होऊ यांगी का दोनों पर जबर्दस्त प्रभाव है। यांगी की दखल आर्मी हेडक्वार्टर से पीएमओ तक बराबर बताई जाती है।

ओली और जनरल थापा के बीच मुलाकात ऐसे वक्त में हुई है, जब सोमवार (6 जुलाई) को दोपहर 11 बजे से सत्ताधारी पार्टी की शीर्ष ईकाई स्थायी समिति की बैठक होनी है। इसी बैठक में ओली का भविष्य तय होगा।

हालॉंकि उससे पहले आम सह​मति बनाने के लिए ओली और दहल के बीच एक और मुलाकात होनी है। रविवार तक दोनों नेता आम राय बनाने में नाकामयाब रहे थे। इससे पहले शनिवार को स्थायी समिति की बैठक आखिरी क्षणों में टाल दी गई थी।

स्थायी समिति में प्रचंड का दबदबा माना जाता है। समिति के 44 सदस्य में से केवल 13 ही ओली के पक्ष में बताए जाते हैं।

ओली की कुर्सी पर यह संकट उनके भारत विरोधी एजेंडे और नेपाली जमीन पर चीनी अतिक्रमण को लेकर आँख मूॅंदने की वजह से खड़ी हुई है। पार्टी नेता उनके इस रुख का सार्वजनिक तौर पर विरोध कर रहे हैं।

पार्टी के भीतर अपने खिलाफ आवाज को दबाने के लिए ओली तमाम प्रयास कर चुके हैं। उन्होंने पार्टी के स्टूडेंट और यूथ विंग से मदद मॉंगी। विपक्षी नेपाल कॉन्ग्रेस के दरवाजे खटखटाए। अपने मंत्रियों तक को यह साफ करने को कहा कि वे किसके साथ हैं। यहॉं तक कि राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव लाए जाने को भी हवा दी, जिसे राजनीतिक दलों ने खारिज कर दिया।

ओली इस स्थिति के लिए भारत को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। लेकिन प्रचंड इसे अनुचित करार दे चुके हैं। वे ओली के इस्तीफे को लेकर अड़े हुए हैं।

लेकिन ऐसा लगता है कि ओली कुर्सी बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। वे सारी आशंकाएँ सच साबित होती दिख रही हैं जो प्रचंड पूर्व में स्थायी समिति की बैठक में जाहिर कर चुके हैं।

प्रचंड ने ओली पर निशाना साधते हुए कहा था कि वे नेपाल को पाकिस्तान नहीं बनने देंगे। उन्होंने कहा था, “हमने सुना है कि सत्ता में बने रहने के लिए पाकिस्तान, अफगानिस्तान या बांग्लादेश मॉडल पर काम चल रहा है। लेकिन इस तरह के प्रयास सफल नहीं होंगे। भ्रष्टाचार के नाम पर कोई हमें जेल में नहीं डाल सकता है। देश को सेना की मदद से चलाना आसान नहीं है और ना ही पार्टी को तोड़कर विपक्ष के साथ सरकार चलाना संभव है।”

अब जनरल थापा के साथ ओली की मुलाकात के बाद सेना के सहारे सरकार चलाए जाने के कयासों को बल मिला है। यह बात भी सामने आई थी कि ओली की कुर्सी बचाने के लिए चीन और पाकिस्तान पूरी तरह सक्रिय हैं। कहा जा रहा है कि इनके इशारे पर ओली अध्यादेश लाकर पॉलिटिकल पार्टीज ऐक्ट में बदलाव करने की फिराक में हैं। इससे उन्हें पार्टी को बाँटने में आसानी होगी।

प्रचंड की गिरफ्तारी के भी कयास लग रहे हैं। प्रचंड ने कुछ दिनों पहले ही संदेह जताया था कि ओली उन्हें भ्रष्टाचार के कथित मामले में जेल में डालने की तैयारी कर रहे हैं। तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच ओली को चीन द्वारा हनी ट्रै​पिंग में फॅंसाने की अफवाहें भी पिछले कई दिनों से चल रही है। जानकारों का मानना है कि यदि ओली ने लीक से हटकर कोई कदम नहीं उठाया तो उनकी कुर्सी जानी तय है।

बंगाल: 2 जिला-3 लाशें, TMC नेता पिंटू प्रधान समेत 15 गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना और बीरभूम जिले की पुलिस ने तीन लोगों की कथित हत्या के मामले में 15 लोगों को गिरफ्तार किया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण 24 परगना जिले के मोइपिथ-बैकुंठपुर पंचायत क्षेत्र में तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता अश्विनी मन्ना को कथित तौर पर वामपंथी पार्टी सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) के समर्थकों ने मार डाला।

इसके कुछ घंटों बाद ही सुधांशु जना नाम का एक SUCI कार्यकर्ता का शव उसके घर में लटका मिला था। SUCI की बंगाल के बाकी हिस्सों में बहुत कम मौजूदगी है, लेकिन यह उस क्षेत्र में प्रभवशाली है जहाँ हिंसा हुई। एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि हिंसा के लिए दोनों पक्षों के ग्यारह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में टीएमसी युवा मोर्चा का नेता पिंटू प्रधान भी है

वहीं जब स्थानीय टीएमसी नेताओं से गिरफ्तारियों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने यह कहते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि पुलिस अपनी ड्यूटी कर रही है।

जयनगर विधानसभा सीट के पूर्व एसयूसीआई विधायक तरुण नस्कर ने कहा कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता टीएमसी पंचायत नेताओं द्वारा भाई-भतीजावाद का विरोध कर रहे हैं, जो चक्रवात अम्फान से प्रभावित लोगों में राहत और मुआवजे के वितरण में शामिल हैं।

नस्कर ने कहा, “2018 के पंचायत चुनावों में हमने 11 ग्राम पंचायत सीटें जीतीं जबकि टीएमसी ने सात और माकपा ने सात सीटें जीतीं। लेकिन टीएमसी नेताओं ने हमारे उम्मीदवारों को धमकाया और उन्हें पक्ष बदलने के लिए मजबूर किया ताकि वे बोर्ड बना सकें। हम बोर्ड के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की योजना बना रहे थे। गुरुवार को हमने पंचायत प्रधान के खिलाफ राहत-बचाव संबंधी भ्रष्टाचार की शिकायत दर्ज कराई। इसी के चलते हमला हुआ।”

वहीं बीरभूम जिले में चार आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। खैरासोले पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने कहा, “बीरभूम जिले में, टीएमसी कार्यकर्ता शिशिर बाउरी का शव शुक्रवार रात खैरासोल इलाके में पाया गया। उनके परिवार के सदस्यों ने छह स्थानीय टीएमसी कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जिसके बाद चार आरोपितों को गिरफ्तार किया गया।”

इधर टीएमसी नेताओं ने आरोप लगाया कि हत्या के पीछे भारतीय जनता पार्टी का हाथ था। भाजपा जिलाध्यक्ष श्यामपदा मोंडल ने आरोप से इनकार किया। उन्होंने कहा, “यह सच है कि इस क्षेत्र के काफी लोगों ने हमें लोकसभा चुनाव में वोट दिया लेकिन हत्या टीएमसी में आंतरिक विवाद का नतीजा है।”

इसके अलावा उत्तर 24 परगना जिले में, बैरकपुर नगरपालिका के एक पार्षद चंपा दास को शनिवार शाम को इशापुर में अपने घर के बाहर पैर में गोली मार दी गई थी। उसने पुलिस को कुछ संदिग्ध अपराधियों के नाम बताए, लेकिन रविवार दोपहर तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई थी।

जाकिर नाइक की तारीफ वाला महेश भट्ट का वीडियो वायरल, भगोड़े इस्लामी प्रचारक को बताया था- गौरव, बेशकीमती खजाना

फ़िल्म सड़क-2 की रिलीज डेट आने के बाद सोशल मीडिया में फिल्म डायरेक्टर महेश भट्ट का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें वह भगोड़े इस्लामी प्रचारक जाकिर नाइक के साथ हैं और उसकी शान में कसीदे पढ़ रहे हैं।

वीडियो तब का है कि जब 2010 में इंग्लैंड ने जाकिर को अपने देश में एंट्री देने से इनकार कर दिया था। जाकिर नाइक पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज है। इसके अलावा नफरत फैलाने और आतंकी गतिविधियों में शामिल रहने जैसे संगीन आरोप भी हैं।

ऐसे में ज़ाकिर के लिए महेश भट्ट द्वारा की गई चाटुकारिता लोगों को रास नहीं आ रही है। वायरल हो रहे वीडियो को देख कर लोग सोशल मीडिया में भट्ट को खूब खरी-खोटी सुना रहे हैं।

ज़ाकिर नायक की तारीफ करते हुए महेश भट्ट ने कहा था, “मैं शुरुआत में डॉ. ज़ाकिर नाइक को शक्तिशाली ब्रिटिश साम्राज्य का सामना करने के लिए उनकी हिम्मत को सलाम करता हूँ। मैं उनके साहस को सलाम करता हूँ, जो उनके इमान से आता है। अगर उनके दिल में कुछ गलत होता, तो वह इन गुंडों के साथ लड़ने का जोखिम नहीं उठाते। दुनिया जानकारी नहीं सिर्फ मनोरंजन चाहती है। हम भारतीयों के लिए हमारे भाई (ज़ाकिर नाइक) राष्ट्रीय गौरव हैं, इसके साथ ही एक बेशकीमती खजाना भी।”

भट्ट ने ज़ाकिर की वकालत करते हुए अमेरिका व यूके सहित अन्य पश्चिमी देशों के विरुद्ध प्रपंच फैलाना शुरू कर दिया और जान-बूझकर इसकी तुलना गलत तरीके से पर्शियन वॉर से की थी। उनका कहना था कि नाइक को यूके में उपदेश देने की अनुमति होनी चाहिए। उन्होंने कहा- “वो डॉक्टर नाइक को हिंसा फैलाने वाला बताते हैं लेकिन इतिहास जानता है कि हिंसक कौन है।”

उन्होंने आगे लोगों से यह भी पूछा कि क्या वे उन लोगों पर विश्वास करते हैं, जो सिर्फ झूठ बोलते हैं और पैसो के बल पर समाचार पत्र, न्यूज़ चैनल को खरीद लेते हैं ताकि डॉ. नाइक जैसे व्यक्ति को सजा दी जा सके। इसके साथ भट्ट ने उस समय की भारत सरकार से भी आग्रह किया था कि वो जाकिर नाइक को न्याय दिलाए और उसके साथ खड़े हो।

बता दें महेश भट्ट को जाकिर नाइक के पीस टीवी पर अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया था। जिस पर हाल ही में समुदाय के एक समूह को संबोधित करने के लिए नफ़रत भरे भाषा के प्रसारण के लिए £ 300,000 (लगभग 2.75 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया गया था। उसी प्रोग्राम में जब एक शख्श ने महेश भट्ट से पूछा कि क्या वो (नफ़रत फ़ैलाने वाले ) ज़ाकिर नाइक को अपने किसी फिल्म में कास्ट करेंगे? इस पर भट्ट ने कहा,”ज़ाकिर साहेब की जिंदगी अपने आप में एक कमाल की कहानी है। जोकि अपने में एक फीचर फिल्म है। अब मैं ये नहीं जानता की ज़ाकिर नाइक उसमें हीरो का रोल करना चाहते हैं या नहीं। बाकि उनका रोल निभाने के लिए किसी को ढूंढ लेंगे। बस शर्त ये है कि वो इस चीज़ की हमें परमिशन दे दें। आप उनका परमिशन ले आइए, हम जरूर उनकी जिंदगी पर एक फिल्म बना सकते हैं।”

पिछले साल भारत में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने एक चौकाने वाला खुलासा किया था। सुरक्षा एजेंसियों ने आईएसआईएस से संदिग्ध तौर पर जुड़े होने की वजह से 127 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें से ज्यादातर विवादित इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक के भाषणों से प्रेरित थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रीय जाँच एजेंसी के निदेशक वाईसी मोदी ने आतंकवाद विरोधी टीमों के एक कांफ्रेंस में कहा था कि आतंकवादी और उनके हमदर्द जो आईएसआईएस में शामिल हो गए थे, वे सभी जाकिर नाइक द्वारा दिए गए भाषणों से प्रेरित थे।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया था कि बांग्लादेश स्थित आतंकवादी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) ने केरल, कर्नाटक और महाराष्ट्र में अपने आतंकी गतिविधियों को बढ़ाया है।

उल्लेखनीय है कि मुंबई हमले के एक मामले में आरोपी डेविड कोलमैन हेडली को कथित तौर पर महेश भट्ट के बेटे राहुल भट्ट का करीबी पाया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, 2008 में घातक मुंबई हमले से एक दिन पहले हेडली ने भट्ट को हमले वाले दिन यानी 26 नवंबर, 2008 को दक्षिण मुंबई नहीं जाने के लिए आगाह किया था।