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हॉस्पिटल से ₹4.21 लाख का बिल, इंश्योरेंस कंपनी ने चुकाए सिर्फ ₹1.2 लाख: मनोज इलाज की जगह ‘कैद’

हैदराबाद का यशोदा हॉस्पिटल। यशोदा हॉस्पिटल में कोरोना वायरस से संक्रमित मनोज कोठारी का इलाज। मनोज कोठारी को हॉस्पिटल से 4.21 लाख रुपए का बिल। यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से मनोज कोठारी का बीमा। लेकिन भुगतान सिर्फ 1.2 लाख रुपए का ही।

इंश्योरेंस कपनी का बहाना- कोविड-19 के इलाज के लिए तेलंगाना सरकार ने जितना प्राइस फिक्स किया है, भुगतान सिर्फ उतने का ही। नतीजा- 47 साल के मनोज कोठारी कोरोना वायरस के संक्रमण से ठीक होने के बावजूद हॉस्पिटल में 29 जून से जबरन रहने को मजबूर।

मनोज 20 जून को यशोदा हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया, “29 जून को मैं ठीक हो गया और हॉस्पिटल से डिस्चार्ज करने के लिए बोल दिया गया। लेकिन उसी 29 जून से मैं यहीं हॉस्पिटल में लगभग कैद हूँ। ना तो किसी से मिल पा रहा हूँ न ही किसी से बात करने दिया जा रहा है। अगर मुझे कुछ हो गया तो इसकी जिम्मेवारी कौन लेगा?” मनोज को बताया गया कि जब वो बाकी रकम का भुगतान करेंगे तो उन्हें डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।

सरकारी दर का लोचा

मनोज कोठारी का यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से 5 लाख रुपए का बीमा है। फिर 4.21 लाख रुपए के बिल के पेमेंट में क्या दिक्कत है? यहाँ बिल और पेमेंट में सरकारी दर का पेंच फँस गया है। इंश्योरेंस कंपनी के अनुसार तेलंगाना सरकार ने जो दर तय किया है, वो सिर्फ उसी का भुगतान करेगी। हॉस्पिटल जहाँ मनोज भर्ती हुए, उसका कहना है कि वो बाकी रकम खुद से जमा करें और घर जाएँ। बाद में इंश्योरेंस कंपनी से सेटलमेंट अमाउंट ले लें।

यशोदा हॉस्पिटल ने हालाँकि इस मुद्दे पर यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को संपर्क भी किया। अपने लेटर में हॉस्पिटल ने यह तर्क भी दिया कि कोरोना के उपचार के लिए तेलंगाना सरकार ने जो दर तय किया है, वो दर बीमार व्यक्ति के खुद के भुगतान के लिए है, न कि किसी इंश्योरेंस कंपनी द्वारा मेडिकल बीमा लिए हुए व्यक्ति के भुगतान के लिए। हॉस्पिटल के इस पत्र का जवाब अभी तक इंश्योरेंस कंपनी ने नहीं दिया है।

2 और परिवार वाले कोरोना+

मनोज कोठारी पर यह परेशानी अकेले नहीं आई है। उनके परिवार के 2 और लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। अफसोस यह कि उन दोनों का इलाज भी इसी यशोदा हॉस्पिटल में ही चल रहा है। मनोज कहते हैं, “मुझे डर है कि पेमेंट वाली बात उनके साथ भी हो सकती है। मैं तेलंगाना के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से अपील करता हूँ कि महामारी के इस दौर में इंश्योरेंस कंपनियों और बड़े कॉर्पोरेट हॉस्पिटलों में चल रही लूट पर लगाम लगाएँ।”

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी ने इस मामले पर अपनी राय रखी है। इंश्योरेंस कंपनी ने बताया कि यही दिक्कत अन्य कॉरपोरेट हॉस्पिटलों से भी रिपोर्ट की गई है। इसका कारण कंपनी ने यह बताया कि तेलंगाना सरकार ने कोविड-19 के इलाज के लिए सामान्य कॉरपोरेट दरों से 70-80 प्रतिशत की कम दरों पर हॉस्पिटल सुविधाओं को तय कर दिया है। इससे कॉरपोरेट हॉस्पिटल और इंश्योरेंस कंपनियों के बीच भुगतान को लेकर समस्या आ रही है।

इंश्योरेंस, प्रीमियम और सरदर्द

मनोज कोठरी एक नाम हैं। इनकी जगह रमेश, जॉर्ज या संगीता भी हो सकते हैं। ये 5 लाख रुपए का इंश्योरेंस लेते हैं। कमाई में से कुछ बचा कर उसका प्रीमियम भी भरते हैं। यह सोच कर कि कुछ होगा तो हॉस्पिटल और इंश्योरेंस कंपनी बचा लेंगे। लेकिन कागजों में या सरकारी पेंच में या नियम व शर्तें लागू जैसी चीजें धरातल पर इनकी जिंदगी आसान नहीं बल्कि तकलीफदेह बना देती है।

मनोज ने इसके लिए कानूनी रास्ते पर चलने की ठानी। उन्होंने इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। खुद पैसे देकर हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने के रास्ते को उन्होंने इनकार कर दिया। एक तरह से सत्याग्रह वाला रास्ता… कॉर्पोरेट से लड़ाई का शायद और कोई रास्ता भी नहीं!

मनाली से गुजर रहे भारतीय सैनिकों का तिब्बती लोगों ने किया गर्मजोशी से स्वागत, देखें Video

चीन से गतिरोध के बीच भारत को वैश्विक स्तर पर समर्थन मिलने के साथ ही पड़ोसी देशों के नागरिकों में भी भारत सरकार और उसकी सेना के प्रति जो सम्मान है, उसका एक नजारा हाल ही में देखने को मिला। तिब्बत के लोगों ने मनाली, हिमाचल प्रदेश से गुजर रहे हुए भारतीय सेना के काफिले का गर्मजोशी से स्वागत किया।

लोगों ने रास्ते के दोनों तरफ खड़े होकर सफेद स्कार्फ लहराकर भारतीय सैनिकों को शुभकामनाएँ दीं। इस दौरान तिब्बती समुदाय के लोगों ने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज और तिब्बती ध्वज के साथ उनका अभिवादन किया। लोगों ने भारतीय सेना के स्वागत में इत्र और हवन के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले सामग्री का इस्तेमाल कर धुआँ किया और उनके लिए प्रार्थना की। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है।

बता दें कि तिब्बत भी चीन के ‘विस्तारवादी नीति’ से काफी परेशान है। पिछले दिनों केंद्रीय तिब्बत प्रशासन (CTA) तिब्बत में ‘सांस्कृतिक नरसंहार’ का आरोप लगाते हुए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) से अनुरोध किया था कि वह चीन द्वारा तिब्बत और उसके तहत आने वाले अन्य क्षेत्रों में किए जा रहे ‘मानवाधिकार उल्लंघनों’ पर एक विशेष सत्र बुलाए।

उल्लेखनीय है कि भारत और चीनी सेना के बीच बीते दिनों हुए हिंसक मुठभेड़ के बाद तिब्बत की निर्वासित सरकार के पीएम लोबसंग सांगेय ने कहा था कि गलवान वैली पर चीन का अधिकार नहीं है। अगर चीनी सरकार ऐसा दावा कर रही है तो ये गलत है।

उन्होंने कहा था कि गलवान नाम ही लद्दाख का दिया हुआ है, फिर ऐसे दावों का कोई मतलब नहीं रह जाता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि अहिंसा भारत की परंपरा है और यहाँ इसका पालन होता है। वहीं, चीन अहिंसा की बातें तो करता है, लेकिन पालन नहीं करता। वो हिंसा का पालन करता है। इसका सबूत तिब्बत है।

1 दिन के मॉंगे ₹1.15 लाख, बना रखा है बंधक: कोरोना संक्रमित डॉक्टर ने निजी अस्पताल पर लगाए आरोप

हैदराबाद से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक कोरोना संक्रमित महिला ने आरोप लगाया है कि एक निजी अस्पताल ने उन्हें एक दिन के लिए 1.15 लाख रुपए का बिल थमा दिया। इतना भुगतान नहीं करने पर उन्हें बंधक बनाकर रखा गया है।

आरोप लगाने वाली महिला खुद डॉक्टर हैं। वे फीवर हॉस्पिटल में बतौर सर्जन कार्यरत हैं। एक सेल्फी वीडियो में उन्होंने यह आरोप लगाए हैं। यह वीडियो वायरल हो रहा है।

वीडियो में उन्होंने दावा किया है कि उनका तरीके से उपचार नहीं किया गया और उन्हें डिस्चार्ज नहीं किया जा रहा है। वे कहती हैं, “कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद घर पर ही अपना इलाज कर रही थीं और होम क्वारंटाइन में थीं। 1 जुलाई को आधी रात सॉंस की समस्या के बाद वे प्राइवेट अस्पताल में भर्ती हुईं।”

वे कहती हैं, “मैं खुद कोरोना वारियर हूँ और ये लोग एक दिन के लिए मुझसे 1.15 लाख रुपए चार्ज कर रहे हैं। मैं डायबिटिक हूँ फिर भी मुझे यहाँ सही उपचार नहीं मिल रहा है। यह लोग मुझे पर झूठे आरोप भी लगा रहे हैं। मैं मुश्किल में हूँ, मैंने 40 हज़ार रुपए दिए हैं फिर भी इन्होंने मुझे बंद करके रखा है।” उन्होंने इस बाबत पुलिस से भी शिकायत भी दर्ज कराई है।

वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए फीवर हॉस्पिटल के मुखिया डॉक्टर के शंकर ने कहा, “उन्हें पहले ही बताया गया था कि सरकार ने कोरोना वायरस से प्रभावित होने वाले फ्रंट लाइन कोरोना वारियर्स के लिए अलग से इंतजाम किए हैं। लेकिन उन्होंने इसकी जानकारी अपने सीनियर अधिकारियों को दी बिना ही खुद को एक निजी अस्पताल में भर्ती करा लिया।”

उन्हें घटना की जानकारी तब हुई जब महिला का वीडियो एक स्थानीय समाचार चैनल पर दिखाया जा रहा था। इसके ठीक बाद उन्होंने वहाँ के रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर से कहा कि वह जल्द अस्पताल जाकर भुगतान सम्बन्धी विवाद को खुद देखें और महिला को डिस्चार्ज कराएँ। अस्पताल पहुँच कर उन्हें पता चला कि महिला पहले डिस्चार्ज की जा चुकी हैं। फिलहाल आइसोलेशन में है और उनकी स्थिति सामान्य है। शंकर ने यह भी बताया कि वह ड्यूटी के दौरान कोरोना से प्रभावित नहीं हुई थीं।       

उत्तराखंड: रात में 15 साल की बच्ची को घर से उठाया, जुनैद और सुहैब ने किया दुष्कर्म

उत्तराखंड के लक्सर कोतवाली थाना क्षेत्र के एक गाँव से नाबालिग छात्रा के साथ दो सगे भाइयों द्वारा दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार की ओर से शिकायत मिलने के बाद लक्सर पुलिस ने आरोपित जुनैद और सुहैब के खिलाफ पॉस्को एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। आरोपित एक दारोगा के सगे भाई बताए जा रहे हैं।

शुक्रवार (03 जुलाई, 2020) को पीड़िता को लक्सर कोतवाली लेकर पहुँचे परिजनों ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनकी नाबालिग बेटी दसवीं की छात्रा है। बीती 1 जुलाई की रात्रि को 15 वर्षीय छात्रा अपने घर पर सो रही थी। तभी पड़ोस का युवक आया और लड़की का मुँह दबाकर उसे जबरन अपने साथ ले गया।

आरोप है कि दोनों ने बारी-बारी से किशोरी के साथ दुष्कर्म किया और साथ ही किसी को बताने पर उसे परिवार सहित जान से मारने की धमकी दी। बदहवास हालत में घर पहुँची छात्रा को देख परिजनों के होश उड़ गए। छात्रा ने पूरी बात परिजनों को बताई और फिर परिजन उसे लेकर लक्सर कोतवाली पहुँच गए।

पीड़िता के गाँव पहुँचकर सीओ ने मामले की जाँच की है। फिलहाल पीड़ित परिजनों की तहरीर के आधार पर लक्सर पुलिस ने आरोपित जुनैद और सुहैब के खिलाफ में मुकदमा दर्ज कर लिया है।

खबर के मुताबिक आरोपित उत्तराखंड पुलिस में तैनात दारोगा के सगे भाई हैं। इस मामले की जाँच कोतवाली की महिला दारोगा को सौंपी गई है। कोतवाल नेगी ने बताया कि मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट मिलने के बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इससे पहले उत्तर प्रदेश के इलिया थाना क्षेत्र में पुलिस ने 7 साल की बच्ची के साथ रेप का प्रयास करने के आरोप में सद्दाम नाम के युवक को गिरफ्तार किया था। वहीं मामला दो समुदायों से जुड़ा होने के कारण गाँव में तनाव की स्थिति बन गई थी। इतना ही नहीं सुरक्षा-व्यवस्था बनाए रखने के लिए गाँव में पुलिस बल की तैनाती की गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 13 जून, 2020 की सुबह 8 बजे गाँव के ही 22 वर्षीय सद्दाम ने 7 साल की मासूम के साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया था। बाद में मौके पर पहुँची पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और उसके खिलाफ़ आईपीसी की धारा 363, 376, 511, 153ए तथा 5/6 पास्को एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था।

उस रात विकास दुबे के घर दबिश देने गई पुलिस के साथ क्या-क्या हुआ: घायल SO ने सब कुछ बताया

कानपुर के चौबेपुर के बिकरू गाँव में दबिश देने गई पुलिस टीम पर हमला कर आठ पुलिसकर्मियों की हत्या का मुख्य आरोपित विकास दुबे अभी तक फरार है। उसकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। इसके साथ ही सरकार विकास दुबे को प्रदेश तथा बाहर संरक्षण देने वाले नेता तथा अफसरों का भी कनेक्शन तलाश रही है। 

इस बीच बिठूर थाने के एसओ कौशलेंद्र प्रताप सिंह ने उस रात की पूरी कहानी बताई। उन्होंंने बताया कि विकास दुबे के घर दबिश देने गई पुलिस टीम के साथ क्या हुआ था।

एसओ कौशलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि उस रात पुलिस एनकाउंटर के इरादे से नहीं गई थी और न ही उनके पास पर्याप्त मात्रा में असलहे थे। लेकिन विकास दुबे और उसका गैंग पूरी तैयारी में था।

न्यूज़ 18 की खबर के मुताबिक, घायल एसओ कौशलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि 2 जुलाई की रात करीब 12 बजे दबिश देने की तैयारी थी। उनके साथ उनकी टीम थी, साथ ही चौबेपुर थाने के एसओ विनय तिवारी माय फोर्स व एक अन्य थाने की फोर्स भी थी। इसके अलावा सीओ भी थे। सभी लोग करीब साढ़े 12 बजे विकास के घर से करीब 200 मीटर की दूरी पर गाड़ी से उतरना पड़ा। रास्ते में जेसीबी को इस तरह से खड़ा किया गया था कि कोई गाड़ी न निकल सके। पैदल भी एक बार में एक ही आदमी निकल सके।

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि वहाँ पर पर्याप्त मात्रा में रोशनी न होने की वजह से वो लोग विकास दुबे की गैंग को नहीं देख पा रहे थे, मगर वो लोग उनको अच्छी तरह से देख रहे थे। उन्होंने बताया कि तीन तरफ से फायरिंग हो रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे एक ही समय में 15 लोग गोली चला रहे हों। उन्होंने आरोपितों के पास सेमी ऑटोमेटिक वेपन्स होने की भी आशंका जताई। हालाँकि अँधेरे की वजह से कुछ भी स्पष्ट रूप से नहीं दिखने की बात कही।

बता दें कि पुलिस ने विकास दुबे का किलेनुमा मकान जमींदोज कर दिया है। कानपुर रेंज के आईजी मोहित अग्रवाल ने बताया कि विकास ने घर की दीवारों में हथियार और कारतूस चुनवा रखे थे। आईजी के अनुसार सूचना मिली थी कि विकास ने अपने घर में भारी मात्रा में असलहे छिपा रखे हैं। पिस्टल जैसे हथियार दीवारों में चुनवाकर छुपाने की जानकारी मिली थी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो कोई भी पुलिसकर्मी दोषी पाया जाएगा, उस पर हत्या का मुकदमा चलेगा।

बताया जा रहा है कि विकास दुबे भेष बदलने में माहिर है। इसके अलावा उसके राजस्थान के एक नेता के साथ बेहद अच्छे संबंध की भी बात कही जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शातिर गैंगस्टर विकास अपने साथ मोबाइल फोन भी नहीं रखता।

आईजी मोहित अग्रवाल ने कहा है कि जल्द ही विकास पुलिस के शिकंजे में होगा। यह किसी आतंकी घटना से कम नहीं है। विकास के साथ वही सुलूक होगा जो एक आतंकवादी के साथ होता है।

पुलिस ने विकास दुबे के सहयोगी दयाशंकर अग्निहोत्री ने गिरफ्तारी के बाद बताया कि विकास दुबे को पुलिस स्टेशन से एक फोन आया था। इसके बाद उसने लगभग 25-30 लोगों को बुलाया। उसने पुलिसकर्मियों पर गोलियाँ चलाईं। उसने कहा कि मुठभेड़ के समय वो घर के अंदर बंद था, इसलिए उसने कुछ भी नहीं देखा।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद आपराधिक नेटवर्क को जड़ से ख़त्म करने के लिए विकास दुबे को संरक्षण और समर्थन देने वाले हर उस व्यक्ति की सूची बनाई जा रही है, जिसने उसकी मदद की है। विकास दुबे से जुड़े सारे नेताओं की लिस्ट तैयार की जा रही है, चाहे वो किसी भी राजनीतिक पार्टी में क्यों न हों। इस काम में प्रशासनिक तंत्र के साथ-साथ ख़ुफ़िया विभाग भी लगा हुआ है। यहाँ तक कि भाजपा के भी जिन नेताओं के विकास दुबे से सम्बन्ध हैं, उनका भी ब्यौरा जुटा कर आगे की कार्रवाई तैयार की जा रही है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार बदमाशों ने DSP देवेंद्र मिश्रा पर सिर्फ गोली ही नहीं चलाई, बल्कि उनका सर और पाँव भी कुल्हाड़ी से काट दिया था, उनकी लाश को क्षत-विक्षत भी किया था। वहीं एक सब इंस्पेक्टर को प्वाइंट ब्लैक रेंज से गोलियों से छलनी कर दिया। एक कॉन्स्टेबल पर एके-47 से गोलियों की बौछार की गई थी। विकास दुबे के सभी आदमी आधुनिक हथियारों से लैस थे।

अपने रुख पर कायम प्रचंड, जनता भी आक्रोशित: भारत विरोधी एजेंडे से फँसे नेपाल के चीनपरस्त PM ओली

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने चीन के इशारों पर नाचते हुए भारत-विरोधी बयान तो दे दिया, लेकिन अब अपनी ही पार्टी में मचे घमासान से उनकी कुर्सी लगभग जाने ही वाली है। नेपाल में चरम पर पहुँचे राजनीतिक उठापठकत के बीच कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेतागण मिल कर जल्द ही ओली के खिलाफ निर्णय ले सकते हैं। हालाँकि, ओली ने इसके लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया था।

केपी शर्मा ओली ने अंतिम चाल ये चली कि उन्होंने अपने विरोधी नेताओं पर राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी को अपदस्थ करने के लिए महाभियोग लाने की बात कह दी। लेकिन, प्रचंड ने राष्ट्रपति से मुलाकात कर इन चर्चाओं को भी विराम दे दिया। ‘शीतल निवास’ में हुई इस मुलाक़ात के बाद प्रचंड प्रधानमंत्री आवास भी पहुँचे लेकिन पीएम ओली के साथ उनकी बैठक बेनतीजा रही। आधे घंटे तक चली इस बैठक के बाद अब सोमवार (जुलाई 6) को फिर एक बैठक होगी।

कोरोना वायरस से निपटने में ओली की सरकार बुरी तरह विफल रही है। देश में अस्थिरता का माहौल है। भारतीय इलाक़ों को नेपाल के नक़्शे में शामिल कर नेपाल के पीएम ओली अपने देश में राष्ट्रवाद के तले अपनी चीनपरस्ती के खिलाफ उठते आवाज़ को दबाना चाहते थे, लेकिन ये चाल भी चल नहीं पाई। कुशासन, भ्रष्टाचार के कारण जनता भी त्रस्त है। कोविड-19 मैनेजमेंट फेल रहा है।

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की माँग है कि केपी शर्मा ओली न सिर्फ प्रधानमंत्री का पद छोड़ें, बल्कि पार्टी के अध्यक्ष के पद को भी अलविदा कहें। परेशान ओली ने अपने मंत्रियों से कहा है कि वो सब अपना-अपना पक्ष चुन लें और बता दें कि वो उनकी साइड हैं या उनके विरोधी खेमे की तरफ हैं। साथ ही उन्होंने ‘मौजूदा परिस्थितियों’ को देखते हुए कोई बड़ा क़दम उठाने की बात भी कही है। गुरुवार को मुख्य विपक्षी दल नेपाली कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा ने भी उनसे मुलाक़ात की।

इससे लेकर हाँ की कॉन्ग्रेस में जम कर विवाद चल रहा है और पार्टी नेता उनसे इस मुलाक़ात को लेकर स्पष्टीकरण देने को कह रहे हैं। तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों पुष्प कमल दहल, माधव नेपाल और झालानाथ खनल ने राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी से मिलकर ये स्पष्ट कर दिया है कि उनका राष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग लाने का कोई इरादा नहीं है। उनकी मुलाक़ात 45 मिनट चली, जहाँ इन नेताओं ने महाभियोग की बात को दुष्प्रचार बताया।

इससे पहले ओली के राजनीतिक भविष्य पर निर्णय करने के लिए देश की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की स्थायी समिति की महत्वपूर्ण बैठक सोमवार (जुलाई 6, 2020) तक टाल दी गई थी। पार्टी के शीर्ष नेता ओली के काम करने के तरीकों को निरंकुश बता रहे हैं।

नेपाल के भारत विरोधी एजेंडे के लिए होऊ यांगी जिम्मेदार बताई जा रही हैं। होऊ यांगी नेपाल में चीन की राजदूत हैं। पहले नेपाल के नए नक्शे के पीछे उनका ही हाथ बताया गया था। अब कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि होऊ यांगी की दखल नेपाल के आर्मी हेडक्वार्टर से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक है।

काली नागिन के काटने से जैसे मौत होती है उसी तरह निर्मला सीतारमण के कारण लोग मर रहे: TMC सांसद कल्याण बनर्जी

पश्चिम बंगाल में टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लेकर विवादित बयान दिया है। टीएमसी नेता ने निर्मला सीतारमण की तुलना ‘काली नागिन’ से की है। बनर्जी ने सीतारमण पर अर्थव्यवस्था को तबाह करने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि निर्मला सीतारमण देश की सबसे खराब वित्त मंत्री हैं।

TMC नेता कल्याण बनर्जी ने शनिवार (जुलाई 4, 2020) को अपने संसदीय क्षेत्र बांकुड़ा में एक रैली के दौरान कहा, ”काली नागिन (विषैला साँप) के काटने से जिस तरह लोगों की मौत होती है उसी तरह निर्मला सीतारमण के कारण लोग मर रहे हैं। उसने अर्थव्यवस्था को नष्ट कर दिया है। उसे शर्म आनी चाहिए और अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। वह सबसे खराब वित्त मंत्री है।”

इसके अलावा पीएम पर निशाना साधते हुए कल्याण बनर्जी ने कहा, “यह नरेंद्र मोदी 2019 से पहले यहाँ आए थे। उन्होंने वादा किया था कि बेहतर भारत बनाएँगे। हाँ, उन्होंने अपना वादा निभाया। जीडीपी ग्रोथ गिरकर 1 फीसदी हो गई है। नरेंद्र मोदी और उनकी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की जय हो।”

टीएमसी ने यह रैली पेट्रो कीमतों में हुई बढ़ोत्तरी और रेलवे के निजीकरण के विरोध में आयोजित की थी। टीएमसी नेता के इस बयान पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। बीजेपी ने कहा है कि ममता बनर्जी का अपनी पार्टी के नेताओं पर नियंत्रण नहीं है, जो निराशा से ‘बकवास’ कर रहे हैं। राज्य के पार्टी अध्यक्ष दिलीप घोष ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने पार्टी के नेताओं पर अपनी पकड़ खो दी है। 

उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा, “टीएमसी में ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार फैला है। वे आंतरिक झगड़े से भयभीत हो गई हैं और उनमें से कई सत्ताधारी पार्टी में व्याप्त स्थिति से ध्यान हटाने के लिए बेहूदा टिप्पणियाँ कर रहे हैं। हम इस तरह की टिप्पणियों को ज्यादा महत्व नहीं देते। वे इस तरह की बकवास हताशा में कर रहे हैं।”

‘अल्लाह ने अपने बच्चों को तनहा नहीं छोड़ा’: श्रीकृष्ण मंदिर में मलिक ने की तोड़फोड़, ‘हीरो’ बता रहे पाकिस्तानी

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में कट्टरपंथियों के दबाव में प्रशासन ने श्रीकृष्ण मंदिर के निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है। अब यहॉं तोड़फोड़ किए जाने की खबर आई है। इस ​हरकत को अंजाम देने वाला का नाम मलिक शनी अवन बताया जा रहा।

इस्लामाबाद के लोग इस घटना के बाद उसे ‘हीरो’ ​की तरह पेश कर रहे। उसकी जम कर प्रशंसा की जा रही है।

सोशल मीडिया में पाकिस्तानी उसकी तारीफ कर रहे हैं, जिससे वहाँ पहले से ही डर के साए में जी रहे हिन्दुओं के लिए माहौल और ज्यादा असुरक्षित हो गया है। मलिक शनी ने न सिर्फ मंदिर की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया बल्कि ऐसा करते हुए वीडियो भी शूट किया।

इस वीडियो में वह कुछ लोगों के साथ मंदिर कंस्ट्रक्शन साइट पर जाकर दिखाता है कि काम रोक दिया गया है और वो इस पर ख़ुशी भी जताता है।

एक अन्य वीडियो में ये शख्स मंदिर के निर्माण के लिए खड़ी की गई दीवारों को तोड़ता हुआ दिखता है और साथ ही उसने ईंटों को भी उठा-उठा कर इधर-उधर फेंका। एक अन्य वीडियो में भी वो मंदिर में तोड़फोड़ मचाता दिख रहा है और बैकग्राउंड में ‘अल्लाह ने अपने बच्चों को तनहा नहीं छोड़ा’ गाना बज रहा है। इस व्यक्ति की इस हरकत के बाद पूरे पाकिस्तान में हिन्दू-विरोधी माहौल को और हवा मिल रही है।

पाकिस्तान में लोग सोशल मीडिया पर ‘एक दूसरे से कह रहे हैं कि वे इस्लामाबाद स्थित निर्माणाधीन श्रीकृष्ण मंदिर वाले स्थल पर पहुँचें और मंदिर को ध्वस्त कर दें। कई लोग वीडियो बना कर भी ऐसी अपील कर रहे हैं।

इससे अल्पसंख्यक हिन्दू समुदाय डरा हुआ है। मौलाना इस मंदिर को लेकर पहले ही फतवा जारी कर चुके हैं।

वहीं अगर मलिक शनी अवन के बारे में बात करें तो उसके फेसबुक प्रोफाइल के अनुसार, वो पाकिस्तान में ’99 न्यूज़ HD प्लस’ में कार्यरत है। उसने अल्लामा इक़बाल ओपन यूनिवर्सिटी, इस्लामाबाद से पढ़ाई की है। उसने लिखा है कि वो फिलहाल पाकिस्तान के रावलपिंडी में रह रहा है। उसने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट्स कर गर्व से दावा भी किया कि उसने मंदिर में तोड़फोड़ मचाई है।

बता दें कि इस्लामी कट्टरपंथियों ने फतवा जारी करते हुए कहा था कि सरकार ज्यादा से ज्यादा अल्पसंख्यक समुदाय के धार्मिक स्थलों की मरम्मत या जीर्णोद्धार के लिए सरकारी कोष से रुपए खर्च कर सकती है। सरकारी धनराशि का प्रयोग दूसरे धर्म के नए धार्मिक स्थलों के निर्माण में कतई नहीं किया जा सकता है।

इस्लामी कट्टरवादियों के विरोध के आगे झुकते हुए इस्लामाबाद में कैपिटल डेवलपमेंट अथॉरिटी (CDA) ने शुक्रवार (3 जुलाई, 2020) को कानून का हवाला देते हुए कृष्णा मंदिर के निर्माण में बनने वाली चारदीवारी का कार्य रोक दिया था। पाकिस्‍तान सरकार ने अब मंदिर के संबंध में इस्‍लामिक आइडियॉलजी काउंसिल से सलाह लेने का फैसला किया है। मजहबी मामलों के मंत्रालय ने नए मंदिर के निर्माण में उनकी कोई भूमिका नहीं है।

रोती-बिलखती रही अम्मी, आतंकी बेटे ने नहीं किया सरेंडर, सुरक्षा बलों पर करता रहा फायरिंग, मारा गया

दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम जिले में शनिवार (04 जुलाई, 2020) दोपहर को आतंकियों के साथ शुरू हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने मकान में छिपे दो आतंकियों को ढेर कर दिया। इस दौरान एक माँ अपने आतंकी बेटे से सुरक्षाबलों से सामने रो-रोकर समर्पण करने की गुहार लगाती रही, लेकिन इसके बाद भी आतंकी बेटा सेना के जवानों पर गोलियाँ चलाता रहा। इस पर सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए आतंकी को ढेर कर दिया।

जानकारी के मुताबिक कुलगाम के आरा इलाके में मौजूद एक मकान में छिपे दो आतंकियों को सूचना के बाद सेना के जवानों ने घेर लिया था। इस बीच एक आतंकी ने फायरिंग करते हुए मकान से निकलकर भागने की कोशिश की तो सुरक्षाबलों ने उसे ढेर कर दिया। वहीं दूसरा आतंकी मकान के अंदर से ही फायरिंग करता रहा। सुरक्षाबलों ने आतंकी की माँ और उसके परिवार के अन्य सदस्यों को मौके पर बुलाकर उसे समर्पण का मौका दिया। 

मुठभेड़ स्थल पर पहुँचकर माँ ने आतंकी बेटे को समझाने की बहुत कोशिशें की। वह बेटे के सामने रोती-गिड़गिड़ाती रही, लेकिन उस पर कोई असर नहीं हुआ और उसने परिवारवालों की समर्पण की गुहार ठुकरा दी। काफी देर तक गुहार लगाने के बाद भी आतंकी समर्पण को तैयार नहीं हुआ। इसके बाद सुरक्षबलों ने उसे भी मुठभेड़ में मौत के घाट उतार दिया।

हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े दोनों स्थानीय आतंकियों से सेना ने दो एके-47 राइफल, गोलियाँ और अन्य सामग्री बरामद की है। साथ ही ऑपरेशन में घायल हुए जेसीओ समेत तीन सेना के जवानों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

कुलगाम के पुलिस अधीक्षक गुरिंदरपाल सिंह के मुताबिक आरा इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की सूचना पर पुलिस, सीआरपीएफ और सेना ने घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया था। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन में जम्मू और कश्मीर पुलिस के जवान शामिल थे।

आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर के मलबाग क्षेत्र में गुरुवार (2 जुलाई, 2020) देर रात आतंकियों के साथ सुरक्षाबलों की मुठभेड़ हुई थी। इसमें सुरक्षाबलों ने एक आतंकी को ढेर कर दिया था। वहीं मुठभेड़ में घायल दो सीआरपीएफ जवानों में से एक वीरगति को प्राप्त हो गए थे। यह मुठभेड़ कश्मीर विश्वविद्यालय के पीछे के क्षेत्र में हुई थी।

पुलिस के अनुसार एनकाउंटर में मारा गया आतंकी पिछले हफ्ते जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) के एक जवान और 6 साल के बच्चे को मारने वाला जाहिद दास था, जोकि अनंतनाग में सुरक्षाबलों द्वारा घेरे जाने के बाद फरार होने में कामयाब हो गया था।

गौरतलब है कि पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर पुलिस ने डोडा जिले को आतंकियों से पूरी तरह मुक्त घोषित किया था। वहीं इस वर्ष जनवरी से जून तक 118 आतंकी मारे जा चुके हैं। इतना ही नहीं जून महीने में ही सुरक्षाबलों ने 51 आतंकियों को मौत के घाट उतारा है।

CARA को बनाया ईसाई मिशनरियों का अड्डा, विदेश भेजे बच्चे: दीपक कुमार को स्मृति ईरानी ने दिखाया बाहर का रास्ता

केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण अथवा ‘सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्सेज अथॉरिटी’ (CARA) के कामकाज पर सवालिया निशान लगे हैं, क्योंकि इसमें सीईओ दीपक कुमार द्वारा ईसाई मिशनरियों के पैठ बनाने की बात पता चली है। ये संस्था केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अंतर्गत आता है।

इस संस्था का काम है कि देश भर में अनाथ बच्चों को गोद लिए-दिए जाने (एडॉप्शन) पर फ़ैसला लेना। बताया गया है कि हर वर्ष 4000 के क़रीब बच्चे गोद लिए जाते हैं और इनमें से अधिकतर विदेश जाने वालों की संख्या है। इस पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग यही ताक़तवर निकाय करता है।

सूचना मिली है कि पिछले 4 सालों में विदेश भेजे जाने वाले बच्चों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है। मंत्रालय में तैनात संयुक्त सचिव आस्था खतवानी से कारा का प्रभार वापस ले लिया गया है। CARA के सीईओ व सेक्रेट्री दीपक कुमार को भी पद से हटाने का फैसला हुआ। दीपक कुमार के खिलाफ कई तरह की अनियमितताएँ सामने आई थीं, जिसके बाद ये निर्णय लिया गया।

कहा जा रहा है कि दीपक कुमार के कार्यकाल के दौरान दुनियाभर में भारत से गोद लिए गए बच्चों को लेकर कई शिकायतें सामने आ रही थीं। दरअसल, ये पूरा मामला जबरन ईसाई धर्मान्तरण से जुड़ा है। बच्चों को गोद लेकर ईसाई बना दिए जाने की कई शिकायतें सामने आई थीं। इसी कारण दीपक कुमार के विरुद्ध क़दम उठाए गए। अब सवाल उठता है कि आखिर ईसाई मिशनरियों की इन करतूतों के पीछे लोगों का ध्यान क्यों नहीं गया?

सूत्रों के अनुसार, जब से दीपक कुमार ने कारा (CARA) के सीईओ का प्रभार सँभाला, तभी से नियमों को ताक पर रख कर बच्चों को गोद दिए जाने की प्रक्रिया अपनाई जाने लगी। सूत्रों का ये भी कहना है कि दीपक कुमार ने अनियमितताएँ बरतते हुए अपने करीबियों को CARA में बिठाया और इसका एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह संचालन शुरू कर दिया। मंत्रालय को काफी शिकायतें मिलीं कि एडॉप्शन की प्रक्रिया में संविदा कर्मचारियों द्वारा रक़म की वसूली की जा रही है।

इसके बाद महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इस सम्बन्ध में जाँच की और मामले को संज्ञान में लिया। दीपक कुमार को हटाने जाने के बाद कारा में तैनात कई अन्य अधिकारियों पर भी गाज गिरना तय मना जा रहा है। उधर आस्था की जगह अनुराधा चगति को कारा का प्रभार सौंपा गया है। अब इस मामले में मंत्रालय सख्त कार्रवाई करने की तैयारी में जुट गया है।

हमारे सूत्रों के अनुसार, दीपक कुमार के बारे में मंत्रालय को जो शिकायतें मिली हैं, उनमें विदेशी संस्थाओं से साँठगाँठ कर बच्चों का विदेश में एडॉप्शन कराने का रास्ता साफ़ करने का मामला सबसे प्रमुख है। विदेशी एजेंसियों से मिलीभगत कर के बच्चों को गोद दिए जाने के इस गोरखधंधे में कई भारतीय संस्थाएँ भी शामिल हो सकती हैं। कई बीमार दम्पतियों को भी बच्चे गोद दिए गए, जिससे इन आरोपों को बल मिला है। आइए, आगे बढ़ने से पहले एडॉप्शन के आँकड़ों पर एक नज़र डालते हैं:

वर्ष देश में एडॉप्शन विदेश में एडॉप्शन
2010 5693628
20115964629
2012-13 4694308
2013-14 3924430
2014-15 3988374
2015-16 3011666
2016-17 3210578
2017-18 3276651
2018-19 3374653
देश और विदेश के एडॉप्शन के आँकड़े

दीपक कुमार के अंतर्गत कारा में चल रहे नियम-विरोधी कामकाज को लेकर कुछ राज्यों ने पहले ही असंतोष जताया था। इसके अलावा कुछ मामलों में मुंबई व जबलपुर की हाईकोर्ट द्वारा उन्हें फटकार भी लगाया गया था। बावजूद इसके वे पद पर बने रहने में कामयाब रहे थे। अब जब उन्हें निकाल बाहर किया गया है, निष्पक्ष जाँच में इसकी सारी कड़ियाँ सामने आने की उम्मीद है।

दरअसल, दीपक कुमार को इतना बड़ा पद दिए जाने के पीछे भी कुछ बड़े अधिकारियों की मिलीभगत थी। सूत्रों के अनुसार, एक साजिश के तहत 2016 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के ही कुछ बड़े अधिकारी उन्हें लेकर आए थे। वो आर्मी के सिग्नल कोर में फाइबर इंजिनियर थे और उनकी शिक्षा-दीक्षा भी इंजीनियरिंग में ही हुई है। CARA के कामकाज का जो तरीका है, उसे लेकर उन्हें न कोई अनुभव था और ही कोई ज्ञान।

नियमानुसार, ऐसी पद पर आसीन होने से पहले मानविकी विषय में डिग्रीधारी होना आवश्यक है। इस तरह उनके कामकाज के साथ-साथ उनकी नियुक्ति भी जाँच के घेरे में है। कई अधिकारियों में तो उनकी रंगमिजाजी के किस्से भी चर्चा में रहते हैं। मंत्रालय के उच्चाधिकारियों को उनके सोशल मीडिया एकाउंट्स पर भी कुछ आपत्तिजनक कंटेंट्स मिले, जिसका उन्हें हटाए जाने में अहम रोल है।

हमारे सूत्रों का ये भी कहना है कि मनमाफिक कामकाज की प्रक्रिया अपनाने के लिए दीपक कुमार ने कारा के कई नियमों को बदल भी दिया था। उन्होंने अपने सम्बन्धियों को कारा में घुसाने के लिए भी बड़ी चालाकियाँ की। सबसे पहले तो उन्हें चपरासी के रूप में नियुक्ति दी और फिर धीरे-धीरे उनको कारा में एडवाइजर बना कर मोटी रकम देनी शुरू कर दी। भर्ती किए गए संविदाकर्मी फिर विदेशी एजेंसियों के साथ साँठगाँठ कर ख़ुद भी कमाई करने लगे।

चूँकि ये मामल अनाथ बच्चों से जुड़ा हुआ है, इसीलिए जाँच में भी पूरी सावधानी और गोपनीयता बरती जा रही है क्योंकि बच्चों की पहचान बाहर नहीं आनी चाहिए। मंत्रालय के कुछ अधिकारी तो दीपक कुमार का कार्यकाल आगे बढ़ाए जाने के भी हिमायती थे। लेकिन, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दीपक कुमार को हटा कर मंत्रालय में तैनात मनोज कुमार को अस्थायी रूप से कारा का प्रभार सौंपा है।

ये तो थी निकाय में हुई गड़बड़ियों की बात। अब आते हैं CARA में ईसाई मिशनरियों और क्रिश्चियन संस्थाओं की पैठ पर क्योंकि पूरे मामले की जड़ यही है। दीपक कुमार द्वारा इसे तानाशाही तरीके से संचालित किया जा रहा था। उन्होंने जिन करीबियों की नियुक्ति की, उनमें भी कुछ सेना से थे। किसी भी पद के लिए योग्यता का ध्यान नहीं रखा गया। क्रिश्चियन संस्थाओं के इशारे पर भी कुछ नियुक्तियाँ हुईं।

उनके दो भतीजे हैं अमन और शिशिर। इन दोनों को पहले तीन महीने तक एमटीएस के पद पर 10 हजार रुपए के मासिक वेतन के साथ रखा गया, उसके बाद यंग प्रोफेशनल्स के पद पर बिठा कर वेतन तीन गुना बढ़ा दिया गया। 9 महीने बाद तो इन दोनों को सलाहकार का पद थमा दिया गया और 60 हज़ार रुपए प्रतिमाह दिए जाने लगे। इस तरह की उन्होंने एक-दो नहीं बल्कि कई नियुक्तियाँ की हैं। उनकी अन्य संदिग्ध नियुक्तियों को देखिए:

  • सेना से ही आने वाले संजय बारशीला को CARA में डायरेक्टर के पद पर बहाल किया गया।
  • दीपक ने अपने मित्र किसी जॉर्ज की पत्नी मिनी जॉर्ज को सीनियर प्रोफेशनल के पद पर बिठा दिया।
  • सेना में अपने वरिष्ठ अधिकारी की पत्नी शालिनी पीयूष को भी सीनियर प्रोफेशनल का पद दिया गया।
  • अपनी क़रीबी क्षिप्रा और अपने लिए जासूसी करने वाले अनुराग पांडेय और एक दीपांशू मूँगनी को यंग प्रोफेशनल के पद पर बिठा दिया।
  • आर्मी से ही रिटायर्ड सुमित पाठक को जूनियर प्रोफेशनल का पद दिया गया।
  • रत्ना मालेकर को भी पद दिया गया।

बच्चों को अडॉप्ट करने के लिए उन समूहों, विदेशी एजेंसियों को प्राथमिकता दी गई जिनके CARA के अधिकारियों से हित जुड़े थे। सीईओ दीपक कुमार के मित्र जगन्नाथ पति के बेटे का कनाडा में न सिर्फ़ एडमिशन कराया बल्कि उसके रहने की भी व्यवस्था की थी। इसके बदले एडॉप्शन की प्रक्रिया में उस एजेंसी को लाया गया और फिर उसे लाभ पहुँचाया गया।

इसमें भारतीय पेरेंट्स को जम कर इंतजार कराया गया और उनकी सीनियोरिटी को धता बताते हुए विदेशियों को प्राथमिकता दी गई। भारतीय पेरेंट्स इंतजार करते रहे। भारत में अगर किसी को इस प्रक्रिया में लाभ पहुँचाया भी गया तो उन्हें ही जो काफी संपन्न थे। मानसिक व शारीरिक रूप से कमजोर बच्चों को भी ख़ासी परेशानी हो रही है, जिन्हें उन संस्थाओं में रहने को मजबूर किया उनके देखरेख और पुनर्वास की व्यवस्था नहीं की गई।

इसके अलावा प्रशिक्षण के लिए आने वाली धनराशि में भी घपला किया गया। स्वीकृत राशि को खर्च तो कर दिया गया लेकिन प्रशिक्षण के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई। अडॉप्ट किए गए बच्चों के फॉलोअप की कोई व्यवस्था नहीं की गई। साथ ही दीपक कुमार ने CARA में अपने द्वारा नियुक्त किए गए सभी कर्मचारियों व अधिकारियों का कार्यकाल भी 1 वर्ष के लिए बढ़ा दिया, ताकि उन्हें हटाने में मशक्कत करनी पड़े।

बच्चों की ज़िंदगी से किस तरह खेला गया, इसका एक उदाहरण देखिए। बिहार की एजेंसी में निवासरत सरस्वती को 2018 में अमेरिका के एक पेरेंट्स से रिफरल दे कर मैच कराया गया और उक्त एजेंसी को आदेश दिया गया कि वो प्रक्रिया पूरी करे। एडॉप्शन के बाद सरस्वती को अमेरिकन दम्पति द्वारा जम पर प्रताड़ित किया गया, उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया। अंततः सरस्वती की मृत्यु हो गई।

CARA के अधिकारियों ने ख़ुद के बचने के लिए बिहार की ही उक्त एजेंसी को जिम्मेदार ठहरा दिया और सरकार से उसकी मान्यता ख़त्म कराने के लिए अनुशंसा कर दी। ब्लेम गेम में वो ये भूल गए कि विदेश में अनाथ बच्चों को गोद देने के लिए CARA की अनुमति आवश्यक है। इसके अलावा दीपक कुमार पर एलटीसी घोटाले में संलिप्त रहने के भी आरोप लगे हैं। मंत्रालय इन मामलों की जाँच में लगा हुआ है।

जहाँ तक ईसाई मिशनरियों कि बात है, भारत मे उनका प्रभाव बढ़ता ही जा रहा है। बड़े पादरियों पर यौन शोषण के आरोप लगे हैं। चर्चों मे ननों के यौन शोषण की की वारदातें सामने आई हैं। इन सबके अलावा अब बच्चों को गोद लेने के मामलों मे उनका दाखल ये बताता है कि वो धर्मांतरण के लिए वे कुछ भी करने को तैयार हैं। और उनकी मदद करते हैं दीपक कुमार जैसे लोग, जो सरकारी संस्थाओं मे जमे हुए हैं।