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कारवाँ के संपादक ने फैलाया झूठ, कहा- देश में नहीं है कोरोना के फ्री टेस्ट की सुविधा

चीन के वुहान शहर से निकलकर पूरे विश्वभर में आतंक मचाने वाले कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ हर देश ने जंग छेड़ रखी है। लेकिन इतने संवेदनशील मौक़े पर भी वामपंथी मीडिया गिरोह की ओछी हरकतें जारी है। भारत में जहाँ सरकार संक्रमित लोगों को हर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने में प्रयासरत है। वहीं मीडिया गिरोह उनके ख़िलाफ़ फेक न्यूज फैलाने में। कल हमने देखा कि किस तरह कुछ फर्जी ट्विट्स को आधार बनाकर चुनिंदा लोगों द्वारा सरकार पर सवाल उठाए गए। अब कारवाँ मैग्जीन के एक्जिक्यूटिव एडिटर भी इसी खेल को आगे बढ़ाते यानी झूठ फैलाते पकड़े गए हैं।

विनोद के. जोस ने एक ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर किया है। इसमें दावा किया गया कि अन्य देशों में कोरोना वायरस का टेस्ट फ्री है, जबकि भारत में इसके लिए बहुत रुपए लिए जा रहे हैं। विनोद ने ट्विटर पर जिस स्क्रीनशॉट को शेयर किया, वो @devil-ind नाम के यूजर का है। इस यूजर ने दावा किया है कि इरान, चीन, यूरोप, अमेरिका, श्रीलंका में ये टेस्ट फ्री है। लेकिन पाकिस्तान में इसे कराने की कीमत 500 है, बांग्लादेश में 300 और भारत में 4500। अब हालाँकि, जो लोग सरकार की कोशिशों के गवाह है उन्हें ये समझने में बिलकुल समय नहीं लगेगा कि ये झूठी खबर है। लेकिन जो उनके विरोधी हैं उनके लिए ये प्रमाण की तरह है। इसलिए आपको बता दें कि जो दावे विनोद द्वारा किए जा रहे हैं वो देश की निजी लैब द्वारा निर्धारित दामों पर किए जा रहे हैं, क्योंकि भारत में सरकार द्वारा किए जा रहे कोरोना वायरस के टेस्ट बिलकुल फ्री हैं।

अब हालाँकि, ये बात सच है कि कोरोना के बढ़ते मामलों को देखकर सरकार ने कुछ प्राइवेट लैब को टेस्ट करने के लिए अप्रूव किया है। जिसमें ICMR ने टेस्ट की अधिकतम कीमत 4500 रखी है। यानी प्राइवेट लैब में ये टेस्ट कराने वाले मरीज को प्राइवेट लैब 4500 तक चार्ज कर सकती हैं। लेकिन ये भी सच है कि सरकार ने इस बात की अपील है कि या तो वे इस टेस्ट को फ्री करें या फिर अपने दामों को कम करें।

ये सब लेफ्ट लिबरलों द्वारा फैलाए जा रहे झूठ से बिल्कुल उलट है। सरकार ने टेस्ट के दाम 4500 रुपए तय नहीं किए हैं, बल्कि यह केवल दाम की अधिकतम सीमा है। प्राइवेट लैब से इससे काम पैसा लेने की उम्मीद की जाती है। यहाँ स्पष्ट कर दें कि ये स्थिति सिर्फ़ भारत के साथ नहीं है। बल्कि यूएस में भी है जहाँ सरकार ने टेस्ट को मुफ्त किया हुआ है। लेकिन अगर प्राइवेट लैब में चेक करवाया जाता है तो वह पैसा या तो मरीज को देना होता है या फिर वो पैसा उसके इंश्योरेंस से कटता है। इसलिए लेफ्ट मीडिया द्वारा लगाए जा रहे आरोप बिलकुल गलत है कि कोरोना वायरस का टेस्ट भारत में फ्री नहीं है।

सच ये है कि सरकारी लैब में ये टेस्ट फ्री हैं और प्राइवेट प्रयोगशालाओं में इनके लिए कुछ पैसे लगते हैं। यह 4500 रुपए से ज्यादा नहीं हो सकता। साथ ही सरकार लगातार कहती रही है कि सरकारी प्रयोगशालाओं में जाँच की पर्याप्त क्षमता है।

कमलनाथ हुए क्वारंटाइन: इस्तीफे वाली प्रेस वार्ता में था संक्रमित पत्रकार, दिग्विजय समेत 200 अन्य पर भी खतरा

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने खुद को क्वारंटाइन यानी सबसे अलग कर लिया है। उनके राजनीतिक सलाहकार आरके मिगलानी की कोरोना वायरस रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इसके साथ ही, कमलनाथ की आखिरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद सारे पत्रकारों को क्वारंटाइन किए जाने की खबरें भी सामने आ रही हैं।

दरअसल, भोपाल में हुए कमलनाथ के प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद एक पत्रकार की बेटी कोरोना पॉजिटिव पाई गई है। इस वजह से यह फैसला लिया गया है कि संपर्क में आए सभी पत्रकारों को कोरोना के संक्रमण के भय से क्वारंटाइन होना पड़ेगा। इसके अलावा प्रशासन की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद नेताओं की भी लिस्ट बनाई जा रही है, जो प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद थे।

20 मार्च को इस्तीफे की घोषणा करने के लिए मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने आवास पर एक पत्रकार वार्ता की थी। जिसमें से एक पत्रकार की बेटी की कोरोना वायरस की जाँच में रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई है।

कमलनाथ के पिए राजेंद्र मिगलानी से संक्रमित युवती के पिता (जो कि प्रेस वार्ता में मौजूद थे) ने मुलाकात की थी और मिगलानी मुख्यमंत्री आवास में कमलनाथ के साथ लगातार मौजूद रहते हैं। 21 मार्च को कमलनाथ के PA मिगलानी की तबीयत खराब होने के कारण उन्हें 23 मार्च को भोपाल के स्मार्ट सिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 25 मार्च को उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।

कमलनाथ की इस प्रेस वार्ता में कोरोना पॉजिटिव मरीज के पिता और पेशे से पत्रकार केके श्रीवास्तव भी मौजूद थे। यह खबर सामने आने से अब अन्य नेताओं को भी खुद को अलग करना पड़ सकता है क्योंकि इस पत्रकार वार्ता में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सहित कॉन्ग्रेस के सभी विधायक और प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों सहित लगभग 200 पत्रकार मौजूद थे।

शाहीन बाग़ के कारण रोज खर्च होते थे 6 घंटे: कैंसर मरीज की मौत, बेटे ने की थी अमित शाह से अपील

शाहीन बाग़ वालों ने 100 से अधिक दिनों तक दिल्ली में सड़क जाम कर पिकनिक मनाया लेकिन इसके कारण आम जनता को क्या परेशानियाँ झेलनी पड़ीं, इसे बारे में न तो लिबरल गैंग ने बात की और न ही मीडिया ने इसे उठाया। बच्चों को रोज स्कूल जाने में तकलीफ हुई, रोज लोगों को ऑफिस आने-जाने में घंटों देरी हुई और कई लोगों को तो अस्पताल तक पहुँचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। एक व्यक्ति को हार्ट अटैक आने के बाद समय पर हॉस्पिटल नहीं पहुँचाया जा सका, जिससे उसकी मृत्यु हो गई और तीन बेटियों के सिर से पिता का साया छिन गया।

ऐसी ही एक कहानी है मिन्टी शर्मा की, जिनके पिता कैंसर से जूझ रहे थे। जब सबा नकवी जैसे लिबरपंथी रोज शाहीन बाग़ वालों की तस्वीरें शेयर कर के गर्व महसूस कर रहे थे, तब मिन्टी अपने पिता को दिल्ली से रोज नोएडा ले जाने में व्यस्त थे। उनके पिता को रोज यात्रा करनी पड़ती थी और शाहीन बाग़ के उपद्रवियों के कारण उनकी तबियत बिगड़ती जा रही थी क्योंकि वहाँ घंटों जाम लगता था। एक बीमार व्यक्ति को आने-जाने में प्रतिदिन 6 घंटे लग जाते थे। मिन्टी ने सोशल मीडिया पर भी अपना दर्द बयाँ किया था।

उन्होंने 16 जनवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपील की थी कि वो इस ‘पागलपन’ पर लगाम लगाएँ और साथ ही अपने पिता के दुःख को साझा किया था। शाहीन बाग़ वालों का सीएए विरोधी प्रदर्शन अनवरत जारी रहा और मिन्टी के पिता की मृत्यु हो गई। उससे पहले वो काफ़ी दिनों तक हॉस्पिटल में भर्ती भी थे। क्या उनकी मृत्यु के लिए शाहीन बाग़ वालों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए? शाहीन बाग़ वालों के कारण ऐसे न जाने कितने ही मरीजों को दिक्कतें आई होंगी लेकिन सोशल मीडिया पर न साझा किए जाने के कारण उनके बारे में पता नहीं चला।

अभी भी सेक्युलर गिरोह शाहीन बाग वालों का गुणगान करने में लगा हुआ है कि उन्होंने एक सफल ‘आंदोलन’ चलाया। दिल्ली पुलिस को मजबूरन वहाँ जाकर तम्बुओं को हटाना पड़ा क्योंकि कोरोना से उपजे खतरों को नज़रअंदाज़ करते हुए वो वहीं पर जमे हुए थे। भले ही ये उपद्रव ख़त्म हो गया लेकिन जिनका घर उनके कारण सूना हो गया, क्या उसके लिए गिरोह विशेष माफ़ी माँगेगा? ये एक ऐसा ‘गाँधीवादी’ आंदोलन था, जहाँ गाँधी को ही फासिस्ट बताया गया।

AIIMS में 14 दिन से लगातार लोगों की सेवा में लगे डॉक्टर का भावुक करने वाला यह वीडियो हम सबके लिए है

पूरे देशभर में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए कल शाम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आखिरकार 21 दिन के लिए पूरे देशभर में पूर्ण लॉकडाउन का ऐलान कर ही दिया। लेकिन इसके बावजूद भी कुछ स्थानों से लोग इस लॉकडाउन की गंभीरता को नजरअंदाज करते हुए अपने मनोरंजन के लिए सड़कों पर देखे जा रहे हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर एम्स अस्पताल के एक डॉक्टर का बेहद भावुक करने वाला सन्देश सामने आया है।

एम्स अस्पताल के एक डॉक्टर संजय कुमार का यह वीडियो आज तक न्यूज़ चैनल के पत्रकार रोहित सरदाना ने ट्वीट किया है। वीडियो में डॉक्टर कह रहे हैं- “मैं घर नहीं गया। पंद्रह दिन पहले शादी की सालगिरह थी तो उस समय दो दिन के लिए घर जाने का मौका मिला। मेरी घर पर एक बेटी है, उसे नहीं देख पा रहा हूँ।”

डॉक्टर संजय कुमार भावुक होकर आगे कहते हैं- “कृपया घर पर रहिए, बाहर मत निकलिए। इस बिमारी को फैलने से कृपया रोकिए, देश पर बड़ी समस्या आ सकती है।”

दरअसल, डॉक्टर संजय कुमार उन सैकड़ों-हजारों लोगों में से एक हैं, जो कोरोना के संकट के दौरान भी अपने कर्तव्य पथ पर डटकर हम लोगों की सहायता में खड़े हैं। एक ओर, कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण घोषित किए गए 21 दिन के इस लॉकडाउन को जहाँ कुछ लोग अपने घर और परिवार के साथ बिताने का अवसर समझ रहे हैं, उसी समय दूसरी ओर कई डॉक्टर, सफाई कर्मी, अधिकारी आदि निरंतर और तत्परता से कोरोना के खिलाफ संघर्षरत हैं और 24 घंटे से भी ज्यादा अवधि तक काम कर रहे हैं।

रोहित सरदाना ने इस वीडियो को ट्वीट करते हुए लिखा है – “डॉक्टर संजय दो महीने की अपनी बच्ची को देख नहीं पा रहे, ताकि आप-हम अपने बच्चों को देख पाएँ! कम से कम इन बातों को सुनिए, समझिए, घर पर रहिए, सुरक्षित रहिए। #GharBaithoZindaRaho”

उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस के संक्रमण के बढ़ते हुए खतरे को देखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे भारत में लॉकडाउन का ऐलान किया है। पीएम मोदी ने देश में 21 दिनों के लॉकडाउन का ऐलान किया है। इसके साथ ही पीएम मोदी ने कोरोना की गंभीरता के प्रति देशवासियों को चेतावनी देते हुए कहा कि 21 दिन नहीं संभले, तो देश 21 साल पीछे चला जाएगा।

मंत्रियों से इस तरह सोशल डिस्टें​सिंग निभा रहे PM मोदी, 130 करोड़ जनता को भी कर रहे प्रोत्साहित

कोरोना वायरस को रोकने के लिए सबसे कारगर उपाय सोशल डिस्टेंसिंग है। यानी एक-दूसरे से दूरी बनाना। फिर चाहे वो घर हो या फिर पब्लिक प्लेस। हर जगह सोशल डिस्टेंसिंग इस समय मानवता को बचाने के लिए सबसे पहली शर्त है। सरकार लगातार इसके लिए जनता को जागरूक कर रही है और खुद भी इस पर अमल कर रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद भी इस पर अमल कर रहे हैं और देश की जनता को भी इसके लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। आज उनकी कैबिनेट बैठक में इसकी झलक दिखी। साथ ही सोशल मीडिया में कई तस्वीरें सामने आई हैं जिससे पता चलता है कि आवश्यक वस्तुओं की दुकानों पर किस तरह लोग सोशल डिस्टेंसिंग पर अमल कर रहे हैं। तस्वीरें अलग-अलग जगहों (राज्यों) की हैं। लेकिन इन्हें देखकर अंदाजा लग सकता है कि सरकार की गुहार आमजनों तक पहुँचने लगी है और उन्होंने इसे गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है। इसके अलावा अमित शाह ने भी लोगों को इसकी महत्तवता बताने के लिए केंद्रीय कैबिनेट की बैठक की फोटो शेयर की है जिसमें पीएम की अपील का अनुपालन किया जा रहा है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा शेयर की गई बैठक की तस्वीर में सभी मंत्री थोड़ी-थोड़ी दूर पर बैठे देखे जा सकते हैं जिसकी अध्यक्षता पीएम मोदी द्वारा की जा रही है। इस तस्वीर को लेकर सोशल मीडिया पर कई लोगों ने केंद्र सरकार के प्रयासों की तारीफ की।

अमिताभ बच्चन ने भी इसे लेकर कुछ फोटोज़ ट्वीट की और सोशल डिस्टेंसिग को लेकर दिखाई जा रही गंभीरता पर भारतीयों की तारीफ की। इन तस्वीरों में दुकान के बाहर दूर-दूर खड़े होने के लिए बनाए घेरों में खड़े लोगों की तस्वीर नजर आई।

गुजरात से भी इन निर्देशों का पालन करती जनता की तस्वीर आई और देखा गया कि लोग सोशल डिस्टेंसिंग के लिए घेरे में खड़े हैं जिन्हें सब्जी की दुकान के बाहर बनाया गया है।

जम्मू-कश्मीर में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला और लोग सफेद चूने से बने घेरे में बैठे नजर आए।

गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री पियूष गोयल ने भी इस महामारी के समय में लोगों को खाने-पीने की बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाने के लिए आश्वस्त किया है। उन्होंने एक विडियो ट्वीट किया है जिसमें बताया गया है कि खाने की आपूर्ति के लिए सरकार क्या इंतजाम कर रही है। उन्होंने लिखा, “खाद्यान्नों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए मंदिर हसौद, छत्तीसगढ मे अनाज की लोडिंग कर उसे रेलवे द्वारा भेजा जा रहा है।” उन्होंने बताया, “अपने कर्मचारियों के बल पर रेलवे द्वारा इस प्रकार की गतिविधियां पूरे देश में जारी हैं जिससे आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को सुनिश्चित हो रही हैं।”

बता दें इस समय देश में कोरोना के 512 मामले आ चुके हैं। इनमें से 40 रिकवर हो गए है जबकि बाकियों का इलाज जारी है। सरकार इस आपदा से निबटने के लिए हर मुमकिन प्रयास कर रही है। इसके तहत कल PM मोदी ने पूरे देश में 21 दिन के लॉकडाउन की घोसना की थी।

कोरोना: मजहब की आड़ में जाहिलपना करते ‘धरती के सबसे बड़े मूर्खों’ के वीडियो

कोरोना वायरस को लेकर पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा की जा चुकी है। लोगों को घर में रहने को कहा गया है। केवल ज़रूरी सेवाएँ चालू रहेंगी। ऐसे में हर नागरिक का भी ये कर्तव्य बनता है कि वो सरकार के निर्देशों का पालन करे। दुनिया भर में कोरोना द्वारा मचाई गई तबाही, विशेषज्ञों और डॉक्टरों की सलाहों और भारत में उपजी परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने लॉकडाउन का निर्णय लिया। लेकिन, कुछ लोग ऐसे भी हैं जो सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी सनक दिखाने में लगे हैं। वो अपनी जाहिल मानसिकता बयाँ कर के कोरोना वायरस के प्रति लोगों के दिमाग में ग़लत बातें भर रहे हैं।

यहाँ हम आपके लिए कुछ ऐसे वीडियो लेकर आए हैं, जो कोरोना वायरस पर मजहबी उन्माद फैलाने वालों को बेनकाब करती हैं। इनमें से एक वीडियो में एक युवक अपने दोस्तों को कहता है कि आज मु###न हाथ मिलाने और गले मिलने से डर रहे हैं तो क्या कल कोरोना के कारण इस्लाम छोड़ देंगे? वहीं एक अन्य वीडियो में एक युवक कहता दिखता है कि दिन में 5 बार नमाज पढ़ने वालों को कोरोना नहीं हो सकता।

अब इन्हें कौन बताए कि कोरोना वायरस मजहब नहीं देखता। जिस ईरान में मजहबी इस्लामी तीर्थयात्रा पर गए थे, वहाँ स्थिति बिगड़ने के बाद उन्हें भारत सरकार वापस ला रही है। फिर भी ये लोग सोशल मीडिया के माध्यम से बकैती करने में लगे हुए हैं। यहाँ लोगों को पता होना चाहिए कि इस तरह के वीडियो आम लोगों पर गहरा प्रभाव डालते हैं। अतः ऐसी मूर्खतापूर्ण हरकत लोगों की जान जोखिम में डाल सकती है। आगे और भी है।

इस वीडियो थ्रेड में सपा नेता रमाकांत यादव का भी बयान है, जिन्होंने पीएम मोदी पर ही कोरोना वायरस बनाने का आरोप लगा दिया था। ध्रुव राठी का भी वीडियो है, जिसने कहा था कि ये वायरस चीन तक ही सिमित है और मीडिया तो सिर्फ़ एक प्रकार का हौव्वा बना रहा है। एक अन्य वीडियो में एक व्यक्ति कहता है कि वो नमाज पढ़ने तो जाएगा ही क्योंकि एक अच्छा काम करते समय अगर प्राण निकल भी जाएँ तो इससे अच्छी क्या बात होगी? एक दूसरे वीडियो में युवक कहता है कि मजहबी भाइयों का जूठा पीने या खाने से भला होता है। इसके बाद वो एक-दूसरे का जूठा पानी पीते हैं।

टिक-टॉक सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं। एक महिला तो यहाँ तक कहती है कि कोरोना क़ुरान से निकला वायरस है। एक अन्य वीडियो में एक ही मस्जिद में लोग पानी से हाथ-मुँह धोते नज़र आते हैं और बाद में मीडिया के सामने अपने इस क़दम का बचाव भी करते हैं। एक वीडियो में आप गैदरिंग न जुटाने की तमाम चेतावनियों के बावजूद लोगों को सड़क पर इकट्ठे होकर नमाज पढ़ते देख सकते हैं।

एक वीडियो में एक युवक दावा करता है कि कोरोना वायरस अल्लाह की तरफ़ से एनआरसी है और अल्लाह जिसे चाहेगा उसे दुनिया में रखेगा और जिसे चाहेगा उसे अपने पास बुला लेगा। एक मौलवी दावा करता है कि उसे अल्लाह-ताला ने बताया कि कबूतर खाने से कोरोना वायरस ख़त्म हो जाता है। एक महिला जो सीएए प्रदर्शनकारी भी है, ने दावा किया कि इसकी क्या गारंटी है कि बाहर निकलने से कोरोना नहीं होगा? इस तरह की सोच वाले लोगों के वीडियो देख कर आपको अंदाज़ा लग जाएगा कि ये किस कदर समाज को गुमराह कर रहे हैं।

यही हाल रहा तो देने पड़ेंगे देखते ही गोली मारने के आदेश: लॉकडाउन उल्लंघन पर तेलंगाना के CM

चीन के वुहान शहर से शुरू हुआ कोरोना वायरस का संक्रमण आज पूरी दुनिया को रुला रहा है। इसका प्रसार रोकने के लिए सरकारों को एक के बाद एक सख्त कदम उठाने पड़ रहे हैं। PM मोदी ने कल पूरे देश में 21 दिनों के लॉकडाउन की घोसना की थी। इसके बाद बाजारों में राशन और अन्य सामान लेने वालों की उमड़ पड़ी। सरकार की अपील के बाद भी लोग अपने घरों से निकलने से बाज नहीं आ रहे हैं। इससे नाराज तेलंगाना के सीएम के चन्द्रशेखर राव ने लोगों को चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने लॉकडाउन का पालन नहीं किया गया तो उनके पास सेना बुलाने और देखते ही गोली मारने का आदेश पुलिस को देने के अलावा और कोई विकल्प नहीं होगा।

मीडिया से बात करते हुए राव ने कहा कि अगर इसी तरह से लॉकडाउन के आदेश का उल्लंघन होता रहा तो उन्हें 24 घंटे के कर्फ्यू का आदेश देना पड़ेगा। इसलिए ऐसे हालात मत पैदा कीजिए, जिससे सरकार को पुलिस को देखते ही गोली मारने का आदेश देना पड़े। साथ ही राव ने कहा कि कर्फ्यू शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे तक लगाया जाएगा और शाम 6 बजे दुकाने बंद कर दी जाएँगी। लोगों को सड़कों से दूर रखने के लिए पेट्रोल पंप भी बंद रहेंगे। वहीं सरकार लॉकडाउन का पालन कराने के लिए प्रदेश में सेना की मदद लेने पर भी विचार कर रही है। दरअसल, तेलंगाना में अब तक कोरोना के कुल 35 मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें 10 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ग्रोफर और बिग बास्केट जैसी कुछ खाद्य वितरण कंपनियों से बातचीत कर रही है ताकि वे अपनी डिलीवरी सर्विस को फिर से शुरू कर सकें। सरकार ऐसे 19000 लोगों पर निगरानी रखे हुए है, जो विदेश से आए हैं साथ ही उनके संपर्क में आने वाले लोगों पर भी निगरानी रखी जा रही है। साथ ही सरकार ने चेतावानी देते हुए कहा है कि दूसरे देशों से आए जो लोग क्वारेंटाइन के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लॉकडाउन और क्वारेंटाइन के आदेशों का उल्लंघन करने वालों के पासपोर्ट भी रद्द किए जा सकते हैं।

आपको बता दें कि कोरोना महामारी की चपेट में अब तक विश्व के 186 से अधिक देश आ चुके हैं। वहीं विश्व में मरने वालों की संख्या बढ़कर 16961, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 3,86,300 से अधिक हो गई है।भारत में मरने वालों की संख्या 11, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 562 से अधिक हो गई है। इनमें से 41 मरीज ठीक हो चुके हैं। इन्ही आँकड़ों को देखते हुए भारत सरकार ने पूरे देश में 21 दिन यानी कि 14 अप्रैल तक के लिए लॉकडाउन घोषित कर दिया है।

ईरान से लाए गए 277 और भारतीय, जोधपुर मिलिट्री स्टेशन के आइसोलेशन वार्ड में रहेंगे 14-28 दिन

भारत में कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच ईरान से लौटा भारतीयों का नया जत्था जोधपुर उतरा है। इस दल में 277 लोग शामिल हैं। भारत सरकार की पहल पर इन्हें विशेष विमान से यहाँ लाया गया गया है। अब अगले 14 दिन ये लोग आइसोलेशन में रखे जाएँगे। इन सभी लोगों ने वतन वापसी पर विदेश मंत्री एस जयशंकर का आभार जताया है। इससे पहले 15 मार्च को ईरान से 234 भारतीयों का जत्था आया था, जिसकी सूचना खुद विदेश मंत्री ने दी थी। साथ ही ईरान में भारतीय राजदूत और वहाँ के अधिकारियों को धन्यवाद दिया था। इस वायरस के संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित देशों में ईरान भी शामिल है।

जानकारी के अनुसार, एयर इंडिया के 2 विमान आज सुबह करीब 6.30 बजे जोधपुर एयरपोर्ट पर उतरे। इन दोनों विमानों में 277 भारतीयों को लाया गया। यहाँ से जाँच-पड़ताल करने के बाद उन्हें आर्मी इलाके में बनाए गए वेलनेस सेंटर ले जाया गया। इस वेलनेस सेंटर में 500 बेड की व्यवस्था है। यहाँ इन्हें 14 से 28 दिन तक रखा जाएगा। ईरान से जोधपुर लाए गए भारतीयों की यह पहली खेप है। इससे पहले ईरान से भारतीयों को एयरलिफ्ट कर जोधपुर संभाग के ही जैसलमेर लाया गया था। पश्चिमी राजस्थान में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर स्थित जैसलमेर में भी आर्मी की तरफ से वेलनेस सेंटर बनाया गया है। वहाँ भी ईरान से लाए गए सैकड़ों भारतीयों को रखा गया है।

बता दें, एक ओर जहाँ भारत सरकार विदेश में फँसे अपने लोगों को इस संकट की घड़ी में भी घरवापसी करवा रही है। वहीं बड़ी तादाद में लौटे लोगों की संख्या को देखकर राज्य सरकार की चिंता बढ़ती जा रही है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पिछले 1 महीने में पंजाब में 90,000 लोग अपने वतन लौटे हैं। ऐसे में अब सरकार इन सभी की जाँच करना चाहती है। इसके लिए प्रदेश सरकार ने केंद्र से 150 करोड़ रुपए का स्पेशल पैकेज माँगा है। बता दें, इनमें से कई लोगों के कोरोना पॉजिटिव होने की आशंका जताई जा रही है। ये बात खुद राज्य के मंत्री बलबीर सिंह सिंधू ने कही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पंजाब के 22 जिलों में पहले ही कर्फ्यू लगा हुआ है। इसके अलावा राज्य के मंत्री बलबीर सिंह संधू ने इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन को चिट्ठी लिखी है और केंद्र से 150 करोड़ रुपए की मदद के साथ ही माँग की है। उन्होंने चिट्ठी में कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो उन्हें सेना से भी हेल्प की अपील करनी होगी।

17 साल के प्रेमी से मिलने उत्तराखंड पहुॅंची 37 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई महिला, रेलवे स्टेशन से क्वारेंटाइन में भेजी गई

पूरा विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा है। इसके संक्रमण से बचने के लिए लोग अपने घरों में कैद हैं। पीड़ित अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे। ऐसे वक़्त में उत्तराखंड से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। 37 वर्षीय एक ऑस्ट्रेलियाई महिला अपने 17 वर्षीय प्रेमी से मिलने उत्तराखंड के काठगोदाम रेलवे स्टेशन पहुँच गई। रेलवे स्टेशन पर महिला को अकेले देख अधिकारियों में हड़कंप मच गया। पूछताछ के बाद अधिकारियों ने उसे क्वारेंटाइन में भेज दिया।

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को रानीखेत एक्सप्रेस में सवार होकर ऑस्ट्रेलियाई महिला कोलकाता से उत्तराखंड के काठगोदाम रेलवे स्टेशन पहुँची। पूछताछ में महिला ने अधिकारियों को बताया कि वह नैनीताल में अपने पति से मिलने जा रही है। इसके बाद पुलिस ने उक्त व्यक्ति से संपर्क किया, जिसके बाद 17 वर्षीय युवक महिला को लेने के लिए रेलवे स्टेशन पहुँच गया। लेकिन युवक ने महिला का पति होने से इनकार कर दिया और बताया कि वह उसका प्रेमी है। इसी बीच सूचना पर रेलवे स्टेशन एक एम्बुलेंस पहुँची, और मेडिकल जाँच के बाद महिला को क्वारेंटाइन कर दिया गया।

पूछताछ में युवक ने अधिकारियों को बताया कि वह गोवा के एक होटल में शेफ का काम करता है। इसी बीच महिला से उसकी मुलाकात हुई थी। इसके बाद वे कई बार कोलकाता में भी मिले। वहीं महिला ने बताया कि वह पिछले करीब एक साल से भारत में रह रही है। एक दोस्त के साथ वाराणसी से मुरादाबाद पहुँची थी।

वहीं बीते सोमवार को बीडी पांडे अस्पताल के क्वारेंटाइन वार्ड से दो विदेशी सैलानी सुबह को भाग निकले। इससे अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मच गया। बाद में बमुश्किल पुलिस और एसडीआरएफ की टीम ने दोनों विदेशियों को पकड़ लिया और उन्हें अस्पताल लाने के बाद मोतीनगर हल्द्वानी में बनाए क्वारेंटाइन वार्ड में भेज दिया। हालाँकि दोनों की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव है।

जानकारी के अनुसार एक इजरायली युवक और बेल्जियम निवासी युवती अलग-अलग समय में भारत भ्रमण पर आए थे। कई जगह घूमने के बाद 20 मार्च को दोनों नैनीताल पहुँचे। नैनीताल में इन दोनों पर्यटकों को कहीं भी होटल नहीं मिला तो शुक्रवार शाम वह बीडी पांडे अस्पताल पहुँचे। डॉक्टरों से जाँच का अनुरोध किया था। विदेशी सैलानियों की स्वास्थ्य जाँच करने के बाद उन्हें अस्पताल के क्वारेंटाइन वार्ड में भर्ती कर दिया गया। अस्पताल प्रबंधन ने दोनों पर नजर रखने के लिए एसडीआरएफ की टीम को वार्ड के बाहर तैनात किया था, लेकिन सोमवार सुबह साढ़े दस बजे के करीब यह दोनों विदेशी एसडीआरएफ के जवानों को चकमा देकर अस्पताल से भाग निकले।

अस्पताल प्रबंधन ने सैलानियों के अस्पताल से गायब होने की सूचना अपने अफसरों के अलावा जिला प्रशासन और पुलिस को दी। खोजबीन के दौरान लगभग दो घंटे के बाद दोनों सैलानी मल्लीताल स्थित अंडा मार्केट में नजर आए। पुलिस और एसडीआरएफ के जवान दोनों को पकड़कर बीडी पांडे अस्पताल लाए, जहाँ से उन्हें हल्द्वानी के मोतीनगर स्थित क्वारेंटाइन वार्ड में भेज दिया। इस दौरान विदेशी सैलानियों ने अस्पताल प्रबंधन पर कई आरोप भी मढ़े। आपको बता दें कि 22 मार्च से ही उत्तराखंड पूरी तरह से लॉकडाउन है। पूरे देश में 14 अप्रैल तक के लिए लॉकडाउन की घोषणा कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। कोरोना से भारत में मरने वालों की संख्या 11 हो गई है, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 562 है।

गुरुद्वारे पर आतंकी हमला: फिदायीन ने खुद को उड़ाया, बंदूकधारियों से चल रही मुठभेड़, 4 की मौत

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में गुरुद्वारे पर आतंकी हमले की खबर है। मीडिया रिपोर्टों में अफगान आंतरिक मंत्रालय ने काबुल में हुए इस हमले की पुष्टि की है। बताया जा रहा है की पहले फिदायीन हमलावर ने खुद को उड़ा लिया। हमले में 4 लोगों के मरने की खबर है।

आत्मघाती धमाके के बाद बंदूकधारी गुरुद्वारे में दाखिल हो गए। अफगानी मीडिया रिर्पोटों के हवाले से न्यूज एजेंसी एएनआई ने बताया है कि सुरक्षा बलों ने गुरुद्वारे के पहले तल को खाली करा लिया है। मुठभेड़ जारी है। अंदर फॅंसे कई लोग सकुशल बाहर निकाल लिए गए हैं।

अल जजीरा के मुताबिक ने सांसद नरेंद्र सिंह खालसा ने बताया कि जब यह हमला हुआ, तो वह घटनास्थल के पास ही थे। उनके अनुसार, धमाके की आवाज सुनते ही वे गुरुद्वारे की ओर भागे और देखा कि वहाँ कम से कम 4 सिखों की मृत्यु हुई थी। अभी तक किसी ने भी इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। लेकिन इस महीने की शुरुआत में राजधानी काबुल में ही IS (दाएश) ने अल्पसंख्यक शिया समुदाय के एक समूह पर हमला किया था, जिसमें 32 लोग मारे गए थे। अब इस हमले को भी उससे जोड़कर देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि अफगानिस्तान में लंबे समय सिखों को व्यापक भेदभाव का सामना करना पड़ा है और कई बार आतंकवादियों ने भी उन्हें निशाना बनाया है। हालिया दिल्ली दंगों के बाद भी काबुल में सिखों की दुकान पर हमला हुआ था। अकाली दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस घटना का विडियो अपने ट्विटर पर भी शेयर की था जिसमें अधेड़ उम्र का सिख दुकानदार हाथ जोड़कर हताश खड़ा था और उसकी दुकान का सामान जमीन पर बिखरा था।

बता दें, अल्पसंख्यक सिखों पर यह पहला हमला नहीं है। पहले भी अफगानिस्तान में उनपर हमले होते आए हैं और डरकर वे भारत आने को मजबूर हुए हैं। 2018 में भी जलालाबाद में आत्मघाती हमला हुआ था जिसमें 13 सिख मारे गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली थी। हमले से सिख समुदाय इतना डर गया था कि उन्होंने देश छोड़ने का फैसला कर लिया था। मौजूद जानकारी के मुताबिक, अफगानिस्तान में अब 300 से भी कम सिख परिवार बचे हैं। इनके पास दो ही गुरुद्वारा है। एक जलालाबाद और दूसरा काबुल में।