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ध्रुव राठी जैसे ‘ऑनलाइन हकीमों’ से दूर रहें, मूर्खतापूर्ण बातें कह कर कोरोना पर बाँटता है फ़र्ज़ी ज्ञान

जब जनवरी और फरवरी 2020 में लिबरल गैंग कोरोना वायरस को पीएम मोदी की चाल बताने से लेकर इसके ख़तरे को नज़रअंदाज़ करते हुए इसकी खिल्ली उड़ा रहा था, तब मोदी सरकार पूरे जतन से इस वायरस के खतरनाक प्रकोप को रोकने के प्रयासों में लगी हुई थी। सोचिए, अगर देश इन लिबरल गिरोहों के पास होता तो फिर अभी भारत में कितनी लाशें गिर रही होतीं? सौभाग्य से ऐसा नहीं हुआ क्योंकि सरकार सजग थी, जिसने तुरंत चीन से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग की व्यवस्था की, कई फ्लाइट्स पर पाबंदी लगाईं और फिर जनता को जागरूक करने में लग गई। लेकिन, इस दौरान लिबरल और सेक्युलर गिरोह क्या कर रहा था?

इनलोगों के ही गुट की एक नेता ममता बनर्जी ने भी तब कहा था कि पीएम मोदी दिल्ली में हुए दंगों को ढकने के लिए कोरोना वायरस के ख़तरों को बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रहे हैं। आज स्थिति ये है कि पूरा कोलकाता लॉकडाउन है। आइए, इसी गैंग के एक यूट्यूबर और प्रपंच ध्वजवाहक ध्रुव राठी पर नज़र डालते हैं, जो उस समय कुछ और दावे कर रहा था और अब कुछ और ही दावे कर रहा है। ध्रुव राठी ने तब कहा था कि मीडिया इसे बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रही है।

राठी ने फरवरी में बनाए गए एक वीडियो में दावा किया था कि चीन से बाहर रहने वाले लोगों को घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है क्योंकि उनके लिए कोई ख़तरा नहीं है। राठी ने कहा था कि मीडिया ‘फियर मोंगरिंग’ फैला रहा है, यानी कोरोना वायरस के नाम पर लोगों को डरा रहा है। राठी ने लोगों से कहा था कि वो सावधानी रखें लेकिन घबराएँ नहीं।

वो तो भला हो कि अधिकतर नागरिक ऐसे फर्जी यूट्यूबर्स की बातों पर ध्यान नहीं देते, लेकिन कुछ कम बुद्धि वाले राठी-समर्थक उसकी बातों को फूल और बाकी बातों की बबूल ही समझते हैं। राठी ने तब आरोप लगाया था कि ‘डर का माहौल’ ऐसे बनाया जा रहा है, जैसे कोई ‘जॉम्बी अपॉकलिप्स’ (चलती-फिरती लाशों वाली तबाही) आ गया हो। राठी पहले क्या कह रहा था और अब उनकी राय कैसे बदल गई है समय के साथ, यहाँ देखिए:

और अब यही ध्रुव राठी लोगों को समझा रहा है कि कैसे सारे देशों में कोरोना वायरस को लेकर तबाही फ़ैल रही है। साथ ही उसने अपने नए वीडियो में बताया है कि कैसे कुछ देशों ने इससे निपटने के लिए तगड़े इंतजाम कर लिए थे। राठी अब भारत सरकार को भी सलाह दे रहा है कि उसे और भी बहुत कुछ करना चाहिए। शायद उसे पता नहीं है कि जब वो कोरोना वायरस को ‘मीडिया का डर’ बताते हुए इसका मखौल उड़ा रहा था, तब सरकार काम करने में लगी हुई थी, तैयारियों में लगी थी।

कुछ आवाज़ें भी कुछ जला सकती हैं: प्रतीक सिन्हा की जली तो रुबिका पर किया हमला, लग गई क्लास

एबीपी न्यूज़ की पत्रकार रुबिका लियाकत को नीचा दिखाने के चक्कर में एक बार फिर से ‘ऑल्ट न्यूज़’ के संस्थापक प्रतीक सिन्हा की बेइज्जती हो गई। प्रतीक यूँ तो आए दिन सोशल मीडिया पर बेइज्जती की नई इबारतें लिख रहे होते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने रुबिका से पंगा ले लिया। दरअसल, रुबिका ने ‘जनता कर्फ्यू’ के दिन शाम 5 बजे लोगों द्वारा घंटी, ताली और थाली वगैरह बजाए जाने के अनुभवों को साझा किया था, जिससे प्रतीक चिढ़ गए। रुबिका ने लिखा था- “थालियों की, घंटियों की, तालियों की आवाज़ ने बहुतों को सदमे में पहुँचा दिया होगा। ये एकता की आवाज़ है। अखण्ड भारत की पहचान है।” प्रतीक को ये बुरा लगा।

प्रतीक सिन्हा ने ज़हर की उल्टी करते हुए लिखा कि लोगों को ऐसे ही एंकरों के कारण दिक्कत का सामना करना पड़ता है, जो अपने नेता और उसके कारनामों को सही ठहराते हैं और यही इनकी ज़िंदगी का प्रमुख उद्देश्य है। प्रतीक ने इसके बाद रुबिका की ट्वीट में धर्म घुसाते हुए ज्ञान बाँचा कि कोई महामारी किसी का धर्म या विचारधारा देख कर कोई भेदभाव नहीं करती। उन्होंने रुबिका को ‘चीयरलीडर’ करार देते हुए लोगों से कहा कि वो ऐसे एंकरों को फॉलो न करें। इसके बाद रुबिका लियाकत ने जो रिप्लाई दिया, उसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी खूब वाहवाही तो हुई ही, प्रतीक की भी बेइज्जती हुई।

रुबिका लियाकत ने प्रतीक के कथित फैक्ट-चेकिंग पोर्टल की पोल खोलते हुए कहा कि अगर ‘वर्क फ्रॉम होम’ के कारण उनके पास कर्मचारियों की कमी है तो वो ख़ुद अपनी ही ट्वीट का फैक्ट-चेक करने के लिए तैयार हैं। रुबिका ने लिखा- “इस ट्वीट में कोरोना का कोई ज़िक्र नहीं सदमेश्वर! मेरे ट्वीट का ‘प्रतीक’ बनने के लिए शुक्रिया! गहरा सदमा लगा है ‘Fearleaders’ को।” रुबिका के इस जवाब के बाद प्रतीक को कुछ नहीं सूझा और वो भाग खड़े हुए।

लोगों ने प्रतीक सिन्हा को याद दिलाया कि विदेश में भी कई देशों ने सांकेतिक तौर पर विभिन्न तरीके अपना कर कोरोना से लड़ रहे मेडिकल कर्मचारियों व अन्य लोगों को धन्यवाद दिया। क्या वो सभी लोग मूर्ख थे? भारत में रविवार की शाम लोगों ने ताली, थाली और घंटी के साथ-साथ शंख फूँक कर भी डॉक्टरों व विषम परिस्थितियों में जनसेवा में रत अन्य लोगों को अपना धन्यवाद भेजा। कई लोगों के लिए ये एक इमोशनल अनुभव रहा।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की अपील की थी और उन्होंने ही लोगों को ऐसा करने को कहा था। लिबरल व सेक्युलर गैंग में से कुछ ने दिखावटी रूप से इस क़दम का समर्थन किया, वहीं कई अपने कुत्ते-बिल्लियों के डरने की बातें करते हुए देखे गए।

चौथी बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने शिवराज सिंह चौहान, ऐसा करने वाले पहले व्यक्ति, अकेले ही ली शपथ

मध्य प्रदेश की तमाम सियासी उथल पुथल के बाद आज प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता शिवराज स‌िंह चौहान ने चौथी बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह कोरोना संक्रमण के चलते रात 9 बजे राजभवन में आयोजित एक सादे समाराेह में सम्पन्न हुआ। शिवराज सिंह ने अकेले ही शपथ ली और उनके साथ आज कोई मंत्री शामिल नहीं हुआ। शिवराज के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए बीजेपी के विधायक तीन बसों में सवार होकर राजभवन पहुँचे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इससे पहले आज सोमवार शाम को उन्हें भाजपा विधायक दल का नेता चुन लिया गया था। उनके नाम का प्रस्ताव भाजपा के वरिष्ठ नेता गोपाल भार्गव ने रखा।

बताया जा रहा है कि शिवराज सिंह मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही, रात में मंत्रालय जाकर काम काज संभाल लेंगे। इससे पहले विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद शिवराज सिंह ने कहा था कि पार्टी मेरी माँ है और उसके दूध की लाज रखने में वे कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। गौरतलब है कि शिवराज सिंह चौहान 2005 से 2018 तक लगातार 13 साल सीएम रह चुके हैं। इस दौरान उन्होंने तीन बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके फिर सीएम बनने पर मध्यप्रदेश के इतिहास में पहला मौका होगा, जब कोई चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेगा

शिवराज सिंह के अलावा अब तक अर्जुन सिंह और श्यामाचरण शुक्ल तीन-तीन बार सीएम रहे हैं। इस बार शिवराज के साथ-साथ नरेंद्र सिंह तोमर और नरोत्तम मिश्रा के नाम की भी चर्चा थी। लेकिन अब, माना जा रहा है कि भाजपा आलाकमान ने शिवराज के नाम ही मुहर लगा दी है। उल्लेखनीय है कि 20 मार्च को कमलनाथ द्वारा सीएम पद से इस्तीफे दिए जाने के बाद सीएम पद की दौड़ में शिवराज ही सबसे मजबूत दावेदार थे। पार्टी का एक खेमा भी मौजूदा विधानसभा में संख्या गणित को देखते हुए अभी फिलहाल शिवराज सिंह चौहान को ही कमान देने का दबाव बना रहा था। लेकिन, कयासो में कई बार अन्य दावेदारों में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम भी सामने आया।


कोरोना ने कर दिखाया महिला-उत्थान: किचन में सब्जी बनाता, घर की सफाई करता और बर्तन माँजता व्यंग्यकार

कोरोना के आगमन के विभिन्न लोगों पर विभिन्न प्रभाव हो रहे हैं। अंग्रेज़ी की विश्व विनाश पर कई फ़िल्में बनी हैं जिसमें तोरई समान खलनायक दूसरे ग्रह से आ कर मानव समाज को समाप्त करने की घोषणा करता है और अमरीकी राष्ट्रपति अपनी विशाल एवम् अपरिमित बुद्धिबल का उपयोग करते हुए संसार की रक्षा करते हैं। ऐसी हर फ़िल्म में एक व्यक्ति कहीं न कहीं बोर्ड ले कर खड़ा रहता है जिसपर विश्व विनाश की चेतावनी लिखी होती है। एक प्रमुख नेता कोरोना के आगमन पर उसी व्यक्ति की भूमिका निभा रहे हैं। मदर टेरेसा के चमत्कारों के मुरीद विज्ञान की ओर मुड़ गए हैं। कुछ शेरदिल नौजवान मानते हैं कि इस्लामिक देश ईरान में सर्वाधिक प्राण लेने वाला कोरोना उनके मज़हबी हुस्न से प्रभावित होकर कोरोना जान बनकर ‘लिल्लाह’ पुकारेगा और लब-ए-नाज़ुक को दाँतो तले दबा कर सरकार के चश्म-ए-नूर पर बोसा धर देगा। बहरहाल, आम भारतीय घरों में है, सोशल डिस्टेंसिंग में है।

आम भारतीय पतियों का पत्नियों पर अफ़सरी का रोब समाप्त हो चुका है, और उनके दफ़्तरी निखट्टूपन की खबर घरों तक पहुँच चुकी है। पंद्रह दिन की घरों में गिरफ़्तारी और उस में पतियों की स्थिति यह बाक़ायदा बताती है कि क्यों प्रभु श्रीराम पत्नी सीता को वन में नहीं ले जाना चाहते थे, जबकि पत्नी तीन तीन सासों के घर से निकलने को हठ पर थी। पति की ना आज चली है ना तब चली, ख़ैर ये कहानी फिर सही।

पति सब्ज़ी बना रहे हैं, घरों की सफ़ाई कर रहे हैं, बर्तन माँज रहे हैं। महिला उत्थान का जो काम सुश्री वर्जीनिया वुल्फ़, सरोजिनी नायडू, इंदिरा गांधी यहाँ तक कि लेडी माउंटबेटन तक ना कर सकी, वो आज कोरोनाजान ने कर दिखाया। इस परिवर्तन के काल ने मुझ जैसे कई पतियों को अपनी सुप्तप्राय प्रतिभा के प्रति जागरूक किया है। मैं एक बुरा व्यंग्यकार हो सकता हूँ परंतु आज मैंने इस सत्य का साक्षात्कार किया कि बर्तन माँजने में मेरा कोई सानी नहीं है। तनिक अभ्यास से बर्तन प्रक्षालन के क्षेत्र में मैं नए कीर्तिमान स्थापित कर सकता हूँ, गति और गुणवत्ता दोनों में।

बर्तन माँजते हुए मुझे उनमें कई राजनैतिक चरित्र दिखे। बर्तन भिन्न भिन्न प्रकार के होते हैं। जैसे तवा काले रंग का होता है। तवा भारतीय राजनीति के कुछ हैदराबादी की भाँति होता है, जिसपर पराठे को कितना ही जलाएँ उसके चिन्ह परिलक्षित नहीं होते। तवे की पीठ का ढीठ कालापन ऐसी सांप्रदायिक पार्टियों के सेक्युलरिज्म की भाँति होता है, जिसके ऊपर उनकी स्वयं की मतांधता छुपी रहती है।

कुछ नेता नॉन स्टिक प्रवृत्ति के होते हैं। यह किसी दल या विचारधारा से नहीं चिपकते। यह एक दल से दूसरे दल भटकते रहते हैं। आप इनके ऊपर डोसा बनाएँ या चीला, अनुभवहीन हाथों में प्रत्येक प्रकार के खाद्य की परिणति भुर्जी स्वरूप में होती है। जिस प्रकार विभिन्न योनियों से गुजरता हुआ मनुष्य अंतत: ब्रह्म में लीन होता है, दर्द हद से गुज़र के दवा होता है, नॉनस्टिक नेता पार्टी दर पार्टी भटक कर अंततः भाजपाई होता है। अंतरात्मा की पूँछ पकड़ कर वह अपने राजनीतिक निर्वाण को प्राप्त करता है।

एक होता है बेलन। इस बर्तन का शास्त्रों में एक विशेष ही स्थान बताया गया है। यही एक बर्तन है जिसका पाक कला के साथ साथ सामरिक मामलों में भी विशेष दखल है। यह भारतीय राजनीति के ताहिर हुसैन हैं। तवा नेता से एक कदम आगे यह जुझारू प्रकृति के होते हैं और वीर रस से ओतप्रोत होते है। इनका उत्साह विचारधारा तक सीमित नहीं होता है, वरन ये मैन-ऑफ-एक्शन होते हैं। बेलन नेता बेलनाकार होता है, सौंदर्यबोध से दूर रहता है, अक्सर एक ही स्वेटर कई कई दिनों पहनता है और जिस प्रकार प्रकार बेलन भिन्न भिन्न प्रकार की सुंदर कारीगरी, कशीदाकारी के लिए नहीं जाना जाता है, यह भी अपने आकार, मारक शक्ति एवम् सौंदर्यहीनता के लिए जाना जाता है।

फिर आते हैं चम्मच। इनके अस्तित्व का ध्येय भारतीय भोजन पद्धति में दाल मे घी मिलाने तक होता है। घी मिलाने के बाद इन्हें थाली में किनारे रख दिया जाता है। ऐसी प्रवृत्ति के नेता, दरअसल नेता होने का आभास भर देते हैं, पूछता इन्हें इन्हीं की पार्टी में कोई नहीं है। इनका मुख्य कार्य भोजन के क्षेत्र में ना होकर संगीत के क्षेत्र में होता है। कीर्तनों में ये ढोलक पर बजाए जाते हैं और ख़ुशी के समय यह थाली-सम बड़े नेताओं के संसर्ग में आ कर शोर मचाते हैं। जब तक यह किसी दल में नहीं होते, ट्रोल कहलाते हैं और किसी फ़्लू की भाँति अपमानित होते रहते हैं। जिस प्रकार गरीब सा शेरू नामधारी कुत्ता साहब के घर पहुँच कर सभ्य विलायती टॉमी हो जाता है, यह एक शक्तिशाली थाली के संपर्क में आकर आम नजले से कोरोना-सम सशक्त बैकरूम बॉय एवम् राजनैतिक विश्लेषक बन जाते हैं। उसके बाद यह एक चैनल से दूसरे चैनल, एक अख़बार के दूसरे अख़बार तक संक्रमित करते हैं।

जिस प्रकार कुछ अच्छी गुणवत्ता के चम्मच डाइनिंग टेबल की शोभा बढ़ाते हैं, और ऐसे टेबल पर बैठते हैं मानो उन्हें भोजन से कुछ लेना देना ही नहीं है, वैसे ही ऐसे चम्मच वर्ग के कुछ मनोहारी और छबीले सदस्य होते हैं, जो काम तो अन्य चम्मचों के समान ही करते हैं परंतु स्वयं तो निष्पक्ष पत्रकार या अराजनैतिक बुद्धिजीवी के रूप में स्थापित करते हैं और परोक्ष रुचि को छुपा कर भोजन से उदासीनता प्रदर्शित करते रहते हैं। अंत में आता है प्रेशर कुकर। यह वास्तव में एक कड़ाही या भगोना ही होता है परंतु अभिजात्य परिवार में पैदा होने के कारण अलग ठसके में रहता है और अन्य बर्तनों की ओर ‘यू ब्लडी इंडियन’ के भाव से देखता है। इसकी यह प्रबल धारणा रहती है कि यह अन्य बर्तनों पर शासन करने के लिए बना है और यदि अन्य बर्तन इसे शासन में नहीं लाते, यह इसे उनका ही दुर्भाग्य मानता है।

जिस प्रकार प्रेशर कुकर वर्ग के नेता अपने उपनाम एवम् दादी जैसा नाक के लिए चहुँओर सराहे और सम्मानित किए जाते हैं, एक कुलीन प्रेशर कुकर अपनी संभ्रांत सीटी और सेफ़्टी वाल्व के लिए जाने जाते हैं। जो काम इनके गाँव वाले गरीब कज़िन जैसे कड़ाही और पतीला बिना आवाज़ करते हैं, ये ज़ोर ज़ोर से सीटी बजा बजा के करते हैं। इनकी एक और महान प्रतिभा यह होती है कि जब इन्हें सत्ता के स्टोव से उतार दिया जाता है, उसके बाद भी इनमें अपनी कुलीनता का इतना प्रेशर बना रहता है कि ये रूक रूक कर सीटी मारते रहते हैं। ये अपनी चमक, रूप और अदा में अन्य बर्तनों से भिन्न होते हैं और जनता का बहुत प्रेम पाते हैं। ये स्वयं को बर्तन समाज को परमात्मा का दिया गया वरदान मानते हैं, और मानते हैं कि यदि बर्तन समाज मूर्खतावश इन्हें सत्ताच्युत करता है तो देर-सबेर ऐसे समाज का पतन सुनिश्चित है।

आज के कोरोना देवी की सेवा मे किए गए गृहकार्य के दौरान अर्जित विचारों को पाठकों सो बाँट कर मन हर्षित है। आशा है कोरोना देवा के प्रस्थान की मँगल घड़ी तक, नया व्यंग्य संग्रह तैयार हो जाएगा। इन दिनों पाठकगण घर पर रहें, सुरक्षित रहें। जब आप बाहर आएँगे, एक असफल व्यंग्यकार और सफल बर्तनकार आपके समक्ष अपने लेख के साथ होगा।

आपबीती: मुझे SFI नेता ने कहा ‘भाजपा’ वालों के साथ सोओ, बाद में विक्टिम कार्ड खेलना, हम देख लेंगे

प्रेसिडेंसी कॉलेज की प्रियंका दास ने फेसबुक पर अपना एक अनुभव शेयर किया है, जो सोशल मीडिया पर काफ़ी वायरल भी हो रहा है। प्रियंका दास के बारे में बता दें कि वो एसएफआई की सदस्य और समर्थक रही थीं। एसएफआई वामपंथी छात्र संगठन है, जो सीपीआई का ही एक भाग है। प्रियंका ने बताया कि उन्होंने एसएफआई की झूठी बातों पर भरोसा कर लिया, जो उनकी ग़लती थी। उन्होंने एक मयाबन गांगुली का नाम लिया और बताया कि उस पर कार्रवाई करवाने के लिए ही वो एसएफआई में गई थी लेकिन कुछ नहीं हुआ। प्रियंका ने आगे बताया कि मयाबन वो व्यक्ति है, जो उनके पास तब आया था जब वो फर्स्ट ईयर में थीं।

गांगुली ने प्रियंका से जो कहा, वो चौंकाने वाला था। उसने सलाह दी कि प्रियंका को भाजपा के नेताओं के साथ सोना चाहिए और बाद में विक्टिम कार्ड खेलना चाहिए। गांगुली का कहना था कि एसएफआई बाद में उसे बचाएगा और ऐसे ही भाजपा को उखाड़ फेंका जाएगा। प्रियंका ने बताया कि ये सब सुन कर उन्हें शौक लगा क्योंकि वो एक छोटे शहर से आई थीं और उन्हें लगता था कि सब कुछ अच्छा होगा।

इसके बाद मयाबन ने उन्हें डराना शुरू कर दिया। अगर वो किसी से बात कर रही होतीं तो मयाबन गांगुली आ धमकता और और उनके साथी को धक्का देकर अजीब से व्यवहार करता। वो बार-बार प्रियंका को घूरता रहता। एसएफआई वालों को पता था कि प्रियंका डरी हुई हैं, फिर भी वो कॉल कर-कर के धमकी देते थे। बाद में चुनाव आने पर उन्हें महत्व दिया जाने लगा और एसएफआई के बाकी नेताओं ने बताया कि मयाबन पर कार्रवाई की जाएगी। उनकी इन्हीं बातों को मान कर प्रियंका ने अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए हो रहे डिबेट में एसएफआई की तरफ से शिरकत की।

प्रियंका ने फेसबुक पर शेयर किया अपना दर्द

प्रियंका ने बताया कि वो लीगल एक्शन भी ले सकती थीं लेकिन उनके पास न तो उतना धन है और न ही समर्थन। उन्होंने बताया कि वो डरी हुई थीं लेकिन एसएफआई वालों ने उनका मजाक बनाना नहीं छोड़ा। प्रियंका ने अपने दर्द शेयर किया तो कई लोगों ने सोशल मीडिया पर उनका समर्थन किया। उन्होंने बताया कि फ़िलहाल उनके पास कोई पुख्ता सबूत नहीं है क्योंकि कैम्पस में ऐसे कई लोग हैं।

जब हमने फेसबुक के माध्यम से उनसे बात करने की कोशिश की और पूछा कि क्या वो इस मुद्दे पर हमसे बात करना चाहेंगी, तो उन्होंने ये कहा: “नहीं। सुनिए, हम वामपंथी ऐसे काम नहीं करते। वो व्यक्ति उचित पूछताछ के लिए भेज दिया गया है और हम इसे अपनी युनिवर्सिटी तक ही रखना चाहेंगे। ये कोई ऐसी बात नहीं है जिसे दक्षिणपंथी प्रोपेगंडा के लिए इस्तेमाल किया जा सके। इसलिए ऐसा (साक्षात्कार) मत कीजिए। जिस व्यक्ति ने ये सब किया उसे वामपंथी यूनियन ही सजा देगा। दूसरी पार्टियों से कहीं अलग, वामपंथी पार्टियाँ अपनी गलतियों को स्वीकारती है और उसे सही करती है। कृपया इस सन्देश को भी शेयर करें।”

प्रियंका दास से हुए चैट का स्क्रीनशॉट

माइक पर ‘अल्लाह का अजाब’ चिल्लाने वाले ‘शांतिप्रिय’ क्या इन आँकड़ों पर भी कुछ बोलेंगे?

एक तरफ जहाँ भारत समेत पूरी दुनिया कोरोना से लड़ने को हर सम्भव कदम उठा रही है, एक के बाद एक देश खुद को लॉक डाउन करता जा रहा है। वहीं इस वैश्विक महामारी से लड़ने में केंद्र और राज्य सरकारों का सहयोग करने की जगह समुदाय विशेष ने अलग ही माहौल बनाया है। सोशल मीडिया पर वायरल इनके वीडियो में किसी ने कोरोना को कुरान से निकला घोषित कर दिया जिससे समुदाय विशेष को डरने की कतई जरूरत नहीं, तो किसी ने इसे अल्लाह का अज़ाब करार दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विवादास्पद मजहबी गुरु ने इस संवेदनशील विषय पर कहा था कि उइगरों से क्रूरता करने के कारण अल्लाह ने चीन पर इस वायरस का कहर भरपाया है और उन्हें दंडित किया है। एक ऑडियो में धर्मगुरु को चीन से कहते सुना जा सकता है कि याद करो कैसे उन्होंने उइगरों को धमकी दी थी और दो करोड़ मु###नों की जिंदगी बर्बाद करने की कोशिश की। मु###नों को शराब पीने के लिए मजबूर किया गया, उनकी मस्जिदों को तोड़ दिया गया और उनकी पवित्र पुस्तकों को जला दिया गया। इलियास ने कहा कि चीन ने सोचा कि कोई भी उन्हें चुनौती नहीं दे सकता, लेकिन अल्लाह सबसे शक्तिशाली है, अल्लाह ने चीन को सजा दी।

वहीं शाहीन बाग़ की महिला प्रदर्शनकारियों ने इसे मोदी के किए की सजा बतलाया। मीडिया से बातचीत में शाहीन बाग की एक महिला प्रदर्शनकारी ने कहा था, “यह अल्लाह का अज़ाब है, मैं कोरोना वायरस के फैलते प्रकोप से जरा भी नहीं डरती हूँ। अगर सरकार को हमारी चिंता है, तो उन्हें पहले ये काला कानून वापस लेना होगा।”

इन सब मूर्खतापूर्ण बयानबाजियों के बीच कोरोना महामारी से बेहाल इस्लामी देशों में कोरोना से संक्रमित मरीजों और हुई मौतों के आँकड़ों पर एक नजर डालना समीचीन होगा।

चीन और इटली के बाद कोरोना वायरस से अगर कोई देश सबसे ज्यादा संकटग्रस्त है तो वह इस्लामिक मुल्क ईरान है जहाँ अब तक इस वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या 23,049 पहुँच चुकी है जिसमें से कुल 1812 लोगों की मौत हो चुकी है। इसी तरह मलेशिया में 1518 मामले और 14 मौतें, तुर्की में 1236 मामले और 30 मौतें, और पाकिस्तान में अब तक 825 संक्रमण के मरीज तथा 6 मौतों की खबर आई है।

इनके अलावा इंडोनेशिया से 579 मामले और 49 मौतें, बहरीन से क्रमशः 339 और 2, सऊदी अरबिया से 562 कोरोना मामले और शून्य मौतें फिलहाल तक, तथा इराक से 266 मामले सामने आए हैं जिनमें से 23 की मौत हो चुकी है। इसी प्रकार क़तर से 494 कोरोना संक्रमित मरीजों की पुष्टि की खबरें आईं हैं, जबकि अल्जीरिया से अब तक 201 पॉजिटिव मामले और 17 मौतों की खबर आ चुकी है। यही हाल अफगानिस्तान आदि इस्लामी देशों का भी है।

इन दुर्भाग्यपूर्ण खबरों और आँकड़ों को जुटाने का मकसद किसी मौत का मखौल उड़ाना नहीं है, यह सिर्फ उन घटिया चरमपंथी कठमुल्लों और बुर्कानशीं महिलाओं को आईना दिखाना है जो किसी वैश्विक महामारी के समय भी यह कहने का साहस जुटा पाते हैं कि यह बिमारी सिर्फ उन्हें होगी जो अल्लाह को नहीं मानते। समझ नहीं आता कि ऐसे लोग, इस्लामिक देशों में होतीं इन मौतों पर अब क्या जवाब देंगे?

भारत में 63 लाख, विश्व में 200 करोड़ को हो सकता है कोरोना, अगर सावधानी नहीं बरती गई

चीन के वुहान से शुरू हुआ कोरोना वायरस आज लगभग पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेने को आतुर नजर आ रहा है। जिससे निपटने के लिए पूरी दुनिया आज लॉकडाउन के मुहाने है। भारत में भी कई प्रदेशों ने खुद के सम्पूर्ण लॉक डाउन की जहाँ घोषणा कर दी है, वहीं देश भर के उन 75 जिलों को भी लॉकडाउन कर दिया गया है जहाँ कोरोना से संक्रमित रोगी पाए गए हैं और जहाँ इसके संक्रमण के फैलने की आशंका बेहद ज्यादा हो चुकी है।

ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि कोरोना संक्रमण किस कदर फैलता है। मैथमैटिकल मॉडल के जरिये इसके संक्रमण के पैटर्न को समझ, हम इसकी रोकथाम के लिए जरूरी लॉकडाउन, सोशल डिस्टेंसिंग और हाथ धोने जैसे तौर तरीकों की अहमियत को भी समझ सकते हैं। इन्हीं सब पर ऑपइंडिया के अजीत भारती ने आईआईएम अहमदाबाद से पढ़े नीतेश से बात की जिहोंने आँकड़ों की मदद से इस महामारी के फैलने पर विस्तार से बताया।

भारत की स्थिति समझने के लिए, सबसे पहले चीन के आँकड़ों को समझने की जरुरत है। 22 जनवरी को चीन में कोरोना संक्रमण के सिर्फ 548 केस थे, जो अगले तीन दिन यानी 25 जनवरी तक 1000 पर पहुँच गए, ये संख्या 1 फरवरी तक 1000 से 10000 और अगले 12 दिनों में 50000 क्रॉस कर गई।

इटली की बात करते हुए नीतेश ने कहा कि वहाँ कोरोना के पहले 100 मामले 23 फरवरी को हुए, जो 29 फरवरी तक 1000 और 7 मार्च तक 5000 तक ही पहुँचे थे पर उसके बाद कोरोना संक्रामक मरीजों की संख्या में वहाँ एक्सपोनेंशियल वृद्धि दिखी और मामले 10 मार्च तक 10000, फिर 21 मार्च तक 50000 पार कर गए।

चीन और इटली के बाद भारत में फैलते इस संक्रमण के आंकड़ों और इस घातक वायरस की एक्सपोनेंशियल वृद्धि को समझाते हुए नीतेश ने कहा कि भारत में 14 मार्च को जहाँ पहली बार कोरोना पेशेंट की संख्या 100 छुई थी वह अगले 6 दिन में दोगुनी होकर 200 और उसके अगले 2 दिन में 200 से 400 तक पहुँच गई।

नीतेश ने अपने मॉडल के आधार पर बताया कि यदि इसी तरह ये संख्या बढ़ती रही तो भारत में कुल कोरोना संक्रामक मरीजों की तादाद 63 लाख तक पहुँच सकती है जबकि यदि लॉकडाउन (समुदायों, शहरों, जिलों, राज्यों, देशों के बीच आवाजाही पर प्रतिबन्ध), सोशल डिस्टेंसिंग (यानी, लोगों के बीच दूरी बना कर रहना), आदि निर्देशों का पालन किया गया तो भारत में कोरोना की यह संभावित संख्या 1000 गुना कम होकर महज 6000 के आसपास रह सकती है। चार्ट में अगर आप वैश्विक स्थिति देखेंगे तो चीन के अलावा बाकी देशों के 2 अरब लोग संक्रमित हो सकते हैं। इसीलिए, बार-बार हाथ धोना, लोगों से मिलना-जुलना बंद करना, अनावश्यक कामों से घर से बाहर निकलना बंद करना आदि कुछ ऐसी सावधानियाँ हैं जिससे इस महामारी के फैलने की गति को रोका जा सकता है।

कोरोना के संक्रमण को रोकने और इसके वैज्ञानिक मॉडल पर विस्तार से समझने के लिए वीडियो देखें:

डॉक्टरों को प्रोत्साहन राशि, बुजुर्गों को 3 माह का पेंशन, लोगों को 1 महीने का राशन, छात्रों को स्कॉलरशिप: टूटी CM नीतीश की नींद

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच अब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भी आँख खुली है। सोमवार (मार्च 23, 2020) को उन्होंने ताबड़तोड़ घोषणाएँ कर के डैमेज कंट्रोल का प्रयास किया। बिहार में कोरोना वायरस के कारण क़तर से लौटे एक मरीज की मौत हो चुकी है। जिस तरह से महाराष्ट्र और दिल्ली कमाने गए लोग लौटे हैं, उसे देखा जाए तो स्थिति आने वाले दिनों में और बिगड़ सकती है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि सभी डॉक्टरों और मेडिकल कर्मचारियों को एक अतिरिक्त महीने का वेतन ‘प्रोत्साहन राशि’ के रूप में दिया जाएगा क्योंकि कोरोना से लड़ने के लिए वो लगातार लगे हुए हैं।

इसके अलावा सभी राशन कार्ड धारकों को 1 महीने का राशन पहले ही दे दिया जाएगा ताकि उन्हें खाने-पकाने की कमी न हो और वो घर में रह सकें। सरकार ने रिटायर्ड बुजुर्ग कर्मचारियों पर भी ध्यान दिया है। राज्य में जितने भी पेंशन धारक हैं, उन्हें अगले तीन महीने की पेंशन राशि अभी ही दे दी जाएगी ताकि वो अपना और परिवार का ख्याल रख सकें। राशन कार्ड धारकों को 1000 रुपए भी दिए जाएँगे। इन सबके अलावा 31 मार्च तक पहली से लेकर बारहवीं कक्षा तक के सभी छात्रों को स्कॉलरशिप प्रदान कर दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की है कि कोरोना का कोई भी लक्षण होने पर वो छिपाएँ नहीं। साथ ही जनता से उन्होंने कहा है कि जितना भी हो सके, वो अपने घरों में रहें। इसीलिए 3 महीने का वृद्धजन पेंशन, दिव्यांग पेंशन, विधवा पेंशन और वृद्धावस्‍था पेंशन पहले ही देने का फ़ैसला लिया है। ये राशि सीधे लाभार्थियों के खाते में डाली जाएगी। बिहार में 31 मार्च तक लॉकडाउन है और इस स्थिति में सरकार लगातार लोगों को इसका कड़ाई से पालन करने को कह रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा है कि सभी राज्य ये सुनिश्चित करें कि लोग इस लॉकडाउन का कड़ाई से पालन करें।

बिहार में फिलहाल दवा की दुकान, राशन की दुकान, डेयरी, पेट्रोल पंप को लॉकडाउन की पाबंदियों से अलग रखा गया है। वहीं बैंक, पोस्ट ऑफिस, एटीएम और मीडिया कार्यालय भी लॉकडाउन से बाहर रहेंगे। बिहार में 520 यात्रियों को सर्विलांस पर रखा गया है, जिनकी जाँच की जा रही है। राज्य में अस्पतालों की कमी को देखते हुए सरकार इस प्रयास में लगी है कि कोरोना से बचाव के उपायों पर ज्यादा जोर दिया जाए।

अम्बानी ने खोला खजाना: कोरोना मरीजों के लिए अस्पताल, इमरजेंसी सेवाओं को फ्री तेल, प्रतिदिन 1 लाख मास्क का उत्पादन

रिलायंस ने कोरोना वायरस को देखते हुए लोगों की मदद के लिए क़दम बढ़ाए हैं। रिलायंस ने कहा है कि वो संकट की इस घड़ी में सरकार की मदद करने के लिए तैयार है। रिलायंस ने सिर्फ़ दो सप्ताह में कोरोना वायरस के मरीजों के लिए अस्पताल बनाया है। ये देश का पहला ऐसा अस्पताल है, जो केवल कोरोना वायरस के मरीजों के लिए होगा। एचएन रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल ने भी कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों का इलाज करने और क्वारंटाइन की सुविधा देने की घोषणा की है। साथ ही रिलायंस फाउंडेशन देश के विभिन्न शहरों में लोगों को मुफ्त भोजन भी देगा। ये काम कई एनजीओ के माध्यम से किया जाएगा।

महाराष्ट्र के लोधीवाली में भी एक आइसोलेशन सेंटर बनाया गया है। रिलायंस लाइफ साइंस ने विदेश से मेडिकल कीटस इम्पोर्ट करने का फ़ैसला लिया है। डिमांड को पूरा करने के लिए कम्पनी ने प्रतिदिन 1 लाख फेस मास्क का निर्माण शुरू कर दिया है। इसके अलावा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री राहत कोष में 5 करोड़ रुपए का दान दिया गया है। जियो ‘कोरोना हारेगा, इंडिया जीतेगा’ इनिशिएटिव शुरू किया है, जिसमें लोगों को घर में रह कर काम करने और परिवार व प्रियजनों से जुड़े रहने के लिए उत्साहित किया जा रहा है।

जियो हेल्थ केयर ने घोषणा की है कि वो लोगों को घर में रह कर ही कोरोना के लक्षण जाँच करने की सुविधा देना शुरू कर दिया है, जिससे अस्पतालों में आवश्यक रूप से भीड़ न बढ़े। रिलायंस ने तकनीक के माध्यम से सरकार द्वारा जारी की गई हेल्पलाइन नंबर को लोगों तक पहुँचाने में भी मदद करने का ऐलान किया है। जियो ने बिना किसी सर्विस चार्ज के लोगों के घर तक ब्रॉडबैंड पहुँचाने का फ़ैसला लिया है, जिससे लोग ‘वर्क फ्रॉम होम’ कर सकें। साथ ही अब जियो धारकों को ज्यादा वॉइस कॉल डेटा भी दिया जाएगा।

साथ ही सभी इमरजेंसी सेवाओं की गाड़ियों को रिलायंस अपने पेट्रोल पम्प्स पर मुफ्त में तेल भी देगा। पूरे देश में रिलायंस के 736 ग्रोसरी स्टोर्स हैं, जिन्हें लोगों के डिमांड्स को पूरा करने के लिए तैयार किया जा रहा है। अब ये सभी स्टोर्स सुबह 7 बजे से रात 11 बजे तक खुले रहेंगे। इन स्टोर्स में सब्जियों व अन्य चीजों का इंतजाम किया जाएगा। साथ ही बुजुर्गों के लिए होम डिलीवरी की व्यवस्था की जाएगी।

रिलायंस ने अपने कर्मचारियों को भी भरोसा दिया है कि वो स्थायी हों या कॉन्ट्रैक्ट बेस्ड, उन्हें सैलरी मिलती रहेगी- भले ही उनसे काम लिया जाए या नहीं। साथ ही जिन भी कर्मचारियों का वेतन 30,000 से कम है, उन्हें महीने में 2 बार वेतन दिया जाएगा ताकि उन्हें कैश की कमी न हो।

फिलिस्तीन में कोरोना वायरस के 2 केस आए सामने, दोनों हाल ही में पाकिस्तान से लौटे थे, 1,270 लोग क्वारंटाइन

फिलीस्तीन में अधिकारियों ने कोरोना वायरस संक्रमण के दो मामलों की रविवार (22 मार्च, 2020) को पुष्टि की। फिलिस्तीन के इन लोगों ने पाकिस्तान की यात्रा की थी और वापसी पर उन्हें पृथक कर दिया गया। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “दो नागरिकों में पाकिस्तान से लौटने के बाद कोविड-19 संक्रमण की पुष्टि हुई है।” इन दोनों के संक्रमित होने की पुष्टि के साथ ही गाजा में कोरोना संक्रमण का पहला केस सामने आया।

संक्रमित मरीजों को रफा शहर के एक अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। इससे पहले इजराइल और मिस्र से गाजा में प्रवेश करने वाले लगभग 1,270 लोगों को क्वारंटाइन कर दिया गया था। वेस्ट बैंक में 55 लोगों में कोरोना वायरस का पता चला है। फिलिस्तीन में अब तक मौत के कोई मामले सामने नहीं आए हैं। एहतियात के तौर पर वेडिंग हॉल और बाजार बंद कर दिए गए हैं।

उप स्वास्थ्य मंत्री यूसेफ अबू अल-रीश ने कहा, “ये दो मामले उन लोगों में से दर्ज किए गए हैं, जो गाजा वापस आए और यहाँ रहने वाले लोगों के साथ नहीं मिले।” अब यहाँ पर सीमित परीक्षण क्षमताओं के साथ इस क्षेत्र में पैनिक की स्थिति पैदा हो गई है। गाजा में लगभग 20 लाख लोगों की देखभाल के लिए मात्र 60 ICU बेड हैं। कर्मचारियों की भारी कमी के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है।

फिलिस्तीनी शरणार्थी UNRWA के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसी के गाजा निदेशक माथियास श्मले ने कहा था, “मैं जो कुछ भी सुन रहा हूँ, अगर यह प्रकोप उस भयानक स्थिति में पहुँच जाता है, जहाँ आपको इलाज के लिए 60 से अधिक आईसीयू बेड की आवश्यकता होती है, तो यह काफी मुश्किल हो जाएगा और निश्चित तौर पर यह एक विशालकाय आपदा में तब्दील हो सकता है।” बता दें कि कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवादी संगठन हमास और इजरायल सरकार के बीच चल रहे संघर्ष के कारण गाजा स्ट्रिप 2007 से नाकाबंदी के अधीन है।