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लॉकडाउन के बाद भी रामपुर के मदरसे में पढ़ रहे थे बच्चे, पुलिस ने संचालक को लिया हिरासत में, FIR का आदेश

इन दिनों पूरा विश्व कोरोना वायरस के खिलाफ अपने-अपने तरीके से जंग लड़ रहा है। वहीं भारत में भी इसकी रोकथाम के लिए तरह-तरह के उपाय किए जा रहे हैं। यही कारण है कि भारत सरकार ने पूरे देश में 21 दिनों के लिए लॉकडाउन घोषित कर दिया है, लेकिन इन सभी घोषणाओं को भारत में कुछ लोग नजरअंदाज कर रहे हैं। कोई मदरसों में बच्चों को इस्लामी तालीम देने में लगा हुआ है तो कोई मस्जिदों में नमाज अदा करने में लगा हुआ है। कुछ ऐसा ही एक मामला सामने आया है उत्तर प्रदेश के जिला रामपुर से। जिले में घोषित लॉकडाउन के बाद भी एक मौलवी द्वारा मदरसे में बच्चों को पढ़ाया जा रहा था। इसकी जानकारी जब जिला प्रशासन को हुई तो उसने तत्काल कार्रवाई करते हुए मदरसा संचालक को हिरासत में ले लिया।

दरअसल जिले में लॉकडाउन की घोषणा के बाद भी टाँडा क्षेत्र के गाँव लांबा खेड़ा में मदरसा को बंद नहीं किया गया। इतना ही नहीं मदरसे में करीब 100 बच्चों को पढ़ाया जा रहा था। इसकी जानकारी जैसे ही जिले के जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह को हुई तो उन्होंने तत्काल संबंधित विभाग को जाँच के आदेश दे दिए। जाँच में शिकायत सही पाए जाने पर डीएम ने मदरसा संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दे दिए गए।

इसके बाद डीएम ने बताया कि जिले में लॉकडाउन का सख्ती से पालन कराया जाएगा, क्योंकि जनता के हित में है और जरा सी लापरवाही सभी को भारी पड़ सकती है। इसे देखते हुए किसी को भी घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। डीएम ने बताया कि इस दौरान इस दौरान गैस एजेंसी, पेट्रोल पंप और जरूरी सामानों की दुकानें खुली रहेंगी। वहीं लॉकडाउन की घोषणा के बाद भी बेवजह सड़कों पर घूम रहे 10 लोगों को रामपुर पुलिस ने हिरासत में लेकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

रामपुर में खुले मदरसे की दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर की कटिंग

आपको बता दें कि बीते दिनों लॉकडाउन के दौरान मेरठ में पुलिस ने मस्जिदों में नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी थी। इसके बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने न तो 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की पालन किया और न ही शाम के पाँच बचते ही ताली, थाली बजाकर अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने वाले लोगों का अभिनंदन किया। इसके बाद भी शाम होने ही सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग सड़कों पर आए और पुलिस प्रशासन की अपील का विरोध करने लगे। घंटो समझाने के बाद भी लोग नहीं माने इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की चेतावनी दी तब कहीं जाकर मुस्लिम समुदाय के लोग अपने घरों को रवाना हुए।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या 41 हो गई है। वहीं मोदी जी द्वारा 21 दिनों के लिए घोषित किए गए लॉकडाउन के बाद बाजारों में खरीददारी करने वालों लोगों की भीड़ जुट गई है, जिसे देखते हुए योगी सरकार ने लोगों को घर-घर जरूरी सामान पहुँचाने की बात कही है।

मोदी सरकार 80 करोड़ लोगों को देगी ₹2 और ₹3 प्रति किलो गेहूँ-चावल: 7 किलो प्रति व्यक्ति की दर से 3 महीने के लिए एडवांस राशन दिया जाएगा

पूरा विश्व कोरोना की महामारी से जूझ रहा है। इसी बीच मोदी सरकार ने कोरोना से जंग करने के लिए पूरी तरह से कमर कस ली है। पहले तो मोदी सरकार ने 21 दिनों का पूरे देश में लॉकडाउन घोषित किया अब सरकार कमर सकते हुए कोरोना से जंग लड़ने के लिए एक और बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने अब देश के 80 करोड़ लोगों को 2 रुपए प्रति किलो गेंहूँ और 3 रुपए प्रति किलो चावल देने का फैसला किया है। साथ ही राज्य सरकारों से तीन माह का राशन खरीदने की बात कही है। जिससे कि कोरोना के खिलाफ इस जंग में सभी देश वासियों को समय से राशन मिल सके।

पीएम मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया। कैबिनेट बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने प्रेस कॉन्फ्रेस करके कहा कि देश के 80 करोड़ लोगों को सस्ते दर पर राशन दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार देश के 80 करोड़ लोगों को हर महीने 7 किलो प्रति व्यक्ति राशन देगी, जोकि 3 महीने के लिए एडवांस होगा। वहीं जावड़ेकर ने मीडिया को बताया कि सरकार 80 करोड़ लोगों को 27 रुपए प्रति किलो वाला गेहूँ मात्र 2 रुपए प्रति किलोग्राम में और 37 रुपए किलोग्राम वाला चावल 3 रुपए प्रति किलोग्राम में देगी।

उन्होंने यह भी बताया कि इस पर 1 लाख 80 हजार करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। यह तीन महीने के लिए राज्यों को एडवांस में दिया जाएगा। इस दौरान जावड़ेकर ने कोरोना के बचाव के लिए लोगों से सामाजिक दूरी बनाए रखने की अपील की। साथ ही कहा कि किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। सरकार के पास पर्याप्त राशन का भंडार है। इसलिए किसी भी कीमत पर घरों से बाहन न निकलें साथ ही इस बीमारी से लड़ने के लिए कुछ भी काम करने से पहले हाथ धोना और बार-बार हाथ धोना। वहीं जावड़ेकर ने लॉकडाउन को सकारात्मक रूप से लेते हुए कहा कि आप लोगों के लिए परिवार के साथ समय बिताने का अच्छा मौका है और 21 दिनों तक घरों के अंदर ही रहे।

उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यक सेवाओं जैसे दूध, पशुचारा राशन आदि की सभी दुकानें हर दिन खुली रहेंगी। इसलिए हमें दुकानों पर जाकर भीड़ करने की आवश्ययकता नहीं है। इस दौरान सभी लोग अपने बीच कम से कम 6 फुट का अंतर रखें। हमें डरने की नहीं बल्कि समझदारी से काम लेने की जरूरत है।

आपको बता दें कि कोरोना महामारी की चपेट में अब तक विश्व के 196 से अधिक देश आ चुके हैं। भारत में मरने वालों की संख्या 11, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 562 से अधिक हो गई है। इनमें से 41 मरीज ठीक हो चुके हैं। इन्ही आँकड़ों को देखते हुए भारत सरकार ने पूरे देश में 21 दिन यानी कि 14 अप्रैल तक के लिए लॉकडाउन घोषित कर दिया है। साथ ही मोदी ने लोगों से घरों में पहने की भी अपील की है उन्होंने कहा है कि अगर हम 21 दिन नहीं संभले तो हम 21 साल पीछे चले जाएँगे।

माँ शैलसुते के आशीर्वाद से संकट से बाहर निकलेगा देश: काशी के लोगों से बोले PM मोदी- दुनिया भर में 1 लाख लोग ठीक हो चुके हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (मार्च 24, 2020) को राष्ट्र के नाम अपने सम्बोधन में बड़ी घोषणा करते हुए पूरे देश में 21 दिनों के लिए सम्पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की। अब पीएम मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी सम्बोधित किया है। जहाँ पूरे देश में कोरोना के अब तक 600 मामले आ चुके हैं, उत्तर प्रदेश में भी 35 मरीज मिले हैं। हालाँकि, पूरे देश में लगभग 40 ऐसे लोग भी हैं, जो कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद ठीक भी हो चुके हैं। पीएम मोदी ने कैबिनेट की बैठक भी आज ‘सोशल डिस्टन्सिंग’ का पालन करते हुए की, जहाँ सभी मंत्रियों के लिए थोड़ी-थोड़ी दूरी पर कुर्सियाँ रखी गई थीं।

पीएम मोदी ने कहा कि आज काबुल में गुरुद्वारे में हुए आतंकी हमले से मन काफी दुखी है। उन्होंने इस हमले में मारे गए सभी लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना जाते हुए अपने सम्बोधन की शुरुआत की। नवरात्री की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है। माँ शैलपुत्री स्नेह, करुणा और ममता का स्वरूप हैं। उन्हें प्रकृति की देवी भी कहा जाता है। पीएम ने कहा कि आज देश जिस संकट के दौर से गुजर रहा है, उसमें हम सभी को माँ शैलसुते के आशीर्वाद की बहुत आवश्यकता है

प्रधानमंत्री ने वाराणसी की जनता से कहा कि आपका सांसद होने के नाते मुझे, ऐसे समय में आपके बीच होना चाहिए था। लेकिन आप यहाँ दिल्ली में जो गतिविधियाँ हो रही हैं, उससे भी परिचित हैं। पीएम मोदी ने कहा कि यहाँ की व्यस्तता के बावजूद वो वाराणसी के बारे में निरंतर अपने साथियों से अपडेट ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज कोरोनी के खिलाफ जो युद्ध पूरा देश लड़ रहा है, उसमें 21 दिन लगने वाले हैं। हमारा प्रयास है इसे 21 दिन में जीत लिया जाए। पीएम मोदी ने आगे कहा:

काशी का अनुभव शाश्वत, सनातन, समयातीत है। और इसलिए, आज लॉकडाउन की परिस्थिति में काशी देश को सिखा सकती है- संयम, समन्वय, संवेदनशीलता। काशी देश को सिखा सकती है- सहयोग, शांति, सहनशीलता। काशी देश को सिखा सकती है- साधना, सेवा, समाधान। संकट की इस घड़ी में, काशी सबका मार्गदर्शन कर सकती है, सबके लिए उदाहरण प्रस्तुत कर सकती है। देखिए इस बीमारी में जो बातें सामने आई हैं, उसमें सबसे बड़ी सच्चाई यही है कि ये बीमारी किसी में भेदभाव नहीं करती। ये समृद्ध देश पर भी कहर बरपाती है और गरीब के घर में भी कहर बरपाती है। कुछ लोग ऐसे हैं, जो अपने कानों से सुनते हैं, अपनी आँखों से देखते हैं और अपनी बुद्धि से समझते भी हैं। बस अमल नहीं करते हैं। ये एक प्रकार की दुर्योधन वृत्ति है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दौरान काशी के लोगों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग भी की और उनके विभिन्न सवालों का जवाब दिया। पीएम मोदी ने बताया कि कोरोना से संक्रमित दुनिया में 1 लाख से अधिक लोग ठीक भी हो चुके हैं और भारत में भी दर्जनों लोग कोरोना के शिकंजे से बाहर निकले हैं।

पाक: कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर हुई 1000, लापरवाही पर इमरान सरकार को कोर्ट ने फटकारा

पाकिस्तान में सरकार की लापरवाही के कारण कोरोना का संक्रमण अब विकराल रूप लेने की कगार पर है। बुधवार तक वहाँ 1000 कोरोना संक्रमित केसों की पुष्टि हो गई है। इनमें से 413 मरीज अकेले सिंध प्रांत के हैं, जबकि 115 बलूचिस्तान के और 296 पंजाब के हैं। इसके अलावा खैबर पनख्तूख्वा से 78 और राजधानी इस्लाबाद से 16 मामले सामने आए हैं। देश में महामारी के कारण मरने वालों की संख्या अब तक 7 हो गई है जिसमें एक डॉक्टर भी शामिल है। अब इन्हीं हालातों में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदइंतजामी देखकर इमरान सरकार को लाहौर हाइकोर्ट ने फटकार लगा दी है।

दरअसल, हाई कोर्ट ने कहा कि इमरान सरकार पूरे मामले को लेकर गंभीर नहीं है। कोर्ट ने कहा कि सरकार ने ईरान से तीर्थयात्रियों को समय पर वापस लाने के लिए प्रयास नहीं किया। यही नहीं जो यात्री ईरान से लौटे उन्‍हें घर जाने दिया गया, जबकि उन्‍हें 14 दिन तक अलग-थलग रखने की जरूरत थी। हाई कोर्ट ने कहा कि ये ईरान से आए लोग अब देश में कोरोना वायरस के प्रसार के बड़े स्रोत बन गए हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि इस महाआपदा को सही तरीके से सँभालने को लेकर गंभीर नहीं है।

डॉन वेबसाइट का 3:15 बजे अपडेट हुआ स्क्रीनशॉट

यहाँ बता दें कि पाकिस्तान सरकार की लापरवाही के कारण वहाँ की हालत इस समय बेहद गंभीर बताई जा रही हैं। द डॉन में छपी एक खबर के मुताबिक यदि इस समय कोरोना पर लगाम नहीं लगाई गई तो जून तक संक्रमित लोगों की संख्या लाखों में हो सकती है। खबर में बताया गया है कि कोरोना वायरस पूरी दुनिया को तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है। इसके साथ ही इससे लोगों में डर बैठ रहा है। मगर, अभी इसकी भयावह स्थिति आनी बाकी है। इसमें कहा गया है कि इससे निपटने के लिए पाकिस्‍तान को बड़े पैमाने पर एक्‍शन लेने की जरूरत है।

‘भय से मुक्त रहें, क्योंकि भय सबसे बड़ा पाप है’: कोरोना से जंग में जरूरी है स्वामी विवेकानंद का ‘प्लेग मैनिफेस्टो’ पढ़ना

ऐसा शायद पहली बार हुआ है जब पूरा विश्व किसी संक्रामक महामारी की चपेट में आया है। हालाँकि, कई बड़े देश अलग-अलग समय पर अकाल, प्लेग जैसे बड़े संकटों से गुजर चुके हैं। आज जब दुनिया कोरोना वायरस से उपजी बीमारी का सामना कर रही है, ऐसे में स्वामी विवेकानंद के 1899 के प्लेग घोषणा पत्र का जिक्र ज़रूरी हो जाता है।

मार्च, 1899 में जब कलकत्ता में प्लेग फैला था, तब स्वामी विवेकानंद ने प्लेग पीड़ितों की सेवा के लिए रामकृष्ण मिशन की एक समिति बनाई थी। उनके नेतृत्व में इस समिति में एक प्लेग घोषणा पत्र तैयार किया गया, ताकि स्वयंसेवकों के साथ आम जनता भी इससे अच्छी तरह परिचित हो सके कि किसी आपदा या महामारी के दौरान किन बातों पर किस तरह का संयम बरतने की आवश्यकता होती है। स्वामी विवेकांनंद का यह घोषणा पात्र (मैनिफेस्टो) हमें मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक रूप से समस्याओं से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है।

स्वामी विवेकानंद द्वारा जारी प्लेग मेनीफेस्टो (घोषणा पत्र) का मूल-पाठ

कलकत्ता के भाइयों,

  1. यदि आप प्रसन्न हों तो हमें भी प्रसन्नता का अनुभव होता है, और आपके दुःख में दुःख का। इसलिए इन कठिन विपरीत दिनों में हम आपके कल्याण के लिए प्रयास कर रहे हैं एवं अविराम प्रार्थना कर रहे हैं, आपको रोग से बचाने का तथा महामारी के भय से बचाने का।
  2. इस गंभीर रोग से – जिससे डरकर उच्च व नीच दोनों वर्ग के लोग, धनी और निर्धन नगर छोड़ कर भाग रहे हैं यदि हम पीड़ित हो जाते हैं और आपकी सेवा करते हुए विनष्ट हो जाते हैं तब भी हम अपने आप को भाग्यशाली समझेंगे क्योंकि आप सभी भगवान का स्वरूप हो। वह जो मिथ्याभिमान, अंध विश्वास या अज्ञानता से अन्यथा समझता है भगवान को आहत करता है और भयंकर पाप करता है। इस विषय में न्यूनतम संदेह नहीं है।
  3. हम आप से प्रार्थना करते हैं – निराधार भय के कारण संत्रास न करें। भगवान पर भरोसा करें और शांतिपूर्वक समस्या के समाधान का रास्ता खोजने का प्रयास करें। अन्यथा उन्हीं का साथ दें जो वैसा कर रहे हैं।
  4. डर कैसा ? प्लेग फैलने के कारण जो आतंक लोगों के दिलों में प्रवेश कर गया है उसका वास्तविक आधार नहीं है। प्रभु की इच्छा से जिस तरह का भयानक प्लेग अन्य स्थानों पर हुआ है वैसा कलकत्ता में नहीं है। सरकारी अधिकारी भी विशेषकर हमारे लिए मददगार साबित हुए हैं। फिर डर कैसा ?
  5. आइए, हम भय को त्यागें और भगवान के अनंत स्नेह पर विश्वास रखते हुए कमर कसें और कर्मक्षेत्र में उतरें। आइए हम शुद्ध और स्वच्छ जीवन जिएं। उसकी कृपा से रोग और महामारी का डर हवा में उड़न छू हो जायेगा।
  6. (क) हमेशा अपना घर, परिसर, कमरे, कपड़े, बिस्तर और नाली आदि स्वच्छ रखें।
    (ख) बासी और खराब हुआ भोजन न खाएं, इसके बजाय ताजा और पौष्टिक भोजन लें। निर्बल शरीर अधिक रोग प्रवण होता है।
    (ग) हमेशा मन प्रसन्न रखें। हर एक को एक बार मरना है। कायर मृत्यु की टीस से बार बार भुगतते हैं, केवल अपने मन के भय के कारण।
    (घ) डर उनको कभी नहीं छोड़ता जो अनैतिक साधनों से अपनी जीविका कमाते हैं या दूसरों को क्षति पहुंचाते हैं। इसलिए जब हम मृत्यु के बड़े भय के सामने हैं, हमें सब तरह के कदाचार से बचना है।
    (ङ) महामारी की अवधि में हम क्रोध और लोभ से विरत रहें – यद्यपि आप गृहस्थ हों।
    (च) अफवाहों पर ध्यान न दें।
    (छ) अंग्रेज सरकार किसी को जबरन टीका नहीं लागाएगी। केवल उन्हीं को टीका लगेगा जो तैयार हैं।
    (ज) पीड़ित रोगियों के इलाज में हमारे अस्पताल में हमारी परिचर्या और निगरानी में सभी पंथों, जातियों और महिलाओं के शील (पर्दा) का आदर करते हुए कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। धनिकों को भागने दीजिए! लेकिन हम गरीब हैं, हम गरीबों के दिल का दर्द समझते हैं। असहायों की सहायता ब्रह्मांड की मां स्वयं करती है। मां हमें विश्वास दिला रही है: डरो मत! डरो मत!

भगिनी निवेदिता और स्वामी विवेकानंद के अन्य मठवासी शिष्य ने कलकत्ता के लोगों की सेवा करने के लिए दिन रात मेहनत की। स्वामी विवेकानंद ने उनसे आग्रह किया – “भाई, यदि तुम्हारी सहायता के लिए कोई नहीं है, तो तुरंत बेलूर मठ में भगवान रामकृष्ण के सेवकों को सूचना भेजो। भौतिक रूप से जो संभव है ऐसी सहायता की कोई कमी नहीं होगी। माँ की कृपा से आर्थिक सहायता भी संभव होगी।”

प्लेग के दौरान स्वामी विवेकनंद ने बांग्ला भाषा में तैयार इस ‘प्लेग घोषणा पत्र’ को हिंदी में छपवाकर वितरित कराया था। इसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागृत करना और रोगियों तक मदद पहुँचाना था। इस प्लेग मैनिफेस्टो में विवेकानंद ने कहा था- “भय से मुक्त रहें, क्योंकि भय सबसे बड़ा पाप है।”

(स्रोत : पूर्ण साहित्य / खण्ड 9/ लेख: गद्य एवं कविताएं। प्रबुद्ध भारत खण्ड 111; 1 मई 2006)

सड़क पर कोरोना संक्रमण के लिए चेकिंग: UP पुलिस लोगों को दे रही ग्लव्स व मास्क, गाड़ियों को कर रही सैनिटाइज

लोग लॉकडाउन का सख्ती से पालन करें और क़ानून तोड़ने वालों को सज़ा मिले, इसके लिए यूपी पुलिस तरह-तरह के क्रिएटिव आईडिया आजमा रही है। इससे पहले हमने देखा था कि कैसे इसका पालन न करने वालों और बेवजह सड़क पर भटकने वालों के हाथ में प्लाकार्ड थमा कर उनकी तस्वीरें क्लिक की जा रही है। इन प्लाकर्ड्स पर क़ानून तोड़ने वालों को कोरोना का दोस्त और समाज का दुश्मन बताया गया है। यूपी में कोरोना के अब तक 35 मामले सामने आ चुके हैं, इसीलिए पुलिस एहतियातन सख्त क़दम भी उठा रही है ताकि लोग इस खतरनाक वायरस के संक्रमण से बचें और घर में रहें। इधर, पुलिस ने मॉक-ड्रिल कर के भी अपने कर्मचारियों को लोगों के टेस्ट करने का प्रशिक्षण दिया।

लेकिन, साथ-साथ पुलिस अन्य तरीकों से भी लोगों का ख्याल रख रही है। पुलिस अनाउंसमेंट के लिए लाउडस्पीकर का प्रयोग कर रही है। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप देख सकते हैं कि जैसे ही वो कार आई, पुलिस ने माइक से गाड़ी रोकने का निर्देश दिया ताकि अंदर के पैसेंजरों को चेक किया जा सके। जैसे ही लोग गाड़ी से उतरते हैं, पुलिस उनका टेम्परेचर चेक करती है। इसके लिए उन्हें एक निश्चित दूरी पर खड़ा किया जाता है और पुलिस अपने उपकरण से टेस्ट करती है।

इसके बाद लोगों को मास्क और ग्लब्स दिए जाते हैं और उन्हें पहनने को कहा जाता है। मामला संदिग्ध पाए जाने पर पुलिस उन्हें लेकर हॉस्पिटल जाती हैं। लेकिन हाँ, हॉस्पिटल ले जाने से पहले पुलिस स्प्रे मार कर गाड़ी को सैनिटाइज करना नहीं भूलती। ये है यूपी पुलिस। जहाँ एक तरफ वो अपराधियों को एनकाउंटर में मार गिराती है, वहीं दूसरी तरफ लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए उनकी जाँच करती है और उन्हें ज़रूरी चीजें मुहैया कराती है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट निर्देश है कि लोगों को ज़रूरी चीजें उनके घर तक मुहैया कराई जाए ताकि उन्हें घर से बाहर निकल कर बाजार न जाना पड़े। उन्होंने कहा कि राज्य के स्टॉक में अनाज और सब्जियों या फलों व दूध की कमी नहीं है, इसीलिए जनता को पैनिक होने या घबरा कर अपने घर में स्टॉक जमा करने की आवश्यकता नहीं है। उत्तर प्रदेश के पुलिस व प्रशासन के इन क़दमों के कारण उनकी खूब वाहवाही हो रही है।

गुरुद्वारे पर IS का हमला: 27 की मौत, 6 घंटे की मुठभेड़ के बाद 4 आतंकी भी मार गिराए गए

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में सिखों को निशाना बनाकर भीषण आतंकी हमला किया गया। गुरुद्वारे को आतंकियों ने निशाना हुआ। सुबह के करीब 7:45 बजे हमला हुआ। उस वक्त वहॉं 150 श्रद्धालु मौजूद थे। हमले में 27 लोगों की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य घायल हो गए।

सबसे पहले एक फिदायीन हमलावर ने खुद को उड़ा लिया। फिर उसके बंदूकधारी साथियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की। घटना की सूचना मिलते ही अफगान सुरक्षाबल एक्शन में आ गए। 6 घंटे की मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों ने 4 आतंकियों को मार गिराया। गुरुद्वारे में फँसे लोगों को रेस्क्यू कर लिया गया है। हमले की जिम्मेदारी आईएस ने ली है।

जानकारी के मुताबिक, हमले के वक़्त अरदास के लिए गुरुद्वारे में कई छोटे-छोटे बच्चे भी मौजूद थे। हमले के बाद हर तरफ चीख-पुकार मची हुई थी। सुरक्षाकर्मियों ने जब उन्हें बाहर निकाला, तब उनके चेहरे पर खौफ साफ दिखाई दे रहा था।

काबुल पुलिस ने कहा कि कम से कम 11 बच्चों को गुरुद्वारे से बचाया गया है। वहीं इस संबंध में सिख विधायक नरेंद्र सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि करीब 150 लोग गुरुद्वारे के अंदर प्रार्थना कर रहे थे, जब यह हमला हुआ। आंतरिक मंत्रालय के प्रवक्ता तारिक एरियन के हवाले से बताया गया कि अफगान सुरक्षा बलों ने अंदर फँसे कई लोगों को बचा लिया है।

मोहन सिंह ने अलजजीरा को बताया कि हमले के वक्त वे भी गुरुद्वारे में थे। पहले उन्होंने गोलियाँ चलने की आवाज सुनी तो खुद को टेबल के नीचे छिपा लिया। अचानक धमाका हुआ और छत का एक टुकड़ा उन पर आ गिरा, जिससे वे घायल हो गए। मंत्रालय ने हमले के बाद गुरुद्वारे की तस्वीरों को शेयर किया है। इनमें अफगान सुरक्षाबल द्वारा कई बच्चों को रेस्क्यू करते दिखाई पड़ रहे हैं।

गौरतलब है कि अफगानिस्तान में लंबे समय सिखों को व्यापक भेदभाव का सामना करना पड़ा है और कई बार आतंकवादियों ने भी उन्हें निशाना बनाया है। हालिया दिल्ली दंगों के बाद भी काबुल में सिखों की दुकान पर हमला हुआ था। अकाली दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस घटना का विडियो ट्विटर पर शेयर किया था। इसमें अधेड़ उम्र का सिख दुकानदार हाथ जोड़कर हताश खड़ा था और उसकी दुकान का सामान जमीन पर बिखरा था।

बता दें, अल्पसंख्यक सिखों पर यह पहला हमला नहीं है। पहले भी अफगानिस्तान में उन पर हमले होते आए हैं और डरकर वे भारत आने को मजबूर हुए हैं। 2018 में भी जलालाबाद में आत्मघाती हमला हुआ था जिसमें 13 सिख मारे गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी भी इस्लामिक स्टेट ने ली थी। हमले से सिख समुदाय इतना डर गया था कि उन्होंने देश छोड़ने का फैसला कर लिया था। मौजूद जानकारी के मुताबिक, अफगानिस्तान में अब 300 से भी कम सिख परिवार बचे हैं। इनके पास दो ही गुरुद्वारा है। एक जलालाबाद और दूसरा काबुल में।

गुजरात की अच्छाई गिरोह विशेष को स्वीकार नहीं: वहाँ की तस्वीर को पुडुचेरी का बता कर शेयर कर रहा गिरोह विशेष

कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने ट्विटर पर एक फोटो शेयर किया, जिसमें एक दुकान पर लोग सोशल डिस्टैन्सिंग प्रैक्टिस करते हुए दिख रहे हैं। इस फोटो में देखा जा सकता है कि एक किराने के दुकान वाले ने अपनी दुकान के सामने कई गोल घेरे लगा रखे हैं, जो एक-दूसरे से दूरी पर स्थित हैं। सफ़ेद रंग से बने हुए इन लाल घेरों में खड़े होकर लोग अपनी बारी का इन्तजार कर रहे हैं। जैसे-जैसे जिसकी बारी आती है, बिना धक्का-मुक्की किए लोग जाते हैं और सामान लेकर चले जाते हैं।

सिंघवी ने दावा किया कि ये तस्वीर पुड्डुचेरी स्थित एक दूध के दुकान की है। लेकिन, दुकान का नाम गुजराती में लिखा हुआ है। ऑपइंडिया ने इस फोटो को लेकर और चीजें पता लगाने की कोशिश की और पाया कि बोर्ड पर ‘चन्द्रमानवाला’ लिखा हुआ है, जो गुजरात के पाटन के पास स्थित है। नीचे गूगल मैप के स्क्रीनशॉट में आप देख सकते हैं कैसे हमने इस जगह के बारे में खोजा और इसका लोकेशन पता चला:

गूगल मैप पर गुजरात के चन्द्रमाना का लोकेशन

सबसे बड़ी बात कि इस दुकान के बगल में एक और दुकान दिख रहा है, जिसका नाम है- ‘भगवती स्वीट मार्ट’। इसे भी गूगल मैप पर सर्च करते ही पता चल जाता है कि ये गुजरात की तस्वीर है। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की मैनेजिंग एडिटर रही प्रिया गुप्ता ने भी इस तस्वीर को इसी दावे के साथ शेयर किया कि ये पुडुचेरी की है। बाद में पोल खुलने के बाद गुप्ता ने माना कि ये ट्वीट गुजरात का है और उनसे ग़लती हुई है।

ऐसा नहीं है कि पुडुचेरी में ऐसा नहीं हुआ। वहाँ एक मिल बूथ में इस तरह का नियम बनाया गया था, जिसकी तस्वीर उप-राज्यपाल किरण बेदी ने शेयर की थी। वो एक अलग तस्वीर थी। लेकिन लिबरल गैंग गुजरात से आई तस्वीर को भी पुडुचेरी का बता कर शेयर करने लगा। शायद ऐसा इसीलिए भी किया गया क्योंकि गुजरात में भाजपा की सरकार है और वहाँ कुछ भी अच्छा होने को लिबरल गैंग पचा नहीं सकता। ऊपर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गुजराती हैं, इसीलिए गुजरात से गिरोह विशेष को विशेष चिढ़ रहती है।

37 लोगों के साथ 20 मार्च को सऊदी अरब से लौटी अम्मा, बेटे को भी हुआ संक्रमण: UP के पीलीभीत का मामला

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से कोरोना वायरस संक्रमण का एक और मामला सामने आया है। 33 वर्षीय युवक को कोरोना पॉजीटिव पाया गया है। इस युवक का विदेश यात्रा का कोई रिकॉर्ड नहीं है। हालाँकि उसकी माँ हाल ही में सऊदी अरब की यात्रा से लौटी थी। उन्हें भी कोरोना पॉजीटिव पाया गया था। इसके साथ ही पीलीभीत जिले में 2, जबकि पूरे उत्तर प्रदेश में अब तक संक्रमण के 41 मामले सामने आ चुके हैं। पीड़ित युवक को पहले से ही आइसोलेशन में रखा गया है।

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के डॉक्टर सुधीर सिंह ने युवक में संक्रमण की पुष्टि की है। उसकी माँ सऊदी अरब से लौटी थी और उनसे बेटे को संक्रमण हुआ है। यह कांटेक्ट ट्रांसमिशन का मामला है जो बेहद चिंताजनक है। इसे देखते हुए उन्होंने विदेश से हाल में लौटे लोगों को घरों में रहने की अपील की है। साथ ही कहा है कि जो भी लोग बाहर से लौटे हैं लक्षण दिखाई देने पर तुरंत स्वास्थ्य विभाग को सूचना दें।

पीलीभीत निवासी पीड़ित युवक की माँ 25 फरवरी को 37 लोगों के एक ग्रुप के साथ सऊदी अरब की यात्रा पर गई थी। 20 मार्च को ये लोग लौट आए थे। जाँच में युवक की माँ को कोरोना पॉजीटिव पाया गया था। इसी के साथ पूरे उत्तर प्रदेश में 41 कोरोना से संक्रमित लोगों के मामले सामने आ चुके हैं। सबसे अधिक मरीज आगरा-नोएडा के 11 हैं। इसके बाद लखनऊ के 8, गाजियाबाद के 3 और पीलीभीत के 2 मरीजों में कोरोना वायरस पॉजिटिव पाया गया है। इसी तरह शामली, लखीमपुर-खीरी, वाराणसी, मुरादाबाद, कानपुर और जौनपुर में कोरोना वायरस से संक्रमित 1-1 मरीज़ पाए गए हैं। इनमें से 11 लोग स्वस्थ हो गए हैं और उन सभी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

गौरतलब है कि चीन के वुहान शहर से शुरू हुआ कोरोना का कहर आज विश्व के करीब 186 देशों तक पहुँच गया है। विश्व में मरने वालों की संख्या बढ़कर 16961, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 3,86,300 से अधिक हो गई है। भारत में मरने वालों की संख्या 11, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 562 से अधिक हो गई है। इनमें से 41 मरीज ठीक हो चुके हैं। इन्ही आँकड़ों को देखते हुए भारत सरकार ने पूरे देश में 21 दिन यानी 14 अप्रैल तक के लिए लॉकडाउन घोषित कर दिया है। वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने WHO को कुछ आँकड़े पेश करते हुए कहा कि इस महामारी से बचने के लिए घर पर ही रहें घर के बाहर लक्ष्मण रेखा खींच लें।

Covid-19: भारत के राष्ट्रीय चरित्र और संकल्प की प्रयोगशाला सिद्ध होगी यह परीक्षा

पिछले वर्ष नवम्बर में चीन से शुरू हुआ कोरोना संकट अब अंतरराष्ट्रीय आपदा बन चुका है। आज विश्व के 196 देशों के 425,987 (वर्तमान में सक्रीय केस) लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। विश्वभर में इस आपदा में अब तक 18,957 लोग मारे जा चुके हैं। यह संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इस महामारी के कारण इटली, चीन, ईरान और स्पेन आदि देशों में जान-माल का सर्वाधिक नुकसान हुआ है। अमेरिका, इंग्लैण्ड, फ़्रांस और भारत जैसे ताकतवर देश भी इससे अछूते और अप्रभावित नहीं हैं।

जिन देशों ने चीन के अनुभव से सबक लेकर जरूरी एहतियातन कदम उठा लिए हैं, उनमें काफी कम नुकसान हुआ है। दक्षिण कोरिया, जर्मनी और स्विट्ज़रलैंड ऐसे देशों में अग्रणी हैं। इस अंतरराष्ट्रीय आपदा ने पहले से ही मंदी की शिकार विश्व अर्थ-व्यवस्था को धराशाई कर दिया है। इस अंतरराष्ट्रीय संकट से भयभीत विश्व-मानव ठिठक-सा गया है। हालाँकि, भारत में इस महामारी की शुरुआत अपेक्षाकृत देर से हुई है। अब भारत इतिहास की इस सर्वाधिक भयावह आपदाओं में से एक आपदा के मुहाने पर खड़ा है।

इस आपदा से लड़ने और जीत हासिल करने में न सिर्फ राष्ट्रीय नेतृत्व की सक्षमता और दूरदर्शिता बल्कि प्रशासनिक कुशलता और सक्रियता की भी परीक्षा होने वाली है। इसके अलावा इस निर्णायक लड़ाई में सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका भारतवासियों की होने वाली है। यह आपदा भारत के राष्ट्रीय चरित्र और संकल्प की प्रयोगशाला सिद्ध होने वाली है।

22 मार्च को रविवार के दिन प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना की कड़ी को तोड़ने के लिए ‘जनता कर्फ्यू’ और मीडिया/स्वास्थ्य/पुलिस/सफाईकर्मियों एवं परचून, दूध, फल-सब्जी आदि रोजमर्रा की वस्तुएं उपलब्ध कराने वालों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए ‘थाली बजाओ-ताली बजाओ’ का आह्वान करके राष्ट्रीय चरित्र और संकल्प का परीक्षण प्रारम्भ कर दिया है।

भारतवासियों ने उनके इस आह्वान का पूर्ण पालन करते हुए अत्यंत सकारात्मक संकेत दिए हैं। ‘जनता कर्फ्यू’ और ‘थाली बजाओ-ताली बजाओ’ में देशवासियों ने उत्साहजनक भागीदारी करते हुए कोरोना संकट के खिलाफ शंखनाद किया है। हालाँकि, यह राष्ट्रीय चरित्र और संकल्प की अभिव्यक्ति की शुरुआत मात्र है। आने वाले दिन और भी मुश्किल होने वाले हैं, और आने वाली परीक्षाएँ और भी कठिन होने वाली हैं। कल ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किए गए 21 दिनों के ‘लॉक डाउन’ से उन कठिन दिनों की भी शुरुआत हो रही है।

अगर भारतवासी इन मुश्किल दिनों और कठिन परीक्षाओं के लिए एक परिवार के रूप में, एक राष्ट्र के रूप में एकजुट होते हैं, तो कोरोना को निश्चित रूप से पराजित होना पड़ेगा। भारतीय संस्कृति के आधारभूत विचार ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के निर्णायक आत्मसातीकरण का क्षण निकट है। इस संकट की घड़ी में हमें तीन बातों का विशेष ध्यान रखना है- रोजमर्रा की वस्तुओं का अति-संग्रह नहीं करना है; अपेक्षाकृत असमर्थ, अक्षम, ‘अभागे’ लोगों/परिवारों के साथ वस्तुओं, साधनों और सुविधाओं को साझा करना है; सरकार और शासन-प्रशासन के निर्देशों का मन से अनुपालन करना है।

कोरोना संकट ने वर्तमान सभ्यता की समीक्षा का भी अवसर उपलब्ध कराया है। उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण ने वर्तमान सभ्यता के स्वरूप और संवेदना का केंद्र बदल दिया है। यांत्रिकता और व्यक्तिवाद, ये दो घटक इस नई बनी सभ्यता के आधार-स्तम्भ हैं। यांत्रिकता और व्यक्तिवाद की गिरफ़्त में हाँफती इस सभ्यता की धमनियों में उपभोक्तावाद संचारित हो रहा है।

वास्तव में यह यांत्रिक सभ्यता उपभोक्तावाद का उपनिवेश है। इसकी सांसों में धुआँ उड़ाते असंख्य वाहनों की दुर्गन्ध और कानों में कोलाहल है। पिघलते ग्लेशियरों, कटते जंगलों और उजड़ते पशु-पक्षियों की कराह इस सभ्यता की उपलब्धि है। असीम उत्पादन, अति संचय और अंध उपभोग ने विश्व-मानव का अवमूल्यन करके उसे उपभोक्ता मात्र बना दिया है।

क्रमशः क्षरित मनुष्यता ने इस आत्मजीवा इकाई को आत्म-निर्वासित कर दिया है। अपनी भौतिक प्राप्तियों को सेलिब्रेट करती यह सभ्यता बेहद अकेली, उदास और अवसादग्रस्त है। यह विडम्बना ही है कि आवागमन के साधनों की अनवरत उन्नति, संचार माध्यमों की अकल्पनीय प्रगति और सोशल मीडिया माध्यमों की अबाध उपलब्धता के बावजूद दिलों की दूरियाँ बढ़ती ही जा रही हैं।

सामाजिकता और आत्मीय संवाद रहित सभ्यता अपने अकेलेपन में अवाक् है। भौतिक साधन-सुविधाओं की दासता और उनके अधि-ग्रहण ने मनुष्य को न सिर्फ समाज और परिवार से दूर कर दिया है, बल्कि स्वयं से भी अलगा दिया है। आत्मीय संबंधों से रहित आत्म-निर्वासित मनुष्य एक रोबोट बन गया है। निश्चय ही, वर्तमान सभ्यता अति भौतिकता, अति यांत्रिकता और अति बौद्धिकता से आक्रांत है। भरी-भरी और सुखी-संतृप्त दिखने पर भी खाली, खोखली, व्यथित और बेचैन…!

ऐसी सभ्यताएँ किसी भी आपदा या आक्रमण के लिए सर्वाधिक भेद्य होती हैं। इसलिए अगर समय रहते सभ्यता समीक्षा करते हुए इसके चाल-चलन को ठीक न किया गया तो इसका हस्र भी माया, बेबिलोनिया, मेसोपोटामिया, इन्का आदि सभ्यताओं वाला ही होगा।

इस सभ्यता को अपनी गति को थामकर तनिक आत्म-चिंतन करने की आवश्यकता है। कोरोना की आपदा ने वह अवसर उपलब्ध कराया है। जिनके पास खाने-पीने तक का समय न था, परिवार से बोलने-बतियाने और स्वयं तक को जानने-समझने की फुर्सत न थी, वे हाथ-पर-हाथ धरकर घर में बैठे हैं और सोच रहे हैं कि उनकी दुनिया कितनी प्रदूषित और संक्रमित हो गई है।

‘वर्ल्ड इज वन न्यूज़ (WION)’ नामक चैनल ने इधर प्रसारित की गई अपनी एक ताजा रिपोर्ट में लोगों की गतिविधियाँ सीमित हो जाने के बाद प्रकृति के स्वरूप में आए सकारात्मक परिवर्तन को दिखाया है। इस रिपोर्ट में दिखाया गया है कि लोगों की भागमभाग और भीड़भाड़ कम हो जाने से समुद्र तटों, पहाड़ों और सड़कों का चेहरा एकदम बदल गया है। वह फिर से सुन्दर, सुरम्य और शांत होने लगा है।

प्रकृति मनुष्य की सबसे निकटस्थ मित्र और सहचरी होती है। परन्तु अत्यधिक दोहन और शोषण करके मनुष्य ने उसे अपना शत्रु बना लिया है। असंतुलित विकास और जनसंख्या विस्फोट ने कोढ़ में खाज का काम किया है। इसके लिए जिम्मेदार कौन है? आज यह बात सर्वाधिक विचारणीय और प्रासंगिक है कि इस दुनिया को सुन्दर और जीने लायक कैसे बनाया जा सकता है!

प्राचीनतम भारतीय संस्कृति और उसके जीवन-मूल्य इस हाँफती-जूझती सभ्यता के घावों पर मलहम लगा सकते हैं। स्वयं भारतवासियों को भी अपनी उन जड़ों की और लौटना होगा, जिनको कि वे कालिदास बनकर रात-दिन काटने में लगे हैं। गौतम बुद्ध, महात्मा गाँधी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन और चिंतन में ऐसे एकाधिक सूत्र हैं, जो रोबोट बने विश्व-मानव को राह दिखा सकते हैं।

गौतम बुद्ध का ‘अष्टांग मार्ग’, महात्मा गाँधी का ‘हिन्द स्वराज’ और पंडित दीनदयाल उपाध्याय का ‘एकात्म मानव-दर्शन’ अंध-सभ्यता के ज्योतिपुंज हैं। इनका जीवन और चिन्तन भारतीय संस्कृति का सारभूत है। ‘मध्यमार्ग’ के अनुकरण में ही वर्तमान सभ्यता की गति है। सीमित उत्पादन और संयमित उपभोग ही भविष्य का मार्ग है। व्यष्टि, समष्टि, सृष्टि और परमेष्टि की एकात्मता से ही जीवन को उन्नत और आनंदमय बनाया जा सकता है।

सत्य, अहिंसा, बंधुत्व, अस्तेय और अपरिग्रह आदि को अपनाकर ही इस हिंस्र सभ्यता को मानवीय बनाया जा सकता है। मानव–सभ्यता को तनिक ठहरने और विचारने का जो अवसर कोरोना संकट ने दिया है, उसे यूँ ही हाथ से फिसल न जाने देना चाहिए, बल्कि वैकल्पिक जीवन-शैली और मानवीय संकल्पों की उद्गम-स्थली बनाना चाहिए।