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शाहीन बाग में फिर इकट्ठा हुई ‘जाहिलों’ की भीड़, लोगों ने कहा- ‘तंबू उखाड़ना काफी नहीं, इन्हें बंबू भी चाहिए’

दिल्ली के शाहीन बाग इलाके से प्रदर्शन स्थल का तंबू उखड़ने के बाद वहाँ की एक तस्वीर सामने आई है। ये तस्वीर वहाँ के स्थानीय लोगों की है, जो कोरोना के फैलते प्रभाव को जानते-समझते हुए सड़क पर इकट्ठा हुए हैं।

जानकारी के मुताबिक, शाहीन बाग पर पुलिस की कार्रवाई के बाद ये भीड़ जुटी और देखते ही देखते इनकी तादाद बढ़ती गई। हालाँकि, चिंता की बात नहीं है क्योंकि स्थिति को समझते हुए वहाँ पहले ही भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद है।

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ सरकार विज्ञापनों, संदेशों, सोशल मीडिया के जरिए लोगों से अपने-अपने घरों में रहने की गुहार लगा रही है। वहीं ये तस्वीर इलाके में मौजूद लोगों की नासमझी, लापरवाही और समाज के प्रति गैर-जिम्मेदार रवैये को दर्शाती है।

सोशल मीडिया पर तो यूजर्स इस भीड़ को जाहिल, मानवता के दुश्मन और आतंकवादी तक कह रहे हैं। लोगों का कहना है, “देश हमेशा याद रखेगा, जब देश सबसे मुश्किल घड़ी से गुजर रहा था तब जाहिलों ने देश को धोखा दिया। यह सही में गद्दार है और धोखेबाज हैं।” 

वहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के जानकार दिव्य कुमार सोती ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि इन लोगों के लिए तंबू उखाड़ना काफी नहीं है। इन्हें बंबू भी चाहिए।

एएनआई द्वारा दी इस जानकारी पर एक शमीला नामक यूजर ने भी प्रतिक्रिया दी है। महिला का कहना है कि एएनआई कोरोना वायरस को मुस्लिमों की छवि भयावह बना रही है। शमीला के अनुसार, ये कोरोना वायरस 2 और 3 महीनों में मर जाएगा। लेकिन लोगों की नफरत भरी प्रतिक्रिया कभी खत्म नहीं होगी।

बता दें कि शाहीन बाग में मुस्लिमों की भीड़ की इस हरकत को धिक्कारा जा रहा है। लोगों का कहना है कि बॉलीवुड के सेकुलर और पत्तलकारों को आकर इन्हें समझाने की आवश्यकता है।

आज रात 8 बजे… देश को फिर संबोधित करेंगे PM मोदी, कोरोना वायरस पर करेंगे बात

देश में फैल रहे कोरोना वायरस को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार (मार्च 24, 2020) रात 8 बजे देश को संबोधित करेंगे। पीएम मोदी ने खुद ट्वीट करते हुए इसकी जानकारी दी। पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा है, “वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण बातें देशवासियों के साथ साझा करूँगा। आज, 24 मार्च रात 8 बजे देश को संबोधित करूँगा।” इससे पहले 19 मार्च को पीएम ने देश को संबोधित किया था और जनता कर्फ्यू का ऐलान किया था।

बता दें कि भारत में फैल रहे कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच देश के 32 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में पूरी तरह से लॉकडाउन का ऐलान कर दिया गया है। इस फैसले से 560 जिलों में पूरी तरह से बंदी लागू कर दी गई है। भारत में कोरोना वायरस से संक्रमण के अब तक करीब 500 मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के मंगलवार तक के आँकड़ों में यह संख्या सामने आई है।

मंगलवार सुबह तक के आँकड़ों के मुताबिक देश में कोरोना वायरस के कुल मामले 492 हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इन आँकड़ों में 41 विदेशी नागरिक शामिल हैं और अब तक 9 मौत हो चुकी है। पिछले कुछ दिनों में संक्रमण के मामले अचानक बढ़ने के बाद अधिकारियों ने लगभग पूरे देश में लॉकडाउन लागू कर दिया है जिसके तहत लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध हैं और सड़क, रेल एवं हवाई यातायात पर 31 मार्च तक रोक लगा दी गई है।

इसके अलावा लोगों को सख्त हिदायत दी जा रही है कि लोग घरों से बाहर ना निकलें। लेकिन लोग फिर भी लापवाही करते हुए सड़कों पर आ रहे हैं और लॉकडाउन का पालन नहीं कर रहे हैं। खुद प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर लोगों से अपील की थी कि वे लॉकडाउन को गंभीरता से लें और राज्य सरकार कानून का पालन करवाएँ। पुलिस ने लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी एक्शन भी लिया है।

बता दें कि इससे पहले पीए मोदी ने सोमवार (मार्च 23, 2020) को इस कठिन समय में मीडिया के कार्यों की प्रशंसा करते हुए इसे राष्ट्रसेवा कहा और आभार जताया। पीएम मोदी ने मीडिया को सम्बोधित करते हुए कहा, “आप लोगों ने बहुत बहादुरी और दिलेरी से काम किया है। सही मायने में यही राष्‍ट्र सेवा है।”

सावधान: सोशल मीडिया पर कोरोना संबंधी अफवाह फैलाया तो… 6 महीने के लिए जाएँगे जेल

महामारी घोषित हो चुके कोरोना वायरस का कहर दुनिया भर में लगातार बढ़ता ही जा रहा है। कोरोना वायरस की चपेट में दुनिया भर के साढ़े तीन लाख से ज्यादा नागरिक आ चुके हैं। इनमें से 16491 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 1 लाख 337 लोग ठीक हो चुके हैं जबकि 11204 की हालत बेहद गंभीर है। एहतियात के तौर पर भारत सहित विश्व के कई देशों ने बड़े हिस्सों में लॉकडाउन कर दिया है, इस वजह से करीब 100 करोड़ लोग अपने घरों में कैद हो गए हैं।

वहीं भारत की बात करें तो यहाँ कोरोना के 451 मामले सामने आए हैं। 9 लोगों की इस संक्रमण से मौत हो चुकी है। भारत में अभी यह महामारी सिर्फ दूसरे चरण तक पहुँची है। भारत सरकार यह कोशिश है कि यह तीसरे चरण यानी कम्‍युनिटी ट्रांसमिशन तक न पहुँचे। भारत की सरकार पूरी ताकत के साथ कोरोना वायरस के साथ जंग लड़ रही है।

सरकार इससे निपटने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है, देश भर में चिकित्सा सेवाएँ तेज कर दी गई है। जगह जगह अस्पतालों में इसके लिए आइसोलेश वार्ड बनाए गए हैं। इस बीच इसको लेकर अफवाहों का बाजार भी गर्म है। सोशल मीडिया से लेकर प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के माध्यम से बिना किसी आधार के, बिना किसी पुष्टि के कई अफवाहें फैलाई जा रही है। जिसकी वजह से जनता के मन में काफी संशय पैदा हो रहा है और इस घातक बीमारी पर नियंत्रण करना काफी मुश्किल साबित हो रहा है, क्योंकि इस बीमारी से निपटना जनता के सहयोग के बिना संभव नहीं है। 

इस मामले को उड़ीसा, असम, महाराष्ट्र और गुजरात समेत लगभग सभी राज्यों ने गंभीरता से लिया है और एक विज्ञप्ति जारी किया। इसमें साफ-साफ कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति, संस्था या संगठन कोरोना वायरस से संबंधित कोई भी जानकारी बिना तथ्य का पता लगाए या फिर DMET, DPH, DHS या कलेक्टर की पूर्व मंजूरी के बिना प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या सोशल मीडिया पर नहीं डालेगा। अगर कोई इसका उल्लंघन करता है, तो उसे दंडनीय अपराध माना जाएगा और उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 188 के तहत कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि इस धारा के तहत 6 महीने की जेल हो सकती है। एडवाइजरी में कहा गया है कि ऐसा करना इसलिए आवश्यक है ताकि कोरोना को लेकर अनौपचारिक जानकारी और तेजी से फैल रही अफवाहों पर विराम लगाया जा सके, उसे रोका जा सके।

आगे विज्ञप्ति में कहा गया है कि किसी भी निजी प्रयोगशालाओं को कोरोना वायरस के परीक्षण की अनुमति नहीं है। कोरोना वायरस का परीक्षण करने के इच्छुक निजी स्वास्थ्य संस्थानों को राज्य IDSP इकाई के माध्यम से अपने परीक्षण नमूने भेजने होंगे। इसके बाद राज्य IDSP इकाई भारतीय स्टेट काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) द्वारा जारी गाइडलाइन के हिसाब से परीक्षण की व्यवस्था करेगी। 

इसके साथ ही इसमें यह भी कहा गया है कि अगर किसी व्यक्ति ने पिछले 14 दिनों में ऐसे किसी देश की यात्रा की है, जहाँ पर कोरोना वायरस के केस पाए गए हैं, तो उसे स्वेच्छा से राज्य नियंत्रण कक्ष, राज्य निगरानी अधिकारी, IDSP या फिर टोल फ्री नंबर 104 पर रिपोर्ट करना चाहिए, ताकि  DMET, DPH, DHS और कलेक्टर द्वारा माले पर संज्ञान लिया जा सके।

‘हमारा रोजा है, हमें छोड़ दो… हाय लगेगी’ – शाहीन बाग में बुर्के वाली महिला ने दी पुलिस को बददुआ

आज सुबह 7 बजे शाहीन बाग पूरा खाली करवा लिया गया। दिल्ली पुलिस ने भारी तादाद में निर्देशों का पालन करते हुए ये कार्रवाई की। धरना स्थल से टेंट कुर्सी हटवाई गए। शरारती तत्वों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने बताया कि पहले उन्होंने लोगों को समझाया। मगर जब प्रदर्शनकारी राजी नहीं हुए और माहौल बिगाड़ने की कोशिश की तो बल का इस्तेमाल करके इस काम को अंजाम दिया गया।

मंगलवार को सुबह-सुबह पुलिस के इस एक्शन के बाद शाहीन बाग की कई विडियोज आईं। विडियो में भारी संख्या में पुलिस को शाहीन बाग पर देखा गया। इसी बीच एक नजारा और देखने को मिला, जिसमें एक महिला प्रदर्शनकारी पुलिस वालों को बद्दुआ देती नजर आई और कहती दिखी कि इन्हें उनकी हाय लगेगी।

विडियो में 1 मिनट 8 सेकेंड के आगे देख सकते हैं कि पुलिस इस बुर्काधारी महिला को डिटेन कर रही है। लेकिन वो कैमरे में देखकर कह रही है, “देख लीजिए, हमें पकड़कर ले जा रहे हैं। हमारा रोजा है। इन्हें हाय लगेगा।” 

विडियो में देख सकते हैं कि महिला प्रदर्शनकारी बार-बार खुद को पुलिस की पकड़ से छुड़ाने की कोशिश कर रही है। लेकिन जब पत्रकार उससे बढ़ते संक्रमण पर सवाल करता है तो कहती है कि इन्हें हमारी हाय लगेगा। हमारे बच्चे दूध पीने वाले हैं, हमें छोड़ दो। वहीं एक दूसरे प्रदर्शनकारी (हिरासत में लिए जाने के बाद) विडियो की शुरुआत में महिला से पहले कहता है कि अब इनकी मर्जी है जो चाहें कर सकते हैं, इनका राज है।

अब हालाँकि, विडियो देखने के बाद दिल्ली पुलिस का विरोध करने वालों को इसमें भी पुलिस की ही गलती नजर आएगी। लेकिन, 100 दिन से कालिंदी कुंज का रास्ता खुलने का इंतजार कर रही जनता ने इस कदम का स्वागत किया है। साथ ही कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने की दिशा में अहम कदम बताया गया है।

सोशल मीडिया पर इस विडियो को देखने के बाद लोगों ने चुटकी ली है। कुछ ने इसे बिन सिर पैर का धरना बताया और पूछा कि क्या 100 दिनों से जो इन लोगों के कारण लोगों को नोएडा से साउथ दिल्ली और साउथ दिल्ली से नोएडा स्कूल, कॉलेज, नौकरी, अस्पताल जाने में दिक्कत हुई, उन्हें हाय नहीं लगेगी।

WHO ने की भारत की तारीफ, कहा- ‘कोरोना को रोकना अब आपके हाथ में, पहले भी ऐसे दुश्‍मनों को हराया’

पूरी दुनिया इस वक्त कोरोना वायरस के संक्रमण से लड़ रही है। इस वायरस के चलते हजारों लोगों की जान जा चुकी है, जबकि लाखों लोग इससे संक्रमित हैं। तमाम देश इस वायरस से लड़ने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं और अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं ताकि वह अपने देशवासियों को बचा सकें। कोरोना वायरस के खतरे से लोगों को बचाने के लिए भारत लगातार सख्त कदम उठा रहा है। कई राज्यों को को पूरी तरह से लॉकडाउन कर दिया गया है, तो कई राज्यों में कर्फ्यू लगा दिए गए हैं। इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत के प्रयासों की तारीफ की है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्यकारी निदेशक माइकल जे रेयान ने कहा है कि कोरोना वायरस का भविष्य में कैसा असर रहेगा, यह भारत जैसी बड़ी जनसंख्या वाले देशों की कार्रवाई पर तय होगा। उन्होंने कहा, “चीन की तरह भारत बहुत बड़ी जनसंख्या वाला देश है। कोरोना वायरस के दूरगामी परिणाम इस बात पर निर्भर करेंगे कि बड़ी जनसंख्या वाले देश इसे लेकर क्या कदम उठाते हैं। यह बहुत जरूरी है कि भारत जन स्वास्थ्य के स्तर पर आक्रामक फैसले लेना जारी रखे।”

इसके साथ ही कोरोना संकट में भारत से उम्मीद जताते हुए माइकल जे रेयान ने कहा कि भारत ने साइलेंट किलर कही जाने वाली 2 गंभीर बीमारियों- स्मॉल पॉक्स और पोलियो के उन्मूलन में दुनिया का नेतृत्व किया। भारत में जबरदस्त क्षमता है, सभी देशों में भी जबरदस्त क्षमता है कि वे अपने समुदायों और नागरिक समाजों को एकत्र करें।

कोरोना वायरस संकट के निपटने की काबिलियत का हवला देते हुए रियान ने कहा कि हमारा मानना है भारत में जबरदस्त क्षमता है। जब समुदाय जुटते हैं, सिविल सोसाइटी साथ आती हैं और सरकारें ड्राइव करती हैं तो लक्ष्य पूरा होता है। WHO ने कहा कि भारत को इस लड़ाई का नेतृत्व करते हुए दिखाना चाहिए कि क्या होना चाहिए और उसे किस तरह किया जा सकता है।

वहीं दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कोरोना की भयावहता देखते हुए पूरी दुनिया से वैश्विक शांति को लेकर आह्वान किया। उन्होंने कहा, “मैं दुनिया के सभी कोनों में तत्काल वैश्विक युद्ध विराम का आह्वान कर रहा हूँ। यह लॉकडाउन पर सशस्त्र संघर्ष और हमारे जीवन की सच्ची लड़ाई पर एक साथ ध्यान केंद्रित करने, शत्रुता से पीछे छोड़ने और अविश्वास तथा दुश्मनी को दूर करने का समय है।”

भारत में कोरोना के 451 मामले सामने आए हैं। 9 लोगों की इस संक्रमण से मौत हो चुकी है। भारत में अभी यह महामारी सिर्फ दूसरे चरण तक पहुँची है। भारत सरकार यह कोशिश है कि यह तीसरे चरण यानि कम्‍युनिटी ट्रांसमिशन तक न पहुँचे। भारत पूरी ताकत के साथ कोरोना वायरस के साथ जंग लड़ रही है।

कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के देखते हुए सोमवार (मार्च 23, 2020) की रात पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई। 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश को पूरी तरह से लॉकडाउन कर दिया गया है, यानी अब देश के 548 जिले लॉकडाउन हैं। हालाँकि तीन राज्य पूरी तरह से लॉकडाउन नहीं है, जिसमें उत्तर प्रदेश, उड़ीसा और मध्य प्रदेश शामिल है। वहीं, लक्षद्वीप में कुछ गतिविधियों के लिए लॉकडाउन की घोषणा की गई है।

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विदेश से लौटे एयर इंडिया के कर्मचारियों को परेशान कर रहे पड़ोसी, बुला रहे पुलिस

कोरोना वायरस के दहशत की वजह से जहाँ लोग अपनों से मिलने से भी परहेज कर रहे हैं, वहीं एयर इंडिया के कर्मचारी विदेशों में फँसे लोगों को अपनी जान पर खेलकर देश वापस ला रहे हैं। विदेशों में फँसे भारतीयों को वापस लाने के लेकर एयर इंडिया के प्रयासों को लेकर पीएम मोदी व अन्य मंत्रियों ने सराहना की।

लेकिन इन जाबाँजों को अपने ही पड़ोसियों द्वारा परेशान किया जा रहा है। स्थिति यह है कि पड़ोसी उन्हें देखते ही आरडब्ल्ययूए और पुलिस बुला रहे हैं। कंपनी ने रविवार (मार्च 22, 2020) को बताया कि कई सोसायटी, आरडब्ल्यूए और पड़ोसियों ने उनके चालक दल के सदस्यों को परेशान करना शुरू कर दिया है। उन्हें ड्यूटी करने से रोका जा रहा है और पुलिस तक बुलाई जा रही। ऐसा इसलिए क्योंकि वे हाल ही में विदेश से लौटे हैं। 

क्रू मेंबर्स की इन परेशानियों को लेकर एअर इंडिया ने प्रशासन और आम लोगों से एक अपील की है। एयर इंडिया ने रविवार को बताया कि एयरलाइन्स की टीम ने विदेशों में कोराना वायरस से प्रभावित इलाकों से भारतीय नागरिकों को निकालने का सराहनीय काम किया है। एअर इंडिया ने लिखा कि लोग ये तक भूल जाते हैं कि एयर इंडिया के इन नायकों के कारण ही कईयों के साथी, माँ-बाप, भाई-बहन या बच्चे कोरोना प्रभावित इलाकों से लौट कर वापस आ सके हैं। एअर इंडिया ने पुलिस वगैरह जैसी संस्थाओं से मदद माँगी। एयरलाइन कंपनी ने कहा कि संस्थाएँ ये तय करें कि एयर इंडिया के कर्मचारियों से लोग सलीके से पेश आएँ, उन्हें सम्मान और आजादी मिले।

एयर इंडिया ने बताया कि विदेश की उड़ानों में जाने वाले चालक दल के सदस्य बचाव के सभी प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं। साथ ही विदेश से आने के बाद उनकी डॉक्टरी जाँच की जाती है और वे 14 दिन सबसे अलग भी रहते हैं।

कंपनी ने कहा कि कुछ लोग यह भूल जा रहे हैं कि विदेशो में फँसे उनके करीबियों को वापस बुलाने के लिए ये क्रू मेंबर्स लगातार मेहनत कर रहे हैं। लेकिन सोसाइटी के लोग इसकी तारीफ करने की बजाय उन्हें परेशान कर रहे हैं। वे उन्हें घर से निकलने से रोक रहे हैं और कई बार उन्होंने पुलिस को बुला लिया है। एयरलाइन ने कहा कि लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों और आम लोगों से अपील की है कि वो क्रू मेंबर्स के सही बर्ताव करें। उनकी ​इज्जत करें और आम नागरिक की तरह ही पेश आएँ। चालक दल के सदस्य ही कोरोना प्रभावित कई देशों में फँसे लोगों को सुरक्षित उनके घर पहुँचाया है।

बता दें कि सिर्फ एयर इंडिया के क्रू मेंबर्स के साथ ही नहीं, बल्कि उन डॉक्टरों के साथ भी इसी तरह का व्यवहार हो रहा है, जो दिन रात एक करके मरीजों को ठीक करने का प्रयास करते हैं। इस विषम परिस्थिति में भी अपनी जान की परवाह किए बिना कोरोना के मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इस तरह की घटनाएँ सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने इस बारे में सूरत के बीजेपी विधायक हर्ष सिंघवी से बात की। जिसके बाद सिंघवी ने स्थानीय प्रशासन से बात करके उन्हें मामले पर संज्ञान लेने के लिए कहा है।

शाहीन बाग एक झटके में खाली: प्रदर्शनकारियों की मनमानियों के बीच पुलिस ने उठा लिए टेंट-कुर्सी, कई हिरासत में

कोरोना वायरस के फैलते प्रभाव के बावजूद नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ अपना धरना प्रदर्शन जारी रखने वाले शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने आज सुबह हटवा दिया। धरना स्थल पर लगे टेंट और कुर्सियों को भी वहाँ से उठा लिया गया। मंगलवार (मार्च 24, 2020) को शाहीन बाग में भारी पुलिस फोर्स की तैनाती के बीच ये कार्रवाई हुई। पुलिस ने धारा-144 की दलील देते हुए ये एक्शन लिया। बता दें कि शाहीन बाग में महिलाएँ पिछले 100 दिनों से धरने पर बैठी थीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जॉइट सीपी देवेश श्रीवास्तव ने कहा, “कोरोना वायरस के बढ़ने के कारण लोगों से अपील की जा रही थी। स्थानीय भी हमसे माँग कर रहे थे। आज सुबह हमने इस कार्रवाई की शुरुआत 7 बजे की। शुरुआत में कुछ शरारती तत्व माहौल को बिगाड़ना चाहते थे। वे नहीं माने, तो उन्हें हिरासत में लिया गया है।” 

जॉइंट सीपी ने बताया कि करीब 10 से 12 लोगों को हिरासत में लिया गया है। विरोध करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। देवेश श्रीवास्तव ने आगे कहा कि हमारा मकसद इलाके में शांति बहाल करना है। कोरोना को लेकर सख्त आदेश थे कि भीड़ जमा न हो।

अब फिलहाल, पुलिस ने धरने वाली जगह से टेंट को पूरी तरह हटा दिया है। कोरोना वायरस के मद्देनजर दिल्ली में धारा 144 लागू है। इसके बावजूद वहाँ कुछ प्रदर्शनकारी जुटे हुए थे। एक पुलिसर्मी ने बताया कि सुबह भी वहाँ काफी महिलाएँ धरने पर बैठी हुईं थी। हमने उनसे कहा कि 144 लगाई गई है, इसलिए धरने को खत्म कर दें। लेकिन वह नहीं माने। इसके बाद पुलिस को बलपूर्वक उनको हटाना पड़ा।

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ पुलिस प्रदर्शनस्थल को बलपूर्वक खत्म करवाने के पीछे प्रदर्शनकारियों की जिद को कारण बता रही है। वहीं प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वह खुद पीछे हट गए थे, लेकिन पुलिस ने धरना स्थल में बना भारत माता का नक्शा और इंडिया गेट को क्यों हटाया। बताया जा रहा है यहाँ लोगों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी भी की है और हालातों को देखते हुए पूरे शाहीन बाग इलाके में भारी पुलिस फोर्स को तैनात किया गया है।

इस बीच भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने भी शाहीन बाग प्रदर्शन खाली होने की सूचना दी है। उन्होंने धरना स्थल से हटाए गए टेंट, कुर्सियों को ट्रक में भरते हुए ये विडियो अपने ट्विटर पर डाली है और लिखा है, “सब तख्त उछाल कर फेंक दिए, सब टेंट उखाड़ कर फेंक दिए, हमने देख लिया, सबने देख लिया, दिल्ली को मिल गई आज़ादी शाहीन बाग का फ्रॉड ख़त्म।”

यहाँ बता दें कि बीते दिनों दिल्ली में कोरोना के बढ़ते केसों के बावजूद शनिवार को हमने शाहीन बाग पर बैठे प्रदर्शनकारियों की जिद देखी। इससे पहले भी कई बार विडियोज के जरिए ऐसी बातें सामने आई थीं, जिसमें वहाँ बैठी महिलाएँ किसी कीमत पर प्रदर्शन से उठने की बात नहीं सुन रहीं थी। बल्कि इसकी जगह वे ये कह रही थीं उन्हें कोरोना नहीं हो सकता। उनके साथ अल्लाह है। कोरोना तो मोदी को होगा।

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कोरोना से लड़ाई में PM मोदी ने की मीडिया की तारीफ, कहा: यही है असली राष्ट्रभक्ति

कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम में केंद्र सरकार समेत सभी राज्य सरकारें अपनी भूमिकाओं का निर्वहन करने में लगी हुई हैं। ज्यादातर राज्यों ने जहाँ खुद को लॉकडाउन कर लिया है वहीं देश के 75 जिलों को भी इस महामारी के चलते लॉकडाउन कर दिया गया है। ऐसे हालात में देश में आवश्यक सुविधाओं तथा सेवाओं की आपूर्ति करने वाले बिना डरे बिना हिचके अपनी अपनी ड्यूटी में मुस्तैद हैं। इन लोगों में वो मीडियाकर्मी भी शामिल हैं जो कोरोना से निपटने के लिए जारी किए जा रहे सरकारी पहलों और निर्देशों को आम लोगों तक पहुँचा रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को आज मीडिया से बातचीत के दौरान मीडिया का आभार जताया। उन्‍होंने इस कठिन समय में मीडिया के कार्यों की प्रशंसा करते हुए इसे राष्ट्रसेवा कहा और आभार जताया। मोदी ने मीडिया को सम्बोधित करते हुए कहा, “आप लोगों ने बहुत बहादुरी और दिलेरी से काम किया है। सही मायने में यही राष्‍ट्र सेवा है।”

इस दौरान कोरोना से लड़ने में सोशल डिस्टेंसिंग की महत्ता बतलाते हुए उन्होंने कहा, “हमारे लिए आगे अभी बड़ी जंग है। इसके लिए सोशल डिस्‍टैसिंग काफी अहम है। आप जानते हैं कि कैसे बातचीत करनी है। लोगों से घर पर रहने के संदेश को तेजी से फैलाएँ। जापान और दक्षिण करिया ने अनुशासन अपनाकर इस पर कुछ हद वतक कंट्रोल किया है।” पीएम मोदी ने आगे अपने सम्बोधन में कहा कि कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में भय और निराशा का कोई स्‍थान नहीं हैं, हमारे हौसले बुलंद रहने चाहिए।

पीएम मोदी ने स्वास्थ्य सेवाओं में जुटे लोगों को याद करते हुए कहा, “हमें मेडिकल या स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं में जुटे लोगों का हौसला बढ़ाना होगा। वे बिना किसी स्‍वार्थ के अपनी जिंदगी खतरे में डालकर लोगों के लिए काम कर रहे हैं।” याद रहे कि भारत में अबतक कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 450 पार कर चुकी है जिसमें से 9 की मौत हो चुकी है।  


ध्रुव राठी जैसे ‘ऑनलाइन हकीमों’ से दूर रहें, मूर्खतापूर्ण बातें कह कर कोरोना पर बाँटता है फ़र्ज़ी ज्ञान

जब जनवरी और फरवरी 2020 में लिबरल गैंग कोरोना वायरस को पीएम मोदी की चाल बताने से लेकर इसके ख़तरे को नज़रअंदाज़ करते हुए इसकी खिल्ली उड़ा रहा था, तब मोदी सरकार पूरे जतन से इस वायरस के खतरनाक प्रकोप को रोकने के प्रयासों में लगी हुई थी। सोचिए, अगर देश इन लिबरल गिरोहों के पास होता तो फिर अभी भारत में कितनी लाशें गिर रही होतीं? सौभाग्य से ऐसा नहीं हुआ क्योंकि सरकार सजग थी, जिसने तुरंत चीन से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग की व्यवस्था की, कई फ्लाइट्स पर पाबंदी लगाईं और फिर जनता को जागरूक करने में लग गई। लेकिन, इस दौरान लिबरल और सेक्युलर गिरोह क्या कर रहा था?

इनलोगों के ही गुट की एक नेता ममता बनर्जी ने भी तब कहा था कि पीएम मोदी दिल्ली में हुए दंगों को ढकने के लिए कोरोना वायरस के ख़तरों को बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रहे हैं। आज स्थिति ये है कि पूरा कोलकाता लॉकडाउन है। आइए, इसी गैंग के एक यूट्यूबर और प्रपंच ध्वजवाहक ध्रुव राठी पर नज़र डालते हैं, जो उस समय कुछ और दावे कर रहा था और अब कुछ और ही दावे कर रहा है। ध्रुव राठी ने तब कहा था कि मीडिया इसे बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रही है।

राठी ने फरवरी में बनाए गए एक वीडियो में दावा किया था कि चीन से बाहर रहने वाले लोगों को घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है क्योंकि उनके लिए कोई ख़तरा नहीं है। राठी ने कहा था कि मीडिया ‘फियर मोंगरिंग’ फैला रहा है, यानी कोरोना वायरस के नाम पर लोगों को डरा रहा है। राठी ने लोगों से कहा था कि वो सावधानी रखें लेकिन घबराएँ नहीं।

वो तो भला हो कि अधिकतर नागरिक ऐसे फर्जी यूट्यूबर्स की बातों पर ध्यान नहीं देते, लेकिन कुछ कम बुद्धि वाले राठी-समर्थक उसकी बातों को फूल और बाकी बातों की बबूल ही समझते हैं। राठी ने तब आरोप लगाया था कि ‘डर का माहौल’ ऐसे बनाया जा रहा है, जैसे कोई ‘जॉम्बी अपॉकलिप्स’ (चलती-फिरती लाशों वाली तबाही) आ गया हो। राठी पहले क्या कह रहा था और अब उनकी राय कैसे बदल गई है समय के साथ, यहाँ देखिए:

और अब यही ध्रुव राठी लोगों को समझा रहा है कि कैसे सारे देशों में कोरोना वायरस को लेकर तबाही फ़ैल रही है। साथ ही उसने अपने नए वीडियो में बताया है कि कैसे कुछ देशों ने इससे निपटने के लिए तगड़े इंतजाम कर लिए थे। राठी अब भारत सरकार को भी सलाह दे रहा है कि उसे और भी बहुत कुछ करना चाहिए। शायद उसे पता नहीं है कि जब वो कोरोना वायरस को ‘मीडिया का डर’ बताते हुए इसका मखौल उड़ा रहा था, तब सरकार काम करने में लगी हुई थी, तैयारियों में लगी थी।

कुछ आवाज़ें भी कुछ जला सकती हैं: प्रतीक सिन्हा की जली तो रुबिका पर किया हमला, लग गई क्लास

एबीपी न्यूज़ की पत्रकार रुबिका लियाकत को नीचा दिखाने के चक्कर में एक बार फिर से ‘ऑल्ट न्यूज़’ के संस्थापक प्रतीक सिन्हा की बेइज्जती हो गई। प्रतीक यूँ तो आए दिन सोशल मीडिया पर बेइज्जती की नई इबारतें लिख रहे होते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने रुबिका से पंगा ले लिया। दरअसल, रुबिका ने ‘जनता कर्फ्यू’ के दिन शाम 5 बजे लोगों द्वारा घंटी, ताली और थाली वगैरह बजाए जाने के अनुभवों को साझा किया था, जिससे प्रतीक चिढ़ गए। रुबिका ने लिखा था- “थालियों की, घंटियों की, तालियों की आवाज़ ने बहुतों को सदमे में पहुँचा दिया होगा। ये एकता की आवाज़ है। अखण्ड भारत की पहचान है।” प्रतीक को ये बुरा लगा।

प्रतीक सिन्हा ने ज़हर की उल्टी करते हुए लिखा कि लोगों को ऐसे ही एंकरों के कारण दिक्कत का सामना करना पड़ता है, जो अपने नेता और उसके कारनामों को सही ठहराते हैं और यही इनकी ज़िंदगी का प्रमुख उद्देश्य है। प्रतीक ने इसके बाद रुबिका की ट्वीट में धर्म घुसाते हुए ज्ञान बाँचा कि कोई महामारी किसी का धर्म या विचारधारा देख कर कोई भेदभाव नहीं करती। उन्होंने रुबिका को ‘चीयरलीडर’ करार देते हुए लोगों से कहा कि वो ऐसे एंकरों को फॉलो न करें। इसके बाद रुबिका लियाकत ने जो रिप्लाई दिया, उसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी खूब वाहवाही तो हुई ही, प्रतीक की भी बेइज्जती हुई।

रुबिका लियाकत ने प्रतीक के कथित फैक्ट-चेकिंग पोर्टल की पोल खोलते हुए कहा कि अगर ‘वर्क फ्रॉम होम’ के कारण उनके पास कर्मचारियों की कमी है तो वो ख़ुद अपनी ही ट्वीट का फैक्ट-चेक करने के लिए तैयार हैं। रुबिका ने लिखा- “इस ट्वीट में कोरोना का कोई ज़िक्र नहीं सदमेश्वर! मेरे ट्वीट का ‘प्रतीक’ बनने के लिए शुक्रिया! गहरा सदमा लगा है ‘Fearleaders’ को।” रुबिका के इस जवाब के बाद प्रतीक को कुछ नहीं सूझा और वो भाग खड़े हुए।

लोगों ने प्रतीक सिन्हा को याद दिलाया कि विदेश में भी कई देशों ने सांकेतिक तौर पर विभिन्न तरीके अपना कर कोरोना से लड़ रहे मेडिकल कर्मचारियों व अन्य लोगों को धन्यवाद दिया। क्या वो सभी लोग मूर्ख थे? भारत में रविवार की शाम लोगों ने ताली, थाली और घंटी के साथ-साथ शंख फूँक कर भी डॉक्टरों व विषम परिस्थितियों में जनसेवा में रत अन्य लोगों को अपना धन्यवाद भेजा। कई लोगों के लिए ये एक इमोशनल अनुभव रहा।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की अपील की थी और उन्होंने ही लोगों को ऐसा करने को कहा था। लिबरल व सेक्युलर गैंग में से कुछ ने दिखावटी रूप से इस क़दम का समर्थन किया, वहीं कई अपने कुत्ते-बिल्लियों के डरने की बातें करते हुए देखे गए।