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कोरोना पर खौफ के बीच वामपंथी सरकार को शराब की चिंता, लॉकडाउन में भी खोल रखे हैं ‘ठेके’

केरल में सोमवार को कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की तादाद में अचानक वृद्धि देखने को मिली। इसके बाद राज्य में कुल 28 केस सामने आए। इतना होने के बावजूद राज्स सरकार के फैसलों में निहित नियम-शर्तों को देखकर लगा कि वे सिर्फ़ इस लड़ाई को लड़ने के लिए दिखावटी प्रयास कर रहे हैं और उन्हें केवल अपने राजस्व से मतलब है।

दरअसल, सोमवार को राज्य में 28 कोरोना मामलों का खुलासा होने के बाद केरल सरकार ने सभी बार और शराब के ठेकों को बंद करने की घोषणा की। लेकिन इस दौरान उन्होंने ये भी घोषणा की कि राज्य संचालित शराब की दुकानें खुली रहेंगी। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कोविड-19 समीक्षा बैठक के बाद इस निर्णय की घोषणा की।

उन्होंने कहा, “राज्य द्वारा संचालित केरल स्टेट बेवरेज (मैन्युफैक्चरिंग एंड मार्केटिंग) कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बेवको) की शराब की दुकानों को प्रतिबंधों से मुक्त कर दिया गया है और यह अब इन शराब की दुकानों को छूट दी जाएगी।” विजयन ने सोमवार को ये घोषणा करते गुए संवाददाताओं से कहा, “शराब की दुकानें खुली रहेंगी। जब सरकार ने शराब की बिक्री रोक दी थी तो हमें कुछ बुरे अनुभवों से गुजरना पड़ा था। इससे कई सामाजिक मुद्दे उत्पन्न होंगे।”

मुख्यमंत्री विजयन ने राज्य द्वारा संचालित शराब की दुकानों के खुलने पर शर्त रखी। उन्होंने कहा, “ग्राहक बैठकर नहीं पी सकते। मगर, बाद में जरूरत पड़ने पर काउंटर सेल की अनुमति दी जाएगी।”

इसके बाद उन्होंने अपने निर्णय को वाजिब ठहराते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के फैसले का हवाला दिया। जिसमें उन्होंने लॉकडाउन के दौरान जरूरत के सामनों जैसे सब्जी आदि के साथ पेय को जरूरी सामग्री में शामिल किया था और इसकी आपूर्ति को आवश्यक बताया था।

यहाँ बता दें कि केरल में इस समय वामपंथियों की सरकार है जिसके कारण सीएम का ये फैसला और भी ज्यादा हैरान करने वाला है। क्योंकि अपनी विचारधारा को हमेशा धर्म-जाति-पाति से उठकर मानवता के हित में बताने वाले वामपंथियों से जाहिर है ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती। लेकिन ऐसी उम्मीद सिर्फ कागजी है!

गौरतलब है कि सरकार के इस फैसले की आलोचना करते हुए नेता विपक्ष रमेश चेन्निथला ने कहा कि यह शराब की सभी दुकानों को बंद करने के खिलाफ सरकार के अड़ियल रवैये को दर्शाता है, जिससे राज्य और अधिक खतरनाक स्थिति में पहुँचेगा।

जानकारी के अनुसार, केरल वह राज्य है जहाँ प्रति व्यक्ति शराब की खपत सबसे अधिक है। जिसके कारण इसका सीधा राजस्व पर पड़ता है या ये कहें कि सरकारी खजाने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा राज्य की शराब की खपत से आता है। बता दें 2019 में बिक्री की तुलना में बेवको आउटलेट के माध्यम से कानूनी शराब की बिक्री में 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।

ऑल्ट न्यूज के सिन्हा, प्रिंट वाले गुप्ता ने फेक अकाउंट को रीट्वीट कर फैलाई झूठी जानकारी, पकड़े जाने पर ट्वीट डिलीट

एक ट्विटर अकाउंट होता है, जो कई दिनों से बंद पड़ा हुआ है। उस ट्विटर अकाउंट से अचानक से एक वीडियो ट्वीट किया जाता है, जिसमें एक महिला डॉक्टर बताती है कि किस तरह डॉक्टरों को सरकार द्वारा कुछ भी सुविधाएँ नहीं दी जा रही हैं। वो बताती हैं कि उसने जो मास्क पहना हुआ है, वो काफ़ी पुराना है और उसे बार-बार धो कर उसे पहनना पड़ रहा है। विडम्बना देखिए कि वो ट्विटर अकाउंट काफ़ी दिनों से बंद पड़ा हुआ था जबकि उसे 2011 में ही बनाया गया था।

वो डॉक्टर बताती हैं कि वो एक सप्ताह से यही मास्क पहन रही हैं। इस ट्विटर अकाउंट के काफ़ी कम फॉलोवर हैं, मात्र 314 ही। फिर वो ट्वीट वायरल कैसे होगा? ऐसे में प्रतीक सिन्हा आगे आते हैं और वो उस ट्वीट को रीट्वीट करते हैं। वही प्रतीक सिन्हा, कथित फैक्ट-चेकिंग वेबसाइट ‘ऑल्ट न्यूज़’ के संस्थापक। इसके बाद ‘द प्रिंट’ के संस्थापक शेखर गुप्ता द्वारा उसे रीट्वीट किया जाता है। बस हो गया वायरल। वामपंथी गैंग की ख़बरों का नैरेटिव ऐसे ही गढ़ा जाता है।

और सबसे अच्छी बात तो ये है कि ये अकाउंट किसी पुरुष के नाम पर था, जिसका हैंडल है- विक्रमादित्य। पहले नाम भी किसी पुरुष का था लेकिन इसको वायरल करने के लिए इसे किसी महिला के नाम पर बना दिया गया। लेकिन, चोरी पकड़ी इसीलिए गई क्योंकि इस ट्विटर अकाउंट ने नाम तो बदल लिया लेकिन वो अपना यूजरनेम या फिर ट्विटर हैंडल का नाम नहीं बदल पाए। तैयारी अधूरी रह गई और प्रपंच पकड़ा गया। इसका मतलब है कि प्रतीक सिन्हा ने एक फेक अकाउंट का ट्वीट शेयर किया, ताकि इसके आधार पर मोदी सरकार पर निशाना साधा जा सके।

प्रतीक सिन्हा ने रीट्वीट किया फेक हैंडल का ट्वीट

अब उस अकाउंट ने अपने सारे ट्वीट्स डिलीट कर लिए हैं। अगस्त 2011 में बने उस अकाउंट पर अगर आप अभी जाएँगे तो आपको कुछ नहीं दिखेगा क्योंकि उसने सारे ट्वीट्स हटा दिए हैं। पकड़े जाने के बाद गिरोह विशेष ने ऐसा करवाया है। अक्सर ये आरोप लगाया जाता है कि फलाँ ट्विटर हैंडल ने कुछ ग़लत सूचना साझा कर दी तो इसके लिए पीएम मोदी जिम्मेदार हैं क्योंकि वो इसे फॉलो करते हैं। ठीक ऐसे ही, इस ट्विटर हैंडल को जेएनयू की पूर्व छात्र नेता शेहला रशीद फॉलो कर रही थीं। अब आप समझ सकते हैं कि किसके तार कहाँ और किस-किस से जुड़े हुए हैं।

और भी कई लोग थे, जिन्होंने मोदी सरकार के विरोध में ट्वीट देखते ही इस हैंडल को फॉलो कर दिया। उनमें से एक नाम ज्योति यादव का भी है, जो ‘द प्रिंट’ नामक प्रोपेगंडा पोर्टल में कार्यरत हैं। इस ट्विटर हैंडल का नाम पहले ‘विक्रमादित्य सांगवान’ था। आप ऊपर की तस्वीर में उसकी फोटो भी देख सकते हैं, जो कि देखने में स्पष्ट रूप से एक पुरुष लग रहा है। फिर मोदी के विरोध के प्रोपेगंडा की आग में उसने ख़ुद को औरत क्यों बना लिया, ये समझ से परे हैं।

कोरोना संकट पर वित्त मंत्रालय ने दी बड़ी राहत: ITR, GST सहित कई घोषणाएँ, दूसरे बैंक के ATM से पैसे निकालने पर नहीं लगेगा कोई चार्ज

भारत समेत पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का प्रकोप जारी है। भारत में अब तक इसके 503 केस सामने आ चुके हैं जिनमें से 9 लोगों की मौत हो गई है। कोरोना के खतरे से निपटने के लिए देश के कई राज्यों में लॉकडाउन घोषित किया गया है। कुछ जगहों पर लापरवाही की वजह से कर्फ्यू लगा दिया गया है। 

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के मद्देनजर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार (मार्च 24, 2020) को मीडिया को संबोधित किया। मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने कई राहतों का ऐलान किया। वित्त मंत्री ने इनकम टैक्स और जीएसटी को लेकर अहम ऐलान किया। निर्मला सीतारमण ने लोगों को राहत देते हुए इनकम टैक्स रिटर्न की तारीख (2018-19) को बढ़ाकर 30 जून तक कर दिया है। पहले इसकी आखिरी तारीख 31 मार्च थी। इसके बाद जमा करने पर 10% जुर्माना था। अब रिटर्न की देरी पर 12% की जगह 9% चार्ज लगेगा। इसके साथ ही आधार-लिंक पैन की आखिरी तारीख को 30 जून 2020 तक किया गया। यह भी पहले 31 मार्च तक थी।

इसके अलावा वित्त मंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि TDS पर ब्याज दर 18% की जगह 9% किया गया। विवाद से विश्वास योजना को बढ़ाकर 30 जून 2020 कर दिया है और इस पर 10 प्रतिशत का कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं है। सीतारमण ने अन्य बड़े ऐलान भी किए। इसमें मार्च, अप्रैल, मई का जीएसटी रिटर्न भरने की तारीख भी 30 जून तक बढ़ाई गई। इसकी फाइलिंग में देरी पर कोई जुर्माना नहींं लगेगा। निर्मला सीतारमण ने आगे कहा कि 5 करोड़ सालाना से कम कारोबार वाली कंपनियों पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि कस्टम क्लियरेंस अब एक जरूरी सर्विस है, इसलिए 30 जून, 2020 तक यह 24/7 काम करेगी। नई कंपनीज बनाने वालों को अपने व्यापार के लिए डिक्लरेशन करने के निर्धारित 6 महीने की अवधि को बढ़ाकर एक साल किया गया। बोर्ड की बैठक आयोजित करने की अनिवार्यता को 60 दिनों की अवधि के लिए बढ़ाया जा रहा है, यह छूट अगली दो तिमाहियों के लिए है। 2020 में अभी जिन कंपनियों ने डायरेक्टर्स की एक भी मीटिंग नहीं की है, उनको नियम का उल्लंघन नहीं माना जाएगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि कोरोना वायरस से जुड़े कार्यों में अब CSR का फंड दिया जा सकता है। यानी यह फंड अब कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में इस्तेमाल किया जाएगा।

महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के 101 केस पॉजिटिव: 3 लाख N95 समेत 25 लाख मास्क कालाबाजारियों से जब्त, 4 गिरफ्तार, 2 फरार

कोरोना वायरस ने देश में कहर बरपाना शुरू कर दिया है। कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र है। मंगलवार (मार्च 24, 2020) सुबह चार नए मामले सामने आए हैं, जिसमें से 3 पुणे से और एक सांगली से आया है। सांगली में पहली बार कोई कोरोना पॉजिटिव केस सामने आया है। अब महाराष्ट्र में मरीजों की संख्या 101 हो गई है। कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए पूरे राज्य में लगाई गई धारा 144 के फेल होने के बाद सीएम उद्धव ठाकरे ने आज से पूरे राज्य में कर्फ्यू घोषित कर दिया है। इसी के साथ राज्य के सभी बॉर्डर और शहरों की सीमाओं को भी सील किया गया है।

कोरोना वायरस के खतरे के बीच जरूरी संसाधन जैसे मास्क और सैनिटाइजर की माँग अचानक से काफी बढ़ गई है। इसके बाद इसकी कालाबाजारी की शिकायतें सामने आ रही हैं। इस बीच मुंबई पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए 25 लाख मास्क को जब्त किया है। महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने बताया कि पुलिस ने अंधेरी और भिवंडी के गोदामों से 25 लाख मास्क जब्त किए हैं, जिसमें 3 लाख N95 मास्क शामिल हैं। इन मास्कों की कुल कीमत 15 करोड़ रुपए है। उन्होंने बताया कि मास्क की कालाबाजारी के आरोप में 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 2 लोग फरार हैं। पुलिस दोनों की तलाश कर रही है। पुलिस ने बताया कि इन मास्कों को ऊँची कीमत पर बेचने की तैयारी थी।

गृहमंत्री ने बताया कि कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए पुलिस सर्तकता से काम कर रही है। उन्होंने मंगलवार को मुंबई में पत्रकारों को बताया कि मुंबई के अंधेरी व कांदिवली में बड़े पैमाने पर मास्क को बनाकर जमा किए जाने की गोपनीय खबर वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक महेश देसाई की टीम को मिली थी। इसी जानकारी के आधार पर पुलिस ने नकली ग्राहक बनकर आरोपितों के साथ संपर्क किया और 25 लाख मास्क बरामद कर लिया है। उन्होंने कहा कि घटनास्थल से बरामद मास्क आम नागरिकों के लिए उपलब्ध करवाए जाएंँगे। 

गौरतलब है कि इससे पहले राजस्थान में मास्क की कालाबाजारी की खबर सामने आई थी। जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल से तकरीबन ढाई लाख से ज्यादा मास्क गायब हो गए थे। इन गायब हुए मास्क की कीमत लगभग 11 करोड़ रुपए बताई गई थी। बताया गया कि गायब हुए मास्क N95 क्वालिटी के थे।

अज़ान सुनकर निकल पड़े 100-150 नमाजी: धारा 144 का उल्लंघन करते हुए अदा की नमाज, आसबीबी मस्जिद के ट्रस्टियों पर FIR दर्ज

विश्व भर में कोरोना के फैलते प्रभाव को रोकने के लिए हर ओर प्रयास किए जा रहे हैं। मगर, इस बीच एक समुदाय ऐसा है, जो इन कोशिशों को नजरअंदाज कर लगातार अपनी मनमानी कर रहा है। बीते दिनों कई ऐसे मामले सामने आए जब मजहब के नाम पर कोरोना के खतरे को दरकिनार कर मानवता को खतरे में डाला गया। इसी कड़ी में मुंबई में भी एक मस्जिद में धारा 144 का उल्लंघन करते हुए नमाज अदा की गई। जिसकी सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मस्जिद के ट्रस्टी पर FIR दर्ज की।

गौरतलब है कि अब तक कोरोना के मरीजों की संख्या महाराष्ट्र में सबसे अधिक पाई गई है और ये तादाद बढ़ती जा रही है लेकिन फिर भी भिवंडी शहर के आसबीबी मस्जिद पर इसका कोई फर्क़ नहीं है।

जानकारी के मुताबिक सोमवार की दोपहर यहाँ नमाज के लिए मस्जिद से अजान हुई। बस फिर क्या…! नियम कानून का उल्लंघन करते हुए लोग चल पड़े नमाज पढ़ने। मगर, इसकी जानकारी होने के बाद सरकार के आदेश का उल्लंघन करने के कारण भिवंडी शहर पुलिस ने आसबीबी मस्जिद के पदाधिकारियों के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया।।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस उपायुक्त राजकुमार शिंदे ने जमावबंदी लागू करने की जानकारी देते हुए शहर के सभी धार्मिक स्थलों पर जमा न होने की बात कही थी। उन्होंने मस्जिदों के पदाधिकारियों से नमाज के समय सिर्फ अजान करके लोगों को जानकारी देने का अनुरोध किया था और नमाज घरों में पढ़ने की बात कही थी।

मगर, आसबीबी मस्जिद में तो नमाज अदा करने वालों की भीड़ लग गई। इसके बाद भिवंडी शहर पुलिस ने आसबीबी मस्जिद के अध्यक्ष गुलाम अहमद खान, कोषाध्यक्ष मरगूब हसन अंसारी, सदस्य मो हबीब अंसारी एवं हजरत अली अंसारी सहित मस्जिद के अन्य पदाधिकारियों के विरुद्ध सीआरपीसी की धारा 144 (1)(3) एवं आईपीसी की धारा 188, 269 सहित राष्ट्रीय आपदा उल्लंघन अधिनियम 2005 की धारा 51 बी के तहत मामला दर्ज किया है।

100 बेड के साथ चालू हुआ देश का पहला ‘कोरोना वायरस डेडिकेटेड अस्पताल’, रिसर्च में जुटे रिलायंस के वैज्ञानिक व डॉक्टर

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कोरोना वायरस से निपटने और लोगों की परेशानियों का ख्याल रखने में सरकार का पूर्ण सहयोग करने का वादा किया और इसी क्रम में कई घोषणाएँ की। इनमें कोरोना वायरस के मरीजों के लिए एक स्पेशल अस्पताल खोलने की बात भी कही गई थी, जिसे सिर्फ़ 2 सप्ताह में तैयार कर लिया गया है। अब हम आपको उस असपताल की डिटेल्स बताते हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने बताया है कि ये देश का पहला ‘कोविड-19 डेडिकेटेड हॉस्पिटल’ है। इसमें 100 बेड हैं और इसे बृहनमुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) के साथ मिल कर तैयार किया गया है। इसे ‘सेवन हिल्स हॉस्पिटल’ के एक सेंटर के रूप में तैयार किया गया है।

रिलायंस ने बताया है कि ये अपने आप में भारत का पहला ऐसा सेंटर है और इसे पूर्णरूपेण रिलायंस फाउंडेशन द्वारा फंड किया गया है। क्रॉस-कंटैमिनेशन को रोकने और संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए एक ‘नेगेटिव प्रेशर रूम’ का निर्माण किया गया है। सभी बिस्तरों को सारी ज़रूरी सुविधाओं, जैसे बायोमेडिकल इंस्ट्रूमेंट्स और अन्य इंफ्रास्ट्रक्टर से लैस किया गया है। जैसे- वेंटीलेटर, पेसमेकर, डायलिसिस मशीन और पेसेंट मॉनिटरिंग डिवाइसेज की सुविधा सभी बेड के लिए है। इसके अलावा एचएन रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल ने भी क़दम बढ़ाए हैं।

ये अपने आप में एक वर्ल्ड क्लास हेल्थकेयर संस्थान है, जिसने विदेश से आने वालों के लिए स्पेशल मेडिकल फैसलिटीज की व्यवस्था करने का निर्णय लिया है। यहाँ जल्द ही संक्रमित लोगों के इलाज और आइसोलेशन की व्यवस्था पूरी कर ली जाएगी। यहाँ के डॉक्टर्स और रिसचर्स लगातार कोरोना वायरस का तोड़ ढूँढने में लगे हुए हैं, ताकि इसका कोई स्थायी इलाज निकल कर सामने आए। महाराष्ट्र की लोधीवाली में भी रिलायंस का एक बड़ा आइसोलेशन सेंटर है, जिसे जिला प्रशासन को सौंप दिया गया है। रिलायंस ने मुख्यमंत्री राहत कोष में भी 5 करोड़ रुपए जमा किए हैं। देखें रिलायंस के ‘कोरोना वायरस डेडिकेटेड हॉस्पिटल’ का वीडियो:

सोमवार (मार्च 23, 2020) को ही रिलायंस ने घोषणा की थी कि रिलायंस फाउंडेशन देश के विभिन्न शहरों में लोगों को मुफ्त भोजन भी देगा। ये काम कई एनजीओ के माध्यम से किया जाएगा। इमरजेंसी सेवाओं की गाड़ियों को रिलायंस अपने पेट्रोल पम्प्स पर मुफ्त में तेल भी देगा। पूरे देश में रिलायंस के 736 ग्रोसरी स्टोर्स हैं, जिन्हें लोगों के डिमांड्स को पूरा करने के लिए तैयार किया जा रहा है। अब ये सभी स्टोर्स सुबह 7 बजे से रात 11 बजे तक खुले रहेंगे। इन स्टोर्स में सब्जियों व अन्य चीजों का इंतजाम किया जाएगा। साथ ही बुजुर्गों के लिए होम डिलीवरी की व्यवस्था की जाएगी। रिलायंस ने प्रतिदिन 1 लाख मास्क के उत्पादन की भी जानकारी दी है।

कानून तोड़ने वालों को नहीं होगा संक्रमण, सिर्फ़ लगेगी चोट: सैनिटाइज्ड लाठियों से पिटाई करेगी हरियाणा पुलिस

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बाद लगभग पूरे भारत में लॉकडाउन की घोषणा विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा कर दी गई है। लेकिन, कई लोग फिर भी सरकार की सलाहों व आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं। ऐसे में हरियाणा में भी स्थिति ठीक नहीं है। वहाँ भी लोगों से लगातार अपील की जा रही है कि वो लॉकडाउन का पालन करें लेकिन कई लोग घरों से निकल रहे हैं। ऐसे में पुलिस अब सख्ती से कार्रवाई करने में जुट गई है। लाठियों को सैनिटाइज किया जा रहा है ताकि क़ानून तोड़ने वालों की पिटाई की जा सके।

हरियाणा में ‘सिक्योरिटी एंड साइबर क्राइम’ के एसपी पंकज नैन ने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें पुलिस बल अपनी लाठियों पर सैनिटाइजर छिड़कते दिख रहे हैं। चूँकि इन लाठियों का इस्तेमाल सख्ती के लिए किया जाना है, ऐसे में पुलिसवालों का और साथ ही जिनकी पिटाई होगी, उनका भी सुरक्षित रहना ज़रूरी है, इसीलिए पुलिस लाठियों को सैनिटाइज कर रही है। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप देख सकते हैं कैसे लाठियों पर सैनिटाइजर का इस्तेमाल किया जा रहा है:

अब तक कहावत ये चलती थी कि लाठी को तेल पिलाने से ज्यादा चोट लगती है लेकिन अब लाठियों को सैनिटाइजर पिलाया जा रहा है। आईपीएस अधिकारी पंकज ने बताया कि पुलिस ‘फुल तैयारी’ में है। जहाँ तक हरियाणा सरकार की बात है, वो किसानों के लिए एक बड़ी घोषणा का खाका तैयार करने में लगी हुई है। ‘मुख्यमंत्री परिवार समृद्धि योजना’ के 12.38 लाख लाभार्थियों के खाते में 2000 रुपए 31 मार्च तक भेज दिए जाएँगे। प्रत्येक को 4000 रुपए पहले ही दिए जा चुके हैं। सरकार ने विभिन्न कारोबारियों और व्यवाप्रियों से भी इसके लिए मदद माँगी है।

कई प्रदेशों में पुलिस कोरोना वायरस के खतरों को दरकिनार कर बिना मतलब घर से बाहर निकलने वालों पर कार्रवाई कर रही है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा में पुलिस ने ऐसे लोगों को एक पर्ची थमा पर उनकी फोटो खिंचवाई। उन पर्ची पर लिखा होता है- “मैं समाज का दुश्मन हूँ। मैं कोरोना वायरस का दोस्त हूँ। मैं सरकार की सलाह नहीं मानूँगा। मैं घर में नहीं रहूँगा।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चिंता जताई थी कि लॉकडाउन का सख्ती से पालन नहीं किया जा रहा है, ऐसे में विभिन्न राज्य सरकारें इस दिशा में काम करें।

शाहीन बाग में फिर इकट्ठा हुई ‘जाहिलों’ की भीड़, लोगों ने कहा- ‘तंबू उखाड़ना काफी नहीं, इन्हें बंबू भी चाहिए’

कॉन्ग्रेस नेता, चमचा डॉक्टर और ‘साथी पत्रकारों’ ने फैलाया कोरोना पर झूठ, स्वास्थ्य मंत्री ने दिए FIR के आदेश

कॉन्ग्रेस नेता हरजीत भट्टी, जो कि पेशे से एक डॉक्टर हैं, ने सोमवार (मार्च 23, 2020) को ट्विटर पर दावा किया कि असम मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य कर्मियों को खुद को प्लास्टिक बैग में कवर करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि ये वो प्लास्टिक की थैलियाँ हैं, जिसका इस्तेमाल जैव चिकित्सा अपशिष्ट (biomedical waste) को ले जाने के लिए किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि असम मेडिकल कॉलेज में व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों (PPE) की कमी है।

कॉन्ग्रेस नेता द्वारा किया गया ट्वीट
विनोद कापड़ी द्वारा किया गया ट्वीट

फिल्मकार-पत्रकार विनोद कापड़ी, जो नियमित रूप से फर्जी खबरें फैलाने में लिप्त रहते हैं, वे भी इसमें शामिल हो गए हैं। देश में छाए संंकट के बीच भी उन्होंने पीएम मोदी पर निशाना साधने का मौका नहीं छोड़ा। इसके साथ ही अन्य ‘पत्रकारों’ ने भी भट्टी के ट्वीट को फैलाने का काम किया, जैसा कि वो हमेशा किया करते हैं।

इस खबर को इसी तरह के अन्य लोगों ने भी ट्विटर पर काफी शेयर किया।

मोहम्मद जुबैर द्वारा लाइक किया गया Joydas का ट्वीट

AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर द्वारा Joydas के ट्वीट को लाइक किया गया (हालाँकि हम अभी भी इस खबर का AltNews द्वारा फैक्ट चेक किए जाने का इंतजार कर रहे हैं।)

वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट द वायर की पत्रकार ने भी Joydas के असत्यापित ट्वीट को शेयर किया। जिसे Joydas ने बाद में बिना किसी स्पष्टीकरण के डिलीट कर दिया। 

इसी तरह का दावा कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया संयोजक सरल पटेल ने भी किया।

हालाँकि असम के स्वास्थ्य मंत्री हिमंता विश्व शर्मा ने उनके सारे दावों को झूठा करार दिया। 

स्वास्थ्य मंत्री हिमंता विश्व शर्मा ने कॉन्ग्रेस नेता हरजीत भट्टी के ट्वीट को (राजनीतिक उद्देश्यों से) अत्यधिक प्रेरित बताते हुए कहा कि ऐसा जानबूझकर किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने पिछले तीन दिनों में PPE किट की अच्छी संख्या में आपूर्ति की है। शर्मा ने यह भी बताया कि पुलिस को भट्टी के खिलाफ FIR दर्ज करने और जाँच करने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि वो खुद अस्पताल के अधिकारियों के साथ संपर्क में हैं।

शर्मा के स्पष्टीकरण के बाद भट्टी, कापड़ी और Joydas ने चुपचाप अपने ट्वीट को डिलीट कर दिया, जबकि कॉन्ग्रेस मीडिया संयोजक सरल पटेल ने अपने नेता शशि थरूर की तरह इसे अपने टाइमलाइन से डिलीट नहीं किया।

इधर हरजीत भट्टी ने उसी तस्वीर के साथ एक और ट्वीट करते हुए लिखा कि उन्हें असम मेडिकल कॉलेज से फोन आया कि उनके पास PPE है। इस प्लास्टिक बैग से परीक्षण किया गया था कि अगर मरीजों की संख्या में वृद्धि होगी तो PPE की कमी होने पर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इस ट्वीट के जरिए उन्होंने एक बार फिर से आधारहीन दावा किया।

बता दें कि डॉ हरजीत सिंह भट्टी कॉन्ग्रेस पार्टी के अखिल भारतीय चिकित्सा सेल के राष्ट्रीय संयोजक हैं। पिछले साल फरवरी में उन्हें कॉन्ग्रेस पार्टी में इस पद पर नियुक्त किया गया था। भट्टी सिर्फ कॉन्ग्रेस पार्टी ही नहीं बल्कि भीम आर्मी के भी काफी नजदीकी हैं। वह भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद के डॉक्टर होने का दावा करते हैं। आजाद इन दिनों जमानत पर बाहर है और भट्टी यह दावा करते हुए कि वह बेहद अस्वस्थ हैं, आजाद के चिकित्सा देखभाल की माँग को लेकर काफी मुखर रहे हैं। वह न केवल आजाद के डॉक्टर हैं, बल्कि वो उनके समर्थक भी हैं, क्योंकि उन्हें हैशटैग #AzaadiForAzad के साथ ट्वीट पोस्ट करते हुए देखा गया है।

पटना की वो मस्जिद, जहाँ विदेशियों का तय होता है काम और कटता है कमान: 12 की पकड़ के बाद खुलासा

बिहार की राजधानी पटना के कुर्जी इलाके में स्थित दीघा मस्जिद से पकड़े गए 12 विदेशियों को क़्वारंटाइन कर दिया गया है। सोमवार को इन्हें हिरासत में लेने के बाद जाँच के लिए पटना एम्स भेजा गया। यहाँ स्क्रीनिंग के बाद इन्हें होटल पाटलिपुत्र अशोक भेजा गया। खुद एम्स के निदेशक डॉ प्रभात कुमार सिंह ने इस खबर की जानकारी दी।

जागरण में प्रकाशित संबंधित खबर

उल्लेखनीय है कि सोमवार को ये सभी पटना पहुँचे थे। लेकिन, पहले इस बारे में किसी को सूचना नहीं थी। मगर, खुलासा होते ही आसपास के मोहल्ले में ये खबर फैल गई और लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। हँगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस भी फौरन इलाके में पहुँची और 12 विदेशियों को अपनी कस्टडी में ले लिया।

इनसे पूछताछ में पता चला कि सभी तजाकिस्तान (Tajikistan) के निवासी हैं और पटना में धार्मिक प्रचार प्रसार के लिए आए थे। दीघा थानेदार मनोज कुमार सिंह ने बताया कि एहतियातन जाँच के लिए सभी को एम्स भेजा गया। ये सभी चार महीने पूर्व धार्मिक प्रचार के लिए भारत आए थे और सोमवार की सुबह नमाज के लिए दीघा मस्जिद गए थे, पुलिस ने सूचना पर जाँच के लिए एम्स भिजवाया।  

यहाँ बता दें कि स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार को इन विदेशियों के बारे में जानकारी होनी चाहिए थी लेकिन कुछ लोगों की मदद से इन लोगों को धार्मिक स्थल की आड़ लेकर छिपाया गया। साथ ही इन लोगों ने अपनी मेडिकल जाँच भी नहीं करवाई। इन पर ये भी आरोप लगा कि धार्मिक स्थल में छिपकर ये लोग बिहार में घूम-घूमकर धर्म विशेष का प्रचार करते हैं।

जानकारी के मुताबिक, ये सभी विदेशी पहले दिल्ली, फिर मुंबई में थे। इसके बाद 4 मार्च को पटना पहुँचे थे। लेकिन यहाँ इन्हें अपने काम (मजहब प्रचार) को करने के लिए अशोक राजपथ पर नूरी मस्जिद स्थित तबलिगी जमायत मुख्यालय जाना था। क्योंकि, वहीं से इन्हें किस मस्जिद में भेजना है, ये तय होता है।

दरअसल, बिहार में इस काम के लिए मुख्यालय से ही कमान कटता है। बताया जा रहा है कि इन लोगों का सोमवार की सुबह दीघा के गेट नंबर 74 पर स्थित मस्जिद में जाने के लिए कमान कटा था। मगर, सुबह करीब दस बजे किसी ने उन्हें देख हल्ला कर दिया कि बिना जाँच के दूसरे देश से पटना आए हैं।

पिता की पेंटिग राणा कपूर को करोड़ों में बेचना प्रियंका गाँधी को पड़ेगा महँगा, ED की नजरों में है ये अपराध

कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने एमएफ हुसैन द्वारा बनाई अपने पिता राजीव गाँधी की पेंटिग को यस बैंक के पूर्व सीईओ राणा कपूर को करोड़ों में बेचा था। शायद उस समय उन्हें अंदाजा नहीं था कि ये सौदा उन्हें इतना महंगा पड़ेगा कि इस लेन-देन के कारण ईडी उन पर अपना शिकंजा कसेगी।

जी हाँ, खबर आ रही है कि ईडी बैंक फ्रॉड मामले में इस ट्रांसैक्शन को अपराध मान सकती है। अभी फिलहाल जाँच एजेंसी ने राणा कपूर को कस्टडी में ले रखा है। लेकिन आसार है कि इस मामले में देनदारों से भी पूछताछ हो सकती है। जिसकी खबर सुनकर गाँधी परिवार के वकील केटीएस तुलसी ने इसे असंवैधानिक बताया। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि यह सब अपराध में कैसे आ सकता है? यह पूरी तरह से एक निजी वाणिज्यिक लेनदेन है और जब कॉन्ग्रेस पार्टी ने इसे आयकर घोषित किया है, तो हमें उन पर विश्वास करना होगा। बिना किसी काल्पनिक खींचतान के ये मामला मनी लॉन्ड्रिंज की गतिविधि का हिस्सा नहीं बन सकता।

उल्लेखनीय है कि मामले की जाँच में जुटे एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “2 करोड़ रुपए, जिसे राणा कपूर ने प्रियंका गाँधी को पेंटिंग के बदले दिया, वह कपूर के अकाउंट में कुछ समय पहले ही आए थे। इस कारण से ये मामला उनके लिए जाँच का विषय है और इसी वजह से खरीददार और देनदार दोनों पर PMLA एक्ट की धारा 3 के कार्रवाई हो सकती है।”

यहाँ बता दें कि पीएमएलए की इस धारा के तहत प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जो व्यक्ति भी अपराध के दौरान उस प्रक्रिया या संपत्ति से संबंधित होता है, उसे मनी लॉन्ड्रिंग का अपराधी माना जाता है।

जानकारी के मुताबिक एमएफ हुसैन ने राजीव को उनकी ये पेंटिंग उनके प्रधानमंत्री रहने के दौरान दी थी। लेकिन साल 2010 में प्रियंका गाँधी ने इसे 2 करोड़ रुपए में राणा कपूर को बेच दिया। कपूर ने इसकी पेमेंट प्रियंका गाँधी को चेक के जरिए की थी। जिसकी जाँच आईटी विभाग द्वारा जारी है।

गौरतलब है कि ये मामला उस समय प्रकाश में आया था, जब ईडी ने राणा कपूर के मुंबई वाले घर पर छापेमारी की और इस पेंटिंग को जब्त किया था। बाद में जाँच में मालूम हुआ कि 2 करोड़ की लेन-देन इसी पेंटिग से संबंधित थी। खुद राणा कपूर ने ईडी को इस मामले में कॉन्ग्रेस पार्टी के होने के सबूत दिए।

खबर के अनुसार, जब कपूर से पूछा गया कि उन्हें ये पेंटिंग कैसे मिली, तो बैंकर राणा कपूर ने उन्हें अपने और पूर्व कॉन्ग्रेस नेता मिलिंद देवड़ा के बीच हुई बातचीत (संदेश के जरिए) की एक कॉपी सौंपी। इसमें एक पत्र स्वीकृति का था और दूसरा प्रियंका गाँधी की ओर से आभार का। इसके अलावा एक कॉपी उस 2 करोड़ रुपए के चेक की थी, जिसपर उन्होंने 3 जून 2010 को हस्ताक्षर किया।

जाँच एजेंसियों को सौंपे गए संदेशों को उस समय ब्लैकबेरी के जरिए प्रेषित किया गया था। जिसमें डिओरा और कपूर के बीच 25 मई 2010 से लेकर 6 जून 2010 तक की बातचीत है। प्राप्त दस्तावेजों से मालूम पड़ता है कि कपूर ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की पेंटिंग खरीदने की इच्छा जताई थी और यस बैंक के जरिए इस खरीददारी को वाजिब ठहराने के लिए ये कारण दिया था कि वह कला को संग्रहित करने के शौकीन हैं।वहीं, प्रियंका गाँधी द्वारा कपूर को लिखे गए पत्र में उन्होंने इस पेंटिंग के ऐतिहासिक मूल्यों को संदर्भित किया था और आशा जताई थी कि कपूर इस पेंटिंग के कद के अनुरूप इसे सही जगह देंगे।

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