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शाहीन बाग़ में फेंका गया पेट्रोल बम, जनता कर्फ्यू से ध्यान खींचने की साजिश बता रहे लोग

शाहीन बाग़ के लोग रविवार (मार्च 22, 2020) को भी धरने पर बैठे हुए हैं, जब पूरा देश कोरोना वायरस से लड़ने के लिए जनता कर्फ्यू का पालन करने में लगा हुआ है। अब उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन स्थल पर किसी ने पेट्रोल बम फेंक कर मारा है। दिल्ली के हालिया हिन्दू-विरोधी दंगों में देखा गया था कि दंगाई मुस्लिम भीड़ ने पेट्रोल बम का खतरनाक रूप से इस्तेमाल किया था और कई हिन्दुओं को निशाना बनाया गया था। अभी तक साफ़ नहीं है कि शाहीन बाग़ में पेट्रोल बम किसने फेंका।

तस्वीरों में देखा जा सकता है कि शाहीन बाग़ एंटी-सीएए प्रदर्शन स्थल के नजदीक आग लगी हुई है और लोग उसे बुझाने में लगे हुए हैं। एएनआई की ट्वीट के अनुसार, ये घटना रविवार की सुबह हुई है। सोशल मीडिया पर लोगों ने आशंका जताई है कि हो सकता है कि शाहीन बाग़ के उपद्रवियों ने जनता कर्फ्यू से ध्यान खींचने के लिए ऐसा किया हो। हालाँकि, इस सम्बन्ध में अभी तक कुछ भी पुष्टि नहीं हुई है।

कोरोना वायरस को लेकर सरकार ने आगाह किया है कि कहीं भी भीड़ न जुटाएँ लेकिन शाहीन बाग़ के उपद्रवियों ने पूरी दिल्ली को ख़तरे में डाल रखा है। तबरेज नामक प्रदर्शनकारी कोरोना वायरस का शिकार भी हो गया। उसकी बहन को भी कोरोना हो गया था, जो सऊदी से इस्लामी तीर्थयात्रा कर के लौटी थी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शाहीन बाग़ में कोरोना के ख़तरों से जुड़े सवालों को टाल दिया। कोरोना को लेकर जिस तरह से सोशल मीडिया पर विज्ञान और डॉक्टरों की सलाह को धता बताते हुए मजहबी विडियो शेयर किए जा रहे हैं, इससे लगता नहीं है कि ये समाज इस समस्या के प्रति गंभीर है।

हथियारों की ट्रेनिंग लेने Pak जाने वाली थी तानिया परवीन, मदरसों से जुटाती थी लश्कर के लिए मदद

पश्चिम बंगाल में शुक्रवार (मार्च 20, 2020) को 21 साल की कॉलेज छात्रा तानिया परवीन गिरफ्तार की गई थी। वह आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी है। उसे नॉर्थ 24 परगना जिले के बदुरिया से पकड़ा गया था। फ़िलहाल वो बशीरहाट सब डिविजनल कोर्ट के आदेश पर 14 दिनों की पुलिस रिमांड पर है, जहाँ उससे पूछताछ जारी है। आतंकी तानिया परवीन के व्हाट्सप्प ग्रुप में लश्कर-ए-तैयबा के सबसे बड़े सरगना हाफ़िज़ सईद के दो करीबियों के नंबर मिले हैं। इन्हीं दोनों के माध्यम से मुंबई हमले का मास्टरमंड तानिया को सन्देश भेजा करता था। तानिया को हवाला का जरिए रुपए भी भेजे गए थे। गिरफ़्तारी से पहले वो बांग्लादेश सीमा पर विभिन्न आतंकी संगठनों को एकजुट कर बड़े हमले की साजिश रचने में लगी हुई थी।

पश्चिम बंगाल की सोशल टास्क फोर्स द्वारा पूछताछ में तानिया से ये जानकारियाँ मिली हैं। तानिया के एक सहयोगी को भी हिरासत में लिया गया है, जो उसकी तरह ही छात्र है। उसका नाम मनाजीरुल इस्लाम है। इस्लाम के पास से दो मोबाइल फोन और कई सिम कार्ड्स मिले हैं। वो भो लगातार अपने पाकिस्तानी आकाओं के संपर्क में था। तानिया के पास से बरामद इलेक्ट्रॉनिक चीजों सहित अन्य सामानों को फॉरेंसिक जाँच हेतु भेजा गया है।

तानिया का मुख्य लक्ष्य था कि वो एक इस्लामिक राज्य की स्थापना करे। इसके लिए उसे खूँखार वैश्विक आतंकी संगठन आईएसआईएस से प्रेरणा मिली थी। वो उसी तर्ज पर काम करते हुए एक इस्लामिक स्टेट की स्थापना करना चाहती थी। पाकिस्तान से उसके आकाओं ने उसे कई भड़काऊ पुस्तकें भेजी थीं, जिसे पढ़ कर उसकी सोच और भी कट्टरवादी हो गई थी। 3 साल से लश्कर से जुडी तानिया को ‘जिहाद’ का प्रशिक्षण इन्हीं किताबों के जरिए मिला। पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों पर हुए हमले के बाद उसकी फोटो शेयर कर के तानिया ने आतंकियों की प्रशंसा भी की थी।

गिरफ़्तार आतंकी तानिया परवीन को लेकर ‘दैनिक जागरण’ के राष्ट्रीय संस्करण में छपी ख़बर

बता दें कि पिछले कुछ सालों में जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की कमर टूटने के बाद पूरे भारत में उनके स्लीपर सेल्स लगभग ख़त्म हो गए थे, जिसे पुनर्जीवित करने का ठेका तानिया को दिया गया था। उसने कई व्हाट्सप्प ग्रुप बना कर ये काम शुरू किया। इनमें से कुछ ग्रुप्स में पाकिस्तानी आतंकी भी शामिल थे। उसका उद्देश्य था कि युवाओं, ख़ासकर छात्र-छात्राओं को कट्टरपंथी बना कर उन्हें आतंकी संगठनों से जोड़ा जाए। तानिया अक्सर आसपास के इलाक़ों में स्थित मदरसों का दौरा करती थी और वहाँ भड़काऊ भाषण देकर लश्कर के लिए लोग जुटाती थी।

तानिया ने मुर्शिदाबाद में कई आतंकी शिविर भी बना रखे थे, जहाँ वो अपने लोगों को भड़काऊ भाषण देने के लिए प्रशिक्षण देती थी। वहाँ वो लोगों को ‘जिहाद’ सिखाती थी और आतंकी गतिविधियों के संचालन के गुर भी सिखाती थी। वो कुछ दिनों बाद अत्याधुनिक हथियार चलाने की ट्रेनिंग लेने पाकिस्तान जाने वाली थी। वह बांग्लादेश होकर पाकिस्तान जाने वाली थी, जहाँ वो आईएसआई अधिकारियों से मिलने वाली थी। वो आतंकी संगठन के लिए मोटी रकम भी जुटा रही थी।

अब डॉक्टरों के लिए सिरदर्द बनीं कनिका कपूर: अस्पताल में मिल रही बेहतर सुविधाएँ, पर थम नहीं रहे नखरे

कोरोना वायरस से संक्रमित होने की बात छिपा कर सैकड़ों जिंदगी को संकट में डालने वाली बॉलीवुड सिंगर कनिका कपूर अब उस अस्पताल के लिए परेशानी का सबब बन गई हैं जहाँ उनका इलाज चल रहा है। कनिका लखनऊ के संजय गाँधी PGIMS में भर्ती हैं। लेकिन यहाँ वह मरीज की तरह नहीं, बल्कि एक स्टार की तरह पेश आ रही हैं। उनके नखरों से डॉक्टर परेशान हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यहाँ वह खाने-पीने की चीजों, कमरे वगैरह को लेकर अस्पताल प्रशासन को परेशान कर रही हैं।

उन्होंने एक वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में कहा कि अस्पताल में वह जेल जैसा महसूस कर रही हैं। कमरे में मच्छर हैं और धूल भरी हुई है। उनका आरोप है कि जब डॉक्टर से उसे साफ करवाने को कहा जाता है कि तो वह कहते हैं कि यह फाइव स्टार होटल नहीं है। इस पर अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कनिका को अस्पताल की बेहतर सुविधाएँ दी गई हैं। वह एक स्टार की तरह नहीं, बल्कि मरीज की तरह व्यवहार करें। 

अस्पताल के डायरेक्टर डॉक्टर आरके धीमन ने कहा, “कनिका कपूर को अस्पताल में उपलब्ध सबसे बेहतर सेवा दी जा रही है। लेकिन उन्हें बतौर मरीज हमारे साथ सहयोग करना चाहिए, ना कि वह अपने स्टार वाले नखरे दिखाएँ। उन्हें ग्लूटेन-फ्री डाइट दी जा रही है जो कि अस्पताल के किचन में तैयार की जा रही है।”

उन्होंने आगे कहा, “कनिका कपूर को एक आइसोलेटे रूम दिया गया है, जहाँ पर अटैच्ड टॉयलेट है, मरीज का बिस्तर है, टीवी लगी है। उनके कमरे में एयर कंडीशन है, वेंटिलेशन है। साथ ही कोरोना यूनिट के लिए बनाया गया एयर हैंडलिंग यूनिट भी है। उनका ज्यादा से ज्यादा ध्यान रखा जा रहा है पर पहले उनको एक मरीज की तरह बर्ताव करना चाहिए ना कि एक स्टार की तरह।” कनिका पर आरोप है कि वह डॉक्टर और स्टाफ के साथ अभद्रता कर रही हैं

बता दें कि कनिका कपूर हाल ही में लंदन से वापस आई थीं। शुक्रवार (मार्च 20, 2020) को वह तब सुर्खियों में आईं जब उनके कोरोना वायरस से संक्रमित होने का पता चला। संक्रमण की बात सामने आने से पहले कनिका लखनऊ से लेकर कानपुर तक कई पार्टियों में शामिल हुईं थी। इनमें से एक में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, बीजेपी सांसद दुष्यंत सिंह, यूपी के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह जैसे वीआईपी मेहमान भी शामिल थे। इस खबर से लखनऊ से लेकर संसद तक हड़कंप मच गया था। राहत की बात ये है कि उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह, वसुंधरा राजे, दुष्यंत सिंह समेत जो 164 लोग लखनऊ की पार्टियों में कनिका के साथ मौजूद थे उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है। इनमें वे 28 लोग भी हैं, जो कनिका के बेहद नजदीक थे।

राजस्थान, ओडिशा और गुजरात में लॉकडाउन: जनता कर्फ्यू से सड़कों पर सन्नाटा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घोषणा के अनुसार, पूरे देश में आज ‘जनता कर्फ्यू’ है। रविवार (मार्च 22, 2020) को देश भर में सुबह 7 बजे से लेकर रात 9 बजे तक लोग सेल्फ-क्वारंटाइन में रहेंगे और शाम को अपने घर की बालकनी से या दरवाजे से ताली बजा कर डॉक्टरों को धन्यवाद अर्पित करेंगे। हालाँकि, इस दौरान ज़रूरी सेवाएँ देने वाले कर्मचारीगण बाहर रह सकते हैं। ‘जनता कर्फ्यू’ के दौरान देश भर की सड़कों पर सन्नाटा देखा जा रहा है। यहाँ तक कि बेंगलुरु का अति-व्यस्त मैजेस्टिक बीएस स्टेशन भी खली है। वहीं विभिन्न राज्यों में लॉकडाउन की घोषणा की गई है ताकि कोरोना वायरस के प्रसार को रोका जा सके।

ओडिशा की नवीन पटनायक सरकार ने 5 जिलों व 7 शहरों में 22 मार्च सुबह 7 बजे से 29 मार्च रात 9 बजे तक लॉकडाउन की घोषणा की है। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लोगों के जीवन की सुरक्षा के लिए प्रदेशभर में आवश्यक सेवाओं को छोड़कर 22 मार्च से 31 मार्च तक पूरी तरह लॉकडाउन के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि इस लॉकडाउन के तहत आवश्यक सेवाओं के अतिरिक्ति समस्त राजकीय एवं निजी कार्यालय, मॉल्स, दुकानें, फैक्ट्रियाँ एवं सार्वजनिक परिवहन आदि बंद रहेंगे। गहलोत ने जनता से सहयोग की अपील की है। उधर गुजरात में भी अहमदाबाद, सूरत, राजकोट और बडोदरा- इन चार बड़े शहरों में 25 मार्च तक लॉकडाउन की घोषणा की गई है।

वहीं आज जनता कर्फ्यू के मद्देनजर दिल्ली के सारे मेट्रो स्टेशन बंद हैं। कोलकाता से लेकर नागपुर तक हाइवे पर भी सन्नाटा पसरा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को फिर से याद दिलाया है कि अभी किए गए प्रयासों का भविष्य में फायदा होगा और जनता कर्फ्यू का पालन करने से कोरोना वायरस से लड़ने के लिए ज़रूरी इच्छाशक्ति मिलेगी और बचाव भी होगा। इटली में 24 घंटों में लगभग 800 मौतों के बाद स्थिति काफ़ी भयानक हो गई है। वहाँ से 263 भारतीय छात्रों को एयर इंडिया की स्पेशल फ्लाइट से वापस लाया गया।

उधर दिल्ली रेलवे ने भी रात 10 बजे तक सभी प्रकार की पैसेंजर ट्रेनों की आवाजाही बंद कर दी है। जम्मू-कश्मीर में भी लोग जनता कर्फ्यू का पालन कर रहे हैं। झारखंड सरकार ने ख़तरे को देखते हुए रेलवे से निवदन किया है कि वो दूसरे राज्यों से आने वाली ट्रेनों पर रोक लगाए। भारत में अब तक कोरोना वायरस के 327 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 23 इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं और 4 लोग की मौत हुई है। सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में 64 और केरल में 52 मामले सामने आए हैं। बिहार और झारखंड में अभी तक एक कोरोना का एक भी मरीज नहीं निकला है। हालाँकि, सैकड़ों लोगों की शक के आधार पर टेस्टिंग की गई है।

पिछले 1 दिन में कोरोना वायरस के देश भर में 75 नए मामले सामने आए हैं, जो चिंता की बात है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने लोगों से आह्वान किया है कि अब बड़ी लड़ाई लड़ने का समय आ गया है और सभी लोग प्रधानमंत्री की सलाह का पालन करें। आज ओला और उबर जैसी कैब सेवा कंपनियों ने भी कहा है कि वो सिमित संख्या में ही सर्विस देंगे।

डॉक्टरों को जनवरी से नहीं मिली सैलरी, केजरीवाल सरकार नहीं जारी कर रही फंड: परेशान कमिश्नर ने किया ट्वीट

दिल्ली सहित पूरे देश में कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ता जा रहा है और केंद्र सरकार इससे निपटने के लिए जनता को लगातार जागरूक करने में लगी हुई है। उधर दिल्ली सरकार पर इस मामले में असंवेदनशीलता दिखाने के आरोप लग रहे हैं। अब अरविंद केजरीवाल सरकार पर आरोप लगा है कि उसने पिछले 3 महीनों से डॉक्टरों को सैलरी नहीं दी है। ऐसा दिल्ली की एक अधिकारी के ट्वीट से पता चला है। नॉर्थ दिल्ली म्युनिसिपल कॉरपोरेशन की कमिश्नर वर्षा जोशी ने ट्वीट कर बताया है कि डॉक्टरों को जनवरी 2020 से लेकर अब तक सैलरी नहीं दी गई है।

दरअसल, वर्षा जोशी ने एक फोटो शेयर किया था, जिसमें नॉर्थ दिल्ली म्युनिसिपल कॉरपोरेशन की डॉक्टरों की टीम इंदिरा गाँधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मुस्तैद दिख रही है। कई लोगों ने इस तस्वीर के सामने आने के बाद डॉक्टरों की तारीफ करते हुए लिखा कि इन विषम परिस्थितियों में भी वो निःस्वार्थ भाव से जनसेवा में लगे हुए हैं। इस तस्वीर में IGI एयरपोर्ट पर डॉक्टरों को स्क्रीनिंग के लिए कार्यरत देखा जा सकता है। मास्क और ग्लव्स पहने ये डॉक्टर्स यात्रियों का मेडिकल टेस्ट करने के लिए वहाँ जमे हुए हैं।

इस तस्वीर को ट्वीट करने के बाद वर्षा जोशी ने बताया कि उन्होंने जनवरी से लेकर अब तक डॉक्टरों को सैलरी नहीं दी है, क्योंकि दिल्ली सरकार ने अभी तक फंड रिलीज नहीं किया है। अभी तक उनकी ट्वीट का दिल्ली सरकार के किसी मंत्री या नेता ने कोई जवाब नहीं दिया है। लोगों ने कहा कि केजरीवाल अपनी खुशामदी में किए गए ट्वीट्स का जवाब देते हैं, लेकिन ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर बयान नहीं दे रहे। हालाँकि, एक व्यक्ति ने IAS अधिकारी वर्षा को सलाह दी कि वो दूसरे संसाधनों का प्रयोग करते हुए डॉक्टरों को सैलरी दें। वर्षा ने कहा कि अगर उनके पास दूसरे संसाधन होते तो फिर वो सैलरी के लिए दिल्ली सरकार के फंड्स का इन्तजार ही क्यों करती?

बता दें कि आज रविवार (मार्च 20, 2020) को पूरे देश में जनता कर्फ्यू का ऐलान किया गया है और आज 14 घंटों के लिए लोग सेल्फ-क्वारंटाइन का पालन करते हुए घरों में ही रहेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपील की है कि शाम को सभी लोग अपने घर के दरवाजे, खिड़की या बालकनी में के पास जाकर ताली, घंटी या थाली बजा कर उन डॉक्टरों और कर्मचारियों का धन्यवाद करें, जो इन विषम परिस्थितियों में भी लगातार काम कर रहे हैं।

भारत में अब तक कोरोना वायरस के 327 मामले आ चुके हैं। इनमें से 26 मामले अकेले दिल्ली के हैं। ऐसे में डॉक्टरों को सैलरी न दिया जाना दिखाता है कि दिल्ली सरकार इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं है। जब सीएम केजरीवाल से शाहीन बाग़ प्रदर्शन के कारण कोरोना फैलने का सवाल किया गया था तो उन्होंने इसे हँसी-मजाक में टाल दिया था।

जब कपिल सिब्ब्ल को रंजन गोगोई ने घर में घुसने नहीं दिया, दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग में चाहते थे सपोर्ट

भारत के पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई जब से राज्यसभा सांसद बने हैं सुर्खियों में बने हुए हैं। गगोई ने कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता कपिल सिब्बल को लेकर एक सनसनीखेज खुलासा किया है। एक टीवी चैनल से बातचीत में उन्होंने बताया कि साल 2018 में जब सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने ऐतिहासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, उसके बाद कपिल सिब्बल तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग पर समर्थन माँगने उनके आवास पर पहुँचे थे। लेकिन, पूर्व केंद्रीय मंत्री और वकील सिब्बल को उन्होंने घर में घुसने नहीं दिया था। 

टीवी चैनल टाइम्स नाऊ से बातचीत में राज्यसभा सदस्य रंजन गोगोई से जब कपिल सिब्बल को लेकर पूछा गया तो उन्होंने कहा, “व्यक्तिगत रूप से मैं कपिल सिब्बल पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूँगा। मगर मैं यह जरूर बताना चाहूँगा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस (सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन चार जजों की 18 जनवरी, 2018 की प्रेस कॉन्फ्रेंस) के बाद वो मेरे आवास पर आए थे। वह तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट का समर्थन माँगने आए थे। मैंने उन्हें अपने घर में आने ही नहीं दिया था। तब मैं (सुप्रीम कोर्ट जजों के) वरिष्ठता क्रम में तीसरे नंबर पर था।” बता दें कि 2018 में हुई इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने वाले जज थे- जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस मदन लोकुर, जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस रंजन गोगोई। 

जब रंजन गोगोई से पत्रकार पूछती हैं कि जब उन्होंने कपिल सिब्बल को घर में घुसने ही नहीं दिया और न ही उनसे बात हो पाई तो उन्हें कैसे पता चला कि वह क्या कहने आए थे? इस पर पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा, “क्योंकि शाम में ही एक फोन आया था और मुझसे कहा गया था कि वह (कपिल सिब्बल) इस मुद्दे पर बात करने के लिए मेरे यहाँ आएँगे। मैंने फोन करने वाले व्यक्ति से कह दिया था कि उन्हें मेरे घर में आने की अनुमति मत दीजिए।”

दरअसल जस्टिस गोगोई को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की तरफ से राज्यसभा के लिए मनोनीत किए जाने पर कपिल सिब्बल ने इसे सरकार की तरफ से उपहार बताते हुए कहा था कि न्यायमूर्ति गोगोई राज्यसभा जाने की खातिर सरकार के साथ खड़े होने और सरकार एवं खुद की ईमानदारी के साथ समझौता करने के लिए याद किए जाएँगे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व चीफ जस्टिस ने कहा कि ऐसा विचार देश के किसी दुश्मन का ही हो सकता है। इस पर जब पत्रकार ने गोगोई से पूछा, “क्या आप कपिल सिब्बल को देश का दुश्मन कहेंगे?” इसी सवाल के जवाब में तो गोगोई ने ऊपर की बातें बताईं।

गोगोई ने 19 मार्च को राज्यसभा सांसद के तौर पर शपथ ली थी। इस दौरान विपक्ष ने जमकर हंगामा किया था। सदन का बहिष्कार किया था। उनका विरोध राष्ट्रपति द्वारा उच्च सदन के लिए मनोनीत किए जाने के बाद से ही शुरू हो गया था। एक इंटरव्यू में गोगोई ने कहा था कि एक ‘लॉबी’ के चलते न्यायपालिका की आजादी खतरे में है। यह लॉबी अपने मुताबिक फैसला चाहता है। ऐसा नहीं होने पर जजों की छवि खराब करने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने न्यायपालिका को बंधक बना रखा है। सोचते हैं जब निर्णय उनके मतलब का है तभी वो स्वतंत्र और सही निर्णय है। बाकी टाइम में वही जज, वही न्यायपालिका भ्रष्ट और समझौतावादी दिखने लगती है।

उन्होंने कहा था कि न्यायपालिका वास्तविक अर्थों में पूरी तरह तब तक स्वतंत्र नहीं होगी जब तक इन लोगों का गढ़ नहीं टूटता। ये जजों को फिरौती देने के लिए पकड़ते हैं। अगर कोई फैसला उनके मनमुताबिक नहीं आता तो वह जज की छवि को खराब करने की हरसंभव कोशिश करते हैं।

मलेच्छों से शिवाजी की रक्षा करने वाले संत: इन्द्रायणी नदी में पारिवारिक विरासत प्रवाहित कर भगवद्भक्ति का मार्ग चुना

संत शिरोमणि तुकाराम का जन्म पुणे के निकट देहू में हुआ था। यह स्थान आलन्दी से केवल सात किलोमीटर दूर है। संत तुकाराम कुनबी जाति के थे तथा घर में व्यापार का कार्य होता था। कुनबी जाति में जन्म लेने के क्या लाभ हैं, ऐसा गिनाते हुए स्वयं तुकाराम कहते हैं, हे ईश्वर:

शूद्रवंशी जन्मलों। म्हणोनि दंभे मोकलिलों॥
अरे तूंचि माझा आतां। मायबाप पंढरीनाथा॥
घोकाया अक्षर। मज नाहीं अधिकार॥
सर्वभावों दीन। तुका म्हणे यातिहीन॥

अर्थात्,हे भगवान्! मैं शूद्रवंश में उत्पन्न हुआ हूँ- यह बहुत अच्छा हुआ, अन्यथा यदि उच्च जाति में जन्म पाता तो उच्चता के गर्व में अकड़ता फिरता। भला हुआ जो उस गर्व से बच गया। हे मेरे माई-बाप, पंढरीनाथ! शूद्र वंश में जन्म पाने का दूसरा लाभ यह हुआ कि मैं तुझे माँ-बाप मानता हूँ और संसार में मैं केवल तेरा ही हूँ। अक्षर पठन तथा वेदादि शास्त्र अध्ययन का मुझे अधिकार नहीं, यह भी अच्छा ही हुआ, अन्यथा अपने पांडित्य के घमण्ड में इतराता रहता। तुका कहता है- अब मैं हीन जाति का एक दीन-हीन जन बनकर सर्वभावेन तेरी शरण में आ सका हूँ, क्योंकि मैं जाति तथा ज्ञान के अहंकार से दूर था तथा दूर हूँ।

विठोबा के भक्त

संत तुकाराम का परिवार पंढरपुर के विठोबा का भक्त था। समय-समय पर परिवार सहित सभी लोग पण्ढरपुर की तीर्थयात्रा करते थे। माता-पिता की मृत्यु के बाद तुकाराम ने व्यापार चलाने की बहुत कोशिश की, किन्तु भक्ति में रुचि के कारण व्यापार में मन नहीं लगा। व्यापार के बही-खाते, कागज आदि सभी कुछ इन्द्रायणी नदी को समर्पित कर वे भगवद्भक्ति में लग गए। अभंग लिखना और उनको भक्तों के मध्य बैठकर स्वर सहित गाना, इसी में इनका मन लगा रहता था। अपने गुरु के बारे में तुकाराम कहते हैं कि वे स्वप्न में आए थे और मेरे सिर पर हाथ रखकर मुझको अपना शिष्य बनाया है। तुकाराम ने नामदेव, ज्ञानदेव के भजन गाने प्रारम्भ कर दिए। गीता और भागवत का अध्ययन करना और गाना यही उनके जीवन का क्रम बन गया।

अभंगों की पोथी इन्द्रायणी नदी को समर्पित

सैकड़ों वर्षों से धर्मशास्त्रों को संस्कृत में लिखने की ही परम्परा थी। इस कारण जब-जब लोकभाषा में इन धर्मशास्त्रों एवं ईश्वरस्तुति का लेखन प्रारंभ किया गया तब-तब रूढ़िवादी लोगों ने इसका विरोध किया। स्वामी रामानन्द, संत ज्ञानेश्वर, गोस्वामी तुलसीदास आदि संत लोग पहले ही लोकभाषा में शास्त्रों को लिखने के कारण भारी विरोध एवं प्रताड़ना का सामना कर चुके थे। मराठी में लिखे अभंगों का ब्राह्मणों द्वारा विरोध किए जाने पर संत तुकाराम ने अभंगों की पोथी को इन्द्रायणी नदी में प्रवाहित कर दिया। उसके बाद वे चौदह दिन तक उसी नदी के तट पर बैठे साधना करते रहे। कहते हैं कि चौदह दिन बाद वह पोथी पुनः वापस मिल गई।

संत तुकाराम कहते हैं कि एक दिन बाबाजी चैतन्य ने मेरे कान में कहा- ‘रामकृष्ण हरि’ और कहा कि इसका नित्य जाप किया करो। अगले ही मास भगवान् विट्ठल स्वप्न में आए। उन्होंने कहा- ‘तुकाराम! अब तुम्हें लोगों को समझाना होगा, उनका मार्गदर्शन करना होगा। देखो ये कैसे भटक रहे हैं, गड्ढे में गिर रहे हैं, आत्मनाश कर रहे हैं। क्या तुम इन्हें इसी घृणास्पद अवस्था में पड़े रहने दोगे? जिसे भी दृष्टि प्राप्त है उसका यह कर्तव्य हो जाता है कि वह किसी अंधे को गड्ढे में न गिरने दे।’ कुछ दिनों बाद भक्त नामदेव उनके स्वप्न में आए। नामदेव जी ने कहा- ‘सर्वत्र भक्ति-मार्ग का प्रसार करने की मेरी इच्छा थी, उसी हेतु मैं शतकोटि अभंग लिखना चाहता था, किन्तु मेरी इच्छा वैसी ही रह गई। मैं चाहता हूँ कि उस कार्य को तुम पूरा करो। मैं तुम्हें आशीर्वाद देता हूँ। अभंग लिखो, विपुल संख्या में लिखो, सामान्य जनों की समझ में आवे, उनके मन में ईश्वरभक्ति पैठे ऐसा लिखो।’ संत तुकाराम जी ने कहा- ‘महाराज! आपकी आज्ञा शिरोधार्य। अब तुकाराम बड़े ही उत्साह के साथ अभंग लेखन के कार्य में लग गए। इस कार्य में उनका सहयोगी था उनका बालकपन का मित्र। नाम था- संताजी जगनाडे।

आषाढ़ मास की एकादशी के दिन पण्ढरपुर तथा आलंदी में भक्तों का विराट् समागम होता है। मीलों दूर से लोग पैदल चलकर आते हैं। संघ बनाकर चलते हुए लोग समवेत स्वर में कीर्तन गाते चलते हैं। उनके कीर्तन-भजन का ‘मुख्य स्वर’ होता है- ‘ज्ञानबा-तुकाराम।’ अर्थात् संत ज्ञानेश्वर (ज्ञानबा) और संत तुकाराम को वे ईश्वर (विट्ठल) के समकक्ष मानते हैं। इसलिए संत बहिणाबाई लिखती हैं;

संतकृपा झाली। इमारत फळा आली।
ज्ञानदेवे रचिला पाया। उभारिलें देवालया॥
नामा तयाचा किंकर। तेणें रचिलें तें आवार॥
जनार्दन एकनाथ। खांब दिला भागवत॥
रानी तुका झालासे कळस। भजन करा सावकाश॥

अर्थात्, संतों की कृपा से वारकरी सम्प्रदाय का यह मन्दिर खड़ा हुआ है, जिसकी नींव ज्ञानेश्वर ने डाली है। नामदेव ने पत्थर बनाकर उसे मजबूती प्रदान की है। जनार्दन के शिष्य एकनाथ ने ‘भागवत’ रूपी स्तम्भ का आधार प्रदान किया है। तुकाराम ने इस मन्दिर का कलश बनकर इस सम्प्रदाय को पूर्णता प्रदान की है। अब आप सुख से भजन कर लो।

इस प्रकार भजन में तुकाराम की महत्ता कलश के रूप में स्थापित की गई है। इसलिए संत तुकाराम को वारकरी सम्प्रदाय में संतशिरोमणि कहा जाता है।

सन् 1636 का एक प्रसंग है छत्रपति शिवाजी महाराज के पीछे मुगलों की सेना पड़ी थी तथा शिवाजी बचने के लिए उपयुक्त स्थान ढूँढ़ रहे थे। निकट ही लोहगाँव में संत तुकाराम का कीर्तन चल रहा था। ताल-मृदंगढोल-मजीरे के साथ-साथ ‘राम-कृष्ण-हरि’ के संकीर्तन की गूंज ऊँचे स्वर से उठ रही थी, हजारों लोग बैठे थे। शिवाजी महाराज भी इन्हीं के साथ मिलकर बैठ जाते हैं। अब म्लेच्छों से शिवाजी को बचाना भी है, यह दायित्व संत तुकाराम के ऊपर आ गया। संत तुकाराम विष्णु को पुकारने लगे। वे कहते हैं- हे प्रभु! बचाओ-बचाओ, एक क्षण की भी देरी मत करो;

न देखवे डोळां ऐसा हा आकांत। परपीडे चित्त दुःखी होतें॥
काय तुम्ही येथे नसालसें जालें। आम्हीं न देखले पाहिजे हे॥
परचक्र कोठे हरिदासांच्या वासें। न देखिजेत देशें राहातिया॥
तुका म्हणे माझी लाजविली सेवा। हीनपणे देवा जिणें जालें॥

अर्थात्, हे विठ्ठल! यह कैसा हाहाकार मचा है, गाँव सारा भयभीत है, अस्त है। दूसरों की ऐसी पीड़ा देखकर मेरा मन बहुत दुःखी हो रहा है। यह क्या हो रहा है? लगता है कि जैसे तुम यहाँ नहीं हो। हे विठ्ठल! ऐसा दृश्य हमें फिर मत दिखलाओ। अरे, जिस देश-प्रदेश में हरि के भक्तों का निवास हो, वहाँ यह परचक्र (शत्रु का आक्रमण) आया ही कैसे? तेरे भक्तों के देश में ऐसा भीषण दृश्य दिखलाई देना उचित नहीं। तुका कहता है- हे विट्ठल! तुमने आज मेरी सेवा व्यर्थ कर दी। मेरी सेवा पर आज मुझे लजाने की नौबत आ गई है और मेरा जीवन हीनता पूर्ण बन गया है। तात्पर्य यह कि विपत्ति के समय भगवान् भक्तों की रक्षा करते हैं, यह मेरा कथन असत्य हुआ जाता है। यदि अब ग्राम की रक्षा नहीं हुई तो मेरी सेवा का लाभ क्या हुआ?

इस घटना की ऐतिहासिक जानकारी यह है कि बाद में मुगलों की सेना लोहगाँव छोड़कर चली गयी। तुकाराम मुगलों के अत्याचारों से दुखी हैं। पूजा-अर्चना के स्थान भी सुरक्षित नहीं हैं।

भीत नाहीं आतां आपुल्या मरणा। दुःखी होतां जना न देखवे॥
आमची तो जाती ऐसी परम्परा। कां तुम्ही दातारा नेणां ऐसें॥॥
भजनी विक्षेप तेंचि पैं मरण। न वजावा क्षण एक वांयां॥
तुका म्हणे नाहीं आघाताचा वारा। ते स्थळी दातारा ठाव मागें॥

अर्थात्, हे विट्ठल! मैं अपनी मृत्यु से भयभीत नहीं हूँ, दूसरों के ऊपर जो आक्रमण हो रहे हैं, यह अत्याचार मुझसे देखा नहीं जाता। हे दाता प्रभो! क्या तुम-हम भक्तों की परम्परा नहीं जानते हो कि हम मृत्यु से कभी भयभीत नहीं होते? कीर्तन-भजन में विक्षेप आना मरणतुल्य है। हे दयालु! इस आपत्ति को दूर करो। आने में एक क्षण की भी देरी मत करो। तुकाराम कहता है कि यह जो संकट की आँधी आई है उसको दूर करने के लिए हे विट्ठल! हम आपसे सहायता की शरणस्थली माँगते हैं, हमें तू ऐसे स्थान पर ले चल, जहाँ कीर्तन-भजन में रुकावट न आवे।

इस भजन के अर्थ को शिवाजी और उनके साथी लोग भली प्रकार समझ रहे थे। लोहगाँव पर आक्रमण के इस प्रसंग पर तुकाराम महाराज ने तीन अभंग लिखे थे। यह शत्रु-आक्रमण प्रसंग के नाम से अभंगगाथा में सम्मिलित हैं। कहते हैं एक बार शिवाजी महाराज ने तुकाराम के पास बहुत सोना-आभूषण आदि भेंट में भिजवाया, किन्तु तुकाराम ने श्रद्धापूर्वक सभी कुछ वापस कर दिया और लिखकर भेजा;

आम्ही तेणे सुखी। म्हणा विट्ठल विठ्ठल मुखी॥

अर्थात्, मैं तो वैसे ही सुखी हूँ (आपके इस धन से मेरे को कोई सुख नहीं मिलेगा)। आप मुख से विट्ठल-विट्ठल कहें उसी से मेरे को सुख मिलेगा।

शिवाजी सब कुछ छोड़ कर भक्तिभाव से तुकाराम के साथ रहना चाहते थे। किन्तु तुकाराम ने शिवाजी से कहा कि आप जो कर रहे हैं वही आवश्यक है। परामर्श के लिए समर्थ गुरु रामदास से मिलने को कहा। समर्थ गुरु रामदास तो प्रवृत्तिमार्ग के संत थे और ‘मारिता-मारिता घ्यावें राज्य आपुलें’ अर्थात् ‘मारते-मारते अपना राज्य प्राप्त करो’ वाली नीति में विश्वास करते थे। समर्थ गुरु रामदास ने शिवाजी का योग्य मार्गदर्शन किया। सगुण भक्ति के उपासक संत तुकाराम का कहना था कि भक्ति तो समर्पण की सर्वोच्च स्थिति है। भक्ति तो मुक्ति से भी उच्च है।

जातिगत भेदभाव में कोई विश्वास नहीं

संत तुकाराम ने जाति की कभी कोई चिन्ता नहीं की। वे स्वयं शूद्र कहलाते थे, किन्तु भक्तिभाव के कारण सभी जातियों के भक्तगण उनके पास आते थे। वे जहाँ जाते, वहीं मेला लग जाता था। उनका कहना था, “ईश्वर प्राप्ति में जाति का कोई स्थान नहीं है। वेद-शास्त्रों का भी यही कहना है कि ईश्वर की सेवा में जाति महत्वहीन है। जो ब्राह्मण हरिस्मरण की चिन्ता नहीं कर पाता, वह ब्राह्मण कहलाने के कतई योग्य नहीं है। वहीं निम्न जाति का कहलाने वाला व्यक्ति प्रभु से प्रेम करता है तो वह सच्चा ब्राह्मण है। सभी जातियाँ उसी एक ब्रह्म में से ही निकली हैं।” अपने मनोगत भक्तिभावों को सुन्दर ढंग से तुकाराम रखते हैं, “मैं ईश्वर को धन्यवाद देता हूँ कि उसने हमको विद्वान् ब्राह्मण नहीं बनाया। क्योंकि वह तो अबोध लोगों को विद्वानों की तुलना में अधिक प्यार करता है और हमारी असहाय स्थिति में हमारा अधिक संरक्षण भी तो करता है।” उस समय की सामाजिक परिस्थितियों में जब हिन्दू समाज के ही एक बड़े वर्ग को मन्दिर में प्रवेश नहीं मिल पा रहा था तब तुकाराम उन्हें भगवन्नाम का जाप करने का आग्रह करके भक्ति-भाव के साथ जोड़े रख रहे थे। प्रभु का नाम सभी को पवित्र करता है। तुकाराम कहते हैं;

हो कां दुराचारी। वाचे नाम जो उच्चारी॥
त्याचा दास मी अंकित। कायावाचामने सहित॥
नसो भाव चित्तीं। हरिचे गुण गातां गीतीं॥
करी अनाचार। वाचे हरिनाम उच्चार॥
हो कां भलते कुल। शुचि अथवा चांडाल॥
म्हणवी हरिचा दास। तुका म्हणे धन्य त्यास॥

अर्थात्, चाहे कोई दुराचारी हो, तथापि यदि वह भगवन्नाम का उच्चारण करता है, मैं तन, मन, वाणी सहित उसका दास होने के लिए तत्पर हूँ। चाहे किसी के हृदय में भाव-भावना ना हो, किन्तु यदि वह हरि के गुण गाता है, यह मनुष्य भी प्रशंसा के योग्य है। जो अनाचार करता है, तथापि वाणी से हरिनाम का जाप करता है, वह चाहे किसी भी कुल का हो कुलीन हो, अकुलीन हो; पवित्र हो अथवा चांडाल हो, किन्तु अपने को हरि का दास कहलाता है। तुका कहता है- वह व्यक्ति भी धन्य है।

तुकाराम महाराज की बातों में जातिगत भाव का स्पर्श भी नहीं था। वे तो मानवता की महत्ता में विश्वास रखते थे। उनके विचारानुसार ब्राह्मण या शूद्र जन्मगत नहीं वरन् गुणों के अनुसार ही होना चाहिए। वे अपने गुणोपासक सिद्धान्त को ही पुनः प्रतिपादित करते हैं;

ब्राह्मण तो याती अंत्यज असतां। मानावा तत्त्वता निश्चयेसीं॥
रामकृष्ण नामें उच्चारी सरळें। आठवी सांवळे रूप मनीं॥
शांति क्षमा दया अलंकार अंगीं। अभंग प्रसंगी धैर्यवंत॥
तुका म्हणे गेल्या षड्ऊर्मी अंगें। सांडुनियां मग ब्रह्मचि तो॥

अर्थात्, चाहे कोई जाति से अंत्यज (शूद्र) हो, किन्तु यदि वह सरल, मधुर राम कृष्ण नाम का उच्चारण करता है, मन में श्री विठ्ठल के साँवले रूप का ध्यान करता है, शान्ति, क्षमा, दया आदि सद्गुण उसके स्वभाव में बस गए हैं तथा दुःख एवं संकट के समय भी उसका धैर्य अभंग बना रहता है उस शूद्र को भी ब्राह्मण ही मानना चाहिए। तुका कहता है- जिसने काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह और मत्सर इन छह विकारों पर विजय पा ली है, उसकी जाति नीच अथवा अन्त्यज क्यों न हो, वह साक्षात् ब्रह्म ही है। वही सच्चा ब्राह्मण है।’

संत तुकाराम की विचारधारा में तीन बातें महत्वपूर्ण हैं;

  • वे निःसंकोच भाव से यह स्वीकार करते हैं कि जो मैं बोल रहा हूँ वह पहले के श्रेष्ठ-संत-जनों की जूठन ही बोल रहा हूँ।
  • श्रेष्ठ विचारों के क्षेत्र में तुकाराम महाराज जाति को कतई महत्व नहीं देते हैं। व्यक्ति की कोई भी जाति क्यों न हो, उसके विचारों का ही मूल्यांकन होना चाहिए। श्रेष्ठ विचारों पर किसी एक जाति का एकाधिकार नहीं हो सकता।
  • तीसरी बात यह कि उनका परमेश्वर पर पूरा विश्वास है और वे मानते हैं कि वे जो भी बोल रहे हैं वह उनका विठ्ठल ही उनसे बुलवा रहा है। अतः यह देववाणी है।

वे कहते हैं;

संतांची उच्छिष्टं बोलतों उत्तरें। काय म्या गव्हारें जाणावें हैं॥
विट्ठलाचे नाम घेतां नये शुद्ध । तेथें मज बोध काय कले॥
करितों कवतुक बोबडा उत्तरीं। झणी मजवरि कोप धरा॥
काय माझी याति नेणां हा विचार। काय मी ते फार बोलों नेणे॥
तुका म्हणे मज बोलवितो देव। अर्थ गुह्य भाव तोचि जाणे॥

अर्थात्, मैं जो बातें, अथवा विचार कहता हूँ, वे संतों की, विद्वानों की जूठन हैं, अन्यथा मैं निपट, गँवार ज्ञान या उपदेश क्या जानूँ । मैं तो ‘विट्ठल’ शब्द का उच्चारण तक ठीक तरह नहीं कर सकता, फिर उसका ज्ञान, परिचय मैं कहाँ से पाऊँगा। मैं तो अपनी तुतलाती बोली में कुछ कहने का यत्न करता हूँ- हे भाइयो! मेरे इस कार्य के कारण कोई मुझ पर क्रोध मत करना। आप मेरी जाति का भी कोई विचार मत कीजिएगा, मैं क्या हूँ, मेरी जाति क्या है, इस बारे में अधिक क्या कहूँ। आप सब जानते हैं। तुका कहता है- भाइयो! वास्तविक तथ्य यह है कि वह भगवान् ही मुझसे बुलवाता है और मैं बोलता है, इसलिए उन वचनों का या अभंगों का अर्थ क्या है, इनमें कौन-सा गुह्य आशय छिपा है, इसे मैं क्या जानूँ ? मुझसे बुलवाने वाला वह भगवान् ही जाने।

कबीरदास का कहना है कि पुस्तकीय ज्ञान से ही ब्रह्म की अनुभूति नहीं हो सकती। सच्चा ज्ञानी तो वह है जो सभी से प्रेम करता है। संत तुकाराम ने भी हिम्मत के साथ सच बात कही और केवल कुछ श्लोक कण्ठस्थ करने मात्र को ही ज्ञानी होने का आधार नहीं माना। यद्यपि उनके खरा कहने के कारण कुछ लोग उनसे नाराज रहने लगे, किन्तु वे खरा बोल कहने से चूके नहीं;

वेदाचा तो अर्थ आम्हांसी च ठावा। येरांनी वाहावा भार माथां॥
खादल्याची गोडी देखिल्यासी नाहीं। भार धन वाही मजुरीचें॥
उत्पत्तिपालणसंहाराचे निज। जेणे नेलें बीज त्याचे हातीं॥
तुका म्हणे आले आपण चि फळ। हातोहातीं मूल सांपडळे॥

अर्थात्, वेद का सच्चा अर्थ क्या है, यह हम ही जानते हैं। अन्य जन, जो अपने आप को वेदपाठी या वैदिक मानते हैं, वे तो केवल वेद की पोथी को सिर पर ढोने वाले श्रमिक हैं। अर्थात् केवल पाठ करने से या वेदों को रट लेने से कुछ नहीं होता। वेदों के अनुसार जिसका आचरण है, जो सबसे प्रेम का नाता जोड़ता है, वही सच्चा वेदपाठी है। स्वादिष्ट भोजन का स्वाद खाकर ही जाना जा सकता है, केवल देखने से नहीं- उसी प्रकार वेदों के ज्ञान के अनुसार जिसका जीवन है, वही सच्चे रूप में वेदार्थ जानता है। मजदूर धन का बोझा सिर पर उठाकर घूमता है, उस धन का मूल्य वह क्या जाने! जिस परमेश्वर ने जगत् की उत्पत्ति की, जो पालनकर्ता तथा संहारकर्ता है, उस मूलतत्व को जिसने पाया, वही वेदार्थ जानता है| तुका कहता है, सारे संसार का जो मूल है, अर्थात् ब्रह्म जिसके हाथ में आ गया, फल तो स्वयमेव उसके हाथ आ जाएगा। अर्थात् वेद जिस ईश्वर का वर्णन करते हैं, उस निराकार निर्गुण को जान कर जिसने आत्मज्ञान पा लिया है, उसने ही वेदों को जाना है। केवल स्मरण रखने वाले तो भारवाही श्रमिक मात्र हैं।

संत तुकाराम महाराज की ‘अभंगगाथा’ महाराष्ट्र में अत्यन्त जनप्रिय एवं लोकग्राही होने के साथ ही मार्मिक, सुबोध तथा हृदयस्पर्शी रही है। सम्पूर्ण महाराष्ट्र में इसकी सर्वस्पर्शता तथा सर्वोद्धारकता सर्वमान्य है। सभी विद्वानों ने इसे ‘तुकोपनिषद्’ तथा ‘पंचम वेद’ का सम्मानजनक स्थान प्रदान किया।

वर्तमान में उपलब्ध ‘तुकाराम-अभंग गाथा’ नामक ग्रन्थ में पाँच हजार से अधिक अभंग हैं। इसको मराठी भाषा का वेद कहा जाता है। मात्र इकतालीस वर्ष की आयु में ही संत तुकाराम चले गए। उनका यही सन्देश रहा – ‘जय-जय रामकृष्ण हरि का जप करो, विट्ठल-विट्ठल, पाण्डुरंग-पाण्डुरंग ही सबका सहारा है।

संदर्भ: डॉ. कृष्ण गोपाल की भारत की संत परम्परा और सामाजिक समरसता, तुकाराम-अभंगगाथा, महाराष्ट्र की संत परम्परा

WhatsApp पर मिलेगी कोरोना को लेकर हर जानकारी, WHO के हेल्थ अलर्ट का ये रहा नंबर

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने व्हाट्सएप पर एक हेल्थ अलर्ट लॉन्च किया। इसका इस्तेमाल से आप कोई भी जानकारी हासिल कर सकते हैं। इसका मकसद कोरोनो वायरस के बारे में विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराना है। (WHO ने कोरोना से संबंधित सही जानकारी लोगों को देने और संक्रमंण को फैलने से रोकने के उपाय बताने के लिए व्हाट्सएप से करार किया है।

WHO के डायरेक्टर जनरल डॉक्टर टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने बताया कि ऑनलाइन तकनीक ऐसा माध्यम है, जो कि हमारे स्वास्थ्य से संबंधित जानकारियाँ देने में सहायक है। ऐसी जानकारियाँ महामारी से भी ज्यादा तेजी से फैलती हैं और यह हमारे जीवन के लिए सहायक सिद्ध होती हैं। इसलिए हम फेसबुक और व्हाट्सएप के हमारे सहयोगी होने पर गर्व महसूस करते हैं। इनके माध्यम से हम करोड़ों लोगों तक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पहुँचा पा रहे हैं।

अब WHO हेल्थ अलर्ट कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों, जैसे कि खुद को कोरोना के संक्रमण से कैसे बचाएँ, यात्रा से संबंधित सलाह और कोरोना वायरस से संबंधित फैल रहे भ्रम को तोड़ने संबंधी सही जानकारियाँ लोगों को उपलब्ध करवाएगा।

WHO का हेल्थ अलर्ट पाने के लिए फोन कॉन्टैक्ट्स में नंबर 41 79 893 1892 सेव करें। सेवा शुरू करने के लिए व्हाट्सएप मैसेज में केवल ‘Hi’ शब्द को टेक्स्ट करें। यह सेवा आपको कई जानकारियॉं देगी। आपको लगातार अपडेट करता रहेगा। संक्रमण, मृत्यु से संबंधित आँकड़े और व्यक्तिगत स्वच्छता कैसे बनाए जैसी जानकारी प्राप्त करने के लिए लोग उसमें मौजूद नंबर को दबा सकते हैं या उसमें उपलब्ध इमोजी को टच कर सकते हैं। लोग कोरोना वायरस इन्फोर्मेशन हब पर जाकर भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

दरअसल कोरोना वायरस फैक्ट सहयोगी के तौर पर कुछ अंतर्राष्ट्रीय फैक्ट चैंकिंग मैसेज साइट्स को व्हाट्सएप ने 1 मिलियन डॉलर का अनुदान देने की घोषणा की है ताकि ऑनलाइन गलत सूचना प्रसारित होने से रोका जा सके।

गौरतलब है कि चीन के बुहान शहर से शुरू हुआ कोरोना का कहर आज विश्व के करीब 180 देशों तक जा पहुँचा है। वहीं इससे मरने वालों की संख्या 11 हजार के पार हो गई है। वहीं इससे संक्रमित लोगों की संख्या ढाई लाख से भी अधिक हो गई है।

राजस्थान: मौलवी की गिरफ्तारी के बाद समुदाय विशेष के लोगों का थाने पर हमला

राजस्थान के बारां शहर में समुदाय विशेष के लोगों ने जमकर उत्पात मचाया। शुक्रवार (मार्च 19, 2020) रात थाने पर ही हमला कर दिया। पुलिसकर्मियों पर जमकर पत्थर बरसाए। एक आरोपित मौलवी की गिरफ्तारी से यह बवाल शुरू हुआ है। तकरीबन तीन सौ लोगों ने मौलवी को छुड़ाने के लिए कोतवाली थाने के अंदर घुसकर वहाँ मौजूद अधिकारियों पर पत्थरों से हमला बोल दिया। इसमें एक एएसआई सहित कुछ अन्य पुलिसकर्मी घायल हो गए।

एक रिपोर्ट के अनुसार, मुस्लिम समुदाय की भीड़ के थाने में घुसकर पत्थरबाजी के दौरान पुलिस के आधा दर्जन जवानों के साथ डीएसपी महावीर शर्मा, एएसआई भरत सिंह भी घायल हो गए। पत्थरबाज भीड़ थाने में ही दर्जनों से अधिक बाइक छोड़कर फरार हो गई। इस मामले में पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है। सूचना मिलने पर एडीएम अबुबक्र ने कोतवाली पहुँचकर घटना का जानकारी ली। इस घटना के बाद शहर में तनाव की स्थिति बनी हुई है।

पुलिस ने पत्थरबाजों पर FIR दर्ज की है। इसमें 49 नामजद और 150 अन्य लोग शामिल हैं। कोतवाली थाने में मौलवी को छुड़ाने के लिए पहुँचे मुस्लिम समुदाय के इन लोगों पर बाद में पुलिस ने लाठियाँ बरसाई और पत्थरबाज करीब 25 मोटरसाइकिल मौके पर ही छोड़कर फरार हो गए। भीड़ द्वारा अचानक हुए इस पथराव में थाने में खड़ी पुलिस जीप सहित दर्जनों दुपहिया वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस की रैपिड एक्शन टीम और आरएसी के जवान मौके पर पहुँचे और पत्थरबाजों की भीड़ पर लाठीचार्ज कर उसे तितर-बितर किया। यहाँ तक कि पत्थरबाजों पर काबू पाने के लिए पुलिस को पंप एक्शन गन भी चलानी पड़ी। इसके बाद कुछ पत्थरबाज मस्जिद में छुप गए और कुछ वहीं छिपकर पत्थरबाजी करते रहे।

याद है न 22 मार्च का जनता कर्फ्यू : हम सबके पास अपनी जिम्मेदारी निभाने का अवसर है, हम इसे नहीं गँवाएंगे

याद है न रविवार का जनता कर्फ्यू, आइए हम सब मिलकर कोरोना को ना कहे

रविवार (मार्च 22, 2020) यानी कल सुबह 7 बजे से लेकर रात 9 बजे तक देशभर में जमीन से आसमान तक ‘जनता-कर्फ्यू’ रहेगा। पीएम मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए इस कर्फ्यू का आह्वान किया था। इसका मकसद न केवल विश्वभर में दहशत का कारण बने काेरोना वायरस के संक्रमण का प्रसार रोकना है बल्कि उन लोगों के प्रति आभार जताना भी है जो संकट की इस घड़ी में महामारी से हमारी जिंदगी बचाने के लिए लड़ रहे हैं। उन डॉक्टर, नर्स, स्वास्थ्य कर्मचारियों का जिन्होंने ह​मारी सुरक्षा के लिए अपना जीवन दॉंव पर लगा रखा है, उनका समर्थन और हौसला भी बढ़ाना है।

पीएम मोदी ने रविवार की शाम 5 बजे, वैश्विक महामारी के दौरान भी इस बीमारी से लड़ रहे डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की कर्त्तव्यनिष्ठा के प्रति आभार प्रकट करने के लिए अपनी बालकनी में खड़े होकर ताली, थाली या घंटी बजाने की भी अपील की है।

दरअसल इस कोरोना वायरस के लिए पूरे विश्व में वैज्ञानिक निरंतर वैक्सीन तैयार करने का प्रयास कर रहे हैं और वर्तमान में इसके संक्रमण को रोकने का मात्र एक ही उपाय है कि जितनी ज्यादा से ज्यादा दूरी सम्भव हो, बनाए रखी जा सके ताकि इसका संक्रमण दूसरे लोगों तक न पहुँचे। जनता-कर्फ्यू के दौरान आम नागरिकों को भी अपने कर्तव्य का पालन करना होगा। कल होने वाले सभी सार्वजनिक समारोह और प्रतियोगी परीक्षाएँ टाली गई हैं। देश के अन्य हिस्सों में इस अवधि में मेट्रो रेल सेवाएँ बंद रहेंगी और सार्वजनिक परिवहन सेवा सीमित रहेगी।

वायरस के भय से अपने गाँव लौटने की जल्दबाजी कर रहे लोगों के लिए भी प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट के माध्यम से निर्देश देते हुए कहा कि ऐसा कर आप अपने गाँव के लोगों के लिए भी संकट पैदा कर सकते हैं। ट्वीट में पीएम मोदी ने कहा – “मेरी सबसे प्रार्थना है कि आप जिस शहर में हैं, कृप्या कुछ दिन वहीं रहिए। इससे हम सब इस बीमारी को फैलने से रोक सकते हैं। रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों पर भीड़ लगाकर हम अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। कृप्या अपनी और अपने परिवार की चिंता करिए, आवश्यक न हो तो अपने घर से बाहर न निकलिए।”

ऑपइंडिया निवेदन करता है कि जनता-कर्फ्यू के दौरान कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें। जैसे, अफवाहों के संक्रमण पर अंकुश लगाना, क्योंकि इस वायरस की क्षमता और उपायों के बारे में अभी तक यदि दुनियाभर के श्रेष्ठ डॉक्टर और खोजकर्ता ही पूरी तरह से आश्वस्त नहीं हैं तो हम और आप आखिर कैसे इसका कोई सटीक आँकलन कर सकते हैं? खासकर, किसी भी जानकारी को ‘सबसे पहले’ आगे बढ़ाने की व्याकुलता का व्हाट्सएप जैसे मैसेंजर एप्प्लिकेशंस पर त्याग करना होगा।

इसके साथ ही, राशन से लेकर अन्य रोजमर्रा के उत्पादों का भंडारण ना कर के किसी भी प्रकार की भगदड़ और अफरा-तफरी को अंजाम ना दें। सबसे बड़ी बात जो एक है वो ये कि कोरोना वायरस के संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित गरीब वर्ग हो रहा है, जो रोजाना के खर्चों के लिए किसी के घर पर या फिर प्रोजेक्ट आधारित काम करते हैं।

पीएम मोदी ने भी जनता-कर्फ्यू के आह्वान के साथ इस गरीब वर्ग के आर्थिक हितों का ध्यान रखने की विशेष अपील की है। यह एक ऐसी महामारी है, जिसने हर वर्ग- चाहे गरीब, अमीर या फिर मध्यम वर्ग हो, सबको अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी साबित करने का मौका दिया है। हमें इसे जाया नहीं होने देना चाहिए। हम और आप इस वक्त सबसे बेहतर यही कर सकते हैं कि कम से कम अपनी जिम्मेदारियाँ ईमानदारी से निभाएँ।

Covid-19 : अब तक के आँकड़े

विश्व के अधिकांश (अब तक 185) देशों में फैल चुके कोरोना वायरस से अब तक 11,949* लोगों की मौत हो चुकी है जबकि करीब 288,044 लोग इससे संक्रमित हुए हैं। भारत में अब तक कुल संक्रमितों की संख्या 256 हो चुकी है जिनमें से 4* की मृत्यु हो गई है और 23 को सफलतापूर्वक रिकवर भी कर लिया जा चुका है। शुक्रवार के बाद देश में कुल 47 नए मामले सामने आए हैं।

चीन के वुहान प्रांत से शुरू हुए इस चीनी वायरस को लेकर तैयार की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन में हुई मौत के 80% मामले 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के थे। चीन में 81,008 लोगों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है और करीब 3,255 लोगों की इस वायरस के चपेट में आने के बाद मौत हो चुकी है। चीन के बाद सबसे ज्याद प्रभावित इस वायरस ने इटली को किया है, जहाँ संक्रमण से होने वाली मौतों (अब तक 4,032) ने चीन को भी पीछे छोड़ दिया है।

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