प्राइम टाइम स्क्रिप्ट: जनता कर्फ्यू आपातकाल की टेस्टिंग, थाली बजाना गरीबों को बेइज्जत करने की मुहिम। रवीश की स्क्रिप्ट लीक हो गई है। उन्होंने कहा कि जनता कर्फ्यू आपातकाल की टेस्टिंग है।
‘बेबी डॉल’ की आवाज़ को हुआ कोरोना, कही जा रही हैं ‘बाथरूम में छुप कर भागी थी’ की बातें
अभी तक यह सिर्फ विदेशों में ही देखा जा रहा था कि कोरोना के कारण बड़ी से बड़ी फिल्म हस्तियाँ और राजनेता भी प्रभावित हो रहे हैं लेकिन अब आखिरकार कोरोना वायरस बॉलीवुड तक भी पहुँच गया है। फिल्मों में मशहूर ‘बेबी डॉल मैं सोने दी’ और ‘चीटियाँ कलाईयाँ रे’ गाने वाली सिंगर कनिका कपूर के कोरोना से संक्रमित हो गई हैं। कनिका कपूर ने यह बात खुद अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर स्वीकार कर ली है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़कर 9 हो गई है।
Singer @TheKanikakapoor confirms that she has tested positive for the #Covid19 #coronavirus. “We can get through this without panic only if we listen to the experts,” she says. Read full statement#KanikaKapoor #CoronavirusOutbreakIndia https://t.co/Pr5ezxKCyc
— Delhi Times (@DelhiTimesTweet) March 20, 2020
15 मार्च को कनिका लंदन में थीं, और वहाँ से लौटने पर वो लखनऊ में एक पार्टी में शामिल हुई थीं। एक न्यूज चैनल के पत्रकार द्वारा किए गए ट्वीट के बाद यह खबर तेजी से फैली। सोशल मीडिया पर भी कनिका के संक्रमित होने की खबर वायरल हुई और यूजर्स का दावा है कि वे एयरपोर्ट पर बाथरूम में छुपकर कोरोना जाँच से बच निकलीं। कनिका और उनके परिवार को लखनऊ के किंग जॉर्ज हॉस्पिटल में आइसोलेट किया गया है।
कुछ रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि कनिका कपूर हाल ही में लंदन से लखनऊ लौटी थीं। लंदन से लौटने के बाद कनिका ने एक आलीशान होटल में एक डिनर पार्टी भी होस्ट की थी, जिसमें लगभग 100 लोग शामिल हुए थे। बताया जा रहा है कि कनिका कपूर की इस पार्टी में कई अधिकारी, राजनेता और सामाजिक लोग शामिल हुए थे। कनिका एक पॉश अपार्टमेंट में रहती हैं। ऐसे में अब मेडिकल अधिकारी इस बात को लेकर परेशान हैं कि इस पूरी बिल्डिंग को और उन सब लोगों को कैसे आइसोलेशन में रखा जाए जो कनिका की पार्टी में शामिल हुए थे।
कनिका कपूर ने अपने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “पिछले 4 दिनों से मुझे फ्लू के लक्षण दिख रहे थे। मैंने अपना टेस्ट कराया और मैं COVID-19 के लिए पॉजेटिव निकली हूँ। मैं और मेरा परिवार अब पूरी तरह से अलग-थलग हैं और पूरी तरह मेडिकल अडवाइस ले रहे हैं कि अब आगे क्या करना है।”
अपने इन्स्टाग्राम एकाउंट पर ही कनिका ने आगे लिखा है, “इस बीच मैं जिन-जिन लोगों से मिली हूँ, उनकी भी मैपिंग का काम शुरू हो गया है। 10 दिन पहले जब मैं घर आई थी मेरी एयरपोर्ट पर जाँच सामान्य तरीके से हुई थी। लेकिन, मुझमें लक्षण 4 दिन पहले ही देखने को मिले हैं। इस स्टेज पर मैं आप सब से बस यही कहना चाहूँगी कि आप सब अपना ध्यान रखें और भीड़ से दूर रहें। अगर लक्षण नजर आएँ तो खुद की जाँच कराएँ। मैं अभी बिलकुल ठीक हूँ। सामान्य फ्लू जैसे लक्षण हैं और थोड़ा बुखार है। इस समय हम सब को एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभानी चाहिए।”
UP ने दादी जैसी नाक देखी, MP ने दादी जैसे तेवर: एक ने पार्टी की नाक कटाई, दूसरे ने कॉन्ग्रेस की काटी
मध्य प्रदेश में बीते कई दिनों से चल रहे सियासी ड्रामे का शुक्रवार को कमलनाथ के इस्तीफे के साथ पटाक्षेप हो गया। इस सियासी उठापठक के केंद्र में कई किरदार रहे। इनमें से एक नाम ज्योतिरादित्य सिंधिया का है। हाल ही में भाजपा का दामन थामने वाले सिंधिया के समर्थक विधायक अपना इस्तीफा वापस लेने को तैयार नहीं हुए और आखिरकार 15 महीने पुरानी कॉन्ग्रेस सरकार की विदाई का रास्ता तैयार कर दिया।
मध्य प्रदेश की सियासत का संदेश स्पष्ट है। भले जितनी मजबूत राजनीतिक विरासत मिले, आखिर में निर्णायक जमीन और समर्थकों के बीच खुद की पकड़ ही साबित होती है। यही कारण है कि कॉन्ग्रेस के तमाम जतन के बावजूद उनके समर्थक विधायक इस्तीफा वापस लेने को टस से मस नहीं हुए। वरना विरासत में राजनीति तो कॉन्ग्रेस के शीर्ष परिवार के चिरागों को भी मिली हुई है।
कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी के राजनीतिक कौशल पर तो अब उनके करीबियों को भरोसा नहीं रहा। इसी तरह पार्टी की महासचिव प्रियंका गॉंधी जब 2019 के आम चुनावों से पहले सक्रिय राजनीति में आईं तो उस समय के माहौल को याद करिए। उन्हें पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया। लिबरल गिरोह इसे कॉन्ग्रेस का मास्टर स्ट्रोक बता रहा था। किसी ने उनकी साड़ी के बॉर्डर पर बात की तो किसी ने उनकी दादी इंदिरा जैसी नाक की। जगह-जगह पोस्टर लगे दिखाई दिए जिसमें उन्हें दुर्गा के अवतार में दिखाया। लेकिन जब नतीजे आए तो पता चला कि यूपी में कॉन्ग्रेस अपनी परंपरागत सीट अमेठी भी नहीं बचा पाई। कारण, प्रियंका को लेकर जो हाइप क्रिएट किया गया था उस तरह की न तो जमीन पर उनकी अपील थी और न समर्थकों का उन पर यकीन। आज भी वे इस चुनौती से जूझ रही हैं।
प्रियंका के साथ ही कॉन्ग्रेस ने ज्योतिरादित्य को भी महासचिव बनाया था। उन्हें पश्विमी उत्तर प्रदेश का प्रभार दिया गया था। उसी समय कहा गया था कि कॉन्ग्रेस की अंदरूनी राजनीति के तहत उन्हें मध्य प्रदेश से दूर रखने के लिए इस मोर्चे पर लगाया गया है। इसके बाद भी पार्टी में उनकी लगातार उपेक्षा होती रहती। आखिरकार, यही कमलनाथ सरकार को भारी पड़ी और अंत में सिंधिया विजेता बनकर उभरे।
आज जिस तरह ज्योतिरादित्य के समर्थक विधायकों की बगावत मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस सरकार को भारी पड़ी है, उसने लोगों को 53 साल पुराने इतिहास की याद दिला दी है। तब डीपी मिश्रा के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार ज्योतिरादित्य की दादी राजमाता विजयराजे सिंधिया की उपेक्षा की भेंट चढ़ी थी। इसके बाद राज्य में पहली बार गैर कॉन्ग्रेसी सरकार बनी थी।
यह घटना 1967 की है। द्वारका प्रसाद मिश्रा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। ग्वालियर में छात्रों का आंदोलन चल रहा था। मिश्रा लगातार राजमाता की उपेक्षा कर रहे थे जो उस समय कॉन्ग्रेस में ही थीं। राजमाता ने अलग राह चुनने का फैसला किया। उस समय कॉन्ग्रेस के 36 विधायक भी उनके साथ खड़े हुए। ठीक उसी तरह जैसे आज 22 विधायक ज्योतिरादित्य के साथ डटे थे।
इन 22 विधायकों की बगावत के कारण ही कमलनाथ और दिग्विजय सिंह तमाम जतन के बावजूद राज्य में पार्टी की सरकार नहीं बचा पाए। इन 22 का समर्थन जमीन पर ज्योतिरादित्य की पकड़ को भी साबित करता है। लेकिन, यही आज की कॉन्ग्रेस का सबसे बड़ा संकट भी है। जिनके पास पकड़ है वे पार्टी में उपेक्षित हैं। जो मुख्य किरदार में हैं उनके पास दादी की विरासत भले हो पर वैसा असर कहीं नहीं दिखता।
अयोध्या में नहीं होगा रामनवमी मेला, सरकार और साधुओं ने कहा घर में ही करें अनुष्ठान: CM योगी की अपील के बाद प्रशासन सक्रिय
कोरोनावायरस के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए अब अयोध्या के रामनवमी मेले मे भीड़ को आने से रोकने के लिए प्रयास शुरू हो गए हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसकी अपील की है। उसके बाद प्रशासन सक्रिय हो गया है और अयोध्या के संतों से ने भी श्रद्धालुओं से मेले में न आने की अपील की है। इसके लिए प्रयास तेज हो गए हैं।
जानकारी के मुताबिक इस बार रामनवमी मेला का आयोजन नहीं किया जाएगा। योगी सरकार ने लोगों से अपील की है कि वो भीड़-भाड़ वाली जगहों पर न जाएँ, घर पर रहकर ही पूजा- अनुष्ठान करें। इसके साथ ही साधुओं ने भी लोगों से कहा है इस महामारी के भयंकर प्रकोप को देखते हुए सुरक्षा के मद्देनजर घर में पूजा-अनुष्ठान करें।
गुरुवार (मार्च 19, 2020) को योगी आदित्यनाथ ने जारी एक सरकारी विज्ञप्ति में कहा है, “चैत्र नवरात्रि आने वाला है और कई भक्त पहले, दूसरे, आठवें और नौवें दिन विशेष रूप से मंदिरों में जाते हैं। कई क्षेत्रों में मेलों का भी आयोजन किया जाता है, जिसमें लोगों की व्यापक भागीदारी देखी जाती है। विशेष परिस्थितियों के मद्देनजर, मैं जनता से अपील करता हूँ कि वो किसी भी तरह के धार्मिक अनुष्ठान या पूजा का आयोजन अपने घरों में ही करें, ताकि संक्रामक वायरस के प्रसार को रोका जा सके।”
इस रिलीज के अनुसार सरकार ने सभी जिलों के जिला मजिस्ट्रेटों और पुलिस अधिकारियों को धार्मिक नेताओं के साथ बातचीत करने और 25 मार्च से 2 अप्रैल तक होने वाले चैत्र नवरात्रि के दौरान धार्मिक समारोहों से बचने के इस संदेश को प्रसारित करने में मदद करने का निर्देश दिया है।
अयोध्या के जिला मजिस्ट्रेट अनुज झा ने इकॉनॉमिक टाइम्स से कहा, “सरकार किसी भी मेले का आयोजन नहीं कर रही है और न ही लोगों को किसी ऐसे मेले में आमंत्रित करती है। हम जनता से अपील करने में धार्मिक नेताओं की मदद चाहते हैं कि वो जनता से कहें कि वो घर पर रहकर ही पूजा-अनुष्ठान करें।”

बता दें कि इससे पहले कई वामपंथी मीडिया गिरोह ने ये खबर चलाई कि कोरोनावायरस महामारी को लेकर एक ओर सभी राज्य सरकारें एहतियात बरत रहीं हैं। वहीं, दूसरी ओर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार रामनवमी के मौके पर अयोध्या में एक बड़ा आयोजन करने की तैयारी कर रही है। योगी सरकार ने राम नवमी के मौके पर अयोध्या में एक बड़े मेले का आयोजन कराने की मंजूरी दे दी है। आश्चर्य की बात यह है कि केंद्र सरकार की ओर से कोरोना वायरस पर एडवाइजरी जारी करने के बावजूद इस मेले का आयोजन कराने का फैसला किया है।


लिबरल वर्ग ने हाल ही में अयोध्या में रामनवमी को लेकर भी जमकर प्रोपेगंडा किया और कल (मार्च 19, 2020) राजदीप सरदेसाई भी उसी प्रोपेगंडा को दोहराते हुए देखे गए। कल रात राजदीप ने रामनवमी के आयोजन को लेकर बहस छेड़ी और इसे रामनवमी बनाम शाहीन बाग जैसे मुहावरों में ढालने की कोशिश भी की। बता दें कि राजदीप ने कल रात झूठ बोला जबकि दो दिन पहले ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने उनसे कहा था कि मेले में अभी समय है, उससे पहले एक उच्चस्तरीय बैठक होगी और तब तय होगा कि मेला होगा या नहीं।
हालाँकि, रामनवमी मेले को लेकर तो स्पष्ट हो गया है कि इसका आयोजन नहीं होगा, लेकिन शुक्रवार की नमाज को लेकर अभी तक कोई सूचना नहीं है कि देश भर की तमाम मस्जिदों में लोग जुटेंगे या नहीं। कल जब भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने जुमे की नमाज को लेकर कल राजदीप सरदेसाई से सवाल किया तो राजदीप ने यह कहकर टाल दिया कि इसे शाहीन बाग बनाम रामनवमी मत बनाइए।
मध्य प्रदेश में शिव-राज का ये है गणित, फ्लोर टेस्ट से पहले ही कमलनाथ का इस्तीफा
फ्लोर टेस्ट के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से ही कयास लग रहे थे कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ विधानसभा में बहुमत साबित करने से पहले ही इस्तीफा दे देंगे। शुक्रवार को ऐसा ही हुआ। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया। शीर्ष अदालत ने बहुमत साबित करने के लिए उन्हें आज शाम पॉंच बजे तक का वक्त दिया था।अब राज्य में शिवराज के नेतृत्व में बीजेपी सरकार के गठन की उम्मीद जताई जा रही है। विधानसभा के मौजूदा गणित के हिसाब से बीजेपी के पास जरूरी नंबर हैं।
MP political crisis: Kamal Nath announces resignation ahead of floor test
— ANI Digital (@ani_digital) March 20, 2020
Read @ANI Story| https://t.co/zEZFqPCbWb pic.twitter.com/2ZKwYWTkbh
राज्य में कमलनाथ के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस सरकार 15 महीने से चल रही थी। 22 विधायकों की बगावत के कारण सरकार अल्पमत में आ गई थी। इसके बाद से सरकार फ्लोर टेस्ट से बच रही थी। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सदन में फजीहत से बचने के लिए कमलनाथ ने इस्तीफे का फैसला लिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस्तीफे की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा ने उनके कार्यकाल के दौरान साजिश रची और उनकी सरकार गिराने के हर मुमकिन प्रयास किए। कमलनाथ ने कहा कि 11 दिसंबर 2018 को पिछली विधानसभा का परिणाम आया, जिसमें कॉन्ग्रेस सबसे अधिक सीटें हासिल करके आई। 17 दिसंबर को मैंने शपथ ली और 25 दिसंबर को मंत्रिमंडल की शपथ ली। आज 20 मार्च है, इस दौरान हमारा प्रयास प्रदेश की तस्वीर बदलने का रहा। 15 महीनों में मेरी क्या गलती थी, मेरा क्या कसूर था। अपने राजनीतिक जीवन में मैंने काम पर विश्वास रखा।
#MadhyaPradesh CM Kamal Nath: The people of this country can see the truth behind the incident where MLAs are being held hostage in Bengaluru…The truth will come out. People will not forgive them. pic.twitter.com/nyxetiM4ZZ
— ANI (@ANI) March 20, 2020
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सीएम कमलनाथ के चेहरे पर निराशा साफ दिखी। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा ने उनके 22 विधायकों को बंधक बनाया और ये पूरा देश बोल रहा है। उनके अनुसार करोड़ों रुपए खर्च करके ये खेल खेला गया और इसकी सच्चाई थोड़े समय में सामने आएगी। उन्होंने कहा हमने तीन बार विधानसभा में अपनी बहुमत साबित किया। मगर, बीजेपी की ओर से जनता के साथ विश्वासघात किया जा रहा है और लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या की जा रही है, जनता इन्हें कभी माफ नहीं करेगी।
#WATCH I have decided to tender my resignation to the Governor today: #MadhyaPradesh CM Kamal Nath pic.twitter.com/DlynuxzGtO
— ANI (@ANI) March 20, 2020
अपने कार्यो को गिनाते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में कमलनाथ ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में आम लोगों के लिए काम किया और माफियों का खत्म करने का काम किया, लेकिन ये सब भाजपा को रास नहीं आया। उनका मानना है कि उनकी सरकार पर किसी तरह का आरोप नहीं लगा। लेकिन भाजपा ने धोखा दिया और उन्हें काम नहीं करने दिया।
बता दें कि मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं। 2 विधायकों का निधन हो चुका है। कॉन्ग्रेस के 22 और बीजेपी के एक विधायक के इस्तीफे स्वीकार किए जाने के बाद 205 विधायक बचे हैं। यानी सरकार को बहुमत साबित करने के लिए 103 विधायकों का समर्थन चाहिए। बीजेपी के पास 106 विधायक हैं। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज के नेतृत्व में सरकार बननी तय दिख रही है। हालॉंकि शिवराज के विधायक दल का नेता चुने की औपचारिकता बची हुई है।
कहॉं है निर्भया का छठा गुनहगार? AAP सरकार ने दिए थे ₹10 हजार और सिलाई मशीन
16 दिसंबर 2012 की रात को निर्भया के साथ दरिंदगी करने वाले चार दोषियों को आज तड़के तिहाड़ जेल में फाँसी दे दी गई। दोषियों ने पैरामेडिकल की छात्रा निर्भया का न सिर्फ सामूहिक दुष्कर्म किया बल्कि उसके साथ बर्बरता की सारी हदें पार कर दी थी। फॉंसी पर लटकाए गए इन दरिंदों के अलावा पूरे देश को झकझोर देने वाले इस मामले में दो और भी गुनहगार थे। मुख्य आरोपित राम सिंह ने 11 मार्च 2013 को तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी।
वहीं, छठा बलात्कारी घटना के वक्त नाबालिग था, जिसे जुवेनाइल कोर्ट ने तीन साल की कैद की सजा सुनाई थी। दिसंबर 2015 में उसे बाल सुधार गृह से रिहा कर दिया गया था। चार दोषियों को फाँसी पर लटकाए जाने के बाद एक बार फिर इस छठे गुनहगार की चर्चा हो रही है। लोग पूछ रहे हैं कि अभी वह कहाँ है। बताया जाता है कि इसी छठे गुनहगार ने निर्भया और उनके दोस्त को आवाज देकर बस में बैठने के लिए बुलाया था। साथ ही इसी नाबालिग दोषी ने निर्भया से सबसे पहले छेड़छाड़ शुरू की थी और अपने साथियों को इस वारदात को अंजाम देने के लिए उकसाया था। इसी ने निर्भया के साथ सबसे अधिक बर्बरता की थी। इसी ने निर्भया के शरीर में लोहे की रॉड डाल दी थी, जिससे निर्भया की आँतें तक बाहर आ गई थी। जंग लगी लोहे की रॉड से निर्भया का टॉचर करने वालों में यही दोषी था। घटना के वक्त इस नाबालिग की उम्र 17 साल 6 महीने थी, यानी वह बालिग होने में मात्र 6 महीने ही छोटा था।
जानकारी के मुताबिक वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। जब वह करीब 11 साल का था, तभी घर से भाग निकला और दिल्ली आ गया था। दिल्ली में आकर वह काम करने लगा और उसके बाद वह राम सिंह के सम्पर्क में आ गया। उसने कुछ समय तक राम सिंह के लिए काम किया था। उसके राम सिंह पर 8000 रुपए बकाया थे, जिसे लेने के लिए 16 दिसंबर को वह पहुँचा था और इस घिनौने वारदात का हिस्सा बना।
2015 में जब वह जेल से रिहा हुआ तो उसके बाद परिवार वालों से बात करने के बाद उसे दक्षिण भारत के किसी स्थान पर भेज दिया गया था और यहाँ तक कि उसका नाम तक बदल दिया गया था। अब वह अपने बदले हुए नाम और बदली हुई पहचान के बाद एक एनजीओ की निगरानी में दक्षिण भारत के किसी होटल में बावर्ची का काम करता है।
बता दें कि जब नाबालिग बलात्कारी को रिहा किया गया था तो लोगों के बीच काफी आक्रोश देखने को मिला था। रिहाई की खबर पाकर निर्भया के परिजनों समेत हजारों की संख्या में लोग इंडिया गेट पर प्रदर्शन के लिए एकत्र हुए थे। बवाल बढ़ने पर पुलिस को इंडिया गेट पर धारा 144 लगानी पड़ी थी। वहीं निर्भया की माँ और पिता की आँखों से आँसू बह रहे थे। वह बार-बार ये ही कर रहे थे कि उनके साथ न्याय नहीं हुआ।
इस दौरान कहा गया कि छठा नाबालिग बलात्कारी कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) गलती से जेल से रिहा होने में सफल हो गया था। कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी के इस केस को लेकर गैरजिम्मेदाराना रवैया दिखाया, जिसकी वजह से दरिंदे की रिहाई संभव हुई थी। कॉन्ग्रेस और AAP पर तब यह आरोप लगा था कि दिल्ली सरकार अगर दोषी की रिहाई न होने के लिए अगर थोड़ी भी गंभीर होती तो वह उस दोषी की रिहाई की तारीख के काफी पहले ही कानूनी प्रकिया का सहारा लेती।
दोषी की रिहाई के एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में अनुरोध करने वाली AAP सरकार के मुख्यमंत्री ने उसे रिहा होने पर 10 हजार रुपए और सिलाई मशीन देने का एलान किया था। तब केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने इस पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि केजरीवाल सरकार ने नाबालिग दोषी को 10000 रुपए और सिलाई मशीन देकर क्यों रिहा किया? क्या उन्हें निर्भया की माँ के आँसू नजर नहीं आए।
कोरोना के इलाज में मलेरिया की दवा कारगर: ट्रंप ने इस्तेमाल की दी मँजूरी
चीन के वुहान शहर से कोरोना का संक्रमण शुरू हुआ। दुनिया के 150 से अधिक देशों में फैल चुके संक्रमण के कारण अब तक 10,020 लोगों की मौत हो चुकी है। 2,44,683 लोग संक्रमित हैं। संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। इस महामारी का कारगर इलाज अभी तक नहीं मिल पाया है। हालॉंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा कोरोना वायरस के पीड़ित के इलाज में भी कारगर है। उन्होंने इसके इस्तेमाल की भी मॅंजूरी दे दी है।
US President Donald Trump touts chloroquine, an old malaria drug, that doctors say may help treat novel coronavirus, claims it will be available “almost immediately”: US Media (file pic) pic.twitter.com/NCiJ8oVQML
— ANI (@ANI) March 19, 2020
ट्रंप ने कहा कि मलेरिया और अर्थराइटिस में इस्तेमाल होने वाली दवा कोरोना वायरस के इलाज में बेहतर साबित हुई है। उनके प्रशासन की तरफ से गठित कोरोना वायरस टास्क फोर्स ने पीड़ितों के इलाज के लिए एंटी मलेरिया ड्रग को मँजूरी दी है। ड्रोक्लोरोक्वीन नामक यह दवा डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर कोरोना वायरस के मरीजों के लिए ‘फौरन उपलब्ध’ कराई जाएगी। ट्रंप ने सबसे पहले न्यूयॉर्क में इसका इस्तेमाल किए जाने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि मैं सोचता हूँ कि यह बहुत कारगर होगा। यह गेम चेंजर हो सकता है।
इससे पहले इजराइल के वैज्ञानिकों ने कोरोना वैक्सीन बना लेने का दावा किया था। हालाँकि, इस टीके को उपयोग के वास्ते कई परीक्षण करने होंगे जिनमें महीनों लग सकते हैं। दरअसल इस वैक्सीन को प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देशों पर विकसित किया गया है। इजराइल के वैज्ञानिकों ने यह भी उम्मीद जताई थी कि इसकी घोषणा जल्द ही की जा सकती है। इससे पहले इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने टीका विकसित करने के लिए सभी संसाधन झोंक देने के लिए कहा था।
जब लॉबी के पसंद का फैसला हो तभी जज ‘सही’ और ‘स्वतंत्र’: पूर्व CJI गोगोई ने बताया उनसे क्यों चिढ़ा है विपक्ष
पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कल (मार्च 19, 2020) बतौर राज्यसभा सांसद शपथ ली थी। इस दौरान विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। सदन का बहिष्कार किया। उनका विरोध राष्ट्रपति द्वारा उच्च सदन के लिए मनोनीत किए जाने के बाद से ही शुरू हो गया था। इस मसले पर अब गोगोई ने अपना पक्ष रखा है। इससे पता चलता है कि आखिर क्यों विपक्ष और लिबरल गिरोह उनसे चिढ़ा हुआ है।
गोगोई के मुताबिक एक ‘लॉबी’ के चलते न्यायपालिका की आजादी खतरे में है। यह लॉबी अपने मुताबिक फैसला चाहता है। ऐसा नहीं होने पर जजों की छवि खराब करने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने न्यायपालिका को बंधक बना रखा है। सोचते हैं जब निर्णय उनके मतलब का है तभी वो स्वतंत्र और सही निर्णय है। बाकी टाइम में वही जज, वही न्यायपालिका भ्रष्ट और समझौतावादी दिखने लगती है।
टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि न्यायपालिका वास्तविक अर्थों में पूरी तरह तब तक स्वतंत्र नहीं होगी जब तक इन लोगों का गढ़ नहीं टूटता। ये जजों को फिरौती देने के लिए पकड़ते हैं। अगर कोई फैसला उनके मनमुताबिक नहीं आता तो वह जज की छवि को खराब करने की हरसंभव कोशिश करते हैं।
गौरतलब है कि राज्यसभा में राष्ट्रपति द्वारा नामित किए जाने के बाद कई विरोधियों ने ये आरोप लगाया था कि चूँकि पूर्व सीजेआई ने अयोध्या में राम मंदिर के पक्ष में अपना फैसला सुनाया इसलिए उन्हें राज्यसभा भेजा गया। गोगोई ने कहा है कि उन्होंने इस लॉबी को खारिज किया था, इसलिए उनकी इतनी आलोचना हुई।
उन्होंने ये भी कहा कि अगर एक जज आधे दर्जन लोगों की बातें सुनकर अपना फैसला लेता तो वह अपनी शपथ के प्रति ईमानदार नहीं होता। अयोध्या मामले में आए फैसले पर उन्होंने कहा, “यह 5 न्यायाधीशों की पीठ द्वारा एक सर्वसम्मत निर्णय था। इसके अलावा राफेल भी तीन न्यायाधीशों की पीठ द्वारा लिया एक सर्वसम्मत निर्णय था। इस तरह के आरोप लगाकर वे उन न्यायधीशों की सत्यनिष्ठा पर भी सवाल उठा रहे हैं, जो इन दोंनो फैसलों का हिस्सा रहे।”
उन्होंने राज्यसभा में मिले पद को ‘मुआवजे’ की तरह देखने वाली बातों को खारिज करते हुए कहा कि अगर वे फायदा चाहते तो इससे अधिक बड़े और बेहतर पदों की तलाश करते। राज्यसभा सांसद के लाभ एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश के समान होते हैं। उन्होंने कहा कि अगर नियम उन्हें इस चीज की अनुमति दें, तो वे सांसद को मिलने वाले वेतन और भत्ते नहीं लेंगे और उसे छोटे शहरों में पुस्तकालयों को पुनर्जीवित करने के लिए दे देंगे।
जनवरी 2018 के ऐतिहासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने का जिक्र करते हुए गोगोई ने याद किया कि उस समय उनका किस तरह स्वागत किया गया था। उन्होंने बताया, “साल 2018 में जब मैं प्रेस कॉन्फ्रेंस में गया था तो लॉबी का प्रिय था। लेकिन उस समय भी मैं चाहता था कि निर्णय एक निश्चित प्रक्रिया के अनुसार हो।”
पूर्व सीजेआई ने इंडिया टुडे को भी इंटरव्यू दिया है। इसमें उन्होंने कहा है कि यदि भारत का राष्ट्रपति आपको अनुच्छेद 80 के तहत एक प्रस्ताव देता है और आपको कहता है कि राष्ट्र को आपकी सेवा की आवश्यकता है, तो आपको मना नहीं करना चाहिए। अपने ऊपर लगते आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यदि बात केवल फायदा लेने की होती, तो मैं कभी राज्यसभा की सदस्यता नहीं स्वीकार करता।
जनता कर्फ्यू: PM माेदी के 9 आग्रह, थाली और ताली में उलझी लिबरल गैंग की औरतें
कोरोना वायरस को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को राष्ट्र को संबोधित किया। संक्रमण का प्रसार करने के लिए लोगों से संकल्प और संयम की अपील की। अफवाहों से बचने और सतर्कता बरतने सहित तमाम बातें की। इसके आर्थिक प्रभाव की चर्चा करते हुए बताया कि इससे निपटने के लिए टास्क फोर्स का गठन किया गया है।
उन्होंने जनता से 9 आग्रह किए। रविवार को जनता कर्फ्यू की अपील की। साथ ही कहा कि 22 मार्च के दिन सभी लोग अपने घर की बालकनी में आएँ और इस महामारी से निपटने में जुटे लोगों की सेवा के प्रति आभार जताने के लिए 5 मिनट तक करतल ध्वनि बजाएँ।

प्रधानमंत्री की इस पहल की ज्यादातर तबकों में सराहना हुई। लेकिन, लिबरल गैंग को यह नहीं सुहाया। शेहला रशीद जैसे कुछ नामों को छोड़ दे तो गैंग की ज्यादातर औरतें थाली और ताली के अलावा प्रधानमंत्री के संबोधन में कुछ तलाश नहीं पाईं। इस सूची में सबसे पहला नाम है प्रोपेगेंडा पोर्टल द वायर की आरफा खान्नम शेरवानी का। अपनी कुँठा व्यक्त करते हुए उसने ट्वीट किया है, “जनता curfew, ताली और थाली… सब कुछ जनता ही करेगी, तो आप क्या करेंगे सरकार? 30 मिनट के भाषण में 3 चीज़ें बताइये जो सरकार करेगी?”

पत्रकार रोहिणी सिंह भी भार प्रकट करने के तरीके को भी संशय के घेरे में रखकर पेश करती हैं और लिखती हैं- “भारत में वैश्विक महामारी से लड़ाई ताली और थाली बजा-बजाकर लड़ी जाएगी।”

सबा नकवी ने लिखा है, “ये दिलचस्प है कि निजी क्षेत्र के डॉक्टर प्रधानमंत्री का गुणगान करते हैं, जबकि सरकारी क्षेत्र के डॉक्टर अभी भी बुनियादी किट और मास्क माँग रहे हैं।”

पत्रकार सागरिका घोष भी नरेंद्र मोदी के इस आग्रह पर सवाल उठाती हैं। वे पहले तो तो नरेंद्र मोदी के ‘जनता कर्फ्यू’ विचार की तारीफ करती हैं। मगर, इसके बाद अपना रवैया बरकरार रखते हुए कहती हैं कि एक दूसरे से दूर रहने की बात ठीक है, लेकिन वे कुछ ठोस सुनने की इच्छुक थी। सागरिका सवाल करती हैं कि जो प्रधानमंत्री ने कहा वो सब तो ठीक है, लेकिन सरकार क्वारेंटाइन सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए क्या कर रही है, इसके बारे में नरेंद्र मोदी ने कोई बात क्यों नहीं की।


इंडियन एक्सप्रेस की पूर्व पत्रकार और दलितों से घृणा करने वाली इरेना अकबर स्वास्थ्यकर्मियों को सराहने के लिए उठाए जाने वाले इस कदम का मजाक उड़ाने के लिए लिखती हैं कि रविवार को 5 बजे वो अपनी बॉलकनी में खड़े होकर भक्तों की शिनाख्त करेंगे। उनके हिसाब से जो कोई भी प्रधानमंत्री की बात मानकर अपनी बॉलकनी में खड़े होकर ताली या थाली बजाएगा वो सिर्फ उनका भक्त होगा।

इरेना कहती है कि प्रधानमंत्री सिर्फ़ अपील नहीं करते बल्कि आश्वस्त करते हैं कि वो इस विपदा में उनका ध्यान रखेंगे। लेकिन मोदी ने सिर्फ़ अपील की, क्योंकि वे जानते हैं कि वे बेवकूफों के राष्ट्र को संबोधित कर रहे हैं।
A Prime Minister doesn’t only APPEAL to people, he ASSURES them that he will take care of a crisis. Modi only appealed, did not assure, because he knows he is addressing a nation of fools. #COVID2019india
— Irena Akbar (@irenaakbar) March 19, 2020
एक पत्रकार और शीरीन नाम की महिला जिन्हें इरेना अकबर भी रीट्वीट करती हैं। वे थाली बजाकर आभार देने की बात का मजाक उड़ाते हुए कहती हैं कि इटली में हो रहा बॉलकनी टाइम पास भारत के लिए राष्ट्रीय आपदा से लड़ने की नीति है।
Italy’s balcony timepass is India’s national disaster policy.
— Shireen (@shireenazam) March 19, 2020
स्वघोषित पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी भी इस पर अपनी राय देने नहीं चूकतीं। वे सागरिका घोष की तरह तालमेल बिठाते हुए कहती है कि वे नरेंद्र मोदी के इस भाषण को उनके सबसे अच्छे भाषणों में रेट करती हैं। केवल थाली बजाने वाली बात को छोड़कर। बता दें, स्वाति चतुर्वेदी इस पहल पर हैरानी जताती हैं और कहती है कि उन्हें ये फिजूल लग रहा है।


