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मज़हब के आगे PM मोदी की अपील बेअसर: गोरखपुर में आम दिनों की तरह ही खुले में पढ़ी गई नमाज

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार (मार्च 19, 2020) शाम राष्ट्र के नाम अपने संदेश में कहा था कि कोरोना के खिलाफ ‘संकल्प और संयम’ से ही यह लड़ाई जीती जा सकती है और उसके लिए हमें अपना मूवमेंट कम से कम करने की जरूरत है। पीएम मोदी ने सलाह देते हुए कहा था कि भीड़-भाड़ वाले इलाकों से बचने की जरूरत है तथा जितना हो सके घर बैठ कर ही काम करने की जरूरत है। लेकिन कुछ लोग मात्र मजहबी आस्था में अंधे होकर कोरोना के कहर तक को नजरअंदाज करते हुए अपने साथ-साथ और लोगों की भी जिन्दगी को जोखिम में डाल रहे हैं।

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आज उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में प्रधानमंत्री की इस अपील का मजाक बनाते हुए देखा गया। दरअसल, कोरोना को देखते हुए उम्मीद थी कि आज मुस्लिम समुदाय के लोग जुमे की नमाज को मस्जिद में न पढ़कर अपने-अपने घरों में पढ़ेंगे, जिससे सैंकड़ों लोगों के एक जगह एकत्रित होने से बचा जा सकेगा। लेकिन अफ़सोस कि इस संदर्भ में की गईं तमाम अपीलों के बावजूद भी गोरखपुर में जुमे की नमाज के लिए आज कई जगह सैंकड़ों की भीड़ देखी गई। आम दिनों की तरह ही घंटाघर और कलेक्ट्रेट में दोपहर से ही भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। 

देश के नाम अपने सम्बोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने अगले एक हफ्ते तक सामाजिक मेल-जोल कम करने, भीड़ वाले इलाक़ों से बचकर रहने और 22 मार्च को ‘जनता कर्फ्यू’ का पालन करने की अपील की थी। बृहस्पतिवार को गोरखपुर के जिलाधिकारी के विजयेंद्र पांडियन ने भी शहर के लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की और भीड़ भाड़ वाली जगहों से दूर रहने की अपील की थी।

शाहीन बाग़ में भी जारी है मनमानी

ऐसी ही जिद पिछले कई दिनों से लगातार शाहीन बाग में देखने में आ रही है, जहाँ से लोग हटने का नाम नहीं ले रहे हैं। शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारी अब मानवता के लिए ख़तरा बन कर उभर रहे हैं। जहाँ एक तरफ सरकार लोगों से अपील कर रही है कि भीड़ न जुटाएँ और किसी भी सामाजिक फंक्शन इत्यादि का हिस्सा न बनें, वहीं शाहीन बाग़ में सीएए के विरोध के नाम पर बैठी महिलाएँ वहाँ से हटने का नाम ही नहीं ले रही है। ऐसा ही कुछ दक्षिण कोरिया में हुआ था जहाँ एक चर्च की जिद के कारण 5000 से भी अधिक लोग कोरोना वायरस की चपेट में आ गए थे। ठीक उसी तरह, दिल्ली का शाहीन बाग़ एक खतरनाक स्पॉट बन कर भर रहा है, जहाँ डॉक्टरों व विशेषज्ञों की हर सलाह को धता बताया जा रहा है।

गौरतलब है कि शाहीन बाग़ का धरना 95 दिनों से लगातार जारी है। अब महिलाएँ वहाँ भूमि पर बैठने की बजाए लकड़ी की चौकियों पर बैठी हुई हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि वो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के उस आदेश को मानेंगी, जिसमें 50 से ज्यादा लोगों के एक साथ एक जगह न जुटने की बात कही गई है।

वैसे ये पहली बार नहीं है कि शाहीन बाग़ में इस तरह की असंवेदनशीलता दिखाई जा रही है। इससे पहले एक नवजात शिशु की मौत हो गई थी। उसे उसकी अम्मी हमेशा भीषण ठण्ड में भी प्रदर्शन में लेकर जाती थी। मौत के बाद उसके वहाँ की कई महिलाओं ने कहा था कि अल्लाह की बच्ची है, अल्लाह ने बुला लिया। भाजपा नेता अमित मालवीय ने याद दिलाया कि 1918 फ़िलेडैल्फ़िया में एक परेड को रोके जाने को कहा गया लेकिन उनकी जिद के कारण स्पेनिश फ्लू फैला और स्पेन की 80% जनसंख्या संक्रमित हो गई। लाखों की मौत हो गई थी।

‘जनता कर्फ्यू’ के दौरान 22 मार्च को बंद रहेगी दिल्ली मेट्रो, DMRC ने पीएम मोदी की अपील पर लिया फैसला

कोरोनावायरस के संकट के बीच दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (DMRC) ने अहम कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से ‘जनता कर्फ्यू’ की अपील के बाद दिल्ली मेट्रो ने आगामी 22 मार्च को मेट्रो परिचालन बंद करने का फैसला लिया है। मेट्रो ने कहा है कि कोरोनावायरस के फैलाव और ‘जनता कर्फ्यू’ को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। यह पहला मौका है जब दिल्ली मेट्रो का परिचालन बंद किया जा रहा है। आज तक मेट्रो के इतिहास में कभी भी मेट्रो का परिचालन पूरी तरह से बंद नहीं किया गया है।

डीएमआरसी ने कहा है कि सामाजिक दूरी को बनाए रखने और लोगों को घरों में रहने के लिए प्रोत्साहित करते हुए दिल्ली मेट्रो को 22 मार्च को बंद रखने का फैसला किया गया है। दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन ने कहा कि यह कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई का एक कदम है।

दरअसल, कोरोनावायरस के संकट को लेकर पीएम मोदी ने गुरुवार (मार्च 19, 2020) को देश के नाम संबोधन दिया। जहाँ पीएम मोदी ने 22 मार्च को देशवासियों से जनता कर्फ्यू का पालन करने के लिए कहा। देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इस रविवार 22 मार्च को सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक देशवासी ‘जनता कर्फ्यू’ का पालन करें।

इससे पहले डीएमआरसी ने एडवाइजरी जारी करते हुए कहा था कि मेट्रो के अंदर भी यात्रियों को एक मीटर की दूरी बनानी होगी। दिल्ली मेट्रो में यात्री खड़े होकर सफर नहीं कर सकेंगे। लोगों को एक सीट छोड़कर बैठाया जाएगा। मेट्रो स्टेशनों में प्रवेश लेने से पहले यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग होगी। वहीं जिन स्टेशनों पर भीड़ अधिक होगी, वहाँ मेट्रो नहीं रुकेगी। इसके साथ ही मेट्रो प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अति आवश्यक होने पर ही घरों से निकलकर मेट्रो का सफर करें।

वहीं देश में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। दिल्ली में सभी शॉपिंग मॉल को बंद करने का फैसला किया गया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर इसका ऐलान किया। उन्होंने कहा कि इस दौरान मॉल में सब्जी, मेडिकल स्टोर और किराना की दुकानें खुलीं रहेंगी।

बता दें कि देश के विभिन्न हिस्सों में कोरोनावायरस के नए मामले सामने आने के बाद भारत में इससे संक्रमित लोगों की संख्या शुक्रवार (मार्च 20, 2020) को 200 के पार हो गई। स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार इनमें 32 विदेशी नागरिक शामिल हैं। देश में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या पाँच हो गई है। इसके अलावा 20 लोग वे हैं, जो ठीक हो गए हैं या फिर उन्हें छुट्टी दे दी गई है। 

कोरोना का कहर: महाराष्ट्र के चार शहरों को किया गया बंद, दिल्ली में कनॉट प्लेस, इंडिया गेट से लेकर सभी मॉल हुए बंद

कोरोना का कहर जारी है, लाख कोशिशों के बाद भी वायरस का असर चीन के अलावा कहीं भी कम होता नहीं दिखाई दे रहा। एक तरफ जहाँ चीन में दो दिनों में कोई भी नया मामला सामने नहीं आया है, तो वहीं भारत सहित अन्य देशों में हर रोज मौतों और इससे संक्रमित लोगों की संख्या लगातार बढ़ती ही चली जा रही है। इसकी रोकथाम के लिए विश्वभर में तमाम तरह के प्रयोग भी किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में अगर भारत की बात करें तो महाराष्ट्र ने अपने चार शहरों को लॉकडाउन कर दिया है। वहीं दिल्ली में केजरीवाल सरकरा ने कनॉट प्लेस, इंडिया गेट और दिल्ली के सभी मॉल को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश जारी कर दिया है। इतना ही नहीं देश के कई हिस्सो में धारा 144 लगा दी गई है।

वहीं कोरोना वायरस का असर विश्व के 180 से अधिक देशों में फैल चुका है। अगर भारत की बात करें तो कोरोना वायरस से भारत में अब तक 5 मौतें हो चुकी हैं और इससे संक्रमित लोगों की संख्या 200 के पार पहुँच गई है। चौंकाने वाली बात यह कि भारत में सबसे अधिक मामले महाराष्ट्र राज्य से सामने आए हैं। यही कारण है कि उद्धव सरकार ने पुणे, पिम्परी-चिंचवाड़, मुंबई और नागपुर को पूरी तरह से बंद करने का फैसला किया है। इस दौरान जरूरी सेवाएँ पहले की तरह जारी रहेंगे, जबकि बाकी चीजें बंद रहेंगी। उद्धव ठाकरे ने कहा है कि अगर लोगों ने यात्रा करना बंद नहीं किया तो मुंबई की लाइफ लाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन को भी बंद किया जा सकता है।

वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कोरोना वायरस को लेकर मौजूदा हालात को देखते हुए सभी मॉल (किराना, फ़ार्मेसी और सब्जी की दुकानों को छोड़कर) को बंद करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही दिल्ली के दिल की घड़कन कहा जाने वाले कनॉट प्लेस और इंडिया गेट को भी सरकार ने आम लोगों के लिए बंद कर दिया है। वहीं रविवार यानि 22 मार्च को दिल्ली में मेट्रो सेवा भी पूरी तरह से बंद रहेगी। कोयम्बटूर जिला कलेक्टर, रासामणि ने जानकारी दी है कि कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए कोयंबटूर में तमिलनाडु-केरल सीमा को बंद किया जाएगा। उधर श्रीनगर में भी कोरोना का पहला मामला सामने आ गया है।

कोरोना से निपटने के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया (DGCI) ने अंतर्राष्ट्रीय और भारतीय कंपनियों सहित 18 कंपनियों को देश में कोरोना वायरस डायग्नोस्टिक टेस्ट के लिए लाइसेंस दिया है। आपको बता दें कि देश में कोरोना वायरस की वजह से पांचवीं मौत हुई है। इटली के रहने वाले शख्स ने राजस्थान के सवाई मानसिंह अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में दम तोड़ा। कुछ दिन पहले उसकी रिपोर्ट नेगेटिव आ गई थी। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने कहा है कि अब तक देश में कोरोना वायरस के 206 मामलों की पुष्टि हो चुकी है।

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में देशवासियों से 22 मार्च को सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक जनता कर्फ्यू लगाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के कारण इस समय पूरा विश्व संकट के गंभीर दौर से गुजर रहा है। इस संकट ने पूरी मानव जाति को संकट में डाल दिया है।

‘जनता कर्फ्यू’ से कोरोना पर PM मोदी का वार, याद आया शास्त्री का 55 साल पुराना उपवास

चीन से निकले कोरोना वायरस की मार आज विश्व के करीब 180 देश झेल रहे हैं। सभी प्रभावित देश अपने-अपने तरीके से इससे निपटने की कोशिश कर रहे हैं। भारत में कोरोना की चपेट में आने से अब तक पाँच लोगों की मौत हो चुकी है और 200 से ज्यादा संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं।

इसका प्रसार रोकने के लिए मोदी सरकार तमाम कदम उठा रही है। इसमें से एक जनता जनता कर्फ्यू है। इसकी अपील पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को देश को संबोधित करते हुए की थी। उनके प्रयासों की चौतरफा सराहना हो रही है। उनके इस कदम ने लोगों के जेहन में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के एक ऐसे ही अनूठे प्रयोग की याद ताजा कर दी है। शास्त्री ने करीब 55 साल पहले इसी तरह देश के लोगों से उपवास की अपील की थी।

1964 में शास्त्री प्रधानमंत्री बने। इसके अगले ही साल भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ गया। उस समय देश में भयंकर सूखा पड़ा था। खाने-पीने की चीजों को निर्यात किया जा रहा था। यह संकट सरकार के लिए युद्ध से भी बड़ी चुनौती बनकर उभरी। अनाज देने के एवज में अमेरिका अपनी शर्तें थोप रहा था। यह शास्त्री को मॅंजूर नहीं था। ऐसे में अनाज की कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने कई कदम उठाए। इनमें से एक जनता से उपवास की अपील थी।

हालॉंकि जनता से यह अपील करने से पहले उन्होंने इसका प्रयोग अपने ही परिवार पर किया। एक दिन शास्त्री ने घर के सारे सदस्यों को रात के खाने के समय बुलाया और कहा कि कल से एक हफ्ते तक शाम को चूल्हा नहीं जलेगा। बच्चों को दूध और फल मिलेगा और बड़े उपवास रखेंगे। शास्त्री की इस बात का परिवार के सभी सदस्यों ने पूरी तरह से सात दिन तक पालन किया। पूरा सप्ताह बीत जाने के बाद शास्त्री ने एक बार फिर से परिवार के सदस्यों को एक साथ बुलाया और कहा, “मैं सिर्फ देखना चाहता था कि यदि मेरा परिवार एक हफ्ते तक एक वक्त का खाना छोड़ सकता है तो मेरा बड़ा परिवार (देश) भी हफ्ते में कम से कम एक दिन तो भूखा रह ही सकता है।”

इसके बाद शास्त्री ने आकाशवाणी के जरिए देश की जनता से हफ्ते में कम से कम एक बार खाना न पकाने और उपवास रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से देश इतना अनाज बचा लेगा कि अगली फसल आने तक देश में इसकी कमी न हो। शास्त्री की इस मार्मिक अपील देश पर गहरा असर देखने को मिला।

इसके बाद शास्त्री जी का यह कदम देश की राजनीति में भी हमेशा के लिए एक सबक बन गया और आम लोगों को भी अहसास हुआ कि देश हित में आखिर सामान्य व्यक्ति किस तरह से अपनी भागीदारी अदा कर सकता है। गौरतलब है कि शास्त्री जी ने कृषि उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए ‘जय जवान जय किसान’ का भी नारा दिया था।

कोरोना वायरस: विदेश से लौटे बेटे की छुपाई पहचान, रेलवे ने महिला अधिकारी को किया सस्पेंड, कई अन्य के संक्रमित होने का डर

देश के विभिन्न हिस्सों में कोरोनावायरस के नए मामले सामने आने के बाद भारत में इससे संक्रमित लोगों की संख्या शुक्रवार (मार्च 20, 2020) को 200 के पार हो गई। स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार इनमें 32 विदेशी नागरिक शामिल हैं। देश में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या पाँच हो गई है। इसके अलावा 20 लोग वे हैं, जो ठीक हो गए हैं या उन्हें छुट्टी दे दी गई है। 

लेकिन, इस बीच कुछ लोग कोरोना वायरस को लेकर कुछ ऐसा कर रहे हैं जो दूसरे को संकट में डाल सकता है। कर्नाटक में एक रेलवे कर्मचारी पर इसी को लेकर कार्रवाई करते हुए निलंबित कर दिया है, जिसने विदेश से लौटे अपने बेटे की पहचान छुपाई थी। बेंगलुरू की रहने वाली एक महिला रेलवे कर्मचारी का बेटा हाल ही में इटली से लौटा था। लेकिन कर्मचारी ने बेटे को निगरानी में नहीं रखा और उसके बारे में किसी को सूचित भी नहीं किया। लेकिन जब बुधवार (18 मार्च, 2020) को उसका टेस्ट किया गया तो वो कोरोना वायरस का संक्रमित पाया गया।

अधिकारियों को उसके बारे में जानकारी मिलने के बाद महिला अधिकारी के बेटे को आइसोलेशन में रखा गया है। रेलवे के प्रवक्ता ई विजया ने शुक्रवार को बताया कि महिला अधिकारी ने प्राधिकारियों को अपने बेटे के इटली से लौटने की जानकारी नहीं दी और मुख्य बंगलूरू स्टेशन के निकट रेलवे के एक अतिथिगृह में उसे रख कर अन्य लोगों के जीवन को भी खतरे में डाला। विजया ने बताया कि सहायक कार्मिक अधिकारी (यातायात) को निलंबित कर दिया गया है।

उन्होंने बताया कि 25 वर्षीय युवक स्पेन से होते हुए जर्मनी से आया था और उसे 13 मार्च को बंगलूरू में केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा पहुँचने पर घर में अलग रहने को कहा गया था। वह 18 मार्च को कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया। वहीं रेलवे के एक अधिकारी ने महिला अधिकारी के बेटे के इटली से आने की जानकारी छुपाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने अपने परिवार को बचाने के लिए अपने बेटे को छुपाया लेकिन उन्होंने हम सबका जीवन खतरे में डाल दिया।

बताया जा रहा है कि महिला अधिकारी ने चुपके से अपने बेटे को केएसआर रेलवे स्टेशन पर मौजूद ऑफिसर्स रेस्ट हाउस में 13 मार्च को ठहरने की व्यवस्था कराई थी। जानकारी के मुताबिक महिला अधिकारी का बेटा बंगलूरू में एक स्टार्टअप चलाता है। उसकी तबीयत बिगड़ने पर एंबुलेंस को बुलाया गया और उसे मंगलवार (मार्च 17, 2020) रात को अस्पताल ले जाया गया। बुधवार को राजीव गाँधी इंस्टीट्यूट ऑफ चेस्ट डिसीज में उसका परीक्षण हुआ जो पॉजिटिव मिला। मामला सामने आने के बाद रेलवे ने रेस्ट हाउस को बंद करने का फैसला लिया है।

बता दें कि देश के कई राज्यों ने ये नियम लागू किया है कि जो भी व्यक्ति कोरोना वायरस को लेकर अपनी पहचान छुपाएगा तो उस पर केस दर्ज किया जाएगा, कर्नाटक में भी ये नियम लागू किया गया है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘कॉमेडियन’ से ट्रोल बने कुणाल कामरा की याचिका पर सुनवाई करने से किया इंकार, लगाई फटकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘कॉमेडियन’ से ट्रोल बने कुणाल कामरा की उस याचिका पर सुनवाई करने से इंकार कर दिया है, जिसमें कामरा ने अपने ऊपर लगे प्रतिबंधों को हटाने की माँग की थी। कोर्ट ने टिपप्णी करते कॉमेडियन को फटकार लगाते हुए एक टिप्पणी भी की है, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि विमान में इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता। दरअसल, कामरा ने एक हवाई यात्रा के दौरान रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी से बदसलूकी की थी। इसके बाद इंडिगो इयरलाइंस ने यात्री कामरा पर 6 महीने का प्रतिबंध लगा दिया था।

ख़ुद को कॉमेडियन कहने वाले कुणाल कामरा ने एक हवाई यात्रा के दौरान ‘रिपब्लिक न्यूज़’ के संपादक अर्नब गोस्वामी के साथ बदतमीजी की थी। अर्नब अपनी सीट पर बैठे हुए थे और कान में हेडफोन लगाए हुए थे। कुणाल कामरा अर्नब के पास पहुँच गया और उसने उन्हें ‘डरपोक’ बताया था। उसने अपने इस घटिया हरकत का वीडियो भी शूट कर लिया। वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि कुणाल कामरा अर्नब गोस्वामी पर लगातार तंज कसते हुए न सिर्फ़ उन्हें परेशान कर रहा है बल्कि बार-बार उन्हें ‘डरपोक’ भी बता रहा है। बाद में उसने ट्विटर पर इस वीडियो को डालते हुए गर्व के साथ लिखा कि वो रोहित वेमुला की माँ के लिए ऐसा कर रहा है। वो वीडियो में स्वीकार करता है कि वो जो कर रहा है, वो नियमानुसार सही नहीं है लेकिन फिर वो कहता है कि वो इसके लिए जेल जाने को भी तैयार है। वो अर्नब को कहता दिख रहा- ‘गेट द फकिंग टाइम और रोहित वेमुला की 10 पेज की सुसाइड नोट को पढ़ो।

इतना ही नहीं कामरा ने इसके बाद अर्णव को पर्सनल मैसेज भेजकर परेशान किया था। कामरा के इस व्यवहार के बाद इंडिगो एयरलाइन्स ने उपद्रवी यात्री कुणाल कामरा को 6 महीने के लिए प्रतिबंधित कर दिया था और इंडिगो ने कहा कि कुणाल कामरा का ये व्यवहार अस्वीकार्य है और उन्हें फ्लाइट में उड़ान भरने के लिए 6 महीनों के लिए प्रतिबंधित किया जाता है। बाद में कई और एयरलाइन्स ने भी कुणाल कामरा को प्रतिबंधित कर दिया था।

80 लाख दिहाड़ी मजदूरों को ₹1000 देगी योगी सरकार, कोरोना से राहत दिलाने के लिए मनी एट होम योजना

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यूपी में कोरोना वायरस के खिलाफ जारी लड़ाई में बड़ी घोषणा कर सकते हैं। मीडिया खबरों के अनुसार कोरोना के चलते मंदी की आशंकाओं के मद्देनजर योगी सरकार प्रदेश के 80 लाख श्रमिकों को बड़ी राहत देने जा रही है। जानकारों के अनुसार सरकार दिहाड़ी मजदूरों के लिए ‘मनी एट होम’ योजना लाने जा रही है। इस योजना के अंतर्गत कोरोना वायरस के कारण प्रभावित दिहाड़ी मजदूरों के बैंक खातों में 1000-1000 रुपए की राशि डाली जाएगी।

पिछले मंगलवार को यूपी कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना वायरस से लड़ने को लेकर प्रदेश सरकार की तैयारियों की समीक्षा की थी। बैठक के बाद उन्होंने प्रदेश के दिहाड़ी मजदूरों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। जानकारों के अनुसार आज योगी इस पर फैसला ले सकते हैं।

प्रदेश के श्रम विभाग में पंजीकृत मजदूरों की संख्या 20 लाख से ज्यादा है, तो वहीं नजर विकास विभाग के 16 लाख दिहाड़ी सफाई कर्मचारी और 58,000 से ज्यादा ग्रामसभाओं में से प्रत्येक से 20-20 मजदूर इस योजना के अंतर्गत लिए जाएँगे। यह कुल संख्या 80 लाख के नजदीक बैठेगी। इसके अलावा योगी सरकार ने पिछले दिनों प्रदेश में कोरोना वायरस से संक्रमित होने वालों की जाँच और इलाज मुफ्त में करने का भी ऐलान किया था। साथ ही यह भी घोषणा की थी कि इलाज हेतु लिए गए अवकाश के दौरान उनके वेतन में कोई कटौती नहीं की जाएगी।

गौरतलब है कि मंगलवार को हुई बैठक में यूपी के सभी पर्यटक स्थल 31 मार्च तक बंद करने का आदेश दिया गया है। इस दौरान कहा गया कि पर्यटक स्थल सिर्फ साफ-सफाई के लिए खुलेंगे। तहसील दिवस व जनता दर्शन भी 2 अप्रैल तक नहीं होंगे। सभी स्कूल-कॉलेजों और मल्टीप्लेक्स 2 अप्रैल तक बंद कर दिए गए हैं। इसके अलावा सभी स्कूल-कॉलेजों में चल रही परीक्षाओं को स्थगित करने का आदेश जारी हुआ है। बता दें, इस समय उत्तर प्रदेश में कोरोना के पीड़ित मरीजों की संख्या 13 है, जिसमें से 12 भारतीय और 1 विदेशी नागरिक हैं। इसमें से चार लोग कोरोना से पूरी तरह ठीक हो चुके हैं।

पीएम मोदी के जनता कर्फ्यू को मिला लिबरल-सेक्युलर गैंग का साथ तो किसी ने किया कटाक्ष

प्रधानमंत्री मोदी ने कल गुरुवार को देश से ‘संकल्प और संयम’ अपना, कोरोना वायरस को मात देने की अपील की। उन्होंने अपने सम्बोधन में 22 मार्च को देशवासियों से ‘जनता कर्फ्यू’ का पालन करने की गुजारिश की, जो कि आने वाले दिनों में कोरोना से लड़ने के लिए एक तरह का सामाजिक मेलजोल से दूरी बनाए रखने का परीक्षण होगा।

देश के नाम इस 30 मिनट के सम्बोधन में मोदी ने लोगों से सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक घर पर रहने को कहा। उन्होंने कोरोना के खतरे से आगाह करते हुए, इस कोरोना के इस वैश्विक खतरे को अभूतपूर्व कहा।

मोदी की इस अपील का समर्थन में कुछ अपवादों के अतिरिक्त सभी तबके के लोगों ने किया है। मोदी के समर्थन में लिबरल-सेक्युलर मीडिया गैंग के अलावा कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम का भी उतर आना वाकई सुखद आश्चर्य देता है, जिसने मोदी के जनता कर्फ्यू का न सिर्फ दिल खोल कर स्वागत किया बल्कि मोदी की इसके लिए जमकर प्रशंसा भी की।

मोदी विरोध के लिए कुख्यात सागरिका घोष मोदी के इस कदम की तारीफ़ करते हुए भी, पीएम पर कटाक्ष करने से बाज नहीं आईं।

वहीं मल्टी टैलेंटेड स्वयंभू सेफालॉजिस्ट और कथित समाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने भी मोदी की तारीफ करते हुए इकोनॉमिक टास्क फ़ोर्स के आईडिया का भी समर्थन किया।

इन लिबरल सेक्युलर गैंग के प्रमुख व्यक्तियों में से एक राजदीप सरदेसाई ने भी मोदी के ‘जनता कर्फ्यू’ को अपना समर्थन देते हुए इस हेल्थ क्राइसिस से निपटने के लिए सभी उपाय करने की अपील की। सबसे आश्चर्यजनक शेहला राशिद का मोदी की अपील को समर्थन देना रहा। टुकड़े-टुकड़े गैंग की मशहूर सदस्य और मोदी की आलोचना कर सुर्ख़ियों में रहने की आदी शेहला राशिद ने भी लोगों से घर में रहने, अपने एम्प्लॉयी को सवेतन अवकाश देने का पुरजोर समर्थन किया।

इनके अलावा ट्रोल स्वाति चतुर्वेदी ने भी जनता कर्फ्यू के पक्ष में ट्वीट किया, हालाँकि, उन्हें मोदी द्वारा उन लोगों के प्रति आभार जताने की अपील नागवार गुजरी जो इस हेल्थ क्राइसिस में अपनी जान जोखिम में डाल, रात दिन बीमारों की सेवा-उपचार में लगे हैं।

मोदी के समर्थन में खुलकर उतर आई लिबरल-सेक्युलर ब्रिगेड इस बात का स्पष्ट साक्ष्य है कि उन्हें भी अब इस कोरोना क्राइसिस की गंभीरता का न सिर्फ अंदाजा हो चुका है बल्कि उन्हें अच्छे से खबर है कि इस बेहद खतरनाक स्थिति से निकालने के लिए जिस सशक्त लीडरशिप की जरूरत है वह मोदी ही दे सकते हैं।

पाकिस्तान: एक आदमी कबूतर के विष्ठा से भगा रहा कोरोना, दूसरा बता रहा सपने में आया वायरस

कोरोना वायरस को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ लोग इस समय अपने-अपने स्तर पर इसका इलाज बता रहे हैं। कई लोग घरेलू नुस्खे बताकर इसे दूर करने की सलाह दे रहे हैं, तो कुछ लोग ऐसे हैं जो हवा में तीर छोड़कर इसे जड़ से खत्म करने के दावे कर रहे हैं। कुछ इसके फैलने की वजह को मजहब से जोड़कर बता रहे हैं।

इन दिनों सोशल मीडिया पर ऐसे ही कुछ विडियो वायरल हो रहे हैं। ज्यादातर विडियो मौलवियों के हैं। इनमें से एक विडियो में एक व्यक्ति कोरोना को जड़ से खत्म करने का नुस्खा बता रहा है। बता रहा है कि आखिर कोरोना वायरस है क्या और उसने पूरे विश्व में क्यों कोहराम मचा रखा है।

अब, जब ये दोनों विडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं तो आइए बताते हैं कि मौलवी अपनी बातों के पीछे क्या तर्क दे रहे हैं। एक मौलवी साहब पाकिस्तान में कोरोना के फैलते प्रभाव को देखते हुए कहते हैं कि कोरोना वायरस का इलाज अल्लाह ताला ने उनके दिमाग में डाल दिया है और ये इलाज एकदम परफेक्ट है। बस कबूतर के विष्ठा को पानी में मिलाकर तीन बार पीना है। चूँकि कबूतर अल्लाह-अल्लाह करता है इसलिए ये इलाज सही है।

मौलवी कहते हैं कि अगर कोई उनकी इस बात को गलत साबित करता है तो वह उसे बताना चाहते हैं कि कबूतर जिस भी चीज को अपनी चोंच में लेता है और उसे अपने गले से नीचे करता है, वो अगर जहरीली हो या जो कुछ भी हो उसे हजम कर देता है। इसके लिए एक झिल्ली होती है। अगर इसका इस्तेमाल शुगर वाले मरीज करते हैं तो उनकी शुगर भी गायब हो जाएगी।

अब हालाँकि, ये बातें कितनी हास्यास्पद हैं, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। लेकिन सोशल मीडिया पर विशेष समुदाय के कुछ लोग इसे सच मानकर आगे बढ़ा रहे हैं और बाकी अन्य यूजर उनकी चुटकी ले रहे हैं।

इसी तरह एक अन्य वायरल विडियो में भी एक मौलवी लोगों को कोरोना वायरस के बारे में बता रहा है। मौलवी कहते हैं कि कोरोना वायरस को लेकर बांग्लादेशी युवक को इटली में सपने आया। सपने में उसने कोरोना वायरस को इंसानी शक्ल में देखा। जब व्यक्ति ने पूछा कि तू कौन है, तो उसने कहा- कोरोना वायरस। उसने पूछा- तू किसलिए आया है? तो वायरस ने बताया कि जहाँ से वायरस शुरू हुआ, वहाँ तीन चीनियों ने आयशा नाम की औरत से रेप किया था और उसके मुँह पर पट्टी बाँध दी थी।

अब चूँकि वो कुछ बोल नहीं सकती थी। इसलिए उसने अपने मन में अल्लाह को याद किया और रोकर उन्हें अपना दुखड़ा सुनाया। उसने कहा, “या अल्लाह क्या हो रहा है कि क्या कोई मुझे बचाने वाला नहीं?” अब जैसा ही वो तीन लोग रेप करके वहाँ से उठे। तो कोरोना वायरस की शक्ल में अल्लाह का अजाब आया और तीनों बंदे तो वहीं खत्म हो गए। इसके बाद दो सिक्योरिटी गार्ड जो इस जुर्म की पहरेदारी कर रहे थे उन पर ये कहर बरपा।

मौलवी के अनुसार, अल्लाह इस बात से नाराज हुए कि उन लोगों ने समुदाय विशेष को कहा था कि आपको नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं, मस्जिदें खोलने की इजाजत नहीं, कुरान-ए-पाक पढ़ने की इजाजत नहीं… जो देश सुपर पावर बना बैठा था वहाँ अल्लाह ने जरा सी देर में लाखों को जमीन पर फेंक दिया।

इससे पहले भी एक मौलवी की विडियो सामने आई थी। इसमें कोरोना वायरस को वह मौलवी उइगरों पर हो रहे अत्याचारों की सजा बता रहा था। लेकिन बाद में मालूम हुआ कि वह खुद ही कोरोना से संक्रमित हो गया है।

कोरोना से मुस्लिम की मौत हो तो दफनाए नहीं, इलेक्ट्रिक शवदाह गृह में जलाएँ: शिया वक्फ बोर्ड चीफ रिजवी

कोरोना वायरस के संक्रमण के साथ कई किस्म की भ्रांतियाँ और अफवाहें भी तेजी से फैल रही हैं। कुछ मुस्लिम धर्म गुरु सोशल मीडिया पर कोरोना से बचने के लिए ताबीज पहनने की सलाह दे रहे तो कोई कबूतर से संक्रमण दूर रखने के नुस्खा बता रहा। इन नुस्खों के बीच उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने संक्रमण का प्रसार रोकने को लेकर समुदाय विशेष को एक बड़ी सलाह दी है।

रिजवी ने कहा है कि अगर कोरोना वायरस से किसी मुस्लिम व्यक्ति की मौत हो जाती है तो उसे कब्रिस्तान में दफनाने की जगह उसे शव को जलाकर उसका अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए। इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया है कि अगर उस शव को दफनाया जाता है तो कोरोना वायरस के फैलने की आशंका बनी रहती है। बता दें कि शवदाह की परंपरा हिन्दुओं में है।

रिजवी ने एक विडियो जारी करते मुस्लिमों से अपील की है कि कोरोनो वायरस से मरने वाले मरीज को दफनाने की जगह इलेक्ट्रॉनिक शवदाह गृह में अंतिम संस्कार करें। रिजवी ने कहा कि इस तरह से अंतिम संस्कार करने से वायरस जल जाएगा और इसे फैलने से रोकने में मदद मिलेगी।

विडियो जारी कर उन्होंने कहा है, “अगर किसी मुस्लिम की मौत कोरोना वायरस से हो जाती है, तो मरीज के परिवार को मृतक को दफनाना नहीं चाहिए। इलेक्ट्रिक शवदाह गृह में उसका अंतिम संस्कार करना चाहिए। इस तरह से मृतक के शरीर का वायरस जलकर पूरी तरह से खत्म हो जाएगा। अगर महामारी अधिक फैलती है, तो शिया वक्फ बोर्ड इस बारे में विचार करेगा कि अपने नियंत्रण वाले कब्रिस्तानों में कोरोना पीड़ित मरीजों को दफनाने की इजाजत दी जाए या ना दी जाए।”