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बांग्लादेश से आए छात्रों ने कोरोना टेस्ट से किया इनकार, श्रीनगर हवाई अड्डे पर की तोड़फोड़

देश में कोरोना के बढ़ते प्रकोप की रोकथाम के लिए सरकार तमाम तरह की पाबंदियाँ लगा रही है। विदेशों से आने वाले यात्रियों की एयरपोर्ट पर ही जाँच हो रही। लेकिन गुरुवार को बांग्लादेश से पहुँचे कुछ छात्रों ने श्रीनगर में कोरोना की जाँच कराने से इनकार कर दिया। छात्रों ने न सिर्फ विरोध किया बल्कि श्रीनगर एयरपोर्ट के रिसेप्शन में तोड़फोड़ भी की। इसके बाद छात्रों को पुलिस ने हिरासत में लेकर कोरोना जाँच के लिए नियत केन्द्रों में भेज दिया।

दरअसल गुरुवार देर रात को बांग्लादेश से श्रीनगर हवाईअड्डे पर 160 से अधिक छात्र जैसे ही पहुँचे, वहाँ मौजूद अधिकारियों ने उनसे जाँच में सहयोग करने की अपील की। इस पर छात्रों ने अपनी जाँच कराने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद छात्र हवाई अड्डे पर हंगामा करने लगे। छात्रों ने रिसेप्शन में सामान को बिखरते हुए वहाँ लगी काँच की खिड़कियों को तोड़ दिया। छात्रों के साथ वहाँ मौजूद उनके अभिवावकों ने भी हंगामा करना शुरू कर दिया।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि बांग्लादेश से कुछ छात्र श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पहुँचे थे। बडगाम जिला मजिस्ट्रेट के निर्देशानुसार कोरोना वायरस संक्रमण के मद्देनजर एहतियात के तौर पर इन छात्रों को पृथक रखा जाना था, जिसका छात्रों ने विरोध किया। हालाँकि बाद में सभी को पहले से नियत जाँच केन्द्र में भेज दिया गया। आपको बता दें कि बीते दिन ही पाकिस्तान में पढ़ाई करने के लिए गए 14 कश्मीरी छात्र भारत लौट आए। बाघा बॉर्डर से भारत आए सभी छात्रों को कोरोना जाँच के लिए सेंटर में भेज दिया गया। हालांकि ट्विटर पर लोगों ने कश्मीरी छात्रों के पाकिस्तान में पढ़ाई पर सवाल खड़ा करते हुए लिखा था कि पाकिस्तान में पढ़ाई के लिए कौन जाता है भाई? इतना ही नहीं दुबई से लौटे चार युवकों ने भी कोरोना की जाँच न कराने के लिए कर्नाटक में डॉक्टरों को धमकाया था। इनका कहना था कि इस्लाम मेडिकल टेस्ट की इजाजत नहीं देता। इस बीच केरल के क्वारेंटाइन से फरार हुआ व्यक्ति बोगाईगॉंव रेलवे स्टेशन पर पकड़ा गया। वह असम का रहने वाला है। पकड़े जाने के बाद उसे रेलवे हॉस्पिटल के आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है।

गौरतलब है कि देश में कोरोना वायरस के चलते देश में गुरुवार को चौथी मौत हो गई थी। वहीं वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ कर 173 हो गई है। इसकी रोकथाम के लिए राज्य अपने-अपने स्तर पर भी पाबंदियाँ लगा रहे हैं। गुरुवार रात को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की अपील की थी।

21/12/12 को निर्भया ने कही थी फाँसी, 20/03/20 को 4 दरिंदे सूली पर: 36 साल बाद एक साथ 4 को फाँसी

16 दिसंबर 2012: दिल्ली में एक चलती बस में निर्भया के साथ गैंगरेप हुआ।
21 दिसंबर 2012: एसडीएम उषा चतुर्वेदी सफदरजंग हॉस्पिटल जाकर निर्भया का बयान लेती हैं। बकौल चतुर्वेदी- मैंने उससे पूछा कि तुम क्या चाहती हो? उसका पहला जवाब था फॉंसी। फिर थोड़ी देर रुककर बोली, नहीं… फॉंसी नहीं… सभी को जिंदा जला देना चाहिए।
20 मार्च 2020: तड़के दोषी मुकेश, अक्षय, विनय और पवन को तिहाड़ जेल में फॉंसी पर लटका दिया गया।

फॉंसी पर लटकाए गए इन दरिंदों के अलावा पूरे देश को झकझोर देने वाले इस मामले में दो और भी गुनहगार थे। मुख्य आरोपी राम सिंह ने 11 मार्च 2013 को तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी। एक नाबालिग था जिसे दिसंबर 2015 में बाल सुधार गृह से रिहा किया गया था। मुकेश, अक्षय, विनय और पवन को इस मामले के लिए विशेष तौर पर गठित त्वरित अदालत ने 14 सितंबर 2013 को फॉंसी की सजा सुनाई थी। इसके बाद यह मामला शीर्ष अदालत तक गया। गुनहगारों को बचाने के लिए उनके वकीलों हर दॉंव आजमाया। यहॉं तक कि 19 मार्च की रात भी फॉंसी टालने की हरसंभव कोशिशें हुई।

इस मामले में तीन डेथ वारंट पर किसी न किसी वजह से फाँसी पर रोक लगी लेकिन कोर्ट के चौथे डेथ वारंट पर चारों दोषियों को फाँसी की सजा दी गई। दोषियों के फाँसी के फंदे पर लटकाए जाने के बाद निर्भया की माँ आशा देवी ने कहा कि आज उन्हें इंसाफ मिला है, लेकिन उनकी लड़ाई जारी रहेगी। आशा देवी ने कहा, “हमारा सात साल का जो संघर्ष है, वो आज काम आया है। हमें देर से ही सही लेकिन इंसाफ जरूर मिला है। इसके लिए देश की सरकार, राष्ट्रपति और अदालतों को धन्यवाद। हमारी बेटी के साथ जो हुआ उससे पूरा देश शर्मसार हुआ था, लेकिन अब जब इन दोषियों को फाँसी दी गई है, तो दूसरी बेटियों को भी इंसाफ मिलने की उम्मीद जागी।”

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि 20 मार्च को वो निर्भया दिवस के रूप में मनाएँगीं। इंसाफ मिलने के बाद आशा देवी ने निर्भया की तस्वीर को प्रणाम किया, गले लगाया और कहा, “बेटी अब आपको न्याय मिल गया है।” उन्होंने कहा, “आज हमें न्याय मिला, यह दिन देश की बेटियों को समर्पित है। मैं न्यायपालिका और सरकार को धन्यवाद देना चाहूँगी। हमारी बेटी अब जिंदा नहीं है और लौटेगी भी नहीं। हमने यह लड़ाई शुरू की थी, जब वो हमें छोड़कर चली गई। यह संघर्ष उसके लिए था, लेकिन हम भविष्य में अपनी बेटियों के लिए इस लड़ाई को जारी रखेंगे।”

इसके साथ ही निर्भया के पिता बद्रीनाथ ने इस फैसले पर खुशी जताते हुए कहा, “आज हमारी जीत हुई है और यह सब मीडिया, सोसायटी और दिल्ली पुलिस की वजह से संभव हो सका। आप हमारी मुस्कुराहट देखकर समझ सकते हैं कि हमारे दिल में क्या चल रहा है।”

हालाँकि निर्भया के दोषियों के वकील ने अंत तक अपनी कोशिशें जारी की। इस कोशिश में पहले हाईकोर्ट फिर सुप्रीम कोर्ट में इस फाँसी को टालने की कोशिश की लेकिन वो काम नहीं आई। फाँसी का इंतजार कर रहे चारों दोषियों की फाँसी पर रोक लगाने के लिए उनके वकील एपी सिंह देर रात सुप्रीम कोर्ट पहुँचे थे। सुनवाई से पहले एपी सिंह ने कोर्ट के बाहर धरना भी दिया। फिर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पवन गुप्ता के नाबालिग होने की दलील को खारिज करते हुए उसके वकील एपी सिंह से कहा कि आप बार-बार स्कूल सर्टिफिकेट की दलील देकर दोषी के नाबालिग होने का दावा क्यों करते हैं। कोर्ट ने एपी सिंह से पूछा कि किस आधार पर वो राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज किए जाने को चुनौती दे रहे हैं। इसके अलावा वो जो दलीलें दे रहें हैं वे सब पुरानी दलीलें हैं, जिन्हें वो पहले रख चुके हैं। 

गौरतलब है कि इससे पहले 1993 के मुंबई सीरियल धमाके के दोषी याकूब मेमन की याचिका को जब राष्ट्रपति की ओर से खारिज कर दिया गया था, तब 30 जुलाई 2015 की आधी रात को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खुला था। उस वक्‍त वकील प्रशांत भूषण सहित कई अन्य वकीलों ने देर रात को इस फाँसी को टालने के लिए अपील की थी।

इससे पहले 25 अक्टूबर 1983 को पुणे की यरवदा जेल में चार लोगों को एक साथ फॉंसी दी गई थी। इनलोगों ने जनवरी 1976 से मार्च 1977 के बीच 10 लोगों की सिलसिलेवार तरीके से हत्या की थी। दुष्कर्म के मामले में आखिरी फॉंसी 14 अगस्त 2004 को धनंजय चटर्जी को अलीपुर सेंट्रल जेल में दी गई थी। वह कोलकाता में 14 साल की छात्रा से दुष्कर्म कर उसकी हत्या करने का दोषी था। इसके बाद 3 आतंकियों अफजल गुरु, अजमल कसाब और याकूब मेनन को सूली पर लटकाया गया था।

जनता कर्फ्यू: राजदीप पूछ रहा पुलिस तो नहीं होगी घरों के बाहर? नमाज पर हुआ चुप, रामनवमी पर झूठ

कोरोना वायरस को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज शाम आठ बजे देशवासियों के नाम सन्देश दिया जिसमें उन्होंने घर से बाहर ना निकल पाने की स्थिति में गरीब कामगारों की सैलेरी जारी रखने से लेकर नवरात्रि को लेकर सन्देश दिए। लेकिन इस सब में पीएम मोदी के भाषण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू था- जनता कर्फ्यू!

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 22 मार्च को सुबह 7 से रात नौ बजे तक‍ जनता कर्फ्यू कि बात कही। पीएम मोदी ने कहा कि मैं आज प्रत्येक देशवासी से एक और समर्थन माँग रहा हूँ। यह समर्थन जनता-कर्फ्यू लगाने के लिए था।

इस भाषण के बाद हर किसी ने अपनी-अपनी तरह से इस पर प्रतिक्रिया दी। सबसे आश्चर्यजनक यह देखना था कि ट्विटर पर अक्सर सरकार विरोधी एजेंडा और हिंदुत्व विरोधी अभियानों को लेकर सक्रीय होने वाले कुछ चुनिन्दा लोगों ने भी प्रधानमंत्री मोदी की इस माँग का समर्थन किया। लेकिन कुछ लोग अपनी घृणा की विचारधारा में इतना गहरा उतर चुके हैं कि वो कोरोना जैसी महामारी के बीच भी अपनी घृणा और सरकार विरोधी प्रोपेगेंडा के लिए जगह बना ले रहे हैं। इन्हीं में से एक नाम है इण्डिया टुडे समूह के तथाकथित पत्रकार राजदीप सरदेसाई का। ये वही राजदीप सरदेसाई है जिसे कुछ दिन पहले ही NDTV के पत्रकार रवीश कुमार ने ‘दुकानदार’ कहकर सम्बोधित किया था।

राजदीप ने जनता कर्फ्यू के आह्वाहन का मजाक बनाते हुए फ़ौरन बयान दिया कि क्या जनता कर्फ्यू के दिन पुलिस उसके घर के आगे मौजूद रहेगी? दरअसल, स्पष्ट सी बात यह है कि राजदीप जैसे लोग सदियों से चली आ रही सत्ता की गुलामी के कारण स्वयं को इतना ज्यादा सुरक्षित महसूस करने लगे हैं कि कोरोना जैसी किसी महामारी का भी ये लोग उपहास बनाते नजर आते हैं।

यह वही सभ्रांत मीडिया गिरोह है, जिसने 2014 से ही निरंतर मोदी सरकार द्वारा गरीबों के कल्याण के लिए लाई हर योजना का उपहास किया है और नतीजा यही रहा कि राजदीप हर समय थूक आसमान में उछालते ही नजर आए और वो कहाँ जाकर गिरा यह बताने की ज़रूरत नहीं है।

एक ओर जब प्रधानमंत्री मोदी जनता कर्फ्यू को उन लोगों के लिए समर्पित कर रहे हैं, जो कोरोना की वैश्विक त्रासदी के बीच भी बेहद समर्पण के साथ और सेवा भाव से लोगों का उपचार कर रहे हैं और उनकी जरूरतों का ध्यान रख रहे हैं, वहीं राजदीप सरदेसाई को यहाँ जनता कर्फ्यू एक खतरा नजर आता है। हालात तो यह हो चुके हैं कि राजदीप सरदेसाई इस जनता कर्फ्यू के विरोध में 22 मार्च को बदहवास हालात में सड़क पर दौड़ न लगाने लगें कि देखो मोदी ने कहा लेकिन कोरोना मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। ये ऐसा ही है जैसे मोदी अगर जहर को प्रतिबंधित कर दें तो राजदीप जैसे ही कुछ गिने-चुने लोग ख़ुशी-ख़ुशी जहर पीना स्वीकार कर लें।

अयोध्या में रामनवमी के आयोजन को लेकर प्रपंच

यही नहीं रामनवमी पर राजदीप जैसे ही प्रपंचकारियों द्वारा फैलाए जा रहे झूठ पर पूरी चर्चा करने कि हिम्मत रखने वाले इसी राजदीप ने रामनवमी के आयोजन को लेकर भी बहस छेड़ी और इसे रामनवमी बनाम शाहीन बाग़ जैसे मुहावरों में ढालने की कोशिश भी की।

शो के दौरान जब राजदीप सरदेसाई से भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने जुमे की नमाज को लेकर सवाल किया तो राजदीप ने यह कहकर टाल दिया कि इसे शाहीन बाग़ बनाम रामनवमी मत बनाइए। आखिरी बार जब राजदीप सरदेसाई कोई मुद्दा अपनी इस धूर्त हंसी के साथ क्लोज नहीं कर पाए थे, तब वो अमेरिका के मेडिसन स्क्वायर में लोगों से घूँसा खा रहे थे। ख़ास बात यह है कि पुलिस वहाँ पर भी मौजूद नहीं थी।

इन्हीं कुछ सोशल मीडिया से उपजे हुए लिबरल वर्ग ने हाल ही में अयोध्या में रामनवमी को लेकर भी जमकर प्रोपेगंडा किया और आज राजदीप सरदेसाई भी उसी प्रोपेगंडा को दोहराते हुए देखे गए हैं। दरअसल, राणा अयूब जैसे इन्टरनेट विचारकों ने ट्विटर पर इस खबर को खूब तत्परता से फैलाया कि कोरोना के आतंक के बावजूद अयोध्या में 25 मार्च से 2 अप्रैल के बीच रामनवमी के मेले का आयोजन किया जा रहा है। इस फर्जी खबर का खंडन खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 16 मार्च को ही यह स्पष्ट कर दिया था कि 20 मार्च को ही इस बारे में सभी अधिकारियों से बातचीत के बाद कोई फैसला लिया जाएगा।

लेकिन राणा अयूब, ध्रुव राठी और राजदीप जैसे सर से पाँव तक घृणा और सत्ता विरोधी अभियान में जुटे लोगों को अपनी विश्वसनीयता से फर्क पड़ना बंद हो चुका है और राजदीप जैसे लोग इसे शर्म के बजाए विशेषाधिकार समझकर इसका खुलकर ‘उपयोग’ करते जा रहे हैं।

फिलहाल आवश्यक यह है कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 22 मार्च को आयोजित किए जा रहे जनता-कर्फ्यू का हिस्सा बनें और एक-दूसरे को एहसास दिलाएँ कि इस वैश्विक आपातकाल की घड़ी में सभी लोग अपने वैचारिक विरोधाभाषों से दूर होकर एक दूसरे के साथ हैं। वास्तव में ‘वर्क फ्रॉम होम’ और लॉकडाउन जैसी स्थिति का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव समाज के सबसे निचले वर्ग पर पड़ता है।

इसी बात को समझते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने आज के अपने भाषण में इन्हीं कुछ बिन्दुओं से देशवासियों को अवगत करवाया और कहा कि जनता कर्फ्यू के दिन दूसरों की सेवा कर रहे लोगों का 22 मार्च की शाम को 5 बजकर 5 मिनट तक करतल ध्‍वनि के साथ आभार करें। ‘सेवा परमो धर्म’ के हमारे संस्कारों को मानने वाले ऐसे देशवासियों के लिए हमें पूरी श्रद्धा के साथ अपने भाव व्यक्त करने होंगे। आप स्वयं सोचिए, देश के प्रधानमंत्री से ऐसा संदेश सुनने के बाद भी क्या किसी प्रकार की आपसी घृणा के लिए जगह शेष रह जाती है?

COVID-19: दिल्ली के लोकनायक अस्पताल से फरार हो गए 6 कोरोनावायरस के संदिग्ध, पुलिस-प्रशासन तलाश में जुटी

देश में बढ़ते कोरोना मामलों के बीच कोरोना की दहशत और मूर्खता की नजीरें ही पेश करते हैं वो लोग जो इस वायरस से पीड़ित होने या संदिग्ध होने के बावजूद भी इलाज न करवा कर अस्पतालों से, एयरपोर्ट्स से भाग खड़े होते हैं, और इस तरह न सिर्फ खुद को बल्कि सैंकड़ों मासूमों को भी इस घातक संक्रमण के सापेक्ष खतरे में डाल देते हैं। ऐसा ही वाकया दिल्ली में गुरुवार को सामने आया जब लोक नायक जय प्रकाश अस्पताल से कोरोना के 6 संदिग्‍ध मरीज भाग गए। खबरों के अनुसार कोरोना के लक्षण मिलने के बाद इन सभी को अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में रखा गया था। जहाँ से ये सभी गायब हो गए हैं और अब पुलिस इन सभी की तलाश में लगी है।

इस तरह की समाज विरोधी हरकतों के खिलाफ चेतावनी देते हुए इससे कुछ देर पहले ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऐलान किया था कि कोरोना से संक्रमित या ऐसे संदिग्ध लोगों के यूँ भाग जाने पर उनके खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार शाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दिल्ली के सभी रेस्‍त्रां को 31 मार्च तक बंद करने की घोषणा की भी थी। इसके साथ ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने लोगों से कोरोना वायरस को लेकर एहतियात रखने, सतर्कता बरतने की भी अपील की थी।

अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केजरीवाल ने अपने पुराने निर्णय जिसमें एक जगह पर 50 से ज्यादा लोगों के जुटने पर प्रतिबंध था, को और सख्त करते हुए इस सीमा की समीक्षा करते हुए इसे 20 कर दिया है। उन्होंने इसका कारण कोरोना से बढ़ता हुआ खतरा बताया। अब से दिल्ली में 20 से ज्यादा लोग एक जगह पर जमा नहीं हो सकेंगे। साथ ही केजरीवाल ने अपने निर्णय को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह प्रतिबंध सभी प्रकार के राजनीतिक और गैर राजनीतिक आयोजनों पर लागू होगा।

कोरोना से बचाव के लिए दिल्ली सरकार के प्रयासों को प्रेस से साझा करते हुए केजरीवाल ने कहा कि हम विदेशों से दिल्ली पहुँच रहे लोगों को चिन्हित कर रहे हैं और उनके हाथों पर स्टैंप लगा रहे हैं, साथ ही उन्हें कुछ दिनों के लिए घरों में ही रहने को भी बोला जा रहा है। उन्होंने बताया कि अगर विदेश से आए लोग अपने घरों से बाहर निकलते हैं तो उनके खिलाफ सरकार सख्त कदम उठाएगी और उन पर मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।

दिल्ली में कोरोना की स्थिति पर सीएम ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेन्स में बताया कि दिल्ली में अब तक कोरोना के 10 मामले पॉजिटिव मिले हैं। जिनमें से 1 की मौत हुई, वहीं तीन लोग इस बीमारी से बाहर निकल चुके हैं, जबकि 6 मरीजों की हालत पूरी तरह ठीक है। कोरोना संक्रमण को रोकने की दिशा में उठाए गए कदमों पर उन्होंने कहा कि हम सभी बस अड्डों, मेट्रो स्टेशन आदि को लगातार सैनिटाइज कर रहे हैं।

याद रहे कि इससे पहले दिल्ली सरकार ने 31 मार्च तक सारे स्कूल, कॉलेजों और दिल्ली यूनिवर्सिटी को छात्रों और कर्मचारियों के लिए बंद करने का निर्देश देने के साथ-साथ जितना संभव हो सके घर से काम करने की अपील की थी।


निर्भया केस: मदर इंडिया जैसी माँ की दरकार रखता है समाज, ऐसी माँ की नहीं जो बलात्कारी बेटे को खिलाना चाहती है पूड़ी-सब्जी

साल 2012 में निर्भया के साथ हुई बर्बरता सोचकर भी रूह काँप जाती है। रात में घर से निकलते हुए डर लगता है और कोई मदद के लिए हाथ बढ़ाए तो उस पर शक होता है। उस रात जो कुछ भी हुआ और जो कुछ भी निर्भया ने झेला, उसे जानने के बाद शायद ही कोई ऐसा शख्स हो, जो उन दरिंदों के लिए सजा-ए-मौत न माँगे। आखिर कौन चाहता है ऐसे दानवों के बीच में रहना, जो एक लड़की के यौनांग में व्हील जैक घुसा दें और जब बाद में इस क्रूरता की वजह पूछी जाए तो जवाब दें कि अगर वो उस रात विरोध नहीं करती तो वे इस हद तक नहीं जाते।

सोचिए, ऐसी मानसिकता के लोग अगर आसपास हों, तो कितनी देर लगेगी हर दूसरी लड़की को निर्भया बन जाने में और कितनी देर लगेगी हर वहशीपन को जस्टिफाई करने में…। पूरे आठ साल तक हमारी चरमराई व्यवस्था ने निर्भया को इंसाफ के लिए इंतजार कराया। ये अंतराल इतना लंबा था कि 6 में से एक दोषी ने तो खुद आत्मग्लानि में मौत को गले लगा लिया और 1 को नाबालिग होने का फायदा मिल गया। लेकिन बाकी चार के लिए निर्भया की माँ फाँसी की गुहार लगाती रहीं और रो रोकर न्यायव्यवस्था से इंसाफ माँगती रहीं।

8 साल तक इस मामले में सुनवाई चली। पूरे 8 साल। इस बीच दोषियों की ओर से याचिका पर याचिका दाखिल हुईं। कभी मानवता को शर्मसार करने वाले उनके वकील ने उन्हें बचाने के लिए नाबालिग कार्ड खेला तो कभी मानसिक बीमारी वाला। कभी इंद्रा जय सिंह जैसी बड़ी वकील ने निर्भया की माँ से चारों को माफ करने की खुद गुजारिश की। मगर, आज जब सभी युक्तियाँ खत्म हो गई और दरिंदों को फाँसी पर लटकाने की अंतिम तिथि आई, तो एक नया ड्रामा शुरू हुआ।

ये ड्रामा दोषियों के घरवालों की ओर से देखने को मिला। हालाँकि, दोषियों के सजा के दिन नजदीक आते आते ये सब बहुत पहले से शुरू हो चुका था। लेकिन पटियाला कोर्ट के बाहर आज हद पार हो गई। आज यहाँ दोषी अक्षय कुमार की पत्नी ने अपने पति की सजा को रुकवाने के लिए रो-रोकर खुद को चप्पलों से मारा और बार-बार बोलती रही कि उसे नहीं जीना है, उसे मार दो। इसके बाद निर्भया के गुनहगार विनय शर्मा की माँ ने भी अपने बेटे को आखिरी बार अपने हाथ से सब्जी,पूड़ी और कचौड़ी खिलाने की इच्छा जताई। इससे पहले एक दोषी की बहन को बैनर लिए ये सवाल पूछते देखा गया था कि अगर उसके भाई को फाँसी हो गई तो उससे शादी कौन करेगा?

विचार करिए…ये सब उन लोगों की हरकतें हैं जिन्हें मालूम है कि उनके बेटे ने, उनके पति ने, उनके भाई ने कैसे एक बच्ची की आत्मा के परखच्चे उड़ाए, उसके शरीर को तहस-नहस किया..।आज विनय कुमार की माँ इच्छा जताती हैं कि उन्हें अपने बेटे को पूड़ी-सब्जी खिलाना है। उस बेटे को जिसे कल फाँसी होनी हैं, क्योंकि उसने 8 साल पहले एक लड़की के चीथड़े उड़ाने में सहयोग दिया था। उस बहन को अपने भाई के साथ आज भी रहना है जिसे मालूम है कि उसका भाई उस लड़की का दोषी है, जिसकी माँ के आँख से आँसू भी अब सूख चुके हैं, जो बार-बार नृशंस वारदात के बदले सिर्फ़ सजा-ए-मौत माँग रही है।

याद करिए हैदराबाद में रेप पीड़िता के दोषियों में से एक की माँ के शब्द…। जिन्होंने अपने बेटे के एनकाउंटर पर न अपनी परवरिश को कोसा, न अपने बच्चे की गलती को, न उसकी मानसिकता को… उन्हें बस अपने बेटे के जाने का दुख हुआ और उन्होंने डॉ प्रीति को मीडिया के सामने गाली दे डाली। उनके लिए अपशब्द इस्लेमाल किए। क्या वो नहीं जानती होंगी कि उनके बेटे ने आखिर क्या किया था और डॉ प्रीति की क्या गलती थी? क्या औरत होने के बाद भी उन्हें नहीं समझ आया होगा कि उनके बेटे ने कितना घिनौना पाप किया है? या उनकी आँख पर ममता की पट्टी इतनी कसके बँधी रही होगी कि मानवता का हर अंश उनके भीतर से खत्म हो गया होगा।

हम हर ऐसी वारदात के बाद कैंडल मार्च करते हैं। दरिंदों को फाँसी देने की गुहार लगाते हैं। हैशटग चलाते हैं। निंदा करते हैं। न्याय प्रशासन को कोसते हैं। लेकिन एक काम जो हम करना भूल जाते हैं वो होता है ऐसी महिलाओं की सोच को सुधारना, जो कहने सुनने के लिए तो बलात्कार को बुरा मानती हैं, लेकिन जब किसी लड़की का दोषी उनके अपने घर का कोई पुरुष निकलता है तो वह हर कोशिश करके उसे बचाने में लग जाती हैं, फिर चाहे कोई उनके अस्तित्व पर ही क्यों न सवाल उठा दे। ऐसी महिलाएँ ही महिलाओं के लिए घातक होती हैं।

आज, पुनीता देवी समेत सभी दोषियों के घर की महिलाओं को ये सब करते देखना ज्यादा हैरान करने वाला नहीं है। क्योंकि ये प्रतिक्रियाँ आज के समय में बहुत सामान्य प्रतिक्रियाँ हैं। जिन्हें समाज ने गढ़ा है अपने लिए। जिन्हें उन पुरुषों ने बढ़ावा दिया है अपने लिए, क्योंकि उन्हें मालूम है कि वे आज नहीं कल ऐसी हरकत जरूर करेंगे और उस समय उनकी माँ-बहने ही उनके चरित्र के गुणगान करके उन्हें बचाएँगी, और साबित करेंगी कि दूसरे लड़की पर ढाया गया जुल्म मात्र एक गलती साबित थी, अपराध नहीं।

कहना गलत नहीं है ये सब एक लम्बी प्रक्रिया का नतीजा है, जिसे समाज ने पोसा है और अब ये महिलाओं (ग्रामीण महिलाओं) में इस तरह बस गई है कि वे जानते-समझते हुए भी खुद को इससे दूर नहीं कर सकती और अपराधी बनती जाती हैं- कभी भाई को बचाने के लिए, कभी पिता को बचाने के लिए, तो कभी बेटे को बचाने के लिए… आज का समय एक ऐसा समय है जब समाज को मदर इंडिया फिल्म में दर्शाई गई माँ की जरूरत है। जिसने अपने गाँव की बेटी की रक्षा के लिए अपने बेटे को गोली मारी थी। न कि ऐसी माँ की, जो सबकुछ जानते हुए ममता की आड़ में दरिंदों का बचाव करती हैं और अंत समय में उन्हें पूड़ी सब्जी खिलाने की बात करती है।

ईरान से सटे पाकिस्तान में कोरोना बनी आफत: जाँच के लिए निजी अस्पताल वसूल रहे 9000 रूपए, अब तक 300 पॉजिटिव, 2 की मौत

ईरान के पड़ोसी होने के कारण पाकिस्तान में भी कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ना शुरू हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान में अब तक कोरोना से संक्रमित लोगों की गिनती 301 पार कर चुकी है, जिसमें दो मरीजों की मौत भी हो चुकी है। ये दोनों मौतें पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में होने की खबर है। पाकिस्तान का सिंध प्रान्त इस घातक वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित है। ऐसे में यहाँ सरकार ने 30 मई 2020 तक सभी शिक्षा संस्थानों को बंद करने की घोषणा की है। जहाँ 200 से ज्यादा व्यक्तियों के इस वायरस से संक्रमित होने की खबरें आ रहीं हैं। वहीं बलूचिस्तान सूबे से 23 लोगों के कोरोना पीड़ित होने की खबर आई है। जानकार ईरान से सटे होने के कारण पाकिस्तान में कोरोना से संक्रमण के मामले और बढ़ने की आशंका जता रहे हैं।

पाकिस्तान में कोरोना के मामले बढ़ते जाने के साथ-साथ वहाँ जाँच और जरूरी चिकित्सा उपकरणों की होती कमी ने इस समस्या को और भयावह बना दिया है। जहाँ डॉक्टरों ने मास्क, आदि बचाव उपकरणों के अलावा जाँच किट की कमी के चलते काम बंद करने की धमकी दी है। लाहौर में आम लोगों ने शिकायतें की हैं कि निजी अस्पताल कोरोना की जाँच के लिए उनसे 9000 रूपए तक वसूल कर रहे हैं, जिस पर सरकार का कहना है कि कोरोना जाँच मुफ्त कराने का इंतजाम किया गया है।

एक तरफ पाकिस्तान में कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ रही है, निजी अस्पताल लोगों से कोरोना जाँच के लिए अवैध वसूली कर रहे हैं, सेनेटाइजर और मास्क आदि की भी बेहद कमी है वहाँ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का यह दावा कि वे कोरोना को लेकर उठाये गए कदमों की समीक्षा करेंगे जनता को भरमाने वाला और खोखली बयानबाजी ही कही जाएगी।

इमरान ख़ान ने ये कह कर अपने ही देशवासियों को सकते में डाल दिया है कि अगर ज्यादा लोग कोरोना का शिकार हुए तो देश की स्वास्थ्य व चिकित्सा व्यवस्था धड़ाम हो जाएगी। इमरान ने कहा कि जो वृद्ध लोग हैं, सिर्फ उन्हें ही तुरंत मेडिकल अटेंशन देने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि जो भी कोरोना वायरस के शिकार हुए हैं, उनमें से 97% पूरी तरह ठीक हो जाएँगे और 90% लोगों को नार्मल फ्लू की तरह ही बीमारी होगी, जिन्हें डरने की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी चीजें बंद हो गई तो लोग भूखे मरेंगे।

उन्होंने पाकिस्तान को सम्बोधित करते हुए कहा था कि अगर 4-5% मरीज भी बाहर निकले तो हज़ारों संक्रमित होकर बीमार पड़ जाएँगे। उन्होंने लोगों को सलाह दी थी कि वो दौड़ कर मेडिकल टेस्ट कराने हॉस्पिटल न जाएँ। अमेरिका का उदाहरण देते हुए ख़ान ने दावा किया कि किसी भी देश के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि सर्दी-जुकाम के शिकार सभी लोगों का मेडिकल टेस्ट कराया जा सके। अपने ही पीएम की ऐसी सलाह से पाकिस्तानी हैरान हैं।

इस सबके बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कोरोना से प्रभावित देशों की संख्या 166 तक पहुँच चुकी है जिनमें कोरोना से जुड़े दो लाख से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। वहीं कोरोना संक्रमण के चलते मरने वालों की कुल संख्या दुनिया में 8600 से ज्यादा हो चुकी है।

गरीब लोगों से जो सेवाएँ लेते हैं उनके आर्थिक हितों का ध्यान रखें, उन्हें पूरा वेतन दें: PM मोदी

पीएम नरेंद्र मोदी आज कोरोना वायरस को लेकर देश के लोगों को संबोधित कर रहे हैं। दुनियाभर में कोरोना वायरस के बढ़ते मामले और भारत पर भी लगातार मंडराते इसके खतरे के मद्देनजर पीएम मोदी ने जनता को संयम और जागरूकता अपनाने कि सलाह दी है। कोरोना महामारी से उत्पन्न हो रही आर्थिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, वित्त मंत्री के नेतृत्व में सरकार ने एक कोविड-19 इकनॉमिक रिस्पॉन्स टास्क फोर्स के गठन का फैसला लिया है।

COVID-19 Economy Task Force

कोरोनावायरस के संकट को देखते हुए फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण के साथ बातचीत करके COVID-19 Economy Task Force (आर्थिक टास्क फ़ोर्स) बनाने का फैसला किया है। यह हर परिस्थिति का आंकलन करते हुए निकट भविष्य में फैसले लेगी। टास्कफोर्स सभी से सलाह लेकर फैसले लेगा। संकट के इस समय में मेरा आग्रह है कि आप जिन जिन लोगों से सेवाएं लेते हैं उनके आर्थिक हितों का ध्यान रखे। मुमकिन है कि अगर कोई दफ्तर ना पाए या घर ना पाए तो उनका वेतन मत काटिए। ध्यान रखिएगा कि उन्हें भी अपने परिवार को बीमारी से बचाना है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा- “मैं चाहता हूँ कि 22 मार्च, रविवार के दिन हम ऐसे सभी लोगों को धन्यवाद अर्पित करें जो खुद जोखिम उठाकर आवश्यक कामों में लगे हैं, इस महामारी से लड़ने में मदद कर रहे हैं। रविवार को ठीक 5 बजे हम अपने घर के दरवाजे पर खड़े होकर, बालकनी में खिड़कियों के सामने खड़े होकर 5 मिनट तक ऐसे लोगों का आभार व्यक्त करें।

  • इस रविवार यानि 22 मार्च को सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक, सभी देशवासियों को जनता-कर्फ्यू का पालन करना है।
  • कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के खिलाफ लड़ाई के लिए भारत कितना तैयार है, ये देखने और परखने का भी समय है।
  • संभव हो तो हर व्यक्ति प्रतिदिन कम से कम 10 लोगों को फोन करके कोरोना वायरस से बचाव के उपायों के साथ ही जनता-कर्फ्यू के बारे में भी बताए।
  • संकट के इस समय में आपको ये भी ध्यान रखना है कि हमारी आवश्यक सेवाओं पर, हमारे हॉस्पिटलों पर दबाव भी निरंतर बढ़ रहा है।इसलिए मेरा आपसे आग्रह ये भी है कि रूटीन चेक-अप के लिए अस्पताल जाने से जितना बच सकते हैं, उतना बचें
  • ऐसी स्थिति में, जब इस बीमारी की कोई दवा नहीं है तो हमारा खुद का स्वस्थ बने रहना बहुत आवश्यक है। इस बीमारी से बचने और खुद के स्वस्थ बने रहने के लिए अनिवार्य है संयम।

इस नवरात्री पर 9 आग्रह –

कोरोनावायरस का संकट बहुत बड़ा

पीएम मोदी ने कहापहले विश्व युद्ध और दूसरे विश्व युद्ध में जितने लोग प्रभावित नहीं हुए थे, उससे ज्यादा लोग कोरोनावायरस संक्रमण से प्रभावित हैं। कोरोनावायरस को हल्के में नहीं लेना चाहिए। इसकी वजह से पूरी मानव जाति खतरे में पड़ गई है। 

क्यों जरूरी है Isolation?

पीएम मोदी ने कहा कि सरकारी सेवा, अस्पताल और मीडिया की सक्रियता जरूरी है लेकिन जिन लोगों के लिए जरूरी नहीं है वह घर से बाहर ना निकलें। मैं एक और चीज माँगता हूँ कि जनता कर्फ्यू लगाया जाए। 22 मार्च, रविवार को सुबह 7 बजे रात 9 बजे तक जनता कर्फ्यू का पालन करना है। अभी से लेकर रविवार तक इस जनता कर्फ्यू का संदेश लोगों को पहुँचाएँ।

‘पढ़ने के लिए’ गए पाकिस्तान: कोरोना के डर से भारत लौटे इन छात्रों की सच्चाई जानकार आप हैरान रह जाएँगे

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के कारण बुधवार (मार्च 18, 2020) रात पंजाब के अटारी स्थित भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के रास्ते भारत आए 43 पाकिस्तानियों को क्वारंटाइन फैसिलिटी सेंटर में भेज दिया गया है। इन सभी की कोरोना वायरस (Covid-19) की जाँच की जाएगी। 43 में से 29 ऐसे हैं जो दुबई से लौटे हैं, जबकि 14 पाकिस्तान में पढ़ाई कर रहे हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इनमें से 29 लोग वो हैं जो दुबई क्रिकेट मैच देखने गए थे और बुधवार को अटारी वाघा बॉर्डर के रास्ते होकर भारत आए थे। उनके अलावा, पाकिस्तान में पढ़ने वाले चौदह भारतीय छात्र भी देश लौट आए हैं। सिविल सर्जन परीजीत कौर जोहाल ने कहा कि इन 43 में से 29 दुबई से लौटे हैं, जबकि 14 पाकिस्तान में पढ़ाई कर रहे हैं और इन सभी की मेडिकल रिपोर्ट्स राज्य सरकार को भेज दी गई है।

शिक्षा’ के उद्देश्य से पाकिस्तान गए भारतीय छात्रों ने किया सबको हैरान

इन्टरनेट यूजर्स को भारतीय छात्रों के पढ़ाई करने के उद्देश्य से पड़ोसी आतंकवाद के पोषक देश पाकिस्तान जाने की यह खबर सामने आने पर हैरानी हुई और उन्होंने अपना आश्चर्य भी व्यक्त किया।

@imbb_vhc नाम के एक ट्विटर यूजर ने आश्चर्य प्रकट करते हुए लिखा- “पाकिस्तान में पढ़ाई का आखिर क्या मतलब है? आखिर पाकिस्तान पढ़ाई करने कौन जाता है? और वो वहाँ पढ़ते क्या हैं?

इसके जवाब में @sonali_mehta25 ने लिखा है- “शायद धार्मिक पढ़ाई या फिर छात्रों को मिलने वाले वीजा पर कुछ और गतिविधि, गृह मंत्रालय को इन छात्रों पर विचार करना चाहिए। स्लीपर आईएसआई सेल तो है न? बहुत सी सम्भावनाएँ हैं।”

कुछ अन्य ट्विटर यूजर्स ने भी तंज कसते हुए लिखा है कि पाकिस्तान क्या वो लोग भीख माँगने की क्लास लेने जा रहे थे या फिर बम फोड़ने में पीएचडी करने?

भारतीय छात्रों के शिक्षा के उद्देश्य से पाकिस्तान जाने की बात को लेकर ट्विटर पर हर कोई आश्चर्यचकित था। हालाँकि, कुछ ही समय में यह स्पष्ट हो गया कि पाकिस्तान से लौटे ये भारतीय छात्र कश्मीर से हैं। मार्च 16, 2020 की एक हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कश्मीर से 15 छात्रों सहित लगभग 100 भारतीयों को अटारी-वाघा सीमा के माध्यम से पाकिस्तान से भारत लौटने की अनुमति दी गई थी।

नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ कस्टम अधिकारी ने हिंदुस्तान टाइम्स के रिपोर्टर को बताया कि भारत-पाक सीमा पर विशेष स्क्रीनिंग प्रक्रिया से गुजरने के बाद पाकिस्तान में पढ़ रहे लगभग 15 कश्मीरी छात्र भी भारत लौट आए हैं।

उल्लेखनीय है कि सैकड़ों की तादाद में कश्मीरी छात्र पाकिस्तान में पढ़ते हैं। और चूँकि कोरोनो वायरस की महामारी के कारण मौजूदा समय में वहाँ के शैक्षणिक संस्थान बंद हो गए हैं, इसलिए उनमें से अधिकांश छात्र अब घर लौट रहे हैं। उससे पहले, लगभग 60 कश्मीरी छात्र वाघा सीमा पार कर पाकिस्तान से लौटे थे।

मोदी जी ने की संकल्प और संयम की अपील, कहा 22 मार्च को जनता कर्फ्यू का हर नागरिक पालन करें

कोरोना वायरस को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी राष्ट्र को संबोधित कर रहे हैं। इस दौरान वह कोविड-19 (COVID-19) से संबंधित मुद्दों और इससे निपटने के प्रयासों के बारे में जनता को अवगत करा रहे हैं। इससे पहले कोरोना वायरस के चलते देश में लॉकडाउन की अटकलों को प्रधानमंत्री कार्यालय ने सिरे खारिज दिया है। पीएमओ ने कहा था कि पीएम मोदी आज रात आठ बजे अपने संबोधन में लॉकडाउन जैसी कोई घोषणा नहीं करने वाले हैं।

PM मोदी के संबोधन की कुछ महत्वपूर्ण बातें

शुरुआत करते हुए पीएम मोदी ने कहा- “आज मैं एक करोड़ देशवासियों से कुछ माँगने आया हूँ। मुझे आपको कुछ दिन और कुछ सप्ताह चाहिए। अभी तक कोरोना वायरस को लेकर न तो कोई दवा बन पाई और न ही कोई वैक्सीन बन पाई है। ऐसे में हमें सजग रहना जरूरी है।”

  • मैं देशवासियों से जनता कर्फ्यू माँग रहा हूँ। 
  • जब मैं छोटा था तब मैं अनुभव करता था कि गाँव-गाँव ब्लैकऑउट किया जाता था।
  • 60 से 65 वर्षा से अधिक उम्र वाले व्यक्ति घर से बाहर नहीं निकलें। 
  • देशवासियों से आग्रह है कि आने वाले कुछ सप्ताह तक ज्यादा जरूरी हो तभी घर से बाहर निकलें। हो सके तो ऑफिस का काम भी घर से ही करें।
  • 130 करोड़ देशवासियों को संकल्प और दृढ़ करना होगा। इसे रोकने के लिए एक नागरिक के नाते अपने कर्तव्य का पालन करेंगे। हमें यह संकल्प लेना होगा कि स्वयं संक्रमित होने से बचेंगे और दूसरों को भी बचाएंगे।  
  • सरकार की पूरी नजर कोरोना की स्थिति पर है। भारत जैसे 130 करोड़ की जनसंख्या वाले देश पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा यह मानना गलत है। अभी तक विज्ञान कोरोना का इलाज नहीं निकाल पाया है। ऐसी स्थिति में हर किसी की चिंता बढ़नी जरूरी है। अध्ययन में यह बात सामने आई है कि शुरुआती कुछ दिनों के बाद बीमारी का विस्फोट हुए है। कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या तेजी से फैली है।
  • आपसे जब भी जो कुछ मांगा है आपने निराश नहीं किया है। आज मैं 130 करोड़ देशवासियों से कुछ मांगने आया हूं। मुझे आपके आने वाला कुछ सप्ताह चाहिए। आपका आने वाला कुछ समय चाहिए।
  • बीते कुछ दिनों से ऐसा लग रहा है कि हम ठीक है, लेकिन यह सोच सही नहीं है। प्रत्येक भारतीयों का सजग रहना जरूरी है।
  • कोरोना का संकट ऐसा है कि पूरे विश्व को सकट में डाल दिया है।
  • पीएम मोदी के संबोधन से पहले कांग्रेस के नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने आज रात पीएम नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन को लेकर कहा है कि अगर टोटल लॉकडाउन की घोषणा नहीं हुई तो मुझे निराशा होगी।
  • प्रधानमंत्री कार्यालय ने बुधवार को ट्विटर पर यह जानकारी दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस दौरान वह कोविड-19 से जुड़े मुद्दों और उस पर काबू पाने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में बताएंगे।
  • एक अन्य ट्वीट में पीएमओ ने बताया कि प्रधानमंत्री ने कोरोना संकट से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों को लेकर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इसमें भारत की तैयारियों को और पुख्ता करने के तौर-तरीकों पर चर्चा हुई।

बीफ पार्टी आयोजित करने वाले माकपा सांसद को राज्यसभा में कॉन्ग्रेस ने दिया समर्थन, भाजपा नेता ने बताया- गोभक्षकों का रक्षक

बंगाल से माकपा की टिकट पर निर्विरोध राज्यसभा पहुँचे विकास रंजन भट्टाचार्य पर भाजपा के कैलाश विजयवर्गीय के एक ट्वीट से बवाल खड़ा हो गया है। कैलाश विजयवर्गीय ने अपने ट्वीट में कॉन्ग्रेस समर्थित माकपा के नव निर्वाचित सांसद को ‘गौ भक्षकों का रक्षक’ करार दिया। भाजपा नेता ने अपने ट्वीट में कुछ साल पुरानी उस घटना का जिक्र किया जिसमें विकास रंजन भट्टाचार्य ने कोलकाता में बीफ पार्टी का आयोजन किया था। विजयवर्गीय ने माकपा के भट्टाचार्य के बहाने कॉन्ग्रेस पर हमला करते हुए उसे ऐसे व्यक्ति को राज्यसभा पहुँचाने का दोषी कहा जिसने बीफ पार्टी का आयोजन कर हिन्दुओं की भावना को आहत करने का काम किया था।

असल में बंगाल से 4 राज्यसभा उम्मीदवारों को निर्विरोध चुन लिया गया है जिसमें 3 तृणमूल कॉन्ग्रेस के और 1 माकपा के विकास रंजन भट्टाचार्य हैं जिन्हें कॉन्ग्रेस ने समर्थन दिया था। विकास रंजन भट्टाचार्य, कोलकाता के मेयर भी रह चुके हैं। हाल फिलहाल में ये तब चर्चा में आए थे जब देश में बढ़ती कथित “असहिष्णुता” के खिलाफ प्रदर्शन करने के दौरान कोलकाता में एक बीफ पार्टी आयोजित की गई थी। कोलकाता के पूर्व मेयर विकास रंजन भट्टाचार्य इस विरोध प्रदर्शन के महत्त्वपूर्ण हिस्सा थे जिसमें लोगों के मुँह में बीफ खिलाई गई थी। इस आयोजन के समय आयोजनकर्ताओं में से एक विकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा था कि बहुलतावाद भारत का प्राण है और इस आयोजन का विरोध करने का उद्देश्य भारत के उसी तत्व की रक्षा करना है। उस समय कई वामपंथियों ने भी इस बीफ पार्टी का विरोध करते हुए कहा था कि इस तरह की पार्टियाँ गैरजरूरी हैं और समाज के एक वर्ग की धार्मिक भावनाएँ आहत करने वाली हैं।

ऐसे व्यक्ति को जो सड़क पर बीफ पार्टी आयोजित करने के लिए कुख्यात रह चुका है, को कॉन्ग्रेस का समर्थन, खुद कॉन्ग्रेस पर कई सवाल खड़े करता है जो अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है।