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आतंकी हाफिज सईद के नाम से अलीगढ़ में जारी हुए फतवे: साम्प्रदायिक तनाव बढ़ाने का था लक्ष्य, FIR दर्ज

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में पुलिस ने मुम्बई हमले के मास्टरमइंड आतंकी हाफिज सईद के नाम से जारी कथित फतवे के सिलसिले में अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। हाफिज सईद संयुक्त राष्ट्र में सूचित वैश्विक आतंकी है जिसके सिर पर अमेरिका ने एक करोड़ डॉलर का इनाम रखा हुआ है। जिले के एसपी अरविन्द कुमार ने मीडिया को बताया कि इस मामले की पड़ताल हम गहराई से कर रहे हैं। एसपी अरविन्द कुमार ने बताया कि जो पर्चा बाँटा गया है वह काफी आपत्तिजनक है और जिले में साम्प्रदायिक तनाव बढ़ाने वाला हो सकता था।

पुलिस ने लोगों के बीच डर फैलाने के लिए आईपीसी की दफा 505 (1)(b) और पब्लिक सर्वेंट के दिए आदेश की नाफ़रमानी के लिए दफा 188 के तहत कोतवाली पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया है। एफआईआर के अनुसार, बड़ी संख्या में पैम्प्लेट्स मिले हैं जो इस बात का साफ़ संकेत करता है ये शहर का माहौल बिगड़ना चाहते थे।

याद रहे कि अलीगढ़ के ऊपरकोट इलाके में 23 फरवरी के बवाल के दौरान बाबरी मंडी में इलाके में सांप्रदायिक विवाद हुआ था। जिसमें एक व्यक्ति की गोली लगने से मौत हो गई थी जिसके बाद से बाबरी मंडी में रह रही हिन्दू आबादी बेहद डरी सहमी रही थी। 11 मार्च को जुम्मे की नमाज से पहले स्थितियाँ ऐसी बनीं थीं कि मुस्लिम फ़सादियों के डर से लोगों ने रातभर जागकर काटीं। इसी दौरान यहाँ के बजरिया क्षेत्र में वो पर्चे बाँटे गए थे, जिसे आतंकवादी हाफिज सईद का फतवा कहा गया था और जिसके संबंध में पुलिस जाँच कर रही है। मीडिया में आई खबरों के अनुसार बाँटे गए पर्चे में कहा गया था कि इस पत्र को भारत की साढ़े तीन लाख मस्जिद में जुमे के दिन पढ़ाया गया है। खबरों के अनुसार इस पर्चे में प्रधानमंत्री से लेकर देश के लिए आपत्तिजनक बातें लिखी हुईं थीं। यह पर्चे बजरिया के अलावा प्रमुख दुकानों पर भी बाँटे गए थे।

‘सुन लो मोदी, हमारी माँ-बहनों ने टीपू सुल्तान को जन्म दिया है और तुम…’ – शाहीन बाग़ से हिंसा की अपील

देश भले युद्ध स्तर पर कोरोना वायरस संक्रमण से बचने में दिन-रात एक किए हुए हो, शाहीन बाग अभी भी पब्लिक सेफ्टी पर दी जा रही सारी सलाहों को धता बता झूठ, घृणा और डर की खेती में मशगूल है। ‘जामिया वर्ल्ड’ नामक फेसबुक पेज ने एक वीडियो अपलोड किया है। यह वीडियो इस बात की बानगी है कि कैसे कुछ लोग नियम, व्यवस्था, कानून और सरकारी एजेंसियों की हरेक सलाह की नाफ़रमानी के लिए कटिबद्ध हैं। कोरोना को देखते हुए पब्लिक गैदरिंग के खिलाफ सरकार ने स्पष्ट गाइडलाइन्स जारी कर रखी हैं, इसके बावजूद न सिर्फ शाहीन बाग़ में धरना बदस्तूर जारी है बल्कि नागरिकता रजिस्टर आदि पर झूठ और घृणा फैलाने से भी बाज नहीं आ रहे।

3 मिनट 30 सेकण्ड्स लम्बे इस वीडियो में वक्ता जिहादी इस्लामिस्ट टीपू सुल्तान का जिक्र करता हुआ कहता है – सुन लो मोदी, हमारी माँ-बहनों ने टीपू सुल्तान को जन्म दिया है और तुम आजादी के 70 बाद हमसे नागरिकता का सबूत माँगते हो, कहते हो कि हमें नागरिकता रजिस्टर की प्रक्रिया से गुजरना होगा। ये लालकिला जहाँ से झंडा फहराते हो, ये क्या तुम्हारे पूर्वजों ने बनवाया? जहाँ ट्रम्प को लेकर गए थे वो ताजमहल क्या तुम्हारे पूर्वजों ने बनवाया था?

ताजमहल, क़ुतुब मीनार और लालकिला पर अपना दावा ठोंकने के बाद बोलने वाला कहता है कि तुमने शौचालय बनवाए हैं, जाओ और वहाँ से झंडा फहराओ।

हिंसा करने की खुलेआम अपील करते हुए यह फ़सादी वीडियो में शाहीन बाग़ में धरने पर बैठे लोगों और बाकी मुस्लिमों को कहता दिखता है कि अगर तुमने बाबरी मस्जिद की शहादत को चुपचाप स्वीकार न कर लिया होता तो ये नौबत न आती, हमारी माँ-बहनों को यूँ सड़कों पर न बैठना पड़ता, आज हमारे भाई-बहनों को बेइज्जत किया जा रहा है अगर अब भी तुम बाहर न निकले तो अगला नंबर तुम्हारा होगा।

एक दूसरे वीडियो में एक दूसरा वक्ता रिलायंस और अडानी के आर्थिक बहिष्कार की अपील करते हुए कहता है कि अगर रिलायंस और अडानी को नुकसान होगा तो वह सीधे मोदी-शाह को हिट करेगा। वह आगे कहता है कि कोरोना-वोरोना सिर्फ एक साजिश है इनकी, जिससे ये हमें हमारे घरों में बंद कर सकें, हमें इससे कुछ नहीं होगा। वो लक्ष्मी की पूजा करते हैं वो डरें कोरोना से, हम लक्ष्मी की पूजा नहीं करते हमें क्या डर है इससे?

ऐसा पहली बार नहीं है कि इस तरह के नफरत फैलाने वाले घृणात्मक वीडियो शाहीन बाग़ से निकल कर आए हों। प्रधामंत्री मोदी और अमित शाह को कत्ल करने से लेकर, हिन्दुओं की कब्र कितनी गहरी खुदेगी तक के वीडियो नागरिकता कानून के विरोध के चलते देश भर के प्रदर्शनों से आते रहे हैं।

याद रहे कि दिल्ली सरकार के कोरोना के फैलाव को रोकने के लिए हर तरह के सामुदायिक जुटाव पर रोक लगा रखी है, इसके बावजूद भी वहाँ प्रदर्शन जारी है जो सरकारी नियम कानून की खुली अवहेलना है।

जिसके खून से इंदिरा को खत लिखा वो भी अकेला, जिसने राहुल की राफेल नहीं उड़ाई वो भी बेगाना

आपने अनिल पाठक का नाम सुना है। शायद नहीं। वे इस वक्त पटना के इंदिरा गॉंधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में डायलिसिस से अपनी खून साफ करवाकर जिंदा रहने की कोशिश कर रहे हैं। गुमनाम से पाठक सन् 80 में पहली बार चर्चा में आए थे। बिहार के कॉन्ग्रेसियों ने उनके खून से चिट्ठी लिखकर इंदिरा गॉंधी को अपनी वफादारी साबित की थी। कालांतर में पाठक दूसरे दलों में रहे। कुछ साल नीतीश कुमार के भी करीब रहे। लेकिन, आज जीवन की लड़ाई अकेले लड़ रहे हैं।

इस घटना के कुछ साल बाद ही सन् 82 में करीब दो महीने के लिए कॉन्ग्रेस असम में एक शख्स को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाती है। नाम: केशब चंद्र गोगोई। पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के पिता। गुरुवार यानी 19 मार्च 2020 को जब पूर्व सीजेआई गोगोई राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ लेने पहुँचे तो विपक्षी सदस्यों ने उच्च सदन में हंगामा किया। शेम-शेम के नारे लगाए। सदन से वॉक आउट किया। 

गोगोई से विपक्ष की नाराजगी को समझने से पहले 1998 में आई फिल्म चाइना गेट के विलेन जागीरा का एक डायलॉग सुनते हैं;

आगे बढ़ते हैं। ऐसा नहीं है कि रंजन गोगोई से कॉन्ग्रेस, लिबरलों और सेकुलरों को पुरानी चिढ़ है। ये बीमारी नई है। 12 जनवरी 2018 को एक ऐतिहासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखने के बाद तो गोगोई इस जमात की आँखों के तारे थे। उनकी चिंता में पूरा जमात दुबला हुआ जा रहा था। आशंका जता रहा था कि नंबर होने के बावजूद उन्हें देश का अगला मुख्य न्यायाधीश नहीं बनने दिया जाएगा। उनके सीजेआई बनने पर कॉन्ग्रेस के इस ट्वीट पर गौर करिए;

फिर ऐसा क्या हुआ कि गोगोई से आज इतनी चिढ़ है? असल, गोगोई के कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण फैसले हुए। राफेल से लेकर अयोध्या मामले तक। लेकिन, इसमें से किसी भी फैसले से जमात को ‘इंसाफ’ होता नहीं दिखा, क्योंकि उनके लिए न्याय का मतलब कानून की किताब से फैसला नहीं है। उनके लिए जस्टिस का मतलब है उनकी मर्जी के अनुसार फैसला। उन्हें उम्मीद थी कि गोगोई मोदी सरकार को कुचल देंगे। लेकिन, उन्होंने अदालत के सामने मौजूद तथ्यों के अनुसार फैसला दिया। उन्हें उम्मीद थी कि गोगोई कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी को आम चुनावों में राफेल में उड़ान भरने के लिए ईंधन देंगे, लेकिन उन्होंने शीर्ष अदालत का गलत हवाला देने की वजह से गॉंधी परिवार के चिराग को तलब कर लिया। माफी मॉंगने के बाद ही छोड़ा। वे उम्मीद कर रहे थे कि गोगोई की अगुवाई वाला पीठ अयोध्या से रामलला को बेदखल करने की नेहरू की लाइन पर चलेगा। लेकिन, उन्होंने पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर फैसला दे दिया।

बात बस इतनी सी है। वरना न तो राष्ट्रपति ने पहली बार राज्यसभा के लिए किसी को मनोनीत किया और न ही पहली बार कोई पूर्व मुख्य न्यायाधीश संसद के उच्च सदन में पहुॅंचा है। बहरुल इस्लाम से लेकर रंगनाथ मिश्रा तक ऐसे कई उदाहरण आपको मिल जाएँगे। सबके सब कॉन्ग्रेसी राज के। लेकिन, गोगोई पर रंगनाथ मिश्रा की तरह सिख दंगा पीड़ितों की बात नहीं सुनने का आरोप नहीं है। परिवार के प्रति उनकी वफादारी बहरुल इस्लाम जैसी नहीं है। इसलिए, गोगोई उन्हें खटकते हैं।

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त को कैबिनेट मंत्री, पूर्व जज को उपराष्ट्रपति, राज्यपाल तक बनाने वाली कॉन्ग्रेस को असल में राज्यसभा में मनोनयन को भी उसकी तरह रेवड़ी की तरह बॉंटने की आदत रही है, जैसे उसने पद्म पुरस्कारों समेत तमाम सम्मान में दिखाया है। उसे न तो इन पुरस्कारों का समान भारतीय की दहलीज तक पहुॅंचना बर्दाश्त है, न उच्च सदन में न्यायपालिका की ऐसी आवाज का पहुॅंचना जो खम ठोंक कहता हो- राष्ट्रपति द्वारा मुझे राज्यसभा भेजने के इस फैसले को मैं स्वीकार करता हूँ। यह एक अवसर है, जहाँ से मैं चौथे स्तंभ का पक्ष और उनकी बातों को संसद में रख सकता हूँ। वहीं संसद की बात को भी न्यायपालिका के सामने रखने का मौका है। जब उनसे पूछा जाता है कि क्या वह भाजपा में जाएँगे? तो उनका जवाब होता है- इसका कोई सवाल ही नहीं उठता।

ऐसा नहीं है कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों को कॉन्ग्रेस केवल गोगोई के मामले में कुचलने की कोशिश कर रही है। हर जगह, हर मौके पर ऐसा करना उसकी आदत में शुमार है। मध्य प्रदेश का सियासी ड्रामा इससे अलग नहीं है। 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद कॉन्ग्रेस सरकार बहुमत खो चुकी है। इस बात को बखूबी जानते हुए भी वह तीन-तिकड़म में लगी है। वरना, जो नियम इन 22 में से 6 के इस्तीफे स्वीकार करने की इजाजत विधानसभा के स्पीकर को देता है, वही अन्य 16 के इस्तीफे स्वीकार करने में कैसे आड़े आ रहा है?

इसलिए, कॉन्ग्रेस को मजबूत करना लोकतंत्र के लिए जरूरी है, जैसे तर्क बेमानी हैं। असल में कॉन्ग्रेस एक बीमारी है। इससे देश को जितनी जल्दी निजात मिल जाए उतना बेहतर। देश रहेगा तो लोकतंत्र भी बचेगा और संविधान भी। कोशिश तो ये उसे भी कुचलने की कर चुके हैं। लेकिन, उस वक्त विपक्ष के तौर पर जनता खड़ी हुई और लोकतंत्र का सूरज आपातकाल की कैद से निकला। सो, खुद विपक्ष बनिए। लोकतंत्र की आवाज बनिए। इस बीमारी के भरोसे लोकतंत्र को मजबूत करने के बेतुके तर्कों से निकलिए। अब फिर से जागीरा के डॉयलॉग को याद करिए। क्या जमात आपसे कह रही है- जनादेश तो तुम दे दोगे, पर कमीनापन कहॉं से लाओगे…

‘हम देखेंगे’ की जगह ‘गायंत्री मंत्र’ सुनकर बिलबिला उठे वामपंथी, NDTV ने तो डिलीट ही कर दिया वीडियो, लोगों ने लगाई लताड़

कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण इन दिनों अधिकतर सड़कें खाली हैं। कई लोगों को विशेष रूप से घर में रहने की सलाह दी गई है तो कई अपनी इच्छा से घर में बंद हैं। ऐसे में इस अकेलेपन को दूर करने के लिए लोग तरह-तरह के तरीकों से एक दूसरे को इस लड़ाई को लड़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।

अभी कुछ दिन पहले हमने देखा कि इटली, जहाँ कोरोना का असर व्यापक स्तर पर है, वहाँ लोगों ने बॉलकनी में आकर गाना गाया। अब इसी की तर्ज पर गुरुग्राम में भी ऐसा मामला आया। जहाँ कोरोंटाइन हुए लोगों का उत्साह बढ़ाने के लिए कुछ औरतें अपने घर से निकलकर आईं और इस मुश्किल घड़ी में अपने आसपास मौजूद ऐसे लोगों को सकारात्मक ऊर्जा देने के लिए गायत्री मंत्र और हम होंगे कामयाब गाना गाया।

इस वीडियो को एनडीटीवी की पत्रकार सुक्रिती द्विवेदी ने अपने ट्विटर पर शेयर किया। उन्होंने ‘इटली जैसा दृश्य गुड़गाँव’ में बताते हुए इसे ट्वीट किया। उन्होंने बताया कि गुड़गाँव के सेक्टर 28 में औरतें घरों से निकलकर बॉलकनी में आईं और उन्होंने गायत्री मंत्र और हम होंगे कामयाब गाना गाया।

अब देखते ही देखते ये विडियो वायरल हो गई। सोशल मीडिया यूजर्स इसकी सराहना करने लगे। मगर इस बीच कुछ वामपंथी ये सब देखकर बिलबिला उठे। उन्होंने फौरन इसे धर्म से जोड़ दिया और वीडियो में नजर आ रही महिलाओं को बेवकूफ तक करार दे दिया।

लिबरल-सेकुलरों ने तुरंत कहना शुरू किया कि इटली में लॉकडाउन था, गुरुग्राम में नहीं हैं। इसलिए लाउड स्पीकर लगाकर हिंदू मंत्रो का उच्चारण केवल एक स्टंट हैं। जबकि कुछ ने ये शिकायत की कि ये लोग सिर्फ़ हिंदू मंत्रों को लाउड स्पीकर पर बोलकर लोगों को तंग कर रहे हैं।

एक यूजर ने औरतों की उम्र को लेकर उनका मजाक उड़ाने की कोशिश की और लिखा कि 4-5 आंटी पूरी सोसायटी को परेशान कर रही हैं, ताकि सोशल मीडिया पर शो-ऑफ किया जा सके।

यहाँ बता दें, जिस समय लिबरल अपनी खुंदस निकालते हुए इटली और गुरुग्राम में फर्क़ बता रहे हैं। वहाँ अब तक कोरोना के 17 पॉजिटिव केस आ चुके हैं। जिसके कारण सरकार ने स्कूल, कॉलेज और आँगनबाड़ी सबको बंद करने का निर्देश दिया है ताकि इस वायरस को फैलने से रोका जा सके। लेकिन शायद लिबरलों और कट्टरपंथियों को इससे कोई लेना देना नहीं हैं। उन्हें सिर्फ़ अपनी घृणा प्रदर्शित करनी हैं।

इस वीडियो को देखकर एक इस्लामिक ट्रोल मंत्र उच्चारण करने वाली महिलाओं पर सेक्सिस्ट कमेंट करती हैं और इस पूरे प्रयास को प्रायोजित इवेंट बताती हैं। एक अन्य ट्रोल कहती हैं कि इटली में जो लोग बॉलकनी में आए उन्होंने दिल से प्रोत्साहित करने वाला गाना गाया। उन्होंने लाउडस्पीकर, माइक्रोफोन, राष्ट्रीय ध्वज आदि के साथ धार्मिक मंत्र नहीं बोले।

कुछ कट्टरपंथियों ने तो ये देखकर यहाँ तक हैरानी जताते हुए पूछा कि ये महिलाएँ जो आज हम होंगे कामयाब गा रही हैं, उनमें से कितनी महिलाएँ कभी शाहीन बाग गईं और ये गाना गाकर आई।

गौरतलब है कि ऐसे समय में जब पूरा विश्व इस घातक वायरस से लड़ने के लिए प्रयासरत है और अपने आसपास के लोगों को बचाने के लिए अलग-अलग कोशिशें कर रहा है। उस समय जाहिर है ये प्रयास भी सराहना के योग्य हैं। लेकिन लिबरलों में होती हलचल को देखकर समझा जा सकता है कि उनके लिए मानवता के मायने सिर्फ तभी तक हैं, जब तक उनसे हिंदू धर्म को न जोड़ा जाए। खुद विचार करिए कि जो लोग लाउड स्पीकर से आते मजहबी आवाजों को जस्टिफाई करने पर तत्पर रहते हैं। उनके लिए ये स्टंट हैं। जिनके लिए शाहीन बाग में प्रदर्शन कर रही औरते सशक्त महिलाएँ हैं। वहीं गायत्री मंत्र गाती ये औरतें आँटी हैं। जिनके लिए ‘हम देंखेगे’ जैसे गजलें अजेंडामुक्त हैं। वहीं हिंदू मंत्रों का उच्चारण स्टेज ईवेंट हैं।

यहाँ सबसे शर्म की बात, जो इस वीडियो के वायरल होने के बाद हुई वो ये कि एनडीटीवी ने पहले जहाँ इस विडियो को अपने ट्विटर से ट्वीट किया और इसे इटली जैसे उदहारण बताया। वहीं अपने निर्धारित दर्शकों का विरोध देखर फौरन इसे डिलीट कर दिया कि कही उनके सेकुलर मानकों को ठेस न पहुँचे।

हालाँकि, एनडीटीवी की इस हरकत के लिए कुछ यूजर्स ने उन्हें जमकर लताड़ लगाई और कहा कि ये वीडियो क्यों डिलीट की? शायद तुम चाहते थे कि यहाँ पर गायत्री मंत्र का जगह हम देखेंगें गाया जाए। लेकिन गायत्री मंत्र सुनकर तुमने इसे डिलीट कर दिया क्योंकि ये तुम्हारे फॉलोवर्स के मन पर चोट करता।

100 तलवारों सहित शोएब, इम्तियाज, कादर, याकूब गिरफ्तार: पुलिस को दिखाया फर्जी रसीद, 9 दिन की हिरासत

गुजरात के राजकोट के जूनागढ़ जिले में पुलिस ने 4 युवकों को 100 तलवारों सहित गिरफ्तार किया। इनकी गिरफ्तारी मंगरोल शहर में शनिवार की रात हुई। आरोपितों के पकड़े जाने के बाद पुलिस ने हथियारों के एक डीलर को भी गिरफ्तार किया। बाद में पाँचों को कोर्ट में पेश किया गया। इसके बाद इन्हें 9 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। अब आगे की जाँच जारी है।

पुलिस के मुताबिक शनिवार को 6 बजे केशोड़-मंगरोल हाइवे पर उन्होंने चारों युवकों को आते देखा। इनके हाथ में एक थैला था। जिसे देखकर मंगरोल पुलिस को शक हुआ और उन्होंने फिरदौस नर्सरी के नजदीक मंगरोल-केसोड़ चोकड़ी के पास उन्हें रोका। उनके थैले की छानबीन हुई, जिसमें से 100 से ज्यादा तलवारें निकलीं।

जब पुलिस ने इसे देखकर उनसे पूछताछ की तो उन्होंने सच बताने की बजाय पुलिस को फर्जी रसीद दिखाई। लेकिन जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो उन्होंने खुलासा किया कि तलवारें कच्छ के अंजार से इरफान द्वारा भेजी गई थीं और मंगरोल में हसन वाजा तक पहुँचाई जानी थीं।

इसके बाद पुलिस ने सारी तलवारों को जब्त कर लिया और 4 युवकों को गिरफ्तार कर लिया। इनकी पहचान शोएब छपास (20) इम्तियाज बुमाडिया (18), कादर गिरनारी (35) और याकूब बुमाडिया (35) के रूप में हुई। चारों मंगरोल नगर के निवासी हैं।

इनके पास से पुलिस ने 100 तलवारों के अलावा 2 बाइक और 3 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। जिनकी कीमत का अनुमान 1,23,000 रुपए लगाया गया है। पुलिस ने इस सबंध में हसन वाजा को भी गिरफ्तार किया है, जिसका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड था। यहाँ बता दें कि गिरफ्तार हुए ये पाँचों आरोपित कारपेंट्री और मजदूरी का कार्य करते थे।

पोप फ्रांसिस ने ‘गॉड’ से की बात: कोरोना वायरस से इटली में फैली महामारी को ‘अपने हाथों से’ रोकने के लिए कहा

चीन के बुहान शहर से शुरू हुए कोरोना वायरस का कहर इन दिनों चीन के बाद सबसे अधिक इटली में फैला हुआ है। इस पर पोप फ्रांसिस ने कहा है कि ऐसे समय में लोगों को परिवार के साथ जुड़ने के लिए संगरोध में समय का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मैंने गॉड से कोरोनो वायरस को अपने हाथ से रोकने के लिए कहा था। उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना वायरस क्या है, इसके लक्षण क्या हैं इसे लेकर आपको डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए। वहीं कोरोना वायरस के प्रकोप से जूझ रहे इटली में मंगलवार तक वायरस के 27,980 मरीज सामने आ चुके हैं और इसकी चपेट में आने से अब तक अकेले इटली में 2,503 मौतें हो चुकी हैं।

वहीं पोप फ्रांसिस पिछले कुछ दिनों से अपना समय वेटिकन में बिता रहे हैं, हालांकि उन्होंने इटालियन राजधानी में दो चर्चों में बीमारी के पीड़ितों के लिए प्रार्थना करने के लिए रविवार दोपहर को देश के राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन को खारिज कर दिया। पोप फ्रांसिस बुधवार को वेटिकन में एपोस्टोलिक महल की एक लाइब्रेरी में आयोजित एक कार्यक्रम में लोगों को संबोधित कर रहे थे। इसके बाद डेली मेल की खबर के मुताबिक पोप ने बुधवार को दैनिक इतालवी प्रकाशन ला रिपब्लिका से बात करते हुए पोप फ्रांसिस ने कहा कि उन्होंने गॉड से ‘अपने हाथों से’ इटली में महामारी को रोकने के लिए कहा है।

दरअसल, इटालियन सरकार ने कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए घोषणा की थी कि सार्वजनिक रूप से रहते हुए एक मीटर की दूरी बनाए रखें। इससे पहले कोरोना वायरस संकट में अपनों को खो चुके लोगों को संबोधित करते हुए, पोप ने कहा था कि ‘मैं हर किसी से उन लोगों के करीब रहने के लिए कहता हूँ जिन्होंने इस आपदा में अपनों को खो दिया है। हर संभव किसी भी तरीके से उनके करीब हो।

आपको बता दें कि पोप खुद पिछले महीने से ठंड से पीड़ित हैं। इसके बाद भी उन्होंने इतालवी सरकार द्वारा घर के अंदर रहने की सलाह को टाला और रविवार को रोम की सुनसान गलियों से वायरस के अंत की प्रार्थना करने के लिए चर्च की ओर चले गए। वेटिकन के प्रवक्ता माटेओ ब्रूनी ने कहा कि अपनी सुरक्षा बढ़ाने पर भड़के 83 वर्षीय पोप, जोकि खुद ठंड से पीड़ित हैं उन्होंने सड़कों पर चलने का फैसला किया ‘जैसे कि वह एक तीर्थयात्रा पर निकले हों।

बीवी से झूठ बोलकर गर्लफ्रेंड के साथ गया था इटली, कोरोना वायरस ने धर लिया: नहीं बता रहा GF का नाम

आपने गैब्रियल ग्रासिया मार्खेस की मशहूर पुस्तक ‘लव इन दी टाइम्स ऑफ़ कोलेरा’ का नाम तो सुना ही होगा! इसी तर्ज पर अब ‘लव इन दी टाइम्स ऑफ़ कोरोना’ जैसी ख़बरें भी सामने आने लगी हैं।

कोरोना वायरस ने चीन के बाद सबसे ज्यादा तबाही इटली में मचाई है। ऐसे में एक शख्स ने अपनी पत्नी से बिजनेस ट्रिप का झूठ बोलकर अपनी प्रेमिका के साथ कुछ समय बिताने के लिए इटली को चुना, जहाँ उसे कोरोना ने अपनी चपेट में ले लिया।

दरअसल, ब्रिटेन में एक शख्स अपनी पत्नी को झूठ के अंधेरे में रखकर अन्य महिला के साथ इश्क फरमा रहा था। बिजनेस ट्रिप तो बहाना था, असल में उन्हें प्रेमिका के साथ इटली में वक्त बिताना था। लेकिन दुर्भाग्यवश उनकी इस सीक्रेट ट्रिप को ‘कोरना वायरस’ की नजर लग गई और ट्रिप के दौरान कोरोना वायरस की चपेट में आ गए।

एक रिपोर्ट के अनुसार, 30 साल के इस शख्स को कोरोना के कारण अलग कमरे में रखा गया है। लेकिन उसकी पत्नी अब भी इस बात से अंजान है कि आखिर उनके पति को इस वायरस ने कैसे पकड़ा। कोरोना के लक्षण दिखने पर शख्स ने इस बात की हामी भरी कि वह इटली की सीक्रेट ट्रिप के दौरान इस वायरस की चपेट में आया। इसके साथ ही शख्स ने अस्पताल के डॉक्टर्स को बताया कि उसका एक महिला के साथ अफेयर चल रहा है।

हालाँकि, जब उसकी पहचान पूछी गई तो उसने प्रेमिका (गर्लफ्रेंड) का नाम बताने से इंकार कर दिया। रिपोर्ट में बताया गया कि शख्स ने यह माना है कि उसकी पत्नी यह नहीं जानती है कि आखिर उन्हें यह संक्रमण कैसे हुआ। अभी तक तो इस शख्स की हालत स्थिर बनी हुई है। जबकि उसकी पत्नी ने खुद को अपने नॉर्थ इंग्लैंड के घर में सेल्फ आइसोलेशन में रखा हुआ है।

ज्ञात हो कि दुनियाभर में कोरोना वायरस का कहर है। चीन के वुहान शहर से शुरू हुआ यह वायरस 8 हजार लोगों की जान ले चुका है। जबकि 2 लाख से ज्यादा लोग इससे संक्रमित हैं। बुधवार को एक रिपोर्ट में बताया गया कि इटली में COVID-19 के चलते मौत के 500 नए मामले समने आए हैं। 12 मार्च से यह पूरा देश लॉकडाउन है।

नूर-ए-इलाही में सौरभ के प्राइवेट पार्ट के पास गोली मारकर भागे इमरान और उसका दोस्त, ऑफ ड्यूटी ASI की बहादुरी से धरे गए

उत्तरपूर्वी दिल्ली के दंगा प्रभावित इलाके नूर-ए-इलाही, यमुना विहार में बुधवार (मार्च 18, 2020) की रात लूटपाट की वारदात सामने आई। यहाँ विशेष समुदाय के दो युवकों ने बन्दूक की नोंक पर एक हिंदू युवक से उसका सामान छीना और उसे गोली मारी। लेकिन, ऑफ ड्यूटी एएसआई रविन्द्र की बहादुरी से दोनों को धड़ पकड़ा गया। दोनों आरोपितों की पहचान इमरान उर्फ मॉडल और इमरान के रूप में हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डीसीपी ऑफिस में कार्यरत एएसआई रविंद्र बुधवार की रात करीब 7 बजे अपने भतीजे से मिलने गए थे। मगर वापसी के दौरान उन्होंने तीन लोगों के बीच आपसी झड़प होती देखी। इनमें से एक ने इसी बीच 2 राउंड गोली फायर कर दी और फिर भागना शुरू कर दिया।

मगर, पुलिस अधिकारी ने पीड़ित की हालत देखकर उन चोरों का पीछा किया और उनमें से एक को पकड़ा लिया। इसके बाद पीड़ित ने भी चोर के साथी का पीछा किया और उसे भी पकड़ लिया गया। इस वारदात में पीड़ित के प्राइवेट पार्ट के पास गोली लगी।

एएसआई रविंद्र बताते हैं कि जब वे नूर-ए-इलाही करीब 8:25 pm पर पहुँचे। तो उन्होंने तीनों को हाथापाई करते देखा। पीड़ित मदद की गुहार के लिए चिल्ला रहा था। जब उन्होंने उससे पूछा तो उसने बताया कि दोनों लोगों ने उससे उसका मोबाइल छीन लिया है। बस फिर क्या… ऑफ ड्यूटी एएसआई ने इतना सुनते ही वहाँ अपनी मोटरसाइकल छोड़ी और पिस्टल वाले युवक के पीछे भागे। आरोपित एक रेस्ट्रां की ओर भाग रहा था। लेकिन पुलिस अधिकारी ने उसे पकड़ लिया और उससे उसकी पिस्टल छीनी।

इसके बाद वहाँ भीड़ इकट्ठा हुई और आरोपित को पीटा गया। पीड़ित सौरभ गुप्ता ने भी इस बीच दूसरे चोर को पकड़ लिया और बाद में दोनों को भजनपुरा थाने सौंपा गया। बाद में सौरभ गुप्ता को इलाज के लिए सरकारी अस्पताल के लिए भर्ती कराया गया।

CAA के खिलाफ धरना में जहाँ पहुँचते थे नेता-एक्टिविस्ट, बाइक से आकर 5 लोगों ने बरसाई अंधाधुंध गोलियाँ

बिहार के गया जिले में पिछले कई माह से सीएए के खिलाफ चल रहे अनिश्चितकालीन धरने पर बीते दिन कुछ बाईक सवार आरोपितों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इससे धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों में भगदड़ मच गई। हालाँकि किसी के भी हताहत होने की खबर नहीं है। वहीं मौजूद लोगों ने तीनों आरोपितों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया है, जिनसे पुलिस लगातार पूछताछ कर रही है। दरअसल गया जिले के चाकंद के बारा समेत कटारी हिल के शांति बाग, शेरघाटी एवं इमामगंज समेत कई स्थलों पर सीएए, एनपीआर और एनआरसी के खिलाफ अनिश्चतकालीन धरना चल रहा है।

वहीं गया-पटना हाइवे के किनारे बारा गाँव के पास संविधान बचाओ-देश बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले सीएए के खिलाफ चल रहे धरने के पास बुधवार देर शाम को पाँच बाईक सवार आरोपितों ने अचानक से हवाई फायरिंग कर दी। गोली आवाज सुनते ही धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। वहीं लोगों ने तत्काल शोर मचाकर तीन आरोपितों को हथियार सहित दबोच लिया। जबकि दो आरोपित किसी तरह मौका पाकर फरार हो गए। इसके बाद लोगों ने तीनों आरोपितों को जमकर पीटा और फिर पुलिस के हवाले कर दिया।

धरने पर फायरिंग की सूचना पर पहुँचे पुलिस के आला अधिकारियों ने मौजूद लोगों से मामले में पूछताछ की। सिटी एसपी राकेश कुमार ने बताया कि घटनास्थल से एक देसी कट्टा, एक खोखा और कई कारतूस बरामद किया गया है और पूरे मामले की छानबीन की जा रही है। इसके बाद से ही पुलिस हिरासत में लिए तीनों आरोपितों से मामले को लेकर पूछताछ कर रही है। आपको बता दें कि धरना स्थल पर फायरिंग करने वाले आरोपितों की पहचान चतरा के प्रतापपुर थाना के लिपटा गाँव के कमलेश यादव, खिजरसराय के चिरैली गाँव के हरिवंश वर्मा और परैया थाना के फुरहुरिया गाँव के वीरू कुमार के रूप में हुई है।

गौरतलब है कि गया जिले में कई स्थानों पर सीएए के खिलाफ चल रहे धरने में प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में अपनी माँगों को लेकर शामिल हो रहे हैं। इतना ही नहीं, इन धरनों में राजद, कॉन्ग्रेस, वामपंथी दलों एवं अन्य पार्टियों के कई नामचीन नेता, विधायक, सांसद एवं अन्य एक्टिविस्ट शामिल होकर अपना समर्थन दे चुके हैं।

पूर्व CJI रंजन गोगोई बन गए राज्य सभा सांसद, शपथ ग्रहण के दौरान विपक्ष ने मचाया हंगामा

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने विपक्षी सदस्यों के शोर शराबे के बीच गुरुवार (मार्च 19, 2020) को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ग्रहण ले ली है। राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होने पर गोगोई जैसे ही शपथ लेने निर्धारित स्थान पर पहुँचे, वहाँ विपक्षी सदस्यों ने उन्हें देखकर हल्ला करना शुरू कर दिया और शेम-शेम के नारे लगाए। इस दौरान विपक्ष ने सदन से वॉक आउट भी किया। लेकिन अंतत: भारी विरोध के बीच रंजन गोगोई ने सांसद की शपथ ले ही ली।

गौरतलब है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सरकार की अनुशंसा पर सोमवार को पूर्व सीजेआई गोगोई को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया था। जिसके बाद विपक्ष उन पर काफी हमलावर रहा और आज उनके शपथ के दौरान जोर-जोर से हल्ला मचाकर सदन से वॉक आउट कर गया।

गोगोई के शपथ लेने और विपक्ष के वॉक आउट पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राज्यसभा में पूर्व सीजेआई सहित विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों के आने की एक महान परंपरा है। गोगोई जिन्होंने आज शपथ ली है वह निश्चित रूप से अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देंगे। विपक्ष का वॉक आउट करना घोर अनुचित था।

वहीं, राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने भी विपक्ष के इस रवैये को देखकर कहा कि ऐसा व्यवहार सदस्यों की मर्यादा के अनुरूप नहीं है।

बता दें कि रंजन गोगोई देश के 46वें चीफ जस्टिस रहे हैं। उन्होंने सीजेआई का पद 3 अक्टूबर 2018 से 17 नंवबर 2019 तक संभाला। इस बीच उन्होंने राम जन्मभूमि जैसे कई ऐतिहासिक फैसले लिए। मौजूद जानकारी के अनुसार पूर्व CJI का जन्म 18 नवंबर, 1954 को असम में हुआ। उन्होंने डिब्रूगढ़ के डॉन बोस्को स्कूल और दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज में पढ़ाई की। उनके पिता केशव चंद्र गोगोई असम के मुख्यमंत्री थे। जस्टिस रंजन गोगोई ने 1978 में वकालत के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। 28 फरवरी, 2001 को रंजन गोगोई को गुवाहाटी हाईकोर्ट का स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। इसके बाद जस्टिस गोगोई 23 अप्रैल, 2012 को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने थे और बाद में मुख्य न्यायाधीश भी बन कई मामलों की सुनवाई को लेकर चर्चा में रहे।