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नहीं देखा जाएगा कौन हिंदू, कौन मुस्लिम… खाड़ी देशों से आने वाले सभी 26000 भारतीय को मेडिकल सुविधा, मुंबई में तैयारी पूरी

देश के साथ-साथ विदेशों में कोरोना के लगातार बढ़ते प्रभाव से भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए केन्द्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। खाड़ी देशों से 26000 भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जाएगा। इसके लिए मुंबई में बीएमसी ने पोवई में एक नवनिर्मित ट्रेनिंग सेंटर को ही क्वारंटाइन सेंटर में तब्दील कर दिया है। इस फैसले के बाद से ही मुंबई नगरपालिका उन 26 हजार लोगों के ठहरने का इंतजाम करने में जुटी है, जो आज से 31 मार्च तक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कुवैत और ओमान जैसे खाड़ी देशों से वतन वापस आने वाले हैं।

बीएमसी के मुताबिक इन देशों से हर दिन 23 फ्लाइट मुंबई पहुँचती है। केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार, यूएई, कुवैत, कतर और ओमान से आने वाले सभी यात्रियों को हर हाल में 14 दिनों तक क्वारंटाइन सेंटर में रहना होगा। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब दुबई से आने वाले महाराष्ट्र के 15 लोगों में कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। इसलिए बीएमसी ने अपने इंजीनियरों के लिए पोवई में एक नवनिर्मित ट्रेनिंग सेंटर को क्वारंटाइन सेंटर में तब्दील कर दिया है। इसके अलावा, मरोल में सेवन हिल्स हॉस्पिटल में आइसोलेशन वार्ड की व्यवस्था है।

योजना के मुताबिक खाड़ी देशों से ज्यादातर भारतीय यहाँ इस महीने का आखिर तक पहुँचेंगे। अधिकारियों के अनुसार खाड़ी देशों से आने वाले लोगों को कई श्रेणियों में बाँट दिया जाएगा। जो लोग स्वस्थ होंगे, उनको छूट दी जाएगी और जो लोग संदेह की श्रेणी में होंगे उनके ऊपर निगरानी रखी जाएगी। हालाँकि नेगेटिव पाए जाने वाले लोगों को सार्वजनिक परिवहन का सहारा नहीं लेने दिया जाएगा। वहीं मुंबई पहुँचने वाले हर व्यक्ति के हाथ पर मुहर लगा दिया जाएगा और उन्हें देश के दूसरे किसी हिस्से के लिए फ्लाइट लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

जो लोग मुंबई से दूर-दराज के इलाके के होंगे, उन्हें पोवई या सेवन हिल्स हॉस्पिटल स्थित क्वारंटाइन सेंटर में रखा जाएगा। जिनमें कोविड-19 के लक्षण दिखेंगे, उनकी जाँच की जाएगी। वहीं, बुजुर्गों आदि को क्वारंटाइन सेंटर में तुरंत भेज दिया जाएगा। बीएमसी बुधवार से वाहनों की व्यसवस्था में भी जुट गया, जिनके जरिए लोगों को एयरपोर्ट से आइसोलेशन वार्ड तक ले जाया जाएगा।

वहीं देश में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 150 से अधिक हो गई है। अगर बात करें देश में फैले इस वायरस के मरीजों की तो अभी तक महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या सबसे अधिक यानी 45 मिली है।

न्यू रेलवे, नई रफ्तार: सुरक्षा, तकनीक और सुविधा से मोदी सरकार ने किया कॉन्ग्रेस जमाने के खस्ताहाल रेलवे का कायाकल्प

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने सर्वाधिक ध्यान जिन चीजों पर दिया है, उनमें से एक पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन है। चाहे वह ‘भारतमाला प्रोजेक्ट’ के तहत देश के महत्वपूर्ण स्थानों को आपस में जोड़ने का लक्ष्य हो या पोर्ट्स को जोड़ने का कार्य। सरकार ने ट्रांसपोर्टेशन के ऊपर काफी राजस्व व्यय किया है। इसमें एक महत्वपूर्ण क्षेत्र, देश की लाइफ़ लाइन ‘भारतीय रेल’ है। देश का जनमानस लम्बी दूरी की सुलभ व सस्ती यात्रा के लिए हमेशा से रेलवे को प्राथमिकता देता रहा है। इसे ध्यान में रख मोदी सरकार रेलवे का कायाकल्प करने की दिशा में बढ़ रही है।

सुरक्षा

सन् 2014 में जब मोदी सरकार ने देश की कमान सँभाली उसके बाद से ही रेलवे सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई। चाहे वह एक्सिडेंट या ट्रेन के अंदर महिला सुरक्षा या स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा का सवाल। सरकार पूरी तत्परता से इस पर ध्यान दे रही है। UPA कार्यकाल में भारतीय रेल में सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति दुखद रही। ममता बनर्जी के बतौर रेल मंत्री रहते उनके कार्यकाल में लगभग 619 लोगों को रेल संबंधी दुर्घटनाओं में अपनी जान गॅंवानी पड़ी। UPA के समय मानवरहित क्रॉसिंग की वजह से 1,441 लोगों को अपनी गॅंवानी पड़ी।

इसके समाधान हेतु रेल मंत्री पीयूष गोयल ने सभी मानवरहित क्रॉसिंग को 1 साल में खत्म करने का निर्णय साकार किया। रेलवे क्रॉसिंग को हटाना कोई साधारण कार्य नहीं था, मगर रेल मंत्री और रेलवे की टीम ने तत्परता और असाधारण इच्छाशक्ति के बल पर यह लक्ष्य साधने में सफलता प्राप्त की। 1 साल के भीतर सभी मानवरहित क्रॉसिंग ख़त्म किए गए। इन जगहों पर पुल बनाए गए या गेटमैन की तैनाती की गई ताकि वहाँ आने-जाने वाले यातायात को सुचारू रूप से व सुरक्षित तरीके से संचालित किया जा सके। मोदी सरकार ने LHB कोच, FOB’s के निर्माण, रेल पटरियों के रिन्यूवल के कार्यों पर ज़ोर दिया। इसके परिणामस्वरूप पहले की तुलना में लगभग 85% की कमी रेल एक्सिडेंट में देखने को मिली, जो इतिहास में पहली बार हुआ। वर्ष 2019(FY) रेलवे के इतिहास में ऐसा वर्ष रहा जिसमें अभी तक 1 भी मौत ट्रेन एक्सिडेंट के कारण नहीं हुई। यह रेलवे इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में स्थापित हुई।

तकनीक

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने रेलवे में तकनीकी उन्नयन पर बहुत ज़ोर दिया है। चाहे वह आपके खाने की जानकारी उपलब्ध करवाने के लिए बारकोड सिस्टम हो, जिसमें जब आपका खाना ट्रेन में आपके पास आएगा और आप अपने मोबाइल से उसे स्कैन करेंगे तो वह आपको उस किचन तक ले जाएगा जहाँ आपका खाना तैयार हुआ है। आप CCTV की मदद से देख सकते हैं कि किचन कितना साफ़ है और कर्मचारी कैसे काम कर रहे हैं। इससे केवल यात्रियों को संतुष्टि ही नहीं अपितु कर्मचारियों की जवाबदेही व पारदर्शिता को भी बढ़ावा मिला है। वहीं रेलवे ने ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम को रेलवे में लाने का प्लान भी बनाया है, जिससे रेलवे ट्रेन की मूवमेंट, लाइन क्लीयर करना, कौन सी ट्रेन को किस समय पास करना है, आदि सब सिग्नलिंग सिस्टम के द्वारा निर्धारित किया जाएगा, जिससे ट्रेन की समयबद्धता में सुधार होगा।

सुविधा

मोदी सरकार के कार्यकाल में रेलवे यात्रियों के लिए अनेक सुविधाओं का पिटारा खोला गया है। लगभग 5600 स्टेशनों पर वाई-फ़ाई सुविधा की उपलब्धता को सुनिश्चित किया गया है। आज के समय में इंटरनेट हर व्यक्ति के लिए वक मूलभूत आवश्यकताओं में से एक है। ख़ाली समय में लोग इंटरनेट के जरिए समय बिताने व ज़रूरतमंद लोग उसको अपनी सुविधा के अनुसार इस्तेमाल करते हैं। स्टेशन पर फ़्री हाई स्पीड वाई-फ़ाई से लोगों के इसके अनेक फ़ायदे मिल रहे है। हाल ही में केरल से जुड़ा एक प्रसंग चर्चा में रहा। वहॉं एक कुली ने स्टेशन के वाई-फ़ाई का इस्तेमाल करके अपनी पढ़ाई की और राज्य की सिविल परीक्षा पास की। वहीं कई लोग इसे मनोरंजन व सोशल नेटवर्किंग के लिए भी इस्तेमाल करते हैं। सुंदर वेटिंग रूम, IRCTC के लाउंज, लिफ़्ट, एस्कलेटर, मात्र एक रुपए में सैनेटरी पैड, ब्रेस्ट फ़ीडिंग जैसी सुविधाओं को भी रेलवे ने ध्यान में रखा है जो दिखने में छोटी है लेकिन काम बहुत लोगों के आती है। महिलाओं सुरक्षा और सुविधा के दृष्टिकोण में यह एक सराहनीय प्रयास है।

आधुनिक ट्रेनों के साथ नई रफ़्तार

रेलवे में अगर आपको सबसे बड़ा बदलाव देखना है तो रेलवे की नई ट्रेनों पर गौर करें। पिछले वर्ष रेलवे में ‘मेक इन इंडिया’ के अंतर्गत बनी नई ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ ट्रेन दिल्ली से वाराणसी के बीच चलाई गई। इसको हरी झंडी स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिखाई थी। इसके बाद दूसरी वन्दे भारत एक्सप्रेस दिल्ली से कटरा के बीच चलाई गई। आधुनिक ट्रेन की सूची में हमसफ़र एक्सप्रेस, तेजस एक्सप्रेस, पंडित मदन मोहन मालवीय एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें शामिल हैं, जिन्होंने यात्रियों को लुभाया है।

तेजस एक्सप्रेस जैसी आधुनिक व सुविधाजनक ट्रेन जो कि पटरी पर चलते किसी प्लेन से कम नहीं है। इसमें रेलवे ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के अंतर्गत कार्य किया और पहली ट्रेन का परिचालन दिल्ली से लखनऊ व दूसरी ट्रेन मुंबई से अहमदाबाद के लिए शुरू की गई। हाल ही में केंद्र सरकर द्वारा पेश किए गए बजट में वन्दे भारत व तेजस जैसी ट्रेनों के लिए काफ़ी बजट आवंटित किया गया। आने वाले वर्षों में लगभग 44 रेक आने कि उम्मीद जताई जा रही है जो रेलवे को रफ़्तार देने के लिए तैयार है। रेलवे सेवा व रेल मदद वह प्लेटफॉर्म है जो ट्विटर के माध्यम से लोगों की यात्रा संबंधी समस्याओं का समाधान करता है।

रेलवे सेवा

अगर आपको रेलवे से जुड़ी किसी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है, अगर ट्रेन में चलते समय RPF की मदद की ज़रूरत है या मेडिकल मदद की ज़रूरत है या रेलवे के कार्य से जुड़ी किसी भी प्रकार की मदद की ज़रूरत है, तो रेलवे ट्विटर के जरिए इसका समाधान करता है। बस एक ट्वीट करने से सीधे रेल मंत्रालय से निर्देश जारी होते हैं और लोगों की समस्याओं का समाधान होता है। आप @RailwaySeva को टैग करके कोई ट्वीट करें तो आपकी समस्या का समाधान हो जाएगा। रेलवे ने हाल ही में रेल मदद ऐप भी लॉंच किया है, जिसमें FIR की तरह आपकी समस्या को दर्ज किया जाएगा व शिकायत पंजीकरण उपरांत SMS के माध्यम से शिकायतकर्ता को सूचना दी जाएगी। साथ ही समस्या के समाधान उपरांत शिकायतकर्ता को पुनः SMS द्वारा समस्या के समाधान की जानकारी दी जाएगी।

स्टेशन रीडेवलपमेन्ट

स्टेशन रीडेवलोपमेन्ट रेल मंत्रालय द्वारा स्टेशन को आधुनिक बनाने के लिए चलाया गया उपक्रम है। रेल मंत्री पीयूष गोयल समय-समय पर ट्वीट कर उसकी जानकारी जनता के साथ साझा करते हैं। वहीं रेल मंत्रालय भी अपने ट्विटर अकाउंट् से इसकी जानकारी मुहैया कराता है। रेल मंत्री के इंस्टाग्राम अकाउंट पर आप विभिन्न स्स्टेशनों के उन्नयन संबंधी तस्वीरों को देख सकते हैं। इसमें स्टेशन पर आधुनिक बिल्डिंग शौचालय, साफ़-सफ़ाई, कलाकृति, आधुनिक मटेरियल, वेटिंग रूम, VIP लाउंज लिफ़्ट, एस्कलेटर, वाइफ़ाई, LED लाइट जैसी अनेक सुविधाएँ प्रदान की जा रही है। कुछ स्टेशन जिनको आधुनिक किया गया है उनमें – महाराष्ट्र के शिरडी, लोनावला, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, झारखंड का गिरिडीह, उत्तरप्रदेश में मथुरा, वाराणसी, मंडुआडीह, गुजरात का छायापुरी शामिल है। बाकी यह फेहरिस्त काफ़ी लम्बी है।

रेलवे रिस्ट्रक्चरिंग

कैबिनेट द्वारा हाल ही में रेलवे रिस्ट्रक्चरिंग करने का फ़ैसला लिया गया जो कि एक बहुत बड़ा फैसला है। रेलवे बोर्ड में अब तक चेयरमैन के अलावा 8 सदस्य होते थे जो अलग-अलग सर्विसेज से आते थे। लेकिन अब सभी का विलय करके इंडियन रेलवे मैनेजमेंट सर्विस (IRMS) बनाने की मंजूरी दी गई है। केंद्रीय कैबिनेट ने रेलवे बोर्ड के फंक्शनल लेवल पर पुनर्गठन को मंजूरी दे दी है। अब नए रेलवे बोर्ड में एक चेयरमैन और 4 सदस्य होंगे। भारतीय रेलवे की मौजूदा आठ समूह एवं सेवाओं को अब इंडियन रेलवे मैनेजमेंट सर्विस (IRMS) नाम से एक केंद्रीय सेवा में पुनर्गठित किया जाएगा।

रेलवे विद्युतीकरण

रेल मंत्री पीयूष गोयल जिस भी सभा में जाते है अगर रेलवे के ऊपर उनको कुछ बोलना है तो रेलवे विद्युतीकरण पर बोलने में वो कभी नहीं हिचकिचाते। उनका कहना है कि आने वाले वर्षों में भारतीय रेल दुनिया का पहला ऐसा रेलवे होगा जो 100% विद्युतीकृत हो जाएगा। आँकड़ों पर गौर करें तो उनकी बातों में दम दिखता है।

UPA के ज़माने में विद्युतीकरण

वित्त वर्ष किलोमीटर 
2007-08 502
2008-09 797
2009-10 421
2010-11 75
2011-12 595
2012-13 1337
2013-14 610

मोदी सरकार के कार्यकाल में विद्युतीकरण

वित्त वर्ष किलोमीटर 
2014-15 1176
2015-16 1502
2016-17 1646
2017-18 4087
2018-19 5276

जाहिर है कि कॉन्ग्रेस सरकार की तुलना में विद्युतीकरण काफ़ी अधिक और तेज़ी से हुआ है। विद्युतीकरण होने से रेलवे की रफ़्तार में इज़ाफ़ा तो होगा ही साथ ही पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा। इससे भारत पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका और स्थान को मजबूत कर पाएगा।

राज्य सभा के लिए कौन हो सकते हैं नामित: क्या प्रशांत भूषण जानबूझकर बोल रहे झूठ?

पूर्व सीजेआई गोगोई का नाम राज्यसभा के लिए नामित होने के बाद बड़े-बड़े बुद्धिजीवी निकलकर सामने आ रहे हैं। पहले तो हर मुमकिन प्रयास करके ये प्रसारित करने की कोशिश की जा रही थी कि राष्ट्रपति कोविंद ने गोगोई को जो राज्यसभा भेजने के लिए नामित किया, वो केवल उनके ‘एकतरफा’ फैसलों के कारण। लेकिन अब संविधान के अनुच्छेदों का उदाहरण देकर राष्ट्रपति के चयन को गलत साबित किया जा रहा है।

अब ऐसा करने वाले कोई और नहीं, बल्कि खुद जाने-माने वकील प्रशांत भूषण हैं। प्रशांत भूषण का कहना है कि आर्टिकल 80 (3) के तहत यदि कोई व्यक्ति कला, विज्ञान, साहित्य या समाज सेवा में विशेष ज्ञान रखता है, तो उसे राज्य सभा में नामांकित किया जा सकता है। लेकिन गोगोई की प्रतिभा और कला, विज्ञान, साहित्य या सामाजिक सेवा में विशेष ज्ञान एक सील कवर में अच्छी तरह से छिपा हुआ लगता है!

प्रशांत भूषण वकालत की दुनिया में वामपंथियों के एक ‘वरिष्ठ’ उम्मीद हैं। तो उनके द्वारा किया गया मार्गदर्शन भी अंतिम सत्य की तरह माना जाता है। लेकिन प्रमाणों की तरफ यदि गौर किया जाए तो प्रशांत भूषण और उनके समर्थकों का एजेंडा पूरी तरह ध्वस्त होता दिखता है।

साल 2005 में आई एक लिस्ट पढ़िए। इस लिस्ट में 107 ऐसे लोगों के नाम हैं, जिन्हें 1952 से लेकर 2005 तक राज्यसभा के लिए नामित किया गया। इनमें करीब 4 नाम ऐसे हैं, जिनका वकालत संबंधी बैकग्राउंड होने के बावजूद उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया गया।

इसके अलावा हाँ, इस सूची में कई बुद्धिजीवी, शिक्षाविद, इतिहासकार, वैज्ञानिक, कवि, इंजीनियर, अर्थशास्त्री, कलाकार, सामाजिक कार्यकर्ता के भी नाम हैं। लेकिन कहीं भी इसका उल्लेख नहीं है कि कानूनविद राज्यसभा के लिए नामित नहीं हो सकते। तो सवाल उठता है कि जब 1952 से इस बात पर गौर नहीं किया गया, तो आज क्यों?

क्या कानूनी जानकार होने के बाद प्रशांत भूषण अपने फॉलोवर्स को गलत सूचना प्रसारित करने पर आतुर हो चुके हैं? या केवल अपना अजेंडा साधने के लिए और भाजपा के प्रति अपनी नफरत निकालने के लिए अपने प्रोफेशन और अपनी विश्वसनीयता के साथ ख़िलावाड़ कर रहे हैं? या ये भी कह सकते हैं कि वो पूर्व सीजेआई के प्रति अपनी कुँठा निकाल रहे हैं, क्योंकि पिछले साल उन्हें कई मौकों पर उनके रवैये के कारण लताड़ा गया था।

गौरतलब है कि पिछले साल 16 जनवरी को लोकपाल मामले में बहस के दौरान चीफ़ जस्टिस ऑफ इंडिया ने प्रशांत भूषण को जमकर फटकार लगाई थी। उस समय चीफ जस्टिस ने प्रशांत भूषण नसीहत देते हुए चीजों को सकारात्मक तरीके से देखने की बात कही थी। लोकपाल मामले पर बहस के दौरान कोर्ट में जब प्रशांत भूषण ने सर्च कमिटी के उपर सवाल खड़ा किया था तो चीफ़ जस्टिस ने तल्ख अंदाज में प्रशांत भूषण को ये जवाब दिया- “ऐसा लगता है आप जजों से भी ज्यादा जानते हैं।”

नारायण स्वामी मंदिर को ढाह कर बनाया गया देवल मस्जिद… और राज्य सरकार हिंदू-इस्लामी वास्तुकला पर ताली बजा रही!

भारत में इस्लामिक आक्रांताओं के प्रभाव के कारण हमने शुरुआत से ही अपनी संस्कृति और सभ्यता का खून होते देखा। क्लासरूम में किताबों के जरिए हमें जिन मुगलों के गुणगान का पाठ पढ़ाया गया, हकीकत में उनकी तलवार ने भारत का कोई कोना नहीं छोड़ा और भारत के न जाने कितने मंदिरों को मात्र मलबे में तब्दील कर दिया। उसके बाद इन्होंने उसी मलबे पर मुस्लिम स्मारकों को इतिहास में दर्ज करवाया। खुद मुस्लिम इतिहासकारों ने भी अपने शासकों और सेनापतियों की इस बर्बरता का बढ़-चढ़कर बखान किया। देवल मस्जिद भी इसी क्रूरता का एक उदाहरण है। जिसे आज तेलंगाना की विरासत के रूप में देखा जाता है और सेक्युलर लोग इसकी तारीफ करते नहीं थकते। लेकिन इसकी वास्तविक हकीकत क्या है और देवल मस्जिद बनने का इतिहास क्या है, आइए आज हम आपको बताएँ…

कल हेरिटेज तेलंगाना (तेलंगाना सरकार के हेरिटेज विभाग का ऑफिशिअल ट्वीटर हैंडल) ने इस मस्जिद को लेकर एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में इस मस्जिद का बखान इस प्रकार हुआ, “हिंदू और इस्लामी वास्तुकला दोनों की विशेषता वाले देवल मस्जिद एक ऐसी विरासत है, दुर्लभ स्मारक वाली ऐसी संरचना है, जिसने खोजकर्ताओं को मोहित किया है।”

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अब हालाँकि, ये बात जाहिर है कि जिनकी आँखों पर धर्मनिरपेक्षता के नाम पर इस्लामिक पट्टियाँ बाँध दी गई हैं, वे इसे वाकई में एक धरोहर समझेंगे। लेकिन जिन्हें थोड़ा भी इस्लामिक बर्बरता और क्रूरता का भान है, वे समझ पाएँगे कि किस चालाकी से हिंदुओं के मंदिर पर ढाए गए जुल्म को संरचना का नाम देकर धरोहर बताया जा रहा है।

आंध्र प्रदेश के निजामाबाद जिले के बोधन में स्थित इस देवल मस्जिद का इतिहास काफी पुराना है। जैसा कि नाम से ही पता चलता है ये मस्जिद पहले एक मंदिर था। मगर मोहम्मद तुगलक ने दक्खन में अपने विजय अभियान के बाद इसकी संरचना में थोड़ा बहुत बदलाव करवाया और फिर इसे मस्जिद का नाम दे दिया। लेकिन इस दौरान इसकी दीवारों पर कई ऐसी कलाकृतियाँ छूट गईं, जिन्होंने इतिहासकारों को अपने मंदिर होने का प्रमाण दिया।

इतिहास के अनुसार, देवल मस्जिद पहले हिंदू-जैन मंदिर था, जिसका निर्माण राष्ट्रकूट के राजा इंद्र (तृतीय) ने 9वीं औ 10वीं सदी में कराया था। लेकिन तुगलक ने इस मंदिर को तोड़कर पहले खंडित किया और बाद में उसे मस्जिद का आकार दे दिया। बाद में हिंदुओं के पूजनीय शिवलिंग को पैरों के पास मढ़वाया।

इस मस्जिद का असली नाम इंद्रनारायण स्वामी हुआ करता था। कला इतिहासकार एमएस मेट ने इसका जिक्र अपनी किताब में भी किया कि आखिर कैसे एक विशाल मंदिर को मस्जिद में तब्दील किया गया। उन्होंने बताया कि तुलगक ने यहाँ से मूर्तियों को हटवाया और मेहराब रखवाया। मंदिर के शिखर को ध्वस्त किया गया और उसकी जगह गुँबद बनाए गए।

केवल इतिहासकार नहीं, बल्कि “मस्जिद” के भीतर रखा गया 11वीं शताब्दी का शिलालेख भी इस बात को संदर्भित करता है कि पहले ये ‘मस्जिद’ इंद्रनारायण का मंदिर था। लेकिन तुगलक के आक्रमण के बाद इसमें बदलाव हुआ।

बता दें कि इस मंदिर का जीर्णोद्धार 11वीं शताब्दी में जोगापय्या नाम के एक व्यक्ति ने किया था। उन्होंने उस समय भगवान विष्णु की एक प्रतिमा का अभिषेक किया था और एक गरुड़ स्तंभ बनवाया था।

ट्रू इंडोलॉजी द्वारा दी जानकारी के अनुसार, इस मस्जिद को आज भी वांडा संभल गुड़ी कहा जाता है। इस मस्जिद की दीवारों पर आज भी भगवान विष्णु के दशावतार देखे जा सकते हैं।

आइए अब उन परिस्थियों के बारे में जानते हैं, जिनके कारण ये विशालकाय मंदिर एक मस्जिद में तब्दील हुआ। दरसअल, 1323 में तुगलक खान ने बोधन पर आक्रमण किया। उस समय इसे काकतिया कमांडर सीतारामचन्द्र शास्त्री द्वारा संरक्षित किया जाता था। जिसके कारण उन्होंने तुगलक खान का तगड़ा प्रतिरोध किया। लेकिन आखिर में उन्हें हार माननी पड़ी और उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया।

तुगलक ने शास्त्री के सामने इस्लाम अपनाने और तुगलक के शासन को स्वीकारने की शर्त रखी। बाद में शास्त्री ने इस्लाम कबूल कर अपना नाम आलम खान कर लिया। लेकिन जैसे ही तुगलक की सेना वहाँ से गई शास्त्री ने दोबारा से हिंदुत्व अपना लिया। इसके बाद जब अगली दफा तुगलक की सेना ने बोधन पर आक्रमण किया उन्होंने अपने साथ कोई कैदी नहीं रखा। उन्होंने बोधन किले को घेरा और उसे ध्वस्त कर दिया। उन्होंने काकतिया कमांडर सीताराम चंद्र शास्त्री का सिर धड़ से अलग कर दिया और फिर इस मंदिर को देवल मस्जिद बना दिया।

इंडोनेशिया से आया इस्लामी प्रचारक दल, जहाँ घूमा वहाँ कोरोना के 13 मामले: मस्जिद के लोगों को खोजने में जुटी पुलिस

तेलंगाना में बुधवार देर शाम को कोरोना वायरस के सात नए मामले सामने आए। इसके बाद राज्य सरकार ने घोषणा करते हुए बताया कि तेलंगाना राज्य में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। वहीं सार्वजनिक स्वास्थ्य निदेशालय ने जानकारी दी कि कोरोना वायरस के सभी 7 नए मामले इंडोनेशिया से आए हैं, जोकि सभी इस्लामिक प्रचारक हैं।

ये सभी सात नए मामले एक सदस्य की रिपोर्ट पॉजीटिव मिलने के एक दिन बाद आए। यह सदस्य एक टीम का हिस्सा था। बताया जा रहा है कि 10 इस्लामिक प्रचारकों का समूह तीन दिन की करीमनगर की यात्रा पर था और ये सात लोग भी इसी ग्रुप से ही हैं। सभी का मंगलवार को परीक्षण किया गया। वहीं इस ग्रुप में तीन भारतीय भी थे, जो कि हैदराबाद के गाँधी अस्पताल में रहते थे।

इंडोनेशियाई से आए ग्रुप के बारे में बताया जा रहा है कि ये ग्रुप 22 फरवरी को नई दिल्ली आया था और इनमें से 10 भारतीय तीन मार्च को करीमनगर पहुँचे। इस ग्रुप ने आंध्र प्रदेश संपर्क क्रांति के कोच नंबर S9 में यात्रा की और रामागुंडम में उतर गया। इसके बाद यह ग्रुप मुकरमपुरा और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी क्षेत्रों की दो मस्जिदों में भी रहा। वहीं अपने धार्मिक अभियान के दौरान ये कस्बे के कुछ इलाकों में घूमे और कई लोगों से मिलने भी गए। इसी बीच विशेष शाखा पुलिस, जो कि शहर में विदेशी नागरिकों को ढूँढती थी, उन्हें जिला मुख्यालय के अस्पताल ले आई, जहाँ एक व्यक्ति को खाँसी, सर्दी और बुखार जैसे लक्षण दिखाई दिए।

स्वास्थ्य मंत्री इटाला राजेंदर ने कहा कि उन लोगों का पता लगाना बड़ा ही मुश्किल होगा, जो इंडोनेशियाई से आए लोगों के साथ निकट संपर्क में आए थे। हालांकि राज्य सरकार ने इस मामले के बारे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को पहले ही सूचित कर दिया है ताकि अन्य राज्यों में संपर्क ट्रेसिंग की कार्रवाई की जा सके।

वहीं देश में कोरोना के अब तक 150 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं और तीन लोगों की अलग-अलग राज्यों में मौत हो चुकी है। इसकी रोकथाम के लिए केन्द्र सरकार के साथ राज्यों ने अपने-अपने स्तर पर कई तरह की योजनाओं के साथ घोषणाएँ की है। वहीं अधिकांश राज्यों ने अपने यहाँ स्कूल, कॉलेज, मॉल, सिनेमा हॉल यहाँ तक कि मंदिरों को भी बंद कर दिया है।

उठाए जा सकते हैं 6 महीने के राशन, हमारे पास 646 लाख टन अनाज: कोरोना के ख़तरे को देखते हुए सरकार ने खोला खजाना

भारत में कोरोना वायरस के अब तक 151 मामले सामने आ चुके हैं। मोदी सरकार भी जनता के स्वास्थ्य व सुरक्षा को लेकर चिंतित है, जिसके तहत कई अहम घोषणाएँ की जा रही हैं। इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने जानकारी दी कि अप्रैल 1, 2020 तक पीडीएस के माध्यम से दिए जाने वाले अनाज में चावल 135.8 लाख टन और गेहूँ 74.6 लाख टन की आवश्यकता है। उन्होंने आगे जानकारी देते हुए बताया कि कुल 210.4 लाख टन अनाज की जरूरत है जबकि अभी सरकार के पास कुल स्टॉक 646.09 लाख टन स्टॉक है। मतलब कि सरकार के पास अनाज का 435.69 लाख टन अतिरिक्त स्टॉक मौजूद है।

पासवान ने आगे बताया कि इसमें चावल 272.90 लाख टन और गेहूँ 162.79 लाख टन है। केन्द्र के सर्कुलर के मुताबिक, राज्य सरकारें एक बार में 6 महीने तक के लिए पीडीएस का अनाज ले सकती हैं। अभी पंजाब सरकार 6 महीने का और ओडिशा सरकार एक बार में 2 महीने का कोटा ले रही है। केंद्र सरकार का कहना है कि अन्य सरकारें भी चाहें तो अनाज ले सकती हैं। इस मामले में सरकार राज्यों का हाथ नहीं रोकेगी। पासवान ने बताया:

“अनाज की न कोई कमी है और न इसको लेकर कोई घबराहट है। इसके अलावा खुले बाजार में भी OMSS के माध्यम से बिक्री हो रही है, जिसमें चावल का भाव 22.50 रुपए प्रति किलो है। किसी को घबराने की ज़रूरत नहीं है।” कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के चलते संभावित प्रतिबंध से सप्लाई बाधित होने पर गरीब लोगों को अनाज की कमी न हो, इसे देखते हुए यह फैसला लिया गया है। एक बार में ज्यादा राशन लेने की छूट दिए जाने से सेंट्रल स्टोरेज पर प्रेशर कम होगा क्योंकि कुछ मात्रा में गेहूँ खुले में रखे गए हैं।

केंद्र ने राज्य सरकार को एडवाइजरी जारी की है। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए राशन दुकानों पर भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए सुरक्षात्मक कदम उठाए जाएँ। फ़िलहाल, सरकार पीडीएस सिस्टम के तहत देश भर के 5 लाख राशन दुकानों पर बेनिफिशियरी को 5 किलो सब्सिडाइज्ड अनाज प्रत्येक महीने देती है। इस पर सरकार को सालाना 1.4 लाख करोड़ रुपए का खर्च आता है। नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत राशन दुकानों के जरिए अनाज सब्सिडाइज्ड रेट पर प्रदान किए जाते हैं। 3 रुपए प्रति किलो चावल, 2 रुपए प्रति किलो गेहूँ और 1 रुपए प्रति किलो मोटे अनाज बेचीं जाती है।

SAARC की ही तर्ज पर PM मोदी ने बुलाई G-20 देशों की बैठक, समूह के मुखिया देश ने मानी राय

पीएम मोदी ने रविवार (मार्च 15, 2020) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सार्क (SAARC) देशों की बैठक बुलाई थी। सार्क से जुड़े देशों ने पीएम नरेंद्र मोदी की पहल का स्वागत करते हुए कोरोना वायरस के कहर से निपटने के लिए एक-दूसरे की मदद को वक्त की जरूरत बताया।

इसके बाद पीएम मोदी ने सार्क देशों की तर्ज पर ही सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान के साथ टेलीफोन पर कोरोना संक्रमण से निपटने के उपायों पर बातचीत की। G-20 समूह के मौजूदा मुखिया (अध्यक्ष) सऊदी अरब ने इस संगठन के देशों की बैठक बुलाने के मोदी के सुझाव को स्वीकार कर लिया है।

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री ने महामारी को लेकर दक्षेस देशों के बीच एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आयोजित करने की भारत की हालिया पहल के बारे में बताया।

यह बैठक वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिए होगी और इसमें एक दूसरे से अनुभवों को साझा करने और आगे एक सामूहिक रणनीति बनाने पर जोर होगा। साथ ही वैश्विक अर्थव्यवस्था को बचाने की रणनीति पर भी चर्चा होगी।

पीएम मोदी और प्रिंस सलमान ने इस पर सहमति व्यक्त की कि सऊदी अरब के नेतृत्व में इसी तरह की कवायद जी-20 देशों के समूह की ओर से भी की जानी चाहिए। गौरतलब है कि सऊदी अरब मौजूदा समय जी-20 समूह का अध्यक्ष है।

गौरतलब है कि सार्क देशों में कोरोना वायरस से निपटने के लिए COVID-19 इमजेंसी फंड बनाने की घोषणा करते हुए पीएम मोदी ने भारत की ओर से इसमें 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 74 करोड़ रुपए) देने का ऐलान किया था।

पीएम मोदी से वार्ता के बाद मंगलवार को देर शाम सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित G-20 समूह के कार्यालय की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि कोरोना वायरस पर विशेष बैठक अगले हफ्ते बुलाई गई है ताकि इस महामारी से उत्पन्न स्थिति व चुनौतियों से लड़ने की एक साझा वैश्विक प्रयास हो सके।

G-20 में दुनिया के इस समय सबसे प्रभावशाली 20 देश शामिल हैं और इसका गठन वर्ष 2007-08 के वैश्विक मंदी के बाद किया था। उसके पहले तक दुनिया के सर्वशक्तिशाली सात देशों का एक संगठन समूह-7 काम करता था।

कोरोना है फिर भी घर में रहो, ठीक हो जाओगे, हॉस्पिटलों में लाइन मत लगाओ: इमरान का अपने देशवासियों को सन्देश

कोरोना वायरस से पूरी दुनिया तबाह है और जिसे भी जरा सा भी इसके लक्षण दिख रहे हैं, उसे तुरंत अस्पताल में चेकअप कराने की सलाह दी गई है। लेकिन, पाकिस्तान में इसका उलटा हो रहा है। वहाँ के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान का कहना है कि जिसे भी कोरोना वायरस हो, वो अपने घर में ही रहे और बाहर न निकले। लोगों का पूछना है कि अगर ऐसा तो फिर मरीज अपना इलाज कैसे कराएँगे? इमरान ख़ान ने अपने लोगों को न घबराने की सलाह दी है और चेताया है कि कोरोना वायरस के प्रसार को रोकना असंभव है।

लेकिन, साथ ही इमरान ने ये भी कहा है कि पाकिस्तान बाकी देशों की तरह पूरी तरह लॉकडाउन में नहीं जा सकता क्योंकि इससे उसकी अर्थव्यवस्था चौपट हो जाएगी। पाकिस्तान में अब तक कोरोना वायरस के 245 मामले सामने आ चुके हैं। सिंध प्रांत में इसका कुछ ज्यादा ही प्रकोप है, जहाँ इसके 172 मामले सामने आ चुके हैं। इन सबके बीच इमरान का कहना है कि पाकिस्तान के बड़े शहर लॉकडाउन की स्थिति में नहीं जा सकते।

इमरान ख़ान ने ये कह कर अपने ही देशवासियों को सकते में डाल दिया है कि अगर ज्यादा लोग कोरोना का शिकार हुए तो देश की स्वास्थ्य व चिकित्सा व्यवस्था धड़ाम हो जाएगी। इमरान ने कहा कि जो वृद्ध लोग हैं, सिर्फ उन्हें ही तुरंत मेडिकल अटेंशन देने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि जो भी कोरोना वायरस के शिकार हुए हैं, उनमें से 97% पूरी तरह ठीक हो जाएँगे और 90% लोगों को नार्मल फ्लू की तरह ही बीमारी होगी, जिन्हें डरने की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी चीजें बंद हो गई तो लोग भूखे मरेंगे।

उन्होंने पाकिस्तान को सम्बोधित करते हुए कहा कि अगर 4-5% मरीज भी बाहर निकले तो हज़ारों संक्रमित होकर बीमार पड़ जाएँगे। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वो दौड़ कर मेडिकल टेस्ट कराने हॉस्पिटल न जाएँ। अमेरिका का उदाहरण देते हुए ख़ान ने दावा किया कि किसी भी देश के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि सर्दी-जुकाम के शिकार सभी लोगों का मेडिकल टेस्ट कराया जा सके। अपने ही पीएम की ऐसी सलाह से पाकिस्तानी हैरान हैं

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ जानें यहाँ: सूचनाएँ, जानकारियाँ, लिंक्स, हेल्पलाइन नंबर्स और संक्रमित लोगों की संख्या

COVID-19 वायरस से जुड़ी ख़बरों कि लाइव जानकारी

भारत में अब तक कोरोना वायरस के कुल 151 मामले सामने आ चुके हैं। पीड़ितों में 25 विदेशी नागरिक हैं। उत्तराखंड में राज्य सरकार ने कर्मचारियों को घर से काम करने के आदेश जारी किए। आदेश में कहा गया है कि बहुत जरूरी होने पर कर्मचारियों को ऑफिस में बुलाया जाए। वहीं, बेंगलुरु में दो नए केस मिलने के बाद देश में संक्रमितों की संख्या 151 हो गई है। इनमें 25 विदेशी हैं। भारत में कोरोना वायरस के कारण अब तक तीन लोगों की मौत भी हो चुकी है। इसके साथ ही भारतीय सेना का एक जवान भी कोरोना टेस्ट में पॉजिटिव पाया गया है। कोरोना की वजह से कई बड़े और छोटे शहरों में लोग घरों में रहने को मजबूर हैं और लॉकडाउन घोषित कर दिए जा चुके हैं। स्कूल-कॉलेज, मॉल, सिनेमाहॉल बंद कर दिए गए हैं ।

भारत में कुल संक्रमित 151
भारत में कुल सक्रीय संक्रमित134*
भारत में कुल रिकवरी14
संक्रमण से भारत में कुल मृत्यु3
भारत में पीड़ित विदेशी नागरिक 25
विश्वभर में संक्रमितों की कुल संख्या206,845 *
विदेशों में वायरस से संक्रमित भारतीय 276
विश्वभर में संक्रमण से रिकवर कर लिए गए लोग 82,889*
पूरे विश्व में अब तक संक्रमण से हुई कुल मौतें 8,272*

नोट- तारांकित (*) किए गए आँकड़े लगातार बदल रहे हैं, जिन्हें कि अपडेट किया जाता रहेगा।

यह भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आँकड़ों पर आधारित हैं। विश्वभर के अन्य आँकड़े worldometers(डॉट)info से लिए गए हैं।
कोरोना वायरस से समान्धित हेल्पलाइन नम्बर – +91-11-23978046
टोल फ्री नम्बर – 1075
हेल्पलाइन मेल आईडी – ncov19[at]gov[dot]in

वायरस के संक्रमण से बचने के लिए सरकार द्वारा सामाजिक उपक्रमों, गैर जरुरी यात्रा और भीड़भाड़ वाली जगहों से दूर रहने के सख्त निर्देश दिए जा चुके हैं।

विदेश राज्‍य मंत्री वी मुरलीधरन ने बुधवार (मार्च 18, 2020) को लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि विदेश में इस समय 276 भारतीय कोरोना वायरस से संक्रमित हैं। ईरान में सबसे ज्यादा 255 मामले सामने आए हैं। इनके अलावा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में 12, इटली में 5, हांगकांग, कुवैत, रवांडा और श्रीलंका में एक-एक भारतीय इस गंभीर वायरस से संक्रमित हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार को ईरान से 53 भारतीयों का चौथा दल भारत लौटा और इसके साथ ही कोरोना वायरस से प्रभावित इस देश से निकाले गए लोगों की कुल संख्या 389 हो गई है।

कोरोना से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचना एवं जानकारी-

सरकार द्वारा जारी एडवाइजरी (पीडीएफ)
इन्डियन काउँसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च द्वारा जारी गाइडलाइन्स (पीडीएफ)
यात्रा सम्बन्धी सलाह (पीडीएफ)

कब करवाएँ कोरोना कि जाँच –

मास्क कब पहनें –

घर पर कैसे करें खुद को क्वारंटाइन –

कब होता है खुद को घर पर क्वारंटाइन करना जरुरी –

मोदी हमसे डरते हैं, हम कोरोना से नहीं डरते, ये अल्लाह का अज़ाब है, कुरान हमारी रक्षा करेगा: शाहीन बाग की बुर्कानशीं महिलाएँ

दिल्ली के शाहीन बाग में सीएए के खिलाफ पिछले करीब तीन महीनों से महिला प्रदर्शनकारियों का धरना जारी है। इस बीच कोरोना वायरस के लगातर बढ़ते प्रकोप से पूरी दुनियाँ बंद है वहीं शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी धरना स्थल को खाली करने के लिए तैयार नहीं है। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक देश भर में घातक कोरोना वायरस फैलने के बावजूद, शाहीन बाग में CAA विरोधी प्रदर्शनकारियों ने यह कहते हुए जगह खाली करने से इनकार कर दिया कि वे कोरोना वायरस से डरते नहीं हैं।

धरने पर पहुँची महिलाओं से टाइम्स नाउ के संवाददाता ने बात की, जिस पर एक शाहीन बाग की एक महिला प्रदर्शनकारी ने कहा कि यह अल्लाह का अज़ाब है, मैं कोरोना वायरस के फैलते प्रकोप से जरा भी डरती हूँ। अगर सरकार को हमारी चिंता है, तो उन्हें पहले ये काला कानून वापस लेना होगा। नीचे संलग्न ट्वीट में आप वीडियो देख सकते हैं।

इस बीच महिला प्रदर्शनकारी ने मोदी पर भी निशाना साधा और कहा कि मोदी सरकार उनसे डरती है और कहा कि शाहीन बाग में सभाओं को प्रतिबंधित करने के लिए सरकार का हालिया निर्देश उनके द्वारा जारी आंदोलन को कमजोर करने की ही एक चाल है। बुर्का-पहने महिला ने एक बार फिर कहा कि हम कोरोना वायरस से डरते नहीं हैं।

इसके बाद चैनल के रिपोर्टर ने सवाल किया कि इस तरह के बड़े पैमाने पर यहाँ एकत्र होने के कारण प्रत्येक प्रदर्शनकारी को वायरस फैलने का खतरा हो सकता है, इसके जवाब में महिला प्रदर्शनकारी ने कहा कि वायरस से संक्रमित होने का जोखिम तो उनके घरों में भी भी होगा, इसलिए किसी भी कीमत पर धरना स्थल को खाली करने का सवाल नहीं है। एक अन्य बुर्का पहने प्रदर्शनकारी महिला ने भी कुछ इसी तरह अपनी सहयोगी की बात को आगे बढ़ाया और कहा कि वे अरविंद केजरीवाल द्वारा की गई अपील का हम पालन कर रहे हैं।

दरअसल, हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 1897 में महामारी रोग अधिनियम लागू किया था और अत्यधिक संक्रामक रोग के प्रसार को सीमित करने के लिए प्रतिबंधों का एक नया सेट घोषित किया था। इसके बाद मुस्लिम प्रदर्शनकारियों ने फैसला किया कि कम लोग ही धरने पर आएँगे, लेकिन न तो धरने को समाप्त करेंगे और न ही घरना स्थल को खाली करेंगे।

केजरीवाल सरकार की अपील के बाद भी शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों का सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। इक तरफ चीन के बुहान शहर से तेजी से फैली महामारी ने दुनियाँ को बंद कर दिया है। तो वहीं दूसरी ओर शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी धरना स्थल पर कुरान पढ़ रहे हैं। यह मानते हुए कि अल्लाह उन्हें कोरोना के संकट से बचाएगा।