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आपकी भाषा ठीक नहीं, कल बहुमत साबित करें वरना सरकार अल्पमत में मानी जाएगी: कमलनाथ को गवर्नर से झटका

मध्य प्रदेश में बहुमत साबित करने से लगातार बच रहे मुख्यमंत्री कमलनाथ को राज्यपाल लालजी टंडन ने तगड़ा झटका दिया है। राज्यपाल ने कहा है कि वो मंगलवार (मार्च 17, 2020) को सदन में बहुमत साबित करें। अगर ऐसा नहीं होता है तो माना जाएगा कि राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार के पास बहुमत नहीं है और वो अल्पमत में है। कमलनाथ को पहले 16 मार्च को बहुमत साबित करने को कहा गया था लेकिन सत्र शुरू होने के बाद इसे 26 मार्च तक स्पीकर ने स्थगित कर दिया। इससे ये समझा जा रहा था कि कॉन्ग्रेस के पास अब अतिरिक्त 10 दिन हैं। लालजी टंडन ने पहले ही नियमानुसार कार्यवाही करने की बात कही थी।

राज्यपाल ने कमलनाथ को लिखा पत्र

कमलनाथ ने भी राज्यपाल टंडन को पत्र लिखा था, जिस पर राज्यपाल ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री द्वारा उन्हें लिखे गए पत्र की भाषा अशोभनीय है और संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कमलनाथ ने सर्वोच्च न्यायालय के जिस निर्णय का जिक्र अपने पत्र में किया है, वो वर्तमान परिस्थितियों में लागू नहीं होता। उन्होंने कहा कि इसका निर्णय अंतिम रूप से फ्लोर टेस्ट के बाद ही हो सकता है, ऐसा सर्वोच्च न्यायालय ने अपने अनेक निर्णयों में कहा है।

इधर विधानसभा सत्र स्थगित होने के बाद भाजपा भी सुप्रीम कोर्ट पहुँच गई है। पार्टी की माँग है कि जल्द से जल्द फ्लोर टेस्ट कराया जाए। जबकि कमलनाथ सरकार 16 विधायकों के इस्तीफे के बाद अल्पमत में लग रही है। 6 अन्य विधायकों ने भी इस्तीफा दिया है, जिसे स्वीकार नहीं किया गया है। कॉन्ग्रेस के कुल 22 विधायक भाजपा के खेमे में जा मिले हैं।

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कश्मीरियों को सड़क, पानी नहीं चाहिए, इंडियन आर्मी को भगाएँगे: हिजबुल मुजाहिदीन की ‘ऑडियो धमकी’

जम्मू कश्मीर के अधिकारियों द्वारा घाटी में सोशल मीडिया के उपयोग या दुरुपयोग का मूल्यांकन करने के दो दिन पहले पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन ने अपना पहला ऑडियो क्लिप जारी किया। अधिकारियों द्वारा 4 मार्च को घाटी में मोबाइल यूजर्स के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध हटाए जाने के बाद से यह पहला ऑडियो है।

16 मिनट के इस ऑडियो क्लिप में, हिजबुल चीफ कमांडर रियाज नाइकू को अपने कैडरों को उत्तेजित करते हुए सुना जा सकता है। वह अपने कैडरों से कहता है कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने से भारतीय सुरक्षा बलों के खिलाफ उनकी लड़ाई में कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और उनका संगठन भारतीय अर्धसैनिक बलों और सेनाकर्मियों को निशाना बनाना जारी रखेगा।

इस क्लिप में हिजबुल का प्रमुख कमांडर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का सीधा संदर्भ देता है और जम्मू-कश्मीर के लोगों से कश्मीर के लिए पीएम मोदी की विकास नीतियों को वापस लौटाने के लिए कहता है। सुरक्षा बलों द्वारा टॉप 10 वॉन्टेड आतंकवादियों में से एक रियाज नाइकू कहता है, “सड़क, पानी, सोशल मीडिया हमारे लक्ष्य नहीं हैं… भारत अनुच्छेद 370 और सोशल मीडिया प्रतिबंध जैसे विभिन्न ट्रिक्स का उपयोग करके इसके डेमोग्राफी को बदलना चाहता है। यह पाकिस्तान और कश्मीर को हथियार उठाने के लिए मजबूर करता है। लेकिन हम अभी भी लड़ेंगे।”

इसके साथ ही ऑडियो में नाइकू हाल ही में रिहा हुए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला का उदाहरण देते हुए उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती का भी उल्लेख करता है। हिजबुल प्रमुख कमांडर ने कहा कि भारत सरकार ने इन राजनेताओं का ‘यूज एंड थ्रो’ किया। उसने आगे कहा कि दुनिया कश्मीर के घटनाक्रमों को देख रही है और भारतीय सेनाओं को कश्मीर छोड़ना होगा जैसे अमेरिका अफगानिस्तान से बाहर निकल गया।

यह ऑडियो जम्मू और कश्मीर के अधिकारियों द्वारा घाटी में सोशल मीडिया के उपयोग या दुरुपयोग का मूल्यांकन करने के दो दिन पहले आया था। अधिकारियों ने 4 मार्च को सोशल मीडिया का उपयोग बहाल करते हुए, 17 मार्च को सेवाओं को बहाल करने की व्यावहारिकता का मूल्यांकन करने के लिए एक समय सीमा निर्धारित की थी। कल यह तय किया जाएगा कि सोशल मीडिया पर प्रतिबंध 17 मार्च के बाद जारी रहेगा या फिर हटा लिया जाएगा।

13 फरवरी को जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने पाकिस्तान प्रायोजित अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के स्वास्थ्य के बारे में अफवाहों को रोकने के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को निलंबित कर दिया था। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट ने 90 वर्षीय गिलानी की तबीयत खराब होने का झूठा दावा किया था। 17 फरवरी को कश्मीर साइबर पुलिस ने घाटी में सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर एक FIR दर्ज किया था।

सुरक्षा अधिकारियों ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हालाँकि ऑडियो प्रभाव ज्यादा नहीं है, लेकिन अगर आतंकियों द्वारा इसी तरह से सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया जाता रहेगा तो सुरक्षा के मद्देनजर इसे बंद करना होगा। वहीं कश्मीर के आईजी ने हिजबुल चीफ कमांडर रियाज नाइकू की धमकियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमने नाइकू को अनंतनाग के रूप में जवाब दिया है, जहाँ हिजबुल और लश्कर दोनों के चार शीर्ष आतंकवादी ढेर हो गए हैं।”

बता दें कि हिजबुल चीफ कमांडर रियाज नाइकू पुलवामा का एक A++ श्रेणी का आतंकवादी है। इसके साथ ही वह भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा वॉन्टेड शीर्ष 10 आतंकवादियों में से एक है। नाइकू 2012 से 2020 के बीच एक दर्जन से अधिक नागरिकों, पुलिस और विशेष पुलिस अधिकारियों की हत्या और अपहरण के लिए वॉन्टेड है।

चाकू गोद कर मार डालूँगा: NSUI के छात्र नेताओं ने प्रोफेसरों को दी माँ-बहन की गाली, माँ सरस्वती को कहे अपशब्द

गुजरात यूनिवर्सिटी सीनेट चुनाव जितने के बाद यूँ लग रहा है मानो NSUI (कॉन्ग्रेस का छात्र संगठन) के लोग इस जीत को हज़म नहीं कर पा रहे हैं। बता दें कि हाल ही में गुजरात यूनिवर्सिटी सीनेट में एनएसयूआई की बड़ी जीत हुई थी और मीडिया ने भी इसे बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया था। ये एक ऐसी ख़बर है जिसे स्थानीय मीडिया से लेकर राष्ट्रीय मीडिया में खूब तवज्जो मिली। चुनाव जीतने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कॉन्ग्रेस की वाहवाही भी हुई लेकिन इस खबर का दूसरा हिस्सा हम तक नहीं पहुँचा या पहुँचाया नहीं गया। इसे जानने के बाद आपको इस बात का अंदाज़ा हो जाएगा कि आने वाला समय गुजरात यूनिवर्सिटी के छात्रों, प्रोफ़ेसरों के लिए कितना भयानक है!

जीत के नशे में मदहोश NSUI के नेता डॉ. इन्द्रविजय सिंह गोहिल, अहर्निश मिश्रा, सिद्धराज सिंह चौहान ने यूनिवर्सिटी के दो प्रोफ़ेसरों डॉ. अतुल ऊनागर एवं डॉ. मुकेश खटीक को कॉल-मेसेज कर करियर ख़त्म करने, चाकू गोदने, हाथ-पैर-जबड़ा तोड़ देने की धमकियों के साथ असंख्य बार माँ-बहन की गालियाँ सुनाई। साथ ही पी.एच.डी की छात्रा के लिए बारंबार र$# जैसे आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करने से भी गुरेज़ नहीं किया। डॉ. अतुल ने अपनी समझ से अहर्निश मिश्रा एवं सिद्धराज सिंह चौहान के कॉल को रिकॉर्ड कर लिया जिसके बाद यह मसला सबके सामने आया है। पूरी रिकॉर्डिंग के दौरान बारंबार ये गुंडे प्रोफ़ेसर लगातार माँ-बहन की गालियाँ देते हुए सुनाई देते हैं।

कॉल के दौरान NSUI के दोनों नेता जब लगातार माँ-बहन की गालियाँ बरसा रहे थे तब डॉ.अतुल कह रहे थे कि “आपको शुभकामनाएँ, खूब काम करो, खूब विकास करो, माँ-सरस्वती आपके मुख पे बिराजमान हो, माँ-सरस्वती आपको खूब-खूब ज्ञान दें!” इस दौरान NSUI नेता अहर्निश मिश्रा बार-बार प्रोफ़ेसर पर यह बोलने का भी दबाव बना रहा था कि “बोल, मैं अतुल, मेरी माँ का भो#$@।” चूँकि डॉ. अतुल गुजरात यूनिवर्सिटी में संस्कृत के प्रोफेसर हैं, इसलिए कॉल के दौरान संस्कृत भाषा का मज़ाक उड़ाते हुए बैकग्राउंड में एक पूरा समूह चटख़ारे ले रहा था- ये साफ़ सुना जा सकता है।

कॉल के दौरान NSUI के गुंडे लगातार कह रहे थे कि “रिकॉर्ड कर और जिसको बताना है, बता देना।” उनके ऐसा कहने से समझा जा सकता है कि इन गुंडों की हौसलाबजाई के पीछे एक पूरा सिस्टम काम कर रहा है। और इसी सिस्टम के बूते ये लोग यूनिवर्सिटी कैंपस में वीभत्स भाषा, गाली-गलौच एवं जान से मारने की धमकियाँ दे रहे हैं, खुल्लम-खुल्ला बगैर किसी डर के! कॉल के बीच एक बार जब डॉ. अतुल ने कहा कि “भगवान हमारे साथ है क्योंकि हम तो माँ सरस्वती की उपासना करते है,” तब अहर्निश मिश्रा ने भगवान के लिए भी अपशब्द प्रयोग किया। उसने भगवान के लिए “भगवान भो#@के” जैसे आपत्तिजनक गाली का प्रयोग किया।

स्थानीय अख़बारों ने इस ख़बर को छापा लेकिन मेनस्ट्रीम मीडिया ने नज़रअंदाज़ किया

पोलिटिकल साइंस के प्रोफेसर डॉ. मुकेश खटीक को भी NSUI नेता डॉ. इन्द्रविजय सिंह गोहिल ने व्हाट्सप्प पर माँ-बहन की गालियाँ देकर चाकू गोदकर मारने की धमकियाँ दी। इस वाकये के बाद दोनों प्रोफेसरों ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। NSUI की गुंडागर्दी के इस पूरे वाकये के बाद डॉ. अतुल ने कहा:

“अत्यधिक भय का माहौल है। उनके द्वारा मुझे कई तरीकों से शारीरिक एवं मानसिक नुकसान पहुँचाए जाने की आशंका है। मैं बहुतों की आवाज़ हूँ। ईश्वर से मुझे सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली है लेकिन यदि इस प्रेरणा का परिणाम नहीं मिलता है तो गुंडे-माफ़ियाओं को और ताक़त मिलेगी। मुझे व्यक्तिगत नुकसान होगा तो आगे असत्य के विरोध में आवाज़ उठाने की हिम्मत करने से लोग डरेंगे।”

लोकल गुजराती न्यूज़ चैनलों ने इस ख़बर को चलाया

गुजरात यूनिवर्सिटी सीनेट चुनाव में NSUI की जीत के तुरंत बाद जिस प्रकार से ‘डर का माहौल’ बनाया गया है, इस पर ‘गुजरात यूनिवर्सिटी शैक्षिक संघ’ ने कुलपति को आवेदन देकर कैंपस को भयमुक्त करने की बात कही है। अब देखना ये है कि इस मामले में यूनिवर्सिटी और पुलिस-प्रशासन क्या कार्रवाई करता है क्योंकि यहाँ प्रोफेसरों की जान का सवाल है।

पेट्रोल बम लेकर घूम रहे दंगाइयों से निर्दोष छात्रों को बचाने के लिए जामिया लाइब्रेरी में घुसना पड़ा: दिल्ली पुलिस

नए नागरिकता कानून के विरोध के नाम पर जामिया विश्विद्यालय में हुई हिंसा पर दिल्ली पुलिस द्वारा दिल्ली के कोर्ट में फाइल की गई ‘एक्शन टेकेन रिपोर्ट’ में दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि वह लाइब्रेरी में फँसे हुए मासूम स्टूडेंट्स को बचाने के लिए ही जामिया लाइब्रेरी में प्रवेश की थी।

मीडिया के अनुसार, यह रिपोर्ट पुलिस ने मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट रजत गोयल के आदेश के बाद दाखिल की। याद रहे कि मजिस्ट्रेट गोयल ने दिल्ली पुलिस को ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ फाइल करने का आदेश जामिया प्रशासन की उस याचिका पर दिया था, जिसमें कोर्ट से दिल्ली पुलिस के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अपील की गई थी।

इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि दिल्ली पुलिस ने न सिर्फ बेरहमी से विश्वविद्यालय स्टूडेंट्स को पीटा, उन्हें गालियाँ दीं, अपमानजनक टिप्पणियाँ कीं बल्कि बगैर किसी ठोस कारण के उसने लाइब्रेरी के मेन गेट को तोड़ उसके भीतर आँसू गैस के गोले भी छोड़े।

इन आरोपों पर कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में दिल्ली पुलिस ने कहा कि कानून और व्यवस्था को बरकरार रखने और यूनिवर्सिटी तथा लाइब्रेरी के भीतर फँसे निर्दोष स्टूडेंट्स को बचाने के लिए उन्हें जरूरी कदम उठाने पड़े, जिसमें लाइब्रेरी में घुसना भी शामिल था। इससे पहले जामिया मिलिया इस्लामिया ने कोर्ट से कहा था कि तमाम कोशिशों और प्रार्थनाओं के बाद भी दिल्ली पुलिस ने न तो किसी भी दोषी पुलिस अधिकारी के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज की है और न ही किसी के खिलाफ किसी भी प्रकार की जाँच शुरू की है।

दिल्ली पुलिस ने अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट में यह भी कहा है कि पेट्रोल बम लिए घूम रहे दंगाइयों और फँसे हुए निर्दोष स्टूडेंट्स के बीच फर्क करना बेहद मुश्किल था, क्योंकि उस समय अँधेरा हो चुका था। इसलिए उसने वहाँ मौजूद सभी को हाथ ऊपर कर के बाहर आने का आदेश दिया।

अपनी अर्जी में जामिया प्रबंधन ने आरोप लगाया था कि दिसंबर हिंसा में विश्विद्यालय की सरकारी सम्पत्ति को भारी नुकसान पहुँचाने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ वीडियो और फोटोग्राफ मौजूद हैं। जबकि पुलिस ने कोर्ट में दाखिल अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दंगाइयों ने यूनिवर्सिटी कैंपस में मौजूद लाइट्स को तोड़ दिया था जिसके कारण दंगाइयों और मासूम स्टूडेंट्स के बीच फर्क करना मुश्किल था। इसके अतिरिक्त पुलिस ने जामिया हिंसा में अपने कई अधिकरियों और कर्मियों के घायल होने की बात भी कही है। इस मामले पर अगली सुनवाई अब 7 अप्रैल को होगी।

सदन के बाहर निकलते ही 50 को बना दिया 500: राहुल गाँधी के गणित का फिर उड़ा मजाक, ख़ुद के ही आँकड़ों में उलझे

राहुल गाँधी के आँकड़ों ने एक बार फिर से कॉन्ग्रेस की किरकिरी करा दी है। लोकसभा में 50 विलफुल डिफॉल्टर्स का नाम पूछने के बाद संसद के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए राहुल ने एक नहीं कई बार कहा कि उन्होंने ‘500’ डिफॉल्टर्स का नाम पूछा है। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने सोमवार (मार्च 16, 2020) को लोकसभा में बैंक लूट का मुद्दा उठाते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की। हालाँकि वह खुद एक बार फिर आँकड़ों के जाल में उलझ गए।

संसद से बाहर निकलने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए राहुल गाँधी ने कहा, “जब आप संसद में सवाल पूछते हैं तो मंत्री जवाब देते हैं फिर आप दूसरा सवाल पूछते हैं। लेकिन, आज मैंने सवाल पूछा, मंत्री ने जवाब नहीं दिया। मैंने पूछा था कि सबसे बड़े ‘500’ डिफॉल्टर्स कौन हैं। स्पीकर की ड्यूटी है कि मेरे अधिकारों की रक्षा करें, लेकिन उन्होंने मुझे दूसरा सवाल पूछने नहीं दिया। यह मेरे अधिकारों का हनन है। यह गलत है।”

राहुल गाँधी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने मजे लेने शुरू कर दिए। उन्होंने इसके जवाब में एक से एक प्रतिक्रियाएँ दीं।

एक यूजर ने लिखा, “पर संसद में तो पप्पू 50 की बात कर रहा था अब 500 हो गए। फिर फिसल गई जबान।”

एक ने लिखा, “तू और तेरी मम्मी पहले नपोगे, अगर लिस्ट पब्लिक हो गई तो!”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “5000 हो जाएगा कल तक, धैर्य रखो।”

एक यूजर ने लिखा कि भाई पहले ये तय कर 50 या 500…तेरे दरबारी पत्रकार तो 50 कह रहे हैं।

प्रकाश झा नाम के एक यूजर ने लिखा, “इसको समझ नहीं आता है कि वो पार्लियामेंट है, वो इसका घर नहीं है। अधिकारों के साथ ही कुछ जिम्मेदारियाँ भी होती हैं।”

एक यूजर ने लिखा, “एक-दो सवाल घंटे भर रट्टा मारकर आए थे राहुल बाबा वो भी नहीं पूछने दिया, अच्छे खासे मनोरंजन का मूड खराब कर दिया हमारा।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “राहुल जी अनुराग ठाकुर ने आपको जवाब दिया है। जाकर चेक कर लीजिए। आपकी आदत झूठ बोलने की है तो इसमें सरकार क्या कर सकती है आपको तो सरकार पर विश्वास ही नही है। आपको संसद पर भी विश्वास नहीं है। आपको केवल भ्रम वाली राजनीति करने पर विश्वास है।”

एक ने लिखा, “देश को 50 साल लूटने वाले आज कर्ज की बात कर रहे हैं।” वहीं एक अन्य ने कहा, “अपने चाचा चिदम्बरम से जो गबन के आरोप में जेल में रहे और अब जमानत पर बाहर आए हैं। उनसे पूछ लेते वो तुम को बेहतर समझा देते।”

ISIS की दो जिहादी औरतें अफगानिस्तान से लौटना चाहती हैं भारत, बशर्ते उन्हें जेल न हो

ISIS में शामिल होने के लिए केरल से भागकर अफगानिस्तान जाने वाली 2 जिहादी औरतें अब भारत लौटना चाहती हैं। इनका नाम निमिषा उर्फ़ फातिमा और सोनिया उर्फ़ आयशा है। इनका कहना है कि इनके शौहरों को अफगानिस्तान में मार दिया गया है।

सोनिया ने बताया कि वह अफगानिस्तान में अपने जीवन से बहुत असंतुष्ट है। वे अपने पति के परिवार के पास वापस लौटना चाहती है। जबकि निमिषा का कहना है कि वो अपनी माँ बिंदु संपथ से मिलना चाहती है, बशर्ते उसे गिरफ्तार न किया जाए।

गौरतलब है कि पिछले साल 900 आतंकियों ने अफगान सुरक्षाबलों के आगे सरेंडर किया था। इनमें से करीब 10 आतंकी भारत से थे और इनमें भी अधिकतर केरल से थे। साल 2016 में कई आतंकी केरल से अफगान गए थे। कुछ अपने साथ अपने पूरे परिवार को ले गए थे, जबकि कुछ अकेले चले गए थे।

इन आतंकियों ने अफगानिस्तान के पूर्वी प्रान्त नंगरहार में सरेंडर किया था, जहाँ अफगान सुरक्षाबलों ने ISIS के ख़िलाफ़ अभियान छेड़ा हुआ था। ये अभियान 12 नवंबर को जारी हुआ था। जिसके शुरु होने के कुछ ही घंटों के बाद 93 आतंकियों ने सुरक्षाबल के आगे आत्मसमर्पण कर दिया था।

यहाँ बता दें, कि ऐसी स्थिति में भारत आने की इच्छा जताने वाली दोनों लड़कियाँ भी भारत से 2016 में ISIS ज्वाइन करने के लिहाज से अफगानिस्तान गई थीं। इन दोनों लड़कियों ने कॉलेज के समय में इस्लाम धर्म अपनाया था। बाद में निमिषा ने ईसा से निकाह किया था और सोनिया ने अब्दुल राशिद से।

निमिषा एक डेंटल स्टूडेंट थी। जो केरल के तिरुवनंतपुरम इलाके की रहने वाली थी। इसने बिना अपनी माँ को बताए बेक्सिन नामक एक ईसाई से शादी की थी। बाद में दोनों ने इस्लाम कबूल कर लिया था और कट्टरपंथियों के बहकावे में आकर कट्टरपंथ की राह पर चल पड़े थे। निमिषा उन 21 लोगों में से थी जिन्होंने ISIS ज्वाइन करने के लिए केरल छोड़ा था।

इसके अलावा इंजीनियर अब्दुल राशिद और उसकी एमबीए पत्नी सोनिया उर्फ आयशा दोनों पीस एड्यूकेशनल फाउंडेशन के लिए काम करते थे। जिसकी देखरेख में 10 स्कूल चलते थे। इस दंपत्ति पर आरोप था कि इन्होंने पदन्ना, पलक्कड़ और त्रिकिपुर में 22 छात्रों को कट्टरपंथ के राह पर ढकेला था।

813 लोगों के संपर्क में आया इटली से लौटा कोरोना संक्रमित मरीज, माँ की मृत्यु भी कोरोना वायरस के ही कारण!

हाल ही में इटली से लौटे 46 वर्षीय व्यक्ति को कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया। उक्त व्यक्ति 20 फरवरी को भारत लौटा था। उसने इस बीच एयरपोर्ट से लेकर दिल्ली के जनकपुरी वाले रूट पर सफर किया और करीब 813 लोगों के संपर्क में आया। भारत में ये संख्या किसी भी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों की संख्या में अब तक सबसे अधिक है।

गौरतलब है कि इससे पहले इसी व्यक्ति की माँ की मृत्यु कोरोना वायरस के कारण अस्पताल में बीते शुक्रवार को हुई थी। जानकारी के मुताबिक मृतक महिला राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती थी। संक्रमित महिला का इलाज दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में चल रहा था, जहाँ शुक्रवार (मार्च 13, 2020) को उसने दम तोड़ दिया था। महिला को डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की भी समस्या थी। 

जानकारी के अनुसार 46 वर्षीय व्यक्ति हाल ही में यूरोप और इटली से बिजनेस टूर करके भारत आया था। इस दौरान जब वो एयरपोर्ट पर उतरा तो वह कई लोगों के संपर्क में आया। एयरपोर्ट पर उसे थर्मल सेंसर से चेक किया गया। लेकिन वहाँ जब उसका तापमान नॉर्मल आया तो उसे आगे निकास द्वार से जाने को कह दिया गया। उसने परिजनों के अनुसार, “वह अपने 6 सहकर्मियों के साथ सफर कर रहा था और सबके टेस्ट नेगेटिव थे। उसपर भी कोई संकेत नहीं पता चले थे, जब तक उसे बुखार नहीं हुआ।”

रिपोर्ट्स के अनुसार, संक्रमित व्यक्ति की रिपोर्ट आने से पहले वह अपनी पत्नी और दो बच्चों के संपर्क में आया था। जबकि उसकी माँ उसके छोटे भाई के साथ उसी इलाके में लेकिन दूसरे घर में रहती थी, जिन्होंने बीमार होने से कुछ दिन पहले अपने बेटे से मुलाकात की थी।

अब हालाँकि, व्यक्ति के परिजनों के अनुसार, परिवार के अन्य सदस्य भी जाँच में नेगेटिव पाए गए हैं। लेकिन जहाँ वो शख्स रहता था, उस घर को बंद कर दिया गया है और बताया जा रहा है कि वहाँ हर कोई डरा हुआ है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय द्वारा उपलब्ध कराए गए डेटा के अनुसार, वायरस होने और इसके पता लगाने के बीच व्यक्ति 813 लोगों के संपर्क में था। इसमें से 40 लोग दिल्ली के और 773 बाहर के शहर के हैं।

107 Vs 99: आठ वोटों से गिर जाती कमल-सरकार, आज ही खिल जाता मध्य प्रदेश में ‘कमल’

सिंधिया गुट के कॉन्ग्रेसी विधायकों के बागी होने के बाद से मध्य प्रदेश विधानसभा में शक्ति परीक्षण से भाग रही कमलनाथ सरकार को आज 10 दिन की मोहलत और मिल गई है। राज्यपाल के कहने पर आज 16 मार्च को सरकार को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना था। लेकिन स्पीकर एनपी प्रजापति ने कोरोना का हवाला देकर विधानसभा की कार्यवाही ही 26 मार्च तक स्थगित कर दी। यानी आज का बहुमत परीक्षण अब कम से कम स्पीकर के निर्णय के अनुसार 26 मार्च तक सम्भव नहीं।

हालाँकि विधानसभा स्पीकर के निर्णय को गैर संवैधानिक बताते हुए भाजपा इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई है। फ्लोर टेस्ट में जानबूझ कर अनावश्यक देरी के विरोध में भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी है। जानकारों के अनुसार सुनवाई के दौरान भाजपा सुप्रीम कोर्ट से यह माँग करेगी कि स्पीकर को जल्द फ्लोर टेस्ट कराने के निर्देश दिए जाएँ। इसके अतिरिक्त वो यह भी माँग कर सकती है कि विधानसभा स्पीकर 16 बागी विधायकों का इस्तीफा भी बिना देरी स्वीकार करें।

इस सबके बीच यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर विधानसभा स्पीकर के इस निर्णय के पीछे सच में घातक कोरोना वायरस से जुड़ी चिंताएँ हैं या कमलनाथ सरकार को बचाने की अंतिम कोशिश।

समझें MP विधानसभा का गणित

मध्य प्रदेश में कुल विधानसभा सदस्यों की संख्या 230 है, जिसमें से दो विधायकों (भाजपा के मालवा से विधायक मनोहर उंटवाल और मुरैना जिले से कॉन्ग्रेस विधायक बनवारी लाल शर्मा) की मृत्यु के कारण वर्तमान संख्या 228 रह गई है। यानी बहुमत का आँकड़ा पहुँचता है 115 विधायकों पर। कॉन्ग्रेस में हुई बगावत के पहले पार्टी के पास थे 114 ( स्पीकर को मिलाकर, जिन्हें सिर्फ निर्णायक वोट करने का अधिकार है ) विधायक, भाजपा के पास थे 107, सपा के एक , बसपा के दो और निर्दलीय विधायक थे कुल चार।

अब इसमें से अगर उन 22 कॉन्ग्रेसी विधायकों को निकाल दिया जाए, जिन्होंने अपने इस्तीफे विधानसभा स्पीकर एनपी प्रजापति को भेज रखे हैं तो इसके बाद विधानसभा की वर्तमान स्ट्रेंथ आ जाएगी 206 और बहुमत का आँकड़ा गिरकर आ जाएगा 104! जिसमें कॉन्ग्रेस के विधायकों की संख्या कितनी होगी – सिर्फ 92! अब यदि 4 निर्दलीय, 1 सपा और 2 बसपा विधायकों को भी जोड़ दिया जाए तो कलनाथ के समर्थन में होंगे कुल 99 विधायक जबकि भाजपा की संख्या 107 है। यानी साफ़ है कि इस स्थिति में कमलनाथ सरकार के बचने की कोई भी गुंजाइश नहीं है।

मामले पर नजर रख रहे जानकारों की मानें तो विधानसभा का यह गणित ही आज के घटनाक्रम की प्रमुख वजह हो सकती है, जिसमें विधानसभा की कार्यवाही को 26 मार्च तक टाल कर कमलनाथ को अपने बागी विधायकों को मनाने का समय दिया गया।

कौन हैं वो बागी, जिन्होंने ला रखा है MP में सियासी भूचाल

मीडिया के अनुसार जिन 22 कॉन्ग्रेस विधायकों के कारण एमपी समेत देश की राजनीति में पिछले कई दिनों से उठा-पटक चल रही है, इनमें से 6 विधायकों का इस्तीफा विधानसभा स्पीकर ने स्वीकार कर लिया है। ये हैं:

  1. साँची से विधायक व स्कूल शिक्षा मंत्री प्रभुराम चौधरी
  2. महिला एवं बाल कल्याण मंत्री डबरा से विधायक इमरती देवी
  3. स्वास्थ्य मंत्री, सरकार के दलित चेहरे और सांवेर से विधायक तुलसी सिलवट
  4. सागर की सुर्खी सीट से विधायक और कमलनाथ सरकार में राजस्व मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत
  5. गुना की बमोरी सीट से विधायक, सरकार में श्रम मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया
  6. कमलनाथ सरकार में सिविल सप्लाई मिनिस्टर, ग्वालियर से विधायक प्रद्युम्न सिंह तोमर

ये सभी सिंधिया लॉयलिस्ट्स के रूप में विख्यात थे। इनके अलावा जिन बाकी सिंधिया गुट के 16 विधायकों के इस्तीफे अभी तक स्वीकार नहीं किए गए हैं, वो हैं: 1. अशोक नगर से जयपाल सिंह ‘जज्जी’, 2. ग्वालियर के करेरा से जसवंत जाटव, 3. मंदसौर की सुवासरा से हरदीप सिंह डांग, 4. चंबल क्षेत्र से रणवीर जाटव, 5. अन्नुपुर सीट से बिसाहू लाल सिंह, 6. विधायक मुन्ना लाल गोयल, 7. मुरैना से रघुराज सिंह कंसाना, 8. धार की बदनावर सीट से राजवर्धन सिंह दत्तीगांव, 9. चंबल क्षेत्र से ओपीएस भदौरिया, 10. चंबल क्षेत्र से कमलेश जाटव 11. चंबल से बृजेन्द्र यादव 12. चंबल से ही सुरेश रठखेड़ा, 13. दतिया से रक्षा संतराम सरोनिया, 14. मुरैना जिले की दिमानी सीट से गिरिराज दंडोतिया, 15. मुरैना की ही सुमावली सीट से दिग्विजय कैंप के माने जाने वाले ऐदल सिंह कंसाना और 16वें बागी विधायक हैं राज्य कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी। इन 16 विधायकों के इस्तीफे अभी तक स्पीकर के पास पेंडिंग हैं।

इस बीच भाजपा की तरफ से विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ शिवराज सिंह चौहान ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी है। इस पर अदालत ने 12 घंटों के भीतर सुनवाई करने को कहा है। अपनी याचिका में शिवराज ने विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री कमलनाथ और मुख्य सचिव को पार्टी बनाया है।

वहीं आज राज्यपाल लालजी टंडन ने भी अभिभाषण को पूरा न पढ़, विधानसभा स्पीकर और सरकार के निर्णय के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। विधानसभा स्पीकर और सरकार को अप्रत्यक्ष रूप से हिदायत देते हुए उन्होंने सभी को शांतिपूर्वक तरीके से अपने-अपने दायित्वों का पालन करने को कहा। राजयपाल से मिलने राजभवन दिग्विजय सिंह के आलावा, शिवराज भी भाजपा विधायकों संग पहुँचे।

अब इस पूरे सियासी ड्रामे और उठा-पटक का क्या नतीजा निकलेगा, इसका दारोमदार कुछ हद तक सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी निर्भर करेगा।

मानवता के हत्यारे वामपंथियों की जगह भारतीयता के अग्रदूत सावरकर के नाम JNU में मार्ग के मायने

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में भारत की महान विभूतियों के नाम पर भवनों के अथवा मार्गों के नाम रखने की शृंखला में एक और नाम जुड़ गया है स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर मार्ग। इससे पूर्व भारतरत्न बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर जी के नाम पर पुस्तकालय का नाम रखा जाना हो या महान गणितज्ञ आर्यभट्ट, महान शल्य चिकित्सक सुश्रुत, भारत की समन्वयवादी परम्परा के आचार्य अभिनव गुप्त जी एवं भारतरत्न पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम जी जैसे भारत के गौरवों के नाम पर मार्गों का नामकरण हो। निसन्देह स्तुत्य एवं सराहनीय कार्य है। ऐसा पुनीत कार्य भारत के विश्वविद्यालयों में जहाँ भारत के भविष्य की पटकथा लिखी जाती हो, संस्कार निर्माण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विश्व के अन्य शीर्ष विश्वविद्यालयों के नाम भी उस देश विशेष के किसी न किसी व्यक्ति, स्थान अथवा परम्परा को ही द्योतित करते हैं। वस्तुतः भारतीय परम्परा में नामकरण केवल अभिधान के लिए नहीं होते अपितु जिस नाम पर सम्बन्धित व्यक्ति का नाम रखा जाता है, उसमें उस नाम के गुण, वैशिष्ट्य की भी साकार अभिव्यक्ति की अपेक्षा रहती है। यथा नाम तथा गुण:।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एक लंबे समय तक कम्यूनिस्ट विचारधारा का प्रभाव रहा। कॉन्ग्रेस ने खुद को सत्ता में बनाए रखने के लिए कम्यूनिस्टों को शिक्षा का दारोमदार सौंप दिया। इसके बाद शुरु हुई भारतीयता को अपमानित करने की प्रथा। जिन कम्यूनिस्टों ने स्वाधीनता आंदोलन के दौरान भारत की वादा खिलाफी की, भारतीय महापुरुषों को अपमानित करने का कार्य किया, कभी सुभाष बाबू को तोजो का कुत्ता तो कभी कवींद्र रवींद्र को माघीर दलाल जैसे अपशब्दों से सम्बोधित किया, जो स्वतंत्रता आंदोलन के नायक महात्मा गाँधी जी तक को अपशब्द कहने से नही चूके, उन कम्यूनिस्टों के हाथों में भारत की शिक्षा व्यवस्था वास्तव में भारतीयता को समाप्त करने का ही कुचक्र था।

कम्यूनिस्टों द्वारा भारतीय महापुरुषों को अपमानित करने का ताजा उदाहरण दिल्ली विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में स्वाधीनता सेनानियों को ‘आतंकवादी’ कहने का ही दुस्साहस था, जो कि बाद में अभाविप एवं देश के प्रबुद्ध नागरिकों की आपत्ति व न्यायिक लड़ाई के बाद सुधारना पड़ा। ऐसे ही जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में विवेकानंद जी की प्रतिमा को नष्ट करने का प्रयास भी कम्यूनिस्टों की इसी गर्हित मानसिकता को प्रकट करता है।

यह एक विडंबना ही कही जाएगी कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रसंघ कार्यालय में भी भारतीय महापुरुष विवेकानंद आदि जी का चित्र भी तभी लगाया जाता है, जब ABVP JNUSU में चुनकर आती है। उससे पूर्व वहाँ मार्क्स, लेनिन, स्टालिन आदि मानवता के हत्यारों को स्थान दिया जाता है, किंतु भारतीयता के अग्रदूतों को नहीं।

यह दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि मानवता का हत्यारा एवं अनेकों महिलाओं के साथ बर्बरता करने वाला चे ग्वेरा तो कम्यूनिस्टों का रोल मॉडल बनता है किन्तु राष्ट्र की स्वाधीनता के लिए जीवन में दो बार आजीवन कारावास की सजा पाने वाले एवं समरस भारत के स्वप्नद्रष्टा वीर सावरकर इनकी कुंठा के शिकार।

स्वाधीनता के उपरांत अपने ही देश में जितना अपमान वीर विनायक दामोदर सावरकर जी को झेलना पड़ा शायद ही किसी अन्य महापुरुष को ऐसा अपमान झेलना पड़ा हो। एक ऐसे महापुरुष जिनका सम्पूर्ण परिवार ही स्वाधीनता आन्दोलन के लिए समर्पित रहा।

आज जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एक मार्ग का नाम सावरकर जी के नाम पर रखा जाना निसन्देह एक दूरदर्शितापूर्ण कदम है। यह कदम उस स्थान पर अत्यावश्यक हो जाता है, जहाँ बैठकर स्वतन्त्रता उपरांत एक खास इतिहासकारों के वर्ग ने भारतीय मूल्यों को धूलि-धूसरित करने का कार्य करते हुए इतिहास की मनगंढ़त व्याख्या हमारे समक्ष रखी। जहाँ बैठकर औरंगजेब का महिमामंडन एवं दाराशिकोह को नेपथ्य में रखा गया। जहाँ फिदेल कास्त्रो का तो गुणगान किया गया किन्तु महामना, स्वामी दयानंद, स्वामी श्रद्धानंद एवं तिलक आदि के स्वाधीनता आन्दोलन के प्रयासों को भुला दिया गया। ये वही कम्यूनिस्ट थे जिन्होनें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की स्थापना के उपरांत वहाँ दशकों तक संस्कृत केंद्र तक नही खुलने दिया।

संस्कृत केंद्र जब अभाविप के दीर्घकालिक संघर्ष के फलस्वरूप अटल जी के नेतृत्व वाली NDA सरकार में बन गया तो उसे स्कूल में परिवर्तित नहीं होने दिया। योग-संस्कृति और आयुर्वेद को JNU से कम्यूनिस्टों द्वारा धक्का मारने की बात की गई। ऐसे में भारत की महान विभूतियों के नाम पर विश्वविद्यालय के भवन अथवा मार्गों का नामकरण निश्चय ही भारत के भविष्य के कर्णधारों में भारतीयता के गौरव की चेतना विकसित करने के लिए महत्त्वपूर्ण कदम है। इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन साधुवाद का पात्र है।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की यह वर्षों पूर्व माँग थी, जो सफल हुई। अभी भी सावरकर जी के नाम पर विश्वविद्यालय में चेयर की स्थापना के प्रयास हों या विश्वविद्यालय में सावरकर जी की प्रतिमा लगवाने की बात हो, विद्यार्थी परिषद इस सकारात्मक वैचारिक आन्दोलन को निरंतर जारी रखेगी।

कोरोना है, नहीं है… या कंफ्यूजन है? हर तरह की जानकारी के लिए एकमात्र साइट, खुद PM मोदी कर रहे शेयर!

भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय पूरे जोर-शोर से कोरोना वायरस से उपजे खतरे से निपटने में लगा हुआ है। जहाँ एक तरफ एयरपोर्ट्स पर स्क्रीनिंग की व्यवस्था की गई है और देश भर में लोगों के मेडिकल जाँच की व्यवस्था की जा रही है, वहीं ऑनलाइन जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। ख़ुद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बचाव व सावधानी के विभिन्न तौर-तरीकों को ग्राफिक्स व चित्रों के माध्यम से शेयर कर रहे हैं। इसी क्रम में ‘नेशनल हेल्थ पोर्टल ऑफ़ इंडिया‘ वेबसाइट में भी बदलाव किए गए हैं, जहाँ कोरोना वायरस के खतरों को लेकर जनता को आगाह किया गया है और कुछ ऑनलाइन सेवाओं की जानकारी दी गई है।

वहाँ ‘कोरोना वायरस के बारे में अधिक जानें’ पर क्लिक करते ही आप ‘स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय‘ की वेबसाइट पर चले जाएँगे, जिसकी पूरी रूप-रेखा ही बदल दी गई है। यहाँ ऊपर ही सबसे पहले कोरोना वायरस के लिए हेल्पलाइन नंबर की जानकारी दी गई है, यानी +91-11-23978046 पर कॉल कर के आप कोरोना वायरस से सम्बंधित किसी भी प्रकार की सूचना ले या दे सकते हैं, मदद माँग सकते हैं। इसके बाद सारे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए भी अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर की सूची प्रदान की गई है। इस ईमेल आईडी [email protected] पर आप मेल कर के कोरोना सम्बंधित मदद ले सकते हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट: कोरोना को लेकर सूचनाएँ, मदद व अपडेट्स यहाँ मिलेंगे

सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में ‘क्वारंटाइन’ को लेकर जारी किए गए दिशा-निर्देशों की सूची भी दी गई है। इस पर क्लिक करते ही पीडीएफ फॉर्मेट में सारी जानकारी आपके सामने आ जाएगी। इसके बाद जानकारी दी गई है कि इस समय तक भारत में कोरोना वायरस के कितने केस आए हैं। ये जानकारी समय-समय पर नई सूचना आने के साथ ही अपडेट की जा रही है। तत्पश्चात भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की एक सूची के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है कि किस प्रदेश में कोरोना वायरस के कितने मामले आए हैं? इनमें अब तक महाराष्ट्र से सर्वाधिक 32 और केरल से 22 मामले सामने आए हैं।

इसके बाद एसडीआरएफ फंड्स से लेकर एयरपोर्ट्स पर की गई व्यवस्थाओं तक की जानकारी उपलब्ध कराई गई है। सबसे अच्छी बात तो ये है कि बच्चों में कोरोना वायरस को लेकर सजगता लाने के लिए एक कॉमिक बुक का सहारा लिया गया है। हिंदी और अंग्रेजी, दोनों ही भाषाओं में जानकारियाँ दी गई है और तमाम वीडियो भी उपलब्ध कराए गए हैं। हेल्थकेयर सुविधाओं के बारे में पूरी जानकारी दी गई है।

वहीं दूसरी ओर, ट्विटर पर भी स्वास्थय मंत्रालय पूरी तरह सक्रिय है। यहाँ तरह-तरह के चित्रों द्वारा बताया जा रहा है कि कोरोना से बचाव व सावधानी के लिए क्या करना चाहिए और क्या नहीं। साबुन से लेकर भीड़ न जुटाने सम्बन्धी जानकारी को चित्रों के रूप में प्रदर्शित कर साझा किया गया है। विदेश से लौटने वाले यात्रियों को क्या करना चाहिए और क्या नहीं, इसकी जानकारी भी छोटे-छोटे इन्फोग्राफिक बना कर दी जा रही है। बताया गया है कि अगर आप हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करते हैं तो ज़रूरत पड़ने पर सरकार द्वारा अनुमोदित प्रयोगशाला में आपका मेडिकल जाँच कराया जाएगा।