Home Blog Page 504

दोनों तरफ से पकड़ा हाथ, घोटाले में नेहा कक्कड़ को उठाकर ले गई ‘मर्द पुलिस’… सिंगिंग करियर भी खत्म: वायरल हो रही तस्वीरों का जानिए सच

बॉलीवुड गायिका नेहा कक्कड़ को पुलिस गिरफ्तार कर ले गई। उनका गायिकी का करियर समाप्त हो गया और वह भी इतना दुखद। यही दावा एक कथित न्यूज वेबसाइट ने किया। इसके साथ ही एक नेहा कक्कड़ की एक फोटो भी पुलिसवालों के साथ वायरल हुई।

नेहा कक्कड़ के पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने की यह खबर कुछ पेज ने चलाई। इस खबर के साथ नेहा कक्कड़ की एक फोटो भी लगाई गई। इसमें नेहा कक्कड़ जैसी शक्ल वाली महिला एक साड़ी पहने हुए है। महिला का हाथ दो पुलिसकर्मियों ने पकड़ रखा है।

फोटो में नेहा कक्कड़ जैसी दिखने वाली वाली महिला रो रही है। इसी के साथ खबर लिखी है। “ये पूरे भारत के लिए काफी दुखद दिन है, अलविदा नेहा कक्कड़!” इसी खबर को शयर करते हुए लिखा गया है कि उनके गायिकी के करियर का अंत हो गया और यह पूरे भारत के लोगों के लिए दुखद खबर है। इसी खबर में दावा था कि नेहा कक्कड़ को विदेशी मुद्रा के लेनदेन मामले में गिरफ्तार किया गया है।

असल में यह तस्वीर झूठी है और यह खबर भी झूठ है। नेहा कक्कड़ ना ही गिरफ्तार हुई हैं और ना ही उनका करियर खत्म हो रहा है। जो तस्वीर उनकी बता कर वायरल की जा रही है, वह फेस स्वैपिंग नाम की तकनीक के सहारे बनाई गई है। यानी यह तस्वीर भी फर्जी है।

नेहा कक्कड़ के खिलाफ वर्तमान में ऐसा कोई मामला नहीं चल रहा है कि उन्हें गिरफ्तार किया जाए। इसके अलावा यह खबर और किसी मीडिया में नहीं आई। ऐसे में साफ़ हो जाता है कि यह खबर पूरी तरीके से झूठी है। असल में जिस वेबसाइट पर यह खबर डाली गई है वह फर्जी है और ठगी वाले एक एप का प्रचार करती है।

इसमें फोटो और खबर AI के माध्यम से बनाई गई थी। हालाँकि, यह कोई पहला मामला नहीं है जब AI का इस्तेमाल किसी नामचीन हस्ती के सहारे ठगी के लिए किया गया हो। इससे पहले सचिन तेंदुलकर और रतन टाटा तक का इस्तेमाल यह ठग कर चुके हैं।

कभी कार तो कभी अस्पताल… केरल में दलित खिलाड़ी से 5 बार गैंगरेप, 13 साल की उम्र से शुरू हुआ यौन शोषण: 5 साल में 62 ने नोंचा, 44 गिरफ्तार

केरल के पथानमथिट्टा जिले में दलित समुदाय की एक लड़की के साथ पिछले 5 सालों तक हुए रेप और गैंगरेप की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। लड़की ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि 13 साल की उम्र से अब तक 62 लोगों ने उसके साथ रेप किया। इस मामले में अब तक 44 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पीड़ित लड़की एक एथलीट है, जिसका कम से कम 5 बार गैंगरेप भी किया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह चौंकाने वाला मामला तब सामने आया जब पीड़िता के शिक्षकों ने उसके व्यवहार में बदलाव देखा और इस बारे में चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) को सूचना दी। काउंसलिंग के दौरान पीड़िता ने अपनी आपबीती सुनाई, जिसके बाद पुलिस को इस घटना की जानकारी दी गई।

इस मामले की जाँच के लिए एक विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया गया है। इस टीम का नेतृत्व डिप्टी एसपी पी एस नंदकुमार कर रहे हैं, जबकि जाँच की निगरानी खुद डीआईजी एस अजीता बेगम कर रही हैं। डीआईजी ने बताया कि अब तक इस मामले में 30 एफआईआर दर्ज की गई हैं। इस मामले में जिन 58 आरोपितों की पहचान की जा चुकी है, उनमें से 44 को गिरफ्तार किया जा चुका है।

डीआईजी एस अजीता बेगम ने कहा, “2 आरोपित विदेश भाग चुके हैं। उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर और रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। बाकी 13 आरोपितों की तलाश जारी है। हम वैज्ञानिक और सटीक जाँच करेंगे और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।”

हैरान करने वाली वहशियों की कारस्तानी

पुलिस के अनुसार, पीड़िता ने बताया कि उसका शोषण 13 साल की उम्र से शुरू हुआ। आरोपितों में से कई उससे पथानमथिट्टा के एक प्राइवेट बस स्टैंड पर मिले और उसे अलग-अलग जगहों पर ले जाकर उसका यौन शोषण किया।

पीड़िता ने बताया कि उसके साथ कम से कम पाँच बार गैंगरेप हुआ। इनमें से एक घटना कार के अंदर हुई, जबकि एक अन्य घटना जनवरी 2024 में पथानमथिट्टा के जनरल अस्पताल के अंदर हुई।

इसी क्रम में साल 2023 में जब वह 12वीं कक्षा में पढ़ रही थी, तब इंस्टाग्राम के जरिए उससे जुड़े युवक ने उसे रन्नी स्थित एक रबर प्लांटेशन में ले जाकर तीन अन्य लोगों के साथ उसका गैंगरेप किया।

जाँच के दौरान पुलिस को पता चला कि पीड़िता अपना खुद का कोई मोबाइल फोन प्रयोग नहीं करती। वह अपने पापा के फोन से बात करती थी। इसी फोन में पीड़िता ने अपना यौन शोषण करने वाले 40 आरोपितों के नंबर सेव कर रखे हैं। सबसे दुखद पहलू यह रहा कि पीड़िता के कोच और ट्रेनर भी इस अपराध में शामिल हो गए। दर्ज करवाए गए बयान में पीड़िता ने अपने कुछ रिश्तेदारों के नाम भी बताए हैं जो उसके यौन शोषण में शामिल रहे। 

पुलिस ने बताया कि इस मामले की जाँच के लिए 30 से अधिक अधिकारियों की एक टीम बनाई गई है, जिसमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। डीआईजी अजीता बेगम ने कहा, “सबरीमला यात्रा खत्म होने के बाद इस टीम में और अधिक अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। सभी दोषियों को कानून के कठघरे में लाया जाएगा।”

समुद्री यात्रा पर निकले, जहाज टूटा तो निर्जन टापू पर 30 साल रहे अकेले… घर लौटते ही 3 साल में हो गई इटली के शख्स की मौत

इटली के बुदेली द्वीप पर 3 दशक तक अकेले रहने वाले शख्स की समाज में वापस आने के 3 साल बाद मौत हो गई। वह 2021 में ही समाज के बीच रहने के लिए लौटा था। वह इस निर्जन द्वीप पर बिना बाहर की दुनिया से सम्पर्क किए रहता था और यहाँ की देखभाल भी करता था। इस शख्स का नाम मौरो मोरांडी था।

मोरांडी की बीते 2025 की शुरुआत के दिनों में मौत हुई। बुदेली के द्वीप पर मोरांडी 1989 में पहुँचे थे। निकले तो वह एक लम्बी समुद्री यात्रा पर थे लेकिन उनका जहाज इस द्वीप के पास ही टकरा कर नष्ट हो गया था। इसके बाद जब यहाँ पहुँचे तो उन्हें पता चला कि अब तक द्वीप की देखभाल करते आया शख्स रिटायर होना चाहता है।

मोरांडी ने इसके बाद तय किया कि वह बुदेली पर ही रहेंगे और इसकी देखभाल करेंगे। उन्होंने अपनी नाव बेच दी और यहाँ के 1 कमरे वाले एक अपार्टमेंट में रहने लगे। यह द्वीप एकदम निर्जन है और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यहाँ पर फौजें रुका करती थीं।

मोरांडी बुदेली में रहने के दौरान इसके रास्ते साफ़ किया करते थे। वह यहाँ समुद्र तट की भी सफाई करते थे और गर्मियों की छुट्टियों में आने वाले पर्यटकों को इस जगह के इतिहास और यहाँ के पर्यावरण के बारे में भी समझाते थे। मोरांडी यहाँ इसलिए बसे थे क्योंकि वह पूँजीवाद, राजनीति और ऐसे ही मुद्दों से कहीं दूर भागना चाहते थे।

बुदेली में उन्हें एक और द्वीप से नाव से खाना पहुँचाया जाता था। उनके घर में बिजली देने के लिए एक सोलर सिस्टम भी लगा दिया गया था। उन्होंने यहाँ अपना पूरा संसार बसा लिया था। उन्हें इंटरनेट की भी सुविधा मिली हुई है। वह इसका इस्तेमाल भी करते थे। उनका इंस्टाग्राम पर भी एक अकाउंट था, जिस पर उनके 70,000 फॉलोवर थे।

मोरांडी को रॉबिनसन क्रूसो का नाम दे दिया गया था। रॉबिनसन एक क्रूसो एक अंग्रेजी किताब का मुख्य पात्र है। किताब में जहाज़ डूब जाता है और वह वेनेजुएला और त्रिनिदाद के तटों के पास एक निर्जन द्वीप पर 28 साल व्यतीत करता है। मोरांडी की कहानी भी कुछ ऐसी ही थी।

मोरांडी का इस इलाके की पर्यावरण की देखभाल करने वाले ला माडालेना राष्ट्रीय उद्यान के अधिकारियों से लम्बी लड़ाई चली थी। वह मोरांडी को यहाँ से निकालना चाहती थी। 2021 में उसने उन्हें यहाँ से वापस इटली में भेज दिया था। इसके बाद मोरांडी ने बताया था कि सामान्य समाज में रहने से उन्हें दिक्कत हो रही है। अब 85 वर्ष की उम्र में उनकी मौत हो गई है।

‘दलित व्यक्ति का प्रसाद जिन-जिन लोगों ने खाया, सबको समाज से कर दिया बहिष्कार’: भीम-मीम गैंग ने फैलाई फर्जी खबर, जानिए सच्चाई

मध्य प्रदेश के छतरपुर के एक गाँव से खबर आई कि वहाँ दलित व्यक्ति का प्रसाद खाने के बाद 20 परिवारों का बहिष्कार कर दिया गया है। बहिष्कार करने वाला व्यक्ति गाँव का सरपंच संतोष तिवारी है। दरअसल, 13 जनवरी 2025 को इस तरह के दावों के साथ कई सोशल मीडिया पोस्ट वायरल किए गए। हालाँकि, पुलिस ने इस तरह की किसी घटना से इनकार करते हुए इसे आपसी विवाद बताया है।

एक्स यूजर ‘द दलित वॉयस’ ने अपने पोस्ट में लिखा, “दलित व्यक्ति के हाथों से प्रसाद खाने के लिए हिंदुओं द्वारा 20 परिवारों को बहिष्कृत कर दिया गया। यह घटना मध्य प्रदेश के छतरपुर की है।” हालाँकि, इस पोस्ट में दावे का समर्थन करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं दिए गए थे। इसी तरह के पोस्ट अन्य सोशल मीडिया यूजर्स ने आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है।

नाद्या नाम के एक अन्य यूजर ने अपने X पोस्ट में लिखा, “21वीं सदी का भारत कुछ ऐसा ही है। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के अतरार गाँव में एक दलित व्यक्ति से प्रसाद लेने के कारण लगभग 20 परिवारों को सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है।” इसने प्रोपेगेंडा वेबसाइट मकतूब मीडिया का हवाला दिया है, जिसमें कहा गया था कि ‘उच्च जाति’ के परिवारों का बहिष्कार किया गया था।

इस खबर को लेकर मकतूब मीडिया ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, “जब खबर फैली कि उच्च जाति के परिवारों ने एक दलित से प्रसाद स्वीकार किया है तो सरपंच ने कथित तौर पर सभी लोगों के खिलाफ सामाजिक बहिष्कार की घोषणा कर दी। इन परिवारों को शादी-विवाह सहित सभी सामाजिक समारोहों से बाहर रखने की घोषणा की गई है।”

हालाँकि, आर्या अन्वीक्षा और डॉक्टर नेहा दास सहित कई एक्स (पूर्व में ट्विटर) यूजर्स ने इन दावों का खंडन किया और वायरल इस फर्जी खबरों को खारिज करने के लिए सबूत पेश किए। इस तरह की फर्जी खबरें खुद को अंबेडकरवादी बताने वाले लोगों साझा की हैं। दरअसल, जिस मामले को वायरल किया किया जा रहा है वह अगस्त 2024 का बताया जा रहा है।

दरअसल, यह फर्जी खबर छतरपुर जिले के अतरार गाँव के एक दलित व्यक्ति द्वारा लगाए गए आरोपों से उपजी है। उसने अपनी शिकायत में दावा किया था कि उसके द्वारा बाँटे गए प्रसाद को खाने के कारण उसे और पाँच अन्य परिवारों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया। हालाँकि, पुलिस ने इन दावों का खंडन किया और कहा कि यह गाँव के दो समूहों के बीच राजनीतिक विवाद का मामला है।

अहिरवार समाज (अनुसूचित जाति) से ताल्लुक रखने वाले जगत अहिरवार नाम के व्यक्ति ने 7 जनवरी को छतरपुर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने कहा था कि अगस्त 2024 में उसने स्थानीय हनुमान मंदिर में प्रसाद में लड्डू चढ़ाया और उसे वहाँ खड़े लोगों में बाँट दिया। इसके बाद गाँव के सरपंच संतोष तिवारी ने उसके परिवार और प्रसाद खाने वाले पाँच अन्य लोगों को बहिष्कृत कर दिया।

अहिरवार ने दावा किया है कि इन परिवारों को अब शादियों और अन्य सामुदायिक कार्यक्रमों सहित सामाजिक समारोहों में आमंत्रित नहीं किया जाता है। अहिरवार ने सरपंच संतोष तिवारी पर जातिगत विभाजन का इस्तेमाल कर बहिष्कार लागू करने का आरोप लगाया और कहा, “हमें सदियों पुराने जातिगत पूर्वाग्रह के कारण बुनियादी सामुदायिक संपर्क से वंचित किया जा रहा है।”

पुलिस ने आरोपों को नकारा, बताया राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता

हालाँकि, पुलिस ने इन आरोपों को नकार दिया है। पुलिस के उप-विभागीय अधिकारी (SDPO) शशांक जैन ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा, “हमने ग्रामीणों से बात करके मामले की जाँच की, लेकिन इस तरह के बहिष्कार का कोई सबूत नहीं मिला।” पुलिस ने कहा कि यह घटना दो समूहों के बीच राजनीतिक दुश्मनी का नतीजा लगती है, जो स्थानीय चुनावों में कड़ी टक्कर से उपजी है।

एसडीओपी जैन ने कहा कि आरोप पूर्व सरपंच अहिरवार और मौजूदा सरपंच तिवारी का समर्थन करने वाले प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच जारी तनाव से प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, सरपंच तिवारी ने भी बहिष्कार की घटना से साफ तौर पर इनकार किया। तिवारी ने कहा, “ये आरोप निराधार और राजनीति से प्रेरित हैं। अहिरवार सरपंच का चुनाव हार गए हैं। यह मुझे बदनाम करने की एक चाल है।”

दिलचस्प बात यह है कि इस मामले पर मीडिया रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि जिन परिवारों का कथित तौर पर बहिष्कार किया गया है, वे दलित और उच्च जाति दोनों समुदायों से हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की रिपोर्ट में कहा गया, “यह प्रसाद ब्राह्मणों सहित विभिन्न जातियों के 20 से अधिक ग्रामीणों को दिया गया था। जैसे ही यह बात फैली कि उच्च जाति के व्यक्तियों ने एक दलित से प्रसाद स्वीकार किया है, सरपंच ने कथित तौर पर इन सभी परिवारों का सामाजिक बहिष्कार करने का आदेश दिया।”

क्या दिल्ली में फिर से दंगे करवाना चाहती थी AAP? जिस नाबालिग ने भेजे बम धमकी के 400+ ईमेल उसके माता-पिता का NGO अफजल गुरु समर्थक: BJP ने केजरीवाल से भी बताए लिंक

दिल्ली पुलिस ने मंगलवार (14 जनवरी 2025) को खुलासा किया कि पिछले कुछ महीनों से दिल्ली के स्कूलों को बम धमकियों वाले फर्जी ईमेल भेजने के मामले में उन्होंने आरोपी की पहचान कर ली है। स्पेशल सीपी (लॉ एंड ऑर्डर) मधुप तिवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इन धमकियों के पीछे एक नाबालिग का हाथ है, जिसने कुल 400 फर्जी ईमेल भेजे हैं। ये ईमेल दिल्ली के स्कूलों में अव्यवस्था फैलाने और पढ़ाई-लिखाई को बाधित करने का कारण बने। दिल्ली पुलिस के इस खुलासे के बाद बीजेपी ने आम आदमी पार्टी पर हमला बोला और कहा कि दिल्ली में चुनाव से पहले दंगे कराने की कोशिश होती है। BJP ने अरविंद केजरीवाल से भी मामले में सवाल पूछा है।

मधुप तिवारी ने कहा, “हमारी टीम ने 12 फरवरी 2024 से इन ईमेल की जाँच शुरू की थी। ये ईमेल स्कूलों में छुट्टियाँ कराने, परीक्षा स्थगित कराने और डर का माहौल बनाने का कारण बने। हमने शुरुआत में ईमेल सर्विस प्रोवाइडर्स से डेटा माँगा, लेकिन आरोपित ने वीपीएन का इस्तेमाल किया था, जिससे जाँच में दिक्कतें आई। 8 जनवरी 2025 को भेजे गए एक ईमेल से हमें टेक्निकल विंडो मिला और हमने ईमेल भेजने वाले व्यक्ति को ट्रेस कर लिया।”

दिल्ली पुलिस ने बताया कि उसने अपनी जाँच में पाया गया कि ईमेल भेजने वाला एक नाबालिग है, जिसने 400 से अधिक फर्जी ईमेल भेजे। पुलिस ने उसके लैपटॉप और मोबाइल की फोरेंसिक जाँच की, जिससे यह खुलासा हुआ कि वह अकेला ऐसा नहीं कर सकता था। उसके परिवार की जाँच करने पर पता चला कि उसके माता-पिता एक एनजीओ चलाते हैं, जिसका एक राजनीतिक दल से गहरा संबंध है। यह एनजीओ अफजल गुरु की फाँसी का विरोध करने वाले एक सिविल सोसाइटी समूह का हिस्सा भी रहा है।

स्पेशल सीपी (लॉ एंड ऑर्डर) मधुप तिवारी ने कहा, “जाँच में हमने पाया कि नाबालिग ने इन ईमेल को खुद भेजा, लेकिन हमें संदेह है कि इसके पीछे एक व्यापक साजिश हो सकती है। यह एनजीओ कई संवेदनशील मुद्दों पर एक विशेष राजनीतिक दल का समर्थन करता है और अफजल गुरु की फाँसी पर सवाल उठाता रहा है। हम डिजिटल सबूतों की गहराई से जाँच कर रहे हैं और राजनीतिक कनेक्शन के एंगल को भी देख रहे हैं।”

बीजेपी ने आम आदमी पार्टी से माँगा जवाब

इस मामले के खुलासे के बाद बीजेपी ने आम आदमी पार्टी पर तीखे आरोप लगाए। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि यह घटना बताती है कि कैसे आम आदमी पार्टी और उससे जुड़े एनजीओ देश के बच्चों के मन में जहर भर रहे हैं। उन्होंने कहा, “आतिशी के माता-पिता ने अफजल गुरु की दया याचिका पर हस्ताक्षर किए थे। यह एनजीओ उसी मानसिकता का हिस्सा है। हमें आम आदमी पार्टी से जवाब चाहिए कि क्या उनका इन गतिविधियों से कोई संबंध है। अगर नहीं है, तो वे स्पष्ट बयान दें।”

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि मैं अरविंद केजरीवाल से अपील करता हूँ कि वे सामने आएँ और आप को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन लोगों के साथ उनका क्या संबंध है। अगर नाबालिग यह सब कर रहे हैं, तो ऐसे NGO देश के बच्चों के दिमाग में किस तरह का जहर घोल रहे हैं?

त्रिवेदी ने यह भी कहा कि आप पार्टी के विधायकों पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसाने में मदद करने के आरोप पहले ही लग चुके हैं। उन्होंने कहा, “दिल्ली सरकार के खिलाफ सबूतों की कड़ी जुड़ती जा रही है। क्या यह एनजीओ भी आप पार्टी की योजनाओं का हिस्सा है? अगर नहीं, तो अरविंद केजरीवाल और उनके सहयोगी इस पर सफाई दें।”

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा, “यह महज संयोग नहीं है कि जब भी दिल्ली में विधानसभा चुनाव होते हैं, दंगे करके माहौल बिगाड़ने की कोशिश होती है। हम उत्तर पूर्वी दिल्ली और शाहीन बाग में हुए दंगों को नहीं भूले हैं। अब एक नाबालिग के जरिए एक एनजीओ का नाम सामने आ रहा है और अफजल गुरु से कनेक्शन, इसमें आप और अरविंद केजरीवाल शामिल हैं।” बता दें कि 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगे हुए थे, जिसमें आम आदमी पार्टी से जुड़ा रहा ताहिर हुसैन मास्टरमाइंड था। वो उस समय आम आदमी पार्टी पार्टी के टिकट पर पार्षदी का चुनाव भी जीता था।

राजनीतिक संबंधों की जाँच जारी

पुलिस का कहना है कि इस मामले में अभी जाँच चल रही है। उन्होंने बताया कि आरोपित ने 7 अलग-अलग मौकों पर धमकी भरे ईमेल भेजे, जिनमें एक बार 250 स्कूलों को एक साथ बम की धमकी दी गई थी। नाबालिग को खुद भी याद नहीं है कि उसने कितनी बार ऐसे ईमेल भेजे। दिल्ली पुलिस ने यह भी जानकारी दी कि पिछले साल मई से दिसंबर तक दिल्ली के स्कूलों, अस्पतालों, एयरपोर्ट और एयरलाइंस को कुल 50 बार बम की धमकियाँ दी गईं। हर बार ये धमकियाँ फर्जी निकलीं, लेकिन उन्होंने प्रशासन और आम लोगों को परेशानी में डाला।

दिल्ली पुलिस के इस खुलासे के बाद सवाल यह है कि क्या इन फर्जी धमकियों के पीछे कोई बड़ा षड्यंत्र है और क्या राजनीतिक दलों और एनजीओ की मिलीभगत का इसमें कोई रोल है। पुलिस अब एनजीओ और उसके राजनीतिक संबंधों की गहराई से जाँच कर रही है।

भारत से माफी माँगेगी फेसबुक-इंस्टाग्राम चलाने वाली मेटा? संसदीय समिति ने किया तलब, जुकरबर्ग ने कहा था- हार गई मोदी सरकार

फेसबुक और इंस्टाग्राम के स्वामित्व वाली कंपनी मेटा को अब संसद तलब करेगी। मेटा को उसके CEO मार्क जुकरबर्ग के भारत की सरकार को लेकर हालिया बयान के चलते तलब किया जाएगा। मार्क जुकरबर्ग ने हाल ही में दावा किया था कि कोविड महामारी के बाद अधिकांश सरकारें सत्ता से चली गईं। इसमें उन्होंने भारत का भी नाम लिया था। इसके बाद भारत में इसको लेकर कड़ी प्रतिक्रिया हुई थी। अब संसद की आईटी मामलों की स्थायी समिति इस मामले में कार्रवाई करने जा रही है।

संचार और आईटी मामलों की स्थायी संसदीय समिति के मुखिया निशिकांत दुबे ने इस मामले में मंगलवार (14 जनवरी, 2025) को मेटा को तलब करने का ऐलान किया है। उन्होंने एक्स (पहले ट्विट्टर) पर यह जानकारी दी है। निशिकांत दुबे ने कहा, “मेरी कमिटी ग़लत जानकारी के लिए मेटा को बुलाएगी। किसी भी लोकतांत्रिक देश की ग़लत जानकारी उसकी छवि को धूमिल करती है। इस गलती के लिए भारतीय संसद से तथा यहाँ की जनता से उस संस्था को माफ़ी माँगनी पड़ेगी।”

उन्होंने या ऐलान देश के आईटी मामलों के केन्द्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मार्क जुकरबर्ग के बयान पर जवाब के बाद दिया। अश्विनी वैष्णव ने इस मामले पर कहा, “दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में, भारत ने 2024 के चुनावों में 64 करोड़ से अधिक मतदाताओं के साथ चुनाव सम्पन्न करवाए। भारत के लोगों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाले NDA में अपने विश्वास की पुष्टि की। जुकरबर्ग का यह दावा कि 2024 के चुनावों में भारत सहित अधिकांश मौजूदा सरकारें कोविड के बाद हार गईं, तथ्यात्मक रूप से गलत है।”

केन्द्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि मेटा के मुखिया का ही गलत जानकारी देते हुए देखना एकदम निराशाजनक है। गौरतलब है कि मेटा मुखिया जुकरबर्ग हाल ही में जो रोगन नाम के पॉडकास्ट में गए थे। उनका यह पॉडकास्ट 10 जनवरी, 2025 को रिलीज हुआ था। इस पॉडकास्ट के दौरान ही उन्होंने कंटेंट मॉडरेशन, सरकार पर भरोसा, COVID-19, एल्गोरिदम, सरकारी प्रभाव जैसे मुद्दों पर बात की। इसी बीच उन्होंने दावा किया कि कोविड महामारी के बाद कई देशों की सरकारे गईं और इसी में भारत का उदाहरण दिया।

इस मामले में में मेटा ने भी बाद में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। ना ही मेटा ने अपने CEO के बयान को लेकर माफी माँगी। अब मेटा को भारत में संसदीय समिति ने तलब कर लिया है।

आयुष बनकर महाकुंभ में यति नरसिंहानंद के कैंप के बाहर घूम रहा था अयूब अली, संतों ने पकड़ा: डासना मंदिर में भी पहचान छिपा घुसपैठ कर चुके हैं मुस्लिम

गाजियाबाद के डासना मंदिर के महंत एवं जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद के प्रयागराज महाकुंभ कैंप से अयूब नाम के एक संदिग्ध को पकड़ा गया है। कहा जा रहा है कि अयूब ने अपना नाम आयुष बताकर मेला क्षेत्र में प्रवेश किया था। पुलिस अयूब को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। पुलिस पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वह नरसिंहानंद के कैंप के बाहर क्यों घूम रहा था।

अयूब मंगलवार (14 जनवरी 2025) को यति नरसिंहानंद के कैंप के आसपास घूम रहा था। उसकी गतिविधियाँ संदिग्ध लगीं तो अखाड़े के संतों ने उसे पकड़ लिया। इस दौरान अयूब ने अपना नाम आयुष बताया और कहा कि वह नरसिंहानंद से मिलने के लिए आया हुआ है। शंका हुई तो संतों ने पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की तो उसने अपना असली नाम अयूब अली बताया।

उसने बताया कि वह उत्तर प्रदेश के एटा के अलीगंज का रहने वाला है। उसके अब्बा का नाम शाकिर अली है और उसके दो भाई एवं तीन बहनें हैं। उसने बताया कि वह कुंभ में घुमने के लिए अकेला आया हुआ था। उसने यह भी कहा कि उसे किसी ने भेजा नहीं है। उसने यह भी कहा, “मुझे मालूम नहीं था कि यहाँ आना अलाऊ नहीं है।” वह कानपुर से ट्रेन में बैठकर गोरखपुर गया और वहाँ से प्रयागराज पहुँचा था।

इस घटना के बाद नरसिंहानंद ने कहा कि महाकुंभ में उनकी हत्या हो सकती है। इसकी साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा, “कुछ महीने पहले ही गाजियाबाद स्थित मेरे डासना मंदिर के बाहर 10,000 मुस्लिमों की भीड़ ने हमला किया था। मेरी लगातार रेकी की जा रही है। बेंगलुरु में रहने वाला जुबैर भी धमकी दे चुका है। उसी ने मंदिर पर हमला कराया था।”

नरसिंहानंद ने कहा कि उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से दो गनर मिले हुए हैं। उन्होंने कहा, “महाकुंभ में मुझे सबसे ज्यादा खतरा है। मेरी कभी भी हत्या हो सकती है।” उन्होंने हिंदुओं से 4-5 बच्चे पैदा करने की अपील करते हुए कहा कि भारत में मुस्लिमों की वजह से हिंदू आबादी को खतरा पैदा हो गया है। हिंदुओं की आबादी तेजी से घट रही है और मुस्लिमों की बढ़ रही है।

पहले भी उनके मंदिर से पकड़ा चुके हैं मुस्लिम

उत्तर पुलिस ने 3 अक्टूबर 2024 को डासना मंदिर में घुसने की कोशिश करने के आरोप में तीन मुस्लिमों को पकड़ा था। इन लोगों ने अपना नाम हिंदू बताया था। हालाँकि, उनकी पहचान राहुल, नानक और वजीर खान के रूप में हुई थी। ये सभी मथुरा जिले के रहने वाले थे। तीनों ने हिंदू नामों का इस्तेमाल किया और मंदिर में घुसने के लिए खुद को रामलीला टीम का हिस्सा होने का दावा किया था।

वहीं, मई 2023 में 2 नाबालिग लड़कियों के साथ एक संदिग्ध मंदिर में घुसने की कोशिश करते हुए पकड़ा गया था। संदिग्ध का नाम मोहसिन बताया गया था। यह बात भी सामने आई थी कि मोहसिन के साथ 2 लड़कियाँ थीं, जिनमें से एक हिन्दू समाज से है। इसी लड़की के आधार कार्ड पर एंट्री करने की कोशिश की गई थी। दूसरी नाबालिग लड़की मुस्लिम है। नरसिंहानंद ने रेकी करने का आरोप लगाया था।

इससे पहले अक्टूबर 2021 में भी एक मुस्लिम बच्चे ने डासना मंदिर में घुसने की कोशिश की थी। उसे नरसिंहानंद ने खुद पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था। नरसिंहानंद ने दावा किया था कि यह बच्चा उनकी रेकी करने के लिए आया था। इसका नाम अनस बताया गया था। नरसिंहानंद ने कहा था कि मुस्लिम के बच्चे ट्रेंड कातिल हैं।

वहीं, जून 2021 में मंदिर में कथित तौर पर पुजारी नरसिंहानंद की हत्या करने आए दो लोगों को पकड़ा गया था। उससे पहले मार्च 2021 में डासना मंदिर के महंत नरसिंहानंद और उसके साथी ने आसिफ नाम के एक मुस्लिम लड़के को मंदिर में घुसते हुए पकड़ा था। इसके बाद मंदिर के पुजारियों ने उसकी पिटाई कर दी थी। इस घटना के बाद नरसिंहानंद की हत्या का एलान करते कई वीडियो सामने आए थे।

ऑस्ट्रेलिया से हार के बाद ‘लेडीज टूर’ पर कैंची, पत्नी-गर्लफ्रेंड को 14 दिन ही साथ रख सकेंगे टीम इंडिया के खिलाड़ी: एक ही बस से सब करेंगे सफर, गंभीर के मैनेजर पर भी एक्शन

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने हालिया हार के बाद टीम की प्रदर्शन क्षमता को बेहतर बनाने के लिए कुछ कड़े नियम बनाए हैं। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के खिलाफ लगातार हार के बाद शनिवार (11 जनवरी 2025) को मुंबई में बीसीसीआई की समीक्षा बैठक में ये निर्णय लिए गए। इस बैठक में कप्तान रोहित शर्मा, मुख्य कोच अजित अगरकर और बीसीसीआई के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैठक के बाद बीसीसीआई ने खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब विदेशी दौरों के दौरान खिलाड़ियों के परिवार की उपस्थिति सीमित कर दी गई है। यदि दौरा 45 दिनों से अधिक लंबा है, तो खिलाड़ी के परिवार केवल 14 दिनों के लिए उनके साथ रह सकते हैं। छोटे दौरों के लिए यह सीमा सात दिनों की होगी। बीसीसीआई का मानना है कि खिलाड़ियों के साथ परिवार की लंबी उपस्थिति उनके प्रदर्शन को प्रभावित करती है, इसलिए यह सख्त कदम उठाया गया है।

इसके अलावा, सभी खिलाड़ियों को अब टीम बस से ही यात्रा करनी होगी। पहले कुछ खिलाड़ी निजी वाहनों या अन्य साधनों से सफर करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। चाहे खिलाड़ी कितना भी बड़ा हो, उसे टीम बस का ही उपयोग करना होगा। बीसीसीआई का कहना है कि यह कदम टीम की एकता को बनाए रखने के लिए उठाया गया है। बता दें कि बीते वर्ल्ड कप के दौरान कप्तान रोहित शर्मा पर ओवरस्पीडिंग के आरोप लगे थे और उनका चालान भी कटा था।

सहयोगी स्टाफ के कार्यकाल को लेकर भी नई नीति बनाई गई है। अब किसी भी स्टाफ का कार्यकाल दो साल तक सीमित होगा। प्रदर्शन के आधार पर इसे एक साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। यही नहीं, बीसीसीआई की ओर से गौतम गंभीर के निजी मैनेजर गौरव अरोड़ा पर भी सख्ती बरती गई है। अब मुख्य कोच के निजी मैनेजर टीम होटल में नहीं रुक सकेंगे और न ही वीआईपी बस में सफर कर पाएँगे।

खिलाड़ियों के अतिरिक्त खर्चों को लेकर भी सख्ती बरती गई है। अब हवाई यात्रा के दौरान अगर किसी खिलाड़ी का सामान तय सीमा (150 किलोग्राम) से अधिक होगा, तो उसका खर्च खुद खिलाड़ी को उठाना होगा। बीसीसीआई ने स्पष्ट किया है कि ऐसे नियम लागू करने का उद्देश्य खिलाड़ियों के प्रदर्शन को सुधारना और टीम के भीतर एकजुटता बनाए रखना है।

इन सख्त दिशा-निर्देशों से यह साफ है कि बीसीसीआई अब प्रदर्शन में कोई भी कमी बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। टीम के भीतर अनुशासन और एकता लाने के लिए ये फैसले लागू किए गए हैं।

कभी चाकू तो कभी पेट्रोल बम लेकर आते थे पाकिस्तानी, 1000+ बार किया रेप: ब्रिटेन के ग्रूमिंग गैंग ने शराब-कबाब से फँसाया, पीड़िता को कहते थे- गोरी मेम-कु&या

एक ब्रिटिश लड़की का पाकिस्तानी आदमियों के ग्रूमिंग गैंग ने 1000 से अधिक बार रेप किया। उसको गालियाँ दी गई। उसे ‘गोरी मेम’ कह कर प्रताड़ित किया गया। उसके साथ हुई इस घटना के बाद पाकिस्तानियों ने घर पर भी हमला किया। उसकी पीड़ा की यह कहानी ब्रिटेन के एक न्यूज चैनल ने अपनी एक डाक्यूमेंट्री में शामिल की है।

ग्रेट ब्रिटेन न्यूज को एक डाक्यूमेंट्री के लिए इस लड़की एमिली (बदला हुआ नाम) ने अपनी कहानी बताई। ग्रेट ब्रिटेन न्यूज ने एमिली की यह पीड़ा एक एक्टर के माध्यम से सुनाई है। एमिली बताती है, “मैं कॉलेज के दौरान एंड्रिया नाम की एक लड़की से मिली जिसने मुझे एक पाकिस्तानी से मिलवाया। यह पाकिस्तानी एक कबाब की दुकान पर काम करता था।”

एमिली ने आगे बताया, “इसके बाद हम लगातार कबाब की इस दुकान पर जाने लगे। यहाँ हमें वह मुफ्त में कबाब खिलाते थे और शराब भी पिलाते थे। इसके अलावा वह मुफ्त में सिगरेट भी पिलाते थे। हम तब किशोर थे और ऐसी मुफ्त की पार्टी को पसंद करते थे। मैं तब 14 साल की थी।”

एमिली ने इसके बाद गैंगरेप के विषय में बताया “इसके बाद मुझे एंड्रिया एक और जगह ले गई जहाँ यह कबाब वाले पाकिस्तानी मिले। यहाँ 5-6 लोगों ने मेरा रेप किया। मुझे इस दौरान अलग-अलग शहर में ले जाया गया और रेप किया गया। मेरी माँ को इस दौरान इस बारे में कुछ नहीं पता था।”

एमिली ने इसके बाद कहा, “वो लोग यही बॉयफ्रेंड वाला मॉडल अपनाते थे। मुझे उन लोगों ने धमकाया, मेरा शीलभंग किया… वह मुझे गोरी लड़की, कु#या जैसी गालियाँ देते थे। मेरे घर एक आदमी चाकू लेकर भेजा गया और पेट्रोल बम भी लेकर कोई पहुँचा। मेरा 1000 से ज्यादा बार रेप हुआ और पता नहीं कितने लोगों ने मेरा यौन शोषण किया।”

यह घटना यूनाइटेड किंगडम के टेलफोर्ड शहर में हुई। इस शहर में पाकिस्तानियों की बड़ी संख्या है। टेलफ़ोर्ड शहर में 2022 में ग्रूमिंग गैंग के बारे में हुई एक जाँच ने सबको चौंकाया था। इस रिपोर्ट में सामने आया था कि यहाँ 1000 से अधिक बच्चों और बच्चियों का यौन शोषण सालों तक चलता रहा।

बच्चों का यह यौन शोषण 1980 से ही चल रहा था और पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग लगातार इन बच्चियों को निशाना बनाते थे। इस रिपोर्ट में यह भी सामने आया था कि पीड़ितों को ही यहाँ दोषी ठहरा दिया जाता था ताकि किसी पर मुस्लिम विरोधी होने का ठप्पा ना लगे।

टेलफ़ोर्ड में 13 वर्षीय बच्ची लूसी का अजहर अली नाम ने लगातार रेप किया था और बाद में उसका घर जला दिया था। इस आग में गर्भवती लूसी, उनकी बड़ी बहन सारा और माँ की मौत हो गई थी। यह टेलफ़ोर्ड में ग्रूमिंग का बड़ा मामला बना था।

गौरतलब है कि बीते कुछ दिनों से यूनाइटेड किंगडम में लगातार पाकिस्तानियों द्वारा ब्रिटिश बच्चियों की ग्रूमिंग का मामला चल रहा है। इसको लेकर एलन मस्क ने भी कार्रवाई की माँग की है। हालाँकि, यहाँ की किएर स्टार्मर की सरकार ने ग्रूमिंग मामलों में जाँच से मना कर दिया है और संसद में भी इस प्रस्ताव को गिरा दिया है।

ताहिर हुसैन ने हिंदू विरोधी दंगों के लिए दिया था पैसा: दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट में बताया ‘मास्टरमाइंड’, विधानसभा चुनावों के लिए जमानत माँग रहा है AIMIM का प्रत्याशी

दिल्ली दंगों के सरगना ताहिर हुसैन ने विधानसभा चुनावों में AIMIM के उम्मीदवार के रूप में नामांकन करने के लिए हाई कोर्ट से अंतरिम जमानत की माँग की है। दिल्ली पुलिस ने मंगलवार (14 मंगलवार) को ताहिर हुसैन की इस माँग का दिल्ली हाई कोर्ट में विरोध किया। इसके बाद जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने फैसले को सुरक्षित रख लिया। वह अपने चैंबर में फैसला सुनाएँगी।

ताहिर हुसैन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रिबेका जॉन पेश हुईं और उन्होंने नामांकन दाखिल करने से लेकर चुनाव प्रचार तक के लिए 16 जनवरी से 9 फरवरी तक अंतरिम जमानत की माँग की। वहीं, दिल्ली पुलिस की तरफ से पेश हुए एडीशनल सॉलीसिटर ऑफ इंडिया (ASG) चेतन शर्मा और SPP रजत नायर ने इस बेल का विरोध किया। नायर ने कहा कि ताहिर हुसैन समाज के लिए खतरा हैं।

शर्मा ने कहा कि नामांकन, स्क्रूटनी और बैंक अकाउंट खोलने के लिए हिरासती परोल दी जा सकती है। हालाँकि, उन्होंने चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत देने का सख्त विरोध किया। ASG ने कहा कि ताहिर हुसैन ने वीभत्स काम किया है। उन्होंने तर्क दिया कि चुनाव लड़ने का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि नामांकन किया जा सकता है, लेकिन चुनाव प्रचार के लिए जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

शर्मा ने तर्क दिया कि ट्रायल अपने अंतिम चरण है। चुनाव प्रचार के दौरान ताहिर हुसैन इस दौरान गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में चार गवाह पहले ही पलट चुके हैं। शर्मा ने आगे कहा कि ताहिर हुसैन दंगों का मुख्य साजिशकर्ता, सरगना और फंडिंग करना वाला है। वह UAPA और PMLA सहित तीन मामलों में जेल में हैं।

ASG शर्मा ने कहा, “यूएपीए और ईडी मामलों में जेल नियम है और जमानत अपवाद है। यहाँ हम इस तथ्य के बावजूद हिरासत पैरोल के लिए तैयार हैं कि चुनाव लड़ना मौलिक अधिकार नहीं है। हम मान रहे हैं कि नामांकन दाखिल करने में उनकी सुविधा के लिए हिरासत पैरोल दी जानी चाहिए। दूसरों की तरह वह भी चुनाव लड़ सकते हैं। वे भी जीते हैं। लोग जेल में बैठकर जीते हैं।”

वहीं, ताहिर हुसैन की ओर से रिबेका जॉन ने कहा कि PMLA मामले में वह हिरासत की आधी से ज़्यादा अवधि काट चुके हैं और उन्हें अभी तक दोषी भी नहीं ठहराया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि ताहिर हुसैन को 11 एफ़आईआर में बरी किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

दरअसल, दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में हाईकोर्ट के समक्ष अंतरिम जमानत याचिका दायर की गई है। अंकित शर्मा की हत्या करने के बाद उनके शव को नाले में फेंक दिया गया था। बता दें कि इससे पहले 3 दिसंबर को ट्रायल कोर्ट ने ताहिर हुसैन को जमानत देने से इनकार कर दिया था।