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‘आतंकियों से ताहिर हुसैन के लिंक की जाँच कर रहे थे IB के अंकित शर्मा, इसलिए कर दी गई हत्या’

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के हिंदू विरोधी दंगों का सूत्रधार बनकर पार्षद ताहिर हुसैन उभरा है। उसके घर से हिन्दुओं पर पत्थरबाजी हुई। पेट्रोल बम फेंके गए। गोलियॉं चलाई गई। स्थानीय लोगों के अनुसार दंगाई लोगों को खींचकर उसके घर ले गए और फिर निर्मम तरीके से हत्या कर लाश नाले में फेंक दी। आईबी के अंकित शर्मा की हत्या भी उसके घर में किए जाने का आरोप है। उनका शव नाले से बरामद किया गया था और पोस्टमार्टम रिपोर्ट बताती है कि उन्हें 400 से ज्यादा बार गोदा गया था।

एफआईआर दर्ज होने के बाद से ताहिर हुसैन फरार बताया जा रहा है। आप ने भी उसे पार्टी से निलंबित कर दिया है। हालॉंकि अमानतुल्लाह खान जैसे आप विधायक अब भी उसका बचाव कर रहे हैं। इस बीच, भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने इस मामले को एक नया मोड़ दिया है। उन्होंने आशंका जताई है कि ताहिर हुसैन के आतंकियों से रिश्ते हैं और इसकी जाँच के कारण ही अंकित शर्मा की हत्या की गई।

स्वामी ने ट्वीट किया, “सरकार को यह स्पष्ट करने की जरूरत है कि आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा कहीं बांग्लादेशी आतंकियों के साथ ताहिर हुसैन के संबंधों के तार तो नहीं ढूँढ रहे थे और इसीलिए उनकी हत्या ताहिर के इशारे पर कर दी गई। अंकित की हत्या अगर बांग्लादेशी आतंकियों के साथ ताहिर के संबंधों पर नजर रखने के लिए हुई है तो यह बेहद गंभीर मामला है।”

बता दें कि उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान अंकित शर्मा की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक अंकित के शरीर पर 400 से ज़्यादा बार चाकुओं से गोदा गया। अंकित के शरीर के हर हिस्से पर चाकू मारे गए थे। उनके शरीर का एक भी हिस्सा ऐसा नहीं था जिसमें चाकू के गहरे घाव न हों। यहाँ तक की उनकी आँत तक को निकाल लिया गया था। अंकित के साथ हुई भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने कहा कि इस तरह से यातना का शिकार और क्षत-विक्षत बॉडी उन्होंने अपने जीवन में कभी नहीं देखा।

अंकित शर्मा का शव 26 फरवरी को चाँद बाग के एक नाले से मिला। अंकित शर्मा के पिता राजिंदर कुमार का आरोप है कि उनके बेटे की हत्या के पीछे ताहिर हुसैन का हाथ है। अंंकित शर्मा के पिता ने शुक्रवार (फरवरी 28, 2020) को नया खुलासा करते हुए कहा कि अंकित शर्मा के शव को दंगाइयों ने मस्जिद से नाले में फेंका था। उन्होंने दिल्ली के दयालपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराते हुए AAP के निलंबित नेता और नगर पार्षद ताहिर हुसैन के अलावे कई अन्य लोगों को भी आरोपित बनाया है।

अंकित के पिता रविन्द्र शर्मा की तहरीर पर दिल्ली पुलिस ने हिंसा को बढ़ावा देने, आगजनी और अंकित की हत्या सहित कई मामलों नगर पार्षद ताहिर हुसैन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। साथ ही दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन के घर को सील कर उसके ख़िलाफ़ जाँच शुरू कर दी है। नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के खजूरी ख़ास क्षेत्र स्थित ताहिर हुसैन की फैक्ट्री को भी सील कर दिया गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक ताहिर हुसैन के घर में 3000 दंगाई इकट्ठा थे। दंगों के बाद उसके घर की छत पर से ईंट-पत्थर और पेट्रोल बम का जखीरा भी बरामद हुआ है।

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बहू-बेटियों की इज्जत बचाने के लिए हिन्दू खा रहे थे गोली और पत्थर: शिव विहार ग्राउंड रिपोर्ट

दिल्ली में हिन्दू-विरोधी दंगों में मजहबी दंगाई भीड़ ने जमकर कहर बरपाया। जहाँ एक तरफ मीडिया का एक बड़ा वर्ग इस मामले में एकदम पक्षतापूर्ण रिपोर्टिंग में लगा हुआ है, हमने ग्राउंड पर जाकर सही स्थिति को आप तक पहुँचाने का बीड़ा उठाया। इसी क्रम में हम नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के करावल नगर स्थित शिव विहार पहुँचे, जो इन भीषण दंगों का सबसे बड़ा गवाह बना है। वहाँ हमने स्थानीय लोगों से बातचीत की, मजहबी भीड़ की क्रूरता की कहानियाँ सुनीं और फिर हर एक विवरण को कैमरे में कैद करने का प्रयास किया। शिव विहार चौक पर इन दंगों का सबसे ज्यादा असर हुआ।

शिव विहार चौक पर दो स्कूल हैं। एक का नाम है- राजधानी पब्लिक स्कूल। वहीं दूसरे का नाम है- डीआरपी स्कूल। राजधानी स्कूल एक समुदाय विशेष के व्यक्ति का है, जबकि डीआरपी स्कूल के ओनर कोई शर्मा जी हैं। एक स्कूल को ख़ाक में मिला दिया गया, जबकि दूसरे स्कूल को पूरे क्षेत्र में शांति भंग करने का अड्डा बनाया गया। आप समझ सकते हैं कि किस स्कूल के साथ क्या किया गया होगा। राजधानी स्कूल को एक ‘अटैक बेस’ की तरह प्रयोग में लाया गया। वहाँ दंगाइयों को संरक्षण मिला। वहाँ से पूरे क्षेत्र में बमबारी की गई, पत्थरबाजी हुई, गोली चलाई गई। उसकी छत पर हमें कई गुलेल पड़े मिले, जिनका इस्तेमाल कर भारी पत्थरों और पेट्रोल बम को भी दूर तक निशाना बना कर फेंका गया।

शिव विहार का राजधानी स्कूल- जो बना ‘आतंक का अड्डा’

जब ऑपइंडिया की टीम राजधानी स्कूल की छत पर पहुँची तो वहाँ का माहौल देख कर ऐसा लगा कि वहाँ कई दिनों से हमले की पूरी तैयारी की जा रही थी। वहीं पर एक स्थानीय व्यक्ति सुरक्षा बलों को खाना-पीना खिलाने में लगे हुए थे। उन्होंने हमें बताया कि जितनी भारी संख्या में पत्थर और पेट्रोल बमों का प्रयाग किया गया, लगता नहीं था कि इतना सबकुछ एक ही दिन में जुटाना संभव हो पाया होगा। हमने कई ऐसे बड़े-बड़े कंटेनर देखे, जिनमें पत्थर अभी तक भरे हुए थे। उन कंटेनरों का इस्तेमाल पत्थर ढोने के लिए किया गया था।

राजधानी स्कूल के बगल में एक मैरिज हॉल है, जिसमें कई गाड़ियाँ लगी हुई थीं। वहाँ काफ़ी सारे स्थानीय लोग जमा थे, जो इस बात की शिकायत कर रहे थे कि मीडिया यहाँ काफ़ी देर से पहुँचा। स्थानीय लोगों ने बताया कि उस मैरिज हॉल को उन्हीं मजहबी दंगाइयों ने तबाह किया, जो राजधानी स्कूल को ‘अटैक बेस’ बनाए हुए थे। उसके बगल में स्थित डीआरपी स्कूल जलाने के पीछे भी राजधानी स्कूल में जमा मजहबी दंगाइयों की भीड़ को ही जिम्मेदार ठहराया गया। जैसे-जैसे हम लोगों से बातचीत करते हुए आगे बढ़ रहे थे, हमें एक-एक बात पूरी तरह स्पष्ट होती हुई दिख रही थी। वो ये कि यहाँ भी उसी तरह से दंगे को अंजाम दिया गया, जिस तरह से चाँदबाग़ में ताहिर हुसैन के बहुमंजिला मकान को बेस बनाकर अधिक से अधिक हिन्दुओं को नुकसान पहुँचाया गया।


दंगाई भीड़ द्वारा DRP स्कूल को पूरी तरह से जला दिया गया – टूटे दरवाजे, हर तरफ आग ही आग

जैसे चाँदबाग में आम आदमी पार्टी के निलंबित निगम पार्षद ताहिर हुसैन की इमारत आतंकियों की पनाहगार बनी, शिव विहार चौक पर स्थित राजधानी स्कूल को भी यही किरदार दिया गया। आइए, अब आपको बताते हैं कि हुआ क्या था। सबसे पहले तो कट्टरपंथियों की एक बड़ी भीड़ राजधानी स्कूल पहुँची। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वो स्कूल के मालिक के समुदाय विशेष से होने के कारण योजना के तहत ही उसे चुना गया था। राजधानी स्कूल की छत पर पत्थर, पेट्रोल बम और गुलेल सहित कई हथियारों का इंतजाम पहले से ही किया गया था। साथ ही सामने की एक चार मंजिला इमारत भी आतंक का अड्डा था जहाँ से पेट्रोल बम, पत्थर फेंके गए, गोली दागी गई। इन दोनों जगहों पर ‘अटैक बेस’ बनने से कट्टरपंथी दंगाइयों को काफ़ी फायदे हुआ, क्योंकि वे काफी ऊँचाई से आस-पास के काफी दूर तक हिन्दुओं के घरों को निशाना बना सकते थे। कहीं-कहीं दंगाइयों की संख्या 1000 से ज़्यादा बताई जा रही है।

सबसे पहली बात तो ये कि वो स्कूल की इमारत उस क्षेत्र के बाकी इमारतों से अपेक्षाकृत ऊँची है। इससे आसपास के घरों पर हमला करना आसान हो गया। उसके आसपास हिन्दुओं के प्रतिष्ठान हैं और कई हिन्दुओं के घर हैं। एक भी ऐसे घर की छत नहीं दिखी, जहाँ राजधानी स्कूल की छत से पत्थरबाजी न हुई हो। छत से गोली भी चलाई गई। गोली लगने से एक व्यक्ति की तत्काल मौत हो गई थी, जिसका नाम दिनेश कुमार है। इसके अलावा कई हिन्दू घायल हैं जिनका इलाज चल रहा है। मजहबी दंगाई भीड़ की गोली से मरने वाले दिनेश जी के भाई सुरेश से ऑपइंडिया ने संपर्क किया है और जल्द ही इस पर विस्तृत रिपोर्ट आएगी। गोली दिनेश के सिर के ठीक बीच में लगी थी।

ये दंगाई इसी थोड़े से क्षेत्र तक सीमित रहे चौक से आगे बढ़कर और अंदर तक हिन्दुओं को नुकसान न पहुँचाएँ इसके लिए उन्हें भी सड़क पर उतरना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया जब जब हिन्दुओं ने जवाबी कार्रवाई की तब मजहबी भीड़ थोड़ी डर गई। फिर भी कोई पहले से प्लानिंग न होने और उनकी तुलना में नीचे से प्रतिकार करने की वजह से हिन्दू समुदाय का नुकसान ज़्यादा हुआ। मजहबी भीड़ को रोकने के लिए पत्थर खाना, पेट्रोल बम का वार सहना और गोली से निशाना बनना- ये सब हिन्दुओं की मज़बूरी थी। जब हमने सामने की दुकान में बैठे एक बुजुर्ग से पूछा कि आख़िर हिन्दू राजधानी स्कूल के नीचे जमा ही क्यों हुए थे, जब उन्हें पता था कि ऊपर से हमले हो रहे हैं? बुजुर्ग ने बताया:

“हमेशा ऊपर से नीचे वार करना आसान रहता है और किसी भी संघर्ष में नीचे पड़ जाने वाले को नुकसान होता आया है। हिन्दुओं की मज़बूरी थी कि वो पत्थरों के वार सहें, पेट्रोल बम से घायल हों और गोलियों की जद में जाएँ। अगर हिन्दू ऐसा नहीं करते तो शायद आज हमारी बहू-बेटियों की इज्जत नहीं बचती। अगर हिन्दू राजधानी स्कूल के नीचे से टस से मस भी होते तो इस्लामी भीड़ हमारे घरों में घुस जाती तो हमारी बहू-बेटियों का क्या होता, ये आप ही समझ लीजिए। हिन्दुओं ने इसलिए संघर्ष करना उचित समझा क्योंकि उग्र दंगाई भीड़ को रोकने का यही एक तरीका था- भले उनका निशाना बनो लेकिन डटे रहो।”

राजधानी स्कूल में तोड़फोड़ वाली ख़बर मीडिया में ख़ूब चलीं लेकिन किसी ने यह नहीं बताया कि ये तोड़फोड़ एकदम दिखावटी था। स्थानीय लोगों का सवाल है कि डीआरपी स्कूल को राख में बदल दिया गया और राजधानी स्कूल में मामूली सी तोड़फोड़ हुई, ऐसा कैसे सम्भव है? हमने सच्चाई जानने के लिए दोनों स्कूलों का कोना-कोना खंगाल डाला और हमने जो पाया, वो बेहद चौंकाने वाला था। जी हाँ, राजधानी स्कूल में अधिकतर कक्षाओं में बेंच-डेस्क एकदम सही तरीके से रखे गए थे और 2-4 डेस्क उलट-पलट दिए गए थे। सबसे नीचे वाले फर्श पर जरूर कुछ सामान बिखरा था, लेकिन वहाँ के लोगों का कहना है कि ये सब दिखावटी तौर पर था ताकि लगे कि यहाँ भी हिंसा हुई है।

वहाँ कुछेक चीजों को जला कर एक जगह रखा गया था, जिससे प्रतीत होता था कि उन्हें जलाया गया है। लेकिन, स्कूल की दीवारों को जरा भी नुकसान नहीं पहुँचाया गया था। वो स्कूल, जिसके दरवाजे पर ही लिखा हुआ था- “नो सीएए, नो एनपीआर“। सोचिए, वहाँ बच्चों को क्या पाठ पढ़ाया जाता होगा। स्कूल के हर फ्लोर तक पहुँचे हम लेकिन कहीं भी ऐसा नहीं दिखा कि कोई बड़ी तोड़फोड़ हुई हो। जैसा कि हमने ऊपर बताया, स्कूल की छत पर वो सारे सबूत मौजूद थे, जिनसे पता चलता है कि वहाँ एक ‘युद्ध’ के हिसाब से तैयारी की गई थी। बम बनाने में प्रयोग होने वाले कई मटेरियल भी पड़े हुए थे।

अब बगल के डीआरपी स्कूल का हाल सुनिए, जहाँ कई पेरेंट्स अपने बच्चों के साथ जमा हुए थे। वहाँ हमें एक जंजीर लटकी हुई दिखाई गई, जिसके सहारे दंगाई राजधानी स्कूल से उतर कर डीआरपी स्कूल में आए थे। फिर बाहर से भी करीब 300 के आसपास दंगाई DRP स्कूल में घूसे और स्कूल की हर एक कक्षा में एक-एक बेंच-डेस्क सहित पूरा स्कूल जला डाला। ब्लैकबोर्ड्स तोड़ डाले गए।


दंगाई भीड़ द्वारा DRP स्कूल को पूरी तरह से जला दिया गया , यहाँ तक की फर्नीचर भी एक जगह इकट्ठा करके आग के हवाले कर दिया गया

जली हुई वस्तुओं की दुर्गन्ध वातावरण में बुरी तरह फैली हुई थी। अपनी भतीजी के साथ आई एक महिला ने बताया कि ये सब समुदाय विशेष के कट्टरपंथियों ने किया है। वहाँ विडियो शूट करने आए एक युट्यूबर ने हमें बताया कि भारतीय संस्कृति में गुरु का दर्जा सबसे ऊपर है और विद्या के जिस मंदिर में बच्चों को पढ़ाया जाता है, उसका ये हाल करना दिखाता है कि दंगाई भीड़ पर किस कदर मजहबी उन्माद हावी था।

वहाँ एक स्थानीय नागरिक उमेश हमें मिले। “ये सब मुस्लिमों ने किया है, मोहम्डन की करतूत है ये।“- उन्होंने हमारे सवाल का यही जवाब दिया। हालाँकि, कई लोग ऑफ द रिकॉर्ड यही बात दोहरा रहे थे लेकिन कैमरे के सामने बोलने से बच रहे थे, क्योंकि उनका कहना था कि अगर उन्हें उसी इलाक़े में रहना है तो कैमरे के सामने आना सही नहीं होगा क्योंकि जैसे आज निशाना बनाया कल भी बना लेंगे।

पूरी कहानी कुछ यूँ है- राजधानी स्कूल की छत पर और आसपास मौजूद हजारों की मजहबी भीड़ ने फायरिंग की, बमबारी की, पत्थरबाजी की और फिर बगल के करीब 300 मजहबी दंगाई भीड़ ने DRP स्कूल को जला दिया। कितने मरे हैं इस सवाल पर लोगों का कहना हैं कि वहाँ के नाले में अभी भी कई लाशें पड़ी हो सकती हैं, जिन पर किसी का ध्यान नहीं गया है। क्योंकि घरों से लोग गायब हैं।

इस लेख में सलग्न किए गए विभिन्न विडियो और फोटो में आप तबाही का मंजर देख सकते हैं और स्थानीय लोगों की राय भी सुन सकते हैं। पीड़ित हिन्दुओं का कहना है कि उनका दुख-दर्द कोई मीडिया वाले नहीं दिखा रहे। वे आक्रोशित और हतोत्साहित हैं। वे पीड़ित भी हैं और मीडिया का एक बड़ा वर्ग उन्हें दंगाई दिखाने में भी लगा हुआ है। दो स्कूलों की इस कहानी से स्पष्ट पता चलता है, कि कौन पीड़ित है और कौन दंगाई ?

पहले से जमा कर रखे थे पत्थर, हिंदुओं पर हमले के लिए बहू-बेटियों को भी दे रहे थे लाठी: महिला चश्मदीद

जो हिंदू लड़की करती थी दुआ सलाम, उसी की शादी को जला कर राख कर डाला: चाँद बाग ग्राउंड रिपोर्ट

‘हमारी बेटियों को नंगा करके भेजा दंगाइयों ने, कपड़े उतारकर अश्लील हरकतें की’ – करावल नगर ग्राउंड रिपोर्ट

जो हिंदू लड़की करती थी दुआ सलाम, उसी की शादी को जला कर राख कर डाला: चाँद बाग ग्राउंड रिपोर्ट

शादी वाले घर में बेटी की शादी की तैयारियाँ चल रही थीं। रिश्तेदारों का जमावड़ा था। मेहमानों के स्वागत में दावत का इंतजाम किया जा रहा था। घर में कढ़ाई-छोलनी चल रही थी, मुँह में पानी लाने वाले तरह-तरह के व्यंजन हलवाई द्वारा बनाए जा रहे थे। लेकिन फ़िल्मी सीन की तरह कुछ ऐसा होता है कि पल भर में शादी वाले घर की खुशियाँ मातम में बदल जाती है। यह कोई आतंकी हमला नहीं था। बल्कि हमलावर घर के पड़ोस में रहने वाले वही अब्बा जान, भाई जान थे; जिनसे शादी वाले घर की बहन-बेटियाँ हर रोज दुआ सलाम करती थीं।

हम बात कर रहे हैं दिल्ली के उस हिंसा प्रभावित इलाके चाँद बाग और करावल नगर की, जहाँ दंगाइयों ने हिंदुओं के घरों को निशाना ही नहीं बनाया बल्कि उनकी दुकानों को पहले तो जमकर लूटा और फिर उन्हें आग के हवाले कर दिया गया। लेकिन इस बीच सबसे दुखद और रुह कंपा देने वाली उस घटना को भी अंजाम दिया गया, जिसे जिस किसी ने भी देखा, वह अपने आँसू बहने से नहीं रोक सका। घटना थी ताहिर हुसैन के बराबर वाले मकान में चल रही बेटी की शादी की तैयारियाँ और फिर उसमें दंगाइयों के कारण पसरा सन्नाटा।

पार्किंग चलाने वाले घटना के चश्मदीद प्रदीप और उनके साथी बताते हैं, “सीएए विरोध के नाम पर बड़ी संख्या में मुस्लिम चाँद बाग नाले की पुलिया पर खड़े हुए थे, जिसे कवर करने के लिए एक मीडिया हाउस की इनोवा गाड़ी पुलिया के पास जैसे ही पहुँचती है, वैसे ही कट्टरपंथियों द्वारा उस पर पथराव शुरू कर दिया गया। इसी के साथ मजहबी भीड़ करावल नगर की ओर बढ़ गई। दोपहर का समय था, पार्किंग का शटर पूरा खुला हुआ था। बाहर मेन रोड की ओर से जोर-जोर से आवाजें आ रही थीं। हमने देखा तो बाहर दुकानों पर पत्थरबाजी शुरू हो गई। हमने तुरंत अपने शटर को गिराया और अंदर एक कोने में जाकर खड़े हो गए, लेकिन शटर गिरने के बाद भी दंगाइयों ने रॉड की मदद से शटर को तोड़ दिया और अंदर प्रवेश कर गए।”

पार्किंग के अंदर घुसे दंगाइयों ने पहले तो प्रदीप और उनके साथी को रॉड से जमकर पीटा, जिससे प्रदीप लहूलुहान हो गए। देखते ही देखते दंगाइयों ने पार्किंग को आग के हवाले कर दिया। इसके बाद दोनों जान बचाने के लिए छत की ओर भागे। वहाँ भी ताहिर की छत से दंगाई पत्थरबाजी कर रहे थे। इसके बाद दोनों ने अपनी जान बचाने के लिए दूसरी मंजिल से ही छलांग लगा दी, जिसमें प्रदीप गंभीर रूप से घायल हो गए।

वहीं दूसरी मंजिल पर एक हिंदू लड़की की शादी की तैयारियाँ चल रही थीं। मेहमानों के स्वागत सत्कार के लिए दर्जनों हलवाई लजीज व्यंजन बनाने में लगे हुए थे। इतने में ही ताहिर हुसैन की छत पर मौजूद हजारों दंगाइयों की भीड़ ने दूसरी मंजिल पर शादी की तैयारी में लगे लोगों पर पहले तो ईंट-पत्थर फिर टाइल्स फेंकना शुरू कर दिया। जैसे ही उनको पता चला कि मजहबी भीड़ नीचे से भी और ऊपर से भी हिंदुओं पर हमला कर रही है, वैसे ही सारे लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर की दीवारों से पीछे की ओर कूद गए। दंगाई यहीं शांत नहीं हुए। उन्होंने इसके बाद वहाँ रखे सिलिंडर में आग लगाकर विस्फोट करने की कोशिश की। इसमें वह सफल नहीं हो सके, जिसके बाद पेट्रोल बम से आग लगाकर फरार हो गए।

आग इतनी भयंकर थी कि पार्किंग में खड़ी सभी गाड़ियाँ जल कर राख हो गईं और शादी का सारा सामान बर्बाद हो गया। शादी की तैयारियाँ धरी की धरी रह गईं। छत पर कहीं गोल गप्पे दिखाई दे रहे थे तो कहीं कालाजामुन। इसी के साथ शादी वाले घर में पल भर के अंदर खुशियों की बजाय मातम फैल गया। दुकान और मकान में फैली आग का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि मकान का सारा प्लास्टर आग की लपटों से गर्म होकर नीचे जमीन में पड़ा हुआ था और आग से निकले धुएँ से काली हुई दीवारें दंगे की आग को चीख-चीखकर बयाँ कर रही थीं।

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दिल्ली के हिन्दू-विरोधी दंगों की सच्चाई और उसे छिपाने का प्रोपेगेंडा: 9 कार्टून से खुली पोल

आँतें फाड़कर निकाल दी गई, 6 लोगों ने 400 से ज़्यादा बार चाकू भोंका: IB के अंकित शर्मा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट

दिल्ली दंगा: … जब जान बचाने के लिए 9 और 5 साल के बच्चों को प्रीति ने छत से नीचे फेंका

आईबी के अंकित शर्मा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट बताती है कि उन्हें 400 से ज़्यादा बार चाकुओं से गोदा गया। यह निर्ममता केवल उन्हीं हिंदुओं के साथ नहीं हुई, जिनकी जान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के दंगों में गई है। ​जो हिंदू जान बचाने में कामयाब रहे उनकी आपबीती भी सिहरन पैदा करती है। 19 साल के विवेक के सिर में दंगाइयों ने ड्रिल मशीन से छेद कर दिया। प्रीति तो जान बचाने के लिए अपने 9 और 5 साल के बच्चों को छत से नीचे फेंकने को मजबूर तक हो गई।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक आज भी प्रीति उस वक्त को याद कर सिहर जाती हैं। आँखों में मौत का खौफ दिखाई देता है और गला भर आता है। प्रीति यमुना विहार के बी-ब्लॉक में रहती हैं। उनके परिवार की जान पर 24 फरवरी को बन आई थी। इसी दिन उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में हिंदू विरोधी दंगे भड़के थे। वैसे हिंसा की शुरुआत रविवार को ही हो गई थी।

प्रीति के हवाले से दैनिक जागरण ने बताया है 24 फरवरी की दोपहर उसने अपनी आँखों से मौत को देखा। दंगाई पेट्रोल बम फेंक रहे थे। पहली मंजिल से वह अपने घर को बेबस हो जलता देख रही थी। घर को दंगाइयों ने सामने से घेर रखा था। अंदर प्रीति के साथ उसके पति और दो बच्चे फँसे थे। पेट्रोल बम से घर में आग लग चुकी थी।

बकौल प्रीति, “मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। घर के पीछे की तरफ पहुँची तो गली में मोहल्ले के लोग खड़े थे। जान बचाने के लिए 9 साल के संयम और 5 साल के विहान को पहली मंजिल से नीचे फेंक दिया। लोगों ने उन्हें नीचे पकड़ लिया और उनकी जान बच गई।” बच्चों को सही सलामत निकालने के बाद प्रीति और उसके पति दीपक गुप्ता दूसरे मंजिल से बगल वाली इमारत में किसी तरह पहुॅंचे। उस इमारत के पिछले रास्ते से दोनों बाहर निकले। प्रीति के मुताबिक सैकड़ों की संख्या में दंगाई सुबह से ही जमा होने लगे थे, जबकि पुलिस वाले वहॉं महज चार-पाँच ही थे। जब दंगाइयों का उपद्रव शुरू हुआ तो जान बचाने के लिए उन्हें भी भागना पड़ा। संयम ने दैनिक जागरण को बताया कि इस घटना के बाद वह इतना डर गया था कि पूरी रात सो नहीं पाया।

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दिलबर सिंह नेगी के हाथ-पैर काट दंगाइयों ने दुकान की आग में झोंका: बचकर भागे श्याम ने बताई आपबीती

‘मस्जिद से फेंकी गई थी अंकित शर्मा की लाश’ – पिता ने FIR में ताहिर हुसैन को बताया हत्या का आरोपी

दिल्ली में हुई हिंसा के बाद चाँद बाग के नाले से मिले इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के अंकित शर्मा के शव को लेकर हर दिन नए खुलासे सामने आ रहे हैं। पहले जानकारी मिली कि वह अपनी ड्यूटी से लौट रहे थे। फिर जानकारी मिली कि वह दंगाइयों को समझाने में लगे हुए थे। इसके बाद पता चला कि दंगाइयों ने उनको पकड़ कर ताहिर हुसैन के घर में खींचा था। फिर जानकारी सामने आई कि दंगाइयों ने अंकित शर्मा के साथ तीन अन्य लोगों को भी ताहिर के घर में खींंचा था। इसके बाद आज अंंकित शर्मा के पिता ने नया खुलासा करते हुए कहा कि अंकित शर्मा के शव को दंगाइयों ने मस्जिद से नाले में फेंका था।

अंकित शर्मा के पिता रविन्द्र शर्मा ने दिल्ली के दयालपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराते हुए AAP नेता और नगर पार्षद ताहिर हुसैन के अलावे कई अन्य लोगों को भी आरोपित बनाया है। रविन्द्र शर्मा ने दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया है कि अंकित शर्मा के शव को मस्जिद से नाले में फेंका गया था। वहीं ने आज फॉरेंसिक टीम उस स्थान का निरीक्षण करने में लगी हुई है, जहाँ 26 फरवरी को इंटेलिजेंस ब्यूरो के अंकित शर्मा का शव मिला था। दरअसल उनका शव नार्थ-ईस्ट दिल्ली के चाँद बाग इलाके में मिला था।

अंकित के पिता रविन्द्र शर्मा ने प्रशासन से तारिक हुसैन की आपराधिक रिकॉर्ड की जाँच कराने का आह्वान करते हुए कहा कि ताहिर हुसैन ने अपने आवास पर गुंडों को इकट्ठा किया था। ये सभी ताहिर की छत से लगातार फायरिंग कर रहे थे और नीचे खड़े लोगों पर छत से पेट्रोल बम भी फेंक रहे थे, जिससे इलाके में रहने वाले लोगों में तनाव और डर का माहौल पैदा हुआ। थाने में दी गई एफआईआर के मुताबिक अंकित शर्मा अपने दो दोस्तों के साथ मंगलवार शाम 4.30 बजे अपनी ड्यूटी से लौट रहे थे। इसी बीच अंकित ने दंगा प्रभावित क्षेत्र में अराजकता देखी तो वह अपने दोनों दोस्तों के साथ यह देखने के लिए आगे बढ़ गए कि क्या हो रहा है।

वहीं रविन्द्र ने यह भी बताया कि 25 फरवरी को देर शाम तक अंकित के घर नहीं लौटने पर उन्होंने उसकी तलाश शुरू कर दी। वो पहले खजूरी खास, दयालपुर के नजदीकी पुलिस थानों में गए और बाद में आसपास के अस्पतालों में उनके बारे में पूछताछ की। इसके बाद पूरी रात उसकी खोज की गई, लेकिन अंकित कहीं नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने 26 फरवरी को पुलिस में एक गुमशुदगी दर्ज कराई।

अंकित के पिता रविन्द्र शर्मा की तहरीर पर दिल्ली पुलिस ने हिंसा को बढ़ावा देने, आगजनी और अंकित की हत्या सहित कई मामलों नगर पार्षद ताहिर हुसैन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद ताहिर हुसैन के खजूरी इलाके में स्थित घर को सील कर दिया गया। वहीं आम आदमी पार्टी ने भी इसके बाद कार्रवाई करते हुए ताहिर हुसैन को पार्टी से निलंबित कर दिया। दरअसल हिंसा वाले दिन ताहिर हुसैन के घर से दंगाइयों ने नीचे खड़े लोगों पर और आस-पास में मौजूद हिंदुओं के मकानों पर पेट्रोल बम, ईंट-पत्थर बरसाए थे।

दिल्ली पुलिस पीआरओ एमएस रंधावा के मुताबिक दिल्ली हिंदू-विरोधी हिंसा मामले में अब तक दिल्ली पुलिस ने 123 एफआईआर दर्ज की हैं, जबकि 630 लोगों को हिरासत में लिया गया है।

आँतें फाड़कर निकाल दी गई, 6 लोगों ने 400 से ज़्यादा बार चाकू भोंका: IB के अंकित शर्मा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट

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मजदूरी करने दिल्ली आया था कल्लन का बेटा ताहिर, 20 साल में खड़ा कर लिया ‘दंगों का हेडक्वार्टर’

मुस्लिमों को 5% आरक्षण का ऐलान: हिंदुत्व का दावा करने वाली शिवसेना झुकी कॉन्ग्रेस-NCP के सामने

महाराष्ट्र में सरकारी स्कूल और कॉलेज में मुस्लिमों को 5 फीसदी आरक्षण दिए जाने को लेकर उद्धव कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है। एनसीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और महाराष्ट्र के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री नवाब मलिक ने कहा कि जल्द ही इसे विधानसभा से पारित किया जाएगा। यूँ तो पिछले काफी वक्त से इसे लेकर राजनीतिक चर्चा चल रही थी लेकिन उद्धव ठाकरे सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री नवाब मलिक के इस ऐलान के साथ ही शिवसेना की हिंदूवादी राजनीति को लेकर सवाल खड़े होते दिख रहे हैं।

नवाब मलिक ने कहा, “हाई कोर्ट ने सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में मुस्लिम समुदाय को 5 फीसदी आरक्षण को हरी झंडी दी थी। पिछली सरकार के कार्यकाल में इस संबंध में कोई ऐक्शन नहीं लिया गया। इसलिए हमने हाई कोर्ट के आदेश को कानून के रूप में अमल करने का ऐलान किया है।”

इससे पहले एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने भी एक कार्यक्रम के दौरान अल्पसंख्यकों की प्रशंसा की थी। तब उन्होंने कहा था कि अल्पसंख्यकों, विशेष तौर पर मुस्लिमों ने राज्य चुनाव में भाजपा के लिए वोट नहीं किया। उन्होंने कहा कि समुदाय के सदस्य जब कोई निर्णय लेते हैं तो यह किसी पार्टी की हार सुनिश्चित करने के लिए होता है।

बता दें कि मुस्लिम समुदाय को 5 फीसदी आरक्षण के लिए कॉन्ग्रेस और एनसीपी की तरफ से मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर पहले से ही दबाव बनाया जा रहा था। और जो शिवसेना कभी महाराष्ट्र में धर्म के आधार पर आरक्षण देने के सख्त खिलाफ थी, उसी ने आज कॉन्ग्रेस और एनसीपी के आगे झुककर इस प्रस्ताव को सहमति दी।

गौरतलब है कि साल 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले जून महीने में राज्य की तत्कालीन कॉन्ग्रेस-एनसीपी गठबंधन सरकार ने मुस्लिमों के लिए 5 फीसदी के आरक्षण की व्यवस्था की थी और इस संबंध में अध्यादेश भी जारी किया था। मगर इसके बाद हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना गठबंधन की सरकार सत्ता में आ गई। नई सरकार ने मराठा आरक्षण बरकरार रखा, लेकिन मुस्लिम समुदाय के लिए आरक्षण पर कोई कदम नहीं उठाया। यह अध्यादेश लैप्स हो गया था। तब भाजपा के साथ शिवसेना सत्ता में साझीदार थी, जब मुस्लिम आरक्षण के लिए अध्यादेश लैप्स हो गया था। यह आरक्षण धर्म पर आधारित था। बॉम्बे हाइकोर्ट ने 2014 में इस पर रोक लगाते हुए सिर्फ शिक्षा में मुस्लिमों को 5 फीसदी आरक्षण को बरकरार रखा, जबकि नौकरी में आरक्षण को खारिज कर दिया था।

याद हैं न बलिदानी रतनलाल: परिवार की मदद के लिए आएँ आगे, ये रहे बैंक डिटेल्स

दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में हेड कॉन्सटेबल रतनलाल वीरगति को प्राप्त हो गए। उनकी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि दंगाइयों की गोली लगने के कारण उनकी मृत्यु हुई। रिपोर्ट में बताया गया कि दंगे के दौरान मारी गई गोली उनके बाएँ कंधे में जाकर लगी और दाएँ कंधे में जाकर फँस गई। गोली को पोस्टमॉर्टम के दौरान निकाला गया।

रतनलाल मूल रूप से राजस्थान के सीकर जिले के फतेहपुर तिहवाली गाँव के निवासी थे। लेकिन अपनी पत्नी और 3 बच्चों के साथ वो पिछले काफी समय से दिल्ली के बुराड़ी में ही रह रहे थे। उन्होंने अपनी माँ से इन छुट्टियों में गाँव आने का वादा किया था। लेकिन हिंदू-विरोधी दंगों में उनकी ख्वाहिश अधूरी ही रह गई। वो माँ को किया वादा पूरा करने से पहले ही दुनिया को छोड़कर चले गए।

उनके जाने के बाद अब उनका परिवार बिलकुल अकेला है। उनके पीछे उनकी पत्नी पूनम के अलावा दो मासूम बेटियाँ सिद्धि (12) और कनक (10) के साथ-साथ एक बेटा राम (7) रह गया है। इनके अलावा रतनलाल की माँ और एक छोटा भाई दिनेश भी हैं। ये दोनों गाँव में रहते हैं। पिता बृजमोहन का तो ढाई साल पहले ही देहांत हो चुका है। अब ऐसे में आखिर उनका घर चलाने वाला है ही कौन?

ऐसे में रतनलाल के परिवार की आर्थिक मदद के लिए कुछ दिन पहले अरुण बोथरा नाम के एक IPS ऑफिसर ने सोशल मीडिया पर रतनलाल के परिवार (पत्नी) का बैंक डिटेल्स अपलोड किया था। बैंक अकाउंट की पुष्टि के लिए ऑपइंडिया ने उनके भाई दिनेश से बात की। सारी डिटेल्स सही निकली। जब ऑपइंडिया ने रतनलाल के भाई से पूछा कि उनके परिवार को क्या-क्या जरूरत है… तो उनकी आवाज भारी हो गई और वह केवल यही कह पाए, “जैसी जिसकी भावना।”

अब अगर आप भी इन दंगों में वीरगति को प्राप्त हुए हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल के परिवार की मदद करना चाहते हैं या फिर आर्थिक सहयोग करने में सक्षम हैं, तो हम उनकी बैंक डिटेल्स नीचे साझा कर रहे हैं। कृपया उनकी मदद के लिए आगे आएँ, जो खुद की जान की परवाह किए बिना दंगाइयों के सामने सीना ताने खड़े रहे और हमारे और आपके लिए अपने पूरे परिवार को छोड़कर चले गए।

Name: Mrs Poonam Bari
A/C no: 33150100023786
Bank of Baroda
IFSC Code – BARB0BURARI
(Fifth Character is Zero)

‘हमारी बेटियों को नंगा करके भेजा दंगाइयों ने, कपड़े उतारकर अश्लील हरकतें की’ – करावल नगर ग्राउंड रिपोर्ट

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में जो कुछ हुआ उसका डर अब भी हिंदुओं के चेहरे पर साफ दिखाई पड़ रहा है। दंगा प्रभावित चाँदबाग में कुछ जगहों पर थोड़ी बहुत चहलकद़मी दिखी। लेकिन नाले से आगे करावल नगर की तरफ बढ़ने पर लोग बंद गली के गेट से डरी हुई आँखों से बाहर देख रहे थे। ये वही इलाका है जहॉं ताहिर हुसैन की वो इमारत है जो दंगे का केंद्र बनकर उभरा है।

ऐसे ही एक गेट पर हमारी नज़र पड़ी। गेट के दूसरी तरफ दर्जनों लोग डरी हुई आँखों से रोड पर मीडिया और पुलिस की गतिविधियों को देख रहे थे। ताहिर हुसैन के मकान से करीब 50 मीटर की दूरी पर कुछ महिलाएँ और पुरुष खड़े थे। पीपल के पेड़ के नीचे पड़ी बजरी के ढेर के पास ये लोग खड़े थे। सड़क की गतिविधियों पर इस समूह का ज्यादा ध्यान नहीं था। वे गर्दन ऊँची कर टकटकी लगाए ताहिर के मकान को देख रहे थे। जब मैं उनके पास पहुॅंचा तो कुछ लोग पीछे हट गए। हमने उनसे बातचीत करने की कोशिश की तो उनकी डरी हुई वे आँखें फूट पड़ीं।

एक बुजुर्ग महिला ने कहा, “देखो… हमारे दिलों में पाप नहीं है। ये मुस्लिम भाई अब अपने घरों को छोड़कर चले गए। हम इनके घरों में आग भी लगा सकते हैं और ताला भी तोड़ सकते हैं, लेकिन हम हिंदू ऐसा कभी नहीं करेंगे। घटना के डर से हम न तो तीन दिन से सो रहे हैं और न ही कुछ खा-पी रहे हैं। यह दिल्ली को भी पाकिस्तान बनाना चाहते हैं, जो कि ऐसा कभी हो नहीं सकता, लेकिन अब हम इसका इलाज करके मानेंगे। यह चोर बिल्डिंग है। इसमें गुंडागर्दी होती है। इस इमारत को अब यहाँ नहीं रहने देंगे, इसे हम सरकार से तुड़वाकर ही दम लेंगे। चाँदबाग को इन्होंने अपना गढ़ बना रखा है।”

एक अन्य महिला ने बताया, “जब इस इमारत से हमारे ऊपर तेजाब की बोतलें और पत्थर फेंके जा रहे थे। तब हमारी आँखें खुली कि इनका यह प्लान काफी पहले से बना हुआ था। हम दशकों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं। हर रोज़ हम इस इमारत को आते-जाते और अपनी छतों से देखते हैं, लेकिन कभी अहसास नहीं हुआ कि यहाँ कुछ हमें मारने के लिए ही योजनाएँ बनाई जा रही हैं। वहीं आज तक ये भी पता नहीं चला कि इतनी बड़ी इमारत में आख़िर होता क्या है। यह सब इसकी राजनीति का हिस्सा है।”

दिल्ली करावल नगर में ताहिर हुसैन के मकान के सामने पड़े ईंट-पत्थर

उनके साथ खड़ी महिला बताती है, “तीन दिन बाद आज हम अपने घरों से बाहर आए हैं, इन्होंने हमारे साथ तो जो किया सब आपके सामने है, लेकिन इन्होंने ट्यूशन से लौट रहीं हमारी बेटियों को भी नहीं छोड़ा और नंगा करके भेजा। उनके सामने दंगाइयों ने कपड़े उतारकर अश्लील हरकतें की। हम जीवन में अपने पड़ोसी को कभी मारने की सोच भी नहीं सकते, लेकिन इनकी तैयारी से ऐसा लग रहा था कि यह हम सबको खत्म करना चाहते थे।” दंगाइयों की मानसिकता का आप अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि इन लोगों ने ट्यूशन से आती बच्चियों को न सिर्फ नग्न करके भेजा, बल्कि पहले भी छतों से अपने कपड़े उतार कर ये लड़कियों को आवाज़ देते थे- “आ जा… इधर आ जा…”

साथी महिलाओं को बात करता देख पीछे खड़ी महिला भी इसी दौरान आगे आईं। ऑपइंडिया को अपनी पीड़ा बताते-बताते उनकी आँखों में आँसू आ गए। उन्होंने बताया, “हमारे पास (हिंदुओं) एक-एक दो-दो बच्चे हैं, और उनके दस-दस बारह-बारह बच्चे हैं। सभी के हाथ में हथियार थे वह हमारे घरों के ऊपर पत्थर बरसा रहे थे। हमने डर के कारण अपनी खिड़कियों को भी बंद कर लिया और तीन दिनों तक घर से बाहर तक नहीं निकले। दंगाइयों ने इसका फ़ायदा उठाया और हमारे मंदिर को भी जला दिया। यहाँ तक कि मोहल्ले में मौजूद अधिकांश हिंदूओं के घरों को भी आग के हवाले कर दिया। दंगाइयों ने गरीब श्याम चाय वाले और मेडिकल स्टोर वाले को भी नहीं छोड़ा। उनकी दुकानों में पहले तो लूटपाट की और फिर उनको आग लगा दी।”

ग्रुप में खड़ी एक महिला ने केजरीवाल सरकार पर निशाना साधा और कहा, “अब क्या है दिल्ली के लोग फ्री के चक्कर में पड़े गए। अब इसका परिणाम हमें पाँच साल तक झेलना पड़ेगा।”

पहले से जमा कर रखे थे पत्थर, हिंदुओं पर हमले के लिए बहू-बेटियों को भी दे रहे थे लाठी: महिला चश्मदीद

ग्राउंड रिपोर्ट: ताहिर हुसैन की छत से चली गोली अनूप सिंह की गर्दन में लगी, आर-पार निकल गई

33 सालों में नहीं देखा ऐसा भयानक मंजर, हमारा सब कुछ बर्बाद कर दिया: ‘श्याम चाय वाले’ की आपबीती

‘तुम सड़क पर उतरो, कॉन्ग्रेस तुम्हारे साथ खड़ी’ – सोनिया, राहुल, प्रियंका के हेट स्पीच पर HC का नोटिस

सीएए विरोधी प्रदर्शनों में जनता को ट्वीट और भाषणों के जरिए भड़काने के आरोप में सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर, बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर, रेडियो जॉकी सायमा, AAP नेता अमानतुल्लाह खान के ख़िलाफ़ दर्ज हुई याचिका पर सुनवाई के दौरान आज (फरवरी 28, 2020) दिल्ली हाइकोर्ट में एनआई जाँच के लिए अपील की गई। इसके बाद कोर्ट ने इस संबंध में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया।

कॉन्ग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी, पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा पर भी भड़काऊ भाषण देने के आरोप में दिल्ली हाईकोर्ट में दर्ज हुई याचिका पर आज सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने दिल्ली पुलिस, केंद्र और राज्य सराकर को नोटिस भेजा। मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल को होगी। इसमें अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा और प्रवेश वर्मा के खिलाफ दी गई याचिकाओं पर भी सुनवाई होगी।

गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट में आज तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इन याचिकाओं में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी, असदुद्दीन ओवैसी, अकबरुद्दीन ओवैसी, वारिस पठान, दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, आम आदमी पार्टी विधायक अमानतुल्लाह खान और अभिनेत्री स्वरा भास्कर, आरजे सायमा समेत अन्य लोगों पर भड़काऊ बयान देने का आरोप लगाया गया था।

इस सुनवाई के दौरान आज याचिकाकर्ता ने कोर्ट में सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी के उन बयानों को पढ़कर सुनाया, जिसमें उन्होंने सीएएए का विरोध करने के लिए सड़क पर उतरने की बात कही थी। साथ ही कहा था कि कॉन्ग्रेस इस तरह का विरोध करने वाले लोगों के साथ खड़ी है।

इसके साथ ही सुनवाई के दौरान मनीष सिसोदिया के उस बयान का जिक्र किया गया, जिसमें उन्होंने दिल्ली पुलिस पर बस में आग लगाने का आरोप लगाया था। इतना ही नहीं असदुद्दीन ओवैसी, वारिस पठान द्वारा दिए गए भाषण को भी कोर्ट के सामने रखा गया। इसके साथ ही जिन अन्य लोगों के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं, उनके बयानों की कॉपी हाईकोर्ट के सामने पेश की गई।

बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने तीनों याचिकाओं पर अलग-अलग सुनवाई करते हुए बाद आज केंद्रीय गृह मंत्रालय, दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है कि इन तीनों पक्षों का इन याचिकाओं पर क्या कहना है, क्योंकि याचिका में माँग की गई है कि भड़काऊ बयान देने वाले सभी लोगों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करनी चाहिए।

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कयामत का दिन कभी नहीं आएगा: CAA की आड़ में हिंसा करने वालों को CM योगी की चेतावनी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर यूपी में हो रहे प्रदर्शनों और दिल्ली में हिंसा को लेकर कड़ा रुख दिखाया है। सीएए, एनपीआर और एनआरसी के नाम को लेकर विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए बुधवार (फरवरी 26, 2020) को सवाल किया कि सीएए पर इतना बवाल क्यों हो रहा है?

सीएम योगी ने विधानसभा में बजट सत्र के दौरान विपक्ष पर तंज कसते हुए पूछा, “आखिर देश की छवि खराब करके आप क्या पाना चाहते हैं। देश में आगजनी करके तोड़फोड़ करके निर्दोष लोगों को निशाना बनाकर क्या चाहते हैं? आज भी तो आप सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। बुद्धिमान व्यक्ति बार-बार ठोकर नहीं खाता। आप सीएए, एनपीआर और एनआरसी के नाम पर भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं। आप समाज की अपूरणीय क्षति कर रहे हैं। आने वाली पीढ़ी इस कृत्य के लिए कभी माफ नहीं करेगी।”

सीएम ने कहा, “अगर कुछ लोगों को गलतफहमी हुई है कि वो कानून-व्यवस्था को अपने हाथ में लेकर चीजों को अपने तरीके से चला सकते हैं तो सरकार को इसका समाधान निकालना आता है।” आगे उन्होंने यह भी कहा कि कुछेक लोग दूसरों को मार रहे हैं और अगर वो उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार उन पर लाठीचार्ज नहीं करेगी, तो ऐसा नहीं होने जा रहा है।

सीएम योगी आदित्यनाथ यहीं पर नहीं रुके। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “एक बात नोट कर लें… किसी गलतफहमी का शिकार होंगे… ये ‘कयामत का दिन’ कभी नहीं आने वाला है।” उन्होंने आगे कहा, “प्रदेश में लोकतांत्रिक अधिकारों की छूट है मगर लोकतंत्र की आड़ में आगजनी करने की छूट सरकार नहीं देगी…तोड़ फोड़ करने की छूट सरकार नहीं देगी और जिसने किया है उससे वसूली भी करेगी।”

विधानसभा में बजट पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सबका विकास करेगी, लेकिन तुष्टिकरण किसी का नहीं करेगी। सभी अपनी परंपराओं के अनुसार त्योहार मनाएँ, लेकिन दूसरों के मामलों में दखल देंगे तो खामियाजा भुगतना पड़ेगा। पिछली सरकार में पुलिस लाइन में जन्माष्टमी नहीं मनाई जाती थी, काँवड़ यात्रा में डीजे नहीं बजा सकते थे। हमने दोनों परंपराओं को लागू किया। इस दौरान जब समाजवादी पार्टी सदस्य राकेश प्रताप सिंह ने योगी सरकार से पूछा कि क्या सरकार हिंसा में मारे गए परिवार के लोगों को कोई मुआवजा देगी। इसके जवाब में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा- जी नहीं। ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

सीएम योगी ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून के नाम पर विरोध प्रदर्शन अनावश्यक है। यह नागरिकता देने का कानून है। प्रधानमंत्री बार-बार कह चुके हैं कि इससे किसी से नागरिकता नहीं जाने वाली है। यह कानून 1955 में कॉन्ग्रेसी सरकार ने बनाया था, इसमें सिर्फ एक संशोधन किया गया है। 11 वर्ष के जगह पर 5 वर्ष कर दिया गया है। सीएम योगी ने कहा कि वह बनाएँगे तो ठीक है, हम बना दें तो बुरा है?

दंगाइयों ने दंगाइयों को मारा, मुआवजा देने का सवाल ही नहीं: CAA विरोधी हिंसा पर CM योगी सख्त

अगर कोई मरने के लिए आ ही रहा है तो वह जिंदा कैसे हो जाएगा: CAA विरोधी हिंसा पर CM योगी

UP में नहीं चलेगा कश्मीर की आज़ादी वाला नारा, महिलाओं को सड़क पर छोड़ रजाई में सो रहे प्रदर्शनकारी: CM योगी