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नालों से निकले 4 शव, पुलिस का सर्च ऑपरेशन जारी: दिल्ली दंगों में अब तक 42 की मौत

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में अब तक 42 मौतों की पुष्टि हो चुकी है। नालों से चार शव मिले हैं। ताजा जानकारी के अनुसार क्षेत्र के अलग-अलग इलाके के नालों से पुलिस ने अब तक 4 शव बरामद किए हैं। सबसे पहले बुधवार (फरवरी 26, 2020) को चाँदबाग के नाले से आईबी के अंकित शर्मा का शव निकाला गया था। इसके बाद गुरुवार को 3 अन्य लोगों के शव भी निकाले गए।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने इंडिया एक्सप्रेस को इस संबंध में बताया, “उत्तर-पूर्वी जिले के नालों से 4 लाशें बरामद हुईं है। ये सभी उन इलाकों में मिली, जहाँ सोमवार (24 फरवरी) और मंगलवार (25 फरवरी) को हिंसा भड़की थी। हमारे पास लापता लोगों की सूची है। अब हम इन शवों की शिनाख्त करने में जुटे हैं। स्थानीय पुलिस को घरों और इमारतों की तलाशी के लिए तैनात कर दिया गया है। साथ ही सभी नालों की तलाशी ली जाएगी।”

जानकारी के अनुसार, पुलिस ने गुरुवार को जिन शवों को बरामद किया है, उनमें एक की पहचान मुशर्रफ के रूप में हुई है। उसे चाँदबाग के नाले में मारकर फेंका गया था। मृतक की बहन ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा, “हम हर जगह गए, पर हमें उनकी जानकारी कहीं नहीं मिली। फिर हमें किसी ने बताया कि उसे नाले में फेंक दिया गया था। जब हमने नाला देखा तो उसका शव वहाँ भी नहीं था। फिर गुरुवार को हम जीटीबी अस्पताल गए तो वहाँ उसका शव हमें मिला।”

दूसरे शव की पहचान मोहसिन के रूप में हुई। पुलिस को मोहसिन का शव भजनपुरा नाले से मिला। मोहसिन के अंकल ने बताया, “मंगलवार को करीब पाँच बजे वो भजनपुरा किसी काम से गया था। यहाँ उसकी कार को एक भीड़ ने घेर लिया और उससे पैंट उतारने को कहा। उसने किसी तरह अपने साथी को फोन किया। लेकिन जब तक उसे बचाने के लिए कोई कुछ कर पाता उन लोगों ने उसे मार कर नाले में फेंक दिया।”

जीटीबी अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर के अनुसार, “गुरुवार को सुबह करीब साढे दस बजे तीनों शव लेकर आए गए। जरूर मृतकों को नाली में फेंके जाने से पहले भयानक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा होगा। तीनों शव सड़ चुके थे। शुरुआती जाँच में इनके सिर, चेहरे और छाती पर चोट के निशान मिले हैं। मगर, हो सकता है कुछ जलने के भी घाव हों। सारी चीजें सिर्फ़ पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता पाएगी।”

गौरतलब है कि पुलिस ने इससे पहले इस हिंसा में मारे गए 37 लोगों की जानकारी साझा की थी। पुलिस ने बताया था कि हिंसा में मारे गए लोगों में 1 पुलिस अधिकारी समेत 36 आम नागरिक हैं। साथ ही ये भी बताया इस अधिकतर लोगों (21 लोग) की मौत गोली लगने के कारण हुई। 4 लोगों की हत्या धारधार हथियार घोंपने और प्रताड़ित किए जाने के कारण हुई। वहीं, 3 लोगों को जलाकर मार डाला गया।

स्कूल की छत पर सेट किया गया था बड़ा गुलेल, हिंदुओं की संपत्ति को चुन-चुनकर बनाया निशाना

दिल्ली में बीते दिनों हिंदुओं के ख़िलाफ़ हुई हिंसा पूर्व नियोजित होने के कई सबूत सामने आ रहे हैं। हिंसाग्रस्त इलाकों से लगातार ऐसी तस्वीरें और विडियो सामने आ रही हैं, जो इस बात को प्रमाणित करती हैं कि ये हिंसा दो समुदायों के आमने-सामने आने से नहीं भड़की, बल्कि ये सब एक प्लान के तहत हुआ। मुस्लिम दंगाइयों ने हिंदुओं के घरों, उनकी गाड़ियों और उनके शैक्षणिक संस्थानों पर हमला करने के लिए पहले से ही तैयारी कर रखी थी।

सोशल मीडिया पर इस समय एक वीडियो वायरल हो रहा है। विडियो शिव विहार के एक स्कूल का है। यह स्कूल एक मुस्लिम का है। इसके आसपास ही अमर विहार और मुस्तफाबाद है। विडियो में देखा जा सकता है कि इस स्कूल की छत पर एक बडा गुलेल सेट किया है। इससे पत्थर और पेट्रोल बम जमकर बरसाए जा सके। विडियो में आप देख सकते हैं कि ये गुलेल आम गुलेल की तरह नहीं है। लोहे की रॉड पर रबड़ लगाकर बड़े आकार में इसे बनाया गया है। इसमें यदि कोई चीज फँसाकर दागी जाए, तो वो दूर जाकर गिरेगी।

वीडियो बनाने वाले शख्स को कहते सुना जा सकता है कि गुलेल को निशाना लगाने के लिए जिस जगह सेट किया गया है उसके सामने अमर विहार का इलाका है और वहाँ हिंदुओं की दो पार्किंग हैं। जहाँ पर मुस्लिम के स्कूल की छत से पेट्रोल बम फेंके गए। इसके अलावा युवक इस स्कूल के बगल की एक बिल्डिंग को भी दिखा रहा है जहाँ पर हिंदू व्यक्ति को मार दिया गया।

युवक को कहते सुना जा सकता है कि इस युद्ध में कबाड़ की चीज़ों का भी दंगाइयों ने इस्तेमाल किया। युवक कहता है कि ये लड़ाई नहीं है, ये युद्ध है। इसे ही सिविल वार कहा जाता है। हालात देखकर युवक कहता है कि इजराइल के साथ भी ऐसा ही युद्ध लड़ा जाता है और हमारे (हिंदुओं) साथ भी ऐसा ही युद्ध लड़ा जाता है।

विडियो में हम देख सकते हैं कि युवक स्कूल की छत से बगल के एक स्कूल की इमारत को भी दिखाता है जो कि एक हिंदू का है। विडियो में साफ दिख रहा है कि दंगाइयों ने हिन्दू के स्कूल को तहस-नहस कर दिया है। एक क्लासरूम भी नहीं छोड़े गए हैं, जबकि मुस्लिम के स्कूल में हल्के नुकसान से अतिरिक्त कुछ नजर नहीं आ रहा।

गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर इस विडियो को जमकर शेयर किया जा रहा है और कहा जा रहा है कि लोग अपने दिमाग से इन बातों को निकाल दें कि ये हिंसा सीएए के विरोध में हुई। ये हिंसा हिंदुओं के ख़िलाफ़ पूर्व नियोजित थी। वरना कौन पत्थर और पेट्रोल बम फेंकने के लिए गुलेल लगाता है।

एसएन श्रीवास्तव होंगे दिल्ली के नए पुलिस कमिश्नर: दंगों पर काबू पाने के लिए बुलाए गए थे

वरिष्ठ आईपीएस सच्चिदानंद श्रीवास्तव दिल्ली पुलिस का नए कमिश्नर होंगे। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उनके नाम पर मुहर लगा दी है। दिल्ली में हिंदू विरोधी हिंसा के पर काबू पाने लिए 25 फरवरी को बतौर स्पेशल कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) उनकी विशेष नियुक्ति की गई थी। वे अमूल्य पटनायक की जगह लेंगे, जो 29 फरवरी को रिटायर हो रहे हैं। पटनायक का कार्यकाल 31 जनवरी को ही खत्म हो गया था, लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव के मद्देनजर उन्हें एक महीने का एक्सटेंशन दिया गया था।

जर्नलिस्ट आदित्य राज कौल ने एसएन श्रीवास्तव के दिल्ली पुलिस कमिशनर के तौर पर नियुक्ति की खबर की पुष्टि करते हुए गृह मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ऑर्डर को शेयर किया है।

एसएन श्रीवास्तव का कार्यकाल 1 मार्च 2020 से शुरू होगा। बीते दिनों एसएन श्रीवास्तव सीआरपीएफ में थे और दो साल पहले वो जम्मू-कश्मीर में भी रहे। इस दौरान घाटी में उन्होंने ऑपरेशन ऑल आउट में आर्मी का साथ दिया था। श्रीवास्तव को गृह मंत्रालय ने विशेष रूप से सीआरपीएफ से बुलाकर दिल्ली का स्पेशल कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) बनाया था, ताकि हिंदू विरोधी दंगों पर काबू पाया जा सके। दंगों में अब तक 42 लोगों के मरने की पुष्टि हो चुकी है। स्पेशल कमिश्नर के रूप में कार्यभार संभालने के तुरंत बाद, श्रीवास्तव ने दंगा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था।

बता दें कि एसएन श्रीवास्तव AGMUT कैडर में 1985 बैच के अधिकारी हैं। उन्हें एक तेजतर्रार अधिकारी के तौर पर जाना जाता है। बतौर डीसीपी वे दक्षिण पश्चिम और उत्तर जिले का प्रभार सँभाल चुके हैं। वे दिल्ली पुलिस की ट्रैफिक डिवीजन में भी तैनात रह चुके हैं। श्रीवास्तव दिल्ली पुलिस में ट्रेनिंग ब्रांच के अलावा हेड क्वार्टर शाखा भी रहे हैं।

इसके बाद उन्हें दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में तैनात किया गया था जहाँ उन्होंने कई एंटी टेरर ऑपरेशन किए। साथ ही मशहूर आईपीएल मैच फिक्सिंग कांड का खुलासा भी उनके समय में ही हुआ था। अपने काम के लिए मशहूर श्रीवास्तव को सीआरपीएफ में पश्चिमी जोन का एडीजी बनाया गया जहाँ उन्होंने सेना के साथ मिलकर आतंकवादियों के खिलाफ अनेक एनकाउंटर में शामिल हुए।

एसएन श्रीवास्तव ने साल 2017 में दक्षिण कश्मीर में ऑपरेशन ऑल आउट के तहत कई ऐसे एनकाउंटर किए जिसमें हिज्बुल मुजाहिदीन समेत अनेक आतंकवादी गुटों के कई टॉप कमांडर शामिल थे। इसके बाद उन्हें सीआरपीएफ की ट्रेनिंग शाखा में भेज दिया गया था जहाँ से उन्हें दिल्ली पुलिस में बतौर अपर विशेष आयुक्त कानून व्यवस्था के पद पर लाया गया था।

पहले से जमा कर रखे थे पत्थर, हिंदुओं पर हमले के लिए बहू-बेटियों को भी दे रहे थे लाठी: महिला चश्मदीद

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सीएए विरोध के अचानक से हिंदू विरोधी दंगों में तब्दील होने से हर कोई सकते में है। हर कोई यह जानना चाहता है कि इस साजिश के पीछे कौन लोग थे। इसे कैसी रची गई। अभी तक जो तथ्य सामने आए हैं उसमें ताहिर हुसैन की भूमिका मुख्य संदिग्ध के तौर पर उभरी है। उसकी इमारत से जो पत्थर और पेट्रोल बम का जखीरा मिला है उससे लगता है कि साजिशें लंबे समय से रची जा रही थी। ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान हमारी जिन लोगों से बात हुई उससे भी ऐसा लगता है। एक चश्मदीद ने हमें दंगाइयों की हर उस तैयारी के बारे में बताया जो सीएए विरोध की आड़ में पिछले काफी समय से रची जा रही थी।

ग्राउंड रिपोर्ट के लिए हम अपने दफ्तर से निकलकर मेट्रो से शास्त्री पार्क पहुँचे। यहाँ से हिंसा प्रभावित क्षेत्र जाने के लिए हमने एक ऑटो लिया। ऑटो में बैठते ही हमने चालक से इलाके के हालात के बारे में पूछना शुरू कर दिया। इसी बीच रास्ते से कुछ महिला सवारी बैठीं, जिनमें से एक महिला ने ऑटो में बैठते ही अपनी आँखों देखी बतानी शुरू कर दी। ऑटो से उतरने के बाद हमने अपना परिचय देते हुए महिला से पूरी बात बयाँ करने का अनुरोध किया। महिला हमसे बात करने के लिए तो राजी हो गई, लेकिन एक शर्त के साथ वह ये कि उनका नाम नहीं आना चाहिए।

सोनिया विहार में किराए के मकान पर रहने वाली उस महिला ने ऑपइंडिया को बताया, “देर रात का समय था। मैं दूसरी मंजिल पर कमरे में डर के मारे सो भी नहीं पा रही थी। इसी बीच पड़ोस से भीड़-भाड़ के साथ लोगों की जोरों से आवाज आ रही थी। मैंने देखा कि इस्लामी भीड़ हाथों में लाठी-डंडे, ईंट-पत्थर, सरिया, रॉड, तमंचे आदि हथियार लेकर गली से मेन रोड की तरफ जा रही है। इस भीड़ में बड़ी संख्या में महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे। मैंने देखा कि परिवार के बड़े लोग हिंदुओं पर हमला करने के लिए अपने बच्चों और महिलाओं को घरों से बाहर निकाल रहे थे। इसे देखकर मैं दंग रह गई।”

महिला आगे बताती है, “इतना ही नहीं सभी ने अपने घरों के अंदर और छतों पर पहले से ही ईंट-पत्थर रखे हुए थे। वहाँ से लोग लगातार ईंट-पत्थरों को बाहर निकाल रहे थे। यह सब देख मेरे अंदर इतना डर पैदा हो गया कि मैं पूरी रात सो भी नहीं सकी, क्योंकि वह पूरा मोहल्ला दूसरे मजहब का है और जहाँ में रहती हूँ वह एक मात्र हिंदू परिवार का घर है।” महिला बार-बार एक ही बात पर आश्चर्य जता रही थी कि हम (हिंदू) लड़ाई होने पर अपने बच्चों को घर के अंदर करते हैं, लेकिन वह अपने बच्चों और महिलाओं को लाठी डंडे देकर लड़ाई करने के लिए बाहर कर रहे थे।

मूल रूप के बिहार की रहने वाली महिला सोनिया विहार के मुस्लिम बाहुल्य इलाके में एक किराए के मकान में रहती है। सात साल पहले पति की मौत के बाद वह बच्चों का पालन-पोषण करने के लिए घरों में काम करती है। हिंसा के बाद से वह इतनी डरी हुई है कि पिछले तीन दिनों से अपने काम पर नहीं गई और सोचने के लिए मजबूर है कि दिल्ली में अब रहा जाए कि नहीं। हिंसा से डरी सहमी वह महिला बार-बार एक ही बात कहती रही, “मेरा नाम नहीं लेना, नहीं तो वे लोग मुझे मार डालेंगे।”

33 सालों में नहीं देखा ऐसा भयानक मंजर, हमारा सब कुछ बर्बाद कर दिया: ‘श्याम चाय वाले’ की आपबीती

ग्राउंड रिपोर्ट: ताहिर हुसैन की छत से चली गोली अनूप सिंह की गर्दन में लगी, आर-पार निकल गई

ग्राउंड रिपोर्ट: चुन-चुन कर जलाई हिन्दुओं की दुकानें, ताहिर हुसैन के तहखाने वाली इमारत में थे 3000 गुंडे

दिल्ली हिंदू विरोधी दंगे: ड्रोन फुटेज में मस्जिद पर ईंट-पत्थरों का ढेर, NDTV ने तस्वीर ही एडिट कर दी

दिल्ली पुलिस ने गुरुवार (फरवरी 27, 2020) को हिंदू विरोधी दंगों के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगाप्रभावित इलाकों में ड्रोन की मदद से लिए कुछ विडियो जारी किए। विडियो में स्पष्ट तौर पर देखा गया कि न केवल स्थानीय लोगों ने अपने घरों की छत पर ईंट-पत्थर जमा किए हुए हैं, बल्कि एक मस्जिद की छत पर भी ईंट-पत्थरों का बड़ा ढेर लगा है।

विडियो में मस्जिद की तस्वीरें और उसपर इकट्ठा किए गए ईंट-पत्थर एकदम क्लियर हैं। लेकिन एनडीटीवी की एकतरफा पत्रकारिता की हद देखिए…अपने पाठकों को बरगलाने के लिए और रिपोर्ट के जरिए इस्लामी आतताइयों की हकीकत को छिपाने के लिए उसने ड्रोन से ली तस्वीर का तो इस्तेमाल किया, लेकिन उसमें से मस्जिद को क्रॉप कर दिया। ताकि उनका कोई पाठक इन दंगों में मुस्लिमों की भूमिका पर सवाल न उठा सके।

सोचिए, क्या एनडीटीवी ऐसा उस समय तब करता जब उसे किसी मंदिर की छत पर पत्थर दिखते? तब तो शायद उनकी रिपोर्ट की हेडलाइन भी प्रमुखता से इसी बिंदु पर होती।

एनडीटीवी के ऐसे ओछे कारनामे की सबसे दिलचस्प बात तो ये है कि एनडीटीवी खुद की एकतरफा पत्रकारिता को जस्टिफाई भी नहीं कर सकता। क्योंकि क्रॉप इमेज के जरिए एनडीटीवी इस बात का दावा भी नहीं कर रहा कि वो आखिर तस्वीर में मौजूद विशेष एंगल से कुछ बताना चाहता है या उससे कुछ पता चल रहा है। वहीं हेडलाइन भी देखें तो एकदम फ्लैट है।

बता दें, तस्वीर के जिस एंगल को एनडीटीवी ने शेयर किया है उसमें सिर्फ़ दो बिल्डिंग, दो सड़क और पुलिस वालों का एक समूह नजर आ रहा है। लेकिन अगर इसी की पूरी तस्वीर (बिन एडिट की हुई) को जूम करके देखा जाए तो पता चलेगा कि मस्जिद की छत पर भारी संख्या में ईंट पत्थर देखकर ही एनडीटीवी ने इसे क्रॉप किया।

गौरतलब है कि विशेष समुदाय के अपराधों को छिपाने का एनडीटीवी का पुराना इतिहास रहा है। सोशल मीडिया आ जाने के कारण और यूजर्स की सक्रियता के कारण अब इसके उसके एजेंडे का खुलासा खुलकर होने लगा है। पिछले दिनों की यदि बात करें, तो हमने देखा था कि किस तरह रवीश कुमार पुलिस के सामने बंदूक तानकर खड़े होने वाले युवक का नाम शाहरूख की जगह अनुराग मिश्रा बताना चाह रहे थे। वहीं उसी चैनल के एक अन्य रिपोर्टर श्रीनिवासन जैन घटनास्थल पर मौजूद होने के बावजूद दंगाइयों को अपने कैमरे में कैप्चर नहीं कर रहे थे, सिर्फ इसलिए क्योंकि पत्थर बरसा रही वह भीड़ अल्पसंख्यक समुदाय की थी।

मजदूरी करने दिल्ली आया था कल्लन का बेटा ताहिर, 20 साल में खड़ा कर लिया ‘दंगों का हेडक्वार्टर’

ताहिर हुसैन जैसों ने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के बीच जो खूनी डिजाइन तैयार किया उसने उत्तर पूर्वी दिल्ली को दंगों की चपेट में ले लिया। स्थानीय लोगों बताते हैं कि ताहिर का घर दंगों का हेडक्वार्टर था। वहॉं पकड़-पकड़कर हिंदू लाए गए और उनकी हत्या की गई। इंटेलीजेंस ब्यूरो के कॉन्स्टेबल अंकित शर्मा को जिस तरह उसके गुंडों ने मौत के घाट उतारा गया, वह रोंगटे खड़े कर देता है।

दंगों में भूमिका सामने आने के बाद आप ताहिर से पल्ला छुड़ाने की कोशिश में है। उसे पार्टी से निलंबित कर दिया गया है। हालाँकि पार्षद ताहिर हुसैन दिल्ली की राजनीति का चर्चित चेहरा नहीं है। लेकिन पूर्वोत्तर दिल्ली के शाहदरा, नेहरू नगर, चाँदबाग जैसे इलाकों में खासा रसूख रखता है। अपनी बिरादरी में उसकी अच्छी-खासी पैठ है। नेहरु विहार से पार्षद ताहिर हुसैन का घर करावल नगर में है। वह पैसे के लिहाज से भी काफी मजबूत है। उसके घर की छत से जिस तरह पेट्रोल बम, पत्थर का जखीरा मिला है उससे जाहिर करता है कि वह दंगे की पूरी तैयारी करके बैठा था।

दैनिक जागरण के अमरोहा संस्करण में प्रकाशित खबर

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार AAP पार्षद ताहिर हुसैन मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अमरोहा के गाँव पौरारा का रहने वाला है। ताहिर हुसैन का मामूली मजदूर से आम आदमी पार्टी के पार्षद तक का सफर हैरान करने वाला है। ताहिर 20 साल पहले मजदूरी करने की नीयत से दिल्ली आया था। यहाँ आकर वो मजदूरी करने लगा। कुछ महीनों बाद ताहिर के पिता कल्लन सैफी भी अमरोहा से दिल्ली अपने बेटे के पास आ गए। ताहिर ने कुछ वर्ष पहले गाँव के अपने पुश्तैनी मकान को भी बेच दिया था।

फिलहाल उसकी कुछ आवासीय भूमि खाली पड़ी हुई है। ताहिर साल में एक-दो बार गाँव जाया करता था, लेकिन पिछले तकरीबन एक साल से वो गाँव नहीं गया है। उसका एक भाई गाँव में स्कूल चलाता है। ताहिर पाँच भाइयों में सबसे बड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि गाँव में किसी तरह का कोई रोजगार न होने की वजह से वो मजदूरी करने के लिए दिल्ली आ गया था। कुछ साल में ही वह बड़ा कारोबारी बन गया और राजनीति में भी उसने पैठ बना ली। इसके बाद वह AAP का निगम पार्षद बन गया।

जानकारी के मुताबिक ताहिर हुसैन करीब 18 करोड़ की संपत्ति का मालिक है। आठवीं पास ताहिर ने 2017 में पहली बार चुनाव लड़ा था और चुनाव आयोग को दिए शपथ-पत्र के अनुसार उस पर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था। बता दें कि ताहिर हुसैन का घर इस तरीके से बनाया गया है कि उससे चारों ओर का इलाका कवर हो और अंदर जो भी लोग हों, वो एकदम सुरक्षित रहें। स्थानीय लोगों ने बताया कि ताहिर हुसैन के घर में तकरीबन 3000 दंगाई जमा थे और कई संदिग्ध लोगों का आना-जाना लगा हुआ था, यानी काफ़ी पहले से इसकी साज़िश रची जा रही थी। लोगों ने हुसैन के बारे में बताया कि उसकी इमारत का परिसर बहुत बड़ा है, जिसमें एक तहख़ाना भी है

ताहिर की छत के जो विडियो सामने आए हैं उनमें भारी मात्रा में पत्थर, पेट्रोल बम, बोलतें, डंडे शामिल हैं। अपने ऊपर लगे आरोपों के बाद भले ही ताहिर हुसैन खुद को बेगुनाह बता रहा हो मगर जो सबूत उनके मकान की छत से मिले हैं, उसने ताहिर के दावों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर ऐसे भी विडियो तैर रहे हैं जिनमें खुद ताहिर हुसैन हाथों में डंडा लेकर अपने मकान की छत पर घूम रहा है।

ताहिर हुसैन पर गुरुवार (फरवरी 27, 2020) को दयालपुर पुलिस थाने में आईपीसी की धारा-302 (हत्या) का मामला दर्ज किया गया। ताहिर पर आईबी ऑफिसर अंकित शर्मा समेत 4 लोगों को मार कर उनकी लाश को नाले में फेंकने का आरोप है। साथ ही दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन के घर को सील कर उसके ख़िलाफ़ जाँच शुरू कर दी है। नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के खजूरी ख़ास क्षेत्र स्थित ताहिर हुसैन की फैक्ट्री को भी सील कर दिया गया है। फिलहाल ताहिर फरार चल रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उसकी तलाश शुरू कर दी गई है। संभावित ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी गई है।

ताहिर के चाँदबाग में एजेंडा लेकर रिपोर्टिंग करने पहुँचे राजदीप सरदेसाई, युवक ने की बोलती बंद

उत्तर-पूर्वी दिल्ली का चॉंदबाग हिंदू विरोधी दंगों का केंद्र बनकर उभरा है। यहीं आप के पार्षद रहे ताहिर हुसैन की वह तहखाने वाली इमारत भी है, जहॉं स्थानीय लोग करीब 3000 दंगाइयों के जुटने की बात कहते हैं। यहॉं से पत्थर और बम फेंके गए। गोलियॉं चली। आईबी के अंकित शर्मा की निर्मम तरीके से हत्या हुई। एफआईआर दर्ज होने के बाद से ताहिर फरार है।

इसी चॉंदबाग में राजदीप सरदेसाई भी रिपोर्टिंग करने पहुॅंचे। राजदीप की गिनती उन एजेंडाबाज पत्रकारों में होती है, जिनका एक ही धर्म है समुदाय विशेष को पीड़ित दिखाओ और हिंदुओं को हमलावर। इसी एजेंडे के साथ वे चॉंदबाग भी पहुॅंचे लेकिन एक युवक ने उनके मंसूबों को नाकाम कर दिया।

चाँदबाग का जायजा ले रहे राजदीप ने कई लोगों से बात की। इसी दौरान उन्होंने एक युवक ये कुछ सवाल करने शुरू किए और अपना हिंदू-मुस्लिम एजेंडा चलाने के लिए उससे पूछते नजर आए कि सामने जो दुकान जलाई गई है, वो किसकी है?

उनके इस सवाल से पहले वहाँ मौजूद सभी लोग उन्हें अपनी पीड़ा सुना रहे थे। ये बता रहे थे कि किस तरह दंगाइयों ने हमला किया। लेकिन सरदेसाई इस बीच लगातार हिंदू-मुस्लिम कर रहे थे। ऐसे में लोगों ने उन्हें समझाया भी कि हिंदू भी इंसान ही हैं। वो भी डरे हुए हैं। लेकिन जब इसके बाद भी सरदेसाई नहीं माने और सामने एक जली दुकान को लेकर सवाल किया तो वह युवक राजदीप के सवालों के पीछे छिपे उद्देश्य को समझ गया और कहने लगा, “ये मैटर नहीं करता दुकान किसकी है…मैटर ये करता है कि नुकसान किसका हुआ हुआ। आप पूछना चाहते हैं कि ये दुकान हिंदू की है या मुस्लिम की। मैं क्यों बताऊँ किसकी है। मैं तो कहूँगा कि नुकसान हमारा भी हुआ। पंचर तो वहाँ से हम भी लगवाते थे। कमाता तो वो शख्स हमसे भी था।”

इसके बाद युवक को अन्य क्षेत्र में रहने वाले अपने साथियों के बारे में बोलता सुना जा सकता है। युवक बताता है कि जब उसने भजनपुरा में अपने हिंदू साथी को फोन किया, तो उसने बताया कि वो बहुत घबराया हुआ है, कमरे में बंद है। वहीं दूसरा दोस्त हाल पूछने पर बताता है कि वो रो रहा है, क्योंकि बेटी को 2 दिन से दूध पीने के लिए लाकर नहीं दे पाया हूँ।

युवक लगातार दिल्ली हिंसा पर राजदीप सरदेसाई से सवाल करता है कि हम लोग कैसे जमाने में हैं? क्या वाकई हम पढ़े-लिखे हैं? युवक कहता है जब हमारे परिवार वाले कहते थे कि 1992 में दंगे हुए तो हम मजाक समझते थे। हम कहते थे हम दिल्ली में रहते हैं। लेकिन परिवार वाले कहते थे कि अभी यूपी में हुआ है, इसलिए संभलकर।

युवक के अनुसार, वो एक सरकारी कर्मचारी है और उसके भाई मजदूर हैं। उसके कई दोस्तों का इस हिंसा में काफी नुकसान हुआ है। उसे कभी नहीं लगा था कि दिल्ली में ये सब होगा, लेकिन अब जब ये सब देख रहे हैं तो उनके चेहरे पर डर को साफ देखा जा सकता है। ऐसी स्थिति में जब सरदेसाई युवक से पूछते हैं कि इतने के बावजूद वो इस इलाके में रहेंगे या नहीं, तो वो कहते हैं कि जब उनका परिवार पाकिस्तान नहीं गया, तो वो चाँदबाग क्यों छोड़ देंगे? इसके बाद राजदीप सरदेसाई उसे शाबाशी देते नजर आए। लेकिन बता दें युवक द्वारा सरदेसाई को दिए जवाब की क्लिप सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है।

इसके अतिरिक्त वीडियो के 6:30 के स्लॉट पर राजदीप को यमुना विहार के निवासियों से कपिल मिश्रा के भाषण को लेकर भी सवाल पूछते भी सुना जा सकता है। वे पूछते हैं कि क्या आप लोगों को लगता है उनके भाषण के कारण माहौल बिगड़ा? जिस पर वहाँ मौजूद जनता ने इस बात को स्पष्ट तौर पर नकारा और कहा उनकी वजह से नहीं हुआ, उन्होंने सिर्फ़ रास्ता खोलने की बात कही और कुछ भी नहीं।

ताहिर हुसैन के गुंडों से बचा नाबालिग: दंगाइयों ने हमें पकड़ा, मैं हाथ छुड़ा भागा… पीछे देखा तो तीनों गायब थे

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों में जो लोग मारे गए उनके घरों में चीख-पुकार मची हुई है। जो इस हिंसा की चपेट में तो आए, लेकिन किसी भी तरह से जिंदा बच गए वह उस पल को याद कर बार-बार बदहवास हो जाते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है उस नाबालिग लड़के की, जिसने IB के अंकित शर्मा के साथ दो लोगों को घसीटकर ताहिर हुसैन के घर ले जाते दंगाइयों को देखा। दंगाइयों ने इस नाबलिग को भी पकड़ लिया था। लेकिन वह भागने में कामयाब रहा और जब पीछे मुड़कर देखा तो तीनों गायब थे। इतना बताते ही वह आगे कुछ बोल नहीं पाता है और फूट-फूट कर रोने लगता है।

दंगाइयों के चुंगल से छूटकर भागा (चौथा पाड़ित) नाबालिग लड़का रोते-बिलखते हुए ऑपइंडिया को बताता है, “चाँदबाग में हिंसा भड़क रही थी। दंगाइयों की भीड़ बड़ी संख्या में ताहिर हुसैन के मकान के पास इकट्ठा हो रही थी। दंगाइयों ने शिव मंदिर पर हमला कर दिया इससे कुछ हिंदुओं में उबाल आया, लेकिन मुस्लिमों की भीड़ को देखकर कोई उन पर वार करने की हिम्मत तक नहीं जुटा सका। इसी बीच ड्यूटी से लौट रहे अंकित शर्मा ने देखा तो वह चाँदबाग का दृश्य को देख दंग रह गए। उन्होंने दंगों के बीच जिसे भी देखा बस यही क्या ‘तुम लोग क्या कर रहे हो आप हम सबको यहीं रहना है।’ इसके बाद भी दंगाई न तो सुनने को तैयार थे और न ही किसी की बात मानने को। अंकित शर्मा लोगों को समझाते हुए चाँदबाग से करावल नगर की ओर आगे बढ़ गए। उनके साथ और भी लोग थे, जिसमें मैं भी शामिल था।”

चश्मदीद(नाबालिग लड़के) के मुताबिक, “अंकित शर्मा और उनके साथ कुछ लोग ताहिर के मकान के पास पहुँचे ही थे कि दंगाइयों की भीड़ झपट पड़ी। हमें ताहिर के घर में खींचने की कोशिश की। इस बीच मैंने अपना हाथ झटके से छुड़ा लिया और वहाँ से दौड़ पड़ा। दंगाई अंकित शर्मा के साथ दो और लोगों को घर की खींच ले गए। मैंने पीछे मुड़कर देखा तो वह तीनों ग़ायब थे। मुझे तभी अहसास हो गया था कि अब वह लौटकर नहीं आएँगे। मैं किसी भी तरह वहाँ से भाग कर अपने घर पहुँच गया और अपने घर का दरवाजे को बंद कर लिया।” उस पल को याद करते ही नाबालिग सिहर उठा और रोने लगा।

नाबालिग ने बताया कि अंकित से उसकी कोई जान-पहचान नहीं थी। लेकिन, वह जानता था कि वे कौन हैं और क्या काम करते हैं। इसलिए जब वे दंगाइयों को समझाने निकले तो वह भी साथ हो गया। लेकिन, उस घटना के बाद से नाबालिग और उसका परिवार काफी भयभीत है। वे लोग घर से निकल पाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। उन्हें खौफ है कि यदि उनकी पहचान सार्वजनिक हो गई तो अब भी दंगाई उन्हें मार डालेंगे। नाबालिग ने रोते हुए बताय वे मेरे सामने तीन लोगों को खींच ले गए और मैं कुछ नहीं कर सका। अंकित शर्मा का शव तो नाले से बरामद किया जा चुका है। उन्हें किस कदर प्रताड़ित कर मारा गया यह भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सामने आ चुकी है। लेकिन, उनके साथ जिन दो और लोगों को दंगाई ताहिर के घर ले गए थे उनके साथ क्या हुआ होगा यह सोचकर ही सिहरन पैदा हो जाती है।

स्थानीय लोगों ने ऑपइंडिया को बताया कि ताहिर की इमारत में करीब तीन हजार गुंडे जमा थे। वहीं से हिंदुओं पर पत्थर और पेट्रोल बम फेंके गए। गोली चलाई गई। कुछ विडियो सामने आए हैं जिसमें ताहिर भी डंडे के साथ दिख रहा है। एफआईआर दर्ज होने के बाद आप का निगम पार्षद रहा ताहिर फरार है।

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अलीगढ़: हिन्दुओं के घरों पर ‘मकान बिकाऊ है’ के पोस्टर, जुमे की नमाज से पहले 4000 को नोटिस

अलीगढ़ में 23 फरवरी 2020 को सीएए विरोधियों ने जमकर हिंसा की थी। उपद्रव के बाद जुमे की पहली नमाज आज (फरवरी 28, 2020) है। इस नमाज को अमन-चैन से कायम कराने के लिए प्रशासन ने पूरा जोर लगा दिया है। चार हजार पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों का भारी-भरकम फोर्स लगाया गया है। पुलिस ने 4000 लोगों को निषेधात्मक नोटिस भी जारी किया है। इनलोगों को चेतावनी दी गई है कि शहर में किसी तरह की कोई अप्रिय घटना हुई तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इसके साथ ही पुलिस ने CrPc की धारा 110 (G) के तहत 200 लोगों को नोटिस भेजा और 50 लोगों के खिलाफ गुंडा एक्ट में नोटिस जारी किए हैं। इसके अलावा शाहजमाल, जमालपुर और जीवनगढ़ क्षेत्र के लाइसेंस के साथ हथियार रखने वाले 100 लोगों के खिलाफ नोटिस जारी करते हुए कहा गया है कि अगर वो विरोध-प्रदर्शन वाले स्थानों पर पकड़े जाते हैं, तो उनका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा। बता दें कि शाहजमाल, जमालपुर और जीवनगढ़ में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

अलीगढ़ के एसएसपी मुनिराज जी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए बताया कि 2000 असामाजिक तत्वों को ‘रेड नोटिस’ जारी किया गया और 2000 अन्य को CrPc की धारा 107/116 के तहत नोटिस जारी करते हुए उस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया, जिसमें लिखा गया था कि वो शहर की शांति को भंग करने की कोशिश नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि पुलिस पहले से ही हाई अलर्ट पर थी।

एसएसपी ने आगे बताया कि जुमे की नमाज को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल को तैनात किया गया है। जिसमें PAC की नौ कंपनियाँ और RAF की चार कंपनियाँ शामिल हैं। इन कंपनियों में तीन एडिशनल एसीपी के साथ ही 8 डिप्टी एसपी होंगे। इसके अलावा अलीगढ़ में एहतियात के तौर पर पहले से ही पड़ोसी जिलों के 8 स्टेशन हाउस अधिकारी (SHO) तैनात किए गए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि संवेदनशील इलाकों में पड़ने वाले पुलिस स्टेशनों पर गैर-घातक हथियार वितरित किए गए हैं। जिसमें दंगा-रोधी बंदूकें, आँसू गैस की बंदूकें और आँसू गैस के ग्रेनेड आदि शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अगर उनके क्षेत्र में किसी तरह की कोई हिंसा होती है तो वो इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। पुलिस ने शहर में 8 स्थानों की पहचान की है जो संवेदनशील क्षेत्रों में आते हैं और शांति बनाए रखने के लिए स्थानीय नेताओं के साथ बैठकें आयोजित करते हैं।

मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों से गुजरने वाले नमाजियों के आवागमन व धार्मिक स्थलों की निगरानी रखी जाएगी। ड्रोन कैमरे व सीसीटीवी कैमरों से भी निगरानी होगी। शहर का माहौल बिगाड़ने वालों के मंसूबे पूरे नहीं होने देंगे। उन्होंने लोगों से अफवाहों से दूर रहने व सांप्रदायिक सौहार्द्र बनाए रखने की अपील की। शहर में सुरक्षा-व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए हैं। मजिस्ट्रेटों के साथ भारी पुलिस फोर्स तैनात है। किसी भी तरह की अराजकता बर्दाश्त नहीं होगी। इंटरनेट प्रतिबंध को शुक्रवार (फरवरी 27, 2020) रात 12 बजे तक बढ़ाया गया है।

हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार रविवार की हिंसा के बाद से लोग काफी दहशत में हैं। सदर क्षेत्र के बाबरी मंडी में कुछ लोगों ने अपने घर के बाहर ‘मकान बिकाऊ है’ के पोस्टर लगा दिए। हालॉंकि प्रशासन की ओर से सुरक्षा का भरोसा दिलाए जाने के बाद पोस्टर हटा लिए गए। दंगाइयों ने लोगों के घरों में भी घुसने की कोशिश की थी। बाबरी मंडी चौकी में पुलिसकर्मियों को भी घेर लिया था। इसके बाद यहॉं रहने वाली सावित्री, सुधा, द्वारिका प्रसाद, नेहा गुप्ता समेत कई लोगों ने अपने घरों के बाहर मकान बिकाऊ के पोस्टर लगा दिए। कुछ लोग घर बंद कर बाहर जा चुके हैं।

दिल्ली दंगों में अब तक 38 मौतें: 21 को गोली मारी, 4 की धारदार हथियारों से हत्या, 3 को जलाकर मारा

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में भड़के दंगों में अब तक 38 लोगों के मरने की पुष्टि हो चुकी है। पोस्टमार्टम रिपोर्टों से यह बात सामने आने लगी है कि किस कदर प्रताड़ित कर लोगों की निर्मम तरीके से हत्या की गई। आईबी के अंकित शर्मा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक उनके शरीर का एक भी हिस्सा ऐसा नहीं था जिसमें चाकू के गहरे घाव न हों। डॉक्टर ने लिखा है कि 400 से ज़्यादा बार उन्हें चाकुओं से गोदा गया। इस क्रूर अमानुषिक हत्याकांड और यातना को अंजाम देने में कम से कम 6 लोगों के शामिल होने की बात डॉक्टर बताते हैं। उन्होंने कहा है कि अंकित शर्मा को 6 लोगों ने लगातार 2 से 4 घंटे तक 400 बार चाकुओं से गोदा होगा। साथ ही, उनकी आँत को शरीर से बाहर निकाल दिया था।

फर्स्टपोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार दिली पुलिस ने गुरुवार (फरवरी 27, 2020) को हिंसा में मारे गए 37 लोगों की जानकारी साझा की। पुलिस ने बताया कि हिंसा में मारे गए लोगों में 1 पुलिस अधिकारी समेत 36 आम नागरिक हैं। साथ ही ये भी बताया इस अधिकतर लोगों (21 लोग) की मौत गोली लगने के कारण हुई। 4 लोगों की हत्या धारधार हथियार घोंपने और प्रताड़ित किए जाने के कारण हुई। वहीं, 3 लोगों को जलाकर मार डाला गया।

पुलिस के मुताबिक, अभी तक जिन मृतकों की जानकारी वो जुटा पाए हैं, उनमें 15 मुस्लिम और 10 हिंदू हैं। बाकियों के धर्म/मजहब की पहचान का खुलासा अभी नहीं हुआ है। मृतकों में सबसे कम उम्र के युवक का नाम अमन था। उसकी उम्र मात्र 17 साल थी। वहीं, इस दंगे में सबसे अधिक उम्र में मरने वाले वालों में दो बुजुर्ग की उम्र 70 साल थी। इसके अलावा अभी तक की सूचना के अनुसार मालूम हुआ है कि हिंसा में 29 पुरुषों और 1 महिला ने अपनी जान गंवाई।।

गौरतलब है कि उत्तरपूर्वी दिल्ली में हुई इस हिंसा में करीब 34 लोगों को जीटीबी अस्पताल में मृत घोषित किया गया। जबकि अन्य लोगों को लोक नायक जय प्रकाश अस्पताल में। जीटीबी अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट के मुताबिक अस्पताल में 24 फरवरी से अब तक करीब 215 दंगा पीड़ितों को भर्ती कराया गया। फिलहाल अस्पताल में सिर्फ 51 मरीज भर्ती हैं। इनमें से एक को छोड़कर बाकी सब की स्थिति स्थिर है।

फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार मरने वालों की पहचान इस प्रकार है-

  1. रतन लाल (हेड कॉन्सटेबल)
  2. मुबारक
  3. दीपक (34)
  4. मोहम्मद फुरकान (30)
  5. वीरभान
  6. विनोद(45)
  7. मो.मुद्दस्सिर (30)
  8. इश्तियाक खान (24)
  9. अंकित शर्मा (26)
  10. दिलबर
  11. शान मोहम्मद (35)
  12. प्रवेश (48)
  13. जाकिर(24)
  14. राहुल ठाकुर (23)
  15. राहुल सोलंकी(26)
  16. मेहताब (22)
  17. शाहिद (25)
  18. अमन (17)
  19. मारूफ (32)
  20. सलमान
  21. आलोक तिवारी (32)
  22. इरफान (25)
  23. बब्बू (32)
  24. अश्फाक (22)
  25. फैजान

बता दें कि अलग-अलग अस्पतालों में लगभग 30 लोगों की स्थिति नाजुक बनी हुई है। हिंसा मामले में पुलिस ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली से 106 लोगों को गिरफ्तार किया है। 48 एफआईआर दर्ज की है और 514 संदिग्ध लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।